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- Dec 5, 2013
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मैं साहिल हूँ. यह कहानी मेरी ज़िन्दगी के उस मोड़ की है जब वक़्त ने एक अजीब करवट ली थी. हम दिल्ली गए थे, मेरी अम्मी ऐसा की कजिन, सायमा, की शादी के लिए. सायमा अम्मी के मां की बेटी थी, इसलिए यह एक बड़ा फॅमिली इवेंट था. शादी का माहौल जश्न से भरा हुआ था, जैसे हर तरफ रंगों की बरसात हो रही हो और खुशियों की महफ़िल सजी हो.
घर से हम तीनो निकले the-main, मेरी अम्मी, और मेरी नानी. मेरे अब्बू, फहद, को बिज़नेस के काम से रुकना पड़ा, इसलिए वह हमारे साथ नहीं आ सके. मैं कॉलेज में था, अपनी hi धुन में रहने वाला एक एवरेज सा लड़का. मध्यम हाइट, पतला सा जिस्म, और काले बाल जो अक्सर मेस्सी रहते थे, हवा में लहराते हुए. मेरा चेहरा अम्मी से ज़्यादा अब्बू से मिलता था. देखने में मैं मासूम लगता था, पर मेरे अंदर एक बेचैनी थी, एक तेज़ धड़कन जो हर नए तजुर्बे को तलाशती थी.
मेरी अम्मी बोहोत केयरिंग थी, जिनकी दुनिया उनकी फॅमिली के ird-gird hi घूमती थी. उनकी लम्बी हाइट उन्हें एक ग्रेसफुल प्रजेंस देती थी. उनका गोरा रंग चांदनी की तरह चमकता था, और उनकी स्किन छूने में दूध सी नरम थी. गोल चेहरे पर badi-badi काली आँखें थीं, ऐसी गहरी जैसे झीलें हों. लम्बे, काले बाल उनकी पीठ पर लहराते, और जब हवा चलती तोह उनसे एक खुशबू बिखर जाती. उसकी आवाज़ में शहद सी मिठास घुली हुई थी, नरम और प्यारी. उनकी मुस्कराहट ऐसी थी जो दिल को सुकून दे, जैसे सूरज की पहली किरण. उनका जिस्म स्लिम, मगर हर चउरवे अपनी जगह पर आकर्षित करता tha-patli कमर, चौड़े कूल्हे, और एक भरा हुआ सीना. वह हर कपडे में खूबसूरत लगती थी.
ट्रैन के सफर में मैं अम्मी के बगल में बैठा था. उनके जिस्म की गर्मी मेरे हाथ को छू रही थी, एक नरम एहसास, आग की तपिश जैसा गरम. नानी विंडो साइड पर सो रही थी, उनकी साँसों की ek-si रफ़्तार और हलकी खर्राटों की आवाज़ आ रही थी. अम्मी ने एक dheela-dhala काला आबय और ब्राउन वैल पहना हुआ था, जिसमें उनका पूरा जिस्म ढाका था, सिवाए उनके चेहरे और हाथों के. मेरी नज़र baar-baar उनके गोर हाथों पर टिक जाती, जो आबय की आस्तीनों से बहार झलक रहे थे. दूध जैसे सफ़ेद, उनसे लोशन की एक हलकी, ताज़गी भरी खुशबू आ रही थी.
मेरे दिल में एक अजीब सा सुकून था. "बीटा, दिल्ली में बोहोत मज़ा आएगा," अम्मी ने मुस्कुराते हुए कहा. उनकी आँखों में पुरे परिवार से मिलने का एक्ससिटेमेंट साफ़ दिख रहा था. मैं बस हाँ में सर हिला सका, यह सोचते हुए की अम्मी कितनी ज़िम्मेदार हैं. उनका हर कदम परिवार को एक धागे में पिरोये रखता था. रात को ट्रैन की लाइट्स डिम हो गयीं और बहार अँधेरा छ गया. स्टेशनों की गुज़रती हुई रोशनियां तेज़ी से beet-te सितारों जैसी लग रही थी. मैं अम्मी के कंधे पर सर रख कर सो गया, और ट्रैन की वाइब्रेशन मेरे जिस्म में एक करंट की लहार सी दौड़ रही थी. यह सफर हमारी ज़िन्दगी में एक नया अध्याय शुरू करने वाला था.
दिल्ली पहुँच कर हम सायमा के घर रुके, जो एक पुराणी हवेली जैसा था. उसके नक़्क़ाशी वाले पिल्लर्स और बड़े से आँगन में फूलों ki-khaas कर गुलाब और चमेली ki-mehek फैली हुई थी. पूरी हवेली शादी के लिए सजाई गयी थी. Rang-birangi लाइट्स रात में दिवाली के दीयों की तरह जगमगाती और दिन में सूरज की रौशनी में हलकी चमक देती. दरवाज़ों पर ताज़े फूलों की मालाएं लटक रही थी, जिन्हें छूने पर सुबह की ओस जैसी ताज़गी महसूस होती. बैकग्राउंड में तबला और शहनाई का हल्का संगीत शादी का माहौल बना रहा था.
हमारा कमरा बड़ा था, जिसमें एंटीक फर्नीचर और एक बड़ा सा बीएड था, जिसकी नरम बेडशीट्स पर लेटना बादल पर सोने जैसा था. अम्मी ने कमरे में आकर अपना आबय उतारा, और एक पल के लिए जैसे कमरे की रौशनी बदल गयी. उसके नीचे उन्होंने एक गहरे नीले रंग का एलिगेंट लेहेंगा सूट पहना हुआ था. सिल्क का कपडा उनकी स्किन पर नीले आसमान की तरह चमक रहा था. उसकी चोली tight-fitting थी, जो उनके जिस्म के हर चउरवे को हलके से उभार रही थी. फ्लोवी लेहेंगा उनके पैरों की शेप का बस एक इशारा दे रहा था. मेहँदी लगे हाथों में सोने के gehne-kaanon में झुमके, कलाइयों में चूड़ियां, और गले में haar-unki शान बढ़ा रहे थे.
शादी के फंक्शन्स शुरू हुए. मेहँदी, संगीत, हल्दी. हर दिन एक नया रंग, एक नया जोश. मेहँदी वाले दिन, जब साड़ी औरतें ढोलक पर गाने गए रही थीं, अम्मी ने तोते के पंख जैसा हरे रंग का एक अनारकली सूट पहना. उसका कपडा इतना मुलायम और बारीक था की रौशनी में उनके जिस्म का सिल्हूट एक धुंधली परछाई की तरह नज़र आ रहा था. वह जब चलती थीं, तोह उनकी पायल की छान छान की आवाज़ भीड़ में भी अलग सुनाई देती, जैसे कोई संगीत उनके साथ चल रहा हो. मैंने देखा की कैसे बाकी मर्दों की नज़रें भी उन पर आकर ठहर जाती थीं, और न जाने क्यों, यह देख कर मेरे अंदर एक अजीब सी गर्व और जलन की लेहेर दौड़ गयी.
यह सब देख कर मुझे एक अजीब सी बेचैनी हो रही थी, जैसे शादी का यह जश्न सिर्फ रिश्तों को नहीं, बल्कि मेरे एहसासों को भी मज़बूत कर रहा था. यहाँ का हर नज़ारा, हर आवाज़, हर खुशबू, और हर एहसास मुझे अम्मी के साथ बिताये पलों की कीमत समझा रहा था.
घर से हम तीनो निकले the-main, मेरी अम्मी, और मेरी नानी. मेरे अब्बू, फहद, को बिज़नेस के काम से रुकना पड़ा, इसलिए वह हमारे साथ नहीं आ सके. मैं कॉलेज में था, अपनी hi धुन में रहने वाला एक एवरेज सा लड़का. मध्यम हाइट, पतला सा जिस्म, और काले बाल जो अक्सर मेस्सी रहते थे, हवा में लहराते हुए. मेरा चेहरा अम्मी से ज़्यादा अब्बू से मिलता था. देखने में मैं मासूम लगता था, पर मेरे अंदर एक बेचैनी थी, एक तेज़ धड़कन जो हर नए तजुर्बे को तलाशती थी.
मेरी अम्मी बोहोत केयरिंग थी, जिनकी दुनिया उनकी फॅमिली के ird-gird hi घूमती थी. उनकी लम्बी हाइट उन्हें एक ग्रेसफुल प्रजेंस देती थी. उनका गोरा रंग चांदनी की तरह चमकता था, और उनकी स्किन छूने में दूध सी नरम थी. गोल चेहरे पर badi-badi काली आँखें थीं, ऐसी गहरी जैसे झीलें हों. लम्बे, काले बाल उनकी पीठ पर लहराते, और जब हवा चलती तोह उनसे एक खुशबू बिखर जाती. उसकी आवाज़ में शहद सी मिठास घुली हुई थी, नरम और प्यारी. उनकी मुस्कराहट ऐसी थी जो दिल को सुकून दे, जैसे सूरज की पहली किरण. उनका जिस्म स्लिम, मगर हर चउरवे अपनी जगह पर आकर्षित करता tha-patli कमर, चौड़े कूल्हे, और एक भरा हुआ सीना. वह हर कपडे में खूबसूरत लगती थी.
ट्रैन के सफर में मैं अम्मी के बगल में बैठा था. उनके जिस्म की गर्मी मेरे हाथ को छू रही थी, एक नरम एहसास, आग की तपिश जैसा गरम. नानी विंडो साइड पर सो रही थी, उनकी साँसों की ek-si रफ़्तार और हलकी खर्राटों की आवाज़ आ रही थी. अम्मी ने एक dheela-dhala काला आबय और ब्राउन वैल पहना हुआ था, जिसमें उनका पूरा जिस्म ढाका था, सिवाए उनके चेहरे और हाथों के. मेरी नज़र baar-baar उनके गोर हाथों पर टिक जाती, जो आबय की आस्तीनों से बहार झलक रहे थे. दूध जैसे सफ़ेद, उनसे लोशन की एक हलकी, ताज़गी भरी खुशबू आ रही थी.
मेरे दिल में एक अजीब सा सुकून था. "बीटा, दिल्ली में बोहोत मज़ा आएगा," अम्मी ने मुस्कुराते हुए कहा. उनकी आँखों में पुरे परिवार से मिलने का एक्ससिटेमेंट साफ़ दिख रहा था. मैं बस हाँ में सर हिला सका, यह सोचते हुए की अम्मी कितनी ज़िम्मेदार हैं. उनका हर कदम परिवार को एक धागे में पिरोये रखता था. रात को ट्रैन की लाइट्स डिम हो गयीं और बहार अँधेरा छ गया. स्टेशनों की गुज़रती हुई रोशनियां तेज़ी से beet-te सितारों जैसी लग रही थी. मैं अम्मी के कंधे पर सर रख कर सो गया, और ट्रैन की वाइब्रेशन मेरे जिस्म में एक करंट की लहार सी दौड़ रही थी. यह सफर हमारी ज़िन्दगी में एक नया अध्याय शुरू करने वाला था.
दिल्ली पहुँच कर हम सायमा के घर रुके, जो एक पुराणी हवेली जैसा था. उसके नक़्क़ाशी वाले पिल्लर्स और बड़े से आँगन में फूलों ki-khaas कर गुलाब और चमेली ki-mehek फैली हुई थी. पूरी हवेली शादी के लिए सजाई गयी थी. Rang-birangi लाइट्स रात में दिवाली के दीयों की तरह जगमगाती और दिन में सूरज की रौशनी में हलकी चमक देती. दरवाज़ों पर ताज़े फूलों की मालाएं लटक रही थी, जिन्हें छूने पर सुबह की ओस जैसी ताज़गी महसूस होती. बैकग्राउंड में तबला और शहनाई का हल्का संगीत शादी का माहौल बना रहा था.
हमारा कमरा बड़ा था, जिसमें एंटीक फर्नीचर और एक बड़ा सा बीएड था, जिसकी नरम बेडशीट्स पर लेटना बादल पर सोने जैसा था. अम्मी ने कमरे में आकर अपना आबय उतारा, और एक पल के लिए जैसे कमरे की रौशनी बदल गयी. उसके नीचे उन्होंने एक गहरे नीले रंग का एलिगेंट लेहेंगा सूट पहना हुआ था. सिल्क का कपडा उनकी स्किन पर नीले आसमान की तरह चमक रहा था. उसकी चोली tight-fitting थी, जो उनके जिस्म के हर चउरवे को हलके से उभार रही थी. फ्लोवी लेहेंगा उनके पैरों की शेप का बस एक इशारा दे रहा था. मेहँदी लगे हाथों में सोने के gehne-kaanon में झुमके, कलाइयों में चूड़ियां, और गले में haar-unki शान बढ़ा रहे थे.
शादी के फंक्शन्स शुरू हुए. मेहँदी, संगीत, हल्दी. हर दिन एक नया रंग, एक नया जोश. मेहँदी वाले दिन, जब साड़ी औरतें ढोलक पर गाने गए रही थीं, अम्मी ने तोते के पंख जैसा हरे रंग का एक अनारकली सूट पहना. उसका कपडा इतना मुलायम और बारीक था की रौशनी में उनके जिस्म का सिल्हूट एक धुंधली परछाई की तरह नज़र आ रहा था. वह जब चलती थीं, तोह उनकी पायल की छान छान की आवाज़ भीड़ में भी अलग सुनाई देती, जैसे कोई संगीत उनके साथ चल रहा हो. मैंने देखा की कैसे बाकी मर्दों की नज़रें भी उन पर आकर ठहर जाती थीं, और न जाने क्यों, यह देख कर मेरे अंदर एक अजीब सी गर्व और जलन की लेहेर दौड़ गयी.
यह सब देख कर मुझे एक अजीब सी बेचैनी हो रही थी, जैसे शादी का यह जश्न सिर्फ रिश्तों को नहीं, बल्कि मेरे एहसासों को भी मज़बूत कर रहा था. यहाँ का हर नज़ारा, हर आवाज़, हर खुशबू, और हर एहसास मुझे अम्मी के साथ बिताये पलों की कीमत समझा रहा था.