संस्कारी परिवार की बेशर्म कामुक रंडियां। अंदर छुपी हवस जब सामने आयी । - Page 6 - SexBaba
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संस्कारी परिवार की बेशर्म कामुक रंडियां। अंदर छुपी हवस जब सामने आयी ।

Update - 31

सुबह के 5:00 बज रहे थे आरती और शालिनी गहरी नींद में सोई हुई थी ।

तभी अचानक बलवीर का फोन बजता है बलवीर की आंख खुल गई बलवीर ने फोन उठाया तो देखा धर्मवीर पर फोन आ रहा था । बलवीर ने सोचा पता नहीं क्या बात हो गई जो भैया इतनी सुबह सुबह फोन कर रहे हैं । । बलवीर ने जल्दी से फोन उठाया और कॉल आंसर की ।

बलवीर - हेलो भैया इतनी सुबह सुबह कैसे फोन किया, सब ठीक तो है ना ।

धर्मवीर : ठीक नहीं है इसीलिए किया और हंस पड़ा धर्मवीर ऐसा कहकर ।

बलवीर नहीं सोचा यदि सब ठीक नहीं है तो हंसने वाली क्या बात है, लेकिन फिर भी उसने पूछा ।

बलवीर : भैया क्या बात है बताओ कैसे याद किया अपने छोटे भाई को ।

धर्मवीर : अरे बलवीर माफ करना , तुम इंजॉय कर रहे हो और मैंने तुम्हें सुबह सुबह परेशान कर दिया । दरअसल बात यह है की हमारी कंपनी को एक कॉन्ट्रैक्ट मिल रहा था जिसका मेल अभी मुझे रिसीव हुआ है । आज 10:00 बजे प्रेजेंटेशन देनी है और मैं चाहता हूं कि यह सब कुछ मेरा अकेला ही नहीं है तुम भी बराबर के हिस्सेदार हो, क्योंकि तुम मेरे भाई हो और छोटे भाई का हिस्सा हर चीज में होता है ।

यह सुनकर बलबीर बोला : भैया कैसी बात कर रहे हैं । मैंने आपको हमेशा एक पिता की नजर से देखा है और बड़ा भाई तो वैसे भी पिता समान होता है । आप आदेश कीजिए मेरे लिए क्या काम है।

धर्मवीर : बलवीर काम कुछ नहीं है , लेकिन 10:00 बजे तुम्हें मेरे साथ चलना है क्योंकि यह बहुत बड़ा कॉन्ट्रैक्ट है । अब भगवान की कृपा से हमें मिला है अगर यह डील फाइनल हो जाती है तो हमें करोड़ों का फायदा होगा ।

बलवीर : जी भैया जैसा आप कहते हैं । मैं अभी निकल लेता हूं यहां से ।

ऐसा सुनकर धर्मवीर ने फोन रख दिया ।

धर्मवीर आज बहुत खुश था क्योंकि जितनी मेहनत उसने की थी एक तरह से ये उसका ही फल था जो उसकी कंपनी इतनी ऊंचाइयों पर पहुंची थी । बस इस खुशी के माहौल में भी धर्मवीर की आंखें नम हो गई ।

और आंखों के नम होने की वजह की धर्मवीर का बेटा राकेश । धर्मवीर मन ही मन दुखी हो गया ।

उसका एक ही बेटा था राकेश जो उसे भगवान की तरह पूजता था । बहुत अच्छा लड़का था राकेश । मेरा बेटा आज होता तो बहुत खुश होता । धर्मवीर इसी उधेड़बुन में लगा हुआ था । तभी उसकी नजर अपनी बहू उपासना की बहन पूजा पर पड़ी जो पूरी रात चुदकर बैठी थी ।जिस दिन से बलवीर आरती और शालिनी घर से घूमने गए थे उसी दिन से उपासना और पूजा को धर्मवीर और सोमनाथ पूरे दिन रात चोद रहे थे ।

कभी सोमनाथ अपनी बेटी उपासना पर चढ़े रहते हैं तो कभी अपनी छोटी बेटी पूजा पर धर्मवीर चढ़ा रहता था । वह कभी अपनी बहू उपासना के मुंह में लंड रखता तो कभी उसकी बहन पूजा को अपने नीचे दबाए पड़ा रहता।

कहने का मतलब पूजा और उपासना को चुदाई का पूरा सुख मिल रहा था । उनकी सिर्फ चुदाई होती थी, चुदाई और सिर्फ चुदाई ।





किसी लड़की के लिए या किसी औरत के लिए यह पल भी बड़े मनमोहक होते हैं क्योंकि आजकल हर किसी की जिंदगी में इतना वक्त नहीं होता की दो-चार दिन लगातार चुदाई कर सके । किसी की जिंदगी में इतना वक्त नहीं होता तो किसी की जिंदगी में मौका नहीं होता , किसी का लाइफ पार्टनर ऐसा नहीं होता बहुत सारे कारण हो सकते हैं । और जब किसी लड़की या औरत को दो-चार दिन तक सिर्फ चुदना ही पड़े , सिर्फ नंगी होकर किसी से लिपटना पड़े और दिल खोलकर चुदाई करें लगातार जब तक उसका दिल ना भर जाए । बस किसी के नीचे टांगे फैलाए पड़ी रहे या किसी की गोद में बैठकर उसके खड़े लोड़े पर बैठी रहे और घंटो बातें करें । इन पलों की तमन्ना दुनिया की हर लड़की या औरत करती है । यह सब बताने का मेरा इतना ही मतलब था कि जब लगातार दो-चार दिन से चुदाई की चुदाई हो रही हो तो वह दिन ही किसी के लिए गोल्डन डे बन जाते हैं उसकी लाइफ के । और यही हो रहा था पूजा और उपासना के साथ । वह बस चुद रही थी खुलके। अपने बाप और ससुर के लौड़ों से खेल रही थी और चुतों में सोमनाथ और धर्मवीर का वीर्य इकट्ठा कर रही थी।





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जैसे ही धर्मवीर की नजर पूजा पर पड़ी उसकी आंखों में एक गुस्सा सा आ गया। वह गुस्सा के भाव इसलिए आए थे क्योंकि अभी वह अपने बेटे राकेश को याद कर रहा था और उसने उपासना से राकेश की शादी इसलिए की थी क्योंकि उपासना उसे बहुत ही सुशील संस्कारी और सुंदर लगी थी, लेकिन जो रंडीपना उन दोनों बहनों के अंदर था यह तो राकेश संभाल ही नहीं पाता । राकेश इतना तगड़ा तंदुरुस्त भी नहीं था की उपासना जैसी घोड़ी को अच्छे से ठोक पा । राकेश के पास इतना टाइम भी नहीं था कि वह उपासना की चूत में लंड बजाकर उसे ठंडी रख पाता । तो इसका मतलब मैंने राकेश के लिए एक सही जीवनसाथी नहीं चुनी थी मेरा बेटा राकेश उपासना के काबिल नहीं था या उपासना राकेश के काबिल नहीं थी । इन दोनों में से एक बात तो जरूर है ।

तभी वह पूजा को देखते-देखते सोचने लगा कि अकेली उपासना ही नहीं , उसकी बहन पूजा भी तो लोड़ा निचोड़ लेती है पूरा अपनी चूत में । ईसका मतलब गलती उपासना की भी नहीं थी क्योंकि हर औरत या लड़की जब जवान होती है तो उसकी चूत लंड मांगने लगती है । और मेरा बेटा उपासना की लंड की मांग को पूरा नहीं कर पा रहा था , तो इसका मतलब कमी उपासना बहू में नहीं मेरे बेटे राकेश में थी ।

यह सोचते ही धर्मवीर की आंखों में फिर से गुस्सा सा आ गया क्योंकि बेशक उपासना उसकी बहू हो लेकिन राकेश भी उसका बेटा था । अपनी उस उधेड़बुन के बाद आए गुस्से मैं राकेश ने अपने आप से कहा : मेरे बेटे में ही तो कमी थी अब इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उसके घर के हर मर्द में कमी हो। ऐसा बिल्कुल नहीं है और इस घर में भी मर्द हैं । और मर्द होने का एहसास कराना चाहिए तुम दोनों बहनों को । मैं बताऊंगा मर्द कैसे होते हैं । मैं बताऊंगा कि मर्द बाहर किसी के सामने बेशक तुम्हें अपने से ज्यादा इज्जत दे बेशक तुम्हें एक देवी की तरह तवज्जो दे, बेशक तुम्हारी गुलामी करें जैसे तुम कोई शहजादी हो , मर्द वो है जिसके संपर्क में आओ तो तुम्हारी चूत उसे देखकर कुलमुलाना शुरू करदे और वह तुम्हें शहजादी से रंडी तक का सफर कराए । तुम्हें देवी से एक गरम कुत्तिया तक का सफर तय करा दे तो समझो उससे ज्यादा प्यार करने वाला इंसान तुम्हें दुनिया में तो क्या अपने सपनों में भी नहीं मिल सकता । मेरा बेटा राकेश ऐसा नहीं था वह तो बस दिन में अपनी कंपनी के लिए भागदौड़ करता रहता था और रात में भी एक प्रोफेशनल इंसान की तरह आराम से एक दो बार तुम्हें चोदता था और फिर एक अच्छे पति की तरह सो जाता था । लेकिन तुम्हें ऐसा नहीं चाहिए था तुम्हें तो ऐसा चाहिए था कि जी भर के तुझे अपनी बाहों में और बड़ी धीमी धीमी आवाज में तुझसे खुल के तेरी चूत का हाल पूछता, तुझसे बहुत सारी प्यारी प्यारी बातें करने के बाद तुझे बिस्तर में गंदे तरीके से रौंद सकता हो , तुझे ढीली कर सकता चोद चोद कर । ऐसा ही चाहिए था ना तो मैं हूं वैसा और अब कमी की बात भी क्या है तुझे चुदाई की भूख थी मुझे समझ आ गया, लेकिन अपने बाप से ही चुद गई बहन की लोड़ी । इसे चुदाई की भूख नहीं इसे तो वेश्यावृत्ति , रंडीपना कहते हैं । अगर तुझ में चुदाई की आग होती तो तू दूसरी जगह चुदने जाती और अपनी चुदाई की आग को शांत करती लेकिन बहन की लोड़ी तूने रिश्तों तक का ख्याल नही किया । एक बार चुदकर तो 2 दिन तक लंगड़ाई थी फिर भी तुझे अपने सगे बाप के लंड की जरूरत पड़ गई , अपने बाप के लंड के नीचे ही लेट गई मतलब उसका यही हुआ कि तुझे एक तगड़ा तंदुरुस्त लंड नहीं चाहिए तुझे तो अपनी चूत में हर आता जाता लंड चाहिए लेकिन मैं ऐसा नहीं होने दूंगा । मेरे इस संस्कार भरे घर मैं जो तुम दोनों बहनों ने आग लगाई है यह मैं कभी नहीं भूल सकता । मेरे घर में तो इतनी गंदी सोच तक भी नहीं थी बड़ा प्यारा परिवार था मेरा, लेकिन जब तू लंड की भूख में अपने पति से फिर उसके बाप से और फिर अपने बाप से चुद सकती है तो इसकी क्या गारंटी है किसी चौथे से तू नहीं चुदेगी । ऐसा सोच कर धर्मवीर की आंखें लाल हो गई और वह कसरत करने चला गया ।





धर्मवीर जैसे ही कमरे से गेट बंद करके निकला तो गेट बंद होने की आवाज से पूजा की आंखें खुल गई उसने अपनी आंखें अपने हाथों से मलते हुए अपनी गर्दन घुमाई तो देखा धर्मवीर जा चुका था पूजा सोचने लगी पता नहीं मौसा जी सुबह-सुबह कहां चले गए इतनी सुबह तो नहीं उठते हैं । हो सकता है वॉशरूम गए हो टॉयलेट करने गए हो । लेकिन तभी उसकी नजर टेबल पर पड़ी एक फाइल पर गई जो बैड के बिल्कुल आगे रखी थी ।

जिसका मतलब बिल्कुल साफ था कि धर्मवीर अभी उसे पढ़कर गया था पता नहीं पूजा के मन में क्या आया अचानक उसने वह फाइल उठाई और जैसे ही उसने देखा कि करोड़ों का कॉन्ट्रैक्ट मिल गया है कंपनी को । उसकी आंखों से नींद एकदम गायब हो गई वह खुशी से खड़ी हुई और जल्दी एक जींस टॉप पहनकर उपासना के कमरे की तरफ दौड़ी । लेकिन उपासना और सोमनाथ अभी नहीं उठे थे उनका गेट अंदर से लॉक था ।

एक सेकेंड के लिए तो पूजा रुकी लेकिन उसके मन में फिर पता नहीं क्या आया उसने गेट खटखटा दिया : दीदी दीदी गेट खोलो ।





उपासना की आंखें खुली इतनी सुबह सुबह उसकी छोटी बहन क्यों चिल्ला रही है गेट पर । यह सोचते हुए उपासना उठी उसने भी जल्दी से कपड़े पहने और एक नजर बेड की तरफ डाली तो शर्मा गई क्योंकि उसका बाप सोमनाथ बिल्कुल मादरजात नंगा सो रहा था और उसका काला लंड भी सोया हुआ लटक रहा था । यह देखकर उपासना ने जल्दी से एक चादर ली और सोमनाथ के ऊपर डाल दी और दरवाजा खोल दिया ।

सामने अपनी छोटी बहन पूजा को देखकर उपासना ने पूछा।

उपासना : तुझे क्या हुआ सुबह-सुबह इतनी खुश है पूजा दीदी हमारी कंपनी ने करोड़ों का कॉन्ट्रैक्ट लिया है ।

सुनकर उपासना भी खुश हुई क्योंकि काम के प्रति उसकी भी लग्न थी । यह सुनकर उपासना ने पूजा से कहा ।

उपासना : अच्छा तो फिर तो आज बड़ा खुशी का दिन है लेकिन पापा जी तो अभी सोए हुए हैं ।

पूजा : हां दीदी लेकिन मौसा जी अभी-अभी उठ कर नीचे गए हैं । उपासना चल ठीक है तो आज हम ही नाश्ता बनाते हैं सुबह का अपने हाथों से ।

पूजा बोली : हां दीदी और पापा जी को भी उठा दो या मैं ही उठा देती हूं । यह कहकर जैसे ही पूजा बेड की तरफ चली सभी उपासना ने पूजा का हाथ पकड़ लिया और बोली ।

उपासना : मैं उठा देती हूं ना चल तू किचन में । मैं आती हूं ।

यह पूजा को कुछ अटपटा लगा पूजा बोली ।

पूजा : क्या हुआ दीदी आप उठाओ या मैं उठाऊं आखिर हम दोनो ही उनकी बेटियां है । बात तो एक ही है और उठाना क्या लो मैं अभी आवाज लगा देती हूं , आवाज से उठ जाएंगे ।

ऐसा कह कर पूजा ने जोर से आवाज लगाई पापा जी पापाजी । यह सुनकर उपासना थोड़ी शर्मा गई । लेकिन फिर भी अपनी सफाई दिखाने के लिए अपनी चतुराई दिखाने के लिए या अपना त्रिया चरित्र दिखाने के लिए बोली ।

पूजा : पूजा क्या बच्चों की तरह करती है । और एक 2 मिनट सो लेंगे या नाश्ता करके उठा लेंगे । तब तक पापा जी आ जाएंगे चल चलते हैं ।

उपासना जैसे ही पूजा का हाथ पकड़ कर किचन की तरफ चलने लगी तो पूजा को एक जिद्दी सी चढ़ गई । बोली ।

पूजा : दीदी अब तो मैं ही उठाऊंगी। यह भी कोई बात हुई क्या । पापा जी को जगाने नहीं दे रही हो सब तो जाग गए हैं । दिन में कर लेंगे नींद पूरी । मैं जगा देती हूं जब तक हम नाश्ता तैयार करेंगे तब तक फ्रेश हो लेंगे ।

ऐसा कहकर पूजा मैं बैड के पास जाकर जैसे ही चादर खींचते हुए चिल्लाई पापा जी ।

जैसे ही चादर अलग हुई तो बेड पर सोमनाथ बिल्कुल नंगा सो रहा था और नीचे बिछी सफेद बेडशीट पर जगह जगह गंदे धब्बे बने हुए थे । जो इस बात की ओर साफ साफ इशारा कर रहे थे की रात में उसके नंगे बाप ने अपनी बड़ी बेटी उपासना को बड़े गंदे तरीके से रौंदा है बिस्तर में और वही बेटी उपासना पूरी रात उस लंड से चुदी है ।

यह देखते ही पूजा ने धीरे से मुस्कुराते हुए उपासना की तरफ देखा और उसने अपनी नजरें झुका लीं ।

अगले ही पल अपनी आंखें नचाते हुए पूजा से उपासना बोली ।

उपासना : तू ना बिल्कुल बदमाश हो गई है । तुझे मना किया था ना लेकिन नहीं मानी ।

पूजा ने मुस्कुराते हुए चादर उठाई और दोबारा से सोमनाथ के ऊपर डाल दी और धीरे से उपासना के पास आकर बोली ।

पूजा : तो दीदी बता भी तो सकती थी ना कि अपने नंगे बाप से लिपट कर सो रही थी ।

उपासना : अच्छा तू तो ऐसे कह रही है जैसे तुझे पता ही नहीं हो कि पापा यहां क्यों सोए हैं । और तू क्यों धर्मवीर पापा जी के पास रहती है दिन रात ।

इस बात पर पूजा भी थोड़ी सी शर्मा गई और बोली।

पूजा: दिन रात कहां दीदी कभी-कभी तो पापा जी के साथ भी रहती हूं कमरे में । मानती हूं कि मैं धर्मवीर मौसा जी के साथ ही सोती हूं रात में लेकिन दिन में तो कभी भी पापा जी भी बुला लेते हैं कमरे में।

लेकिन अपनी उपासना दीदी को मैं अकेला नहीं रहने देती मैं उनके पास धर्मवीर मौसा जी को भेज देती हूं , जो कमरे में अपनी बहू उपासना को नंगा करके उनके साथ खूब टाइम स्पेंड करते हैं ।

इस बात से उपासना थोड़ी और ज्यादा शर्मा लेकिन फिर भी वह उसकी छोटी बहन थी जो उसे खुले माहौल का एहसास करा रही थी। अब उपासना भी थोड़ी-थोड़ी गर्म होने लगी थी उपासना बोली।

उपासना : हां चल अब ज्यादा जब बातें मत बना किचन में चलते हैं वरना फिर कोई ना कोई बुला लेगा तुझे मुझे नंगी करने के लिए ।

ऐसा बोलकर उपासना पूजा ने एक दूसरे की आंखों में देखा और हंसते हुए किचन की तरफ चल दी ।





उधर दूसरी तरफ शालिनी और उपासना को जगाने के लिए जैसे ही बलवीर उनकी तरफ मुड़ा तो दोनों बुआ भतीजी एक दूसरे की तरफ मुंह करके सो रही थी । बलवीर जोकि उन दोनो की चूतों को चैक कर चुका था उंगली से वो उठा और उन्हें सोती हुई देखकर बलवीर की आंखें में वासना नाचने लगी , और वासना नाचती भी क्यों ना दोनों की चूतों की महक जो ले चुका था बलवीर।

बलवीर दोनों को बड़ी गौर से देख रहा था आरती के शरीर में थोड़ा भारीपन ज्यादा था लेकिन इसका मतलब यह नहीं था कि शालिनी आरती के सामने पतली लगती थी ।

शालिनी भी किसी मस्त हथनी की तरह अपनी गांड निकाले सो रही थी ।

बलवीर धीरे-धीरे आरती और शालिनी के पास गया । और झुक कर अपना मुंह आरती की गांड के पास लाया । कपड़ों में से ही सही लेकिन थोड़ी-थोड़ी चूत की महक बलवीर को आ रही थी बलवीर ने और हल्की सी नाक अंदर की तरफ घुसाई और एक गहरी सांस खींची उसके अंदर अपनी गदराई बहन की चूत की खुशबू महसूस होते हैं बलवीर के लिए कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था। फिर वह घूम कर शालिनी की तरफ गया हर इसी तरह से अपने नाक शालिनी की गांड पर लगा कर मुंह जांघों के बीच में डालकर एक गहरी सांस खींची दोनों की चूतों की खुशबू बिल्कुल एक जैसी तो नहीं थी लेकिन मिली जुली थी । यह खुशबू वैसे ही नहीं थी जैसी किसी लड़की की चूत से आती है यह खुशबू तो उसी चूत से आती है जो लोड़े की याद में पानी छोड़ती रहती हो । जिससे अपनी जवानी संभाली नहीं जा रही है । उन्हीं चूतों से ऐसी मादक खुशबू आती है जो नाक में भरते ही अंदर तक झुर्झुरी पैदा कर देती है ।





(दोस्तों ऐसा सबके साथ होता है । क्योंकि सबके घर में मां बहन बेटी होती हैं । कोई कोई तो तीन बहनों में अकेला भाई होता है । हर घर में लड़की होती है और हर जवान लड़की में लंड की भूख भी होती है । तो ये विचार दिमाग में आ ही जाते हैं । जब भी घर में अपनी बहन की मटकती गांड को देखते हैं तो चोर नज़रों से उसके पिछवाड़े को हर कोई देखता है । लड़कियों का तो मुझे पता नहीं क्या सोचती हैं क्या नहीं लेकिन लड़के जब भी अपने घर में अपनी बहन का भारी पिछवाड़ा देखते है तो उनके मन में ये विचार जरूर आता है कि बहन की शादी कर देनी चाहिए वो शादी लायक हो गई । उसकी मटकते चूतड़ों को देखकर विचार आता है कि ये भी लंड लेने लायक हो गई है पूरा ले जायेगी एक बार में लेकिन वो ये नहीं जानते हैं कि उनकी बहन पता नही कितनी बार चुद चुकी है । जो इसका पिछवाड़ा इतना भारी है ये अपने आप नही हुआ किसी ने तबियत से चूत फाड़ी है उसकी । जब घर में कोई गदराई हुई घोड़ी सो रही होती है और नजर पड़ जाए तो एकबार जी भरके देखने से कोई नहीं चूकता । कोई बाप जब बेटी का भारी पिछवाड़ा देखता है तो वो भी सोचता है कि उसकी बेटी की गांड बाहर क्यों निकलने लगी लेकिन फिर मन में विचार आता है नही नही वो बेटी है मेरी । ये विचार आते ही भारतीय लोगो की सारी वासना की मां चुद जाती है क्योंकि जब मन में आए कि बेटी है मेरी तो चाहे उसकी बेटी रण्डी ही क्यों ना हो लेकिन उसे उसमे वही हंसती खेलती नटखट बच्ची ही दिखेगी लेकिन वो ये नहीं जानता कि उसकी बेटी रोज अपनी चूत होटल में फड़वाके आती है और रात भर किसी से जानू जानू करके उसे चुम्मियां देती है । आखिर हम भारतीय जो ठहरे घर में रण्डी बहन भी हो तब भी ही उसमे एक प्यारी सी ही वक्त लड़ने वाली बहन दिखती है ऊपर से घरवालों के डायलॉग ये दूसरे घर चली जायेगी फिर किससे लड़ेगा ये हमेशा तेरे पास नही बैठी रहेगी । शायद यही बात हम भारतीयों को सबसे अलग बनाती है । चलो रिश्तों पर बहुत ज्ञान पेल लिया अब कहानी पर चलते हैं)

वैसा ही हाल बलवीर का था लेकिन बलवीर को अचानक याद आया कि उसे तो तुरंत निकलना है ।

उसने धीरे से शालिनी का हाथ पकड़ा और उसे हिलाने लगा शालिनी की आंख खुल गई शालिनी ने जैसे ही बलवीर को अपने सामने खड़ा पाया तो एक साथ उसकी आंखों में गुस्सा और शर्म के मिले-जुले भाव आ गए पहले दिन को याद करके और उसने अपनी आंखें झुका ली।

बलवीर : हमें अभी निकलना है । धर्मवीर भैया का फोन आया है अभी जरूरी काम से जाना होगा ।

शालिनी यह सुनकर आरती को जगाने के लिए जैसे ही अपना हाथ बढ़ाने लगी तुरंत बलबीर ने उसका हाथ रोक दिया ।

शालिनी कुछ समझ नहीं पाई और बलबीर ने उसके कान के पास अपने होंठ लाकर धीरे से उसके कान में कहा ।

बलवीर : घर चलते तेरी कसी हुई चूत में अपना लंड डालकर उसे फाडूंगा मैं ।

यह सुनते ही शालिनी शरीर में झुनझुनी हो गई और उसने गुस्से से अपने चाचा को घूरते हुए आरती को जगा दिया ।

आरती भी बलवीर को आगे देखकर पहले तो चौकी फिर मामला जब समझ आया वह भी सामान्य होकर जल्दी से तैयार हो गई और चारों निकल लिए घर की तरफ ।

दूसरी तरफ उपासना और पूजा नाश्ता तैयार कर चुकी थी और काफी खुश नजर आ रही थी लेकिन इन सबके खुश होते हुए किसी को धर्मवीर का गुस्सा दिखाई नहीं दे रहा था ।

किसी को यह अंदाजा नहीं था की धर्मवीर अभी कितने गुस्से में बाहर गया है।

बाहर बैठा हुआ धर्मवीर बस यही सोच रहा था कि ये लंड भी क्या चीज है अगर औरत को दीवानी बना दे तो फिर वह औरत नहीं कुतिया बन जाती है और यही कुतीयापना मेरी बहू कर रही है अपनी बहन के साथ मिलकर ।

दोस्तों धर्मवीर को भी अंदाजा नहीं था की वही रंडीपना उसकी बहन आरती और बेटी शालिनी में भी है ।

धर्मवीर तो बस गुस्से में था अपने बेटे राकेश को याद करके और अपनी बहू उपासना के अंदर लंड की भूख देखकर ।

पूजा और उपासना नाश्ता लगाकर एक दूसरे से बात करने लगे तभी उपासना उठकर अपने कमरे की तरफ चली गई अपने बाप सोमनाथ को जगाने के लिए। जैसे ही वह कमरे में पहुंची तो सोमनाथ अभी भी सोया पड़ा था ।

उपासना ने सोमनाथ को जगाया और बताया कि आज कितना खुशी का दिन है उसकी कंपनी को तरक्की मिली है ।

उधर धर्मवीर का गुस्सा हर पल बढ़ता जा रहा था।

धरमवीर घर की तरफ आया और घर के मेन गेट पर आकर उसने हॉल में शालिनी को बैठे देखा ।

जैसे ही गेट पर लॉक लगाया धर्मवीर ने तो उसकी आवाज से पूजा ने गेट की तरफ देखा तो धर्मवीर खड़ा था

पूजा को कुछ पता नहीं था कि धर्मवीर कितना गुस्से में है । वह तो बस यही सोच रही थी कि रात भर चोदकर सुबह फ्रेश मूड से उठकर बाहर गया है ।

धर्मवीर गेट पर खड़ा होकर पूजा को घूरने लगा । अपनी तरफ इस तरह घूरता देख कर पूजा कुछ असामान्य महसूस करने लगी तो उसने नजरें झुका कर शर्मा कर धीरे से कहा ।

पूजा : मौसा जी गेट पर क्यों खड़े हो अंदर आजाइए ना।

लेकिन धर्मवीर पर इसका कुछ असर नहीं हुआ वह तो बस घूरे जा रहा था पूजा को ।

पूजा खड़ी होकर टेबल पर नाश्ते का सामान लगाने लगी और बोलने लगी ।

पूजा : मौसाजी दीदी और पापा जी भी आने वाले हैं, आप भी आ जाइए नाश्ता कर लेते हैं ।

ऐसा कहकर उसने फिर एक बार धर्मवीर की तरफ देखा जो अभी भी उसे घूर रहा था और उसने फिर मुस्कुरा कर अपनी नजर नीचे झुका ली ।

धर्मवीर उसे घूरते हुए अपनी शर्ट उतारने लगा शर्ट के साथ-साथ उसने अपनी बनियान भी उतार दी ।

नीचे धर्मवीर ने एक लूंगी पहन रखी थी और वह घूरे जा रहा था पूजा को ।

जब पूजा ने देखा कि धर्म गेट पर नंगा हो रहा है तो उस के शरीर में एक झुर्झुरी सी हो गई और दोस्तों पूजा के शरीर में ही क्या दुनिया की हर लड़की या हर औरत जिसे पता हो कि उसे चोदने वाला यार उसके दरवाजे पर खड़ा है उसके सामने तो उसके दिल में जो फीलिंग होती है वह एक लड़की ही समझ सकती है । वह शर्मा रही होती है और साथ में बौखला रही होती है एक लंड लेने के लिए वह मुस्कुरा रही होती है , और चूत को तैयार कर रही होती है एक लंड खाने के लिए ।

यही हाल कुछ पूजा का था वह कभी मुस्कुराती तो कभी शर्मा कर नजरें झुका लेती , कभी नजरें मिलाती तो कभी धर्मवीर के तगड़े शरीर को देखने लगती जो हट्टा कट्टा था । पहलवानों से भी ज्यादा सॉलिड शरीर था धर्मवीर का । पूजा कभी मुस्कुरा कर अपनी उंगलियों से अपने बालों को संभालते हुए खाना लगा रही थी । धर्मवीर की आंखें लाल होने लगी और वजह थी पूजा की गांड जो सच में इतनी मेंटेन थी कि मन करता उसकी गांड पर चढ़े ही रहो ।





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धर्मवीर पूजा के पास आने लगा जैसे-जैसे वे करीब आने लगा पूजा की धड़कन बढ़ने लगी ।

कोई भी जब नंगा मर्द सिर्फ लुंगी पहने इस तरह किसी लड़की की तरफ या किसी औरत की तरफ बढ़ेगा तो जाहिर सी बात है उसकी चूत ठंडी करके ही वापस जाएगा । और अब धर्मवीर बिल्कुल करीब आ चुका था पूजा के । पूजा ने अपने नजरें झुका ली और धीरे से बोली ।

पूजा : मौसा जी कमरे में चलते हैं ।

धर्मवीर कुछ नहीं बोला बस ऐसे ही घूरता रहा कभी उसकी मोटी मोटी जांघों को तो कभी इसके मोटे-मोटे चूचों को, कभी उसके होठों को जिन पर भी वह अपना लंड रखने वाला था ।

धर्मवीर पूजा के सामने खड़ा था।

धर्मवीर ने पूजा के चेहरे को घूरा पूजा ने अपनी नजरें झुका ली । धर्मवीर ने पूजा के चेहरे पर थूक दिया ।

चेहरे पर धर्मवीर का थूक पड़ते ही पूजा पानी पानी हो गई ।





पूजा बोली : मौसा जी चलिए ना कमरे में चलते हैं ।

धर्मवीर ने पूजा के मुंह पर थप्पड़ मारा पूजा का मुंह खुल गया ।

धर्मवीर ने तुरंत उसकी गर्दन पकड़ कर उसके खुले मुंह में थूक दिया। पूजा के मुंह में अपना थूक डालने के बाद धर्मवीर ने अपनी लूंगी खोल दी ।

फनफनाता हुआ लौड़ा हवा में लहराने लगा । जैसा कि आप जानते हैं धर्मवीर का लंड एक लंड नहीं पूरा हल्लबी लौड़ा था लेकिन यह लोड़ा भी झेल चुकी थी पूजा ।

धर्मवीर ने पूजा के बालों को पकड़ा और लौड़े को मुंह के सामने कर दिया । पूजा को कुछ समझ नहीं आया तो उसने अपनी नजरें उठाकर धर्मवीर के चेहरे की तरफ देखा । लेकिन धर्मवीर लगातार उसे घूर रहा था पूजा ने फिर से अपनी नजरें झुका ली और लंड के स्वागत के लिए अपना मुंह खोल लिया ।

मुंह खुलते ही धर्मवीर ने एक ही बार में पूरा झटका लगाकर लंड घुसाने की कोशिश की लेकिन आधा लंड ही पूजा के मुंह में जा सका और पूजा गूं_गूं_गूं करने लगी । धर्मवीर को पता नहीं क्या सूझा उसने पूजा के सर में 2, 3 घूंसे मारे और ठूंस दिया पूरा लंड उसके हलक तक । पूजा की तो आंखें बाहर आ गई । आंखों से आंसू आने लगे , उसकी सांसे तक रुकने लगी थी ।





एक मिनट तक लंड को हलक में रखने के बाद तो पूजा झटपटाने लगी अपने हाथ पैर इधर-उधर झटकने लगी, तब जाकर धर्मवीर ने लंड मुंह से बाहर निकाला ।

लोड़ा बाहर आते ही पूजा के मुंह से ढेर सारा थूक बाहर आया। उसकी खांसी रुकने का नाम नहीं ले रही थी वह बस खांसती जा रही थी लंबी लंबी सांसे लेते हुए । कुछ देर में नॉर्मल होते हुए धीरे से बोली ।

पूजा : बोली मौसा जी आप जानवर हैं क्या ।

धर्मवीर ने जब यह सुना तो उसने दोबारा से पूजा के बालों को पकड़ा और लंड से उसके गालों को पीटने लगा । गालों को लंड से पीटते हुए बोला।





धर्मवीर : तुम दोनों बहन अव्वल दर्जे की रंडी हो । मेरा लंड हर औरत के बस की बात नहीं है लेकिन तू मेरे लोड़े से पूरी रात चुदी है तो सोच ले तू कितनी गर्म है । पूरा लंड तूने एक बार में लील लिया तो सोच ले तू आने वाले समय में कितनी बड़ी मर्दखोर रंडी बनेगी और ये मैं नहीं कह रहा । यह सब तेरे मोटी चूची , बाहर को निकलती हुई चौड़ी गांड और मोटी मोटी जांघें कह रही हैं कि तुझे लंड चाहिए सिर्फ लंड । ले कुतिया खेल मेरे लंड से ।



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ऐसा कहकर धर्मवीर ने अपने लंड को उसके मुंह के चारों तरफ घुमाया , कभी उसके गालों पर लंड मारता तो कभी उसके होठों पर , तो कभी उसके माथे पर लंड रख देता ।





धर्मवीर ने फिर मुंह खोलने के लिए कहा पूजा जानती थी कि धर्मवीर का लंड मुंह के मुकाबले ज्यादा बड़ा है। लेकिन फिर भी उसने डरते डरते मुंह खोला ।

धर्मवीर ने फिर से उसके मुंह में लंड डाल कर अपने चूतड़ों को आगे धकेला । पूरा लंड फिर उसके मुंह में चला गया । पूरा लंड मुंह में समाने के बाद धर्मवीर धीरे-धीरे लंड को अंदर-बाहर करने लगा।

जब धर्मवीर लंड बाहर लाता हूं तो पूजा को सांस लेने का मौका मिलता । लेकिन यह ज्यादा देर नहीं चलने वाला था क्योंकि अपनी रफ्तार बढ़ाने लगा था धर्मवीर ।

धर्मवीर ने पूजा के सर को पकड़ा और पूरी जान से लोड़े को अंदर-बाहर करने लगा । पूरा जड़ तक लंड उसके मुंह में ठूंसकर बाहर निकाल लेता । उसके मुंह की ताबड़तोड़ चुदाई करने लगा । पूजा के मुंह से बस दो ही चीज है बाहर आ रही थी घोंघोंघों घप्प घाप्प की आवाज और दूसरा उसके थूक की लार बह रही थी ।



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लगातार मुंह में लौड़ा अंदर बाहर ले रही थी पूजा । वह इसी रफ्तार से चोदने के बाद धर्मवीर ने अचानक से लंड मुंह से बाहर निकाला और उसके बालों को खींच कर पकड़ा । पूजा का मुंह उपर उठ गया धर्मवीर ने अपने लंड हिलाते हुए तो झटके से उसके मुंह में लंड डाल दिया।

आधा लंड बड़े आराम से ले गई पूजा लेकिन आधा अभी बाकी था ।

धर्मवीर ने फिर से उसके बालों को पकड़ा और जान लगाई लेकिन फिर भी एक तिहाई लंड ही मुंह में जा सका । उसके गरम-गरम मुंह में अपना लौड़ा डालने के बाद अनियंत्रित हो चुका था धर्मवीर । उसकी आंखें बासना में लाल हो चुकी थी ।

धर्मवीर ने दोबारा से पूजा के सर में 2 , 3 घूंसे मारे और पूरा लंड ठूंस दिया उसके मुंह में । फिर से पूजा की आंखें बाहर आ गई धर्मवीर की जांघों पर थप्पड़ मारने लगी पूजा लेकिन धर्मवीर ने बुरी तरह से पूरी ताकत से उसके सर को दबोच रखा था । जब पूजा के लिए बर्दाश्त से बाहर हुआ तो वह अपने हाथ पैरों को पटकने लगी । अचानक उसका पैर एक टेबल पर लगा । मेज पर रखा हुआ गुलदस्ता फर्श पर गिरा पूरे घर में आवाज गूंजी । यह आवाज सुनकर सोमनाथ और उपासना बाहर आए तो उनकी आंखें फटी की फटी रह गई ।

धर्मवीर ने पूरी ताकत से अपना लंड पूजा के मुंह में ठूंस रखा था और यह बात अच्छे से जानती थी उपासना कि धर्मवीर का लोड़ा मुंह में लेना हर औरत के बस की बात नहीं है और पूजा तो फिर भी उसकी छोटी बहन थी ।

सोमनाथ और उपासना लगभग भागते हुए उनके पास आए ।

सोमनाथ : समधी जी यह क्या कर रहे हैं आप।

उपासना : देखो ना पापा पूजा की हालत।

धर्मवीर गुर्राते हुए बोला : पूरी रात चुदी है ये । यह बहुत गर्म है साली ।

जब पूजा की यह हालत देखी तो सोमनाथ और उपासना ने धर्मवीर की बाजुओं को पकड़कर खींचना शुरू किया।

यह देखकर धर्मवीर को गुस्सा आया । उसने एक साथ पूजा के बालों को पकड़कर खींचा और लोड़ा मुंह से बाहर कर दिया लेकिन तभी उसने उपासना के बालों को खींचकर पकड़ा और लोड़े के पास उसका मुंह लाया । ।

उपासना का मुंह तो हैरानी से खुला हुआ था और इसी बात का फायदा उठाते हुए धर्मवीर ने पूरा लंड उसके मुंह में उतार दिया ।

उपासना को इसकी उम्मीद भी नहीं थी कि अपने बाप के सामने ही उसका ससुर उसके मुंह में लंड डाल देगा ।

सोचकर देखिए कि ये एक लड़की के लिए कैसा अनुभव होगा । अपनी ससुराल में अपने बाप के सामने उसके ससुर का लंड उसके मुंह में हो ।





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उपासना अभी समझने की कोशिश कर रही थी कि यह हो क्या रहा है कि तभी उसके मुंह में लंड का दबाव बढ़ाते हुए धर्मवीर ने उसके सर में भी दो-तीन घूंसे मुक्के जड़ दिए और उतार दिया लंड अपनी बहु के हलक तक ।

वही हालत उपासना की भी होने लगी उसका लौड़ा लेना इतनी आसान बात नहीं थी लेकिन उपासना फिर भी प्रयास करती हुई उसके लंड को मुंह में लिए बैठी रही ।

एक मिनट हो गई उधर पूजा की खांसी बंद नहीं हो रही थी । पूजा के मुंह से थूक की लार लगातार बहे जा रही थी और वह खांसती जा रही थी ।

सोमनाथ उसे अपने सीने से लगा कर रिलैक्स कराने की कोशिश कर रहा था ।

उधर धर्मवीर ने भी लंड को झटके देना शुरू किया और अपनी रफ्तार इतनी बढ़ा दी कि जैसे उसकी चूत फाड़ रहा हो । यह देखकर पूजा और सोमनाथ की आंखे फटी जा रही थी । सोमनाथ के सामने ही उसकी बड़ी बेटी के मुंह में लंड बजाया जा रहा था ।



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उपासना के मुंह को इतनी रफ्तार से चोदने के बाद जैसे ही धर्मवीर झड़ने लगा उसने तुरंत लंड बाहर निकाल लिया और उपासना के मुंह पर अपना वीर्य उड़ेलने लगा ।

उपासना का पूरा मुंह उसके वीर्य से सन गया ।





तभी बाहर से गाड़ी के हॉर्न की आवाज आई । सभी समझ गए कि बलवीर शालिनी और आरती आगये हैं ।।

**** दोस्तों आगे कहानी जारी रहेगी ****
 
अपडेट 20

चलो दोस्तो आगे की कहानी की शुरुआत फिर एक शायरी के साथ करते हैं



खुदा जाने हमारे इश्क की दुनिया कहाँ तक है,

खुदा जाने हमारे इश्क की दुनिया कहाँ तक है


वो वही तक देख सकता है नजर जिसकी जहां तक है ।

******

सोमनाथ जी फर्श पर से उठकर सर झुकाए हुए बैड पर बैठ गए ।

धर्मवीर जोर से हसने लगा । यह देखकर सोमनाथ हैरान होते हुए धर्मवीर का मुह ताकते हुए कहने लगा ।

सोमनाथ- समधीजी जी , आपको अभी भी हँसी आरही है ।

धर्मवीर - अरे मैं हालातों पर नही बल्कि तुम्हारे खड़े लंड पर हसा हूं , तुम्हारी बेटी तो खड़े लंड पर लात मार गयी भईया । hahahaha।

सोमनाथ - उड़ा लीजिये आप भी मेरी हंसी । क्योंकि आप तो पहले ही उपासना से मजे ले चुके है । अगर उसने आपके साथ ऐसा किया होता तो पता चलता ।

धर्मवीर - हंसी तुम्हारी नही उड़ा रहा हूँ मेरे दोस्त । और मैं यही समझने की कोशिस कर रहा हूँ कि जब हमने उनकी बातें सुनी थी तब तो वो चुदवाने के लिए मरी जा रही थीं दोनों फिर अचानक ये क्या हुआ ।

उधर उपासना जैसे ही अपने रूम में पहुंची तो रोने लगी । अभी तक पूजा को भी कुछ समझ नही आरहा था कि दीदी को अचानक क्या हुआ ।

पूजा - दीदी आप अचानक इस तरह रोने क्यों लग गयी । मैं कुछ समझी नही ।

उपासना ने अपना मोबाइल पूजा को दिया पूजा ने देखा तो उसमें शालीनी का मैसेज था - Daddy Rakesh bhaiya ne atmahatya kar li hai . Or ek note likhkar gye h vo .

यह पढ़कर पूजा के सर का आसमान घूम गया । नही जीजू कहते हुए वो भी रोने लगी ।

तभी 10 मिनट बाद धर्मवीर और सोमनाथ नीचे आये तो दोनों को रोता देखकर वो भागकर दोनों के पास आये ।

धर्मवीर सर झुकाकर - बेटा यदि हमसे और तुम्हारे पापा से इतनी बड़ी गलती हो गयी है तो हमे मांफ कर दो ।

तभी पूजा ने धर्मवीर को मोबाइल पकड़ाया ।

और जैसे ही धर्मवीर ने मैसेज पढ़ा धर्मवीर को सदमा आगया ।

घर मे बिल्कुल शांति हो गयी जहाँ अभी तक मादक सिसकारियों की आवाज आरही थी याब वहां सिर्फ रोने पीटने की आवाजें आने लगी ।

धर्मवीर को हॉस्पिटल ले जाया गया ।

सुबह के 7 बज रहे थे । धर्मवीर जी को होश आ चुका था । धर्मवीर जी के पास इस वक्त उपासना पूजा बैठे हुए थे ।

तभी रूम में डॉक्टर की एंट्री हुई ।

डॉक्टर - सर आप इस वक्त बिल्कुल स्वस्थ हो । बस आपको किसी बात की चिंता या कोई भी ऐसी बात नही सोचनी है जिससे आपके दिमाग पर जोर पड़े ।

धर्मवीर - रा-राकेश मेरा बेटा कहाँ है ?

उपासना डॉक्टर के साथ बाहर जाकर बात करने लगी ।

और 1 घंटे बाद जब धर्मवीर की आंखे खुली तो इस वक्त वो अपने घर मे था ।

तभी शालीनी की एंट्री होती है । शालीनी आते ही उपासना के गले लगकर रोने लगी ।

शालीनी रोते हुए - भाभी ये क्या हुआ ये क्या किया भैया ने ।

उपासना की आंखों से सिर्फ आंसू बह रहे थे ।

तभी रूम में एक नए किरदार की एंट्री होती है जिनका नाम बलवीर है । ये बलवीर भाई है धर्मवीर जी के जो अमेरिका में सेटल है अपने परिवार के साथ।

इनकी उम्र अभी 45 साल है । अमेरिका में रहते है लेकिन फिर भी दिल है इनका हिंदुस्तानी ।

पूरे सात फीट इनकी हाइट है । तगड़े तंदरुस्त है पर रंग से काले है । कोई भी देखकर इन्हें इंडियन नही अफ्रीकन ही कहेगा । इनकी कद काठी अनुसार ही इनके लंड का साइज भी 14 इंच है जिनकी मोटाई लगभग हाथ की कलाई के बराबर होगी । इनकी एक ही खासियत है कि जिसे भी आजतक इन्होंने चोदा है फिर उसे किसी और के चोदने लायक नही छोड़ा , मतलब सीधा और साफ है जिसे भी ये एकबार चोद लेते है उसकी चूत को भोसड़ा बना देते है । रहम नाम की चीज इनके अंदर है ही नही । अब आगे पढ़िए ।





उपासना ने तुरंत पर्दा किया । शालीनी चाचाजी के गले लगकर रोने लगी।

बलवीर - नही बेटा शायद हमारी किस्मत में ये ही लिखा था । कोई ऐसी बात जरूर थी जिसने हमारे बेटे को ऐसा करने पर मजबूर कर दिया ।

तभी पूजा पानी लेकर आ चुकी थी पानी की प्यास किसको थी कुछ देर बैठने के बाद बलवीर जी अपने भाई धर्मवीर के पास गए और गले से लिपट कर रो पड़े।

बलबीर ने मन ही मन सोचा यदि मैं ही भैया को नहीं संभालूंगा तो भैया को कौन संभालेगा ऐसा सोचकर उन्होंने अपने आपको हिम्मत दी और अपने भाई धर्मवीर का हाथ अपने हाथों में लेकर उन्हें ढांढस बंधाया ।

तभी घर में आरती की एंट्री होती है आरती की आंखों से बहते आंसू को देखकर बलबीर ने अपनी बहन को गले से लगाया और तीनों बहन भाई कुछ देर की खामोशी के बाद एक दूसरे की आंखों में देखकर एक दूसरे को हिम्मत देने लगे ।

14 दिन बीत चुके थे घर में शांति का माहौल था

राकेश की तेहरवीं भी हो चुकी थी ।

उधर जापान में पुलिस वालों को नदी में एक बॉडी तैरती हुई दिखाई दी ।उन्होंने जल्दी से उस बॉडी को पानी से निकाला बॉडी के पेट से खून निकल रहा था ।

उसे जल्दी से हॉस्पिटल ले जाया गया जहां जाकर पता चला कि इंसान के शरीर में चाकू से हमला हुआ है लेकिन दिल या फेफड़ों में कोई घाव नहीं है।

और अभी कोई कोई सांस ले रहा है।

पुलिस को उसकी जेब से उसका बटुआ मिला तो पता लगा कि वह राकेश नाम का कोई इंडियन है ।

राकेश को हॉस्पिटलाइज कर दिया गया जहां उसे अभी तक कोई होश नहीं था ।

ब्लड चढ़ाया गया शाम के वक्त राकेश को होश आया उसमें अब इतनी जान नहीं बची थी कि वह खड़ा हो सके।

उसके मुंह से बस इतना ही निकला - नहीं नहीं नहीं । बस ऐसा ही वह कह सका ।

दो-तीन दिन बीत गए जैसे-जैसे दिन बीत रहे थे राकेश की हालत में सुधार हो रहा था 4 दिन में राकेश अपना खाना खुद खाने लगा और आराम से उठने बैठने लगा इन 4 दिनों में राकेश के दिमाग में कोहराम मचा रहा।

कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ? क्यों उसकी ही बहन ने उसकी यह हालत करदी ।

5 दिन बीत चुके थे । हॉस्पिटल से राकेश को की छुट्टी कर दी गई लेकिन राकेश ने अभी तक अपने किसी भी मिलने वाले से संपर्क नहीं किया था।

उसने हॉस्पिटल में भुगतान किया और कुछ दिन जापान में ही रहने की ठानी उसने एक होटल में रूम लिया और वहीं पर सेटल होकर अपनी हालत सुधारने लगा ।

उधर 20 25 दिन के बाद अब धर्मवीर की हालत में काफी सुधार हो चुका था ।

धीरे-धीरे एक सपना समझकर अपने बेटे को भुलाने की कोशिश करने लगा था धर्मवीर ।

उपासना भी अपने आप को समझा रही थी और अपनी जिंदगी से समझौता कर रही थी।

बलवीर और आरती दिनभर धर्मवीर और उपासना को बिजी रखते जिससे की उन्हें याद ही ना आ सके ।

अब सब कुछ सामान्य होने लगा था।

अब उस घर में 7 लोग रहते थे धर्मवीर बलवीर सोमनाथ उपासना आरती शालिनी और पूजा ।

रात के 10:00 बज चुके थे सब डिनर कर चुके थे ।

धर्मवीर , बलवीर , सोमनाथ और आरती बैठे गपशप कर रहे थे ।

बलवीर अपने भाई धर्मवीर की बहुत ही ज्यादा शर्म करता था बहुत ज्यादा इज्जत करता था ।

बलबीर बोला - भैया जी मैं सोच रहा हूं कि काफी दिन हो गए हैं आपको कहीं घूम कर आना चाहिए ।

धर्मवीर - मैं तो यहां पर घूमता ही रहता हूं बलबीर एक काम करो तुम काफी सालों बाद इंडिया आए हो तुम घूम कर आओ ।

बलवीर - जी भैया जैसा आप कहें लेकिन मैं जानना चाहता हूं कि आप मुझे अकेले ही घूमने भेज रहे हैं या कोई मुझे गाइड करने वाला भी साथ है।

यह सुनकर धर्मवीर हंस पड़ा धर्मवीर बोला जिसे तुम ले जाना चाहो उन्हें अपने साथ ले जाओ ।

बलवीर पूछने लगा कि कोई है जो घूमना चाहता हो । वर्ल्ड टूर नहीं लेकिन इंडिया टूर तो जरूर ही घूम लेंगे ।

यह सुनते ही आरती खुश हो गई और एक साथ चहकते हुए बोली भैया आप चिंता क्यों करते हो मैं हूं ना । हम दोनों भाई बहन चलते हैं घूमने ।

तभी बलवीर ने शालीनी से भी पूछा शालीनी ने पता नही क्या सोचकर हां करदी ।

आरती , शालीनी और बलवीर का प्लान फिक्स हो चुका था । अगले दिन सुबह को बलवीर, शालीनी और आरती अपने 6 दिन के टूर के लिए रवाना हो चुके थे । ड्राइवर उनको सुबह 7 बजे एयरपोर्ट लेकर पहुंच चुका था ।

अब घर में बचे थे धर्मवीर , सोमनाथ, उपासना और पूजा ।

सोमनाथ और धर्मवीर बिल्कुल शांत बैठे हुए थे तभी रूम में पूजा चाय लेकर आती है ।

पूजा चाय रखकर चली गयी । सोमनाथ और धर्मवीर चाय की चुस्की लेने लगे ।

सोमनाथ जी ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा - समधीजी , जो हुआ वो होना ही था । अब कितना भी हम सोच ले लेकिन अपने भूतकाल को नही बदल सकते । मैं समझता हूं लेकिन राकेश आपका ही बेटा नहीं हमारा भी दामाद था । और मैने तो कभी दामाद समझा ही नही बेटा ही समझा था । पर होनी को कौन टाल सकता है ।

धर्मवीर - हम्म शायद किस्मत को यही मंजूर था ।

सोमनाथ - अब आगे की जिंदगी बच्चो के सहारे खुशियों के साथ गुजारिये और गम को भुलाने में ही हम सबकी भलाई है ।

उधर उपासना ने भी जिंदगी से संधि कर ली थी । अब वो भी सामान्य होने लगी थी । पूजा उसको दिन भर हसाती रहती । उनके कमरे में से भी अब चहकती आवाज और हँसने की आवाजें आने लगी थी ।

पूजा - दीदी तुम चलते में इतनी मत मटका करो ।

उपासना - अच्छा मतलब अब तुम हमे बताओगी की मैं ज्यादा मटक रही हूं ।

पूजा हंसते हुए - ओह दीदी तो चिढ़ती भी है ।

उपासना - चल पूजा एक काम करो जरा ।

पूजा - क्या दीदी ?

उपासना - गेट तक जाकर वापस आओ ।

पूजा ने वैसा ही किया । पूजा गेट के पास तक गयी और वापस आगयी ।

उपासना - अब तू बता पूजा की चलते में तू नही मटक रही थी क्या जो मुझे बोल रही थी । पिछवाड़ा तो तेरा भी ऊपर नीचे हिल रहा था ।

पूजा शर्माती हुई - दीदी जब है ही भारी तो हिलेगा ही ये तो ।

उपासना - अच्छा एक बात बता ।

पूजा - हां दीदी पूछो ।

उपासना - नीचे जो जंगल था वो साफ किया तूने या नही । जब तू आयी थी तब तो तेरी झांटों से ढका हुआ था सबकुछ ।

पूजा यह सुनकर शर्माकर झेंप गयी ।

पूजा - क्या दीदी आप भी ना । बताया तो था कि वहां के बाल सेव नही करती और तबसे तो टाइम भी नही मिला है करने का।

उपासना - अच्छा दिखा तो जरा देखूं तो की तू अंदर से दिखती कैसी है ।

पूजा के गाल लाल हो गये ।

उपासना - मैं तो एक लड़की हूँ और तेरी बहन भी हूँ , मुझसे तो तू बड़ी शर्मा रही है और बेशक किसी दुसरे के सामने टांग फैलाकर लेट जाएगी ।

पूजा - ऐसी बात नही है दीदी ।

उपासना ने पूजा की कोई बात ना सुनते हुए पूजा की सलवार का नाड़ा एक झटके में खोल दिया । नाड़ा खुलते ही सलवार नीचे गिर गयी ।

उपासना ने देखा कि पूजा की मोटी जांघो के बीच मे उसकी चूत पैंटी से ढकी हुई है लेकिन चूत के साइड में से काले काले बाल निकलते दिखाई पड़ रहे थे ।

पूजा ने शर्म से अपने मुंह पर हाथ रखा हुआ था ।

फिर उपासना ने पूजा की पैंटी में अपनी उंगलिया फसाई और पैंटी घुटनों तक सरका दी ।

उपासना के मुह से देखकर इतना ही निकला - हाय रब्बा । और पूजा ने ऐसा कहते हुए अपने मुह पर हाथ रख लिया ।

उपासना ने देखा कि पूजा की चुत घनी काली काली झांटों से ढकी हुई है । झांटों के बाल उंगली से भी ज्यादा लंबे है ।

उपासना - पूजा एक बात बोलू ।

पूजा - याब बोलने को रह ही क्या गया है दीदी । अब तो जो बोलना है बोलिये ।

उपासना - तेरी चूत तो मुझे झांटों की वजह से दिख नही रही पर चूत के ऊपर फैले इस घने जंगल को देखकर ही मैं कह सकती हूं कि तेरी चूत तो लुगाइयों की चूतों को भी मात देती है ।

पूजा - दीदी अब ये तो सभी की ऐसी ही होती है ।

उपासना - नही पूजा तेरी चुत को देखकर यही कहा जा सकता है कि इस चूत का पानी निकालना हर किसी के बस की बात नही ।

पूजा - अच्छा अब जरा आप खड़ी होना एक मिनट के लिए ।

उपासना खड़ी हो गयी । पूजा से उसकी सलवार भी नीचे खिसकाकर घुटनो पर कर दी ।

दोस्तो एक महीने से उपासना ने भी झांटों को साफ नही किया था । लेकिन उपासना की चूत पर पूजा की चूत के बराबर बाल नही थे ।

पूजा की चूत पर बालों का जमावड़ा था जबकि उपासना की चूत पर बाल नाखून से थोड़े ही ज्यादा बड़े थे ।

यह देखकर पूजा कहने लगी- मैं मानती हूं कि मेरी चूत पूरी ढकी हुई है लेकिन कम तो आप भी नहीं हो दीदी , देखो तो आपकी चूत को देखकर ऐसा लगता है जैसे यह चूत निगलना चाहती हो कुछ और निगलना ही क्या पूरा मोटा लंड खाना चाहती है । तुम्हारी चूत को रौंदना भी कौन सा बच्चों का खेल है जो आप मुझे कह रही हो ।

यह सुनकर उपासना भी शर्मा दी । दोनों बहने एक दूसरे की चूतों को हाथ से सहलाने लगी और गर्म होने लगी ।

हाथ से सहलाते हुए उपासना बोली- पूजा तेरी चूत पर बाल ही लंबे नही बल्कि तेरी तो चूत भी मेरे पूरे हाथ में मुश्किल से आ रही है । तेरी चूत के होंठ काफी मोटे मोटे हैं ।

पूजा भी सिसकारी भरते हुए बोली- दीदी चूत तो आपकी भी मेरे पूरे हाथ में नहीं आ रही है ।आपकी भी कचोरी जैसी चूत है और इसके लिए कोई मोटा लंबा लौड़ा ही होना चाहिए ।आपकी चूत पर झंडा गाड़ना कोई बच्चों का खेल नहीं है

दोनों बहने काफी गर्म हो चुकी हो चुकी गर्म हो चुकी हो चुकी थी अब तो उनकी आंखों में लंड नाचने लगे थे

पूजा बोली - मैं एक बात पूछूं दीदी ।

उपासना- हां पूछो ।

पूजा - दीदी अब दिल नहीं करता क्या आपका । कैसे संभाल पाती हो अपने आप को । जिस औरत के पास तुम्हारे जैसी चूत हो उसको तो सुबह-शाम लंड से खेलते रहना चाहिए ।

पूजा इतना कह कर चुप हो गई। बड़ी ही तपाक से वह बोल गई थी ये बात ।

उपासना ने एक नजर उसको देखा और बोली - बहुत बोलना सीख गई है तू चल जब तू ने पूछा है तो बता ही देती हूं । किस का मन नहीं करता लंड लेने को । सबका करता है और जैसा तूने कहा कि अगर औरत मेरे जैसी हो तो। हां पूजा यह बात सही है मेरी जैसी औरत को दिनभर लंड पर चढ़े रहना चाहिए । लेकिन फिर भी मैं अपने आप को संभाल लेती हूं ।कोई चारा भी तो नहीं क्या करूं ।

पूजा बोली- दीदी चारा तो है और आप जानती भी हैं , लेकिन पता नहीं क्यों आप इस तरह से बदली बदली रहने लगी है ।

उपासना बोली - पहले बात अलग थी अब मुझे नहीं लगता कि धर्मवीर मेरे ससुर या मेरे पापा सोमनाथ इस रिश्ते को कबूल करेंगे ।

पूजा बोली - लेकिन फिर भी एक बार पता तो करना चाहिए कि उनके दिल में क्या है?

उपासना को यह बात थोड़ा जंची और उसने हामी भर दी ।

दोनों ने अपने बंगले के बगीचे में नहाने का प्लान बनाया और स्विमिंग पूल में चले गए।

दोस्तों धर्मवीर के बंगले में स्विमिंग पूल पार्किंग वाली जगह के साइड में बना हुआ था ।जहां से वह धर्मवीर के रूम से बिल्कुल साफ दिखाई देता था ।

पूजा ने दो बिकनी निकाली लेकिन उपासना ने बिकनी पहनने को मना कर दिया और उसने एक सलवार उसके ऊपर ब्रा पहनने के लिए बोला ।

दोनों ने सलवार पहनी और ऊपर ब्रा पहनी ।

सलवार जो पहनी थी दोस्तों शालिनी की सलवार दोनों घोड़ियों ने पहन ली। जो कि चूतड़ों पर वैसे ही टाइट हो गई थी दोनों ने अपने बालों का जुड़ा बनाकर सर पर रख लिया।

पीछे से कमर बिल्कुल नंगी हो गई दोनों की और उस पतली कमर के नीचे तबले जैसे चूतड़ों पर पहनी हुई सलवार ।

गजब का रूप बना लिया था दोनों ने ।

किसी काम देवी की तरह दोनों स्विमिंग पूल की तरफ धीरे-धीरे बढ़ने लगी ।



*******

दोस्तों कहानी कैसी चल रही है मुझे कमैंट्स करके जरूर बताएं क्योंकि मुझे लिखने का कोई ज्यादा तजुर्बा नही है । इस 24 साल के नवयुवक से यदि कोई गलती हो लिखने में तो माफ कीजियेगा । यह शब्दो से खेलने की एक छोटी सी कोशिश है मेरी ।


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