Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 140 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

आपकी और बाकी सब रीडर्स की बहोत बहोत आभारी हूँ दोस्तों

प्रयास और कोशिश करती रहती हूँ, परिणाम आप लोग ही देंगे
 
शुक्रिया दोस्त

बने रहिये कहानी के साथ और आपके मंतव्यो देते रहे
 
चलिए कहानी में थोडा आगे चलते है
 
लेकिन किरण ने भाई के लंड पर थोडा हाथ फिराके छोड़ दिया,किरण कमरे से बाहर आई। वह बहुत खुश थी।

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अब आगे............

किरण के पास अब एक लायसंस था की वह दोनों बहु के सामने भी अपने पैर किसी लंड के आगे खोल सकती थी। पता नै उसे क्या अजीब सा आनंद मिल रहा था। खेर उसे भाई के लंड पर कोई रूचि नहीं थी। पर वह जानती थी की खुल के चुदवाना है तो भाई को थोडा मौक़ा देना पड़ेगा ताकि भाभी शांत रहे। और वह खुद ही किरण के पैरो को किसी के सामने फैलाने को कहे। क्या पता श्याद यह एक डील थी!!!!!!!!

अब यह परम कहाँ गया? चलो देखते है। फनलवर को उसके पीछे पड़े रहना पड़ता है कही मेरी जानकारी के बाहर कोई गुल ना खिला रहा हो।
फनलवर की पेशकश

जब वह कमरे से बाहर आया तो अभी भी अंधेरा था। उसके पास घड़ी नहीं थी। सुबह के करीब 6 बज रहे थे। उसने इधर-उधर देखा तो चारों तरफ औरतें और लड़कियाँ सो रही थीं, किसी की झांगे तो किसी की गांड तो किसी के बोबले साफ़ दिख रहे थे, सोने में कपड़ो का को प्रावधान नहीं दिख रहा था। वह अभी भी नींद में था। बाहरी मकान पर भी उसे आरामदायक जगह नहीं मिली। इसलिए उसने घर जाकर देर तक सोने का फैसला किया। वह लगभग शॉर्ट कट से भागते हुए घर पहुंच गया। उसने दरवाज़ा खटखटाया और कुछ देर खटखटाने के बाद पूनम ने दरवाज़ा खोला। उन्हें पूनम को नंगी देखकर कोई हैरानी नहीं हुई। उसने दरवाज़ा बंद कर दिया और परम को अपने साथ खींचने की कोशिश की,

“परम मेरे साथ तू सो जा,चूत प्यासी है तेरे लंड के लिए, थोडा मेरी चूत को पानी पिला दे। कल तेरे बाप ने भी नहीं चोदा।”

“नहीं रानी, अभी नहीं…। मैं बहुत थक गया हूँ…।” फिर भी परम ने उसकी चूत को थोडा दबाया और आगे चला।

छोटीबहू, सेठानी और किरण जैसी माल को चोदकर परम सच में बहुत थक गया था।

परम दूसरे कमरे में चला गया और माता-पिता के कमरे में उसने महक को नंगी सोती हुई देखा। पूनम के आस-पास होने के कारण, वह महक के साथ सोने नहीं गया और अपना कमरा खोला, जिसे लड़कियों ने कल रात बाहर से कुंडी लगा दी थी। उसने लाइट जलाई और देखा कि उसके पिता और सलोनी एक-दूसरे को पकड़े हुए नंगी सो रहे थे। सलौनी की चूत से अभी भी बाप का माल और खून दोनों ही टपक रहा था। परम को अपने पिता से जलन हुई।

“बेटीचोद साला, हर वक़्त नयी चूत को फाड़ देता है। जवान लोडो को यह मार ही देगा। कुछ बचाके रखनेवाला नहीं है। माँ ने अपने पति को बिगाड़ के रखा है। चूत की क्या हालत बना देता है! और एक सुंदरी है की ऐसे मस्त लोडे को छोड़ कर सेठजी जैसे बेकार लंड से खेलती रहती है।“ उसे फिर याद आया की वह भी तो नयी चूत चोदते रहता है। उसके चहरे पर एक हलकी सी मुस्कान आई।

“बाबूजी!” उसने मुनीम को थोडा हिलाया।
फनलवर की रचना

“हम्म....कौन?” मुनीम ने अपने हाथ को ऊपर उठाते हुए पूछा।

“बाबूजी मैं हूँ, परम।”

थोड़ी देर तो मुनीम कुछ नहीं बोला पर थोड़ी ही देर में उसके मस्तिष्क में परम की आवाज़ गरजी। “बाबूजी!”

बेबाक हो के मुनीम जागा, उसने देखा की सलौनी के हाथ उसकी छाती पर है, और उसके हाथ उसके बोब्लो को ढके हुए हैं। मुनीम ने थोडा निचे देखा तो अचरज हुआ, उसका अधमरा लंड सलौनी की झांगो के बिच फसा पाया। वह तुरत उसके लंड को पकड़ के बहार खिंचा और पलग पर बैठ गया।

परम ने फिर से उसकी बाप का पैर को थोडा हिलाया, उसने उन्हें हिलाया और बाहर जाने को कहा। “मुझे अब यहाँ सोना है।“

बाबूजी: “तू यहाँ इस वक़्त? तू तो सेठजी के घर ही रुकनेवाला था यहाँ क्यों आया?” उसने एक हाथ अपने लंड पर रखा और कहा।

“बाबूजी, मैं वही से आ रहा हूँ, मैं कल रात ठीक से सोया नहीं तो सोचा घर जाके आराम से सो जाऊ। लेकिन यहाँ तो सब कमरे में कोई ना कोई है तो मैंने सोचा आपको जगाऊ और मुझे सोने का मौक़ा मिले।“ उसने सलौनी की आधी दिख रही चूत पर ध्यान केन्द्रित करते हुए कहा।

“क्यों? क्या हुआ जो नींद नहीं आई?” मुनीम अभी भी नींद में लग रहा था क्यों की वह समज नहीं पाया की परम क्या बोला।

आखिर मुनीम भान में आया और समज गया की क्यों परम को नींद नहीं आई।

“हां,ठीक है, तुम यहाँ सो जाओ मैं बहार चला जाता हूँ।“ मुनीमजी ने एक नजर गहरी नींद में सोती हुई सलौनी की तरफ देखा और उसके शरीर पर नजर डाली। उसके बोबले पर काफी जगह मुनीम के निशान दिख रहे थे, निपल काफी सूजी हुई थी, जो उसके नार्मल आकर से काफी बढ़ गई थी। उस निपल को देख के कोई भी कहा सकता था की मुनीमजी ने क्या कांड किया है। उसकी चूत से निकला खून उसकी झांग पर थे साथ में उसके माल भी उसकी झांगो पर चमक कर अपनी हाजरी भरा रहे थे। किसी को भी पता चल सकता था की लडकी के साथ क्या हुआ है। उसकी चूत तो काफी सूज के पकोड़ा जैसी बनी हुई थी जो साफ़ दिखाई देती थी।

मुनीम को यह जानकर शर्मिंदगी हुई कि उसके बेटे ने उसे एक नंगी लड़की के साथ नंगा देख लिया। बिना कुछ कहे मुनीम बाहर चला गया। परम ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। उसने अपने कपड़े उतारे और सलोनी के पास बैठ गया जो गहरी नींद में थी। उसने धीरे से उसे सीधा किया। उसकी चुची की जोड़ी सबसे छोटी थी जिसे उसने अब तक सहलाया। लेकिन उसकी निपल उसके स्तन के आकर पर गवाही दे रही थी की निपल को मुनीमजी ने काफी मेहनत कर दी है। काफी सूजी हुई थी और स्तनों के उभार से तुरंत ध्यान खिंच रही थी।

वास्तव में वह बहुत पतली कमर वाली और कम विकसित जांघों वाली सबसे पतली लड़की थी। उसने बालों वाली चूत को सहलाया और ऐसा करते समय उसका लंड टाइट हो गया। वह गुस्से में था कि उसके पिता ने इस लड़की को चोदा। वह इस लड़की पर ज्यादा गुस्सा था, बजाय इसके कि वह जवान लड़कों से चुदवाए, जैसे परम। लेकिन उसको एक पिता समान आदमी ने चोदा। चोदा तब तक तो ठीक था पर उसकी हालत ज्यादा ही ख़राब दिख ररही थी। वह उसके शरीर को देख रहा था।
फ्नलवर की लेखनी

सलौनी के बोबले पर पापा के निशानों को देख कर उसको ओर ज्यादा जलन महसूस हुई। उसने पाया की लगभग सभी जगह से उसके बाप ने अपनी छाप छोड़ रखी थी। लेकिन वह एक बात से प्रसन्न भी हुआ की उसका बाप उस से भी बड़ा चोदु है, साथ-साथ में जलन भी हुई की उसका सुपारा और उसके बाप का सुपारे में बहोत फर्क था, एक बार उसके बाप का लंड किसी चूत पर टकराया तो उसका भोसड़ा बनना तय ही था। और यहाँ तो एक नन्ही सी चूत का हिसाब लिया गया था, उसके बाप के लंड ने।

तभी सलौनी करवट बदल कर सीधी हो गई अब उसका शरीर और माल सब साफ़ दिखाई देता था। और उसी वक़्त एक लोंदा उसकी चूत से बहार आके चादर पर गिरा। जो की उसके खून और बाप के माल और सलौनी के खुद का माल का मिक्सचर था।

वह सोच रहा था की माल पतला तो है लेकिन चोदने के लायक भी है। उसके बाप ने खूब जम के उसे चोदा हुआ है। उसके शरीर को पकड़े बिना उसने चूत के होंठ खींचे!

और सलोनी चिल्लाई, “ओह्ह्ह्ह माआआ…मर गयी…। का....का अब रहने दो.....म........र जाउंगी....आ....प का लं...ड ब...हो...त बड़ा है। आ...प....ने भो...स बना दिया है।” सलौनी नींद में कुछ भी बोल रही थी। परम को शायद उसके शब्दों पर ध्यान नहीं था।

वैसे भी,एकदम सुजा हुआ माल को अगर कोई इस तरह बिना सूचित किये खींचे तो क्या होगा! सलौनी के हाथ तुरंत ही उसकी चूत पर चला गया जो परम की हरकत से उसे काफी दर्द महसूस हुआ था। वैसे भी वह काफी दर्द सह चुकी थी। और गहरी नींद में भो तो थी। उसकी चूत ठीक से मूत भी नहीं सकती ऐसी हालत हो गई थी। लेकिन परम ने देखा की उसके चेहरे पर एक सुकून था, भले वह ही नींद में थी।


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दोस्तों आज के लिए बस यही तक

फिर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ


तब तक के लिए फनलवर की ओर से जय भारत
 
जी हाँ

अप सही कह रहे है.............क्या मुझे इसे लिमिट कर देना चाहिए ???????????????????
 
शुक्रिया दोस्त

आपकी यही कोम्नेट बता रही है की आप को यह कहानी पसंद आ रही है और मुनीमजी एक प्रथम केटेगरी के किरदार है, अच्छा लगा की जलन हो रही है

शुक्रिया दोस्त
 
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