Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan - Page 20 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan



?? ??


अभी खेल ख़त्म नहीं Hua....Abhi तो बस शुरुआत है...!!

कबीर को मार देता तो रीडर मुझे न छोड़ते...

एनीवे नानी... को तो कोई ले गया है न...??



चेयरमैन बच के जायेगा कहाँ...??



थैंक्स जी...

फॉर कंटिन्यू रीडिंग एंड सुप्परब फैंटास्टिक रिव्यु....

बस ऐसे अपनी कृपा मुझ पर बनाये रखियेगा...



थैंक यू वैरी मच सबकी प्यारी निहु..!!
 
आपकी

आखिर कब तक Bachega....Chairman...??



हौशला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया...

बहित ख़ुशी हुयी ये जानकर की आपको अपडेट पसंद आया...

थैंक्स आसिफ भाई....

फॉर कंटिन्यू रीडिंग एंड शानदार सुप्पोर्टस...

बस ऐसे hi साथ बने रहे...



नेक्स्ट अपडेट आज रात आ जायेगा....
 
थैंक यू सर जी....



कभी आईये हमारे थ्रेड में भी स्टोरी रीड करने...

बस कोंग्रटुलते करने आ जाते है....

???

अब तो मोदी जी में लोखड़ौन कर दिया है...

थोड़ा बहुत तो फ्री हो गए होंगे....



बस भाभी जी ने कपडे और बर्तन धुलने काम न दिया हो तो ठीक है...!!

??. ???. ????
 
Update..No..63*

MeGa..UpDaTe


Abb..Takk...

नानी माँ ! रचना देवी, स्वर्ग लोग को सिधार चुकी थी....



सब उनके शरीर से लिपट कर रोने लगे....

लेकिन कबीर सदमा लग चूका था,

वो अकेले में बैठा बाद बढ़ाये जा रहा था....

""ये सब मेरी वजह से हुआ...


मुझे उसकी बात माननी चाहिए थी....??""



Abb...Aage...

""नहीं पुत्र !

इसमें किसी का कोई दोष नहीं है..


जो होना है वो होक hi रहेगा...

नियति को कोई बदल नहीं सकता....

चाहे जितने भी षड़यंत्र रच लो...

नियति जब अपना खेल खेलती है तो उसके आगे सभी धराशायी हो जाते हैं...!!

कबीर जो अब तक सदमे में था,

अचानक आदिगुरु महाराज की आवाज़ सुनकर अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ और उनके क़दमों में गिर्र कर रोने लगा.....

रट हुए...

कबीर - ऐसा हमारे साथ hi क्यों होना था....??

जैसा आपने कहा वैसा hi हम करते चले गए...

फिर ऐसा क्यों...??

हमने तो सभी की भलाई hi चाही है हमेशा...

जवाब दीजिये फिरर हम hi क्यों...??

आदिगुरु - उठो पुत्र ! इस तरह रोने बिलखने से कुछ हासिल नहीं होगा...

तुम्हारे hi साथ क्यों....

जवाब तुम्हें पता है...!!

जब किसी को कुछ आशीर्वाद में दिया जाता है तो उसके साथ hi उसकी भक्ति और विश्वाश का इम्तेहान भी लिया जाता है..

की वो कब तक अपना अटूट विश्वास ईश्वर पर कायम रख सकता है..

ऐसा hi तुम सबके साथ भी हुआ है...!!

वैसे भी उनकी आयु पूरी हो चुकी थी..

ये तो बस एक जरिया था इस संसार से मुक्ति का....!!

तभी अन्य गुस्से में जोरर से चिल्लाई....

""चले जाओ... यहाँ से..."",

अन्य के ऐसे चिल्लाने से सभी चौंक गए...

जिन ! अन्य का हाथ पकड़ते हुए....

जिन - शांत रहो...

तुम्हें पता भी है तुम क्या बोल रही हो...??

अन्य, जिन का हाथ झिटकते हुए...

अन्य - जब सब आपको पता रहता है पहले से hi तो...

सब कुछ तबाह होने के बाद hi क्यों आते हो...??

खुद को रचयिता समझते हो....??

जो हर बार सब कुछ तबाह होने के बाद ज्ञान देने चले आते हो...!!

अन्य की बातें सुन कर सब हैरान और परेशां हो जाते है की आखिर ये सब क्या गुस्से में बोले जा रही है...??

आदिगुरु - पुत्री ! क्षमा करना,

मैं कोई रचयिता नहीं,

मैं तो बस ईश्वर का अनुयायी हूँ....

सबकी तरह मेरी भी कुछ कर्त्तव्य हैं..

मैं उन दायित्वों का पालन करने यहाँ आया हु...??

अन्य - तब कहा थे आपके दायित्व,

जब एक ईश्वर भक्त कन्या को पापी बनने पर मज़बूर किया जा रहा था....??.

नहीं चाहिए मुझे आपकी कोई मदद ! मैं खुद सब को देख लुंगी...

अब जब मैं एक क़ातिल बन hi चुकी हूँ....

तो मेरी नानी माँ को मरने वाले हर एक सख्स को इस दुनियां मिटा दूंगी....

मीरा - अन्य ! ये तुम क्या बोले जा रही हो...

क्या तुम ये भी भूल चुकी हो की यह कौन है...??

आदिगुरु - कहने दो उसे,

अभी यह अपने होश में

इस्सलिये इसके अंदर बदले की भावना ने जन्म ले लिया है...

किन्तु समय गुज़र जाने के बाद पुनः ठीक हो जाएगी...!!

अन्य - नहीं ठीक होना मुझे...

सब कुछ तबाह कर दूंगी...

जो भी मेरे रस्ते में आएगा...

मैं हर उस शख्श का भी नाम -ो- निसान इस धरती से मिटा दूंगी....!!

चिल्लाते हुए...

कबीर - बास बहुत हुआ...

इससे आगे कुछ भी कहा तो...

मेरा हाथ उठ जायेगा...

अन्य - मैं भी कहे देती हूँ...


मुझे किसी ने भी रोकने की कोशिश की तो मैं सब कुछ भूल जाउंगी...??



मीरा भागते हुए अन्य के पास गयी और उसे शांत करने की कोशिश करने लगी....

और समझने लगी....

कबीर - गुरुवार ! इसे अचानक क्या हुआ है...??

ये ऐसे कैसे बहकी बहकी बातें कर रही है..??

ऐसा लग रहा जैसे की अन्य नहीं कोई और है...??

आदिगुरु - इस वक़्त वह काली शक्तियों के वश में है..

जो की उस शैतान के हमले के कारन हुआ है..!!

अच्छी बात ये है की उसके अनादर कुछ समझ अभी भी बाकी है...

कबीर - किन्तु गुरुवार ! आपने तो कहा था की अन्य एक देव कन्या है फिर ऐसा कैसे मुमकिन है....??

गुरुवार ! इससे पहले वह कुछ अनर्थ कर दे...

उस पर कृपा करें...??

आदिगुरु - कुछ बातें समझ से परे होती है....??

तुम्हें इन सब अलौकिक और शैतानी शक्तियों का ज्ञान नहीं....!!

वैसे मैं अन्य के लिए hi तो आया हु..

लेकिन वह मेरी बात सुनने को तैयार नहीं...

बल्कि मुझे hi अपना दुश्मन समझ रही...!!

कबीर - मैं उसे समझने की कोशिश करता हु..

तब तक आप भी कुछ करें...

मेरी बेटी को वापस पहले जैसा कर दें....??

कबीर, मीरा, जिन और सभी अन्य को समझने लगते है..

लेकिन वह किसी की भी न सुन रही थी..

मीरा - बेटी यह वक़्त गुस्से का नहीं...

शांति से काम लेने का है...

एक तरफ तुम्हारी नानी का मृत शरीर यहाँ पड़ा है...

तो दूसरी तरफ हयान के ऊपर खतरा मंडरा रहा है...??

होश में आ जाओ अन्य.....

इससे पहले की अनजाने में तुम सब कुछ तबाह कर दो....

गुरुवार की तरफ इशारा करते हुए....

अन्य - मैं ठीक हु..

बस इस शख्श को मुझसे दूर जाने को कहो...

वर्ण मैं कुछ भी कर गुज़रूंगी....??

आदिगुरु - पुत्री ! मैं तुम्हारा दुश्मन नहीं....

तुम्हारे अंदर व्याप्त काली शक्तियों की वजह से मेरी उपस्थिति तुम को कष्टदायी लग रही है....

मुझे अपना काम करने दो..

सब पहले जैसा हो जायेगा...

अन्य - क्या पहले जैसा हो जायेगा...

क्या तुम मेरी नानी की वापस जीवित कर सकते हो...??

यदि नहीं तो मुझसे दूर hi रहना..

वर्ण मैं भूल जाउंगी..

की तुम मेरे गुरु के भी गुरु हो...!!

आदिगुरु - ईश्वर की कृपा हो तुम पर..

चलो काम से काम ये तो याद है की मैं तुम्हारा गुरु हु....

बुरी शक्ति के वाश में चूर होकर कुछ ऐसा अनर्थ मत कर देना....

जिसका पछतावा भी न कर पाओ..

इससे पहले की तुम अपनों को नुक्सान पहुँचाऊँ..

मुझे अपना काम करने दो...

गुरुवार अन्य की तरफ जाने लगे...

जैसे जैसे उसके करीब जा रहे थे अन्य दर्द से चिल्लाने लगी...

मुझसे दूर रहो.... !!

लेकिन लगातार कुछ मन्त्रों का जाप करते हुए...

अन्य के करीब जाने लगे....

जब अन्य से बर्दाश्त न हुआ तो...

अन्य ने वो किया जिसकी अन्य से कभी उम्मीद नहीं की जा सकती थी....

अन्य गुस्से में जोरर से चिल्लाई और हवा में उठ गयी...

तभी उसके हाथ में फिरर से वही दिव्या तलवार आ गयी....

जिससे कुछ देर पहले चेयरमैन के गुंडों का अंत किया था....

अन्य - अभी ही वक़्त गई....

यहाँ से चले जाओ..

वर्ण मजबूरन मुझे हमला करना पड़ेगा....??

पर आदिगुरु ने कोई जवाब नहीं दिया...

और अपने काम में लगे रहे.....

अन्य - नस बहुत हुआ....

अब देखो मैं कगा करई हूँ....??

अन्य ने, आदिगुरु पर तलवार से हमला कर दिया....

इससे पहले किसी को कुछ समझ आता की क्या हुआ....

अचानक आसमान से जोररदर बिजली दोनों के दरमियान गिरी....

और हर तरफ रौशनी फ़ैल गयी....

सामने का नजारा देख कर....

कबीर, मीरा और सभी एक साथ जोरर से चिल्लाये अनयययआआ.......!!

वही दूसरी तरफ हयान भी जोरर से चीख पड़ा ान्यीय!!

और हयान बेहोश हो गया.....!!

_____________________


आईये अब चलते हैं

हयान की तरफ....

मास्क मन - उठ जा भाई..

कब तक सोयेगा...

रात भर पहरा दे रहा था क्या...??

तभी अचानक वह पर सफ़ेद रौशनी फ़ैल गयी....

एक पल के लिए जो जहाँ पर था...

सब रुक गया...

धीरे धीरे प्रकाश छटने लगा.....

""यह ऐसे नहीं उठेगा....

एहि ठीक समय है अगला कदम उठाने का ....??""

मास्क मन - तू फिर आ गया बुढऊ...

जब देखो ज्ञान की बातें करने लगता है...

जबकि तुम्हें पता है...

तुम्हारी बातें मेरे सर के ऊपर से जाती है...??

जो सख्स समय को भी रोक सकता हो...

उससे भला क्या नहीं हो सकता....??

हम्म अभी जो प्रकट हुए वो कोई और नहीं...

आदिगुरु थे....

मास्क मन - मेरे पीछे क्यों पड़े हो..??

जबकि मैंने पहले hi कह दिया है की मुझे कैद में रहना पसंद नहीं...

तो फिर क्यों बंधुआ मजदूर बनाने में लगे हो....??

नहीं बनना मुझे किसी के भी शरीर का हिस्सा...

मैं एक आज़ाद पंछी हु...

मुझपर किसी का जोरर नहीं...

कोशिश तो बहुत की थी न मुझे अपने जैसा बनाए की फिर भी रोक नहीं पाए...??

आदिगुरु - मेरा जवाब अभी भी वही है...

मुझे फिर से उसी बहस में नहीं पड़ना...

अभी तो तुम एक आज़ाद पंछी हो...

लेकिन फिर क्या होगा जब वो आज़ाद हो जायेगा....??

तब कैसे बचाओगे खुद के अस्तित्व को...

वैसे भी तुम एक आत्मा हो जिसे मैं एक मौका दे रहा हु..

पुनः जीवन जीने का....??

मैं तुम्हारा पालनहार हु,

जन्म से लेकर अब तक मैंने तुम्हारे जीवन की रक्षा की है...

तुम्हें सभी ज्ञान से अवगत कराया है...

तो अब तुम्हारा भी फ़र्ज़ बनता है की मेरी बात मन जाओ...

और अपने और उसके अस्तित्व को बचाये रखो....!!

मास्क मन - मेरा भी जवाब अभी भी वही है..

पहले मेरी शर्त पूरी करने का वचन दो..

फिर मैं तुम्हारी सभी बात मैंने को तैयार हु...

मुस्कुराते हुए....

आदिगुरु - ठीक है मुझे तुम्हारी सभी शर्त मंजूर है...

मास्क मन सोंच में पद गया...

मास्क मन (मन में) - ये क्या बूढ़ा ! तो इतनी जल्दी मान Gaya..Muskura रहा है..

कही फिर से तो मेरे साथ कोई चाल नहीं चल रहा है....??

बूढ़ा बहुत होशियार है...

कुछ तो झोल जरूर है...

लेकिन मैं भी कोई काम नहीं...

इससे बूढ़ों की तो नाक में डैम कर लूंगा...

अगर चल बाज़ी की तो...??

आदिगुरु - क्या सोंच रहे हो पुत्र...??

अब तो तुम्हारी सभी शर्तें भी मान ली गयी है...

फिर क्या देरी है....??

मास्क मन - कुछ नहीं ! बस सोंच रहा था की कुछ शर्तें और मनवा लू....

फिर सोंचा रहने देते है...

जो होगा देखा जायेगा...??

मैं रेडी हु इस प्रक्रिया के लिए....!!

आदिगुरु - बहुत hi उचित फैसला है पुत्र !

लेकिन तुम अपनी समय सीमा और मर्यादा का ध्यान रखना...

वर्ण तुम्हें बहुत भरी नुकसान उठाना पद सकता है....??

मास्क मन - ठीक है...

और कुछ भी हो तो अभी बता दो...??

(मन में ) - एक बार मुझे शरीर तो मिलने दो फिर देखो मैं कौन कौन सी मर्यादाओं को लांघता हु...??

आदिगुरु मन hi मन मुस्कुराते हुए....

मैं भी तो चाहता हु की तुम ऐसा करो....??

मास्क मन - क्या इस बात की सचाई.


हयान को पता है...??

आदिगुरु- उसे सब पता है....

मैं उससे मिल लूंगा...

आदिगुरु - ठीक है पुत्र ! अब देर मत करो...

शीघ्र hi हयान के शरीर के बाएं तरफ जाकर लेट जाओ...

और उसके बाएं हाथ को अपने दाहिने हाथ से पकड़ के रखो...

मैं प्रक्रिया का शुभारम्भ करता हु....

इस प्रक्रिया में तुम्हें बहुत hi असहनीय दर्द सहना पद सकता है...

याद रहे हाथ नहीं छोड़ना....

मास्क मन - मैं शरीर पाने के लिए सभी दर्द सहने को तैयार हु...

आप शुरुआत करें....

आदिगुरु ने कुछ और महत्वपूर्ण निर्देश दिए....

सब कुछ समझा देने के बाद मास्क मन जाकर हायं का हाथ पकड़ के बाएं तरफ लेट गया....!!

आदिगुरु महाराज ने कुछ मन्त्रों का उच्चारण करना शुरू कर दिया....

फिर दोनों के पास जाकर दाहिना हाथ हयान के माथे ओर...

तो बयां हाथ मास्क मन के माथे ओर रख दिया....

आदिगुरु के ऐसा करते hi...

एक साथ दो घटनाएं घाटी...

पहलीमे ये हुआ की मास्क मन का अस्तित्व ख़त्म हो गया...

हयान के शरीर में जाकर शमा गया....

दूसरी घटना ये घाटी की....

अचानक आसमान से एक तेज़ रौशनी का पुंज आकर हयान के शरीर में शमा गया...

और ऐसा होते hi...

हयान का शरीर जलने लगा....

उसके पूरे शरीर से आग से लपटे निकलने लगी...

धीरे - धीरे आग की लपटे काम होने लगी..

और पूरी तरह से शांत हो गयी...

हयान का शरीर पुनः अपनी पहले जैसी स्थिति में आ चूका था....

अभी कुछ देर hi गुज़रे थे की हयान का शरीर मास्क मन की भेष में आ गया....

यह प्रक्रिया बार बार काफी देर चलती रही ऐसा लग रहा था की जैसे दोनों में जंग चल रही हो अपना रूप स्थायी रखने की....

अंत में जीत मास्क मन की हुयी......

आदिगुरु ने कुछ और मन्त्रों का जाप किया...

जिससे हयान को होश आ गया....

किन्तु इस वक़्त हयान , हयान न होकर कोई और था.....??

समय एक बार फिर से चलने लगा....

आदिगुरु जा चुके थे....

तभी हयान उठ खड़ा हुआ.....

और जोरर जोरर से हसने लगा......

तभी हयान ने अपना मोबाइल पॉकेट से निकला....

और एक सांग प्ले कर दिया.....

""Hello हनी बन्नी...

बोलो ट्रिंग ट्रिंग.....""


आज के लिए बस इतना hi...

......

.........

________


लाइक्स, कमैंट्स, वोट्स और रेविएवस का रखना ध्यान.... आपका दोस्त हैाँ..!!
 


अन्य वाला Part मेरे से सही लिखते बन रहा...

बूत हयान वाले Part को सही से नहीं डेस्क्रिबे कर प् रहा...

शायद इसीलिए लूप हो जा रहे है...

थैंक्स फॉर सुग्गेस्टिव फिर भी कोशः करूँगा...

की खामियों को सुधर सकू...

और कुछ बेहतर पेश करूँ.

थैंक्स सर जी....

फॉर ब्यूटीफुल रिव्यु....

बूत जहाँ तक मुझे लग रहा है..

आपने दूसरे थ्रेड पर कमेंट कर दिया है... बी मिस्टेक्स.??



देखिये शायद राइटर साहब को कोई ऐतराज़ न हो जाये....
 
हर एक सवाल का जवाब मिलेगा..

बस वक़्त लगेगा... भेद खुलने में....??

बहित हो शानदार रिव्यु दिया है आपने...

बजीत ख़ुशी हुयी ये जानकर की आप बारीकी से स्टोरी को रीड कर रहे है....

थैंक्स भाई....


फॉर कंटिन्यू रीडिंग एंड फैबुलस सुप्पोर्टस...



बस ऐसे hi साथ बने रहे....
 
Update..No..64*

MeGa..UpDaTe

Abb..Takk...

आदिगुरु के सब कुछ समझा देने के बाद,

मास्क मन जाकर हायं का हाथ पकड़ के बाएं तरफ लेट गया....!!


आदिगुरु महाराज ने मन्त्रों का उच्चारण करना शुरू कर दिया....

फिर दोनों के पास जाकर दाहिना हाथ हयान के माथे ओर...

तो बयां हाथ मास्क मन के माथे के ऊपर रख दिया....

आदिगुरु के ऐसा करते hi...


एक साथ दो घटनाएं घाटी......??

Abb..Aage...

हुआ ये की आदिगुरु ने मैट्रन के जरिये हयान के शरीर और मास्क मन की आत्मा को,

एक दूसरे में समाहित करने की क्रिया प्रारम्भ की..

आदिगुरु के ऐसा करते hi हयान का तो कुछ न हाउ किन्तु....

मास्क मन की आत्मा दर्द से तिलमिला उठी...

मास्क मन दर्द से Chhat-Patane लगा...

धीरे - धीरे उसकी आत्मा हयान के शरीर में सामने लगी....

और अंत में मास्क मन की आत्मा का अस्तित्व ख़त्म हो गया......

(Note-Mask मन एक आत्मा थी, जिसका अस्तित्व हयान के जन्म के समय हुआ...


किन्तु आदिगुरु इसे राज़ बनाकर रखा....

जैम के समय क्यों नहीं डिटेल्स दिया...??


ऐसा क्यों किया इसका राज़ आगे खुलेगा डिटेल्स में...!!)

दोनों का एक दूसरे में समां जाने के बाद आसमान से एक ब्लैक & विगत एनर्जी रे आकर हयान के शरीर में प्रवेश कर गयी....

और इसी के साथ समय चक्र पुनः शुरू हो गया....

समय चक्र शुरू होते hi हयान को होश आ गया और उठ कर बैठ गया.....

अपने सामने चेयरमैन2 और उसके साथियों को देख कर उसकी आँखें गुस्से से एक डैम लाल हो गयी....

जोरर से दहाड़ते हुए....

हयान - जिस जिस को भी अपनी जान प्यारी है,

यहाँ से चला जाये वर्ण सिर्फ उसकी लाश hi बचेगी...??

(पागल तो नहीं हो गया तू..

यह क्या बोल रहा है...??)

हँसते हुए....

चेयरमैन2 - अब तुझे क्या हुआ ??

वो बचा किधर गया...??

कहाँ छुपा दिया उस बचे को....??

हयान - शायद तुमने मेरी चेतावनी को सही ढंग से नहीं लिया...

इसीलिए हंस रहे हो..

अभी भी वक़्त है चले जाओ सब यहाँ से....

नहीं तो वो आ जायेगा...??

(मैं रेडी हु शिकार के लिए)

हँसते हुए.

चेयरमैन2 - कौन आ जायेगा...??

वो बचा.... नन्हा सा.. प्यारा प्यारा...

चेयरमैन2 की बातें सुन कर उसके सभी साथी जोरर जोरर से हसने लगते है....

हयान - बास बहुत हुआ आ जाओ सभी एक साथ..

शायद इन सब को तुम्हारा hi इंतज़ार है....??

(अब कही तुमने मेरे दिल की बात)

हयान की बातें सुनकर, चेयरमैन2 इधर उधर देखने लगता है...

पर उसे कोई नहीं दिखाई देता है....

"यहाँ हो क्या रहा है..

कही ये नकाब पॉश पागल तो नहीं गया....??

न जाने किस्से बातें कर रहा है...??""

हयान कुछ बोलता उससे पहले hi...

चेयरमैन2 का मोबाइल बजने लगता है....

चेयरमैन2 - है बॉस कहिये...

सब ठीक तो है न...??

दूसरी तरफ से............

दूसरी तरफ की बातें सुन कर चेयरमैन2 गुस्से से तिलमिला उठता है....

मोबाइल को जोरर से जमीन में पटक देता है...

मुस्कुराते हुए....

हयान - क्या हुआ बहरूपिये...??

बॉस की बंद बज गयी क्या...??

चेयरमैन2 - अपनी करनी पर बहुत घमंड है न....

ऐसी मार मरूंगा की तुझे तेरी नानी याद आ जाएगी....!!

गुस्से से चिल्लाते हुए....

हयान - बहुत बड़ी भूल कर दी तूने मेरी नानी की याद दिला कर...

आ जाओ सब के सब एक साथ.....

चिल्लाते हुए....

चेयरमैन2 - भूंज दो इसे गोलियों से....

धयान रहे इसका चेहरा न ख़राब हो...??

हमें वापस जाना है तुरंत.....

चेयरमैन2 का आदेश मिलते hi...

सभी गुंडे एक साथ हयान पर गोलियां दागना शुरू कर डेट है...

चरों तरफ से ताबड़ तोड़ फायरिंग शुरू हो जाती है....

जिस जगह पर हयान खड़ा था धुआं छ जाता है....

धीरे धीरे धुआं छटने लगता है....

पर ये क्या हयान वह पर नहीं था....

चेयरमैन2 - कहा गया वो...

देखो यही कहीं होगा भागने न पाए...

मुझे उसका सर लेकर दो....

बॉस को गिफ्ट में देना है....

""इधर क्या देखते हो..

मैं तो तुम्हारे पीछे खड़ा हु..""

हयान की आवाज़ सुनकर चेयरमैन2 पीछे मुद कर देखने को होता है की तभी....

एक जोरर दर पंच उसके जबड़े में पड़ता है....

काट काट की आवाज़ होती है..

और चेयरमैन2 वहीँ जमीन पर औंधे मुँह गिर्र पड़ता है....

मुँह से खून का फ़व्वार फुट वादा...

दांत टूटकर वहीँ बिखर गए..

चेयरमैन2 की यह हालत देख कर सभी गुंडे हयान की तरफ भागते है...

लेटस स्टार्ट फाइट....

अब कहानी हयान की जुबानी....

10 गुंडे स्पीड से भागते हुए मेरी तरफ आये और जैसे hi मुझे मरने को हुए....

मैंने तेज़्ज़ी से सबको एक एक किक जड़ दी...

जितनी स्पीड से मेरी तरफ आये उससे दुगना तेजी के साथ पीछे अपने साथियों के ऊपर जा गिरे.....

सभी दर्द से कराहने लगे.....

मैंने भी देर न करते हुए उनके ऊपर टूट पड़ा और लात घूंसो की बौछार कर दी....

काट... काट... कड़क... धम्म्म्म...

बस ऐसे hi आवाज़ आती रहीं....

सैलून का मर मर के कचूमर निकलने लगा...

सब की हड्डी पसली तोड़ दी...

अभी मई उनको पीट hi रहा था की तभी मुझ पर किसी में पीछे से वार किया...

मैं उड़ता हुआ दूर जा गिरा.....

चेयरमैन2 - बास बहुत हुआ... चूहा बिल्ली की लड़ाई...

अब तुझे दिखता हु मैं क्या कर सकता हु...

मैं अपनी जगह से खड़ा होते हुए...

तू बोलता ज्यादा है...

करता काम है...

अरे आए न....

चेयरमैन2 मेरी तरफ तेज़ी से भागता हुआ आता है...

और अचानक hi उसका हाथ एक तलवार में बदल जाता है....

मेरे कंधे में कट मरता हुआ आगे निकल जाता है..

फिर अचानक पलट कर मेरे पेअर पर भी कट मार देता है....

मेरे कंधे और जांघ से खून रिसने लगने लगता है...

( दर्द होता है बे..

बच्चों की तरह मार खा रहा है....

अभी तुझे बहुत कुछ सीखना पड़ेगा...)

मैं भी तुरंत पलट कर उसका हाथ पकड़ लेता हु....

जिससे चेयरमैन2 जमीन पर गिर्र पड़ता गई....

मैं उसके दाहिने हाथ को दोनों हाथ से मजबूती से पकड़ लेता हु और अपने पेअर को उसके छाती में रख कर....

तेज़ी से उसके हाथ को मरोड़ देता हु..

चेयरमैन2 की चीख निकल जाती है....

मैं यहाँ नहीं रुकता...

फिर जोरर से झींकते हुए हाथ को धड़ से अलग कर देता हु....

(अब सही hai...Dusra भी उखाड़ बे...)

मैं दूसरा हाथ भी उखाड़ने वाला था की तभी पीछे से फिरर किसी ने मुझ पर वॉर किया....

मैं पीछे मुदा और सबको उठा उठा कर पटकने लगा...

(चुटिया है क्या..??


यह तेरे दुश्मन है, तेरी नानी माँ के क़ातिल... क्या तू इन्हे ऐसे hi छोड़ देगा...??)

मैं - तू चुप रह..

मैंने तुझे पहले hi कहा है,

मैं अहिंसावादी हु..

मैं किसी की जान नहीं ले सकता..

बस उनकी करनी का दंड दे रहा हु....


( हेठे ही ठीक है, तुझे जो भी करना है कर,

अब अगर एक और भी वॉर मुझपर हुआ,

तो मैं अपने आप से बहार हो जाऊंगा....

फिर तू मुझे नहीं रोक पायेगा....??)


मैं भी अब एक डैम होशियारी से खुद को बचते हुए...

सब का काम तमाम करने लगा......

1,2,3,4,5,6,.........एक एक करके सभी मर खा खा कर इधर उधर गिरने लगे....

जितने भी गुंडे थे सभी इस वक़्त जमीन पर लेते दर्द से कराह रहे थे.....

तभी चेयरमैन2 जोरर से चिल्लाया....

बस बहुत जी लिया तू,

अब तुझे मरने से कोई नहीं बचा सकता.....

मैं भी उसकी तरफ देख कर मुस्कुराने लगा....

साला म्युटेंट की औलाद फिर से ठीक हो गया....

इस बार लगता है इसकी गर्दन hi तोड़नी पड़ेगी.....??

इतना बोलने के बाद चेयरमैन2 ने अपनी आखें बंद कर ली...

और अपने दोनों हाथों को आसमान की तरफ उठा दिए....

ऐसा करते hi अचानक वह पर खड़े बिजली के खम्बों से करंट का प्रवाह चेयरमैन2 के शरीर की तरफ होने लगा.....

धीरे धीरे उसके शरीर पूरी तरह से एक प्रकार इलेक्ट्रिक सोर्स बना गया...

फिर अचानक hi उसका शरीर दो भागों में बाँट गया...

मैं तो एकदम शॉक हो गया...

उसकी क़ाबलियत और एनर्जी को देख कर....

तभी मुझ पर दोनों तरफ से आग और इलेक्ट्रिक रेज़ से हमला होने लगे...

मैं भी रेडी था

मैं खुद को उसके हमले से बचने लगा....

पर ज्यादा देर तक खुद को उसके खतरनाक वार से नहीं बचा पाया....

इलेक्ट्रिक रेज़ ने मुझे अपने चपेट में ले लिया.....

मुझे अपने सिकंजे में कस्ती चली गयीं

इस हमले से मेरी बॉडी में आग लग गयी....

मेरे सारे कपडे जलने लगे....

मैं ज्यादा देर तक खुद को रोक नहीं पाया....

मेरा काबू खुद पर छूटने लगा....

और एक तेज़्ज़ धमक हुआ....

और मैं उड़ता हुआ दूर जाकर गिर्र पड़ा....

मेरी ऐसी हालत देख कर चेयरमैन2 और उसके बचे हुए साथी अपनी जीत का जश्न मानाने लगे....


""इतना आसान नहीं है अपनी मौत को हरा देना....""

सब मेरी तरफ अचम्भे से देखने लगे...

मुझे और मेरे रूप को देख कर सब थर्र थर्र कम्पनी लगे...

उनके चेहरे से तो ऐसा लग रहा था की जैसे कोई भूत देख लिया हो...

डर के मरे सबकी पंत गीली हो गयी....

इस वक़्त मैं अपने डेविल रूप में आ गया था...

मेरे बॉडी से आग की लपटे निकल रही थी....




मैं अपनी जगह से गायब होकर सीधा चेयरमैन2 के पास पहुँच गया और उसकी गर्दन को अपने हाथों में जकड लिया....

मैं - मेरे मन करने के बाद भी भी तूने अपनी सीमाओं को को लाँघ दिया....

देख तूने मुझे शैतान बनने पर मज़बूर कर दिया....


""देख मेरी आँखों में तुझे क्या दीखता है....??""

चेयरमैन2 को जबरदस्ती अपनी आँखों पर देखने केलिए मज़बूर करने लगा...

वह दर्द से छटपटाने लगा....

उसकी आँखें मेरी गर्मी को बर्दाश्त न कर सकीय और बाह कर जमीन पर गिर्र पड़ी...

साडी अक्कड़ निक्कल गयी...

आ गया घुटनो पर....

बहुत बोलता था न....

सेल की देखने के मात्रा से hi गोटियां निकल कर बहार आ गयी.

मुझसे रहम की भीख मांगने लगा....

तभी किसी ने फिर पीछे से वार किया...

मैंने पलट कर उसकी तरफ गुस्से से देखा....

वो डर के मरे पीछे जा गिरा....

सभी मेरा रूप देख कर डर के मरे इधर उधर भागने लगे...

चेयरमैन2 को उठाकर जोरर से पटक दिया..

"वो मर्डर जायेगा उसे छोड़ दो...."

"
मैं एहि तो चाहता हु.. सबकी मौत ""

"मैं तुम्हें ऐसा नहीं करने दूंगा..""

""तुम मुझे नहीं रोक सकते...""

चेयरमैन2 को दोनों पेअर को पकड़ते हुए दूर कड़ी गाड़ी के बोनट पर फेंक दिया....

और 1 सेक् में hi उसके पास फिर पहुँच गया......

""मैं तुम्हें किसी की जान लेने नहीं दूंगा....

मैं कोई क़ातिल नहीं...""


""पर मुझे मजा तो जाने लेने में Hi आती है...""

चेयरमैन2 अपने जख्मों को भूलकर हैरान और परेशां हो गया...

तुम कौन हो..

एक तरफ तो मरते हो..

फिर दूसरी तरफ बचने की बात करते हो.....??

मैं - मैं सिर्फ तुम्हारे किये की सजा देना चाहता हु...


""और मैं तुम्हारी जान लेना चाहता हु...??""

एक बार फिर उसे उठाकर गाड़ी के गिलास पर पटक दिया....

मैं - थोड़ा रेस्ट तो लो..

उसे सँभालने का मौका तो दो.....


""एक चांस तो दिया यह भागने का....""

एक बार फिर पटक दिया....

""मत मारो उसे.....""

चेयरमैन2 - झल्लाते हुए...

मैं पागल हो जाऊंगा.....

ये दूजा होने की एक्टिंग क्यों कर रहे हो...??

यहाँ ककी फुस्रा नहीं तुम hi अकेले सब कर रहे हो...??

मेरे साथ ये दो तरफ़ा खेल मत खेलो..

खुद hi मरते हो...

खुद hi रहनुमा बनते हो.....??

मैं - ये मैं नहीं कर रहा....

"
"यह सब तुम्हारी समझ से परे है...

अब तू सस्पेंस में hi मरेगा.....!!

वैसे ये सही कह रहा है...

ये मेरा काम है,

बहुत चाहत थी न तुम्हें मुझसे मिलने की...

लेकिन अफ़सोस मुझे दलहन के लिए अब तेरी आँखें न बची""


चेयरमैन2 - मुझे मौत चाहिए....

मुझे मार डालो...

लेकिन ऐसे मत तड़पाओ.....

मैं - तुम भाग जाओ...

मैं इसे रोकने की कोशिश करता हु...

"
"जिसमे हो दम मुझे रोक के बताये....""

तभी मैं अपने आप उड़ता हुआ दूर जा गिरा...

फिर एक पल में hi वापस उसके पास पहुँच गया...

और एक जोररदर पंच चेयरमैन2 के फेस पे जड़ दिया....

दुबारा पंच मरने वाला था की मेरा हाथ रुक गया....

फिर एक थप्पड़ जड़ दिया....

चेयरमैन2 मुझसे दूर भागने लगा.....

भागते हुए...

गाड़ियां निकालो..

यह पागल हो गया है...

किसी को नहीं छोड़ेगा....

बचे कूचे गुंडे गाड़ियों की तरफ भागने लगे....

मैं - जाने दो उन्हें,

मैं इन सब को पुलिस के हवाले करूँगा....

"
" मौत से भी कोई भाग पाया है आज तक....??

मैं एक एक को पकड़ के उनको मौत के घात उतरने लगा....

चेयरमैन2 को पकड़ के गाडी से बांध दिया....


और सभी घायल गुंडों को उठा कर गाडी में दाल दिया....,,,

मैं - कोई आखिरी िक्षा हो तो कह दो....

क्यूंकि अब चिटा को अग्नि देने वक़्त हो गया है....??

""प्ल्ज़ हमें जलाकर मत मारो..

चाहे तो गोली मर दो...

लेकिन इस तरह तड़पने के लिए मत छोडो....

मैं - ठीक है तुम सब की आखिरी विनती मंजूर की जाती है....

मैंने पास में पड़ी बन्दूक लो उठा लिया....

और सब के पैरों को निशाना बनाकर गोलियां दागने लगा....

गीली मर मर के सभी के पैरों को छलनी कर दिया....

सभी दर्द से चिल्लाते हुए रहम की भीख मांगने लगे....

लेकिन इनकी सुनता भी कौन..??

एक हयान था जो की रहम दिली दिखाकर जेल ले जाने की बात कर रहा था...

लेकिन सभी ने गुस्सा दिला कर उसे hi सगंत करवा दिया...

और उसके रौद्र रूप को जगा दिया....!!

लास्ट में गाड़ी से पेट्रोल निकल कर सब पर छिड़क दिया...

और एक और फायर किया...

गाडी समेत सभी आग की चपेट में आ गए....

और दर्द से तड़प तड़प कर मौत के मिह ओर बढ़ने लगे.....

पूरे वातावरण में चीखें गूंजती रहीं....

__________________________


आज के लिए बस इतना hi....

........

............

.................

लाइक्स, कमैंट्स, वोट्स और रिव्यु का रखना ध्यान..... आपका दोस्त हयान..!!
 


अगर मैं अपने बिजी लाइफ से कुछ वक़्त निकल कर स्टोरी को आगे बढ़ा रहा हूँ...

तो आपका भी फ़र्ज़ बनता है...

की स्टोरी का सुप्पोर्टस करें....!!

बुरा लगे तो सॉरी....

बूत स्टोरी को बराबर सपोर्ट नहीं मिल रहा....!!

बहुत निराशा होती है... रिस्पांस न मिलने पर...



थैंक्स !!
 
मैंने तो स्टोरी बीच में नहीं छोड़ी....

बूत आपने साथ जरूर छोड़ दिया है....

अगर मैं अपने बिजी लाइफ से कुछ वक़्त निकल कर स्टोरी को आगे बढ़ा रहा हूँ...

तो आपका भी फ़र्ज़ बनता है...

की स्टोरी का सुप्पोर्टस करें....!!

बुरा लगे तो सॉरी....

बूत स्टोरी को बराबर सपोर्ट नहीं मिल रहा....!!

बहुत निराशा होती है... रिस्पांस न मिलने पर...



थैंक्स !!
 
Update..No..65*

MeGa..UpDaTe

Abb..Takk...

एक हयान hi था जो की रहम डीिली दिखाकर,

सजा के तौर पर जेल ले जाने की बात कर रहा था...

लेकिन सभी ने गुस्सा दिला कर उसे hi शांत करवा दिया...

और उसके रौद्र रूप को जगा दिया....!!

और खुद hi अपनी मौत को बुला बैठे....

लास्ट में मैंने गाड़ी से पेट्रोल निकल कर सब पर छिड़क दिया...

और एक और फायर किया...

गाडी समेत सभी आग की चपेट में आ गए....

और दर्द से तड़प तड़प कर मौत के मुँह की तरफ बढ़ने लगे.....


पूरे वातावरण में चीखें गूंजने लगीं....

Abb..Aage...

हर तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था....

अब तो सिर्फ मैं और मेरी तन्हाई hi बची थी...

बाकी सब तो मेरे अनादर की आग पहले hi निगल चुकी थी....

रस्ते और इलेक्ट्रॉनिक पोल्स की हालत जर्जर हो चुकी थी....

यहाँ पर का नजारा बाईट गुज़रे तूफ़ान की कहानी बयां कर रहे थे.....

मैं गहरी सांस लेते हुए बोलै....

मैं - ये तुमने ठीक नहीं किया....

तुम्हें ईश्वर के खिलाफ जाने का हक़ किसने दे दिया...

किसी के जीवन और मृत्यु दंड का हक़ केवल उस परमात्मा को है...

किसी और को नहीं....??

(
प्रकृति के बनाये गए सभी नियम तुम पर लागु होते हैं...

एक इंसान पर न की शैतान पर....

मैं कल भी अपनी मर्जी का मालिक था और आज भी हूँ...!!)

मैं - शायद तुम भूल रहे हो...

तुम मुझसे हो न की मैं तुमसे...

एक बात मेरी सुन लो...

अगर एक भी बेगुनाह की जान तुम्हारे वजह से गयी....

तो मैं खुद का अस्तित्व hi मिटा दूंगा...

फिर देखता हु कैसे मनमानी करते हो...??

(
मुझे दोष देने से पहले, खुद के दिमाग में जोरर डालो...

यहाँ सभी के हाथ खून से साणे हुए थे...

कोई भी Saaf-suthra नहीं...

अब तुम मेरी भी बात गौर से सुन लो...


मुझे कुछ भी कहने से पहले मेरे जन्म का मकसद समझ लेना....??)

मैं - है जनता हु की तुम्हारा जन्म गुनाहगारो को सजा देने के लिए हुआ है...

लेकिन इसका ये मतलब ये तो नहीं की हर एक छोटे से भी गुनाह की सजा मौत हो...??

तुम्हें मेरे इशारे पर काम करना होगा..??

मैं बताऊंगा की किसे मौत देनी है या फिर सुधरने का मौका...??

(मैं किसी के इशारे में न
ाचने वाला बन्दर नहीं...

की जैसा चाहे वैसे नचा लो...

मैं एक हैवान हूँ..

एक शैतान जिस पर किसी का जोरर नहीं....

अगर मेरी करनी से आपत्ति है तो उस बुढऊ आदिगुरु से मिलो...


वही तुम्हें राष्ट समझायेगा...)

मैं - मैं रास्ता खोज लूंगा...

तुम्हें एक दिन अपने इशारे पर नचाउंगा...??

(सपने देखना अच्छी बात ह
ै...

लेकिन जरुरी नहीं की पूरे हो...

अभी तूने मेरे जुल्म की हद्द देखि hi कहाँ है...??

वैसे भी मैं तुझ बेवक़ूफ़ से बहस नहीं करना चाहता....

यह वक़्त मेरे आराम का है..

थक गया हु शिकार करके....


Don't डिस्टर्ब में..!!)

बातों का सिलसिला यहीं थम गया....

लेकिन मेरे दिमाग में हजारों सवाल पैदा कर गया....

कुछ समझ नहीं आ रहा था की कैसे इस मुसीबत से पीछा Chhudaun...to कैसे...??

एक hi रास्ता था आदिगुरु...

लेकिन उन्होंने तो पहले hi पल्ला झाड़ लिया था,

यह कहकर की यह मेरी मुसीबत है..

इससे मुझे खुद hi बहार निकलना होगा.....??

मेरा एक गलत कदम मुझे हमेशा के लिए एक शैतान बना सकता है....!!

मुझे कोई न कोई तो हल खोजना hi होगा....??

मैं अपनी सभी उलझनों को दर किनार कर...

देहरादून के लिए निकल गया.....

Hello जिन ! सब ठीक तो है न..

अन्य! का मोबाइल क्यों स्विच ऑफ है...??

जिन -..................

मैं - इतना सब हो गया तुमने कुछ बताया भी नहीं....

एक बार कॉल तो करनी चाहिए थी...??

मुझे अड्रेस सेंड करो...

मैं अभी पहुँच रहा हु..

मैं अपनी गाडी को फुल स्पीड में भागते हुए देहरादून मैक्स सिटी हॉस्पिटल की तरफ चल दिया.....

अभी मैं पहुंचने hi वाला था की मेरा मोबाइल रिंग हुआ...

जैन अंकल की कॉल थी...

मैं इग्नोर करते हुए सीधे हॉस्पिटल पहुँच गया....

भागते हुए सीधा इमरजेंसी रूम पहुँच गया....

सामने का नजारा देख कर मेरा दिल धक् से रह गया..

एक अजीब सी तीस उठने लगी....

सामने बीएड पर अन्य ! लेती हुयी थी...

बाकी सभी उसे घेरे हुए खड़े थे....

मेरे कदम अपने आप वहीँ दरवाज़े पर रुक गए...

मेरी आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं हो रही थी....

तभी माँ भागते हुए आ कर मेरे गले से लग गयी...

मेरे चेहरे को बेतहाशा चूमने लगी...

एक बार की सबकी निगाहें मुझ पर टिक गयीं..

माँ - कैसा है मेरा बचा..

तू ठीक तो है न...

तुझे कहीं चोंट तो नहीं लगी....

माँ बहुत कुछ बोले जा रही थी लेकिन

मैं खामोश खड़ा रहा....

माँ - क्या हुआ कुछ बोलता क्यों नहीं.....??

तभी डैड मेरे पास आये और मुझे हिलाते हुए....

डैड - बोल बीटा क्या हुआ...??

सब ठीक तो है न...??

मैं होश में आते हुए....

""नानी कहाँ हैं...??""

इतना बोलकर फिर से खामोश हो गया....

माँ - वो दूसरे वार्ड में है उनका ओप्रशन चल रहा है...

तू बैठ यहाँ पे...

तुझे कुछ हुआ तो नहीं..

जोरर से चिल्लाते हुए....

मैं - नानी कहाँ हैं....

अन्य! की ऐसी हालत किसने की....??

(
ये क्या चुतियापा है..

जो जवाब तुझे पहले से पता है...

इनसे क्यों पूछ रहा है...

जानना है तो उस बुढऊ को बुला...


वही है असले फसाद की जड़....)

मैंने उसे खामोश रहने का इशारा दिया.....!!

माँ - बीटा हमें खुद कुछ नहीं पता...

क्या और कैसे हुआ....

बस इतना जानते है की गुरुवार और अन्य के बीच लड़ाई हुयी थी...

फिर आगे क्या हुआ..

माँ जी कहाँ गयी,

इन सबका जवाब हमें नहीं पता...??

हमें तो अन्य बेहोशी के हालत में पड़ी मिली,

लेकिन गुरुवार कहीं नहीं दिखे....??

डैड - है बीटा, तेरी माँ सच कह रहीं हैं..

डीआरएस. का कहना है की अन्य को शॉक लगा है..

जिसकी वजह से वह बेहोश है...

तेरे आने पर तो हमेशा इसे होश आ जाता था...

लेकिन इस बार ऐसा क्यों नहीं हुआ....??

जैन का भी कुछ पता नहीं.....??

वो तेरे hi पास गया था मिला क्या....??

(
उसने फिर कुछ बोलना चाहा लेकिन मैंने फिर शांत करवा दिया....)

मैं - नहीं मेरी उनसे मुलाक़ात नहीं हुयी....

मुझे पता है वो कहाँ हैं....

आप सभी अन्य! को लेकर घर जाएं बाकी सब मैं देख लूंगा....!!

माँ - तू भी हमारे साथ चल न घर....

देख तो अपनी क्या हालत बना राखी है..

मैं - मैं सुबह तक घर आ जाऊंगा.....

मुझे एक बहुत जरुरी काम के सिलसिले में कहीं जाना है...??

डैड - अभी जाना जरुरी है क्या..

अभी हम सबको तेरी ज्यादा जरुरत है....

सबसे ज्यादा अन्य को ....!!

मैं - लेकिन मेरा अभी जाना जरुरी है...

मैं अब कोई काम अधूरा नहीं छोड़ना चाहता....!!

अब मैं चलता हु आप सब घर जाओ...!!

माँ - ये तो बता जा कहाँ जा रहा है....??

मैं - आदिगुरु के पास...

कुछ जरुरी सवालों के जवाब लेने......??

इतना बोलकर मैं वापस हॉस्पिटल के बहार आ गया..

अपनी गाड़ी में बैठ कर चल दिया जंगल की तरफ.....

मैं - Hello अंकल ! मैं आ रहा हु...

आप वापस घर जाओ...

बाकि मैं सब देख लूंगा....

जैन अंकल - ..........

गुस्से से खीजते हुए....

मैं - मैंने एक बार कह दिया न....

आप जाओ, और सबकी हिफाजत करो...

इतना तो आपसे हो जायेगा na...iss बार ??

इतना कह कर मैंने फ़ोन कट कर दिया....

मंजिल से बस 5 मं की hi दूरी पर था....

मैंने गाड़ी को साइड पे रोक दिया....

और वहीँ पास के एक पेड़ के निचे ध्यान में बैठ गया....

""कहो पुत्र कैसे याद किया....??""

प्रणाम गुरुवार !!

मैं - मेरे पास वक़्त काम है...

बस आप इतना बता दो की आप ने ये सब किश मकसद से किया है...??

इसके पीछे का राज़ क्या है...??

और है आपसे एक गुज़ारिश है बात को घुमा फिर के बताने के बजाये सीधा बताएं....??

आदिगुरु - मेरा जवाब अभी hi वही है...

बस अंतर इतना है की यह सब उस लाल धागे के टूटने की वजह से हुआ है..

जो की उस शैतान से लड़ाई के वक़्त अन्य की ऊर्जा के जागृत होने की वजह से हुआ था...!!

अन्य अब बिलकुल ठीक है...

उसे जल्द hi होश आ जायेगा...

वक़्त लगेगा पुनः वास्तविकता में आने में....

रही बात तुम्हारी नानी माँ की...

तो वो सही स्थान पर पहुँच चुकी है....!!

मैं - क्यों किया आपने ऐसा...

एक बेटे से आखिरी बार देखने का मौका तक छीन लिया..

चिटा को अग्नि देने का अधिकार भी...!!

आदिगुरु - जज्बाती मत बनो,

वजह तुम जानते हो....

यदि उनके शरीर का डाह संस्कार होता तो उनके अंदर समायी काली शक्तियां पूरे वातावरण को दूषित कर देती....

जिसका अंजाम बहुत दुखद होता...

जो उचित था वही मैंने किया....!!

मैं - तो अब इसका भी जवाब दे दीजिये...

की मैं इस पापी शैतान से कैसे पीछा छोडूँ....??

मैं जितना समझने की कोशिश करता हु..

उतना hi उलझता चला जा रहा हु....??

आदिगुरु - जो हो रहा है, उसे होने दो इस पर तुम्हारा कोई जोरर नहीं...

उसे अपना लो सब ठीक हो जायेगा...

भविष्य उज्जवल होगा.....!!

शायद अब तुम्हारे सभी प्रश्नो के उत्तर पूरे हो गए होंगे....

अब मुझे जाना होगा....!!

मैं - जैसा आप उचित समझे...

प्रणाम गुरुवार !!

मुझे आशीर्वाद दे की मैं इस परिस्थिति से जल्द बहार निकल सकूँ...

और एक नार्मल लाइफ जी सकूँ....!!

आदिगुरु - मेरा आशीर्वाद सदैव तुम्हारे साथ है...

बस एक बात का ख्याल रखना..

ईश्वर के प्रति अपना विश्वाश कभी टूटने मत देना....

मैं - ऐसा hi होगा.....!!

मैं - वापस धायण से उठ गया और अपनी मंजिल की तरफ चल दिया.....

मैं - उठ जा कुम्भ कारन की औलाद...

लो मैं फिरर ले आया तुम्हें एक और शिकार की तरफ...

जिसको भी मरना है मारो...

बस याद रहे चेयरमैन को कुछ नहीं होना चाहिए....

उसे मैं सजा दूंगा....!!

(
क्या बात है..

बहुत जल्दी समझदार बन गए...

मुझे तो लगा था हम दोनों की कभी नहीं बनेगी..)

मैं - अब जब तुम मेरे hi शरीर का हिस्सा बन चुके हो तो...

हमें एक होकर अपने काम को अंजाम देने की सोचना चाहिए,

न की एक दूसरे में उलझ कर रह जाएं...

(
शाब्बाश ! मैं भी तो एहि तब से समझने की कोशिश कर रहा हु..

चलो देर से hi सही...

मान तो गए..)

मैं - तो चलो अब कुछ धमाका हो जाये......

आ जाओ अपने रूप में.....

मैंने एक बार से अपना वही रौद्र रूप धरना कर लिया...

इस वक़्त मैं चेयरमैन के फार्महाउस के सामने खड़ा था...

बहार सिक्योरिटी बहुत ज्यादा टाइट दिख रही थी....

शायद आज की घटना के कारन था....

मैंने एक बार पूरी जगह को स्कैन किया....

मैं - क्या कहते हो फिरर खेल शुरू किया जाये.....

(
खेल शुरू क्या करना है...

शुरू हो चूका है सामने देखो)


मैंने जैसे hi सामने देखा,

मैं खुद को उन गुंडों के करीब पाया...

अचानक मुझे अपने सामने देख कर बौखला गए...

और मुझ पर फायरिंग करने लगे....

लगातार फायरिंग करते रहे...

हर तरफ शोरगुल मचने लगा....

जिससे अंदर बैठे सभी गुंडे भी बहार आ गए....

जब देखा की मुझ पर गोलियों का कोई असर नहीं पद रहा था...

तो मुझे गन से पीटने की कोशिश करने लगे....

बस एहि गलती कर दी....

मैंने एक की बन्दूक को पकड़ा....

मेरे छोटे hi गन पिघलने लगी....

मैंने पिघला हुआ फौलाद अपने एक हाथ में लिया...

और दूसरे हाथ से सामने वाले की गर्दन पकड़ ली...

जिससे उसका मुँह खुल गया....

मैंने सारा का सारा लावा उसके मुँह में भर दिया....

मेरे इस हरकत से सामने वाले की बोलती hi बंद हो गयी....

आँख से आंसू के बजाये गर्म पिघला लावा निकल रहा था....

उसकी हालत इतनी बुरी थी की वह दर्द में चिल्लाना चाहता था...

रोना चाहता था...

लेकिन सिवाय तड़पने के कुछ न कर सका

और वही पर दम तोड़ दिया....

अपने साथी की ऐसी हालत देख कर बाकियों के तो तोते hi उड़ गए...

किसी की भी हिम्मत न हो रही थी आगे आने की...

सब डर के मरे अंदर की तरफ भागने लगे....

मैं - इनको छोडो चेयरमैन के पास चलो...

पहले उसका हिसाब किताब पूरा किया जाये...

(
इतनी भी क्या जल्दी है..

पहले थोड़ा एन्जॉय तो कर लेने दो)


मैं सीधा फार्महाउस के अंदर घुश गया....

जो भी सामने आता उसको मौत के घात उतारते हुए...

हर एक कमरे की तलाशी लेने लगा...

लेकिन चेयरमैन कहीं नहीं नजर आया...

मैं जोरर से चिल्लाया...

कहा छिपा बैठा है डरपोक..

खुद को बहुत शक्तिशाली समझता था न...

तो आना सामने....

मैं भी तो देखु तेरी ताक़त.....??

मैंने आगे बढ़ते हुए एक गुंडे की गर्दन पकड़ ली....

मैं - जल्दी बता कहाँ है तेरा बॉस,

वर्ण मरने के लिए तैयार हो जा....??

गुंडा - मुझे छोड़ दो मैंने कुछ नहीं किया.....

वो वो बॉस..

फायरिंग की आवाज़ सुन कर बेसमेंट के रिश्ते से यहाँ से भाग गए हैं...

हहहह ः....

उस फत्तू बॉस के लिए इतनी इज्जत.....

मैं - एक शर्त पर छोड़ दूंगा...

पहले ये बता वो गया कहाँ है...??

गुंडा - वो मुझे नहीं पता....

बस इतना पता है वो राष्ट यहाँ के पहाड़ी इलाकों में निकलता है....

अब गक तो वो ाबहजत दूर जा चुके होंगे....??

मैं - फिर तो तू मेरे किसी भी काम का नहीं..

मरने के लिए तैयार हो जा.....

गुंडा - रुको रुको.....

वो बॉस, के भी कोई बॉस है...

अभी कुछ देर पहले वहां जाने की बात कर रहे थे.....

मैं - कौन सी जगह....??

गुंडा - हॉंक कोंग.....

अब मैं जॉन...

तुमने जो कहा वही मैंने किया.....??

मैं - कैसे जाने दू...

तुम्हारी तो आत्मा तक सदी हुयी है...

तुम्हारे हाथ बेगुनाहों के खून से रेंज हुए है....

खच खच की आवाज़ के साथ उस गुंडे के शरीर के दो टुकड़े हो गए...

वही जमीन पर तड़प तड़प कर मर गया......

"
"मेरी डिक्शनरी में माफ़ी नाम का कोई शब्द नहीं...""

""हर एक गुनहगार को उसके किये की सजा मिलेगी,

बचना है तो बुराई का साथ छोड़ दो,

वर्ण दुनिया छोड़ने के लिए तैयार हो जाओ...."'


""आ रहा हु मैं""

"हयान - एक शैतान""

_____________________

आज के लिए बस इतना hi....

--------

-------------

-------------------


थैंक्स फॉर रीडिंग एंड सुप्पोर्टस..... आपका दोस्त हयान..!!
 
Back
Top