चूत को चाटते-चाटते परम गांड को भी चाट रहा था और सुंदरी की गांड भी अब उसी के छुट के पानी से पनिया गई। गांड पर उंगली रगड़ते परम ने उंगली गांड के अंदर घुसाया तो सुंदरी परम से चिपक गई। परमने सुंदरी को बिस्तर पर ढकेल दिया और उसकी दोनो जाँघों को माँ की निपल दबाया और आराम से माँ की चूत और गांड का स्वाद लेने लगा।
अब आगे........
"गाँव की वेश्या, टांगो को पकड़ कर रख.. अभी तेरी गांड का बाजा बजाता हूं। लगता है इस गांड में उंगली भी नहीं घुसी है।"
“गाँव की वेश्या” शब्द सुनके सुंदरी का मन चक्कर खाने लगा। वह भी अपने बेटे से। उसे बिलकुल भी पसंद नहीं आया। पर दूसरी तरफ सोचा तो उसके दिमांग ने कहा परम ने क्या गलत कहा है! उसकी आँख से दो आंसू टपक पड़े। उम्मीद से बहार और खास कर बच्चो के नजरिये से। शायद उसकी आँखे नहीं रोई थी पर उसका दिल ने कुछ अजीब जवाब दिया था आंसू के जरिये। उसने तुरंत अपने आप को संभाला।
“आह मेरे राजा,गांड बिल्कुल कोरी है, एक दम वर्जिन।” अगर आपको झूठ बोलने की प्रेक्टिस करने के लिए सुंदरी से मिलना चाहिए।
परम ने जीभ से माँ की चूत और गांड का मजा लेता रहा तब तक की गांड का छेद खुला नहीं हो गया। परम ने चूत का रस निकाला कर गांड को चिकना किया और फिर दो उंगली घुसाकर गांड को चोदने लगा। परम को लगा कि अब उसका लोडा माँ के गांड के अंदर घुस सकता है, माँ की गांड का छेद अब उतना भर गया है की वह मधुर आवाजो के साथ माँ की गांड मार सकता है। परम खड़ा होकर माँ की जांघों पर दबाव डाला और एक हाथ से अपना तना हुआ लंड पकड़ कर गांड पर रखकर दबाया। सुपारा अन्दर नहीं गया, लेकिन परम ने लंड हटाया नहीं, और जोर से दबाया।
सुंदरी को दर्द महसूस हुआ, "बेटा, रहने दो, दर्द कर रहा है.. तेरा सुपारा नहीं घुसेगा।" वह जानती थी इसलिए उसने अपने गांड की मांसपेशिया को खिंच के रखा था। वह नहीं चाहती थी की परम एक ऐसी गांड मारने जा रहा है जिस का द्वार कई सालो से खुला हुआ है।
परमने लंड को थोड़ा ऊपर उठाया और एक जोर से धक्का दिया। आधा सुपारा गांड के छेद को पार कर घुस गया।
"कुतिया, चुप रह और मेरा लंड का मज़ा ले। जब रेखा की कच्ची गांड मेरा लंड खा सकती है तो तेरी गांड में क्यों नहीं घुसेगा! तू तो बहोत गदराई हुई गांड की मालकिन है।" कहकर परम ने लंड को उपर खींचा और जोर का धक्का मारा। 1.5 इंच का सुपारा गांड के अंदर घुस गया और माँ की गांड की अन्दर जाके गांड की खर-अंतर लेने लगा। सुंदरी को लगा कि किसीने गरम-गरम मोटा आयरन रॉड गांड में घुसा दिया है। उसने जांघों को आगे की ओर खीचा, लेकिन परम ने दोनों हाथो पर जांघों को संभालकर एक के बाद और जोर से लंड पर धक्का मारा।
“बापरे… मर गई…।” सुंदरी जोर से चिल्लाई लेकिन बगल के रूम में दोनों बाप-बेटी खुब गहरी नींद में सोए थे, “बेटा, लंड बाहर निकल लो… जो बोलोगे करुंगी…” सुंदरी सिसक रही थी और पसीना बहा रही थी। आंखों से आंसू निकल रहे थे, लंड को गांड के अंदर जाने का दर्द कुछ ज्यादा ही तेज था। सुंदरी छट-पटा रही थी..और ऊपर परम लंड को करीब-करीब पूरा लंड बाहर निकाल कर एक बार और जोर से धक्का मारा और गांड को एक तरीके से चिर डाला। यह सब इसलिए हुआ की जब परम ने जोर से गांड में धक्का मारा तब सुंदरी से अपनी मांसपेशिया खुल गई। और फिर अपने आप ही ज्यादा सिकुड़ गई।
“….बाप रे….प्लीज़ बेटा….निकल ले….मैं मर जाउंगी तो किसे चोदेगा….बहुत दर्द कर रहा है….पैर फैलाने दे।”
“कुतिया, आराम से गांड मरवा, फिर बाद में खुद ही रोज गांड मरवायेगी…जैसे रेखा मरवाती है… अभी तो विनोद भी तेरी गांड मारेगा… वेश्या… चूत चुदवाने के लिए 50000/- लेती है… गांड कितना मरवायेगी…।”
“जो करना है कर बेटा.. लेकिन लंड बहार निकाल ले …बर्दाश्त नहीं होता है।” सुंदरी आगे मुंह रख के हँस रही थी।
लेकिन परम को भी लग रहा था कि उसका लंड माँ की गांड में फंस गया है। गांड के अंदर इतनी गर्मी थी कि परम को लग रहा था कि उसका लंड पिघल जाएगा,,,
“माँ, तू कुत्ते से चुदवायेगी….कुत्ते का लंड चुसेगी…भोसड़ीकी।” मैत्री और नीता की पेशकश।
“हाँ…चुदवाउंगी कुत्ते से भी या गधे से भी.. लेकिन अभी के लिए अब लंड बाहर निकालेगा….बाप रे बाप….कितना दर्द कर रहा है….टट्टी भी नहीं कर पाऊंगी….ठीक से।”
"अरे माँ गांड मरवाने से गांड का छेद खुले गा तो तुम्हे टट्टी में जोर नहीं लगाना पड़ेगा, आराम से निकल जाएगा। तू चिंता मत कर और तेरी गांड को ढीली कर।“
अब सुंदरी की आवाज में दर्द कम था। परम को भी लगा कि लंड अब आराम से बाहर आ जा रहा है। परम ने एक बार फिर लंड को पूरा बाहर निकाला।
“आअहह… बाप रे कितना मोटा लंड है… आज पता चला…” सुन्दरी बोली। इस से पहले की सुंदरी अपनी टांगों को बिस्तर पर रखती, परमने माँ की जांघों को बांहों में फंसाया और गांड पर लंड टिका कर खूब जोर से धक्का मारा और लंड को गांड के अंदर दबाने लगा और इस बार पूरा लंड गांड के अंदर घुस गया। परम लंड को अंदर डाले हुए माँ की चुची को दबाते हुए माँ को चूमा और गालों को सहलाया। करीब 4-5 मिनट तक बिना धक्का मारे लंड को गांड के अंदर दबाये रखा और तब सुंदरी को भी आराम लगा। उसक दर्द अब कम होने लगा, वो भी बेटे का किस का जवाब देने लगी।
"मां, मैंने किताब में फोटो में औरत को कुत्ते से चुदवाते देखा है। जब भी किसी कुतिया को रोड पर कुत्ते से चुदवाते देखा है तो ऐसा लगता है कुत्ते किसी कुतिया को नहीं औरत को चोद रहा है... रानी तू एक बाद कुत्ते से चुदवा ना.. ।"
"अरे ओ मादरचोद,पहले जो काम कर रहा है.. वह तो पूरा कर। धक्का मार कर मेरी गांड ढीली कर दे। जिस से की बाद में जब विनोद से और तेरे दोस्तों से गांड मरवाऊ तो मजा आए। धक्का मार-मार कर गांड ढीला कर दे…" सुंदरी ने अपनी गांड को सिकुड़ के परम के लंड को दबाते हुए कहा। उसने अभी तक अपनी गांड को पकड़ कर रखा था ताकि परम को पता ना चले की उसके बाप का लंड आता जाता रहा है।
परम आराम से धक्का मारने लगा, लंड अभी भी गांड में बहुत टाइट था और लंड को लग रहा था कि पहली बार चुदाई कर रहा है।
लेकिन परम माँ को कुत्ते से चुदवाने के लिए तैयार करना चाहता था।
'बोलना माँ.. कुत्ते से चुदवाएगी?' मैत्री और नीता का प्रयास।
"सुना तो मैंने भी है.. लेकिन कभी देखा नहीं है.. मुझे कुत्तों से चुदाई वालि किताब लाकर दे। लेकिन गाँव में मर्द मर गए हैं क्या! मैं कुत्ते का लंड लुंगी? मुझे तो बस एक के बाद एक मोटा और करारा मर्द का लंड चाहिए। मैं कभी भी कुत्ते से ना से चुदवाऊंगी। महक को भी कुत्ते से चुदवाने की कोशिश मत करना। ”
परम दमादम माँ के गांड में लंड पेलता रहा। अब दोनो को मजा आ रहा था। सुंदरी बेटे को चूम रही थी और गांड उछाल कर अपनी गांड को लंड के रूट तक मरवा रही थी। मरवाते मारते दोनों थक गए..
'बेटा दो-चार बार जोर से और जल्दी-जल्दी धक्का मार कर लंड का माल मेरी गांड को पिला दे, बहोत तरसी है,लंड के माल के लिए।'
“माँ मजा आया की नहीं…” और परम ने तीन-चार बाद खूब जल्दी जल्दी धक्का लगाया और गांड को अपने लंड का वीर्यदान कर दिया। सुंदरी ने परम को अपने ऊपर दबाया।
'बेटा पहले तो बहुत ही दर्द किया लेकिन बाद में मजा आया।“ मन ही सोच रही थी बेटा एक बार अपने बाप का राक्षसी लंड देख लेना बाद में अपने लंड पर गर्व करना।
परमने लंड बाहर निकाला और माँ की चूची पर बैठ कर लंड माँ के मुँह में दबा दिया। सुंदरी को लगा कि अपनी टट्टी खा रही है, लेकिन उसका लंड बहार निकाला और चूस रही है। फिर दोनो अलग हो गये। सुंदरी ने परम का माल अपनी गांड को दबा के बचा लिया और अन्दर ही जमा रखा।
सुंदरी उठी और उसने पेटीकोट और ब्लाउज पहन लिया और कहा, “कोइ तेरी बहन महक की गांड मारे, उस से पहले तू ही उसकी गांड का दरवाजा खोल दे। अब तो मैं विनोद से गांड मरावाउंगी।“ उसने मुनीम का रास्ता थोडा बंद किया, महक की गांड के लिए। वह मानती थी की अगर मुनीम का लंड महक की गांड में गया तो वह सिर्फ और सिर्फ उनकी रह जायेगी। और फटी गांड कोई नहीं मारेगा। वह चाहती थी की महक हमउमर के लंड से ही गांड मरवाए ताकि छेद सही रहे। वरना महक के दोनों छेदों को बेचने में कठिनाई हो सकती है। और दूसरी तरफ मुनीम का लंड तो सिर्फ उसका ही है, वह किसी से भी शेर नहीं करना चाहती थी। चाहे खुद की बेटी ही क्यों ना हो।
सुंदरी ने घड़ी की ओर देखा, सुबह के साढ़े पांच बजे थे. “चल बेटा, तेरे साथ थोड़ी देर और सोती हूं।
आज के लिए बस इतना ही।
कल तक के लिए आप से विदा।
आपके मंतव्य मुझे और बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते है।
प्लीज़ अपने मंतव्य दीजिये।
।। जय भारत ।।