Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 144 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

Ji aaj denewali thi par kuchh additional kaam aa gaya to nahi de paai.

Sorry

Kal pakka de dungi lunch hours me baad. I mean recess time me.
 
shukriyaa dost

maine yah story nahi padhi par mujhe lagta hai ki meri aur yah stroy me kaafi antar hai, meri story me chacha abhi tak nahi aaye aur yaha shayad chacha main charactor hai , dusara yah kahani muj se pahle likhi gai hai shayad 2022 jo ki abhi tak shayad End nahi hui.

kher agar koi prasang aisa hai jo milta jhilta hai to thik hi hai...............vaise bhi net se liya net ko diya jaisi baat hai................kisi kaa koi copy right to hai hi nahi.
 
चलिए कहानी को थोडा आगे लेके चलते है.................
 
“महक, तूने गलत कहा था…सिर्फ पूनम ने नहीं, तूने भी चोदकर मुझे मस्त कर दिया। मुझे अब किसी भी लड़की से चुदवाना या उसको चोदने का अनुभव प्राप्त हो गया और लगता है की लंड भी और लड़की भी, कोई भी हो मेरी गांड मुझे मजा दे सकती है, अगर तुम दोनों जैसी माल मेरे माल को तोड़ सके वैसे।”

****

अब आगे.............

सलोनी उठी, खिड़की की ओर बढ़ी और पहली बार लंड हाथ में लिया।

“काका, बहुत मजा आएगा इस मस्त लौड़े से चुदवाने में…” उसने महक को निर्देशित किया,

“दरवाजा खोल दे और मैं भी तेरे बाप के लिए चूत खोल देती हूँ।” अब वह अपने आप में नहीं रही थी।

सलोनी ने लंड की मुठ मारी और मुनीम ने फिर से सलोनी के ऊपर वीर्य छिड़क दिया… उसने तुरंत लंड को मुंह में भर लिया और वीर्य को जीभ पर इकट्ठा कर लिया। मुनीम ने छोटी सी चुची दबाई और महक ने दरवाजा खोला। महक और पूनम दोनों बाहर आ गईं। अन्दर आके मुनीम ने सलोनी के मुंह में अपना लंड रखा और सलोनी ने लंड को चूस कर सूखा लिया और लंड को छोड़ दिया। वह भी बाहर आ गई। उसने महक को कसकर पकड़ लिया और उसके होंठों को चूम लिया और चूमते हुए वीर्य का कुछ हिस्सा महक के मुँह में उड़ा दिया। दोनों लड़कियों ने सह निगल लिया।

“क्यों रे कुतिया, कैसा है तेरे बाप का रस।” सलोनी ने पूछा।

“हरामजादी तेरे बाप के रस से ज्यादा टेस्टी है…। तू बस अब अपनी चूत चुदवा फिर बताना की मेरे बाप का लंड कैसा है। माँ चुद जायेगी तेरी इस नन्ही सी चूत की।” महक ने पलटकर जवाब दिया

मुनीम ने महक को कमर से पकड़ा और ढीला लंड बेटी के कूल्हे पर रगड़ा।

“साली,मादरचोद, तूने ही आज मुझे धोखा दिया।” मुनीम ने कहा, “ये दोनों पूनम और सलोनी की चुदाई के लिए तैयार थे,तूने ही नहीं चोदने दिया। मादरचोद,तेरी माँ की चूत मारू, भोसडिकी।”

महक ने पापा को दूर नहीं किया। बल्कि पूछा। ''मुझे चोदोगे? अपनी बेटी को चोदोगे सहेली के सामने!''

“हा, आज तुझे इन दोनों के सामने चोदूंगा। और तेरे इस कुए में मैं अपना बिज डालूँगा, भोसडीकी आज तेरी चूत और गांड को ऐसा बड़ा बनाऊंगा की कभी मेरे सामने ऐसा वर्ताव करने से पहले सोचेगी।” मुनीम ने चूची को दबाया।

“ठीक है,चोदने दूंगी लेकिन एक शर्त पर।” उसने कहा

“क्या शरत?” मुनीम ने पूछा।
फनलवर की पेशकश

“पहले तुम्हें हम तीनो का पेशाब पीना पड़ेगा।” महक को लगा कि पापा इसके लिए कभी राजी नहीं होंगे। लेकिन मुनीम बाकी दो लड़कियों को दिखाना चाहता था कि वह कैसे सबसे हॉट लड़की पर हावी होकर उसे संतुष्ट करता है।

“हाँ पीऊँगा,मैं तैयार हूँ!” उसने कहा।

“तो मैं भी मेरे बाप से चुदने को तैयार हूँ।” उसने सबको टॉयलेट में आने को कहा

मुनीम ज़मीन पर घुटनों के बल बैठ गया और महक ने बाकी दो लड़कियों से मुनीम के मुँह में पेशाब करने को कहा। महक ने चूत को उसके मुँह से लगा दिया और पेशाब करने लगी।

पूनम के लिए भी यह घिनौना था। उसे बेटी के हाथों में पिता का इतना अपमान पसंद नहीं आया। और खास कर उसके पसंदगी का लंड से ऐसी मजाक! उसने महक को ना जाने कितनी गालिया दी अपने मन में।

“महक, बस अब हो गया। चूत हटा ले।” उसने सहेली से पेशाब करने का अनुरोध किया। लेकिन महक ने सुनिश्चित किया कि उसका पेशाब पिता के मुँह में ही जाए।

महक के पेशाब खत्म होने के बाद, मुनीम ने खुद पूनम के कूल्हों को पकड़ा और होंठ चूत के होंठों पर रख दिए।

“पूनम मुतो।”

और पूनम ने बेमन पेशाब करना शुरू कर दिया और मुनीम ने अपनी प्यारी पूनम का ढेर सारा पेशाब पी लिया।

मुझे मालूम नहीं था कि तू इतनी गंदी हो सकती है।” पूनम ने महक को डाँटा और पेशाब खत्म होने के बाद उसे दूर धकेल दिया।

“मुझे तुम्हारा यह व्यवहार बिलकुल भी पसंद नहीं आया। तुम्हे नहीं चुदवाना था तो सीधा मना कर देती लेकिन यह शरत रख के तुमने अपने आपको नीचा कर दिया महक, एक मस्त लंड की बेइज्जती कर दी। मुझे माफ़ कर दो काका। मैं यह बिलकुल नहीं चाहती थी। हां अगर आप मुज पर मूत ते तो शायद मैं ख़ुशी-ख़ुशी पि लेती।” पूनम ने अपना मुनीम के प्रति प्रेम का अद्रश्य रूप से स्वीकार कर लिया। वह ना जाने क्यों पर अब मुनीम से प्यार करने लगी थी। परम एक चोदु है पर मुनीम का लंड उसे अति प्रिय था। वह शायद कभी उसके बच्चे की माँ बन ने के सपने देख रही थी हलाकि यह सब उसने किसी को नहीं बताया था।

दूसरी ओर सलौनी को यह सब गन्दा लग तो रहा था पर सब कुछ उसके लिए नया था वह एसा समज रही थी की यह सब होता है। और उसने देखा भी था की उसके पापा कभी कभी उसकी मम्मी पर पेशाब करते थे और मम्मी भी पप्पा के ऊपर पेशाब करती थी लेकिन दोनों में कोई झगडा नहीं होता था। बस माँ ने कहा था अपना मुंह बंद रखे रखना है तो वह कुछ नही बोली बस अपना मूत मुनीम के मुंह में छोड़ती रही और उसके लिए यह एक मादक अनुभव था उसे शायद पसंद भी आया था। पर एक मर्द पर मूतना कुछ अजीब लग रहा था, उसे ऐसा था की मर्द को यह छुट्टी है की वह औरत पर म्यूट पर यहाँ कुछ उल्टा था और नया भी था। उसने इस प्रसंग का मजा लिया।

पूनम की बात सुन कर महक को भी अपने किये पर पछतावा हुआ। वह सिर्फ एक्साईटमेंट क्रिएट करना चाहती थी, और अपनी जलन जो पूनम या फिर सब औरतो से जो भी मुनीम यानी की अपने पापा से चुद्वाती थी, वह अपने बाप को किसी भी तरह किसी से भी साँझा करना नहीं चाहती थी। अब उसे डर लगने लगा की उसका बाप अब उस से दूर चला जायेगा इस हरकत से। उसने अपने बाप को पूनम की नजर से गिराने के लिए यह सब किया। उसकी आँखों में अब पानी था।

आखिरकार, सलोनी ने भी मुनीम के मुंह में पेशाब कर दिया, उसके लिए यह एक अच्छा अनुभव था। अब सलोनी हर तरह की चुदाई के लिए तैयार थी। एक ही रात में वो एक आम लड़की से एक गंदी और सेक्सी लड़की बन गई।

सलोनी के पेशाब करने के बाद, मुनीम उठा, उसने पेशाब करना शुरू किया और तीनों लड़कियों की चूत पर पेशाब छिड़क दिया। लेकिन पूनम ने मुनीम का लंड अपने मुंह में ले लिया और आँखों से इशारा किया की वह अपनी मूत की धार छोड़े वह तैयार है उसके सब कुछ लेने के लिए। और लंड से मूत की धार बहाने लगी और पूनम का मुंह भरने लगी, पूनम बड़े आराम से सब पि रही थी, शायद वह अपने मन से कर रही थी, कोई गिलौनापन नहीं दिख रहा था। पेशाब खत्म होते ही सलोनी बैठ गई और लौड़ा गटक गई।

वो दूसरी बार ही लंड चूस रही थी। बेडरूम में पहली बार। और दोनों लड़कियों ने अपनी उंगलियाँ चाट लीं।

"कौन बोलेगा साली वर्जिन है। बाप रे, हम से ज़्यादा अच्छे से लंड चूस रही है।।" महक ने कहा। पूनम ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया। शायद वह अभी भी गुस्से में थी। उसने महक की ओर देखा तक नहीं और ना कोई प्रत्युत्तर दिया। जैसे महक वहा है ही नहीं।

“मुझे तो बस परम का लौड़ा चुसने में मज़ा आता है…।” पूनम ने कहा। उसने जान्बुज कर मुनीम का नाम काट दिया। उसे अब लग रहा था की महक को अपने बाप का लंड साँझा करने में जलन हो रही है।
फनलवर की लेखनी

“वैसे मैं सबका लंड चूसती हूँ…लेकिन मुझे लंड चूसना अच्छा नहीं लगता।” महक ने कहा।

“मुझे जबरदस्त चुदाई चाहिए और उसके बाद तुम जैसी सुंदर लड़की का चूत चूसना अच्छा लगता है। लेकिन इस साली सलोनी को देख, लगता है सालो से भूखी है…।”

दोनों लड़कियों को समझ नहीं आ रहा था कि सलोनी क्यों चूसने की इच्छुक है। शुरुआत में तो उसने अपने पिता से भी बड़े मुनीम से चुदाई का मन बना लिया था। लेकिन बाद में उसने सोचा कि अगर उसे एक पितातुल्य व्यक्ति से अपना कौमार्य भंग करवाना ही है, तो क्यों न पिता को ही बेटी का कौमार्य भंग करने का मौका दिया जाए।

बेटी ने देखा था कि मुनीम दो बार स्खलित हो चुका है और उसे यकीन था कि अगर वह एक बार और स्खलित हुआ, तो वह उसे या बाकी दो को चोदने की स्थिति में नहीं होगा।

चुदाई और चूसने के आनंद से मुनीम कराहने लगा। वह चुदाई करना चाहता था, लेकिन साथ ही वह इस आनंद को जाने नहीं देना चाहता था। आँखें बंद करके उसने खूब आनंद लिया और खुद पर काबू नहीं रख सका। तीसरी बार स्खलित हुआ, लेकिन इस बार उसने अपना लंड मुँह से बाहर निकाला और वीर्य को ज़मीन पर गिरते देखा।

“आज तुम किसी को चोद नहीं पाओगे।” पूनम बोली। महक ने हकार में सिर हिलाया। और खुश हुई की आज मुनीम किसी को चोद नही पायेगा, बाद में वह लंड मेरा है।

“चलिए काका अब चुदाई करेंगे!” सलोनी ने कहा और मुनीम को टॉयलेट से परम के कमरे में खींच लिया।

“हमें परेशान मत करना।” सलोनी ने दरवाज़ा धक्का देकर बंद कर दिया।

“साली एक नंबर की हरामजादी, अब अकेले मुनीम का मज़ा लेगी।” पूनम ने गुस्से और जलन में कहा और बाहर से दरवाज़ा बंद कर दिया।

“साली, रात दिन मुनीम से चुद्वाती रह हमें क्या।”

दोनों माता-पिता के कमरे में आ गए। वे पहले से ही संतुष्ट थे। पूनम ने महक को उसकी बदचलन और पापा से चुदने की चाहत के लिए डाँटा। उसने महक से कहा कि वह परम से कहेगी कि वह अपने दोस्तों को बुलाकर महक को चोदे और संतुष्ट करे। महक मुस्कुराई और मन ही मन बोली,

“क्या होगा अगर पूनम को पता चल गया कि परम और मुनीम के अलावा सेठजी और उसके दोस्त भी उसे चोद चुके हैं?”

पूनम जानती थी कि विनोद अब नियमित रूप से महक को चोद रहा है। दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाया और सो गए। लेकिन पूनम को नींद नहीं आई वह अभी भी पछता रही थी की उसने महक के कहने पर अपनी चूत कैसे खोल दी काका के मुंह में, चुतरस होता तो अच्छा था पर मुतने का मन ही नहीं था।

वही दूसरी ओर महक पूनम के विपरीत सोते हुए रो रही थी और मन ही मन अपने बाप से माफ़ी मांग रही थी। उसके आंसू को किसी ने नहीं देखा।

*****


आज के लिए बस यही तक कल फिर मिलेंगे एक बाये अपडेट के साथ तब तक के लिए फनलवर की ओर से जय भारत।
 
दोस्तों एक नया अपडेट दे दिया है आपके मनोरंजन के लिए

कृपया पढ़े और अपनी राय भेजे।
 
साथ देने के लिए और सहकार केलिए आपका शुक्रिया दोस्त
 
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