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पुष्पा ने बेटी की गोद में आराम से लेटते हुए, आह भरकर पूछा, “तुझे परम ने चोदा है ना...?”
पूनम ने माँ के एक निप्पल को मुंह में लेते हुए चूसना शुरू कर दिया और बोली,
“हाँ माँ... बहुत बार चोदा है...” फनलवर की प्रस्तुति।
फिर पूनम ने सीधे माँ की आँखों में देखकर साफ-साफ कहा,
“माँ, मैंने फैसला कर लिया है। मैं सेठजी की रखैल बन जाऊँगी। लेकिन शादी किसी ऐसे आदमी से करूँगी जो मेरे और सेठजी के रिश्ते को पूरी तरह स्वीकार करे। जब चाहे, जहाँ चाहे, सेठजी का लंड मेरी चूत और गांड में समा जाए। तुम भी चुदवा लो ना मम्मी... अच्छा लगेगा...”
पुष्पा ने तुरंत सिर हिलाया और बोली,
“नहीं बेटी... परम के अलावा मुझे कोई और लंड नहीं चाहिए। बस उसी का मोटा लंड...”
पूनम ने मुस्कुराते हुए माँ को पूरी तरह लिटा दिया। उसने माँ की टाँगें चौड़ी कीं, घुटनों के पास से पकड़कर ऊपर की ओर मोड़ा और माँ की चूत पर झुक गई। पहले तो पूरी चूत को सूँघा, फिर जीभ निकालकर लंबी-लंबी चाट लगानी शुरू कर दी।
“आआह्ह्ह... ओह्ह पूनम... किसने सिखाया तुझे ये सब... तेरे हाथ और जीभ में जादू है बेटी... मैं तो सोचती थी कि सिर्फ सुंदरी ही ये जादू जानती है...” पुष्पा जोर से कराह उठी। उसकी कमर उछलने लगी।
पूनम ने माँ की चूत में दो उँगलियाँ ठेल दीं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगी। साथ ही क्लिटोरिस को चूसते हुए बोली,
“माँ, एक बार महक के साथ रहो ना... वो तुझे एक नंबर की रंडी बना देगी...”
“क्या बात है! महक में भी वैसा ही जादू है जो उसकी माँ में है?”
“अरे माँ... वो माँ-बेटी किसी को भी अपने जाल में फंसा सकती हैं। तू बस एक बार उनके सामने जा और अपना माल दिखा दे... वो तेरा धंधा तेरे सामने ही करवा देंगी।” एडिट किया है मैत्री ने।
पुष्पा हाँफते हुए बोली, “नहीं बेटी... मुझे धंधे में कोई रुचि नहीं है। तेरे पापा मानेंगे नहीं। वैसे उन्होंने कहा तो है कि मैं किसी से भी चुदवा सकती हूँ, लेकिन इज्जत का ध्यान रखकर...”
पूनम ने माँ की चूत में जीभ डालकर गहराई तक चाटते हुए कहा,
“माँ, हम बाजार में तो अपना माल लेकर चुदवाने नहीं जा रहे। बस सेठजी के दोस्तों और जान-पहचान वालों में अपना माल बाँटेंगे और चुदवाकर अच्छा-खासा पैसा भी ले लेंगे। धंधा करना बुरा नहीं है। हमारे गाँव की कई औरतें शहर जाकर धंधा करके आती हैं और यहाँ रौब ठोकती हैं।”
पुष्पा ने बेटी के सिर को अपनी चूत पर और जोर से दबाते हुए कराहा,
“हाँ बेटी... सही बात है... धंधा बुरा तो नहीं... लेकिन इज्जत का भी सवाल है। वैसे जो औरतें करती हैं, वो भी इज्जत देखकर ही करती होंगी। पर फिर भी... मेरे ससुर तो मेरे माल पर बहुत मरते थे, लेकिन मेरी माँ ने मना कर दिया था कि अपना माल दबाकर रखो। रख लिया... क्या पाया? सिर्फ पंडित का छुट्टा लंड!”
पूनम ने माँ की चूत चाटते-चाटते कहा,
“बस माँ, मैं भी वही कह रही हूँ। तुम पापा से बात करना। मेरे बारे में पूछ लेना। अगर उनकी हाँ है तो मैं सेठजी की रखैल अभी से बन जाती हूँ। वरना भी बन जाऊँगी, लेकिन बाप के अनजाने में नहीं करना चाहती। तुम बस पापा को पैसा दिखाना... मुझे पैसा से मतलब नहीं, मुझे तो मोटे-मोटे लंडों से मतलब है... मेरे दोनों छेद अच्छे से चुदते रहें, बस।”
पुष्पा ने बेटी को ऊपर खींचकर गहरी किस की और बोली,
“वैसे बेटी तुम एक वेश्या से भी बदतर सोच रही हो फिर भी ठीक है बेटी... मौका मिलते ही पापा से बात करूँगी। मुझे नहीं लगता कि पैसों के सामने वो ज्यादा विरोध कर पाएंगे। जो तुम्हें हर महीने मिलेगा, उसमें से कुछ उन्हें भी दे देंगे। वो भी खुश, तेरा माल भी खुश...”
पूनम ने माँ की चूत में तीन उँगलियाँ डालकर तेजी से फक करते हुए कहा,
“हम्म... लेकिन मुझे सेठजी को जवाब देना है माँ। जो भी करना है, जल्दी करना।” फनलवर की रचना है।
पुष्पा ने बेटी को चूमते हुए जवाब दिया,
“अरे बेटी डरती क्यों है! तू जा के सेठजी को बता दे कि तू उनकी रखैल बनने के लिए तैयार है। जब पापा तैयार हो जाएँगे, तब उन्हें बताएँगे। आज से पूनम सेठजी का माल है... और वो जिससे चाहे, जितनी बार चाहे चुदवा सकती है। बात खत्म। मुझे कोई एतराज बही है, तुम चाहो तो सेठजी को यहाँ लाके भी चुदवा सकती हो पर ध्यान रहे तेरी छोटी बहन भी है और यह लोडो को चूत से काफी मतलब होता है और मैं नहीं चाहती की मेरी दूसरी बेटी भी ऐसे ही किसी के सामने अपनी चूत को खोले बेटी, वह परम का माल है और परम के खूंटे से ही लटकने दे।”
ऐसे ही दोनों माँ-बेटी एक-दूसरे की चूत चाटते, उँगलियाँ डालते, स्तन चूसते, गांड में उँगली करते और बेहद गंदी-गंदी बातें करते हुए नंगे ही एक-दूसरे से लिपटकर सो गए...
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यही तक दोस्तों।
फिर मिले तब तक फूँलवर के जय भारत।।
पूनम ने माँ के एक निप्पल को मुंह में लेते हुए चूसना शुरू कर दिया और बोली,
“हाँ माँ... बहुत बार चोदा है...” फनलवर की प्रस्तुति।
फिर पूनम ने सीधे माँ की आँखों में देखकर साफ-साफ कहा,
“माँ, मैंने फैसला कर लिया है। मैं सेठजी की रखैल बन जाऊँगी। लेकिन शादी किसी ऐसे आदमी से करूँगी जो मेरे और सेठजी के रिश्ते को पूरी तरह स्वीकार करे। जब चाहे, जहाँ चाहे, सेठजी का लंड मेरी चूत और गांड में समा जाए। तुम भी चुदवा लो ना मम्मी... अच्छा लगेगा...”
पुष्पा ने तुरंत सिर हिलाया और बोली,
“नहीं बेटी... परम के अलावा मुझे कोई और लंड नहीं चाहिए। बस उसी का मोटा लंड...”
पूनम ने मुस्कुराते हुए माँ को पूरी तरह लिटा दिया। उसने माँ की टाँगें चौड़ी कीं, घुटनों के पास से पकड़कर ऊपर की ओर मोड़ा और माँ की चूत पर झुक गई। पहले तो पूरी चूत को सूँघा, फिर जीभ निकालकर लंबी-लंबी चाट लगानी शुरू कर दी।
“आआह्ह्ह... ओह्ह पूनम... किसने सिखाया तुझे ये सब... तेरे हाथ और जीभ में जादू है बेटी... मैं तो सोचती थी कि सिर्फ सुंदरी ही ये जादू जानती है...” पुष्पा जोर से कराह उठी। उसकी कमर उछलने लगी।
पूनम ने माँ की चूत में दो उँगलियाँ ठेल दीं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगी। साथ ही क्लिटोरिस को चूसते हुए बोली,
“माँ, एक बार महक के साथ रहो ना... वो तुझे एक नंबर की रंडी बना देगी...”
“क्या बात है! महक में भी वैसा ही जादू है जो उसकी माँ में है?”
“अरे माँ... वो माँ-बेटी किसी को भी अपने जाल में फंसा सकती हैं। तू बस एक बार उनके सामने जा और अपना माल दिखा दे... वो तेरा धंधा तेरे सामने ही करवा देंगी।” एडिट किया है मैत्री ने।
पुष्पा हाँफते हुए बोली, “नहीं बेटी... मुझे धंधे में कोई रुचि नहीं है। तेरे पापा मानेंगे नहीं। वैसे उन्होंने कहा तो है कि मैं किसी से भी चुदवा सकती हूँ, लेकिन इज्जत का ध्यान रखकर...”
पूनम ने माँ की चूत में जीभ डालकर गहराई तक चाटते हुए कहा,
“माँ, हम बाजार में तो अपना माल लेकर चुदवाने नहीं जा रहे। बस सेठजी के दोस्तों और जान-पहचान वालों में अपना माल बाँटेंगे और चुदवाकर अच्छा-खासा पैसा भी ले लेंगे। धंधा करना बुरा नहीं है। हमारे गाँव की कई औरतें शहर जाकर धंधा करके आती हैं और यहाँ रौब ठोकती हैं।”
पुष्पा ने बेटी के सिर को अपनी चूत पर और जोर से दबाते हुए कराहा,
“हाँ बेटी... सही बात है... धंधा बुरा तो नहीं... लेकिन इज्जत का भी सवाल है। वैसे जो औरतें करती हैं, वो भी इज्जत देखकर ही करती होंगी। पर फिर भी... मेरे ससुर तो मेरे माल पर बहुत मरते थे, लेकिन मेरी माँ ने मना कर दिया था कि अपना माल दबाकर रखो। रख लिया... क्या पाया? सिर्फ पंडित का छुट्टा लंड!”
पूनम ने माँ की चूत चाटते-चाटते कहा,
“बस माँ, मैं भी वही कह रही हूँ। तुम पापा से बात करना। मेरे बारे में पूछ लेना। अगर उनकी हाँ है तो मैं सेठजी की रखैल अभी से बन जाती हूँ। वरना भी बन जाऊँगी, लेकिन बाप के अनजाने में नहीं करना चाहती। तुम बस पापा को पैसा दिखाना... मुझे पैसा से मतलब नहीं, मुझे तो मोटे-मोटे लंडों से मतलब है... मेरे दोनों छेद अच्छे से चुदते रहें, बस।”
पुष्पा ने बेटी को ऊपर खींचकर गहरी किस की और बोली,
“वैसे बेटी तुम एक वेश्या से भी बदतर सोच रही हो फिर भी ठीक है बेटी... मौका मिलते ही पापा से बात करूँगी। मुझे नहीं लगता कि पैसों के सामने वो ज्यादा विरोध कर पाएंगे। जो तुम्हें हर महीने मिलेगा, उसमें से कुछ उन्हें भी दे देंगे। वो भी खुश, तेरा माल भी खुश...”
पूनम ने माँ की चूत में तीन उँगलियाँ डालकर तेजी से फक करते हुए कहा,
“हम्म... लेकिन मुझे सेठजी को जवाब देना है माँ। जो भी करना है, जल्दी करना।” फनलवर की रचना है।
पुष्पा ने बेटी को चूमते हुए जवाब दिया,
“अरे बेटी डरती क्यों है! तू जा के सेठजी को बता दे कि तू उनकी रखैल बनने के लिए तैयार है। जब पापा तैयार हो जाएँगे, तब उन्हें बताएँगे। आज से पूनम सेठजी का माल है... और वो जिससे चाहे, जितनी बार चाहे चुदवा सकती है। बात खत्म। मुझे कोई एतराज बही है, तुम चाहो तो सेठजी को यहाँ लाके भी चुदवा सकती हो पर ध्यान रहे तेरी छोटी बहन भी है और यह लोडो को चूत से काफी मतलब होता है और मैं नहीं चाहती की मेरी दूसरी बेटी भी ऐसे ही किसी के सामने अपनी चूत को खोले बेटी, वह परम का माल है और परम के खूंटे से ही लटकने दे।”
ऐसे ही दोनों माँ-बेटी एक-दूसरे की चूत चाटते, उँगलियाँ डालते, स्तन चूसते, गांड में उँगली करते और बेहद गंदी-गंदी बातें करते हुए नंगे ही एक-दूसरे से लिपटकर सो गए...
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यही तक दोस्तों।
फिर मिले तब तक फूँलवर के जय भारत।।