Ek Duje ke Vaaste.. - Page 2 - SexBaba
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Ek Duje ke Vaaste..

अपडेट 6

एकांश के केबिन को बन कर कम्प्लीट होने मे और 2 दिन का वक्त लग गया था और एक पूरा दिन लगा था पूरा सामान फाइलस् शिफ्ट करने मे और आज 3 दिनों बाद वो अपने नए केबिन मे था...

इन सभी दिनों मे अक्षिता को सभी काम को सुपरवाइज़ करना पड़ा था और अब चुकी वहा सब इम्पॉर्टन्ट और कान्फडेन्चल फाइलस् थी वो सब सामान अक्षिता को खुद अरेंज करना पड़ा था और इसके लिए अक्षिता को पूरा दिन फाइलस् लिए सीढ़ियों से उप डाउन करना पड़ा था

अक्षिता को देख ऐसा लग रहा था मानो वो अभी गिर पड़ेगी और उसकी हालत देख स्वरा और रोहन को उसकी फिर्क हो रही थी.. उन्होंने के अक्षिता से कहा भी के आराम कर ले इतना काम ना करे लेकिन अक्षिता ने उनकी बात नहीं मानी

अब उनको एकांश पर भी गुस्सा आ रहा था क्युकी पूजा से उन्हे पता चला था एकांश जबरदस्ती अक्षिता से उप डाउन करवा रहा था और एकांश का अक्षिता को इतना काम बताना उन्हे नहीं जम रहा था

रोहन बहुत ज्यादा गुस्से मे था और वो अक्षिता के लिए कुछ ज्यादा ही प्रोटेकटिव था लेकिन स्वरा के समझाने के बाद वो थोड़ा शांत हुआ था, अक्षिता आज कुछ ज्यादा ही थकी हुई लग रही थी और उसे ऐसे इग्ज़ॉस्ट होकर काम करता रोहन से नहीं देखा जा रहा था

वैसे तो स्वरा को भी ये सब नहीं जम रहा था गुस्सा तो उसे भी आ रहा था लेकिन उसने पहले अक्षिता से बात करने के बारे मे सोचा के वो ये सब क्यू कर रही है यू चुप चाप एकांश की हर बात सुन रही है, वो चाहती तो विरोध कर सकती थी,

कल वीकएंड था और रोहन और स्वरा दोनों ने कल अक्षिता ने इस बारे मे बार करने का सोचा।।

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सोमवार का दिन

एकांश हमेशा के जैसे अपने ऑफिस मे आ चुका था और अपने केबिन मे पहुच चुका था इस वक्त सुबह के ठीक 9.30 बज रहे थे और उसके केबिन मे आते ही उसे अपने डोर पर नॉक सुनाई दिया , एकांश जानता था दरवाजा किसने खटखटाया था और उसके चेहरे पर एक स्माइल आ गई थी

“कम इन” एकांश ने कहा

“सर आपकी कॉफी”

एकांश ने एक नजर अक्षिता की ओर देखा, अक्षिता की हालत कुछ ठीक नहीं थी चेहरा पीला पड़ा हुआ था और आंखे लाल हो रखी थी, उसकी हालत देख एकांश थोड़ा चौका

अक्षिता ने ऊफफई टेबल पर रखी और उसके ऑर्डर का वेट करने लगी

“सर, मेरे लिए कोई काम है या मैं जाऊ?” अक्षिता ने पूछा

“मुझे कुछ लेटर्स टाइप करवाने है, ये रही कॉम्पनीस की लिस्ट और डिटेल्स सब इस फाइलस् मे है साथ ही ये ईमेल भी करने है” एकांश ने अक्षिता को फाइल पकड़ाते हुए कहा

एकांश उसके एक जगह बैठने वाला काम दे रहा था है ये देख अक्षिता थोड़ी हैरान हुई साथ ही आज एकांश का आवाज भी नॉर्मल था हमेशा जैसा रुड नहीं था

अक्षिता ने वो फाइल की और चली गई, अक्षिता की बॉडी बहुत थकी सी थी, चेहरे का नूर उड़ चुका था आँखों कोई चमक नहीं थी बल्कि था तो बस सूनापन

एकांश को अब कही न कही ऐसा लग रहा था के उससे इतना काम नहीं करवाना चाहिए था हालांकि वो भी ये सब कीसी बदले के लिए नहीं कर रहा था, एकांश पर्सनल और प्रोफेशनल का अंतर जानता था, वो अपने केबिन के ग्लास विंडो के पास आया और अपने स्टाफ को काम करता देखने लगा और जब उसने देखा के अक्षिता भी अपना काम आराम से कर रही है वो भी अपने काम मे लग गया जबसे उनसे इन कंपनी को टेकओवर किया था और अक्षिता वापिस से उसकी लाइफ मे आई थी वो उसे वापिस से अफेक्ट करने लगी थी भले ही दोनों मे अब पहले जैसा कुछ नहीं था लेकिन कभी जो था वो शायद आज भी उनके अंदर मौजूद था और एकांश कभी कभी यही सोचने लग जाता के इतने सब के बाद भी अक्षिता उसे कैसे अफेक्ट कर सकती है

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अपने दिमाग को बगैर किस खयाल मे भटकाए एकांश काम मे लगा रहा वो एक डील के लिए प्रेज़न्टैशन बनाने मे लगा हुआ था और अगर ये डील सही से हो जाती तो इसका उसे काफी फायदा मिलने वाला था, एकांश ने एक कॉल लगाया

“हैलो” दूसरी ओर से आवाज आया

“इन माइ केबिन” और फोन कट

अक्षिता सीढ़िया चढ़ कर उसके केबिन मे पहुची

“सर आपने बुलाया था?”

“आइ एम वर्किंग ऑन अ डील उसके लिए मुझे फाइनैन्शल फाइलस् जैसे क्रेडिटर डेबिटर की सभी पुरानी फाइलस् चाहिए” एकांश मे अपने लॅपटॉप मे नजरे गड़ाए कहा

“सर ये बहुत पुरानी फाइलस् है, स्टोर रूम मे होंगी”अक्षिता ने कहा

“ठीक है प्लीज ब्रिंग इट तो मे” एकांश ने वैसे ही कहा और ओके बोल कर अक्षिता वहा से निकल गई

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अक्षिता पहले अपने फ्लोर पर गई वहा उसने रीसेप्शन से सबसे पहले स्टोर रूम की चाबिया ली और रीसेप्शनिस्ट मीरा को अपने को मिले हुए काम के बारे मे बताया और कुछ पल उससे बात करके अक्षिता स्टोर रूम की चाबिया लेकर उस ओर बढ़ गई

स्टोर रोम ऑफिस मे उस फ्लोर पर एकदम कोने मे बना हुआ था और उधर स्टाफ का आना जाना भी एकदम कम था

अक्षिता ने चाबी से रूम का दरवाजा खोला और स्टोर रूम मे अंदर घुसी जहा बहूत सारी फाइलस् उसका इंतजार कर रही थी बड़ी बड़ी रैक मे फाइलस् रखी हुई थी जिनपर धूल जम रही थी

अक्षिता ने उसे जो चाहिए थी वो फाइलस् ढूँढना शुरू किया, वो हर फाइल को वन बी वन चेक कर रही थी और इस काम मे उसे खासा वक्त लगना था और उसके पास लिस्ट भी काफी लंबी थी, जब उसे सामने की रैक मे कुछ फाइलस् नहीं मिली तो वो स्टोर रूम मे और पीछे की ओर गई और पुरानी फाइलस् खोजने लगी

अक्षिता पसीने से पूरी भीग चुकी थी ऊपर से स्टोर रूम मे कीसी भी तरह का कोई वेनलैशन नहीं था और उसे वक्त का भी पता नहीं चल रहा था के उसे वहा कितना वक्त हो गया है ऊपर से वो अपने फोन भी लाना भूल चुकी थी

अक्षिता ने अभी तक निकाली हुई सभी फाइलस् को देखा और सोचा के इसमे काम हो जान चाहिए और जरूरत पड़ी तो वो वापिस यहा आ जाएगी, उसने सभी फाइलस् उठाई और स्टोर रूम के दरवाजे के पास रखे टेबल पर सही से लगा कर चेक करने लगी

इस सब मे अक्षिता का एक बात की ओर ध्यान नहीं गया था के स्टोर रूम का दरवाजा हवा से अपने आप बन हो चुका था और चाबिया उसी दरवाजे पर बाहर की साइड लटक रही थी

अक्षिता ने सभी फाइलस् को चेक करने अरेंज किया और दरवाजे तक आई तो दरवाजा बंद पाकर वो थोड़ा चौकी, दरवाजे का हंडेल घुमाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ दरवाजा लॉक हो चुका था अक्षिता ने दरवाजा खोलने की भरसक कोशिश की लेकिन वो हर बार नाकाम रही

कुछ टाइम बाद अक्षिता को ध्यान मे आया एक वो वहा स्टोर रूम मे अब बंद हो चुकी थी, उसने चाबिया खोजने की भी कोशिश की लेकिन चाबिया होती तो मिलती ना

अक्षिता अब पैनिक करने लगी थी दरवाजा पीट कर मदद के लिए चिल्ला रही थी लेकिन कोई वहा सुनने वाला था ही थी, ऑफिस मे इस इलाके मे कोई ज्यादा आता ही नहीं था, अक्षिता ने एक बारी लॉक भी तोड़ने की कोशिश करी लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ

पैनिक मे अब अक्षिता के हाथ पैर कांपने लगे थे पसीने से पूरा शरीर भीग गया था, अक्षिता अपनी पूरी जान लगा कर चीखी लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ, वो लगातार दरवाजा पीट रही रही

धीरे धीरे अक्षिता की बॉडी रीऐक्टोर करना बंद करने लगी, उसे चक्कर आने लगे थे, गला सुख गया था, आँखों के सामने अंधेरा छा रहा था वो दीवार के सहारे चलते हुए टेबल को पकड़ते हुयुए स्टोर रूम एम रखी एक कूर्चि की ओर बढ़ रही थी लेकिन अब शरीर साथ छोड़ रहा था दिमाग घूम रहा था और आखिर कार वो वही बेहोश होकर गिर पड़ी....

क्रमश:
 
अपडेट 7

अक्षिता को गए 2 घंटे हो गए थे और एकांश अपने केबिन मे यही सोच रहा था के इतना वक्त तो नहीं लगना चाहिए था, उसने सोचा के शायद अक्षिता को फाइलस् नहीं मिली होंगी इसीलिए वक्त लग रहा था

वही दूसरी तरफ स्वरा भी अक्षिता के बारे मे ही सोच रही थी क्युकी उसने भी अक्षिता को लंच के बाद से नहीं देखा था और अब उसे ये चिंता सता रही थी के शायद एकांश उससे बहुत ज्यादा काम करवा रहा होगा और ये सोच के उसने एक नंबर डायल किया

“हैलो दिस इस पूजा स्पीकिंग हाउ मे आइ हेल्प यू?”

“ही पूजा स्वरा बात कर रही हु, अक्षिता वहा पर है क्या?”

“एक मिनट रुको मैं देख लेती हु”

स्वरा फिर पूजा का इंतजार करने लगी

“हैलो स्वरा अक्षिता नहीं है यहा, मैंने कुछ थोड़े समय पहले देखा था उसे लंच ब्रेक के बाद उसके बाद नहीं दिखी वो ना ही यहा आई है” पूजा ने बताया और स्वरा ने फोन रखा

पूजा से बात होने के बाद स्वरा सीधा कैन्टीन की ओर गई के शायद अक्षिता वहा हो फिर कैन्टीन के बाद फिर रेस्टरूम वगैर सब जगह स्वरा ने चेक कर लिया लेकिन उसे अक्षिता कही नहीं मिली और आखिर मे वो रोहन के पास पहुची

स्वरा को ऐसे पैनिक मोड मे देख रोहन पहले तो थोड़ा चौका फिर स्वरा ने जब उसे पूरा मैटर बताया तब उसे भी टेंशन होने लगी थी, रोहन पूरी बिल्डिंग छान आया था लेकिन कही अक्षिता का कुछ पता नहीं था, आखिर मे वो लोग रीसेप्शन पर पहुचे मीरा से पूछने के उसने अक्षिता को बाहर जाते देखा है क्या

“मीरा तुमने अक्षिता को देखा है क्या बाहर जाते या अंदर आते हुए?” स्वरा ने मीरा से पूछा

“हा... अभी दो घंटे पहले ही देखा था” मीरा ने कहा

“कहा?” रोहन और स्वरा ने एकसाथ पूछा

“वही आई थी स्टोर रूम की चाबी लेने और चली गई, उसे कुछ फाइलस् चाहिए थी” मीरा ने पूरी बात बताई

“तुमने उसे स्टोर रूम से बाहर आते देखा? या चाबी वापिस करने आई थी वो?” रोहन ने पूछा

“नहीं”

“हो गया कांड” बोलते हुए रोहन और स्वरा दोनों स्टोर रूम की ओर लपके

स्टोर रूम का दरवाजा बंद देख रोहन और स्वरा दरवाजा खोलने की कोशिश करने लगे और अक्षिता को आवाज लगाने लगे, रोहन ने तो दरवाजा तोड़ने की भी कोशिश की लेकिन मीरा ने उसे रोक दिया जो उनके पीछे पीछे वहा आ गई थी,

“ये स्टोर रूम की ही चाबी है” मीरा ने दरवाजे के पास नीचे जमीन पर गिरे चाबियों के गुच्छे को उठाते हुए कहा और इस वक्त तक कुछ क्लीनिंग वाले और ऑफिस स्टाफ भी इनकी आवाज सुन वहा पहुच गया था, उन्होंने झट से दरवाजा खोला और अक्षिता का नाम पुकारते हुए अंदर घुसे

“अक्षु...!” स्वरा ने चिल्ला कर कहा जब उसने नीचे बेहोश पड़ी अक्षिता को देखा

स्वरा अक्षिता के पास नीचे ही बैठ गई और उसके चेहरे को थपथपा कर उसे उठाने की कोशिश करने लगी, रोहन ने कीसी से पानी लाने कहा और वो भी नीचे बैठ कर अक्षिता को होश मे लाने की कोशिश करने लगा

इतनी सब आवाज और भसड़ सुन कर एकांश भी क्या हुआ है देखने वहा पहुच गया था और अपने सामने का सीन देख कर शॉक था, वो जल्दी से उन लोगों के पास पहुचा और घुटनों के बल बैठ गया

“अक्षिता.... क्या हुआ है इसे?” उसने वहा के बाकी लोगों से पूछा,

तब तक कोई पानी ले आया था और रोहन ने अक्षिता के चेहरे पर पानी मारा लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ वो वैसे ही बेहोश रही, अब वो लोग और ज्यादा पैनिक करने लगे थे

“ये सब आपकी वजह से हुआ है आपने किया है” स्वरा ने गुस्से मे एकांश को देखते हुए कहा.. उसकी आँखों मे पानी था

“क्या?? नहीं!“ एकांश ने भी चिल्ला कर कहा

“उससे इतना काम करवाया के उसकी हालत ऐसी हो गई, ये सब आपकी वजह से हुआ है” रोहन ने भी गुस्से मे एकांश को सुना दिया लेकिन एकांश इस गिल्ट ट्रिप पर नहीं जाने वाला था, हा उसे भी इस वक्त अक्षिता के लिए बुरा लग रहा था और उसकी फिक्र भी हो रही थी लेकिन अक्षिता चाहती तो बोल सकती और वो शायद वो उसका काम भी कम कर देता

“मैंने बस उसे कुछ पुरानी फाइलस् लाने कहा था, बस! और मुझे नहीं पता उसका साथ क्या हुआ है और वो कैसे बेहोश हो गई” एकांश ने कहा

“वो claustrophobic है, वो बंद कमरों मे छोटी बंद जगहों मे डर जाती है, इसीलिए वो लिफ्ट भी यूज नहीं करती” स्वरा ने एकांश को गुस्से से देखते हुए कहा

अब एकांश को लगने लगा था के उसे अक्षिता ने इतना काम नहीं करवाना चाहिए था, अक्षिता के लिए उसकी फिक्र और बढ़ गई थी लेकिन वो उसे दिखा नहीं रहा था और अब रोहन ने अक्षिता को गोद मे उठा लिया था

“हम उसे अस्पताल लेकर चलते है मैं ड्राइवर से कार निकालने कहता हु... चलो” एकांश ने आगे बढ़ते हुए कहा

“थैंक यू सर पर हम हमारी दोस्त का खयाल रख सकते हु” रोहन ने एकांश को घूरते हुए कहा और वो और स्वरा अक्षिता को लेकर वहा से निकल गए इस दुआ के साथ के अक्षिता ठीक हो जाए...

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“वो ठीक हो जाएगी ना?”

“हा बाबा”

“मुझे बहुत फिक्र हो रही है रोहन”

“मुझे भी”

जिसके बाद स्वरा और रोहन दोनों मे से कोई कुछ नहीं बोला और डॉक्टर का इंतजार करने लगे जो अक्षिता को चेक कर रहे थे

“इतना वक्त क्यू लग रहा है इन्हे” स्वरा ने रूम के बाहर इधर उधर घूमते हुए कहा

“अरे यार डॉक्टर को उनका काम करने दो शांत हो जाओ तुम कुछ नहीं होगा उसे”

स्वरा की आँख मे अक्षिता की चिंता मे वापिस पानी जमने लगा था वो रो रही थी और रोहन उसे शांत कराने मे लगा हुआ था

“विल यू प्लीज शट अप”

इस आवाज के साथ उन दोनों ने उस ओर देखा तो पाया के एकांश गुस्से मे उन्हे ही देख रहा था, वो ये भूल ही चुके थे के एकांश भी वहा था जो उनके पीछे पीछे अस्पताल पहुचा था, एकांश वही कॉरिडर मे इधर उधर घूम रहा था अपनी हो सोच मे गुम था वही स्वरा और रोहन दोनों बेंच पर बैठे थे जो बीच बीच मे एकांश को देख लेते जो बहुत ज्यादा चिंताग्रस्त दिख रहा था

तभी डॉक्टर बाहर आए और ये तीनों डॉक्टर की ओर लपके

“कैसी है वो?”

“क्या हुआ था उसे?”

“कोई खतरे वाली बात तो नहीं है ना?”

“उसे होश आया?”

“क्या हम उससे मिल सकते है?”

एक एक बाद एक तीनों ने डॉक्टर से सवाल पुछ डाले और डॉक्टर को चिल्ला कर उन्हे चुप कराना पड़ा

“वो ठीक है, अब भी बेहोश है, उसे आराम की जरूरत है हमने दवाइया दे दी है दो घंटे मे होश आ जाएगा अब खतरे की कोई बात नहीं है और आप उससे अभी नहीं मिल सकते है” डॉक्टर ने एक ही लाइन मे सबके सभी सवालों का जवाब दे दिया था और वहा से चला गया

उन तीनों ने एकदूसरे को देखा और डॉक्टर की बताई पूरी बात सही से समझने के बाद राहत की सास ली

“आइ विल गो टॉक टु हिम” इतना बोल के एकांश डॉक्टर के पीछे चला गया और रोहन और स्वरा वही खड़े रहे

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एकांश डॉक्टर के साथ उनके केबिन मे था

“हैलो डॉक्टर, मैं एकांश रघुवंशी, मुझे आपसे कुछ बात करनी थी” एकांश ने कहा

“कहिए मिस्टर रघुवंशी क्या बात करनी है आपको”

“अक्षिता के बारे मे” एकांश ने कहा

“ओके, बैठिए”

“उसे क्या हुआ है डॉक्टर?” एकांश ने चिंतित स्वर मे वहा कुर्सी पर बैठते हुए पूछा

“और आप उनके क्या लगते है?”

“मैं.... मैं उसका बॉस हु, वो एम्प्लोयी है मेरी”

“ओह... लेकिन मिस्टर रघुवंशी मैं पैशन्ट की कन्डिशन केवल उसके फॅमिली मेम्बर से ही डिस्कस करता हु”

“मैं समझता हु डॉक्टर लेकिन ये मेरे लिए जानना बहुत जरूरी है”

“वो अब ठीक है मिस्टर रघुवंशी”

“बस इतना ही?”

“वो claustrophobic है कीसी कमरे मे बंद होने की वजह से डर के बेहोश हो गई है बस, और कुछ जानना है आपको?”

“ओके.. थैंक यू डॉक्टर, डॉक्टर क्या मैं उसे देख सकता हु”

“अभी नहीं मिस्टर रघुवंशी”

“प्लीज”

डॉक्टर ने एकांश को देखा, उसकी आँखों मे जो भाव थे उन्हे देख डॉक्टर उसे मना नहीं कर पाए

“ठीक है लेकिन प्लीज उसे डिस्टर्ब मत कीजिएगा”

“थैंक यू डॉक्टर” और इतना बोल के एकांश वहा से निकल गया

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एकांश धीरे धीरे अक्षिता के कमरे की ओर बढ़ रहा था उसके दिमाग मे वो सीन चल रहा था जब उसने अक्षिता को बेहोशी की हालत मे देखा था, और ये कहना बिल्कुल ही गलत होगा के अक्षिता की वो हालत देख वो डरा ना हो, एकांश का पूरा स्टाफ उसे हैरत मे देख रहा था जब वो भागदौड़ करते हुए ऑफिस से अस्पताल के लिए निकला था और इस सब मे एक सवाल एकांश के मन मे उमड़ रहा था

‘उनके रीलेशनशिप के दौरान क्यू एकांश को अक्षिता के बारे मे ये बात पता नहीं चली थी’

जवाब उसका पास था

शायद वो अक्षिता को उतने अच्छे से जान ही नही पाया था, या वो बाते छुपाने मे एक्सपर्ट थी या वो नहीं चाहती थी के उसके बारे मे ये सब उस को पता चले क्युकी आखिर मे वो सब झूठ ही तो था’

एकांश रूम के पास पहुच गया था और वहा जो सीन चल रहा था उसे देख रुका

स्वरा चुपके से रूम मे घुसने की कोशिश कर रही थी, दरवाजा हल्का स खुला हुआ था जिसके हँडल को स्वरा ने कस के पकड़ा हुआ था वही रोहन स्वरा को कमर से पकड़े उसे अंदर जाने से रोक रहा था

‘क्या कर रहे हो तुम?” स्वरा ने रोहन से कहा

“तुमको रोक रहा हु”

“छोड़ो मुझे” स्वरा ने थोड़े गुस्से मे कहा

“नहीं” रोहन ने उसे और कस के पकड़ लिया

“रोहन जाने दो मुझे”

“स्वरा नहीं, वो हँडल छोड़ो”

“नहीं तुम छोड़ो मुझे”

“नहीं, डॉक्टर ने अभी मना किया है और वो नर्स देख लेगी तो और चिल्लाएगी”

“मुझे कुछ नहीं पता मुझे अक्षु को देखना है”

“पकडी जाओगी”

“रोहन अगर तुमने अभी मुझे नहीं छोडा तो मैं तेरी जान ले लूँगी” स्वरा ने रोहन को धमकाया

“लेकिन..”

“रोहन जाने दो ना वो नर्स आ जाएगी वरना” स्वरा ने बिनती करते हुए कहा

‘ये कैसे एम्प्लॉईस रख रखे है मैंने’ इन लोगों की ये हरकते देख एकांश ने मन मे सोचा और उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई,

“जाने दो उसे” एकांश ने कहा

“नहीं, इट्स अगैन्स्ट रूल” रोहन

“कुछ नहीं होगा” एकांश ने वापिस कहा और रोहन ने अपनी पकड़ ढीली की और स्वरा जल्दी से अपने पीछे दरवाजा बंद करते हुए रूम मे चली गई

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एकांश भी रूम मे आया और बेड पर सोई अक्षिता के मुरझाए चेहरे को देखा, अक्षिता को अब भी होश नहीं आया था और अब एकांश को लग रहा था के उससे इतना काम नहीं करवाना चाहिए था और डायरेक्टली या इनडायरेक्टली कही न कही इसमे उसका भी कुसूर था..

एकांश की आंखे भरने लगी थी और वो वहा और नहीं रुक सकता था इसीलिए वो अपनी आंखे साफ करते हुए झट से बाहर आया तो उसकी नजरे कुछ और लोगों से मिली जिनकी आँखों मे चिंता के भाव थे..

“आंटी अंकल, ये मिस्टर एकांश रघुवंशी है, हमारे बॉस और सर ये अक्षिता के पेरेंट्स है” रोहन ने इन्ट्रो करवाया

अक्षिता के पेरेंट्स एकांश को ऐसे देख रहे थे मानो परख रहे हो, मानो उन्हे कुछ जानना हो वही एकांश से उनकी नजरे नहीं सही जा रही थी, उसके पेरेंट्स ने एकदूसरे को देखा और फिर डॉक्टर से मिलने चले गए लेकिन जाते हुए एक नजर एकांश पर डाल गए थे..

अक्षिता के पेरेंट्स डॉक्टर से मिल कर आ गए थे

“क्या कहा डॉक्टर ने?” रोहन ने उन्हे केबिन से बाहर आता देख पूछा

“उन्होंने कहा के अब वो ठीक है लेकिन...” अक्षिता के पिता बोलते बोलते रुके

“वो बहुत ज्यादा स्ट्रेस ले रही है, जो उसके लिए बिल्कुल भी सही नहीं है” अक्षिता की मा ने कहा

उनकी बात सुन स्वरा और रोहन दोनों ने एकांश को देखा जो अपनी कीसी गहन सोच मे डूबा हुआ था

“मेरी बेटी बहुत बहादुर है वो संभाल लेगी अपने आप को फिक्र मत करो” अक्षिता के पिता ने मुसकुराते हुए कहा और वो लोग अब अक्षिता के होश मे आने की राह देखने लगे

कुछ समय बाद नर्स ने आकार बताया के अक्षिता को होश आ गया है और वो लोग उससे मिल सकते है ये सुन उनके चेहरों को मुस्कान आ गई और अक्षिता के पेरेंट्स के साथ रोहन और स्वरा उससे मिलने अंदर गए वही एकांश बाहर बैठा उस कमरे के बंद दरवाजे को देख रहा था वो आराम से उठ कर दरवाजे के पास आया और उसमे लगी कांच की विंडो से अंदर देखा

उसने देखा के अक्षिता बेड पर बैठी थी और स्माइल के साथ अपने दोस्तों और पेरेंट्स से बात कर रही थी, उसे ठीक देख एकांश के चेहरे पर भी मुस्कान आ गई और वो ठीक है ये सोच उससे भी अच्छा लगने लगा, वो बस वहा से जाने के लिए अभी पलटा ही था के अपने सामने खड़े शक्स को देख ठिठका

जिस डॉक्टर ने अक्षिता का इलाज किया था वो हाथ बांधे एकांश को देख रहा था

“पहले तो आप उससे मिलने के लिए बेचैन थे और अब अंदर भी नहीं जा रहे ऐसा क्यू?”

“वो डॉक्टर... वो..”

“आप उससे मिलना नहीं चाहते?” डॉक्टर ने एकांश के नर्वसनेस को भांपते हुए कहा

“मैं नहीं मिल सकता” इतना बोलते हुए एकांश वहा से निकल गया अपने दिमाग मे विचारों का तूफान लिए..

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“हैलो अक्षिता अब कैसा लग रहा है?”

“अब ठीक है डॉक्टर, थैंक्स”

“आपको अपनी तबीयत का खयाल रखना चाहिए.. बहुत कमजोर हो आप.. बढ़िया खाओ एक्सर्साइज़ करो और स्ट्रेस मत लो, ठीक है?”

“ओके डॉक्टर”

“ओके देन, आप लोग इन्हे घर ले जा सकते है” इतना बोल डॉक्टर वहा से चले गए

“ओ शीट! सर भी बाहर ही है हम तो उनके बारे मे भूल ही गए थे” डॉक्टर के जाने के बाद रोहन को एकांश का ध्यान आया

एकांश का नाम आते ही अक्षिता का दिल जोरों से धड़कने लगा था वही रोहन एकांश को बुलाने बाहर आया तो वहा कोई नहीं था

“कहा है वो?” स्वरा ने पूछा

“पता नहीं शायद चले गए” रोहन ने कहा और अक्षिता को थोड़ा बुरा लगा के वो उससे बगैर मिले गया लेकिन बाकी लोगों के साथ ने उसे इस बारे मे सोचने ही नहीं दिया, उनलोगों ने बिल भरा और दवाइया लेकर घर की ओर निकल पड़े, आज का दिन उन लोगों के लिए बहुत भारी बीता था....

क्रमश:
 
अपडेट 8

कभी ऐसा लगा है के कीसी ने आपको बस एक जगह पर बांध दिया हो और हिलने डुलने पर पाबंदी लगा दी गई हो?

अक्षिता पिछले 2 दिनों से ऐसा ही कुछ महसूस कर रही थी, अस्पताल से आने के बाद उसके पेरेंट्स ने उसे बेड से नीचे भी नहीं उतरने दिया था और कोई काम करना तो दूर की बात और उसमे भर डाली रोहन और स्वरा ने जो ऑफिस निपटा कर अक्षिता के घर पहुच जाते उसकी मदद तो करते ही साथ मे क्या करे क्या ना करे इसपर लेक्चर अलग देते रहते थे, और तो और वो उसका खाना भी उसके रूम मे ही ले आते थे, पिछले 2 दिनों मे अक्षिता को 200 बार ये हिदायत मिल चुकी थी के दोबारा वो ऐसा कोई काम ना करे जिससे उसे तकलीफ हो

और इन सबमे सबसे चौकने वाली बात ये थी के एकांश ने अक्षिता को एक हफ्ते की छुट्टी दे दी थी ताकि वो घर पर आराम कर सके, जब स्वरा ने ये बात अक्षिता तो बताई तो पहले तो उसे इस बात पर यकीन ही नहीं हुआ के एकांश ऐसा करेगा उसने ये सच है या नहीं जानने के लिए कई बार ऑफिस मे अलग अलग लोगों को फोन लगाके पूछा भी अब ये शॉक कम था के तभी उसके दोस्तों से उसे पता चला के एकांश उस दिन उसके होश मे आने तक अपने सभी काम धाम छोड़ अस्पताल मे था... अब इसपर क्या बोले या सोचे अक्षिता को समझ नहीं आ रहा था...

खैर मुद्दे की बात ये है के अक्षिता एक जगह बैठे बैठे कुछ न करे पक चुकी थी और आज उसने ये डिसाइड किया था के वो चाहे कुछ हो आज ऑफिस जाएगी ही, वो जानती थी के उसके यू ऑफिस पहुचने से रोहन गुस्सा करेगा और स्वरा भी हल्ला मचाएगी लेकिन वो उसे झेलने के लिए रेडी थी क्युकी वो सीन कमसे कम घर मे खाली बैठने से तो इन्टरिस्टिंग होगा..

अक्षिता इस वक्त अपने ऑफिस मे अपने फ्लोर पर खड़ी थी और सभी लोग उससे उसका हाल चाल पूछने मे लगे थे और वो भी सबको बता रही थी के वो अब ठीक है, अपने लिए सबको प्यार देख अक्षिता खुश भी थी और जैसा उसका अनुमान था रोहन दौड़ता हुआ उसके पास पहुचा था और उसके पीछे स्वरा भी वहा आ गई थी और उन दोनों ने पहले अक्षिता को एक कुर्सी पर बिठाया और फिर शुरू हुआ उनका लेक्चर के वो यहा क्या कर रही है क्यू आई आराम करना चाहिए था वगैरा वगैरा जिसे अक्षिता बस चुप चाप सुन रही थी और जब उससे रहा नहीं गया तब वो बोली

“बस करो यार ठीक हु मैं अब” अक्षिता ने थोड़ी ऊंची आवाज मे कहा

“नहीं तुम ठीक नहीं हो अक्षु” स्वरा ने भी उसी टोन मे जवाब दिया

“स्वरा प्लीज यार, उन चार दीवारों के बीच पक गई थी मैं कुछ करने को नहीं था”

“अच्छा ठेक है लेकिन तुम कोई स्ट्रेस नहीं लोगी और उतना ही काम करोगी जितना जमेगा ठीक है?” आखिर मे रोहन ने अक्षिता के सामने हार मान ली और उसे ऐसे समझने लगा जैसे वो कोई बच्ची हो और अक्षिता ने भी हा मे गर्दन हिला दी

“और हा अगर अपना वो खडूस बॉस कुछ बोले तो बस मुझे एक कॉल कर देना” स्वरा ने कहा

उसके बाद भी उन्होंने कई और बाते कही और इसी बीच अक्षिता की नजरे घड़ी पर पड़ी तो 9.25 हो रहे थे

“चलो गाइस काम का वक्त हो गया” इतना बोल के अपने दोस्तों की बाकी बातों को इग्नोर करके अक्षिता वहा से निकल गई

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अपने हाथ मे एकांश की कॉफी लिए अक्षिता उसके फ्लोर पर खड़ी थी और उसे वहा देखते ही पूजा ने उसे एक स्माइल दी और आके उसके गले लग गई

“थैंक गॉड तुम आ गई, अब कैसी तबीयत है तुम्हारी?” पूजा ने अक्षिता से कहा

“मैं बढ़िया हु लेकिन मेरी इतनी याद क्यू आई?”

“अरे मत पूछो यार, मुझे नहीं पता तुम इस आदमी को कैसे झेलती हो, इसने दो दिनों मे जिंदगी झंड कर रखी है, ये करो वो करो, एक पल मे एक काम दूसरे मे दूसरा उसपर से शैतान के जैसा बिहैव करते है एक गलती तक माफ नहीं होती अब तुम ही बताओ मुझे कैसे पता होगा कौनसी फाइल कहा रखी है, ऊपर से कुछ इक्स्प्लैन करने का मौका भी नही देते अब तो पता है मुझे इस इंसान के डरावने सपने भी आने लगे है खैर अब तुम आ गई हो अब मुझे इससे मुक्ति मिलेगी” पूजा ने भकाभक अपनी सारी भड़ास निकाल डाली वही अक्षिता अपनी पलके झपकाते हुए पूजा की कही बातों को प्रोसेस करने मे लगी हुई थी और फिर वो उसकी बात पे हसने लगी

“मैंने कोई जोक सुनाया क्या हो हस रही हो” पूजा

“सॉरी यार लेकीन कोई न मैं आ गई हु अब” अक्षिता ने पूजा को आश्वस्त करते हुए कहा

“हा हा और सच कहू तो मुझसे ज्यादा सर खुश होंगे, तुम्हें पता है कल क्या बोल रहे थे?... बोले ‘उसपर इतना डिपेंड हो गया हु के अब काम ही सही से नहीं कर पा रहा’ “ पूजा ने कहा और अक्षिता को देखने लगी जो अपनी जगह स्तब्ध खड़ी थी

“ये उसने कहा?”

“हा”

“तुमसे?” उसने पूछा

“नहीं, अपने आप मे ही बड़बड़ा रहे थे अब मेरे तेज कानों ने सुन लिया” पूजा ने बताया लेकिन अक्षिता अब भी शॉक मे थी और जब उसके ध्यान मे आया के उसे लेट हो रहा है तो सब ख्यालों को झटक कर आगे बढ़ी

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“कम इन”

अक्षिता ने जैसे ही ये आवाज सुनी वो अंदर पहुची और उसके टेबल पर कॉफी रखी

“सर आपकी कॉफी”

अक्षिता ने कहा और उसकी आवाज सुन एकांश ने चौक कर उसे देखा, उसकी नजरे अक्षिता को नर्वस कर रही थी

“तुम यहा क्या कर रही हो?” एकांश ने चिल्ला कर कहा

‘मैं यहा क्या कर रही हु? ये भूल गया क्या मैं यहा काम करती हु? या इसकी याददाश्त चली गई है? हे भगवान याददाश्त चली गई तो ये काम कैसे करेगा... मैं भी क्या क्या सोच रही हु शायद मैं छुट्टी पर थी इसीलिए भूल गया होगा भुलक्कड़ तो ये है ही’

एकांश के सवाल ने अक्षिता की खयालों की रेल चल पड़ी थी और उसे इसमे से बाहर भी उसी आवाज ने निकाल

“मैंने कुछ पूछा है?” एकांश ने वापिस गुस्से मे कहा

“वो.. सर मैं यहा काम करती हु ना” अक्षिता ने जवाब दिया

“of course I know that stupid! मैं ये पुछ रहा हु तुम यहा क्या कर रही हो तुम्हें तो घर पर आराम करना चाहिए था..” एकांश ने कहा

“did you just called me stupid?” अक्षिता ने गुस्से मे पूछा

“तुम्हें बस वही सुनाई दिया?” एकांश अब भी उखड़ा हुआ था

“हा! और मैं स्टूपिड नहीं हु।“

“ऐसा बस तुम्हें लगता है लेकिन ऐसा है नहीं, मुझे अच्छे से पता है तुम क्या हो” एकांश ने कहा

“हा हा और आप तो बहुत इंटेलीजेन्ट हो ना” अक्षिता ने सार्कैस्टिक टोन मे कहा

“तुम मुझे परेशान करने आई हो क्या?”

“शुरुवात आपने की थी”

“आप शायद भूल रही हो यहा का बॉस मैं हु तो अब मुझे परेशान करना बंद करो और सीधे सीधे जवाब दो” एकांश ने कहा, अब वो दोनों ही एकदूसरे से भिड़ने लगे थे

“पहले तो आपने मुझे स्टूपिड कहा और फिर अब कम्प्लैन्ट कर रहे है के मैं परेशान कर रही हु लेकिन पता है असल मे मामला इसके बिल्कुल उल्टा है वो आप है जो मुझे परेशान कर रहे है बेतुके सवाल करके और...” अक्षिता आज चुप होने के मूड मे ही नहीं थी और एकांश ने उसकी बात काट दी

“शट अप!” एकांश ने चीख कर कहा और अक्षिता के मुह पर ताला लगाया

“अब मेरे सवाल का जवाब दोगी?” उसे शांत देख एकांश ने पूछा

“हा तो पूछिए न मैं आपकी तरह नहीं हु, पूछो मैं दूँगी जवाब” अक्षिता ने कहा

“मैंने तुम्हें 1 हफ्ते की छुट्टी दी थी आराम करने तो तुम यहा क्या कर रही हो?”

“मैं अब एकदम ठीक हु और घर पर मन नहीं लग रहा था तो मैंने सोचा आज से काम शुरू कर लू” अक्षिता ने कहा

“आर यू शुअर के तुम ठीक हो?” एकांश ने एक बार फिर पूछा

“यस सर, मैं एकदम ठीक हु”

“ठीक है तुम यहा काउच पर बैठ कर ही काम करोगी सीढ़ियों से ज्यादा ऊपर नीचे जाने की जरूरत नहीं है” एकांश ने वापिस अपनी नजरे लैपटॉप मे गड़ाते हुए कहा

“लेकिन सर मैं मेरे डेस्क से काम कर सकती ही और आपके बुलाने पे आ जाऊँगी” अक्षिता ने कहा क्युकी वो उसके साथ एक ही रूम मे काम नहीं करना चाहती थी

“मैंने तुमसे तुम्हारी राय पूछी?”

“लेकिन...”

“No arguments” एकांश ने फरमान सुना दिया था जिसने अब अक्षिता के मुह पर ताला लगा दिया था

“अब जाओ और जाकर काउच पर बैठ कर ये फाइलस् चेक करो इसमे कोई गलती तो नहीं है ना” एकांश ने उसे कुछ फाइलस् देते हुए कहा

अक्षिता ने हा मे गर्दन हिलाते हुए वो फाइलस् ली और चुप चाप बैठ कर उन्हे चेक करने लगी जिनमे बस कुछ वर्तनी की त्रुटियों के अलावा कोई गलती नहीं थी, उसे समझ आ गया था के जान बुझ के उसे ऐसा काम दिया गया था जिसमे उसे कुछ नहीं करना था, उसने एक नजर एकांश को देखा जो अपने काम मे लगा हुआ था और उसके लिए मानो उसके अलावा उस रूम मे कोई और था ही नहीं...

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“ओके भेज दो उन्हे” एकांश ने फोन पर कहा जब रीसेप्शनिस्ट ने उसे कोई उससे मिलने आया है इसकी खबर दी

जल्द ही दरवाजे पट नॉक हुआ और एकांश ने उन लोगों को अंदर आने कहा और दो लोग बिजनस सूट पहने अंदर आए और उन्होंने एकांश को ग्रीट किया, एकांश ने भी वैसे ही प्रतिसाद दिया और उन्हे बैठने कहा

उन लोगों की नजरे अपनी सीट के पीछे की ओर गई तो उन्होंने देखा के एक लड़की वहा बैठी फाइलस् देख रही है जिसे नजरंदाज करके वो अपने बातों मे लग गए

वही अक्षिता बगैर कुछ करे वहा काउच पर बैठे बैठे पक गई थी, उसे बस एक बार बहार जाने की पर्मिशन मिली थी वो भी लंच ब्रेक मे और जैसे ही लंच खतम हुआ एकांश ने उसे वापिस बुला लिया था और उसे कुछ कॉम्पनीस की इनफार्मेशन सर्च करने के काम पर लगाया था जिसे वो काफी समय पहले खतम कर चुकी थी और जब उसने ये एकांश को बताया तो उसने उसे और कुछ फाइलस् दे दी थी गलतीया ढूँढने, अब अक्षिता को एकांश का ये बिहैव्यर कुछ समझ नहीं आ रहा था, उसे समझ नहीं आ रहा था के वो काम करे ना करे स्ट्रेस ले ना ले आराम करे ना करे एकांश को क्या फर्क पड़ता है और यही सोचते हुए उसके ध्यान मे आया के वो अब भी उसकी केयर करता है और यही सोच के उसके चेहरे पर स्माइल आ गई

लेकिन फिर भी वो वहा बैठे बैठे अब फ्रस्ट्रैट होने लगी थी बस वही चार दीवारे और लैपटॉप मे घुसा हुआ एकांश जिसके लिए वो उस रूम मे थी ही नहीं, उसने वहा बैठे बैठे एक झपकी तक मार ली थी और अब अक्षिता को ताजी हवा चाहिए थी और उसे अपने दोस्तों से मिलना था जिनसे वो लंच के दौरान भी बात नहीं कर पाई थी

अक्षिता ने फाइलस् से नजरे ऊपर उठा कर देखा तो पाया के दो लोग एकांश से बात कर रहे थे कुछ प्रोजेक्ट्स के बारे मे और वो लोग अपनी बातों मे काफी ज्यादा मशगूल थे के उनमे से कीसी ने ये नोटिस नहीं किया के अक्षिता अपनी जगह से उठ गई थी और धीरे धीरे चलते हुए दरवाजे तक पहुच गई थी

उसने धीमे से दरवाजा खोला और बाहर निकल कर वापिस बंद कर दिया और फिर झट से वहा से निकल गई अपने इस छोटे से स्टन्ट के लिए खुद को शाबाशी देते हुए

जब इन लोगों की बाते खत्म हुई तो उन दो लोगों ने पीछे काउच की ओर देखा तो पाया के वो खाली था, उनकी नजरों का पीछा करते एकांश ने भी देखा तो अक्षिता को वहा ना पाकर वो थोड़ा चौका और उसने सोचा के वो वहा से कब निकली?

उन लोगों के जाने के बाद एकांश अपनी ग्लास विंडो के पास पहुचा अपने स्टाफ को देखने तो उसने दकहया के अक्षिता अपनी डेस्क पर बैठी थी और अपने दोस्तों के साथ हस बोल रही थी

अक्षिता कीसी छोटे से बच्चे की तरह बिहैव कर रही थी जिसे एक रूम मे बंद कर दिया गया हो जिसे पानी और खाने के लिए पर्मिशन लेनी पड रही थी, उसको देख एकांश के चेहरे पर एक स्माइल आ गई और वो वापिस अपने काम मे लग गया...

क्रमश:
 
अपडेट 9

धीरे धीरे दिन बीत रहे थे एकांश और अक्षिता साथ काम कर रहे थे लेकिन फिर भी दोनों के बीच तनाव बना हुआ था, फीलिंगस थी लेकिन कोई उसे बताना नहीं चाहता था, अक्षिता जिन बातों से भाग रही थी वही अब उसके पीछे थी

पिछले कुछ दिनों मे अक्षिता ने एकांश के सॉफ्ट साइड को इक्स्पीरीअन्स किया था, उसे पुराने एकांश की झलक दिख रही थी और यही बात उसे डरा रही थी, एकांश के उसकी केयर करने से वो डर रही थी, इन भावनाओ से वो दूर रहना चाहती थी लेकिन ये हो नहीं पा रहा था

वही ऐसा भी नहीं था के एकांश सब कुछ भुला चुका था, अक्षिता के उसे छोड़ के जाने के गम से आज भी उसे तकलीफ होती थी लेकिन वो उस दिन अक्षिता की तबीयत खराब होने के पीछे खुद को मान रहा था और भले ही एकांश और अक्षिता अपनी भावनाओ से कितना ही भाग ले एकांश कितना ही मना कर ले लेकिन दोनों के दिलों मे आज भी वो प्यार दिल के कीसी कोने मे बरकरार था...

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आज एकांश का जन्मदिन था लेकिन वो इस दिन के लिए जरा भी उत्साहित नहीं था उसके लिए ये रोजमर्रा का दिन था, उसके मा बाप दोस्तों ने उसे विश किया आशीर्वाद दिया और वो अपने ऑफिस आ गया

एकांश अपने केबिन मे पहुचा तो उसका केबिन बुके से ग्रीटिंग से भरा हुआ था उन सब को नजरंदाज करते हुए वो अपनी डेस्क पर जाकर बैठ गया और बैठे बैठे उसके दिमाग मे एक खयाल आया, क्या उसे उसका जन्मदिन याद होगा? और तभी दरवाजे पर नॉक हुआ

“कम इन”

“सर आपकी कॉफी” अक्षिता ने अंदर आते हुए टेबल पर कॉफी रखते हुए कहा

एकांश ने अक्षिता को देखा जो इतने सारे गुलदस्ते देख थोड़ा सप्राइज़ थी

“क्या तुम मेरे टेबल से ये सब साफ कर सकती हो?” एकांश ने अक्षिता से कहा

“शुवर सर” और अक्षिता ने वो सब हटाना शुरू किया

अक्षिता ने सभी गुलदस्तों को केबिन मे एक कोने मे जमा दिया था और काम खत्म करने के बाद उसने देखा तो वो एक छोटी बुके की दुकान जैसा लग रहा था जिसे देख अक्षिता थोड़ा हसी

“व्हाट्स सो फनी?” एकांश ने पूछा जिससे अक्षिता का ध्यान उसपर गया क्युकी गुलदस्ते जमाने के चक्कर मे वो भूल चुकी थी के एकांश भी वही था

“नहीं सर कुछ नहीं वो बस आपका केबिन कीसी बुके शॉप जैसा दिख रहा है न तो” अक्षिता ने स्माइल के साथ कहा जिसपर एकांश कुछ नहीं बोला

“सर मेरे लिए और कोई काम है?” अक्षिता ने पूछा

‘ये आज मुझे विश भी नहीं करेगी? इसे याद भी है?’ एकांश के मन मे खयाल आया

“नहीं जा सकती हो” एकांश ने कहा

“ओके”

अक्षिता वापिस जाने के लिए मुड़ी ही थी के जाते जाते रुकी और वापिस पलटी

“सर”

“हा” एकांश ने उसे देखा

“हैप्पी बर्थडे” अक्षिता ने मुसकुराते हुए कहा और बगैर एकांश का रीस्पान्स देखे वहा से चली गई

एकांश से कुछ बोलते ही नहीं बना और अक्षिता झट से वहा से निकल गई थी, वो आंखे बंद किए अपनी कुर्सी पर आराम से बैठा और पुरानी यादे उसके दिमाग मे उमड़ने लगी थी वही अक्षिता ने केबिन से बाहर आकार अपनी आँखों ने टपकी उस एक आँसू की बूंद को पोंछा और अपने काम मे लग गई

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“अक्षु? अक्षु कहा हो यार?”

एकांश के बर्थडे की शाम को अक्षिता ने उसे पार्क मे बुलाया था जहा वो अक्सर मिला करते थे एकांश वहा पहुच चुका था और अक्षिता को ढूंढ रहा था आवाज लगा रहा था लेकिन वो रीस्पान्स नहीं दे रही थी

एकांश जब अक्षिता को ढूंढते हुए इधर उधर घूम रहा था तब उसके पैर से एक बक्सा टकराया उसने जमीन से उस बॉक्स को उठाया और खोल कर देखा तो उसमे एक नोट लिखा हुआ था


यू अरे थे बेस्ट थिंग तहत है एवर हप्पेनेड तो माय लाइफ.. थैंक यू फॉर किंग ईंटो माय लाइफ एंड मेकिंग आईटी मीनिंगफुल एंड स्पेशल – अक्षिता

वो नोट पढ़ कर एकांश के चेहरे पर एक स्माइल आ गई और वो उसे ढूंढते हुए आगे बढ़ने लगा तभी उसे एक और बॉक्स मिला जिसमे भी एक नोट था

मेरी जिंदगी मे बस दो ही खास लोग है मेरे मा और पापा, और मैं तुम्हें तीसरा सबसे खास बंदा नहीं मानती, पता है क्यू? क्युकी तुम ही जिंदगी हो मेरी – अक्षिता

एकांश के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान मौजूद थी और आँखों मे हल्का सा पानी थी, वो थोड़ा और आगे बढ़ा और वहा रखा एक और बॉक्स उठाया

मैं पहले भी अपनी जिंदगी मे खुश थी लेकिन तुमने मेरे जीवन मे आकार मुझे जिना सिखाया है

एकांश अब अक्षिता से मिलने के लिए बेसब्र था लेकिन वो उसे वहा कही नहीं दिख रही थी वो थोड़ा और आगे बढ़ा तो एक और बॉक्स मिला जिसमे एक और नोट था

ी वास् अलोन, यू चामे ईंटो माय लाइफ, वे मेट एंड माय लाइफ बैगन…

अब एकांश अक्षिता ने मिलने का इंतजार नहीं कर पा रहा था तभी एक और बॉक्स और एक और नोट

You made me happy, you completed me, you made me feel loved, you taught me to love, all I wanted to say is…

I Love You..!

जानती हु तुम मुझसे मिलने के लिए बेसब्र हो और मैं भी अब और इंतजार नहीं कर सकती और ये अब आखरी बॉक्स है हम बहुत पास है..


एकांश के चेहरे पर एक मुस्कान आ गए थी, आइ लव यू पढ़ने के बाद से उसका दिल जोरों से धडक रहा था वो अक्षिता को देखने थोड़ा और आगे बढ़ा, शाम ढलने लगी थी और अंधेरा होने लगा था तभी उसने एक क्लिक का आवाज सुना और उसके सामने का एक बड़ा सा पेड़ लाइटिंग मे चमकने लगा, वो नजारा इतना शानदार लग रहा था के एकांश की नजरे नहीं हट रही थी, वही उसी पेड़ के पास जब एकांश की नजरे पहुची तो वहा लाल गुलाब के फूलों का बड़ा सा बुके रखा था साथ मे केक और कुछ गिफ्ट भी थे और लाइटस् से हैप्पी बर्थडे लिखा हुआ था और अब एकांश की नजरे बेसब्री से अक्षिता को खोज रही थी

अक्षिता पेड़ के पीछे से निकल कर एकांश के सामने आई हमेशा की तरह खूबसूरत, एकांश को देखते हुए, एकांश दौड़ कर उसके पास पहुचा और उसने उसे गले लगा लिया, अक्षिता भी एकांश की बाहों मे खुश थी

“हैप्पी बर्थडे अंश” अक्षिता ने वैसे ही गले लगे कहा

“थैंक यू” एकांश ने कहा

वो दोनों कुछ पलों तक यू ही एकदूसरे के आलिंगन के बंधे रहे एकदूसरे के प्यार को महोल की शांति हो महसूस करते हुए और जब अलग हुए तो दोनों के चेहरे से स्माइल नहीं हट रही थी

“अंश, मैं जानती हु तुम्हें तुम्हारा बर्थडे ऐसे पार्क मे मनाने की आदत नहीं है लेकिन...” अक्षिता ने नीचे देखते हुए बोलना चाहा लेकिन एकांश ने उसे रोक दिया

“अक्षु, ये मेरा अब तक का बेस्ट बर्थडे है, मैंने कभी ऐसे मेरा जन्मदिन नहीं मनाया लेकिन आइ लव्ड इट, सब कुछ एकदम परफेक्ट” एकांश ने अक्षिता की आँखों मे देखते हुए कहा

जिसके बाद उन्होंने केक काटा और एकदूसरे को खिलाया, दोनों ही तो थे वहा अक्षिता के लाए गिफ्ट्स लेने के बाद एकांश और अक्षिता वहा जमीन पर बैठे थे

“काश ये समा हु ही चलता रहे, ये पल कभी खत्म न हो” एकांश ने रात के आसमान को देखते हुए कहा

“मैं भी चाहती ही ये वक्त यही थम जाए” अक्षिता ने एकांश के कंधे ओर अपना सर टिकाते हुए कहा

अक्षिता ने नजरे उठा कर एकांश को देखा जो उसे उसे ही देख रहा था, दोनों की नजरे आपस मे मिली, एकांश ने अक्षिता के माथे को चूम लिया, फिर आंखे, फिर नाक, फिर गाल और उसके होंठों को देखते हुए रुका, अक्षिता ने भी अपने आंखे बंद कर ली थी और इस मोमेंट का मजा ले रही थी

जब कुछ पलों तक एकांश ने कुछ नहीं किया तब अक्षिता ने अपनी आंखे खोल उसे देखा जो नजरों से ही आगे बढ़ने की इजाजत मन रहा था और अक्षिता ने नजरों से ही आंखे बंद कर उसे पर्मिशन दे दी थी और एकांश ने अपने होंठ उसके होंठों से टीका दिए.. पहले वो धीरे धीरे उसे किस करने लगा और जल्द ही वो एक पैशनिट किस मे बदल गया जिसमे अक्षिता भी उसका बराबर साथ दे रही थी

जब किस टूटा तब दोनों ही शर्म से एकदूसरे से नजरे चुरा रहे थे एकांश ने अक्षिता को वापिस अपनी बाहों मे भर लिया था और वो दोनों काफी समय तक वैसे ही लेटे रहे,

ये उन दोनों का ही पहला किस था और वो भी एक स्पेशल मोमेंट पर हुआ था

“आइ लव यू” एकांश ने अक्षिता के कान मे कहा

“आइ लव यू टू” अक्षिता ने कहा

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एकांश ने झटके के साथ अपनी आंखे खोली और अपनी सीट पर सीधा बैठा, उसे अपने गालों मे कुछ गीला पान महसूस हुआ और जब छुआ तब एहसास हुआ के वो रो रहा था, उसने झटसे अपने आँसू पोंछे, जब भी एकांश उस दिन के बारे मे सोचता था उसकी आंखे भर आती थी

एकांश अपना वो जन्मदिन कभी नहीं भूल सकता था जो उसने अपने प्यार के साथ बिताया था, आज भी उसके लिए उन बातों पर यकीन करना मुश्किल था जो उस दिन अक्षिता ने उससे कही थी, उसने झूठ बोला था धोका दिया था उसे

एकांश ने वापिस अपनी आंखे बंद कर ली थी और यादों के उसी समुंदर मे वापिस खो गया था

वही दूसरी तरफ स्वरा और रोहन ये सोच के परेशान थे के अक्षिता को क्या हुआ है क्युकी वो भी काफी ज्यादा उदास लग रही थी ऐसे जैसे मानो उसके शरीर मे प्राण हि ना हो, उन्होंने उससे बात करने की भी कोशिश की लेकिन अक्षिता बात टाल गई थी

अक्षिता अपने मे ही खोए हुए कैन्टीन की ओर बढ़ रही थी तभी वो कीसी से टकरा गई, उसने देखा तो एक हैन्डसम सा बंदा उससे टकराया था

“सॉरी... वो मैंने देखा नहीं” अक्षिता ने कहा

“इट्स ओके.. आगे से देख के चलिएगा” उस बंदे ने कहा

अक्षिता ने उसकी बात कर हा मे गर्दन घुमा दी लेकिन फिर उसकी नजरे उस बंदे पर ठहरी जो उसे ऊपर से नीचे तक देख रहा था

“इक्स्क्यूज़ मी” इतना बोलते हुए अक्षिता वहा से चली गई और वो उसे जाती हुई देखने लगा

वो बंदा लिफ्ट के पास पहुचा और ऊपर एकांश के केबिन के पास आया और कम इन सुनते ही अंदर घुसा

“एकांश मेरे भाई हैप्पी बर्थडे लौंडे” उस बंदे ने लगभग चिल्लाते हुए कहा

“अमर..” एकांश उस बंदे को यानि अपने दोस्त को देख चौका

“हा मैं :D

“तू यहा क्या कर रहा है?” एकांश ने पूछा और बदले मे अमर अपने दिल पर हाथ रखता हुआ बोला

“आउच! इधर तकलीफ हुई है इधर पता है, एक तो मैं तुझे विश करने यहा आया और तू पुछ रहा है क्यू आया”

“ओये नौटंकी आते ही मत शुरू हो यार”

“आयला इतने बुके, सारे लड़कियों ने भेजे होंगे हैना” अमर ने एकांश को छेड़ते हुए कहा और तभी दरवाजे पर नॉक हुआ और अंदर बुलाने पे अक्षिता अंदर आई

“सर, फाइनैन्शल ऐनलिस्ट ने ये फाइल आपको देने कही है” अक्षिता ने फाइल देते हुए कहा

एकांश ने उससे फाइल ली वही अमर पूरे समय अक्षिता को देख रहा था वही अक्षिता झट से वहा से निकल गई

“उसे घुरना बंद कर” एकांश ने कहा

“घूर नहीं रहा था बस देख रहा था मुझे लगता है मैं जानता हु इसे” अमर ने कहा

“कैसे?”

“पता नहीं यार याद नहीं आ रहा पर कही तो देखा है इसको” अमर ने कहा वही एकांश वापिस अपनी सीट पर बैठ गया था

“इसका नाम क्या है?” अमर ने पूछा

“अक्षिता, अक्षिता पांडे।‘

जिसपर अमर ने गर्दन हिलाई लेकिन तभी उसे कुछ क्लिक हुआ के वो कौन है

“अक्षिता? मतलब ये वो है जिससे तू प्यार करता था और जिसने तुझे धोका दिया?”

जिसपर एकांश ने हा मे गर्दन हिला दी

जिसके बाद दोनों के कुछ देर बाते की और अमर वहा से निकल गया लेकिन उसके दिमाग मे अब भी अक्षिता ही घूम रही थी.....

क्रमश:
 
अपडेट 10

कुछ दिनों तक सब कुछ एकदम शांत रहा एकदम नॉर्मल बस एक ही चीज बदली थी, एकांश का अक्षिता के प्रति रवैया थोड़ा सौम्य हो गया था, वो अब भी उससे ज्यादा बात नहीं करता था लेकिन कठोरता से भी बात नहीं करता था वही अक्षिता भी उससे जितना हो सके उतना दूर रहने की कोशिश करती थी, काम के अलावा वो एक पल भी उसके केबिन मे नहीं रुकती थी,

आज एकांश का जन्मदिन हुए एक हफ्ता हो गया था और वो इस वक्त अपने केबिन मे था वही आज अक्षिता ऑफिस ही नहीं आई थी और ये बात एकांश को परेशान कर रही थी

“कम इन” जब एकांश ने अपने केबिन कर दरवाजे पर नॉक सुना तो उसने कहा

दरवाजा खुला तो वहा रोहन और स्वरा खड़े थे..

“सर आपने बुलाया हमे?” रोहन ने पूछा

“यस, हेव अ सीट” एकांश ने सपाट आवाज मे कहा

रोहन और स्वरा ने एकदूसरे को देखा और एकांश के सामने रखी कुर्सियों पर बैठ गए

“कहा है वो?” एकांश ने उन दोनों को देखते हुए पूछा

“कौन?” स्वरा

“मिस पांडे” एकांश ने बताया

“वो छुट्टी पर है सर, उसने कहा था के इस बारे मे उसने आपको अपना लीव ऐप्लकैशन ईमेल किया है” स्वरा ने नर्वस होते हुए कहा

“अचानक छुट्टी की क्या जरूरत पड गई? वो भी कुछ दिनों के लिए?” एकांश ने अपने लपटॉप मे अक्षिता का लीव ऐप्लकैशन पढ़ते हुए उन दोनों से पूछा

स्वरा ने एक नजर रोहन को देखा मानो पुछ रही हो क्या बताए

“सर... वो... वो उसकी तबीयत ठीक नहीं है” रोहन ने हिचकते हुए कहा

“क्यू... क्या हुआ है उसे?” एकांश ने एकदम से पूछा, उसकी आवाज मे अक्षिता के लिए चिंता साफ झलक रही थी वही उसके बिहैव्यर मे अचानक आए इस बदलाव से रोहन और स्वरा थोड़ा चौके

“कु... कुछ नहीं सर.. बस बुखार है” स्वरा ने कहा

“सिर्फ बुखार है, फिर उसने ऐसा क्यू कहा के वो कुछ दिनों तक ऑफिस नहीं आ पाएगी” एकांश को अब थोड़ा डाउट होने लगा था

“वाइरल फ्लू है सर वो ठीक होते ही वापिस ऑफिस आ जाएगी” रोहन ने कहा जिसपर एकांश ने हा मे गर्दन हिला दी लेकिन उसे अब भी उनकी बातों पर यकीन नहीं हो रहा था

“सर हम जाए?” कुछ पल तक जब एकांश कुछ नहीं बोला तब स्वरा ने पूछा

“हम्म” एकांश ने कहा और वापिस अपने काम मे लग गया

इधर रोहन और स्वरा दोनों ने केबिन से बाहर आते ही राहत की सास ली

“पता नहीं अक्षु कैसे इस केबिन मे इसके साथ सारा टाइम काम करती है” स्वरा ने अपने माथे पर आया पसीना पोंछते हुए कहा

“वही तो ऐसा लग रहा था इंटरोगेशन चल रही थी”

“वैसे बुखार का बहाना सही बनाया है तुमने, मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा था क्या बोले” स्वरा ने कहा वो दोनों लिफ्ट की ओर बढ़ रहे थे

“अब कुछ तो बताना ही था, असल बात नहीं बता सकते क्युकी असल रीज़न जानने के बाद हमे नहीं पता वो कैसे रीऐक्ट करता” रोहन ने चिंतित स्वर मे कहा

“वो लोग वहा पहुच गए होंगे क्या?” स्वरा ने अपनी घड़ी मे देखते हुए पूछा, वो लोग अब लिफ्ट मे थे

“इतनी जल्दी कहा अभी तो और कम से कम दो घंटे लगेंगे उनको पहुचने मे” रोहन ने कहा

“यार मैं उसे अभी से मिस कर रही हु”

“मैं भी” रोहन ने कुछ सोचते हुए कहा

“अक्षु का वहा जाने का जरा भी मन नहीं था, वो तो उसके पेरेंट्स जबरदस्ती ले गए है उसको” स्वरा ने कहा

“और पेरेंट्स की बात मानने को कन्विन्स हमने किया था देखना वापिस आने के बाद अपना ही दिमाग खाएगी वो” रोहन ने हसते हुए कहा और वो दोनों वापिस अपनी अपनी डेस्क पर अपने अपने काम मे लग गए...

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एकांश बहुत ज्यादा बेचैन था, एक तो वो सुबह से अक्षिता की राह देख रहा था के वो उसकी कॉफी लेकर आएगी लेकिन वो नहीं आई और अब जब चुकी उसे पता चल चुका था के वो कुछ दिन नहीं आएगी तो उसे कुछ ठीक सा नहीं लग रहा था, उसने और एक बार उस लीव ऐप्लकैशन वाले ईमेल को पढ़ा

उसे खुद पर ही ताजूब हो रहा था के वो उसकी इतनी केयर क्यू कर रहा है वो तो उससे नफरत करता था..

एकांश ने अपना काम करना शुरू किया लेकिन वो अपने काम पर फोकस ही नहीं कर पा रहा था, रोहन और स्वरा से बात करने के बाद उसे ये भी लग रहा था के कुछ तो था जो उसे पता नहीं था, वो लोग कुछ तो छिपा रहे थे लेकिन फिर एकांश ने उस ओर से अपना ध्यान हटाया और अपने आप को काम मे बिजी करने मे कमियाब हो गया...

एकांश अपने काम मे लगा हुआ ही था के अचानक उसके केबिन का दरवाजा खुला और एक बंदा अंदर आया, एकांश ने गुस्से से अपने केबिन मे आने वाले तो देखा तो पाया के जो आया था उसपे वो सही से गुस्सा भी नहीं कर सकता था..

“अंदर आने के पहले नॉक करना होता है भूल गया क्या” एकांश ने अमर को घूरते हुए कहा

“हाओ भूल गया” अमर ने भी बात झटकते हुए कहा

“अमर, तू क्यू आया है?”

“क्यू मतलब तेरे से मिलने और क्या”

“तेरे पास और कोई काम नहीं है क्या”

“नहीं है, वैसे काम से याद आया तेरी अससिस्टेंट नहीं दिख रही आज” अमर ने पूछा

“तुझे क्या मतलब है उससे” एकांश ने हल्के गुस्से मे कहा

“मतलब है ब्रो समझा कर” एकांश के गुस्से को इग्नोर करते हुए अमर ने हसते हुए कहा

“शट अप अमर”

“लेकिन सही मे कहा है वो मैं आ रहा था तब भी नहीं दिखी”

“कुछ दिनों की छुट्टी पे है”

“ओह” जिसके बाद अमर इधर उधर की बात करते हुए एकांश का दिमाग खाने लगा लेकिन इसमे एक बात अच्छी हुई एकांश का ध्यान अक्षिता से हट गया था

--

एकांश की कार रघुवंशी मेनशन के बड़े से गेट मे से अंदर घुसी, एकांश कार से निकल कर घर मे आया और अपने रूम की ओर जाती हुई सीढ़िया चढ़ने ही वाला था के कीसी ने उसे पुकारा

“एकांश”

“हा मा” एकांश ने अपनी मा का आवाज सुन कर कहा जो डाइनिंग टेबल के पास खड़ी थी और स्माइल से साथ उसे देख रही थी

“इधर आओ”

जिसके बाद एकांश उनके पास जाकर खड़ा हुआ

“क्या हुआ मा?”

“बेटा इतना लेट ऑफिस मे क्या कर रहे थे, तुम्हें अपनी जरा भी फिक्र नहीं है, देखो कितने थके थके से लग रहे हो”

“मैं ठीक हु मा बस आज काम कुछ ज्यादा था तो लेट हो गया” एकांश ने कहा

जिसके बाद उन्होंने एक जूस का ग्लास एकांश की ओर बढ़ाया और उसने भी बगैर ज्यादा कुछ बोले जूस पी लिया

एकांश की मा को अब आदत हो चुकी थी एकांश का ऐसा उतर हुआ चेहरा देखने की, उनकी आँखों मे मौजूद सुनापान उन्हे साफ महसूस होता था और अपने बेटे को ऐसे देख उनका दिल भी दुखता था और वो इस सब के पीछे का कारण जानते हुए भी कुछ नहीं कर पा रही थी, एकांश मानो हसना ही भूल गया था पिछले 1.5 साल मे उन्होंने उसे कभी हसते खुश होते नहीं देखा था, ना तो एकांश ज्यादा कीसी से मिलता था ना बात करता था बस जितना जरूरी हो उठा ही बोलता था, उसने अपने इर्द गिर्द एक दीवार सी खड़ी कर दी थी जिसमे कीसी को प्रवेश नहीं था, वो एकांश के सर पर हाथ घुमाते हुए यही सोच रही थी

“थैंक्स मा” एकांश ने कहा

एकांश ने वो कीसी को पसंद करता है ये बताने के बाद जो भी कुछ हुआ था उस सब को याद कर उसकी मा के आंखे भर आई थी

“कब तक ऐसे ही रहोगे बेटा , कभी तो आगे बढ़ना होगा ना पुरानी बाते भुलनी होंगी” उन्होंने एकांश को समझाते हुए कहा

बात किस ओर जा रही है एकांश जान रहा था और वो इस बारे मे जरा भी बात नहीं करना चाहता था

“मैं... मैं थक गया हु मा, मैं फ्रेश होकर आता हु” एकांश ने कहा और वहा से जाने लगा

“जल्दी आना, मैं कहना लगवाती हु तब तक”

जिसके बाद एकांश अपने कमरे की ओर चला गया

अपने रूम मे आकार अपना बैग साइड मे रख एकांश अपने बेड पर जा लेटा और जैसे ही उसने अपनी आंखे बंद की उसकी नजरों के सामने एक चेहरा आया और उसने झटके से अपनी आंखे खोली और उठ बैठा, एकांश अपने शर्ट की बटन खोलते हुए अपनी अलमारी तक गया

उसने अलमारी मे का रक ड्रॉर खोला और उसमे से एक तस्वीर निकाली, उस फोटो को देखते हुए उसके चेहरे पर एक दर्द भरी मुस्कान उभर आई थी..

‘तुमने ऐसा क्यू किया अक्षिता? तुम मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकती हो? ये जानते हुए भी के मैंने तुम्हें कितना चाहा था.. क्यू धोका दिया तुमने मुझे? क्या उस रिश्ते मे जरा भी सच्चाई नहीं थी? एक पल भी सच नहीं था?’

एकांश के दिमाग मे कई सवाल कौंध रहे थे.. उसे पता भी नहीं चला कब उसकी आँखों से आँसू गिरने लगे थे, उस फोटो मे वो और अक्षिता साथ थे जिसमे उसने उसे पीछे से गले लगाया हुआ था और अक्षिता उसे प्यार से देख रही थी

वो सब झूठ था क्या? अक्षिता के होंठों पर खिलती वो मुस्कान, उसकी आँखों की मासूमियत और प्यार, शर्म से लाल हुए उसके गाल, सब कुछ एक छलावा था?”

एकांश ने वो फोटो वापिस ड्रॉर मे रखा और अपने आँसू पोंछे और बाथरूम मे शॉवर लेने चला गया ताकि अपने आप को थोड़ा रीलैक्स कर सके

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एकांश अपने ऑफिस मे आ चुका था और अपने केबिन की ओर जाते हुए उसने एक नजर अक्षिता के डेस्क की ओर मारी जो की खाली था, उसने एक लंबी सास छोड़ी और रोहन और स्वरा को देखा जो उसे देख काम मे लग गए थे जैसे उन्होंने उसे देखा ही नहीं था

‘ये लोग कुछ तो छुपा रहे है’ एकांश ने मन ही मन कहा

आज अक्षिता को छुट्टी पर गए तीन दिन हो चुके थे और एकांश अब तक ये बात नाही पचा पाया था वही वो ये भी नहीं मानना चाहता था के वो अक्षिता को मिस कर रहा था

इस सब मे हुआ के के उसका फ्रस्ट्रैशन बढ़ रहा था जिसका सामना उसके एम्प्लॉईस को करना पड रहा था, एकांश की चिढ़चिढ़ बढ़ गई थी और वो अपने हर स्टाफ मेम्बर पर काम से काम एक बार तो जरूर चिल्लाया था, और इस सब मे उसका सबसे ईजी टारगेट बनी बेचारी पूजा जो अक्षिता की जगह काम देख रही थी

एकांश अपनी खुर्ची पर अपना मठ पकड़े बैठा था

‘ये क्या हो गया है मुझे? मुझे उससे दूर रहना है ना की उसे मिस करना है, यू हैट हर एकांश रघुवंशी, यू हेट हर!’

जिसके बाद एकांश मे काम मे अपना मन लगाना चालू किया लेकिन फिर वही बीच बीच मे अक्षिता क खयाल उसका ध्यान भटका देता था और यही उसका फ्रस्ट्रैशन बढ़ा रहा था

‘मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए के वो यहा है या नहीं है, मुझे उससे कुछ लेना देना नहीं है, मैं आज ही ये प्रण लेटा हु के मुझे वो यहा रहे ना रहे कुछ फर्क नहीं पड़ेगा, आइ विल नॉट रीऐक्ट टु हर प्रेजेन्स ऑर आबसेंस’

और जैसे ही एकांश ने ये सोचा उसके केबिन का दरवाजा खुला, उसने उधर देखा तो वहा उसके सामने अक्षिता खड़ी थी और उसके हाथ मे उसकी कॉफी थी।

“तुम वापिस आ गई!” अक्षिता को देख एकांश ने लगभग चिल्लाते हुए अपनी जगह से उठते हुए कहा..

क्रमश:
 
अपडेट 11

जैसे ही एकांश ने अक्षिता के बारे मे ना सोचने के बारे मे सोचा उसके केबिन का दरवाजा खुला, उसने उधर देखा तो वहा उसके सामने अक्षिता खड़ी थी और उसके हाथ मे उसकी कॉफी थी।

“तुम वापिस आ गई!” अक्षिता को देख एकांश ने लगभग चिल्लाते हुए अपनी जगह से उठते हुए कहा..

एकांश को अपने को ऐसे एक्सईटेड देख अक्षिता थोड़ा चौकी, उसके चेहरे पर कन्फ़्युशन साफ देखा जा सकता था जब उसे देख एकांश अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ था

“सर, आप ठीक तो है ना?” अक्षिता ने केबिन मे आते हुए कहा

और जल्द ही एकांश ने अपने आप को संभाला और वापिस से सख्त लहजा अपनाया

“हा” और बगैर अक्षिता की ओर देखे अपनी जगह पर बैठ गया

“आपकी कॉफी” अक्षिता ने कॉफी टेबल पर रखी

एकांश ने एक नजर अक्षिता को देखा जो ऐसे लग रही थी मानो उसने अपने कंधे पर कोई बहुत भरी बोझ उठाया हुआ हो, आंखे ऐसी मानो कई दिनों से सोई ना हो

“where were you?” एकांश ने सपाट आवाज मे पूछा

“मैं छुट्टी पर थी सर” अक्षिता ने भी शांत सपाट आवाज मे जवाब दिया

“पता है लेकिन छुट्टी की जरूरत क्यू लगी?” उसने पूछा

“मेरी तबीयत ठीक नहीं थी”

“ओके, अब जो सच है वो बताओ” एकांश ने पूछा और अक्षिता थोड़ा नर्वस होने लगी

“कैसा सच?” अक्षिता पैनिक कर रही थी लेकिन वैसा महसूस नहीं होने दे रही थी

“तुम्हारी छुट्टी के बारे मे” एकांश ने कहा और अक्षिता की हालत खराब होने लगी, एकांश आगे बोला “तुम्हारे दोस्तों ने बताया तुम्हें बुखार है, वाइरल फीवर लेकिन उसके हावभाव साफ बता रहे थे के वो झूठ बोल रहे है” एकांश ने अपने लैपटॉप मे काम करते हुए कहा

“इडियट्स” अक्षिता पुटपुटाई

“क्या कहा?”

“नहीं... कुछ नहीं सर... लेकिन मैंने मेरी छुट्टी मे क्या किया है इससे आपको कोई मतलब नहीं होना चाहिए” अक्षिता ने अपने आप को संभालते हुए थोड़ा रुडली कहा और एकांश ने अपनी मुट्ठीया भींच ली

“मैं तुम्हारा बॉस हु तुम मेरी एम्प्लोयी हो तो इट इस माइ कन्सर्न डैम इट!” एकांश ने झटके से टेबल पर हाथ मारा

“सर आपको और कुछ चाहिए?” एकांश के गुस्से को इग्नोर करते हुए अक्षिता ने पूछा

“पहले मैंने जो पूछा है उसका जवाब देना सीखो” एकांश दाँत पीसते हुए बोला

“ओके सर... लेकिन मैं मेरे पर्सनल मैटर मेरे बॉस के साथ शेयर नहीं करती” अक्षिता ने कहा

“लीव” एकांश गुस्से मे पुटपुटाया

“क्या सर?”

“मैंने कहा जाओ यहा से” एकांश गुस्से मे चिल्लाया और वो बगैर कुछ बोले उसके केबिन से चली गई...

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रोहन और स्वरा अक्षिता को देख रही थे जो चेहरे पर सूनापन लिए चुप चाप अपना काम करने मे लगी हुई थी एक तो वो लोग उसकी हालत देख कर शॉक मे थे दूसरा उन्हे उसकी काफी चिंता भी हो रही थी कई वापिस आने के बाद उसने उनसे कुछ दूरी सी बना रखी थी

ना तो अक्षिता ने उनसे बात की थी ना तो स्माइल ही दी थी हसना तो दूर की बात और ना ही अक्षिता ने उसकी कीसी बात का जवाब दिया था जब उन्होंने छुट्टी के बारे मे पूछा था, और वो और आज अक्षिता ने उनके साथ लंच भी नहीं किया था

एकांश अपने केबिन की ग्लास विंडो के पास खड़े होकर अपने स्टाफ को देख रहा था, उसके देखा के रोहन और स्वरा दोनों खड़े है और अक्षिता को देख रहे थे, उनके चेहरे पर चिंता की लकिरे साफ दिख रही थी वही फिर उसने अक्षिता को देखा जो एकतक अपने सामने रखी स्क्रीन को देख रही थी

अक्षिता को देखते हुए एकांश को इस खयाल ने थोड़ा और दुखी किया के आज जिस तरह अक्षिता ने उससे बात की थी वैसे पहले कभी नहीं की थी, उसके इस ऑफिस को टेकओवर करने के बाद भी... एकांश यही सब सोच रहा था के उसे एक कॉल आया और वो कॉल अटेन्ड करते हुए अपनी जगह पर जाकर बैठ गया

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“मिस पांडे”

अक्षिता ने जैसे की अपना नाम सुना वो पलटी तो दकहया के वहा उसके पीछे एकांश अपने सपाट चेहरे के खड़ा था, ऑफिस के लोग उनको ही देख रहे थे और चेहरे पर सवालिया निशान लिए अक्षिता ने एकांश को देखा

“मेरी एक होटल मे मीटिंग है और तुम मुझे उस मीटिंग के लिए असिस्ट करने वाली हो, कम विथ मी” एकांश ने ऑर्डर छोड़ा और वहा से निकल गया

अक्षिता ने भी जल्दी से अपना पर्स और फोन उठाया और एकांश के पीछे पीछे बिल्डिंग से बाहर आ गई जहा एकांश खड़ा था और फोन पर कीसी से बात कर रहा था

“जल्दी करो हमारे पास पूरा दिन नहीं है” एकांश ने कार मे बैठते हुए अक्षिता से कहा जो वहा कीसी बुत की तरह खड़ी थी

अक्षिता ने उसे देखा और फिर उसकी बड़ी से कार के पैसेंजर सीट का दरवाजा खोलने लगी

“सीट एट बैक” वापिस एकांश का आवाज आया और अक्षिता को उसके बाजू मे पीछे की सीट पे बैठना पड़ा

एकांश गाड़ी मे भी लैपटॉप लिए कुछ काम कर रहा था वही अक्षिता चुप चाप बैठी खिड़की से बाहर देख रही थी, एकांश भी बीच बीच मे काम करते हुए उसे झलक भर देख लेता था हो अपने ही खयालों मे खोई हुई थी

जब कार रुकी तो अक्षिता ने पाया के कार एक बड़े से मेनशन के सामने खड़ी है

“हम कहा है?” अक्षिता ने उस बड़े से घर को देखते हुए पूछा

“मेरे घर पर” एकांश ने गाड़ी से उतरते हुए कहा

‘क्या! क्यू?” अक्षिता ने थोड़ा पैनिक होते हुए कार से नीचे उतरते पूछा

“मुझे मीटिंग के लिए कुछ फाइलस् चाहिए थी बस वही लेनी है” एकांश ने आराम से कहा और घर मे जाने लगा, उसने पीछे देखा तो अक्षिता नर्वसली वही खड़ी थी

“तुम अंदर नहीं आओगी?” उसने पूछा

“नहीं सर मैं यही वेट करती हु” अक्षिता ने कहा

‘ठीक” इतना कह कर एकांश घर मे चला गया

अक्षिता कार से टिक कर खड़ी थी और उसने राहत की सास ली..

एकांश का इंतजार करते हुए अक्षिता ने इधर उधर देखा तो मेनशन मे बने गार्डन ने उसका ध्यान खिचा जो की बहुत खूबसूरत था और बढ़िया तरीके से मैन्टैन किया था

इधर एकांश अपने रूम मे पहुचा और जो चाहिए थी वो फाइलस् ढूँढने लगा जो उसे जल्द ही मिल भी गई और जब वो निकल ही रहा था के खिड़की से उसने एक नजारा देखा जिसे देख वो वही रुक गया

अक्षिता गार्डन मे थी और अपने घुटनों पे बैठ कर गार्डन मे लगे गुलाब के फूलों को देख रही थी, एकांश ने देखा के वहा अक्षिता थोड़ा खुश लग रही थी, उन गुलाब के फूलों की खुशबू लेटे हुए अक्षिता ने अपनी आंखे बंद कर रखी थी और उसके चेहरे पर एक स्माइल आ गई थी

वही दूसरी तरफ एकांश की मा भी वहा पहुच गई थी और वो कार से उतर कर घर मे जा ही रही थी के उन्होंने देखा के एक लड़की उनके गार्डन मे बैठी है जिसकी उनकी ओर पीठ थी, वो मुस्कुराई और उस लड़की की ओर बढ़ गई

“बेटे कौन हो तुम?” एकांश की मा ने पूछा

अक्षिता झट से आवाज सुन खड़ी हुई और उसने इस आवाज की ओर मूड कर देखा तो वो दोनों ही अपनी जगह जम गई और एकदूसरे को देखने लगी

“अक्षिता!!” एकांश की मा ने धीमे से कहा, वो शॉक थी वही अक्षिता नीचे देखते हुए वैसे ही नर्वसली वहा खड़ी थी

“तुम यहा क्या कर रही हो?” उन्होंने पूछा, वो अब भी शॉक थी

“मैं.... वो... मैं.... एक्चुअल्ली...”

“मा..” एकांश भी वहा पहुच गया था

उनदोनों ने एकांश को देखा फिर एकदूसरे को देखा और वापिस एकांश को देखने लगे

“आप दोनों एकदूसरे को जानते हो क्या?” एकांश ने पूछा

“नहीं!” दोनों ने एकस्थ कहा जिसने एकांश को थोड़ा चौकाया

“तो फिर क्या बात कर रहे थे?” एकांश अब उनके पास पहुच चुका था

“कुछ नहीं मैं बस कुछ नहीं थी वो हमारे गार्डन मे क्या कर रही है तो”

“ओह... वैसे ये मेरी अससिस्टेंट है, वो मेरा ही इंतजार कर रही थी मैं कुछ फाइलस् लेने अंदर गया था” एकांश ने अपनी मा को बताया

एकांश की मा ने झटके के साथ अक्षिता को देखा उन्हे यकीन नहीं हो रहा था के अक्षिता उसकी अससिस्टेंट है, अक्षिता ने भी एक नजर उनको देखा और फिर नीचे देखने लगी

“चलो चलते है मीटिंग के लिए देर हो रही है” एकांश ने अक्षिता से कहा और कार की ओर बढ़ गया, अक्षिता भी चुप चाप उसके पीछे हो ली वही एकांश की मा उन्हे जाते हुए देखने लगी

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एकांश और अक्षिता दोनों होटल मे आ गए थे और सभी की नजरे उनकी तरफ थी या यू काहू एकांश की तरफ... एक तो वो दिखने मे हैन्डसम था हु दूसरा उसका चार्म उसका औरा ऐसा था के लोग उसकी ओर खिचे जाते थे, दूसरा अभी बिजनस जगत मे एकांश अपना नाम बना रहा था और खासा फेमस था

होटल स्टाफ ने एकांश को अच्छे से रीस्पेक्ट के साथ वेलकम किया वही फीमेल स्टाफ के साथ साथ वह मौजूद लड़किया भी उसकी ओर ही देख रही थी

वही लड़कियों का यू एकांश को देखना अक्षिता को पसंद नहीं आ रहा था, वही एक होटल की फीमेल स्टाफ एकांश के बहुत पास खड़ी होकर उससे बात कर रही थी या यू कहे उसे रिझाने की कोशिश कर रही थी और अब ये अक्षिता से बर्दाश्त नहीं हो रहा था,

अक्षिता ने बड़ी हु चतुराई से उस लड़की को एकांश से दूर हटाया और उन दोनों के बीच आकार खाइड हो गई और उस लड़की को थोड़ा घूरने लगी

एकांश ने सप्राइज़ होकर अक्षिता को देखा, वो समझ गया था उसे जलन हो रही थी और ये देख उसके चेहरे पर स्माइल आ गई, अक्षिता ने एकांश को देखा तो वो मुस्कुरा रहा था तो बदले मे अक्षिता ने उसे भी घूर के देखा और उस लड़की को दूर हटाया, अक्षिता और एकांश नजरों से ही एकदूसरे को टशन दे रहे थे

और जहा एक ओर ये आँखों की गुस्ताखिया चल रही थी वही मीटिंग के लिए आए डेलीगटेस और होटल स्टाफ उन्हे देख रहे थे और मीटिंग शुरू होने की राह देख रहे थे और जब उन दोनों के ध्यान मे आया के सब उन्हे देख रहे है तो उन्होंने अपने आप को संभाला और एकांश ने अपना गला साफ किया और बोलना शुरू किया

जिस तरगफ से एकांश डील कर रहा था बात कर रहा अथॉरिटी बता रहा था वो देख अक्षिता इम्प्रेस होने से अपने आप को रोक नहीं पाई, एकांश ने डील की इतने बढ़िया तरीके से हँडल किया था क्व वो लोग उसकी सभी बाते मानते चले गए,

एकांश का स्टाइल, कान्फिडन्स सब कुछ अक्षिता पर आज अलग छाप छोड़ रहा था..

मीटिंग खत्म कर दोनों वापिस ऑफिस आने के लिए निकल गए थे... और दोनों के ही दिमाग मे अपने अपने खयाल दौड़ रहे थे.....

क्रमश:
 
अपडेट 12

एकांश अपने केबिन मे बैठा काम कर रहा था के तभी अचानक अक्षिता धड़धड़ाते हुए उसके केबिन मे घुसी, बगैर नॉक कीये, अक्षिता बहुत ज्यादा गुस्से मे थी और उसे इस वक्त कुछ नहीं सूझ रहा था...

“मिस्टर रघुवंशी! आप अपने आप को समझते क्या है? आप कोई तोप है जो कुछ भी कर सकते है?” अक्षिता ने सीधा केबिन मे घुसते हुए एकांश पर धावा बोल दिया और सीधा उसे गुस्से से देखते हुए बोलने लगी

“मिस पांडे होश मे तो हो क्या बोल रही हो क्या कर रही हो? और तुममे इतनी भी समझ नहीं है क्या के कीसी के केबिन मे आने से पहले नॉक करना होता है?” एकांश भी उसपर गुर्राया

“मुझे जो सही लग रहा है वो मैं कर रही हु और मुझे नहीं लगता तुम इस वक्त कोई मैनर्स या रीस्पेक्ट डेसर्वे करते हो” अक्षिता वापिस चिल्लाई

“होश मे आओ मिस पांडे तुम अपने बॉस से बात कर रही हो”

“अच्छा... लेकिन बॉस के पास ये हक नहीं होता न के उसका एम्प्लोयी अपने पर्सनल जिंदगी मे क्या करता है उसपर नजर रखे उसे स्टॉक करे” अक्षिता ने कहा

“क्या?? मैं कीसी पर नजर नहीं रख रहा हु” एकांश अक्षिता की बात सुन शॉक था और वो अपने आप को डिफेंड करते हुए चिल्लाया

“झूठ मत बोलो...! मैं अभी इतने गुस्से मे हु के अभी कुछ उल्टा सीधा कर जाऊँगी” अक्षिता ने एकांश को उंगली दिखा कर धमकाते हुए कहा

“और क्या करोगी तुम?” एकांश ने अपनी भोहे उठा कर अक्षिता को चैलेंज किया

“कुछ भी जिससे तुम्हें पछताना पड़े”

“अब अपनी ये बकवास बंद करो और मुद्दे पर आओ मिस पांडे” एकांश ने कहा

“Stop. Stalking. Me.” अक्षिता ने दाँत पीसते हुए कहा

“अपने आप को इतना इम्पॉर्टन्स मत दो मिस पांडे मैं क्यू स्टॉक करूंगा तुम्हें?”

“मुझे क्या पता वो तो आपको पता होना ना”

“अबे यार!!” एकांश अब फ्रस्ट्रैट हो रहा था

“एक बात बताओ, तुमको कैसे पता के मैं तुम्हें स्टॉक कर रहा हु, तुमपे नजर रखे हु?” एकांश ने पूछा

“क्युकी आपका वो दोस्त मेरा पीछा कर रहा है, जहा भी मैं जाऊ घर, शॉपिंग रेस्टोरेंट हर जगह” अक्षिता का गुस्सा कम ही नहीं हो रहा था

“क्या? कौनसा दोस्त? किसका दोस्त?” एकांश अब कन्फ्यूज़ था

“पुछ तो ऐसे रहे हो जैसे इस सब के बारे मे कुछ पता ही नहीं है” अक्षिता ने कहा

“हा क्युकी मुझे सही मे कुछ नहीं पता है” एकांश ने जो सच था बता दिया

“लेकिन फिर तुम्हारा दोस्त मेरा पीछा क्यू करेगा जब तुमने उसे ये करने नहीं कहा तो?” अक्षिता मानने को ही तयार नहीं थी

“अबे यार तुम किस दोस्त की बात कर रही हो वो बताओ पहले?” एकांश अब साफ साफ इरिटैट हो रहा था इसीलिए उसने दाँत पीसते हुए बोला

“वही जो उस दिन ऑफिस आया था.. बर्थडे के दिन”

“क्या??”

“हा!”

“तो तुम्हारा ये कहना है के अमर तुमको स्टॉक कर रहा है?” अब इस नए खुलासे से एकांश थोड़ा चौका

“मुझे नाम नहीं पता लेकिन ये वही है जिससे मैं ऑफिस मे टकराई थी और वो आपका दोस्त है” अक्षिता भी इस सब से परेशान थी और एक ही बात रीपीट किए जा रही थी

“तो अब मुझसे क्या चाहती हो?’

“आपने अपने दोस्त को मुझे स्टॉक करने क्यू कहा?

“मैंने कीसी से कुछ नहीं कहा है मिस पांडे, लेकिन मैं पता लगाऊँगा के मैटर क्या है” इससे पहले अक्षिता कुछ बोलती एकांश ने साफ शब्दों मे कह दिया था के उसका इससे कोई लेना देना नहीं है

“ओके”

“अब जाओ यहा से और दोबारा मेरे केबिन मे ऐसे घुसने की हिम्मत मत करना” एकांश ने ऑडर छोड़ते हुए अक्षिता को जाने के लिए कहा

“अभी तो मैं जा रही हु मिस्टर रघुवंशी लेकिन अपने दोस्त को समझा देना के मुझसे दूर रहे मेरा पीछा करना बंद करे क्युकी दोबारा अगर वो मुझे मेरे आसपास या मेरे घर के आसपास दिखा तो जो होगा उसके लिए मुझे दोष मत देना” अक्षिता ने एकांश को जाते जाते वापिस उंगली दिखा कर धमकाया

“don’t you dare to warn me miss Pandey, तुम्हें याद दिलाना पड़ेगा क्या ये मेरा ऑफिस है और मैं बॉस हु?” एकांश ने अक्षिता की ओर बढ़ते हुए कहा और वो थोड़ा पीछे हटने लगी

और इससे पहले के एकांश और कुछ बोलता या करता उन्हे कीसी के गला साफ करने का आवाज आया और दोनों के चेहरे उस इंसान की ओर घूमे

केबिन मे एक खूबसूरत मॉडेल जैसी दिखने वाली लड़की हाथ बांधे एकांश के डेस्क पर बैठी थी और उन्ही लोगों को देख रही थी

अक्षिता भी उस लड़की को देख रही थी

‘ये कौन है? और ये अंदर कैसे आई? और मैंने इसे अंदर आते हुए कैसे नहीं देखा? ये कबसे यहा है? और इसने अब तक कुछ बोला क्यू नहीं? कही ये कोई भूत तो नहीं?”

अपने ही खयालों से अक्षिता थोड़ा चौकी और उस लड़की को थोड़े डर से देखने लगी

‘ये इतनी खूबसूरत भूतनी मुझे ऐसे क्यू देख रही है जैसे मैं कोई अजूबा हु?’

एक तरह यह अक्षिता के दिमाग मे ये सब बेतुके सवाल आ रहे थे ही एकांश ने मन ही मन अपने आप को लपड़िया दिया था क्युकी वो भूल चुका था के वो केबिन मे अकेला नहीं था

‘मैं ऐसी बेवकूफी कैसे कर सकता हु यार? मैं कैसे भूल सकता हु के मैं केबिन मे अकेला नहीं था वो मेरे साथ थी और इस बेवकूफ लड़की से उलझने मे मेरा ध्यान ही नहीं रहा... ये क्या सोच रही होगी अब मेरे मारे मे? हमारे बारे मे?’

इन लोगों के ऐसे क्लूलेस चेहरे देख वो लड़की हसने लगी थी...

“आइ लाइक यू” जब हस कर हो गया तब वो लड़की अक्षिता से बोली

“हा?” और ये था अक्षिता का ब्रिलिएन्ट रीस्पान्स

“आइ रिएलि लाइक यू क्युकी मैंने कभी कीसी को एकांश रघुवंशी से ऐसे बात करते नहीं सुना है” उस लड़की ने मुसकुराते हुए अक्षिता को देख कहा और अक्षिता ने गर्दन नीचे झुका ली

अक्षिता ने एक नजर एकांश को देखा जो गुस्से से उसे ही घूर रहा था और वो उसे देख हस दी

“लेकिन मानना पड़ेगा के तुम न एकदम कमाल हो यार, मतलब तुमने वो कर दिया है जो कोई करने का सोचता भी नहीं है” उस लड़की ने अक्षिता की तारीफ की जो अब भी उसे कन्फ़्युशन मे देख रही थी

“अब ये सीन रोज रोज देखने नहीं मिलता न के कोई एकांश को उंगली दिखा कर धमकाए, उसपर इल्जाम लगाये उससे लड़े उसे चुप करा दे उसपर चिल्लाए और उसे एकदम इरिटैट करके रख दे मतलब एकदम कमाल हैना एकांश?” उस लड़की ने कहा

“हा हा ठीक है हो गया अब” एकांश ने इरिटैटेड टोन ने कहा और वो लड़की वापिस से हसने लगी वही अक्षिता बस नीचे देख रही थी

“ओके ओके, तो अब मुझे इस ब्रैव एण्ड ब्यूटीफुल लड़की से इन्ट्रोडूस तो कराओ” उस लड़की ने कहा

“ये अक्षिता पांडे है, मेरी पर्सनल अससिस्टेंट” एकांश ने कहा

“ओह नाइस टु मीट यू अक्षिता.... आइ एम श्रेया, श्रेया मेहता” श्रेया ने अक्षिता की ओर हाथ बढ़ाते हुए कहा

“नाइस टु मीट यू टू” अक्षिता ने भी मुसकुराते हुए श्रेया से हाथ मिलाया

तभी अक्षिता के फोन का अलार्म बीप बजाने लगा और एकांश और श्रेया दोनों ने सवालिया नजरों से अक्षिता को देखा

“सॉरी.... वो कुछ काम का रिमाइंडर है, जरूरी काम है मुझे जाना होगा” इतना बोल अक्षिता जाने के लिए पलटी

“अक्षिता रूकों” श्रेया ने अक्षिता को रोका और अक्षिता ने उसे देखा फिर फिर श्रेया आगे बोली

“आज मेरी एक पार्टी है होटल मे और मैं चाहती हु तुम भी आओ” श्रेया ने स्माइल के साथ कहा

“नहीं, सॉरी लेकिन मैं नहीं आ पाऊँगी, एक तो मुझे पार्टी करना उतना पसंद भी नहीं है” अक्षिता ने नर्वसली कहा

“प्लीज ऐसा मत कहो यार... तुम आओगी तो मुझे अच्छा लगेगा”

“लेकिन मैं वहा आकार क्या करूंगी मैं तो वहा कीसी को जानती भी नहीं हु” अक्षिता ने वापिस बहाना बनाना चाहा

“अरे मैं तो रहूँगी ही ना वहा और तुम चाहो तो अपने दोस्तों को भी लेकर आ सकती हो फिर तो कोई प्रॉब्लेम ही नहीं होगी” श्रेया ने कहा

“श्रेया तुम क्यू फोर्स कर रही हो, उसको नहीं आना तो ना आए ना” एकांश ने कहा

“एकांश रघुवंशी, तुम खुद तो कही आते जाते नहीं हो न पार्टी करते हो मैं तबसे तुम्हें मना रही हु लेकिन तुम माने? और अब मुझे औरों को भी इन्वाइट नहीं करने दे रहे” श्रेया ने कहा और उसे सुन एकांश वापिस अपनी जगह जाकर बैठ गया वो अब और बहस के मूड मे नहीं था

“तो आओगी ना?” श्रेया ने अक्षिता से पूछा

“हा मैं आ जाऊँगी” अक्षिता ने मुसकुराते हुए कहा और श्रेया ने खुश होकर उसे गले लगा लिया पहले तो अक्षिता थोड़ी चौकी फिर उसने भी श्रेया को गले लगाया

“तुम मुझे अपना नंबर दो मैं उसपर तुम्हें वेन्यू टेक्स्ट करती हु”

जिसके बाद अक्षिता ने श्रेया के साथ नंबर एक्सचेंज किया वही एकांश बस उन्हे देखर यहा था, कुछ देर मे अक्षिता अपने काम मे लग गई और श्रेया भी ऑफिस से चली गई वही एकांश अमर से कान्टैक्ट करने की कोशिश करने लगा जिसका फोन स्विच ऑफ बता रहा था, एकांश अमर की इस हरकत से बहुत ज्यादा गुस्से मे था और अगर अमर के पास इसका कोई खास कारण नहीं हुआ तो वो पिटेगा ये कन्फर्म था

काम खत्म करने के बाद अक्षिता स्वरा और रोहन साथ मे पार्किंग की ओर जा रहे थे

“गाइज आज एक पार्टी है और....” और इसके पहले के अक्षिता अपनी बात पूरी कर पाती

“पार्टी! कौनसी पार्टी.. कैसी पार्टी.. किसका बर्थडे है?” स्वरा ने सवालों की भडमार कर दी

“अरे पहले उसको बात तो पूरी करने दो” रोहन ने स्वरा को कहा

“अरे बस मुझे इन्विटैशन मिला है और हमे जाना है बस इतना समझ लो” अक्षिता ने कहा

“किसकी पार्टी है?” रोहन ने पूछा

“श्रेया मेहता की, मैं उससे आज ही मिली थी एकांश के केबिन मे उसी ने मुझे कहा है मैं दोस्तों के साथ भी आ सकती हु” अक्षिता ने बता

“ओके, लेकिन पार्टी है कहा?” इस बार स्वरा ने आराम से पूछा

“कोई फाइव स्टार होटल है शायद” अक्षिता ने श्रेया का भेजा मैसेज देखते हुए कहा

“क्या?”

“हा”

“वॉव यार, अब आएगा मजा” स्वरा ने एक्सईट होते हुए कहा

“कब जाना है?” रोहन ने पूछा

“आज रात”

“क्या!!!”

“अबे पागल औरत चिल्लाना बंद कर यार” रोहन ने स्वरा वो चुप कराया

“आज पार्टी मे जहा और मेरा क्या पहनना डिसाइड नहीं है शॉपिंग करनी होगी कितने काम है तयार होना है तुम लोग यहा टाइमपास कर रहे हो” स्वरा ने उलट उन दोनों को ही सुना दिया

“अबे बस पार्टी ही तो है इतना क्या लोड लेना जो है उसमे काम चलाओ, चलो मैं निकलता हु तुम लोग रेडी हो जाओ तो कॉल करना मैं दोनों को पिक कर लूँगा” इतना बोल के रोहन वहा से निकल और और उसके पीछे स्वरा और अक्षिता भी अपने अपने घरों की ओर निकल गए.....

क्रमश:
 
टाइटल इंग्लिश में रखने से रीच का फर्क पड़ता है सर्च इंजन बूस्ट होता है :डी

बाकि इतने डिटेल्ड रिव्यु के लिए बहुत बहुत धन्यवाद भाई, आप जैसे कुशल लेखक से रिव्यु पाना अच्छा लगता है,

सभी डॉब्टस का जवाब आने वाले उपदटेस में है भाई :डी है कुछ बाते है हो अटपटी लग सकती है लेकिन वो सब आने वाले टाइम से साथ क्लियर होती रहेगी,

बाकि मुझे आपसे ऑनेस्ट रेविएवस की उम्मीद है अस उनसे मुझे hi बेटर होने में मदद होती है और वो मिलेंगे भी ये जानता हु, साथ बने रहिएगा भाई

इस शानदार रिव्यु के लिए बहुत बहुत शुक्रिया :थैंक्स:
 
अपडेट 13

“क्या बढ़िया जगह है यार ये” स्वरा ने पार्टी के वेन्यू पर पहुचते हुए कहा

“हम्म” अक्षिता भी इधर उधर देख ही रही थी

“अंदर चले या यही रुकना है फिर?” रोहन ने उन दोनों के पीछे से कहा और वो लोग अंदर आए और देखा तो वहा पहले ही कई लोग आ चुके थे पार्टी चल रही थी, एक ओर कुछ लोग डांस कर रहे थे वही दूसरी ओर ड्रिंक्स का भी बंदोबस्त था, कुछ लोग एक साइड खड़े बात रहे रहे थे कुछ महोल का मजा ले रहे थे

अक्षिता तो तभी ऐसा लगा के कोई उसे देख रहा था और जब अक्षिता ने उस ओर देखा तो वहा कोई नहीं था, अक्षिता ने इस बात को इग्नोर किया और वहा श्रेया को खोजने लगी

कुछ पल नजर इधर उधर घुमाने के बाद उसे श्रेया दिख गई जो एकदम कहर ढा रही थी और कुछ लोगों से बाते कर रही थी, अक्षिता स्वरा और रोहन के साथ श्रेया की ओर बढ़ने लगी और वो भी उन लोगों से इक्स्क्यूज़ लेकर इनके पास आई

“Akshita! I am glad you came” श्रेया ने कहा

“it’s my pleasure and you look gorgeous” अक्षिता ने मुसकुराते हुए कहा

“थैंक यू”

‘बाइ द वे ये मेरे दोस्त है, रोहन और स्वरा और गाइज ये है श्रेया मेहता, आज की होस्ट”

“hello guys, its nice to meet you two, hope you are enjoying the party” श्रेया ने स्वरा और रोहन को देखते हुए कहा

“यस, द पार्टी इस अमेजिंग एण्ड नाइस टु मीट यू टू” रोहन ने फॉर्मली कहा

"हैलो मिस श्रेया वंडरफुल पार्टी एंड थैंक यू फॉर इनवाइटिंग अस" स्वरा ने कहा

"प्लीज कॉल मि श्रेया, आई एम ग्लैड यू गाइज केम" श्रेया ने कहा

"वैसे मेरे दो सवाल है एक तो बगैर जान पहचान के मुझे बुलाना और इस शानदार पार्टी का रीजन तो बताओ" अक्षिता ने पूछा

"देखो मुझे मेरी ही पार्टी में किसी को इन्वाइट करने रीजन नही चाहिए और जैसे मैंने तुम्हे एकांश से बात करते देखा आई थॉट के हम अच्छे दोस्त बन सकते है रही बात पार्टी की तो मैं एक फैशन डिजाइनर की और मेरा अपना फैशन हाउस है और रिसेंटली मेरे डिजाइन्स पेरिस फैशन वीक में सेलेक्ट हुए है," श्रेया ने बताया

"ओह माई गॉड, कांग्रेटूलेशंस!" अक्षिता ने श्रेया को गले लगाते हुए कहा

"थैंक यू, गाइज एंजॉय द पार्टी, मुझे अभी जाना होगा कई लोगो से मिलना है," इतना बोल के श्रेया वहा से निकल गई

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पार्टी अपने पूरे रंग पे थी शानदार म्यूजिक बज रहा था, रोहन और स्वरा डांस का मजा ले रहे थे वही अक्षिता वहा से थोड़ी दूर एक कोने में बैठी थी, उसे पार्टी करना वैसे भी ज्यादा पसंद नही था और तभी अक्षिता को खुद पर किसी की नजरे महसूस हुई, वो जो लकड़ियों के पास एक्स्ट्रा सेंस होता है बस उससे ही अक्षिता को लगा के कोई उसे देख रहा था लेकिन उसने जब इधर उधर देखने की कोशिश की तो वैसा कुछ नही था

अक्षिता को वहा बैठे बैठे प्यास लग रही थी वो उठी और वहा सर्व हो रहे पानी जैसे ड्रिंक को पी लिया, अक्षिता वहा अब बोर हो रही थी और अब उसे बस घर जाकर सोना था..

कुछ पल और रुक कर अक्षिता अपने दोस्तो के पास जा ही रही थी के वो किसी से टकरा गई और जब उसने ऊपर देखा

"तुम!!!" अक्षिता ने गुस्से में कहा

"यप :D"

"तुम मेरा पीछा करते हुए यहा तक आ गए?" अक्षिता ने इस बंदे को गुस्से में घूरते हुए कहा

"जी नही, मैं यहा अपने दोस्त की पार्टी अटेंड करने आया हु" उस बंदे से सरेंडर की मुद्रा में अपने हाथ ऊपर उठाते हुए कहा

"तुम मेरा पीछा क्यों कर रहे हो, why are you stalking me?" अक्षिता ने हाथ बांधे पूछा

"मैं कोई तुम्हारा पीछा नही कर रहा ही, मैं बस थोड़ा सा क्यूरियस हु"

"क्यूरियस?"

"हा, तुम्हारे बारे में थोड़ा और जानने के लिए" वो बंदा बोला

अक्षिता ने ना में अपना सर हिलाया और अपने दोस्तो को खोजने लगी

"किसे ढूंढ रही हो?" उस बंदे में पूछा लेकिन बदले में अक्षिता ने बस उसे आंखे बारीक करके घूरा

"चिंता मत करो जल्दी ही उससे मिल लोगो वो श्रेया से मिलने गया है" वो बंदा बोला

"कौन?" अक्षिता ने थोड़ा कंफ्यूज टोन में पूछा लेकिन बदले में वो शक्स बस मुस्कुराया और अक्षिता वहा से जाने लगी और वो बंदा उसके पीछे हो लिया

"तुम यहा क्या कर रही हो?" तभी उनलोगो को ये आवाज सुनाई दी, पलट कर देखा तो वहा एकांश खड़ा था, "अमर, तुम मिस पांडे के साथ क्या कर रहे हो?" एकांश ने थोड़े गुस्से में अमर से पूछा

"कुछ नही भाई बस टकरा गए थे तो थोड़ी बात कर ली :D" अमर में बात झटकते हुए कहा

"तू हमेशा इससे ही क्यों टकराता है बे" एकांश अमर से बोला वही अक्षिता वहा से निकल गई थी...

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पार्टी अपने पूरे जोर पर थी और इस पार्टी में ना तो एकांश को उतना इंटरेस्ट था और ना ही अक्षिता को वही रोहन और स्वरा पार्टी का पूरा मजा ले रहे थे, वही अक्षिता की प्यास ही नही बुझ रही थी जबकि वो अब तक वहा सर्व होते ड्रिंक्स के कई ग्लास गटक चुकी थी और वही एकांश बता नही रहा था लेकिन अक्षिता पर उसका पूरा ध्यान था तभी एकांश ने देखा के अक्षिता थोड़ा अलग बिहैव कर रही है और उस ओर चल पड़ा

“उठो”

“नहीं”

“मैंने कहा उठो वहा से”

“नो”

“मूव”

“नहीं”

एकांश अक्षिता के पास पहुचा जो जमिन पर बैठे मुस्कुरा रही थी और एकांश उसे वहा से उठाने की कोशिश कर रहा था

“तुम वहा नीचे बैठ कर क्या कर रही हो?” एकांश ने इरिटैटेड टोन मे अक्षिता से पूछा

“मैं कुछ ढूंढ रही हु डिस्टर्ब मत करो” अक्षिता ने कहा

“क्या ढूंढ रही हो?”

“मेरे दोस्तों को ढूंढ रही हु” अक्षिता ने सीरीअसली जवाब दिया और अब एकांश के मैटर ध्यान मे आ गया

“अक्षिता तुमने शराब पी है?” एकांश ने आराम से पूछा

“नहीं तो मैंने तो पानी पिया है और कुछ शर्बत”

“पानी पीने से कीसी को नशा नहीं होता है” एकांश गुस्से मे चिल्लाया वही अक्षिता की शक्ल ऐसी हो गई थी मानो अभी रो देगी

“ये लो ये पिलाओ उसे थोड़ा ठीक लगेगा” अमर भी अब तक वहा आ गया था और उसे मैटर समझ आते हो वो बारटेन्डर से थोड़ा नींबू मिला पानी ले आया था

“ये लो ये पीओ ठीक लगेगा” एकांश ने वो ग्लास अक्षिता की ओर बढ़ाया

“नहीं, मैं ये नहीं पियूँगी” अक्षिता ने कहा

“पी लो बस नींबूपानी है” एकांश ने उसे समझाते हूएं कहा

“नहीं,” और इतना बोल के अक्षिता अपने दोस्तों के नाम से चिल्लाने लगी, वहा का महोल लाउड म्यूजिक सब कुछ अक्षिता के नशे हो हल्का हल्का बढ़ा रहे थे, उसने गलती वहा सर्व होती वोडका पी ली थी और वोडका के साथ एक चीज ये भी है के वो अगर ज्यादा देर हवा से इक्स्पोज़ हो जाए हो उसका टेस्ट पानी जैसा हो जाता है, इसीलिए अक्षिता ये जान ही नहीं पाई के वो पानी नहीं था.. और अब अक्षिता पूरे वोडका के असर मे थी

“रोहन स्वरा.... कहा हो तुम लोग” अक्षिता जोर से चीख रही थी और अब वहा अगल बगल वालों का ध्यान उस ओर जा रहा था...

“शट अप” एकांश ने कहा और अक्षिता चुप हुई और तभी स्वरा और रोहन वहा आ गए थे

“हे भगवान अक्षु तुम ऐसे जमीन पर क्या कर रही हो?” स्वरा ने अक्षिता के पास घुटनों पर बैठते हुए पूछा

“मैं तुम लोगों को ढूंढ रही थी”

“ऐसे जमीन पर बैठ कर?” स्वरा ने पूछा

“हा!” अक्षिता ने हसते हुए कहा वही अमर ये साथ मैटर देख कर अपने आप को हसने से रोक रहा था

“अक्षिता, तुमने शराब पी है?” रोहन ने चिंतित स्वर मे पूछा

“उसने भी यही पूछा तुम भी यही पपुछ रहे हो” अक्षिता ने एकांश की ओर उंगली दिखते हुए कहा

“अक्षु तुम जानती हो ना तुम शराब नहीं पीनी चाहिए, तुम शराब को छु भी नहीं सकती तुमको allowed ही नहीं है” रोहन ने सीरीअसली कहा और अक्षिता को खड़ा किया वही उसकी बात सुन एकांश के कान खड़े हो गए क्युकी रोहन काफी ज्यादा सीरीअस लग रहा था

“क्यू?” रोहन की बात पे अमर ने सवाल किया लेकिन जैसे ही स्वरा ने उसे घूर के देखा वो चुप हो गया

“हा हा पता है मैंने बस थोड़ा पानी पिया था” अक्षिता ने कहा

“चलो घर चलो” रोहन ने कहा

“नहीं, मुझे कही नहीं जाना” और इतना बोल के अक्षिता ने वह खड़े एकांश को पकड़ लिया जो बस उसे देख रहा था

अक्षिता ने एकांश को देखा और उसे देख मुस्कुराने लगी, और तभी उसका बैलन्स बिगड़ा और वो गिरने ही वाली थी के एकांश ने उसे संभाल लिया

“अंश, कितने क्यूट लग रहे हो तुम” अक्षिता ने एकांश को मुसकुराते हुए देख कहा, और एकांश थोड़ा चौका, उसके और अक्षिता के बारे मे कीसी को पता नहीं था के उसका पास्ट क्या था ऐसे मे अक्षिता का उसे अंश कह कर बुलाना कई सवालों को डावात देने जैसा था और ये एकांश बिल्कुल नहीं चाहता था

वही अक्षिता अब एकांश को छोड़ने को तयार ही नहीं था वो उसे कस कर पकड़ी हई थी, स्वरा भी अक्षिता का एकांश के लिए बिहैव्यर देख थोड़ी हैरान थी लेकिन ये वक्त सवाल पूछने का नहीं था

रोहन और स्वरा दोनों को ही टेंशन हो रही थी

“अक्षु चलो, घर चलो” स्वरा ने कहा

“नहीं मैं अंश को छोड़ के कही नहीं जा रही” अक्षिता ने कहा

वो लोग अब पार्किंग मे आ चुके थे

“डोन्ट वरी मिस स्वरा, मैं उसे घर छोड़ दूंगा” अक्षिता उसे छोड़ ही नहीं रही थी इसीलिए एकांश स्वरा से बोला

“नहीं!” रोहन और स्वरा ने एकसाथ कहा और एकांश ने सवालिया नजरों से उसे देखा

“सर मैं उसे मेरे घर लेकर जा रही हु, ऐसी हालत मे वो घर नहीं जा सकती उसके पेरेंट्स को टेंशन होगी” स्वरा ने कहा

“ठीक है फिर मैं तुम दोनों को ड्रॉप कर देता हु, मिस्टर रोहन आप जाइए, अमर हम तीनों को ड्रॉप कर देता” एकांश ने कहा और रोहन ने भी उसकी बात ठीक समझी

अक्षिता से सब चला भी नहीं जा रहा था, और नशे से आंखे भी भारी होने लगी थी लेकिन फिर भी वो एकांश को नहीं छोड़ रही थी और एकांश उसे गोदी मे उठाया और कार की ओर बढ़ गया वही अक्षिता भी उससे चिपकी हुई थी और उसे ऐसे देख स्वरा और रोहन काफी शॉक थे,

एकांश ने अक्षिता को पीछे की सीट पर बिठाया और खुद भी उसके बाजू मे बैठ गया वही स्वरा अमर के बाजू मे आगे पैसेंजर सीट पर बैठी थी, स्वरा ने पीछे पलट कर देखा तो वो थोड़ा और चौकी, अक्षिता एकांश के सिने से लग कर सोई हुई थी स्वरा ने उसे ठीक से बैठने कहा भी लेकिन अक्षिता सुनने की हालत मे थी ही कहा वही एकांश भले ही अपने चेहरे पर जाहीर नहीं होने दे रहा था लेकिन अक्षिता को अपने इतना पास पाकर मन ही मन वो भी काफी खुश था

घर पहुचने पर भी एकांश को उसे गोद मे उठा कर बेडरूम मे सुलाना पड़ा

“टेक केयर ऑफ हर, कल सुबह भारी हैंगओवर होने वाला है उसे” एकांश ने स्वरा से कहा जिसने उसे पानी का ग्लास पकड़ाया जिसपर स्वरा ने हा मे गर्दन हिला दी

जिसके बाद एकांश अमर के साथ वहा से जाने के लिए निकला

“सर” स्वरा ने उसे आवाज दी और एकांश पलटा, स्वरा की आँखों मे थोड़ा पानी था और वो कुछ बोलना चाहती थी लेकिन बोल नहीं पा रही थी

“यस?”

“नथिंग, टेक केयर”

“यू टू” इतना बोल के एकांश अमर के साथ वहा से निकल गया दिमाग मे कई सारे सवाल लिए....

क्रमश:
 
अपडेट 14

अक्षिता जब अगले दिन नींद से जागी तो सर दर्द के साथ ही, उसका सर भारी था और वो अपनी आंखे मलते हुए पलंग पर उठ बैठी थी,

अक्षिता ने अपनी आंखे खोल कर इधर उधर देखा तो अपने आप को अपने रूम मे ना पाकर वो थोड़ा चौकी और फिर जब उसकी नजर कमरे के दरवाजे पर गई तो उसने देखा के स्वरा दरवाजे पर खादी हाथ बांधे उसे देख रही थी और इस वक्त स्वरा काफी सीरीअस लग रही थी

“स्वरा, मैं तुम्हारे कमरे मे क्यू हु?” अक्षिता ने सर पर हाथ रखते हुए पूछा लेकिन स्वरा कुछ नहीं बोली

“स्वरा बता ना, और तुम ऐसे मुझे घूर क्यू रही हो?” अक्षिता ने वापिस पूछा लेकिन कोई जवाब नहीं आया

“स्वरा”

“तुम्हें होश भी है क्या कर रही हो क्या चाहती हो?” स्वरा ने सीरीअसली कहा वही अक्षिता थोड़ा कन्फ्यूज़ थी

“कुछ याद है कल क्या हुआ? तुमने क्या किया? तुम जानती हो ना तुम्हें ऐसी चीजों से दूर रहना है वरना सही नहीं होगा” स्वरा ने थोड़ा गुस्से मे कहा

“अरे पर मैंने किया क्या है” अक्षिता ने पूछा

“तुम कल रात शराब के नशे मे धुत थी पूरी”

“क्या!!!” अक्षिता थोड़ा चौकी

“हा।“

“लेकिन मैंने तो कल ऐसा कुछ नहीं पिया” अक्षिता ने याद करते हुए कहा

“ओके टी अब मुझे ये बताओ के कल इतना क्या पी लिया था के अपन नशे मे है इसका भी तुमको ध्यान नहीं है”

“मैंने बस थोड़ा कोल्डड्रिंक और पानी पिया था और कुछ नहीं” अक्षिता ने कहा, “ओह शीट, वो शायद कुछ और ही था,” अक्षिता ने याद करते हुए कहा, वो सब याद करने की कोशिश कर रही थी

“वो जो भी हो अक्षु तुम जानती हो न ये तुम्हारे किए कितना खतरनाक हो सकता है, तुम्हें कुछ भी हो सकता था” स्वरा ने धीमे से कहा

“सॉरी यार पर मैंने जान बुझ कर नहीं किया है कुछ”

“जाने दो जो हुआ, अब तुम आराम करो, मैंने आंटी को बता ददिया है तुम यहा हो और मैं अब ऑफिस के लिए निकल रही हु” स्वरा ने कहा

“ओह शीट! ऑफिस के बारे मे तो मैं भूल ही गई थी” अक्षिता ने पलंग से उतरते हुए कहा

“अरे आराम से आज वैसे भी छुट्टी है तुम्हारी सो डोन्ट वरी” स्वरा ने अपना हैन्ड्बैग लेते हुए कहा

“छुट्टी?”

“एकांश की मेहरबानी है तुमपे, उसने की दी है”

“क्यू?”

“क्युकी अक्षु डिअर हमारा बॉस जानता था के तुमको हैंगओवर होने वाला है बस इसीलिए”

“लेकिन उसको कैसे पता चला के मैंने पी रखी थी?”

“उसे कैसे पता नहीं चलता वही तो तुम्हें यहा छोड़ कर गया है,” स्वरा ने कहा

“क्या??”

“तुम्हें सही मे कुछ याद नहीं क्या?” स्वरा ने हसते हुए कहा

“बस इतना बता मैंने कुछ उलटी सीधी हरकत तो नहीं की ना?”

“अक्षु बेबी आज छुट्टी है ना तो दिमाग पे जोर दलों सब याद आ जाएगा मुझे लेट मत कराओ” स्वरा ने जाते हुए कहा

“हा हा ठीक है, वैसे ही जो भी किया होगा तुम्हारे और रोहन के सामने ही किया होगा” अक्षिता ने वापिस दिमाग पे जोर डाला

“ना, वहा सब से खास कर अपने बॉस और उसका दोस्त” स्वरा मे मुसकुराते हुए कहा और अक्षिता ने अपने सर पे हाथ मार लिया

“मैंने क्या किया?”

“कुछ नहीं शाम हो बताऊँगी अभी लेट हो जाएगा मुझे”

“अच्छा इतना तो बता दे जब रोहन हमारे साथ था तो एकांश ने मुझे यहा क्यू छोड़ा? अक्षिता ने याद करते हुए कहा क्युकी वो और स्वरा रोहन के साथ उसकी कार मे गए थे

अब स्वरा रुकी

“रोहन तो हमे छोड़ देता लेकिन तुम एकांश को छोड़ ही नहीं रही थी, उसे अपने से दूर ही नहीं जाने दे रही थी एकदम चिपकी हुई थी उससे, वैसे अक्षु एक बात बता तू एकांश सर को अंश कहकर क्यू बुला रही थी?”

स्वरा का सवाल सुन कर अक्षिता थोड़ा चौकी, उसे ध्यान मे आ गया था के उससे नशे मे गलती तो हुई है,

“अब लेट नहीं हो रहा था तुझे?”

“अरे वो देखा जाएगा तुम पहले ये बताओ तुम एकांश को अंश कह कर क्यू बुला रही थी लग रहा था तुम जानती हो उसे”

“ऐसा कुछ नहीं है मैं.... मैं नशे मे थी ना तो बस अब जाओ तुम” अक्षिता ने जैसे तैसे बात टाली

“अच्छा ठीक है मैं ऑफिस के लिए निकल रही हु, ये दवाई लो तुम्हें ठीक लगेगा, किचन मे नाश्ता और नींबुपानी बना के रखा है ले लेना आउए आराम करना” स्वरा ने अक्षिता को दवाई पकड़ाते हुए कहा अक्षिता ने भी दवाई ले ली और स्वरा को बाय करके कल रात के बारे मे सोचने लगी,

कुछ समय बाद जब अक्षिता का सर दर्द कम हुआ तो दिमाग पे थोड़ा जोर डालने के बाद अक्षिता को कल रात का पूरा सीन याद आ गया था, उसे याद आ गया था के वो कैसे एकांश की गॉड मे उसकी बाहों मे थी, उससे चिपकी हुई थी, और इस वक्त अक्षिता के दिमाग मे कई सवाल चल रहे

‘ये क्या कर दिया मैंने’

‘पता नहीं एकांश क्या सोच रहा होगा’

‘इतने लोगों मे मुझे उससे ही भिड़ना था क्या’

‘और मुझे शराब का पता कैसे नहीं चला यार’

‘नहीं ये मैं नहीं होने दे सकती मैं अपने ही डिसिशन के खिलाफ हो रही हु ऐसे तो उससे दूर जाने के मेरे फैसले पर असर पड़ेगा’

‘मैं ये नहीं होने दे सकती’

‘मेरा उससे दूर रहना ही बेहतर होगा’


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दूसरी तरफ एकांश इस वक्त अपने ऑफिस मे था और वो थोड़ा डिस्टर्ब लग रहा था, उसके दिमाग मे कल रात की घटनाए चल रही थी के कैसे अक्षिता उसे उससे दूर नहीं होने दे रही थी, उसे कल नशे मे धुत अक्षिता का बिहैव्यर थोड़ा अलग लगा था

एकांश ने अक्षिता के आंखो में डर इनसिक्योरिटी महसूस की थी, ऐसा लग रहा था कुछ कहना था उसे लेकिन वो अपने आप को रोक रही थी, स्वरा भी एकांश से कुछ कहना चाहती थी लेकिन कह नही पाई थी और यही सब बाते इस वक्त एकांश के दिमाग में घूम रही थी और एकांश के इन खयालों को रोका उसके दरवाजे पर हुए नॉक ने

"कम इन"

दरवाजा खुला और एकांश ने उस ओर देखा तो वहा अमर खड़ा था जो अपने हमेशा वाले मजाकिया अंदाज में नही लग रहा था

"एकांश मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है" अमर ने सीरियस टोन में कहा और उसे ऐसे गंभीर देख एकांश को भी कुछ अलग लगा

"आजा बैठ, मुझे भी तुझसे कुछ बात करनी है" एकांश ने अपना लैपटॉप और फाइल्स बंद करते हुए कहा

"पहले मुझे ये बता तू अक्षिता को स्टॉक क्यों कर रहा था?" इससे पहले के अमर कुछ बोलता एकांश ने सवाल दाग दिया

"मैं भी इसी बारे में बात करने आया हु और तुझे इस बारे में कैसे पता चला" अमर बोला

"मतलब सच है ये, हैना?"

"मैं उसे कोई स्टॉक नही कर रहा था बस कुछ जगह पीछा किया था उसका"

"वही तो जानना है मुझे क्यों किया था?"

"उसकी जिंदगी के बारे में जानने के लिए" अमर ने आराम से कहा

"और तू उसके बारे में क्यों जानना चाहता है?" एकांश को हल्का हल्का गुस्सा आ रहा था

"मुझे लगता है वो कुछ छुपा रही है जो हमे नही पता जो तुझे जुड़ा है बस इसीलिए"

"मतलब?" एकांश थोड़ा अब कंफ्यूज था

"मैं जो पुछु बस तू उसका जवाब दे, मुझे बता तुम दोनो अलग क्यों हुए थे" अमर ने पूछा

"तू सब जानता है अमर" एकांश ने मुट्ठियां भींचते हुए कहा

"तू बता यार"

"वो प्यार नही करती मुझसे इसीलिए"

"और ये किसने कहा"

"तू नशा करके आया है क्या, उसने खुद ने और कौन बोलेगा"

"ये कब बोला उसका और क्यों बोला?"

"जब मैने उसे बताया के मैंने हमारे बारे में घर पर बता दिया है और मेरी मां उससे मिलना चाहती है तब उसने कहा था के वो कोई कमिटमेंट नही चाहती है, सेटल होना नही चाहती है और जब मैने उससे कहा के हम प्यार करते है एकदूसरे से तब इसमें प्रॉब्लम क्या है रिश्ते को आगे लेजाने में क्या दिक्कत है तब उसने कहा के वो मुझसे प्यार नही करती उसे बस मेरा अटेंशन मेरा पैसा प्यारा था मैं नही" एकांश ने पूरी कहानी के सुनाई वही अमर अपने ही खयालों में था

"फिर क्या हुआ?" अमर ने आराम से पूछा

"फिर क्या होना I argued के वो झूठ बोल रही है हमारा रिश्ता कैसा था वगैरा लेकिन वो नहीं मानी, मैंने उससे कहा के मेरी आंखों में देख के कहे के वो मुझसे प्यार नही करती और उसने वो कह दिया, बगैर किसी इमोशन के सीधा मेरी आंखों में देखते हुए" एकांश ने अपनी भावनाओं पे कंट्रोल करते हुए कहा

"फिर तूने क्या किया?"

"करना क्या था मैं एक लड़की के सामने अपने आपको एक लड़की के सामने कमजोर दिखाना नही चाहता था मैं वहा से और उसकी जिंदगी से निकल गया"

"उस इंसीडेंट के बाद कभी अक्षिता ने या तूने एकदूसरे से कॉन्टैक्ट करने को कोशिश की?"

"नही, वो मानो मेरी जिंदगी से गायब सी हो गई थी और उसके बाद मैंने उसे यही इसी ऑफिस में 1.5 साल बाद देखा और मेरा यहा इस ऑफिस में होना उसे नही जम रहा था और उसके बिहेवियर से वो मेरे आसपास नही रहना चाहती ये साफ था" एकांश सब बता रहा था और अमर सारी इन्फो ले रहा था

"लेकिन आज तू ये सब क्यों पूछ रहा है?" एकांश ने पूछा

“एकांश देख, शायद मेरी बात तुक ना बनाए लेकिन सच कुछ अलग है, तुझे ये सब अजीब नहीं लगता? बहुत कुछ है जो तुझे नहीं पता” अमर ने कहा

“क्या??”

“हा, तूने जो बोला जो कुछ तुझे पता है जो हुआ सब अधूरा है”

“तू साफ साफ बताएगा क्या कहना चाहता है?”

“मेरे भाई ऐसा है शायद अक्षिता ने तुझसे झूठ बोला है के वो तुझसे प्यार नहीं करती, तेरी बातों से ऐसा लगता है के उस सिचूऐशन मे कीसी बात ने अक्षिता को वो सब कहने फोर्स किया है, वो कुछ तो छिपा रही है, अब अक्षिता के पास उसके अपने रीज़न हो सकते है, शायद वो तुझसे प्यार करती हो लेकिन कह ना पा रही हो” अमर ने एकांश को पूरा मैटर समझाते हुए कहा

“तू समझ रहा है ना तू क्या कह रहा है? सब बकवास है ये, उसने दिल तोड़ा है मेरा, टु अच्छी तरह जानता है मैंने उसकी वजह से कितना सहा है? और अब तू कह रहा है वो प्यार करती है मुझसे... तू पागल हो गया है क्या?” एकांश ने थोड़ा गुस्से मे कहा, उसकी आंखे भी लाल हो रही थी

“जानता हु भाई सब जानता हु और इसीलिए इस मैटर की गहराई मे जाना चाहता हु, मैंने ऐसे ही उसका पीछा नहीं किया है, मैंने उसके बारे मे उसकी जिंदगी के बारे मे उसके कैरेक्टर के बारे मे जानने के लिए किया और मेरे भाई मैं दावे के साथ कह सकता हु के वो थोड़े अटेन्शन और फेम के लिए कीसी को धोका देने वालों मे से तो नहीं है” अमर एक सास मे बोल गया वही एकांश बस सुन रहा था

“तू खुद सोच तुझे ये सब अजीब नहीं लगता अगर उसे फेम और अटेन्शन ही चाहिए था तो वो तो तेरे साथ रहके भी आसानी से मिल सकता था, वो आंटी से मिल लेती तुम्हारी शादी हो जाती और ये सब आसानी से उसका होता, रघुवंशी परिवार की बहु बनने से कौनसी लड़की मना करेगी, उसकी जगह कोई और लड़की होती तो खुशी खुशी तेरेसे शादी कर लेती लेकिन उसने तुझे रिजेक्ट कर दिया, इसमे कुछ गड़बड़ है ऐसा नहीं लगता तुझे? मतलब अगर उसे पैसा अटेन्शन ही चाहिए था तो ये सब तेरे पास भी था फिर उसने तुझे रिजेक्ट क्यू किया, अगर उसे सच मे तुझे धोका देना होता तो ये तो वो तुझसे शादी करके कर लेती, पैसा मिलता वो अलग लेकिन उसने ये नहीं किया, कुछ तो है जो हमे नहीं पता और वो छिपाने मे माहिर है और अब हमे असल रीज़न पता करना है” इसीके साथ अमर ने अपनी बात खत्म की

अमर की बातों ने एकांश को सोचने पे मजबूर कर दिया था, अमर की बाते एकदम सही थी और ये सवाल तो उसने भी कई बार खुद से किया था के जिस लड़की को उसने इतना चाहा था वो उसे धोका कैसे दे सकती थी

“ठीक है, समझ गया और सच कहू तो मैंने भी सोचा था इस बारे मे लेकिन कभी कुछ जवाब नहीं मिला, ऐसा क्या रीज़न होगा के उसे ये करना पड़ा” अब एकांश भी अपनी सोच मे डूबा हुआ था

“मेरे दिमाग मे एक बात है लेकिन....” अमर बोलते हुए रुका

“क्या बात है बता...”

“तुझे याद है मैंने कहा था के मैंने इसे कही देखा है?” अमर अब भी दुविधा मे था के बताए या नहीं

“हा और अब प्लीज साफ साफ बात”

“मैंने उसे 1.5 साल पहले एक मॉल के बाहर कीसी से बात करते देखा था, इन्फैक्ट वो बात करते हुए रो रही थी” अमर ने कहा और एकांश को देखा

“कौन था वो?” एकांश ने पूछा और अब जो अमर बताने वाला था उसे सुन शायद एकांश को एक काफी बड़ा झटका मिलने वाला था

“तुम्हारी मा.....”

क्रमश:
 
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