रानी के साथ की यादें - 1 - SexBaba
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रानी के साथ की यादें - 1

hotaks444

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Nov 15, 2016
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हेलो दोस्तों<br/><br/>यह मेरी आप बीती है, मेरा नाम साहिल है. मैं 26 साल का हूँ और गुरुग्राम में रहता हूँ, मेरा कद 5.9 इंच है, मैं फिलहाल जॉब ढूंड रहा हूँ और मेरा एक ही शौक है बॉडी बिल्डिंग मेरी 3 गर्लफ्रेंड रह चुकी है पर उनके साथ सेक्स में मुझे कोई ख़ास मज़ा नहीं आया, क्योंकी मुझे शुरू से ही औरतें ज्यादा पसंद है और मेरी ये इच्छा वहां पूरी हुई जहाँ मुझे उम्मीद नहीं थी और न कभी ऐसा सोचा था कभी.<br/><br/>उसका नाम रानी है और वो हमारे पास कई सालों से काम कर रही है, उसकी उम्र अब 43 साल है, उसके 2 बच्चे है; एक 18 साल की और एक 16 की, रंग गेहुआँ और बाकी सब कुछ बाद में बताऊंगा. हम्हे अब साथ में साल भर होने वाला है और इस में उसने मुझे वो बहुत सी चीज़े सिखा दी है; उस दिन सुबह से ही मौसम सेक्सी हो रहा था, मैं जिम से आया तो बारिश शुरू हो गई थी, मम्मी पापा ऑफिस चले जाते है और शाम को ही लौटते थे, मैं अपना नाश्ता बना के खा ही रहा था की तभी घंटी बजी, मैंने दरवाज़ा खोला तो देखा की तेज़ बारिश हो रही थी और रानी भीगी हुई सामने खड़ी थी, मैंने उसे आने दिया " आपकी चाबी कहाँ है? " वो अपने आपको चुन्नी से ढकते हुए " जल्दी में घर पे रह गई " तब मेरी नज़र उसपे गई, उसका गुलाबी सूट गीला हो कर उसके बदन से चिपक गया था और उसके हर अंग उभर के दिख रहा था, मैंने उसे वहीँ रोका और जल्दी से एक तौलिया ला के दिया " आंटी आप अन्दर जाके सुखा लो, नहीं बुखार पकड़ लेगा, पहली बार मेरा ध्यान उसके शरीर पे गया, उसके मुम्मे बहुत मोटे थे वैसे वो हमेशा दुपट्टा ओढे रहती थी और कभी ध्यान भी नहीं दिया. वो मेरे कमरे में गई और मैंने पूरी तरह से उसे पीछे से ताड़ लिया, मुझे ध्यान आया की मेरा लण्ड खड़ा हो रहा था, मैं जाके नाश्ता करने लगा, पर मेरा मन कर रहा था की मैं जाके देखूं की वो क्या कर रही है, पर मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी, थोड़ी देर में वो आई और उसे देखते ही रही सही कसर पूरी हो गई और मेरा लण्ड पूरी तरह खड़ा हो गया, पहली बार उसे बिना दुपट्टा के देखा था, उस गुलाबी सूट के नीचे उसकी सफ़ेद ब्रा साफ़ दिख रही थी " साहिल मैं एक कप चाय बना लूँ? " मैंने ध्यान हटाया " आंटी इसमें पूछना क्या है एक कप मेरे लिए भी बना दो " वो चाय बनाने चली गई और मैं सोच में पड गया की उससे कैसे बात बड़ाई जाए, डर भी लग रहा था की कहीं मम्मी से न बोल दे, थोड़ी देर में वो चाय बना के लाइ और जैसे ही देने की लिया झुकी मेरी नज़र उसके बड़े मुम्मो पे गई, उसने देख लिया और तुर्रंत खड़ी हो गई, और थोड़ी दूर ज़मीन पे बैठ गई और टीवी देखना लगी, मैंने बात घुमाई " आंटी तुम एक जोड़ी कपडे यहाँ क्यों नहीं रख देती? मौसम ऐसा है काम ही आएगा " वो मुझे देख रही थी और मुस्कुराई " हम्म सही कह रहे हो, मैं अगर रुक जाती तो इतनी भीगती नहीं " , मेरी नज़र उस पे से हट नहीं रही थी और मेरा लण्ड पूरा तना हुआ था, मैं उठ भी नहीं सकता था की वो देख लेती, और जैसे ही वो किचन में गई; मैं उठ के बाथरूम भागा, मेरे दिमाग काम नहीं कर रहा था, मैंने साबुन का झाग बनाया और अपने मोटे सुपाडे को रगड़ने लगा ( मेरा लण्ड खड़ा होकर 6 इंच का है, पर मेरा सुपाड़ा काफी मोटा;जिसकी वज़हें से बचपन में ही डॉक्टर ने मेरा सुपाडे के ऊपर की खाल निकाल दी थी, और मुझे मुठ मारने के लिए साबुन या लोशन लगाना पड़ता है ), लण्ड पहली बार इतना उत्तेजित था सुपाड़ा फूल के टमाटर जैसा लाल हो गया था, मैं जल्द ही मैं झड़ने वाला था और जैसे ही मेरा माल छूटा, उसी वक़्त दरवाज़ा भी खुला, जल्दी में मैंने दरवाज़ा शायद अन्दर से बंद नहीं किया था और रानी खड़ी मुझे झड़ते हुए देख रही थी " ये क्या कर रहे हो? " , मैं डर के मारे कुछ नहीं बोल पाया और मेरा माल भी निकले जा रहा था; उसने फिर मेरे लण्ड को देखा और बाहर चली गई, मैं जल्दी से बाहर आ गया " आंटी;किसी को बताओगी तो नहीं? " . वो झाड़ू लगा रही थी " ये बात किसी से बोलने वाली नहीं है! " . उस दिन बस यही हुआ और जब तक वो काम करती रही मैं उसके सामने नहीं गया; बारिश भी थम गई थी और वो काम कर के चली गई, रात गई और बात गई.<br/><br/>दुसरे दिन वो आई और मैंने उसके लिए दरवाज़ा खोला, वो मुझे देख मुस्कुराई और किचन में गई, जाने से पहले उसने टेबल पे एक थैला रख दिया, मैं भी सोफे पे बैठ गया और टीवी देखने लगा, थोड़ी देर बाद वो झाड़ू लाग्ने लगी, मैंने दो तीन बार उसपे नज़र मारी और उसने तीनो बार देख लिया, मैं " आंटी उस थैले में क्या है " वो बोली " मेरे कपडे है एक जोड़ी यहीं रख रही हूँ " , मैंने और थोड़ी हिम्मत की " आंटी, वो कल की बात के लिए सॉरी " , टीवी पे फिल्म में किसिंग सीन आ गया, वो काम करते हुए " तुम्हारी गलती नहीं है, दिमाग तो खराब होगा ही " . मैंने चैनल चेंज कर दिया, वो झाड़ू करके चली गई और बर्तन करने लगी, मैं मौका ढूंढ के उसके पास जा रहा था और वो भी भांप रही थी, पर और कुछ बात करने की हिम्मत नहीं हुई, कहीं बिदक जाए और शिकायत कर दे, मैंने तय किया की धीरे धीरे बात आगे बढ़ाऊंगा.<br/><br/>To be continued .
 
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