बड़ी दीवारों के अंदर - SexBaba
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बड़ी दीवारों के अंदर

seema.singh2003

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Nov 20, 2022
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कहानी के मुख्य पात्रों का परिचय:

चाचाजी - नाम राजेश, उम्र 50 साल, कद 5 फीट 9 इंच, रंग गोरा, पतली मूंछ रखते हैं।

पवन - घर का सबसे बड़ा लड़का, उम्र 27 साल, कद 6 फीट, रंग गोरा। यह राजेश के बड़े भाई का बड़ा बेटा है।

मधु - घर की सबसे बड़ी बहू और पवन की वाइफ, उम्र 26 साल, रंग गोरा, कद 5 फीट 6 इंच। ये एक गरीब घर की पैदाइश हैं। अपने परिवार की सबसे बड़ी लड़की। इनके घर में कोई भी सगा भाई-बहन नहीं था। इनके पिता ने 2 शादियां कीं। पहली पत्नी से मधु हुई और मधु को जन्म देते ही उसकी मां का देहांत हो गया। उसके बाद पिता ने दूसरी शादी की और उनसे 2 लड़के और 1 लड़की हुई। वे सब गांव में रहते हैं, मधु की सौतेली छोटी बहन मधु से 4 साल छोटी है, उसका भी कहानी में एक हिस्सा है।

रोहन - घर का मंझला बेटा, उम्र 27 साल, रंग गोरा, कद 5 फीट 8 इंच। इनकी खासियत है इनका हास्यमुख स्वभाव और वो भी अपने को लेकर। यह राजेश का बेटा है।

राधा - रोहन की वाइफ, उम्र 25 साल, रंग गोरा, कद 5 फीट 9 इंच। इनकी खासियत है कि यह घर के हर सदस्य से प्यार करती हैं और उनका हर तरह से ख्याल रखती हैं, पर घर के काम में कुछ कमजोर हैं।

सौरभ - घर का सबसे छोटा बेटा, राजेश के बड़े भाई का छोटा बेटा है, उम्र 24 साल, रंग गोरा, कद 5 फीट 11 इंच। पढ़ाई में अव्वल, काम में तेज़, दिमाग से तेज़। चुप रहना पसंद है इन्हें ज़्यादातर, पर जब बोलते हैं तो बाकी लोग सुनते हैं। इनकी एक और खासियत है और वो है मस्ती में आकर इनका जंगलीपन। अगर कभी ये दारू पी के टन हो जाएं, तो जैसे बाकी लोग लुढ़क जाते हैं, ये उसका उल्टा करते हैं। ये और भी एक्टिव हो जाते हैं। ये खासियत इनके बहुत काम की है!

संजना - घर की सबसे छोटी बहू और सौरभ की वाइफ, उम्र 23 साल, रंग गोरा, कद 5 फीट 1 इंच। सबसे चुलबुली और सबसे घुल-मिल के रहने वाली। इनकी खासियत है इनका फैशन सेंस। किसी भी ड्रेस में ये अच्छी दिखती हैं। दूसरी इनकी खासियत है इनके खूबसूरत बाल। इनके बाल इनकी कमर से भी नीचे तक लहराते हैं और ये उनका बहुत ख्याल भी रखती हैं।

ये सब सदस्य एक ही घर में एक छोटे से शहर में रहते हैं। जैसा कि छोटे शहरों में होता है, गली-मोहल्ले के लोग इन्हें अच्छे से जानते हैं और आपसी खुशियों और गम में शामिल होते हैं। पर छोटे शहरों की एक खासियत और भी है और वो है बंद कमरों के पीछे होने वाली कहानियां। जो चीज़ें बड़े शहरों में खुलेआम बिना पर्दों के होती हैं, वही चीज़ें छोटे शहरों में पर्दों के पीछे होती हैं। अगर पड़ोसी को पता चल जाए तो बात कहां की कहां पहुंच सकती है। पर इस घर का हिसाब थोड़ा अलग है... ये घर शहर में होते हुए भी थोड़ा अलग है।

क्योंकि इस घर के चारों तरफ एक बड़ा आंगन है। और हो भी क्यों न, आफ्टर ऑल बाबूजी शहर के पुराने रईसों में से एक हैं। पूरा घर और आंगन मिला के 4 एकड़ के करीब जगह है। चारों तरफ 8 फीट की दीवार और बीचों-बीच 6 बेडरूम का मकान। घर की एंट्री के बाद एक बहुत बड़ा ड्राइंग रूम है। उससे लगता हुआ एक बड़ा सा डाइनिंग एरिया और उसके साथ किचन। इसके अलावा घर के दूसरे हिस्से में सबके कमरे हैं जिनको एक कॉमन कॉरिडोर जोड़ता है।

सबसे पहले चाचाजी का कमरा है और उनके ठीक सामने पवन का। पवन के साथ रोहन का और सामने सौरभ का। उनके बाद 2 गेस्ट रूम हैं। हर कमरे के साथ एक अटैच्ड बाथरूम है। इस प्रकार 3-3 कमरों के 2 सेट कॉरिडोर के दोनों तरफ हैं। हर सेट के कमरों में आपस में भी एक-एक डोर है जिससे कि एक रूम से दूसरे रूम में जा सकें।

घर की छत पे एक 2 रूम का सेट है जिसमें नौकरों के रहने का प्रबंध है। इस घर में हमेशा नौकरानी रही है, पर जब से दीपा काकी का देहांत हुआ, तब से कोई भी अच्छी नौकरानी नहीं मिल पाई है।

आजकल ये परिवार घर में बिना नौकरानी के गुज़ारा कर रहा है। बस एक काम चलाओ नौकरानी यशोदा है, जो कि सुबह और शाम को घर के कामकाज में मदद करवा देती है और चली जाती है। इसका मुख्य काम घर की सफाई करना और बर्तन मझना और कपड़े धोना है ।
 
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