Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 16 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

thank you dost

ji bilkul vaise kahi na kahi yah gaav pura aisa hai, asabhya.........
 
ji bilkul mitra

ab ye to kahaani hi bataa payegi ki vinod ne kaisa perform kiya, sundari jaisi mahilaa ke saath, ho sakta hai bechara sundari ko dekh ke hi .................
 
thank you dost

yes muje bhi wahi intezaar hai.....vinod pe baaz najare rakhe hui hu
 
चलिए अब आगे चलते है कहानी में

सुंदरी बिस्तर पर सोने ही बाली थे की परम ने कहा:

“मां साड़ी उतार दो ख़राब हो जायेगी।”

सुंदरी "बेटे को देखकर मुस्कुराई और झटके से साड़ी उतार दिया और बिस्तर पर लेट गई। परम सोच रहा था कि साला यह विनोद सुंदरी को नंगा क्यों नहीं कर रहा है। लेकिन विनोद को तो सुंदरी के चूत में लंड पेलने की जल्दी थी। विनोद ने फटा-फट पेटीकोट को कमर के ऊपर तक घसकाया और दिखाई पड़ा एक दम चिकनी चूत। (पेंटी का रिवाज वहा गाव में नही होता) विनोद को लगा कि किसी 12-13 की लड़की का चूत देख रहा है। विनोद ने सुंदरी के पैरों को फैलाया और दोनों पैरों के बीच बैठ कर लंड को एंट्री पॉइंट पर रखा और सुंदरी की चुचियों को पकड़ा। जोर का धक्का मारा। विनोद के धक्के में दम था। पूरा लंड बुर के अंदर घुस गया।

“आहहह…।” धीरे से पेलो बेटा।” सुंदरी बोली। लेकिन विनोद को तो चूत का भोंसड़ा बनाना था। सुंदरी की बुर देख कर बहुत मस्त हो गया था। उसको विश्वास नहीं हो रहा था कि सुंदरी को चोद रहा है। लंड चूत के अंदर पूरा चला गया, चूत टाइट थी, या फिर सुंदरी ने जानबुज कर अपनी छुट के मांस को जकड के रखा था, वह तो सुंदरी ही जानती थी, माहिर जो थी। इतनी गर्मी और टाइटनेस का उपयोग एक साल पहले अपनी दीदी को भी चोदने में नहीं आया था। विनोद ने जोर से धक्का मारा। सुंदरी को विनोद की जल्दबाज़ी देख कर लगा कि साला जल्दी ढल जाएगा और वही हुआ।

चौथा धक्के में ही विनोद ने सुंदरी की चूत को अपना पानी से नहला दिया। सुंदरी की गर्मी तो अभी चढ़ना शुरू ही हुआ था। उसने तो अभी तक लंड को चूत के अन्दर पूरा महसुस भी नहीं किया था और विनोद झड़ गया। सुंदरी को दुख नहीं हुआ कि उसने एक नामर्द से चुदवाया है। विनोद बहुत गर्म हो गया था उसकी धईलो को मसल-मसल कर और ये सोच कर कि सुंदरी को चोद रहा है। सुंदरी ने दोनों पैरों से विनोद को टाई कर दिया और उसके गालों को चूमते हुए बोली:
मैत्री और फनलव द्वारा अनुवादित रचना है

"बेटे। घबराओ मत, ऐसा होता है। थोड़ा ठंडा हो जाओ, फिर चोदना।"

विनोद को चार धक्के में ही पानी छोड़ता देख परम बहुत खुश हुआ और उसने सारे कपड़े उतार कर नंगा सुंदरी के सामने आकर लंड हिलाने लगा और कहा

“माँ, ये साला तो तुम को चोद नहीं पाया, मुझे चोदने दो।”

" चुप.. मादरचोद, माँ को अपना लंड दिखता है। जाकर विनोद की माँ और दीदी को चोदो, मेरा माल (चूत) तुम्हारे लिए नहीं है।" सुंदरी परम के लंड को मुठ मारने लगी।

“जब तक मैं विनोद से मजा लेती हूं तुम उन दोनों कुतिया को जाकर चोदो।” सुंदरी ने बेटे के लंड को मसल कर छोड़ दिया।

फिर उसने विनोद को अपने से अलग किया और पूछा, “फिर चोदोगे की थक गए!”

विनोद ने सुंदरी के ब्लाउज के बटन खोले और ब्लाउज को बाहर निकाल दिया। विनोद ने चूत में लंड तो पेला लेकिन अभी तक मस्त चुचियों का दर्शन नहीं किया था। उसने दोनो निपल्स को धीरे से मसला और कहा “काकी अभी तो खाली तुम्हारी चूत को छुआ है, थोड़ी देर के बाद फिर पेलूंगा और तब देखना मेरे लंड से तुमको चुदवाने में कितना मजा आता है।” इतना कहते हुए विनोद ने सुंदरी के कमर से पेटीकोट को बाहर निकाल दिया। अब उस कमरे मे टीनो मादरचोद बिल्कुल नंगे थे।
मैत्री और फनलव द्वारा अनुवादित रचना है

"काकी तुम सच में एक नंबर की माल हो। परम मूर्ख है कि उसने अब तक तुम्हें चोदा नहीं। मैं तेरा बेटा होता तो कब का तुम्हारी चूत में लंड पेल कर मजा लेता। और क्या पता मेरे ही बच्चे की माँ भी बन जाती। मेरे साथ कोलकाता चलो, वहा एक से एक चुदक्कड़ है। खूब चुदाई का मजा देंगे और जितना मागोंगी उतना पैसा भी देंगे।”

विनोद सुंदरी के होठों को चूमता रहा तब तक जब तक सुंदरी ने उसे बदन से अलग नहीं किया।

“विनोद तुझे फिर से लंड पेलना है तो जो मैं कहती हूँ..”

विनोद को सुंदरी का हर अंग छूने में मज़ा आ रहा था, “क्या करने बोलती हो काकी!“

“मेरी चूत चाट और चूस।” सुंदरी ने कहा।

"छी काकी, बुर भी कोई चाटने की चीज है। वहां तो खाली लंड को ही अंदर डालना होता है, चोदने के लिए चूत होती है काकी।"

“देख हरामी, तू अगर मुझे फिर से चोदना चाहता है तो चूत चाट नहीं तो लंड पकड़ कर बाहर चला जा और अपनी माँ से गांड सटा के सो जा।” सुंदरी बोलते हुए विनोद को धक्का दे कर उठ गई। फिर कहा “देख, परम का लंड भी चूत के अंदर जाने को तैयार है, आज उसी से चुदवा लूंगी।” सुंदरी ने परम को पास बुलाया और उसका लंड पकड़ कर अपनी स्तनों से रगड़ने लगी।

"काकी, परम के बारे में मैंने किसी को भी बुर को चाटते नहीं देखा। बुर तो गंदा रहता है, चाटने से बीमारी हो जाएगी...तू समजती क्यों नहीं!"

"चुप! बहनचोद साला। चूत चटवाने में जो मजा औरत को आता है उतना मजा तो लंड से पेलवाने में भी नहीं आता है।" सुंदरी अब परम के लंड को अपनी चूत से रगड़ रही थी।

परम खुश हो गया था कि आज माँ उसके दोस्त के सामने हमसे चुदवायेगी। उसने माँ का चूची दबाते हुए कहा “विनोद तुमने देखा तो है, जब मैंने तुम्हारी माँ और दीदी की चूत चूसता हूँ तो दोनों कुतिया कितना मजा लेती है।”

सुंदरी ने फिर कहा "मादरचोद, जल्दी बोल। मेरी चूत को अंदर तक चाटेगा की मैं परम से पेलवा लू?"


विनोद अपने ढीले लंड को हाथ से रगड़ कर टाइट करने की कोशिश कर रहा था और उधर परम ने सुंदरी के क्लिट को जोर से मसला। “ओह्ह….. आह्ह…” सुंदरी चीख उठी। विनोद ने फैसला किया कि अब अगर थोड़ी भी देरी होगी तो परम उसके सामने सुंदरी को पेल डालेगा और सुंदरी भी उसकी मां और दीदी की तरह परम के लंड की गुलाम हो जाएगी। विनोद को क्या मालूम कि दोनो माँ-बेटे रोज चुदाई का मजा लेते हैं। विनोद ने सोचा कि परम जब उसकी माँ और दीदी की चूत चाटता है तो दोनो मादरचोद बहुत मजा लेती है और परम भी खूब मजा लेकर चूत का स्वाद पुरे अंदर से लेता है। विनोद ने फैसला किया कि क्यों ना चूत चाटने की शुरुआत सुंदरी के चूत से की जाए। क्या यह चूत भी स्वादिष्ट है और इस चूत से ज्यादा स्वादिष्ट कोई हो ही नहीं सकता। अगर चूत का स्वाद अच्छा लगेगा तो रात अपनी माँ और दीदी की चूत भी चाटेगा।मैत्री और फनलव द्वारा अनुवादित रचना है

अब आगे देखते है की विनोद सुंदरी की चूत चाट के चुतरस लेता है या फिर.............छोड़ देता है..............सुंदरी का स्वाद भूल जाएगा.......!!!!!!!!!!

मेरे साथ बने रहिये

यह एपिसोड कैसा लगा आपकी राय जरुर दीजिये..........प्रतीक्षा:
 
बस आप लोगो का साथ और सहकार से रचना चल रही है
 
जी,बहोत बहोत धन्यवाद आपका
 
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