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संजू की नज़र जैसे हे
संजू ( मैं में) - हाय्ययी
ोू सुध बुध खोयी है खोयी मैंने...
है जान गवई गवई मैंने है तुझको बसाया है धड़कन में सावरे...
तोसे नैना जबसे मिले बन गए.... सिलसिले... ा. ा..
संजू जैसे किसी मूर्ति की भाँती वह खड़ा हुआ मेनका को मंत्रमुग्ध होक देखे जा रहा था...
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मेनका - संजू... जी... संजू... जी.... क्या... हुआ आप ऐसे क्या.... देखे... जा रहे है...
मेनका की आवाज़ सुनते हे संजू अपने स्वप्न लोक से बहार आया और उसके दिल में जो गाना बज रहा था वह बंद हुआ...
संजू -- हां.... आए... वोह कुछ नहीं....
मेनका - अच्छा... तोह ये बताइये की कितने टाइम हवेली के लिए निकलना है..... उसके हिसाब से मई नाहा धो के तैयार होक रेडी हो जाउंगी....
संजू - क्या तुम अभी नहायी नहीं हो...
मेनका - हां....
संजू ( मैं में) - जब बिना नहाये इतनी सुन्दर लग रही है तोह जब नहाके रेडी होक आएगी तब कैसी लगेगी
संजू - तुम जल्दी नाहा लो... और रेडी होक सबसे पहले मेरे से मिलने आना ok..
मेनका - जी... बाबू... लेकिन हवेली कितने बजे जाने है... वह क्या है न वह जाकर अपना काम सुरु करने से पहले में मंदिर हो आना चाहती हु...
संजू ( मैं में) - वाह.... संस्कार तोह कूट कूट के भरे है लड़की मई...
मेनका - बताइये न...
संजू - आज नहीं जा रहे हवेली
मेनका - पर क्यों...?? आपने तोह कहा था की आज जाना है
संजू - हां वोह मैंने कहा तोह था... लेकिन आज नहीं... क्युकी अभी हवेली में पूजा करवानी पड़ेगी... और उसके बाद हे वह जाया जा सकता है इसलिए आज मई पंडित जी के यहाँ जाऊंगा. . और उनसे एक अच्छा सा मुहरत देख के हवेली की पूजा करवानुंगा तब तक तुम घर में हे रहकर मल्लू माँ से घर के कुछ और काम सिख लो...
मेनका - जी ठीक है.......
मेनका वह से चली गयी.... मेनका के जाते हे संजू भी घर की छत्त पे चला गया... और छत्त पे कपडे सुखाने लगा...
संजू छत्त पे कपडे सूखा के निचे आया... और मल्टी को ढूढ़ने लगा....
मल्लू माँ... मल्लू माँ... वेयर अरे यू..
चंदा - वह घर पे नहीं है.... माँ के साथ गयी है.....
संजू - कहा गयी है....
चंदा - वह दोनों पड़ोस में गयी है...
संजू - अच्छा....
संजू पड़ोस के घर में जाने लगा...
संजू वह जेक मल्टी को ढूढ़ने लगा...
मल्टी एक कोने में मिली वह और भी कई साडी औरतें बैठी हुई थी... और बातें कर रही थी....
संजू - मल्लू माँ... मल्लू माँ... कहते हुए... मल्टी के पास पहुंच गया...
वह बैठी औरतें मल्टी को ऐसे मल्लू माँ कहते हुए सुनकर अवाक रह गयी...
एक औरत - क्यों रे मालती... ये संजू तुझको मल्लू माँ क्यों बोल रहा...
मल्टी - संजू मुझे अपनी माँ मंटा है और मई इसको अपना बीटा इसलिए और इसने हमेसा एक बेटे की तरह फ़र्ज़ निभाया है और मेरा ख़याल रखा है...
मल्टी - है... संजू बीटा बता क्या काम था.....
संजू - वोह मल्लू माँ... पंडित जी को पूजा के लिए बोलना था तोह उनके घर जाना होगा तोह आप चलोगी क्या मेरे साथ.....
मल्टी - अभी तोह नहीं जा पाऊँगी बीटा... शाम को चल सकते है...
संजू - अच्छा..
दूसरी औरत - ारी... बीटा... क्यों इस बुढ़िया को थकायेगा... इस से ाचा तू हे चला जा.... ये मल्टी तोह अब बुढ़िया हो गयी है... वह तक जाते जाते थक जाएगी... मई तुझे रास्ता बता देती हु तू खुद हे कहले जाना....
संजू - आप रास्ता बताओगी ये तोह ठीक है लेकिन आगे से कभी मेरी मल्लू माँ को बुढ़िया मत कहना वह आज भी जवान है... और आजकल की लड़कियों से कही जयादा खूबसूरत है....
संजू की ये बात सुनके.... सब चुप हो गयी.
मल्टी का तोह चेहरा सरम से लाल हो गया था वोह अपनी आंखें नीची करके... वही बैठी थी...
औरत - हस्ते हुए... देखो.. तोह जरा अपनी मल्लू माँ से कितना प्यार करता है... बुढ़िया क्या बोल दिया... हमको समझा रहा है
अच्छा अच्छा... नहीं बोलेंगे तेरी मल्लू माँ को बुढ़िया... वोह जवान है... मई तोह कहती हु कुवारी है अभी इसकी शादी हे नहीं हुई... हीहीही
सभी औरतें हसने लगी...
मल्टी - चुप हो जाओ तुम लोग क्या तुम लोग भी न..
दूसरी औरत - अच्छा अच्छा... काहलो बीटा मई तुम्हे रास्ता बताती हु... यहाँ से सीधा जाना फिर जाते जाना जाते जाना... फिर तुम्हे जो कोई भी मिलेगा उस से पूछ लेना... हीहीही
संजू
( साला ये तोह कॉमेडी किंग
संजू - जी ठीक है... मई पहुंच जाऊंगा... धन्यवाद.....
ये रास्ता बताने वाली औरत का नाम है.. कजरी जो की है मल्टी की सज्री ( सहेली)
संजू अब "" घर से निकलते हे.... कुछ दूर चलते हे.... ""
रस्ते में है एक मोड़...
पहली दफा मैंने जब उस मोड़ को देखा.. तोह
सांसें गयी ये तहर... होऊ... ोू... क्युकी मोड़ पे था एक सांप
संजू ने उलटे पाँव लगायी दौड़... हो... ू...
संजू के पीछे पीछे सांप भी भागने लगा.... संजू की हो गयी... बप हाई....
संजू - बरमारी का... सांप... कहा से आ गया... बी.... अपनी मैया... की भैया पकड़वाने
भाग बेटे संजू भाग.....
संजू भागते हुए घर तक आ गया... वोह सांप
संजू ने नज़र दौड़ाई... तोह देखा वोह सांप एक छुहे के पीछे पद गया था...
संजू - हां... साला.. मादरचोद... सांप भागा.... एक बाला तोह ताली... चलो अब इस पंडित को निपटा के आते है.. मतलब की मिल के आते है...
संजू ऐसे हे खोजते हुए... पूछते पहाचते हुए.... पंडित के घर पहुंच जाता है...
पंडित.... घर पे हे था....
संजू - राम
पंडित - राम
संजू - मई... चुड़ैल मार.... किया गांव का उद्धार... मई संजू नाम... भूतो का काल.. हवेली का शासक... हु...
पंडित - ारी.. आओ आओ... माफ़ करना मई तुम्हे पहचान नहीं पाया था...
संजू के चर्चे सभी ने सुन रखे थी... इसलिए पंडित भी अब संजू का इंट्रो सुन पहचान गया..
पंडित - बताइये क्या सेवा कर सकते है हम आपकी....
संजू - देखिये.... पंडित जी... मैंने हवेली को चुड़ैल भूत प्रेत से तोह छुटकारा दिला दिया है... लेकिन मेरी मल्लू माँ की इच्छा है की हवेली में पूजा कर्यै जाए... उसके बाद हवेली का गंगाजल छिड़काव कर शुद्धिकरण किया जाए... और फिर हवेली में रहना सुरु किया जाए..
पंडित - हां... उनका भी कहना उचित है..
संजू - तोह मई ये जान न चाहता था की कब का मुहूर्त सुभह है पूजा के लिए... और पूजा में क्या क्या सामग्री लगेगी...
पंडित - जी... मई अपनी पत्रिका देख के अभी आपको बता देता हु..
संजू - जी.....
पंडित ने अपनी पत्रिका खोली और कुछ गड़ना करने के बाद बोलै...
पंडित - देखिये संजू जी.... पत्रिका के अनुसार तोह सबसे सुभह मुहूर्त कल का हे है...
संजू - तोह ठीक है कल हे रख लेते है पूजा...
पंडित - जी जैसा आप कहे..
संजू - आप पूजा सामग्री की लिस्ट बना के मुझे दे दीजिये... मई ले आऊंगा आज हे....
पंडित - जी...
पंडित ने एक लम्बी सी लिस्ट बना के दे दी..
संजू - जी अब मई चलता हु कल मुलाक़ात होगी...
संजू वोह लिस्ट लेके घर आ गया... घर पे आने के बाद संजू ने चंदा को पंडित के यहाँ हुई साड़ी बात बता दी और साइकिल पकड़ा और मार्किट चला गया पूजा की सामग्री लेने...
संजू को आते आते शाम हो गयी....
चंदा ने घर में सबको पंडित और संजू के बिच की बात बता दी थी... सब कल की तैयारी में जुट गए थी...
संजू के आने के बाद... सबने खाना वाना खाया... और जल्दी सो गए... क्युकी... सुबह जल्दी उठ के हवेली जाना था पूजा के लिए... तोह जल्दी जल्दी उठना नहाना धोना करना था इसलिए जल्दी सो गए सब...
आगे नेक्स्ट एप में...