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- Dec 5, 2013
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Part 85सब हिसाब किताब करने के बाद रात के दो बज गए थे और अब यहाँ हॉल में सिर्फ रोहन और मेहुल hi बचे थे. देखने से hi लग रहा था के दोनों को खूब नींद आ रही थी.
रोहन मेहुल से बोलता hai…didi आपने पापा को बोलै के हमारा सोने का यहीं अरेंजमेंट है तो क्या आपने हम दोनों के लिए कोई रूम बुक किया है? अगर किया है तो जल्दी बता दो मुझे बहुत नींद आ रही है.
मेहुल मुस्कुराते हुए उसकी गाल पर एक किश करते हुए boli…bas अभी से थक गए मेरे प्यारे भाई. अभी तो तुमने कुछ किया hi नहीं है. वो उसे आंख मारकर बोलती है.
रोहन कन्फ्यूज्ड सा उसके बोल्ड रूप को देखकर बोलता hai….kya? आखिर करना क्या चाहती हो तुम दीदी?
Mehul…intzar करो भाई. इंतज़ार का फल बहुत मीठा होता है. अभी से सोने की बात कर रहे हो भाई? हो सकता है मैं तुम्हे पूरी रात न सोने दूँ. उसके गाल पर अपनी एक ऊँगली फेरती हुई मेहुल बहुत hi कामुक अंदाज़ में बोली तो अब रोहन को थोड़ा अंदाज़ा हुआ के अब शायद कुछ अच्छा होने वाला है. वैसे उसने दो बार सेक्स कर रखा था पर अभी भी उसमे इतना डैम था के अपनी इस हॉट सेक्सी और काम की देवी की पूरी रात बजा सकता था.
मेहुल ने उसे चुप रहने का इशारा किया और अपने पीछे पीछे आने को बोलै. रोहन एक आवारा कुत्ते की तरह मेहुल के पीछे पीछे हो लिया जैसे वो आवारा कुत्ता अपनी कुटिया के पीछे पीछे चलता है.
रुपाली जो के अभी कुछ हिसाब किताब लगाती दूसरी और से निकली थी उसकी नज़र इन दोनों भाई बहिन पर पड़ती है और जिस तरह से रोहन अपनी बहिन के पीछे पीछे जा रहा था उसके चेहरे पर अपने आप hi मुस्कान आ जाती है.
वो मेहुल को रोक कर उसके कान में धीरे से बोलती hai…dekho मुझे नहीं पता के तुम अपने भाई के साथ कहाँ ले जा रही हो. पर मेरा यकीं karo…chahe तुम्हारा भाई बहुत अच्छा है पर सेक्स के मामले में ये बहुत कमीना है. देखना कहीं तुम्हे….
मेहुल उसकी बात को काटकर मुस्कुराते हुए boli…just शट उप रुपाली एंड गुड नाईट.
रुपाली भी ऐसे hi…mere भाइयाँ बन गए सैयां गुनगुनाती हुई वहां से निकल जाती है. वैसे तो रोहन को नहीं पता था के इन दोनों में क्या बात हुई है पर उसे इस बात का अंदाजा तो लग गया था के रुपाली ने उसके बारे में अच्छा तो नहीं कहा होगा क्यूंकि जाते हुए वो उस पर अजीब सी नज़रों से देखती हुई मुस्कुरा रही थी और उसे आंख मार कर जाती है.
रोहन मन hi मन सोचता hai….agar मौका मिला न रुपाली तो तेरी सील तो मैं hi तोडूंगा. वैसे एक बात तो थी के रुपाली देखने में बहुत hi युम्मी सी लगती थी रोहन को और उसका मन था रुपाली की छूट लेने का. खैर अभी तो उसे ये देखना था के उसकी प्यारी बहिन मेहुल उसे कहाँ ले जा रही है.
वो उसके पीछे चलते चलते दो तीन कॉरिडोर को पार करते हुए एक रूम के बहार पहुंचे उसके दूर हैंडल के पास दो गुलाब के फूल लगे हुए थे. मुस्कुराते हुए मेहुल ने उस रूम का लॉक खोला. जहाँ तक रोहन को पता था के ये रूम उन्होंने पहले हिरे नहीं किया था. इसका मतलब इसे मेहुल ने उसके बिना रेंट पर लिया था पर क्यों? आखिर क्या चाहती है मेहुल क्या आज फिर से वो उससे अँधेरे में वो सब करेगी. पर उसका मन नहीं था आज अँधेरे में कुछ भी करने का.
वो मन hi मन सोच रहा था के अगर दीदी ने आज अँधेरे में कुछ करने को बोलै तो वो उसे साफ़ साफ़ मन कर देगा. क्यूंकि उसे उस तरह बिलकुल भी मज़ा नहीं आना था. इस तरह वो मेहुल के पीछे पीछे रूम में एंटर हुआ. मेहुल ने थोड़ा आगे जाकर बीएड से अँधेरे में hi एक ड्रेस उठाई और रोहन को देते हुए boli…bathroom से ये ड्रेस पहन कर आना और हाँ मुझे पूछ लेना के मैं रेडी हूँ या नहीं.
रोहन खीझकर bola…didi फिर से अँधेरा?
मेहुल जो के रोहन को नज़र नहीं आ रही थी मुस्कुरा रही थी boli….tum जाओ तो सही भाई जब मैं तुम्हे रूम में आने को बोलूं तो बाथरूम के बहार लगे स्विच को ों कर देना रूम की साड़ी लाइट्स ों हो जाएँगी. फिर तो कोई प्रॉब्लम नहीं है न.
रोहन मुस्कुरा कर bola…fir भला मुझे क्या दिक्कत होगी. उसने ज्यादा बहस नहीं की और ड्रेस बदलने के लिए. उसने अपने कपडे उतरे और उस ड्रेस को देखा. ये एक नाईट रॉब था फॉर में. मतलब साफ़ था के उसे ये लम्बा सा चोला पहनना है जिसके बीचो बीच तानिया लगी हुई थी और निचे कुछ भी नहीं पहनना है.
उसने देर ना करते हुए फटाफट उस ड्रेस को पहन लिया क्यूंकि उसका लुंड फिर से रेडी हो चूका था चुदाई के लिए हालाँकि वो दो बार चुदाई कर चूका था पहले से. वो एकदम से अंदर आने लगा पर उसे याद आया के उसे तो मेहुल से पूछना था. फिर वो रुक गया.
वो समझ गया था के मेहुल खुद भी कोई अच्छी सी ड्रेस पहन रही होगी. ये सोचकर उसके चेहरे पर स्माइल आ जाती है. वो आवाज़ लगता hai…didi आ जॉन क्या?
मेहुल ऊँची आवाज़ में बोलती hai…bas दो मिनट है. फिर एक मिनट के लिए सन्नाटा छ जाता है. पर एक मिनट बाद hi मेहुल की आवाज़ उसे सुनाई देती hai….aa जाओ भाई और लाइट ों कर सकते हो अब तुम.
रोहन तो कब से इंतज़ार कर रहा था इन पलों का. वो बहार आया और लाइट ों की. पर ये क्या? वो एकदम से हैरान रह गया रूम का नज़ारा देखकर. पहले तो उसे पिंक कलर के बीएड के बीचो बीच पिंक कलर की लॉन्ग निघ्त्य पहने अपनी दीदी नज़र आयी. वो आज शर्मा रही थी, हो के पहले कभी नहीं शरमाई थी उससे.
फिर इधर उधर नज़र दौड़ाई तो देखा के चरों और हार्ट शेप के बैलून्स लगे हुए थे रंग बिरंगे पर ज्यादातर रेड और गुलाबी.
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रोहन का मुँह खुला का खुला रह गया.
कमरा बिलकुल सुहागरात वाला था… laal-gulabi लाइट्स, फूलों की पट्टी बीएड पे बिखेरी हुई, दो शैम्पेन ग्लासेज साइड टेबल पे, और बीच में मेहुल… पिंक सिल्क निघ्त्य में, बिलकुल नयी दुल्हन सी… मांग में छोटा सा टीका, हाथों में लाल चूड़ा, और आँखों में शर्माती हुई वह प्यास जो रोहन ने पहले सिर्फ अँधेरे में महसूस की थी.
मेहुल ने धीरे से हाथ आगे बढ़ाया और रोहन का हाथ पकड़ कर खुद के पास खींच लिया.
“वेलकम तो आवर सुहागरात, मेरे पति…”
उसने इतनी प्यारी आवाज़ में कहा की रोहन का दिल धड़क गया.
रोहन ने उसकी कमर में हाथ दाल कर उसको अपनी तरफ खिंच लिया और सीधा उसके होठों पे अटैक कर दिया. लम्बी, गीली, वाइल्ड किश… दोनों के मुँह में एक दुसरे की साँसें घूम रही थी. मेहुल के हाथ रोहन के रोबे की डोरी पे गए और एक झटके में खोल दी… रोबे नीचे गिर गया. रोहन बिलकुल नंगा था अंदर.
मेहुल ने उसका लुंड हाथ में लिया और धीरे से से सहलाया और कान में गुंजडी,
“आज यह मेरी सुहाग की छूट में पूरा रात रहेगा… नहीं निकलेगा बहार.”
रोहन ने उसको गॉड में उठा लिया और बीएड पे लेता दिया. फूलों की पत्तियों के बीच मेहुल लेती थी जैसे कोई अप्सरा. उसने निघ्त्य के स्ट्रैप्स नीचे किये… दोनों bade-bade मुम्मे बहार आ गए… गुलाबी निप्पल्स आलरेडी टाइट.
रोहन ने पहले उनको मुँह में भर लिया… zor-zor से चूसा, काटा… मेहुल की “आअह्ह्ह… रोहण…” वाली आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी.
फिर वह नीचे आया… निघ्त्य पूरी ऊपर उठा दी… मेहुल ने अंदर कुछ नहीं पहना था. उसकी छूट बिलकुल साफ़, गीली और चमक रही थी. रोहन ने अपना मुँह लगा दिया… जीभ अंदर तक दाल कर चाटने लगा. मेहुल की कमर ऊपर उठ गयी…
“आआह भाई… आज मेरा पति बन गया… चुसस्स… पूरा अंदर डालल… हाय मर गयी!”
दस मिनट तक रोहन ने उसकी छूट को ऐसे चूसा जैसे पहली और आखरी बार मिल रही हो. मेहुल दो बार झाड़ गयी… पूरी टांग कांप रही थी.
अब मेहुल ने रोहन को पीठ के बल लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गयी. उसने लुंड को हाथ से पकड़ा, अपनी छूट पे रगड़ा और धीरे से बैठ गयी.
“ससससस… आआह्ह्ह… कितना मोटा है तेरा…”
पूरा लुंड अंदर तक चला गया. मेहुल ने आँखें बंद कर ली और upar-neeche होने लगी… dheere-dheere… फिर तेज़ी से… उसके मुम्मे zor-zor से उछाल रहे थे.
रोहन ने नीचे से कमर पकड़ कर ज़ोर के धक्के मरने शुरू कर दिए.
“छोड़ अपनी बीवी को… आज से मैं तेरी पत्नी हूँ… फाड् दे मेरी सुहाग छूट… आज पूरी रात bhar-bhar के छोड़ना मुझे!”
रोहन ने उसको पलटा… अब डोगग्य स्टाइल… मेहुल की कमर झुका दी और पीछे से पूरा लुंड एक झटके में दाल दिया.
Thap-thap-thap-thap… आवाज़ इतनी ज़ोर की थी की शायद बहार तक जा रही होगी.
मेहुल चिल्लाई, “हाँ… ऐसे hi… ज़ोर से… आज मेरी सील टूट चुकी है… अब रोज़ छोड़ना मुझे… आआह्ह्ह… झाड़ रही हूँ मैं… आआह्ह्ह्हह!”
रोहन ने उसने रोहन को नीचे लिटाया और रिवर्स काउगर्ल में बैठ गयी… अपनी गांड रोहन के मुँह की तरफ करके… तेज़ी से upar-neeche होने लगी. रोहन ने उसकी गांड के छेद पे ऊँगली रगड़ने लगा… मेहुल पागल हो गयी.
तीसरा राउंड side-position में… दोनों एक दुसरे को किश करते हुए… रोहन का लुंड andar-bahar… मेहुल की टांग उसके कंधे पे…
चारता राउंड… रोहन ने मेहुल को खड़ा किया, मिरर के सामने खड़ा कर दिया और पीछे से छोड़ने लगा… दोनों अपने आप को मिरर में देख रहे थे.
पूरा तीन घंटे… चार बार झड़े दोनों… हर बार अंदर hi… बीएड गीला हो चूका था, फूल सब बिखर गए थे.
आखिर में दोनों थक कर एक दुसरे में लिपट कर लेट गए.
मेहुल ने रोहन के सीने पे सर रख कर गुंजडी,
“आज से तू मेरा पति… मैं तेरी पत्नी… हर महीने एक सुहागरात मनाएंगे हम… प्रॉमिस?”
रोहन ने उसको किश किया और बोलै,
“हर हफ्ते… हर हफ्ते मनाएंगे… तेरी यह सुहाग छूट सिर्फ मेरी है अब.”
दोनों मुस्कुराये और एक लम्बी किश में डूब गए… बहार सुबह होने वाली थी, पर इनके लिए सुहागरात अभी ख़तम नहीं हुई थी.
रोहन मेहुल से बोलता hai…didi आपने पापा को बोलै के हमारा सोने का यहीं अरेंजमेंट है तो क्या आपने हम दोनों के लिए कोई रूम बुक किया है? अगर किया है तो जल्दी बता दो मुझे बहुत नींद आ रही है.
मेहुल मुस्कुराते हुए उसकी गाल पर एक किश करते हुए boli…bas अभी से थक गए मेरे प्यारे भाई. अभी तो तुमने कुछ किया hi नहीं है. वो उसे आंख मारकर बोलती है.
रोहन कन्फ्यूज्ड सा उसके बोल्ड रूप को देखकर बोलता hai….kya? आखिर करना क्या चाहती हो तुम दीदी?
Mehul…intzar करो भाई. इंतज़ार का फल बहुत मीठा होता है. अभी से सोने की बात कर रहे हो भाई? हो सकता है मैं तुम्हे पूरी रात न सोने दूँ. उसके गाल पर अपनी एक ऊँगली फेरती हुई मेहुल बहुत hi कामुक अंदाज़ में बोली तो अब रोहन को थोड़ा अंदाज़ा हुआ के अब शायद कुछ अच्छा होने वाला है. वैसे उसने दो बार सेक्स कर रखा था पर अभी भी उसमे इतना डैम था के अपनी इस हॉट सेक्सी और काम की देवी की पूरी रात बजा सकता था.
मेहुल ने उसे चुप रहने का इशारा किया और अपने पीछे पीछे आने को बोलै. रोहन एक आवारा कुत्ते की तरह मेहुल के पीछे पीछे हो लिया जैसे वो आवारा कुत्ता अपनी कुटिया के पीछे पीछे चलता है.
रुपाली जो के अभी कुछ हिसाब किताब लगाती दूसरी और से निकली थी उसकी नज़र इन दोनों भाई बहिन पर पड़ती है और जिस तरह से रोहन अपनी बहिन के पीछे पीछे जा रहा था उसके चेहरे पर अपने आप hi मुस्कान आ जाती है.
वो मेहुल को रोक कर उसके कान में धीरे से बोलती hai…dekho मुझे नहीं पता के तुम अपने भाई के साथ कहाँ ले जा रही हो. पर मेरा यकीं karo…chahe तुम्हारा भाई बहुत अच्छा है पर सेक्स के मामले में ये बहुत कमीना है. देखना कहीं तुम्हे….
मेहुल उसकी बात को काटकर मुस्कुराते हुए boli…just शट उप रुपाली एंड गुड नाईट.
रुपाली भी ऐसे hi…mere भाइयाँ बन गए सैयां गुनगुनाती हुई वहां से निकल जाती है. वैसे तो रोहन को नहीं पता था के इन दोनों में क्या बात हुई है पर उसे इस बात का अंदाजा तो लग गया था के रुपाली ने उसके बारे में अच्छा तो नहीं कहा होगा क्यूंकि जाते हुए वो उस पर अजीब सी नज़रों से देखती हुई मुस्कुरा रही थी और उसे आंख मार कर जाती है.
रोहन मन hi मन सोचता hai….agar मौका मिला न रुपाली तो तेरी सील तो मैं hi तोडूंगा. वैसे एक बात तो थी के रुपाली देखने में बहुत hi युम्मी सी लगती थी रोहन को और उसका मन था रुपाली की छूट लेने का. खैर अभी तो उसे ये देखना था के उसकी प्यारी बहिन मेहुल उसे कहाँ ले जा रही है.
वो उसके पीछे चलते चलते दो तीन कॉरिडोर को पार करते हुए एक रूम के बहार पहुंचे उसके दूर हैंडल के पास दो गुलाब के फूल लगे हुए थे. मुस्कुराते हुए मेहुल ने उस रूम का लॉक खोला. जहाँ तक रोहन को पता था के ये रूम उन्होंने पहले हिरे नहीं किया था. इसका मतलब इसे मेहुल ने उसके बिना रेंट पर लिया था पर क्यों? आखिर क्या चाहती है मेहुल क्या आज फिर से वो उससे अँधेरे में वो सब करेगी. पर उसका मन नहीं था आज अँधेरे में कुछ भी करने का.
वो मन hi मन सोच रहा था के अगर दीदी ने आज अँधेरे में कुछ करने को बोलै तो वो उसे साफ़ साफ़ मन कर देगा. क्यूंकि उसे उस तरह बिलकुल भी मज़ा नहीं आना था. इस तरह वो मेहुल के पीछे पीछे रूम में एंटर हुआ. मेहुल ने थोड़ा आगे जाकर बीएड से अँधेरे में hi एक ड्रेस उठाई और रोहन को देते हुए boli…bathroom से ये ड्रेस पहन कर आना और हाँ मुझे पूछ लेना के मैं रेडी हूँ या नहीं.
रोहन खीझकर bola…didi फिर से अँधेरा?
मेहुल जो के रोहन को नज़र नहीं आ रही थी मुस्कुरा रही थी boli….tum जाओ तो सही भाई जब मैं तुम्हे रूम में आने को बोलूं तो बाथरूम के बहार लगे स्विच को ों कर देना रूम की साड़ी लाइट्स ों हो जाएँगी. फिर तो कोई प्रॉब्लम नहीं है न.
रोहन मुस्कुरा कर bola…fir भला मुझे क्या दिक्कत होगी. उसने ज्यादा बहस नहीं की और ड्रेस बदलने के लिए. उसने अपने कपडे उतरे और उस ड्रेस को देखा. ये एक नाईट रॉब था फॉर में. मतलब साफ़ था के उसे ये लम्बा सा चोला पहनना है जिसके बीचो बीच तानिया लगी हुई थी और निचे कुछ भी नहीं पहनना है.
उसने देर ना करते हुए फटाफट उस ड्रेस को पहन लिया क्यूंकि उसका लुंड फिर से रेडी हो चूका था चुदाई के लिए हालाँकि वो दो बार चुदाई कर चूका था पहले से. वो एकदम से अंदर आने लगा पर उसे याद आया के उसे तो मेहुल से पूछना था. फिर वो रुक गया.
वो समझ गया था के मेहुल खुद भी कोई अच्छी सी ड्रेस पहन रही होगी. ये सोचकर उसके चेहरे पर स्माइल आ जाती है. वो आवाज़ लगता hai…didi आ जॉन क्या?
मेहुल ऊँची आवाज़ में बोलती hai…bas दो मिनट है. फिर एक मिनट के लिए सन्नाटा छ जाता है. पर एक मिनट बाद hi मेहुल की आवाज़ उसे सुनाई देती hai….aa जाओ भाई और लाइट ों कर सकते हो अब तुम.
रोहन तो कब से इंतज़ार कर रहा था इन पलों का. वो बहार आया और लाइट ों की. पर ये क्या? वो एकदम से हैरान रह गया रूम का नज़ारा देखकर. पहले तो उसे पिंक कलर के बीएड के बीचो बीच पिंक कलर की लॉन्ग निघ्त्य पहने अपनी दीदी नज़र आयी. वो आज शर्मा रही थी, हो के पहले कभी नहीं शरमाई थी उससे.
फिर इधर उधर नज़र दौड़ाई तो देखा के चरों और हार्ट शेप के बैलून्स लगे हुए थे रंग बिरंगे पर ज्यादातर रेड और गुलाबी.
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रोहन का मुँह खुला का खुला रह गया.
कमरा बिलकुल सुहागरात वाला था… laal-gulabi लाइट्स, फूलों की पट्टी बीएड पे बिखेरी हुई, दो शैम्पेन ग्लासेज साइड टेबल पे, और बीच में मेहुल… पिंक सिल्क निघ्त्य में, बिलकुल नयी दुल्हन सी… मांग में छोटा सा टीका, हाथों में लाल चूड़ा, और आँखों में शर्माती हुई वह प्यास जो रोहन ने पहले सिर्फ अँधेरे में महसूस की थी.
मेहुल ने धीरे से हाथ आगे बढ़ाया और रोहन का हाथ पकड़ कर खुद के पास खींच लिया.
“वेलकम तो आवर सुहागरात, मेरे पति…”
उसने इतनी प्यारी आवाज़ में कहा की रोहन का दिल धड़क गया.
रोहन ने उसकी कमर में हाथ दाल कर उसको अपनी तरफ खिंच लिया और सीधा उसके होठों पे अटैक कर दिया. लम्बी, गीली, वाइल्ड किश… दोनों के मुँह में एक दुसरे की साँसें घूम रही थी. मेहुल के हाथ रोहन के रोबे की डोरी पे गए और एक झटके में खोल दी… रोबे नीचे गिर गया. रोहन बिलकुल नंगा था अंदर.
मेहुल ने उसका लुंड हाथ में लिया और धीरे से से सहलाया और कान में गुंजडी,
“आज यह मेरी सुहाग की छूट में पूरा रात रहेगा… नहीं निकलेगा बहार.”
रोहन ने उसको गॉड में उठा लिया और बीएड पे लेता दिया. फूलों की पत्तियों के बीच मेहुल लेती थी जैसे कोई अप्सरा. उसने निघ्त्य के स्ट्रैप्स नीचे किये… दोनों bade-bade मुम्मे बहार आ गए… गुलाबी निप्पल्स आलरेडी टाइट.
रोहन ने पहले उनको मुँह में भर लिया… zor-zor से चूसा, काटा… मेहुल की “आअह्ह्ह… रोहण…” वाली आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी.
फिर वह नीचे आया… निघ्त्य पूरी ऊपर उठा दी… मेहुल ने अंदर कुछ नहीं पहना था. उसकी छूट बिलकुल साफ़, गीली और चमक रही थी. रोहन ने अपना मुँह लगा दिया… जीभ अंदर तक दाल कर चाटने लगा. मेहुल की कमर ऊपर उठ गयी…
“आआह भाई… आज मेरा पति बन गया… चुसस्स… पूरा अंदर डालल… हाय मर गयी!”
दस मिनट तक रोहन ने उसकी छूट को ऐसे चूसा जैसे पहली और आखरी बार मिल रही हो. मेहुल दो बार झाड़ गयी… पूरी टांग कांप रही थी.
अब मेहुल ने रोहन को पीठ के बल लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गयी. उसने लुंड को हाथ से पकड़ा, अपनी छूट पे रगड़ा और धीरे से बैठ गयी.
“ससससस… आआह्ह्ह… कितना मोटा है तेरा…”
पूरा लुंड अंदर तक चला गया. मेहुल ने आँखें बंद कर ली और upar-neeche होने लगी… dheere-dheere… फिर तेज़ी से… उसके मुम्मे zor-zor से उछाल रहे थे.
रोहन ने नीचे से कमर पकड़ कर ज़ोर के धक्के मरने शुरू कर दिए.
“छोड़ अपनी बीवी को… आज से मैं तेरी पत्नी हूँ… फाड् दे मेरी सुहाग छूट… आज पूरी रात bhar-bhar के छोड़ना मुझे!”
रोहन ने उसको पलटा… अब डोगग्य स्टाइल… मेहुल की कमर झुका दी और पीछे से पूरा लुंड एक झटके में दाल दिया.
Thap-thap-thap-thap… आवाज़ इतनी ज़ोर की थी की शायद बहार तक जा रही होगी.
मेहुल चिल्लाई, “हाँ… ऐसे hi… ज़ोर से… आज मेरी सील टूट चुकी है… अब रोज़ छोड़ना मुझे… आआह्ह्ह… झाड़ रही हूँ मैं… आआह्ह्ह्हह!”
रोहन ने उसने रोहन को नीचे लिटाया और रिवर्स काउगर्ल में बैठ गयी… अपनी गांड रोहन के मुँह की तरफ करके… तेज़ी से upar-neeche होने लगी. रोहन ने उसकी गांड के छेद पे ऊँगली रगड़ने लगा… मेहुल पागल हो गयी.
तीसरा राउंड side-position में… दोनों एक दुसरे को किश करते हुए… रोहन का लुंड andar-bahar… मेहुल की टांग उसके कंधे पे…
चारता राउंड… रोहन ने मेहुल को खड़ा किया, मिरर के सामने खड़ा कर दिया और पीछे से छोड़ने लगा… दोनों अपने आप को मिरर में देख रहे थे.
पूरा तीन घंटे… चार बार झड़े दोनों… हर बार अंदर hi… बीएड गीला हो चूका था, फूल सब बिखर गए थे.
आखिर में दोनों थक कर एक दुसरे में लिपट कर लेट गए.
मेहुल ने रोहन के सीने पे सर रख कर गुंजडी,
“आज से तू मेरा पति… मैं तेरी पत्नी… हर महीने एक सुहागरात मनाएंगे हम… प्रॉमिस?”
रोहन ने उसको किश किया और बोलै,
“हर हफ्ते… हर हफ्ते मनाएंगे… तेरी यह सुहाग छूट सिर्फ मेरी है अब.”
दोनों मुस्कुराये और एक लम्बी किश में डूब गए… बहार सुबह होने वाली थी, पर इनके लिए सुहागरात अभी ख़तम नहीं हुई थी.