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From this section you can read all the indian sex stories arranged from the various users. So what you are going to read stories like 'Office girl with her lover', 'Indian mom with her son. Lots of erotic tales are posted here. So guys hold your cock for the amazing sexual fantasies.
असलम के मर्दाना बदन की रगड़ अपने कोमल फूलों से बदन पर पा कर मेरे मुंह से मस्ती भरी, एक जोरदार सिसकी निकाली, उई मम्मी।
सुनीता के मुंह से निकली ये सिसकी इतनी तेज़ और ऊंची थी कि दूसरे कमरे में लेटीं उसकी सास सलमा आंटी और ससुर अब्दुल ने भी सुन ली थी,
सलमा आंटी; अपनी बहू सुनीता की मस्त भरी सिस्की सुन सलमा आंटी के होंठो पर एक शरारती मुस्कान आ गई क्योंकि वो जान गई थी कि उसका बेटा असलम उनकी रसीली बहूं को प्यार झूले पर चढ़ा झूला झूला रहा है
सलमा आंटी मन में मुस्कुराती अपने गले में पड़ी चैन को उंगली से घूमा कर बड़ी अदा से मुस्कराती हुई बोली ये सुनीता बहूं भी ना कितनी जोर से चिल्ला रही है ये भी नहीं सोचती बाहर अभि भी होगा ,
( अभि अपने कानों में ईयर फोन लगा गाने सुन रहा था और उसकी मम्मी असलम के नीचे अपनी टांगें चौड़ी करके असलम को अपनी चूचियां चूसवाती हुई असलम के लौड़े पर अपनी रसीली चूत रगड़ रही थी )
मेरी सांसें बड़ी तेज़ी से चलने लगी थी जिस से मेरी चूचियां जो असलम की छती से दबी हुई थी उन में भी मीठा मीठा दर्द सा होने लगा था,
असलम मेरे होंठों को अपने होंठों से कभी अपने होंठों को मेरे गोरे मुलायम गालों पर रगड़ते मेरे गर्दन को चूमते मेरी आंखों में आंखे डाल कर मुस्कराते हुए बोला
असलम; मल्लिकाएं हुस्न कितनी नरम हो सच में बड़ी मस्त हो यार तुम्हारी जवानी ने मुझे पागल कर दिया है,
क्या बदन है एकदम मक्खन के जैसा नरम मुलायम,
काफी देर तक असलम और मैं एक दूसरे के मुंह में मुंह डाले एक दूसरे को चूमते रहे,
कभी मैं असलम की जीभ को अपने मुंह में खींच कर चूसने लगती,
तो कभी असलम मेरी जीभ को अपने मुंह में खींच कर चूसने लगता,
दोनों के बदन एक दूसरे से चिपके हुए थे,
तभी असलम ने मेरे होठों को चूसा अपनी सख्त हथेली मेरी चूचियों पर रख मेरी चुची को अपनी मुट्ठी में भर जैसे नींबू निचोड़ते ही वैसे मसल दिया,
जैसे ही असलम ने मेरी की चुची को मसाला मेरी मुंह से जोर से सिसकारियां निकल गई,
आह उउउउउउहहहहहह ससससससीईईईईईईई,
असलम को कुछ कहने की बजाए जैसे प्यार से, कोई मासूम अपने प्रेमी को कहती हैं ठीक वैसे ही, मैं असलम की बांहों में भर कर, अपनी आंखे असलम की आंखों में डालकर प्यार से बोली,
आह ईईईईईई कितनी जोर से मसलते हो दर्द होता है हटाइये ना पर असलम मेरी किसी भी बात की परवाह किये हुए मुझे अपनी बांहों में भर कर फिर से चूमते बोला
सुनीता इसी दर्द में तो मज़ा है इसी दर्द के लिए तो तड़प रही थी,
अब मैं क्या बोलती मैं भी अपने शौहर असलम के नीचे पड़ी जवानी की आग में जल रही थी मैं खुद असलम से लिपट कर बोली,
असलम ने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरी ब्रा सरका दिया,
दोनों गोरी गोरी चुचिया ऐसे फड़फड़ा कर बाहर निकली जैसे बरसो की कैद से आज़ाद हुई हो,
मेरी पहाड़ जैसी चूचियों की ऊपर भले की नोक के जैसे खड़े खड़े गुलाबी निप्पल जिस को देख कर किसी का भी मान ढोल जाए,
अब वो असलम की गिरफ्त में थी असलम मेरे दोनो संतरों को अपनी ताकत हाथो में भर कर ऐसे दबाने लगा जैसे वो मेरी चूचियां को नहीं किसी गाड़ी के भोंपू को बजा रहा हो,
उस समय मैं अपनी आंखे बंद आआआआआहह उउउउउउहहहहहह
असलम नीचे झुका और मेरी दोनो तने गुलाबी निप्पल से एक को अपने मुंह में भर कर चूसने लगा,
जैसे वो कोई मीठे आम चूस रहा हो और मेरे निप्पल को अपने दोनो दांतों के बीच फंसा कर जोर से खींचने लगा तो दीदी के बदन में मस्ती की लहर दौड़ने लगी वो दर्द से अपने बदन को थोड़ा ऊपर उठती बोली आह उउउउउउहहहहहह ससससससीईईईईईईई अभि के अब्बू।
असलम मेरे चूतड़ों पर हाथ फिराते हुए चूचियों को चूसते चूसते अपने होंठो को मेरी नाभि पर रख कर चूमने लगा
मुझे बहुत गुदगुदाने के कारण अपने सर को इधर उधर झटके लगाने लगी कुछ देर मेरी की नाभि को चूमने के बाद असलम थोड़ा-सा नीचे आया
असलम ने अपने हाथ मेरे पेटीकोट के नारे पर रखा और पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया
पेटीकोट का नाड़ा खोल कर असलम पेटीकोट को नीचे करने लगा,
मैंने भी अपनी पहाड़ जैसी बड़ी सी गांड़ को उपर उठा दिया और अगले ही पल पेटीकोट जमीन पर था,
लेक्सी ब्रा पेंटी में अपनी बेगम साहिबा को देख,
असलम बोलें, या अल्लाह सुभान अल्लाह
बिल्कुल जन्नत की हुर, काम की देवी लग रही हो, बल्ब की रोशनी में मेरा गोरा बदन चमक रहा था,
उस समय मुझे इस रूप कोई मर्द देख लेता तो उसका कब पानी निकल चुका होता,
असलम अपने मजबूत हाथों को मेरी गोरी चिकनी जांघ पर फिसल कर मेरे बदन की आग को ओर अधिक बढ़ा रहे थे,
मेरे और मेरे शौहर असलम के हालत ऐसे थे जैसे बरसो की प्यास हो और अपनी प्यास आज ही भुजा लेना चाहता हो,
असलम मेरी आंखों में आंखें डाल कर धीरे धीरे मेरे शौहर फिर से मेरे उपर चढ़नें लगा
असलम के गर्म होंठ मेरी पेंटी की आउटलाइन को चूमते हुए नीचे से ऊपर आकर मेरे होश उड़ाए जा रहा था असलम को कोई जल्दबाजी नहीं थी,
मैं असलम के नीचे अपनी टांगें चौड़ी करके लेटी हुई अपनी बड़ी सी गांड़ पटक रही थी,
असलम बड़ी अदा से मेरे शौहर अपनी बेगम साहिबा के गर्म बदन से चिपका खेल रहे थे असलम के होंठ मेरे शरीर के हर कोने पर अपनी जीभ से चाट चाट कर अपनी मोहब्बत की मोहरें लगा रहे थे,
बस एक ही कमी थी असलम के 9 इंच लम्बा और 4 इंच मोटा लौड़ा की मोहर चूत पर बाकी थी,
असलम के होंठ मेरे होंठों को चूसने लगे और असलम का हथियार मेरी पेंटी के उपर से ही चूत को चूम रहा था असलम का एक हाथ धीरे धीरे से मेरी पेंटी में घुस गया और अगले ही पल असलम की अंगुली मेरे सबसे बड़े खजाने के छेद पर थी
और मेरी दोनों टांगों को पूरा खोल दिया मेरी टांगों पर चढ़ी पैंटी उस समय मेरे चूत रस से पूरी तरह गीली हो चुकी थी,
असलम मेरी गीली पैंटी देख कर मुस्कुराने लगा और असलम ने मेरे होंठों को चूसते हुए एक पल गंवाए अपनी अंगुली अपनी बेगम साहिबा की चूत में घुसा दी ,
तो मैंने शर्म से मुंह दूसरी तरफ घुमा लिया तो असलम अपनी उंगलियों को धीरे धीरे मेरी चूत में घुमा कर
मेरी आंखों में आंखें डाल कर बोला, सुनीता बेगम किससे शर्मा रही हो देखो कितना पानी छोड़ रही हो लगता ही तुम्हारे तालाब में बहुत पानी है आज की रात अपना हथौड़ा तुम्हारे तालाब में डाल कर देखता हूं कि कितना गहरा ही तुम्हारा तालाब,
पूरा अन्दर जाकर खोद खोद कर पानी निकल उस मीठे पानी के तालाब में डुबकी लगाने की इजाजत है,
जहां असलम मम्मी के होठों को चूस रहा था वही असलम का खड़ा लंड मेरी पेंटी के उपर से ही मेरी चूत से चिपका मेरी चूत को चूमा चाटी कर अपनी मोहब्बत जता रहा था,
असलम जैसे नया खिलाड़ी भी अब मंजे हुए खिलाड़ी तरह मेरे बदन से चिपका ये सब जान गये थे कि कब कहा चोट करनी है,
असलम मेरी आंखों में आंखें डालकर मुझसे पूछने लगे सुनीता मल्लिकाएं हुस्न कैसा लग रहा है,
तो मैंने भी मासूम बनते हुए पूछा क्या, ?
असलम ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने खड़े लंड पर रख, ये,
मैंने शर्म से अपना हाथ खींच कर बोली धत्त
असलम अब अपनी बेगम साहिबा को इतने आसान से कहां छोड़ने वाले थे, ये मुमकिन नहीं था,
असलम भी जानते थे कि थोड़ी शर्म है मुझमें, पर मुझे अब खेलना तो उनके लौड़े के साथ ही है,
एक बार मैं उनके लंड से खेलने लगी तो मेरा डर भी निकल जाएगा और शर्म,
तो असलम ने फिर से मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया,
असलम ने मेरे हाथ अपने लंड पर रखा था मैंने अपने हाथ जैसे ही असलम के लंड पर एक ही झटके से फिर हटा लिया तो असलम ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोला क्या हुआ जान हाथ क्यों हटा लिया पकड़ो ना बेचारा कब से तड़प रहा है
मैं; दईया रे ये क्या है
असलम; मेरी जान ये केला है तुम्हे केला बहुत पसंद है
मम्मी; हाय दईया रे इसको कोई केला बोलता है और इसको कौन खाता है
असलम; तुम्हारे जैसी मस्त हसीनाओं को ऐसा ही केला पसंद होता है, ऐसा केला खा कर वो दुनिया के हर केला का स्वाद भूल जाती है और अब तो इस केले पर मेरी जान का नाम लिख है लो मेरी जान पकड़ो ना,
असलम पक्के खिलाड़ी थे वो मेरे जैसी माल को इतनी आसानी से कैसे जाने देता इसीलिए असलम ने कहा,
सुनीता कुछ नहीं होगा बस तुम वैसा करो जैसा मैं कहता हूं अब से तुम मेरी हो इस और इतना कहते ही असलम ने मेरी चुचियों पर आपने होंठ रख दिए और चूसने लगा ,
मैं बस सिसकियां भरने लगी, तभी असलम ने मेरा हाथ पकड़ा और उसे अपने लंड पर रख दिया और अपने लंड को मेरी मुठ्ठी पकड़ने की कोशिश की,
मैंने शर्म से अपने हाथ पीछे खींच लिया, असलम के कहने पर मैं तो जैसे उसके हाथ की गुड़िया बन के रह गई थी,
जब असलम ने फिर से कहा बेगम साहिबा प्लीज एक बार मेरा लंड पकड़ो प्लीज,
मैं नहीं कर सकती मुझे शर्म आती है तो असलम ने कहा किस बात की शर्म बेगम इस कमरे में तो मैं और तुम ही हो और कोई नहीं है,
किसी पहले मर्द का थोड़े ही पकड़ रही अपने शौहर का पकड़ रही हो, पर मैं नहीं शर्माती हुई कहा की प्लीज,
पर असलम कहने माने वाले था उसको आज ही मुझे अपना लौड़ा थमा कर मेरी सारी शर्म को दूर करना था इसलिए उन्होंने फिर से कहा जान प्लीज एक बार मेरा कहा मान लो प्लीज मुझे पता है तुमने कई सालों से सेक्स नहीं किया,
आज अल्लाह ने हमें मिला दिया है तो फिर तुम्हे सरम की नहीं एक मर्द जरूरी है
मैंने अपना चेहरा नीचे कर दिया तो असलम मेरे चेहरे को सहलाते बोले रानी
क्यों तड़पा रही हो पकड़ो ना अब शौहर का लंड अगर बेगम नहीं पकड़ेगी तो कौन पकड़ेगी, बोलो बेगम ही पकड़ती है ना उसको शांत भी बेगम ही करती है,
मैं; मुझे शर्म आती है
असलम ने दुबारा मेरा हाथ अपने लंड पर रखे हुए कहा पकड़ो ना रानी अब हम से कैसी शर्म
अपका बड़ा लंबा और मोटा है और इतना बोल कर मैं अपना मुंह नीचे करने से मुस्कुराने लगी
असलम; मेरे गालों को चूमते बोला,मेरी जान लम्बे और मोटे से ही तो मेरी जान को मजा आएगा बोलो मेरी रानी आएगा ना मोटे और लम्बे से मजा तो मैं सरमाते हुए हाय दईया रे कितने बड़े बेशर्म है हमार शौहर,।
फिर असलम ने मेरा हाथ अपने लौड़े पर दबा दिया इस बार मैंने अब असलम के लंड को धीरे धीरे सहला रही थी,
मुझे अब असलम के लंड से खेलने में मजा आ रहा था इसलिए मेरे हाथ बड़ी तेजी से असलम के लंड पर चल रहा था,
मैं अपने हाथ से अभि के अब्बू के लंड का जायज़ा ले रही थी कि मेरे शौहर का लंड कितना बड़ा और मोटा है
अब मेरे हाथ खुद पर खुद अपने शौहर असलम के शैतानी लौड़े पर चलने लगा,
असलम मेरी आंखों में आंखे डाल कर बोले क्या हुआ सुनीता, अच्छा नहीं लगा क्या मेरे,
मैं असलम की बात का क्या जवाब देती, हाय दईया रे हमार शौहर का हथियार बड़ा लम्बा और मोटा है ये तो मेरी चूनमुनीया को फ़ाड़ कर रख देगा,
मैं असलम के कान के पास धीरे से बोली हम्म,
हम दोनों बिस्तर पर लेट एक दूसरे को चूम रहें थे
असलम अपना दूसरे हाथ को नीचे मेरी पैंटी में घुसा दिया,
जैसा ही असलम के हाथ मेरी उस जगह से टकराया मुझे लगा जैसे कोई बिजली की नंगी तार ने मुझे छू लिया हो .
मेरी तांगे अब पूरी तरह से खुल गई तो असलम मेरी नंगी मक्खन सी चूत को अपने हाथ से रगड़ने लगे
आज मैंने पहली बार आज की रात के लिए अपनी झांटों को साफ़ किया था एक भी बाल नहीं थे मेरी चूत पर कुछ देर मेरी चूत को रगड़ने के बाद असलम की मोटी उंगली मेरी चूत में सरका गई जैसे ही असलम की उंगली मेरी चूत गई मेरी सांसें तेज होने लगी और मुंह से सिसकारियां निकल पड़ी,
किसी मर्द के हाथ जब औरत की चूत पर चलता है तो वो औरत अपने मैं नहीं रहती,
असलम मेरे बदन से खेल खेल बुरी तरह से गरम कर दिया था, और मेरी मदहोशी के आलम में सब कुछ बुला कर खुद अपने हाथ को असलम के खड़े लंड पर चलने लगी,
जब असलम ने देखा कि मैंने खुद अपने हाथ से उनका लंड सहला रही हूं तो उन्होंने अपने हाथ मेरे हाथ के ऊपर से हटा लिया, और मैं असलम के लंड को ऊपर से नीचे सहलाते हुए
उसकी लम्बाई या मोटाई का अंदाज़ा लगाने लगी और कोई औरत हो जब उसे पता चले कि उसके शौहर का लंड इतना जबरदस्त है तो उसके दिल में कितनी खुशी होगी ये तो वही बता सकती है ।
इस कम सी उमर में असलम का लंड इतना दमदार था कि मुझे ये बात अच्छे से समझ आ गई थी कि आज की रात मेरी कितनी जबरदस्त ठुकाई होने वाली है।
असलम का लंड तो निकाह से शांत था आज की रात अपना सारा गुस्सा मेरे पर निकलने वाला था,
मैंने अपने टांगो को पूरी तरह से अब खोल दिया था ताकी असलम के हाथ मेरी चूत पर अच्छे से पहुंच सकें,
असलम भी बस उसी मौके की तलाश में थे तो उन्होंने ने मेरी काम रस से गीली चूत में अपनी एक उंगली घुसाने लगे पर हाथ की उंगली मेरी चूत के छेद के जगह मेरी गांड की छेद पर चली गई...
जैसे ही मेरी गांड में असलम की उंगली गई, मैं चौंक गई और बोली है... आआआआआहह उउउउउउहहहहहह ससससससीईईईईईईई
अजी कहा घुसा दिये वहां नहीं वो छेद ग़लत है
मेरे मुंह से ये सुन कर असलम खुश हो गए, कि मैं उन्हें सही वाली छेद में डालने के लिए बोल रही हूं ,
असलम शरारत करते हुए बोले, मेरी जान अगर इस छेद में नहीं तो फिर किस छेद मैं डालू...
उनकी बात का अर्थ समझ कर शर्मा गई, और अपना चेहरा असलम के सीने में छुपा लिया असलम मेरे होठों को छुपाते हुए मेरी चूत को सहलाते बोले
फिर तुम ही बता दो सही वाला छेद कौन सा है और मेरे कुछ बोलने से पहले असलम अपनी उंगली मेरी चूत में घुसा दिया और मेरी चूत में अपनी उंगली घुसा कर बोले,
मेरी जान यह तो सही छेद है ना इस छेद में घुसाने को बोल रही थी
असलम; उफ्फफ्फ़....कितनी टाइट है मेरी जान तुम्हारी ये चूत,
असलम की उंगली खास मोटी थी और जैसे ही असलम की उंगली चूत में घुसी,
मेरे मुंह से हल्की से आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआह्ह ...
असलम की उंगली चूत में जाने जे दर्द हो रहा था,
मैं सोचने लगी जब असलम जी का हथियार 9 इंच लम्बा या 4 इंच मोटा लंड मेरी चूत में घुसेगा तब क्या होगा मैं तो मर ही जाउंगी,
असलम अपनी उंगली मेरी चूत में अंदर बाहर करने लगे,
मैं अब अपने शौहर असलम जी लंड लेने के लिए खुद को तैयार करने लगी,
असलम अपनी उंगली मेरी चूत में गच्चा गच्चा अंदर बाहर कर रहे थे तो मैं कसमसाने लगी,
मेरे शौहर असलम जी; मेरी जान क्यों मजा नहीं आ रहा मेरी जान आज की रात मजा लो आज की रात तो हमारी सुहागरात है अब तुम मेरी हो सिर्फ मेरी आज रात हमारे बीच कोई भी दीवार नहीं आ सकती हमें अब कोई नहीं रोक सकता एक होने से।
असलम जी मेरे ऊपर से उठे ओर उन्होंने अपनी उंगली मेरी पैंटी की आउटलाइन में घूमने लगें
असलम ने अपनी उंगली मेरी पेंटी में फसा ली जैसे ही असलम जी अपनी उंगली मेरी पैंटी में फसाई मेरा दिल ओर तेज़ी से धड़कनें लगा,
क्योंकि मुझे पता था कि अब मेरे बदन पर से मेरी पेंटी उतरने वाली है और असलम जी सामने पूरी तरह से नंगी हो जाउंगी क्योंकि अब तक तो मेरी पेंटी मेरी चूत को छुपाने में कामयाब रही थी,
मेरी पैंटी मेरे चूतड़ों के नीचे फंसी हुई थी
असलम जी चाहते थे तो मेरी पेंटी को खींच कर मेरे बदन से अलग कर सकते थे पर असलम जी प्यार से मेरी पेंटी को नीचे खींचने लगे,
लेकिन मेरे सहयोग के बिना असलम जी का इस तरह से मेरी पेंटी उतारना मुश्किल था
असलम जी कहते थे कि मेरी पेंटी उतारने में मदद करु, उनके बोलने से पहले ही मैंने भी अपने चूतड़ों को थोड़ा ऊपर उठा लिया,
असलम जी मेरी पेंटी मेरे चूतड़ों से नीचे खींच कर उससे मेरी टांगो से निकाल दी,
उस समय मेरी पेंटी मेरी चूत के रस से इस कदर गीली थी मानो अगर मेरी पेंटी को निचोड़ कर पानी निकाला जाए तो मेरी चूत के रस से आधा गिलास भर जाता,
मैं असलम के साथ बेंड पर नंगी पड़ी थी और हसरतें भरी नजरों से असलम को देख रही थी
असलम मेरे ऊपर चढ़ गया और अगले ही पल असलम के हाथ मेरी ब्रा के हुक पर थे
असलम ने बिना कोई वक्त गंवाए मेरी ब्रा का हुक खोल दिया
मेरी सांसें तेज हो गई जो ब्रा अब तक मेरी चुचियों को नीचे लटक रही थी अब वो ब्रा मेरे शौहर असलम के हाथ में थी,
असलम और मैं अब कमरे में सम्पूर्ण नंगे हो गए थे असलम ने मेरी आंखों में आंखें डाल कर धीरे अपने होंठ मेरे होठों पर रख दिया और प्यार से मेरे होंठों को चूसने लगा,
असलम धीरे से मेरी चूचियां को चूम नीचे आया और उन्होंने अपने होठों को मेरी गोरी चिकनी गुलाबी होंठ वालीं चूत के ऊपर अपने होंठ रख दिया,
पहली बार किसी मर्द ने मुझे बिस्तर पर ऐसे मेरी चूत पर अपने होंठ रखे तो मेरे मुंह से एक भयंकर सिसकी निकल गई……….
मेरे शौहर असलम जी मेरी गीली हो रही चूत के ऊपर अपने होठों को रख कर चलने लगे।
अपने शौहर असलम जी होंठो और गरम सांसो को अपनी चूत के ऊपर पा कर तो मेरी चूत ओर तेज़ी से पानी छोड़ने लगी थी,
उन्होंने मेरी नंगी चूत पर अपने होठों को रख कर किस किया में फाड़ फाड़ उठी थी
जिस से की मेरी चूत के रस से सराबोर पानी से बुरी तरह से गीली हो उठी थी,
असलम जी लग्न से मेरी चूत के ऊपर अपने होंठ टीका कर मेरी चूत के रस को चूस रहे थे,
मेरी चूत पूरी तरह से मेरे चूत के सर से भीग गई थी और असलम जी मेरी गीली चिकनी गुलाबी होंठ वालीं चूत से पानी की पिचकारी को अपने मुंह में दबाये चूत का रस को चूस रहे थें,,
मेरी सांसें तेज चल रही थी और मेरे हाथ खुद पर खुद मेरे शौहर असलम जी के सर पर पहुंच गए थे मैं खुद असलम के सर को पकड़ कर अपनी चूत पर दबा रही थी,
असलम चूत को ऐसे चाट रहे थे जैसा मनो वो मेरी चूत के रस को नहीं चूस रहे हों, कोई अमृत को चूस रहा हो,
तभी असलम जी ने किसी तरह अपनी जीभ मेरी चूत के अंदर डाल दी,
असलम की जीभ चूत में घुसते ही मेरे चूतड़ खुद से ही उपर उठने लगे और मेरी कमर खुद पर खुद चल रही थी,
मुझे पता था कि मेरे ससुर जी आज मेरे साथ अपनी सुहागरात जरूर मनाएंगे इसलिए मैंने अपनी सुहागरात के लिए अपनी चूत को शेव करके चिकना किया हुआ था, मेरे ससुर जी तो मेरी चिकनी चूत को चूम रहे थे और चाट रहे थे
असलम मेरी चूत के होठों को चूस कर खड़ा हो गया जब मेरी आंखों असलम की आंखों से मिलीं और मैं इशारों-इशारों में पुछने ही वालीं की क्या बात है
तो मेरी नज़र असलम के शरीर के नीचे पड़ी,
असलम जी का काला मुस्लिम लंड ओह आप उसे लंड नहीं कह सकते असलम जी का 09 - 10 इंच का लौड़ा किसी पागल सांड की तरह हवा में झूल रहा था
असलम जी का लौड़ा किसी बांस की तरह इतना कड़क था अगर मैं उस पर बैठ जाऊं तो उनका लौड़ा मुझे जमीन से उठा कर घुमा दे,
असलम जी मेरे सामने अपने लौड़े को आगे पिछे करते मुस्कुराते बोले
देखो अभी तुम्हारी चूत से मैंने तुम्हारा रस पिया है तो कितनी एनर्जी आ गई,
और अब मेरा लन्ड सीधा तुम्हारी चूत का रस पियेगा तो सोचो तब कितनी एनर्जी मिलेगी,
असलम जी अब पहली बार मेरे सामने चूत शब्द का इस्तमाल किया था,
असलम जी का इस तरह मेरे सामने मेरी चूत लंड की बात कहने पर मुझे बुरा नहीं लगा,
बल्कि एक अलग ही तरह की खुशी थी मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया और मैंने अपना चेहरा घुमा कर बोली
बड़े बेशर्म हो आप कोई करता ही इतनी गंदी बातें तो असलम जी नंगे ही मेरे साथ लेट गए और बड़े प्यार से मेरे चेहरे को सहलाते हुए बोले
कोई करे ना करे पर हम तो करते ही हैं और अब मैं अपनी बेगम साहिबा, गुले गुलज़ार के साथ ही कर रहा हूं,
ऐसी बातें अपनी बेगम साहिबा के साथ करना गुनाह है क्या,
और जब बेगम तुम जैसी हसीन और खूबसूरत हो मज़ा ओर भी बढ़ जाता है
असलम जी; बोलो अपनी बेगम से ऐसी बातें करना गलत है
मैं; मुस्कुरा कर मैने ये तो नहीं कहा पर आप इतने बेशर्म होंगे मुझे नहीं पता था
असलम जी; शौहर बेगम में बेशर्मी कैसी, मैं तो कहता हूं तुम भी अब बेशर्म हो जाओ, मधु बताओ ना अच्छा बताओ ना बेगम साहिबा तुम्हे मेरा लंड कैसा लगा,
मैं, आप इसके लंड कहते हैं आज मैंने पहली बार किसी के सामने लंड शब्द का इस्तमाल किया था,
असलम जी, अच्छा जरा हमें भी तो पता चले की अगर इसे लंड नहीं कहते तो क्या कहते हैं
मैं, इसे लंड नहीं लौड़ा कहता है,
असलम जी अच्छा तो फिर ये बता दो कि तुम्हे मेरा लौड़ा कैसा लगा
मैं, जी बड़ा मोटा और लम्बा है आपका लौड़ा ओर मैं आंखें बंद कर दूसरी ओर घूम गई
तो असलम जी मुझे कमर से पकड़ कर अपना लौड़ा मेरी गांड़ पर रगड़ते हुए बोलें,
असलम जी का मोटा और लम्बा लौड़ा कभी मेरी गांड़ तो कभी मेरी चूतड़ों को कभी चूत को रगड़ खा रहा था,
मेरा हाथ खुद पर खुद कभी चूत पर तो कभी असलम जी लौड़े के पहाड़ी आलू जैसा मोटा सुपाड़ा को सहला देता था,
असलम जी मेरी उपर चढकर अपनी बाहों में कस कर बोले
असलम जी; जानती हो ये इतना लम्बा या मोटा कैसे हुआ
मैं; इधर से मुझे क्या पता
असल जी; सुनीता बेगम ये लांबा और मोटा भी तो तुम्हें देख कर हुआ है ,
तुम्हारा रस पी कर जानती हो औरत का रस पीने से मर्द को कितनी एनर्जी आती है उसकी मर्दानगी कितनी बढ़ जाती है ,
वैसे तुम औरतों भी हमारे माल पीने से ज्यादा हसीन और जवान हो जाती हो,
यही कह कर असलम जी एक तरह से मुझे अपना लंड चूसने का बोल दिया था,
असलम जी का लंड चूसने का सुन कर, मैं शर्म से पानी पानी हो उठी थी
और मुस्कराते हुए धीरे से बोलीं नहीं पीना
असलम जी; अच्छा देखते ही कब तक नहीं पीती अभी ऊपर से नहीं लोग नीचे से तो लोगी ना
मैं अब अपने शौहर असलम जी की बात का क्या जवाब देती क्योंकि मुझे भी पता था कि आज नहीं कल मुझे उनका लॉलीपॉप चूसना ही है खैर वो तो बाद की बात थी आज की रात मुझे उनका लौड़ा अपने अंदर लेना ही था,
वैसे ही अब मेरी चूत में खुजली बहुत हो रही थी,
और अब मैं अपने शौहर जी का लौड़ा अपनी चूत में लेने के लिए एक दम से तैयार थी,
भले ही असलम जी मेरे अब दूसरे शौहर थे मुझे पता था कि अभि के पापा की लूली मेरे अन्दर असलम के लौड़े के पहाड़ी आलू जैसा मोटा टोपे के जितनी ही जाती थी,
आज असलम जी के साथ मेरी दूसरी सुहागरात थी और असलम का हथियार मेरी चूत के चिथड़े करने के साथ-साथ मुझे दर्द और मज़े देने वाला था,
और असलम भी मुझे कच्ची कली से फूल बनाने को तैयार थे सही मायने में तो मेरी नथ उतारने को उनका लंड मेरी चूतड़ों पर झटके के मार रहा था
मैं असलम की पकड़ से निकालने के लिए कसमसा रही थी,
मैं असलम की बांहों से निकल कर मुस्कुराती हुई बोली क्या कर रहे हो खा जाओगे क्या देखो मेरे गालों का क्या हाल कर दिया है
अगर जनाब को ज्यादा भूख लगी है तो मै खाने को कुछ ला देती हूं
तो असलम जी मुझे फिर से अपनी बहन से भरकर मेरे होंठो को चूमते बोला,
मेरी जान लाने कह जा रही हो अगर मेरी भूख ही मिटानी है तो अपने लाल सेब जैसे गालों को मसलते हुए , होंठों को चूसते चूसते बोलें,
फिर मेरी बड़ी चुचियों को दबाता बोलें मेरी जान रसगुल्लों का रस चखा दो देखो कितना रस भरा पड़ा है,
तो मैं भी असलम की आंखो से देखकर बोली अच्छा जी जनाब आप तो अपनी भूख मिटा लोगे मेरा क्या होगा,
मुझे भी तो भूख लगी है मैं क्या खाऊंगी,
तो असलम जी ने मेरा का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख बोला मेरी रानी तेरे लिए मेरे पास मस्त सिंगापुरी केला है तुमको ये खिलाऊंगा सिंगापुरी केला बड़ा ही स्वादिष्ट हैं
मलाई वाला एक बार इस सिंगापुरी केले को चख लोगी तो जीवन भर इस केले की स्वाद को भूल नहीं पाएगी,
तो मैं शर्म से बोली धत् मुझे नहीं खाना और अपने हाथ को असलम के लंड से हटा लिया तो असलम ने फिर से मेरा हाथ पकड़ा और अपने लौड़े पर रख दिया,
मेरी पहाड़ जैसी चूचियों को चूसते हुए मेरी आंखों में देख कर बोला क्या हुआ मेरी जान पकड़ो इसे प्यार करो,
अब मैं भी अपने शौहर असलम जी के लंड को पकड़ कर बोली, क्या ये सॉफ्टी है जो आप मुझे खिलाना चाहते हो,
तो असलम इस बार मुझे अपनी बाहों में भर कर पूछते बोलें मेरी जान तेरी जैसी मस्त हसीना इक बार इस सॉफ्टी चख ले तो फिर जिंदगी भर किसी ओर सॉफ्टी को नहीं देखेगी,
इसके स्वाद को भूल नहीं पाओगी बोलो भूल पाओगी इसके स्वाद को नहीं
मैं भी असलम की इस बात पर मुस्करा पड़ी और उसके लंड को सहलाने लगी
अब अंदर से कब से मन ही मन असलम से चुदाई करने को तैयार और तड़प रही थी,
आखिर मैं भी जानती थी कि अब असलम उसका शौहर ही है और वो आज नहीं कल उसे अपने नीचे दबा कर मेरे ऊपर चढ़ कर चुचियों को मसलते चुसते हुए अपने मोटे लौड़े से मेरी चूत चोदेगा,
तो वो क्यों उसे चोदने से रोके मैं असलम और खुद पर अपने आप को कंट्रोल करती,
असलम; बेगम साहिबा तेरे जैसी मस्त औरत को मेरा जैसा दमदार मर्द ही ठोक कर मजा दे सकता है बोलो मेरी जान सही कहा ना मैंने,
असलम की बात सुन कर मैं मुस्करा पड़ी,
असलम; सुनीता मेरा लन्ड प्यार करेगा अपनी जान के अंदर अपने प्यार की बारिश करेगा तो मैं भी असलम के रंग में रंग उसकी आंखों में आंखें डाल कर
उनके सिंगापुरी लौड़े को सहलाते हुए बोली तो करो ना प्यार कर दो अपने प्यार की बारिश अपनी बेगम साहिबा के अंदर कब तड़प रही है
असलम मेरे के होंठो को चूसने के बाद मेरे गालों पर अपने गाल रगड़ ने लगा और अपने हाथ पीछे मेरी गांड पर अपने हाथ को रख कर मेरी गांड पर हाथ फेरने लगा,
जिस से मैं मस्ती मुझे छटपटाने लगी
मेरी सांसें तेज थी और आंखें बंद किये,
सुनीये जी ये क्या कर रहे हो प्लीज छोरो ना मुझे
असलम; कुछ नहीं जान बस अपनी जान को प्यार कर रहा हूं क्यूं मेरी जान अच्छा नहीं लग रहा मेरा तुम्हे इस तरह प्यार करना,
असलम; तो कौन रोक रहा है मेरी रानी आज हम दोनो मिल कर इस रात को रंगीन बनाते और यादगार बनाते हैं,
अब असलम ने अपने एक हाथ मेरी चूचियों पर आ गया और उन्हें दबाने लगा और दूसरे हाथ से मेरी मस्त गांड से खेलने लगा
और अपने होंठों को अपने होंठों पर रख कर उनका रस चूसने लगा
असलम के होंठ चूसने से मैं मस्ती में आने लगी और असलम के नीचे वाले होंठ को अपने होंठो से लेकर चूसने लगी,
मैं और असलम एक दूसरे से चिपके होंठो को ऐसे चूस रहे थे कि जैसे वो जन्म से प्यासे हो और इक दूसरे के होंठो से रस टपक रहा हो,
कुछ देर वो दोनों इसी तरह इक दूसरे के होंठो को चूस रहे थे कि जहां असलम के होंठ मेरे होंठो का रस निचोड़ रहे थे वही असलम के हाथ मेरे बदन पर घूम घूम कर उसका जायज़ा ले रहे थे,
असलम; मेरी जान सच में तेरा ये बदन बड़ा मस्त ही, तेरा सामान बड़ा लाजवाब है,
मुझे तो यकीन नहीं हो रहा कि इतना जबरदस्त सामान के होते तू मर्दों की नज़र से बच कैसे गई बता इतनी कातिल जवानी को कैसे छुपाया रखा,
मैं असलम के होंठो को चूमते हुए बोली अपने शौहर के लिए मेरे राजा,
असलम; सच तो फिर आज मैं लूट लू इस मस्त जवानी को,
मैं; तो फिर लूट लो मेरे राजा मेरी इस जवानी को लूटने का हक अब सिर्फ और सिर्फ तुम्हारा ही है