Ek Duje ke Vaaste.. - SexBaba
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Ek Duje ke Vaaste..

hotaks

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Dec 5, 2013
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यो Hello सफ की जनता हाउ यू आल दोइन :डी

ी क्नोव ी ऍम ा बिट लेट ये स्टोरी मैं दिवाली के बाद hi लेन वाला था बूत हर बार ऐसा hi होता मेरे सोचे हिसाब से कुछ नहीं होता खैर वो अलग बात है..

अब वैसे तो मैं इस स्टोरी को 9 दिन पहले नई ईयर पे शुरू करने वाला था लेकिन उस दिन अपने को काम आ गया तो अब चुकी आज बहुत बढ़िया दिन है और मुहूर्त भी ाचा है तो फिर आज hi शुभारम्भ करते है :डी

एंड यू गाइस क्नोव में अपुन स्टोरी पूरी करता है :कूल:

अब अपुन इसमें डेली अपडेट का वडा नहीं करेगा बूत रेगुलर अपडेट रहेंगे ये मान के चलो बोले तो हर दूसरे दिन :ेस्क:

खैर तो प्रेसेंटिंग यू अपुन की नयी स्टोरी


एक दूजे के वास्ते..

और उम्मीद करता हु इसको भी हर स्टोरी जैसा प्यार मिलेगा, आज रिस्पांस देखते है अपडेट कल से दूंगा :डी

नाउ कॉंग्रट्स के मैसेज करो :वेटिंग:

p.s. स्टोरी देवनागिरी में होगी तो किसी को कोई समस्या हो तो बताने का
 
Romance-book-cover-Made-with-Poster-My-Wall.jpg
 
एक दूजे के वास्ते

प्रोलॉग

शाम का वक्त था और सुहाना मौसम था, पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश ने मौसम मे ठंड बढ़ा दी थी और ऐसे मे वो पार्क मे बेंच पर बैठी उसका इंतजार कर रही थी, ये वही जगह थी जहा वो लोग अक्सर मिला करते थे

“हे”

ये आवाज सुन उसने ऊपर देखा तो उस इंसान को पाया जिसका वो यहा इंतजार कर रही थी

“हाइ” उसने मुस्कुरा कर कहा और खड़ी हो गई

“क्या सोच रही थी? उसने जब आते हुए उसे बेंच पर सोच मे डूबा देखा तो पुछ लिया

“नहीं कुछ नहीं, तुम बताओ तुमने मुझे इतना अर्जन्टली मिलने क्यू बुलाया है?”

“वो मुझे कुछ बताना था तुम्हें, वो मैंने कल हमारे बारे मे घर पर मेरी मा को बात दिया” उसने नर्वसली अपनी गर्दन खुजाते हुए उससे कहा और वो शांति से उसकी बात सुन रही थी

“पहले तो वो थोड़ी गुस्सा हुई लेकिन फिर जब मैंने उन्हे तुम्हारे बारे मे बताया, हमारे बारे मे बताया के हम एक दूसरे से कितना प्यार करते है और मैं तुम्हारे बगैर नहीं रह सकता तब..... वो मान गई और वो एक बार तुमसे मिलना चाहती है” उसने मुस्कुराते हुए कहा, उसकी खुशी उसके चेहरे से साफ देखि जा सकती थी

“तुम्हारी मा से मिलना है? इतनी जल्दी?” उसने नर्वस होते हुए कहा

“अरे तो उसमे क्या है, मैं जल्द ही बिजनस टेकओवर करने वाला हु और मा पापा चाहते है के मैं जल्द ही सेटल हो जाऊ और जब मैंने उन्हे तुम्हारे बारे मे बताया तो वो बस तुमसे मिलना चाहते है” उसने कहा

“उम्म... मैं नहीं कर सकती ये, नहीं मिल सकती” उसने नीचे देखते हुए कहा

“क्या???? लेकिन क्यू?? वो कन्फ्यूज़ था

“मुझे अभी ये सब नहीं चाहिए, मैं फिलहाल कोई कमिट्मन्ट नहीं चाहती थी” उसने सपाट चेहरे के साथ कहा

“लेकिन क्यू अक्षु? तुम मुझसे प्यार करती हो ना? अब वो इस से डर रहा था

वो चुप रही

“अक्षिता.... तुम जानती हो ना मैं तुमसे कितना प्यार करता हु और मैं तुम्हारे बगैर नहीं रह सकता”

उसने अपनी गर्दन हिला दी

“तो फिर ये सब क्यू??” अब उसे गुस्सा आ रहा था

उसमे उसका सामना करने ही अब हिम्मत नहीं थी वो पलट गई

“क्युकी... मैं तुमसे प्यार नहीं करती” उसने कहा

और वो ये शब्द सुन वो अपनी जगह स्तब्ध खड़ा हो गया

“तुम.... तुम मजाक कर रही हो ना” उसे खोने का डर उसकी आवाज मे साफ झलक रहा था

“नहीं!”

“क्या??” वो थोड़ा चिल्लाया

कुछ पल वहा उन दोनों के बीच शांति छाई रही

“मैं नहीं मानता! मुझे तुम्हारी इस बात पर यकीन नहीं है, तुमने कहा था तुम मुझसे प्यार करती हो यार” वो चिल्लाया

“मैंने झूठ कहा था” उसने आराम से कहा

“तो तुम कह रही हो हमारे बीच पिछले दो सालों मे जो कुछ भी हुआ वो सब कुछ झूठ था” उसकी आंखे नम हो चुकी थी उनमे पानी जमने लगा था

“हा”

“लेकिन क्यू??”

“क्युकी मुझे तुम्हारा पैसा तुम्हारा अटेंशन अच्छा लगा था, तुम्हारा लुक तुम्हारा स्टैटस पसंद था... बस”

उसकी बात सुन वो अब कुछ कहने की हालत मे नहीं था, वो शॉक मे था

“तुम मुझे तुम्हारे साथ सेटल होने कह रहे हो जिसके लिए मैं रेडी नहीं हु, मेरी भी फॅमिली है जिम्मेदारिया है सपने है अपनी जिंदगी है और मैं ये सब फिर एक अट्रैक्शन के लिए नहीं छोड़ सकती”

उसने उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी ओर घुमाया

“मेरी आँखों मे देखक कर कहो अक्षिता... के तुम मुझसे प्यार नहीं करती” वो गुस्से मे चिल्लाया गुस्से से उसकी आंखे लाल हो गई थी

“मैं तुमसे प्यार नहीं करती” उसने उसकी आँखों मे देखते हुए कहा

अक्षिता की बात सुन उसकी आँखों से आँसू बहने लगे, आज उसके दिल के टुकड़े टुकड़े हो गए थे

अब उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था, उसने अक्षिता को वही छोड़ा और वहा से चला गया और पीछे छोड़ गया अपने प्यार अपनी जिंदगी को....


पता नहीं इनकी कहानी मे आगे क्या होगा... क्या ये अंत है या एक नई शुरुवात... क्या सच मे अक्षिता उससे प्यार नहीं करती?? और अगर वो अक्षिता को इतना चाहता है तो क्या वो उसके इस धोके से उबर पाएगा.... जानने के लिए पढिए, एक दूजे के वास्ते.....
 
इनडीएक्स

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अपडेट 1

1.5 साल बाद...

“अक्षु उठो अब तुमने रात मे कहा था न तुम्हें ऑफिस जल्दी जाना है लेट हो जाएगा तुम्हें”

इस वक्त सुबह के 8 बज रहे थे और अक्षिता की मा उसे नींद से जगाने की कोशिश मे लगी हुई थी

“उमहू, मम्मी यार सोने दो ना, चली जाऊँगी ऑफिस भी”

“अरे पर तुमने ही तो कहा था के तुम्हें आज ऑफिस जल्दी जाना था आज जरूरी काम है ऑफिस मे और अब सोई हो उठो, 8 बजे गए है”

और जैसे ही अक्षिता के कानों ने 8 बजने की बात सुनी अक्षिता उठ बैठी, उसे 8.30 तक ऑफिस पहुचना था लेकिन 8 उसे घर पर ही बज चुके थे और आज इतने इम्पॉर्टन्ट दिन उसका ऑफिस के लिए लेट होना लगभग तय हो चुका था, वो जल्दी से बेड से उठी और रेडी होकर ऑफिस के लिए रवाना हो गई,

अक्षिता जितनी जल्दी हो सकता था ऑफिस पहुच गई थी फिर भी उसे लेट हो चुका था और जैसे ही वो ऑफिस मे घुसी

“अक्षु इधर”

अक्षिता की दोस्त और कलीग स्वरा ने उसे आवाज दिया और अक्षिता मुसकुराते हुए उसके पास गई

“तुमको कोई आइडीया है के कितने बज रहे है?” स्वरा ने गुस्से मे कहा

“सवा नौ” अक्षिता ने नीचे देखते हुए धीमे से कहा

“और आपको ऑफिस कितने बजे तक आना था?”

“साढ़े आठ बजे तक” अक्षिता ने वैसे ही नीचे देखते हुए कहा

“और वो क्यू??”

“क्युकी आज हमारा नया बॉस आने वाला है” अक्षिता ने स्माइल के साथ कहा, उसको जरा भी अपने लेट आने का पछतावा नहीं था और इसको कोई फरक नहीं पड़ा ये देख स्वरा ने अपना सर झटक लिया

“सॉरी ना यार स्वरू और इतना भी लेट नहीं हुआ है वैसे भी मैं उसके आने के पहले तो आ ही गई हु ना अब चल जल्दी हॉल मे”

जिसके साथ ही अक्षिता स्वरा को अपने साथ खिच के ले जाने लगी

“ओये रोहन कहा है” अक्षिता ने अपने दूसरे दोस्त के बारे मे पूछा

“वो पहुच गया है हमारी राह देख रहा है” स्वरा ने कहा

आज से 1 साल पहले अक्षिता स्वरा और रोहन ने एक साथ ही इस कंपनी मे जॉइन किया था और तभी से तीनों की दोस्ती काफी अच्छी हो गई थी, वो दोनों मीटिंग हॉल मे पहुची जहा रोहन पहले ही मौजूद था

“हाश पहुच गए.... हाइ रोहन” अक्षिता ने रोहन को देखते ही कहा

“चलो तुम दोनों पहुची तो” रोहन ने उन दोनों को देख कहा

“ओये तुम लोगों को पता है क्या अपना नया बॉस कौन है?? मैंने सुना है वो बहुत हैन्डसम है, ऊपर से बैच्लर भी है” स्वरा ने अपने नए बॉस के बारे मे सोचते हुए उन दोनों से पूछा

“और मैंने तो ये भी सुना है के वो हैन्डसम होने के साथ साथ गुस्से वाला और ऐरगन्ट भी है तो मैडम सपने से बाहर आओ और बेहतर होगा के उसके सामने तमीज से रहो क्युकी मैंने यहा तक सुना है के वो किसी को फायर करने से पहले एक बार भी नहीं सोचता” रोहन ने स्वरा को सपनों से बाहर लाते हुए सच्चाई से अवगत कराया।

पूरा हॉल लगभग भर चुका था, ऑफिस के सभी कर्मचारी आ गए थे और जैसे ही बॉस की एंट्री होने लगी पूरा हॉल एकदम शांत हो गया, लेकिन ये उनका नया नहीं बल्कि पुराना बॉस था, जो आज रिटायर हो रहे थे, उन्होंने कंपनी के बारे मे, अपने इक्स्पीरीअन्स के बारे मे बहुत सी बाते की, और आज जब उन्होंने अपनी कंपनी को बेच दिया था तो उन्हे कैसा फ़ील हो रहा था ये उन्होंने अपने एम्प्लॉईस को बताया

अक्षिता अपने पुराने बॉस को देख मुस्कुराई जब उन्होंने अपनी स्पीच के दौरान उसके काम की तारीफ की, वो लगभग 60 साल के थे और चुकी उनके कोई बाल बच्चे नहीं थे जो उनका बिजनस आगे बढ़ाए तो उन्होंने कंपनी को बेच कर रेटाइरमेंट लेकर बाकी जिंदगी अपनी वाइफ के साथ बिताने का फैसला किया था, ये न तो कोई बड़ी कंपनी थी ना ही ज्यादा छोटी, लेकिन उनका बिजनस अच्छे खासे प्रॉफ़िट मे था जिसने कई सालों तक कई लोगों को नौकरिया दी थी और अब चुकी वो रेटायर हो रहे थे उन्होंने इस सफल बिजनस की बागडोर किसी और को सोपने का मन बनाया था...

“सो माइ डिअर स्टाफ, प्लीज वेलकम योर न्यू बॉस” उन्होंने मुसकुराते हुए कहा

और इसी के साथ हॉल मे तालियों की गूंज उठने लगी और गेट से हॉल मे एक हैन्डसम नौजवान की एंट्री हुई, अपने नए बॉस को देख जहा एक ओर सारा स्टाफ खुश था उत्साहित था वही अक्षिता शॉक थी, वो अपनी जगह पर जम गई थी।

‘नहीं ये नहीं हो सकता’

‘ये वो नहीं है, ये हो ही नहीं सकता ये झूठ है’ अक्षिता ने अपने आप से कहा तभी

“स्टाफ प्लीज वेलकम मिस्टर एकांश रघुवंशी, आपके नए बॉस, और मुझे ये बताते हुए बहुत खुशी हो रही है के हमारी कंपनी रघुवंशी ग्रुप के साथ लिगली और कंप्लीटली मर्ज हो चुकी है और अब इस कंपनी की बागडोर मिस्टर एकांश संभालेंगे”

‘ये वही है और अब ये मेरा बॉस है’ अक्षिता ने मन मे कहा,

इस बात पर कैसे रीऐक्ट करे अक्षिता को समझ ही नहीं आ रहा था वो बस शॉक होकर अपनी जगह पर जम गई थी वही दूसरी ओर स्वरा अपने नए बॉस को देख बहुत खुश थी खास तौर पर इतने हैन्डसम बॉस को देख कर और उसकी इस खुशी को देख रोहन इरिटैट हो रहा था,

उनका पुराना बॉस एकांश को अपने सारे स्टाफ से मिला रहा था और अक्षिता उसे दूर से देख रही, वो बहुत बदल चुका था ये वो नहीं था जिसे वो कभी जानती थी उसे देख कर ऐसा लगता था मानो उसे हसना आता ही ना हो, उसे देखते हुए अक्षिता की आँखों मे पानी जमने लगा था, आज वो उसे पूरे पूरे 1.5 साल बाद देख रही थी, उसने उसे बहुत ज्यादा मिस किया था उसकी स्माइल उसका उसे छेड़ना, गले लगाना, सब कुछ उसने मिस किया था लेकिन इन सब का अब कोई मतलब नहीं था।

एकांश एक एक कर सभी स्टाफ से मिल रहा था..

‘ये लोग तो यही आ रहे है? क्या करू? क्या करू? क्या ये जानता है मैं यहा काम करती हु? हे भगवान मैं कैसे फेस करूंगी उसे? क्या वो मुझे पहचानेगा? एक काम करती हु पलट कर भाग जाती हु मिलूँगी ही नहीं, हा ये सही रहेगा’ अक्षिता अपने दिमाग के घोड़े दौड़ा रही थी और अभी उससे ना मिलना ही अक्षिता ने सही समझा लेकिन ऐसा ज्यादा दिनों तक नहीं चलने वाला था वो अब उसका बॉस था और कभी न कभी तो दोनों को आमने सामने आना ही था

अक्षिता पसीने से भीगी हुई थी मानो उसे कोई पैनिक अटैक आया हो और ऐसे मे वो उससे नहीं मिल सकती थी, उसे फेस करने के लिए अक्षिता को पहले अपने आपको तयार करना था मेंटली प्रीपेर करना था और ऐसे मे अक्षिता को सबसे अच्छा आइडीया वहा से भागने का ही लगा उसने लंबी सास ली और बगैर किसी की नजर मे आए वहा से निकलने के बारे मे सोचा और वो धीरे धीरे पीछे सरक कर वहा से निकलने ही वाली थी के तभी...

“अक्षिता”

अपने पुराने बॉस की आवाज सुन वो रुकी और उसने पीछे पलट कर देखा तो पाया के उसका पुराना बॉस नए बॉस के साथ उसे ही देख रहा था, उसको अपनी ओर देखता पा कर अक्षिता की सास अटक रही थी लेकिन एकांश का चेहरा एकदम नूट्रल था उसे कुछ फरक नहीं पड रहा था

‘लगता है इसने मुझे पहचाना नहीं’ अक्षिता ने मन मे सोचा तभी

“कहा जा रही हो, यहा आओ” अक्षिता के पुराने बॉस ने उसे बुलाया एक एम्प्लोयी के तौर पर उसे अक्षिता का काम बहुत पसंद था उसने स्माइल के साथ अक्षिता से कहा और अक्षिता ने एक लंबी सास ली और नीचे देखते हुए उनकी ओर बढ़ी

“मिस्टर रघुवंशी मीट मिस अक्षिता पांडे, ये हमारे एचआर डिपार्ट्मन्ट मे काम करती है” बॉस ने अक्षिता का इन्ट्रो कराया और इस पूरे टाइम अखिता बस गर्दन झुकाए नीचे देख रही थी जब तक के

“नाइस तो मीट यू मिस पांडे” उसके शांत ठंडी आवाज मे अक्षिता से कहा और अक्षिता ने सर उठा कर उसे देखा उसकी आँखों मे आँसू जमने लगे थे दिमाग मे जंग छिड़ी थी उसकी आवाज बता रही थी वो उसे भुला नहीं था लेकिन चेहरे पर ऐसा कुछ दिखाई नहीं दे रहा था

“नाइस टु मीट यू टू, मिस्टर रघुवंशी” अक्षिता ने कहा

“बाकी लोगों से मिल ले?” एकांश ने कहा और वो बाकी लोगों की ओर बढ़ गया

कुछ समय बाद

“अक्षु क्या हुआ था सुबह?” लंच करते हुए स्वरा ने अक्षिता से पूछा

“कब?” लेकिन अक्षिता को कुछ समझ नहीं आया तब स्वरा ने रोहन को देखा

“अक्षिता हमने सबने देखा था वो” रोहन ने कहा

“तुम लोग किस बारे मे बात कर रहे हो बताओगे?” अक्षिता ने अब थोड़ा जोर से पूछा, उसने अपने की लिए कॉफी ली हुई थी सुबह से हो रही घटनाओ से उसका सर फटा जा रहा था और ये कॉफी उसे शायद थोड़ा आराम दे दे

“पहली बात तो जब हमारा नया बॉस आया उसे देखते ही तुम्हारा चेहरा ऐसा हो गया था जैसे तुमने कोई भूत देख लिया हो” स्वरा ने कहा जिससे अब अक्षिता थोड़ा टेंशन मे थी

“दूसरी बात, तुम हॉल से भागने की कोशिश कर रही थी बताओगी ऐसा क्यू?” रोहन ने अगला सवाल दागा

“और तीसरी और सबसे इम्पॉर्टन्ट बात नए बॉस ने सबको ग्रीट किया सबसे हाथ मिलाया लेकिन तुमसे नहीं ऐसा क्यू?” स्वरा

“ये जाकर उससे पूछो” अक्षिता ने अपना पल्ला झाड दिया

“ये कोई जवाब नहीं हुआ, अक्षु तुम ठीक हो न?” स्वरा ने उससे पूछा

“हा बाबा मैं ठीक हु कुछ नहीं हुआ है, अब सर मत दुखाओ यार” इसी के साथ अक्षिता ने उन दोनों को चुप करा दिया लेकिन उसके दिमाग मे एक जंग छिड़ी हुई थी कई सारी बाते घूम रही थी पता नहीं आने वाला समय उसके जीवन मे क्या लाने वाला था, फिलहाल तो उसके दिमाग मे सबसे ऊपर एक ही बात थी के जल्दी से घर जाकर दवा लेकर सो जाए जो होगा देखा जाएगा....

क्रमश:
 
अपडेट 2

अपने बॉस को ऑफिस मे आता देखा सभी लोगों के उठ कर उसका अभिवादन किया और एकांश भी अपने सभी एम्प्लॉईस का अभिवादन स्वीकारते हुए टॉप फ्लोर पर बने अपने ऑफिस केबिन की ओर बढ़ा

अपने केबिन मे पहुच कर एकांश के सब तरफ नजर मारी और उसे वो केबिन बिल्कुल भी पसंद नहीं आया था और वैसे ही उसने फोन उठाया और एक कॉल लगाया

“अभी के अभी मेरे केबिन मे आओ” एकांश ने फोन पर ऑर्डर दिया और फोन झटके के साथ रख दिया

अगले ही पल केबिन के दरवाजे पर नॉक हुआ और एकांश ने कम इन कह के उस इंसान को अंदर आने की पर्मिशन दी

“सर, आइ एम पूजा, हाउ मे आइ हेल्प यू?” अंदर आने वाली लड़की ने आराम से स्माइल के साथ पूछा

“पूजा मुझे इस केबिन मे कुछ चेंजेस करने है, एक इन्टीरीअर डिजाइनर को बुलाओ और हा एक और बात, मुझे ये फाइलस् का अरेंजमेंट भी ठीक नहीं लग रहा है” एकांश से सधी हुई आवाज मे कहा

“ओके सर, फाइलस् तो सर पुराने बॉस का अससिस्टेंट अरेंज करता था बट वो सर के जाने से पहले ही रिजाइन कर चुका है” पूजा न एकांश को इन्फॉर्म किया

“ओह, लेकिन मुझे अभी कुछ अर्जन्ट फाइलस् की जरूरत है और मैं इसमे से ढूंढ नहीं सकता” एकांश थोड़ा इरिटैट लग रहा था

“कोई बात नहीं सर, अक्षिता को कौनसी फाइल कहा रखी है पता है, वो सर की ये सब मैनेज करने मे हेल्प किया करती थी और उनके काम मे भी असिस्ट करती थी” पूजा ने कहा

“ठीक है तुम जाओ और उसे भेज दो” एकांश ने कहा और फिर अपनी नजरे अने लपटॉप मे गड़ा ली

“ओके सर” इतना बोल के पूजा वहा से चली गई

**

“हैलो” अपने डेस्क पर बजता हुआ फोन उठा कर अक्षिता ने जवाब दिया

“अक्षिता, पूजा हेयर, बॉस तुम्हें केबिन मे बुला रहे है”

अक्षिता के जैसे ही ये सुना डर के मारे उसकी आंखे बड़ी हो गई

“क्यू?” अक्षिता ने धीमे से पूछा

“उन्हे कुछ फाइलस् अर्जन्टली चाहिए, जल्दी आओ” और इतना बोल के पूजा ने कॉल कट कर दिया

‘कोई बात नहीं अक्षु, तुम ये कर सकती हो, वो बस तुम्हारा बॉस है... बस प्रोफेशनल रहना है और कुछ नहीं’

अक्षिता मन ही मन अपने आप को समझते हुए एकांश के केबिन की ओर बढ़ रही थी, वो इस वक्त काफी ज्यादा नर्वस थी और जैसे ही वो बॉस के फ्लोर पर पहुची उसने वहा रीसेप्शन डेस्क पर पूजा को देख के हल्का सा स्माइल किया

और फिर कांपते हाथों से उसने केबिन का दरवाजा खटखटाया और जैसे ही उसने अंदर से कम इन का आवाज सुना उसकी सास भारी होने लगी और उसे घबराहट होने लगी, उसने धीरे धीरे दरवाजा खोला और अंदर आई

“गुड मॉर्निंग सर, आपने बुलाया मुझे?” अक्षिता ने पूछा

एकांश ने एक नजर अक्षिता को देखा और इसके साथ ही अक्षिता का दिल दुगनी स्पीड से धड़कने लगा, वो आज ब्लू सूट मे बहुत ज्यादा हैन्डसम दिख रहा था

“यस” उसने वापिस स्क्रीन की ओर देखते हुए कहा

“हाउ मे आइ हेल्प यू सर?” अब तक अक्षिता ने अपनी नर्वसनेस को संभाल लिया था

“यहा बहुत सारा मेस है और मुझे कुछ फाइलस् चाहिए” उसने अथॉरिटी वाले टोन मे कहा

“शुवर सर, आपको कौनसी फाइलस् चाहिए?” फाइलस् के रैक कर पास जाते हुए अक्षिता ने पूछा, उसे अच्छे से पता था कौनसी फाइल कहा रखी है

“मार्केटिंग” उसने कहा

अक्षिता को अच्छे से पता था वो फाइल कहा है उसने झट से मार्केटिंग की फाइल निकाल कर उसके टेबल पर रखी

“क्रेडिटर फाइल” एकांश ने कहा

इस फाइल के लिए अक्षिता को थोड़ी और फाइलस् इधर उधर करनी पड़ी पर उसे वो मिल गई और उसने वो भी एकांश के टेबल पर रख दी और उसके अगले ऑर्डर का इंतजार करने लगी

“पिछले दो साल की फाइनैन्शल रेपोर्ट्स” एकांश ने ऑर्डर दिया

इस फाइल को ढूँढने मे अक्षिता को थोड़ा ज्यादा टाइम लग गया और अब उसके लिए एकांश के साथ अकेले एक ही रूम मे रहना मुश्किल हो रहा था और आखिरकार उसे वो फाइल मिल ही गई

“ये रही फाइनैन्शल रेपोर्ट्स, सर” अक्षिता ने फाइल उसके टेबल पर रखते हुए कहा और वहा खड़ी हो गई

एकांश कुछ समय तक कुछ नहीं बोला और न ही उसने एक बार भी नजर उठा कर अक्षिता को देखा

“सर, क्या मैं जा....” लेकिन अक्षिता की बात पूरी हो पति इससे पहले ही

“कंपनी पॉलिसीस् की फाइल” एकांश के अगला ऑर्डर दे दिया

अब ये फाइलस् इम्पॉर्टन्ट और कान्फडेन्चल थी... ये फाइल कहा रखी है सोचने मे अक्षिता को थोड़ा वक्त लगा लेकिन फिर उसके ध्यान मे आ गया वो अपनी जगह से हट कर एकांश के डेस्क पर पास जाकर खड़ी हो गई और उसका अपने यू पास आकार खड़ा होना जब एकांश को समझ नहीं आया तो उसने उसकी ओर देखा

“सर वो फाइलस् लॉक है और उसकी चाबी यही कही आपकी डेस्क मे होनी चाहिए” अक्षिता ने कहा और एकांश वापिस अपने काम मे लग गया

“सर, क्या मैं..?” अक्षिता ने कतराते हुए पूछा और एकांश ने बगैर कुछ बोले गर्दन से इशारा कर दिया

एकांश जिस खुर्ची पर बैठा था अक्षिता वहा जाकर खड़ी हो गई और सारे ड्रावर्स चेक करने लगी

उसको अपने इतने करीब पाकर एकांश के दिल की धड़कने भी बढ़ी हुई थी उसका जबड़ा कस गया था और उसने अपने हाथ की मुटठिया भींच ली थी, अक्षिता के उससे दूर जाते ही उसने राहत की सास छोड़ी लेकिन अक्षिता अब उसके दूसरे साइड के ड्रावर्स चेक करने लगी थी

“और कितना टाइम लगने वाला है, मुझे वो फाइलस् जल्दी चाहिए” एकांश ने थोड़ा रुडली कहा, उसे अपने इतने करीब पाकर वो अब इरिटैट हो गया था

“मैं जल्दी करती हु सर” अक्षिता ने एक ड्रॉर खोलते हुए कहा और मन ही मन ये दुआ करने लगी के वो चाबी इसी मे हो और चाबी उसी ड्रॉर मे थी

“यस! मिल गई!” अक्षिता ने बड़ी सी मुस्कान लिए कहा

एकांश ने एक नजर अक्षिता के मुसकुराते हुए चेहरे की ओर देखा, इसी मुस्कान से कभी उसे बेइंतेहा मोहब्बत थी लेकिन अब यही मुस्कान उसे उसके धोके की याद दिला रही थी और अब इसी मुस्कान से उसे नफरत थी

“तुमने कोई ऑस्कर नहीं जीता है जो इतनी खुश हो रही हो... अब जल्दी मुझे वो फाइलस् ला कर दो” एकांश ने चिल्लाते हुए कहा

एकांश की आवाज सुन कर अक्षिता की स्माइल ही गायब हो गई, उसके जल्दी से जाकर वो फाइलस् लाकर एकांश के टेबल पर रखी और कुछ देर अगले ऑर्डर के इंतजार मे वही खड़ी रही लेकिन एकांश का उसपर ध्यान ही नहीं था वो अपने काम मे लगा हुआ था जैसे उस रूम मे उसके अलावा कोई और हो ही ना

“सर आइ विल टेक माइ लीव नाउ” अक्षिता ने कहा

जिसपर एकांश से बस मुंडी हिला दी और जितना जल्दी हो सके अक्षिता उसके केबिन से बाहर आ गई

केबिन से बाहर आते ही अक्षिता एक दीवार के सहारे टिक कर खड़ी हो गई और उसने एक लंबी सास छोड़ी, पुरानी सभी यादे इस वक्त उसके दिमाग मे चल रही थी, वो कुछ पल तक वैसी ही खड़ी रही

अक्षिता ने जब अपनी आंखे खोली तब पूजा उसे चिंता भरी नजरों से देख रही थी, अक्षिता ने उसे देख के स्माइल पास की और अपने फ्लोर अपने डेस्क की ओर चली गई

दूसरी तरफ अक्षिता के केबिन के बाहर जाते ही एकांश ने भी एक राहत की सास ली, आज 1.5 साल बाद वो उसके इतने करीब थी और इन नजदीकियों से एक भावनाओ का सैलाब इस वक्त एकांश के मन मे उमड़ रहा था

‘नहीं नहीं नहीं उसके बारे मे नहीं सोचना है, तुम बस उससे नफरत करते हो’ एकांश ने अपने आप को समझाया और वापिस अपने काम मे लग गया

***

“कहा गई थी तुम?” अक्षिता के अपनी डेस्क पर आते ही स्वरा ने उससे पूछा

“बॉस को कुछ फाइलस् चाहिए थी” अक्षिता ने सपाट लहजे मे कहा

“अक्षु ठीक को तुम?” रोहन ने पूछा जब उसने अक्षिता को अपना सर पकड़े बैठे देखा

“हा मैं ठीक हु” अक्षिता ने मुसकुराते हुए कहा

“बॉस ने कुछ कह दिया क्या” स्वरा

“वो तो सबके साथ ही रुड है कुछ नया नहीं” अक्षिता ने मुसकुराते हुए कहा लेकिन बस वो जानती थी के एकांश ऐसा क्यू है

“छोड़ो यार बॉस को चलो लंच के लिए चलते है” रोहन ने अपनी सीट पर से उठते हुए कहा

“हा हा चलो” अक्षिता और स्वरा दोनों ने एकसाथ उठते हुए कहा

**

लंच के बाद अक्षिता वापिस अपनी डेस्क पर अपने काम मे लगी हुई थी तभी उसके डेस्क पर रखा फोन फिर से बजा

‘कही ये उसी का कॉल तो नहीं’ अक्षिता ने सोचा और कॉल उठाया और एकांश की आवाज का इंतजार करने लगी लेकिन आवाज आया पूजा का

“अक्षिता बॉस ने तुम्हें वापिस बुलाया है”

और अक्षिता वापिस चल पड़ी एकांश के केबिन की ओर, उसने दरवाजा खटखटाया और जब उसने कम इन कहा तो आराम से दरवाजा खोल के अंदर आई

“ये फाइलस् इस रैक मे अल्फाबेटीकली अरेंज कर दो” एकांश ने बगैर उसकी ओर देखे कहा और अक्षिता ने फाइलस् को देखा

एकांश ने सभी फाइलस् इधर उधर कर दी थी और अब इनको अरेंज करना घंटों का काम था और अक्षिता लग गई काम पे

‘अच्छा हुआ मैंने सही से लंच कर लिया वरना तो बेहोश ही हो जाना था’

फाइलस् जमाते हुए अक्षिता ने मन ही मन कहा

कुछ समय बाद अक्षिता का फोन बजा, उसने एक नजर एकांश को देखा वो अपने काम मे लगा हुआ था उसका इस ओर ध्यान ही नहीं था तो अक्षिता ने कॉल उठाया

“हा रोहन”

“कहा हो यार तुम चलो निकलना है 5 बजे गए”

अक्षिता ने काम मे टाइम की ओर ध्यान ही नहीं दिया था

“तुम लोग जाओ मुझे थोड़ा और वक्त लगेगा” अक्षिता

“लेकिन..”

“तुम लोग जाओ मैं ठीक हु”

अक्षिता ने फोन कट किया, इस पूरे समय एकांश उसे ही देख रहा था और उसने जब उसे देखा तो उसे अपनी ओर ही देखता पाया

“काम खतम करके तुम जा सकती हो” एकांश

जिसके बाद अक्षिता वापिस काम मे लग गई इसी बीच उसकी मा का भी कॉल आया तो उसने उन्हे भी वही बताया

थोड़ी देर बाद उसने देखा के एकांश अपनी चीज़े समेट के जा रहा है और जाते जाते

“फिनिश द वर्क एण्ड लीव” एकांश उसे कह गया

अक्षिता ने एक नजर फाइलस् पर डाली, अब भी एक घंटे का काम बचा था, उसने जाकर अपने लिए एक कॉफी बनाई और वापिस काम मे लग गई 1 घंटे मे उसमे सारी फाइलस् अरेंज कर दी थी और एकांश का केबिन लॉक करके निकल गई, आज उसे काफी ज्यादा लेट हो गया था

‘बी रेडी अक्षु, ये यह तुम्हारी जिंदगी झंड करने वाला है’ अक्षिता ने मन ही मन सोचा और अपने घर की ओर बढ़ गई अब उसमे और कुछ सोचने करने की शक्ति नहीं बची थी....

क्रमश:
 
अपडेट 3

अगले दिन एकांश ऑफिस आया और सीधा अपने केबिन की ओर बढ़ गया, उसका केबिन नीचे वाले फ्लोर पर जहा बाकी सब लोग काम कर रहे थे वहा शिफ्ट कर दिया गया था, उसके फ्लोर पर और उसके केबिन मे काम चल रहा था और जब तक वो पूरा हो एकांश को यही से काम करना था

केबिन मे पहुचते ही एकांश ने फाइलस् की रैक पर नजर डाली तो उसने देखा के सभी फाइलस् उसके बताए मुताबिक सही तरीके से लगी हुई थी जिसे देख उसके चेहरे पे मुस्कान आ गई साथ ही ये खयाल भी आया के उसके जाने के बाद भी अक्षिता को ये सब सही करने मे कम से कम 2 घंटे लगे होंगे,

एकांश अपनी जगह से उठा और अपने केबिन मे लगी कांच की खिड़की से बाहर देखने लगा, एकांश वही से अपने सभी स्टाफ को काम करते देख सकता था और सबको देखते हुए एकांश की नजरे जाकर ठहरी अक्षिता पर जो अपना काम कर रही थी और साथ ही स्वरा की बताई कीसी बात पर हस भी रही थी और उसे ऐसे हसते हुए एकांश से देखा नहीं जा रहा था, एकांश ने वापिस अपने आप को काम मे उलझा लिया,

काम मे वक्त कैसे बीता एकांश को पता ही नहीं चला और अपना काम निपटा कर वो लंच करने जाने ही वाला था के एकांश के केबिन के दरवाजे पर नॉक हुआ

“कम इन”

“सर, आप को केबिन मे कौनसा कलर करवाना है वो पूछना था, ये रहा केटलॉग” पूजा ने केबिन मे आते हुए कहा

“केटलॉग रहने दो कलर मुझे पता है, ग्रे कलर” एकांश ने कहा वही पूजा वो आगे कुछ कहेगा इसका इंतजार करने लगी और पूजा अब भी वही खड़ी है ये देख एकांश ने पूछा

“क्या हुआ? और कोई काम है?”

“सर बस सिर्फ ग्रे कलर?” पूजा ने पूछा लेकिन बदले मे एकांश ने बस उसे घूर के देखा और इसीके साथ पूजा को उसका जवाब मिल गया था वो बगैर कुछ बोले झट से वहा से चली गई

पूजा के जाने के बाद अपना काम निपटा कर जब एकांश लंच के लिए बाहर आया तो उसने देखा के अक्षिता रोहन के साथ हसते हुए कैफै से बाहर आ रही थी, अक्षिता ने रोहन से कुछ कहा जिसे सुन वो उसके पीछे भागने लगा था, अक्षिता को ऐसे रोहन के साथ बेफिक्र बर्ताव करता एकांश से देखा नही जा रहा था, भले ही वो उससे नफरत करने लगा था लेकिन दिल के कीसी कोने मे दबा वो प्रेम अक्षिता को रोहन के साथ नही देख पा रहा था और और एकांश गुस्से मे उबलने लगा था, तभी उसके दिमाग मे एक आइडीया आया, उसे समझ आ गया था के अब उसे क्या करना है, वो वापिस अपने केबिन मे गया और एक कॉल लगाया

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लंच के बाद सभी लोग अपनी अपनी जगह बैठ कर अपने अपने काम मे लगे हुए थे तभी पूरा महोल एकदम से शांत हो गया, सबसे सामने देखा तो पाया के उनका बॉस वहा अपनी जेब मे हाथ डाले वहा खड़ा था

“हैलो एव्रीवन, आपके लिए एक अनाउन्स्मेन्ट है, प्लीज सभी लोग यहा आ जाइए” एचआर डिपार्ट्मन्ट के हेड मिस्टर शेखर ने कहा और वहा मौजूद सभी लोग उनके सामने जाकर खड़े हो गए वही अक्षिता इस सब मे थोड़ा पीछे ही रही भीड़ मे छिपी हुई एकदम पीछे, एकांश ने एक नजर सबको देखा और फिर शेखर को आगे बढ़ने कहा

“आप सभी को यहा इसिलौए बुलाया है क्युकी सर को एक पर्सनल अससिस्टेंट चाहिए और आप ही मे से कीसी एक को इस पोजीशन के चुना जाएगा”

ये बात सुनते ही वहा मौजूद लड़कियों के मन मे तो मानो लड्डू फूटने लगे थे और वो एकांश के साथ काम करने के सपने देखने लगी थी वही अक्षिता को घबराहट होने लगी थी

अक्षिता ने एकांश को देखा तो उसने पाया के वो उसे ही देख रहा था, एकांश की नजरे केवल अक्षिता पर थी, अक्षिता ने अपने आप को स्वरा के पीछे छिपा लिया था और बस यही दुआ कर रही थी के वो उसे न चुने

एकांश के हाथ मे कुछ पेपर्स थे जिनमे सभी की डिटेल्स थी एकांश ने एक नजर उन पेपर्स पर डाली और उसमे से एक पेपर निकाल कर शेखर को दिया, शेखर ने उस सेलेक्टेड प्रोफाइल को देखा और बाकी लोगों को देखते बोला

“मिस अक्षिता पांडे” शेखर ने भीड़ मे अक्षिता को ढूंढते हुए कहा वही अक्षिता ने जैसे ही अपना नाम सुन वो वही जम गई थी, अक्षिता अच्छी तरह जानती थी के एकांश ये सब जान बुझ के कर रहा था

सभी लोगों ने हट कर अक्षिता के लिए रास्ता बनाया लेकिन वो अपनी जगह से नहीं हिली

“अक्षिता” स्वरा ने थोड़ा जोर से कहा और उसे आगे आने को कहा, अक्षिता ने अपनी आंखे बंद कर रखी थी, उसने जैसे ही अपनी आंखे खोली तो पाया के सब उसे ही देख रहे थे, कुछ की नजरों मे जलन थी कुछ मे गुस्सा और कुछ लोग उसके लिए खुश थे जैसे पूजा, स्वरा रोहन और खुद शेखर....

“आगे आओ अक्षिता” शेखर ने अक्षिता को आगे आने कहा

“सर मैं इस पज़िशन के लिए क्वालफाइड भी नहीं हु” अक्षिता ने उनलोगों की ओर बढ़ते हुए शेखर से कहा लेकिन शेखर के कुछ बोलने से पहले एकांश बोल पड़ा

“मैं यहा का बॉस हु, मैंने तुम्हें सिलेक्ट किया है कोई दिक्कत हो तो टॉक टु मी” एकांश ने कहा और बदले मे अक्षिता ने बस गर्दन हिला दी

“सर मैं आपकी सेक्रेटरी की पोजीशन के लिए क्वालफाइड नहीं हु” अक्षिता नर्वसली एकांश को देखते हुए कहा

“कौन लायक है कौन नहीं ये मैं डिसाइड करूंगा मिस पांडे”

“लेकिन...“

“मिस पांडे, मेरे सवालों का बस हा या ना मे जावब देना” एकांश ने सीरीअस होकर कहा

“जी सर”

“आप इस कंपनी के बारे मे जानती है?”

“यस सर”

“आपको ये पता है के किसका यहा क्या काम है?”

“यस सर”

“क्या आपको पता है सभी फाइलस् कहा रखी है और किस फाइल मे क्या है?”

“जी सर”

“क्या आपको पता है मीटिंग्स कैसे अरेंज की जाती है उनका स्केजूल कैसे बनाया जता है?”

“यस सर”

“क्या आपको पता है कंपनी के सभी प्राइवेट और कान्फडेन्चल डॉक्युमेंट्स और फाइलस् कहा रखी है?”

“यस सर”

“अब आखरी सवाल क्या आपको अपने सूपिरीअर के, अपने बॉस के ऑर्डर फॉलो करने आते है?” एकांश ने पूछा

“यस सर”

एक ओर यह ये सेशन चल रहा था वही सारा स्टाफ अपनी आँखों के सामने ये केबीसी का खेल देख रहा था, कीसी ने भी एकांश को इतना बोलते नहीं सुना था और काइयों को तो ये भी समझ नहीं आ रहा था के अक्षिता मना क्यू कर रही थी..

“देखो तुमने अभी खुद ही अपने सभी डाउट का जवाब दे दिया है” एकांश के मुस्कुराते हुए कहा वही अक्षिता वहा थोड़ी कन्फ्यूज़ खड़ी रही

“जो कोई भी मेरा सेक्रेटरी बनेगा उसे ये सब बाते पता होनी चाहिए और तुम्हें ये सब पता है, सो यू आर क्वालफाइड फॉर दिस पोज़िशन” एकांश ने सपाट चेहरे से कहा

“लेकिन सर...” पर अक्षिता अपनी बात पूरी करती उससे पहले ही

“कोई लेकिन नहीं, आइ वॉन्ट यू तो वर्क आस माइ पीए फर्म टूमारो” एकांश ने फरमान सुन दिया था और वो अपने केबिन मे चला गया

सारा स्टाफ अब भी वही खड़ा ये सब देख रहा था, ये उनका देखा सबसे आसान इंटरव्यू था लेकिन एकांश के सामने खड़ा रहना सबके लिए उतना ही मुश्किल था

शेखर और रोहन खुश थे के अक्षिता का प्रमोशन हो गया था और स्वरा तो खुशी मे पागल हो रही थी वही अक्षिता शॉक मे थी

“ये अभी अभी क्या हुआ” अक्षिता ने रोहन और स्वरा को देखते हुए कहा

“तुम्हारा प्रमोशन हो गया है” रोहन और स्वरा ने खुश होते हुए कहा लेकिन अक्षिता जानती थी के ये उतनी खुश होने वाली बात नहीं थी..

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“कम इन” एकांश अपने केबिन मे काम कर रहा था और जैसे ही उसने दरवाजे पर नॉक सुन उसने उस शक्स को अंदर आने कहा

“सर...” अक्षिता ने कहा और एकांश ने उसे देखा

“क्या हुआ”

“सर, मुझे ये प्रमोशन नहीं चाहिए, प्लीज ये कीसी ऐसे को दीजिए को इसके काबिल हो” अक्षिता ने दरवाजे के पास खड़े होकर नजरे झुकाए कहा वो काफी नर्वस थी और एकांश से आंखे नहीं मिला पा रही थी

“तुम्हें लगता है के मैं तुम्हारी बात सुनूँगा या तुम्हारे पास कोई चॉइस है” एकांश ने रूखे स्वर मे कहा

“सर...” लेकिन एकांश ने उसे बीच मे ही रोक दिया

“क्यू?” एकांश ने अपनी जगह से उठते हुए पूछा

“मुझे.. मुझे नहीं लगता मैं ये कर पाऊँगी।“

“क्यू?” एकांश ने अपना सवाल दोहराया और एक एक कदम अक्षिता की ओर बढ़ाने लगा

“क्युकी मुझे ये काम नहीं करना है” अक्षिता ने पीछे सरकते हुए कहा और अब वो दरवाजे के एकदम करीब थी

“क्यू?” एकांश भी अब अक्षिता के पास पहुच चुका था

अक्षिता और एकांश की नजरे मिली, अक्षिता ने उसकी आँखों मे देखा, ये वही आंखे थी जिनमे कभी उसके लिए बेशुमार प्यार था लेकिन अब वहा उसके लिए केवल गुस्सा था

“बताओ तुम्हें ये काम क्यू नहीं चाहिए?” एकांश अक्षिता के और करीब आया

अक्षिता के शब्द उसके गले मे अटक गए थे, एकांश के इतने करीब होने से उससे बोलते नहीं बन रहा था, अक्षिता ने वहा से निकालना चाहा लेकिन एकांश के अपने दोनों हाथ उसके इर्द गिर्द दरवाजे पर रख कर उसे वहा अटका लिया था

“स... सर”

“हम्म...”

एकांश अक्षिता की आँखों मे खोने से अपने आप को रोक नहीं पाया, कुछ पल वो दोनों वैसे ही शांत खड़े रहे, एक दूसरे की आँखों मे खोए और फिर अक्षिता ने अपना चेहरा दूसरी ओर घुमा लिया जिसने एकांश को भी होश मे ला दिया

“तुम प्रमोशन इसीलिए नहीं चाहती क्युकी तुम डरती हो” एकांश ने उसी पोज़िशन मे कहा

“डर? कैसा डर?” अक्षिता ने डरते हुए पूछा

“तुम डरती हो मुझसे, मेरे साथ काम करने से, तुम डरती को के कही.....”

लेकिन एकांश बात पूरी करता उससे पहले ही अक्षिता बोल पड़ी

“मैं नहीं डरती।“

“तो ये सब क्यू?”

“मुझे लगा के कोई मुझसे बेहतर इस पोज़िशन को डिसर्व करता है बस इसीलिए”

“ठीक है फिर कल से अपना नया रोल संभालने तयार रहना” एकांश ने अक्षिता से दूर हटते हुए कहा और उसके हटते ही अक्षिता ने राहत की सास ली और अपनी बढ़ी हुई धड़कनों को काबू करने लगी

अक्षिता कुछ बोलना चाहती थी लेकिन सही शब्दों का चयन नहीं कर पा रही थी

“और कोई डाउट है क्या?” एकांश ने जब उसको कुछ पल वही खड़ा देखा तो उसकी ओर बढ़ने लगा और अक्षिता “नहीं” कहकर जल्दी से उसके केबीन से बाहर आ गई और दीवार से सटकर अपनी साँसों को काबू करने लगी

‘यह क्या हो रहा है मेरे साथ? मैंने उसे दूर क्यू नहीं हटाया? मुझे ऐसे कंट्रोल नहीं खोना चाहिए था, नहीं ये मैं नहीं होने दे सकती, मुझे उससे जितना हो सके दूर रहना होगा’ अक्षिता ने मन ही मन सोचा और वापिस अपनी डेस्क पर जाकर अपना काम करने लगी

अभी अक्षिता अपनी डेस्क पर काम कर ही रही थी के पीछे से उसे कीसी ने पोंक किया, मूड कर देखा तो पाया के स्वरा और रोहन अपनी बड़ी सी स्माइल लिए उसे देख रहे थे, उनके लिए थे आज उनकी दोस्त का प्रमोशन हुआ था और अब वो अक्षिता से पार्टी मांग रहे थे और अक्षिता भी उनके साथ खुश थी....

क्रमश:
 
अपडेट 4

अगले दिन ऑफिस मे

“मिस पांडे आप लेट है’ एकांश ने बगैर अक्षिता की ओर देखते हुए कहा

अक्षिता ने अपनी घड़ी मे देखा तो उसमे 9.34 हो रहे थे फिर उसने कन्फ्यूज़ लुक के साथ एकांश को देखा

“मैंने कहा था के आप इक्सेक्ट्लि 9.30 को मेरे केबिन मे होनी चाहिए और अब 9.34 हो रहे है” एकांश ने सपाट टोन मे कहा

“ओह, सॉरी सर” अक्षिता ने कहा

“मुझे सॉरी सुनना पसंद नहीं है तो बेहतर होगा के आप कोई गलती ही न करे”

“ओके सर” अक्षिता ने हा मे गर्दन हिला दी

“अब चूंकि आप मेरी पीए है कुछ बाते है जो आपको फॉलो करनी होंगी, कुछ रुल्स है” एकांश ने कहा और रुक कर अक्षिता को देखा तो उसने हा मे गर्दन हिलाई फिर एकांश आगे बोला

“रोज आप इक्सेक्ट्लि 9.30 पे यहा प्रेजेंट होनी चाहिए और आपके हाथ मे मेरी ब्लैक कॉफी होनी चाहिए” एकांश बोलते हुए फिर रुक और अक्षिता का रिएक्शन देखने लगा

“कॉफी?” अक्षिता ने पूछा

“यस”

“लेकिन वो मेरा काम नहीं है” अक्षिता ने सपाट आवाज मे जवाब दिया

“ये मेरे पीए का काम है जो की आजसे तुम हो” एकांश ने भी उसी टोन मे कहा

“लेकिन..”

“देखो मुझे तुम्हें कुछ इक्स्प्लैन करने की जरूरत नहीं है... मैं बॉस हु तुम एम्प्लोयी हो और तुम्हारा काम है मेरे ऑर्डर्स मानना, तो अब इसपे और कोई बात नहीं होगी” एकांश ने बात खतम करते हुए कहा और अक्षिता बस शांति से खड़ी रही

”इस दिस क्लीयर टु यू मिस पांडे?”

“यस सर”

“ओके तो जाओ और मेरी कॉफी लेकर आओ” एकांश ने ऑर्डर छोडा और वापिस काम मे लग गया

अक्षिता भी झटके के साथ उसके केबिन से निकली और कैफै की ओर गई जहा एकांश की कॉफी तयार रखी हुई थी, उसने वहा से कॉफी ली और वापिस केबिन मे आई

“सर आपकी कॉफी”

अक्षिता ने उसके टेबल पर कॉफी रखते हुए कहा और इस सब मे एकांश ने एक नजर भी अक्षिता को नहीं देखा था

“मुझे शर्मा और धर्माधिकारी की फाइलस् चाहिए” एकांश ने कॉफी का घूंट लेते हुए ऑर्डर छोड़ा

“ओके सर” जिसके बाद अक्षिता ने वहा रैक मे से फाइलस् ढूँढी और उसकी टेबल पर रखी

“नाउ गो एण्ड चेक के मेरे केबिन मे रेनवैशन का काम कहा तक पहुचा है” एकांश ने अगला ऑर्डर छोड़ा और अक्षिता जल्दी से बाहर या गई ये सोच के इसी बहाने वो उससे दूर रहेगी,

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“हाइ अक्षु” लंच के दौरान रोहन ने कैन्टीन मे अक्षिता के सामने मे बैठते हुए कहा

“क्या हुआ तुम्हारा चेहरा क्यू उतरा हुआ है?” स्वरा ने अक्षिता के बगल मे बैठते हुए पूछा

“कुछ नहीं बस थक गई हु” अक्षिता ने कहा

“आज पहला ही दिन है धीरे धीरे आदत हो जाएगी” रोहन ने समझाया

“हा और नहीं तो क्या”

“तो क्या ऑर्डर कर रहे है हम?” रोहन ने दोनों लड़कियों को देख के पूछा और खाने के नाम से दोनों के चेहरे खिल उठे

“बिरयानी” “बर्गर” स्वरा और अक्षिता दोनों एकसाथ बोल पड़ी और एकदूसरे को देखा

“मुझे बिरयानी खानी है” अक्षिता ने स्वरा को देखते हुए कहा

“और मुझे बर्गर चाहिए” स्वरा ने भी वापिस अक्षिता को घूर के देखा

“तुम रोज वही तो खाती को यार स्वरा”

“अक्षु मैं सिर्फ कभी कभी बर्गर ऑर्डर करती हु”

“और वो कभी कभी रोज होता है”

“नहीं”

“हा”

“नहीं”

“हा”

“नहीं”

“हा”

“नहीं बोला न”

“अरे चुप हो जाओ यार” रोहन को आखिर चिल्ला कर उन दोनों को चुप करवाना पड़ा

“तुम लोग के ये बेफिजूल के झगड़े के चक्कर मे लंच ब्रेक खतम हो जाएगा, आज मैं ऑर्डर करूंगा” रोहन ने दोनों को चुप कराते हुए कहा और अब वो दोनों उसे आँखों मे मासूमियत लिए देख रही थी

“ऐसे मत देखो, मैं तुम्हारी भोली शक्लों पे नहीं जाने वाला, मैं सेंडविच बुला रहा हु जो ऑइल फ्री है फैट फ्री और सेहत के लिए ठीक है”

अब जाहीर है बिरयानी और बर्गर के लिए लड़ने वाली लड़कियों को रोहन का सेंडविच पसंद नहीं आने वाला था

“पागल कही का” अक्षिता और स्वरा पुटपुटाई

“सुनाई दिया मुझे”

“उसी लिए बोला था” वापिस दोनों साथ मे बोल पड़ी

जिसके बाद इनकी बचकानी हरकतों को नजरंदाज करते हुए रोहन ऑर्डर लाने चला गया और उसे परेशान करके ये दोनों इधर हसने लगी थी,

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लंच निपटा कर सभी वापिस अपने अपने काम मे लग चुके थे और अक्षिता एकांश के केबिन के बाहर खड़ी थी

“कम इन” नॉक करने के बाद एकांश की सर्द सपाट आवाज अक्षिता को सुनाई दी और वो सोचने लगी ये ये इतना सडू कैसे बन गया, जिस एकांश को वो कभी जानती थी वो ऐसा नहीं था और उन्ही बातों के बारे मे सोचते हुए अक्षिता पुरानी यादों मे खोने लगी थी और नजाने कब तक वो दरवाजे के सामने पुरानी यादों मे खोई चेहरे पर मुस्कान लिए खड़ी थी और जब उसकी तंद्री टूटी और उसके ध्यान मे आया ये वो वहा खड़ी खड़ी सपने देख रही थी वो अंदर जाने के लिए आगे बढ़ी और जैसे ही उसकी नजरे सामने दरवाजे पर गई वो थोड़ा चौकी

क्युकी दरवाजे पर उसका बॉस खड़ा था और वो उसे कुछ यू देख रहा था मानो वो कोई मेंटल हो और अभी पागल खाने से भाग कर आई हो

अक्षिता के दरवाजा खटखटाने के बाद एकांश ने उसे 3 बार अंदर आने कहा था और जब सामने से कोई रीस्पान्स नहीं आया तो उसने खुद ही उठ कर दरवाजा खोला और वहा अक्षिता को खुद मे ही खोया हुआ पाया

एकांश अक्षिता के चेहरे पर आ रहे अलग अलग भाव देख सकता था.. कभी ऐसा लगता वो कुछ सोच रही है कभी कुछ कन्फ्यूज़ दिखती तो कभी खुद से हस रही थी और जब उसकी तंद्री भंग हुई तब उसका वो चौकने वाला रिएक्शन हर एक चीज को एकांश ने बारकाई से देखा था

वैसे तो उसे इस वक्त अक्षिता पर गुस्सा होना चाहिए था लेकिन वो भी अपने आप को उसके खूबसूरत चेहरे मे खोने से नहीं रोक पाया था और अब दोनों ही वापिस नॉर्मल स्टेट मे आ चुके थे

“आर यू मेंटल?” एकांश ने चिढ़ कर कहा

“नहीं तो” अक्षिता ने सौम्यता से जवाब दिया

“तो फिर दरवाजा खटखटाने के बाद यह बाहर खड़ी होकर क्या कर रही थी? मैंने कितनी बार आवाज दी अंदर से लेकिन तुम तो अपनी ही दुनिया मे खोई हुई थी कुछ खयाल है तुम कहा हो क्या कर रही हो?” एकांश ने भड़कते हुए कहा

एकांश अक्षिता को डांट रहा था और वो गर्दन झुकाए चुप चाप सब सुन रही थी, उसे पता भी नहीं चला था कब वो अपने की खयालों मे खो गई थी

“अब अंदर आकार कुछ काम करोगी या ऐसे ही कीसी पुतले की तरह खड़ा रहना है?” एकांश वापिस चिल्लाया और अंदर जाकर अपनी जगह पर बैठ गया

एकांश ने अक्षिता को एक लेटर लिखने कहा जो वो बताने वाला था और अक्षिता भी लिखने के लिए रेडी हो गई और कुछ टाइम तक सही से लिखा भी लेकिन फिर एकांश ने अपने बोलने की स्पीड बढ़ा दी जिसमे अक्षिता पीछे छूट गई

“हो गया?” एकांश ने पूछा

“वो.. स.. सर आप प्लीज एक बार रीपीट करेंगे?” अक्षिता ने डरते हुए पूछा

“क्यू? तुमने लिखा नहीं?”

“वो आप बीच मे बहुत फास्ट बोल रहे थे इसीलिए...“

“अच्छा तो अब ये मेरी गलती है?” एकांश ने गुस्से मे पूछा

“नहीं सर मेरी गलती है मेरा ध्यान भटक गया था ये मेरा पहला ही दिन है इस काम का” अक्षिता ने एकांश की आँखों मे देखते हुए कहा

“यू आर गुड फॉर नथिंग” एकांश ने रुडली कहा

“इसीलिए मैंने कहा था के मैं इस काम के लिए सही नहीं हु” अब अक्षिता ने भी अपना आवाज बढ़ाते हुए कहा

एकांश ने उसे घूर के देखा और अक्षिता ने झट से अपनी नजरे झुका ली और एकांश वापिस उसे बताने लगा और अक्षिता ने भी इस बार सब सही से लिखा और धीमे से थैंक यू कहा और वहा से जाने लगी

“कान्सन्ट्रैट ऑन योर वर्क” एकांश ने अपनी हमेशा वाली सपाट आवाज मे अक्षिता से कहा और अक्षिता वहा से निकल गई..

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“अक्षु तू पागल है क्या?”

घर जाते हुए जब अक्षिता ने रोहन और स्वरा को अपने आज के पराक्रम के बारे मे बताया तब उन दोनों के मुह से एकसाथ निकला वही अक्षिता को भी लग रहा था के उसे ऐसे ट्रैन्स मे नहीं जाना चाहिए था लेकिन ये खयाल बस कुछ ही पालो का था, जैसे ही उसने अपने दोनों दोस्तों को अपनी बेवकूफी पर हसता हुआ देखा ये खयाल उसके दिमाग से गायब हो गया

“ज्यादा हसो मत मुझे पता है के बात बेवकूफी भरी थी लेकिन पता नहीं मैं क्या सोच रही थी” अक्षिता ने ये बात छुपा ली थी के वो उसके और एकांश के बारे मे ही सोच रही थी

“नो वन्डर ही लूक्ड एट यू लाइक यू आर सम मेंटल असायलम पैशन्ट” स्वरा ने हसते हुए कहा और अक्षिता ने उसे हल्के गुस्से से देखा

वो बीच पार्किंग लॉट मे पागलों की तरह हस रहे थे और इसपर ब्रेक तब लगा जब एकांश उनके पास से होकर गुजरा और अपनी कार तक जाते हुए उन्हे अजीब नजरों के साथ देखता हुआ गया

“बढ़िया! अब इसको लगेगा के हम भी तुम्हारी ही तरह कोई पागल लोग है” रोहन ने अक्षिता से कहा और वो भी अपनी गाड़ियों की ओर बढ़ गए...

क्रमश:
 
अपडेट 5

अक्षिता ने ऑफिस पार्किंग मे अपनी गाड़ी लगाई और वो ऑफिस बिल्डिंग की ओर बढ़ गई वही एकदम उसी समय पर एकांश भी अपनी कार से वहा पहुचा और ऑफिस बिल्डिंग की ओर जाने लगा, अक्षिता और एकांश दोनों की नजरे अभी एकदूसरे पर नहीं पड़ी थी

और दोनों ने एकदूसरे को तब देखा जब वो ऑफिस के एंटेरेंस पर एकदूसरे से टकराए..

दोनों ने एकदूसरे की छुअन को काफी समय बाद महसूस किया था जिससे दोनों ही कुछ पालो के लिए खो से गए थे दोनों की आपस मे नजरे मिली और कुछ पल वो वैसे ही रहे

“सॉरी मिस्टर रघुवंशी” अक्षिता ने झट से कहा और उससे दूर हो गई

वही एकांश अब भी अपनी और अक्षिता की पुरानी यादों मे खोया हुआ था, उसकी तंद्री तब टूटी जब उसकी आँखों ने अक्षिता को अपने से दूर जाता देखा..

दोनों ने बिल्डिंग मे प्रवेश किया और लिफ्ट की ओर बढ़ गए एकांश तो लिफ्ट तक जाकर रुक गया लेकिन अक्षिता आगे बढ़ गई

“मिस पांडे, एलवैटर इस हियर” एकांश ने जब अक्षिता को सीढ़ियों की ओर बढ़ता देखा तो लिफ्ट की ओर इशारा करते हुए कहा, अब ये वो भी नहीं जानता था के उसने अक्षिता को क्यू रोका था क्युकी उसे इस बात की कोई फिक्र नहीं होनी चाहिए के अक्षिता लिफ्ट से जाए या सीढ़ियों से, अक्षिता ने एक नजर एकांश को देखा और फिर लिफ्ट को देखा

“मैं लिफ्ट यूज नहीं करती सर, आइ ऑल्वीज़ यूज स्टेर्स” अक्षिता ने सपाट चेहरे के साथ कहा और बगैर एकांश का रिप्लाइ सुने वहा से चली गई और एकांश उसे जाते हुए देखता रहा...

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वो अपने हाथों मे अपने कीसी दोस्त के लिए लाल गुलाब के फूलों का बुके लेकर एक फूलों की दुकान से निकली थी, उसके चेहरे पर एक बड़ी सी स्माइल थी..

वही वो अपनी मा के जन्मदिन के लिए बहुत बढ़िया गिफ्ट लेकर मुसकुराते हुए गिफ्ट शॉप से बाहर आ रहा था...

दोनों ने ही एकदूसरे को नहीं देखा था दोनों ही अपने अपने गिफ्ट्स को देख कर खुश हो रहे थे और सामने बगैर ध्यान दिए चल रहे थे दोनों ही काफी खुश लग रहे थे और इस चक्कर मे दोनों किधर जा रहे है इसपर दोनों ने ही ध्यान नहीं दिया और दोनों आपस मे टकरा गए

उसने अपने इन्स्टिंगक्ट से अपने हाथों से उसकी कमर को पकड़ा ताकि उसे गिरने से बचा सके और गिरने के डर से उसने अपनी आंखे बंद कर रखी थी

गुलाब के फूलों का गुलदस्ता उसके हाथों से ऊपर छूट कर उनपर अपनी पंखुड़िया बिखेरता नीचे गिर गया था..

यह पहली बार था जब उसने उस परी को देखा था और उसकी खूबसूरती मे अपने आप को खोने से रोक नहीं पाया था, उसकी नजरे इस खूबसूरत चेहरे पर थम सी गई थी, उसके उन लंबे गेसूओ मे फसी कुछ गुलाब की पंखुड़िया उसे लुभा रही थी

दूसरी तरफ उसने धीरे धीरे अपनी आंखे खोली और अपनी ओर उन गहरी काली आँखों को देखता पा कर वो थोड़ी शॉक थी, उसका ध्यान भी उसके चेहरे से नहीं हट रहा था

दोनों वैसे की कुछ पल एकदूसरे मे खोए रहे और दोनों की तंद्री तब टूटी जब उन्होंने अपने आसपास आवाजे सुनी, देखने पर पता चला के मॉल मे मौजूद लोग उन्हे ही देख रहे थे, वो दोनों एकदूसरे से अलग हटे और अब उन्हे अपने सामान का ध्यान आया

“मेरे फूल”

“मेरा गिफ्ट”

दोनों के मुह से एकसाथ निकला और वो अपने अपने गिफ्ट्स उठाने लगे

“तुम देख के नहीं चल सकते क्या” उसने चिढ़ कर कहा

“ये बात तो तुम पर भी लागू होती है मैडम” उसने भी उसी भाषा मे जवाब दिया

“तुम्हारी वजह से मेरे सारे फूल बर्बाद हो गए”

“और तुम्हारी वजह से मेरा गिफ्ट टूट गया होगा”

“तुम्हारा गिफ्ट बॉक्स मे पैक है उसे कुछ नहीं हुआ होगा लेकिन मेरे फूल” उसने मॉल मे बिखरे गुलाब के फूलों को देखते हुए मायूसी के साथ कहा

उसने उसके चेहरे को देखा उसकी आँखों मे पानी जमने लगा था और अब उसे बुरा लग रहा था

उसने नीचे से सभी फूल उठाए और उनको एक कवर मे जमाया और खड़ा हुआ वो बस उसकी हर हरकत को देख रही थी

उसने उस बोके को लगभग ठीक करके मुसकुराते हुए उसके हाथ मे थमाया और उसने भी जब देखा के गुलदस्ता ठीक लग रहा है तो मुसकुराते हुए ले लिया और उसे ऐसे स्माइल करता देख उस बंदे का दिल जोरों से धडक रहा था

“थैंक यू, आइ होप मेरी वजह से आपका गिफ्ट खराब ना हुआ हो”

“अरे नहीं ठीक है”

कुछ पल दोनों के बीच शांत छाई रही

“उम्म... आइ एम एकांश” उसने उस लड़की की ओर अपना हाथ बढ़ाते हुए कहा

“अक्षिता..” उसने भी स्माइल के साथ उससे हाथ मिलाया

यही उनकी पहली मुलाकात थी, यही से तो उनकी कहानी शुरू हुई थी...



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एकांश ने अपनी आंखे खोल आजू बाजू देखा, अपनी और अक्षिता की पहनी मुलाकात को याद करते हुए उसने चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ गई थी वो अक्सर सोचता के सच मे क्या वो सब झूठ था..

एकांश अपने खयालों से बाहर आया और अपने केबिन मे बने ग्लास विंडो से अपने स्टाफ को काम करता देखने लगा और फिर उसकी नजरे उसपर पड़ी.. अक्षिता अपनी जगह पर बैठी थी

अक्षिता ना तो आज कीसी से बात कर रही थी ना ही हस रही थी जैसा रोज होता था, पिछले एक हफ्ते से वो बराबर 9.30 बजे ऑफिस मे होती थी अपने हाथ मे एकांश की कॉफी लिए, उसके बताए हर काम कर रही थी और एकांश ने भी अक्षिता को आज जितना उदासीन नहीं देखा था

‘मुझे उसकी इतनी चिंता क्यू हो रही है’ एकांश मे मन मे सवाल उठा और उसने उसे वही दबा दिया

जब एकांश पलट कर अपनी जगह जाने ही वाला था के उसने एक लड़के को अक्षिता के पास जाते देखा और वो कोई और नहीं रोहन था, रोहन ने अपना हाथ अक्षिता के कंधे पर रखा और अक्षिता ने मूड कर उसे देखा, अब उन दोनों मे क्या बात हुई ये एकांश नहीं सुन पाया, वो कॉर्नर मे रखे वाटर फ़िल्टर के पास जाकर बाते करने लगे, एकांश ने जब देखा के अक्षिता ने रोहन को गले लगा लिया है और कुछ पल वैसी ही रही तब एकांश की त्योरीय चढ़ गई अपनी जलन मे वो ये नहीं देखा पाया के अक्षिता अपने दोस्त के कंधे को सहारा बना कर रो रही थी.. एकांश ने एक कड़वी मुस्कान से उन्हे देखा और उसके दिमाग मे एक प्लान आया...

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“यस सर” एकांश के बुलाने पर अक्षिता उसके केबिन मे आ गई थी

“मिस पांडे जाओ और देखो ऊपर मेरे केबिन मे दीवार पेंट करने के लिए कौनसा कलर यूज हो रहा है और मुझे बताओ” एकांश ने बगैर उसकी ओर देखे कहा

‘क्या बोल था तुमने, तुम लिफ्ट यूज नहीं करती हैना? अब देखते है’ एकांश ने मन ही मन सोचा

अक्षिता एकांश की बात मानते हुए सीढ़ियों से ऊपर वाले फ्लोर पर गई और रूम चेक किया जिसे पूरे ग्रे कलर मे पेंट किया गया था और वो काफी क्लासी लग रहा था और यही बात अक्षिता ने आकार एकांश को बताई और अब एकांश के पास उसके लिए अगला ऑर्डर तयार था

“सर, पूरे रूम मे ग्रे कलर हुआ है” अक्षिता

“ओके, चेक करो वो कौनसा प्लाइवुड यूज कर रहे है, वो क्लासी और वॉटर्प्रूफ है न?” एकांश ने अगला ऑर्डर छोड़ा और अक्षिता ने हा मे गर्दन हिलाई और काम पर लग गई

अक्षिता वापिस सीढ़ियों से ऊपर गई, उसने सभी डिटेल्स चेक की, जो बाते एकांश ने नहीं बोली थी वो भी देखि ताकि वो और कुछ बोले तो जवाब दे सके

“सर, जो प्लाइवुड यूज हो रहा है मटैलिक ब्लैक कलर का है क्लासी है और वॉटर्प्रूफ भी है” अक्षिता ने कहा

“तुम्हें कैसे पता वॉटर्प्रूफ है?” एकांश ने अक्षिता को देखते हुए पूछा जो हल्का सा हाँफ रही थी

“मैंने डिजाइनर से प्लाइवुड का गरेंटि सर्टिफिकेट दिखने कहा था”

“हम्म, ठीक है मेरे लिए कॉफी ले आओ” अगला ऑर्डर

अक्षिता बगैर कुछ बोले कॉफी लाने चली गई..

‘ये सब कुछ एक बारी मे नहीं बोल सकता था’ उसके मन मे खयाल आया

कैफै मे आई तो वहा कूक नहीं था तो अक्षिता को खुद एकांश के लिए कॉफी बनानी पड़ी जिसे लेकर वो वापिस केबिन मे आई

“सर आपकी कॉफी” अक्षिता ने कॉफी टेबल पर रखते हुए कहा

एकांश ने कॉफी का एक घूंट लिया जिसने उसे थोड़ा चौका दिया, कॉफी बहुत शानदार बनी थी जिसका टैस्ट भी अलग था ये बिल्कुल वैसी थी जैसी उसे पसंद थी

“सर, मैं जाऊ?” अक्षिता ने थकी हुई आवाज मे पूछा

“नहीं, यू नीड़ तो सुपरवाइज़ द वर्क इन माइ केबिन एण्ड रिपोर्ट टु मी” एकांश ने अलग ऑर्डर छोड़ दिया

अक्षिता धीरे धीरे सीढ़िया चढ़ रही थी और अब लगातार ऊपर नीचे करने से उसके पैर दर्द करने लग गए थे, वो वहा पहुच कर चलते हुए काम को देखने लगी, अक्षिता को इस कदर थका हुआ देख पूजा ने उसे पानी ऑफर किया और अक्षिता ने ले भी लिया प्यास तो उसे बहुत लगी थी, अक्षिता ने पानी पीकर कुछ वक्त और चल रहे काम पर नजर रखी

“सर, सब काम सही चल रहा है, पेंटिंग वर्क खतम हो गया है, सभी कबीनेट्स बन गए है, विंडो के ग्लास भी आ गए है बस कबीनेट्स और ग्लास की फिटिंग बची है” अक्षिता ने एकांश को प्रोग्रेस बताई

एकांश कुछ पल खामोश रहा वही अक्षिता बस वहा से निकल कर शांति से कही बैठना चाहती थी, उसका पूरा बदन दर्द कर रहा था

“सर, कुछ मिनट मे लंच ब्रेक होने वाला है मैं जाऊ?” अक्षिता ने दोबारा पूछा जिसपर एकांश ने हामी भर दी और अपने काम मे लगा रहा वही अक्षिता जितनी जल्दी हो सके वहा से निकल गई..

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लंच के दौरान रोहन और स्वरा ने उसके मुरझाए चेहरे को देख क्या हुआ है पूछा तो अक्षिता ने बस वो थक गई है कह कर बात को टाल दिया और चुप चाप लंच खाया..

लंच के बाद अक्षिता अपनी डेस्क पर अपना सर पकड़े बैठी ही थी के तभी उसका फोन बजा और वो किसका होगा ये जानते हुए अक्षिता ने एक लंबी सास छोड़ी

“यस सर” अक्षिता ने फोन उठाते हुए कहा

“इन माइ केबिन, नाउ” और फोन कट

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“मुझे यहा धर्माधिकारी की फाइल नहीं मिल रही है शायद मेरी कार मे है... गो एण्ड गेट इट” एकांश का अगला ऑर्डर तयार था

अक्षिता केबिन से बाहर आई और सीढ़ियों से तीन माले नीचे उतरी, एकांश की कार तक पहुची, ड्राइवर से कार खुलवाई, वहा उसे वो फाइल मिल गई जिसे लेकर वो वापिस तीन माले चढ़ कर एकांश के केबिन मे पहुची

“ये रही फाइल सर” अक्षिता ने हाफते हुए अपना पसीना पोंछते हुए कहा

“मुझे फाइल अर्जन्टली चाहिए थी, इतना वक्त क्यू लग गया?” एकांश ने पूछा

अक्षिता कुछ नहीं बोली वो जानती थी ये सब जान बुझ कर हो रहा था, उसने कहा था के वो लिफ्ट यूज नहीं करती और बस इसीलिए वो उसे परेशान करने ये सब कर रहा था

अक्षिता को तकलीफ तो हो रही थी लेकिन वो बताना नहीं चाहती थी, वो उसके सामने कमजोर पड़ना नहीं चाहती थी, और उसे ये समाधान तो बिल्कुल नहीं देना चाहती थी के वो जीत गया है..

एकांश ने अक्षिता को देखा जो बगैर कुछ बोले शून्य ने देख रही थी, उसे लगा था या तो वो गुस्सा करेगी या सॉरी बोलेगी लेकिन वो चुप रही और वैसे भी एकांश को कहा फर्क पड़ना था

“नाउ गो एण्ड चेक मेरे केबिन मे काम पूरा हुआ या नहीं” एकांश ने कहा

अक्षिता चुप चाप बगैर कुछ बोले केबिन से बाहर आई और सीढ़ियों की ओर जाने लगी और वही दीवार का सहारा लेकर खड़ी हुई और उसकी आंखे से आँसू की एक बूंद नीचे गिरी, जल्दी ही अक्षिता ने अपने आप को संभाला और सीढ़िया चढ़ कर ऊपर आई,

अक्षिता को यू थकी हुई हालत मे रोबोट की तरह चलता देख पूजा को उसकी चिंता होने लगी

“अक्षिता, कुछ देर बैठ जाओ यहा” पूजा ने कहा

“नहीं मुझे काम कहा तक पहुचा चेक करना है” अक्षिता ने आगे बढ़ते हुए कहा

“तुम यही बैठो मैं देख आती हु” पूजा ने कहा

“थैंक यू पूजा लेकिन तुम्हें तुम्हारा काम भी तो करना है मैं कर लूँगी ये” अक्षिता ने हल्की सी स्माइल के साथ कहा

“अक्षिता ऐसा है के मुझे समझ नहीं आ रहा बॉस तुम्हारे साथ ऐसा क्यू कर रहा है”

“मतलब?” अक्षिता ने पूछा

“मैं इसी फ्लोर पर हु और काम कहा तक पहुचा है ये देखना मेरी ड्यूटी है और मुझे डायरेक्ट बॉस को इन्फॉर्म करना है और जब मैं मेरा काम कर रही हु तो वो वही काम तुम्हें क्यू दे रहा है मुझे समझ नहीं आ रहा” पूजा ने कहा

अक्षिता की आँखों मे पनि जमने लगा था और वो उसे रोकने की पूरी कोशिश कर रही थी

‘वो नफरत करता है मुझसे, बहूत ज्यादा नफरत, शायद मैं इसी की हकदार हु’ अक्षिता ने मन मे खयाल आया

“अक्षिता सॉरी यार पर रो मत प्लीज, मुझे तुम्हें हर्ट नहीं करना था” पूजा ने अक्षिता को रोता देख पैनिक होते हुए कहा

“नहीं तुम्हारी गलती नहीं है” अक्षिता ने अपने आँसू पोंछे और उठ कर उसे बताया काम करने लगी, उसने बगैर कुछ बोले एकांश के बताए हर ऑर्डर को फॉलो किया और जब काम खतम हो गया अपने दोस्तों से पार्किंग मे मिल कर घर की ओर निकल गई, उसका पूरा बदन दर्द कर रहा था....

क्रमश:
 
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