रानी के साथ की यादें - 3 - SexBaba
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रानी के साथ की यादें - 3

hotaks444

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Nov 15, 2016
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बड़े दिनों बाद मुझे औरत का साथ मिला था, और मैं उसके बारे में सोचते सोचते सो गया, शाम को मार्किट से 20 पीस का मैनफोर्स रिब्बड कंडोम का पैकेट खरीद लाया, अब तो सब होता रहना था.<br/><br/>दूसरे दिन.<br/><br/>मैं जिम से आने में लेट हो गया, वो आपने काम में लगी हुई थी, मैं किचन में गया और उसे देख मेरी धड़कने तेज़ हो गई, वो काले रंग का सूट पहने थी, लिपस्टिक और बिंदी लगा के बहुत सेक्सी लग रही थी, मैंने उसे जाके पीछे से पकड़ लिया " क्या बात है आंटी, आज तो बिजली गिरा रही हो " , वो शर्मा गई " बिजलियाँ तो तुमने गिराई है मुझपे, कल घर जाके भी शरीर में से तुम्हारी खुशबू आ रही थी " . मैंने उसे चूमना शुरू किया और उसके कानो में गरम साँसे भरी " ओह्ह आंटी मैं भी रात भर जगा रहा और मेरा पप्पू भी. देखो कितना उतावला हो रहा है तुमसे मिलने को! " मैंने उसका हाथ अपने लण्ड पे लगाया " , उसने मेरे खड़े होते हुए लण्ड को टटोला " अभी जिम से आए हो कुछ खा पी के ताक़त बढ़ा लो;आज तो मैं टाइम निकाल के आई हूँ " . मैं कमीज के ऊपर से उसके मुम्मे सहलाने लगा " थोड़ी देर इनसे खेलने दो, इनसे प्यार हो गया है मुझे " . वो हसने लगी " ऐसा क्या है इनमे जो तुम्हे प्यार हो गया? कभी देखे नहीं? " . मैंने उसे घुमा दिया और उसके होंठ चूम लिए " रानी इतने बड़े नहीं देखे कभी, जिनके देखे है उनके इसके आधे भी नहीं थे " . वो छेड़ने लगी " अच्छा तो पहले चख चुके हो इसका स्वाद? " . मैंने उसे उठा के ऊपर बिठा दिया " हाँ! तीन लड़कियों के साथ किया है, उनके साथ कल जैसा मज़ा, मैं तुम्हारा कायल हो गया " . वो मेरे गले लग गई " साहिल मुझे भी इतना अच्छा कभी नहीं लगा, मैंने कभी ऐसा सुख नहीं पाया था, मेरे अन्दर की ललक की जगा दी तुमने " , मैंने उसकी कमीज उतार दी, उसने काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी " रानी तुम बहुत सेक्सी लग रही हो इस काले ब्रा में! " . मैंने उसके छाती को चूमने लगा, वो तड़प रही थी " अहह साहिल मुझे आंटी कह के पुकारो "<br/><br/>मैंने उसकी ब्रा स्ट्राप सरकाई और उसके कंधे को चूमा " आंटी अह्ह्ह तुम बहुत सेक्सी हो!! " वो बहक चुकी थी, मैंने उसकी ब्रा खोल दी और उसके बड़े मुम्मो को चूसने लगा, वो भी मेरा मुँह उनपे दबा रही थी, उसके निप्पल तन के सख्त हो गए थे, वो मेरे लोअर के ऊपर से ही मेरे लण्ड को सहला रही थी. मैंने लोअर नीचे किया और मेरा लण्ड लपक के उसके हाथ में आ गया, वो मेरे टोपे को सहलाने लगी " ओह्ह साहिल कितना तगड़ा है तुम्हारा " . मैंने किचन में ही अपने कपडे उतार फेकें और उसका नाडा खोलने लगा. वो हसने लगी " क्यों साहिल बहुत जल्दी में हो?, खेलो थोड़ी देर अपनी आंटी के साथ " मैंने उसका नाडा खोल उसकी सलवार उतार दी " वही तो कर रहा हूँ आंटी, कल तो पहली बार था आज तो बहुत कुछ करना है! " . उसकी गुलाबी पैंटी देख " क्या बात है आंटी तुम तो आज बड़ी मस्त हो कर आई हो, क्या इरादे है? " , वो मुझसे लिपट गई और मेरे कान में बोली " मेरे राजा अब ये रानी सिर्फ तुम्हारी है " , वो सुनते ही मैंने अपने होंठ उसके होटों पे रख दिए और हम एक दुसरे को ताबड़ तोड़ चूमने लगे, वो एक हाथ से मेरा लण्ड पकडे हुए थी और दुसरे हाथ से मेरे टटो से खेल रही थी, ये फरक होता है, एक अनुभवी औरत में, वो बिन कहे वो सब कुछ कर रही थी जो एक आदमी को पसंद होता है, बस देखना था की, लण्ड चूसने पे उसकी क्या प्रतिकिय्रा होगी. मैं उसे चूमते हुए नीचे गया, और उसकी पैंटी नीचे सरका दी, और उसे बाल में हाथ फेरा " काट के नहीं आई? " , मैंने उसे उठा लिया और उसने मुझे टांगो से जकड लिया " चलो मैं काटता हूँ! " , मैं उसे कमरे में ले गया और बिस्तर पे लेता दिया, और अपना क्लिपर निकाल लाया, वो ज़मीन पे बैठी हुए थी " बिस्तर पे बाल बिखर जाते! " मैंने जल्द ही उसकी चूत चिकनी कर दी और उसकी गीली फांकों में ऊँगली फेरी " अब आएगा मज़ा चाटने में! " , उसे ऊपर बिठाया और उसकी टाँगे फैलाई और उसकी चूत की फांको में अपनी जीब फेराइ, वो तड़प गई " अह्ह्ह्ह सससससाहिल क्या अच्छा लगता है इसमें? " , उसकी चूत सूजी हुई लग रही थी और ऊगली डालने में वो सिसक भी रही थी, जब वो अपने चर्म पे आने लगी मैंने उसे छोड़ दिया, और उसके ऊपर लेट गया " रानी, सूज क्यों रही है? " , उसने हाथ बड़ा के मेरे लण्ड को पकड़ा और अपने छोले पे रगड़ने लगी " करते भी खुद हो और पूछते भी हो, ये क्या बात है? " . मैंने हलके से उसके होटों को चूमा " आंटी उलटी हो जाओ " . वो उलटी लेट गई और मैं उसपे लेट गया, मैं उसे चूमने लगा और उसके पैर फैलाए, और उसका छेद ढूंढ़ने लगा, उसकी चूत बिलकुल गीली थी, और लण्ड बार बार फिसल जा रहा था, उसने हाथ घुमा के लण्ड को अपनी चूत पे लगाया " नहीं लाए निरोध? रोज़ रोज़ सही नहीं है ऐसे " . मैं रुक गया और जल्दी से दराज़ में से निकाला और लगा लिया, उसने जल्दी से लगाया और मैंने धीरे से ज़ोर लगाया, कुछ वो गीली थी कुछ कंडोम चिकना था, टोपा अंदर घुस गया, वो हलके से चिल्लाई " आई माँ साहिल धीरे दर्द हो रहा है " मैं रुक गया " रानी कल तो कुछ नहीं हुआ आज क्या हुआ " . वो गहरी साँसे भर रही थी " जाने दो बस धीरे धीरे करो " , मैं उसे धीरे धीरे चोदने लगा, थोड़ी देर बाद मैं उसे घोड़ी बनाया जैसे ही डाले लगा, उसने रोक दिया " इसे उतार दो, ये लग रहा है, जब छूटे तो निकाल लेना " मैंने फटा फट कंडोम उतारा और घोड़ी चढ़ गया, जैसे ही लण्ड उसके गरम चूत में घुसा, मज़ा सा आ गया " हऐ रानी आंटी आज तो कुछ जायदा ही गरम हो रही हो " मैंने उसकी गांड के छेद को छुआ और उसे हलके हलके रगड़ने लगा, पहले तो वो तिलमिलाई, पर जल्दी ही शांत हो गई " अह्ह्ह साहिल हहह हहह " वो झड़ने के करीब थी, मैं रुक गया और उसके गांड के छेद को रगड़ने लगा, वो ज़ोर से आहे भरने लगी " हऐ साहिल, ठीक से आगे पीछे करो अह्ह्ह " , मैंने एक ज़ोर का झटका दिया और उसे चोदने लगा, मैंने उसकी गाड़ को चिकना किया और ऊँगली डाल दी वो चिल्ला पड़ी " ओह्ह्ह माँ " और ज़ोर से झड़ने लगी मैंने उसे पकड़ लिया और उसे चोदता रहा, वो निढाल हो गई, पर मैं चोदता रहा, मैं झड़ने वाला था " ओह्ह रानी मैं झड़ रहा हूँ अह्ह्ह्हह हहहहह " , वो मुझे लेके मुँह के बल लेट गई, दो तीन पिचकारी उसके अंदर ही छूट गई, मैंने लण्ड बाहर निकाल दिया हुए उसकी गांड पे रख दिया, और हलके से डालने की कोशिश की, उसने हाथ घुमा के लण्ड पकड़ लिया " ना यहाँ नहीं " , मैं उसपे लेटा रहा " रानी अच्छा लगा? " वो " बहुत अच्छा " मेरा लण्ड उसकी गांड में सट रहा था, मैं धीरे धीरे झटके लगा रहा था " आंटी पहले कभी ऐसे किया है? " वो " नहीं रे बाबा करना भी नहीं है, अपना देखा है! " . उसकी गांड मेरे माल से चिकनी हो रही थी, मैंने फिर ज़ोर लगाया और सुपाड़ा उसके छेद पे टकराया, वो चिल्ला पड़ी " माँ! क्या कर रहे हो, नहीं जाएगा वहां आई " . मैं हलके हलके आगे पीछे करने लगा, वो हसने लगी " क्या कर रहे हो? अपनी आंटी का ख्याल करो, अभी हटे हो, फिर त्यार हो गए "
 
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