मुनीम ने सारे पेपर्स सेठ को दिया और बिल्कुल बहू से सैट कर खड़ा हो गया और बहू की नंगी गोल-गोल कुलहो को सहलाने लगा। मुनीम दंग रह गया कि जवान नंगी लड़की उसके बेटे परम का लंड चूस रही है और सेठ देख रहा है। ऐसा ही सीन है उसने इस बिस्तर पर कुछ दिन पहले देखा था जब सुंदरी एक अजनबी का लंड चूस रही थी और सेठ देख रहा था।
यहाँ सेठजी की बहु है।
अब आगे..............
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उस दिन मुनीम को हिम्मत नहीं हुई थी, कि सेठ से उस औरत को चोदने के लिए कहे लेकिन अब 3-3 जवान लड़कियों को चोद के का आत्मविश्वास बहुत बढ़ गया था। मुनीम का लंड टाइट होने लगा था। वह सोच रहा था की सेठजी ने मेरी पत्नी के बदले में काफी कुछ दे दिया है, लेकिन उसे यह बात बिलकुल भी पसंद नहीं आई थी जब सुंदरी की वह साब छोड़ रहा था और सेठजी ने उसे कागजाद लेके बुलाया और वह हसाब ने सुंदरी की गांड पर कागजाद रख के साइन किये थे। वह बिलकुल नहीं चाहता था की ऐसा हो पर उसके हाथ में कुछ नहीं था और नाही परम के हाथ में था, स्थिति को संभालना ही था।
लेकिन आज वह जानता था की परम कौनसी माल को लेके आया है और वह उसी पर नजर गढ़ाए बैठा था की बस एक मौक़ा मिल जाए। जब सेठजी अन्दर जा रहे थे तब मुनीम ने उसको अपनी प्रोमिस याद दिलाई थी की जो भी माल हो आज साथ ही खायेंगे। और अब वह उस कमरे में था जहा एक दिन सुंदरी थ इऔर वह कुछ न कर सका था। वह खुश था की परम ने छोटी बहु पर अपना सिक्का डाल दिया था।
“क्यो मुनिमजी, माल कैसा है?”
“सेठजी बहुत मस्त माल है, लगता है एकदम सोलाआनी माल है।” मुनीम ने कहा और बहू के चूत में पीछे से उंगलियां घुसा कर मजा लेने लगा।
मुनीम उसको चोदना चाहता था।
“सेठजी आप जब बोलिए सुंदरी को लाकर आपके लंड पर डाल दूंगा लेकिन मुझे इस कड़क माल को चोदने दीजिए।”
“परम तो चोद ही चुका है बहु को, तुम भी बहु चोद डालो, लेकिन मैं जब भी सुंदरी को लाऊंगा, जिस से भी चुदवाने बोलूंगा…” सेठजी ने कहा। “देखो मुनीम बहु तुम्हारी हुई लेकिन मुझे सुंदरी चाहिए जब बुलाऊ उसे भेजना पड़ेगा और हां अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए मुझे सुन्दर के माल का उपयोग करना पड़ेगा, और उसके लिए तुम, सुंदरी और परम सब खुश रहोगे ऐसा मैं कुछ करूँगा।“ मुनीम के कान में जाके कहा। उस दिन देखा और अब आगे तुम्हारे सामने ठीक है? और हम दोनों की बात किसी से नहीं।” फनलव और मैत्री की पेशकाश।
मुनीम सहमत हो गया।
मुनीम ने पूरे कपड़े उतार दिए। परम और सेठ ने उसके बड़े लम्बे लंड को आलू के आकार के सुपारे के साथ देखा। मुनीम को अपने बेटे के सामने नग्न होने में कोई शर्म नहीं थी। उसे क्यों होना चाहिए जब वह पहले ही अपनी बेटी को चोद चुका है। मुनीम ने बहू के चूतर को फैलाया और सुपारे को चूत के छेद पर रख कर लगातार 4-5 धक्का मारा। बहू को लगेगा कि उसकी प्यारी चूत फट जाएगी। बहू को लंड, अपनी चूत के अंदर बहुत टाइट लग रहा था, उसे ऐसा लगा की पहली बार चुदवा रही हो।
परम जानता था की बाबूजी अब कमाल करेंगे, उसने बहु को आगे पकड़ के रखा ताकि पीछे से उसकी चुदाई शुरू हो तो वह आगे जाके छटक ना जाये। आखिर वह भी बेटा ही था अपने बाप के लिए कुछ भी कर सकता था।
और सच यह था की मुनीम ने सुपारे ने बहु की चूत फाड़ ही डाली, उसकी छुट से खून बह आया, ससुरजी और परम उस खून को सिर्फ देखते ही रहे, ससुरजी ने अपनी गांड का पहला कचुम्बर हुआ याद आ गया। जब की परम को अपनी बहन की चूत और ठीक से नहीं चल पाने की वजह मालुम हो गई। बहनछोड़ बेटी चोदी है तो बहु क्या चीज़ है। फटेगी आज, उसे डर लग रहा थी की कही बहु फिर से इस लंड पे या मेरे लंड पर आएगी की नहीं।
मुनीम बहू की कमर पकड़ कर खूब मस्ती से बहू को पेल रहा था और बहू को लग रहा था कि उसकी चूत में कोई लंड नहीं बल्कि गरम लोहे की रॉड घुसा है। परम ने भी चोदा था तो लगा था कि चूत फट जाएगी लेकिन अब तो लग रहा है कि चूत के साथ-साथ गांड भी फट जाएगी। 20-25 धक्का लगाने के बाद लंड आराम से चूत के अंदर-बाहर होते दिखा।
मुनीम बिस्तर पर आराम से हाथ बढ़ा कर पीछे दोनों चुचियो को मसलते हुए चुदाई करने लगा। मुनीम को चोदने में बहुत मजा आ रहा था। उसने पूनम, महक और सुधा की कुंवारी चूत पर अपना झंडा गाड चुका था, जब की लीला अपने पति से एक साल से चुद रही थी। और सुंदरी की गांड पर रखे कागजाद की स्याही उसे याद थी। वह बहु की गांड की गोलाई अपने हाथ और लंड से नाप रहा था, उसकी भूगोल अब खराब हो रही थी।
“सेठजी माल पका है आज हमारी भाषा में कहे तो मैं मेरी इस कलम से इस माल के सभी कागज़ पर सफ़ेद स्याही से साइन करता हूँ।“ मुनीम के उस द्रश्य से और चनक चढ़ गई थी और वह अब लगातार धक्के मारे जा रहा था।
“हाँ...हाँ क्यों नहीं अब यह कागज़ भी आप का ही समजो मुनीमजी” सेठजी ने मुनीम के पिछवाड़े पर हाथ फेराते हुए कहा।
उधर बहु की हालत खाराब थी, उनकी आँखे चौड़ी हो गई थी और वह सिर्फ धक्के का मजा ले रही थी, उसे बस अब यही पर स्वर्ग मिल गया था। उसे कोई परवाह नहीं थी, की उसकी चूत सूज के कैसी हो जायेगी।
वह परम और सेठजी मुनीम के धक्क्के देख कर अपने आप को कोस रहे थे।
उधर बहु...
परम उसकी चूत में घुसने वाला दूसरा लंड था, सेठजी तीसरे और अब मुनीम चौथा। लीला अभी-अभी परम के मोटे, लंबे लंड से चुदी थी और फिर सेठजी ने बहुत देर तक दबाए रख्खा था, लेकिन मुनीम को लग रहा था कि वो किसी अनचुदी चूत को चोदे जा रहा था। चूत बहुत टाइट थी। या फिर उसका सुपारा बहोत बड़ा था वह तो लीला ही बता सकती है या फिर खून से पड़ी उसकी चूत।
लेकिन अब वो देखना चाहता था कि किस कच्ची कली को चोद रहा है। मुनीम झटके से लंड को चूत के बाहर निकला और बिना किसी को मौका दिए बहुत ज्यादा दबाव पर सीधा पलट दिया और दोनों जांघों को धक्का देकर फिर से लंड को धक्का मारने लगा। अब चुदाई का असली मजा आ रहा था। बहू भी अपना चूत्तर हिला कर धक्के का जवाब दे रही थी। लेकिन लीला ने झूठ से अपने लंबे घने बालो से चेहरे को कवर कर लिया। मुनीम ने देखा कि जिस लड़की को वो चोद रहा है उसके चेहरे के बाल से ढका हुआ है। मुनीम ने बालों को हटाना चाहा तो बहू ने मुनिम का हाथ हटा दिया और कहा,
'बस, रज्जा जम कर चोदो। चुदक्कड का चेहरा देख कर क्या करोगे। मैंने सेठजी से पूरे 2 लाख ले लिए हैं। परम और सेठजी चोद ही चुके हैं..अब तुम भी पूरा मजा लो....मेरा चेहरा मत देखो...चूची क्यों नहीं दबाते हो, छोटी है इस लिए!' मैत्री द्वारा लिखित।
हाला की यह जानते हुए भी अनजान बन जाना मुनासिब समज के, मुनीम ने भी चेहरा देखने का जिद्द नहीं किया और लगतार चोदता रहा तब तक वो पुरा डिस्चार्ज नहीं हो गया। परम और सेठजी की तरह मुनीम ने भी चूत में वीर्य भर दिया।
“हाँ सेठजी, मेरे इस कलम की सफ़ेद स्याही पूरी खाली कर दी है यह कागजाद पर।“ उसके चहरे आर एक विजयी मुस्कान थी।
मुनीम ने चूची को चूमा और चूसा और फिर बहू के बदन पर पर से उठ गया। सब ने देखा कि चुदवाने के बाद बहू का पूरा शरीर चाँदी की तरह चमकने लगा। उसकी चूत से मानो वीर्य का बहाव निकल आया।
“सेठजी, साली बहुत जबरदस्त माल है…सुंदरिके साथ भी इतना मजा नहीं आया।” दोनों सेठजी और मुनीम ने एक दुसरे को आँख मारी।
मुनीम कपड़े पहन कर बाहर चला गया। मुनीम के बाहर जाते ही बहू उठी और दरवाजे को अंदर से बंद कर दिया। बहु ने चूत को सहलाते हुए कहा “आज तो मेरी माँ ही चुद गई! इस चूत का बाजा बज गया। लेकिन मजा आया एक के बाद एक तीन लंड से चुदवाने में।“ उसने परम को चूमा…और कहा, “परम, ये चूत अब तेरी और तेरे सेठजी की है। लेकिन बाहर का भी लंड कभी-कभी खाने देना, सब से ज्यादा मजा दे के गया है।“ उसका इशारा मुनीमजी के लिए था।
परमने देखा कि सेठजी ने बहू को कुछ पेपर दिए और कहा कि यह कोठी का पेपर है ठीक से रखना। कुछ नोटो का बंडल भी दिया। सेठजी ने परम और बहु को घर जाने को कहा और बोला कि वो एक घंटे में आएंगे। परम और बहू भीतर हो कर कमरे से बाहर निकले। परम आगे के दरवाजे और बहू पीछे के दरवाजे। दोनो रिक्शा पर बैठ कर वापस घर आये। बहू के मन में कोई अपराध बोध नहीं था। वह खुश थी कि मुनीम यह नहीं देख सका कि वह कैसी थी और उसे यकीन था कि सेठजी या परम, कोई भी किसी से चुदाई की बात नहीं करेगा।
अब उसकी चूत के फांके सूजने शुरू हो चुके थे। उसे अब अंदरूनी दर्द हो रहा था। उसने खुन्वाला पेपर नेपकिन अपने पर्स में रखा। उठने की नाकाम कोशिश की लेकिन परम ने उसे मदद की।
“परम, मैं घर जा सकुंगी!”
“भाभी, बाबूजी के निचे से गुजरी हुई हो तो थोडा आराम कर लेना चाहिए, वरना बहोत तकलीफ होती है तभी तो लडकिया बाबूजी से दूर ही रहना पसंद करती है। अभी आपकी चूत सुजेगी, बाद में मूत ने में भी तकलीफ हो सकती है, लेकिन सब ठीक हो जाएगा। अब मैं ही आपको चोद दिया करूँगा।“ उसने अपना मौके को पकड़ कर रखा। मैत्री और नीता की रचना।
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आजके लिए इतना ही ....कल फिर मिलेंगे ।
।। जय भारत ।।