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मैं असलम के साथ उसके मोहल्ले में घूम रहा था कि तभी असलम के मोहल्ले के कुछ दोस्त वहां आ गए ज़ावेद-=असलम भाई क्या हाल है
असलम; भाई बढ़िया तू सुना
जावेद; बढ़िया ओर मेरी तरफ देख कर
असलम; भाई ये मेरा कजिन है
अब असलम उससे क्या बोलता है कि मैं उसकी बीवी का बेटा हूं यानी मैं उसका सौतेला बेटा हूं
जावेद हूं; निकाह में आया है
असलम; हां यार अब ये यहीं राह कर पढ़ेगा
जावेद; बढ़िया है भाई और सुना भाई रात कैसी रही भाभी जान की जाम कर चूचियों को चूसा,
असलम क्या बोलता बस मुस्करा पडा,
जावेद; भाई कुछ भी कहों भाभी जोरदार है बता यार रात भर कितनी बार ली
भाभी जान की जाम कर
असलम; यार गिना ना क्या अब अपनी ही जितनी बार करो लो
जावेद; वो तो भाभी जान मना थोड़े ही करेगी। प्यार जो करती है
असलम; वो तो है
जावेद; असलम के साथ मम्मी के बारे में ऐसी बातें कर रहा था, मुझे गुस्सा बहुत आ रहा था पर असलम का इस बात पर क्या कसूर था वो कुछ कर सकता था।
बस हम दोनो ऐसे ही शाम तक बाहर घूमते रहे, रात को घर आ गए,
असलम की बुआ भी अपने ससुराल जा चुकी थी रात को सोने के लिए असलम ओर मम्मी अपने कमरे में चले गए,
कल की तरह असलम ज़मीन पर सोने लगा तो मम्मी ने इस बार कुछ नही कहा,
सुनीता ये नहीं जानतीं थी की असलम के मन में सुनीता को लेकर क्या ख्याल है असलम पहली रात के बाद से सुनीता को सच में अपनी बेगम बनाने का ख्याल रखना लगा था,,
असलम सुनीता को सोच कर (सुनीता बेगम अब तो मैं तुम्हें अपनी बेगम और अभि का अब्बू बने कर रहूंगा)
ऐसा 2-3 दिन चलता रहा सुनीता ऊपर बेड पर और असलम नीचे ज़मीन पर,
अभि बाहर वाले कमरे में अब्दुल और सलमा के साथ,
अब्दुल और असलम की मम्मी सलमा ने अभि बिस्तर कमरे के दरवाजे के पास लगा रखा,
उनके कमरे के दरवाजे के नाम पर पर्दा था जिस पर जगह-जगह सुराख़ थें।
अभि नींद नहीं आ रही थी कि तभी अचानक अभि को सुनीता के कमरे से उसके उठने का एहसास हुआ तो अभि ने पर्दे के हल्के से छेद से देखा तो सुनीता की आंखे एक तरफ ही देख रही थी
जब अभि ने सुनीता की आंखों का पीछा किया उसे देखा तो अभि एक बार डर गया,
सुनीता जिसे देख रही थी वो कुछ नहीं असलम का 9 इंच लम्बा लंड था जो सोते हुए असलम की लुंगी से खड़ा
बाहर झलक रहा था, असलम का इतना ज़बरदस्त लंड देख कर ना चाहते हुए
सुनीता की नज़र असलम के लंड से हट नहीं रही थी,
सच में असलम का लंड करीब 9 इंच का था जिसे देख किसी औरत का मन डोल ही सकता था।
पता नहीं क्यों सुनीता के चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान आ गई,
सुनीता की आंखों के सामने रात का सीन याद आ गया की असलम ने कैसे उनकी टांगों से उनकी चड्डी उतारी, कैसे उनकी चूत को चाटा,
ये सोच सुनीता के चेहरे पर शर्म के साथ साथ मुस्कुराहट आ गई
फिर सुनीता शर्म से अपना गलें में पड़ी चैन अपने हाथों से घूमाते हुए,
हाय दईया मैंने असलम को उस रात नहीं रोका होता तो असलम मेरी दोनों टांगों को फैला कर दोनों टांगों के बीच में होता,
असलम का 9 इंच लम्बा और 4 इंच मोटा हथियार अभी मेरी चूत में रास्ता बना बच्चेदानी पर अपनी चोट मार रहा होता,
असलम का जीभ मेरी चूचियों और चूत पर चल रही होती,
मैं भी असलम के हर धक्के का ज़वाब उसको अपनी बाहों में भर कर अपनी बड़ी गांड़ उठा कर धक्के का ज़वाब धक्के से देती,
सुनीता बार-बार असलम का चेहरा देखतीं , फिर असलम का लंड
आप ये कह सकते हैं है असलम का लंड सुनीता के दिलो दिमाग पर छा चुका था,
सुनीता की आंखो में तो नींद जैसे गायब ही हो चुकी थी,
अगली सुबह जब सुनीता उठी तो सुनीता के चेहरे पर बेचैनी झलक रही थी।
असलम को देखते ही सुनीता के चेहरे पर एक अलग ही चमक आ जाती।
सुनीता का असलम को देखने का नजरिया ही बदल गया था,
सुनीता ने अब घर के सारे काम को संभाल लिया था,
अब सुनीता की आंखें असलम के कच्छे में कैद 9 इंच लम्बा और 4 इंच मोटा हथियार पर ही होती थी,
ये बात असलम भी जान चुका था, सुनीता अब क्या चाहती है, क्योंकि सुनीता के अन्दर ये आग असलम ने लगाई थी,
अब सुनीता असलम को आपने दिल से शौहर बना कर इस रिश्ते को नया आयाम देना चाहतीं थीं
असलम सुनीता को रात भर अपने लंड के दर्शन जान बुझ कर करता था ताकि सुनीता उसका लंड लेने के लिए तरसती रहें,
असलम जब सुबह उठा तो उसने देखा कि उसका लंड खड़ा होकर उसके अंडरवियर से बाहर निकला हुआ था ,
सुनीता ने जरूर रात में उसके लंड को देखा होगा, ये सोच कर कि सुनीता ने उसके लंड को इस हाल में देखा है,
असलम के दिल में एक अलग ही खुशी थी और उसने आज ये सोच लिया था कि आज के बाद वह रोज अपने मुसल लंड के दर्शन सुनीता को रात में करवाएगा,
ताकि सुनीता खुद ही उसे अपने छेद में लेने के लिए तड़प उठें, उसने सब प्लान बना लिया था,
सुनीता अपनी आंखें बंद किए पड़ी थी असलम ने बड़ी चालाकी से अपनी लुंगी हटा दी उसका काला मुसल लंड उसके अंडरवियर में खड़ा था, अंडरवियर में असलम के खड़े लंड को देख कर
सुनीता की सांसे तेज़ चलने लगी,
असलम भी ये बात अच्छे से जनता था कि सुनीता उसका लंड देख रही थी।
सुनीता की तरफ से कोई रिएक्शन नहीं आया था,
असलम की हिम्मत बहुत बढ़ी हुई थी तो वो अंडरवियर के ऊपर
से अपने लंड को सहलाने लगा.
असलम कुछ इस तरह से कर के दिखा रहा था कि वह सब नींद में कर रहा था।
कुछ देर अंडरवियर के ऊपर अपने लंड को सहलाने के बाद असलम ने अपने लंड को अपने कच्चे से बाहर निकाल लिया और सुनीता को दिखते हुए अपने लंड
को सहलाने लगा,
सुनीता भी सोने की एक्टिंग करते हुए असलम के लंड को निहार रही थी,
सुनीता बेंड पर ब्रा पेंटी में थी धीरे से उसकी उंगली पेन्टी पर पहुंच गई
सुनीता ने असलम के मोटा हथियार पर अपनी नज़र डाली और अपनी एक उंगली को असलम के 9 इंच लम्बा ओर 4 इंच मोटा लंड समझ चिकनी गुलाबी होंठ वालीं चूत का रास्ता दिखा दिया
सुनीता असलम को अपने उपर चढकर चूत में लंड जाने की कल्पना से ही गर्म हो गई थी
कि अगर असलम सुनीता के उपर चढ जाता हैं
तो वह खुद असलम को अपने उपर चढ़ने नहीं रोकती,
सुनीता खुद असलम के लम्बा और मोटा हथियार आपने होंठों से गिला कर असलम के हथियार को अपनी दोनों टांगें चौड़ी करके असलम को उसका शौहर होने का हक देंगी,
सुनीता मन में; अगर असलम मेरे शौहर अभि के अब्बू मेरे उपर नहीं चढ़ेगा तो मैं खुद असलम के उपर चढ़ असलम को अपनी बेगम होने हक दूंगी
सुनीता ने कल्पना में ही असलम को अपने उपर चढ़ने का हक़ दे दिया था,
अब सुनीता से सहन नहीं होता,
सुनीता ने सबसे पहले ब्रा में कैद अपनी पहाड़ जैसी चूचियों को अपनी ब्रा उतार आजाद कर दिया
सुनीता अपनी चूत को अपनी पैंटी के उपर से ही अपनी चूत को सहलाने लगी।
कुछ देर बाद सुनीता की पेन्टी ने भी उसकी टांगें का साथ छोड़ दिया,
सुनीता की पेन्टी अब पास बेंड पर ब्रा के साथ पड़ी थी,
सुनीता अपनी चूत में अपनी उंगली डालकर अंदर बाहर करने लगी
कुछ देर अपनी चूत में उंगली अंदर बाहर करने के बाद सुनीता ने एक तकिया निकाल कर नीचे रख लिया
अपनी कमर पर ऐसे चलने लगी जैसे वो अपनी कमर तकिये पर ना चला कर असलम के लंड पर चल रही हो,
सुनीता कभी अपनी चूत उस तकिये पर रख कर रगड़ती अपनी अपनी कमर को जोर जोर से चलाती मानो प्रैक्टिस कर रही हो
कि अब ऐसे ही असलम के लंड पर अपनी चूत रख कर जोर जोर से अपनी कमर चलाना है,
उस तकिये पर अपनी चूत रगड़ती ऐसी सिसकियां निकलने रही थी आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआ
असलम मेरा हो गया आआ ...
अपनी कमर को थोड़ा हिलाते हुए समझ आ गया कि उसकी चूत ने आज पहली बार असलम के नाम का पानी छोड़ दिया है,
सुनीता ने असलम के साथ अलग अलग पोजीशन में चुदाई की तैयारी कर ली थी,
यहां सुनीता के बेंड के पास लेटा असलम ने अपने लंड को सहलाते हुए धीरे से बड़ बड़ाने लगा,
आआआआआहह ...
सुनीता बेगम तूम कितनी सुन्दर हो, मेरी बेगम की चूंचियां कितनी रसीली है,
असलम के मुंह से खुद को बेगम सुन कर सुनीता समझ गई, असलम का लंड उनके लिए ही खड़ा है,
असलम तो अपने लंड का माल निकाल कर चैन से सो गया पर सुनीता को बेचैन कर गया वैसे सुनीता ने भी अपनी उंगली को असलम का हथियार बना अपनी टांगें फैला कर चूत ने पानी निकाल दिया था,
सुनीता पर अभी तक असलम के लंड का खुमार छाया हुआ था, सुनीता अपनी चुचियों पर गिरे असलम के माल को अपनी उंगलियों से मसलते सोच रही थी कितना निकलता है और कितना गाढ़ा है,
कोई भी औरत ये सीन देख कर गरम तो होगी ही यहीं हॉल सुनीता का था।
अब सुनीता भी असलम की बांहों में सामने के लिए बेताब हो उठी।
सुनीता की वह रात कैसे कटी, ये सुनीता ही जानती थी।
अब तो बहुत जल्द ही सुनीता मन, आत्मा और तन से असलम की बेगम बनाने वाली थी। सुनीता ने ये सोच लिया था।
असलम रात को अपने लंड को हिलाता सुनीता की आग को भड़काता।
धीरे धीरे सुनीता असलम की ओर खिंची जा रही थी, और सलमा के साथ घर के कामों में हाथ बंटाने लगी।
सुनीता भी चाहनें लगी थी कि असलम आगे बढ़ें कर पहले करे पर असलम झिझक महसूस कर रहा था आगे बढ़ने से और सुनीता एक संस्कारी औरत थी एक संस्कारी औरत सीधे तो बोल नहीं सकती थी,
अगली सुबह सुनीता जल्दी उठ गई, असलम अभी भी ऐसा ही सो रहा था,
सुनीता जब उठ कर अपने कपड़े पहनने लगी, तो सुनीता की नज़र असलम के लंड पर पड़ी जो अभी असलम की लूंगी से बहार निकला कुतुबमीनार की तरह खड़ा था।
असलम का लौड़ा देख कर सुनीता आश्चर्य से, हाय दईया इतना बड़ा डंडा दईया रे दईया ये तो अभि के पापा से दोगुना है,
हाय दईया कित्ता बड़ा है कैसे खड़ा हैं हाय दईया हम इतना बड़ा डंडा ले लिए रात में,
हम कहां लिए हमार मर्द असलम घुसा दिया, हमार टांगें फैला चौड़ी कर ज़ोर से, हमार बच्चेदानी तक घुसा दिये,
देखो अभी भी कैसे खड़ा हैं रात भर हमार टांगें फैला हमार चूनमुनीया के अन्दर बहार होने के बाद भी, हमार चूनमुनीया को पानी पानी कर दिये बुरी तरह फैला रखा था हमार चूनमुनीया को,
सुनीता ये सब सोच रहीं थीं
अभि के पापा का तो ऐसा कभी खड़ा नहीं हुआ, सुनीता फिर खुद ही बड़ी अदा से मुस्कराती हुई क्या हुआ बच्चेदानी तक घुसा दिए थे तो क्या किसी ग़ैर औरत के बच्चेदानी तक ना घुसायें अपनी बेगम की में घुसायें थे,
हर औरत यही चहाती है कि उसका शौहर रात भर उसकी टांगें फैला अपना हथियार बच्चेदानी तक घुसायें,
सुनीता बड़ी अदा से मुस्कराती हुई किसी ओर की में तो नहीं घुसायेंगे अपनी बेगम की में ही घुसायेंगे, हम भी क्या सोच रहे थे कुछ गलत थोड़े ही किये हैं अपने ही मर्द का केला अपनी
अंदर घुसायें है हम क्या सभी औरतें लेती है अपने मर्द का, हम ले लेंगे तो इसमें का है और सुनीता यही सब सोचते हुए अपने कपड़े ठीक करते हुए बाहर निकल गयी
सुनीता का ये हाल अभी असलम से ख्यालों में चुद कर था जब असलम को सच में सुनीता को रात भर उसकी टांगें चौड़ी करके चोदने देगी तो सुनीता का क्या हाल करेगा, अब सुनीता फैसला ले चुकी है)
असलम से ख्यालों में चुदने के बाद से ही सुनीता के चेहरे पर एक अलग ही रौनक सी आ गई थी
(सुनीता के ख्याल असलम के लिए)
हम काहे नहीं चुदेगें अपने मर्द से, अपने मर्द से नहीं तो का गैर मर्द से चुदेगें,
हमार शौहर असलम हमार दोनों टांगें चौड़ी फैला कर चोदेगें अपनी टांगें फैला कर असलम को अपने उपर चढकर अपनी बाहों में भर कर अपनी गुलाबी होंठ वालीं चूत चाट चाट कर
चुदवायेंगे, हम खुद असलम के हथियार को अपने हाथ में लेकर अपनी चूनमुनीयां का रास्ता दिखायेंगे,
असलम कभी घोड़ी बन कर पीछे से हमारे उपर चढ़ेंगे
जब असलम हमार दोनों टांगें चौड़ी करके हमार चूनमुनीया नहीं चोदे तो हम खुद अपने शौहर को नीचे गिरा कर उनके घोड़े जैसा लौड़े को पकड़ कर अपनी चूत का रास्ता दिखा देगें पहाड़ जैसे चूतड़ों को उठा-उठा पटक चुदेगा,
सुनीता यही सब सोचते हुए तैयार हो रही थी, जैसे सुहागरात के अगले दिन कोई संस्कारी औरत तैयार होती ही वैसी ही सुनीता भी तैयार हुई,
सुनीता अपने सर पर पल्लू रख कर बाहर आई ओर घर के कामों में सलमा का हाथ बंटाने लगी,
जब सुनीता सलमा की ओर देख मुस्कुराती तो सलमा आंटी भी समझ गई कि सुनीता क्यों मुस्कुरा रही है
सलमा; मैम सहाब क्या बात है कुछ चाहिए
सुनीता अपनी उंगली से अपने गले में पड़ी चैन को उंगली से घूमा कर बड़ी अदा से सलमा के सामने सरमाते हुए,
अपनी गर्दन ना में जवाब देने लगतीं हैं, नहीं सासू मां, सलमा को सासू मां बोल कर सुनीता के चेहरे पर मुस्कान के साथ शर्म की लहर दौड़ गई,
सलमा; अरे मैम साहब आप इतनी जल्दी क्यों उठ गयी आप आराम करती मुझे तो असलम के अब्बू के लिए नाश्ता बनाना होता है
सुनीता; तो क्या है भले ही तीन साल के लिए ही हम इस घर की बहू है
इस घर में रहना तो काम करना ही पड़ेगा,
वैसे तो सुनीता ने तीन साल कहा था, पर सुनीता का इरादा अब तीन साल के बाद यहां से जाने का नहीं था,
असलम के लंड ने सुनीता पर जादू कर दिया था, अभी तो असलम ने सुनीता पर अपनी मोहर लगाई भी नहीं थी,
जब असलम सुनीता की टांगें चौड़ी करके रात भर चोद चोद सुनीता की चूत का पानी छुड़वा कर सुनीता पर पक्की मौहर लगा देगा, और अपना बीज से सुनीता के मटके को भरेगा तो सुनीता पर पक्की मौहर लग चुकी होगी,
सुनीता भले ही 3 साल के बाद चली भी जाएं पर असलम की 1 निशानियां अपने साथ और दूसरी पेट में लेकर जायेंगी,
सलमा; चाय का कप सुनीता को दे कर मैम साहब ये चाय अगर आपको बुरा ना लगे तो असलम को दे आओ,
सुनीता; एक बार फिर अदा से मुस्कराती कर सरमाते हुए बोली
इस में लगने बुरा लगने वाली वाली क्या बात मम्मी जी अब मैं असलम की बेगम हूं निकाह कुबूल किया है ये तो मेरी खुशकिस्मत हैं कि मुझे अपने शौहर असलम की सेवा करने का मौका मिला है,
मम्मी जी आप किसी ग़ैर मर्द के लिए चाय को देने को थोड़ी बोली हो, असलम अब मेरे शौहर है, लगाइये में ले जाती हूं
सुनीता सलमा से ये बोल बड़ी अदा और नज़ाकतों से सलमा से चाय लेकर असलम के हथियार को अपनी आंखों में बसा अपनी बड़ी गांड़ को हिलाकर असलम के कमरे में जाने लगीं,
सलमा की नज़र सुनीता की बड़े पहाड़ जैसे चूतड़ों पर जमीं थी, सुनीता भी अपनी बड़ी गांड़ उछालते हुए बड़ी अदा से मुस्कराती हुई अपने कमरे में जा रहीं थीं,
सलमा खुश थी क्योंकि वह जान चुकी थी कि सुनीता उसके बेटे को शौहर बोली थी,
सुनीता जल्द ही असलम को अपनी बाहों में भर कर गुलाबी निप्पल की रसीली चूचियों को चुसाते हुए असलम के नीचे अपनी टांगें चौड़ी कर बड़ी गांड़ पटक पटक चुदेगी,
असलम के हर धक्के का ज़वाब अपने बड़े बड़े चूतड़ों को उछाल कर देंगी।
पहले सुनीता अक्सर अपनी चुचियों को साड़ी के पल्लू के नीचे छुपा कर रखती थी, जब से सुनीता असलम को अपना शौहर माना था , तब से सुनीता ने अपनी दशहरी आमों से पर्दा हटा लिया था, अब सुनीता अक्सर अपने संतरों को उबर कर दिखाती ,
सुनीता के बड़े बड़े संतरों जो ब्लाउज से ही खड़े ही रहते थे साफ दिखा देते थे।
सुनीता की साड़ी का पल्लू अब उसकी चुचियों पर कम हाथों में ज्यादा रहता था
सुनीता चाय ले कर असलम के कमरे में आई
असलम अभी भी नंगा ही लटा हुआ था,
सुनीता असलम को देख कर
असलम को नंगा लेटा देख सुनीता सरमाते हुए मुस्कुराई,
हाय दईया अभी भी कैसे खड़ा हैं कुतुबमीनार बना हुआ है और मुस्कराते हुए अपना मुंह दूसरी तरफ़ घुमा लिया
असलम भी जान चुका था और जानबूझकर सोने का नाटक करने लगा असलम जानता था की उसकी सुनीता कमरे में ही है और उसको ही देख रही है,
जैसे ही सुनीता चाय का कप असलम की बग़ल में रखें स्टूल पर रखने को नीचे झुकी तो साड़ी के पल्लू ने उसकी की पहाड़ जैसी चूचियों का साथ छोड़ दिया,
असलम ये सब देख रहा था, और असलम नींद में होने का नाटक करते हुए बड़बड़ाने लगा,
आआआआआहह मेरी जान सुनीता तुम्हारे संतरों में रस भरा है गुलाबी रसीले होंठ, पहाड़ जैसी चूचियां दोनों टांगों के बीच रस से सराबोर मटकी,
सुनीता असलम का बड़बड़ाना सुन रुक कर असलम को देखने लगी,
असलम कमरे में अंदर एक दम नंगा उल्टा लेट अपनी कमरे को तेज़ तेज़ चलाते हुए आआआआआहह सुनीता मेरी जान, आआआआआहह उउउउउउहहहहहह ससससससीईईईईईईई सुनीता तूम कितनी सुन्दर हो बड़ी गांड़, रसीली चूचियां
सुनीता समझ गई असलम बिस्तर पर पड़े तकिये को मुझे समझ कर धक्के लगाने लगा रहा है,
सुनीता असलम को अपना शौहर तो मान चुकी थी,
असलम ने भी सुनीता के साथ सुहागरात मनाने की तैयारी शुरू कर दी थी।
असलम सुहागरात मनाने की प्रैक्टिस जोर शोर से कर रहे था।
असलम जिस रफ्तार से बिस्तर पर धक्के मार रहा था सुनीता असलम को देख कर मुस्कुराने लगी
हाय दईया कितने जोर-जोर से धक्के मार रहें हैं
इस से कहीं जोरदार धक्के हमार चूनमुनीया पर पड़ेगें जब हम तोहर नीचे अपनी टांगे चौड़ी करके लेटी होंगी तब तो वो बुलेट ट्रेन की रफ्तार से हमार चूत पर धक्के मारेंगे
दईया रे दईया असलम के तूफानी धक्कों की मार हमार चूत पूरी चौड़ी कर देगें
हम बिस्तर पर इतने बड़े लोड़े के जोर दार धक्का बर्दाश्त कर पाएंगे या बीच रास्तों में दम तोड़ देगें।,
असलम ने हमार साथ मैदान में उतरने से पहले प्रैक्टिस शुरू की थी।
असलम की इतनी जोरदार प्रैक्टिस देख सुनीता को इस बात का अंदाज़ा हो गया था कि अब मेरा मुकाबला कितने जोरदार खिलाड़ी से होने वाला है,
आज मुझे पता चला कि औरत मर्द के बीच बाकी कोई रिश्ता नहीं होता अगर कोई रिश्ता होता है तो वो होता है चुदाई का रिश्ता,
सुनीता ने भी अब इस रिश्ते को दिल से कबूल कर लिया था
सुनीता असलम को जगाने के लिए नीचे झुकी हुई थी और सुनीता की साड़ी का पल्लू फर्श पर गिर पड़ा, सुनीता के बड़े बड़े दूध जो आधे ब्लाउज से बाहर निकल आया थे, सीधे असलम की आंखों के सामने से दर्शन दे रहे थे,
सुनीता बड़ी अदा से मुस्कराती हुई असलम से धीरे से बोली सुनीये जी आपकी चाय,
असलम ने अपनी आंखें खोली तो सुनीता असलम के उपर झुकी हुई थी,
सुनीता जल्दी से असलम लुंगी पकड़ते हुए बोली
लो पहन लो तो असलम उठने लगा उसका काला नाग हवा में झूलने लगा
असलम अपनी लुंगी बांधते हुए बोला, आंटी आपने क्यों तकलीफ की में ले लेता,
सुनीता असलम से ख्यालों में खोई हुई असलम के कमरे से बाहर निकल आई,
जब से मम्मी ने असलम को अपना शौहर होने की बात की थी मैंने देखा अब मम्मी की आंखों से नींद दिन का चैन गायब हो चुका था वो दिन रात करवाते बदलती ओर बिस्तर पर पड़ी मुस्कुराने लगी,
तकिये मैं अपना मुंह छुपा लेती क्योंकि वह जानती थी कि जब असलम के बांस के नीचे लेट लंड का मज़ा लूटेंगी, यही सोचते सोचते मम्मी की टांगें खुद चौड़ी हो गई , मम्मी तकिये के नीचे से एक बड़ा सा केला निकाली और केले को देखने लगी जैसे मम्मी केले को कामुक नज़रों से देखा रहीं थीं,
जैसा ये केला नहीं असलम का 9 इंच लम्बा लंड है
मम्मी उस बेगन को अपने होंठो पर फिरते हुए ऐसे चूसने लगी जैसे वो केले को
नहीं बाल्की असलम के लंड को चूस रहीं हैं,
मम्मी को केला चुसते हुए में समझ गया कि मम्मी अब असलम का लंड चूसे के
लिए तड़प रही है
तभी मम्मी बेड पर उल्टी हो कर लेट गई और बेड पर तकिये पर अपनी चूत रगड़ती
अपनी कमर को चलाने लगी शायद मम्मी तकिये पर कमर चला कर प्रैक्टिस कर रही थी
क्योंकि मम्मी जानती थी कि अब उसे किसी पल मैदान में उतारा जा सकता है
ये सब करते करते मम्मी ने अपनी बीच वाली उंगली को अपने थूक में भर कर मुस्कराते हुए उसे अपने टांगें खोल कर उंगली को
चूत पर रगड़ने लगी।
मम्मी अपनी उंगली को ऐसे चूत पर रगड़ रही थी जैसे वो उंगली नहीं असलम का लंड चूत पर रगड़ रही हो
फिर मेरे देखते ही देखते मम्मी ने अपनी टांगें ओर चौड़ी कर दी मम्मी अपनी दूधिया चिकनी टांगों को जितना चौड़ा कर सकतीं थीं उनकी कर टांगें को हवा में फैला ली, असलम जैसे हटें कटें मर्द को उनकी रसीली चूत तक पहुंच आसान हो
मम्मी उंगली पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ ने लगीं, मम्मी के मुंह से सिसकारियां निकल रही थी आआआआआहह असलम ,
फिर मम्मी ने वो किया जिसका अंदाजा मुझे पहले से ही था,
आआआआआहह उउउउउउहहहहहह ससससससीईईईईईईई अभि के अब्बू ओर कितना तड़पाएगा कर दो अन्दर, ओर मम्मी ने धीरे से उंगली चूत कर दी,
उंगली चूत में जाते ही मम्मी के मुंह से सिसकारियां निकलने लगी आआआआआहह उउउउउउहहहहहह ससससससीईईईईईईई,
अब मम्मी उंगली को चूत में अंदर बाहर करने लगी जैसे वो उंगली नहीं बाल्की असलम अपना लंड मम्मी की चूत के अंदर बाहर कर रहा हो।
मम्मी के बड़े चूतड़ खुद पे खुद उपर नीचे हो रहा थे और मम्मी के बड़ी चूचियां इधर-उधर हिल रही थी
मम्मी अपनी टांगें पूरी चौड़ी करके उंगली को असलम का लंड समझ घच्चा - गच्च अपनी चूत के अंदर बाहर कर रही थी मस्ती मेरी मम्मी की आंखे बंद थी,
मम्मी उंगली को अपनी चूत के अंदर बाहर करते बड़बड़ा रही थी ,
आआआआआहह उउउउउउहहहहहह असलम जोर से पूरा डाल दो आआआआआहह जोर से धक्का मारो असलम मेरे राजा,
बहुत तड़पाया है तूने पूरा अन्दर डालों मेरे शौहर, बुझा दो मेरे शौहर मेरी इस निगोड़ी चूत की प्यास ,, आआआआआहह उउउउउउहहहहहह ससससससीईईईईईईई ओर तेज आआआआआहह उउउउउउहहहहहह ससससससीईईईईईईई असलम में झडने वाली हूं,
इतना कहकर मम्मी बुरी तरह से झड़ गई
मम्मी के चेहरे पर एक अलग ही सुखी पन था जैसे मम्मी की चूत का पानी उंगली ने नहीं बाल्की असलम ने चोद चोद निकाल दिया हो,
मम्मी ने असलम के हथियार के बारे में क्या क्या सोच लिया था, अब मम्मी के दिल असलम हथियार से खेलने का और अपनी चूत की गहराई असलम के लंड से नापने इच्छा ओर तीव्र हो गई थी,