Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 87 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

सब से पहले बहोत बहोत शुक्रिया आपका

जहा तक मुझे याद है की आपने पहले भी यही मुद्दा उठाया था जिसका जवाब मैंने दिया था। पक्का याद नहीं

खेर फिर से ही सही.......

सब से पहले हम चर्चा करते है परम-सुंदरी शीर्षक की।

शायद यह शीर्षक ठीक नहीं है या हीर कहानी के अनुरूप नहीं है। पर मेरे ख्याल से इस कहानी में दो पात्रो है परम और सुंदरी जो कहानी लो लीड करनेवाले थे। और कहानी उनके आस-पास ही घूमनेवाली थी या है। शायद यह कहानी के बहोत से शीर्षक हो सकते थे जैसे एक गाँव की कहानी, मा बेटे की आज़ादी, एक नंगा गाँव,चुदाई से भरपूर एक गाँव,गाँव की मस्तिय,गाँव की नंगी औरते,........और बहोत सी.....पर मैंने परम-सुंदरी चुना ताकि यह कहानी के मुख्य किरदार है। और थोडा सा भिन्न भी है।

अब आते है इस कहानी के मूल रूप पर....शायद आपको याद होगा की मैंने कहानिके शुरुआत में ही एक गाँव की बात कही है जहा सीसी भी प्रकार की अश्लीलता को सामान्य तरीके से लिया जाता है और वे लोग यही भाषा का प्रयोक करते है अपनी सामान्य बातचीत में। मतलब गाँव ही किछ ऐसा है जो हमारे भद्र समाज से काफी विपरीत है। इसका मतलब यह है की यह कहानी परम और सुंदरी से जुड़ते हुए गाँव की बात कह रही है।

अब रही बात परम और सुंदरी जो की मुख्या पात्रो है इस कहानी के, यह कहानी में भले ही माँ बेटे है पर ऐसा नहीं है की यह कहानी आम कानी के तौर पर चले।

मैंने बहोत कहानी पढ़ी है जिस में माँ बेटे की चुदाई या फिर सेक्स कुछ गिने चुने प्रसंगों से चलती है, जैसे माँ को बाज़ार ले जाना और कुछ लोगो की नजरो से बाते कोविचलित करना, माँ का व्यवहार निर्दोष पर मादकता दिखाती है, माँ के लिए अंडर गारमेंट्स खरीद ने जाना और धीरे धीरे प्यार और वासना का बढ़ावा, फिर कहानी में एक तौर से माँ और बेटे की कई सारे प्रसगो और स्थलों पे चुदाई जैसे किचन में बाथरूम में ड्राइंग रूम में छत पर मतलब के घर के हर कोने में अलग अलग तरीके से। और कई बार माँ कोदुसरे व्यक्तियों से भी चुदाई होती है जो की कहानी को लम्बाई देती है।

लेकिन इस कहानी में माँ और बेटे की चुदाई के साथ-साथ माँ और बेटा दोनों स्वतंत्र है अपने सेक्सुअल लाइफ के मजे लेने के लिए। और इस तरह से दोनों पात्रो अन्य कई पात्रो से भिड़ते है। यहाँ पर भी एनी पात्रो से ही कहानी कोलाम्बाई मिल रही है। बेशक!

सुंदरी एक ऐसी स्त्री है जो वासना से भरी पड़ी है और अब वह अपनी वासनाओं को अंजाम देती है कहा तक कैसे यह तो कहानी बताएगी। वह अपने बेटे से चुद तो गई है पर वह ज्यादातर उसे दूर रखने के प्रयास में है। और दुसरे लोगो से अपनी वासना संतोष्टि है। बीटा उसी माँ का बेटा है और वह भी एक से नहीं चले जैसा है। उसे हर वक़्त नए चूत की तलाश में रहता है। और आपने देखा भी है

। उसमे उसकी माँ और बहन भी मदद करती है।

अब परम जैसा की आपने कहा परम और सुंदरी को स्ट्रोंग दिखाए, मेरे ख्याल से तो यह लोग स्ट्रोंग ही है अब आपकी परिभाषा क्या है यह आपने स्पष्ट नहीं किया की स्ट्रोंग किसे कहा जा सकता है। उसकी स्टेमिना आपने दुसरे पात्रो के मुंह से सूना आगे भी सुनेंगे,

मेरी इस कहानी में मैंने किसी भी पात्र को ज्यादा स्तरों बनाया नहीं क्योकि मैं मानती हु के best होता ही नहीं, बेस्ट तब तक ही होता है जब आपके सामने और कोई अच्छा नहीं आता। फिर वह बेस्ट हो जाता है। पहले मोटोरोला के फ़ोन चलते थे तब वह हमारे लिए बेस्ट था अब एप्पल चलता है .....आगे और भी नए मोडल आयेंगे।

इसलिए मुनीम को परम से ज्यादा स्ट्रोंग चुदाई के बारे में बताया गया है लेकिन उसे हाईलाईट में नहीं रखा है क्यों की परम हीरो है।

आपक इस कहानी में रिपीट बहोत कम पात्रो से मिलेंगे सब अपने अपने नए लोगो से अपनी विषय वासना संतोशेंगे आगे प्रयास करुँगी एक पात्र रहे।

यह कहानी माँ बेटे की भी नहीं और है भी। गाँव ही ऐसा है जहा घर में लोग चुदाई करते है लेकिन बहार कुछ नहीं अब वह पात्रो खुलेंगे बस यही तक है कहानी।

फिर भी आप स्ट्रोंगनेस की स्पष्टीकरण करेंगे तो आगे मैं उस हिसाब से लिख सकती हु।

मेरे ख्याल से मैंने काफी स्पष्टि कारन दे दिया है, आपको संतुष्टि होगी.....फिर भी सुझाव आमत्रित है...।

स्शुक्रिया दोस्त ।
 
हर कड़ी में आपको दूसरी कड़ी मिल जायेगी

शुक्रिया दोस्त
 
Maja aa gai....

What else one should require....

Shukriya
 
जी बिलकुल सही है

मुनीम का नसीब ही अच्छा है...बिना मेहनत किये ही मिल जाता है
 
परम ने आज किस कमसिन जवानी का भोग लगाकर सील का सत्यानाश किया उसका विस्तृत वर्णन मिल जाये तो फिर क्या ही कहने

खैर देखते हैं आगे क्या होता है

हा हा हा हा जी आपके विषय वस्तु की कदर करती हु. यह मैंने विस्तृत वर्णन नहीं किया क्यों की वैसे ही अपडेट चुदाई से भरी हुई थी दूसरा एक लाइन से बता दिया की परम ने कुछ काण्ड किया है वहा और सच कहू तो इस को मैंने रिज़र्व कर रखा है आगे जब जरुरत पड़े तो इस लाइन से आगे एक और अपडेट लिखा जा सके.

कोशिश करुँगी दोस्त आगे इसे संम्मिलित किया जाये वैसे उस लड़की का इस कहानी से कोई सीधा सम्बन्ध नही है तो कहानी को लम्बाइ नहीं दिया.

पर अब लम्बाई देना पड़ेगा................... :DD: :sex:
 
सब से पहले शुक्रिया दोस्त एक अच्छे पोस्ट मोरटम के लिए।

मुझे अच्छा लगा की आप और बाकि रीडर्स की सोच भी मुज से मिलती है ......कुछ अलग लिखने की इच्छा और कुछ नहीं दोस्तों......मैं उन कहानी यो को भी उतने ही प्रेम से पढ़ती हूँ। और अपना विषय वस्तु को ले लेती हूँ।

सब की अलग अलग पसंद होती है, कभी कभी सोच मिलती है तो कभी नहीं मिलती। लेकिन आपकी एक लाइन मुझे बहोत च्छी लगी और वह शायद मेरी सोच से बहोत ज्यादा मिलती है। "माँ बाप एकदम चिकने मगर लड़का एकदम काला भुसन्ड्ड लन्ड उससे भी काला जैसे वो इंडियन ना हो कर अफ्रीकन हो ।"

खेर मेरे किसी भी कहानी में BDSM, टॉर्चर , रेप, जैसे दुःख दायक कल्पनाये नहीं मिलेंगी या तो बहोत रेर कहानी के लिए अत्यंत आवश्यक होगी तभी मात्र। और वेः भी एक दो लाइन में ख़तम। क्योकि मैं इस तरीके के सेक्सुअल एक्टिविटीज को बढ़ावा नहीं देती। या फिर मुझे खुद को पसंद ही नहीं।

बाकी शब्दों के लिए शुक्रिया और धन्यवाद।

बहुत ही शानदार तरीके से लिखे है ........................जो आपने कहा है।

यह नेपस्टर साब के अगली टिपण्णी से आगे लिखती हु................. जी आप जिस प्रकार का लिख रहे या सोच रहे उस को उजागर करने के लिए आपको उस कहानी या परसंग पात्रो में घुस ना पड़ता है, मैं कुछ नया नहीं कर रही यह सब करते है लेखक और रीडर्स दोनों।



हां शायद लेखक और लेखिका ज्यादा कामोतुर हो जाते है उसके रिसन बताती हूँ।

अगले अपडेट को पहले पढ़ते है मतलब आप की शुरुआत हुई...उसके बाद आप कुछ सोचते है जो लिखना है....उसकी एक नोट बनती है....उसके बाद आप कुछ लिखते है वहा भी आपको उत्तेजित करती है क्यों की शब्दों और प्रसंग बार-बार आपके दिमांग में घूमता रहते है। फिर कुछ लिखेते है उसके बाद फिर से पढ़ते है और एडिट करते है। उसके बाद कुछ याद आता है तो उसे एड्ड या डिलीट करते है। फायनली आप फिर से पढ़ के तसल्ली कर लेते है यानी की फिर से पढना फिर पोस्ट होता है.......हमारे किस्से में एक कदम और भी है यही कहानी english में भी लिखी जा रही है। वह भी same process।

अब आप ही बताओ की हम कितनी बार पढ़ते है!!!!!! हालत क्या हो सकती है!!!!!!!!!!!! कभी कभी आधा ही छोड़ देना पड़ता है वह तक परिश्थिति बिगड़ जाती है। खेर उसकी की ही मजा है। यह प्लेटफोर्म self entertainment है और हम सब लेते है। अगर कोई कहता है की वह इस स्थिति से अलग है तो वह मेरे लिए महान है।



इसमें कोइ दो राय नहीं है की कामातुर नहीं होते। होते है और होने के लिए ही हम सब यहाँ है...कुछ ज्यादा हो जाते है तो कुछ कम पर होते जरुर है और लेखक/लेखिका ज्यादा होते है क्यों की वह बार बार पढ़ते है।

मैंने इस कोमेंट में अपनी या सभी की पारदर्शिता दिखाई है सो..........लेकिन प्लीज़ प्लीज़......प्लीज़.............सभी रीडर्स, इसे किसी भी प्रकार से अन्यथा ना ले...............जिसे मुझे अन्यथा लेना पड़े..................


बाकि सराहना के लिए बहोत बहोत शुक्रिया दोस्त।

आपकी पोस्ट मोरटम बहोत अच्छी लगती है एक चेलेंज दिखती है। आप जारी रखे..................

मैंने हर एक एपिसोड में एक नया सेक्सुअल पोजीशन एड्ड करने की कोशिश की है.............आगे जाके गन्दा भी हो सकता है..............तैयारी भी रखिये............

चलिए मिलते एक नए एपिसोड में
 
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