मुनीम भी वही चाहता था वह भी बीना रुकावट अन्दर चला गया, जहा पहले से ही उसकी बीवी चुद के गई थी।
अरे मुनीम यहाँ आ के बैठो”
लेकिन मुनीम वही खड़ा रहा, सेठजी के पास। सेठजी ने खड़े हुए मुनीम के धोती के अन्दर ही हाथ डाल दिया और मुनीम के लंड तक पहुच गया। दूसरी सेकण्ड पर सेठजी के हाथ में मुनीम का लंड जो अधखड़ा था, हाथ में आ गया, सेठजी ने दूसरा हाथ पीछे की ओर दाल दिया और मुनीम की गांड के छेद पर जाके अटका।
मुनीम मुस्कुराया और फुसफुसाया “सेठजी लोगे की दोगे?”
“दोनों! हर माल को सही तरीके से पहचानना जरुरी है मुनीम” कह के मुनीम की धोती को ऊपर कर दी और मुनीम का अध खड़ा हुआ लंड सेठजी के मुह के द्वार पे आए खड़ा हो गया।
सेठजी ने बिना पूछताछ किये उसका लोडा अपने मुह में टपका दिया और मुह में ही उसकी चमड़ी को ऊपर निचे करता रहा।
“आह्ह्ह सेठजी”
सेठजी ने अपनी मुह की स्पीड जरा तेज कर दी क्यों की उसे थोड़ी जल्दी थीऔर अभी अभी उसके मुह में परम का वीर्य पड़ा हुआ था। पर सेठजी आये हुए मौके को गवाना नहीं चाहता था क्यों की यही मौक़ा था सुंदरी को उसके पति के सामने चोदने का।
सेठजी ने लपालप मुनीम के लंड को चगलना चालू कर दिया और उसी बिच सेठजी ने मुनीम की गांड को तराशा और दुसरे पल उसकी आधी ऊँगली मुनीम की गांड में घुस गई थी।
तक़रीबन 15-20 मिनट की चुसाई के बाद मुनीम ने एक कराह के साथ अपना माल सेठजी के मुह में खली कर दिया। सेठजी ने संतृप्त नजरो से उसकी ओर देखा और मुस्कुरये, “मस्त माल था, अब से रोज ही ऐसा चलेगा थी है?”
“जी सेठजी, बस आपका लंड है जब भी चाहे आप मुह में ले के खाली कर सकते है, सच कहू तो सुंदरी से भी ज्यादा मजा आई आज!
इस दौरान सेठजी की तीन ऊँगली मुनीम की गांड में पूरी धसी हुई थी, काम ख़तम होने काठ-साथ ऊँगली भी बहार आई और दोनों पुरुष ने मिल कर ऊँगली साफ़ कर धी और धोती सरका के मुनीम बहार आ गया और सेठजी वही उसके वीर्य को मुह में चगलते हुए आगे की सोच ने लगे।
सेठजी काफी संतुष्ट थे उनके मुह में बाप-बेटे दोनों का माल पड़ा था और दोनों ही उसे भा गए थे। उसे पसंद आया था और सोचा की कभी भी अब वह मुनीम की गांड मार सकता है और उसका माल भी खा सकता है और बिना कुछ डरे वह जब चाहे सुंदरी को उठा के चोद सकता है, सामने परम उसकी पत्नी और बेटी को चोदेगा या उसकी बहु को भी चोद सकता है लेकिन उसको उसकी परवा नहीं थी।
क्यों की बाद में परम उसे रेखा की चूत भी दिला सकता था या फिर महक की चूत से भी लड़ा सकता है, बाप को कोई एतराज नहीं होगा। वाह वैसे सौदा बराबर का है।
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उधर....
शेठ के घर पर परम ने देखा कि रेखा अपनी सहेलियों के साथ बैठी है। परम को देखकर किसी ने कमेंट किया, "साला रेखा का गुलाम आ गया।"
“बहुत प्यार करता है, रेखा को ससुराल जाने दो, फिर साले को नीम के पत्ते पर भी चाटने के लिए नहीं मिलेगा।”
तीसरी ने कहा, “तुम लोग मत देना, मैं तो परम को रात दिन अपनी स्कर्ट के नीचे छुपा कर रखूंगी, साला बहुत मस्त लड़का है।।” उसने पूछा, “रेखा, परम ने तुमको चोदा की नहीं?” मैत्री और फनलव द्वारा अनुवादित रचना।
सभी हँसे। इसी तरह समय बीतता गया और परम और सुंदरी घर लौट आये। मुनीम भी दूसरा राउंड उसकी गांड में सेठजी का लंड लेके अपनी गांड का छेद को बड़ी कर के सब से पहले ही वापस आ चुका था, इस बार सेठजी ने उसके मुह में ढेर सारा वीर्यदान किया था जिस से वह खुश था। रात को खाना खाने के बाद सभी सोने चले गये। परम और महेक नंगे हो गए और वहीं चूसने और झड़ने का डेली रूटीन शुरू कर दिया।
“महेक, तुम कब मेरा लंड चूत के नीचे लोगी! अब कंट्रोल नहीं होता है, मादरचोद।” परम ने कहा,
“कंट्रोल नहीं होता है तो अपनी माँ (सुंदरी) को क्यों नहीं चोदते हो....मैं थोड़े दिन और कंट्रोल करूंगी…”
बने रहिये प्लीज़....