“भाभी अब नहीं,मुझे बहुत जरूरी काम है!” परम ने बड़ी बहू से कहा और बड़ी बहू के किसी भी उत्तर की प्रतीक्षा किए बिना, वह घर से बाहर भाग गया।
अब आगे.....................
Update 19
परम को आराम नहीं मिला और शाम 5 बजे तक वह परम को अपने साथ ही रखे रही। लगभग 5:15 बजे, उसने पूमा को कुछ और लड़कियों के साथ घर में घुसते देखा। परम के पहुँचने से पहले ही, वह ऊपर रेखा के कमरे की ओर भागी।
"भाभी अभी नहीं...मुझे बहुत ज़रूरी काम है।" परम ने बड़ी बहू से कहा और बड़ी बहू के जवाब का इंतज़ार किए बिना ही घर से बाहर भाग गया।
पूमा को यहाँ देखकर परम समझ गया कि पुष्पा घर पर अकेली होगी। परम को पूनम के बारे में पूरा यकीन था कि वह उसकी बहन महक के साथ होगी। वह लगभग पूनम के घर दौड़ा, दरवाज़ा खटखटाया और उम्मीद के मुताबिक़ पुष्पा ने दरवाज़ा खोला। उसने तुरंत दरवाज़ा बंद कर लिया और परम उसे अपनी पसंदीदा जगह पर धकेल दिया। उसने पुष्पा के कपड़े उतार दिए, उसे रसोई के प्लेटफॉर्म पर जांघें चौड़ी कर के बिठा दिया,और बिना कुछ बोले पुष्पा की सूजी हुई चूत को चाटने और चूसने लगा। पुष्पा की जांघों के बीच का त्रिकोण सुंदरी के मुकाबले लगभग 50% ज़्यादा था, वो ज़्यादा सूजा हुआ भी था और परम के लिए, वो अब तक की सबसे स्वादिष्ट चूत थी।
पुष्पा कराहने लगी।
"ओह्ह्ह्ह....परमबेटा, बस ऐसे ही चाटता रह...बहुत मजा देता है तू। 20 साल से चुद रही हूं,लेकिन तूने जो मजा दिया वो कभी नहीं मिला।"
परम चाट रहा था, चूस रहा था, चाट रहा था और चूत के हर एक हिस्से को चबा रहा था,और पुष्पा चूत की गर्मी से पसीना-पसीना हो रही थी। करीब 20 मिनट हो गए और परम ने एक बार भी माथा ऊपर नहीं उठाया। मस्त, मोटी जांघो को मसलते हुए चूत का मजा लेता रहा। और दो बार पुष्पा की चूत को झड़ने के लिए मजबूर कर दिया।
“बस बेटा, अब चोदो, मेरी चूत बहुत पनिया गई है…” पुष्पा ने अनुरोध किया।
“बेटा, अब मुझे मेरी ही बेटी पूनम को चोद रहे है यही समज के मेरी चूत को ठोको। उसने जन्बुज कर पूनम का नाम दिया ताकि परम और उकसा जाये।
“हां काकी अब तुजे मैं पूनम समज के चोदुंगा, पर मुझे तेरी चूत और गांड पूनम से भी ज्यादा अच्छी लग रही है।“
“हां बेटेअब तुम जमाई बनेगा मेरा तो मेरी फर्ज है की मुझे मेरी चूत देके अपने जमाईराजा को खुश भी रखना पड़ेगा”
इतना सुनते ही परम का लोडा आसमान पर चढ़ा क्यों की वह पुमा का संकेत था।
पुष्पाने परम को धक्का दिया, मंच पकड़कर कुतिया की मुद्रा में आ गई और एक झटके में परम ने उसे चारों ओर धकेल दिया 10 इंच लंड चूत की गहराई में। अब परम, पुष्पा का रेशमी बदन को सहलाने लगा और उसे ठोकता रहा।
अचानक परम ने देखा कि गांड का छेद फैल रहा है और सिकुड़ रहा है। उसने लार की कुछ बूंदें गांड के छेद पर गिरने दीं और उसे छेद पर मल दिया। इस तरह उसने कुछ देर तक गांड का छेद गीला होने तक काम किया और वह पहले एक उंगली डाल सकता था और फिर दूसरी। अब वह चूत को पंप कर रहा था और साथ ही साथ गांड की मस्त टाइट छेद का भी मजा ले रहा था। पुष्पा बेशरम जैसा अपनी बेटी से भी छोटे लड़के को पूरा मजा दे रही थी।
“काकी तेरी गांड मस्त है। परम ने दूसरी ऊँगली उसकी गांड में गायब करते हुए कहा।
“काकी, कभी काका या किसी और ने गांड मारी है?” परम ने पूछा।
“नहीं बेटा…” उसने जवाब दिया, “पूमा के बाबूजी के अलावा सिर्फ तेरे लौड़े ने मेरे चूत को टच किया है… गांड कौन मारेगा…?”
उसने आगे कहा:'लेकिन बेटा, गांड का ऐसे ही मजा ही लो और लंड को चूत में पेलते रहो। बहुत मजा आ रहा है,जैसा तेरा लोडा देखने में मस्त है,वैसा ही चुदाई भी मस्त करता है। मेरे दोनों छेदों को आज तुम ही भर दो, मुझे अपनी गांड अब मजा दे रही है, तेरी पहली ऊँगली गई तब मैंने सोचा कहा और कौनसा छेद के पीछे पड़ा है पर अब मेरी गांड मुझे मजा दे रही है। चोद अपनी ऊँगली से मेरी गांड को और उसे भी अपनी गुलाम बना दे। मैं और मेरे सभी छेद अब तुम्हारे लंड के लिए तैयार ही रहेंगे।'
पुष्पा पीछे की ओर कूल्हे उछाल-उछाल कर मजा ले रही थी।
“ओह्ह्ह…परम, मुझे इतना मजा आ रहा है तो सोच रही हूँ कि पूनम और पुमा को तू चोदेगा तूजे कितना मजा आएगा…आहह्ह्ह्ह...राजा …बस इसे ही पेलता रह…।। मुझे कोई आपत्ति नहीं है जब तू पुमा और पूनम को चोदता रहे पर मेरी इस गांड और चूत को भी अपने लंड से भोसड़ा बनाते रहना बेटे, उसे सिकुड़ना नहीं चाहिए, बस तेरे लंड की साइज़ के छेड़ बना रहे।”
"काकी, मैं पूमा से तो मैं शादी करूँगा लेकिन पूनम को चोदूंगा तो तुम्हें गुस्सा नहीं आएगा? तुम मुझे बहुत मारोगी।"
परम ने देखा कि उसकी दोनों उंगलियां गांड के अंदर स्वतंत्र रूप से घूम रही हैं। पुष्पा को भी परम की मोटी उंगलियों का गांड की भीतरी दीवारों के साथ घर्षण पसंद आया। उसने अपनी गांड के छेड़ को खुली आज़ादी दे दी थी।
“साला, मैंने तुझे कई बार पूनम को चूमते और बोबले मसलते देखा है, मुझे चुतिया ना समज।” पुष्पा ने अब अपना सिर नंगे मंच पर टिका दिया और कहा कि तीनों सहेली पूनम, सुधा और महक अब कुंवारी नहीं लगतीं…।
“उन्न सबकी मचलती, मस्तानी चुत्तड और चाल देख कर लगता है कि तीनो खूब चुदवाती है किसी मस्त लौड़े से…” उसने परम की ओर चेहरा किया और कहा।
“और तेरे सिवा उन तीनों को कौन चोदेगा…।।! उस्न्की यह मस्तानी चाल और लचकती गांड कौन बना सकता है।” उसने मुस्कुराते हुए कहा…”तूने जरूर अपनी बहन महक को भी चोदा है! क्यों की उसकी भी गांड पहले से ज्यादा ही मटक रही है।“
पुष्पा सही थी लेकिन परम ने झूठ बोला।
उसने स्पीड और धक्के बढ़ा दिए और कहा कि उसने सुधा को कई बार चोदा है लेकिन महक को उसने कभी नंगी भी नहीं देखा है।
“और हां, मैंने पूनम को चोदा नहीं, तू खुद अपनी बेटी से पुछ लेना…।”
लेकिन पुष्पा जैसी 40-42 साल की मस्तानी, गदराई औरत परम का यह झूठ समज सकती थी। उसने इस बात को ज्यादा बढ़ावा नहीं लेने का सोचा। इस बिच परम अपने धक्के को ज्यादा लयबद्ध बनाए रखा और परम के धक्के से पुष्पा कराह उठी।
“नहीं बेटा, नहीं…बहुत दर्द कर रहा है। यह लंड दर्द भी देता है और साथ में मजा भी। पता नहीं तेरे इस लंड में क्या जादू है। चूत अपने आप चुदवाने और लंड को प्रवेश देने के लिए बेबाक हो जाती है।”
लेकिन परम कहा रुकने वाला था! उसकी चूत से लंड निकल कर गांड के छेद पर लंड के सुपारे को सटाया और जोर का धक्का मारा और पुष्पा की आंख से आंसू निकल पड़े।
“ओह्ह्ह्ह बेटा…मत करो…मर जाउंगी तो फिर किसके चूत का स्वाद लेगा…।”
परम ने सुपारा बाहर खींचा और फिर जोर से धक्का मारा। इसी तरह1,2,3,4,5 बार लंड को अंदर पेलता था और फिर बाहर निकाल कर जोर के धक्के से अंदर पेल देता था और परम के पूरे लंड को पुष्पा की गांड गटक गई।
पुष्पा को बहुत दर्द हो रहा था। अब उसने अपना माथा आराम टेके पर टिका लिया था और नीचे देखने लगी। वह नहीं चाहती थी कि परम उसके आँसुओं को लगातार गिरते हुए देखे। उसे याद आया, उसकी छोटी बहन ने लगभग 10-12 साल पहले क्या कहा था।
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आज के लिए बस इतना ही।
आपके कोमेंट के बेज पर ही दूसरा एपिसोड आएगा...............
तब तक के लिए ।
फनलवर की ओर से।
।। जय भारत ।।