Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan - Page 23 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan

Update..No..72*

MeGa..UpDaTe
Abb..Takk..

अब तक सभी ने पढ़ा की हयान ग्रुप्स की कॉलेज लाइफ स्टार्ट हो चुकी थी....


पहले hi दिन कॉलेज में हयान को एक शॉक लगता है...

एक वैम्पायर लेडी के रूप में...


जो की हनी की ब्लैक पावर को महसूस कर के हयान तक पहुंची थी...

लेकिन उससे ज्यादा तगड़ा झटका नरकिस्सा को लगता है....

हयान के अंदर छुपी वाइट एनर्जी को महसूस कर....

वहीँ दूसरी तरफ नरकिस्सा, बुमलीन और सक्कूबी से हयान के रियल फेस की सचाई बताती है..

जिसे सुनकर सभी परेशां हो जाते हैं..

सक्कूबी - तो फिर आप hi Batao.....Hamein क्या करना चाहिए....??

काफी देर कुछ सोचते हुए...


बुमलीन - एक बार फिर से उसका सामना करना होगा.....??

Abb...Aage...

""ये क्या कह रहे हो आप... फिर से उसका सामना करना होगा""

""किस में इतनी पावर है जो उस का सामना कर सके"" नरकिस्सा बोली ""

बुमलीन - तुम्हें hi करना होगा सामना....

एक बार फिर से....

नार्कीससा - क्या...?? मैं...

नहीं ये नहीं हो सकता...

अनजाने ने मैं ये गलती कर सकती हु..

लेकिन सब जान्ने के बाद भी मैं ऐसा कदम कभी नहीं उठा सकती....

बुमलीन - बेवक़ूफ़ मत बनो.....

तुम्हारे शिव और कोई नहीं जा सकता उसके सामने...

क्युकी तुम्हारे शिव बाकि सबकी पहचान छिपी हुयी है...

इस्सलिये सिर्फ तुम्हे Hi जाना होगा....!!

नरकिस्सा - मुझे माफ़ कीजियेगा....

लेकिन मैं तैयार नहीं हु आपकी इस बात से......

आपके इस फैसले से मेरी जान भी जा सकती है.....

और जान सबको प्यारी होती है...!!

बुमलीन - मैंने कब कहा की तुम उससे फाइट करो......

तुम्हें बस वही करना है...

जो अब तक करती चली आयी हो....

जाओ और उसके अंदर छिपे शैतान को जगाओ...

और उस पर काबू पाओ...

वो शैतान भविष्य में बहुत कारगर होगा....!!

नरकिस्सा - शायद आपने मेरी बात को ठीक से समझा नहीं...

उसके अंदर छिपी ब्लैक पावर.... बहुत ज्यादा होकर भी, वाइट पावर के कारन,

उनका अस्तित्व न के बराबर है...

उसने अपनी इक्षाओं पर काबू प् लिया है...

उस पर काबू पाना मेरे बस में नहीं....

बुमलीन - सब समझता हु मैं....

लेकिन तुम नहीं समझ प् रही भविष्य के खतरे को...

शायद ये वही है....

जिसके बारे में कस्सदेया मालिक बात कर रहे थे....

अगर ये वही है तो...

फिर हमें यह करना hi होगा....

वर्ण इसका अंजाम बहुत बुरा हो सकता है...

अगर कस्सदेया मालिक को पता चला की सब जानकर भी हम अनजान बने रहे तो....

शायद की हम इस साक्ष से बच जाये....

लेकिन कस्सदेया मालिक के जुल्म से नहीं....

काफी देर बहस के बाद......

अंत में जीत बुमलीन की हुयी.....

और नार्कीससा को उसकी बात माननी पड़ी.....

क्युकी कोई और राह नहीं बची थी....

नरकिस्सा - ठीक है....

मैं तैयार हु....

क्या आप दोनों मेरी मदद के लिए आओगे. .यदि कोई खतरा हुआ तो.....

बुमलीन - नहीं हम में से कोई नहीं आएगा....

वर्ण उसे हमारी मौजूदगी का अहसास हो जायेगा....

यह काम तुम्हें अकेले hi करना होगा....!!

नरकिस्सा - ठीक है फिरर...

मैं चाहती हु की आप मेरी संपूर्ण ऊर्जा को आजाद कर दें...

यदि मुझे कोई खतरा हुआ तो..

जाते जाते उसके अस्तित्व को भी खतरे में दाल सकू....

बुमलीन - ठीक hai....Jaisa तुम कहो....


अब जाओ और उसका सामना करने के लिए रेडी हो जाओ.....

_____________________________

हयान की तरफ......

कॉलेज स्टार्ट किये हुए.. पूरा एक हफ्ता बीत चूका था...

सब कुछ नार्मल चल रहा था...

मीडिआ के सामने सभी टॉप स्कोरर स्टूडेंट्स का सम्मान भी हुआ....

हमारे गार्डियन के तौर पर खुद प. मम गायत्री जी मीडिआ के सामने आयी...

हालाँकि सब हमारे पेरेंट्स के बारे में जानना चाहते थे....

लेकिन P.Mam ने ऐसा नहीं होने दिया....

सब कुछ ठीक चल रहा था....

लेकिन अभी तक मेरी मुलाक़ात उस लेडी से दुबारा नहीं हो पायी थी...

मुझे बहुत बेसब्री से इंतज़ार था उससे एक और मुलाक़ात का...

मैं भी अब रेडी था आमना सामना करने के लिए....

दिल में एहि अरमान लिए आज एक बार फिर कॉलेज आया था...

की शायद आज फिर मुलाक़ात हो जाये....

पर शायद आज भी उससे मिल पाना संभव नहीं था....

क्युकी लास्ट पीरियड चल रहा था....

और कॉलेज ख़त्म होने में कुछ hi समय बचा था....

लेकिन उसकी कोई खबर नहीं थी....

मैं जिन और अन्य के साथ फिजिक्स की क्लास अटेंड कर रहा था की तभी P.Mam का बुलावा आया....

बीच क्लास से उठकर मुझे उनके ऑफिस जाना पड़ा.....

जैसे Hi मैं क्लास से बहार आया.....

अन्य! से दूरी के कारन

मुझे उसकी मौजूदगी महसूस होने लगी.....

मैं - दोस्त... अपनी एटम बम से मिलने का वक़्त आ चूका है....

"अगर कोई प्रॉब्लम न हो मम ! तो मैं इनसे अकेले में थोड़ा कुछ बात करना चाहूंगा""

P.Mam - Okay No प्रॉब्लम...

तुम दोनों अपना इशू ख़त्म करो...

मुझे अपने कॉलेज में अनजान लोग पसंद नहीं...

इन्होने तुमसे मुलाक़ात की रिक्वेस्ट ki.....So मैंने आने दिया...

वर्ण मैं अपने कॉलेज में घुसने भी न देती....

वैसे भी इनकी वजह से कॉलेज का माहौल ख़राब होने के असर दिख रहे...

मैं कॉलेज के डिसिप्लिन से कोई समझौता नहीं कर सकती....

लेडी - मैं माफ़ी चाहूंगी....

मेरी वजह से आपको प्रॉब्लम हो रही...

बूत ये लास्ट बार है...

मैं वापस नहीं आउंगी.....

P.Mam - Okay.... तुम दोनों के पास 30 मं है..

उसके बाद कॉलेज बंद हो जायेगा....

इतना बोलकर P.Mam ऑफिस से बहार चली गयी...

मुस्कुराते हुए...

मैं - कैसी हो मिस नरकिस्सा...

मुझे तो लगा था अब तुमसे कभी सामना होगा hi नहीं...

लेकिन एक बार फिर हम दोनों आमने सामने है....

कहो क्या कहना चाहती हो....??

नरकिस्सा - बहुत खूब...

हम्म तो तुम्हारे अंदर पहचानने की शक्ति भी है...

लेकिन एक बात समझ न आयी...

""तुम हो कौन...??""

""एक इंसान या फिर शैतान""

मैं - इसी सवाल के जवाब की तो मुझे भी तलाश है....

लेकिन अभी तक इसके जवाब से वंचित हु...

मैं बस इतना कहूंगा मैं तुम्हारी सोंच से परे हु..

मेरे बारे में जाने से अच्छा है की अपने आने का कारन बताओ.....??

नरकिस्सा - दिखने में तो एक बचे जैसे हो...

लेकिन हो बेमिसाल....

मैं भी सीधे मुद्दे पे आती हु...

"" एक सौदा करना है...

सौदा ऐसा जो अमरता प्रदान करे..""

मैं - मैंने पहले कहा है..

मेरे बारे में तुम नहीं जानती...

शायद इसी लिए ऐसे सौदे बजी कर रही हो....

मैं मोह माया से परे हु...

तेज़्ज़ आवाज़ में...

"" क्यों आयी हो यहाँ...""

मेरी आवाज़ से नरकिस्सा कम्पनी लगी...

डरते हुए...

नाटकीसा - मैं एक काली शक्ति की पुजारन हु...

मुझे तुम में काली शक्ति की अपार ऊर्जा महसूस हुयी तो..

मैं तुम्हारी ओर खींची चली आयी....

लेकिन तुम्हारे करीब आकर तुम्हारी वास्तविकता से रूबरू हुयी...

मैं सिर्फ इतना चाहती हु...

की तुम मुझे अपना गुलाम बना लो...

हम दोनों मिलकर इस संसार पर राज करेंगे.....

अचानक रूम का टेम्परेचर बढ़ने लगा....

""ढोंग करती है साली....

मेरी शक्तियों को हासिल कर खुद अमर होना चाहती है....

ऊपर से गुलाम बनने का नाटक करती है...""

बहुत ख्वाहिश थी न मुझसे मिलने की लो मैं तुम्हारे सामने हु...

बता किसने भेजा है तुझे... वर्ण अभी जलाकर ख़ाक कर दूंगा....""

हनी ने नरकिस्सा का गाला पकड़ लिया...

और अपनी आग की लपटों से उसे तकलीफ देने लगा.....

अह्ह्ह ूण ुघठ खस्ते हुए....

नरकिस्सा - आखिर क्या हो तुम...??

मैं सच कह रही...

मैं तुम्हारा भला चाहती हु...??

हनी - भला.. वो भी तू..

ः छः....

तुझ में इतनी शक्ति भी नहीं की तू मेरे सामने टिक सके...

क्या सोंच कर आयी हो...

क्या इतना आसान है..

मुझे अपने बस में करना....??

नरकिस्सा - मैं सच कह रही हु..

मैं तुम्हारी शक्तियां hi महसूस करके तुम तक आयी हु...

वर्ण मेरा और वाइट एनर्जी का क्या रिलेशन....??

""शांत हो जा भाई....

यह सच कह रही है...

यह तुमसे hi मिलने आयी है...

बस इसे ये नहीं पता की तुम हो कौन...??

एक शैतान होकर भी ईश्वर की उपासना करने Wale.....Shaitan...!!

हनी - तू तो चुप hi बैठ यह मेरे लिए आयी है...

तो मैं भी इससे अपने hi तरीके से निपटूंगा...

मैं - ठीक है भाई... तुझे जो करना है कर मैं कुछ नहीं बोलूंगा.....

मैं एक डैम खामोश हो गया.....

हनी - मैं एक लास्ट बार पूछूंगा....

तुझे किसने भेजा है..

तुम्हारे यहाँ आने का मकसद क्या है....??

नरकिस्सा - मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गयी...

यहाँ आकर....

प्ल्ज़. मुझे माफ़ कर दो... मुझे जाने दो....

हनी - यह मेरे सवाल का जवाब नहीं....

तुम्हें आजादी तभी मिलेगी जब तुम सच बताओगी....

नरकिस्सा - जो सच था मैंने बता दिया....

बास मुझे जाने दो....

बार बार नरकिस्सा के इंकार से हनी झल्ला उठा...

अपने हाथों की पकड़ मजबूत कर दी...

जिससे नरकिस्सा दर्द से तड़पने लगी.....

""अब सच बोलेगी.... या फिर अभी भी इंकार करेगी....??""

हाथों की पकड़ बहुत ज्यादा मजबूत थी....

नरकिस्सा कुछ भी बोल नहीं ोा रही थी....

मुझसे यह सब देखा न गया...

मैंने हनी को फिर से अपने काबू पर ले लिया....

जिससे नरकिस्सा आजाद हो गयी....

और तुरंत गायब हो गयी.....

तभी लास्ट पीरियड एन्ड होने की बेल्ल भी बज गयी.....

मैं भी तुरंत ऑफिस से निकल कर अपनी क्लास की तरफ चल दिया....

जहाँ मुझे जिन और अन्य ! क्लास के बहार खड़े मिल गए....

मैं दोनों के साथ ग्राउंड पर आ गया..

अन्य - क्या हुआ हय्यू ! एवरीथिंग इस Okay !

P.Mam ने क्यों बुलाया था....??

मैं - कोई ख़ास बात नहीं थी...

बास किसी से मिलवाना था...

अन्य - अच्छा किस्से मुलाक़ात करने में इतना वक़्त लगा दिया...

मैं - एक इतर इंस्टिट्यूट के प्रोफेसर आये हुए the.....Bas उन्ही से मिलाने के लिए बुलाया tha...(*Jhoot)

जिन - क्या तुम दोनों यही बातों पर लगे Rahoge...Ya फिर आज के प्लान के बारे में भी कुछ सोंचा है....??

मैं - सॉरी, मैं तो भूल hi गया था....

अंकित और सृजल कहाँ है....??

माहि दी - वो देखो... दोनों गेट पर खड़े हमारे आने का वेट कर रहे हैं....

मैं - तो चलिए देर किश बात की है...

हम सब दादू! के साथ कार में मॉल पहुँच गए...

मैं - आप सब अंदर चलो, मैं थोड़ी देर में आता हु.....

मुझे और दादू को छोड़कर बाकी सब मॉल के अंदर चले गए....

मैं - दादू ! क्या सब कुछ रेडी है.. या अभी कुछ बाकि रह गया है....??

दादू - जी बाबा ! जैसा आपने कहने कहा था...

ठीक वैसे hi मैंने डेकोरेट करवा दिया है...

मैं - थैंक्स दादू! आप सच में बहुत अच्छे हो...

आपने उस दिन की बात डैड से न बताकर बहुत अच्छा किया था...??

दादू - थैंक्स की बात नहीं है हयान बाबा !

दरअसल बेबी ने मुझसे ऐसा करने की रिक्वेस्ट की थी...

इस्सलिये मैंने बात छिपा दी...

लेकिन क्या यह सही होगा...

अगर आगे कोई प्रॉब्लम हुयी तो....??

मैं - मेरे ख्याल से अगर कोई इशू हुआ भी तो आप, रघु और निशाम मिलकर उसको हैंडल कर लोगे...

मुझे आप पर पूरा यक़ीन है...

अच्छा दादू ! मुझे जाना होगा.... टाइम हो गया है...

दादू - ठीक है बाबा आप एन्जॉय करो....

मैं बहार यहीं वेट करता हु....

मैं भी वह से सीधा मॉल के अंदर चल दिया....

सबको खोजने लगा....

मुझे सब एक साथ आइस क्रीम पार्लर के सामने खड़े दिख गए....

जहाँ सभी मेरे आने का वेट कर रहे थे....

माहि दी - कितना वक़्त लगते हो....

एक तो बिन बताये सबको यहाँ लेकर आये...

अब खुद hi गायब हो....

मैं - अरे मेरी बड़की दीदी... थोड़ा सब्र रखो.. सब पता चल जायेगा.....

चलो सब मेरे साथ चलो....

.

सब मेरे पीछे पीछे चल दिए....

"ये लो हम आ गए""

मैं एक मॉल में बने एक रूम के बहार आकर रुक गया.....

मैं - सृजल अब तुम्हारी बारी....

ओपन थे दूर.....

मेरे ऐसा कहने से सृजल मुझको अजीब तरीके से देखने लगी..

जैसे पूछना चाहती हो मैं hi क्यों.....??

वहीँ अंकित उसे देख कर मुस्कुराने लगा....

मैं - अब खोलो भी कितना वक़्त लगाओगी....??

सृजल ने झिझकते हुए दरवाज़ा खोला....

अनादर रूम में चरों तरफ अँधेरा पसरा हुआ था....

सृजल पलट कर फिर से हमारी तरफ देखने लगी.....

मैं - अंदर चलो तो सही... डरो मत....

हम सब भी तो साथ हैं ...

सृजल ने जैसे Hi पहला कदम रखा...

अचानक रूम रौशनी से जगमगा उठा...

और म्यूजिक बजने लगा....

"" हैप्पी बिरथ डे तो यू ""

म्यूजिक और रूम का डेकोरेशन देख कर समझ में आया की यहाँ बर्थडे ओर्गनइजे किया गया है...

वो भी सृजल का.....

सब एक एक करके सृजल को उसके जन्म दिन की मुबारक बाद देने लगे....

सृजल - तुम्हें कैसे पता... की आज मेरा बर्थडे है....??

मैं - मुझे क्या... माहि दी को छोड़कर बाकी सबको पता है.....

आज तुम्हारा बर्थडे है...

इसीलिए आज हम यहाँ तुम्हारा बर्थडे सेलिब्रेट करने आये हैं....

सृजल - बूत तुम सबको बताया किसने....??

मैं मुस्कुराते हुए... अंकित की तरफ देखने लगा....

सृजल तुरंत समझ गयी... अंकित ने hi सबको बताया है....

सृजल - इसका मतलब तुम्हें याद था...

वही तो मैं सोंचू तुमने मुझे अब तक ऐश क्यों नहीं किया....

अंकित - मैंने सोंचा इस बार थोड़ा अलग तरीके से तुम्हें विश करू....

सो Maine,Hayaan और अन्य ने मिलकर ये सरप्राइज प्लान किया....

वैसे कैसा लगा हमारा सरप्राइज....??

सृजल अंकित को हुग करते हुए....

सृजल - यह मेरा अब तक सब्सड अच्छा बर्थडे प्लान है...

बहजत अच्छा लगा....

थैंक यू वैरी मच अंकित....

हमेशा की तरह मेरा बर्थडे याद रखने के लिए....

मैं - वह ! म्हणत हम करे....

और वह वही उसे दी जाये....

थिस इस नॉट फारे.....

काश हमें भी कोई हुग करने वाला होता....??

सृजल - ओह्ह बेचारा ! तुम्हें भी हुग चाहिए.....

सृजल आगे बढ़ने वाली थी की.... अन्य! बीच में आ गयी....

अन्य - आजा मेरे पास... मैं तुझे हुग देती हु....

अन्य ने आगे बढ़कर मुझे अपने गले से लगा लिया....

और कान में धीरे से कहा...

"" थोड़ा नौटंकी काम किया कर...

और गर्ल्स से तो दूर hi रहना..""

अन्य ! की बात सुनकर मैं मुस्कुरा उठा....

मैं - चलो चलो.. जल्दी से केक काटो....

और हमें अपने हाथों से खिलाओ....

सृजल ने केक कट किया...

सबको अपने हाथों से बरी बड़ी खिलाया....

हम सब ने भी सृजल को थोड़ा खिलाया... थोड़ा उसके गलों में लगाया....

सबने मिलकर काफी देर मस्ती की...

पार्टी ख़त्म होने के बाद....

सृजल - अच्छा सब मेरी बात गौर से सुनो....

बर्थडे सेलिब्रेशन अभी ख़त्म नहीं हुआ....

तुम सब इन्वितेद हो...

शाम 7 बजे मेरे घर में.... पार्टी है..

मेरे डैड की तरफ से....

सो तुम सबको अपने फॅमिली और पेरेंट्स के साथ जरूर आना है....

है एक बात और.... जब तक तुम सब आ नहीं जाते.. मैं केक नहीं कट करुँगी...

मैं - अच्छा ठीक है....

शाम को मिलते हैं..

अब हमें जाना होगा....

सृजल अंकित के साथ बाइक में बैठकर

अपने घर को रवाना हो गयी....

हम भी अपने घर के लिए निकल गए...

दुपहर के 3 बज रहे थे....

माँ डैड और मौसा मौसी अभी तक नहीं आये थे ऑफिस से,

हम सब अपने रूम में जाकर फ्रेश हुए....

और रेस्ट करने लगे...

क्युकी लंच तो करना नहीं था....

सबका वैसे भी पेट भरा हुआ था....

मैंने भी सोंचा कुछ देर सो लिया जाये...

वैसे भी आज कल रात जो सोने को नहीं मिल रहा...

हनी की वजह से....

साला खुद तो दिन भर चैन से सोता है.....

और रात में मुझे परेशां करता है...

सोने नहीं देता....

जब से रात में चस्का लगा है... शिकार करने का....

जब से हनी मेरे अंदर समाया था...

तब से मेरे बेहेवियर में काफी चंगेस आये थे....

जो की मेरे आलावा सब नोट कर रहे थे.....

बात बात पे गुस्सा करना..

लड़कियों की तरफ अट्रैक्शन.. ेट्स..

ऐसा लग रहा था की जैसे हनी मुझ ओर हावी होता जा रहा है....

खैर मैं अपनी सोंच को यहीं विराम देते हुए सो गया....

अभी सोये हुए कुछ hi समय हुआ था....

मेरे रूम का दूर नॉक हुआ.....

जिससे नेरी आँख खुल गयी....

मैंने उठकर दरवाजा खोला... बहार नाम कड़ी थी...

माँ - लगता है जनाब की नींद बीच में hi ख़राब कर दी..

मैं - नहीं माँ..

मैंने तो पिछले 3हरष से सो रहा हु...

माँ - Okay... अच्छा जाओ फ्रेश होकर आओ...

कॉफ़ी रेडी है....

मैं - बस दो मं में आया.....

मैं तुरंत फ्रेश होकर... हॉल पे पहुँच गया....

जहाँ सभी चाय और कफ की चुस्कियां बात करते हुए ले रहे थे.....

मैं भी सबके साथ जा बैठा....

डैड - हम्म बीटा जी....

आज बर्थडे पार्टी पर जाने का प्लान है....

मैं समझ गया मेरे आने से पहले hi शायद अन्य ने डैड को सब बता दिया है....

मैं - हम्म डैड जाना तो पड़ेगा.....

शर्त hi ऐसी राखी है....

डैड - ठीक है चले जाओ.... बिट हम गुआर्डिन में से कली नहीं Jayega.....Tumhare साथ.....

मैं - मैं पहले से hi यह समझ गया था....

कोई नहीं डैड.. हम दादू के साथ चले जायेंगे....

वैसे डैड! काईन अंकल और रिया मौसी लैब तक दिल्ली से वापस आएंगे....??

डैड ,- अब बुसिनेस्स सेट िप करने में टाइम तो लगेगा hi...

या तो वो दोनों आ जाते.... या फिर हम सब...

किसी न किसो कल तो रुकना hi पड़ेगा.....

बीच में टोकते हुए.....

माँ - मेरे ख्याल से अगर तुम सबको पार्टी में जाना है तो...

जाकर रेडी हो जाना हो जाना चहिये....

वर्ण लेट हो जाओगे....

6:30 आलरेडी हो चूका है......

मैं - अच्छा चलो.. सब रेडी हो जाओ....

हम 15मं में निकलेंगे.....

हम सब फटाफट रेडी हो गए....

मैंने लाइट पिंक कलर की शर्ट और क्रीम कलर का ट्राउज़र्स पहन रख था....

जबकि जिन नेवी ब्लू शर्ट और डार्क ब्लू जीन्स.....

वहीँ अन्य! ने ग्रीन और येलो कलर का सलवार सुईठे पहना हुआ था....

तभी मेरी नजर माहि दी पर पड़ी....

वो तो सबसे अलग hi दिख रही थी....

ऐसा लग रहा था की जैसे किसी मैरिज फंक्शन में जा रही हो...

माहि दी ने पिंक एंड लाइट रेड का मिक्सचर वाला राजस्थानी सुईठे पहना हुआ था....

वही अखिल भाई... भी फुल सुईठे बूट में थे....

सब एक से बढ़कर एक लग रहे थे.....

वो कहते है न... जो खूबसूरती सादगी मशीन होती है.... वह चणक धानक में कहाँ.... वैसा hi कुछ हाल अन्य! का था....

नार्मल ड्रेस में भी क़यामत की ऐडा थी...

मैं अन्य! के रूप रंग में खोया हुआ था की....

अन्य! ने मेरे आखों के सामने चुटकी बजायी....

""क्या हुआ हय्यू! कहाँ खो गए....

यही रुकने का इरादा है क्या...??""

""काश की मैं वक़्त को रोक पता....

कुछ पल हसीं के युहीं बिता देता...""

मैं - है है चलो...

मैं तो कबसे सबके आने का वेट कर रहा हु....

अन्य! मेरी बात सुनकर मुस्कुरा उठी....

अन्य - हम्म देख रही hi... कब से वेट कर रहे हो....

हम सब जाकर गाड़ी में बैठ गए....

दादू ने कार बढ़ा दी...

हमारे पीछे एक गाडी में रघु और निशाम भी सिक्योरिटी के लिए साथ चल दिए.....

कुछ hi मिनट्स में हमारी गाडी.... घंटा घर के पास बने आलीशान महल जैसे घर ""श्रीवास्तव कुञ्ज"" के सामने हमारी गाड़ी रुकी.....

गेट पर सिक्योरिटी काफी टाइट थी....

हमारी कार की स्कैनर के जरिये चेकिंग हुयी....

हमने अपना इंट्रो दिया...

कुछ hi देर में मैं गेट ओपन हुआ...

कार गेट ने एंटर कर गयी....

पूरा घर रौशनी से जगमगा रहा था....

देखने में बहुत बड़े रईस का घर लग रहा था....

अंदर जाकर हमें इस चमक धमक और रुतबे का कारन पता चला....

क्युकी सृजल, मला. रणधीर श्रीवास्तव की एकलौती बेटी थी.....

सृजल की माँ की डेथ कई साल पहले हो चुकी थी....

रणधीर श्रीवास्तव का एक मात्रा सहारा सृजल hi थी....

िस्सकिये वह उसे बहित प्यार करता tha......Har एक ख्वाहिश पूरी करता था....

पूरा हॉल क Khacha-khach भरा हुआ था.....

काफी लोगों को इन्विते किया गया था....

हम सब वहीँ साइड में खड़े....

सृजल के आने वेट कर रहे थे....

तभी हॉल की लाइट्स ऑफ हो गयी...

म्यूजिक की धुन बजने लगी...

तभी फ्लैशलाइट जाकर एक जगह पर जाकर रुक गयी....

रेड फ्रॉक में एक खूबसूरत लड़की.... साथ में, थ्री पीेछे सुईठे पहने... एक लड़का....

दोनों हलके हलके क़दमों के साथ स्टेज के पास रखे केक की तरफ बढ़ने लगे....

1...2...3....4...5...

कैंडल्स बुझ गयी..... केक कटा...

पहला निवाला हमारे दोस्त अंकित सर को....

दूसरा निवाला मला सर को....

हम सब दूर खड़े... ये सब देख रहे थे....

पास जाने की हिम्मत न हो रही थी...

एक तरफ कह रही थी...

तुम सबके के बिना केक कट नहीं करुँगी.... दूसरी तरफ यहाँ का यह हाल....

थोड़ा शॉकिंग लग रहा था....

और आलोट साहब का यूँ साथ होना...

एक इशारा दे रहा था.....

मैं अपनी सोंच में गम था की....

तभी माइक की आवाज़ सुनकर मेरा ध्यान स्टेज की तरफ...

मला सर - जी है आपने सही सुना.....

आज के खूबसूरत दिन पर...

मैं अपनी बेटी की इंगेजमेंट अपने दोस्त A.C.P. नवीन मिश्रा के बेटे आलोट मिश्रा से फिक्स करता hi....

आज का दिन मेरे लिए डबल ख़ुशी का दिन है....

सो Let's एन्जॉय पार्टी....

आज तो शॉक के ऊपर शॉक लग रहे थे....

एक तरफ सृजल के पापा मला..

अंकित के पापा ैप...

वहीँ दूसरी तरफ बर्थडे सेलिब्रेशन के जगह इंगेजमेंट का अनाउंसमेंट....

दोनों ने तो हमें अपने बारे में कुछ बताया hi नहीं...

न hi इस सरप्राइज के बारे में....

सबका हाल मेरे जैसे hi था.....

खैर हम सब बातों को दरकिनार कर....

पार्टी एन्जॉय करने लगे... आपस में मिलकर.....

अभी हम आइस क्रीम का लुत्फ़ उठा रहे थे....

की तभी सृजल की आवाज़ हमारे कानो में पड़ी.....

""ी रिपीट, "हयान, अन्य, जिन, अखिल और माहि जहाँ भी स्टेज पर तशरीफ़ लाएं...""

देर लगी.... लेकिन आखिरकार हमारी याद आ Hi गयी....

आइसक्रीम को बीच में hi छोड़कर हमने अपना रुख स्टेज की तरफ कर दिया....

हम सबने बरी बरी से दोनों को कोंग्रटुलते किया....

सृजल - मैं तुम सबका कब से वेट कर रही हु.....

बूत तुम सब न जाने कहाँ गम थे....

अन्य - हम तो बहुत पहले hi यहाँ आ गए थे....

बूत यहाँ सब अनजान थे... सो हम सब दूर से hi एन्जॉय कर रहे थे.....

सृजल - मन मैं बिजी थी...

बूत तुम सब तो फ्री थे....

मेरे पास तो आ hi सकते थे.....

अन्य - It's ok.. अब तो आ गए न...

सब छोड़...

पहले अपने दूल्हे राजा से तो मिलवा दे....

सृजल एकदम से शर्मा गयी....

सृजल - अच्छा सब मेरे साथ चलो...

मैं तुम्हें अपनी फॅमिली से इंट्रोडस करवाती हो....

सबसे पहले Srijal's डैड...

फिर Ankit's डैड...

और Ankit's माँ... प्रभा मिश्रा....

सबसे एक एक करके हम मिले...

सृजल ने.... हमें कॉलेज फ्रेंड्स और तोप्पेर्स कहकर सबसे इंट्रोडस किया....

सब हमसे मिलकर बहुत खुश हुए...

सृजल और अंकित को अपने साथ लेकर... हम पार्टी एन्जॉय करने लगे...

थोड़ा डांस.. थोड़ा सॉफ्ट ड्रिंक्स...

जब थोड़ा थक गए...

तो हम सब सृजल और अंकित को घेरकर बैठ गए....

अन्य - सृजल अब बता न यार.. ये सब कैसे हुआ....??

सृजल - अभी रहने दे...

कल कॉलेज में सब समझ दूंगी....

बिट प्रॉमिस करो.. सब

कॉलेज में इंगेजमेंट की न्यूज़ नहीं फैलनी चाहिए....

मैं - नहीं फैलेगी...

लेकिन दूल्हे राजा हमारे हाथों से नहीं बचने वाले...

इतनी बड़ी बात.. हमसे छिपाई....

तुम से तो कल hi ठीक से मुलाक़ात होगी.....

हम सब काफी देर बैठे हंसी मजाक करते रहे....

पार्टी ख़त्म होते होते... रात के 10:15 हो गया....

तभी दादू की मिस कॉल आयी....

मैं - अच्छा तो अब हम इजाज़त चाहेंगे....

वक़्त भी काफी हो गया है....

अब हमें चलना चाहिए....

हम फिर से बरी दोनों कपल्स से मिले... उन्हें मुबारक बाद दी...

कल कॉलेज में मिलने को कहकर....

वापस अपनी कार्स की तरफ चल दिए.....

अभी हम कार्स के पास पहुंचे hi थे की....

अचानक जोरर से बदल गरज़ उठा....

और तेज़ हवा बहाने लगी....

अचानक मौसम एकदम सुहाना हो गया.....

""वाओ ! कितना खुशनुमा मौसम है....

चलो न पैदल चलते है, घुमते huye..."",Any बोली....

जिन - मन तो मेरा भी कर रहा है.....

बूत क्या हम ऐसे जा सकते हैं.... पैदल... वो भी इतनी दूर....

दादू - नहीं.. कोई नहीं कहीं जा सकता...

ऐसे पैदल....

मैं - दादू ! क्यों न मैं ड्राइव करूँ कार...??

दादू - बाबा ! रात काफी हो गयी है....

सून सां रास्ता है .

ऐसे आपका ड्राइव करना ठीक नहीं रहेगा....??

मैं - दादू, तभी तो कह रहा हु ड्राइव करने को...

क्यूंकि रास्ता कजली है....!!

देखो न मौसम भी कितना अच्छा है....

ऐसे मौसम में गिलास खोलकर कार ड्राइव करने का अपना Hi मज़ा होता है....

दादू - मैं ऐसा नहीं कर सकता...

सर का आर्डर है....

अगर आपको हवा hi खानी है तो कार की छत ओपन कर देता हु..

आप खड़े होकर मौसम का लुत्फ़ उठा सकते है.......

मुझे भी दादू, की बात ठीक लगी....

मैं - Okay No प्रॉब्लम ! ये भी मस्त आईडिया है....

मैं कार की छत खोलकर बहार की ठंडी हवा का आनंद लेने लगा....

मेरी देखा देखि में अन्य भी आकर मेरे साथ खड़ी हो गयी....

और जावा में हाथ लहराते हुए....

जोरर जोरर से उह्हू ुहुओ चिल्लाने लगी....

हम दोनों को ऐसा करते देख... सबके चेहरे में मुस्कान फ़ैल गयी....

तभी जिन निचे से मेरे पेट में Gud-gudi करने लगी...

जिसके कारन मुझसे खड़ा न रहा गया....

मैं हँसते हुए निचे बैठ गया.....

और जिन! की छोटी को पकड़ के खींच ने लगा....

जिससे वह दर्द में चिल्लाने लगी...

""कोई मुझे बचाओ... इस बाँदा से...""

तभी अचानक.... एक जोरर का झटका लगा...

अन्य! धम्म से निचे आकर मेरे ऊपर गिर्र गयी.....

और दर्द से कराहने लगी....

आज कलिये बस इतना hi..


-----

--------

-----------


लाइक्स, कमैंट्स, वोट्स और रिव्यु का रखना Dhyan....Aapka दोस्त हयान..!!
 
Update..No..73*

MeGa..UpDaTe

Abb..Takk...

जिन निचे से मेरे पेट में Gud-gudi करने लगी...

जिसके कारन मुझसे खड़ा न रहा गया....

मैं हँसते हुए निचे बैठ गया.....

और जिन! की छोटी को पकड़ के खींच ने लगा....

जिससे वह दर्द में चिल्लाने लगी...

""कोई मुझे बचाओ... इस बन्दर से...""

तभी अचानक.... एक जोरर का झटका लगा गाड़ी को...

अन्य! धम्म से निचे आकर मेरे ऊपर गिर्र गयी.....


और दर्द से कराहने लगी....

Abb...Aage...

अचानक अन्य! के यूँ गिरने से मैं घबरा गया....

उसके दर्द में होने का अहसास पाकर मेरी तो जैसे जान hi हलक पे आ गयी थी...

झट से अन्य! को संभलकर सीट में बिठाने लगा.....

मैं अन्य के फेस को अपने दोनों हाथ से पकड़ते हुए....

मैं - क्या हुआ... कही चोंट तो नहीं लगी...

मेरे ऐसा करने से अन्य! की सिसकारी निकल गयी....

मैंने अपना हाथ अन्य! के फेस से हटाया.....

खून.... मेरा हाथ पर अन्य! का खून लगा हुआ था.....

अपने हाथों पर Any!Ka खून देख कर मेरे तो जैसे Tan-badan में आग सी लग गयी....

.ये पहली मर्तबा था की मैंने अन्य! का खून देखा हो...

अभी मैं गुस्से से आग बबूला हो hi रहा था की....

दर्द से चीखते हुए...

अन्य - हय्यू! यहाँ कोई है....??

मुझे बचाओ..

तभी एक पत्थर का टुकड़ा उड़ते हुए...

आकर फ्रंट गिलास पर लगा...

जिससे गिलास पर दरार पद गयी.....

अचानक ऐसा होने से सब घबरा ....

दादू ! का बैलेंस भी बिगड़ गया.....

जिससे गाड़ी इधर उधर भागने लगी....

मैंने तुरंत आगे बढ़कर स्टेरिंग पकड़ ली....

वर्ण अभी गाड़ी पलट जनि थी....

मैंने सबको शांत होने को कहा....

एयर सबसे पहले खुद के गुस्से पर भी काबू पाने लगा....

क्युकी यह वक़्त गुस्से से काम पीना का नहीं...

होशियारी से काम लेने का था....

मैं गुस्से ंविं कोई भी ऐसा वैसा कदम उठा कर सबकी जान को खतरे ंविं नहीं दाल सकता था...

मैं माहौल का जायज़ा लेने लगा....

परिस्थिति को समझने की कोशिश करने लगा....

लेकिन सिचुएशन बाद से बदतर होती नजर आ रही थी...

तभी फिर से एक पत्थर उड़ते हुए आया.... इस बार लेफ्ट गिलास को तोड़ते हुए.... सीधा अंदर घुश गया....

पत्थर दादू को लगता.... उससे पहले hi मैंने झट से उस पत्थर को पकड़ लिया....

और वापस उसी दिशा में फेंक दिया.....

तभी मैंने एक साये को उस पत्थर दूर हट्टे हुए देखा....

मैं - अन्य! खुद को हील करो....

दादू! आप पीछे आओ यहाँ से मैं गाड़ी चलाऊंगा.....

मैंने स्टेरिंग थाम ली...

और ड्राइवर सीट पर जा पहुंचा....

तभी पीछे वाली कार्स पर चरों तरफ से पत्थर बाज़ी होने लगी...

सब एक डैम डर गए... किसी को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था.....

की आखिर हो क्या रहा है....

और कौन हम पर अटैक कर रहा है...??

लेकिन मुझे सब समझ आ गया था....

की यह सब किसका किया धरा है.....

मैंने कुछ पल के लिए...

अपनी आँखें मूँद ली....

और एक मंत्र का उच्चारण किया....

मेरे ऐसा करने से मुझे सब नजर आने लगा....

इस वक़्त दो साये हमारा पीछा कर रहे थे....

और उड़ते हुए हम पर पत्थर से हमला कर रहे थे....

एक को तो मैंने पहले कभी नहीं देखा.......

लेकिन दूसरे को पहचानने में मुझे जरा सा भी वक़्त नहीं लगा......

मैंने दूसरे गाड़ी में बैठे रघु से खुद को कॉपी करने को कहा.....

मैं दोनों साये के हमले से खुद को बचता हुआ....

गाडी तेज़ी के साथ....

कभी लेफ्ट...

तो कभी राइट भागने लगा......

जिससे उनका निशाना खाली जाने लगा....

रघु भी शामे मेरी hi तरह.... गाड़ी को कुछ डिस्टेंस में रख कर.... लेफ्ट राइट करते हुए..... आगे बढ़ने लगा....

इस वात मुझे हनी की कमी बहुत खाल रही थी.....

काश अन्य न होती तो....

अभी इसी पल इनका काम तमाम कर देता....

पर इस वक़्त सबक सीखने से ज्यादा....

सबको सेफ करना सबसे जरूरी था.....

तभी एक साये ने अपनी चल बदल दी....

मेरी कार के सामने आते हुए.....

आग से फायर किया.....

इससे पहले की आग का गोला...

मुझे छूटा... मैंने झट से अपनी सील्ड एक्टिवटे कर दी...

जिससे एक सुरक्षा घेरा बन गया....

दोनों गाडी के चरों तरफ.....

जैसे उस आग के गोले ने सुरक्षा घेरे को छुवा....

आग का गोला वापस उड़ता हुआ....

जाकर उस साये को लगा... जिसने यह हमला किया....

वह साया आग में जलने लगा.....

तभी दूसरा साया जोरर से चिल्लाया..... ""नरकिस्सा....""

हम्म "नरकिस्सा" hi थी... हम पर हमला करने वाली.... जिसपर आज दोपहर hi मैंने रहमदिली दिखाई थी....

जिसका सिला मुझे अब मिल रहा है...

मैं एक बार फिर गलत साबित हुआ... किसी को यूँही माफ़ी देकर...

पर मैं शायद गलत था...

अब मुझे अपने फैसले को बदलना होगा....

सबको उनके किये की सजा मिलनी चाहिए...

यूँही अपनों का खून नहीं बहने दे सकता...

मैंने तुरंत गाडी रोक दी...

मैं - कोई भी बहार नहीं निकलेगा.. जब तक की मैं न कहूं...

इसे मेरी वार्निंग समझियेगा !!

दादू - लेकिन बाबा! बहार बहित खतरा है...

तुम अकेले ऐसे कैसे जा सकते हो..

मैं भी चलता हु..??

मैं - खतरा बहरा नहीं.. अंदर था.. अब तक...

जोकि अब अपने आप से बहार आ गया है...

अन्य - हय्यू! घर चलो....

बाद में देख लेंगे... अभी नहीं...??

मैं - अभी नहीं तो कभी नहीं...

आपसे रिक्वेस्ट है.. चाहे कुछ भी हो गाडी से बहार नहीं निकलोगे आप...!!

इतना कहकर मैं गाडी से बहार आ गया... कार को लॉक कर दिया....

मैंने दूसरी गाडी के पास जाकर यही इंस्ट्रक्शन दिए....

मैं मन्त्रों का उच्चारण करते हुए,

कुछ दूर चलता हुआ आगे गया....

और हवा में एक फूंक मार दी....

""घायल नरकिस्सा जमीन पर तड़प रही थी...

दूसरी उसे ठीक करने की कोशिश कर रही थी""

मुझे अपने करीब आता हुआ देख....

दूसरे साये ने अपन ा हाथ हवा में लहरया...

दोनों एक पल के लिए गायब हो गए...

लेकिन दूसरे hi पल एक जोररदर चींख के साथ दोनों जमीन पर गिरे पड़े थे...

मैं- इतना आसान नहीं है.. मेरे रचे जाल को तोड़ पाना....

""तुम भली भांति परिचित थी मुझसे.... नरकिस्सा, फिर ऐसा यह दुस्साहस कैसा....

क्या सोंचकर तुमने मुझपर हमला किया.....

""जिसमे मेरी जान बस्ती है.. उसका खून बहाया""

कहो क्या सजा मिलनी चाहिए.... उस गुस्ताखी की....

""हमें जाने दो... ौसा फिर कभी नहीं होगा...??"" 'नरकिस्सा बोली...

मैं - इतना घटिया काम करने के बाद भी मुझसे माफ़ी की उम्मीद रखती हो.....

ऐसे कैसे जाने दे सकता हु...

कोई न कोई सजा तो मुलनि चाहिए.... हम्म मौत की सजा मुक़र्रर की जाती है तुम दोनों के जुर्म की...

मैं हवा में अपने हाथ को जोरर जोरर से घूमने लगा......

जिससे वह हवा पर एक होल जैसा वणने लगा ......

नरकिस्सा - नहीं ऐसा मत करो...

हमें माफ़ कर दो... बदले में जो तुम कहोगे वैसा होगा.....

ओर मैंने उसकी एक न सुनी.. अपनी क्रिया जारी राखी....

धीरे धीरे वह होल बड़ा होता गया.....

नरकिस्सा - तुम चली जाओ.. सक्कूबी.... शायद मेरा अंत आ गया है.?

लेकिन तुम... मेरी शक्तियों के जरिये बच सकती हो....

वर्ण यह होल तुम्हें निगल जायेगा...??

सक्कूबी - मैं तुम्हें इस हाल में छोड़ कर नहीं जा सकती...

तुम्हें मेरे साथ चलना होगा....

नहीं तो मैं भी नहीं जाउंगी....

चिल्हते हुए.....

नरकिस्सा - यह वक़्त बहस का नहीं...

सही कदम उठाने का है..

और सही फैसला है की तुम खुद की जान बचाओ....

होल ने अपना विशाल रूप धारण कर लिया....

किसी भी वक़्त निगल जाने को रेडी था....


सक्कूबी - नहीं.. मैं ऐसे हार मानकर भाग नहीं सकती...

हमें उसका सामना करना होगा....??

नरकिस्सा - बेवक़ूफ़ मत बनो... हम उसका अब कुछ नहीं कर सकते....

उसने अपनी काली शक्तियां छिपा राखी है....

वाइट पावर से सामना करने की ताक़त हम में नहीं है...


नरकिस्सा - अब जाओ भी....

सक्कूबी के पास बात मैंने के शिव और कोई चारा नहीं बचा....

नरकिस्सा ने अपना हाथ सक्कूबी के सीने में रखा.... और एक तेज़्ज़ धक्का दिया....

जिससे सक्कूबी एक छोटे से रौशनी के गोले के रूप में आसमान की तरफ उड़ गयी....

इधर होल ने नरकिस्सा को अपनी गिरफ्त में ले लिया....

नरकिस्सा दर्द में चिल्लाने लगी.....

लेकिन हयान ने इस बार कोई रहें दिली नहीं दिखाई.....

धीरे धीरे नरकिस्सा एक काले धुएं में परिवर्तित हो गयी...

और आकर हयान के लेफ्ट हैंड में समां गयी.....

""स्वागत है तुम्हारा... मेरी दुनिया में जान - इ - मैं""

मैं - अब तो तू खुश है न...

अब तू अकेला नहीं रहा.... तेरा साथ निभाने वो आ गयी है....

मजे कर...

हनी - शुक्रिया दोस्त ! आज तूने बिलकुल सही फैसला लिया है....

अब देखना इसके जरिये.. मैं क्या खेल खेलता हु.....

सबकी बारी आएगी... कोई नहीं बचेगा.....??

मैं - ज्यादा खुश मत हो...

मेरे इंस्ट्रक्शन का वेट कर....

क्या करना है.. कैसे करना है.. मैं तुझे बताऊंगा....!!

मैं वापस गाडी की तरफ चल दिया....

जैसे Hi दरवाजा खोला... अन्य! मुझसे लिपटकर रोने लगी....

मैं - अब सब ठीक hai.....Sab भाग गए.....

आपको किसी से डरने को जरुरत नहीं मैं हु न.....

अन्य! ख़ामोशी के साथ मेरे गले लगे सुबकने लगी.....

मैंने दादू को गाड़ी आगे बढ़ने को कहा.....

दादू - हयान बाबा ! आप ठीक तो है न...

कहीं चोट तो नहीं लगी....

मैं - मैं ठीक हु, कुछ नहीं हुआ....

आप गाड़ी को सीधे घर ले चलो.....

दादू - लेकिन बाबा.. आखिर कौन थे वो लोग कहा गए....??

मैं - जिसे जहाँ जाना तो.. हसे उसके अंजाम तक पहुंचा दिया है...

बस आओ सभी से एक रिक्वेस्ट है....

अभी जो भी हुआ है..

उसका जीकर घर पर न हो....

दादू - बाबा कहीं आप गलती तो नहीं कर रहे...

बातों को राज Rakhna....Kahin किसी बड़ी मुसीबत को बुलावा तो नहीं दे रहे....

मैं - मैं कोई काम.. बिना सोंचे समझे नहीं करता..

मेरे फैसले दूरदर्शी है...

आपको ज्यादा टेंशन लेने की जरुरत नहीं.....

यूँही बात करते हुए... हम अपने घर पहुँच गए...

रात के 11 बज रहे थे... डिनर तो हो hi चूका था...

इस्सलिये हम सभी अपने अपने रूम चल दिए....

सोने के लिए.....

मैं बाथरूम चल दिया.. फ्रेश होने और कपडे चेंज करने..?

""क्या खबर मिली है दोस्त....

काम हुआ या नहीं....??

""हॉंकॉंग.... एहि मिलेगा... हमारा नेक्स्ट टारगेट....""

मैं - तो चलो.... कल करते है शिकार""


आज कलिये बस इतना hi..

-----

--------

-----------


लाइक्स, कमैंट्स, वोट्स और रिव्यु का रखना Dhyan....Aapka दोस्त हयान..!!
 
Update..No..74*

MeGa..UpDaTe

Abb..Aage...

""अब एक भी शब्द मत बोलना...

चुपचाप आँखें बंद करो... और ध्यान लगाओ..."" 'अन्य बोली'

मैं ख़ामोशी के साथ अपने दोनों हाथो को जोड़कर ईश्वर से Sukh-Samridhi की प्रार्थना करने लगा.....

अन्य - अब तुम आँखें खोल सकते हो...

मैंने अपनी आँखें खोल दी...

और हसरत भरी निगाह से अन्य! को देखने लगा.....

अन्य - तुमसे न जरा सा भी सब्र नहीं होता,

बताती हु.. सब बताती हु,

पहले पूजा तो ख़त्म कर लेने दो.....

अन्य ने पार्षद की थाली उठायी, थोड़ा सा परिषद मुझे खिलाया... फिर मेरे माथे पर एक छोटा सा तिलक लगा दिया.....

मुस्कुराते हुए....

मैं - बास हो गया या फिर अभी भी कुछ बाकि है....

पता नहीं तुम्हारे दिमाग में क्या क्या चलते रहता है....??

अन्य - है सब हो गया है...

दिल का तो पता नहीं....

लेकिन दिमाग की बातें तुम बखूबी समझते हो... और जानते भी हो...

मैं तुम्हें क्यों लायी हु..

इसका भी तुम्हें पहले से पता है...

क्यों सही कहा न...??

मैं - हम्म सही कहा...

लेकिन मैंने कभी भी आपके मन में झाँकने की कोशिश नहीं की... और न hi कभी करूँगा...

फ़िलहाल अभी मुझे बस इतना बता दो...

इतनी सुबह सुबह मुझे मंदिर क्यों लेकर आये हो....??

अन्य - वो इस्सलिये की...

मुझे तुमसे कुछ जानना है...??

मैं - अगर कुछ जानना hi था तो घर में भी तो पूछ सकते the....Yaha लेन की क्या जरुरत थी...

अन्य - जरुरी था...

क्युकी यह मंदिर hai...Pavitra जगह,

यहाँ कोई भी झूट नहीं बोलता....

अगर मैं तुमसे घर में पूछती तो तुम हमेशा की तरह गोल गोल घुमा देते....

मैं - कैसा सच जानना है.. ??

अन्य - हर एक सच.. जो भी तुम मुझसे छिपाते चले आ रहे हो....

मैं देख रही हु आज कल तुम हय्यू! होकर भी नहीं हो....

तुम्हारी ज़िन्दगी के पहलु में बहित से राज़ छुपे हुए हैं.. जो की अब तुम मुझसे छिपने लगे हो...

मैं - मैं आपका हय्यू! hi हु.... बस कुछ सवालों के जवाब ढूंढ रहा हु...

सोंचा था जब सब जवाब मिल जायेगे .. तो आपको भी सचाई से आगाह कर दूंगा....

अन्य - तो क्या जवाब मिले.....??

मैं - मिले भी और कुछ नहीं मिले..

अन्य - अच्छा ठीक है . जब जवाब मिल जाये तब बता देना......

फ़िलहाल अभी ये तो बता दो....

कल रात क्या हुआ tha....Wo दोनों कौन थे...??

मैं - एक शर्त पर बताऊंगा.....

पहले आप वडा करो जो भी कहूंगा..

ुसस्पर ठीक तरीके से अमल करोगे...??

अन्य - ऐसे कैसे वडा कर दू...

जबकि मुझे पता न हो की तुम क्या कहोगे....??

मैं - तो फिर रहने देते है... घर चलते है...

अन्य - नहीं.. नहीं.. मुझे सच जानना Hai.....Chahe कोई भी शर्त हो...??

मैं - ठीक है अच्छा सुनिए....

""कल आप पर उसी लेडी नरकिस्सा ने हमला किया था...

जो उस दिन कॉलेज में मुझसे मिलने आयी thi......Wah कोई इंसान नहीं... बल्कि एक शैतान थी... बुराई की पूजा करने वाली..

उसने शर्त राखी थी.. की मैं उसका साथ दू.

वर्ण वह मुझे अपना जैसा बनाने का प्रयत्न करेगी...

मैंने उसकी बात मैंने से इंकार कर दिया...

इस्सलिये उसने अपने साथी के साथ मिलकर .. यह खेल खेला...

लेकिन वह मेरी शक्तियों से अनजान थी...

इस्सलिये अपने hi बने गए जाल में खुद hi फंस गयी....

लेकिन उसकी दोस्त बच निकली...

जिसका मुझे डर है की वह आपको जरूर नुकसान पहुचायेगी...

क्यूंकि मेरा तो कुछ बिगाड़ नहीं सकती...

इस्सलिये जो सकता है अब वह आपको मोहरा बनाएगी....

बस इसीलिए मैं आपसे वडा चाहता हु.. की आप मेरी बातें मने....

अन्य - ओह्ह तो ये बात थी....

लेकिन दूसरी वाली कहाँ गयी.....??

क्या वह अभी जिन्दा है....??

मैं - हम्म जिन्दा है... लेकिन अब वह मेरे काबू में है...!!

अन्य - क्या वैसे hi.. जैसे हनी काबू में है....??

शॉक होते हुए...

मैं - क्या....??

अन्य - एहि की हनी और तुम एक जिस्म दो.. आत्मा हो,

(मेरा हाथ पकड़ते huye)Yeh टैटू उस्सकी निशानी है.....

शॉक होते हुए... यह टैटू इतना भयानक कैसे हो गया....??

पहले तो ऐसा नहीं था....??

मैं - इस्सलिये क्यूंकि.. अब इसमें होनेह के साथ साथ नरकिस्सा भी समायी हुयी है...

बूत छपने कद बारे में आपको कैसे पता चला... क्या आपने मेरी जासूसी की....??

अन्य - No.. भला मैं कैसे जासूसी कर सकती हु...

जबकि तुम्हें पता है की छपने कभी भी मेरी मौजूदगी पर सामने नहीं आ सकता.....??

मजन - ओह्ह तो आपकी साड़ी सचाई पता चल चुकी है...

बूत कैसे.....??

अन्य - तुम्ही ने तो कहा था... देवी माँ से पूछ लेना....

सो पूछ लिया...!!

मैं - हम्म तो यह बात है...

जब आपको सब सचाई पता है तो फिर मुझसे क्यों....??

अन्य - वो इस्सलिये क्यूंकि.. मैं देखना चाहती थी की तुम मुझे क्या सच बताओगे....

बूत तुमने आधा Hi सच बताया.. जो की मेरे साथ ठीक नहीं किया...??

मैं - कुछ सच बहित कड़वे होते है...

बूत मैंने ये भी तो कहा था... की देवी माँ से पूछ लेना...!!

अन्य - अच्छा ठीक है...

हम दोनों अपनी जगह ठीक है.....

बताओ मुझसे कैसा वडा चाहते हो....??

मैंने अन्य! के दोनों हाथ थाम लिए....

मैं - क्या देवी माँ ने भविष्य से अवगत नहीं करवाया आपको...??

अन्य - कैसा भविष्य....??

मैं - हमारा आने वाला कल.....??

अन्य - नहीं मुझे ऐसा कुछ भी नहीं बताया...??

मैं - ठीक है... मैं बताता हु...

बस याद रहे.? मुझपर कभी अपना विश्वाश टूटने मत देना....??

अन्य - मैं वडा करती हु... चाहे जैसी भी परिस्थिति आये... मेरा विश्वास कभी काम नहीं होगा....!!

मैं - तो सुनिए सच
......

____________________________

वहीँ दूसरी तरफ....

बूम... एक तेज़ धमकहर तरफ धुआं फ़ैल गया....

बुमलीन जो ध्यान में बैठा अपनी शक्तियों को बढ़ा रहा था....

अचानक से ऐसा धमाका होने से वह घबरा gaya.....Aur थोड़ा दूर जा गिर्रा...

तभी किसी के दर्द में कराहने की आवाज़ आयी...

बुमलीन का ध्यान इन सब से भांग हो गया....

""उसे बचा लो वर्ण वो उसे मार देगा..."" बस इतना बोलकर सक्कूबी बेहोश गयी.....,

बुमलीन भागते हुए सक्कूबी के पास जा पहुंचा....

""तुम्हारी यह हालत की किसने.... काईन किसे मार डालेगा....""

सक्कूबी होश में होती तो कोई जवाब देती...

कोई जवाब न मिलने पर.... बुमलीन समझ गया.. कुछ तो बड़ा कांड हुआ है...

उसने अपना हाथ सक्कूबी के सर पर रखा.... और अपनी आँखें बंद कर ली....

नरकिस्सा और सक्कूबी के साथ जो भी हुआ...

सब फिल्म की तरह उसकी आँखों में दौड़ने लगा.....

अंत देख कर बुमलीन जोरर से गुस्से ने चींख उठा......

""नरकिस्सा""

पर अब चीखने का क्या फायदा.....

जिसे जहँ जाना था वो तो कब का जा चूका है.....

सर पर हाथ रखे रखे कुछ बफ्बुड़ाने लगा....

जिससे सक्कूबी के जख्म भरने लगे.....

और वह पहले के जैसे नार्मल होने लगी.....

सक्कूबी जोरर से "नरकिस्सा" कहते हुए होश में आ गयी......

""क्यों किया तुम दोनों ने ऐसा....

क्या तुम्हें अंजाम नहीं पता था की क्या हो सकता था...

देखो क्या से क्या हो गया तुम दोनों की लापरवाही की वजह से.. आज मैंने अपना एक साथी खो दिया.....""

कुछ बोलती क्यों नहीं जवाब दो....

अब भल सक्कूबी क्या जवाब देती..

उसने तो बस नरकिस्सा का साथ दिया....

जो की अकेले हयान पर अटैक करने का देशन ले चुकी थी...

मूर्ख लोग अक्सर ऐसी hi गलती करते है जल्दबाजी में....

हयान तो उसे एक और मौका दिया था...

ऐसे hi छोड़कर लेकिन... नरकिस्सा अकाल की अंधी उसे उसमें भी खुद की बेइज्जती लगी.....

तो अंजाम तो होना hi था ऐसा...!!

सक्कूबी - मैंने कुछ नहीं किया.... यह सब नरकिस्सा ने किया....

मैं तो बस उसका साथ देने गयी थी...

मैं उसे नहीं बचा सकीय... उस शैतान ने उसे निगल लिया.....

मेरे दोस्त को उसने मार डाला...

मैं उसे नहीं छोडूंगी... इसका बदला लेकर रहूंगी....

जो भी उसने किया hai....Uska अंजाम सम्प्पोर्ण मानव जाती को भुगतना होगा...

तभी मेरा बदला पूर्ण होगा...!!

बुमलीन - बस एहि गलती नरकिस्सा ने भी की थी...

जल्दबाजी में फैसला करके...

कोई तो वजह रही होगी मेरे और मालिक के शांत रहने की...

लेकिन तुम दोनों से जरा भी धैर्य नहीं रखा गया.....

और देखो कैसे तबाह कर दिया सब तुमने....

तुम दोनों ने उस पर हमला करके अपनी मौत को दावत दे दी है....

अब वह शांत नहीं बैठेगा.....

उसका अगला शिकार तुम बनोगी....

सक्कूबी - मैं नहीं डर्टी उससे....

भले hi वह ताक़तवर है...

लेकिन हर ताक़तवर की एक कमजोरी होती है...

और उसकी कमजोरी है.... उसकी फॅमिली...!!

मैं भले hi उसका कुछ न बिगाड़ सकू.... लेकिन एक ऐसा जख्म दूंगी... जिसे वह ज़िन्दगी भर याद रखेगा....!!

बुमलीन - कुछ नहीं करोगी तुम...

चुपचाप जाकर छिप जाओ...

इससे पहले वह तुम्हारे जरिये हमारी जड़ तक पहुँच जाये....

सक्कूबी - लेकिन मैं ऐसे कैसे छिप जॉन..

जबकि वह बेफिकर होकर जिए.....

मौत का हिसाब तो देना hi होगा....??

बुमलीन - अभी सही वक़्त नहीं आया हिसाब बराबर करने का.....

बस एहि एक छोटी वजह नहीं है...

उसकी मौत का प्राण हम सब ने उसके जन्म के समय hi ले लिया था....

किन्तु महामहिम की वजह से हम अभी शांत है....!!

सक्कूबी - ऐसी क्या वजह थी जो अभी तक उसको जिन्दा छोड़ा है...

जिसकी वजह से महामहिम को काल कोठरी में जाना पड़ा...

वो मज़े से जी रहा है...

मैं तो कहती हु सांप को अभी कुचल दो... इससे पहले की वह और जहरीला हो जाये...??

बुमलीन - तुम बेवक़ूफ़ हो.. या फिर नादाँ बन रही हो...

जो काम महामहिम ने नहीं कर पाए...

वो भला हम कर सकते हैं...

कुछ तो जरूर गहरा राज होगा उसको जीवित रखने का.....

इस्सलिये मेरी मनो... अपने बदले की भावना को शांत रखो...

और उसे हम तक पहुंचने मत दो...!!

सक्कूबी - ठीक है अभी तो मैं उसको हाथ नहीं लगाउंगी..

लेकिन जिसके लिए वह मसीहा बनकर पैदा हुआ है... उन्हें मैं तड़पा तड़पा कर मरूंगी...

बुमलीन - बेहतर होगा की तुम उन्हें शैतान योनि में परावर्तित करने पर ध्यान दो...

इससे हमारा दुश्मन कमजोर होता जय
ेगा....

और हमारी सेना का विस्तार भी होगा....!!

सक्कूबी - हम्म देखती हु मुझसे क्या हो पता है...!!

____________________________


अननोन प्लेस...

""गुरुवार! और कितना समय बचा है उसके पास... क्या इस नियति को बदला नहीं जा सकता...??

अभी तो उसने ठीक से दुनिया देखि भी नहीं""

गुरुवार - शिष्य! नियति को कोई नहीं बदल सकता...

नियति कब कौन सा खेल खेल दे किसी को कुछ नहीं पता...

शिष्य - किन्तु यह तो गलत है...

इसमें भला उसकी क्या गलती...

वह तो सबकी भलाई चाहता है..

फिर उसके hi साथ इतना बुरा क्यों....??

गुरुवार - ईश्वर की लीला अपरम्पार है...

उसे समझ पाना हम सबके बस की बात नहीं...

बस इतना समझ लो....

जो भी होता है अच्छे के लिए होता है...!!

शिष्य - जैसा आप कहे गुरुवार !

सत्य hi शिवा है.. शिवा hi सत्य....!!

""उसकी कथनी और कहनी में बहित अंतर है...!!""


आज के लिए बस इतना hi..

-----

--------

-----------


लाइक्स, कमैंट्स, वोट्स और रिव्यु का रखना Dhyan....Aapka दोस्त हयान..!!

images-2020-04-14-T165217-371.jpg


हयान लेफ्ट हैंड टैटू...
 
Update..No..75*

MeGa..UpDaTe

Abb..Takk..

अब तक आप सभी ने पदह... हयान अन्य को भविष्य की झलक दिखता है....

और कोई वडा लेता...

वही दूसरी तरफ... सक्कूबी हयान से बदला लेने का प्राण लेती है...

और मानव जाती के विनाश की िक्षा प्रकट करती है...

जबकि बुमलीन उसे सही वॉट आने तक शांत रहने का सुझाव देता है.....


वहीँ दूसरी तरफ गुरुवार और शिष्य भविष्य के किसी खतरे पर वार्तालाप करते हैं....

Abb...Aage...

""Tu Janta Nahi Main Kaun hu...

Agar Janta hota to Shayad Mujhe Rokne ki Tujh Mein Himmat Nahi hoti..""

Main - Dekh Bhai..

Tu jo bhi ho mujhe Usse Fark Nahi Padta....

Fark Padta hai to Bas Iss baat se ki ye jo tum kar rahe ho... Wo Galat hai... Anyay hai...!!

Ladka - Kaun hai ye teri... Jiske liye tu.. Mujhse bhidne chala aya....

Ye bhi Nahi soncha ki Iska Anjaam kya ho sakta hai...??

Main - Inka aur Mera Insaniyat ka Rishta hai...

Main Kisi bhi Mazloom par Julm hote nahi dekh sakta....

Agar Apni Jaan Pyari hai to In dono ko chhod do....

Ladka - Nahi Chhodta ja..

Tujhe jo ukhadna hai Ukhaad le....

Zin - Hayaan ! Tum iss tuche ko Bardasht kyun kar rahe ho..

Isse bahas karna bekar hai..

Kuchh log baat se naho Laat se samjhte hai....

""Kya boli Saali.... Teri Itni himmat, Tujhe to main Beech sadak mein ......""

Aage Kuchh Bolta isse Pahle hi Zin! ne Ek jorrdar Kick Uss ladke muh mein Jad di....

Ahhh.. Mar dala re....

Bacho...

Ladka - Kisi ko mat Chhodna pakad lo... Sabko... Koi Jane na paye....

Iss waqt Uss Ladke ke Saath 7 aur log the....Jo Hamein Charon Taraf se Gherkar Khade ho gaye...

Main - Any ! Zin ! Tum in dono Ko Lekar Yahan ke Nazdeek Hospital Pahuncho....Tab Tak Main Inse Nipat kar Aata hu...

Any - Nahi.. Main Tumhein Akele Chhodkar Nahi Jaungi....

Chalenge to Saath Ho Warna Koi Nahi....

Main - Any ! Ye kaisi Zid hai Aisi Situation mein....

inka Hospital Jana Bahit Jaruri hai....

Issliye tum Dono Na jao.. Zidd na karo...

Any - Tum jo bhi Samjho... But Main Nahi Jaungi....

Agar Tumhein Jana hai to jao... Inehein To Main Akele hi dekh lungi...

Zin bhi Mere Saath Ruk jayegi....

Main Samajh Gaya ki Any ! Nahi Jane wali....

Koi Na koi Tikdam to Karna hi hoga...

Warna Iss ladki ki Jaan bhi Chali Jayegi.. Jub Main Inn Lafangon se ladunga....

Ladka - Are Mera Mih Dekh Kya Rahe ho... Maro Inehin...

Main - Tujhe Bahut Jaldi hai Maar Khane ki... thoda Thahar Ja Hum Baat Kar Rahe Hain Na...

Ladka - Teri To Main....

Aage Bafhkar Jaise Hi Mujhe Marne ko hua....Maine Uska Haath Beech mein Hi Rok liya....

Aur Apne Hathon ki Pakad Mazboot Kar di....

Jisse Wah Dard se Chhatpatane laga....

Ayiiiiii Chhod mera Hath... Toot Jayega...

Sale Bhadvo.. Kya Aise Tamasha dekhne ke liye Saath Lekar Chalta hu...

Mujhe Bachao.....Haramiyyyyyyon.. Aaahhahha

Maine Haath ko Marod diya....

Kat Kat... Katakkkkk.... Chatttak...

Oyiii Maaaa Tod diya Re.....

Apne Dost Ki Aisi Halat Dekh kar Sab Meri Taraf Bhage...

Jorr se Chillaya....

Makn - Any! In dono Ko Car mein Dalo...

Main Abhi Aaya....

Any Aur Zin Turant Dono Ko Uthakar Gadi mein Daalne lage....

Maine Uss Ladke Ke Sir Ko Apne Hatho Ke Beech Daba liya...

Main - Jisko bhi Apni Fikar Hai... Wo Yahan se Chala Jaye....

Warna Sabka Yahi Anzaam hoga....

Choice is Yours....

Par Kisi Ke Bhi Kaan mein Joon Tak Na Rengi... Sab Mujhe Gherkar Khade rahe...

Tabhi Kisi Ne Meri Peeth Par Peechhe se Laat Maari....

Mere Liye bhi Yahi Sahi Mauka tha.... Kyunki Any! Mujhse Kuchh doori par thi....

Maine Apna Bayan Haath Hawa mein Lahraya....

Sab Kuchh Wahin Tham Gaya.....Jo Jahan par the wahi Par Patthar ki Moorat ki tarah tham se gaye....

Main muskurate huye Chal diya Gadi Ki Taraf...

Aur Driving Seat Par Baithkar Gaadi Ko Full Speed Mein City Hospital ki Taraf Dauda di...

Any - In Sabko Kya hua..... Aisa Lag Raha Jaise Hipnotize ho gaye ho....

Hayyu! Kya Yeh Tumne kiya....

Muskurate huye...

Main - Nahi to..

Main Bhala Aisa Kyun Karunga.... Mujhe to Hipnotize karna Aata bhi Nahi....

Any - To Fir Ye Aise Barf ki tarah kyun Jame Pade hain....

Main - Jo Nahi Dekhna Chahiye tha....Woh Dekh liya...

Shayad siliye Aisa hai ..

Anyway Ye Sab Chhodo... Ye Batao.. Ye Sab Kaise hua...??

Kaun Hai dono....??

Any - Mujhe Inke Bare mein Kuchh Nahi Pata...??

Majn - To Fir Aap iss Jhamele mein Pade kaise...??

Dress se To Apne hi College ke students lagte hai...

Any - Darasal Hua ye tha ki....

Main Aur Zin, Park mein Tumhare Aane ka Wait kar Rahe the...

Wahi Side mein Yeh dono Khade Ice -cream kha Rahe the...

Fir Pata Nahi Kahan Se Ek Scorpio Aakar In dono ke Paas Aakar Ruki....

Ladki ko Jabardasti Gadi mein Daalne lage....

Ladke ne Bachane ki Koshish ki to Sabhi Milkar iss Ladke ko Peetne lage....

Aur Ladki se Badtameezi karne lage...

Hum dono se Yeh Sab Dekha Na gaya to Pahunch gaye Help karne...

Baaki Aage kya hua ..Sab Tumhare Saamne tha....

Main - Hmm...

Kya Apne Inki Talashi li.. Koi Pahchan Wgaiara mili.... Inke Parents ko bhi to inform karna Padega....??

Any - Dekhti hu.. Kya Pata Chalta hai....

Any! aur Zin dono ki Talashi lene lagi....

Zin - Mil Gaya.... Ye dekho...

Ye dono to Bhai Bahen hain...

Dono Ka College I'd tha ..

Dono B.A. 1st Year Ke in Students the...

Any - Hmm Ye dono Sibling hai.....But I'd mein Na To Address Hai Na Hi Contact No....

Hum inke Parents ko inform Kaise karenge....??

Main - Lao.. Mujhe dekhne do...

Maine I'd le li...But Unke bare mein Kuchh Pata Na Chala....

Sivay Naam ke...

Ladka - Bilal(बिलाल) s/o - Anwar Ali...

Ladki - Aafreen(आफरीन) D/o - Anwar Ali.....

Anwar Ali... Naam Padhkar Mujhe Kuchh Doubt sa hua....

Kahin Ye dono wahi to Nahi....??

Agar Maa Ka Baam bhi Likha hota to Shayad Confirm bhi Ho Jata.....!!

Itne Mein Hospital bhi Aa gaya....

Humne Dono ko Apna Friend introduce kar Emergency ward mein Bharti kar diya...

Ward mein Le Jate Samay... Ladki Ke Chehre Se Nakab Hat Gaya.....

Meri Aankhein Uske Chehre pe Thahar si Gayi....

Ye Pahla Mauka tha Jub Maine use dekha tha...

Ek Ajeeb Kashish thi.. Uske Chehre mein Jo Mujhe Baar Baar Apni Oor Akarshit Kar Rahi thi.....

Main Wahin Oar But Banakar Khada ho gaya.....

Apni Sonch mein Gum-sum....

Mujhe Hilate huye....

Any - To Kya Soncha hai... Kya Karna hai...??

Main - Karna Kya hai... Hosh Aane Par Khud Pata Chal Jayega.....

Zin - Hamein Kaafi Late ho gaya hai.. Dadu Pareshan ho Rahe honge....

Kahi Mom - Dad ko Inform na kar dein...

Main - Maine Dadu ! ko Msg de diya hai ki.. Hamein Aane mein late ho jayega...

Aisa Karo Tum dono Chale Jao.....Main Hosh Aane tak wait Karta hu....

Any - Wait Karne ki Kya Jarurat hai...

Main Dono ko Heal kar deti hu...

Saath mein Chalte hain....??

Waise Any! Ka Idea to Sahi tha....

Dono ke behosh hone ke karan Jahan Meri Power bekar thi... Wahi Any! Sab thik Karne mein Saksham thi...

Main - Kya Healing Karna thik hoga....

Agar Tumne aisa kiya to... Sab Shock ho jayenge... Pareshani Ka Sabab Bhi Ban sakta hai....

Mere Khayal se Aisa Karna thik Nahi Hoga....??

Any - Main Kab Kah Rahi hu Dono ko Heal Karne ko...

Ladki Shayad Sadme ke karan Behosh hai.. Tumne bhi dekha Kahin Chont bhi Nahi Lagi...

Thoda Sa Heal Kar deti hu...

Apna Kaam bhi Ho Jayega.....??

Main - Hmm Yeh Thik Rahega.....

Itne mein Door Khula Doctor Bahar Aaye.....

Main - Sir ! Sab Thik to hai na...??

Koi Serious injury to Nahi...??

Dr. - Ladki ki halat to thik hai...

Lekin Ladke ko Kaafi Gahri Chont Aayi hai....

Sar par Kisi Nukili Chiz se Waar Kiya gaya hai....

Jiske Karan Blood clotting hui hai...

Humne treatment jar diya hai... Injection bhi de diya hai..

Dekho Agar 1hrs mein khoon ki Dauran wapas shuru ho gayi to Sab thik hai...

Warna Brain Tumor hone ka Khatra hai....!!

Main - Ohh God ! Ye to Kaafi critical Condition ho gayi...

Kya Koi Aur Salution Nahi hai...

Dr. - Nahi Filhal Abhi 1hrs tak Main Kuchh bhi Nahi Kar Sakta...

Issliye Aap Sabhi 1hrs tak wait karein....

Itna Bolkar Doctor Chala gaye....

Any - Kya Tum Abhi bhi Mujhe Rokoge....Ya Fir Main Kuchh Karun....??

Main - Nahi Aap Kuchh Nahi Karogi....

Ab Aap Dono Ghar Jaoge....

Main 1hrs Baad ghar Aa Jaunga.....Yehi Mera Discission hai....!!

Aur Ha Ab Iss Baat Par Koi Bahash Nahi hogi...

Any - Hayyu ! Lekin Main Nahi.......

Chup Karate huye...

Main - Aap Samajhte kyun Nahi....

30min Baad Mom-Dad Office se Aa Jayenge....

Fir Kya Jawab denge unko....??

Dadu bhi Shayad 15min baad Call kar denge....

Issliye Hamari Bhalayi Isi mein Hai Aao Dono Ghar Jayein Baaki Main Handle kar lunga.....

Akhir mein Haar Mankar Any! ko Zin! ke Saath Ghar Jana hi Pada....

Unke Jaate hi Main Bilal Aur Afreen ke paas Aa Gaya.....

Bilal Ke Sar Pattiyon se Dhaka hua tha....

Face par bhi Bandages lagi huyi thi...

Bahut Buri tarah se Mara tha....

Wahin Afreen Abhi bhi Masoomiyat je Saath Bed par Aaram Farma Rahi thi....

Afreen Ke Ek Muslim Ladki thi.... Shayad Isi wajah se Usne Hijab(Naqab-Black Cloth) Pahna hua tha....

Jo Ki Shayad Drs. Ne Hata diya tha....

Main Ek Baar Fir Uske Chahre ki Khoobsoorti Par Kho Sa Gaya....

Bilal ke Dard mein Karahne se Mera dhyan toota....

Maine Aage Badhte huye Turant Uska Haath Pakad Liya......

Main Sahi Tha..... Anwar Ali Aur Zeenat... Hamare Padoshi....Jo Ki Rashmi Mausi ke Ghar mein Rahte hain.... Yeh dono Unki hi Aulaad hai...

Maine Apne Aakhein Band ki...

Aur Apna Dahina Haath Bilal ke Sar Par Rakh diya....

Fir Turant Hata bhi Liya....

Fir Main Afreen ki Taraf Badha....

Uske Chehre pe padi Reshmi Julfon ko thoda Sa side kiya....

Ek Baar Gaur se dekha....

Mujhse Jyada der dekha Na gaya....

Main Turant Palatkar Wapas Ward ke bahar Aa gaya.....

Apne Mobile se Dadu! ko Call Laga di....

Aur Turant City Hospital aane ko kaha....

Main Abhi Dadu ! Se Baat Hi Kar Raha tha Ki...

Tabhi Meri Nigaah.... Hospital mein Lagi.. LCD Par Gayi....

Breaking News......

"Shayad hi Kisi ne Kabhi dekha hoga Aisa Chamatkar....

Five Sense* Garden ke Paas,

8 Jeevit Prani... Moorat Ban Gaye hai....

Jeevit to hain Lekin Unka Koi Reaction Nahi hai...

Na Bol Pa Rahe hai... Na to Hil Pa rahe hai...

Bas Unki Aankhein... Lagatar aansu Bahaye Ja Rahi hain...,

Jisse Pata chalta hai.. ki Sabhi Bahut Dare huye aur takleef mein hain..

Ye Sab Kaisa hua... Sab Iss Sach Jo Janne ke kiye Beqarar hain....!!

Jaisa Ki Aap Video footages mein dekh Pa Rahe hai...

Kya Yeh sab Natakiya hai....??

Ya Fir koi Anjani Musibat...??

Janne ke liye Hamare Saath Bane Rahe....News 420* !!""


आज के लिए बस इतना hi..

-----

--------

-----------


लाइक्स, कमैंट्स, रिव्यु और वोट्स का रखना Dhyan....Aapka दोस्त हयान..!!
 
Update..No..76*

MeGa..UpDaTe


Abb...Aage...

""पुत्र! सबक सीखना उचित है.. किन्तु इसके लिए शक्तियों का प्रयोग अनुचित है...

शायद तुम भूल रहे हो की... तुम्हारा जन्म केवल मानव कल्याण के लिए हुआ है....

भटके हुए को सही राह दिखने के लिए....

किन्तु आज जो भी तुमने किया है वो सही नहीं है...!!""

हनी - ले भाई.. आ गया.. बुढऊ ! ज्ञान पेलने....

बस इनकी hi कमी thi.....Aao तुम भी मज़ा लूट लो....!!

मैं - प्रणाम गुरुवार ! मेरा ऐसा करने का कोई इरादा नहीं था....

मैं थोड़ा जज्बाती हो गया था...

किन्तु अब ऐसा कभी नहीं होगा....!!

गुरुवार - पुत्र! एक बात सदैव याद रखना...

""अहंकार में तीनो गए

धन, वैभव और वंश

यकीं न आये

तो देख लो

रावण, कौरव और कंस...""

इस्सलिये कभी खुद की शक्तियों पर अहंकार मत करना....

क्यूंकि जो शक्तियां मानव कल्याण के लिए दी जा सकती है....

उसे अहंकार वश चीन भी जा सकता है....

मैं - कोटि कोटि धन्यवाद् गुरुवार! एक बार फिर से मेरा मार्गदर्शन करने के लिए....

मैं शीघ्र hi अपनी की हुयी गलती को सुधर लूंगा.....

गुरुवार - सदैव कल्याण हो पुत्र !!

इतना कहकर गुरुवार! अंतर्ध्यान हो गए....

हनी - तू बेवक़ूफ़ तो नहीं....

तुझे अंदाज़ा भी है तू कितनी बड़ी गलती करने जा रहा है...??

मैं - मैं गलती करने नहीं... सुधरने जा रहा हु...

मैं बेवक़ूफ़ nahi....Rahamdil हु..!!

हनी - रहम दिल... ः Hahahaha....Achha वर्ड है...

लेकिन मेरी भी बात याद रखना ""एक दिन तेरी यह Raham-Dili तेरी जान ले लेगी....!!""

इस्सलिये मेरी बात मान.. सांप को ऐसे छोड़ने की भूल मत कर.... उसे कुचल देना hi बेहतर होगा...

वैसे भी वह इस दुनिये में जीवित रहने योग्य नहीं है.... उसका रोम रोम बुराई से लिप्त है....

मैं - भलाई करना मेरा कर्त्तव्य है.... अगर इसमें मेरी जान भी जाती है... तो मुझे कोई परवाह नहीं....

और है अब अगर तेरी बकवास ख़त्म हो गयी हो... तो मुझे जाने दे... और भी जरूरी काम है....

हनी - तू कर जो भी करना है...

अब समझदारों को और क्या समझाना....

इतने देर में दादू भी आ गए और साथ में अनवर अली भी.....

अनवर अली - कहा है मेरे बचे, दोनों ठीक तो है...

मुझे उनके पास ले चलो.....

मैं - चाचा! वो दोनों ठीक है...

उन्हें कुछ नहीं हुआ... बस चाँद मामूली खरोंच आयी है....

चलिए मैं आपको उनके पास ले चलता हु....

मैं उनको लेकर रूम आ गया....

जहाँ आफरीन और बिलाल बेहोशी के आलम में लेते हुए थे....

सामने अपने बच्चों की हालत देखकर...

अनवर चाचा भागकर दोनों के पास पहुंचे...

और सीने से लगकर रोने लगे.....

दरअशल आफरीन की कंडीशन तो पहले से hi तजिक थी....

बूत बिलाल को अंदुरुनी और बाहरी, बहित ज्यादा चोन आयो थी....

जिससे उसके बदन में हर जगह घाव बन गए थे....

जिसे देखकर अनवर चाचा एकदम घबरा गए....

और दोनों से लिपटकर बेतहाशा रोने लगे.....

इतने में डॉ. और नर्स आ गए.....

डॉ - यह क्या कर रहे हो....

पेशेंट्स से दूर रहिये....

आप सभी लोग बहार चले हमें ट्रीटमेंट करने दे....

मैं, अनवर चाचा को लेकर रूम के बहार आ गया.....

रट हुए....

अनवर चाचा - तुमने तो कहा था बस मामूली खरोंच है....??

किसने किया मेरे बच्चों का यह हाल.....

मैं उसे जिन्दा नहो छोडूंगा.....

कौन थे वो लोग....

मैं - जब मैं वहां पहुंचा था तो कुछ गुंडे आपके बेटे को पीट रहे थे....

और ये सब क्यों कर रहे थे इसका जवाब तो दोनों के होश में आने के बाद hi मिल सकता है.....??

अनवर चाचा - बहुत बहुत शुक्रिया बीटा ! दोनों को बचने के लिए और हॉस्पिटल लेन के लिए.....

बस मेरा एक और काम कर दो....

मुझे उन गुंडों की पहचान बता दो.... बाकी मैं सब देख लूंगा.....

मैं - चाचा जी... हम तो बस वहां से गुज़र रहे थे..

मुझे उनके बारे में कुछ नहीं पता...

मैं तो यह भी नहीं जनता था की यह दोनों आपके बचे हैं....

वो तो हॉस्पिटल आकर पता चला....

अनवर चाचा - थैंक्स बीटा ! इंसानियत दिखने लिए.....

मैं तो तुम्हारा शुक्रगुज़ार हु...

आज तुमने मेरे दिल के टुकड़ो की रक्षा की है...

अभी हम बा कर रहे थे की तभी रूम का दूर खुला.....

डॉ. भर आते हुए....

डॉ - इम्पॉसिबल ! It's मिराक्लेस....

ऐसा कैसे हो सकता है....??

घबराते हुए.....

अनवर चाचा - क्या हुआ डॉ. साहब, सब ठीक तो है न...

मेरा बचा ठीक तो हो जायेगा न....??

डॉ. - ठीक हो जायेगा...

या फिर ठीक हो गया है...

जब इसे एडमिट किया गया था तब इसकी हालत बहुत नाजुक थी...

जान बचाना मुश्किल लग रहा था....

बूत अब जब मैंने दुबारा चेक उप किया...

मेरे तो होश hi उड़द गए....

भीतरी जख्म तो जैसे गायब hi हो गए... अब तो बस ऐसे hi छोटी मोती खरोंच रह गयी हैं....

वो भी जल्द भर जाएँगी....

अनवर चाचा - खुदा का लाख लाख शुक्र है... मेरा बीटा सही सलामत है.....

मैं - हम्म सही कहा चाचा जी...

वो कैसे कैसे खेल खेल दे... किसी को क्या पता.....??

कुछ चीज़े हमारी समझ से परे होती हैं....!!

मैं - डॉ. साहब, आप इन दोनों को डिस्चार्ज कब तक करेंगे.....??

डॉ. - वैसे तो सब नार्मल है अब...

आप मिस. आफरीन को घर ले जा सकते है....

बूत Inhein(Bilal) अभी यही रुकना होगा..

जब तक की कम्पलीट ट्रीटमेंट हो नहीं जाता....

काउंटर पर जाकर फॉर्मेलिटी पूरी कर लें....

मैं - चाचा ! आप जाकर आफरीन को घर छोड़ aaye....Tab तक मैं और दादू, बिलाल के पास रुके हैं....

अनवर चाचा - हम्म ठीक है बीटा... एहि ठीक रहेगा...

सभी फॉर्मेलिटी कम्पलीट होने के बाद....

अनवर चाचा आफरीन को लेकर घर के लिए रवाना हो गए....

मैं भी दादू! को हॉस्पिटल में रुकने को कहकर फाइव सेंस गार्डन की तरफ रवाना हो गया....

जहाँ इस वक़्त अफरा - तफरी का माहौल था...

दरअशल इस वक़्त जहाँ सभी गुंडे स्टेचू बने खड़े थे...

वहां चरों तरफ भीड़ इकठ्ठा हो गयी थी....

उनके फॅमिली मेंबर्स और डीआरएस. उनको तजिक करने की कोशिश कर रहे थे....

चूँकि उन गुंडों की पहचान बहुत ऊपर तक थी इस्सलिये उनकी सुरक्षा के लिए वहां पर पुलिस का कड़ा पहरा हो रखा था....

इन, 7, 8 गुंडों का जो ग्रुप लीडर (सुलेमान - 27) था वो अंडरवर्ल्ड से मिला हुआ था,

उसका भाई हैदराबाद में मिनिस्टर होने के साथ साथ माफिया से भी जुड़ा हुआ था...

उसके बारे में यह सब मुझे सुलेमान को छूने के बाद पता चला था....

एक बात और अनवर अली, सुलेमान के रिलेटिव थे....

जो की रिश्तों में उसके मां लगते थे...

हालाँकि सुलेमान और उसके भाई के काले कामों की वजह से अनवर चाचा ने उनसे रिश्ता तोड़ लिया था....

और उनसे दूरियां बना ली....

लेकिन सुलेमान जो की आफरीन का कजिन लगता था...

उसका दिल आफरीन पर आ गया था....

जिसके चलते वह पीछा करते हुए... देहरादून तक आ पहुंचा था.....

दरअशल जब मैं मेरी फॅमिली देहरादून शिफ्ट हुए थे, तब आफरीन और बिलाल अपने वकील के साथ, हैदराबाद गए हुए थे,

अपनी पुश्तैनी जमीन को बेचने जो की उनके दादा ने, उन दोनों के नाम कर राखी थी....

वहीँ पहली बार आफरीन पर सुलेमान की गन्दी नजर पड़ी थी...

तब से वह उसके पीछे पद गया था....!!

मैंने अपनी कार वही साइड में रोक दी...

और अपने लेफ्ट हैंड को सभी गुंडों की तरफ करके उनपर ग्रीन छोड़ दी...

जैसे Hi रेज़ उन पर पड़ी...

.""मुझे बचाओ... कोई तो बचाओ इस शैतान से....""

दर्द में चीखते हुए, सभी एक एक करके जमीन पर गीध पड़े...

और दर्द से तड़पने लगे....

अचानक से ऐसा होता देख वहां पर कौतुहल मचने लगा...

फटाफट सबको एम्बुलेंस में डाला गया, और हॉस्पिटल के लिए रवाना हो गए....

मैं भी अपनी कार में बैठ कर हॉस्पिटल के लिए रवाना हो गया.....

बदकिस्मती से एम्बुलेंस और मेरी कार दोनों ल सिटी हॉस्पिटल में जाकर रुकी....

अभी मैं कार से बहार निकल hi रहा था की तभी....

साईरन बजाते हुए.....

एक वाइट मेरसेदेज़ आकर रुकी...

फुल वाइट सुईठे बूट में एक शख्श बहार निकला....

जिसे चारो तरफ से सिक्योरिटी गार्ड्स घेरकर खड़े हो गए....

मैंने एक नजर ऊपर से लेकर निचे तक डाली...

मुझे पहचानने में जरा सा भी वक़्त न लगा.....

अकरम सिख - 39 मिनिस्टर ऑफ़ हैदराबाद, सुलेमान सिख का बड़ा भाई......!!

मैं उसे इग्नोर कर इमरजेंसी वार्ड आ गया....

जहाँ दादू, के साथ अनवर चाचा और ज़ीनत चची रूम के बहार खड़े हुए थे.....

अनवर चाचा - आ गए बीटा....

मेरे साथ चलो, फॉर्म पर सिग्न कर दो...

बिलाल को डिस्कार्गेड करने की परमिशन मिल गयी है.....

बाकि का ट्रीटमेंट्स घर पर hi होगा....

मैं - हम्म चलिए,

मैं उनके साथ साथ काउंटर पर आ गया.......

जहाँ इस वक़्त अकरम सिख खड़े स्टाफ को कुछ इंस्ट्रक्शन दे रहे थे....

जैसे Hi अनवर चाचा की निगाह, अकरम पर पड़ी.....

तुरंत hi अपना चेहरा घुमा लिया....

और दूसरी तरफ मुद गए.... और एक साइड में आकर खड़े हो गए....

मैं - क्या हुआ चाचा...

आप इतने घबराये हुए क्यों हैं.....

हमें तो मैं काउंटर पर जाना था Na.....Fir यहाँ इस तरफ क्यों....??

अनवर चाचा - बीटा.. मैं जिस बुराई से बचकर भागता फिर रहा हु.. आज वो मेरी आँखों के सामने कड़ी है....

मैं नहीं चाहता की उसका साया भी मुझपर पड़े इस्सलिये मैं इस तरफ चला आया......

देखो तो वह गया क्या....??

अनजान बने हुए.....

मैं - कौन चाचा जी....

आप किश बारे में बात कर रहे हैं....??

अनवर चाचा - वहां सामने काउंटर पर देखो....

सफ़ेद चादर पर लिप्त हुआ, एक कला नाग दिखेगा......??.

मैं - पर वहां तो कोई नहीं है... चाचा जी..

सिवाय स्टाफ मेंबर के...

अनवर चाचा - क्या अभी तो वही पर था....

चलो जल्दी चलो, इससे पहले की उसकी नजर मुझपर पड़े...

हमें तुरंत यहाँ से चले जाना चाहिए.....!!

हमने काउंटर पर जाकर फॉर्म पर सिग्न किया....

और डिस्कार्गेड पेपर लेकर

अनवर चाचा के पीछे पीछे इमरजेंसी रूम की तरफ भगा....

अनवर चाचा - ज़ीनत ! हमें यहाँ से तुरंत निकलना होगा....

अकरम इस हॉस्पिटल में आ चूका है...??

शॉक होते हुए

ज़ीनत चची - क्या अकरम ! और Yahan.....Wo भला यहाँ क्यों aayega....Shayad आपको धोखा हुआ होगा...??

अनवर चाचा - मैं उस सपोले को कभी नहीं भूल सकता...

वह अकरम hi है....

हमें तुरंत यहाँ से जाना होगा.......??

अनवर चाचा और दादू, बिलाल को व्हील चेयर में बैठकर बहार ले जाने लगे...

मैं भी उनके पीछे चल दिया....

अभी हम रूम से बहार Hi निकले थे की.....

स्ट्रेचर पर लेते हुए सख्श को देख कर ज़ीनत चची के कदम वही पर रुक गए....

इस वक़्त सुलेमान को स्ट्रेचर पर लिटाकर ओप्रशन थिएटर की तरफ ले जा रहे थे....

अनवर चाचा - इसे क्या हुआ...??

ये यहाँ कैसे....??

इसका मतलब अकरम इसके लिए यहाँ आया है.....??

ज़ीनत चची - हैं तो भाई भाई na....Isne भी जरूर कोई कांड किया होगा ..

जिसकी वजह से आज इसकी यह हालत हुयी...

हमें इनसे kya....Chaliye जल्दी गाड़ी की तरफ...

इससे पहले की अकरम भी यहाँ आ जाये.

बिलाल को लेकर हम चारो लोग वन में बैठ गए....

मैंने अपनी कार वही हॉस्पिटल में Hi छोड़ दी....

दादू वन को चला रहे थे, मैं तीनो के साथ पीछे बैठा हुआ था....

सब किसी गहरी में सोंच में दुबे हुए...

एकदम खामोश से बैठे हुए थे.....

मुझसे यह चुप्पी बर्दाश्त न हुयी....

मैं - आप दोनों उस इंसान से इतना डरते क्यों हो....??

आखिर कौन है वो....??

मेरी इस बात से ज़ीनत चची की ानकजों में आंसू आ गए.....

अनवर चाचा - वो इंसान नहीं एक जल्लाद है...

वह इंसान कहलाने लायक Nahi.....Ek कातिल है कातिल..... खून किया है उसने नेरे विश्वाश का... मेरी जान से प्यारी बेटी का....!!

इतना बोलकर अनवर चाचा की भी आँखें भी भर Aayi.....Unki आँखों से लग रहा था. .जैसे कोई पुराण जख्म किसी ने कुरेद दिया हो...

मैं - क्या खून...??

वो भी आपकी बेटी का.....

अनवर चाचा - है मेरी बेटी का.....

सिर्फ खून hi नहीं, बलात्कार किया है उसने... अपने मुँह बोली बहन ka.....Wah एक राक्षस है राक्षस.....

इतना बोलकर अनवर चाचा और ज़ीनत चची...

जोरर जोरर से रोने लगे....

मैं उन्हें आईने से लगाकर तसल्ली देने लगा....

.जैसे hi मैंने अपना हाथ उनके सर ओर रखा.....

अनवर चाचा के अंदर मौजूद सभी यादें मेरे सामने खुलकर बहार आ गयी.....

ऐसा भयंकर मंजर देख कर मेरी आँखें गुस्से से व्क्डम लाल हो गयी...

अपने आप hi मेरी आखें भी छलक पड़ी ....

अनवर चाचा की बेटी के साथ ऐसा दुर्व्यवहार देख कर. ...

""कैसे बर्दाश्त किया होगा अनवर चाचा ने..

कितना दुखदायी होता होगा.... एक बाप के नज़रों के सामने उसकी बेटी का बलात्कार होना...""



आज के लिए बस इतना hi..



-----

--------

-----------


लाइक्स, कमैंट्स, रिव्यु और वोट्स का रखना Dhyan....Aapka दोस्त हयान..!!
 
Back
Top