Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan - Page 21 - SexBaba
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Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan



जो छत तोड़कर जलते हुए ऊपर गया था...

वो बुमलीन था...

वो आया था हयान पर काबू पाने...

लेकिन धागा बांधने के बाद हयान की वाइट एनर्जी और अन्य की वाइट एनर्जी के कारन...

उसे वजन से भागना पड़ा था...

जो की मैंने उसका डिटेल्स आगे दिया था कस्सदेया से बातों के दौरान...

जैसा की स्टोरी के टाइटल से पता चलता है...

इंसान या शैतान....

हयान के अंदर दो पर्सनालिटी है...

एक हयान तो दूसरा मास्क मन... जिसे धागा बांध कर रोका गया था...

शायद आपके डाउट क्लियर हो गया होगा...

अब बात करते है अपडेट की ..

ब्रूटल दिखने पर इस्सलिये ज्यादा ध्यान दिया क्युकी....

मुझे हयान के रौद्र रूप को दिखाना था...

हमेशा की तरह बहुत Hi शानदार रिव्यु...

थैंक्स सर जी..

फॉर कंटिन्यू रीडिंग एंड नीस सुप्पोर्टस...

Bas aईse hi Saath Banaye Rakhiyega..

नेक्स्ट अपडेट पोस्टेड ात पेज No. 373



..
 
हम्म टक्कर बराबर की थी...

लेकिन जब हयान ने अपना रूप बदला तो हयान का पलड़ा भरी हप गया....

अब बात करते है जख्मों की...

हयान को जख्म तो हुए लेकिन बाद में फिर से भर गए...

गायब होने का करना ये नहीं की वह गोली से बचना चाहता था..

बल्कि वह देकर उनके पीछे आना था...

वैसे मैंने हयान की खूबियां बयां नहीं की..

वह क्या क्या कर सकता..

बस परिस्थिति के अनुसार hi दिखाया है....

हमेशा की तरह शानदार.. जबरदस्त...

रिव्यु...

थैंक्स लास्ट बेंचर्स Sahab...for ब्यूटीफुल रिव्यु...

एंड कंटिन्यू रीडिंग एंड शानदार सुप्पोर्टस...

बस आजसे hi साथ बनाये रखियेगा..


नेक्स्ट अपडेट पोस्टेड ात पेज No. 373
 
चेयरमैन2 को हयान के रौद्र रूप ने मारा..

जिसे अब तक मास्क मन के नाम से जानते आये हैं...

चेयरमैन कहा गया नेक्स्ट उजड़ते ंविं पता चल जायेगा..

थैंक्स भाई...

फॉर कंटिन्यू रीडिंग एंड नीस सुप्पोर्टस...

बस ऐसे hi साथ बनाये रखियेगा..


नेक्स्ट अपडेट पोस्टेड ात पेज No. 373
 
समझ नहीं आ रहा मुझसे गक्ति कहा हुयी...

जिसकी वजह से रीडर्स 3 पर्सनालिटी क्रीट कर रहे...

मैंने तो सिर्फ दो hi दिखाया..

एक हयान दूसरा मास्क Man(Jo हयान का रौद्र रूप है... जो अब तक आज़ाद घूम रहा था....)

हम्म हयान को सीखना होगा अपने दूसरे रूप से...

हमेशा की तरह शानदार रिव्यु भाई...

थैंक्स भाई...

फॉर कंटिन्यू रीडिंग एंड सुप्परब सुप्पोर्टस...

बस ऐसे hi साथ बनाये रखियेगा..




नेक्स्ट अपडेट पोस्टेड ात पेज No. 373
 
Update..No..66*

MeGa..UpDaTe

Abb..Takk...

अब तक आपने पढ़ा हयान अपनी फॅमिली से मिलने हॉस्पिटल जाता है..

जहाँ अन्य बेहोशी की हालत में थी..

आदिगुरु से मिलने को कहकर वापस चेयरमैन के फार्महाउस आ जाता है..

जहाँ वह क़त्ल - इ - आम मचता है....


लास्ट में पता चलता है की चेयरमैन एक बार फिर बचकर भाग चूका है....!!

Abb..Aage...

मैं - देखो मैंने तुम्हारी हर एक शर्त को मान लिया है...

जैसा तुम चाहते हो वैसा करने की आज़ादी भी दी है...

क्या तुम मेरी एक बात मानोगे....??


(मैं तो तुम्हारा शुक्रगुज़ार हूँ,

ये भी कोई पूछने की बात है, कहो क्या चाहते हो...??)


मैं - मैं चाहता हु की...

मेरी फॅमिली मेंबर के सामने तुम एकदम खामोश रहो...

मैं नहीं चाहता की तुम्हारी किसी भी हरकत से मुझे उनके सामने शर्मिंदा होना पड़े...

सभी मुझे Be-inteha प्यार करते है,

और मैं भी सबकी इज्जत करता हु...

सो मेरी मान मर्यादा का ख्याल रखना.....!!

कुछ देर यूँही ख़ामोशी छायी रही...


(मन में - ः ः एक शैतान से ऐसी उम्मीद रखना.. कितनी बड़ी बेवकूफी है,

मेरा तो जन्म hi तुम्हें बुरे रस्ते पर ले जाने के लिए हुआ है...

और मेरा पहला कदम तुम्हारी इज्जत को ख़ाक में मिलाना है...)


मैं - क्या हुआ किश सोंच में पद गए....

क्या तुम्हें यह शर्त मंजूर नहीं.....


(कुछ नहीं, अब तुमने मेरे लिए इतना कुछ किया है,

मेरे लिए तो यह बहुत छोटा सा काम है..

मैं खुद को शांत रखूँगा)


मैं - बहुत बहुत शुक्रिया दोस्त..

मुझे तुमसे एहि उम्मीद थी...


(मन में - शुक्रिया तो मैं ऐडा Karunga....Ek दिन,

शरीर तुम्हारा होगा.... दिमाग मेरा...

बहुत मज़ा आएगा...

....ः ः)


मैं - क्या हुआ दोस्त इतने खामोश क्यों हो गए....

अभी तो घर पहुंचने में वक़्त है....


(कुछ नहीं, वो क्या है शिकार करने के बाद मुझे आराम करना पसंद है..)

मैं - हम्म ! अच्छा ये बताओ....

मैं तुम्हें किश नाम से पुकारूँ....??


(शैतान, मास्क मन, नकाब पॉश, खुनी दरिंदा.... मेरे कई नाम है.. जो पसंद हो, उसी नाम से बुला लो..)

मैं - ये सब नाम बेकार....

इनसे बुराई की बू आती है..

हम्म याद आया तुम्हें वो रिंगटोन बहुत पसंद है न.... Hello हनी बन्नी...

तो आज से तुम्हारा नाम हनी ! होगा...!!


(हहह एक शैतान का नाम हनी...

जरा सा भी सुईठे नहीं करता...)


मैं - इसी लिए तो हनी ! ठीक रहेगा...

ऐसा लगेगा जैसे कोई अपनी मेहबूबा को बुला रहा हो....


(ः हां नीस जोके बीआरओ ! चलो ठीक है फिर एहि नाम सही)

ऐसे hi मैं खुद के अंदर छिपे शख्श से बात करते हुए घर पहुँच गया....!!

मेरी कार को देखते hi तुरंत गेट कीपर ने दरवाज़ा खोला....

बहुत दिनों के बाद आना हुआ था कबीरा पैलेस में....

बहुत hi ख़ूबसूरत नज़ारा लग रहा था....

इस वक़्त सुबह के 7 बज रहे थे....

चिड़ियों की Chah-Chahat, सूरज की की किरणे घर की सोभा को और बढ़ा रही थी....

गेट खुला हुआ था मैं सीधा हॉल में जा पहुंचा,

जहाँ Mom-Dad पूजा में बैठे हुए थे...

मैं भी जाकर लार्ड को नमन करके शीश झुका कर जैसे hi बैठने को हुआ....

मुझे एक झटका लगा और मैं पीछे जा गिरा.....

मैं और हनी मन hi मन बातें करने लगे....

(हनी - क्या कर रहा है..

क्यों मुझे मारने में लगा है.....

तू इतना न समझ कैसे हो सकता है...)

मैं - क्यों क्या हुआ....??


(हनी - तू सच में बेवक़ूफ़ है...

या फिर दिखावा करता है...

क्या कभी गॉड के सामने किसी शैतान की उपस्थिति देखि है..)


मैं - पर मैं शैतान नहीं....

(हनी - तू नहीं तो क्या हुआ...

मैं तो हूँ...!!

तू मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकता...

जब तक मैं तुझ में समाया हु)


मैं - लेकिन मैं तो डेली पूजा करता हु...

और आगे भी करूँगा....

अगर तुम्हें कोई प्रॉब्लम है तो खुद को अंतर्ध्यान कर लो....


(हनी - ऐसा पॉसिबल नहीं...

एक शौतन के किये यह बहुत दुखदयी है..)


मैं - ठीक है अच्छा...

मैं इसका कोई हल खोजता हु...

तब तक वेट कर....

वैसे तू बुराई का रास्ता छोड़ क्यों नहीं देता...??

जैसा मैं कहता हु वैसा कर...??


(हनी - मैं बुरा कहा हु..

मैं तो बस जालिम हु...

जुल्म करने वालों के लिए....)


मैं - अगर बुरा नहीं तो... फिर ईश्वर से डरता क्यों है..??

वैसे आज एक तेरी कमजोरी पता चल गयी...

इससे मुझे बहुत फायदा होगा....!!


(हनी - ज्यादा बक बक मत कर...

वर्ण मेरा दिमाग खिसका तो तेरी लंका लगनी तय है...)


तभी माँ मेरे पास आ गयी और मुझे होने सीने से लगा लिया...

मैंने भी उन्हें G.M.wish किया....

माँ - आ गया मेरा बचा....

कैसा है तू...??

जा डैड के साथ पूजा में बैठ जा....

मैं - ठीक हु माँ..

नहीं माँ, अभी नहीं,

Naha-dhokar पूजा करूँगा....

माँ - चल ठीक है..

ाचा आ जा तिलक लगवा ले....

मैं हिचकते हुए माँ के सामने थोड़ा झुक गया.....

जैसे hi माँ ने तिलक लगाया....

मेरी हलकी सी चीख निकल गयी...

माँ - क्या हुआ बीटा....

अभी तुम्हारी दर्द से सिसकी निकली...

कही चोट लगी है क्या...??

मैं - नहीं माँ, मैं ठीक हु...

मैंने तो कोई आवाज़ नहीं की....

माँ - ये मुझे आज हुआ क्या है...

अभी कुछ देर पहले ऐसे लगा...

की जैसे तू मेरे करीब आया था...

फिर तेरे दर्द में होने की आवाज़ आयी...

मैं - आप भी न माँ..

कुछ भी सोचती हो... इतनी भी फ़िक़र मत किया करो...

अब मैं बड़ा हो गया....

माँ - बचे चाहे जितने भी बड़े हो जाये..

एक माँ के लिए, बचे हमेशा बचे hi होते हैं...

मैं - Okay Okay..

मैं ठीक हु...

अब मुझे जाने दो फ्रेश भी होना है....

माँ - ठीक है...

जल्दी से फ्रेश होकर आ मैं ब्रेकफास्ट लगाती हु...

Okay माँ ! बस 10 मं में आता हु...

इतना कहकर मैं अपने रूम की तरफ चल दिया....

जैसे hi मैंने रूम का दूर खोला.....


(हनी - ओह्ह माय गॉड ! क्या मस्त आइटम है बे....??

माँ कसम सुबह सुबह अप्सरा के दर्शन हो गए....)


मैं - चुप बे...

आगे कुछ भी मत बोलना....

वर्ण तुझे बहुत महंगा पड़ेगा...??.

दरअसल सामने जिन ! मिरर के सामने बाल बना रही थी...

जुल्फें बिखरी हुयी..

हल्का गीला बदन...

जैसे अभी अभी नाहा कर आयी हो..

पिंक ड्रेस में बहुत hi ख़ूबसूरत लग रही थी....

एक पल के लिए मेरी भी आँखें उस पर ठहर सी गयी थी.....

तभी जिन ! पलटी और मुझे गेट पर खड़ा हुआ देख,

मेरे तरफ भाग कर आयी....

और मुझे हुग कर लिया....


(हनी - िस्सशहठ मारा डाला रे....)

जिन - गुड मॉर्निंग हयान !

तुम कब आये....??

क्या हुआ कहीं चोट लगी है क्या.....??


(हनी - कुछ देर पहले तक तो नहीं लगी थी... लेकिन अभी अभी पूरा सीना छलनी कर दिया...)

जिन - तुम ने कुछ कहा क्या....??

मैं - नहीं तो...

मैं तो उस वक़्त hi आ गया था,

जब तुम अपने हुश्न के जलवे उस आइना के सामने बिखेर रही थी....

आज तो बिलकुल क़यामत लग रही हो..

मेरी जंगली बिल्ली...


(हनी - वह रे... तुम करो तो चमत्कार...

हम करे तो बलात्कार..)


मुझे अजीब निगाह से देखते हुए....

जिन - कुछ बदले बदले से लग रहे हो...

सच बताओ सब ठीक है न...??

मैं - हम्म सब ठीक है...

अच्छा ये बताओ..

बाथरूम में कौन है..??

मुझे भी फ्रेश होना है....

जिन - महारानी जी नाहा रही है...

अभी टाइम लगेगा..

दूसरे रूम में चले जाओ...

तभी माँ की आवाज़ आयी जो नाश्ते के लिए बुला रही....

मैं - ठीक है जिन ! तुम जाओ मैं अभी आता हु.....

अच्छा ये दुपट्टा दाल लो..

वर्ण आज सब घायल हो जायेंगे.....

जिन - धत्त पगलू..

इतना कहकर शरमाते हुए जिन भाग गयी...

जैसे hi जिन बहार निकली वैसे hi अन्य! ने बाथरूम का दूर खोला....

शायद उसे मेरे आने का अहसास हो चूका था...

जैसे hi मेरी अन्य! पर नजर पड़ी..


धम्म.. अह्ह्ह्ह...

दूर हटो मुझसे....


मैं दूर जा गिरा और दीवार से जा टकराया...

मेरे पूरे शरीर में आग लग गयी....

मैंने एक बार फिर से अपना रौद्र रूप धारण कर लिया.....

तभी इमरजेंसी फायर वाटर पंप से पानी मुझ पर गिरने लगा....

लेकिन मेरे शरीर के आग को न बुझा पायी....

अन्य! तो यह सब देख कर एकदम घबरा गयी...

घबराहट में जोरर से चिल्लाने लगी...

ये तो अच्छा था की रूम साउंड प्रूफ था,

वर्ण अभी सब के सब इकठ्ठा हो जाने थे....

अन्य ! को कुछ समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे....

मेरे पास आने को हुयी मैंने उसे तेज़्ज़ धक्का देकर खुद से दूर कर दिया....

अन्य! भी दिवार से जा टकराई...

दर्द से चीखते हुए...

मैं - बाथरूम के अंदर जाओ.....

अन्य ! तुरंत हद बड़ाहट में बाथरूम में चली गयी....

और दूर लॉक कर लिया....


(हनी - साले चूतिये..

तू तो मेरा अस्तित्व hi मिटाना चाहता है...??

बताया क्यों नहीं बाथरूम में अन्य है...)


तभी अन्य....

चिंता भाव से चिल्लाते हुए...

अन्य - हय्यू ! ये सब क्या है....

तू ठीक तो है न....??

मैं अब संभल चूक था....

मैं - है अब सब ठीक है...

जब तक मैं न कहूं आप बहार मत आना....

अन्य - ठीक है नहीं आउंगी...

पहले तू ये बता..

ये सब है क्या....??

मैं - सब बताऊंगा...

थोड़ा वक़्त दें मुझे....


(जवाब दे बे....

क्यों कर रहा मेरे साथ ऐसा...

पहले मंदिर..

फिर अन्य.... होल्डर ऑफ़ वाइट एनर्जी...)


मैं - तूने मुझे कुछ भी नहीं बताया....

मैं तो इन सब बातों से अनजान था....

तेरी वजह से मुझे भी दर्द सहना पद रहा....

अपनी अन्य ! को धक्का देना पड़ा....

चोंट लग गयी होगी उनको....


(हनी - तुझे उसके चोंट की पड़ी है...

यहाँ मेरा अस्तित्व दांव पे लगा था....

क्या तुझे उस बुढऊ ाफिगुरु ने कुछ बताया नहीं क्या...??)


मैं - इज्जत से नाम लो उनका... मुर्ख !

नहीं उन्होंने मुझे कुछ नहीं बताया..

बस इतना कहा की जो हो रहा hai....Hone दो...


(हनी - इस बुढऊ की तो..

पिछवाड़े में बोम दाल दूंगा...

एक बार मिले तो )


मैं - बस एक और भी अपशब्द कहा उनके बारें में तो...

मैं बीच में hi रुक गया...

अचानक रूम में रौशनी फ़ैल गयी...

तभी एक पल के लिए समय चक्र फिर से रुक गया....

"कहो पुत्र कैसे याद किया...??""


(हनी - बहार आने दे Mujhe.....Nikaal मुझे बहार....

नहीं छोडूंगा....

इसकी तो...)


मैं - प्रणाम गुरुवार !

आदिगुरु - आखिरकार मिल hi गया koi....Tumhari भी टक्कर का..

तो कैसा रही पहली मुलाकात ...??


हनी - बहुत बड़ा गेम खेल गया तू बुढऊ...

नहीं छोडूंगा तुझे...


आदिगुरु - कल भी मुर्ख था... आज भी मुर्ख है....

मैंने तुझे एक नया जीवन दिया...

क़ैद से मुक्ति दिलाई...

और तू है की मुझे हीबुरा कह रहा....??


हनी - इसमें भी तेरा कोई फायदा होगा..

जो तूने मुझे हयान के शरीर से मुक्ति दिलाई....

और मुझे शिक्षा देने के लिए अपने पास क़ैद कर रखा..

वो तो अच्छा हुआ मैं मौका देख कर भाग निकला....


मैं दोनों की बातें ख़ामोशी से सुनने लगा...

और बातों को समझने की कोशिश करने लगा...

आदिगुरु - अगर तू वहां से भागता नहीं..

तो शायद आज वाइट एनर्जी का सामना करने से डरता नहीं...??

मुझसे अब खामोश न रहा गया...

मैं - गुरुवार ! क्या आप विस्तार से बताएँगे..

की ये सब किश बारे में है...??

आदिगुरु - याद है वो दिन..

जब मैं तुम्हें सोनपुर से अपने गृह ले गया था...

तभी मैंने तुम्हारे शरीर से वो लाल धागा तोड़ कर इस्को आजाद करके खुद के पास क़ैद कर लिया था..

ताकि इसे शिक्षा दे सकू...

और इस मुर्ख को भविष्य के लिए तैयार कर सकूँ...

जब उसके आने का समय होगा....??

जिससे तुम्हारा दूसरा अंश भी मज़बूत हो सके...

लेकिन यह मुझे hi धोका देकर भाग गया....

तभी मैंने दूसरा रास्ता चुना....


और वापस तुम्हारे शरीर में समाहित कर दिया....

मैं - कौन आएगा...

किस्सके लिए हम दोनों को तैयार कर रहे....??

आदिगुरु - अभी उसके बारे में जानने का समय नहीं आया...

बस इतना जान लो एक तूफ़ान आने वाला है..

जो सम्पूयर्ण मानव जाती का विनाश कर देगा...!!

हनी - बस बस एहि वजह थी मेरे भागने की...


कभी कोई पूरी बात नहीं बताया...

बस अँधेरे में रख कर मुझसे अपना काम निकलवाने की सोंच रहा..

मैं - गुरुवार ! मुझे आपकी बातों पर पूरा यक़ीन है..


कुछ तो वजह जरूर होगी ऐसा करने की..

लेकिन अब मैं मुसीबत में फंस चूका हु..

इसकी वजह से मेरा जीना दूभर हो जायेगा...

कोई तो राष्ट बताये,

जिसके जरिये मैं इसे कण्ट्रोल कर सकू..


वर्ण यह शैतान मुझे भी अपनी तरह बना देगा.....

हनी - ऐसा करने की सोचना भी मत...

वर्ण इसका अंजाम बहित बुरा होगा....??

आदिगुरु - और जो तुम सोंच Rahe....Uska क्या...??


मैं - कैसी सोंच गुरुवार...

आदिगुरु - यह तुम पर काबू पाना चाहता...

तुम्हारे जरिये अपने काळा कारनामों को पूरा करना चाहता है...

कुछ समय पहले भी इसने क़त्ल इ आम मचाया था..

मेरी शक्तियों के डैम पर...

वो तो अच्छा हुआ..

एक शक्ति रहित आत्मा बन गया...

जिसकी वजह मेरी शर्त मैंने को तैयार हो गया...!!

गुरुवार की बातें सुनकर मैं एक डैम शॉक हो गया....

मैं - मेरा hi अंश होकर मेरे hi खिलाफ जाने की जाल सजी कर रहा....

क्यों कर रहे ऐसा...??

आदिगुरु - अब ये नहीं बोलेगा...

मैं - बास बहुत हुआ मुझे उपाय बताये...

आदिगुरु - उपाय तुम्हें खुद खोजना होगा...

मैं क्रिया बता सकता हु..

जिसके जरिये ये कुछ हद्द तक अपनी मनमानी नहीं कर पायेगा...

वैसे भी अन्य के सामने आते hi अब यह खुद बखुद कण्ट्रोल में आ जायेगा...

मैं - बहुत बहुत धन्यवाद गुरुवार ! आपने मेरी परेशानी hi ख़त्म कर दी....

आदिगुरु - ख़त्म नहीं..

कुछ हद्द तक काम की है..

परेशानियां तो अब आणि शुरू होगी...

जितनी जल्दी हो सके इस पर काबू पाओ....

और अपने कर्मों की तरफ अग्रसर हो..!!

मैं -जैसा आप कहें गुरुवार!

आदिगुरु - इसे अपने सीने में मॉल लो..

महाकाल का आर्शीवाद है इसमें..

इससे तुम्हें मंदिर और अन्य के सामने जाने में कठिनाई नहीं होगी..

अब मुझे जाना होगा...

मैंने आगे बढ़कर गुरुवार के पेअर छुए और आशीर्वाद लिया...

इसी के साथ गुरुवार गायब हो गए..


उनके जाते hi समय चक्र भी शुरू हो गया...!!

हनी - देख भाई.. मई तेरा hi अंश hi भला तेरे खिलाफ षड़यंत्र कैसे रच सकता hi...Jubki तेरे जीवन से hi मेरा जीवन भी जुड़ चूका है...

वो बुढऊ हमेशा दो तरफा बातें करता है..

हर बार एक नया बहाना और कारन खोज लता है...!!

मैं - तुम्हारी बात सही भी हो सकती है...


लेकिन बातें कभी झूटी नहीं होती....

उन्होंने हमेशा सबका भला चाहा है...

मुझे उनकी बातों पर पूरा यक़ीन है..

चाहे कारन जितने भी बदले...

लेकिन मेरा विश्वाश कभी नहीं बदलेगा....!!

हनी कुछ बोलने वाला था की....

तभी अन्य ! चिल्लाई...

अन्य - इतनी देर क्यों लग रही..

बता न क्या बात है,

वर्ण मैं बहार आ रही हु....

मैं - बस 1 मं और उसके बाद आप बहार आ जाना...

अन्य - Okay... ओनली 1 मं..

मैं गुरुवार के द्वारा दी गयी राख को अपने हाथ में लेकर मलने के लिए होता हु की....


हनी - ऐसा मत करो...

अभी वक़्त है मेरी बात ओर यक़ीन करो....


मैं - मुझे तुम्हारी बात पर यक़ीन है,

मैं ये तुम्हारे भले के लिए कर रहा..

वर्ण हम दोनों अन्य का सामना नहीं कर पाएंगे...

इतना बोलकर मैं राख को अपने सीने में मलने लगता हु...

मेरे ऐसा करते hi...

मेरे सीने में एक तेज़्ज़ दत्ड़ उठने लगता है...

मैं खुद का आंतुलान खो बैठता हु....

जमीन में गिर्र पड़ता हु

और वही लेते लेते दर्द से तड़पने लगता हु......

मैं और हनी दर्द में चीखने लगते है...

मेरी चीख सुन कर अन्य ! से और बर्दाश्त नहीं होता...

वह दरवाज़ा खोलकर बहार आ जाती है....

मुझे देख कर एक डैम हैरान परेशां हो जाती है....??

_________________________


आज कलिये बस इतना hi..

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लाइक्स, कमैंट्स,
वोट्स और रिव्यु का रखना dhyan....Aapka दोएत हयान..!!
 
Update..No..67*

MeGa..UpDaTe

Abb...Takk

गुरुवार! द्वारा दिए गए आशीर्वाद रुपी राख को मैं अपने सीने में मलने लगता हु...

मेरे ऐसा करते hi...

मेरे सीने में एक तेज़्ज़ दर्द उठने लगता है...

मैं खुद का संतुलन खो बैठता हु....

और जमीन में गिर्र पड़ता हु....

वही लेते लेते दर्द से तड़पने लगता हु......

मैं और हनी दर्द में चीखने लगते है...

मेरी चीख सुन कर अन्य ! से और बर्दाश्त नहीं होता...

वह दरवाज़ा खोलकर बहार आ जाती है....


मुझे देख कर एक डैम हैरान परेशां हो जाती है....??

Abb...Aage...

रख मलने के कारन मेरा पूरा शरीर एकदम कला पद गया था...

जिसे देख कर अन्य ! हैरान और परेशां हो गयी....

मौ दर्द से बिलख रहा था की तभी....

अन्य ! ने आगे बढ़ कर मेरे दाहिने हाथ को थाम लिया...

और अपनी हीलिंग पावर के जरिये मुझे दर्द से छुटकारा देने की कोशिश करने लगी...

अन्य! के ऐसा करने से मुझे दर्द से रहत मिलने लगी....

और धीरे धीरे मैं नार्मल होने लगा....

कुछ hi देर में मेरा शरीर फिर से पूर्व अवस्था में आ गया....

लेकिन मेरा बयां हाथ अभी भी वैसा hi कला रहा....

मेरे बाएं हाथ पे कोई प्रतिक्रिया न होते देख अन्य! ने उसे भी थाम लिया...

लेकिन लेफ्ट हैंड पर कोई प्रभाव न हुआ अन्य ! के हीलिंग पावर का....

चिंता दिखते हुए...

अन्य - हय्यू ! कुछ बोलेगा भी,

ये सब क्या हो रहा है....??

मैं - मुझे भी कुछ नहीं पता...

मैंने तो बस वही किया जैसा गुरुवार ! ने कहा था....??

अन्य - क्या कहा था गुरुवार ने..??


कुछ समझायेगा भी...??

मैं - बाद में बताऊंगा..

पहले इसे ठीक तो करने दो....

तभी निचे से माँ की फिर से आवाज़ आयी...

ब्रेकफास्ट लग चूका था...

माँ की आवाज़ सुनकर मैं परेशां हो गया...

कुछ समझ नहीं आ रहा था की क्या करू....??

मैं - हनी ! क्या तुम बता सकते हो ये सब क्या हो रहा है मरे साथ...??

पर कोई आवाज़ न आयी....

मैं - क्या हुआ..

कुछ बोलेगा भी....

चुप क्यों है...??

अन्य - ये तू किस्से बात कर रहा है...??

मेरे आलावा कोई भी तो नहीं....

और ये हनी कौन है..??

मैं - जिसकी वजह से ये सब हो रहा...

उसी बात करने की कोशिश कर रहा हु...

अन्य - क्या बोल रहा है....

क्या कर रहा है...

मेरे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा...

ठीक से बताएगा भी क्या हुआ है.....

तभी माँ रूम के तरफ आते हुए...

माँ - तुम दोनों क्या कर रहे इतनी देर से...

कितनी देर से बुला रही हु....

माँ को आता देख मैं घबरा गया...

और तुरंत बाथरूम में घुश गया...

रूम ने दूर नॉक करते हुए...

माँ - क्या कर रहे हो तुम दोनों..

जो अब तक नाश्ते पे नहीं आये....

दूर खोलते हुए....

अन्य - बस अभी रेडी हुयी हु...

हय्यू! अभी भी बाथरूम में है...!!

माँ - बेतु ! और कितनी देर लगी...

सब वेट कर रहे ...

मैं - माँ बस 2 मं में आया....

आप दोनों चलो....

माँ - ठीक है..

बस 2 मं hi..

उससे ज्यादा नहीं....

इतना कह कर माँ और अन्य! बहार चके गए .....

मैं भी फटाफट रेडी हुआ...

और एक फुल शर्ट और जीन्स पहन लिया.....

कुछ हद्द तक तो....

कालापन छिप गया था..

लेकिन हथेली के ुवार अब भी कालापन था...

उसको छिपाने के लिए मैंने हाथ पे रुमाल बाँध ली और चल दिया नाश्ते की टेबल पर.....

सभी लोग नाश्ते की टेबल पे जमा हो चुके थे....

मैंने सब को G.M. विश किया और अपनी खली कुर्सी पर बैठ गया.....

सब कुछ नया नया सा लग रहा था.....

लेकिन एक खालीपन सा महसूस हो रहा था.....

माँ, डैड, मसि, मौसा जी, अखिल भाई, जैन अंकल, माहि दी, रिया मुसी, जिन , और अन्य! सभी मौजूद तजे टेबल पर सिवाय नानी के.....

बस उन्ही की कमी खाल रही थी....

तभी डैड बोल पड़े...

डैड - मुझे लगता है...

हमें इस कुर्सी को हटा देना चाहिए....

इसे देख कर माजी की कमी महसूस होती रहेगी....

डैड की बात सुनकर सब उदास हो गए.....

मौसा जी - सुबह सुबह तुम भी क्या लेकर बैठ गए....

उसे वैसा hi रहने do..Ise देख कर उनकी याद तो बानी रहेगी....

होनी को कोई नहीं ताल सकता...

जो भी होता अच्छे के किये hi होता है..

बस एहि सोंच रख कर आगे बढ़ जाना चाहिए...

""जैसा हम सोंचते है.. वैसा hi हो ऐसा कोई जरुरी नहीं..

पल भर ज़िन्दगी का ठिकाना नहीं...

और हम क्या क्या प्लानिंग करते रहते है..""

दरअसल टेबल सिटींग अरेंजमेंट सोनपुर के जैसे hi करने को मैंने hi कहा था...

पर ऐसा भी हो सकता है...

ये मैंने सोंचा न था....??

ऐसा सबको उदास होता देख मुझसे देखा न गया....

मैं - मेरे ख्याल से नाश्ता ठंडा हो रहा है...

अगर ऐसे hi सब मुँह लटकाये बैठे रहे तो इतने जायकेदार आलू के पराठे का टास्ते बदल जायेगा.....

मुझे तो बहुत जोरर से भूख लगी है...

अब मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा...

जबकि मेरी फवौरीते डिश सामने राखी हो....

वो भी माँ के हाथ के....

मेरी बात सुनकर एक बार फिर से सबके चेहरे पर मुस्कान वापस लौट आयी....

सब कुछ भूलकर सभी नाश्ता करने लगे.....

एक निवाला खता हुए...

मैं - वाओ माँ ! आपका भी जवाब नहीं..

कितना टेस्टी है.....??

रिया मौसी - ोये.. चपडगंजु !

तेरी अम्मा ने नहीं....

मैंने बनाया है...??

मौसी की बात सुनकर मुझे खांसी आ गयी.....

और मैंने पानी के लिए अपना हाथ आगे बढ़ा दिया....

बीएस एहि गलती कर दी मैंने.....

माँ अपनी कुर्सी से उठाकर पानी लेकर मेरी तरफ आयी और मुझे पानी पिलाते हुए....

माँ - बटेऊ ! ये तेरे हाथ पे चोंट कैसे लगी....?~

मेरे हाथ को देख कर एक बार फिर सबका नाश्ता रुक गया....

माँ की बात सुनकर मैं एकदम हड़बड़ा गया.....

हिचकते हुए....

मैं - कुछ नहीं माँ...

वो बस जरा सी चोंट लग गयी थी....

माँ - मुझे पता था की तुझे कहीं न कहीं चोट जरूर लगी है...

लेकिन तू मुझसे झूट बोलकर निकल गया.....

मैं - बस थोड़ा सा कट था...

इस्सलिये सोंचा क्यों आपको परेशां करूँ....

माँ - चुप एक डैम चुप...

ला हाथ मुझे देखने दे....

माँ मेरा हाथ पकड़ कर रुमाल हटाने लगी....

मैं दिल hi दिल गॉड से प्रे करने लगा....

की बस एक बार बचा लो....

वर्ण सब को क्या जवाब दूंगा.....

जैसे Hi रुमाल हटाया....

माँ - मेरा हाथ झटके हुए...

छी... कितना गन्दा है...??

मैं भी अपना हाथ देख कर एकदम शॉक हो गया.....

कुछ ऐसा hi हाल अन्य का भी था.....

माँ - हयान ! ये कैसा मजाक है...

तुमने तो मुझे एकदम से डरा hi दिया था...??

मैं - वो वो माँ...

बस ऐसे hi बनवा लिया...

माँ - ऐसा भी कोई बनवाता है.... टैटू..

कितना डरवाना और भद्दा दिख रहा है....

माहि दी - है.. भाई.. एकदम बेकार दिख रहा है..

पूरा हाथ ख़राब करवा लिया....

मैं भला क्या किसी को जवाब देता...

जब मुझे hi अभी अभी पता चला इसके बारे में....

डैड - अच्छा जाने भी दो सब....

पहले नाश्ता तो कर लो...

मैंने रहत भरी साँस ली...

और नाश्ता करने लगा...

पर मैं खुद हैरान था की अचानक ये टैटू कहाँ से बन गया.....

पहले तो पूरा हाथ hi कला था....

अब ये सुर्प्रिसिंग डेमों टैटू....

वो भी इतना डेंजरस....

जो किसी डरावना शैतान की तरह दिख रहा था....

अन्य! भी मुझे सवालिया नज़रों से देख रही थी...

जैसे पूछना छह रही हो ये सब कैसे हुआ...??

बीते दिनों से लगातार सरप्राइज पे सरप्राइज मिलते आ रहे किश किश के बारे में जवाब दू....

मैंने भी इशारों से बाद में बताने को कह दिया....

एहि सब सोंचते हुए मैंने नाश्ता फिनिश किया.....

अखिल भाई - वैसे हयान ! टैटू बहुत कूल है...

मुझे बहुत अच्छा लगा....

माँ - नहीं एक भी अच्छा नहीं....

आज hi जाकर इसे मितवा कर आओ.....

इतने Komal.Hathon में ये भयानक चीज़ अच्छी नहीं लगती....

डैड - तुम भी छोटी सी बात का बतंगड़ बना देती हो....

अब बनवा लिया है तो रहने दो....

बाद में मिटा देगा....

अन्य - Okay टाइम आउट !

मेरी बात पर ध्यान दे....

मैंने इंटरनेट पे यहाँ के टॉप 5 इंस्टीटूट्स सर्च किये...

जिसमें से मुझे माहि, और जिन को दित सबसे बेस्ट लगा....

सो हमने डीडे किया है की हम सब एक साथ वही एडमिशन लेंगे...

किसी और की कोई रे हो तो बताएं...??

मैं - अब जब तुम्हें पसंद आ गया है तो मुझे भी कोई दिक्कत नहीं.....

आप क्या कहते हो अखिल भाई....??

अखिल भाई - मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं...

मेरे ख्याल हम सबको एक साथ hi किसी सोल्लगे में एडमिशंस लेना चाहिए...!!

माहि दी - तो फिर दित इस दोने....

डैड - अब जब सबने देसिसिओं ले hi लिया है..

तो हमें भी कोई ऐतराज़ नहीं.....

वैसे एडमिशन कब से स्टार्ट हो रहे....??

माहि दी - नेक्स्ट 4 डेज में .....!!

डैड - ठीक है तब तक सब प्रेपरेशन कर ले....

अन्य - वो सब तो हो जायेगा...

पहले आप हमारा सेर्टिफिकेट अपने कॉलेज निकलवा दे....

डैड - मार्कशीट तो है न तुम तीनो के पास..

बस डिग्री hi तो चाहिए..

वो तो एक कॉल पर hi प्रिंसिपल सर तुरंत भेज देंगे.....

मैं - रहने दो डैड..

हम खुद जाकर ले आएंगे.. इसी बहाने अपना इंस्टिट्यूट भी देख आएंगे.....

अन्य - मेरा भी मन बहुत है वहां जाने का कभी गए भी नहीं हम...

डैड - तो इसमें कौन सी बड़ी बात है...

वैसे भी आज तुम सबका सिटी घूमने जाने का प्लान था...

सो उसी तरफ से कॉलेज भी हो आना....

माँ - जैन अंकल को साथ ले जाना...

तुम लोग पहली बार जा रहे हो न...

डैड - जैन, रश्मि दी, विजय भाई... और तुम्हारी माँ मेरे साथ आज कंपनी चल रहे...

सो तुम सब दादू ! के साथ चले जाना....

याद रहे दादू किसी भी बात से इंकार मत करना....

उनके इंस्ट्रक्शन को hi फॉलो करना कोई अपनी मनमानी नहीं करेगा...

(दादू - डैड का ख़ास ड्राइवर है)

अन्य - Okay डैड....

माँ - तो चलो सब रेडी हो जाओ.....

जाने के लिए....

सुबह 8.30 बज रहे थे....

सभी अपने अपने कमरे की तरफ चल दिए और रेडी होने लगे.....

रेडी क्या होना था सब तो पहले से hi रेडी थे...

एक बात मुझे सबसे ज्यादा बेचैनी में डाले हुए थी....

जब से मैंने वो रख अपने सीने में लगायी थी...

तबसे हनी! का कोई भी रिएक्शन नहीं आ रहा था....

मेरे बार बार बुलाने पर भी...

हम सब चिल्लर पार्टी मेरे रूम में इकठ्ठा हुए और घूमने जाने की प्लानिंग करने लगे....

सब ने अपनी अपनी रे दी....

लास्ट में तय हुआ की पहले कॉलेज जायेंगे..

बाद में शॉपिंग....

फिर वहीँ किसी रेस्टोरेंट में खान खाएंगे ...

क्युकी माँ डैड आज शाम तक hi वापस आने वाले थे...

K.M. ओनर रश्मि मौसी के वेलकम बैक के लिए पार्टी राखी गयी थी...

(जो की डैड के फेक डेथ के बाद बना दिया गया था....)

हम सब वापस हॉल में आ गए जहाँ डैड दादू को कुछ इंस्ट्रक्शन दे रहे थे....

दादू से बात करने के बाद.....

डैड ने मिस कनिका को को कॉल की और ऑफिस आने के बारे में इन्फॉर्म किया.....

तब दादू भी कार लेकर आ गए...

हम सब सामने कड़ी Mercedes-Benz सुव में जाकर बैठ गए....

यह कार खास फॅमिली मेंबर के टूर के लिए मॉडिफाइड की गयी थी...

Hi-tech सिक्योरिटी और बुलेट प्रूफ कार थी....

हमसब के बैठने के बाद कार चल दी...

एक कार आगे और एक पीछे, बीच में हमारे सुव...

दोनों गाड़ियों में गार्ड्स थे..

जो हमारी प्रोटेक्शन के लिए डैड ने साथ जाने को कहा....

हम शहर की खूबसूरती को निहारते हुए

K.M. अकादमी ऑफ़ साइंसेज & टूरिज्म मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट ऑफ़ देहरादून, इंडिया

कीबतराफ़ चल दिए.....

वहीँ दूसरी तरफ...

डैड की कॉल पहुँचते hi K.M. ट्रेड सेंटर में ऑफिसियल अनाउंसमेंट हुयी..

जिसमे सभी स्टाफ मेंबर को मीटिंग हॉल में इकठ्ठा होने को मिस. कनिका ने कहा.....

इस वक़्त हॉल पूरे मेंबर से Khacha-khach भरा हुआ था....

मिस कनिका - आज हमारे लिए बहित ख़ुशी का दिन है...

क्युकी आज इस बुसिनेस्स एम्पिरेस के रियल ओनर आ रहे है....

मर. कबीर सोन..!!

इतना कहते hi...

पूरे हाल में शोर शराबा मचने लगा....

क्युकी अब तक सबको एहि पता था की...

मर. कबीर की डेथ हो चुकी है.....

सब एक दुआरे से खुशूर फुसुर में लग gaye...m.

सब को शांत रहने को बोलते हुए.....

मिस कनिका - मैं चाहती हु की हम उनके आने की ख़ुशी में एक सरप्राइज पार्टी ऑर्गेनिसे करें.....

सो इतने काम समय में हमें यह मिलकर करना होगा....

सो आज के लिए सारा वर्क क्लोज किया जाता है....

अनाउंसमेंट होने के बाद सभी पार्टी के तयारी में लग गए....

इधर हमारी गाड़ियां इस वक़्त

K.M. अकादमी ऑफ़ साइंसेज & टूरिज्म मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट ऑफ़ देहरादून, इंडिया के सामने कड़ी थी.....

"वाओ ! कितना खूबसूरत है न"" जिन बोली....

लगभग 25 एकर्स के एरिया में फैला हुआ कैंपस....

तीन बड़ी बड़ी लाल कलर बिल्डिंग्स....

वाक़ई में बहुत hi ख़ूबसूरत इंस्टीटूट्स बनवाया था डैड ने....

तभी सामने का गेट खुला और हमारी गाड़ियां अंदर एंटर कर गयी...

गेट के अंदर का नजारा तो और भी ज्यादा मनमोहक था...

हर तरफ बस हरियाली hi दिख रही थी...

आने जाने के रस्ते के साइड्स से फ्लावर लगे हुए थे.....

हमारी गाड़ी मैं बिल्डिंग के सामने जा रुकी....

शायद एडमिशन स्टार्ट हो गए थे....

क्युकी चहल पहल बहुत ज्यादा दिख रही थी....

सब हमारी hi कार्स को घूरे जा रहे थे....

तभी एक पेओन भागते हुए हमारी गाड़ी की तरफ आया....

दादू ! ने प्रिंसिपल सर से मिलने को कहा....

दादू के साथ hi हम सब भी कार से बहार आ गए....

और दादू के साथ प्रिंसिपल ऑफिस की तरफ चल दिए.....

मैं बिल्डिंग के बोर्ड्स पर...

मेरा, अन्य और जिन का नाम लिखा हुआ था.....

जिसे देख कर हम तीनो मुस्कुराने लगे...

प्रिंसिपल सर हमें ऑफिस के गेट पर Hi खड़े मिल गए.....

सॉरी सर नहीं मम...

क्युकी वो फीमेल थी....

ात प्रिंसिपल ऑफिस...

प्रिंसिपल मम - ही.. ी ऍम भर्ती सिंह, प्रिंसिपल ऑफ़ थिस कैंपस.....

हम सबने भी बरी बरी अपना इंट्रो दिया....

जब उन्होंने मेरा, जिन और अन्य ! का नाम सुना तो ख़ुशी के मरे अपनी सीट से उछाल पड़ी....

भर्ती सिंह - ओह माय गुडनेस....

तो आप तीनो हो..

आज मेरी तमन्ना पूरी हुयी....

न जाने कब से ख्वाहिश थी तुम तीनो से मिलने की....

मैंने कबीर सर से रिक्वेस्ट भी की थी की एक बार आप तीनो को लेकर आये....

बूत इससे पहले वो आते.. की.......

सॉरी फॉर योर डैड....

मैं - सॉरी ! बोलने की कोई जरुरत नहीं....

(मैंने सोंचा बता दू....

फिर सोंचा रहने देते हैं..

खुद hi पता चल जायेगा....)

भर्ती सिंह - मैं तो यह पूछना hi भूल गयी की आप लोग अचानक यहाँ कैसे....??

अन्य - वो बात ये है की हम अपने सर्टिफिकेट लेने आये हैं....??

_________________________


आज के लिए बस इतना hi..

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लाइक्स, कमैंट्स, वोट्स और रिव्यु का रखना Dhyan....Aapka दोस्त हयान..!!
 
Update..No..68

MeGa..UpDaTe

भर्ती सिंह - ओह माय गुडनेस....

तो आप तीनो हो..

आज तो मेरी तमन्ना पूरी हुयी....

न जाने कब से ख्वाहिश थी तुम तीनो से मिलने की....


जो आज जाकर पूरी हुयी....

मैंने कबीर सर से रिक्वेस्ट भी की थी की एक बार आप तीनो को लेकर आये....

बूत इससे पहले वो आते.. की.......

सॉरी फॉर योर डैड....

मैं - सॉरी ! बोलने की कोई जरुरत नहीं....


(मैंने सोंचा बता दू....

फिर सोंचा रहने देते हैं.. खुद hi पता चल जायेगा....)

भर्ती सिंह - मैं तो यह पूछना hi भूल गयी की आप लोग अचानक यहाँ कैसे....??

अन्य - वो बात ये है की हम अपने डॉक्युमेंट्स लेने आये हैं....

भर्ती सिंह - मैं कुछ समझी नहीं कैसे डाक्यूमेंट्स..??

मैं - दरअसल बात ये है की हम अब ग्रेजुएशन करना चाहते है....

सो एडमिशन करवाने के लिए डाक्यूमेंट्स लेने आये है....

भर्ती सिंह - बूत तुम्हारे डैड तो कह रहे थे की...

तुम तीनो की जान को खतरा है..

सो तुम तीनो की पहचान छिपा कर राखी जाये....

पर इस तरह तुम सब के सामने आने से मैं हैरान हु और खुश भी...

शायद अब सब हो गया हो....??

मैं - अब वो खतरा ताल चूका है...

अब हम बाहरी दुनिया में एक आजाद पंछी की तरह उड़द सकते हैं....

इसलिए हम आये हैं अपने डाक्यूमेंट्स लेने...

ताकि अपनी आगे की स्टडी कम्पलीट कर सकें...

भर्ती सिंह - तो उसमें डाक्यूमेंट्स की क्या जरुरत वो तो तुम तीनो का आलरेडी नेक्स्ट क्लास के लिए एडमिशन फॉर्म फइलल किया जा चूका है...!!

प्रिंसिपल मम की बात सुनकर हम सब हैरान हो गए....

जिन चिल्ला उठी व्हॉट ! ऐसे केस....??

मैं - बूत हम अपना एडमिशन दित में लेना चाहते है...

सो डाक्यूमेंट्स लेने आये....??

भर्ती सिंह - दित में क्यों...??

ऐसा करने से मैं रोकना चाहूंगी..??

मैं - ऐसा क्यों...??

भर्ती सिंह - देखो मैं मानती हु की मैं तुम तीनो को ज्यादा नहीं जानती....

न hi तुमसे कभी मिली हु..

यह कॉलेज तुम्हारे डैड का होने के कारन मैं उनकी सभी बात मानती चली आयी हूँ...

तुम तीनो ने बिना कॉलेज आये hi स्टडी कम्पलीट की...

एग्जाम भी घर बैठे दिए....

सबसे अच्छी बात ये रही की तुम तीनो इंटरमीडिएट स्टेट टोपर हो....

शायद तुम लोगों ने बहार बोर्ड पर अपना नाम भी देख लिया हो...

इतना कुछ किया है तुम सब के लिए....

तो अब तुम hi बताओ...

मैं कैसे जाने dun..Itne होनहार स्टूडेंट्स को किसी और कॉलेज....??

जबकि मेरे पास मौका है एक बार फिर तुम तीनो के जरिये अपने इंस्टिट्यूट को टॉप लिस्ट में बनाये रखने का...

शायद तुम सब के यहाँ रहने से और भी स्टूडेंट्स का हौसला बढे...??

सो मैं तुम तीनो को किसी और इंस्टीटूट्स में एडमिशंस के लिए रोकना चाहूंगी.....!!

प्रिंसिपल मम का इतना बड़ा भाषण सुन कर हम तीनो सोंच में पद गए....

वैसे सच hi तो कहा है उन्होंने....

बहुत कुछ किया है हमारे लिए...

घर से एग्जाम देने की परमिशन एग्जाम बोर्ड से ली....

प्राइवेट टुटर भी अर्रंगे किया....

सब कुछ तो किया....

टोपर होने के बावजूद भी हमारी पहचान सबसे छिपाई....

सिवाय नाम के कोई डिटेल्स नहीं दी किसी को....!!

अब हमारा भी फ़र्ज़ बनता है की उनकी बातों को मने..

और अपने कॉलेज का मान बढ़ाएं....

मुझे उनकी बात ठीक लगी...

वैसे भी यह कॉलेज भी टॉप 10 में 9तह रैंक में आता है....

मैं, जिन, अन्य, 3 और स्टूडेंट्स ने इस साल स्टेट टॉप किया था...

जिससे हमारे कॉलेज का नाम इस समय सुर्ख़ियों पर बना हुआ है....

मैंने मन Hi मन फैसला कर लिया अपने hi कॉलेज में स्टडी करने का....

अब बस जिन और अन्य! के फैसले की देरी थी...

क्युकी माहि दी.. और अखिल भाई ने तो पहले hi कह चुके है... जहाँ तुम तीनो वही हम दोनों...

मैं जिन और अन्य! की तरफ सवालिया नजरों से देखने लगा....??

कुछ देर यूँही ख़ामोशी रही बस एक दूसरे के मुँह को ताकते रहे...

कभी हाँ.. कभी न...

और अंत में हाँ.....

हम तीनो एक दूसरे की आँखों में देखते हुए अपनी सहमति जताई....

अन्य - हम्म मम ! मैं भी आपकी बातों से सहमत हु...

शायद दित से भी बेटर ऑप्शन हमारे पास है...

सो हमें खुद के कॉलेज का मान बढ़ने के लिए सोचना चाहिए....

सो मुझे यहाँ स्टडी करने से कोई प्रॉब्लम नहीं....

मैं जिन की तरफ देखते हुए....

मैं - मेरा और जिन का भी एहि फैसला है...

हम एहि स्टडी करेंगे.....

और है बहुत बहुत शुक्रिया जो भी आपने हमारे किये किया है.. !!

भर्ती सिंह - इसमें शुक्रिया की क्या बात है...

यह तो मेरा फ़र्ज़ है...

तुम तीनो के लिए मैं जितना भी करू उतना काम है..

तुम तीनो के वजह से इस कॉलेज का नाम फेमस हो गया है...

जिसके चलते आज एडमिशन के लिए लाइन लगी हुयी है.....

और सीट भी आलरेडी फुल हो चुकी है....

बहुत से स्टूडेंट्स का अट्रैक्शन हमारे कॉलेज की तरफ बढ़ा है....

मैं - तो फिर दोने रहा..

हम सब यहीं अपनी स्टडी कंटिन्यू करेंगे....

मम आपसे एक रिक्वेस्ट थी...

ये है मेरे बड़े भाई और बहन अब से ये भी इसी कॉलेज में स्टडी कंटिन्यू करेंगे....

सो इनका भी एडमिशन इसी कॉलेज में हो जाता तो बेहतर है....!!

भर्ती सिंह - रिक्वेस्ट करने कोई जरुरत नहीं...

हो जायेगा....

बस डाक्यूमेंट्स जमा कर देना कल आकर....

बाकि साडी फॉर्मेलिटी मैं कम्पलीट कर दूंगी....!!

मैं - थैंक्स मम !

है एक बात और कहनी थी...

हम नहीं चाहते हमारे बारे में कोई ज्यादा जाने....

जैसे अब तक आपने हमारे डैड का नाम सीक्रेट रखा है आगे भी रखियेगा....

हमें शो ऑफ करना पसंद नहीं..

एक सिंपल सी और नार्मल लाइफ ज्यादा पसंद है....

सो हमें भी इतर स्टूडेंट्स की तरह hi ट्रीट किया जाये....

भर्ती सिंह - कोशिश करुँगी ऐसा hi हो...

लेकिन क़ाबलियत इंसान को छिपने नहीं देती...

उसे शोहरत की ऊँची बुलंदियों तक पहुँच देती है...

ऐसा hi तुम तीनो के साथ हुआ है....!!

ज्यादा देर छिप नहीं पाओगे....!!

मैं - वो बाद की बात है...

जब तक हो सकता है ऐसा hi चलने दे....

भर्ती सिंह - अच्छा अब छोडो जाने भी दो इन बातों को....

ये बताओ.....

क्या तुम सब देहरादून शिफ्ट हो गए....

क्या मीरा भी आयी है....??

मेरे बोलने से पहले hi...

अन्य - हम्म हम सब वापस लौट आये है...

माँ भी वापस आ गयी है.....

वैसे आप माँ को कैसे जानती है....??

भर्ती सिंह - ये भी कोई पूछने की बात गई....

इस कॉलेज की ओनर मीरा hi तो हैं....

रही बात जानने की की तो... थोड़ा लम्बी कहानी है....

फिर कभी बताउंगी....

वैसे भी अब मुलाक़ात होती रहेगी....

वैसे माँ से कहना मैं कल घर आ रही हु उनसे मिलने....!!

तभी दूर बेल्ल बजी....

अन्य - ठीक है मम !

मैं माँ से कह दूंगी....

भर्ती सिंह - अच्छा अब मुझे जाना होगा.....

कल मैं खुद घर आकर डाक्यूमेंट्स कलेक्ट कर लुंगी...

क्लास एक वीक बाद शुरू होंगी...

बाकी डिटेल्स मैं E-mail कर दूंगी....

इतना कहकर मम ऑफिस से बहार चली गयी....

हम भी बहार आ गए....

मैं - हम्म यहाँ तो सब पहले से hi कम्पलीट हो चूका है...

अब बताओ आगे क्या....??

माहि दी - मॉल चलना है और क्या....

शॉपिंग करनी है...

दोपहर हो गयी है लंच भी तो करना है...??

मैं - हम्म डाइटिंग क्वीन....

लंच टाइम तो हो गया hai....Chaliye मॉल चलते हैं...

हम सब कॉलेज से निकल कर जा पहुंचे दूँ स्क्वायर मॉल.....

शॉपिंग में तो बहुत टाइम लग्न था....

इस्सलिये हम मॉल में बने रेस्टोरेंट में जाकर लंच करने लगे....

सबने अपनी अपनी पसंद की डिश आर्डर की.....

और टीवी देखते हुए खाने का लुत्फ़ उठाने लगे.....

हम सब खा Hi रहे थे की सामने टीवी पे चल रही न्यूज़ को देख कर हम सब का खाना रुक गया....

और ध्यान से टीवी देखने लगे....

*ब्रेकिंग न्यूज़ जाने मने बुसिनेस्स मन *कबीर सोन ज़िंदा है...!!

जी है आप सबने सही सुना है....

देहरादून के बुसिनेस्स टाइकून ने फेक डेथ की न्यूज़ वायरल की थी....

चलिए हम आपको उनके Rub-baru ले चलते हैं....

इस वक़्त K.M. टावर के बहार न्यूज़ ांचोरस का जमावड़ा लगा हुआ था....

डैड को घेरे हुए उनसे तरह तरह के सवाल पूंछ रहे थे.....

डैड को ज़िंदा देख कर सभी खुश और साथ में हैरान भी थे....

सब बस एहि जानना छह रहे थे की उन्होंने ऐसा क्यों किया...??

आखिर ऐसी कौन सी मुसीबत ाँ यदि थी की मौत का नाटक करना पड़ा....

और सैलून तक खुद को सबसे छिपकर रखना पड़ा....??

आज K.M ग्रुप डैड की वजह से सुर्ख़ियों में छाया हुआ था....

डैड ने सभी प्रश्नो का जवाब न देते हुए बस इतना hi कहा की....

""मेरी मौत सिर्फ एक ड्रामा थी...

जो की खुदका वजूद और अपनी रिसर्च को अपने दुसमन से बचाये रखने के लिए किया गया था....!!""

इतना बोलकर डैड जाने लगे, तो ांचोरस ने फिर घेर लिया.....

सर Sir....Bas एक लास्ट सवाल.....

एंकर - किसी खतरा था आपको और आपकी रिसर्च को...

क्या आप दर्शकों को खुल कर बताएँगे....??

डैड - था एक दुसमन जो पूरी दुनिया में अपनी हुकूमत कायम करना चाहता था...

जेनेटिक अटैक के जरिये....!!

बाकि आप सब समझदार हो

मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं बता सकता.....!!

No मोरे क्वेश्चन....!!

इतना बोलकर डैड वापस अपने केबिन की तरफ चल दिए....

न्यूज़ रिपोर्टर - तो देखा आपने...

इसका अर्थ बस एहि निकलता है की....

जिसने भी जेनेटिक अटैक किया था.....

उससे Hi मर. कबीर को खतरा था....

तो क्या अब वो खतरा ताल चूका है..??

सरे सवालों के सही जवाब जानने के लिए साथ बने रहिये.....!!

डैड की इतनी ज्यादा पॉपुलैरिटी देख कर हम सब बहुत खुश हुए....

हमने ख़ुशी ख़ुशी अपना लंच फिनिश किया

और शॉपिंग करने लगे....

सबने मिलकर ढेर साडी

शॉपिंग की....

अपने लिए भी और साथ में माँ - डैड के लिए गिफ्ट भी खरीदे.....

शॉपिंग करने में बहुत ज्यादा वक़्त लग गया....

इसलिए हमने कहीं और घूमने जाने का प्लान कैंसिल कर दिया....

क्यूंकि माँ - डैड भी वापस चल दिए होंगे घर के लिए....

और हम भी उनके साथ अपनी ख़ुशी बाटना चाहते थे....

हमने अपने अपने शॉपिंग बैग गाड़ियों में रखे और चल दिए घर की तरफ....

अब तक 7हरष बीत चुके थे...

लेकिन हनी की कोई खबर न थी..

जो की दिल hi दिल मुझे किसी भय तरफ खींचे लिए जा रहा था...

आखिर ऐसा क्यों हुआ.....??

_____________________________


बहुत दिन हो गए....

एक झलक इनकी तरफ भी दाल लेते हैं.......

""क्षमा कीजियेगा महामहिम ! लेकिन आप की सोंच मेरी समझ के परे है...

आप ये सब क्यों होने दे रहे हैं..."", 'तामुलु बोलै'

कस्सदेया - मेरी कथनी और करनी में बहुत अंतर है...

जल्दबाज़ी में मूर्खता वाला फैसला नहीं लेता....

कुछ कार्य का परिणाम बहुत देरी से मिलता है....

समय आने पर तुम्हें सब साफ़ नजर आने लगेगा....!!

तामुलु - किन्तु महामहिम ! अगर उसने दूसरे अंश पर विजयी प् लिया तो......??

कस्सदेया - वो तो काबू प् hi लेगा....

हम चाहे या न चाहे...

शायद तुम भूल रहे हो....

उसके जन्म के समय तुमने उसके करीब जाने की कोशिश की थी...

याद है न क्या हुआ था....??

तामुलु - जी महामहिम ! मुझे सब याद है..

मैं उसके दिए जख्मों को कभी नहीं भूल सकता.....

मुझे इंतज़ार है उस पल का जब उसका और मेरा आमना - सामना होगा.....!!

कस्सदेया - मुर्ख हो तुम...

मेरे कहने का तात्पर्य नहीं समझ रहे....

"दो अंश है....

एक ब्लैक - जिसकी तरफ तुम आकर्षित हुए...

दूसरा वाइट - जिसने तुम्हारा अस्तित्व मिटने में कोई कसार नहीं छोड़ी थी...""

वाइट सोल का हम कुछ भी बिगड़ नहीं सकते....

और ब्लैक सोल के लिए मैंने अपना पैसा फेंक दिया है....

अब बस इंतेज़रर करो उस चाल का क्या परिणाम निकलता है...!!

तामुलु - परिणाम का तो मुझे भी इंतेज़रर hai...Bas डर है उस ढोंगी बाबा का कोई छल न करे फिर से.....

ः हहह

कस्सदेया - उसका भी इंतेज़ाम जल्द होगा....

अंत नज़दीक है...!!

तामुलु - धन्यवाद् ! महामहिम मेरी चिंता को दूर करने लिए....

एक बात कहनी थी आपसे....??

बात नहीं चुगली करनी थी....??

कस्सदेया - कहो जो भी कहना है साफ़ साफ़....

तामुलु - जिस कार्य हेतु अपने बुमलीन को धरती लोक पर भेजा था...

शायद वो अपने मार्ग से भटक चुके है...

पूरा दिन अय्याशी और स्त्री मोह में डूबे रहते हैं....

नरकिस्सा और सक्कूबी भी अपना काम ठीक से नहीं कर रहीं...

अब तक बहुत काम मात्रा में hi इंसानो को शैतान योनि में परिवर्तित कर पायी हैं....

शायद उनको इतनी आज़ादी देकर आपने सही नहीं किया...

अब वक़्त आ गया है की उन पर सिकंजा कास जाये.....

कस्सदेया - दोषी तो तुम हुए...??

इन सब की जिम्मेदारी तो मैंने तुम्हें दी थी न.....

तुम्हें भी तो पूरी आज़ादी दी है..

मुझसे शिकायत करने के बजाय खुद उन्हें उनकी राह दिखते तो शायद सही भी होता..!!

""न मैं धरती लोक जा सकता हु.... और न hi वो वापस आ सकते हैं..""

तो अब बचे तुम...

खुद गलती करते हो.. खुद hi शिकयत

बताओ मैं क्या करूँ तुम्हारे साथ....

कस्सदेया की बात सुनकर तामुलु घबरा गया...

घबराते हुए...

तामुलु - क्षमा करें महामहिम !

दुबारा ऐसी गलती नहीं होगी.....!!

कस्सदेया - मुझसे क्षमा की उम्मीद मत रखो....

जाओ और अपने कार्य को सही ढंग से करो...

वर्ण अंजाम तुम जानते हो....??

तामुलु - धन्यवाद !

महामहिम की जय हो !

इतना बोलकर तामुलु गायब हो जाता है.....!!


________________________

आज कलिये बस इतना hi..



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लाइक्स, कमैंट्स, वोट्स और रिव्यु का रखना Dhyan....Aapka दोस्त हयान..!!
 
नानी के अंदर काली ऊर्जा तब आयी जब चेयरमैन ने उन पर अटैक किया.....

न की पहले से थी...

और कहा की उसे मेरे वार से कोई नहीं बचा सकता है....

बहुत Hi शानदार रिव्यु.....

थैंक्स सर जी.....


फॉर कंटिन्यू रीडिंग एंड सुपर्ब सुप्पोर्टस...!!

बस ऐसे hi साथ बने रहे...


Today's अपडेट ात पेज No.391
 
ही गाइस !! गुड मॉर्निंग !!

इन दिनों मैं किसानी (खेती - बड़ी ) में बिजी हु...

सो बहुत थक जाता हु...

इस्सलिये अपडेट लिखने में परेशानी हो जाती है...

कुछ दिन अपडेट लेट आएंगे...

सो आप सब से रिक्वेस्ट है जल्द बाज़ी न करे...

जैसे hi अपडेट लिख लूंगा पोस्ट कर दूंगा...


कीप रीडिंग, वेटिंग एंड सपोर्टिंग !!
 
ही गाइस !! गुड इवनिंग !!



सॉरी गाइस ! आज भी अपडेट नहीं आ पायेगा...

दिन भर फसल की कतराई चल रही थी....

सो बहुत ज्यादा बिजी था..

थक भी गया हु..

इस लिए अपडेट नहीं दे पाउँगा.....

ऐसा कंटिन्यू 1 वीक तक हो सकता है...

सो पेशेंट रखियेगा....



कीप वेटिंग एंड सपोर्टिंग...!!
 
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