Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 51 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

दशहरा की आपको भी खूब-खूब शुभकामनाएं।





जय भारत के साथ दिन की शुरूआत कर के, चलो, हम आज के दिन हमारे तन और मन से ऊन आसुरी शक्तियों और इच्छाओ का दहन करने का प्रयास करें।
 
दशहरा की आपको भी खूब-खूब शुभकामनाएं।

जय भारत के साथ दिन की शुरूआत कर के, चलो, हम आज के दिन हमारे तन और मन से ऊन आसुरी शक्तियों और इच्छाओ का दहन करने का प्रयास करें।
 
जी बहोत बहोत धन्यवाद आप का

आपने सही कहा और समझा सुंदरी को यह पात्र को समझना मुश्किल है,क्योकि सुंदरी कब कैसा क्यों और किस से व्यवहार करेगी पता नहीं।

आपने यह भिसाही कहा की जवानी के शुरूआती मोड़ और एक परीपक्व अनुभव से साथ चलना दोनों में काफी अंतर है।

खेर आगे आप जानेन्गे ही की मुनीम और सुंदरी के व्यवहार और उनकी आतंरिक समजौता के बारे में।

फिर से आपका बहोत बहोत धन्यवाद।
 
जी,

शुक्रिया दोस्त मुझे बहोत अच्छा लगा की आप फिर से यह कहानी पढ़ रहे है।

सब से पहले मैं यह बतादू की यह कहानी का मूल स्त्रोत भुखालंड की कहानी से लिया गया है। यह कहानी सिर्फ भाषांतर नहीं है। मूल स्त्रोत में सुंदरी को एक कामपिपाशु औरत दिखाया गया है जब की हम ने यहाँ सुंदरी को काम विवश के साथ साथ उसकी मनोदशा को भी दर्शाने का प्रयास किया है। मूल स्त्रोत में मुनीम का कोइ रोल नहीं है जब की हमने यहाँ उसको दूसरो के मुख से कहालाके उसको महत्वता देने का प्रयास किया है जहा उसकी यानी के एक पुरुष जो अपने ही घर में नन्गता का स्वीकार भी करता है और एक मनोमंथन में भी रहता है। आगे काफी आएगा।

हमने मूल स्त्रोत से अश्लिता ली है और साथ ही पत्रों को महत्वता भी देने का प्रयास किया है। मूल स्त्रोत अश्लीलता से जितने की कोशिश है जब की हम ने अश्लीलता के साथ साथ सिम्पथी का भी सहर अलिया है और वह भी शब्दों के जरिये। जिसे हमने प्रयास किया है की पाठक खुद ही सोचे और समझे, कोई खुलासा नहीं है।

अब रही बात पुरुष प्रधान समाज व्यवश्था की तो यह एक सत्य है। हमने यह समाज व्यव्श्था को स्वीकार लिया है। और यह दुनिया में प्रचलित है। जहा हमारा समाज एक तरफ नारी को देवी के रूप से देखता है और वही उसकी दूसरी नजर उसे नंगा भी देखती है।

सवाल यह है की नारी को रंडी,वेश्या,नगर-वधु, रुपजिविनी जैसी उपाधि किस ने दी??????????? और क्यों?????किस अधिकार से.............चलो मान भी लेते है की ऐसी औरते है.........लेकिन उन्हें रंडी या वेश्या बनाया किसने??????????????????? खेर यह एक लम्बा डिबेट का विषय है जो हम नहीं पढ़ना चाहेंगे।

एक महिला विद्रोही, महिला क्यों नहीं हो सकती?

मेरा ही उदहारण लेते है। मैं और यहाँ जितने भी है सभी तो एक भद्र समाज से है, लेकिन फिर भी एक लेखिका होने के नाते अगर्में कोई अश्लील शब्दों का इस्तमाल करती हु तो मुझे एक हलकट नारी समझा जाता है और यही लोग मुझे हलकी स्त्री समज के डार्लिंग, या मेरे प्राइवेट पार्ट्स तक पहोचने की कोशिस करते है क्यों??????? क्योकि नारी है यह सब वह नहीं कर सकती जो कर रही है मतलब हमारे मनोरंजन के लिए उपलब्ध है।

मैंने कई कहानी पढ़ी है जिसमे ज्यादातर पुरुष लेखक है और वह मैंने अज तक ऐसी कोमेंट नहीं देखि की जहा डार्लिंग और उनके प्राइवेट पार्ट्स का जिक्र किया गया और उन से मनोरजन प्रप्प्त करने की कोशिश की गई। दोस्त समाज और वह भी भद्र!!!!!!!!!!!!!!!!

वैसे स्त्री मन को समझना काफी मुश्किल है। तभी तो कहा जाता है की भगवान् ने नारी बनाके अपने हाथ धो दिए।

खेर यह सब बहोत बड़ी डिबेट का विषय है जिसे हम यही पर अटक जाते है।

कहानी में भी कुछ पात्रो को समजना मुश्किल ही होगा। और कुछ आसानी से समझा जायेगा। दोनों में प्रसंगों और पात्रो की दाय्लोग्स पर आधारित होंगे और समजने के लिए पाठको की मानसिकता।....................

आभार दोस्त की आपने मेरी लेखन शैली को सराहा।

कहानी में जुड़े रहिये।
 
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