Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 17 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

चलिए कहानी में आगे चलते है .......................
 
अब आगे

विनोद ने बिना कुछ बोले परम को थोडा बाजू हटा के उसकी चूत से लंड निकालवा दिया और सुंदरी को पीछे से दोनों स्तनों को पकड़ लिया और बिस्तर पर लेटा दिया। सुंदरी की दोनो टैंगो को फैला कर विनोद ने जीभ को क्लिट पर लगाया। विनोद को एक अजीब सी गंध और स्वाद लगा। उसने जोर-जोर से जीभ को चूत के चीरा पर रगड़ना शुरू किया और सुंदरी अपना चुतर उछालने लगी। विनोद की जीभ चूत पर चलते चलते चूत के छेड़ को पार कर के अंदर घुस गया और उसने पूरी जीभ चूत के अंदर पेल कर जीभ को चूत में घुमाने लगा। सुंदरी को बहुत मजा आ रहा था।



“अहह.. बेटेईईई… मजाआआ.. आ रहा है… आह..” सुंदरी मचल रही थी और खुद ही अपने हाथों से स्तनों को मसलने लगी। परम अपना तनतना हुआ लंड लेकर आगे बढ़ा और सुंदरी के होठों से लंड को लगा कर उसकी छातिया दबाने लगा। सुंदरी ने परम के लंड को अलग हटा दिया और कहा "तुम अभी बैठ कर मजा लो, बेटे अब उसने पैसा दिया है तो उसका हक पहले बनता है।"
मैत्री और फनलव द्वारा अनुवादित रचना



“विनोद जब तुम्हारा लंड टाइट हो जायेगा तो बोलना।”

विनोद ने दोनों हाथो से सुंदरी के टांगो को बिल्कुल दूर फैला दिया था और अपना पूरा मुँह सुदरी की मस्त चूत में घुसाने की कोशिश कर रहा था। उसका नाक तो अंदर चला ही गया था। विनोद को अब धीरे-धीरे चूत का स्वाद बहुत अच्छा लगने लगा।

विनोद सुंदरी की स्वादिष्ट चूत को चाटने और चूसने में बहुत तल्लीन था। ऐसा लग रहा था कि विनोद अपना पूरा सिर बुर में घुसा देगा लेकिन नाक और जीभ के अलावा और कुछ चूत के नीचे नहीं जा सका। सुंदरी को भी बहुत मजा आ रहा था, इस से पहले उसका बेटा परम और सेठजी ने सुंदरी का चूत चाटा था लेकिन जो मजा अभी आ रहा था वैसा मजा पहले कभी नहीं आया था। क्यों की विनोद उसकी चूत चाट रहा था की खोद रहा था! वह जितना अन्दर जा सकता था पहुच गया था। एक तरीके से उसकी सही चुदाई हो रही थी जहा लंड लटक रहा था और जिब उसकी चूत को खोद रही थी।
मैत्री और फनलव द्वारा अनुवादित रचना



सुंदरी खूब मजा ले कर मजा ले रही थी और कमर हिला-हिला कर विनोद को बता रही थी कि उस से खूब मजा आ रहा है। सुंदरी जोरो से 'आहह...' उह्ह्ह…कर रही थी, साथ ही कमर उछल-उछल कर विनोद के चूत चटाई का मजा मार रही थी, और विनोद को उकसा रही थी। सुंदरी को इतना मजा आया कि उसने दोनों हाथों से अपनी जांघों को चूम लिया। अब सुंदरी को अपनी चूत दिख रही थी। विनोद कभी क्लिट को चूस रहा था तो कभी पूरी जीभ को अंदर डाल कर घुमा रहा था। साथ ही चूत के अंदर उंगली भी घुसा कर सुदरी के तन और मन दोनों को चूत खुदाई के द्वारा खुद ही मजा लेने लगा और सुदरी को भी स्वर्ग दिखाने की कोशिश करने लगा।

विनोद का लंड टाइट होने लगा था लेकिन विनोद की चुदाई के बारे में भूलकर चूत खाने में लगा हुआ था। पहली बार विनोद इस तरह चूत का मज़ा ले रहा था। इधर परम का लंड पूरा टाइट था, वो अपनी माँ के पास आया और उसकी बोबले को मसलने लगा साथ ही अपना टाइट लंड को सुंदरी के बदन पर रगड़ने लगा। कभी लंड को सुंदरी की जाँघों से रगड़ता था तो कभी मस्त बोबले को ही लंड से दबा रहा था।

सुंदरी पूरी मस्त हो गई थी और वो भी लंड को चूसना चाह रही थी। अब सुदरी का मुह भी किसी लंड से चुदवाने को तड़प रहा था, उसका मुह खुला था की दोनों लंड से कोई एक भी उसे भर दे, “विनोद अपना लंड मेरे मुँह में डालो।” उसने जोर से कहा लेकिन विनोद अपनी स्थिति बदलना नहीं चाहता था। चूत को चोदा और चाटता रहा। सुंदरी ने दो-तीन बार तड़प कर लंड को मुँह में डालने के लिए कहा, लेकिन विनोद ने नहीं सुना। सुंदरी ने तड़प कर बेटे परम का लंड पकड़ा और मुँह में गपाक लिया और खूब जोर-जोर से चबाने और चूसने लगी।

विनोद का लंड पूरा टाइट हो चुका था। फिर भी उसने चूत का स्वाद लेना बंद नहीं किया। तभी परम ने जोर से कहा “साला चूत चाटते-चाटते तेरा पानी फिर निकल जाएगा और चोद नहीं पाएगा। फिर मुज से फ़रियाद ना करना और पैसे वापस ना माँगना। मैंने सुदरी को चोदने के लिए दे दिया अब तू उसकी चूत चाटे या उसका भोसड़ा बनाये सब तेरी मर्जी है।”
मैत्री और फनलव द्वारा अनुवादित रचना

सुंदरी ने भी परम की बात में हामी भरते हुए कहा: “बेटा विनोद, परम ठीक ही तो कहता है, मैंने मेरा माल दिखा दिया अब पैसे वसूलना तुम्हारा काम है बेटे, चोदो या चाटो! मेरे ख्याल से नंगे माल को चाट के चोदना ही बेहतर रहता है।”

इतना सुनना था कि विनोद ने सुंदरी की कमर को नीचे की ओर दबाया और कमर को जोरो से पकड़ कर लंड चूत में घुसेड़ दिया।

“अहह… धीरे” सुंदरी ने परम के लंड को मुँह से निकाला हुआ कहा।

विनोद ने परम को धक्का मार कर अलग किया और सुंदरी की चुची को दबाते हुए उसे चूमने लगा। सुंदरी को अपनी चूत का स्वाद मिला और वो भी विनोद को टांगो से जकड़ कर कमर उछाल कर विनोद के लंड के धक्के को चूत के गहराईया भरने लगी। सुंदरी को इतना मजा परम के साथ चुदाई में नहीं आया था ना ही सेठ की चुदाई में। सुंदरी ने चोदते हुए फैसला किया कि परम और सेठ का लंड तो खायेगी ही लेकिन विनोद से भी नियमित रूप से चुदवायेगी। विनोद खूब दम लगाकर चोद रहा था और सुंदरी भी पूरा साथ दे रही थी।

“आहहह… राजा… बहुत मजा…आआ… रहा है… मेरे माल (चूत) को चोदते रहो।

इस आह्वाहन से विनोद ने खुश होकर और जोर से धक्का मारा।

“आअहह………, धीरे….चूत फट जायेगी…” वह जानती थी की ऐसे टाइम कैसे बोला जाता है।

परम बिलकुल सट कर, खड़ा होकर अपनी माँ की चुदाई देख रहा था और साथ-साथ सुंदरी की चुचियो को मसल-मसल कर जवानी का मजा भी ले रहा था। चुदाई थमने का नाम नहीं ले रही थी, दोनों खूब जोश में एक दूसरे को बाहों में जकड़ कर चुदाई कर रहे थे।



चुदाई करते-करते सुंदरी थक गई और उसका पानी निकल गया। तुरत बाद विनोद ने भी चूत के अंदर ही पानी निकाल कर चूत को ठंडा कर दिया। सुंदरी ने विनोद के जांघों को अपनी जांघों से जकड़ रखा था और कुछ देर तक चुम्मा चाटी करने के बाद दोनों अलग हो गए।

इस एपिसोड के बारे में अपनी राय अवश्य देना प्लीज़ ..............
 
जी

आपका स्नेह बना रहे
 
जी बहोत बहोत शुक्रिया

जी सुझाव अच्छा है......परम इस कहानी का हीरो ही है और सुंदरी हिरोइन पर सुंदरी को परम से ज्यादा नए लोगो में रस है....ऐसा दिखाया है और परम को भी नयी छोटी लडकियों में रस ज्यादा है फिर भी दोनों आपस में जुड़े है

विनोद महक का हीरो है तो यह सब में मुनीम अपनी जगह बना के बैठा है सेठन जी भी अपनी जगह बना के बैठे है

मुनीम और सेठ दोनों मिले है उसी तरह सुंदरी और मुनीम भी,परम और सुंदरी भी....महक और मुनीम भी सभी एक दुसरे के लिए प्यार भी है और छुट भी दी है....

खेर आगे अभी काफी आएगा लेकिन परम इस कहानी का हीरो तो है लेकिन सभी केरेक्टर्स को थोडा थोडा इम्पोर्टेन्ट भी देना पड़ेगा ताकि कहानी दिलचस्प रहे

फिर भी कोशिश करुँगी की परम के अध्याय को लंबा और बाकि केरेक्टर्स को एक लाइन में ख़तम करने की कोशिश करुँगी.....

जैसे परम का सेक्स प्ले लंबा रहेगा और मुनीम ने पूनम को अपनी तरीके से शांत कर दिया कर के सेक्स ख़तम .............

कोशिश करुँगी........

बने रहिये
 
चलिए आगे चलते है

सुन्दरी की चूत गीली थी, उसकी चूत अभी भी उसका चुतरस और विनोद का वीर्य धीरे धीरे बहार की ओर टपका रही थी। परम ने चूत को छुआ लेकिन सुंदरी ने उसका हाथ अलग कर दिया। विनोद को अपनी बाहों में लेकर चुमने लगी और फिर परम से दो गिलास गर्म दूध गुड़ के साथ लाने को कहा। करीब दस मिनट के बाद परम दूध लेकर आया तो देखा कि सुंदरी विनोद के गोद में बैठी है और विनोद उसकी चूत में फिंगरिंग कर रहा है और साथ में स्तनों को भी दबा रहा है। और कभी-कभी विनोद उसकी उंगलिया चाट के साफ़ करता रहा जिस से सब को यह पता चल रहा था की अब विनोद को चुतरस और मिक्स चुतरस दोनों पसंद आ गए है। दोनों ने वही पोजीशन में बैठे दूध पिया और फिर मस्ती करने लगे। परम ने टाइम देखा. 4.30 हो गए वे।मैत्री और फनलव से अनुवादित रचना

“मां, सेठजी के घर भी जाना है।” परम ने कहा।

"अरे अभी तो बहुत टाइम है, बेटे। एक बार और तुम्हारे दोस्त का लंड से चुदवाउंगी।" सुंदरी ने विनोद को चूमते हुए कहा और दोनों दूध पीने लगे। इधर परम सामने खड़ा होकर माँ की थानों को दबा कर अपना लंड उसकी चूत से रगड़ने लगा। “एक बार मुझसे भी चुदवा लो, माँ!”

सुंदरी ने चूत को लंड के ऊपर दबाया और कहा, “बेटा तुम्हें जो भी करना है कर लो लेकिन तेरा लंड चूत के अन्दर नहीं लेगी।” कहते हुए सुंदरी ने विनोद को आंख मारी.. चूत के नीचे से विनोद का लंड चूत को रगड़ रहा था और ऊपर से बेटे का लंड चूत के स्लिट को खोल कर घुसाने की तैयारी कर रहा था। “बेटा, आज यह माल सिर्फ विनोद का है, विनोद ही चोदेगा बेटे! उसी ने तो यह माल ख़रीदा भी है और मेरा फर्ज है की लंड को पूरा निचोड़ कर भेजना चाहिए।

विनोद ने परम के लंड को चूत के नीचे दबाया और कहा, “अरे काकी, मैं तो अपनी मां और बहन दोनों को रोज चोदता हूं, परम भी खूब अच्छी चुदाई करता है, तुम भी बेटे से चुद जाओ।” इतना कहते-कहते विनोद ने परम के लंड को सुंदरी की चूत में घुसा दिया। परम ने भी धक्का मारा और पूरा लंड चूत के अन्दर चला गया। लेकिन सुंदरी तुरत खड़ी हो गई और घूम कर फिर विनोद के गोद में बैठ गई और बैठे-बैठे चूत को विनोद के लंड के ऊपर दबाया और धीरे-धीरे पूरा लंड चूत के नीचे गायब हो गया। सुंदरी उछल-उछल को चूत को लंड पर उठ बैठ रही थी। अबकी बार परम पीछे से माँ की बोब्लो को मसल-मसल कर अपने लंड को चूत से सटा दिया और दबाये रखा। सुंदरी चुदाई करते-करते विनोद से चिपक गई और उसकी गांड ऊपर उठ गइ।

चुदाई करते-करते सुन्दरी की गांड भी पानी हो गयी, उसकी गांड भी चुतरस पि पि के गीली हो गई थी। परम ने पीछे से स्तन को दबाए हुए अपने लंड गांड के छेद से सताया और लंड को दबाने लगा। सुंदरी और जोर से विनोद से चिपक गये। परम ने और जोर से लंड को अंदर दबाया और करीब दो इंच लंड सुंदरी के गांड के अंदर घुस गया। अब क्या था, सामने से विनोद का लंड चूत को चोदे जा रहा था और पीछे से परम आ लंड उसकी गांड की खबर ले रहा था। दोनों के लंड एक बार बहार आते और फिर अपने अपने गंतव्य में अद्रश्य हो जाते।

“मत करो बेटा, दर्द कर रहा है और सुंदरी ने पीछे हाथ बढ़ा कर परम का लंड गांड से बाहर निकाल दिया और फिर लंड से उठ गयी और जमीन पर फ्लैट लेट गयी। ”विनोद जल्दी से चोद कर पानी निकाल दो।" विनोद तो तैयार था ही, फटा-फट सुंदरी की टैंगो तो फैलाया और बीच में बैठ कर लंड को चूत के छेद में घुसाया और जोर से धक्का मारा। दो-तीन धक्के में पूरा लंड चला गया। विनोद जोर-जोर से धक्का मारने लगा। सुंदरी का खून गरम हो गया था। उसके शरीर में हाई वोल्टेज का करंट दौड़ रहा था। विनोद धका-धक धक्का मार रहा था और करीब दस मिनट की चुदाई के बाद दोनों झड़ गये।
मैत्री और फनलव से अनुवादित रचना

दोनो ठंडे हुए तो सुंदरी ने बाथरूम जाकर मुंह हाथ धोया और फटा-फट साड़ी ब्लाउज पहन लिया। विनोद भी कपडे पहन कर तैयार हो गया। तभी दरवाजे पर दस्तक हुई, परम ने दरवाजा खोला, महक खड़ी थी। महक परम से चिपकना चाहती थी लेकिन परम अलग हट गया। महक ने विनोद को देखा।

"क्या भैया, आज इतने दिनों के बाद हमारी याद आयी है।" महक ने कहा।

विनोद ने देखा कि महक भी अपनी मां सुंदरी की तरह पूरी जवान हो गई है और उसके मन में ख्याल आया कि क्या महक को भी चोदने में सुंदरी जैसा मजा आएगा! लेकिन? विनोद ने फटाहट दिमाग से महक को चोदने का ख्याल हटाया और कहा,

"अरे महक, काम में इतना बिजी रहता हूं कि टाइम नहीं मिलता है।" उसने महक के गालों को थपथपाया और कहा “अब जल्दी-जल्दी मिलने आऊंगा।“ कुछ देर बातें करने के बाद विनोद चला गया। महक को भी विनोद अच्छा लगा।

काफी समय के बाद मिलना हुआ था, इस से पहले सेक्स के बारे में कुछ भी नहीं मालूम था लेकिन अब वो चूत लंड के बारे में सब जानती है। विनोद के लंड के बारे में सोचने लगी, उसने सोचा कि क्या विनोद अपना लंड से खेलने देगा! महक ने फैसला किया कि मौका मिलने पर विनोद को अपनी जवानी का मजा देगी। थोड़ी देर के बाद परम सुंदरी के साथ घर से बाहर निकला तो महक ने परम से कहा, “भैया देर मत करना, आज एक दूसरी माल आएगी तुम्हारा लंड खाने के लिए।”

दोनो निकल गए और महक नंगी होकर विनोद के लंड के बारे में सोचती हुई घर का काम करने लगी।

सुंदरी विनोद का लंड खा कर बहुत खुश थी। जब पहली बार प्रवेश करने पर वह तुरंत डिस्चार्ज हो गया तो उसे बहुत दुख हुआ लेकिन वह जानती थी कि यह उसे चोदने के लिए उसकी अत्यधिक उत्सुकता और उत्तेजना के कारण था। और वह सही थी, दूसरी बार की चुदाई मे विनोद ने उसकी चूत का भरता बना डाला। इतनी देर तक मुनीम ने कभी नहीं छोड़ा था ना ही परम भी विनोद जैसा चुदाई कर पाया था। फिर उसने सोचा की बेटे के सामने उसके दोस्त से चुदवाना से विनोद में काफी जोर आया की वह उसके दोस्त की माँ को उसी के सामने चोद रहा है, तो स्वाभाविक है ज्यादा जोर लगाके चूट को मारेगा, खेर जो भी हो मुझे तो मजा आई और आइन्दा से वह विनोद के लिए अपना प्रवेशद्वार खुला रखेगी। वैसे भी अब मुझे तो लंड से लगन है फिर बेटा हो या बेटे का दोस्त या जमाई कोई भी हो मेरी चूत को भरनेवाला चाहिए। और वह खुद पर और उसके माल पर गर्व करती रही।


मैत्री और फनलव से अनुवादित रचना

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