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- Dec 5, 2013
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इस तरह वे बातें करते रहे और परम ने चुदाई की। आखिरकार रजनी की तरह रिंकू भी चरम पर पहुँच गया और उसे एक संतोषजनक चरमसुख प्राप्त हुआ। लेकिन परम का लौड़ा टाइट ही रहा। उसने रिंकू की चूत से अपना लंड बाहर निकाला और रजनी तीन गिलास मिल्कशेक लेकर लौटी।
परम को याद आया कि उसे पूनम को भी लेने जाना है, इसलिए वह कपड़े पहनना चाहता था। लेकिन रजनी ने उसे नंगा रहने पर मजबूर किया।
तीनों नंगे होकर बातें कर रहे थे। तभी उन्हें एक दस्तक सुनाई दी।
"कौन?" रजनी चिल्लाई। फनलवर की प्रस्तुति।
"मैं हूँ माँ।"
यह उसकी बेटी सुधा की आवाज़ थी।
वह नंगी ही बाहर गई और दरवाज़ा खोला। सुधा के अंदर आते ही उसने देखा कि परम और रिंकू भी नंगी बैठी थीं। सुधा की नज़र सीधे परम के लौड़े पर पड़ी जो अभी भी टाइट था। सुधा परम के पास से गुज़री और उसने उसे अपनी गोद में खींच लिया। सुधा ने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन परम ने उसकी कॉलेज ड्रेस उतार दी और उसे बिस्तर पर उठा लिया। परम जानता था कि सुधा घर में सबको नंगी देखकर हैरान है और इसलिए वह चुदाई के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं है। परम सुधा की कसी और सूखी चूत का स्वाद लेना चाहता था। इसलिए बिना किसी फोरप्ले के, परम ने अपना लंड उसकी चूत के छेद पर रखा और ज़ोर से धक्का दिया।
सुधा की चूत सूखी थी, इसलिए परम के ज़ोरदार धक्के से उसे दर्द हुआ।
"ओह्ह्ह्ह....परम मादरचोद....थोड़ा धीरे। मेरी फट जायेगी......थोड़ी गीली तो कर ले...."
"बाप रे कितना दम है!" नौकरानी फुसफुसाई.... "प्रभा दीदी को चोदा, हम दोनों को चोदा और अब इस गरम जिलेबी सुधा का स्वाद ले रहा है।"
चूत के अंदर हमला इतना अचानक हुआ था कि सुधा को परम के धक्के को सहना मुश्किल हो रहा था। लेकिन उसने नौकरानी की बात सुनी कि 'प्रभा दीदी को चोदा।''
“परम, सलोनी रात को तेरे घर में थी।” सुधा कूल्हे मटकाती रही।
“हा, रात को पूनम और महक ने सलोनी को चोदा और सुबह-सुबह मैंने उसकी 'सील' तोड़ी। बिल्कुल तेरे जैसी कुंवारी थी। दो- बार चोदा लेकिन तेरी चूत में जो गर्मी है वो सलोनी में नहीं। लेकिन उसकी मां ने सलोनी से ज्यादा मजा दिया।''
“साला तू एक नंबर का मादरचोद है। अपनी सब माल की माँ को भी चोदता है।” फनलवर की रचना।
अब चुत में अच्छा गीलापन आ गया था और दोनों को मजा आया चुदाई। माँ और नौकरानी दोनों ने बेटी को एक लड़के से चुदते हुए देखा, उन दोनों को परम ने पहले ही उन्हें लंड का गुलाम बना लिया है।
“परम, तेरा बाप का मोटा सुपारा बहुत मजा देता है। लेकिन जो मजा तेरे साथ चुदाई में है वो और कोई नहीं दे सकता।”
सुधा अब आनंद ले रही थी। "अपने हेड मास्टर की बेटी" मंजुला तुमसे मिलना चाहती थी।" वह एक मिनट तक चुप रही और बोली
“शायद चुदवाने के लिए। उसे कही से पता चला है कि तुम मुझे, रेखा और पूनम को बहुत खुश करते हो…।”
उसने उसे कसकर गले लगा लिया, “कल 4 बजे, इस टाइम पर आ जाना एक मस्त कुंवारी लड़की का मजा लेने के लिए…।”
परम बहुत खुश हुआ, सुधा को जी भरकर चोदा, और लंड निकाला। उसने तीनों औरतों के मुँह में चोदा और उन्हें अपना वीर्य चखाया। माँ को परम का लंड चूसते हुए देख सुधा को मजा आने लगी।
“माँ मेरे परम का लंड कैसा है.....तेरे हर छेद को भर सकता है न।“ फनलवर रचित।
रजनी: “बेटा अब क्या बताऊ, परम अब तेरे अकेला नहीं वह मेरे सभी छेदों का भी मालिक बन चुका है। जब भी उसके लंड का प्रसाद मुंह में जाता है एक अजीब सी संतुष्टि मिल जाती है।“
रिंकू: “सही कह रहे हो मेडम।”
सुधा: माँ जब भी मौक़ा मिले परम के लंड को अन्दर जाने देना मेरी परवाह ना करना, जब तुम मेरे सामने चुदती हो तो मुझे वैसे ही अच्छा लगता है। अगर परम के लंड से मुझे तुम एक भाई या बहन दे दो तो भी मुझे कोई प्रॉब्लम नहि होगा।“
माँ: “जानती हु बेटी, तुम अब मेरी बेटी ही नहीं एक सहेली भी हो और सौतन भी। लेकिन तेरे बाप को पसंद नहीं आएगा, अगर मैंने परम के बच्चे को जमन दिया।“
सुधा: ”अरे मेरे बाप की चिंता मत कर अब वह मेरी छुट का आशिक है जो मैं कहूँगी वही करेगा साला भोस चोदिका। लेकिन तुझे जो अच्छा लगे कर।“
आखिरकार, परम ने कपडे पहने, और रजनी को वादा किया कि वह जल्द ही फिर आएगा। उस वक्त वह रजनी की गांड मारेगा।
रजनी ने कहा “सुधा के पप्पा ने एक बार फिर से सुंदरी को चोद ने का मन बनाया है। कुछ हो सकता है क्या? सुंदरी का माल थोड़ी देर मेरे पति के लंड के लिए फ्री हो सकता है क्या?, अगर हो सके तो सुंदरी को तैयार कर देना प्लीज़, अब पति है कही मुझे मना कर दिया तो मैं तुम से नहीं चुदवा सकुंगी। ज्यादा नहीं बस थोड़ी देर मेरे पति के लंड की ओर अपना पैर फैला के माल को थोडा यूज़ करने दे, उसके लंड को शांत कर के। उसका लंड सुंदरी की चूत को आशीर्वाद देगा बेटा!” रजनी ने काफी मस्का मारा।
परम ने वादा किया कि रेखा की शादी खत्म होने के बाद वह सुंदरी को फिर से यहाँ लाएगा और सामूहिक नंगा नाच करेगा। सुंदरी को भी जी भर के चुदावायेगा और बदले में सुधा, रजनी और रिंकू को तेरे पति के सामने ही चोदेगा।
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आज के लिए बस यही तक। फिर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ।
तब तक फनलवर की तरफ से जय भारत।।
परम को याद आया कि उसे पूनम को भी लेने जाना है, इसलिए वह कपड़े पहनना चाहता था। लेकिन रजनी ने उसे नंगा रहने पर मजबूर किया।
तीनों नंगे होकर बातें कर रहे थे। तभी उन्हें एक दस्तक सुनाई दी।
"कौन?" रजनी चिल्लाई। फनलवर की प्रस्तुति।
"मैं हूँ माँ।"
यह उसकी बेटी सुधा की आवाज़ थी।
वह नंगी ही बाहर गई और दरवाज़ा खोला। सुधा के अंदर आते ही उसने देखा कि परम और रिंकू भी नंगी बैठी थीं। सुधा की नज़र सीधे परम के लौड़े पर पड़ी जो अभी भी टाइट था। सुधा परम के पास से गुज़री और उसने उसे अपनी गोद में खींच लिया। सुधा ने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन परम ने उसकी कॉलेज ड्रेस उतार दी और उसे बिस्तर पर उठा लिया। परम जानता था कि सुधा घर में सबको नंगी देखकर हैरान है और इसलिए वह चुदाई के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं है। परम सुधा की कसी और सूखी चूत का स्वाद लेना चाहता था। इसलिए बिना किसी फोरप्ले के, परम ने अपना लंड उसकी चूत के छेद पर रखा और ज़ोर से धक्का दिया।
सुधा की चूत सूखी थी, इसलिए परम के ज़ोरदार धक्के से उसे दर्द हुआ।
"ओह्ह्ह्ह....परम मादरचोद....थोड़ा धीरे। मेरी फट जायेगी......थोड़ी गीली तो कर ले...."
"बाप रे कितना दम है!" नौकरानी फुसफुसाई.... "प्रभा दीदी को चोदा, हम दोनों को चोदा और अब इस गरम जिलेबी सुधा का स्वाद ले रहा है।"
चूत के अंदर हमला इतना अचानक हुआ था कि सुधा को परम के धक्के को सहना मुश्किल हो रहा था। लेकिन उसने नौकरानी की बात सुनी कि 'प्रभा दीदी को चोदा।''
“परम, सलोनी रात को तेरे घर में थी।” सुधा कूल्हे मटकाती रही।
“हा, रात को पूनम और महक ने सलोनी को चोदा और सुबह-सुबह मैंने उसकी 'सील' तोड़ी। बिल्कुल तेरे जैसी कुंवारी थी। दो- बार चोदा लेकिन तेरी चूत में जो गर्मी है वो सलोनी में नहीं। लेकिन उसकी मां ने सलोनी से ज्यादा मजा दिया।''
“साला तू एक नंबर का मादरचोद है। अपनी सब माल की माँ को भी चोदता है।” फनलवर की रचना।
अब चुत में अच्छा गीलापन आ गया था और दोनों को मजा आया चुदाई। माँ और नौकरानी दोनों ने बेटी को एक लड़के से चुदते हुए देखा, उन दोनों को परम ने पहले ही उन्हें लंड का गुलाम बना लिया है।
“परम, तेरा बाप का मोटा सुपारा बहुत मजा देता है। लेकिन जो मजा तेरे साथ चुदाई में है वो और कोई नहीं दे सकता।”
सुधा अब आनंद ले रही थी। "अपने हेड मास्टर की बेटी" मंजुला तुमसे मिलना चाहती थी।" वह एक मिनट तक चुप रही और बोली
“शायद चुदवाने के लिए। उसे कही से पता चला है कि तुम मुझे, रेखा और पूनम को बहुत खुश करते हो…।”
उसने उसे कसकर गले लगा लिया, “कल 4 बजे, इस टाइम पर आ जाना एक मस्त कुंवारी लड़की का मजा लेने के लिए…।”
परम बहुत खुश हुआ, सुधा को जी भरकर चोदा, और लंड निकाला। उसने तीनों औरतों के मुँह में चोदा और उन्हें अपना वीर्य चखाया। माँ को परम का लंड चूसते हुए देख सुधा को मजा आने लगी।
“माँ मेरे परम का लंड कैसा है.....तेरे हर छेद को भर सकता है न।“ फनलवर रचित।
रजनी: “बेटा अब क्या बताऊ, परम अब तेरे अकेला नहीं वह मेरे सभी छेदों का भी मालिक बन चुका है। जब भी उसके लंड का प्रसाद मुंह में जाता है एक अजीब सी संतुष्टि मिल जाती है।“
रिंकू: “सही कह रहे हो मेडम।”
सुधा: माँ जब भी मौक़ा मिले परम के लंड को अन्दर जाने देना मेरी परवाह ना करना, जब तुम मेरे सामने चुदती हो तो मुझे वैसे ही अच्छा लगता है। अगर परम के लंड से मुझे तुम एक भाई या बहन दे दो तो भी मुझे कोई प्रॉब्लम नहि होगा।“
माँ: “जानती हु बेटी, तुम अब मेरी बेटी ही नहीं एक सहेली भी हो और सौतन भी। लेकिन तेरे बाप को पसंद नहीं आएगा, अगर मैंने परम के बच्चे को जमन दिया।“
सुधा: ”अरे मेरे बाप की चिंता मत कर अब वह मेरी छुट का आशिक है जो मैं कहूँगी वही करेगा साला भोस चोदिका। लेकिन तुझे जो अच्छा लगे कर।“
आखिरकार, परम ने कपडे पहने, और रजनी को वादा किया कि वह जल्द ही फिर आएगा। उस वक्त वह रजनी की गांड मारेगा।
रजनी ने कहा “सुधा के पप्पा ने एक बार फिर से सुंदरी को चोद ने का मन बनाया है। कुछ हो सकता है क्या? सुंदरी का माल थोड़ी देर मेरे पति के लंड के लिए फ्री हो सकता है क्या?, अगर हो सके तो सुंदरी को तैयार कर देना प्लीज़, अब पति है कही मुझे मना कर दिया तो मैं तुम से नहीं चुदवा सकुंगी। ज्यादा नहीं बस थोड़ी देर मेरे पति के लंड की ओर अपना पैर फैला के माल को थोडा यूज़ करने दे, उसके लंड को शांत कर के। उसका लंड सुंदरी की चूत को आशीर्वाद देगा बेटा!” रजनी ने काफी मस्का मारा।
परम ने वादा किया कि रेखा की शादी खत्म होने के बाद वह सुंदरी को फिर से यहाँ लाएगा और सामूहिक नंगा नाच करेगा। सुंदरी को भी जी भर के चुदावायेगा और बदले में सुधा, रजनी और रिंकू को तेरे पति के सामने ही चोदेगा।
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तब तक फनलवर की तरफ से जय भारत।।