पूनम जानती थी कि विनोद अब नियमित रूप से महक को चोद रहा है। दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाया और सो गए। लेकिन पूनम को नींद नहीं आई वह अभी भी पछता रही थी की उसने महक के कहने पर अपनी चूत कैसे खोल दी काका के मुंह में, चुतरस होता तो अच्छा था पर मुतने का मन ही नहीं था।
वही दूसरी ओर महक पूनम के विपरीत सोते हुए रो रही थी और मन ही मन अपने बाप से माफ़ी मांग रही थी। उसके आंसू को किसी ने नहीं देखा।
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अब आगे.............
दूसरे कमरे में, मुनीम सलोनी को सहला रहा था। उसने उसे चूमा, उसकी छोटी चूची और निप्पल चूसे। उसने सलोनी की चूत और भगनासा को भी चाटा और चूसा। वह चाहता था कि सलोनी फिर से लंड चूसे, लेकिन वह नहीं मानी। वह पूरी तरह संतुष्ट थी, हालाँकि उसे अपने पिता से बड़े आदमी से पहले चुदने में कोई दिलचस्पी नहीं थी।
उसने सोचा कि अगर वह मुनीम को चुदने दे सकती है, तो अपने पिता से ही क्यों न चुदवा ले। उसने पिता को रिझाने और उनसे चुदने के बारे में सोचा। उसने कहा कि उसके पिता मुनीम से कहीं ज़्यादा खूबसूरत हैं, लेकिन उसे यकीन नहीं था कि उसके पिता का लंड मुनीम जैसा होगा। उसने तय किया कि भले ही पिता का लंड मुनीम के लंड से छोटा हो, वह पिता के साथ कुछ देर मज़े लेगी और फिर दूसरे लंड का स्वाद चखने के लिए मुनीम के पास आएगी। पिता के साथ महक के रिश्ते ने सलोनी को बहुत प्रभावित किया। वह आँखें बंद करके पिता के साथ चुदाई के सपने देखने लगी।
“काका अभी हम दोनों थक” "गए हैं। आप मुझे पकड़कर सो जाओ। सुबह में चुदाई करेंगे। तब तक ये लौड़ा भी तैयार हो जाएगा।" सलोनी चाहती थी कि जब तक वो मुनीम के साथ है, लंड ढीला ही रहे।
उसने लंड को मुट्ठी में भींच लिया और आँखें बंद कर लीं। मुनीम बहुत दुखी था कि एक कुंवारी लड़की उसके बगल में लेटी है, लेकिन वो उसे चोद नहीं पा रहा है। उसने ये भी सोचा कि थोड़ी नींद के बाद वो अपनी ऊर्जा वापस पा लेगा और सलोनी को चोदने के लिए पहले की तरह तैयार हो जाएगा। वैसे भी वह जबरजस्ती से कुछ भी नहीं करना चाहता था। अब तक जो नहीं किया उस नियम को तोड़ने से कोई फायदा नहीं। वह किसी बी लड़की की आ..ह....लेना नहीं चाहता था। यही तो उसका गुण भी था।
दोनों सो गए।
दूसरे कमरे में दोनों लड़कियाँ बहुत थकी हुई थीं और जल्दी ही सो गईं। फ्नलवर कि लेखनी।
लेकिन मुनीम को कहा नींद आनेवाली थी। बगल में नंगी पुरे सिल वाली लड़की सो रही हो और मुनीम का लंड खड़ा ना हो यह तो कैसे चलेगा। मुनीम आधी रात को अपने बिस्तर से उठा और बगल में सलौनी बड़े आराम की नींद में थी। उसकी बोबले उसके स्वास के साथ ऊपर-निचे हो रहे थे, बिलकुल नंगी थी, उसके पैर एक दुसरे के ऊपर थे इसलिए उसकी चूत नहीं दिखाई दे रही थी फिर भी वह उत्सुक था उसे देखने को। हलाकि उसने देखा था जब वह उसके मुंह में मूत रही थी तब उसने उसकी चूत को पूरा मुंह में लेकर उसका मूत पिया था। पर अब उसे तमन्ना हुई की उसे फिर से देखे।
वह खड़ा हुआ और धीरे से सलौनी को थोडा घुमाया, सलौनी नींद में ही “उम्म्म्म” कर के करवट बदली और मुनीम के सामने उसकी गांड का नजारा दिखाई दिया। उसने उसके कुलहो को थोडा फैलाया, उसके साथ ही सलौनी के मुंह से नींद में ही आवाज निकली “रहने दो न।”
उसने साइड वाले एक बोबले को थोडा दबाया, सलौनी ने उसका हाथ हटाया लेकिन पूरी नींद में थी। मुनीम ने फिर से कोशिश की। इस बार सफल भी हुआ, सलौनी ने अब उसका हाथ अपने बोबले के ऊपर ही रहने दिया और मुनीम ने उसे सहलाना शुरू किया। वह जानता था की माल बहोत ही कच्चा है उसे बहोत प्रेम से लंड के निचे लाना पड़ेगा, कोई जल्दबाजी काम में नहीं आएगी। उसे पूनम की तरह ही उसकी गांड चाट के उसे तरोताजा करके पूरी तैयारी करके उसके माल पर हमला करना पड़ेगा।
मुनीम ने अपनी परिपक्वता का पूरा उपयोग करते हुए,मुनीम ने कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई और धीरे-धीरे अपने गंतव्य की तरफ बढ़ने लगा। अब वह उसका साइड वाला बोबला को सहलाके थोडा मसलता और फिर सहलाता। धीरे-धीरे इसकी असर सलौनी पर होने लगी पर अभी भी वह पूरी नींद में थी या कोई मादक सपना देख रही थी। सलौनी ने कोई विरोध नहीं किया तो मुनीम ने आगे बढ़ने का निश्चय किया। वह अब थोडा ज्यादा जोर लगा के उसके बोबले को मसल रहा था और शरीर के बाकि हिस्से में दूसरा हाथ पसार रहा था। धीरे धीरे वह उसकी गांड तक पहुच गया, उसने एक कुल्हे को थोडा फैलाया और धीरे से गांड के छेद तक पुहुचा।
उसने धीरे से उसकी गांड के छेद को छेड़ना शुरू किया उसने पाया की अभी भी उसकी गांड गीली है, शायद पूनम और महक के थूंक से या फिर खुद के चुतरस से। उसको पता था की पूनम जब सलौनी की गांड मार रही थी, लेकिन पूनम और मुनीम की उंगलियों में काफी अंतर था, पूनम की ऊँगली पतली और मुनीम की बहोत मोटी। उसने बड़े ध्यान से उस छेद को सहलाना चालू कर दिया। थोड़ी देर ऐसे ही सहलाने से उसका परिणाम आगे आने लगा और सलौनी अब नींद में ही थोडा कराहने लगी और अपनी गांड को थोडा पीछे कर के मुनीम की ऊँगली को जगह दी। हालाकि अभी भी वह पूरी नींद में थी लेकिन यह सब उसकी गांड ने ही उसे ऐसा करने को कहा। उसकी गांड, भले ही नींद में ही सही पर आनंद देने लग गई, वैसे भी उसकी गांड पहले भी मरवा चुकी थी तो आराम से आनंद प्रसारित करने लगी। अब मुनीम समज गया की गांड तैयार हो रही है।
उसने सलौनी की चूत पर अपना मुंह ले जा कर के गांड के छेद पर अपना मुंह टिका दिया। नतीजा तात्कालिक तो नहीं आया पर थोड़ी देर जीभ घुमने से सलौनी के शरीर में चेतना आ गई। उसने पाया की कोई उसकी गांड से छेड़छाड़ कर रहा है। वह तुरंत उठ खड़ी हुई। लेकिन तब तक मुनीम ने अपने हाथ उसके पेट पर रख के उठने नहीं दिया और अपना मुंह चूत के छेद से गांड के छेद तक चाटता रहा। फनलवर कि पेश्काश।
“काका, यह क्या कर रहे हो! हमने काफी मजा ली है। अब सो जाओ।“ वह नींद में थी और वह भूल गई थी की उसने क्या सोचा था। थोडा विरोध भी किया पर मुनीम के प्रयासों के आगे उसकी गांड ने विरोध करने से मना कर दिया।
थोड़ी इसी प्रक्रिया चलती रही और सलौनी ने हार मानना शुरू कर दिया, अब वह नींद में नहीं थी, उसको सब याद आ गया की उसने अपने बाप के बारे में क्या सोचा था और यह लंड के बारे में क्या सोचा था। पर मुनीम अब सर्वोपरि था।
बेटी, मैं तो अभी भी भूखा हूँ! मेरा तो ख्याल कर। तुज जैसा कच्चा माल मेरे सामने पड़ा हो तो मैं कैसे सो सकता हु बिना माल को खाए?”
“ठीक है, काका, थोडा कर लो लेकिन मुझे अब चुदवाना नहीं है, प्लीज़ अपने लंड को थोडा काबू में रखना और मेरे मुंह में छोड़ कर शांत हो जाना ठीक है!“ उसने सोचा की अब पापा हो या काका आज मौक़ा है तो सिल टूटेगा क्या फर्क पड़ता है।
“देखेंगे बेटी,अभी तो मुझे अपना काम करने दो” उसने एक ऊँगली सलौनी की गांड में पिरो दी, सलौनी उछल पड़ी।
“नहीं काका, मैंने सोचा है की मैं अपना सिल अपने पापा से खुलवौंगी, फिर आप जितना चोदना है चोदते रहना।“
“बेटी, एक बात बताऊ, देख मेरी बेटी तुजे यहाँ लाके मुझे एक नया माल दिया समजी?”
“जी...तो?”
“तो क्या तू भी तेरे बाप को एक नया पेटीपेक माल अपने बाप को गिफ्ट कर देना, आज तू मुज से चुद जा और कोई और तेरे बाप को दे देना, मैं महक को तेरे बाप से चुदवाने के लिए भेज दूंगा फिर क्या समस्या है तुजे?”
“जी...बात तो आपको सही है लेकिन महक चुदी हुई है।“ फनलवर की रचना।
“तेरे बाप को मस्त माल चाहिए या फिर नयी कच्ची चूत! पूनम भी चुदी हुई थी फिर भी मैंने चोदा न, लंड को चूत चाहिए बेटा।” उसने अपना काम जारी रखा और गांड को ऊँगली से चोदने का प्रयास चालू रखा।
सलौनी अब मुनीम के परिघ में आने लगी थी। उसने सोचा महक जैसा माल देख के उसके बाप को मजा आ जाएगी और मैं खुद भी पापा से चुदुंगी और माँ के साथ महक को भी और पूनम को भी साथ ले लुंगी। और काका की बात भी सही है, सिल का क्या है कभी ना कभी कोई तो तोड़ेगा ही। और सिल टूटेगा तो बड़ा मजा आएगा बाप का लंड भी अन्दर आराम से ले पाऊँगी।
“काका, सिल टूटने से कोई प्रॉब्लम तो नहीं होगी?”
“देखो बेटी, मैंने कई सिल तोड़े है कुछ नहीं हुआ, हो सकता है की तेरे बाप के लिए नया हो और वह ठीक से सिल तोड़ ना पाए, बेहतर है, मेरे लंड से अपना सिल तुडवा लो बाद में औरत बन के कुछ भी करो, जी भर के आने बाप का लंड लेते रहना किसी को पता भी नहीं चलेगा। और औरत बन के कभी भी और कही भी किसी के भी लंड से चुदवा सकती हो। उसके लिए मेरा लोडा सही है। एक बार चुदवाया तो कोई भी लंड तुम्हे आराम से चोद सकता है और दर्द भी नहीं होगा। जीवनभर का एक ही बार दर्द सेहलेना है बाकी आराम ही आराम।“
“ह्म्म्म....तो ठीक है।“
बस इतना सुनना था की मुनीम ने तुरंत उसका लंड सलौनी के मुह में दे मार और आराम से उसका मुंह चोदने लगा। उधर सलौनी भी तैयार ही थी क्यों की उसकी चूत अब उसके काबू में नहीं थी। बार बार रिसती जा रही थी। अब उसके लिए उसकी बाप के लंड से ज्यादा मुनीम का लंड से प्रेम होने लगा था।
थोड़ी देर सलौनी का मुंह चोदने के बाद वह तुरंत निचे की ओर चला गया, अब वह कोई बाधा नहीं चाहता था लंड और चूत के बिच।
उसने सलौनी के पैर थोडा ओर फैलाया और अपने लंड के सुपारे को सलौनी की चूत द्वार पर टिका दिया। सलौनी को पता था की इतना बड़ा सुपारा जब उसकी चूत का छेदन करेगा तो उसकी फट तो जायेगी ही। लेकिन उसकी उम्मीद से ज्यादा ही निष्ठुर होनेवाला था, यह उसको नहीं पता था। महक का गुस्सा अब उसकी चूत पर उतरनेवाला था।
सलौनी ने पर्याप्त सुविधा दी मुनीम के लंड को आने के लिए, अपनी गांड एकदम सटीक कर के पैर हवा मे उठा देये और बोली: “काका, चलो, अब देर ना करो अपने हथियार से मेरा किल्ला तोड़ के अपना सिक्का जमा दो।“
मुनीम समज गया की माल अब पूरी तरह से रेडी है। उसने बिना देरी किये उसका लंड को सलौनी की चूत द्वार से अन्दर की और खिसकाना चाहा पर सलौनी चूत काफी टाईट और छोटी होने की वजह से यह राक्षसी सुपारा जा नहीं रहा था।
सलौनी:”क्या हुआ काका!, अब चोदो प्लीज़....अब चूत से खेलो नहीं बस लंड को जाने दो।”
“बेटी, यह तेरी चूत है की पत्थर की दिवार! काफी टाईट है बेटी अब तू तैयार ही रहना लोडे के मार के लिए।“ इतना कहा के अपने लंड पर जोर से दबाव डाला और सलौनी ऊपर की तरफ उछली।।।
“ओ....बा....प....रे....म....र....गई, इतने जोर से डालते है क्या? निकालो बहार!”
लेकिन अब सलौनी के पास समय नहीं था, वह एक राक्षसी सुपारे के कब्जे में थी। एक सही तरीके से और झटका लगा और मुनीम का सुपारा अंदर की और किल्ला भेद ने के लिए चला गया।
सलौनी चिल्लाई पर मुनीम ने उसके मुंह पर हाथ रख दिया और सब सिसकारी अब उसके गले में ही रह गई। उसने अपनी गांड खिसका के चूत को लंड से आज़ाद करने की नाकाम कोशिश की। क्योकि सलौनी का पहली बार था लेकिन मुनीम के लिए.........
थोड़ी देर में आराम के धक्के से लंड का प्रवेश हो गया और झिल्ली टूटी.....एक खून की धार फुट पड़ी। मैत्री की लेखनी।
“काका....मैं....म....र....ग,,,,इ....!” मेरी चूत.....ओ...बाप....रे....” पर अब काका कहा सुन ने वाला था और सुनता भी तो वह लंड कहा बहार आनेवाला था। धम....धम करके अब मुनीम ने अपनी गति बढाई। एक मिनट के बाद सलौनी भी अपनी गांड उछल-उछल के लंड को अपने में समा ले रही थी। बस इस तरह सलौनी ने अपना कौमार्य मुनीम के लंड को प्रेजेंट कर दिया। थोड़े समय के लिए कुछ शांत धक्के लेकिन बाद में मुनीम अपने तौर तरीके से सलौनी की चूत को फाड़ रहा था। अब समय और कमरे में एक आनंदित शरीर मिलन हो रहा था। दोनों तरफ से एक साथ धक्के लग रहे थे और लंड अब पूरी तरह से चूत में समा रहा था। काफी समय मुनीम के लंड ने सलौनी की चूत की हर दिवार को फैला कर रख दिया और समय आया की मुनीम का शरीर थान्गानाने लगा और लंड से पिचकारी छुटी। मुनीम उसकी चूत को भर के ऊपर से उठा तब दोनों ने देखा की काफी खून बह गया था। मुनीम ने सान्तवना दी और कहा “ऐसा होता है अबसे तुम्हे खून की चिंता करने की जरुरत नहीं रहेगी और नहीं कोई बड़ा लंड से डर ने की जरुरत रहेगी। अब तुम एक मस्त औरत हो और तुम्हारी चूत अब खुल गई है।“ और साइड में जाके सो गया। सलौनी अपनी चूत को थपथपाती रही और खून की चिंता कर रही थी। लेकिन वह बहोत खुश थी। उसकी ख़ुशी उसकी चूत में हो रहे दर्द से काफी ज्यादा थी। हां लेकिन अब उसकी चूत लंड के मार से काफी सूज रही थी। उसकी चूत की पंखुड़िया अब अपने आकर से बड़ी हो रही थी। सुजन पकड़ रही थी। लेकिन अभी फिलहाल तो सलौनी को उसकी चिंता नहीं थी। उसे पता था की ऐसा लंड अगर उसकी चूत में जाएगा तो सुजन तो होनी थी पर कितनी वह तो उसत के देखे तब पता चलता की चुत के पंखुडियो ने मूत द्वार को कवर कर लिया था शायद ही वह ठीक से मूत पाएगी सुबह।
शायद यह सब से बड़ा एपिसोड रहा मेरे लिए लेकिन प्रसंग को पूरा करने के लिए जरुरी था।
आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ तब तक के लिए फनलवर की ओर से जय भारत।।