Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 178 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

Story ko aagr badhata hua ek achha update likha hai. Poonam ki tarah Mahak bhi ek mahatvakankshi ladki hai. Uper se chadhti jawani ka asar. So dimag me jawani ke hi khayal ayenge hi. Fir ye Chodu Gaon aur wahan ka khula mahol ke sath sath apne baap Munim aur unki umar ke kai lakho ke sath sahwas karne ke baad ek naya mard kareeb se dekhne ko mil raha hai to mann ki umango ko pankh lagna lajmi hai. Udhar Bablu ne pahle Munim ke aage ladkiyon ki nangi tasveere daal kar chara fenk diya hai jise Munim ne chuna shuru kar diya hai aur ab Mahak bhi chug rahi hai.
Dekhte hai yah chara kha kar Mahak kya kya karti hai. Thanks.
 
उधर महक के घर पर - ड्राइंग रूम में रात

“अब तुम जो समझो, मैं इनके साथ ही रहता हूँ,” बबलू ने कहा, लेकिन उसकी नजरें महक के पतले कुर्ते से उभरते हुए भारी बोब्बों पर अटकी हुई थीं।

मन ही मन उसने सोचा, “बाप रे... क्या मस्त बोबले हैं! ऐसी चुची ‘बहू बाजार’ में क्या, पूरे कोलकाता में नहीं मिलेगी। कितनी भारी, कितनी नरम... निप्पल भी कितने मोटे और खड़े हो रहे हैं...”
फनलवर कि प्रस्तुती।

जब महक फोटो देखने में व्यस्त थी और बबलू उसे रेडलाइट एरिया की कहानियाँ सुना रहा था, मुनीम रसोईघर में गया और दूसरा गिलास लेकर वापस आ गया।

बबलू ने तीनों गिलास फिर से भर दिए और एक महक की तरफ बढ़ा दिया।

“नहीं, मैं नहीं पीती,” महक ने मना किया और उठने लगी।

लेकिन बबलू ने तेजी से उसका हाथ पकड़कर उसे सोफे पर पीछे खींच लिया और इस बार बिल्कुल अपने बगल में बिठा लिया। उसकी जाँघ महक की जाँघ से सट गई।

“अरे पियो ना... कुछ नहीं होगा। तुम बड़ी हो गई हो। मुनीमजी कह रहे हैं कि तुम्हारी शादी होने वाली है। बस एक घूँट...”

बबलू ने गिलास उसके होंठों पर रख दिया। महक ने विरोध किया, लेकिन बबलू ने उसे जबरन एक बड़ा घूँट पिला दिया।

“उफ्फ... कितना कड़वा है!” महक ने मुँह बनाया।

मुनीम ने नशे में हँसते हुए कहा, “अरे बेटी, सुंदरी भी लेती है। कोई इतना प्यार से मना रहा है तो ले लो...आखिर वह मेहमान है अपना...”

बबलू ने महक का सिर पकड़ लिया और दूसरा घूँट भी उसके मुँह में ठेल दिया। इस बार महक ने थोड़ा और पी लिया। स्वाद कड़वा था, लेकिन गर्मी उसके शरीर में फैलने लगी।

तीसरा घूँट पिलाते हुए बबलू ने अपना बायाँ हाथ महक के कंधे पर रख दिया और उसे अपने और करीब खींच लिया।

महक अब नशे में आने लगी थी। उसकी आँखें लाल हो रही थीं। वह फोटो देख रही थी - नंगी औरतें, चुदाई के अलग-अलग पोज।

“ये सब कौन हैं...?” महक ने पूछा।
फनलवर रचित कहानी।

बबलू ने उसके कान के पास मुँह ले जाकर फुसफुसाया, “कलकत्ता की सबसे महंगी रंडियाँ...”

बबलू ने फिर से गिलास उसके होंठों पर रख दिया। इस बार महक ने खुद ही थोड़ा और पी लिया।

मुनीम अब पूरी तरह बेसुध हो चुका था। वह सोफे पर टिका हुआ था। उसका अंडरवियर खिंचा हुआ था और उसका मोटा लंड तथा सुपारा साफ उभरा हुआ दिख रहा था।

बबलू की नजर बार-बार मुनीम के उभार पर जा रही थी। उसका अपना लंड भी अब पूरी तरह खड़ा हो चुका था।

बबलू मन ही मन सोच रहा था, “अगर ये महक यहाँ न होती तो मैं अभी मुनीम का ये मोटा लंड मुंह में ले लेता... सुपारा चूसता... और फिर उस से गांड मरवाता।”

बबलू उभयलिंगी था। उसे औरतों के साथ-साथ मर्दों को चोदने का भी बहुत शौक था। वह दोनों ही क्र सकता था, चोद भी सकता था तो चुदवा भी सकता था। उसने सालों पहले अपनी बहन को नशे में धुत करके पूरी रात चोदा था, लेकिन अब उसकी नजर मुनीम के कसे हुए लंड और मोटे सुपारे पर अटकी हुई थी। उसे अब मुनीम के अनदेखे लंड को चूसने की तमन्ना भड़क रही थी, उसके मुंह में पानी आ रहा था और वह मुनीम का बड़े सुपारे का मन ही मन कल्पना कर रहा था। साथ-साथ उसकी नजर महक के ताने हुए स्तनों पर भी थी।
संपादिका मैत्री।

महक तस्वीरें देख रही थी। बबलू ने फिर से गिलास भरे। महक का तीसरा गिलास था और अब उसे स्वाद पसंद आने लगा था।

बबलू ने महक को एक हाथ से अपने करीब खींच रखा था, लेकिन उसकी असली इच्छा मुनीम के लंड को छूने और चूसने की थी।



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जुड़े रहिये दोस्तों ...................


Funlover.
 
"बोलो ना... ये रंडियाँ सब कितना लेती हैं...?” महक ने नशे में लहराती हुई आवाज़ में फिर पूछा।

मुनीम को इतने नशे में देखकर और महक को एक के बाद एक ड्रिंक लेते हुए देखकर बबलू के मन में उम्मीद की लहर दौड़ गई। वह सोचने लगा कि आज रात उसे अपने जीवन का सबसे बेहतरीन ‘माल’ मिलने वाला है।

“कोई फिक्स्ड रेट नहीं होता है,” बबलू ने कहा और अपना एक हाथ महक की ऊपरी जाँघों पर रख दिया। फिर धीरे-धीरे जाँघों को अपनी तरफ खींच लिया।
रचयिता फनलवर है।

“जैसा माल... वैसा दाम...”

महक ने तीसरा गिलास भी खत्म कर दिया और बबलू से फिर भरने को कहा। बबलू ने जाँघ को और जोर से दबाते हुए बोला,

“रानी अब मत पीओ... तुमको चढ़ गई है...”

“हरामी... बोल ना कितना रेट लेती है...!” महक ने नशे में उसकी जाँघ पर जोर से थप्पड़ मारते हुए कहा।

बबलू ने मुस्कुराते हुए गिलास फिर से भरा और उसे दे दिया।

“रानी मत पियो... संभल नहीं पाओगी...”

“अरे घर में ही हूँ ना... और कुछ होगा तो तुम दोनों हो ही, मुझे उठाने के लिए,” महक ने नशे में हँसते हुए कहा और चौथा बड़ा घूँट ले लिया।

मुनीम ने देखा कि बबलू ने महक का कुर्ता जाँघों पर चढ़ा लिया है और उसकी एक जाँघ अपनी जाँघों पर खींच ली है।

बबलू ने महक की जाँघ सहलाते हुए बोला, “रानी... कम से कम 100 रुपये और ज़्यादा से ज़्यादा 5000 रुपये एक शॉट का...”

“एक शॉट मतलब...?” महक ने नशे में पूछा।

“इतनी बड़ी हो गई हो, शॉट नहीं मालूम?” बबलू ने गिलास नीचे रख दिया। उसने दोनों हाथों का इस्तेमाल किया, एक हाथ महक की नंगी पीठ पर और दूसरा जाँघों के ऊपर। उसने उसे अपनी तरफ खींचा। महक ने खुद को संतुलित करने के लिए गिलास रख दिया और एक हाथ अपनी जाँघ पर रख लिया।

बबलू का लंड अब बुरी तरह फड़क रहा था। उसका लंड अब किसी भी वक़्त बगावत पर उतर सकता था। ऊपर से यह नशा और साथ में शबाब का नशा, आग में घी का कम कर रही थी।

“आदमी जब अपना लौड़ा रंडी की चूत में पेलता है और अपना पानी गिराता है, तो उसे एक शॉट बोलते हैं...” बबलू ने गंदी भाषा में समझाया।

“लौड़ा” और “चूत” शब्द सुनकर बबलू और मुनीम दोनों का नशा जैसे उड़ गया। उनके लंड और भी सख्त हो गए।

महक ने नशे में हँसते हुए कहा, “सीधा-सीधा बोलो ना... एक शॉट मतलब एक बार की चुदाई...”

“चुदाई” शब्द सुनकर दोनों मर्दों के शरीर में बिजली दौड़ गई।
फनलवर रचित कहानी है।

महक ने आगे कहा, “हमारे गाँव में लड़की जिसे प्यार करती है, उससे मुफ्त में चुदवाती है... और दूसरे लोग उसे चोदने के लिए लाखों रुपये भी देते हैं... जब चुदाई का मन है तो प्यार से अपने यार का लौड़ा चूसो, चुची दबवाओ और खूब जमकर चुदाई करवाओ... चोदने के लिए पैसे की क्या जरूरत है...!”

दोनों मर्दों को अब अपने लंड पर कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था।

महक रंडियों के बारे में और जानना चाहती थी। उसे इस बात की परवाह नहीं थी कि बबलू धीरे-धीरे अपना एक हाथ उसकी जाँघों के बीच दबा रहा था।

“हम औरतें भी तुम मर्दों को सबसे ज्यादा मजा देते हैं... नंगे होकर चुदवाते हैं... फिर तुम मर्द इन रंडियों के पास क्यों जाते हो?”

“ओह्ह... क्या कर रहे हो...?” बबलू ने कुर्ते के ऊपर से महक की चूत को जोर से मसल दिया।

महक ने टाँगें पूरा खोल दीं। बबलू ने झटके से कुर्ता ऊपर उठा दिया। अब महक की चिकनी, गीली और पूरी तरह नंगी चूत दोनों - मुनीम और बबलू - के सामने खुली पड़ी थी।

बबलू ने क्लिटोरिस और लिप्स को उँगलियों से सहलाते हुए बोला,

“ये रंडियाँ सब कुछ करती हैं... गांड मरवाती हैं, लंड चूसती हैं, रस पीती हैं, एक साथ कई आदमियों से चुदवाती हैं... जो तुम घर की औरतें नहीं कर पातीं...”

उसने महक की क्लिट पर चुटकी काट ली।
मैत्री द्वारा संपादित।

“क्या कर रहे हो... गुदगुदी हो रही है...! बाप के सामने बेटी को हाथ नहीं लगाना चाहिए...” महक ने कहा, लेकिन उसने बबलू का हाथ हटाने की कोई कोशिश नहीं की। बल्कि उसकी टाँगें और चौड़ी हो गईं।

“ये रंडियाँ हमेशा नंगी रहती हैं...?” महक ने नशे में पूछा।

“इनको नंगा देखोगी...?” बबलू ने पूछा और फिर से चूत के मुंह पर चुटकी काट ली।

“ओफ्फ्फ... इतना जोर से नहीं, थोडा आराम से यार....... अभी कच्ची चूत है... देखूँगी लेकिन कैसे...?”

“अभी दिखाता हूँ...”

बबलू उठा और एक और A4 साइज़ का एल्बम निकाल लाया। मुनीम भी नीचे आया और बेटी का घुटना पकड़कर ज़मीन पर बैठ गया।

महक नंगी रंडियों और कॉल गर्ल्स की असली तस्वीरें पलटने लगी। बबलू ने महक का कुर्ता और ऊपर खींच दिया। अब महक का पूरा निचला हिस्सा नंगा था। बब्लू ऊपर बैठा था पर मुनीम तो निचे था...............उसकी आँखों के सामने बेटी की चूत के फांके उसे लुभा रही थी। यह देख कर महक को भी लंड की तमन्ना जाग उठी।

“सब तो एक जैसा है... फिर सबकी कीमत अलग कैसे?” महक ने पूछा।

बबलू ने उसका हाथ पकड़कर अपने अंडरवियर के ऊपर रख दिया। महक ने महसूस किया कि बबलू का लंड बहुत ठीक मोटा, गर्म और फड़क रहा था।
फनलवर की रचना।

मुनीम ने देखा की बबलू ने महक का हाथ उसके लंड पर रखा है पर कोई विरोध नहीं किया।



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आगे है बने रहिये।


Funlover.
 
"ध्यान से देखो इसकी बॉडी... खास कर बोबले, कमर और चूत को देखो...” बबलू ने महक की एक भारी चुची को कुर्ते के ऊपर से जोर से दबाते हुए कहा।

मुनीम ने अपनी बेटी की रेशमी, गोरी और मोटी जाँघों पर हाथ फेरते हुए सहमति में सिर हिलाया।
प्रस्तुतकर्ता फनलवर।

बबलू ने एल्बम की तस्वीरें दिखाते हुए आगे कहा,

“जिस माल की बॉडी खास कर बोबले और चूत जितनी टाइट होगी, वो उतनी ज्यादा कीमत लेती है। इस एल्बम में जितने भी माल हैं, सब होटलों में या कस्टमर के घर जाकर रात भर चुदाई करवाती हैं। सबका रेट 20,000 रुपये से ऊपर है... एक रात का। ये रंडियाँ सब कुछ करेंगी... कुछ भी... गांड मरवाएँगी, लंड चूसेंगी, रस पिएंगी, दो-तीन-चार आदमियों से एक साथ चुदवाएंगी... जो तुम घर की औरतें नहीं कर पातीं।”

बबलू ने अपना अंडरवियर नीचे सरका दिया। उसका ठीक ठाक मोटा, नसों वाला और पूरी तरह खड़ा लंड बाहर छलांग लगा। उसने महक का हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया।

महक के हाथ में गर्म, फड़कता हुआ लंड आते ही उसकी साँसें तेज हो गईं।

लेकिन बबलू ने अभी महक को छोड़ा नहीं। उसने जेब से नोटों का एक मोटा बंडल निकाला और महक के हाथ में थमा दिया।

“महक... पूरे 20,000 रुपये हैं। चोदने दो...!” बबलू ने मुनीम की तरफ देखते हुए विनती की, “प्लीज़ मुनीमजी... अपनी बेटी से बोलो... मुझे चोदने दो... बहुत मजा दूँगा...”

महक ने नोटों का बंडल ज़मीन पर फेंक दिया और उठकर जाने की कोशिश की।

“ले रंडी... और 20,000 ले ले... अब नखरा मत कर... भोसड़ीकी!” बबलू ने गुस्से और उत्तेजना के साथ दूसरा बंडल उसके हाथ में थमा दिया। फिर उसने महक को उठाकर खाट पर पटक दिया।

“क्या करू पापा? मैं क्या रंडी हूँ? जो इतने पैसो में अपना माल बेचूंगी?” उसे सिर्फ मुनीमजी की इजाजत चाहिए थी।

मुनीम: (धीमी लेकिन दबंग आवाज में) “महक... देख तो सही ये बबलू क्या कह रहा है। कहता है मेरी बेटी महक की चूत चोदना चाहता है। बीस-बीस हजार के दो बंडल फेंक चुका है।“

महक: “पापा मैं रंडी नहीं हूँ।“

मुनीम: “बेटी, बबलू ने अच्छा ऑफर दिया है। बोला है कि मुझे नई-नई रंडियाँ चोदने देगा। ताजा माल। गाँव से, कॉलेज वाली, शादीशुदा... जो भी चाहिए। बदले में बस एक बार तेरी चूत फाड़ ले। क्या कहती है तू?”

बबलू: (उत्तेजित होकर) “हाँ महक... तुम समझदार हो। मैं तो मुनीमजी को रोज नया माल दिलवा दूँगा। कल ही दो कॉलेज वाली लड़कियाँ लेकर आऊँगा। एक तो अभी 19 की है, दूधिया माल...”
फनलवर की रचना।

मुनीम: “बेटी एक बार रंडी बन के भी देख लो, क्या नुकशान होगा, मजा तुझे भी तो आएगी।“

महक ने कोई विरोध नहीं किया। वह पहले से ही बुरी तरह गीली हो चुकी थी। उसे यकीन था कि यह लड़का उसे चोदेगा, वरना पापा उसे यहाँ क्यों लाए होते?

बबलू ने महक की टाँगें फैलाईं, अपना मोटा लंड चूत पर रखा और एक जोरदार धक्के से पूरा लंड अंदर ठेल दिया।

“आआह्ह्ह...!” महक की चीख निकल गई।

लंड परम या मुनीम जितना लंबा नहीं था, लेकिन काफी मोटा और टाइट था। महक की चूत को अच्छे से फैलाते हुए अंदर घुस गया।

बबलू ने तेज-तेज धक्के मारने शुरू कर दिए।

मुनीम अपनी बेटी को एक अजनबी से चुदते हुए देख रहा था। महक के कराहने की आवाज सुनकर उसे अनोखी खुशी हो रही थी। महक भी जानबूझकर जोर-जोर से कराह रही थी।

“आह्ह्ह्ह... बबलू... और ज़ोर से... धक्का मारता रह... रुक मत... मुझे भी रंडी जैसा चोद... गांड मार... लंड चूसूँगी... बहुत अच्छे...!”

बबलू बहुत खुश हुआ। वह 30 साल का जवान था, अपनी छोटी बहन को 8 साल तक बीवी बनाकर चोद चुका था और बहू बाजार की कई रंडियों को पटाकर चोद चुका था। वह एक प्रोफेशनल चोदू था।

लेकिन उसके मन से मुनीम का मोटा सुपारा अभी भी नहीं गया था। वह मुनीम से गांड मरवाना चाहता था, पर अभी महक की टाइट और गर्म चूत सामने थी।

“महक... बहुत दिनों से चूत में कोई लंड नहीं घुसा लगता है... बहुत टाइट है... उफ्फ मुनीमजी... आपकी बेटी जैसी कोई माल बहू बाजार में नहीं है... सोनागाछी में भी नहीं होगी...!”

बबलू ने और जोर-जोर से ठोकना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ महक के स्तन उछल रहे थे।

आखिरकार बबलू जोर से गरजा और महक की चूत के अंदर गरम-गरम वीर्य की मोटी धार छोड़ दी।

“राजा... अच्छी चुदाई करते हो... मजा आ गया...” महक ने हाँफते हुए कहा, फिर बबलू को चूम लिया और गले लगा लिया।

बबलू ने देखा कि मुनीम बेटी के नंगे शरीर को सहला रहा है।
फनलवर लिखित कहानी।

“मुनीमजी... आपको भी इस रंडी को चोदना है तो 20,000 रुपये और दो... मजा लो। ये एक के बाद एक लंड ले सकती है। बहुत दम है आपकी बेटी में...”

मुनीम नंगा हो गया। बबलू मुनीम का मोटा लंड और खासकर सूजा हुआ सुपारा देखकर चौंक गया। उसकी गांड में खुजली होने लगी।

मुनीम नंगा होकर अपने कमरे में गया और वापस लौटा। उसने नोटों का एक मोटा बंडल महक के पास फेंक दिया और बोला,

“ले रंडी... इसने 40,000 दिए, मैं 50,000 दे रहा हूँ... मुझे चोदने दे...”

मुनीम ने एक बार में आधा गिलास व्हिस्की पी ली।



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यही तक दोस्तों।


आपके कमेंट की प्रतीक्षा रहेगी।


Funlover की तरफ से जय भारत।।
 
काफी गर्मा गरम कामुक और चोदू अपडेट है । जैसा देश वैसा भेष । अब एक दलाल गाँव की देसी और नवयौवना को भोगेगा तो कीमत तो चुकाएगा ही । कलकत्ता की बहू बाजार की रंडियों से डबल कीमत दे कर महक को उसके बाप के सामने रौंदा है । महक को तो एक और नया मर्द मिल गया मनपसंद मर्द के साथ साथ पैसा और भविष्य के लिए कुमाऊँ मर्द आखिर दलाल जो ठहरा । जोश में आया हुआ मुनीम भी 50 हजार निकाल लाया बेटी को रण्डी ही समझ कर उसको भोगने को कामांध हो गया है । कहते है संगत का असर चाहे थोड़ा ही सही मगर आता जरूर है । यही हुआ घर मे एक दलाल के प्रवेश करने के बाद पहले महक पर और फिर मुनीम पर । चलो देखते है मुनीम जी अपने मोटी कलम से क्या खतौनी करता है । अगले अपडेट की प्रतीक्षा रहेगी । आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।

386.
 
जी अपने सही कहा जैसा देश वैसा भेष .....................

जी जोश में आया हुआ मुनीम जनता था की घर का पैसा है घर में ही रहेगा और महक की चूत उसके लिए नयी भी तो नहीं थी पर एक अलग अनुभव.....

खेर मैंने सुना तो है की लोग चेट पर रोल प्ले करते है बस ठीक उसी प्रकार के एक नया रोल प्ले जो की वास्तविकता बना के रख दिया

कहानी में मेरा मतलब वास्तविकता से है............................


आशा है की रीडर्स को एक नया रोल प्ले वाला प्रयास अच्छा लगा होगा

शुक्रिया दोस्त
 
“चूत खुली है... चोद ले...” महक ने बबलू को दूर धकेल दिया।

बबलू को सबसे बड़ा झटका लगा। वह स्तब्ध रह गया।

लेकिन अगले ही पल उसने मुनीम की तरफ रुख किया, झुककर मुनीम का मोटा, नसों वाला लंड मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा।

महक यह देखकर सकते में आ गई। सुंदरी ने सेठजी को परम का लंड चूसते हुए देखा था, लेकिन महक अब अपनी आँखों से देख रही थी कि कोई अजनबी उसका पापा का लंड चूस रहा है।

“ये क्या...?” महक के मुँह से निकला, लेकिन उसकी चूत और भी गीली हो गई।

अचानक महक उठ बैठी। उसने अपनी चूत से निकल रहे रस को उँगलियों पर लिया और बबलू की गांड पर लगाने लगी। उँगलियाँ चिकनी थीं, वे आसानी से बबलू की गांड में घुसने लगीं। कुछ ही मिनटों में बबलू की गांड पूरी तरह खुल गई और रस से चमकने लगी।
प्रस्तुतकर्ता फनलवर है।

“साला गांडू... गांड भी मरवाता है...” महक ने कहा और बबलू की गांड पर थूक दिया। फिर उसने अपनी उँगलियाँ और गहरी डालीं।

“बाबूजी... बेटी को चोदना है तो पहले इसकी गांड मारो... जिसने आपकी बेटी को बहला-फुसलाकर चोद डाला,” महक ने पापा को उत्तेजित करते हुए कहा।

बबलू ने मुनीम की तरफ देखकर विनती की, “हाँ मुनीमजी... मेरी गांड मारो... बहुत दिनों से लंड नहीं घुसा है गांड में...”

महक इस बात से बिल्कुल भी नाराज नहीं थी। उसे बबलू द्वारा चुदाई का अच्छा मजा आया था। वह अपने पापा के साथ चुदाई के लिए तैयार थी, लेकिन पहले थोड़ा मजा लेना चाहती थी।

मुनीम ने अपना मोटा लंड बबलू की गांड के छेद पर रखा और दबाव डाला। लेकिन मोटा सुपारा पहली कोशिश में अंदर नहीं गया।

“मेरा मोटा लंड इस गांड में नहीं जाएगा...” मुनीम ने खींच लिया।

“क्या बाबूजी... जब परम अपना मुसल जैसा लोडा मेरी और सुंदरी की गांड में पेल सकता है, तो आप क्यों नहीं? 4-5 जोरदार धक्के मारो,” महक ने पापा को उकसाया।

मुनीम को यह जानकर गुस्सा आ गया कि परम ने माँ और बेटी दोनों की गांड मारी है। उसने कमर कस ली, लंड को सही जगह पर रखा और एक के बाद एक 7-8 जोरदार धक्के मारे।

“आआआह्ह्ह...!” बबलू की चीख निकल गई। उसका मुँह खुला का खुला रह गया।

महक ने तुरंत बबलू का सिर पकड़कर अपनी चूत पर कस लिया।

मुनीम की यह पहली गांड चुदाई थी। शुरुआत में सूखापन लगा, लेकिन 7-8 मिनट बाद लंड में गीलापन आ गया। बबलू को मालुम नहीं था की अब तक उसने जिस-जिस से भी अपनी गांड मरवाई है वह लोडे और येमुनीम का लंड में आसमान जमीन का फर्क था। अब तक उसकी गांड ने बड़े आराम से सभी लंड के धक्के को सहन कर के बबलू को मजा दे रही थी लेकिन आज उसकी फट रही थी।
फनलवर की प्रस्तुति।

बबलू ने लंड के प्रवेश और धक्के को आराम देने के लिए अपने पैरो को चौड़ा किया और अपने दोनों हाथो से अपने कुलहो को फैलाया फिर भी उसका दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा था।

मुनीम ने बबलू को बेरहमी से 20-25 मिनट तक चोदा। जब मुनीम के लंड ने बबलू की गांड में अपने लखोटे को खाली किया और मुनीम ने लंड को बाहर की तरफ खिंचा और एक जोरदार “फचाक” की आवाज़ से बब्लू की गांड लंड मुक्त हो गई।

बबलू की गांड अब पूरी तरह भोसड़ा बन चुकी थी।

इस दौरान महक बबलू से अपनी चूत चुसवा रही थी।

आखिरकार मुनीम ने लंड बाहर निकाला और कहा,

“ले बेटी... इस बहनचोद को चोद लिया... अब तू चोद...”

“पहले इस लौड़े को बबलू से चूसवाकर साफ करवाओ...” महक ने कहा।

मुनीम ने बबलू के मुँह में लंड ठेल दिया। बबलू ने बिना किसी हिचकिचाहट के पूरा लंड चूसा और मुनीम का वीर्य निगल लिया।

महक अपनी किस्मत पर मुस्कुराई।

“आओ... मुझे दबोच कर सो जाओ... बाद में जब यह जालिम लौड़ा खड़ा होगा, तब चोद देना...” महक ने कहा।

तीनों थके हुए और निढाल होकर सो गए।


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बने रहिये दोस्तों।


Funlover.
 
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