Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan - Page 4 - SexBaba
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Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan

Ab..takk..

गेरयों कदया और बल्ला से मिलकर,

अंतर्ध्यान हो गया,

और गायब होकर एक घने जंगल में प्रकट हुआ.....




अपडेट No. 19 (एन्ड ऑफ़ गेरयों - ी )

Abb..Aage....


जंगल बहुत घाना था, घने होने के कारन सूर्य की रौशनी भी अंदर नहीं पहुँच पा रही थी,

हर तरफ से मौत की बू आ रही थी..

ऐसा लग रहा था जैसे कोई खौफनाक साया इस जंगल को जकड़े हुए है...

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Har-taraf ऊँचे -ऊँचे विशाल कांटे दार जहरीले पेड़ लगे हुए थे,

अगर जरा भी ध्यान विचलित हो तो जिस्म को चीयर दे,

बड़ा hi अजीब जंगल था दूसरे जंगल से बिलकुल अलग,

न जानवर नजर आ रहे थे न पक्षी,

Jeev-Jantu का Naam-o-Nishan नहीं था..

ऐसा नजारा देखकर गेरयों सोंच में पद गया,

गेरयों सोंचते हुए....

""ध्यान में तो एहि जगह दिखी थी किन्तु मुझे जहा जाना है नज़र नहीं आ रहा,

फिर से ध्यान में बैठकर उस जगह पहुँचने का रास्ता खोजने लगा,

गेरयों खड़े होकर एक बार कुछ मंटा पढ़कर सामने की ओर फूंक दिया,

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सामने के सभी पेड़ दाएं - बाएं हो गए और बीच में एक रास्ता निकल आया जिसके बीच में से बहुत तेज़्ज़ प्रकाश निकलकर फैलने लगा..

गेरयों उसी रस्ते की तरफ Chal.pada,

सामने एक काली गुफा नजर जिसके मुहाने पर पत्थर रखा हुआ था,

गेरयों ने उसे घूर कर देखा,

और अपनी सर्च लाइट को उस गुफा पर भेज दिया,

सर्च लाइट पुनः वापस आ गयी, कुछ भी न मिला,

गेरयों को बड़ा हो आश्चर्य हुआ,

क्युकी ध्यान में तो उसे एक प्रतिबिम्ब नजर आया था,

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गेरयों उस पत्थर को हटाने के लिए स्पेल बोलने लगा..

किन्तु वो पत्थर टास से मास्स न हो रहा था,

गेरयों को गुस्सा भी आने लगा था, इतने पावरफुल होने के बाद भी एक पत्थर को नहीं हटा प् रहा था,

जब गेरयों से और बर्दाश्त न हुआ तो उसने उस पत्थर को तोड़ने के लिए अपनी शक्ति से आक्रमण करने सोंची,

जैसे गेरयों ने उस पत्थर पर फायर ब्लास्ट से अटैक किया,

गेरयों का फायर अटैक पुनः वापस आकर गेरयों को hi लगा,

गेरयों पेड़ों को चीरते हुए दूर जा गिरा, हलकी फुलकी चोंटें आयीं लेकिन कुछ hi देर में फिर भर गयी,

"" कोई जोरर से हंसा हहह ः गेरयों के गिरने पर,""

गेरयों इधर उधर देखने लगा किन्तु कोई न नजर आया,

गेरयों जोरर से चिल्लाया हिम्मत है तो सामने आओ, मुकाबला करो"

पैर कोई आवाज़ न आयी,

गेरयों बड़ी hi विचित्र परिस्थिति में फंस गया था,

उसे समझ नहीं आ रहा था क्या करे..??

गेरयों ने एक बार फिर लाइटिंग वाल्ट एनर्जी से प्रहार किया गुफा पर,

अंजाम वही रहा, फिर दूर जा गिरा,

फिर किसे के हंसने की आवाज़ आयी..

गेरयों गुफा के पास गया और पत्थर के सामने बैठके ध्यान में लीं हो गया और अंदर जाने का रास्ता तलाश करने लगा,

सिवाय प्रतिबिम्ब के कुछ न दिखा,

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गेरयों क्रोध से उठ बैठा,

और गुफा के सामने खड़े होकर जोरर से चिल्लाया,

""मुझे अंदर आने का रास्ता दो, वर्ण मई इस जगह को hamesa-hamesa के लिए कैद कर दूंगा"",

किन्तु कोई आवाज़ न आयी,

गेरयों ने एक पावरफुल मंत्र पढ़ा और उस गुफा की ओर हाथ कर दिया,

"तभी गुफा से किसी के जोरर जोरर चिल्लाने की आवाज़ आयी, मुझे छोड़ दो, मुझे छोड़ दो, मुझे कैद मत करो""

""छोड़ दूंगा पहले सामने आओ"" गेरयों बोलै,

लेकिन फिर से शांति छ गयी,

गेरयों समझ गया जो कुछ भी है कुछ न कुछ तो ख़ास है,

जिसे मई प्राप्त नहीं कर प् रहा,

लेकिन अब मई किसी और को भी नहीं हासिल करने दूंगा,

इतना बोलकर गेरयों ने उस गुफा पर अपना सुरक्षा कवच लगा दिया जिससे की वो गुफा हमेसा के लिए बंद रहे, जब तक गेरयों न चाहे,

जबतक गेरयों गुफा पर शक्ति कवच लगता रहा तबतक किसी के दर्द में तड़पने की चीखे आती रही,

सुरक्षा कवच लगाने के बाद, गेरयों फिर से गायब हो गया,

और पहुंचा ब्रम्हांड पर और अपने ध्यान में देखे गए रस्ते की ओर बढ़ता चला गया,

""ओह्ह तेरी अब ये क्या चीज़ है बे पहले तो कभी नहीं देखा"" गेरयों बोलै,

गेरयों उसके अंदर प्रवेश कर गया,

अंदर जब पहुंचा तो सामने देखकर गेरयों के दिमाग की Maa-Bahen दोनों एक साथ हो गयी..,

ये कैसे हो सकता है अगर ये यहाँ है तो फिर उस गुफा पर कौन था...??

गेरयों उस जगह से तुरंत भगा और भागकर सीधा पारी लोक के बहार पहुंचा..,

गेरयों - चिल्लाया पारी लोक के बहार खड़े होकर....

""एलिज़ाबेथ भले hi आज मैं तुम्हे खोज पाने में असमर्थ hu..Lekin

मई वापस आऊंगा....

अबसे तुम्हारे लोक को भी अपने साथ कैद कर दूंगा..

कोई न अंदर जा सकेगा न बहार....

गेरयों अपनी आधी शक्ति को दो भागों में बाँट कर पारी लोक और जिन लोक के सुरक्छा कवच के ऊपर अपना भी कवच लगा दिया,

गेरयों थोड़ा डरा हुआ लगा रहा था,

और वहां से गायब होकर सीधा शैतान लोक पहुंचा,

कस्सदेया - क्या हुआ भाई, इतने घबराये हुए हो..??

गेरयों - मेरे साथ एकबार फिर षड़यंत्र रचा गया है,

हुआ क्या है गेरयों साफ़ साफ़ समझाओ...

शार्ट फ्लैशबैक

हुआ ये था की जब गेरयों गुफा के बाहेर ध्यान में बैठा था गुफा की शक्ति को समझने के लिए तो उसे उस ...

1.. गुफा के अंदर एक प्रतिबिम्ब दिखाई दिया,

जिसकी मदद से आने वाले कल को देखा और बदला जा सकता था...

किन्तु गुफा में प्रवेश नहीं कर paya...Aur गुफा की शक्ति को अपने कवच से कैद कर दिया,

2... गेरयों जब ब्रम्हांड पहुंचा,

दूसरी शक्ति को पाने जो ध्यान में दिखी थी,

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तो सामने उसे बांसुरी नुमा (Flute)...Ek लम्बी सी जगह दिखाई दी जिसमे भीतर जाने के कई रस्ते थे,

पहले होल से गेरयों ने प्रवेश किया किन्तु खली हाथ वापस आ गे,

ऐसे hi करके दूसरे में भी गया,

जब तीसरे होल से घुसा तो उसे सामने एक प्रतिबिम्ब दिखा,

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जिसे देखकर गेरयों का सर hi चक्र गया,

गेरयों तो यहाँ जादुई तलवार हासिल करने आया था,

किन्तु यहाँ गुफा में दिखाई देने वाला प्रतिबिम्ब दिखा....

तलवार कहा गयी....??

तलवार के बिना मई तो भविस्य नहीं बदल सकता,

तभी प्रतिबिम्ब से आवाज़ आयी,,,

हहहह मुर्ख हो तुम,

तुमने सोंच भी कैसे लिया की...

जो शक्तिया अब तक कोई न प् सका वो तुम कैसे हासिल कर सकते हो...??

वो शक्तिया अपने मालिक के इंतज़ार में है,,

तुमने उस गुफा में तलवार को hi कैद कर दिया,. किन्तु उसके मालिक के आ जाने पर सारा माया जाल खुद हैट जायेगा,,

""इसी तलवार से होगा तुम्हारा अंत या फिर उसके मालिक का अंत.. जररयांण.. तुमने उसे हासिल न करके अपना मौका गवा दिया..!!""

अब सुनो तुम्हारा भविस्य...

फ्लूट होल से गुजरने पर जिंदगी का एक दिन ख़त्म हो जाता है,

और तुमने तीन बार प्रयास किया,

जिसके कारन तुम तीन दिन खो बैठे हो,,,,,,

अब जल्दी जाओ खुद को कैद करो, वर्ण सूर्य की रौशनी पड़ते hi तुम जल जाओगे और तुम्हारी आत्मा भी नष्ट हो जाएगी,,,

अपना ऐसा भविस्य सुनकर गेरयों को क्रोध तो बहुत आया लेकिन,

समय काम होने के कारन वो बचे हुए काम को अंजाम देने जल्दी से भगा.....

....Flashback..End.....



बहुत बड़ा षड़यंत्र रचा है न मेरे खिलाफ,

इसका बदला लेने मई जरूर वापस आऊंगा ये मेरा वादा है,

एक डेविल प्रॉमिस,,,..!!

अब मेरे पास वक्त नहीं है

°कस्सदेया"" मेरे भाई अपने कर्त्तव्य को निभाना,,

""ये लो इस प्रतिबिम्ब को संभलकर रखना बहुत काम आएगा,

वो आएगा इससे लेने दे देना चुपचाप सर झुककर,.."

बाकी सब समाया आने पर पता चल जायेगा...

एक जरुरी बात, ध्यान रखना कस्सदेया तुम्हें यह प्रतिबिम्ब संकेत देगा...

वो उस गुफा पर जरूर Aayega.....Uske गुफा पहुँचते hi मेरा कवच टूट jayega...aur तुम्हें इस प्रतिबिम्ब के जरिये पता चलेगा.....

""तब तुम्हें मेरा दिया हुआ काम करना है....??

""तब होगी मेरे बदले की शुरुआत.....??""

अब मई चलता हु, पटल लोक,

गेरयों पातळ लोक पहुंचा जहा तामुलु उसका इंतज़ार कर रहा था,

गेरयों ने तामुलु को ठीक से समझा दिया कैसे यहाँ की सुरक्षा करनी है,

और खुद अनंत गहराई की में कूद गया,

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और अपनी टोटल एनर्जी को फ्री कर दिया,

एनर्जी फ्री होते hi वो खायी भी गायब हो गयी,

उस खायी के ऊपर एक छोटा सा मायावी पेड़ उत्पन्न हो गया,

जिसके चरों तरफ अपने आप पानी भरने लगा,

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Dhire-Dhire पानी विशाल नदी का रूप ले लिया,

बीच में पेड़ चारो तरफ Saaf-Suthra पानी......





सम इम्प. केस. फॉर रीडर...??

1.गेरयों ने कौन सा षड़यंत्र रचा है..??

2.कस्सदेया प्रतिबिम्ब के जरिये क्या करेगा..??

3.कौन हासिल करेगा सोर्ड ऑफ़ बी & व लाइट..??

3.नदी का पानी साफ़ - सुथरा क्यों है..??

5. एलिज़ाबेथ पारी लोक में नहीं तो कहा है..??

6. क्या इब्लीस वापस लौटेगा..??

7. कस्सदेया पृथ्वी लोक क्यों नहीं जा सकता..??

सारे सवालों के सही जवाब जानने के लिए पढ़ते रहिये....

हयान - एक इंसान या शैतान

 
@लस्बेन्चर्स













@जणू भाई





@धम्म





@क़ौसर




जिनका नाम नहीं yaad..mai सॉरी बोलता हु

और बहुत से राइटर है जिनका नाम अभी याद नहीं आ रहा इन लोगो ने मुझे बहुत सपोर्ट किया...

थैंक यू सो मच एव्री गाइस...

 
अपडेट No. 20

मेगा अपडेट...

ईश्वर की महिमा तो जैसे हमपर मेहरबान हो गयी...

मई जिस वास्तु को भी छो रहा था वो सोना हो जा रही थी...

सभी लोन, क़र्ज़ सब ख़त्म हो गया...

अब तो बस सब खुद का hi था...

समय बीतने के साथ साथ hi हमारा समय भी अच्छा चलने लगा...

बुसिनेस्स ने बुलंदी की रफ़्तार ऐसी पकड़ी की...

सबकुछ बदलता चला गया...

बीते इन 6 सालों में...

कबीर, मीरा और रश्मि की कड़ी म्हणत और लगन से...

एक बहुत बड़ा बुसिनेस्स इम्पिरे खड़ा हो गया...

K.M.Group नाम से...

K.M. ग्रुप का नाम dhire-dhire देहरादून के नाम चीन हस्तियों में आने लगा,

देहरादून से जन्मा K.M. ग्रुप अब पूरी इंडिया में अपने पेअर पसारने लगा..

अब कबीर, मीरा और रश्मि..

सिर्फ ऑफिस वर्क सँभालने लगे...

रश्मि दीदी को K.M. ग्रुप का M.D. बनाया गया....

क्युकी अब तक K.M. ग्रुप ने पिछले 6 सालों में....

1. K.M. टूरिज्म ट्रेवल एजेंसी (बद्री भैया)

2. K.M. होटल्स कंपनी ल्टड.

3. K.M. हॉलिडे एंड रिसॉर्ट्स इंडिया ल्टड.

4.K.M. अकादमी ऑफ़ साइंसेज & टूरिज्म मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट ऑफ़ देहरादून, इंडिया

टोटल 4 टाइप के बुसिनेस्स स्टार्ट किये और सभी सक्सेस हुए,

जिससे K.M.Group का कद ऊँचा होता गया,.

और आज K.M. ग्रुप India's टॉप - 10 बुसिनेस्स मन की लिस्ट में 5तह रैंक में है,

30 साल की काम आगे में कबीर और मीरा ने बहुत कुछ हासिल कर लिया,

कद आसमान की बुलंदियों को छू रहा था..

खुशिया कदम चूम रही थी,

लेकिन इंसान चाहे जितना भी अमीर और प्रशिद्ध हो जाये...

कुछ चीज़े इंसान के बस में नहीं होती....

सब कुछ होने के बाद भी हमेशा दर्द में जीते है दोनों..

बस कुछ कमी थी तो वो है एक औलाद की....

दोनों का विवाह हुए 8 साल बीत चुके थे,

किन्तु अभी तक संतान सुख की प्राप्ति नहीं हुयी,

यज्ञ पूजा, कई प्राचीन मंदिरों में माथा तक चुके थे,

किन्तु कोई सफलता न मिली,

जिसके कारन मीरा बहुत दुखी रहने लगी थी,

और कबीर को मीरा का यह रूप देखा नहीं जा रहा था...

कबीर हर संभव कोशिश कर रहा था..

देहरादून के फेमस आयुर्वेदिक इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल,

में भी दोनों अपना इलाज़ करवा चुके... किन्तु परिणाम वही रहा,

भ्रूण विकसित होने से पहले hi पेट में डैम तोड़ देता था... मिसलेनियस प्रॉब्लम थी दोनों में..

ईश्वर और उसकी कुदरत के आगे किसी की नहीं chalti...Chahe अमीर हो या गरीब..

वो कहते है न समय के पहले कुछ नहीं मिलता हर चीज़ का एक वक़्त होता है...

ठीक वैसे hi इन दोनों के साथ भी था...

कबीर और मीरा बहार लॉन में बैठे हुए थे...

तभी पदोष के मंदिर के पुजारी जी घर आये.....

कबीर और मीरा ने पुजारी जी का स्वागत अभिनन्दन किया और आने का कारन पूछा....

पुजारी जी - माना गांव के व्यास गुफा में एक बहुत hi ज्ञानी धर्मात्मा पधारे हुए हैं...

उनके दर से माँगा गया कोई भी वरदान खली नहीं जाता,.

शीघ्र hi तुम दोनों को वह जाकर महात्मा की सेवा करके बदले में संतान सुख की कामना karo...Sab अच्छा होगा....

कबीर - कोटि कोटि धन्यवाद पंडित जी...

अगली hi सुबह कबीर और मीरा दोनों ने जाने का मन बनाया....

मीरा - दीदी हम माना गांव जा रहें है,

महात्मा जी से मिलने... आने में वक़्त लग सकता है....

रश्मि - ठीक है जाओ Bhag*van इस बार तुम्हारी पुकार जरूर सुनेगा...

रश्मि और विजय अब बहुत खुशहाल जीवन व्यतीत करने lage...Sab कुछ मिल गया था..

रश्मि दी और विजय जीजू ने दो बचो को जन्म दिया....

अखिल - 2 इयर्स

महिमा - 9 मोनथस

कबीर और मीरा आज एकबार फिर से माना गांव वापस आएं है...



आप पढ़ रहे है... हयान - एक इंसान या शैतान

जो कि एक काल्पनिक मनगढंत कहानी है..!!



Mana(माणा) Ganv mein,

Kayi Pauranik jagah hai,

ganv se Ganesh Gufa aur Vyas Gufa nazar aati hain,

dono gufaon me Rishi - Muniyon ka jamvada laga rahta hai,

Isi jagah par Vedvyas ne Purano ki rachna ki aur Ved ko 4-bhag mein banta.....,

Sadanan - AdiGuru Shankracharya ke shishy hai,

Sadanan bhi Vyas Gufa mein aakar rahne lage, Mantra, Tap aur Siddhi ke liye.... AdiGuru par ye atoot Viswas rakhte the,

Ekbar AdiGuru ke bulane, Guru ka naam lekar Paani par chal pade aur Nadi paar ki li thi, itna Atoot prem tha,

AdiGuru Shankracharya - Mata-Pita Ke dwara Bhagvan Shiv ki bhakti se inka janm hua tha,

Isliye Inhe Lord Shiva ka Avtar mana jata hai,

AdiGuru Gyan, tap, Tantra-Mantra se bhare huye the, Bahut si siddhiyan prapt thi inhe, Inhe har Vidya mein Maharath haasil thi..

Inke dwara diya vardan nishfal nahi jata tha,

Sadanan ki bhakti aur shakti ki Prashansa door-door tak faili huyi thi,

Sadanan Ishwar Bhakti mein leen the tabhi unhe ek Praksh punj dikha,

Sadanan - Pranam Gurudev !! Aapke darshan paakar mai dhanya ho gaya,

AdiGuru - Tathastu !! Shishy mera ek kaam karoge...??

Sadanan - Agya dein Guruvar,

AdiGuru - Uss Jagah par do Premi-Yugal Rahte hai, Unki ye Pareshani hai,

Unhe kisi Pujari ke jariye apne paas bulao... Pareshani ka Samadhan batakar ...

Mujhe unse Shighr hi milna hai...

Aur Yahan Par do logon ke Rahne ke liye...Ek kutiya ka intezam bhi karo...

Sadanan - Jo Aagya Guruvar...!!

Aaj Kabeer aur Meera bhi Vyas Gufa aaye huye the,..

Kabeer - Meera - Pranam Rishivar !!

Fir Kabeer ne Parichay aur Aane ka karan bataya....

Sadanan - Mujhe Gyat hai, Pandit ji ne soochna di thi,

Aap dono baitkar Pratiksha karein Guruvar se shighr hi aap dono ki Bhent hogi....

15 min guzarne ke baad Ek Tez purush waha par padharein ,

Jinke Tez ko dekhte hi Kabeer aur Meera dono Unke Charnon par shish jhuka diye...

AadiGuru - Utho Putr-Putri....

Mujhe sab gyat hai...

Main Tum dono ke liye hi aaya hu...

Kabeer - Meera - Pranam Guruvar Hamari Pareshani ka samadhan kijiye....

AadiGuru - Jo muraad man mein lekar aaye ho wo avashya hi Poorn hogi...

Shanykaal Yaha par Ek Yagya hoga Jismein Tum dono Shamil hona hai.....

Ab tum dono us kutiya mein Jakar Aaram karo.....

AadiGuru ka Ashirvad lekar Hum dono....Kutiya mein chal diye...Bhojan aur Sone ka intezam uske andar hi tha...

Sadanan - Guruvar Ek prashn tha...aapki agya ho to...

AadiGuru - Muskurate huye,. mai Samajh sakta hu Shisya tumhare man ki bechaini ko, kintu Samay aane par Sab gyat ho jayega...Dhairya Rakho...

Suraj dhalne ko tha

Yagya ka sara intezam ho chuka tha...

Meera Aur Kabeer dono, AadiGuru Dahine taraf baith gaye...Hawan kund Mein Agni jvalit ki gayi...

Aur Yagya ka shubharambh hua...

Sadanan sahit 4 aur Rishi samil the iss Yagya mein...

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मन्त्रों का उच्चारण, Ahuti....1ghante तक यज्ञ चला...

फिर सबने प्रशाद खाया और Ratri-Bhojan करके सब aone-Apne शयन कच्छ की तरफ चले गए...

सुबह कबीर और मीरा जल्दी उठे, ईश्वर की भक्ति में लगा गए....

आदिगुरु के आने के बाद दोनों उनकी सेवा में लीं हो गए,

ऐसे hi 3 दिन गुज़र गए....

चौथे दिन आदिगुरु ने कबीर को अपने पास bulaya...aur कुछ बातें समझायी और प्रशाद दिया....

बताई गयी बातों का यथावत पालन करने को कहा....

कबीर वापिस कुटिया में आ गया,

मीरा को आदिगुरु के बीच हुयी सभी बातों को बताया,

ऐसे hi गुरु सेवा और ईश्वर भक्ति में शाम हो गयी...

फिर कबीर और मीरा ने स्नान किया,

और भोजन करके सो गए...

आज के लिए बस इतना hi..

कीप रीडिंग एंड सपोर्टिंग.....

लिखे,. कमेंट,. रिव्यु. का रखे dhyaan.......Aapka दोस्त हयान..!!
 
अपडेट No. 20

ईश्वर की महिमा तो जैसे हमपर मेहरबान हो गयी...

मई जिस वास्तु को भी छो रहा था वो सोना हो जा रही थी...

सभी लोन, क़र्ज़ सब ख़त्म हो गया...

अब तो बस सब खुद का hi था...

समय बीतने के साथ साथ hi हमारा समय भी अच्छा चलने लगा...

बुसिनेस्स ने बुलंदी की रफ़्तार ऐसी पकड़ी की...

सबकुछ बदलता चला गया...

बीते इन 6 सालों में...

कबीर, मीरा और रश्मि की कड़ी म्हणत और लगन से...

एक बहुत बड़ा बुसिनेस्स इम्पिरे खड़ा हो गया...

K.M.Group नाम से...

K.M. ग्रुप का नाम dhire-dhire देहरादून के नाम चीन हस्तियों में आने लगा,

देहरादून से जन्मा K.M. ग्रुप अब पूरी इंडिया में अपने पेअर पसारने लगा..

अब कबीर, मीरा और रश्मि..

सिर्फ ऑफिस वर्क सँभालने लगे...

रश्मि दीदी को K.M. ग्रुप का M.D. बनाया गया....

क्युकी अब तक K.M. ग्रुप ने पिछले 6 सालों में....

1. K.M. टूरिज्म ट्रेवल एजेंसी (बद्री भैया)

2. K.M. होटल्स कंपनी ल्टड.

3. K.M. हॉलिडे एंड रिसॉर्ट्स इंडिया ल्टड.

4.K.M. अकादमी ऑफ़ साइंसेज & टूरिज्म मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट ऑफ़ देहरादून, इंडिया

टोटल 4 टाइप के बुसिनेस्स स्टार्ट किये और सभी सक्सेस हुए,

जिससे K.M.Group का कद ऊँचा होता गया,.

और आज K.M. ग्रुप India's टॉप - 10 बुसिनेस्स मन की लिस्ट में 5तह रैंक में है,

30 साल की काम आगे में कबीर और मीरा ने बहुत कुछ हासिल कर लिया,

कद आसमान की बुलंदियों को छू रहा था..

खुशिया कदम चूम रही थी,

लेकिन इंसान चाहे जितना भी अमीर और प्रशिद्ध हो जाये...

कुछ चीज़े इंसान के बस में नहीं होती....

सब कुछ होने के बाद भी हमेशा दर्द में जीते है दोनों..

बस कुछ कमी थी तो वो है एक औलाद की....

दोनों का विवाह हुए 8 साल बीत चुके थे,

किन्तु अभी तक संतान सुख की प्राप्ति नहीं हुयी,

यज्ञ पूजा, कई प्राचीन मंदिरों में माथा तक चुके थे,

किन्तु कोई सफलता न मिली,

जिसके कारन मीरा बहुत दुखी रहने लगी थी,

और कबीर को मीरा का यह रूप देखा नहीं जा रहा था...

कबीर हर संभव कोशिश कर रहा था..

देहरादून के फेमस आयुर्वेदिक इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल,

में भी दोनों अपना इलाज़ करवा चुके... किन्तु परिणाम वही रहा,

भ्रूण विकसित होने से पहले hi पेट में डैम तोड़ देता था... मिसलेनियस प्रॉब्लम थी दोनों में..

ईश्वर और उसकी कुदरत के आगे किसी की नहीं chalti...Chahe अमीर हो या गरीब..

वो कहते है न समय के पहले कुछ नहीं मिलता हर चीज़ का एक वक़्त होता है...

ठीक वैसे hi इन दोनों के साथ भी था...

कबीर और मीरा बहार लॉन में बैठे हुए थे...

तभी पदोष के मंदिर के पुजारी जी घर आये.....

कबीर और मीरा ने पुजारी जी का स्वागत अभिनन्दन किया और आने का कारन पूछा....

पुजारी जी - माना गांव के व्यास गुफा में एक बहुत hi ज्ञानी धर्मात्मा पधारे हुए हैं...

उनके दर से माँगा गया कोई भी वरदान खली नहीं जाता,.

शीघ्र hi तुम दोनों को वह जाकर महात्मा की सेवा करके बदले में संतान सुख की कामना karo...Sab अच्छा होगा....

कबीर - कोटि कोटि धन्यवाद पंडित जी...

अगली hi सुबह कबीर और मीरा दोनों ने जाने का मन बनाया....

मीरा - दीदी हम माना गांव जा रहें है,

महात्मा जी से मिलने... आने में वक़्त लग सकता है....

रश्मि - ठीक है जाओ Bhag*van इस बार तुम्हारी पुकार जरूर सुनेगा...

रश्मि और विजय अब बहुत खुशहाल जीवन व्यतीत करने lage...Sab कुछ मिल गया था..

रश्मि दी और विजय जीजू ने दो बचो को जन्म दिया....

अखिल - 2 इयर्स

महिमा - 9 मोनथस

कबीर और मीरा आज एकबार फिर से माना गांव वापस आएं है...



आप पढ़ रहे है... हयान - एक इंसान या शैतान

जो कि एक काल्पनिक मनगढंत कहानी है..!!



Mana(माणा) Ganv mein,

Kayi Pauranik jagah hai,

ganv se Ganesh Gufa aur Vyas Gufa nazar aati hain,

dono gufaon me Rishi - Muniyon ka jamvada laga rahta hai,

Isi jagah par Vedvyas ne Purano ki rachna ki aur Ved ko 4-bhag mein banta.....,

Sadanan - AdiGuru Shankracharya ke shishy hai,

Sadanan bhi Vyas Gufa mein aakar rahne lage, Mantra, Tap aur Siddhi ke liye.... AdiGuru par ye atoot Viswas rakhte the,

Ekbar AdiGuru ke bulane, Guru ka naam lekar Paani par chal pade aur Nadi paar ki li thi, itna Atoot prem tha,

AdiGuru Shankracharya - Mata-Pita Ke dwara Bhagvan Shiv ki bhakti se inka janm hua tha,

Isliye Inhe Lord Shiva ka Avtar mana jata hai,

AdiGuru Gyan, tap, Tantra-Mantra se bhare huye the, Bahut si siddhiyan prapt thi inhe, Inhe har Vidya mein Maharath haasil thi..

Inke dwara diya vardan nishfal nahi jata tha,

Sadanan ki bhakti aur shakti ki Prashansa door-door tak faili huyi thi,

Sadanan Ishwar Bhakti mein leen the tabhi unhe ek Praksh punj dikha,

Sadanan - Pranam Gurudev !! Aapke darshan paakar mai dhanya ho gaya,

AdiGuru - Tathastu !! Shishy mera ek kaam karoge...??

Sadanan - Agya dein Guruvar,

AdiGuru - Uss Jagah par do Premi-Yugal Rahte hai, Unki ye Pareshani hai,

Unhe kisi Pujari ke jariye apne paas bulao... Pareshani ka Samadhan batakar ...

Mujhe unse Shighr hi milna hai...

Aur Yahan Par do logon ke Rahne ke liye...Ek kutiya ka intezam bhi karo...

Sadanan - Jo Aagya Guruvar...!!

Aaj Kabeer aur Meera bhi Vyas Gufa aaye huye the,..

Kabeer - Meera - Pranam Rishivar !!

Fir Kabeer ne Parichay aur Aane ka karan bataya....

Sadanan - Mujhe Gyat hai, Pandit ji ne soochna di thi,

Aap dono baitkar Pratiksha karein Guruvar se shighr hi aap dono ki Bhent hogi....

15 min guzarne ke baad Ek Tez purush waha par padharein ,

Jinke Tez ko dekhte hi Kabeer aur Meera dono Unke Charnon par shish jhuka diye...

AadiGuru - Utho Putr-Putri....

Mujhe sab gyat hai...

Main Tum dono ke liye hi aaya hu...

Kabeer - Meera - Pranam Guruvar Hamari Pareshani ka samadhan kijiye....

AadiGuru - Jo muraad man mein lekar aaye ho wo avashya hi Poorn hogi...

Shanykaal Yaha par Ek Yagya hoga Jismein Tum dono Shamil hona hai.....

Ab tum dono us kutiya mein Jakar Aaram karo.....

AadiGuru ka Ashirvad lekar Hum dono....Kutiya mein chal diye...Bhojan aur Sone ka intezam uske andar hi tha...

Sadanan - Guruvar Ek prashn tha...aapki agya ho to...

AadiGuru - Muskurate huye,. mai Samajh sakta hu Shisya tumhare man ki bechaini ko, kintu Samay aane par Sab gyat ho jayega...Dhairya Rakho...

Suraj dhalne ko tha

Yagya ka sara intezam ho chuka tha...

Meera Aur Kabeer dono, AadiGuru Dahine taraf baith gaye...Hawan kund Mein Agni jvalit ki gayi...

Aur Yagya ka shubharambh hua...

Sadanan sahit 4 aur Rishi samil the iss Yagya mein...

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मन्त्रों का उच्चारण, Ahuti....1ghante तक यज्ञ चला...

फिर सबने प्रशाद खाया और Ratri-Bhojan करके सब aone-Apne शयन कच्छ की तरफ चले गए...

सुबह कबीर और मीरा जल्दी उठे, ईश्वर की भक्ति में लगा गए....

आदिगुरु के आने के बाद दोनों उनकी सेवा में लीं हो गए,

ऐसे hi 3 दिन गुज़र गए....

चौथे दिन आदिगुरु ने कबीर को अपने पास bulaya...aur कुछ बातें समझायी और प्रशाद दिया....

बताई गयी बातों का यथावत पालन करने को कहा....

कबीर वापिस कुटिया में आ गया,

मीरा को आदिगुरु के बीच हुयी सभी बातों को बताया,

ऐसे hi गुरु सेवा और ईश्वर भक्ति में शाम हो गयी...

फिर कबीर और मीरा ने स्नान किया,

और भोजन करके सो गए...

आज के लिए बस इतना hi..

कीप रीडिंग एंड सपोर्टिंग.....

लिखे,. कमेंट,. रिव्यु. का रखे dhyaan.......Aapka दोस्त हयान..!!
 
अपडेट No. 21

अननोन प्लेस...



महिला - ये हम कहा आ गए है, हमें तो घर जाना चाहिए था न..?

आदमी - तुम अब भी नहीं समझ प् रही ho..hum अपने घर नहीं जा sakte..wo इसे ढूंढ रहा होगा...??

किन्तु वो हमें यहाँ नहीं ढूंढ sakta..wo क्या कोई भी नहीं...

महिला - अब क्या करेगा खोजकर सब कुछ तो तबाह कर दिया hai...Jindagi और मौत के बीच ला के खड़ा कर दिया है...??

आदमी - तबाह तो कर दिया हमारा हस्ता खेलता परिवार.. बस एक एहि तो थी सब कुछ हमारी...

कितने नाज़ों से पला था humne....Lekin उस दरिंदे हैवान को जरा भी दया नहीं आयी एक निहत्ते पर अपना बल दिखते हुए..

अब समझ नहीं आ रहा hai..kya करू..??

वहां से तो बचा लाये लेकिन यह ऐसे नहीं जीवित रह पायेगी dhire-dhire इसकी शक्तियां इसके शरीर को खा जाएँगी...

बस एक आत्मा बनकर रह जाएगी....

महिला - कुछ कीजिये न कैसे भी करके मेरे दिल के टुकड़े को बचा लो..

इससपे hi तो मेरी जान बसी है अगर इसे कुछ हो गया तो मैं भी अपनी जान दे दूंगी....

आदमी - मुझे खुद पर रोना आ रहा है की मई इतनी ज्यादा शक्तियों का मालिक होकर खुद के अंश को नहीं बचा प् रहा हु...

ईश्वर ने जाने किश दिन के लिए मुझे इतनी शक्ति दी hai...Jubki मई स्वयं के अंश को बचने के लिए असफल हु...

महिला - ऐसा न कहे आप,

अब तो आप hi से मेरी उम्मीद बची hai...Aap जरूर कोई न कोई युक्ति खोज लेंगे मेरी बेटी को बचने ki..warna उस हैवान की शक्तिया हमारी बेटी को खा जाएँगी....

चाहें तो आप मेरे प्राण लेकर इस्सकी जान बचा लें...

आदमी - हम्म ये सही कहा तुमने !! एक जरिया है हमारी बेटी को बचने ka...bach तो जाएगी....

लेकिन एक कैदी बनकर रहेगी जब तक की वो छुड़ाने नहीं आएंगे...

महिला - क्या रास्ता है हमारी बेटी को बचने का....??

आदमी - मुझे अपनी पुत्री में विद्यमान शक्तियों को दो भागो में बाँटना होगा...

और उसे किसी महिला के कोख में डालना होगा..??

इस तरह हमारी बेटी के शरीर से वो साडी शक्तियां निकल कर उस महिला के गर्भ में पलेंगी और दो alag-alag शक्तियों का जन्म होगा...

लेकिन इस हमारी बेटी हमेसा हमेसा के लिए एक पत्थर की मूरत बन जाएगी...

जब तक की वो दोनों शक्तियां छुड़ाने न आएं...

महिला - यह तो प्रकृति से खिलवाड़ होगा...

ये भी तो जरुरी नहीं की वो दोनों शक्तियां एक साथ रहे...

जबकि एक सचाई की मूरत होगी तो दूजा गुनाहों का देवता होगा....

फिर भला वो कैसे aayenge...Apni माँ को आजाद करने...

आदमी - प्रकृति से खिलवाड़ है तभी तो हमारी पुत्री को पत्थर की मूरत बनकर अपने नए जीवन के लिए प्रतीक्षा करनी होगी....

जब उसके दोनों अंश उसे आजाद करने आएंगे तभी वो पुनः जीवित होगी....

इसके शिव कोई दूसरा चारा नहीं...

महिला - बिन पाप किये सजा भुगतेगी मेरी बेटी..??

ये कहा का न्याय है...

एक अंश तो खिंचा चला आएगा परन्तु दूसरे का क्या..??

आदमी - अब ये फैसला मई तुम पर छोड़ता hu..Meri तो है है,

मई अपनी पुत्री के लिए कुछ भी कर सकता हु..??

महिला - रह पाओगे अपनी पुत्री को आजीवन के लिए मूरत बनाकर...

आदमी - काम से काम एक उम्मीद तो रहेगी की एक दिन दोनों अंश आकर अपनी माँ को आजाद करेंगे....??

और अगर नहीं किया तो वो आत्मा बनकर हमेसा हमेसा के लिए हमसे दूर चली जाएगी आत्मा की दुनिया में...??

महिला - उस महिला के साथ अन्याय नहीं होगा ये....??

अगर वो दूसरा अंश संसार के विनाश का कारन बना तो....??

आदमी - नहीं Banega..Kyuki मई उन्हें मनुष्य योनि के महिला के गर्भ में डालूंगा....

महिला - मनुष्य योनि !!

फिर तो वो कभी भी अपनी माँ तक नहीं पहुँच पायेगा...

पारी लोक के किसी महिला के गर्भ में डालें तो ठीक Rahega....swami

आदमी - ऐसा किया तो दूसरा अंश महाशक्ति शाली बन jayega....Jisse की फिर सरे ब्रम्हांड लोक को खतरा हो जायेगा.. ऐसा करने से वो शैतानी ताकतों का बादशाह बन जायेगा...

मनुष्य योनि सबसे श्रेष्ठ योनि है अपितु सबसे कमजोर भी...

लेकिन म्हणत, कठिन परिश्रम और सच्ची श्रद्धा से ईश्वर को भी पा सकता है....

तो fir....apni माँ तक क्यों नहीं Pahunchega....wo दोनों aayenge...Jaroor आएंगे....

माँ की ममता खिंच लाएगी उन्हें इसके पास... उन्हें आना होगा एक दिन..??

महिला - ठीक है स्वामी यदि आपको इतना विशवास है तो आगे badhe....Kam से काम उम्मीद तो रहेगी....

आदमी - धैर्य रखो मंजुला !!

ईश्वर पे विश्वास रखो सही समय आने पर सब ठीक हो जायेगा.....

मंजुला - हम्म ृषीधर !

धैर्य और ईश्वर के विश्वास पर hi तो अभी तक जीवित हु...

ृषीधर - अब हमें विधि की तयारी करनी चाहिए...??

3 दिन बाद वो दुष्ट को अँधेरे कुवें की क़ैद में धकेल दिया जायेगा...

तब हमें अपनी विधि को को पूरा करना होगा...??

मंजुला - काश मैं उस पापी को अपने हाथ से सजा दे पति...??

ृषीधर - हम्म एक दिन उसे अपने किये गए सभी पापों का हिसाब देना होगा...??

और वो हिसाब देगा मेरी पुत्री एलिज़ाबेथ को....

और उसे उसकी सजा भी एलिज़ाबेथ के अनुसार मिलेगा...??

जिस दिन वो पापी क़ैद में जायेगा हम अपनी विधि सुरु कर देंगे.....

3....2....1......

वहीँ दूसरी तरफ...

शाम को कबीर और मीरा ने स्नान kiya....aur भोजन करके सो गए....

रात्रि 2 बजे दोनों की आँखे खुली अलार्म से...

दोनों ने आदिगुरु के कहे अनुशार ईश्वर की भक्ति की, और दिए गए प्रशाद को खाया...

और दोनों अपने बिस्तर में लेट कर प्रेम - लीला का अद्भुत खेल खेलने लगे....

इधर अचानक गेरयों के जल्दी क़ैद में जाने से.....

अननोन प्लेस में ृषीधर और मंजुला ने अपनी विधि क्रिया को प्रारम्भ कर दिया tha...Elizabeth के शरीर को दो अंश में बाटने की क्रिया...??

जिससे की सारे ब्रम्हांड में एक साथ कई प्रकार के परिवर्तन देखने को मिल रहे थे...



ठीक इसी वक़्त कुटिया के बहार

तेज़ तूफान, बारिश और बिजली का कहर टूट रहा था,

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सभी Apni-Apni कुटिया के बहार खड़े मौसम के इस खतरनाक रूप का कारन जानने कोसिस कर रहे थे,

कबीर और मीरा को इसकी कोई खबर न थी,

उनकी कुटिया पर इस तेज़ कहर का कोई असर नहीं पद रहा था, वो दोनों अपनी प्रेम - वासना में लीं थे...

सदनं को उनकी कुटिया को देखकर बहुत अचंभव हुआ,

जबकि सबकी कुटिया उजाड़ चुकी थी किन्तु उनकी कुटिया पर कोई असर न होते देख,

सदनं आदिगुरु की तरफ भागे....

जो आँखें बंद किये योग में बैठे और मुस्कुरा रहे थे...

और आँखें खोल दी..

सदनं - ये कैसा चमत्कार है, गुरुवार !!

मेरी तो समझ से परे है,

एक तरफ बहुत बुरी घटना होने की आशंका हो रही,

वहीँ उस कुटिया को देखकर आश्चर्य,

और आपकी रहस्यमयी मुस्कान देखर कुछ अच्छा होने की Aashanka,......Guruvar मेरी आशंका को दूर कीजिये कौन है, ये दोनों... ??

आदिगुरु - तुम्हारी सभी शंका सत्य है,

कुछ अच्छा भी होने जा रहा है, और कुछ बुरा हो भी रहा है,

और ये दोनों एक साधारण मनुष्य hi है,

किन्तु ये दोनों भविष्य में Sukh-Shanti और पाप के अंत का एक छोटा सा साधन भी है...

सदनं - गुरुवार क्षमा !! किन्तु कुछ समझा नहीं मैं...

आदिगुरु - शिष्य ज्यादा अधीर मत बनो, समय आने पर सब ज्ञात हो जायेगा....

तुम्हें जो कार्य दिया गया है उसका सही ढंग से पालन करो तुम्हारा कल्याण होगा और ईश्वर की विशेष महिमा का भागी दार बनोगे...

सदनं - धन्यवाद गुरुवार !!

क्षमा कीजियेगा थोड़ा सा अधैर्य हो गया था, बहार की विचित्र घटना को देखकर,

आदिगुरु - समय से पहले कुछ भी नहीं प्राप्त होता,

इस लिए कर्म करते जाओ फल की चिंता मत करो !!

सदनं - जो आज्ञा गुरुवार,

आदिगुरु फिर से ध्यान में लीं हो गए,

और सदनं फिर से बहार आकर विचित्र मौसम का जायजा लेने लगा,

इधर कबीर और मीरा अपने चरम - सुख को पहुँच गए थे,

दोनों में घमासान युद्ध छिड़ा हुआ था,

और एक तेज़ आवाज़ के साथ दोनों चींख उठे और अपनी Prem-Vasna के चरम सुख की प्राप्ति कर ली,

एक तेज़्ज़ प्रकाश हुआ कुटिया में दोनों की आँखें बंद हो गयी....

इधर सदनं बहार आया था की मौसम और बाद से बदतर हो गया, मुस्लाधार बारिश, तेज़्ज़ कद कड़ाहट के साथ बिजली,

फिर सब कुछ जैसे अचानक शांत हो गया,

रात्रि 3 बजे दिन के भांति, बिलकुल श्वेत प्रकाश फ़ैल गया....

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सबकी आँखें इस विचित्र घटना को देखकर आँखे फटी की फटी रह गयी...

कुछ भी दिख नहीं रहा था

सबकी आँखे स्वतः hi बंद हो गयी....

धीरे- धीरे प्रकाश छटने लगा,

सब कुछ पहले के जैसे शांत हो गया...

कबीर और मीरा ने आँखें खोली, सब कुछ पूर्वतः लगा,

दोनों एक दूसरे को आश्चर्य चकित होकर देख रहे थे,

फिर दोनों फ्रेश हुए और सुबह आदिगुरु से इस विचित्र घटना के बारे पूछने का सोंच कर सो गए...??

दोस्तों आज के लिए बस इतना hi...

कमेंट, लाइक्स, सुग्गेस्टियन्स, रेविएवस, का रखना dhyan.....Aapka अपना दोस्त हयान..!!


 
Abb..takk..

कबीर और मीरा ने आँखें खोली, सब कुछ पूर्वतः लगा,

दोनों एक दूसरे को आश्चर्य चकित होकर देख रहे थे,

फिर दोनों फ्रेश हुए और सुबह आदिगुरु से इस विचित्र घटना के बारे पूछने का सोंच कर सो गए...??


अपडेट No. 22

Abb...Aage...


सुबह के 7 बजे दोनों की आँखें खुली,

फ्रेश होकर गुरु की शरण में पहुँच गए...

बीती हुयी उस विचित्र घटना को अवगत कराया....

आदिगुरु - सब अच्छा हुआ है पुत्र,

ईश्वर ने तुम दोनों की गुहार सुन ली है,

अब तुम दोनों अपने घर लौट सके हो....

संतान प्राप्ति के बाद,

महाशिवरात्रि को तुम दोनों के यहाँ आना है और तभी बचे का नाम कारन भी होगा.....

हम दोनों ने गुरु को प्रणाम किया और आशीर्वाद लेकर देहरादून के लिए निकल पसे......

आदिगुरु - मुस्कुराते हुए, शिष्य

एहि सोंच रहे हो न,

जन्म के बाद तुरंत बुलाने के बजाय, महाशिवरात्रि को क्यों बुलाया...??

सदनं - जी गुरुवार !!

आदिगुरु - महाशिवरात्रि के दिन hi तुम्हारे सरे प्रश्नो का उत्तर मिल जायेगा,

और इस दिन तुम खुद को बहुत भाग्यशाली समझोगे,. ये मेरा वचन है.....

सदनं - जैसी आपकी आज्ञा गुरुवार..!!

इधर देहरादून में में भी लोगो और न्यूज़ में इस विचित्र घटना पर बहस चल रही थी,

कोई ईश्वर का चमत्कार कह रहा था तो कोई कलियुग का कहर

हर तरफ अलग -अलग किस्म की बातें हो रही थी...

हम दोनों के वापस आने से माजी और रश्मि दी बहुत खुश थी....

खुश हो भी क्यों नहीं.. हमने अपनी ख़ुशी जो बताई थी..

हमने घर में पूजा राखी, गरीबों को दान दिया और भोजन कराया...

फिर से होने डेली काम काज में लग गया..

15 दिन बाद मीरा की तबियत अचानक ख़राब हो गयी उसे तेज़्ज़ बुखार आया हुआ था...

मई और माजी उसे हॉस्पिटल लेकर गए....

हम तो बहुत पैराहन the...lekin

डॉक्टर ने जब खुश खबरि दी...

मीरा माँ बनने वाली है, वो गर्भवती है...

फिर क्या था हम सभी ख़ुशी से फुले न समाये,

अब हमारे घर में खुशियों का शमा सा बांध गया...

दोनों घरों में खुशियां मनाई गयी.. पूजा पथ, दान सभी हुआ..

बुसिनेस्स में और बढ़ोतरी होने लगी,

कोई परेशानी नहीं थी सिर्फ खुशियां hi खुशियां...

मीरा अब बीएड रेस्ट करने लगी,

माजी मीरा का पूरा ख्याल रखती,

मई ऑफिस जाकर अपना काम देखता,

और घर जल्दी जाकर मीरा के साथ ख़ुशी के पल बीतता...

अब तो जैसे सब अच्छा जा रहा था....

इसी तरह 8 महीने गुज़र गए....

एकदिन अचानक मीरा को तेज़ दर्द उठा मई मीरा को लेकर हॉस्पिटल ले जाने के लिए बहार निकला hi tha...ki अचानक घर में

Rishi-Kanya की टोली हमारे घर में पधारी...

वो 7 लोग थी...

और उनमे से एक ने अपने का कारन बताया,

मई उन्हें मीरा के पास ले गया....

मुझे और माजी को कमरे बहार भेज दिया गया...

मई और माजी कमरे के बहार उनके बुलाने की राह देखने लगे....

चिंता तो बहुत हो रही थी हम दोनों को पर सिवाय इंतज़ार के कुछ भी नहीं कर प् रहे थे...

अंदर से मीरा के दर्द में होने की चींख और मन्त्रों के उच्चारण की आवाजें आ रही थी...

करीब 30 मं मीरा जोर से चीखी और तभी बचे के रोने की आवाज़ आयी और साथ

ईश्वर की महिमा जय हो की आवाजें गूँज उठी,

करीब 15 मं बाद दरवाजा खुला,

ऋषि कन्या के हाथ में बेबी.....


बिन देखे ही लगती है तू सबसे हसीं

तेरे नैनो के तिलिस्म के मजधार में मेरी धड़कन फंसी

सबकी सांसे रुक जाती होगी तेरे हुस्न का दीदार करके जब तू दिखाती है अपनी नूरानी हँसी..!!


-
 
Update..No..23

Rishi Kanya - Badhayi ho tumhare ghar Lakshmi padhari hai,

Aur meri god mein pakda diya...

Mai to khushi se Ro pada bachi ko dekh kar,

Bahut khubsurat bachi, Aaj tak maine itni khoobsurat ladki nahi dekhi thi,

Samandar Jaisi Neeli Aankhein Jo bhi dekh le Unme hi Doob ke Rah jaye...

Mai Bachi ko dekhne mein Khoya hua tha,

Tabhi meri Aankh se Aansu uske Gaal par gira,

Bachi ne bahut Pyaar se muskuraya...

Aansu ki Boond Safed Roshni Bankar Ud gayi !!

Mai Ekdam se jhatka Khakar idhar udhar dekhne laga...

Rishi Kanya - Ghabrane ki koi baat nahi,..andar aao Sab Batati hu...

Rishi Kanya - Ye Kaun hai...??

Meera ki ma ke taraf ishara karte huye...

Mai - Meera ki Maa

Rishi Kanya - Ab mai Jo baat batane ja rahi hu, wo Raaz rahni chahiye...

Hamein AadiGuru Maharaj ne bheja hai, unhe Pahle se Gyat tha, Iss chamatkar ke bare mein,

Issliye Humne tumhe Hospital nahi Jaane diya,

Yeh bachi koi aam bachi nahi hai,

Ek Alokik shakti ka Pratiroop hai..

Kanya ke Hath mein Ye lal dhaga dekh rahe ho, Ise kabhi bhi mat hatne dena,

Jub tak AadiGuru ka Aadesh na ho...iss dhage se hi Iss Kanya ki Shaktiya Bandhi huyi hai,

Jub tak hai ye hai Yeh ek sadharan Ladki ki tarah Rahegi....

Ab suno Savdhani baratne ki baat,

iss bachi ko Sabse door Rakho,

Bachi ko 24 ghante Najar rakho,

Apni nazron se ojhal mat hone dena, Warna buri Shaktiyan iss par Hamla kar sakti hai,

""Kya tum Teeno iss bachi ka khayal rakh paoge, Nahi to Mai Khud Ruk jati hu Dekhbhal ke liye ??"" Rishi Kanya boli,

Mai - Hum Jaroor Rakh lenge, Kabhi bhi ise khud se ek pal kw liye bhi door nahi hone denge...

Meera - Kitni Mannaton ke Baad to Humne ise Paya hai, Aise kaise kisi ka Saaya padne dungi...

Palkon par bithakar Rakhungi iss Chand si Gudiya ko....

Rishi Kanya - Bahut Bhagyashali ho Tum dono,

Jo iss Kanya ke Mata-Pita ho,

Hum mein so Koi ek Har Sham iss bachi kon dekhne aate rahegi..

Baki baatein tumhe Guruvar MahashivRatri mein Naam karan ke samay Samjh denge...

Kal Pooja hogi tumhare ghar iss bachi ke Aagman par,

Ek aur baat Bachi ko aur Meera ko abhi MahashivaRatri tak Doctors se door rakhein,

Koi pareshani ho to Hume batana...

Sabne ek-ek bar bachi ka Hath Apne sar Par Rakha aur chali gayin..

Maine Pyaar se Meera ke Mathe par kiss kiya, aur use Shukriya kaha iss khubsurat bachi ke liye...

Maaji ne Pyar se Meera ke Sar par hath fera aur bachi ko hath mein lekar...puchkarne lagi....

aur kahne lagi nachte huye.. Main to Nani ban gayi hu

Gudiya pyar se muskurane lagi,

Sachme kitni khubsurat muskurahat thi, mere Paas to lafz kam pad rahe hai uski taareef ke liye, Sakshath Jause koi Angel utar aayi ho Jameen par....

""बिन देखे ही लगती है तू सबसे हसीं, तेरे नैनो के तिलिस्म के मजधार में हमारी धड़कन फंसी,

सांसे रुक जाती हैं हमारी जब तू दिखाती है अपनी नूरानी हँसी..!!""

Pahle Vijay bhaiya ko fir Rashmi di ko dono bacho Sahit Jaldi ghar aane ko kaha....

1 hrs baad...

Ting - Tong.....

Maine Jakar Darwaja khola,

Rashmi di - Bhai Aisi bhi kya Aafat aan padi thi ki Bacho sahit achanak se bulaya mujhe,

Mai - Muskurate huye,

wo to Meera batayegi,

uss kamre mein hai...

Di ne Darwaza khola,

Saamne Meera god mein Baby liye baithi thi...bas itna hi dekhna tha ki....

Rashmi di -. Ohhh mmmyyy Goddddd !!

pphle kkkkyun nnnnhi batayyya..

Wo daud kar Meera ke Paas pahunchi Bachi ko God mein lekar Khushi se Uchhalne lagi....Kitni pyari Gudiya hai...

Akhil - Mujhe bhi dikhao...Mamma. ..

Vijay jiju bhi aa gaya itne mein Shor Sharaba sunkar seedha kamre mein aa gaye....Unka bhi Didi Jaisa haal tha...

Sab milne ke baad Bed ke Charon taraf Meera ko gherkar khade ho gaye,

sawalon ki Bauchhar laga di....

1 min - 1 min Ruko to didi...saans to lo...

Mai - Hua ye ki Meera ko Achanak Bahut Jorr se Pet mein Dard utha, Hospital le Jana muskil pad Raha tha,

To mai Nurse ko le Aaya aur Ghar par hi Normal Delivery ho gayi....

Aur baki Sab aapke Saamne hai...

Rashmi - Sach mein Chhoti !! aaj mai Bahut khush hu Tum dono ke liye...

Vijay - To bhai Abb batao Party kab de rahe ho..??

Maaji - Kal Pooja hai,

tabhi thode bahut khas logo ko bulakar Party de lo,

Naam karan ke baad Badi Party bhi kar lena...

Vijay - To kal pooja mein Naam karan bhi kar denge, Kya kahte ho bhai ??

Meera - Nahi Jiju !!

Guru Maharaj ne kaha tha,

Bachi ka Naam karan MahashivaRatri mein hoga,

Aap Sab bhi Ready rahna Jaane ke liye Maana Ganv...

Rashmi - Kyun nahi jaroor chalenge...hai na ji !!

Vijay - Hmm kyun nahi..

Aisa khushi bhara din beetne laga...

Pooja bhi achhe se ho gayi,

Chhoti si Party bhi huyi, Padosiyon ke sath,

Sab kuchh badhiya chalne laga..

Ab koi kami na thi Sab kuchh pa liya Humne...

Ab hum bilkul Free the koi Pareshani na thi...

Bass khushiya hi khushiyan

Kintu,

Gudiya ko paida huye 1 maah beet chuke the,

Lekin Meera ka pet abhi bhi Nikla hua tha,

Ab tak to soojan khatm ho jani chahiye thi...

Doctor ke paas jaane se Mana kiya tha...to

Maine Rishi Kanya se iss bare mein baat ki,

To unhone MahashivaRatri tak Meera ko Bed Rest karne ke liye kaha,

Bilkul bhi uthne aur Kaam karne se Mana kiya...

Agle din Rashmi didi aayi....

Rashmi - Kabeer tumhe meera ko Doctor ke paas le Jana chahiye...Ye jaroor koi infection nahi to ab tak ye sab Normal ho jana chahiye...

But ye to badhta chala ja raha hai....

Mai - Aapko kya lagta hai mujhe Meera ki chinta nahi hai...

Mera bhi Yahi manna hai..

Kintu Guruji ka sakht Nirdesh hai

MahashivaRatri ke pahle Meera kahi nahi jayegi aur na hi Dr. ko dikhayegi...

Mujhe uske Dard ka ahsas hai Lekin Jo khushi ab mili hai wo bhi to GuruMaharaj ke Wajah se hau Bhala mai kaise unke Vishvas ko tod du Didi !!

Dosto Aaj do Update de siye.....

Keep Reading and Supporting...!!

-



 
थैंक्स गाइस !!

फॉर रीडिंग एंड सपोर्टिंग....

इतने बेहतरीन रिव्यु के लिए धन्यवाद...

बहुत अच्छा लगा...

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हैप्पी रिपब्लिक डे

UPDATE...NO..24. (मेगा अपडेट)

नेक्स्ट मॉर्निंग


सुबह नींद मोबाइल के रिंग होने से khuli...office से कॉल थी...

ऑफिस जाने का तो दिल नहीं था मीरा को ऐसी हालत में छोड़कर जाने का...

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लेकिन आज K.M. ट्रेड टावर में एक बहुत बड़ी बुसिनेस्स डील की ख़ुशी में फंक्शन ऑर्गेनिसे किया गया था..

आज हमारी कंपनी को चैरिटी ऑफ़ थे ईयर के खिताब से नवाज़ा जाना था...

तो अब इतने बड़े बुसिनेस्स इम्पिरे के मालिक का वह प्रेजेंट न होना कतई सही नहीं hai...issliye मुझे जाना पड़ा...

एक तरफ बेटी के पैदा होने और कंपनी के अवार्ड मिलने की ख़ुशी...

तो दूसरी तरफ मीरा की तबियत सही न होने का गम...

बद्री भैया और माजी को मीरा का ख्याल रखने के लिए छोड़कर चला गया ऑफिस की तरफ.. .


K.M. ट्रेड टावर

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वह का माहौल hi बदला हुआ था...

रश्मि दी और विजय जीजू ने सुर्प्रिसिंग पार्टी का प्रोग्राम फिक्स रखा हुआ था...

जिसके मुझे खबर hi न थी...

जब मैं बिल्डिंग में एंटर करता हु तो...

सामने एंट्रेंस पर पूरा स्टाफ मेरे वेलकम के लिए खड़ा था...

शायद रश्मि दी ने बेबी बिरथ की न्यूज़ पूरे ऑफिस में फैला दी थी...

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सभी मिलकर मुझे कोंग्रटुलते करने लगे..

सभी ने मेरे लिए एक छोटी सी पार्टी राखी हुयी थी,

सबने मिलकर एन्जॉय किया...

पार्टी के एन्ड होने के बाद चैरिटी का फंक्शन का शुभारम्भ हुआ....

फिर हमारे ग्रुप को चैरिटी ऑफ़ थे ईयर का मैडल दिया गया....

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मैंने यह मैडल मीरा को डेडिकेट किया...

क्युकी चैरिटी का आईडिया मीरा का hi था....

सब कुछ अच्छा जा रहा था..

मैंने ग्रुप के सभी मेंबर और स्टाफ को उनके हार्ड वर्क के लिए थैंक्स कहा और उनको 1 मंथ की एक्स्ट्रा सैलरी दी...

सभी मेंबर स्टाफ बहुत खुश हुआ....

ऑफिस का सारा काम ख़त्म करके मैं रश्मि दी से मिला और उन्हें उनका सारा वर्क समझा दिया क्युकी अब मई ऑफिस वर्क से छुट्टी ले रहा था....

मैंने ऑफिस से 6 माह की छुट्टी ले ली,

सारा काम विजय और रश्मि देखने लगे,

अब मैंने खुद को मीरा की देखभाल में लगा दिया....

मई और माजी दिनभर कोई न कोई मीरा और बची के पास रहते और उनकी देखभाल करने लगे,

रात में भी हम तीनो एक hi रूम में सोते,

मई किसी भी प्रकार की कोई चूक नहीं चाहता था...

पूरा घर तो जैसे मंदिर बन गया था...

पूरा दिन bhajan...Agarbatti..

Diye..Jalte रहते...

सब कुछ ठीक था बस मीरा के पेट की चिंता होती रहती....

लेकिन ऋषि कन्या रोज शाम को आती मीरा को प्रशाद khilati..aur मंत्र उच्चारण करती जिससे मीरा को आराम मिलता था...

बा ऐसे hi पूरा दिन घर में बिताने लगा...

एकदिन अचानक सदनं जी,

हमारे घर पधारे,

हमने उनका खूब अच्छे मन से seva-Satkar किया...

उन्होंने गुड़िया को गॉड में लिया और उसके हाथों को अपने सर पर फिराया और फिर से मीरा को दे दिया...

सदनं - अध्भुत !! बहुत भाग्यशाली हो,

भगवन की कृपा हुयी तुम पर जो इस देव कन्या ने तुम्हारे घर जन्म लिया...

मई गुरु महाराज का सन्देश लाया हु,

और साक्षात इस देवी के दर्शन करने भी....

सदनं - कबीर अब तुम्हें यह शहर छोड़ना होगा, काम से काम 12 वर्ष के लिए....

जब तक की यह कन्या 12 वर्ष की न हो जाये..

वापस चलना होगा सोनपुर..

क्युकी वही एक ऐसी जगह है जो सबसे छिपी हुयी है...

काम के लिए तुम देहरादून डेली आ जा सकते हो...

किन्तु मीरा और बची वहीँ सोनपुर में रहेगी...

गुरुमहाराज का आदेश है की..

तुम सोनपुर में बिना किसी के जानकारी के एक हाई - सिक्योरिटी घर बनाओ,

और मीरा और बची की सुरक्षा के इंतज़ाम करो....

भरोसे के आदमी घर के बहार तैनात करो जो 24हरष चौकन्ना रहें...

बाकी सब 4 माह बाद गुरुवार नामकरण के दौरान बता देंगे...

अब तुम्हारे पास 4 माह का वक्त है...

जो भी करना है जल्दी करना होगा.....

मेरी बात मनो तो जिस व्यक्ति से भी काम लो उसे अपने पास काम पे रख लो..

व्यक्ति का चुनाव परख कर करना...

जितना तुम्हे जानना चाहिए मैंने समझा दिया,

बाकी जवाब वक्त आने पर मिल जायेगा....

सभी जरुरी बातों को समझकर गुरूजी फिर वापस चले गए...

अब मेरी और मीरा को और भी टेंशन होने lagi...apni बेटी को लेकर...

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा की किस्से मुझे उतना डरना चाहिए...

गुरु जी यह सब क्यों करवा रहे है..

बूत मेरी भलाई और मेरी बीवी बची की सेफ्टी के लिए hi तो कह रहे है तो इसमें गलत क्या..??

बाद में कुछ गलत हुआ तो अफ़सोस करने से अच्छा है मैं गुरूजी की बताओं पर चालू और अपनी फॅमिली के किये कुछ भी कर गुजरूं..

तीन दिन में बद्री भैया की मदद se...aur ऑफिस वर्कर की हेल्प से..

सिक्योरिटी के लिए आदमी खोज जारी कर दी...

जगह जगह से सिलेक्शन किया वो भी कॉन्फिडेंटिअल रूप से...

अब मुझे घर बनाना था गांव में...

इस्सलिये आदमियों के मदद से,

जो अब सिर्फ मेरा आर्डर मानते थे...

मैं. रात को चोरी - छिपे घर बनाने के सरे जरुरी सामन, रॉ मैटेरियल्स..

सोनपुर के बहार जंगल में छिपकर रखने लगा...

जब सभी जरुरी सामान इकठ्ठा हो गया तो...

10 सेक्सुयर्टी गार्ड्स को मीरा और बची की देख -रेख में रखकर

मई और मेरे वर्कर्स और सिक्योरिटी,

दिन के उजाले में गांव के लिए रावण हो गए....

मैं सीधा जाकर रमेश चाचा से मिला, जो मुझसे मिलकर बहुत खुश हुए,

लेकिन मेरे साथ इतने सरे आदमियों को देखकर भयभीत हो गए...

फिर मैंने उन्हें यही आकर बसने की बात बताई और घर बनाने की भी....

फिर हम सभी ने मिलकर अपना वर्क स्टार्ट कर दिया...

दिनभर हम सब घर बनाते और घर की सिक्योरिटी के सरे अरेंजमेंट अप्लाई करते और रात में देहरादून आकर अपने घर हिफाज़त करते...

हम सबने मिलकर Din-Raat कड़ी म्हणत करके 3.5 मंथ में hi,

एक Hi-tech दो मंजिल ईमारत कड़ी कर दी पुराने वाले घर के बगल में...

क्यूंकि अब उस पुराने घर में तिब्बत से भागे हुए शरणार्थी रहने लगे the...(Details बाद में)

बिल्डिंग में सिक्योरिटी के सरे इंतेज़ाम हो गए...

साउंड प्रूफ रूम, बुलेट प्रूफ गिलास,

Hi-tech गैजेट,

कैमरा,

अलार्म, स्कैनर

बहार के गेट पर Hi-tech स्कैनर और दीवार के ऊपर करंट दौड़ती वायर लगायी हुयी थी...

लाइट के लिए इन्वेर्टर और छत पर सोलर पैनल और निचे अंडरग्राउंड नॉइज़ प्रूफ मिनी जनरेटर रखे जो दिसेल से चलते थे..

क्युकी गाड़ियां

सोनपुर की गुफा (ane-Jane का रास्ता ) के अंदर नहीं आ पति थी,

इस्सलिये बहार एक अंडरग्राउंड सीक्रेट बेस बनाया और उसके ऊपर ऐसे गोदाम टाइप गाड़ी खड़े करने और रहने के लिए सिक्योरिटी बेस बना दिया...

उस गोदाम में भी सरवेल्लिओन्स लगाया जिससे की हमे गुफा के बहार की हलचल का पता चल सके...

इस अंडरग्राउंड बेस को सुरंग के जरिये मैं बिल्डिंग तक जोड़ दिया gaya...Future में बहार निकलने की सेफ्टी के लिए...

ये सब इतनी जल्दी बनाने में पैसा पानी की तरह बहाना पड़ा..

साथ hi सारे वर्कर को बहुत हार्ड वर्क करना पड़ा...

सायद इसी दिन के लिए मैंने इतने पैसे कमाए थे...

अब महाशिवरात्रि के 10मदिन बचे थे..??


गाइस !! आज के लिए बस इतना hi....

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लाइक्स, कमैंट्स और रेविएवस का रखना dhyan.....aapka दोस्त हयान..!!
 
बहुत बहुत शुक्रिया भाई !!

इतने डिटेल्स में रिव्यु देने के लिए....

आपके कमेंट से हर बार मुझे कुछ नया सीखने को मिलते है...

सायद 10 साल में महामारी तो ख़त्म hi हो गयी होगी...

शायद शैतान से बचने के लिए ho....Sonpur में रहना...

देखते है आगे क्या होता है...??

थैंक्स वन्स अगेन भाई...
 
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