Update..No..44*
MeGa..UpDatE
Abb..takk..
सदनं जी - शैतान ले गए हयान ko....Shaitaannnn !!!!
कबीर और मीरा - नाहीईई
जोरर से चिल्लाते हुए बेहोश हो गए...
Abb..Aage...
गुरु सदनं जी का बस इतना कहना hi था की सबका कलेजा मुँह को आ गया...
रिया और माजी दौड़ कर कबीर और मीरा के पास पहुंचे...
दोनों के ऊपर पानी दाल कर होश में लाया गया..
मीरा तो दर्द से bil-bila उठी..
दोनों बौखलाए हुए the...Iss बात को सुनकर
लगातार आंसू बहाये जा रहे थे..
न जाने कैसे बर्दाश्त कर रहे थे इस दर्द को जो अभी मिल रहा था हयान के गायब होने की वजह से...
सदनं जी, जैन को बुलाते हुए....
जल्दी से अन्य को लेकर मेरे कमरे में चलो...
जैन अन्य को लेकर गुरूजी के कमरे में जाता है और बीएड पर लिटा देता है..
अभी गुरु जी के पीछे पीछे कमरे में आ गए...
एक तरफ बेटी का यह हाल तो दूसरी तरफ बेटे का गायब होना मीरा और कबीर को छलनी किये जा रहा था...
सदनं जी - शांत रहो तुम दोनों !!
यह समय रोने का नहीं धैर्य से काम लेने का है..
ईश्वर पर विश्वाश रखो..
सब सही होगा...
फ़िलहाल अभी हमें सिर्फ अन्य के बारे में सोचना है...
मुझे गुरुमहाराज पर पूरा विश्वाश है, वो उसे कुछ नहीं होने देंगे..
मीरा - गुरु जी hi तो नहीं आये अभी तक..
अगर मेरे बेटे को कुछ हुआ तो मैं खुद को आग लगा दूंगी..
कबीर किसी तरह खुद के गम को छिपाते हुए मीरा को सँभालने लगा...
क्युकी इस वक्त मीरा की हालत बहुत बुरी थी..
आवेश में आकर कोई भी कदम उठा सकती थी...
सदनं जी अन्य के ऊपर मंत्र और गंगा जल का छिड़काव करने लगे...
पहले की अपेक्षा अन्य के जख्म काम हो चुके थे किन्तु होश नहीं आ रहा था....
सदनं जी - हमें अन्य को लेकर शीघ्र hi किसी हॉस्पिटल जाना होगा,
इसे इलाज़ की सख्त जरुरत है....
कबीर - जैन जल्दी से गाड़ियां निकालो...
हम अभी देहरादून जा रहे है...
कबीर - रिया, माजी, आप लोग घर में रुकिए...
जिन भी साथ जाने की जिद्द करने लगी...
कबीर, मीरा, जिन सदनं जी, अन्य को लेकर एक गाड़ी में बैठ के देहरादून के लिए निकल गए...
दूसरी गाड़ी में जैन और कुछ गार्ड्स थे..
बाकी घर में रुके हुए थे सुरक्षा के लिए....
दोनों गाड़ियां जाकर सीधा...
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, देहरादून
में रूकती है...
अन्य को इमरजेंसी वार्ड में एडमिट करवाया जाता है..
सबको बहार रोक कर डॉक्टर अन्य का ट्रीटमेंट्स स्टार्ट कर देते है...
लगभग एक घंटे तक सरे Check-up कम्पलीट होते है...
1हरष बाद डॉ. बहार आते है...
Main(Kabeer ) तुरंत उठाकर डॉ के पास जाता हु...
मैं - अब कैसी है मेरी बेटी...??
डॉक्टर - हमने सारे Check-Up कर लिए है..
वो बिलकुल नार्मल है...
बूत अभी तक ये समझ नहीं आ रहा है की वो बेहोश क्यों है...
हमने पूरी कोशिश की ट्रीटमेंट करके होश में लाने की बूत न कामयाब रहे..
ऐसा लगा रहा है जैसे किसी शॉक की वजह से वो बेहोश है...
हमने ग्लॉकसे दे दिया है अभी उसे वेंटिलेशन में रखा गया है....
जल्द hi होश आ जायेगा....
आप सभी लोग मिल सकते है...
नथिंग मोरे डेंजरस ! जस्ट रिलैक्स...
इतना कह कर डॉक्टर चले जाते..
मैं, मीरा, तुरंत अन्य के पास जाते है..
एक बीएड पे ऑक्सीजन मास्क पहने हुए,
बड़े आराम से सो रही थी मेरी बेटी अन्य...
हाथ में ग्लूकोस की सिरंगे लगी हुयी थी...
जलने के सरे जख्म बॉडी से गायब हो चुके थे..
मैं मीरा वही बीएड के पास बैठ गए..
अन्य के मासूम चेहरे को निहारने लगे...
दूसरों की तकलीफ को दूर करने वाली आज खुद तकलीफ में बड़ी hi मासूमियत के साथ लेती हुयी thi...Ekdam खामोश..
हमारे कान उसकी आवाज़ सुनने के लिए बेकरार थे.. लेकिन सिवाय ख़ामोशी के कुछ नहीं मिल रह था...
मीरा तो बस तब से आंसू बहाये जा रही थी...
कुछ देर बाद जिन और सदनं जी भी आये...
हम सभी अन्य पास बैठे उसके उठने का इंतज़ार करते रहे...
वहीँ दूसरी तरफ..
इस समय जैसे मैं एक बुरा सपना देख रहा था..
इस वक़्त मेरे दिमाग में मेरी ज़िन्दगी की सभी बातें एक फिल्म के जैसे तैर रही थी....
फिर मुझे यह ख्याल आया की अभी मेरे साथ आखिर हुआ क्या था..??
अचानक से मेरी आँखें खुल गयी और मैं उठ गया....
उस दर्दनाक हादसे का ख्याल मन में आते hi पुरे शरीर में एक दर्द की लहार सी दौड़ गयी...
डर तो जैसे मेरे दिल - ो - दिमाग पे छा गया था..
मुझे इस वक़्त सिर्फ अन्य और Mom-Dad की याद सताने लगी..
मैं खुद को सँभालते हुए इधर उधर देखने लगा.
इस समय मैं ऐसी जगह पे था जहाँ दूर दूर तक कुछ भी नज़र नहीं आ रहा था सिवाय अँधेरे के...
कुछ भी समझ नहीं आ रहा था की मैं क्या करू..
मैं idhar-Udhar घबराहट में भागने लगा...
की शायद कुछ नज़र आ जाये...
तभी अचानक मेरे सामने सफ़ेद रौशनी का धुआं जैसा छाने लगा....
मैं एक तक उस धुएं की तरफ देखने लगा...
धीरे - धीरे उस सफ़ेद रौशनी के बीच में एक आकृति बनने लगी...
मुझे एक शख्स खड़े हुए नजर आये....
मैं उस रौशनी की तरफ बढ़ चला...
मुझे उम्मीद की एक किरण नज़र आयी... की शायद अब मेरे सवालों के जवाब मिल जाएं...??
जैसे -जैसे मैं उनके करीब जा रहा था मुझे एक अजीब ख़ुशी और शांति महसूस हो रही थी...
ऐसा लग रहा था जैसे मैं किसी दिव्या शक्ति के करीब जा रहा हु...
मेरे करीब पहुँचते hi मुझे स्वर्ग लोक की अनुभूति होने लगी...
मैंने उस शख्स के नज़दीक पहुंच कर उनके चेहरे की तरफ देखा तो...
वो एक बूढ़े आदमी थे...
लम्बे सफ़ेद बाल , लम्बी सफ़ेद धड़ी, गेरुआ रंग कपड़ों में बिलकुल मेरे सामने खड़े थे...
दिखने में बिलकुल किसी साधु महाराज जैसे लग रहे थे...
उनको देख कर मुझे अनंत शांति महसूस हो रही थी मैं में अब तक की साडी परेशानियां, दुःख - दर्द , सब दूर हो गए..
उनके मुख का तेज़ देख कर अपने आप hi मेरे हाथ उनके सामने जुड़ गए...
मैंने अपनी गर्दन झुका दी और मैंने नतमस्तक हो गया....
मुस्कुराते हुए अपने हाथ को बढ़ाया और मुझे आशीर्वाद दिया...
में - हे ऋषिवर ! आप कोण हैं...??
मैं इस वक़्त कहाँ हु..??
बूढ़े आदमी - पुत्र हयान ! मुझे नहीं पहचाना...??
उनकी आवाज़ सुनते hi मेरे दिल में ख़ुशी की लहार दौड़ गयी...
मैं एक बार फिर उनके चरणों में गिर्र गया..
मेरे मुँह से अनायाश hi निकल पड़ा...
आदिगुरु महाराज !!
आज के लिए बस इतना hi...
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लाइक्स, कमैंट्स, वोट्स और रिव्यु का रखना Dhyan...Aapka दोस्त हयान..!!