Sofiya9169
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असलम मेरे पहाड़ जैसे चूतड़ों से खेलते-खेलते मेरा हाथ पकड़ कर नीचे ले गये और उसे अपने लंड पर रख दिया,
मैंने इस बार बिना कुछ कहे अपने शौहर असलम का खड़ा मस्त लंड बहुत ही प्यार से पकड़ लिया और खुद ही उसे सहलाने लगी,

अभि के अब्बू के लंड से खेलने लगी तो अब उनके लंड की लम्बाई और मोटाई से मस्ती में आ गई थी और मस्ती में असलम की आंखों में देख कर बोली,

राजा तुम्हारा ये तो बहुत ही लंबा और मोटा है कितना कड़क भी है ये तो अभी ऐसे खड़ा हो गया है जैसे कुतुबमीनार हो,
ऐसा लग रहा है जैसे किसी मर्द का नहीं किसी घोड़े का हथियार हो,
मेरी बात सुनकर असलम मेरे पहाड़ जैसे चूतड़ों पर थप्पड़ मारते बोला बेगम साहिबा तूम भी मस्त घोड़ी हो मेरी रानी,
तेरे जैसी मस्त घोड़ी साथ हो तो नामर्द का भी खड़ा हो जाएगा मैं तो मर्द हूं ,
रही बात इस के घोड़े का होने की तो तेरे जैसे मस्त घोड़ी को कबू में करने के लिए लौड़ा भी तो घोड़े के जैसा होना चाहिए,
मैं; मुझे डर लग रहा है राजा इस से
असलम; मेरी जान डर कैसा ये तू पहली बार लंड देख रही है क्या
मैं; नहीं देखी हूं पर ऐसा मूसल लंड पहली बार देख रही हूं
असलम; फिर ऐसे बोल मेरी जान तूने लुल्ला नहीं लुल्ली देखी है और लौड़ा तो इसे ही कहते हैं।
वैसे तेरे उस पहले गांडू पति का कैसा था मेरे जैसा ही था या फिर मुझसे बड़ा था उस हरामी का,

( अभि के पापा को असलम ने गांड़ू और हरामी बोला तो मैं सरमाते हुए बनावटी गुस्से में आकर असलम से बोली धत् कितने गन्दे बच्चे हो अभि के अब्बू मुझे असलम की बात पर गुस्से की जगह मस्ती चढ़ने लगी थी )
असलम; मेरी आंखों में आंखें डाल कर बोले मेरी छमक-छल्लो में बच्चा नहीं अपनी बेगम साहिबा सुनीता के होने वाले बच्चों का अब्बू हूं,
मैं असलम की बांहों में मस्ती में आ कर बोलीं; तुमसे बड़ा और मोटा मेरा राजा उसका तो तुम से आधा भी नहीं होगा,
असलम ; खुश होकर क्या कह रही हो मेरी जान फिर तो तू किसी लौड़े से ठुकाई नहीं हूई है,
आज तुझे बताऊंगा की लौड़े से ठुकाई पर कैसा मजा मिलता है,
मैंने इस बार बिना कुछ कहे अपने शौहर असलम का खड़ा मस्त लंड बहुत ही प्यार से पकड़ लिया और खुद ही उसे सहलाने लगी,

अभि के अब्बू के लंड से खेलने लगी तो अब उनके लंड की लम्बाई और मोटाई से मस्ती में आ गई थी और मस्ती में असलम की आंखों में देख कर बोली,

राजा तुम्हारा ये तो बहुत ही लंबा और मोटा है कितना कड़क भी है ये तो अभी ऐसे खड़ा हो गया है जैसे कुतुबमीनार हो,
ऐसा लग रहा है जैसे किसी मर्द का नहीं किसी घोड़े का हथियार हो,
मेरी बात सुनकर असलम मेरे पहाड़ जैसे चूतड़ों पर थप्पड़ मारते बोला बेगम साहिबा तूम भी मस्त घोड़ी हो मेरी रानी,
तेरे जैसी मस्त घोड़ी साथ हो तो नामर्द का भी खड़ा हो जाएगा मैं तो मर्द हूं ,
रही बात इस के घोड़े का होने की तो तेरे जैसे मस्त घोड़ी को कबू में करने के लिए लौड़ा भी तो घोड़े के जैसा होना चाहिए,
मैं; मुझे डर लग रहा है राजा इस से
असलम; मेरी जान डर कैसा ये तू पहली बार लंड देख रही है क्या
मैं; नहीं देखी हूं पर ऐसा मूसल लंड पहली बार देख रही हूं
असलम; फिर ऐसे बोल मेरी जान तूने लुल्ला नहीं लुल्ली देखी है और लौड़ा तो इसे ही कहते हैं।
वैसे तेरे उस पहले गांडू पति का कैसा था मेरे जैसा ही था या फिर मुझसे बड़ा था उस हरामी का,

( अभि के पापा को असलम ने गांड़ू और हरामी बोला तो मैं सरमाते हुए बनावटी गुस्से में आकर असलम से बोली धत् कितने गन्दे बच्चे हो अभि के अब्बू मुझे असलम की बात पर गुस्से की जगह मस्ती चढ़ने लगी थी )
असलम; मेरी आंखों में आंखें डाल कर बोले मेरी छमक-छल्लो में बच्चा नहीं अपनी बेगम साहिबा सुनीता के होने वाले बच्चों का अब्बू हूं,
मैं असलम की बांहों में मस्ती में आ कर बोलीं; तुमसे बड़ा और मोटा मेरा राजा उसका तो तुम से आधा भी नहीं होगा,
असलम ; खुश होकर क्या कह रही हो मेरी जान फिर तो तू किसी लौड़े से ठुकाई नहीं हूई है,
आज तुझे बताऊंगा की लौड़े से ठुकाई पर कैसा मजा मिलता है,







