ट्रेन का सफर : पैसा लेकर चुदाई - SexBaba
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ट्रेन का सफर : पैसा लेकर चुदाई

hotaks444

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Nov 15, 2016
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मित्रों,<br/>किसी भी समाज में ऐसी औरतों को जोकि गैर मर्दों के साथ रंगरेलियां मनाने के लिए जानी जाती हैं को लोग कितने ही गंदे नजर से देखते हैं लेकिन क्या पैसा पर चुदाई करवाने वाली वैश्या को चोदते वक्त वो उसे अच्छी नजर से देखते हैं, बिल्कुल नहीं तो ट्रेन में एक सहयात्री के साथ सेक्स मैंने पैसे पर किया तो कारण मेरी कामीछा साथ ही दोनों की जरूरत थी और उस मर्द को भी मेरे हुस्न का आनंद लेना था लेकिन वो मर्द तो चरित्रवान ही बना रहेगा, चरित्रहीन भी मेरी जैसे लड़कियां /औरतें तो रण्डी का दर्जा भी मुझे ही लेकिन तन की जरूरत और सुख तो दोनों को मिलती है तो दीपा प्रथम वातानुकूलित के कूप में नग्न अवस्था में ही लेटे बुर चटवाई फिर अब मेरी इच्छा हितेश के लंड को चूसने की हुई तो मैंने उसे बर्थ पर लेटने को कहा, दोनों पूरी तरह से नंगे थे तो मैं हितेश के लंड को पकड़ सहलाने लगी फिर पूछी " ऐसा है कि आप कंडोम तो रखे हैं<br/>( वो हंसता हुआ बोला ) वो मेरे पर्स के अंदर हमेशा होता है लेकिन तुम भी तो धंधा करती हो साथ रखा करो<br/>( मैं थोड़े गुस्से में ) आप तो मुझे नींद में ही छेड़ रहे थे और मैं कोई धंधा नहीं करती " तो वो झेंप गया फिर मैं उसके लंड को पकड़े चेहरा उसके सामने की ओर लंड का चमड़ा छीलकर उसको चूमने लगी, साला का लंड ६-७ इंच का होगा लेकिन मोटाई ३-३. ५ इंच की, तो दीपा ५-६ साल से चूत कुटवा कर उसे ढीली कर चुकी थी और अब उसके सुपाड़ा मुंह में लिए चूसने लगी और धीरे धीरे पूरा लंड मुंह में लिए चूसने लगी तो वो हाथ बढ़ाकर मेरे चूची को पकड़ दबाने लगा और मैं फिलहाल हितेश के लंड को टाईट करने में लगी थी, पल भर बाद मैं उसके पेट पर हाथ फेरते हुए मुंह का झटका देकर मुखमैथुन करने लगी तो वो मस्ती में था और ट्रेन किसी जंक्शन पर रुकी हुई थी, मैं पल भर हितेश के लंड को चूस ली फिर मुंह से बाहर निकाली तो हितेश तुरंत ही अपने बैग से एक पैजामा निकाल पहन लिया और मैं भी अपनी नाईट गाऊन पहन तन को ढक ली, अब सारा कपड़ा समेटकर अपने बैग में रखी और हितेश कूप से बाहर निकल गया। दीपा मोबाइल में देखी तो तकरीबन ०९:१० रात के हुए थे और अब भूख भी लगी थी तो बियर भी पीने की इच्छा थी, ट्रेन चलने का इंतजार था फिर तो आराम से बियर पीते हुए चुदाई का मज़ा लेती। पल भर बाद हितेश आया फिर मैं अपने पर्स लिए वाशरूम चली गई, ट्रेन भी प्लेटफॉर्म से निकल चुकी थी तो मैं वाशरूम घुसी फिर बैठकर छर छर मूतने लगी, बुर को धोकर मुंह हाथ साफ की और फिर कूप में गई तो हितेश अपने बर्थ पर लेटा हुआ था, मैं दरवाजा बंद करके बैग से एक बियर की केन निकाली फिर उसे खोल पीने लगी तो हितेश बोला " तुम बियर की शौकीन हो ना<br/>( मैं ) कभी कभार खास करके सेक्स के दरम्यान<br/>( वो ) ठीक है जल्दी करो अब मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा " तो मैं बियर आराम से पी ली तभी मेरे पति का कॉल आया तो उससे बात करके बियर ख़तम की फिर उसके सामने बैठे हुए अपना नाईटी उतारने लगी, हितेश मेरे बर्थ पर आया और मुझे नंगा देख मेरे चेहरा को चूमते हुए चूची दबाने लगा तो मैं उसके पैजामा की डोरी खोलने लगी फिर क्या था, वो मेरे साथ नंगा था तो मैं बर्थ पर से उठी फिर दरवाजे की ओर चेहरा किए खड़ी हो गई, बिल्कुल ही घोड़ी की तरह तो हितेश अब मेरी चूतड़ के सामने खड़ा था और वो अपने लंड पर कंडोम डाल रहा था फिर मेरी जांघें फैलाकर लंड को चूत में घुसाने लगा और एक ही सांस में २/३ लंड पेलकर चोदना शुरू किया और मैं किसी रण्डी की तरह खड़े खड़े चूतड़ हिलाते हुए चुदवाने लगी तो हितेश आराम से चोदता हुआ मेरे सीने से लटकते चूची को पकड़ मसलने लगा और मुझे रात की चुदाई का कोटा मिल रहा था, पति हो या भाई या आशिक मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता बस जी भर के सेक्स करे तो अब चूतड़ स्थिर किए चुदवाने लगी और वो दे दनादन चोदने में लगा हुआ था तभी मैं सिसकने लगी " उह ओह आह मेरे चूत से रस निकलने लगा " इतने में मेरी बुर रस से सराबोर हो गई तो भी हितेश चोदने में लगा हुआ था और कूप में फच फच की आवाज आ रही थी लेकिन कंडोम युक्त लंड से चुदाई का मजा, बिल्कुल नहीं आता फिर भी इस मादरचोद रंडीबाज से नंगे लंड से चुदवाने का आनंद लेने में आगे दिक्कत हो सकती थी फिर वो लंड निकाला और मुझे अपने दिशा में कर दिया तो मै एक पैर उठाकर बर्थ पर रख दी, फिर हितेश सामने की ओर से मेरे चूत में लंड घुसाने लगा और चोदने लगा, मैं सेक्स की चरम पर थी और वो चोदता हुआ मेरे ओंठ और गाल चूमने लगा तो दीपा उसके सीने से चिपकी चुदाई कराते हुए हांफने लगी " और चोद चोदकर मार दे साले आह बहुत मस्त चोदता है<br/>( वो ८-१० धक्के देकर शांत पड़ गया ) हो गया बेबी लंड झड़ चुका है " फिर दोनों अलग हुए और बारी बारी से फ्रेश हुए, खाना खाकर आराम से सो गए फिर अगले सुबह १०:०० बजे फ्लैट पर।
 
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