Incest Story - Didi Ki Chinta - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest Story - Didi Ki Chinta

दीदी की NASIHATPart 1दोस्तों आपकी फवौरीते कहानी को मैं जल्द hi कम्पलीट करने वाला हूँ. अभी समय की कुछ कमी और उसको पूरा पढ़ना पड़ेगा मुझे खुद तभी उसे आगे बढ़ा पाउँगा इसलिए आपसे माफ़ी चाहता हूँ. तब तक आपको भाई बहन की चुदाई का थोड़ा तड़का लगाकर एक कहानी को पेश कर रहा हूँ आपकी खिदमत में.

रोहन आज फिर मुरझाया सा घर वापिस आया और अपने बैग को सोफे पर hi फेंक कर जूतों को निकला और इस तरह रखा मानो उन्हें कभी पहनना hi ना हो. फिर खुद सोफे पर आकर बैठ गया उदास सा, गुमसुम.

मम्मी ऑफिस गयी थी. 22 वर्षीया मेहुल अपने भाई को कई दिनों से नोटिस कर रही थी के उसका 20 वर्षीया भाई हर रोज़ ऐसे hi करता है. उसने उससे एक दो बार पूछा भी. पर रोहन ने कोई खास जवाब नहीं दिया. वो भी चुप रह गयी. पर क्यूंकि वो अपने छोटे भाई से बहुत प्यार करती थी इसलिए वो उसे इस तरह दुखी और उदास नहीं देख सकती थी.

उसने आज ठान लिया था के वो उससे पूछ कर hi रहेगी के आखिर बात क्या है. उसने उसे खाना दिया. बड़े hi अनमने ढंग से रोहन ने खाना खाया और उठकर अपने कमरे में चला गया. मेहुल भी उसके पीछे पीछे उसके रूम में गयी और बड़े hi प्यार से poochha”mere राजा भैया को कोई परेशान कर रहा है क्या? बहुत दिनों से देख रही हूँ बड़े दुखी लगते हो भाई.”

उसी उदास से स्वर में रोहन बोलै “नहीं दीदी कोई बात नहीं है. मैं बस थक जाता हूँ कॉलेज में इसलिए आपको परेशान सा लगता हूँ.”

मेहुल मुस्कुराने लगी और बोली “मुझे पता था तुम यही जवाब डोज. पर कुछ तो बात है जो तुम्हे परेशान कर रही है. “

रोहन उसके लाख पूछने पर भी उसे कुछ नहीं बताता. थक हारकर मेहुल वहां से चली जाती है. पर वो अपने भाई की परेशानी से परेशान रहती है और डीडे करती है के वो उसकी परेशानी की वजह जानकर रहेगी.

उसकी एक सहेली प्राची का भाई रिशु रोहन का क्लासमेट था. वो उसकी सहेली की वजह से उसकी भी काफी रेस्पेक्ट करता था. मेहुल रिशु को आज लंच पर एक रेस्टोरेंट में बुलाती है.

रेस्टोरेंट में दोनों…

Mehul…aur कैसे हो रिशु?

Rishu…muskurate हुए.. मैं ठीक हूँ दी.. आप सुनाओ. और आज कैसे यद् किया आपने.

Mehul…main भी ठीक हूँ रिशु. आज तुझे रोहन की वजह से बुलाया है.

Rishu…rohan की वजह से? क्या हुआ रोहन को दी?

Mehul…chintit स्वर में.. उसे कुछ नहीं हुआ रिशु. जब भी देखती हूँ परेशान सा दीखता है हमेशा. तुम उसके क्लासमेट हो. बता सकते हो वो किस वजह से परेशान है. पढाई में दिक्कत आ रही है या कोई लड़का उसे परेशान कर रहा है.

रिशु… दी. वैसे तो रोहन मेरा क्लासमेट है. पर हम कभी दोस्त नहीं रहे. वो एक ब्रिलियंट स्टूडेंट है. मुझे नहीं लगता उसे पढाई में कोई दिक्कत है. पर हाँ उसकी दोस्ती जिन लोगों से है वो ज्यादा अच्छे नहीं हैं.

Mehal…hairani se…achhe नहीं हैं मतलब.

Rishu…nahi ऐसी कोई खास बात नहीं है. पर di…wo….kaise कहूं आपसे.

Mehul…uske हाथ पर हाथ rakhkar…suno तुम मुझे प्राची की तरह अपनी बहिन मानकर बेझिझक बता दो क्या प्रॉब्लम है उन लड़कों में.

Rishu…aapko प्राची दी की तरह दी मंटा हूँ तभी तो बता नहीं पा रहा. नहीं तो कब का बता deta…rishu सर झुककर बोलता है.

Mehul…usko काफी टेंशन हो गयी thi…kahin ऐसी वैसी किसी गलत सांगत में तो नहीं है रोहन. देखो रिशु जो भी बात है तुम मुझे साफ़ साफ़ बताओ प्लीज. मुझे बहुत चिंता हो रही है.

Rishu…thik है दी अगर आप पूछना hi चाहते हो तो सुनिए. उसके तीन दोस्त हैं और तीनो के तीन प्ले बॉय टाइप हैं. आप समझ रही हो ना मेरा मतलब.

मेहुल का सर शर्म से झुक गया उसकी बात सुनकर. पर उसे अभी और जानकारी लेनी थी तो उसे थोड़ा बोल्ड होना hi पड़ना था रिशु के सामने.

Mehul…rishu अगर वो लोग प्ले बॉय हैं तो क्या रोहन भी?

Rishu…mujhe इस बारे में ज्यादा नहीं पता दी. अगर आप कहो तो मैं पता लगवा सकता हूँ के मटर क्या है…

अचानक रिशु की नज़र मेहुल के बूब्स पर चली जाती है. वो उन्हें देखता hi रह जाता है. मेहुल के बूब्स कुदरत का करिश्मा hi थे. स्लिम ट्रिम मेहुल की जहाँ कमर 30 के आस पास रही होगी उसके बूब्स का साइज 36 होगा. 22 की उम्र में 36 बूब्स होना बहुत बड़ी बात है. रिशु को अपने बूब्स को ताड़ता देख मेहुल सकपका गयी. वो उन्हें किसी चीज से धक् भी नहीं सकती थी क्यूंकि उसने टीशर्ट और जीन्स पहनी हुई थी.

वो रिशु से मुखातिब होकर बोली ताकि उसका ध्यान बूब्स से हैट जाए. वो बोली ….रिशु एक काम करो थोड़ा पता करो इसको आखिर प्रॉब्लम क्या है. अगर दोस्त वो सब करते हैं तो इसका कुछ लेना देना है क्या उस बात से. देख तू ये काम करेगा तो तेरा मुझ पर बहुत बड़ा एहसान होगा.

Rishu…kaisi बात करती हो दीदी. मैंने आपको हमेशा प्राची दीदी जैसी समझा है. मैं पता लगता हूँ. क्या इसका भी उस बात से कोई ताल्लुक है. मेहुल उसका शुक्रिया ऐडा करके चली जाती है और कहती है के अगर इसके बदले कोई भी काम उसे होगा तो वो बेझिझक करेगी.

रिशु बाद में सोचने लगता hai….hai तो ये मेरी दी जैसी. पर क्या चीज है यार. लगातार मेहुल के बूब्स देखकर रिशु का लुंड खड़ा हो जाता है. वो सोचता है उसने मुझे कहा है के वो बदले में कुछ भी मांग ले. अगर वो छूट ना भी दे तो काम से काम अपने मुम्मे hi चुसवा दे यही बहुत होगा मेरे लिए. वो अपने लुंड को सहलाता हुआ सोचता है. फिर वो रेस्टोरेंट के वाशरूम में चला जाता है. अब उसे अपने लुंड का कुछ तो हल सोचना था वाशरूम में जाकर. तो अपने हाथों को hi तकलीफ देनी थी बेचारे ने.

दो दिन बाद hi रिशु मेहुल को रिपोर्ट सबमिट करता है. वो कुछ चीजों को जोरदार ढंग से बताता है क्यूंकि उसका मन मेहुल पर आ गया था. वो उसे बताता है.

दी रोहन के तीन दोस्त hain…johny, दीपक और विमल. तीनो hi एक नंबर के लड़कीबाज हैं. लड़की पटना इनके लिए बाएं हाथ का खेल है. क्यूंकि विमल मेरा भी दोस्त है तो उसी ने मुझे ये साड़ी बातें बताई. ये हर सैटरडे लड़कियों के साथ सेक्स करते हैं और फिर ये चरों जब इकट्ठे होते हैं तो आपस में डिसकस करते हैं के कैसे लड़की पाते और उसे कहाँ लेजाकर choda….ab रिशु जानबूझकर चुदाई जैसे शब्द बोल रहा था ताकि मेहुल भी गर्म हो जाए. मेहुल को बड़ा बुरा लग रहा था पर उसे अपने भाई की परेशानी जननी थी इसलिए वो कुछ नहीं बोली.

एक और बात कहूं तो आप विश्वास नहीं करोगे. ये जो विमल है ना ये तो अपनी बहिन की फ्रेंड को भी छोड़ चूका hai…rishu ने ये जान बूझकर कहा. मेहुल को पटाने के लिए. पर मेहुल ने उसे कोई उत्तर नहीं दिया इस बात का.

फिर वो आगे बोलता है. ये तीनो तो लड़की पटाने में बड़े हरामी हैं. पर अपने रोहन से आज तक एक भी लड़की नहीं पति. उन तीनो के चुदाई के किस्से सुनकर इसका भी मन करता है के ये चुदाई करे. पर उसके लिए तो लड़की चाहिए होगी न didi…aap समझ रही हो न.

रिशु मेहुल को जोर देकर ये सब बोल रहा था वो जानना चाहता था के मेहुल उसकी बातों में इंटरेस्ट ले रही है या नहीं. मेहुल उसे बार बार bolti…haan ,मैं सुन रही हूँ तुम बोलो रिशु.

रिशु फिर आगे bola…uske पास लड़की नहीं पैट पाती इसलिए ये तीनो उसे चिढ़ाते भी हैं. दी उसे जल्द से जल्द चुदाई चाहिए. नहीं तो अपना रोहन पागल हो जायेगा.

Mehul…ab मैं समझ रही हूँ रिशु. उसे क्या प्रॉब्लम है. तुम्हारा बहुत बौह्त धन्यवाद रिशु तुमने मुझे इतना कुछ बताया. अब मैं जान गयी हूँ के उसे क्या चाहिए.

रिशु bola…hath अपने लुंड पर था uska…achha दी मैंने तो अपना काम कर दिया. अगर मैंने कभी आपसे कुछ बोलै तो आप करोगे न.

मेहुल थोड़ा थोड़ा तो समझ रही थी के वो क्या चाहता है वो मन hi मन सोचती है. मैं तो इसे भोला भला समझती थी ये तो महाहारामि निकला. पर प्रत्यक्ष में बोलती hai…haan हाँ रिशु तुम चिंता मत करो. तुम्हे कभी भी मेरी कोई जरुरत होगी तो मैं हाजिर हूँ.

रिशु खुश हो जाता है और बोलता hai…thik है दीदी जब कभी किसी चीज की जरुरत होगी मैं आपको जरूर बताऊंगा. फिर दोनों फ़ोन रख देते हैं/

मेहुल अभी भी चिंता में थी. वो सोच रही थी मैं अपने भाई की किस तरह से मदद कर सकती हूँ. क्या किसी फ्रेंड को पूछूं. फिर अपने hi सर पर हाथ मारकर बोलती है. ये कोई पूछने वाली बात है भला. फिर सोचती है मोहल्ले में कोई लड़की हो जिसे रोहन को पटाने में मदद करूँ.

सोचते सोचते वो प्राची को फ़ोन लगा देती है. प्राची उसकी बचपन की दोस्त थी. ये नर्सरी से इकट्ठे पढ़े थे. और अपने मन की हर बात शेयर करते थे.

उसने प्राची को रोहन वाली साड़ी बात बता दी और अपनी चिंता भी ज़ाहिर की तो प्राची का मेहुल की बात सुनकर हंस हंस कर बुरा हाल हो गया. वो boli…tum शायद दुनिआ की पहली बहिन होगी जो भाई की चुदाई के लिए लड़की का जुगाड़ करने चली ho…wo खूब हंसती है मेहुल की बात पर.

मेहुल उसको हँसता देख उदास हो जाती है और बोलती hai…kya यार तुझे हंसी सूझ रही है और मुझसे अपने भाई का दुःख नहीं देखा जा रहा.

प्राची ने इस बार जो बात बोली वो शायद कोई भी बहिन ना सुन sake….tu ऐसा क्यों नहीं करती खुद hi क्यों नहीं खुश कर देती अपने भाई को.

मेहुल के पैरों नीचे से जमीन hi निकल गयी ये सुनकर उसे अपनी सहेली से उम्मीद नहीं थी के वो ऐसा कुछ बोल सकती है. वो एकदम से भड़क गयी और बोली ….पागल हो गयी है क्या प्राची. क्या बोल रही है. मुझे गुनाह करने को बोल रही है. मैं तो तुझे अपनी सबसे अच्छी सहेली समझती थी पर तू तो मुझसे दुश्मनो जैसा व्यवहार कर रही है. देख अगर तूने ये मज़ाक में बोलै है तब भी ये बहुत बुरी बात है. तुझे ऐसा नहीं बोलना चाहिए था.

प्राची बोली …रिलैक्स मेहुल relax…naa तो मैंने तुझे ये सब मज़ाक में बोलै है और ना hi ये कोई गुनाह है. ये आम बात है आजकल.

Mehul…apne सेज भाई से सेक्स करना गुनाह नहीं है क्या?

Prachi…pagal आज के ज़माने में कुछ भी गुनाह नहीं hai…apni वो सहेली याद है तुझे अंजलि.

Mehul…anjali, वो चश्मे वाली? जिसके भाई की शादी में हम गए थे.

Prachi…haan वही anjali..uska भाई अरुण पता है उसके साथ क्या क्या करता था?

Mehul…hairan hokar…kya क्या करता था?

प्राची… तुझे विश्वास नहीं होगा अंजलि ने खुद उससे चुदाई के लिए बोलै था. वो दोनों तो 69 भी करते थे. खूब चुदाई की है दोनों ने क्यूंकि इनके मम्मी डैडी तो गोवत जॉब में थे और दोनों की पोस्टिंग दूर थी. कभी कभार hi आते थे. पता है शादी के बाद इसकी भाभी को पता चल गया तो पहले तो वो बहुत नाराज़ हुई पर फिर ऐसी मानी के थ्रीसम भी किया.

मेहुल …तुझे कैसे पता ये सब.

Prachi…anjali मुझसे बहुत खुली हुई थी. जब तुम मुझे कहती रहती थी के तुम्हारा फ़ोन क्यों बिजी आता है. कोई बॉय फ्रेंड है क्या मैं मन करती थी. उस वक्त मेरी अंजलि से hi बात होती थी.

Mehul…oh तो ये बात है. पर यार कोई कोई करे तो चलता है. हरेक इंसान थोड़ी ये सब कर सकता है.

Prachi…koi कोई नहीं. हमारी रेशम मैडम का भी अपने सेज भाई से अफेयर है. दोनों शादी शुदा होकर भी कितनी बार होटल्स में मिलते हैं. मुझे ये बात भी अंजलि ने बताई और उसने तो मुझे दिखाया भी मैडम को अपने भाई के साथ होटल में जाते हुए.

Mehul…baap रे. ये सब होता है इस देश में. पर यार कहना आसान है करना बहुत मुश्किल है. पता है तू भी बोल तो रही है. पर अगर कभी रिशु तुझे कहे छोड़ने के लिए तो तू चुद जाएगी.

प्राची हंसने लगी और boli….mujhe पता था तू ये जरूर पूछेगी. मेरी जान मैं जल्द hi उसको बोलने वाली हूँ. तू कहे तो तुझे रिशु से पुछवा दूंगी जब करुँगी. और हाँ जो काम तूने उसे दिया था वो भी उसने मुझे बता दिया tha…wo खूब हंसी फिर.

मेहुल को लगा ये तो नार्मल बात है आजकर. वो boli…hai तो बहुत हरामी रिशु, पता है मेरे बूब्स की और बड़ी हसरत भरी निगाहों से देख रहा था.

प्राची हँसते हुए boli…achha!! तो फिर चुसवा देने थे. तेरे भाई जैसा है. पर अभी तो तू उसका काम कर जो चुदाई के लिए बेचैन है. रिशु के लिए तो उसकी बहिन hi काफी है. एक बात कहूं वैसे तेरे बूब्स हैं बड़े कमाल के. कोई भी चूसना चाहे इन्हे तो.

Mehul…chal हैट. बदमाश कहीं की.

Prachi…ab तो तू बदमाश बन अपने भाई के सामने और उसे चुदाई का सुख दे.

Mehul…dhile स्वर mein…pata नहीं यार मैं ऐसा कर भी पाऊँगी या नहीं.
 
Part 2

मेहुल सोच रही थी के प्राची एकदम पागल है. मैं भला अपने भाई के साथ ऐसा कुछ कर सकती हूँ. नहीं ये बिलकुल गलत है सरासर गलत है. ना hi नैतिक तौर पर अउ ना hi सामाजिक तौर पर ये सही है. बल्कि मैं तो प्राची से बोलूंगी के कभी भी मेरे सामने ऐसी कोई बात मत करना जिससे मुझे शर्मिंदा होना पड़े.

ऐसी hi सोच सोच कर पता नहीं कब मेहुल नींद की आगोश में चली गयी.

उसने देखा के सोते हुए रोहन का लुंड एकदम खड़ा था. वो दरवाजे के पीछे से कड़ी होकर उसके खड़े हुए लुंड को देख रही थी और मन hi मन सोच रही थी के मैं तो प्राची को गलियां दे रही थी पर यहाँ खुद कैसे एक प्रेमिका की तरह या एक पत्नी की तरह उसके लुंड के उभर को देख रही है.

वो खुद पर हैरान थी पर उसकी निगाह खड़े हुए लैंड पर थी और मन hi मन वो ललचा रही थी और सोच रही थी जाकर उसे उसकी निक्केर में से निकल कर देखे. पर उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी और वो कितनी hi देर ऐसे hi स्टिल कड़ी रही. फिर जैसे hi उसके लुंड ने एक झटका सा मारा उससे फिर रहा नहीं गया और वो उसके पास जाकर कड़ी हो गयी और अपने मुँह को खड़े हुए लुंड के पास लेकर गयी.

वहां मुँह जाते hi उसे एक महक आयी. उसे उसकी महक बहुत hi प्यारी लग रही थी. इसलिए उससे रहा नहीं गया और अपना नाक उसके ऊपरी हिस्से के पास ले गयी और सूंघने लगी. उस सुगंध से वो पूरी तरह से मदहोश हो गयी थी. उससे अब रहा नहीं जा रहा था उसका मन कर रहा था के वो उसके पकड़कर बेतहाशा चूमे.

पर वो अभी हिचकिचा सी रही थी. काफी देर वो उसी तरह लुंड के ऊपरी हिस्से पर नाक लगाकर कड़ी रही. फिर eka-ek उसे पता नहीं क्या हुआ उसने एक हाथ अंदर दाल कर उसे निक्केर से बहार निकल लिया. निक्केर में तो वो फिर भी थोड़ा छोटा नज़र आ रहा था पर जैसे hi वो निक्केर से बहार आया उसने अपना विकराल रूप मेहुल के सामने दिखा दिया.

अब मेहुल से रहा नहीं गया और वो उसके ऊपरी हिस्से को चूमने लगी. रोहन नींद में था तो थोड़ा हिलने डुलने लगा. पर अभी उसकी नींद नहीं खुली थी. पर उसके चेहरे पर संतुष्टि के भाव देखकर मेहुल मुस्कुरा पड़ी और मन hi मन बोली ….चिंता ना करो मेरे भाई मैं तुम्हे पूरी संतुष्टि दूंगी.

वो अपना मुँह अच्छे से खोलकर लुंड के ऊपर लेकर आयी और उसे अपने मुँह में समां लिया. वो उसे बेतहाशा चूमने लगी और मुँह को ऊपर निचे करके सकिंग करने लगी. हालाँकि रोहन के लुंड का सूपड़ा इतना बड़ा था के उसके मुँह में अच्छे से नहीं आ रहा था पर फिर भी वो किसी तरह से मैनेज कर रही थी और उसे चूसे जा रही थी.

अब रोहन की सिसकारियां शुरू हो गयी. वो उछलने लगा, एक बार वो ऐसा उछला के लुंड का आगे का भाग मेहुल के गले से जाकर टकरा गया और उसको खांसी हो गयी. इतने में रोहन की आंख खुल जाती है और वो ये दृश्य देखकर के उसकी बहिन उसका लुंड चूस रही है, पहले तो वो बहुत हैरान रह गया फिर उसे बहुत तेज़ गुस्सा आया और उसने एक जोरदार तमाचा अपनी दीदी के जड़ दिया.

थप्पड़ कहते hi मेहुल की आँखों से आंसू बह निकले और तमाचा इतना करारा था के मेहुल को तगड़ा झटका लगा और उसकी आँख खुल गयी. आंख खुली तो उसने देखा ना वो रोहन के रूम में थी और ना hi रोहन वहां था. मतलब वो सपना देख रही थी. उसने महसूस किया के वो पीसने से तरबतर हो चुकी है. वो दर की वजह से कम्प रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे रोहन ने सपने में नहीं बल्कि सचमुच उसे थप्पड़ मारा हो.

वो उठकर बैठी और थोड़ी देर लगी उसको संयमित होने में. जब वो एकदम निश्चिन हो गयी के ये तो बस सपने का हिस्सा था तो वो अपने आप को समझाते हुए boli….nahi बिलकुल भी नहीं अपने भाई के बारे में तो बिलकुल भी नहीं सोचना.

उसने डिसिशन ले लिया था. वो कुछ और इंतज़ाम कर देगी पर भाई के साथ खुद को जोड़कर नहीं देखेगी. वो खुद तो एक बार सोच भी ले पर उसने इस पहलु पर तो सोचा भी नहीं था के उसका भाई मानेगा क्या? वो अब वहीँ थी जहाँ से शुरुआत हुई थी यानि के उलझने में के अपने भाई के लिए वो क्या करे.

दोपहर बाद जब वो उठी तो रोहन ने रूखी सी आवाज़ में उसे kaha…didi चाय पीला दो एक कप.

मेहुल मुस्कुरा कर boli…haan भाई लाती हूँ. कुछ खाना भी है क्या साथ में.

रोहन ने उसकी मुस्कान का जवाब मुस्कान के साथ ना देते हुए फिर उसी रूखी सी आवाज़ में kaha….nahi दीदी बस चाय बना दो आप और अपने मोबाइल में कुछ देखने लगा.

मेहुल चाय बनाने चली गयी और बेचारी अपने भाई के बारे में hi सोचती रही. पर वो आखिर कर भी क्या सकती थी. उसने चाय के साथ रोहन को उसके पसंद के बिस्कुट भी दिए पर रोहन चुपचाप चाय पिता रहा, बिस्कुट उसने नहीं खाये.

वो फ़ोन पर किसी से चाट पर बात कर रहा tha….mehul ने तिरछी नज़र करके देखा तो “चार उचक्के” नाम से एक ग्रुप बना हुआ था. वो समझ गयी के ये इन्ही दोस्तों का ग्रुप है.

वो तिरछी होकर चाट पढ़ने लगी. विमल अपनी कहानी सुना रहा था. पर वो बेशरम इतना गन्दा बोल रहा था लड़कियों के बारे में के मेहुल को पढ़ते हुए गुस्सा आ रहा था. वो बोल रहा था उसकी फुलझड़ी कैसे बिना एआरएम वाली चेयर पर उसकी गॉड में बैठ गयी उसकी तरफ मुँह करके. उसने खुद उसका लुंड अपनी छूट में डाला और लगी उछलने. विमल साथ hi साथ कुछ गंदे gif भी दाल रहा था. मेहुल मन hi मन boli….yahi कमीने मेरे भाई को उकसा रहे हैं सेक्स के लिए.

इतने में रोहन को एहसास हो गया था के उसकी दीदी उसके पीछे कड़ी है. उसने मोबाइल को लॉक किया और अपनी पॉकेट में रखकर पीछे की और देखा तो मेहुल इतने में संभल चुकी थी और किचन में पहुँच चुकी थी.

रोहन मन hi मन सोच रहा tha….kahin दीदी ने मेरे मोबाइल से चाट तो नहीं पढ़ ली. फिर सोचने laga…nahi वो तो मुझे चाय पकड़कर चली गयी थी. उसने अपना सर झटका और चाय का कप रखकर बाइक लेकर निकल गया.



मेहुल सोचने लगी के इसका क्या किया जाए. पर वो सिर्फ चिंता hi कर सकती थी. कर तो कुछ नहीं सकती थी ना.
 
Part 3आज सब लोग खुश थे. मेहुल के चाचा चाही अपनी बेटी रूही के साथ आये थे. रूही प्लस ओने की स्टूडेंट है और मेहुल की तरह hi सुन्दर दिखती है. दोनों की बनावट लगभग एक जैसी है क्यूंकि इन दोनों की मैं सगी बहने हैं. यानि चची सिर्फ चची hi नहीं मसि भी है.

कहने को तो लोग कहते हैं के मेहुल के पापा ने अपनी जवानी के टाइम अपनी साली को खूब छोड़ा है पर कभी ये बात बच्चों के सामने नहीं आयी. दोनों बचे अपनी चची को मसि hi कहते थे हाँ चाचा को चाचा hi बोलते थे.

रूही भी इन दोनों की मम्मी को मसि और इनके पापा को बड़े पापा बोलती थी. उन लोगों का इस तरह से अकस्मात आना मेहुल और रोहन के लिए प्लीजेंट सरप्राइज (सुखद आश्चर्य) था. रोहन तो चाचा और मसि को जफ्फी दाल के मिला मेहुल भी अपनी मसि को जोर से हुग करके मिली. रूही भी अपने दोनों भाई बहिन को मिलकर पूरी खुश नज़र आ रही थी.

पर एक बात जो मेहुल और रोहन ने नोटिस की वो ये थी के इन तीनो के चेहरे कुछ बुझे बुझे से थे. खैर मेहुल ने सबके लिए चाय बनाई. रोहन मार्किट से समोसे और पकोड़े ले आया था. इधर उधर की बातें होती रही. उन लोगों ने रोहन से उसकी पढाई के बारे में पूछा और मेहुल से पूछा के आगे क्या करना है.

इस तरह बातें करते समय का पता hi नहीं चला और इन दोनों के मम्मी पापा भी आ गए. उन्हें कोई आश्चर्य नहीं हुआ उन्हें देखकर. इसका मतलब इन लोगों को पहले से hi पता था के ये लोग आ रहे हैं.

अब यहाँ इन सभी चरक्टेर्स को डिटेल में बता दिया जाए.


फॅमिली डिटेल

रोहित pawar….41….pita…govt जॉब है.

निधि pawar….39…maa…govt. जॉब है.

मेहुल pawar…22…beti….graduation की है.

रोहन pawar…20…beta…graduation कर रहा है.

राकेश pawar…38…chacha/mausa…private जॉब

राधा pawar….37…chachi/masi….house वाइफ

रूही पवार……17….+1

मेहुल की dost…prachi…ekdam खुलकर बातें करती है इसके साथ.

Rishu…prachi का bhai…ye रोहन का क्लासमेट है पर उसका फ्रेंड नहीं है.

रोहन के friends….johny, दीपक और vimal…ek नंबर के हरामी चुड़क्कड़ लोग हैं. लड़की पटना बाएं हाथ का खेल. न सिर्फ पटटे हैं बल्कि उन्हें दो दिन में hi बिस्तर पर ले आना इनका आर्ट है और इस आर्ट से रोहन अनजान है तभी तो वो चुदाई के लिए खूब प्यासा है.

शाम को खूब हंगामा हो रहा था घर में. दो फैमिलीज़ इकठी हो राखी थी तो शोर होना लाजमी था. मेहुल रोहन को खुश देखकर खुद भी खुश हो रही थी. वो अपने भाई से बहुत प्यार करती थी और उसे कभी भी परेशान या दुखी नहीं देख सकती थी.

रात के खाने के बाद राधा ने सबके लिए मूंग की दाल का हलवा बनाया. ये बहुत स्वादिष्ट बना था.

वो जब सबको सर्वे कर रही थी तो मेहुल की नज़र अचानक अपने पापा पर गयी. उसने देखा के उसके पापा ने मसि का हाथ अच्छे से टच किया तो मसि मुस्कुरा दी. उसे लगा जीजा साली में ऐसा मज़ाक होता hi रहता है हालाँकि फिर उसकी नज़र गयी के उसकी मम्मी ने भी देखा था ये.

खैर ये कोई बड़ी बात नहीं थी. सब लोग राधा के बनाये हलवे की खूब तारीफ कर रहे थे खासकर रोहित जी. उन्होंने तो इतना तक बोल दिया के दिल कर रहा है बनाने वाले के हाथ hi चुम लूँ तो निधि बोली ….शर्म करो आप. बच्चों के सामने कुछ भी बोलते हो.

Rohit…bache अब बचे कहाँ रहे हैं. बड़े हो गए हैं.

Nidhi…fir तो आपको बात करते वक्त और भी ध्यान रखना चाहिए.

रोहित. जब बचे बराबर के हो जाएँ तो उनसे हर बात शेयर करनी चाहिए.

इन दोनों को बहस करते देख राधा बीच में मुस्कुराते हुए बोल padi…arey आप लोग बहस क्यों कर रहे हो हलवे का आनंद लो न.

फिर सब लोग चुपचाप हलवा खाने लगे. रोहन को खास तौर पर बोलना pada…masi वैसे पापा की बात सही है. आपने हलवा बहुत कमल का बनाया है.

Nidhi,,,muskurate hue…ab तो तुम्हे ये हलवा अक्सर खाने को मिलेगा.

मेहुल और रोहन दोनों इकठे hi बोल pade…matlab??

Rohit…matlab अब मसि चाचा और रूही हमारे साथ hi रहने वाले hain..ruhi की एडमिशन तुम दोनों वाले स्कूल में हम करवा देंगे. फिर मेहुल की और देखकर bole….mehul तुम इसकी एडमिशन का काम करवा देना.

मेहुल और रोहन दोनों hi खुश हो गए. Yee….kitna अच्छा होगा हम सब इकठे hi रहेंगे. फिर मेहुल boli…chacha मुझे गलत नहीं समझना. हमें तो ख़ुशी है आप लोग हमारे साथ रहोगे. पर क्या मैं जान सकती हूँ आप लोगों ने शिफ्ट होने का क्यों सोचा.

Rakesh…mehul बीटा जिस फैक्ट्री में मैं जॉब करता था उसमे मजदूर लोगों ने हड़ताल कर दी. हड़ताल को तीन महीने हो गए और मालिक लोगों और मजदूर यूनियन में कोई समझौता नहीं हो पाया. इसलिए मालिकों ने फैक्ट्री बंद करने का डिसिशन ले लिया.

Mehul…oh ये तो बहुत बुरी बात है चाचा. एक फैक्ट्री से हज़ारों लोगों का घर चलता है. उन लोगों का समझौता क्यों नहीं हो पाया.

Rakesh…baki सब तो ठीक है. मालिक और मजदूरों में तो बहुत अच्छे सम्बन्ध हैं पर यूनियन के हेड बहुत हरामी हैं. उन लोगों ने hi फैसला नहीं होने दिया. इसलिए मालिकों को डिसिशन लेना पड़ा बंद करने का.

Mehul…batao अब क्या मजदूरों को उनकी मांगें मिल जाएँगी. ये यूनियन वाले दलाल हमेशा फायदा उठाते हैं और मालिक लोगों को ब्लैक मेल करते हैं और ऊपर से मजदूरों से भी पैसे ऐंठ लेते हैं. चलो खैर अभी यहाँ कोई नौकरी का बना आपका?

Rakesh…haan भाई के जानकार हैं. उनके दोस्त की फैक्ट्री में बात की है इन्होने. कल इंटरव्यू के लिए जाना है.

Mehul…job का कुछ भी हो चाचा. आप चिंता नहीं करना. हम सब आपके साथ हैं.

Rohit…mujhe ख़ुशी हुई के मेरी बेटी बहुत समझदार है. सबका बहुत ख्याल रखती है.

Mehul…akhir बेटी किसकी hun…ye बात सुनकर सभी लोग ठहाका मारकर हंस पड़े.

सबने अच्छे से खाना खाया और पास hi पार्क में सैर के लिए निकल गए. मेहुल क्यूंकि एक कम्पटीशन की तयारी कर रही थी तो उसे पढ़ें था. इसलिए वो नहीं गयी.

चाचा और मसि के लिए अलग रूम था. रोहन का अपना रूम था. रूही मेहुल वाले रूम में एडजस्ट होने वाली थी. इस तरह सबकी एडजस्टमेंट हो गयी थी. और सबसे अच्छी बात यह थी के सबने ख़ुशी ख़ुशी एडजस्टमेंट की.

मेहुल ने खाना तो खूब खा लिया पर वो सैर पर नहीं जा पायी और देर रात तक पढ़ती रही. रूही आकर सो गयी थी. रात के कोई 12.30 बजे मेहुल के पेट में दर्द हो गया. उसे पता था के मम्मी रूम में अजवाइन रखती है. उसने जब अजवाइन वाली डिब्बी देखि तो वो खली थी.

उसके मम्मी पापा के रूम में भी अजवाइन थी तो उसने सोचा उनके रूम से अजवाइन ले आये. वो उनके रूम के पास गयी तो लाइट जलती देखकर खुश हो गयी के चलो उन्हें जगाना नहीं पड़ेगा वो लोग जाग hi रहे हैं.

उसने जैसे hi दरवाजा खटखटाना चाहा तो अंदर से बोलने की आवाज़ आयी. ये उसकी मम्मी की आवाज़ थी जो उसके पापा को कह रही thi…..suno जी आपने सबके सामने hi राधा के हाथ को टच किया. ये अच्छा नहीं है.

रोहित रोमांटिक से मूड में bole….tumhe तो पता है राधा मेरा जवानी का प्यार है…

अपने पापा के मुँह से ये बात सुनकर मेहुल को बहुत हैरानी हुई और वो बोल भी किस्से रहे थे ये बात, उसकी मम्मी से. और मम्मी का जवाब तो उससे भी गजब tha….wo तो ठीक है. अकेले में आप दोनों जो मर्जी करो पर बच्चों के सामने ख्याल रखा करो.

Rohit…haan डार्लिंग ख्याल रखूँगा. अच्छा अपनी कच्ची उतरो आज तो जबरदस्त मूड बन गया अपनी राधा को देखकर.

निधि मस्ती में boli…ap और आपकी radha…aur हंसने लगी. मेहुल को तो जैसे विश्वास hi नहीं हो रहा था इन दोनों की बातों पर. ये हो क्या रहा है इस घर में. क्या मसि और पापा के रिलेशन हैं. क्या चाचा को इस बात का पता है? सोचते हुए मेहुल वापिस अपने रूम में चली गयी क्यूंकि उसे समझ आ गयी थी के उसके मम्मी पापा क्या करने लगे हैं.
 
Part 4मेहुल हैरान थी अपने मम्मी पापा की बातें सुनकर. उसे विश्वास नहीं हो रहा था के उसके घर में रिश्तों में चुदाई पहले से चल रही थी. इसका मतलब उसने जो सोचा ऐसे hi नहीं सोचा ये तो उसके खंडन की रवायत का हिस्सा है. पर जीजा साली का रिश्ता तो होता hi रोमांटिक है, भाई बहिन का तो बहुत पवित्र रिश्ता होता है, मेहुल के दुसरे मन ने उसे समझाया तो उसने अपने इस विचार को परे धकेल दिया.

अभी रोहन वैसे भी खुश था. इतने लोग थे सब लोग आपस में बातें करते हँसते खेलते रहते तो रोहन का मन खूब लगा हुआ था.

रात को मेहुल रूही को कपडे बदलते हुए देख रही थी. (वैसे ये आम बात है. लड़कियां अक्सर अपनी बहनो के सामने कपडे बदल लेती हैं. एकदम नंगी भी हो जाती है.) वो उसके बूब्स देखकर सोच रही थी. जैसे मम्मी और मसि के बूब्स बड़े बड़े और सुडौल हैं ऐसे hi मेरे और रूही के भी हैं. इसका मतलब कुछ चीजें एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में ट्रांसफर होती हैं. वो मन hi मन सोच रही थी के जो भी रूही के साथ कुछ करेगा उसे बहुत मज़ा आएगा. वो मन hi मन हंस पड़ी अपने पागलपन वाली बातों पर.

ऐसे hi कुछ दिन और बीत गए. अब ये तीनो बहिन भाई डेली शाम को इकठे बैठकर टीवी देखते और टीवी देखने का बारे में ज्यादा रूही की hi चलती. एक तो वो छोटी थी उसे कोई कुछ नहीं कहता था. दुसरे कुछ सीरियल उसने फिक्स कर रखे थे जो उसे देखने hi देखने होते थे.

वैसे तो रोहन को मैच वगैरह देखना होता था जो कभी कभी hi आना होता था. पर वो उसके लिए अपनी प्यारी बहिन रूही को परेशान नहीं करता था क्यूंकि वो अपने मोबाइल पर hi देख लेता था. वो अपनी दोनों बहनो को बहुत प्यार करता था. मेहुल जानती थी के रोहन को क्रिकेट का कितना क्रेज है वो किस हद तक दीवाना है उसे पता था. फिर भी वो रूही को टीवी देखने देता था ये बहुत बड़ी बात थी.

पहले अपनी मम्मी या मेहुल से तो वो लड़ पड़ता था क्रिकेट मैच के लिए. आज भी वो अपने मोबाइल में मैच देख रहा था तो मेहुल ने उसे छेड़ते हुए कहा.

Mehul…kyun रोहन आज तुझे रिमोट नहीं चाइये?

Rohan…muskurate hue…nahi दीदी वो क्या है ना के रूही अपना फवौरीते सीरियल “बहु बानी सास” देख रही है तो मैंने सोचा मैं मोबाइल पर देख लूँ.

Mehul….achha पहले तो कभी नहीं देखता था मोबाइल पर. मुझसे और मम्मी से तो लड़ पड़ता था तू.

रोहन ….हँसते hue…kya दीदी आप भी कैसी बात करते हो. वो छोटी है na.aap बड़ी हो समझा karo…aur हिहि करके हंसने लगता है.

मेहुल…. अच्छा तो क्या बड़ी बहिन की कोई वैल्यू hi नहीं होती.

Ruhi…mehul को टोकते hue…oho दीदी, क्यों तंग कर रहे हो आप. जब उसे प्रॉब्लम नहीं है तो फिर आपको भला क्यों दिक्कत हो रही है. चुपचाप बैठ जाओ न. मुझे देख लेने दो सीरियल.

Mehul…arey ऐसा क्या होता है इन सेरिअल्स में, किसी में सास साजिश करती और किसी में बहु. सब शामे होते हैं.

Ruhi…remote पकड़कर. खीझते hue…didi मैं टीवी बंद कर दूँ अगर आपने देखने नहीं देना.

Mehul…muh पर ऊँगली rakhkar…achha बाबा लो चुप हो गयी.

इतने में राधा सबके लिए पकोड़े ले आयी चाय के saath…aur आते hi स्टाइल में boli…garma गर्म पकोड़े खा lo…tantana…

रोहन के तो फेवरेट थे पकोड़े. वो सबसे पहले उछलकर बाउल की और गया और bola…ye वाले तो मैं अकेला hi खाऊंगा. दीदी आप और रूही दूसरी बार वाले खा लेना. पकोड़े देखकर तो रूही भी झपट पड़ी और मेहुल तो कैसे जाने दे सकती थी.

छिना झपटी शुरू हो गयी और इस छिना झपटी में जब रूही ने बाउल जोर से अपनी और खिंचा तो रोहन से जोरदार ढंग से उसका एक बूब डाब गया. रूही को तो जैसे पता भी नहीं चला पर रोहन की तो जैसे सांस अटक गयी. वो तो कब से ऐसे अंगों को छूना चाहता था. पर हाँ वो कभी भी अपनी बहिन के अंग को नहीं छूना चाहता था. तो उसने एकदम से बाउल छोड़ दिया. इस हफडा दफ्डी में मेहुल से भी छूट गया और इस चक्कर में सरे पकौड़े निचे गिर गए.

निधि बच्चों को डांटते हुए boli…kya है बचो. तुम अभी उतने छोटे तो नहीं रहे. उतर hi रहे हैं. थोड़े थोड़े करके खा लो के एकदम पूरा बाउल खाना है सबको.

रूही …रुआंसी सी होकर boli…wo रोहन भाई सारे के सरे ले रहा था.

Rohan….achha जब टीवी देखने दिया तो तारीफ नहीं की पर जब पकोड़े खाने लगा तो शिकयर करती हो. आगे से देखना तुम तीन तीन सीरियल, मैं भी अपनी बरी से रिमोट लूंगा.

Nidhi…kya रोहन तुम बची से लड़ रहे हो. तुम तो बड़े हो ना.

Rohan…achha कोई ज्यादा बची नहीं है वो सिर्फ तीन साल तो छोटी है मुझसे.

Nidhi…aaj तुझे हो क्या गया है रोहन पहले तो हमेशा मेरी छोटी बहिन करता रहता है.

Rohan…isne मेरे पकोड़े जो गिरा दिए.

इतने में राधा एक और बाउल पकोड़े का ले आयी और उसे रोहन को देते हुए boli….ye तो मैं सिर्फ और सिर्फ अपने बाबू को खिलाऊंगी.

रूही ने एक जलती हुई सी नज़र अपनी माँ पर डाली और अपने रूम में चली गयी.

रोहन बाउल लेकर उसके पीछे पीछे गया . वो मुँह परे करके बीएड पर बैठी हुई थी. उसके एकदम पास जाकर उसे bola…meri प्यारी छोटी बहिन सरे के सरे पकोड़े खायेगी.

रूही ने कन्धा उचकते हुए kaha…nahi खाने मुझे पकोड़े वाकोड़े. तुम hi सारे के सारे खा लो ये बाउल वाले भी और वो कड़ाही वाले भी.

एक पकोड़ा हाथ में लेकर वो रूही के मुँह में डालने लगा तो रूही ने मुँह बंद कर लिया. रोहन दुसरे हाथ से उसको गुदगुदी निकलने लगा जिससे उसका मुँह खुल गया और रोहन ने झट से उसके मुँह में पकोड़ा दाल दिया.

रूही भी खुश हो गयी फिर तीनो भाई बहिन ने मिलकर पकोड़े खाये.


तो दोस्तों आज यहीं tak….aapke लिए एक सवाल है. आज जिस मुँह में रोहन ने पकोड़ा डाला है आने वाले समय में वो उसी मुँह में क्या डालेगा. जितने वाले को मिलेगी कटरीना कैफ की फुद्दी. लड़कियों को सलमान खान का लुंड.
 
Part 5इतनी सुबह कौन उठता है भाई. अचना रोहन की आँख खुली तो देखा के आज रूम में पानी नहीं रखा है. वो जैसे hi किचन में पानी लेने गया तो देखा के लिविंग एरिया में मेहुल और रूही सेब खा रही थी. तब रोहन ने अपने में ये बात सोची.

फिर वो उन दोनों के पास आकर बैठ गया और मेहुल से बोलै “अरे दीदी आप लोग इतनी सुबह क्यों उठ गयी. सुबह के पांच बजे हैं और आप लोग उठकर सुबह सुबह खाने भी लग गए.”

Mehul…bhai रूही को बैडमिंटन का शौक है. तो उसने मुझे बोलै के क्या मैं इसके साथ खेल सकती हूँ. तुम्हे तो पैट hi है मुझे फिजिकल एक्टिविटीज बहुत पसंद हैं. इसलिए मैं तुरंत मान गयी इसकी बात. और फिजिकल एक्टिविटी से पहले अगर फ्रूट खा लिया जाए तो ठीक रहता है भाई.

Rohan…oh तो ये बात है. कभी कोई मैच भी खेले हैं रूही तूने?

Ruhi…arey भैया बस स्कूल लेवल पर hi खेला है. और वैसे भी मैं ये सिर्फ अपनी फिटनेस के लिए खेलती हूँ क्यूंकि बैडमिंटन एक कम्पलीट एक्सरसाइज है.

Rohan…haan ये बात तो तूने बिलकुल सही कही रूही. ठीक है तुम दोनों खेलो. कहकर जैसे hi रोहन उठा तो रूही और मेहुल भी उठ गयी.

रूही रोहन से boli….bhai क्यों ना आप भी हमारे साथ खेलो.

शायद ये बात रोहन को सुनी hi नहीं क्यूंकि पहले तो वो लोग बैठी थी पर जैसे hi कड़ी हुई तो उसने देखा दोनों ने सफ़ेद रंग की शर्ट और उसी कलर की निक्केर पहनी हुई थी. बल्कि उन दोनों ने शायद सुबह होने के कारन ब्रा नहीं पहनी थी और उन दोनों की बूब्स की डोडियां साफ़ झलक रही थी.

रूही ने तो हद कर राखी थी उसकी निस्केर ऐसी टाइट थी के उसकी छूट बीच में फांसी हुई थी तो निस्केर के बीचो बीच छूट की शेप साफ़ नज़र आ रही थी. वो एकदम बौखला गया. वो अपनी बहनो के अंगों को ऐसे निहार रहा था के जैसे उनका प्रेमी हो. पर उसका कुसूर भी क्या था वो लोग थी hi इतनी जवान आकर्षक और भरे अंगों वाली के कोई भी देखे तो देखता hi रह जाए.

मेहुल को समझ नहीं आ रही थी के रोहन को क्या हो गया है. वो उसे boli….kya हुआ भाई. खेलना है तो बोलो और अगर तुम कहो तो तुम्हारे लिए भी सेब काट दूँ.

रोहन बौखलाया हुआ पहले hi था bola…nahi नहीं दीदी. आप लोग खेलो मुझे नींद आ रही है. और बिना उनका जवाब सुने वो अपने कमरे की और भगा.

मेहुल तो हैरान hi रह गयी उसके बेहेवियर पर. और रूही को समझ नहीं आया और boli…di ये भाई को क्या दिख गया था जो वो इस तरह से भाग गया,

Mehul…dikha विखा कुछ नहीं रूही. मुझे पता है इसे सोतड़ा पड़ा है. इसे सबसे ज्यादा अपनी नींद प्यारी है. उसकी बात सुनकर रूही हंस पड़ी तो मेहुल को भी हंसी आ गयी. फिर दोनों बैडमिंटन खेलने बैक यार्ड में चली गयी.

====*****====

वहां से जाने के बाद रोहन ने महसूस किया के उसका लुंड फुंफकारे मार रहा है. वो तुरंत बाथरूम की और भगा. अपने दोस्तों से चुदाई के किस्से सुनकर वो अक्सर बाथरूम में जाकर अपने आप को शांत करता था पर ये पहली बार था जब वो दो जवान लड़कियों के अंगों को देखकर और उन्हें महसूस करके बाथरूम में आया था,

और वो दो जवान लड़कियां कोई और नहीं बल्कि उसकी खुद की बहने hi थी एक उसकी सगी बहिन और दूसरी चाचा की लड़की और इंडिया में तो चाचा की लड़की को भी सगी बहिन hi माना जाता है.

पर उसे अब कुछ और नहीं करना था बस नंगा होकर मुठ मारनी थी. उसने अपने पूरे कपडे उतर दिए और उन दोनों के अंगों को याद करके मुठ मारने लगा. आअह्ह्ह्ह रूही. कितनी प्यारी लग रही थी तुम्हारी छूट उस वाइट निस्केर में और दीदी के बूब्स तो कमाल के हैं. सोच सोचकर खुद hi अपने से बोल बोलकर उसने अपने आप को शांत किया.

जब एकदम शांत हो गया तो अपने लुंड और हाथों को धोकर कपडे पहनकर जैसे hi वो अपने कमरे में जाकर लेता. अब तक उसका सेक्स का नशा उतर चूका था और वो खुद को लानते मारने लगा. अपनी सगी बहनो के लिए कितना गन्दा सोचा मैंने. ये बहुत गलत बात है. उन तीन कमीनो की वजह से मेरे अंदर गलत भावनाएं पेअर पसार चुकी हैं. मुझे अपने आप को सुधारना होगा. ऐसा सोचकर जैसे hi वो सोने की कोशिश करने लगा उसके कानों में लड़कियों की जोर जोर से आवाज़ें आने lagi…hoo….hooo.

उसने थोड़ा सा पर्दा सरका कर देखा ये उसकी दोनों बहने थी जो बैडमिंटन खेल रही थी और जैसे कोई एक शॉट मरती उसके मुँह से हो की आवाज़ निकलती. वो उन्हें खेलते हुए देखने लगा. अब उसे उन पर सच में प्यार आ रहा था और वो उनके अंगों की और नहीं देख रहा था.

पर इंसान के अंदर अगर एक बार शैतान अपना घर बना ले तो वो कहाँ इतनी जल्दी सुधरता है. वो एक बार अंदर तो घुस जाता है पर उसे निकलने के लिए किसी कोर्ट में अर्जी नहीं दी जा सकती. वो उसे अपनी परमानेंट मिलकियत समझकर उस पर कब्ज़ा कर लिया है.

अब उसने दूसरी तरह सोचना शुरू कर दिया. काश इस वक्त मेहुल दी और रूही की जगह कोई और लड़कियां होती तो मैं जरूर उन लोगों के साथ खेलने के लिए जाता और किसी तरह से पता लेता. फिर उनकी बूब्स को चुस्त और रूही जैसी लड़की की छूट वाले स्थान को टच करके देखता के उसकी निस्केर कैसे अंदर घुसी हुई है. और उसकी निस्केर के अंदर हाथ डालकर खुद उसकी छूट के अंदर ऊँगली डालकर देखता के कैसे ये कपडा घुसा हुआ था वहां.

छूट के दर्शन करना रोहन का सपना था क्यूंकि उसके दोस्त तो अक्सर अपनी गर्ल फ्रेंड्स के साथ छूटों में नहाते थे. उसके लिए तो दर्शन hi दुर्लभ हो रहे थे.

रोहन अब बेचैन हो गया था. उसके इतने नजदीक दो दो छूट थी पर उसकी बदकिस्मती वो दोनों उसकी बहने थी.

आज जैसे hi इनकी गेम ख़तम हुई मेहुल के फ़ोन पर रिशु का फ़ोन आया. मेहुल हैरान रह गयी के इतनी सुबह उसने फ़ोन क्यों किया पर उठाना तो पड़ना hi था. जैसे hi मेहुल ने फ़ोन उठाया तो रिशु मस्ती भरे अंदाज़ में bola….aur दीदी. कैसी हो आप.

जैसे बोल रहा हो और जान कैसी हो.

मेहुल ने फिर भी उसे इग्नोर किया और boli…main ठीक हूँ रिशु तुम सुनाओ कैसे हो और प्राची कैसी है.

Rishu…main ठीक हूँ दी. और प्राची भी ठीक hi है. वैसे तो आप लोगों की रोज़ बात होती है तो मुझसे ज्यादा तो आपको पता होगा उसके बारे में. अच्छा रोहन का बताइये क्या रहा?

Mehul…hairani se…kya रहा मतलब. उसका क्या रहना था.

Rishu…aap उसके बेहेवियर से चिंतित थी ना. और मैंने बताया था उसको लड़की चाहिए. तो कुछ बना उसका.

मेहुल को अब समझ आ रही थी के ये कमीना उससे फ़्लर्ट कर रहा है. पर किया भी क्या जा सकता है. उसने खुद hi उसको एप्रोच किया था. इसलिए वो boli….nahi भाई अभी तो कुछ नहीं बना. अभी वो ठीक है वैसे.

Rishu…hanste hue….mujhe पता है कितना ठीक है वो. अच्छा एक और बात कहूं, उस दिन जब आप दी से बात कर रही थी फ़ोन पर. फिर हंसने लगता है.

मेहुल का दिमाग ख़राब हो जाता मतलब जब प्राची उससे बोल रही थी के वही रोहन को संतुष्ट कर दे. वो बातें इसने सुन ली क्या? ये प्राची भी ना खुलेआम बात करती है घर में. कोई पर्दा भी नहीं रखती क्या. वो नासमझ बनती हुई रिशु से बोली.

Mehul…hamari तो रोज़ hi बातें होती आपस में फ़ोन उससे क्या होता है.

Rishu…nahi उस दिन जो बात हुई थी तो वो बहुत अजीब बात थी.



Mehul…kis दिन की बात कर रहे हो और क्या बात कर रहे हो rishu…ab मेहुल रिशु से सीधे पूछना चाहती थी के वो क्या बोल रहा है और वो अब रूही से थोड़ा दूर भी हो गयी थी.
 
Part 6Mehul…kis दिन की बात कर रहे हो और क्या बात कर रहे हो rishu…ab मेहुल रिशु से सीधे पूछना चाहती थी के वो क्या बोल रहा है और वो अब रूही से थोड़ा दूर भी हो गयी थी.

…..

Rishu…makkari भरी हंसी के saath….didi उस दिन प्राची दीदी आपको सीधे hi रोहन के साथ चुदाई की बात कर रहे थे न.

मेहुल को बहुत ज्यादा हैरानी हुई रिशु के मुँह से ये बात सुनकर. वो लगभग चिल्ला कर boli…kya बक रहे हो रिशु.

रिशु उधर se…kyun दीदी मैं तो बक रहा हूँ. दीदी को तो आपने कुछ नहीं कहा.

मेहुल ने अपने आप को थोड़ा शांत किया क्यूंकि वो फांसी हुई थी. रिशु को उसने खुद काम पर लगाया था और प्राची की बात उसने सुन ली थी अब उसे दोष देने से कोई फायदा नहीं था. वो boli….dekho रिशु वो मज़ाक कर रही थी और ये मज़ाक हम दो सहेलियों में था. तुम्हे इससे कोई मतलब नहीं होना चाहिए था. और एक बात. रोहन को कोई लड़की मिलती है या नहीं प्लीज आगे से इस बारे में मुझसे कोई बात ना करना.

रिशु अब थोड़ा गंभीर हो गया और बोलै ……मैंने वो सब इसलिए बोलै के मैं जानना चाहता हूँ के क्या मेरी दीदी यानि प्राची की खुद की सोच है वो या फिर उन्होंने ऐसे hi बोल दिया.

मेहुल को झटके पर झटके लग रहे थे. वो लड़का कितना खुले आम ऐसा कुछ पूछ रहा था उससे जिसके बारे में सोचना भी मुश्किल हो. उसने धैर्य बनाये रखते हुए कहा.

Mehul…rishu मुझे अब क्या पता उसके मन में क्या है. उसने मुझे ऐसे hi बोल दिया या फिर उसकी भी सोच ऐसी है और तुम क्यों जानना चाहते हो.

रिशु टपक से bola…kyunki मैं अपनी दीदी की और अत्त्रक्टेड हूँ. अगर उनकी सच में ऐसी सोच है तो आप पता करवा के दो दी.

मेहुल को समझ नहीं आ रहा था वो उसे क्या जवाब दे. वो boli…dekho अगर ऐसा कुछ जानना है तो खुद बात करो प्राची से. मुझे इन सब बातों में न घसीटो, समझे.

थोड़ा सख्ताई से बोले अतः मेहुल ने तो एक बार को तो रिशु थोड़ा दर सा गया पर फिर सँभालते हुए bola….dekho दीदी जब आपको मेरी जरुरत थी तो मैंने आपका साथ दिया था न. अब मुझे आपकी जरुरत है तो आप भाग रहे हो.

मेहुल को अब थोड़ा रीलीज़ हो रहा था के वो मोरली गलत कर रही है रिशु के साथ. वो boli…tum क्या चाहते हो के मैं डायरेक्ट पूछ लूँ प्राची से के तुम अपने भाई के साथ वो सब करोगी?

Rishu….arey दी तुम तो सीधे मरवाने वाली बात कर रही हो. मैं चाहता हूँ आप प्राची दी से मिलो उनसे उसी दिन के बारे में बात करो और उनके मन की बात को जानो आखिर है क्या उनके मन में.

मेहुल को अब समझ आ गया था वो क्या चाहता hai….thik है मैं फ़ोन पर तो नहीं जिस दिन भी घर आउंगी उस दिन उससे बात छेड़ूँगी के आखिर क्यों उसने मुझे ऐसा करने को बोलै और उसके खुद के मन में क्या है.

Rishu…ye हुई ना बात दीदी. और हाँ दीदी मेरे बारे में कुछ भी गलत न सोचना आप. रोहन के लिए कोई अछि सी लड़की ढूंढिए ताकि उसकी इच्छा पूरी हो सके.

Mehul…muskurate hue…haan भाई थैंक्स फॉर योर कंसर्न. मैं तुम्हे गलत समझ गयी थी. कोशिश करती हूँ के तुम्हारा काम हो जाए.

******************************

रोहन रोज़ाना जल्दी उठकर उन दोनों को बैडमिंटन खेलते हुए देखता और इमेजिन करता के ये दोनों उसकी बहने नहीं बल्कि कोई और लड़कियां हैं. वो उनके अंगों को ताड़ता रहता. ये दोनों डेली अलग अलग ड्रेस पहनती थी. पर ड्रेसेस हमेशा छोटी hi होती थी क्यूंकि बैडमिंटन में वही कम्फर्टेबले रहती हैं.

आज रोहन जल्दी उठकर किचन में आया, पानी पिया और उन दोनों के पास जाकर बैठ गया. मेहुल से bola…didi मुझे भी थोड़ा सेब काट दो. आज मैं भी खेलूंगा तुम दोनों के साथ.

मेहुल हँसते hue….achha बच्चू खेल देखते देखते तुम्हारा भी मन हो गया ना खेलने का.

रोहन हैरान रह गया. तो क्या उसकी दीदी जानती है के वो उन दोनों को खेलते वक्त देखता है. तो क्या उन्हें ये भी मालूम है के वो उनके अंगों की और झांकता है. वो bola…didi कभी कभी देख लेता हूँ और हाँ इसीलिए तो मेरा मन किया खेलने का. उसने बहाना बनाते हुए कहा.

रूही हँसते हुए boli…kabhi कभी नहीं भाई. आप हमें हर रोज़ देखते हो और बीच बीच में थोड़ी देर के लिए गायब हो जाते हो.

रोहन को याद आया वो बीच बीच में मुठ मरने चला जाता है जब उनके अंगों को देखकर उसका लुंड खड़ा हो जाता है तब.

रोहन bola…haan बीच बीच में जब खड़े खड़े थक जाता हूँ तो थोड़ी देर के लिए बैठ जाता हूँ.

Mehul…pagal तो ग्राउंड में hi क्यों नहीं आकर देख लिया करते.

Rohan…hanste hue…didi तभी तो आ रहा हूँ, देखने नहीं बल्कि खेलने.

हँसते हुए उसने प्यार से दोनों बहनो को अपने गले से लगा लिया तो उनके सॉफ्ट सॉफ्ट बूब्ज़ उसके जिस्म से टकराये तो उसके शरीर में झुनझुनी सी उठ गयी.

पहले रोहन की गेम रूही से शुरू हुई. रूही ने तीन चार शॉट्स में hi एक पॉइंट ले लिया तो वो समझने लगी के रोहन को हराना कोई मुश्किल बात नहीं है. फिर उसके बाद सात शॉट्स के बाद एक और पॉइंट. वो तो फूले नहीं समां रही थी. फिर उसके बाद लगातार तीन और पॉइंट्स ले लिए.

और उसके बाद जो गेम शुरू हुई उससे तो रूही और मेहुल को ये लग रहा था के रोहन या तो वार्म उप कर रहा था या फिर रूही को जस्ट खिला रहा था. क्यूंकि फिर रूही ने एक भी पॉइंट नहीं लिया और गेम रोहन के पाले में गयी. रूही मायूस सी हो गयी और साइड में जाकर बैठ गयी.

अब रोहन की गेम मेहुल से लगनी थी. रूही के मुकाबले मेहुल की गेम अच्छी थी. 6 पॉइंट्स तक तो गेम टक्कर की रही फिर उसके बाद रोहन की नज़र अचानक अपनी दीदी के बूब्स पर पड़ी जो के बिना ब्रा की शर्ट होने के कारन बहुत ज्यादा उछाल रहे थे. बस उन पर निगाह और एक पॉइंट.

अबके रोहन ने अपने दिमाग को झटका दिया और बोलै साले अपनी hi बहिन की छातियों को घूरता है. शर्म कर. तो उसने खुद को संभाला और अगले दो पॉइंट ले गया और अब उसे एडवांटेज थी. उसके बाद एक और पॉइंट रोहन को मिल गया. ‘

लेकिन उसके बाद मेहुल ने जी जान लगा दी. बहुत अच्छी गेम चल रही थी. ज्यादा म्हणत की वजह से मेहुल और रोहन दोनों पसीने पसीने हो गए. तो इस बार फिर से अचानक रोहन की नज़र मेहुल की चूचियों पर पड़ी जिन पर शर्ट चिपकी पड़ी थी और डोडियां तो ऐसे नज़र आ रही थी जैसे नंगी hi हों. रोहन का ध्यान हटा तो एक पॉइंट मेहुल का.

रोहन का ध्यान अब भटक चूका था. वो बार बार शर्ट से चिपकी चूचियों को देख रहा था. इस तरह से उसने कई पॉइंट गँवा दिए और जीत मेहुल की हुई. वो हैययय करके पहले रूही के और फिर रोहन के गले लग गयी और boli…maine रोहन को हरा दिया. भाई को हरा दिया.



रोहन थोड़ा फ़्रस्ट्राटे हो गया था. उसकी वजह उसका हारना नहीं था. बल्कि अपनी hi दीदी की चूचियों को देखना था वो भी नार्मल नज़र से नहीं बल्कि वासना भरी नज़रों से.
 
Part 7मेहुल ने सोचा आज चलकर रिशु का भी काम कर दिया जाए नहीं तो वो उसके पीछे hi पड़ा रहेगा. वो किसी भी तरह से उससे पीछा छुड़ाना चाहती थी, चाहे उसकी दीदी माने या न माने. उसे प्राची से कोई भी बात करने में कोई दिक्कत नहीं थी. क्यूंकि वो खुद उससे इतनी ज्यादा खुली हुई थी के उसे hi खुद के भाई से छोड़ने को बोल रही थी तो अगर मेहुल उससे उसके भाई रिशु से छोड़ने को बोलती तो वो भला गुस्सा कर सकती थी क्या?

ये सोचकर उसने उससे मिलने का प्रोग्राम बनाया क्यूंकि वो आज उससे मिलकर और उसके विचार जानकार ये सब ख़तम करना चाहती थी. वो अपनी मम्मी को बोलकर के प्राची के यहाँ जा रही है, उसके घर के लिए नकल जाती है ये बोलकर के दोपहर का खाना भी उधर hi खायेगी.

प्राची तो उसे देखकर बहुत खुश हो जाती है. उसको गले से लगाकर उसे अंदर लेकर जाती है. उसकी मम्मी इन दोनों को चाय बनती है तो मेहुल उसे कहती है क्यों ना तुम्हारे रूम में चलकर बात की जाए. प्राची की मम्मी मज़ाक करती hai…kyun दोनों ने अपने बर्फ की बातें करनी हैं क्या?

प्राची अपनी मम्मी को घुड़की देकर बोलती hai….kya मम्मी हम दोनों के hi बर्फ नहीं हैं. आपको तो पता hi है.

Mummy….hanste hue…Wo मुझे पता है. मैं तो ऐसे hi मज़ाक कर रही थी. अच्छा सुनो मैं कोमल ौंटी के यहाँ जा रही हूँ. आने में टाइम लग जायेगा. तुम ऐसा करना दोनों पुलाव बना लेना दोनों लोग खा लेना. रिशु आये तो उसे भी खिला देना.

Prachi…thik है मम्मी आप जाओ. हम लोग देख लेंगे अपना.

Mummy…aur haan..order नहीं करना कुछ. घर पे hi बना के खाना.

प्राची …हाथ जोड़ते hue…achha मेरी माँ. जाओ भी अब. नहीं करते आर्डर. घर का बना hi खाएंगे. वो भी खुद बना के. फिर धीरे से बोलती hai….jiski माँ दिन भर सहेलियों के घर घूमती रहती है. उनके बच्चों को खाना बनाना आ hi जाता है.

मम्मी ने ऑंखें दिखते हुए kaha…kya कहा tune…unhe थोड़ा बहुत hi सुना था.

Prachi…muskurate hue…he हे कुछ नहीं मम्मी. मैं आपको कुछ कह सकती हूँ क्या?

Mummy…haan मुझे पता है तेरा क्या कह सकती है क्या नहीं. अच्छा जा रही हूँ. दरवाजा लॉक कर लो.

प्राची दरवाजा लॉक कर लेती है. मेहुल उसके रूम की और जाने लगती है तो प्राची बोलती है. अरे उधर कहाँ जा रही है मेरी माँ. अब कौन सा घर में कोई है. इधर hi आ जा. यहीं आराम से बैठकर बातें करेंगे.

दोनों बैठकर बातें करने लगती हैं. जहाँ मेहुल हमेशा अपने घर तक hi सीमित रहती थी. प्राची को हर किसी सहेली को गॉसिप करने की आदत थी. वो उसे अपनी हर सहेली की बात बता रही थी. फलानि का फैलाने से चक्कर है. फलानि मैडम फैलाने सर के साथ सेट है.

यही सब करते करते उन्हें दोपहर हो गयी. प्राची और मेहुल मिलकर नमकीन चावल की तयारी करने लगे. इतने में रिशु आया और मेहुल को देखकर एकदम खुश हो गया और bola…hi दीदी. आज बहुत दिनों बाद नज़र आये आप.

मेहुल भी …मुस्कुराते hue….haan रिशु सोचा प्राची से मिले बहुत दिन हो गए तो आ गयी मिलने. और तू बता कैसा चल रहा है तेरा कॉलेज.

रिशु.. बस ठीक hi चल रहा है दी.

Prachi…tu चल कर फ्रेश हो ले. मैं चावल बना रही हूँ. फिर तीनो मिलकर खा लेंगे.

रिशु.. क्यों मम्मी कहाँ है.

प्राची.. तुम्हे तो पता hi है मम्मी. किसी न किसी ौंटी के यहाँ होते हैं हमेशा. आज कोमल ौनिते के यहाँ हैं.

रिशु न में गर्दन मरते हुए अपने रूम में चले जाता है.

इधर ये दोनों खाना बनाने में जुट जाती हैं. थोड़ी देर में ये तीनो खाने के टेबल पर थे और क्यूंकि मेहुल रिशु के सामने बैठी थी तो रिशु इशारा करके मेहुल को समझने की कोशिश करता है के दीदी से बात करो. मेहुल जब देखती है के प्राची का ध्यान नहीं है तो वो हाथ के इशारे से उसे निश्चिन्त रहने को बोलती है.

*******************************************************

रोहन अपने रूम में लेता सोच रहा था के मुझे क्या हो गया है. मुझे अपनी hi बहनो के बारे में इस तरह से सोचना चाहिए क्या. शर्म कर रोहन, तुम ऐसे क्यों वासना से भर जाते हो अपनी hi बहिन की छाती को देखकर.

क्यों खुद पर नित्यंतरण नहीं रहा तुम्हारा. क्यों हवस का शिकार हो जाते हो जब उनके अंगों को देखते हो और जब कभी उनको जफ्फी डालते हो तो उनको महसूस करके आनंद से भर जाते हो.

खुद को hi धोखा दिए जा रहे थे के खिड़की में से उन्हें देखते थे और सोचता था के कोई और लड़कियां हैं. पर असल में तो वो तेरी बहने hi थी रोहन. उसके दिमाग का एक हिस्सा रोहन को लानते मार रहा था.

फिर दूसरा दिमाग एक्टिव हो जाता है और बोलता है. तूने खुद तो नहीं इन भावनाओ को जन्म दिया. कहीं से तो आयी हैं तुम्हारे दिमाग में ये भावनाएं. अपने आप आयी न. तो जो चीज खुद से आयी है. वो गलत कैसे हो सकती है.

फिर पहला एक्टिव हो जाता hai….galat बात. पहले कभी ऐसा हुआ क्या? तुझे चाहिए तो ऐसा के अपने गलत दोस्तों की सांगत छोड़ दो पर तू हमेशा उनकी बातें सुनता रहता है. उनके उलटे सीधे किस्से सुनता रहता है. जिसका असर ये हो रहा है के तू अपनी hi बहनो को गलत नज़रों से देखने लगा है. उन तीनो को छोड़ दे इसी में तेरी भलाई hai…chhod दे रोहन.

दूसरा दिमाग कहता hai…..arey पागल आजकल कौन देखता है बहिन है या कोई और, उसके भी छूट लगी है और रूही तो वैसे भी चाचा की बेटी है. देखा कितने मस्त मुम्मे हैं उसके. एक बार टच करके देख मज़ा आ जायेगा. तू थोड़ी सी कोशिश करे तो रूही तो पैट hi सकती है. पर तू मेरी सुनेगा कहाँ. कोशिश कर रोहन कोशिश kar…koshish कर.

फिर से पहले ने बोलना शुरू kiya….chhod दे ये सब रोहन छोड़ दे.

Doosra…koshish कर रोहन कोशिश कर.

रोहन के दिमाग में बार बार ये दोनों विचार आ रहे थे और उसे बुरी तरह से झिझोड़ रहे थे. रोहन अपने हाथ दोनों कानो पर रख लेता है और जोर से बोलता hai.bas करो तुम दोनों. फिर लेट जाता है और थोड़ी देर में इन्ही विचारों में गुंथा हुआ सा सो जाता है.

************************************

खाना खाने के बाद रोहन अपने कमरे में चला जाता है. उसे उम्मीद थी के मेहुल उसकी दीदी प्राची से जरूर बात करेगी.

प्राची और मेहुल फिर से बैठकर बातें करने लग जाते हैं. इस बार जब बात शुरू होती है तो प्राची खुद बात शुरू करती है. आंख मरते हुए मेहुल से कहती hai…kyun क्या बना फिर रोहन का उसे बहिन की छूट का सुख मिला के नहीं.

मेहुल तो उसके मुँह से यही सुन्ना चाहती थी. Boli….meri तो भाई हिम्मत नहीं हुई. पर लगता है तू जरूर रिशु से मरवाती है. वो तेरी तरफ देख भी इस लहजे से रहा था जैसे तुम दोनों में कुछ हो.

Prachi…uski पीठ पर मरते hue…chal hat.baat तो तुम्हारी और रोहन की हो रही थी. पर तू सुई को मेरी तरफ घुमा रही है. तू अपनी बात बता मेरी छोड़.

Mehul….muskurate हुए ….देखा जब बात खुद पर आयी तो बात को पलट hi दिया तूने. ये भाई से चुदाई वाली कंडीशन hi ऐसी है.

Prachi…pehle तू अपना बता न फिर रिशु के बारे में भी बात कर लेंगे.

Mehul…nahi यार. उससे मेरी कोई बात नहीं हुई इस बारे और अब वो काफी खुश रहता है. हमारी कजिन सिस्टर रूही भी आ गयी है न. तो हम तीनो बातों में इतने बिजी रहते हैं के उसे शायद अब सेक्स की कमी नज़र hi नहीं आती.

प्राची.. शोखी भरे अंदाज़ mein…sex ऐसी चीज है मेरी जान. एक बार किसी के दिमाग में ठिकाना बना ले तो उसे अपना गुलाम बना लेता है. देखना तुम्हे बाद में पता चलेगा के वो तुम्हे महसूस नहीं होने देता था पर वो चाहता बहुत कुछ था.

Mehul…chal तेरी बात तो समझ गयी. पर तू बता न. तेरा और रिशु का कुछ सन है क्या?

Prachi…yaar तू फिर वहीँ पहुँच गयी. अच्छा तुझे जानना hi है तो सुन. मुझे रिशु का नहीं पता के उसके मन में क्या है पर मैंने कई बार उसके बारे में सोचा है. कई बार एक्सिडेंटली मैंने उसे सिर्फ अंडरवियर में देखा है और उसके लुंड वाली जगह पर मैं मुट्ठी सी बानी देखती हूँ तो मुँह में पानी आ जाता है और (आंख मरते हुए )सच कहूं तो छूट में भी. कई बार रात को उसके रूम से आठ आठ की आवाज़ें सुनी है उस वक्त शायद वो मुठ मार रहा होता होगा. मेरा मन करता है दरवाजा तोड़ कर अंदर घुस जॉन और उससे अपनी छूट फड़वा लूँ.

लास्ट शब्द प्राची ने बहुत hi जोश में और थोड़ी ऊँची आवाज़ में बोले तो मेहुल को बोलना pada…bas कर बहिन बस कर. थोड़ा धीमे बोल. उसने सुन लिया तो वो सच में आकर तेरी छूट को फाड़ ना दे.

Prachi…apne तीन उँगलियों से अपनी छूट को सहलाते hue…..haye काश ऐसा हो जाए.

Mehul…hanste hue…achha एक बात तो बता.

Prachi…haan पूछ.

Mehul…agar वो अपनी तरफ से ऐसे सिग्न दिखाए के वो तुझे छोड़ना चाहता है तो क्या तू भी थोड़ा आगे बढ़ेगी.

Prachi…haan बिलकुल. क्यों नहीं यार. जो चीज मैं खुद चाहती हूँ वो मेरा भाई भी चाहता होगा तो फिर तो कोई प्रॉब्लम hi नहीं रही न.



Mehul…oh तू तो बड़ी बेकरार है अपने भाई से छोड़ने के लिए. मेहुल हँसते हुए बोलती है तो प्राची भी हंसने लग जाती है.
 
Part 8रोहन यूट्यूब पर मन को शांत करने के लिए और डाइवर्ट करने के लिए वीडियो देखने लगा. वहां उसे एक वीडियो नज़र आयी जिसमे बताया गया था के अगर मन को डाइवर्ट करना है तो उसका सबसे बढ़िया हल hai…kitaben पढ़िए, कोई खेल खेलिए और योग करिये.

इनमे से किताबों वाला आईडिया तो उसने रिजेक्ट कर दिया. क्यूंकि कोर्स की hi इतनी बुक्स हो जाती हैं के बन्दे का और कुछ करने का मन hi नहीं करता.. दूसरा है खेल के बारे में. तो इन्ही खेलों की वजह से hi तो उसकी बहनो के लिए उसके मन में हवस पैदा हुई तो वो उसे भी रिजेक्ट hi कर देता है. तीसरा है योग. उसने सोचा क्यों न बैडमिंटन छोड़कर योग शुरू कर दिया जाए.

पर उसने खुद hi तो खेलना शुरू किया था. अब क्या बोलकर छोड़ेगा खेलना ये उसे समझ नहीं आ रहा था. जब कुछ समझ आया तो उसके मुँह से खुद hi गलियां निकलने लगी.

फिर उसका शैतान वाला मन हव्य हो गया उसपर और bola…bhain छुड़ा गयी दुनियादारी. जो होगा देखा जायेगा. मुझे खेलना hi है अपनी बहनो के साथ. योग से टट्टू कुछ होने वाला है. ये विचार तो मेरा पीछा छोड़ नहीं रहे अगर मैं खेलने नहीं गया तो ये विचार पूरा दिन मेरी भें छोड़ के रखेंगे. ये सोचकर रोहन डीडे करता है के बैडमिंटन को कंटिन्यू hi रखना है. हाँ खुद के विचारों पर थोड़ा कण्ट्रोल करने की कोशिश करेगा,

ये सब सोचने के बाद वो अपने दोस्तों को मिलने के लिए निकल जाता है. साले चाहे कितने भी कमीने हों पर हर एक दोस्त जरुरी होता है यार.

***************************

मेहुल खुश होकर वहां से वापिस आती है के उसकी तो जीत हो गयी. उसे तो बैठे बिठाये वो मिल गया जिसकी उसने आशा भी नहीं की थी. उसने बहार आने के बाद रिशु को फ़ोन मिलकर बताया के तेरा काम हो गया है. अब तुझे अपनी तरफ से ऐसे इशारे करने हैं जिससे तेरी दीदी खुद तुझे बोले के दाल दो.

रिशु तो इतना खुश हो गया के उसके पेअर जमीन पर नहीं पद रहे the…wo ख़ुशी में बोल gaya…thanks दी अब प्राची दी चूड़ी समझो आप,

मेहुल हँसते हुए boli…oye ठण्ड रख भें छोड़ तू तो बिना कुछ किये hi उछाले जा रहा है. अच्छा बात सुन तेरा काम हो गया है, अब मुझे इन सब चीजों के लिए परेशान न करना. समझे.

Rishu…khush होते hue…haan दी समझ गया. जब मेरा काम hi हो जायेगा. तो आपको क्यों परेशान करना भला. आपको तो रोहन परेशान करेगा न. और हाँ थैंक्स मुझे भें छोड़ बोलने के लिए.

Mehul…rohan की छोड़ खुद की चिंता कर. चल अभी रख रही हूँ. मुझे घर जाना है. वो फ़ोन रख देती है और स्कूटी लेकर घर के लिए निकल लेती है.

**************************************

आज फिर से रोहन अपने टाइम पर उठ गया. उसे एक अलग hi आनंद आने लगा था बहनो के साथ बैडमिंटन खेलने में, उनके साथ समय बिताने में. वो अपनी बहनो से वैसे भी भाई की तरह बहुत प्यार करता था पर अब उसका नजरिया थोड़ा बदला था.

चाहे नजरिया बदला था पर वो एक दोराहे पर आकर खड़ा हो गया था. एक मन इस सबसे दूर जाने को कह रहा था वहीँ दूसरा मन अपनी hi बहनो से मज़ा लेने को प्रेरित कर रहा था. ये इंसानी मन की फितरत भी है के वो उसे हमेशा उलझा के रखता है. अगर इंसान के अंदर एक hi विचार हव्य हो तो चिंता का कोई कारन hi नहीं होता पर जब दो विरोधावासी विचार हव्य हो जाएँ तो इंसान उन दोनों में hi फंस कर रह जाता है, यही हालत थी हमारे भाई रोहन की.

आज फिर उसका पहला मुकाबला रूही के साथ था. जो हमेशा उससे पिछले बदला लेने को उतरती थी और हर बार हार जाती थी. इसलिए वो उससे खेलने पर काफी चिढ़ने लगी थी और यही उसकी हार का दूसरा कारन भी था. जब हम किसी से खेलते वक्त चिढ जाते हैं तो हमारी एकाग्रता भांग हो जाती है.

आज के मैच में जब रूही ने पहला पॉइंट लिया तो उसके अंदर थोड़ा आत्मविश्वास जगा. पर उसने देखा के एक पॉइंट हारने के बावजूद रोहन मुस्कुरा रहा था तो उसे खीझ सी चढ़ गयी और वो दूसरा पॉइंट जल्द hi गँवा बैठी. पर फिर थोड़ा ध्यान लगाने पर तीसरा और चौथा पॉइंट रूही को मिल गया.

ये पॉइंट्स क्यूंकि थोड़ा लम्बा गए तो रूही को प्यास लग गयी. उसने मेहुल से पानी माँगा. मेहुल को पता था के ये बड़ी शिद्दत से रोहन को हराना चाहती है तो वो उसके पास जाकर उसके कान में boli…suno रूही. अगर तुम्हे जीतना है तो दो बातों का ध्यान rakho…chidhi पर नज़र और चेहरे पर मुस्कान ये दो बातें अपना लो. तुम जीत जाओगी.

उसके बाद दो पॉइंट जाने के बाद भी रूही के चेहरे से मुस्कान नहीं गयी. उसका फायदा उसे हुआ के उसे चार पॉइंट लगातार मिल गए. रोहन समझ गया था के मेहुल दीदी रूही के कान में जीत का मंत्र फूंक कर आयी है. इसलिए वो पहले से चेतन्न होकर खेलने लगा. इस बार गेम टाइब्रेकर तक पहुँच गयी और रोहन बहुत hi मुश्किल से जीत पाया और जोर से मुट्ठी बंद करके ऊपर की और करके बोलै “ीीेहःहः”

रूही की बहुत ज्यादा गुस्सा आया उसने रैकेट पटक कर मारा और boli…jao मैं आपके साथ आगे से नहीं खेलने वाली, भाई. रोहन ने हँसते हुए उसे गले से लगते हुए kaha…tum क्या चाहती है झल्ली, मैं जान बूझकर हार jaun..achha चल मैं कल अगर तुझसे जानबूझकर हार भी हौं तो क्या तुझे उस जीत से मज़ा आएगा.

रूही ने ना में गर्दन हिलाई पर अभी भी वो रोनी सूरत बनाये हुए थी. उसकी ना सुनकर रोहन bola….dekho आज तूने इतनी ज्यादा म्हणत और कोशिश की के तू गेम को टाइब्रेकर तक ले गयी. इसका मतलब तू मुझे हरा भी सकती है. देख तेरी गेम में कहाँ कमी है. या मेरे किस शॉट के बाद तुम्हे पॉइंट मिलता है. देखो न जहाँ भी मेरी कमी नज़र आया वहां अटैक करो.

मेहुल भी आगे आयी उसने भी दूसरी तरफ से जफ्फी डालते हुए कहा. रहा बिलकुल सही बोल रहा है रूही. ऐसे रोहन के जानबूझकर तुझे बिलकुल भी मज़ा नहीं आने वाला. उसने उसके माथे पर किश किया. उसके बाद रोहन ने भी उसके माथे पर किश किया तो रूही खुश हो गयी और boli…mujhse जान बूझकर बिलकुल भी नहीं हारना भाई. नहीं तो मैं इससे भी ज्यादा खुश हो जाउंगी.

फिर उसने मेहुल और रोहन दोनों की गाल पर किश कर दिए. इस किश से रोहन हिल सा गया. उसे अब मेहुल से भी गेम लगनी थी. उसने आज मेहुल को भी हरा दिया तो मेहुल हँसते हुए boli…kya खा कर आये थे भाई आज.

रोहन भी हँसते हुए bola….jo तुम दोनों ने खाया है वही मैंने khaya….apple. और क्या खाना है मैंने.

रूही boli…lagta है दंड बैठक लगा कर आते हैं तभी इनका इतना स्टैमिना है.

Rohan…hanste hue…kabhi तुम दोनों को दिखाऊंगा अपना stamina…usne ये बात बोल तो दी पर देखा उसकी दी मेहुल उसको ऑंखें निकल रही थी. उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और ऑंखें झुका के खड़ा हो गया.

*****************************

प्राची अपने और रिशु के लिए खाना बना रही थी जब रिशु ने पीछे से आकर उसकी आँखों पर हाथ रखकर bola…batao तो कौन है ( वो आवाज़ बदलकर बात कर रहा था)

प्राची boli…itni हिम्मत किसी और की नहीं हो सकती. ये मेरा गधा भाई hi hai..fir हंसने लगी.

रिशु ने उसकी आँखों से हाथ हटा लिए और चिढ़कर bola….arey दीदी आपको कैसे पता चल जाता है. मैं तो आवाज़ भी बदलकर बात कर रहा था.

प्राची उसकी और देखकर boli…bhai मेरे. किसी और की इतनी हिम्मत नहीं के तेरी दीदी को छू ले.

रिशु भी उसकी बात सुनकर तैश में आ गया और bola…achha तो भाई को तो पूरा हक़ है न अपनी दीदी को छूने का.

Prachi…muskurate hue…abhi छुआ तूने. कुछ कहा क्या मैंने.

रिशु bola…haan वो तो है दीदी. पर कई बार बाँदा चिढ जाता है छूने से.

Prachi…agar कभी चिढ़ी तो बताना भाई. तुम्हारे छूने से मैं चिढ जॉन ऐसा हो hi नहीं सकता. तुम्हारा पूरा हक़ है.

रिशु bola…hak तो तुम्हारा मुझपर और मेरा तुम पर पूरा है दीदी. तुम मेरी प्यारी दीदी जो हो.



प्राची को उस पर बहुत प्यार आता है और वो उसे गले से लगा लेती है. गले से तो उसने रिशु को पहले भी कई बार लगाया था पर. आज रिशु को एक अलग hi फीलिंग आ रही थी और वही फीलिंग आज प्राची को भी आ रही थी. इन दोनों के रिश्ते में कुछ अनकहे से एहसासों की एक नयी शुरुआत हो चुकी थी.
 
Part 9आज तो हद hi कर दी रूही ने. अपना पूरा स्टैमिना लगा दिया जी जान लगा दी के रोहन से एक मैच जीत ले पर फिर से बेचारी टाई ब्रेकर तक पहुंचा कर हार गयी और उसको इतनी चिढ छड़ी के रैकेट फेंक कर बोली.

Ruhi…main आज के बाद ये बेकार गेम नहीं खेलने वाली. आप दोनों hi खेला करो बस.

रूही बहुत शार्ट टेम्पर थी. और दूसरी बात उसमे थोड़ा बहुत सुपरिवृत्य काम्प्लेक्स भी था. वो ये बात बर्दाश्त hi नहीं कर सकती थी के कोई उसे हरा दे.

अच्छा ये वो वक्त था जब रोहन एक दोराहे पर खड़ा था के बहनो को उस नज़र से देखा जाए या नहीं. कभी वो अपने को इस बात के लिए एग्री कर लेता था तो कभी उसे अपने आप से चिढ हो जाती थी के वो ऐसा क्यों कर रहा है.

इन दिनों गर्मी बहुत थी और एक गेम खेल कर hi कोई भी पसीने पसीने हो जाए ये आम बात थी. तो होता क्या है, रूही रैकेट फेंक कर और अपनी बात बोल कर अपने रूम की और भाग जाती है. जो के मेहुल और उसका कॉमन रूम था.

मेहुल उसे मानाने के लिए भाग कर उसके पीछे पीछे जाती है. वो देखती है के रूही उलटी होकर लेती हुई है और सुबक रही है. मेहुल उसे जबरदस्ती सीधा करती है उसके आंसू पोंछती है और बोलती hai….dekho ऐसे रो कर तो तू कभी नहीं जीत सकती रोहन से.

Ruhi…subakte hue…to फिर कैसे जीत सकती हूँ आप hi बताओ दी. उसकी गेम बहुत hi स्ट्रांग है और उसका स्टैमिना भी.

Mehul…shaitani मुस्कान के saath….agar हम कुछ ऐसी स्कीम लगाएं के क्लाइमेक्स के वक्त उसका स्टैमिना hi ख़त्म हो जाये to…fir तो गेम को संभल लोगी na…mehul आंख मार कर बोलती है.

Ruhi…uljhan भरी नज़रों से मेहुल को देखते hue…aap कहना क्या चाहती हो दीदी. मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा. ऐसे कैसे किसी का स्टैमिना ख़त्म हो सकता है.

Mehul…mujhe बस इतना बताओ जो मैं कहूँगी करोगी न?

Ruhi…bhai को हारने के लिए मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ दीदी. बस एक गेम जितवा दो मुझे. मुझे हारने के बाद रोहन भाई के चेहरे पर जो विक्ट्री वाली स्माइल होती है न वो एक बार मैं अपने चेहरे पर लाना चाहती हूँ. बस एक बार.

Mehul…ankh मरते hue…shaitani मुस्कान के saath….to बस कल तुम वही करना जो मैं कहूं.

रूही को अब लग रहा था के मेहुल जरूर कुछ न कुछ ऐसा करने को बोलेगी के रोहन मैच हार जाये. अपने चेहरे पर आत्मविश्वास के साथ वो बोलती hai….haan दीदी मैं कल वही करुँगी जो आप कहोगे.

************************************

रिशु कॉलेज से आते hi अपनी मम्मी को आवाज़ लगा के बोलता hai…mumma मेरे लिए मग्गी बना डोज प्लीज. आज मेरा बहुत मन हो रहा है मग्गी खाने का, कह कर वो अपने रूम में घुस जाता है फ्रेश होने के लिए चला जाता है.

वो जैसे hi रूम से बहार आता है तो अपनी हॉट बहिन प्राची को पानी का गिलास लिए कड़ी देखता है. वो उसे देखता क्या है बस देखता hi रह जाता है. उसने क्लीवेज रेवेलिंग ब्लाउज पहना हुआ था वाइट कलर का जिसमे उसके 20% मुम्मे साफ़ नज़र आ रहे थे. साथ hi इतनी छोटी सी निक्केर पहनी हुई थी के उसका होना न होना एक बराबर था.

रिशु का मुँह अपनी बहिन के मखमली बदन को देखकर खुला का खुला hi रह गया. गोरी चिट्टी चमड़ी. कप का साइज डी नहीं स तो होगा. और साइज तो 34 से काम नहीं था.

दूधिया रंग की चूचियां देख के रिशु की जीभ से लार टपकने लगी. उसे ऐसे बूत बना देखकर प्राची boli…bhai पानी. क्या हुआ ऐसे क्या दिख गया आपको के मुँह खुला hi रह गया आपका.

रिशु को जैसे hi होश आया वो तुरंत हरकत में आ गया और मुस्कुराते हुए bola…kuchh नहीं दीदी वो मैं कुछ सोच रहा tha…..fir बात को palat-te हुए bola…..waise मम्मी कहाँ गयी. क्या फिर किसी सहेली के यहाँ गयी हैं.

Prachi…mathe पर बल डालते hue…tumhe तो पता है उन्हें घर में तो टिकना होता नहीं है. बस किसी न किसी सहेली के यहाँ होना होता है उन्हें. तुम बैठो मैं तुम्हारे लिए मग्गी बनती हूँ.

रिशु सोफे पर बैठते हुए बोलता hai…didi अगर प्रॉब्लम न हो तो साथ में चाय भी बना देना. थोड़ा सर दर्द हो रहा है.

Prachi…abhi बनती हूँ भाई. और सर दर्द कैसे हो गया एकदम.

Rishu…kuchh नहीं दीदी वो बस आज के टॉपिक्स कुछ ज्यादा hi टोघट the..rishu ने माथे पर बल डालते हुए बोलै.

Prachi..tum बैठो थोड़ी देर मैं अभी आयी. बोलकर किचन में चली जाती है. दोनों के लिए मग्गी और चाय बना लाती है.

प्राची हमेशा निचे सोफे को पीठलगाकर एक चटाई पर बैठा करती थी. कहते कहते रिशु की नज़र अपनी बहिन के मुम्मों पर जाती है जो उससे निचे होने की वजह से अब बहुत ज्यादा रेवेअल हो रहे थे और काफी हद तक दिख रहे थे.

ये देखकर रिशु की पंत में तनाव आना शुरू हो गया. और ये तनाव लगातार बढ़ता hi जा रहा था क्यूंकि उसके गोर गोर दुधु बहुत hi प्यारे लग रहे थे रिशु को. उसका मन कर रहा था के वो उन्हें मुँह में लेकर जोर जोर से चूसे.

लड़कियों में एक खासियत होती है के कोई लड़का उनकी छाती को घूरे तो उन्हें इस बात का एहसास हो hi जाता है. अचानक प्राची ने नज़र उठाकर देखा तो पाया के रिशु उसकी और देख रहा है. बल्कि उसकी और नहीं उसके मुम्मो की और. मन hi मन तो प्राची बहुत खुश हुई पर उसने अपनी ख़ुशी रिशु के आगे जाहिर नहीं होने दी.

रिशु सकपका गया जब प्राची ने उसे उसको देखते हुए देखा. प्राची ने उससे मज़ा लेना chaha….kya बात है भाई मेरे चेहरे पर कुछ लगा है जो तुम कब से इस तरह से देख रहे हो. जब पानी दे रही थी तब भी इतना hi ध्यान से देख रहे थे.

रिशु को तो कोई जवाब hi नहीं सूझ रहा था. पर फिर उसने सोचा अगर आगे बढ़ना है तो कदम आगे बढ़ाना hi पड़ेगा ऐसे तो काम नहीं chalega…wo bola…main तो बस अपनी खूबसूरत दीदी को देख रहा हूँ.

Prachi…muskurate hue..kyun तुम्हे पहले कभी एहसास नहीं हुआ के तुम्हारी दीदी खूबसूरत है.

Rishu…masti mein…pata तो पहले से है पर दीदी जवान अभी हुई है न. इस जवानी ने मेरी दीदी को और भी खूबसूरत बना दिया है.

Prachi…ander से हिल गयी उसकी जवानी वाली बात sunkar…achha बात तो ऐसे कर रहे हो जैसे मेरे भाई नहीं बॉय फ्रेंड हो.

Rishu…ankh मरते hue…didi भाई क्या बॉय फ्रेंड नहीं हो सकता.

प्राची …उसकी जांघ पर थप्पड़ मरते hue…pagal ऐसे क्यों बोल रहा है. मेरा बॉय फ्रेंड बनेगा तू?

Rishu…ek बोल्ड कदम उठाते hue…apni बहिन के कंधे पर हाथ rakhkar…haye मैं तो कब से चाहता हूँ दीदी और इसमें हर्ज़ भी क्या है दीदी. पर हाँ अगर आपका पहले से बॉय फ्रेंड ना हो,

प्राची उसके हाथ को पकड़ लेती है और बोलती hai….mera कोई बॉय फ्रेंड नहीं है भाई. पर हाँ अगर तुम कुछ चाहते हो तो मुझे स्पेशल महसूस करवाना पड़ेगा. तभी मैं थोड़ा आगे बढ़ूंगी.

रिशु उछलकर निचे आकर अपनी दीदी से सत्कार बैठ जाता है उसके हाथ को पकड़कर अपनी गॉड में रखकर उन्हें दोनों हाथों में लेते हुए बोलता है. ठीक है दीदी मैं आज आपको स्पेशल फील करवाऊंगा. मैं शाम को आपकी फवौरीते कड़ाही पनीर की सब्जी बनाऊंगा. और फिर आपको मुझे कुछ न कुछ देना पड़ेगा.

Prachi…thik है प्रॉमिस. तू अगर ऐसा कर पाया तो तुम्हे कुछ न कुछ जरूर मिलेगा. प्राची का ध्यान रोहन के हाथों के नीचे गया जहाँ उसके लुंड ने खूब हलचल मचा राखी थी. वो मन hi मन बहुत खुश हो रही थी ये देखकर.

***************************

आज सुबह फिर से एक गेम लगी थी रोहन और रूही के बीच में. फिर से दो चिर परिचित प्रतिद्वंद्वी (कॉम्पिटिटर्स) आमने सामने थे. रोहन ने पहला पॉइंट लेकर अपना एटीएम विश्वास बढ़ा लिया था. पर आज रूही के अंदर एक अनोखा hi जोश था. वो आज ये मैच जितने के लिए hi मैदान में उत्तरी थी.

उसके अगले दोनों पॉइंट रूही के आत्मविश्वास के नाम रहे. पर फिर रोहन ने पॉइंट्स की झड़ी hi लगा दी और लगातार दस पॉइंट जीत लिए. एक बार को तो रूही डगमगा hi जाती पर मेहुल ने उसे उत्साहित करते हुए kaha…ruhi के ों तुम्हे हिम्मत नहीं हारनी ये मैच जितना है तुम्हे.



फिर तो रोहन को शटल नहीं नज़र आ रही थी. रूही पॉइंट्स पर पॉइंट्स लिए जा रही थी. पर रोहन गेम हारकर एक नया इतिहास नहीं बनाना चाहता था वो रूही के विरुद्ध अपनी जीतों को बरक़रार रखना चाहता था. इसलिए उसने भी पूरा जोर लगा दिया था मैच को जीतने के लिए. तो इस तरह दोनों के जोश और हिम्मत के सड़क ये मैच भी tie-breaker तक पहुँच गया और फिर कुछ ऐसा हुआ के रोहन देखता hi रह गया.
 
Back
Top