Incest Story - Didi Ki Chinta - Page 11 - SexBaba
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Incest Story - Didi Ki Chinta

Part 85सब हिसाब किताब करने के बाद रात के दो बज गए थे और अब यहाँ हॉल में सिर्फ रोहन और मेहुल hi बचे थे. देखने से hi लग रहा था के दोनों को खूब नींद आ रही थी.

रोहन मेहुल से बोलता hai…didi आपने पापा को बोलै के हमारा सोने का यहीं अरेंजमेंट है तो क्या आपने हम दोनों के लिए कोई रूम बुक किया है? अगर किया है तो जल्दी बता दो मुझे बहुत नींद आ रही है.

मेहुल मुस्कुराते हुए उसकी गाल पर एक किश करते हुए boli…bas अभी से थक गए मेरे प्यारे भाई. अभी तो तुमने कुछ किया hi नहीं है. वो उसे आंख मारकर बोलती है.

रोहन कन्फ्यूज्ड सा उसके बोल्ड रूप को देखकर बोलता hai….kya? आखिर करना क्या चाहती हो तुम दीदी?

Mehul…intzar करो भाई. इंतज़ार का फल बहुत मीठा होता है. अभी से सोने की बात कर रहे हो भाई? हो सकता है मैं तुम्हे पूरी रात न सोने दूँ. उसके गाल पर अपनी एक ऊँगली फेरती हुई मेहुल बहुत hi कामुक अंदाज़ में बोली तो अब रोहन को थोड़ा अंदाज़ा हुआ के अब शायद कुछ अच्छा होने वाला है. वैसे उसने दो बार सेक्स कर रखा था पर अभी भी उसमे इतना डैम था के अपनी इस हॉट सेक्सी और काम की देवी की पूरी रात बजा सकता था.

मेहुल ने उसे चुप रहने का इशारा किया और अपने पीछे पीछे आने को बोलै. रोहन एक आवारा कुत्ते की तरह मेहुल के पीछे पीछे हो लिया जैसे वो आवारा कुत्ता अपनी कुटिया के पीछे पीछे चलता है.

रुपाली जो के अभी कुछ हिसाब किताब लगाती दूसरी और से निकली थी उसकी नज़र इन दोनों भाई बहिन पर पड़ती है और जिस तरह से रोहन अपनी बहिन के पीछे पीछे जा रहा था उसके चेहरे पर अपने आप hi मुस्कान आ जाती है.

वो मेहुल को रोक कर उसके कान में धीरे से बोलती hai…dekho मुझे नहीं पता के तुम अपने भाई के साथ कहाँ ले जा रही हो. पर मेरा यकीं karo…chahe तुम्हारा भाई बहुत अच्छा है पर सेक्स के मामले में ये बहुत कमीना है. देखना कहीं तुम्हे….

मेहुल उसकी बात को काटकर मुस्कुराते हुए boli…just शट उप रुपाली एंड गुड नाईट.

रुपाली भी ऐसे hi…mere भाइयाँ बन गए सैयां गुनगुनाती हुई वहां से निकल जाती है. वैसे तो रोहन को नहीं पता था के इन दोनों में क्या बात हुई है पर उसे इस बात का अंदाजा तो लग गया था के रुपाली ने उसके बारे में अच्छा तो नहीं कहा होगा क्यूंकि जाते हुए वो उस पर अजीब सी नज़रों से देखती हुई मुस्कुरा रही थी और उसे आंख मार कर जाती है.

रोहन मन hi मन सोचता hai….agar मौका मिला न रुपाली तो तेरी सील तो मैं hi तोडूंगा. वैसे एक बात तो थी के रुपाली देखने में बहुत hi युम्मी सी लगती थी रोहन को और उसका मन था रुपाली की छूट लेने का. खैर अभी तो उसे ये देखना था के उसकी प्यारी बहिन मेहुल उसे कहाँ ले जा रही है.

वो उसके पीछे चलते चलते दो तीन कॉरिडोर को पार करते हुए एक रूम के बहार पहुंचे उसके दूर हैंडल के पास दो गुलाब के फूल लगे हुए थे. मुस्कुराते हुए मेहुल ने उस रूम का लॉक खोला. जहाँ तक रोहन को पता था के ये रूम उन्होंने पहले हिरे नहीं किया था. इसका मतलब इसे मेहुल ने उसके बिना रेंट पर लिया था पर क्यों? आखिर क्या चाहती है मेहुल क्या आज फिर से वो उससे अँधेरे में वो सब करेगी. पर उसका मन नहीं था आज अँधेरे में कुछ भी करने का.

वो मन hi मन सोच रहा था के अगर दीदी ने आज अँधेरे में कुछ करने को बोलै तो वो उसे साफ़ साफ़ मन कर देगा. क्यूंकि उसे उस तरह बिलकुल भी मज़ा नहीं आना था. इस तरह वो मेहुल के पीछे पीछे रूम में एंटर हुआ. मेहुल ने थोड़ा आगे जाकर बीएड से अँधेरे में hi एक ड्रेस उठाई और रोहन को देते हुए boli…bathroom से ये ड्रेस पहन कर आना और हाँ मुझे पूछ लेना के मैं रेडी हूँ या नहीं.

रोहन खीझकर bola…didi फिर से अँधेरा?

मेहुल जो के रोहन को नज़र नहीं आ रही थी मुस्कुरा रही थी boli….tum जाओ तो सही भाई जब मैं तुम्हे रूम में आने को बोलूं तो बाथरूम के बहार लगे स्विच को ों कर देना रूम की साड़ी लाइट्स ों हो जाएँगी. फिर तो कोई प्रॉब्लम नहीं है न.

रोहन मुस्कुरा कर bola…fir भला मुझे क्या दिक्कत होगी. उसने ज्यादा बहस नहीं की और ड्रेस बदलने के लिए. उसने अपने कपडे उतरे और उस ड्रेस को देखा. ये एक नाईट रॉब था फॉर में. मतलब साफ़ था के उसे ये लम्बा सा चोला पहनना है जिसके बीचो बीच तानिया लगी हुई थी और निचे कुछ भी नहीं पहनना है.

उसने देर ना करते हुए फटाफट उस ड्रेस को पहन लिया क्यूंकि उसका लुंड फिर से रेडी हो चूका था चुदाई के लिए हालाँकि वो दो बार चुदाई कर चूका था पहले से. वो एकदम से अंदर आने लगा पर उसे याद आया के उसे तो मेहुल से पूछना था. फिर वो रुक गया.

वो समझ गया था के मेहुल खुद भी कोई अच्छी सी ड्रेस पहन रही होगी. ये सोचकर उसके चेहरे पर स्माइल आ जाती है. वो आवाज़ लगता hai…didi आ जॉन क्या?

मेहुल ऊँची आवाज़ में बोलती hai…bas दो मिनट है. फिर एक मिनट के लिए सन्नाटा छ जाता है. पर एक मिनट बाद hi मेहुल की आवाज़ उसे सुनाई देती hai….aa जाओ भाई और लाइट ों कर सकते हो अब तुम.

रोहन तो कब से इंतज़ार कर रहा था इन पलों का. वो बहार आया और लाइट ों की. पर ये क्या? वो एकदम से हैरान रह गया रूम का नज़ारा देखकर. पहले तो उसे पिंक कलर के बीएड के बीचो बीच पिंक कलर की लॉन्ग निघ्त्य पहने अपनी दीदी नज़र आयी. वो आज शर्मा रही थी, हो के पहले कभी नहीं शरमाई थी उससे.

फिर इधर उधर नज़र दौड़ाई तो देखा के चरों और हार्ट शेप के बैलून्स लगे हुए थे रंग बिरंगे पर ज्यादातर रेड और गुलाबी.

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रोहन का मुँह खुला का खुला रह गया.

कमरा बिलकुल सुहागरात वाला था… laal-gulabi लाइट्स, फूलों की पट्टी बीएड पे बिखेरी हुई, दो शैम्पेन ग्लासेज साइड टेबल पे, और बीच में मेहुल… पिंक सिल्क निघ्त्य में, बिलकुल नयी दुल्हन सी… मांग में छोटा सा टीका, हाथों में लाल चूड़ा, और आँखों में शर्माती हुई वह प्यास जो रोहन ने पहले सिर्फ अँधेरे में महसूस की थी.

मेहुल ने धीरे से हाथ आगे बढ़ाया और रोहन का हाथ पकड़ कर खुद के पास खींच लिया.

“वेलकम तो आवर सुहागरात, मेरे पति…”

उसने इतनी प्यारी आवाज़ में कहा की रोहन का दिल धड़क गया.

रोहन ने उसकी कमर में हाथ दाल कर उसको अपनी तरफ खिंच लिया और सीधा उसके होठों पे अटैक कर दिया. लम्बी, गीली, वाइल्ड किश… दोनों के मुँह में एक दुसरे की साँसें घूम रही थी. मेहुल के हाथ रोहन के रोबे की डोरी पे गए और एक झटके में खोल दी… रोबे नीचे गिर गया. रोहन बिलकुल नंगा था अंदर.

मेहुल ने उसका लुंड हाथ में लिया और धीरे से से सहलाया और कान में गुंजडी,

“आज यह मेरी सुहाग की छूट में पूरा रात रहेगा… नहीं निकलेगा बहार.”

रोहन ने उसको गॉड में उठा लिया और बीएड पे लेता दिया. फूलों की पत्तियों के बीच मेहुल लेती थी जैसे कोई अप्सरा. उसने निघ्त्य के स्ट्रैप्स नीचे किये… दोनों bade-bade मुम्मे बहार आ गए… गुलाबी निप्पल्स आलरेडी टाइट.

रोहन ने पहले उनको मुँह में भर लिया… zor-zor से चूसा, काटा… मेहुल की “आअह्ह्ह… रोहण…” वाली आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी.

फिर वह नीचे आया… निघ्त्य पूरी ऊपर उठा दी… मेहुल ने अंदर कुछ नहीं पहना था. उसकी छूट बिलकुल साफ़, गीली और चमक रही थी. रोहन ने अपना मुँह लगा दिया… जीभ अंदर तक दाल कर चाटने लगा. मेहुल की कमर ऊपर उठ गयी…

“आआह भाई… आज मेरा पति बन गया… चुसस्स… पूरा अंदर डालल… हाय मर गयी!”

दस मिनट तक रोहन ने उसकी छूट को ऐसे चूसा जैसे पहली और आखरी बार मिल रही हो. मेहुल दो बार झाड़ गयी… पूरी टांग कांप रही थी.

अब मेहुल ने रोहन को पीठ के बल लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गयी. उसने लुंड को हाथ से पकड़ा, अपनी छूट पे रगड़ा और धीरे से बैठ गयी.

“ससससस… आआह्ह्ह… कितना मोटा है तेरा…”

पूरा लुंड अंदर तक चला गया. मेहुल ने आँखें बंद कर ली और upar-neeche होने लगी… dheere-dheere… फिर तेज़ी से… उसके मुम्मे zor-zor से उछाल रहे थे.

रोहन ने नीचे से कमर पकड़ कर ज़ोर के धक्के मरने शुरू कर दिए.

“छोड़ अपनी बीवी को… आज से मैं तेरी पत्नी हूँ… फाड् दे मेरी सुहाग छूट… आज पूरी रात bhar-bhar के छोड़ना मुझे!”

रोहन ने उसको पलटा… अब डोगग्य स्टाइल… मेहुल की कमर झुका दी और पीछे से पूरा लुंड एक झटके में दाल दिया.

Thap-thap-thap-thap… आवाज़ इतनी ज़ोर की थी की शायद बहार तक जा रही होगी.

मेहुल चिल्लाई, “हाँ… ऐसे hi… ज़ोर से… आज मेरी सील टूट चुकी है… अब रोज़ छोड़ना मुझे… आआह्ह्ह… झाड़ रही हूँ मैं… आआह्ह्ह्हह!”

रोहन ने उसने रोहन को नीचे लिटाया और रिवर्स काउगर्ल में बैठ गयी… अपनी गांड रोहन के मुँह की तरफ करके… तेज़ी से upar-neeche होने लगी. रोहन ने उसकी गांड के छेद पे ऊँगली रगड़ने लगा… मेहुल पागल हो गयी.

तीसरा राउंड side-position में… दोनों एक दुसरे को किश करते हुए… रोहन का लुंड andar-bahar… मेहुल की टांग उसके कंधे पे…

चारता राउंड… रोहन ने मेहुल को खड़ा किया, मिरर के सामने खड़ा कर दिया और पीछे से छोड़ने लगा… दोनों अपने आप को मिरर में देख रहे थे.

पूरा तीन घंटे… चार बार झड़े दोनों… हर बार अंदर hi… बीएड गीला हो चूका था, फूल सब बिखर गए थे.

आखिर में दोनों थक कर एक दुसरे में लिपट कर लेट गए.

मेहुल ने रोहन के सीने पे सर रख कर गुंजडी,

“आज से तू मेरा पति… मैं तेरी पत्नी… हर महीने एक सुहागरात मनाएंगे हम… प्रॉमिस?”

रोहन ने उसको किश किया और बोलै,

“हर हफ्ते… हर हफ्ते मनाएंगे… तेरी यह सुहाग छूट सिर्फ मेरी है अब.”


दोनों मुस्कुराये और एक लम्बी किश में डूब गए… बहार सुबह होने वाली थी, पर इनके लिए सुहागरात अभी ख़तम नहीं हुई थी.
 
Part 86सुबह के 8 बज रहे थे.

दोनों अभी भी बीएड पे नंगे लिपटे हुए सोये से जागे थे. पसीना, लव बिट्स, और एक दुसरे के माल से दोनों के बदन चमक रहे थे. बीएड की चादर एक तरफ सर्कि हुई थी, फूल सब कुचले हुए.

मेहुल ने अपना फ़ोन उठाया और रूही को वीडियो कॉल लगा दी.

रूही ने तीसरी रिंग पे पिक किया. उसका चेहरा स्क्रीन पे आते hi चमक उठा.

रूही: “अरे वह! दोनों नंगे बैठ के कॉल कर रहे हो? लगता है रात भर खूब मज़ा लिया!”

मेहुल ने शर्माते हुए भी नॉटी स्माइल दी और रोहन के सीने पे सर रख कर बोली,

“हाँ रूही… कल रात हमारी पूरी सुहागरात हो गयी. तेरा भाई ने मुझे चार बार छोड़ा… और हर बार अंदर hi झाड़ा. मेरी सील टूट चुकी है अब… अब से मैं तेरी भाभी हूँ.”

रोहन ने कैमरा के सामने अपना लुंड थोड़ा हिलाया और बोलै,

“देख रूही, अभी भी खड़ा है तेरा भाई. तेरी दीदी ने इतना मज़ा दिया की नींद hi नहीं आयी पूरी रात.”

रूही की आँखें भर आयी ख़ुशी से. उसकी आवाज़ कम्प गयी,

“मैं बहुत खुश हूँ दीदी… सच में. मुझे तो लगा मेरा नंबर कभी नहीं आएगा, पर तुम दोनों ने जो किया, वह देख कर दिल को सुकून मिल रहा है. अब बस जल्दी घर आओ… मुझे भी अपने भाई से अपनी सुहागरात माननी है.”

मेहुल ने कैमरा को अपने लव बिट्स दिखाए (गले पे, मुम्मों पे, जाँघों पे) और बोली,

“देख रूही… तेरे भाई ने मुझे पूरा निशाँ लगा दिया है. अब तू भी तैयार रह… तेरी बारी भी जल्दी आएगी. मैं खुद तुझे सजाके भाई के पास भेजूंगी.”

रूही ने शर्मा कर नज़रें झुका ली और धीरे से बोली,

“बस अब जल्दी आओ… मैं इंतज़ार कर रही हूँ. और हाँ… अगली सुहागरात तीनों साथ मनाएंगे… प्रॉमिस?”

रोहन और मेहुल एक साथ हंस पड़े.

रोहन: “पक्की बात. अब हर महीने एक सुहागरात… कभी तेरी, कभी मेहुल दीदी की, कभी तीनो साथ.”

रूही ने फ्लाइंग किश दी और कॉल काट दी.

मेहुल ने फ़ोन साइड पे रखा और रोहन के ऊपर चढ़ गयी,

“अब सुबह का पहला राउंड भी तो बनता है न, मेरे पति?”

रोहन ने उसकी कमर पकड़ ली और बोलै,

“चल, अब सीधा बाथरूम में… शावर के नीचे छोडूंगा तुझे… फिर घर चलते हैं… रूही इंतज़ार कर रही होगी.”

दोनों हंस पड़े और एक दुसरे को किश करते हुए बाथरूम की तरफ बढे… सुहागरात अभी ख़तम नहीं हुई थी, बस नयी शुरुआत होने वाली थी.

बाथरूम का दरवाज़ा बंद होते hi मेहुल ने शावर ों कर दिया.

Garama-garam पानी ऊपर से बरसने लगा, दोनों के बदन पे गिरता हुआ नीचे जा रहा था.

मेहुल ने रोहन को दीवार से टिकाया, उसके गले पे पानी डालते हुए धीरे से कान में गुंजडी,

“अभी तक अंदर तेरी गरमी महसूस कर रही हूँ… अब यह शावर भी तुझे ठंडा नहीं कर पायेगा.”

रोहन ने उसकी कमर पकड़ कर पलट दिया और पीछे से चिपक गया.

उसका सख्त लुंड मेहुल की गांड की दरार में घुस गया, पानी के साथ साथ रगड़ने लगा.

मेहुल ने अपना हाथ पीछे करके रोहन का लुंड पकड़ा और अपनी छूट पे सेट कर दिया.

पानी के नीचे hi रोहन ने एक ज़ोर का धक्का मारा… पूरा लुंड एक बार में अंदर.

“आआह्ह्ह्हह… रोहणं…!”

मेहुल की चीख बाथरूम में गूँज गयी, गूँज के वापस आयी.

रोहन ने उसकी कमर को पकड़ कर तेज़ी से धक्के मरने शुरू कर दिए.

पानी ऊपर से बरस रहा था, दोनों के बदन चिपके हुए थे, हर धक्के के साथ “phach-phach-phach” की आवाज़ आ रही थी.

मेहुल ने अपना एक हाथ आगे बढ़ाया और गिलास की दीवार पे टिक लिया, दूसरा हाथ पीछे करके रोहन की गांड पकड़ लिया, और ज़ोर से दबाया.

“छोड़… और ज़ोर से… ऐसे hi… मेरी suhaag-chut को रगड़… हाय!”

रोहन ने उसके बाल पकड़ के सर पीछे खींच लिया और गले पे काटने लगा.

पानी के नीचे उसका मुँह मेहुल के कान पे, गले पे, कंधे पे… हर जगह निशाँ छोड़ रहा था.

फिर उसने मेहुल को घुमाया, उसकी एक टांग उठा के अपने कंधे पे रख दी और सीधा अंदर दाल दिया.

अब दोनों face-to-face थे… पानी उनके चेहरे पे गिर रहा था, आँखों में, मुँह में… दोनों एक दुसरे को देख कर पागल हो रहे थे.

मेहुल की आँखें बंद, मुँह खुला हुआ,

“ाः… ाः… ाः… मर गयी… कितना गहरा जा रहा है… रोहन… आज पूरी अंदर तक भर दे मुझे!”

रोहन ने स्पीड और बढ़ा दी… हर धक्का इतना ज़ोर का की मेहुल की पीठ गिलास से टकरा रही थी.

उसके मुम्मे पानी के साथ उछाल रहे थे… रोहन ने एक हाथ से उनको मसलता रहा, दुसरे से टांग पकड़ के और ऊपर उठाया.

मेहुल झड़ने लगी… उसकी छूट ने लुंड को इतना जकड लिया की रोहन भी कण्ट्रोल नहीं कर पाया…

“आआह मेहुल… ले पूरा… अंदर…!”

दोनों एक साथ झाड़ गए… गरम माल पानी के साथ नीचे बहने लगा.

पर अभी ख़तम नहीं हुआ.

रोहन ने मेहुल को नीचे बिठा दिया.

मेहुल समझ गयी… उसकी नज़रों से… उसने पानी के नीचे hi लुंड मुँह में ले लिया… zor-zor से चूसने लगी.

रोहन का हाथ उसके सर पे, बाल पकड़ के मुँह छोड़ने लगा…

“चूस… पूरी रात तेरी छूट मारी… अब मुँह मारूंगा तेरा…”

मेहुल के मुँह से “glug-glug-glug” की आवाज़ आ रही थी… वह दो बार गले तक ले रही थी.

दो मिनट बाद रोहन ने उसके मुँह में hi झाड़ दिया… मेहुल ने एक बूँद भी बहार नहीं गिरने दी… सब पी गयी.

दोनों सांस फूलते हुए एक दुसरे से लिपट गए… पानी अभी भी बरस रहा था.

मेहुल ने रोहन के होठ पे लम्बी किश की और गुंजडी,

“अब हर सुबह ऐसे hi नहाएंगे हम… तेरी बीवी बन गयी हूँ मैं… अब रोज़ तेरी हूँ.”

रोहन ने उसको गॉड में उठा लिया और बोलै,

“चल अब बैडरूम में… अभी भी सूखा नहीं पाएंगे… और एक राउंड बाकी है अभी.”



दोनों हंस पड़े और बाथरूम से नंगे hi बैडरूम की तरफ भागे… पूरा कमरा अभी भी उनकी सुहागरात की खुशबू से भरा था.
 
Part 87Room-service की बेल्ल बजी.

रोहन ने बिलकुल नंगा hi टॉवल भी नहीं लिया, सीधा दरवाज़ा खोला.

सामने एक 22-23 साल की लड़की कड़ी थी, होटल यूनिफार्म में: वाइट शर्ट, ब्लैक शार्ट स्कर्ट, पोनीटेल. नाम टैग पे लिखा था – पारी.

पारी ने ट्रे देखा, फिर रोहन का खड़ा लुंड देखा, आँखें फैल गयी और चेहरा लाल हो गया.

“सर… कुछ पेहेन लेते आप… मैं खाना सर्वे कर देती…”

रोहन ने दरवाज़ा पूरा खोल दिया और मेहुल की तरफ इशारा किया जो बीएड पे नंगी hi चलनी ओढ़े बैठी थी, मुम्मे बहार, छूट पे सिर्फ एक पिलो.

“फ़िक्र न करो, छूट है मेरे पास मारने के लिए. तुम मत डरो, तुम्हारी नहीं मारूंगा… अभी.”

तीनो ज़ोर से हंस पड़े.

पारी ने शर्माते हुए ट्रे अंदर रखा और बोली,

“सर, मैं छूट मारवाने से नहीं डर्टी… पर अभी मैडम का हक़ है न,” और मेहुल की तरफ देखा.

मेहुल bread-butter उठाते हुए हंस पेयी,

“न बाबा, और नहीं! पूरी रात chud-chud के थक गयी हूँ. तुम्हारी इच्छा है तो तुम मारवा लो, पारी.”

रोहन पीछे से पारी के पास गया, उसकी शार्ट स्कर्ट एक हाथ से ऊपर उठा दिया, पंतय साइड करके अपना मोटा लुंड उसकी गांड की दरार में रगड़ने लगा.

“खाना कपडे उतार के सर्वे करो… अच्छी टिप मिलेगी.”

पारी ने मुस्कुराते हुए एक hi झटके में शर्ट के बटन खोल दिए, ब्रा के साथ स्कर्ट और पंतय भी नीचे.

दो सेकंड में वह बिलकुल नंगी ट्रे उठाये कड़ी थी – chhoti-chhoti चूचियां, टाइट गांड, बिलकुल clean-shaved छूट.

मेहुल ने विस्सल मारी, “वह पारी बेबी… फुल सर्विस देती है होटल!”

पारी ने ट्रे बीएड पे रखा, फिर घुटनो पे बैठ गयी और रोहन का लुंड मुँह में ले लिया.

एक बार पूरा गले तक लेके छोड़ दिया, लार से गीला करके कड़ी हो गयी.

“ब्रेकफास्ट सर्वे कर रही हूँ सर…”

वह प्लेट में bread-butter, आमलेट, जूस सब मेहुल के सामने रखती गयी.

रोहन पीछे से उसकी कमर पकड़ के लुंड छूट पे रगड़ रहा था.

जब पारी झुक कर जूस ग्लास रख रही थी, रोहन ने एक ज़ोर का धक्का मारा – पूरा लुंड अंदर तक.

“आआह्ह्ह… सिर्रर्र…!” पारी की चीख निकल गयी, ट्रे हिल गया.

मेहुल ने हंस के पारी के मुम्मे पकड़ लिए और सहलाने लगी,

“अरे धीरे… धीरे… अभी तो ब्रेकफास्ट भी नहीं किया तूने.”

रोहन ने पीछे से स्पीड पकड़ ली – thap-thap-thap… हर धक्के से पारी के छोटे मुम्मे aage-peeche हिल रहे थे.

पारी के मुँह से सिर्फ “ाः… ाः… ाः…” निकल रहा था.

मेहुल ने अपना ब्रेड काट के पारी के मुँह में डाला,

“खा बेबी… एनर्जी चाहिए होगी… तेरा कस्टमर बहुत वाइल्ड है.”

पारी ब्रेड चूसती रही और पीछे से चुदती रही.

दो मिनट बाद उसकी टाँगे कांपने लगी, उसने ट्रे साइड पे रखा और बीएड का किनारा पकड़ लिया.

“सर… ाः… झाड़ रही हूँ मैं… आआह्ह्ह्ह!”

रोहन ने उसकी कमर और ज़ोर से पकड़ी और teen-chaar ज़ोर के धक्के मारे… अंदर hi झाड़ गया.

पारी सांस फूलते हुए बीएड पे गिर पेयी.

मेहुल ने उसके चेहरे पे किश किया और बोली,

“वेलकम तो थे क्लब, पारी. अब हर संडे आ जाना… तीनो मिलकर मज़े करेंगे.”

रोहन ने टिप निकल के पारी के छूट पे रख दिया (पांच हज़ार का नोट), फिर उसको गॉड में उठा के शावर में ले गया.

मेहुल भी peeche-peeche चली गयी,

“चलो अब तीनो साथ नहाएंगे… और ब्रेकफास्ट के बाद ब्रंच भी हो जायेगा!”

दरवाज़ा बंद हुआ और अंदर से फिर वही “phach-phach” और तीनो की hansi-gunj सुनाई देने लगी.

शावर का दरवाज़ा बंद होते hi तीनो अंदर थे:

रोहन बीच में, मेहुल उसके लेफ्ट, पारी राइट.

ऊपर से garam-garam पानी बरस रहा था, स्टीम ने पूरा बाथरूम छुपा लिया था.

रोहन ने पहले मेहुल को दीवार से टिकाया और उसके होठ पे एक गहरी किश की.

पानी उनके मुँह में जा रहा था, दोनों एक दुसरे की जीभ चूस रहे थे.

पारी पीछे से रोहन से चिपक गयी – उसके chhote-chhote मुम्मे रोहन की पीठ पे रगड़ रहे थे, हाथ नीचे जा के लुंड को सेहला रही थी.

मेहुल ने हंस के पारी के बाल पकडे और उसको आगे खींच लिया.

अब दोनों लड़कियां रोहन के सामने घुटनो पे बैठ गयी.

पानी के नीचे तीनो के चेहरे गीले, बाल चिपके हुए.

मेहुल ने पहले लुंड मुँह में लिया – गले तक लेके चूसने लगी.

पारी नीचे से गोते चूस रही थी.

रोहन के मुँह से सिर्फ “हाय… फुककक…” निकल रहा था.

फिर दोनों लड़कियां एक दुसरे को किश करने लगी – रोहन का लुंड बीच में, दोनों जीभों से चाट रही थी.

रोहन ने मेहुल को खड़ा किया, उसकी एक टांग उठा के शावर रोड पे रख दी और पीछे से छूट में दाल दिया.

मेहुल की चीख गूँज गयी, “आआह… अभी भी इतना मोटा है तेरा!”

पारी नीचे बैठी मेहुल की छूट और रोहन के लुंड को जीभ से चाटने लगी – हर धक्के के साथ उसकी जीभ क्लीट पे लग रही थी.

मेहुल पागल हो गयी, “पारी… ाः… तू भी ऊपर आ…!”

पारी कड़ी हुई, मेहुल ने उसको पलटा और उसकी छूट पे मुँह लगा दिया.

रोहन पीछे से मेहुल को छोड़ रहा था, मेहुल पारी की छूट चाट रही थी – तीनो एक चैन बन गए.

पानी के नीचे सब गीला, सब गरम.

रोहन ने पारी को गॉड में उठा लिया – उसकी दोनों टाँगे अपनी कमर पे लपेट दी – और khada-khada छोड़ने लगा.

पारी की चीखें, “सर… आआह… बहुत गहरा… पहाड़ डोज आज!”

मेहुल पीछे से रोहन के गोते चूस रही थी, ऊँगली उसकी गांड में दाल रही थी.

पारी झाड़ गयी – उसका पानी रोहन के लुंड पे गिर रहा था.

रोहन ने उसको नीचे उतरा और मेहुल को झुका दिया – अब डोगग्य में मेहुल को छोड़ने लगा, पारी नीचे बैठ के दोनों के बीच जीभ फेर रही थी.

मेहुल चिल्लाई, “रोहन… अंदर… आज भर दे मुझे… पारी बेबी तू भी ले लेगी बाद में!”

रोहन ने ज़ोर के तीन धक्के मारे और मेहुल के अंदर झाड़ गया.

मेहुल का बदन कांपने लगा.

अब तीसरा राउंड शुरू – पारी को दीवार से टिकाया, रोहन ने उसकी गांड में दाल दिया.

पारी की चीख निकल गयी, “आआह सर… गांड में पहली बार… धीरे… आआह्ह्ह!”

मेहुल नीचे बैठी पारी की छूट में दो उँगलियाँ दाल के andar-bahar कर रही थी.

रोहन गांड मार रहा था, मेहुल छूट – पारी बीच में पागल हो रही थी.

पांच मिनट बाद पारी दो बार झाड़ गयी, उसकी टाँगे कांप रही थी.

आखिर में रोहन ने पारी को नीचे बिठा दिया – दोनों लड़कियां घुटनो पे – और तेज़ी से लुंड हिलने लगा.

मेहुल और पारी ने मुँह खोल के इंतज़ार किया.

रोहन झाड़ा – garam-garam माल दोनों के मुँह पे, चेहरे पे, मुम्मों पे गिरने लगा.

दोनों ने एक दुसरे को देख के हंसना शुरू कर दिया और सारा माल choos-choos के साफ़ कर दिया.

तीनो सांस फूलते हुए एक दुसरे से लिपट गए.

पानी अभी भी बरस रहा था.

मेहुल ने रोहन के कान में गुंजडी,

“अब हर संडे ऐसे नहाएंगे… पारी बेबी को भी स्टाफ में दाल लेंगे.”

पारी ने शर्मा के किश किया और बोली,

“सर… मैडम… नेक्स्ट संडे से मेरा ऑफ कैंसिल कर दीजिये… मैं फ्री सर्विस दूंगी.”

तीनो ज़ोर से हंस पड़े और शावर बंद करके बैडरूम की तरफ नंगे hi भागे – बीएड अभी भी गरम था, और तीनो का मूड अभी भी पूरा गरम.

शावर का गिलास अंदर से पूरा भाप से धुंदला चूका था.

पानी इतना गरम था के स्टीम ने पूरा बाथरूम नर्क बना दिया था.

रोहन ने मेहुल को सीधा दीवार से ज़बरदस्ती टिकाया, उसके दोनों हाथ ऊपर उठा के एक हाथ से जकड लिए, दुसरे हाथ से उसकी गर्दन दबायी और मुँह में इतनी वाइल्ड किश की के मेहुल की सांस रुक गयी.

उसके होठ काट रहा था, जीभ अंदर तक दाल के चूस रहा था.

पारी पीछे से रोहन के लुंड को पकड़ के अपनी छूट पे रगड़ रही थी, पर उसने एक ज़ोर का थप्पड़ पारी की गांड पे मारा,

“घुटनो पे बैठ कुटिया… दोनों!”

दोनों लड़कियां एक साथ घुटनो पे बैठ गयी, पानी उनके चेहरे पे ज़ोर से गिर रहा था.

रोहन ने लुंड पीछे खींच के मेहुल के मुँह में पूरा दाल दिया, गले तक.

मेहुल की आँखों से पानी निकल आया, वह “glug-glug-glug” कर रही थी, लार नीचे गिर रही थी.

पारी नीचे से गोटों को मुँह में लेके चूस रही थी, हाथ से लुंड हिलाते हुए.

रोहन ने बाल पकड़ के मेहुल का सर पीछे खींचा और पारी के मुँह में दाल दिया, अब पारी गले तक ले रही थी.

दोनों के मुँह से लार टपक रही थी, आँखें लाल हो चुकी थी.

फिर रोहन ने मेहुल को खड़ा किया, उसको पलटा, दीवार से टिकाया और एक hi झटके में गांड में पूरा लुंड दाल दिया.

मेहुल की चीख पूरे बाथरूम में गूँज गयी, “आआह माँ मर गयी… पहाड़ दी तूने आज!”

रोहन ने कमर पकड़ के ज़बरदस्ती धक्के मरने शुरू कर दिए, हर धक्का इतना ज़ोर का की मेहुल का चेहरा गिलास से टकरा रहा था.

पारी नीचे बैठी मेहुल की छूट में तीन उँगलियाँ दाल के zor-zor से andar-bahar कर रही थी.

मेहुल रो रही थी और चिल रही थी, “रोहन… छोड़… पहाड़ दे… तेरी कुटिया हूँ मैं… आआह्ह्ह्ह!”

रोहन ने लुंड निकला, पारी को गॉड में उठाया, उसकी दोनों टाँगे फैला के khada-khada छूट में दाल दिया और गिलास पे टिकक के छोड़ने लगा.

पारी की चीखें, “सर… आआह… बहुत मोटा… पहात जाएगी… आआह्ह्ह!”

मेहुल पीछे से रोहन के गोते चूस रही थी, ऊँगली उसकी गांड में दाल के andar-bahar कर रही थी.

रोहन ने पारी को नीचे उतरा, उसको झुका दिया, और गांड में दाल दिया.

पारी की चीख निकल गयी, “आआह सर… पहली बार… पहाड़ दो आज… आआह्ह्ह!”

मेहुल नीचे बैठी पारी की छूट में मुँह लगा के ज़ोर से चूसने लगी.

रोहन गांड मार रहा था, मेहुल छूट – पारी बीच में पागल हो रही थी, उसका बदन कांप रहा था.

पारी झाड़ गयी, उसका पानी ज़ोर से नीचे गिरने लगा.

रोहन ने लुंड निकला, दोनों लड़कियों को घुटनो पे बिठा दिया, बाल पकड़ के मुँह खोलवाया और तेज़ी से लुंड हिलने लगा.

“ले सालियों… पियो पूरा!”

Garama-garam माल दोनों के मुँह में, चेहरे पे, आँखों पे, बालों पे गिरने लगा.

दोनों ने मुँह खोल के सारा पिया, बाकी एक दुसरे के मुँह से चाट के साफ़ किया.

तीनो सांस फूलते हुए एक दुसरे से लिपट गए.

पानी अभी भी बरस रहा था, पर तीनो के बदन अभी भी जल रहे थे.

मेहुल ने रोहन के कान में गुंजडी,

“अब हर संडे ऐसे hi नहाएंगे… और अगली बार रूही को भी लाएंगे… chaar-chaar लोग मिलकर तुझे ठोकेंगी.”

रोहन ने दोनों को ज़ोर से जकड लिया और बोलै,

“अभी तो शुरुआत है… आज घर नहीं जा रहा कोई… पूरा दिन छोडूंगा दोनों को.”



तीनो ज़ोर से हंस पड़े और शावर बंद करके बैडरूम की तरफ नंगे hi भागे, बीएड अभी भी गरम था, और तीनो का मूड अभी भी पूरा गरम.
 
Part 88कुछ देर बाद, दोपहर के दो बज चुके थे.

रोहन और मेहुल ने फाइनली नहाकर कपडे पहने (मेहुल अभी भी चलते हुए थोड़ी लड़खड़ा रही थी, उसकी आँखों में एक अलग सी चमक थी).

कार में बैठते हुए मेहुल ने रोहन के कान में गुंजडी,

“घर पहुँचते hi रूही को बोल देना… उसकी बारी सिर्फ चाँद दिनों की मेहमान है.”

घर पहुंचे तो अभी भी कुछ दूर के रिश्तेदार और मेहमान बैठकर गप्पे मार रहे थे.

रूही drawing-room के एक कोने में chup-chaap बैठी थी, चेहरा थोड़ा उदास, पीरियड की वजह से उसका मूड ऑफ था.

जैसे hi रोहन अंदर आया, रूही ने उसको देखा और नज़रें झुका ली.

रोहन सीधा उसके पास गया, सबके सामने hi उसको अपनी बाहों में भर लिया और गले लगा कर धीमे से कान में बोलै,

“रूही… मेरी जान… सुन.

जिस दिन तेरे पीरियड ख़तम होंगे, उसी रात तेरी सुहागरात होगी.

मैं खुद तुझे सजाके, तेरे कमरे में आऊंगा… और तेरी सील भी मैं hi तोडूंगा… इतना प्यार से, इतना वाइल्ड… के तू ज़िन्दगी भर याद रखेगी.”

रूही की आँखों में आंसू आ गए, पर चेहरे पे बड़ी सी स्माइल भी.

उसने रोहन के गले में बाहें दाल दी और सबके सामने hi ज़ोर से किश कर दिया उसके गाल पे.

मेहुल साइड से मुस्कुराते हुए बोली,

“हाँ रूही… और मैं खुद तुझे तैयार करुँगी… तेरे लिए भी वैसा hi laal-gulabi कमरा सजायेंगे.”

रूही शर्मा गयी, पर ख़ुशी से उसका चेहरा चमक उठा.

रोहन ने उसके माथे पे किश किया और बोलै,

“बस 4-5 दिन… फिर तेरी बारी… तीनो साथ में सुहागरात मनाएंगे. प्रॉमिस.”

रूही ने धीरे से “थैंक यू भैया…” बोलै और मेहुल को भी झप्पी दे दी.

हॉल में बैठी बुज़ुर्गो ने देखा तो मुस्कुरा दिए, समझ गए कुछ तो बात है, पर कहा कुछ नहीं.

और तीनो के दिल में एक hi बात थी:

अब सिर्फ काउंटडाउन शुरू था… रूही की पहली सुहागरात का.

*****************************************************************

रोहन मेहमानों से थक कर थोड़ी देर के लिए ऊपर अपने रूम में जा रहा था.

गैलरी से होता हुआ जब वह अपने कमरे की तरफ जा रहा था, तब उसने देखा:

नेहा एक साइड वाले छोटे गेस्ट रूम के दरवाज़े के पास कड़ी थी. रोहन हैरान रह गया क्यूंकि उसके हिसाब से तो नेहा कबकी जा चुकी थी. फिर वो अब यहाँ क्या कर रही है. खैर वो ध्यान से देखता है.

दरवाज़ा अंदर से बंद था, पर नीचे से हल्का सा धुआं निकल रहा था.

रोहन चुपके से पास गया और दरवाज़े के झिरी से अंदर देखा.

नेहा अकेली थी.

उसने सिगरेट नहीं, सीधा गांजा जॉइंट फूंक रही थी, bade-bade काश लेके, आँखें लाल, बाल खुले, टॉप का स्ट्राप नीचे सरका हुआ था.

उसके पास एक छोटा सा स्पीकर बजा रहा था, स्लो म्यूजिक.

रोहन ने एक पल सोचा, फिर फ़ोन निकाला, साइलेंट मोड पे किया और वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दी.

क्लियर शॉट था: नेहा का चेहरा, जॉइंट मुँह में, धुआं छोड़ती हुई, आँखें बंद करके मज़े ले रही थी.

30-40 सेकंड का क्लिप बनाया, ज़ूम करके चेहरा और जॉइंट दोनों क्लियर आये.

फिर चुपके से वापस मुद गया.

दिल में एक नॉटी स्माइल थी.

“सोचा था सिर्फ रूही और मेहुल दीदी hi मज़े देंगी… अब नेहा बेबी, तेरी भी टिकट काट गयी अब.

जब मौका मिलेगा, यह वीडियो दिखा के तेरी छूट और गांड दोनों मारूंगा.”

फ़ोन पॉकेट में डालते हुए वह अपने रूम में चला गया.

अब उसके पास एक नया तोय था, और एक नयी गेम शुरू होने वाली थी.

**************************************************************

रोहन सीधा रूही के कमरे में घुस गया, दरवाज़ा अंदर से बंद किया.

रूही बीएड पे बैठी फ़ोन चला रही थी. उसने रोहन को देखा तो शर्मा के स्माइल दी.

रोहन बीएड पे बैठा, पंत की ज़िप खोलते हुए बोलै,

“बीटा रूही… सकिंग करेगी क्या? बहुत तालाब लगी है सेक्स की… नेहा को गांजा फूंकते देख कर लुंड खुद hi खड़ा हो गया.”

रूही ने फ़ोन साइड पे रखा, आँखों में शैतानी भरी मुस्कान आ गयी.

“अन्य्तिमे भाई… तेरी छोटी बहिन हमेशा रेडी है.”

उसने एक सेकंड में रोहन की पंत और अंडरवियर नीचे कर दी.

लुंड पूरा खड़ा, टोपा लाल, नीचे से गीला हो रहा था.

रूही घुटनो पे बैठ गयी, दोनों हाथ से लुंड पकड़ा, ऊपर देखते हुए बोली,

“नेहा दीदी ने तुझे गरम कर दिया? अब तेरी रूही ठंडा करेगी.”

फिर उसने जीभ निकल के टोपा पे एक लम्बी चाट मारी, फिर मुँह में ले लिया और गले तक दाल दिया.

रोहन की “सससस… हाय रूही…” आवाज़ निकल गयी.

उसने रूही के सर पे हाथ रख के धीरे धीरे मुँह छोड़ने लगा.

रूही ने zor-zor से चूसना शुरू किया, कभी गले तक लेके, कभी बहार निकाल के लार लगा के, कभी गोटों को मुँह में भर के.

रोहन आँखें बंद किये मज़े ले रहा था,

“बस ऐसे hi… तेरी नेहा दीदी को भी ऐसे hi चूसने बोलूंगा एक दिन… आआह… रूही… तू नंबर ओने है!”

रूही ने मुँह से निकाल के लुंड पे थप्पड़ मारा और बोली,

“जब तक पीरियड हैं, तब तक मुँह से hi खुश रखूंगी तुझे… पीरियड ख़तम होते hi छूट भी दे दूंगी.”

फिर दोबारा मुँह में ले लिया और इतनी तेज़ी से चूसने लगी की रोहन की कमर कम्पनी लगी.

दो मिनट बाद रोहन ने रूही के सर को ज़ोर से दबाया और गले में hi झाड़ गया…

रूही ने एक बूँद भी बहार नहीं होने दी, सब पी गयी, फिर लुंड साफ़ करके किश किया.

रोहन ने उसको गॉड में उठा के किश किया,

“मेरी जान… अब सिर्फ teen-chaar दिन… फिर तेरी छूट भी मारूंगा, गांड भी मारूंगा.”

रूही ने शर्मा के उसके सीने पे सर रख दिया,

“जल्दी ख़तम हो जाये पीरियड… तेरी छोटी बहिन तड़प रही है तेरे लिए.”

दोनों हंस पड़े और एक दुसरे में लिपट गए.

रोहन का लुंड अभी भी थोड़ा खड़ा था… रूही ने हाथ से सहलाते हुए बोलै,

“एक राउंड और?”

रोहन ने मुस्कुराते हुए सर हिलाया… गेम अभी ख़तम नहीं हुआ था.

******************************************

रोहन रूही के मुँह से लुंड निकालते हुए बोलै,

“अरे यार… नेहा तो सुबह hi वापस जा चुकी थी न? अब ये कैसे आ गयी?”

रूही ने लार से गीला लुंड हाथ में पकडे हुए हंस दी,

“सुबह गयी थी भाई, लेकिन ऑफिस की इम्पोर्टेन्ट फाइल्स और लैपटॉप बैग यहीं भूल गयी थी. मौसी ने फ़ोन किया तो वापस आना पड़ा. अब दो दिन बाद उसकी ट्रैन है… तब तक यहीं रुकेगी.”

रोहन की आँखें चमक उठी,

“मतलब… दो पूरे दिन और दो रातें?”

रूही ने लुंड पे एक छोटी सी किश करके नॉटी स्माइल दी,

“तुम्हे तो बस छूट चाहिए न? टेंशन न ले… मैं इंतज़ाम करती हूँ.”

उसने फ़ोन उठाया और अपनी सहेली नितिका को कॉल लगा दी.

कॉल पिक होते hi रूही सीधा बोली,

“नीतू… मेरा भाई अभी तेरे घर आ रहा है.

तू उसे कैसे भी करके अपने रूम में ले जाना…

और जितनी बार कहे, दो बार, तीन बार, चार बार… उसको अपनी छूट दे देना.

समझी? आज उसका मूड बहुत गरम है.”

नितिका साइड से हंस के बोली, “अरे बस इतनी सी बात? भेज दे… मैं तो कब से इंतज़ार कर रही थी!”

रूही ने कॉल काट कर रोहन की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए बोली,

“तेरी छूट का सॉलिड इंतज़ाम हो गया भाई…

नितिका अकेली है घर पे, mummy-papa बहार गए हैं.

जा, आज पूरा दिन उसकी ले… जब तक दिल भरे तब तक.”

रोहन ने रूही को खींच कर ज़ोर से किश किया,

“मेरी शेरनी बहिन… लव यू!”

फिर पंत ऊपर करके, फ़ोन पॉकेट में डालते हुए बोलै,

“मैं अभी निकलता हूँ… रात को देर से आऊंगा.”

रूही ने दरवाज़े तक छोड़ते हुए कान में गुंजडी,

“और हाँ… नितिका की गांड भी मार देना… वो बहुत टाइम से बोल रही थी.”

रोहन हंस पड़ा और सीधा कार में बैठ के नितिका के घर निकल गया…

दिल में बस एक hi ख्याल: आज छूट का पूरा दोसे मिलने वाला था.

****************************************

नितिका के घर पहुँचते hi दरवाज़ा खुला था.

उसने सिर्फ एक छोटी सी ब्लैक crop-top और low-waist डेनिम शॉर्ट्स पहना था, अंदर bra-panty दोनों नहीं.

बाल खुले, लिप्स पे डार्क रेड लिपस्टिक, आँखों में काजल… सीधा “fuck-me” लुक.

रोहन ने दरवाज़ा बंद किया और एक सेकंड में उसको दीवार से सत्ता दिया.

“कितने दिन से बोल रही थी न तू… आज ले ले पूरा.”

नितिका ने हंस के उसके लोअर का नाडा खींचा और नीचे कर दिया.

लुंड बहार आते hi उसने मुँह में ले लिया और गले तक दाल दिया.

रोहन ने उसके सर को पकड़ के 30 सेकंड में मुँह छोड़ दिया, फिर उसको गॉड में उठा लिया.

सीधा बैडरूम में ले गया.

बीएड पे फ़ेंक कर शॉर्ट्स एक झटके में उतर दिया.

नितिका की छूट बिलकुल गीली, clean-shaved, क्लीट पे छोटी सी पियर्सिंग चमक रही थी.

रोहन ने उसकी दोनों टाँगे कंधे पे रख दी और सीधा पूरा लुंड अंदर दाल दिया.

नितिका की चीख निकल गयी,

“आआह रोहन… पहाड़ दिया तूने… कितना मोटा है रे तेरा!”

रोहन ने स्पीड पकड़ ली – thap-thap-thap-thap… बीएड हिल रहा था.

नितिका के मुम्मे crop-top के अंदर से बहार आ गए थे, वह खुद उनको मसल रही थी.

पहला राउंड 8 मिनट में ख़तम – रोहन ने उसकी छूट में hi झाड़ दिया.

नितिका कांप रही थी, “अभी से इतना… और कितना मरेगा?”

रोहन ने पलटा दिया – डोगग्य स्टाइल.

नितिका की कमर झुका के कड़ी हो गयी, रोहन ने पीछे से गांड पे दो ज़ोर के थप्पड़ मारे और लुंड गांड में दाल दिया.

नितिका चिल्लाई, “आआह माँ… पहली बार… धीरे… आआह्ह्ह!”

रोहन ने धीरे शुरू किया फिर तेज़ी से गांड मारने लगा.

नितिका के मुँह से सिर्फ “हाँ… पहाड़… आज गांड भी दे दूंगी” निकल रहा था.

दूसरा राउंड गांड में ख़तम – रोहन ने अंदर hi भर दिया.

तीसरा राउंड – नितिका ऊपर चढ़ गयी.

उसने रिवर्स काउगर्ल में लुंड लिया और तेज़ी से उछलने लगी.

रोहन नीचे से धक्के मार रहा था, हाथ से उसकी पियर्सिंग वाली क्लीट रगड़ रहा था.

नितिका तीन बार झाड़ गयी – हर बार ज़ोर से चीख के.

आखिर में उसने रोहन के ऊपर hi गिर के सांस ली.

चौथा राउंड – बाथरूम में.

शावर के नीचे khada-khada, नितिका की एक टांग ऊपर, रोहन ने छूट में दाल के छोड़ते हुए मिरर के सामने खड़ा रखा.

दोनों अपने आप को देख रहे थे – नितिका के मुम्मे उछाल रहे थे, रोहन का लुंड andar-bahar.

पांच मिनट बाद दोनों साथ झाड़ गए – रोहन ने छूट में hi भर दिया.

आखिर में दोनों बीएड पे गिर गए.

नितिका सांस फूलते हुए बोली,

“रूही ने सही बोलै था… तू सच में मॉन्स्टर है… अब हर हफ्ते आया कर… मेरी छूट और गांड दोनों तेरी हैं.”

रोहन ने उसके होठ पे किश किया और बोलै,

“पक्का… अब तो परमानेंट मेम्बरशिप हो गया तेरा.”

दोनों हंस पड़े और थोड़ी देर ऐसे hi लिपट के लेते रहे…

रोहन का फ़ोन विबरते किया – रूही का मैसेज:

“कितने राउंड हो गए? वीडियो भेज.”

रोहन ने मुस्कुराते हुए कैमरा ों किया और नितिका को किश करते हुए रिकॉर्ड करने लगा.


***************************
 
Part 89रात के 2 बज रहे थे.

रोहन पानी पीने गैलरी से गुज़र रहा था की नेहा के रूम से halki-halki आवाज़ें आयी.

खिड़की थोड़ी खुली थी, पर्दा भी साइड में हटा हुआ था.

उसने चुपके से अंदर देखा.

नेहा बिलकुल नंगी बीएड पे बैठी थी, दोनों टाँगे फैला के.

फ़ोन स्टैंड पे टिकाया हुआ था, वीडियो कॉल चल रही थी.

उसका लैपटॉप भी खुला था, स्क्रीन पे एक लड़का नंगा बैठा लुंड हिला रहा था.

नेहा ने एक सिगरेट (छोटा सा जॉइंट) अपनी छूट में अंदर तक घुसा रखा था, सिर्फ फ़िल्टर बहार दिखाई दे रहा था.

वह dheere-dheere andar-bahar कर रही थी और कैमरा को दिखा रही थी.

लड़का उधर से बोल रहा था,

“नेहा बेबी… और अंदर दाल… कितनी गीली है तेरी छूट… ाः… जल्दी दिखा!”

नेहा ने जॉइंट छूट से निकाला, उसपे उसका पानी चमक रहा था, उसको मुँह में दाल के बड़ा सा काश लिया और धुआं छोड़ते हुए बोली,

“अब देख… अभी तेरा लुंड hi अंदर जायेगा… ाः… जल्दी झाड़ मेरे लिए!”

रोहन का लुंड एकदम खड़ा हो गया.

उसने चुपके से फ़ोन निकाला और पूरा सन रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया, ज़ूम करके छूट में जॉइंट, धुआं, लड़के का नंगा बदन, सब क्लियर आ रहा था.

नेहा अब तीन उँगलियाँ छूट में दाल के zor-zor से andar-bahar कर रही थी और चिल्लाई,

“ाः… जल्दी… मैं आ रही हूँ… तू भी झाड़… आआह्ह्ह्ह!”

दोनों तरफ से झड़ने की आवाज़ें आयी.

नेहा बीएड पे गिर गयी, जॉइंट मुँह में दाल के धुआं उड़ाती रही.

रोहन ने 4-5 मिनट का फुल हद वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, नेहा का चेहरा, छूट, जॉइंट, लड़के का लुंड, सब बिलकुल क्लियर.

वह चुपके से वापस अपने रूम में आ गया, दिल zor-zor से धड़क रहा था.

दिल में सिर्फ एक hi बात थी:

“नेहा बेबी… अब तो तेरी छूट पक्की है.

कल सुबह वीडियो दिखाऊंगा… फिर देखना कैसे खुद कपडे उतारेगी तू.”

रोहन मुस्कुरा के बीएड पे लेट गया, फ़ोन साइड में रख कर…

अब उसके पास नेहा की छूट मारने का सॉलिड प्रूफ था.

************************************************

सुबह के 11 बज रहे थे.

मेहमान अब काम हो गए थे, घर में सिर्फ क्लोज फॅमिली बची थी.

रोहन चुपके से मेहुल के कमरे में गया.

मेहुल अभी भी निघ्त्य में थी, बाल खुले, चेहरे पे सुहागरात की चमक अभी बाकि थी.

रोहन ने पॉकेट से एक छोटा सा रेड वेलवेट बॉक्स निकाला और मेहुल के सामने रख दिया.

“ये तेरी सुहागरात का तोहफा… मेरी बीवी के लिए.”

मेहुल ने बॉक्स खोला, अंदर पुरे गोल्ड के हैवी झुमके थे, जिसमे chhote-chhote डायमंड्स लगे हुए थे.

उसकी आँखें चमक उठी,

“रोहण… ये तो बहुत कॉस्टली होंगे!”

रोहन ने उसके कान में पहनते हुए बोलै,

“तू मेरी बीवी है… तेरे लिए तो जान भी दे दूंगा.”

मेहुल ख़ुशी से उसके गले लग गयी, फिर खुद दौड़ कर अपने ड्रावर से एक बड़ा सा बॉक्स ले आयी.

“अब मेरी बारी… मेरा पति भी तो गिफ्ट डेसेर्वे करता है!”

उसने बॉक्स खोला, अंदर एक प्रीमियम रोलेक्स थी, ब्लैक डायल, गोल्डन बेज़ेल, बिलकुल क्लासी.

रोहन हैरान रह गया,

“अरे मेहुल… ये तो बहुत ज़्यादा हो गया!”

मेहुल ने खुद उसकी वृस्त पे पहनते हुए शर्मा के बोली,

“तू मेरी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा तोहफा है… इसके सामने कुछ भी काम है.”

दोनों एक दुसरे को देखते रहे, फिर ज़ोर से लिपट गए.

मेहुल ने कान में गुंजडी,

“अब ये झुमके सिर्फ तब पहनूंगी… जब तू मुझे छोड़ने आएगा… और तू ये वाच तब पहना… जब मेरी छूट में होगा तेरा लुंड.”

रोहन ने उसको बीएड पे धकेल दिया और बोलै,

“अभी तरय करते हैं दोनों तोहफे…”

मेहुल हंस पेयी और बोली,

“लॉक कर दरवाज़ा… तेरी बीवी रेडी है.”

कमरे में फिर वही “thap-thap” और मेहुल की “ाः… रोहन…” वाली आवाज़ें गूंजने लगी…

तोहफे तो सिर्फ बहाना थे, असली तोहफा तो एक दूसरा hi था.

*******************************************

दरवाज़ा लॉक होते hi रोहन ने मेहुल को पलंग के किनारे पे बैठा दिया.

गोल्ड के झुमके अभी उसके कानों में झूल रहे थे, हर हरकत में चमक रहे थे.

रोहन ने उसकी निघ्त्य के स्ट्रैप्स धीरे से नीचे किये… निघ्त्य नीचे गिर गयी.

मेहुल के bade-bade मुम्मे एकदम खुल्ले, निप्पल्स आलरेडी टाइट.

रोहन ने एक निप्पल मुँह में लिया और ज़ोर से चूसा, दुसरे को उँगलियों से मसला.

मेहुल की सांस तेज़ी से चलने लगी,

“आआह… रोहन… धीरे… अभी तो अभी पहने हैं झुमके…”

रोहन ने उसको सीधा लिटाया, दोनों टाँगे फैला दी और सीधा मुँह लगा दिया छूट पे.

जीभ अंदर तक दाल के चाटने लगा, क्लीट को ज़ोर से चूसा.

मेहुल की कमर ऊपर उठ गयी, उसने रोहन के बाल पकड़ लिए,

“हाय… मेरा पति… ऐसे hi… पूरा खा जा मेरी छूट को… आआह!”

दस मिनट तक रोहन ने छूट को ऐसे चूसा की मेहुल दो बार झाड़ गयी, बीएड पे गीला डेरा बन गया.

फिर रोहन खड़ा हुआ, अपना लोअर उतरा.

लुंड पूरा खड़ा, टोपा लाल, गीला.

मेहुल ने खुद हाथ बढ़ा के लुंड पकड़ा और मुँह में ले लिया, गले तक.

रोहन ने उसके सर को पकड़ के मुँह छोड़ने लगा,

“चूस बीवी… आज से हर सुबह ऐसे hi छूट और मुँह दोनों मरूंगा तेरा.

फिर उसने मेहुल को घोड़ी बनाया, पीछे से लुंड एक झटके में पूरा अंदर दाल दिया.

मेहुल की चीख निकल गयी,

“आआह माँ… कितना मोटा है… फाड् दे आज!”

रोहन ने कमर पकड़ के तेज़ी से धक्के मरने शुरू कर दिए,

Thap-thap-thap-thap… हर धक्के से झुमके झूल रहे थे, आवाज़ आ रही थी.

मेहुल चिल्लाई,

“हाँ पति… ज़ोर से… तेरी बीवी की छूट फाड्… आज से रोज़ छोड़ना मुझे!”

रोहन ने पोजीशन बदली… मेहुल को ऊपर चढ़ाया.

मेहुल खुद उछलने लगी, मुम्मे zor-zor से उछाल रहे थे, रोलेक्स रोहन की वृस्त पे चमक रही थी.

मेहुल तेज़ी से upar-neeche होने लगी,

“ाः… देखो… तेरी वाच… तेरी बीवी के छूट में ग़ुस्से हुए देख रही है… आआह झाड़ रही हूँ मैं!”

तीन बार झड़ने के बाद रोहन ने उसको पलटा, मिशनरी में दाल दिया और zor-zor के धक्के मारे.

आखिर में दोनों साथ झाड़ गए, रोहन ने पूरा माल छूट के अंदर भर दिया.

दोनों सांस फूलते हुए लिपट गए.

मेहुल ने झुमके छुए और गुंजडी,

“ये झुमके अब सिर्फ तेरे लुंड के सामने झूलेंगे… प्रॉमिस.”

रोहन ने उसके माथे पे किश किया,

“और ये रोलेक्स सिर्फ तब पहनूंगा जब तेरी छूट अंदर होगी.”

दोनों हंस पड़े और एक दुसरे में डूब गए…

कमरे में सिर्फ उनकी साँसें और झुमकों की हलकी सी खनक गूंज रही थी.

************************************************************************

शाम के करीब 7:30 बजे थे.

घर में अब सिर्फ कुछ लोग बचे थे, ज़्यादातर लोग apne-apne कमरों में चले गए थे.

रोहन पानी का गिलास लेने गैलरी से गुज़र रहा था की नेहा के रूम से फिर वही halki-halki आवाज़ें आयी.

दरवाज़ा अंदर से बंद था, लेकिन खिड़की का पर्दा थोड़ा सा साइड था और side-window खुली थी.

रोहन चुपके से पास गया और अंदर देखा, उसका लुंड एक सेकंड में खड़ा हो गया.

नेहा बिलकुल नंगी बीएड पे लेती थी, दोनों टाँगे पूरी फैला के.

एक हाथ में पिंक वाइब्रेटर था, फुल स्पीड पे ों, वह उसको छूट में andar-bahar कर रही थी, क्लीट पे रगड़ रही थी.

दूसरे हाथ से अपने bade-bade मुम्मे zor-zor से दबा रही थी, निप्पल्स को खिंच रही थी.

फ़ोन स्टैंड पे रखा था, वीडियो कॉल चल रही थी.

उसका बॉयफ्रेंड उधर नंगा बैठा लुंड हिला रहा था और बोल रहा था,

“नेहा… और ज़ोर से दाल… दिखा कितनी गीली है तेरी छूट… ाः… जल्दी!”

नेहा की आँखें बंद थी, मुँह खुला हुआ,

“आआह… बेबी… देख… वाइब्रेटर अंदर तक जा रहा है… तू होता तो अब तक फाड् देता मेरी छूट… ाः… झाड़ रही हूँ मैं!”

वाइब्रेटर की बुजजिंग आवाज़ और नेहा की “ाः… ाः…” की चीखें साफ़ सुनाई दे रही थी.

रोहन ने बिना देर किये फ़ोन निकाला, साइलेंट मोड पे किया और पूरा सन रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया.

ज़ूम करके वाइब्रेटर छूट में andar-bahar, मुम्मे दबाते हुए, बॉयफ्रेंड का नंगा लुंड, सब क्रिस्टल क्लियर आ रहा था.

नेहा झाड़ गयी, उसका पानी वाइब्रेटर पे टपक रहा था, वह ज़ोर से चिल्लाई,

“आआह… बेबी… आ गया… आ गया मेरा!”

उसका बॉयफ्रेंड भी झाड़ गया और कॉल काट दी.

नेहा वाइब्रेटर साइड पे रखा, सांस फूलते हुए लेट गयी, पसीना से तरी हुई.

रोहन ने 6 मिनट का फुल हद वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, अब उसके पास नेहा की दो सॉलिड वीडियोस थी: गांजा वाली + वाइब्रेटर वाली.

वह चुपके से वापस मुद गया, दिल zor-zor से धड़क रहा था.

दिल में सिर्फ एक hi बात थी:

“नेहा… अब तो तेरी छूट, गांड, मुँह, सब मेरे हैं.

आज रात hi वीडियो दिखाऊंगा… फिर देखना कैसे खुद आ के लेट जाएगी तू मेरे नीचे.”

रोहन अपने रूम में गया, फ़ोन बीएड पे रखा और मुस्कुरा दिया.

किस्मत सच में उसके साथ थी, और अब नेहा की किस्मत भी बदलने वाली थी.

*****************************************************

रोहन सीधा नेहा के दरवाज़े पे पहुंचा और धीमी आवाज़ में बोलै,

“नेहा दीदी…”

अंदर से एकदम हड़बड़ाहट भरी आवाज़ आयी,


“भाई… रुको… मैं बाथरूम में hoon!”a
 
Part 90

Bhagdad-bhagdad की आवाज़ें आयी… कपडे पहनने की, पानी की, फिर 30 सेकंड बाद दरवाज़ा खुला.

नेहा ने jaldi-jaldi वाइट पंजाबी सूट पहना था (salwar-kameez, दुपट्टा कंधे पे डाला हुआ), बाल अभी गीले थे, चेहरा लाल, सांस थोड़ी तेज़्ज़.

उसने दरवाज़ा थोड़ा सा खोला और शर्मा के बोली,

“क्या हुआ भाई…?”

रोहन ने मुस्कुराते हुए अंदर की तरफ देखा और सीधा बोलै,

“दीदी… अंदर आने को नहीं बोलोगी?”

नेहा कन्फ्यूज्ड हो गयी, एक पल को सोचा फिर साइड हैट गयी,

“आ… आजा…”

रोहन अंदर घुस गया और दरवाज़ा अंदर से धीमे से बंद कर दिया.

नेहा अभी भी थोड़ी हड़बड़ाई हुई थी, वाइट पंजाबी सूट में दुपट्टा कंधे पे डाला हुआ, बाल गीले, चेहरा लाल.

रोहन सीधे बीएड की तरफ गया और बोलै,

“दीदी, कुछ काम था आपसे… बैठो न बीएड पे.”

नेहा कन्फ्यूज्ड थी, फिर भी धीरे से बीएड के किनारे पे बैठ गयी.

रोहन उसके बिलकुल बगल में, सात कर बैठा, इतना पास की दोनों के कंधे टकरा रहे थे.

नेहा ने थोड़ी साइड हटी, पर रोहन ने धीरे से उसके कंधे पे हाथ रख दिया और बिलकुल धीमी, गरम आवाज़ में बोलै,

“दीदी… हम दोनों में कुछ हो सकता है…

मुझे लगता है आप भी यही चाहती हैं…”

नेहा एकदम से हैरान रह गयी, आँखें badi-badi हो गयी, मुँह खुला रह गया.

उसने पल भर के लिए रोहन को देखा, फिर नज़रें झुका ली, सांस तेज़ हो गयी,

“K…kya कह रहे हो रोहन… ये… ये क्या बात कर रहे हो…”

पर उसकी आवाज़ में डर से ज़्यादा एक अजीब सी बेचैनी थी, जैसे दिल zor-zor से धड़क रहा हो.

रोहन का हाथ अभी भी उसके कंधे पे था, धीरे से सहलाता हुआ,

“बास एक बार तरय करके देखो दीदी… आपको बुरा नहीं लगेगा… प्रॉमिस.”

नेहा ने कुछ नहीं बोलै, बस सांस लेने की आवाज़ तेज़ होती जा रही थी…

कमरे में एक अजीब सी ख़ामोशी छ गयी थी, सिर्फ दोनों की तेज़ सांसें सुनाई दे रही थी.

नेहा के दिमाग में एक बिजली सी दौड़ गयी.

अचानक उसको याद आया, ये बुआ का बीटा है… अपना छोटा भाई… और ये उसकी छूट लेने की बात कर रहा है!

उसने एक झटके में रोहन का हाथ झटक दिया और गुस्से से आँखें लाल कर के बोली,

“ये तुम क्या कह रहे हो रोहन?!

इसका मतलब… मतलब तुमने सच में शानू के साथ गलत काम किया है?!”

रोहन अभी भी बिलकुल शांत, मुस्कुराता हुआ उसके पास आया.

उसने धीरे से नेहा के चेहरे से गीले बाल पीछे किये और पीछे किये, उसके माथे पे एक हलकी सी किश की,

फिर नज़रें मिलते हुए उसके होंठों के बिलकुल पास आया और धीमी आवाज़ में बोलै,

“हाँ दीदी… शानू ने मुझे छूट दी है…

और अब आपको भी देनी पड़ेगी.”

इतना कहते hi उसने अपने होंठ नेहा के होंठों से सत्ता दिए.

नेहा के बदन में एक झटका लगा, उसने पहले धक्का देने की कोशिश की, पर रोहन ने उसकी कमर पकड़ ली और किश गहरी कर दी…

रोहन का एक हाथ नेहा की कमर से ऊपर उठा और सीधा उसके वाइट कमीज के ऊपर से उसके bade-boobe पे रख दिया.

ज़ोर से दबाया, जैसे हक़ जताते हुए.

नेहा के मुँह से एक हलकी सी सिसकी निकली, “रोहण…!”

पर आवाज़ में गुस्सा काम और बेचैनी ज़्यादा थी.

रोहन ने दूसरा हाथ नीचे सरका दिया, सलवार के नाड़े को एक झटके में खोला और हाथ अंदर दाल दिया.

पंतय के ऊपर से hi छूट पे ऊँगली फेरने लगा, गीली महसूस हुई तो मुस्कुराया.

नेहा के बदन में बिजली दौड़ गयी.

उसको गुस्सा बहुत आ रहा था, दिमाग चिल्लाया की धक्का दो, थप्पड़ मारो, चिल्लाओ,

पर उसका जिस्म बिलकुल सुस्त पद गया था, जैसे उसकी मर्ज़ी hi नहीं चल रही थी.

रोहन ने बूब को ज़ोर से मसलते हुए उसके कान में गुंजडा,

“देखा दीदी… छूट तो पहले से hi गीली हो चुकी है… गुस्सा मत दिखाओ… सच बोलो, यही चाहती थी न?”

नेहा के होंठ कांप रहे थे, आँखें बंद हो गयी थी, सांस tez-tez चल रही थी…

वह न “हाँ” बोल प् रही थी, न “न”.

बस वही बैठी रही, बदन thar-tharata हुआ, रोहन के हाथों के नीचे पिघलती हुई.

नेहा एकदम से कड़ी हो गयी, चेहरा लाल, आँखें badi-badi,

“रोहन! बद्तमीज़! तेरी हिम्मत कैसे हुई ऐसा करने की?!”

रोहन बिलकुल शांत, मुस्कुराता हुआ उसका हाथ पकड़ा और एक hi झटके में अपनी गॉड में बिठा लिया.

नेहा के हिप्स उसके लुंड पे आ गए, सख्त महसूस होते hi उसकी सांस रुक गयी.

रोहन ने उसके कान में गुंजडा,

“मेरी जान… अगर ज़रा सी भी आवाज़ निकलेगी या शोर मचाओगी, नुकसान सिर्फ तुम्हारा होगा.

अभी सलवार का नाडा खोलो और छूट के दर्शन करवाओ…

वैसे भी मैं तो पहले hi कर चूका हूँ.”

नेहा हैरान होकर, “कब किये…?”

रोहन ने फ़ोन निकाला, पहली वीडियो प्ले की,

गांजा जॉइंट छूट में डालते हुए, धुआं छोड़ते हुए, पूरा चेहरा क्लियर.

नेहा का चेहरा सफ़ेद पद गया, बदन ढीला पद गया, जैसे साड़ी ताकत निकल गयी हो.

रोहन ने मौके का फायदा उठाया, उसकी वाइट कमीज दोनों हाथों से ऊपर उठा दी,

निचे ब्रा नहीं थी, दोनों bade-bade मुम्मे एकदम खुल्ले.

उसने एक निप्पल मुँह में ले लिया और ज़ोर से चूसने लगा, दुसरे को उँगलियों से मसलने लगा.

नेहा के मुँह से सिर्फ एक हलकी सी सिसकी निकली, “रोहण… नहीं…”

पर उसने धक्का नहीं दिया, बस आँखें बंद कर ली और गॉड में hi बैठ गयी…

बदन अभी भी thar-thara रहा था, पर अब डर और बेचैनी दोनों साथ चल रहे थे.

रोहन ने फ़ोन उठाया और पहले गांजा वाली वीडियो चलायी, फिर वाइब्रेटर वाली.

दोनों में नेहा का चेहरा, छूट, आवाज़ें, सब crystal-clear.

नेहा का चेहरा देखने लायक था, सफ़ेद से लाल, फिर बिलकुल सफ़ेद.

रोहन ने सलवार का नाडा एक झटके में खोल दिया, सलवार नीचे गिरा दी, पंतय भी उतर के साइड फ़ेंक दी.

नेहा की छूट अब बिलकुल नंगी, गीली चमक रही थी.

रोहन खुद खड़ा हुआ, t-shirt और लोअर उतर के फेंका, लुंड पूरा खड़ा उसके मुँह के सामने कर दिया.

नेहा ने पहले हाथ से लुंड परे किया और गुस्से में बोली,

“हरामी! तेरा ये मुँह में लेने की बजाये… मैं चाहती हूँ तू मेरी वीडियो का इस्तेमाल कर ले… बस मुझे छोड़ दे!”

रोहन ने ज़ोर से हंस दिया,

“ठीक है मेरी जान… अभी सबको उठाकर drawing-room में प्रोजेक्टर लगा देता हूँ…

तेरी दोनों फिल्म चलाएंगे बड़ी स्क्रीन पे… बुआ, मां, सब देख लेंगे.”

नेहा को लगा जैसे ज़मीन खिसक गयी.

उसकी self-respect, इज़्ज़त, सब एक सेकंड में याद आ गया.

उसने कुछ पल सोचा, सांस तेज़ चल रही थी, फिर धीरे से हाथ बढ़ाया, रोहन का लुंड पकड़ा,

और बिना कुछ बोले मुँह में ले लिया.

रोहन ने उसके सर पे हाथ रखा और धीरे से धक्का मारा,

“हाँ दीदी… ऐसे hi… चूस… अब से रोज़ चूसना पड़ेगा… वर्ण फिल्म रिलीज़ हो जाएगी.”

नेहा की आँखों में आंसू आ गए, पर उसने मुँह andar-bahar करना शुरू कर दिया,

zor-zor से चूसने लगी, गले तक लेके, लार टपकने लगी.

रोहन आँखें बंद किये मज़े ले रहा था,

“वह नेहा दीदी… कितना अच्छा मुँह है तेरा… अब छूट और गांड भी मिलेगी जल्दी hi.”

नेहा बस चुपचाप चूसती रही…

अब उसके पास कोई रास्ता नहीं बचा था.

रोहन ने नेहा के सर को धीरे से पीछे धकेला, लुंड मुँह से निकलवाया और उसको बीएड पे लिटाया.

नेहा के बदन में अभी भी थरथराहट थी, आँखें बंद, सांस तेज़.

रोहन उसके ऊपर चढ़ गया, दोनों टाँगे हाथों से पकड़ कर पूरी चौड़ी कर दी, घुटने तक मोड़ दिए.

नेहा की छूट बिलकुल खुल गयी, गीली, लाल, अंदर तक दिखाई दे रही थी.

रोहन ने पहले झुक कर मुँह लगा दिया, जीभ अंदर तक दाल के zor-zor से चाटने लगा.

नेहा की कमर अकड़ गयी,

“आआह… रोहन… नहीं… आआह्ह्ह…”

पर आवाज़ में अब विरोध नहीं, सिर्फ मजबूरी और मज़ा मिला हुआ था.

रोहन ने 4-5 मिनट तक छूट चूसी, क्लीट को चूसा, दो उँगलियाँ अंदर दाल के andar-bahar किया, नेहा दो बार झाड़ गयी, पानी बीएड पे गिरने लगा.

फिर रोहन खड़ा हुआ, अपना मोटा लुंड हाथ में लिया, टोपा नेहा की छूट पे रगड़ा,

“अब ले दीदी… तेरा भाई तुझे छोड़ने जा रहा है.”

नेहा ने आँखें बंद कर ली, सिर्फ हलके से सर हिलाया.

रोहन ने एक hi ज़ोर का धक्का मारा, पूरा लुंड एक बार में अंदर तक घुस गया.

नेहा की चीख निकल गयी,

“ाआअह माँ… पहात गयी… बहुत मोटा है तेरा… आआह!”

रोहन ने स्पीड पकड़ ली, मिशनरी में hi तेज़ी से धक्के मरने लगा.

हर धक्के के साथ बीएड हिल रहा था, नेहा के मुम्मे upar-neeche उछाल रहे थे.

रोहन ने दोनों मुम्मों को पकड़ के मसलते हुए छोड़ता रहा,

“ले दीदी… अब से तेरी छूट मेरी… रोज़ छोडूंगा तुझे… आआह कितनी गरम है तेरी छूट!”

नेहा के मुँह बंद किये मज़े ले रही थी, अब उसने खुद hi टाँगे और चौड़ी कर दी,

“आआह… रोहन… धीरे… आआह… हाँ ऐसे hi… झाड़ रही हूँ मैं… आआह्ह्ह!”

नेहा तीन बार झाड़ चुकी थी, उसका पानी रोहन के लुंड पे टपक रहा था.

रोहन ने स्पीड और बढ़ा दी, बीएड की चद्दर खिंच गयी,

“ले नेहा दीदी… अब अंदर भर देता हूँ… तेरी छूट में अपना माल दाल देता हूँ!”

नेहा ने बस “आआह… दाल…” बोलै और उसकी कमर thar-tharane लगी.

रोहन ने 8-10 ज़ोर के धक्के मारे और अंदर hi garam-garam माल छोड़ दिया.

नेहा का बदन एक बार फिर कांप उठा, उसने रोहन को जकड लिया.

दोनों सांस फूलते हुए एक दुसरे पे गिर गए.

रोहन ने उसके माथे पे किश किया और गुंजडा,

“अब से तू मेरी रंडी है… जब मर्ज़ी बुलाऊंगा, आ जाएगी… समझी?”

नेहा ने आँखें बंद किये सर हिला दिया…

उसकी हार पूरी हो चुकी थी.

रोहन अपना लुंड नेहा की छूट से धीरे से निकाला, माल से गीला, अभी भी सख्त खड़ा.

उसने नेहा की टांग उठा के साइड किया और उसको घोड़ी बनाया.

नेहा समझ गयी, बदन thar-thara रहा था, पर उसने विरोध नहीं किया, बस सर झुका लिया.

रोहन ने उसकी गांड पे एक ज़ोर का थप्पड़ मारा,

“दीदी… तू बहुत ज़्यादा चूड़ी हुई लगती है… छूट तो ढीली हो चुकी है तेरी…

लाओ अब गांड मरवाओ.”

नेहा की सांस रुक गयी,

“रोहन… नहीं… गांड में नहीं… प्लीज…”

रोहन ने मुस्कुराते हुए उसकी गांड के छेद पे थूक लगा दी, अपने लुंड पे भी,

“अभी तक ‘नहीं’ का ऑप्शन था दीदी… अब नहीं है.”

उसने टोपा गांड के मुँह पे टिकाया और एक hi धीमा सा धक्का मारा.

नेहा की चीख निकल गयी,

“आआह माँ… पहात जाएगी… बहुत मोटा है… नहीं रोहन!”

रोहन ने उसकी कमर पकड़ ली और dheere-dheere अंदर धकेलने लगा.

आधा लुंड अंदर गया तो नेहा के आंसू निकल आये,

“आआह… निकाल… बहुत दर्द हो रहा है…”

रोहन रुक गया, फिर एक ज़ोर का धक्का मारा, पूरा लुंड अंदर तक.

नेहा का मुँह खुला रह गया, सिर्फ एक लम्बी सिसकी निकली.

रोहन ने स्पीड पकड़ ली, गांड मारने लगा,

“ले दीदी… अब तेरी गांड भी मेरी… आज से दोनों छेद मेरे… आआह कितनी टाइट है तेरी गांड!”

नेहा के मुँह से सिर्फ “आआह… आआह…” निकल रहा था, दर्द और मज़ा दोनों साथ चल रहे थे.

रोहन ने 7-8 मिनट तक गांड मारी, नेहा दो बार झाड़ गयी, गांड से भी पानी निकलने लगा.

आखिर में रोहन ने ज़ोर के तीन धक्के मारे और गांड के अंदर hi गरम माल छोड़ दिया.

फिर वह साइड में लेट गया, नेहा उसके ऊपर गिर गयी, सांस फूलती हुई.

रोहन ने उसके बाल सहलाते हुए बोलै,

“अब तू पूरी तरह से मेरी हो गयी… छूट भी, गांड भी, मुँह भी…

जब बुलाएगा, आ जाएगी… समझी?”

नेहा ने आँखें बंद किये, धीमे से सर हिला दिया…

उसकी हार अब पूरी तरह से हो चुकी थी.

रोहन बीएड पे पीठ के बल लेट गया, दोनों हाथ सर के नीचे.

नेहा अभी भी उसके ऊपर थी, सांस फूलती हुई, पसीना से तरी हुई, गांड और छूट दोनों से माल टपक रहा था.

रोहन ने उसके बाल पकडे और धीरे से खींचा,

“उठ दीदी… अब अपनी जगह जान ले.”

नेहा धीरे से उठी, उसकी टाँगे कांप रही थी, उसने घुटनो के बल बीएड पे बैठ गयी, आँखें नीचे.

रोहन ने लुंड को हाथ से पकड़ के हिलाया, अभी भी गीला और सख्त,

“साफ़ कर अपने मुँह से… जैसे अच्छी रंडी करती है.”

नेहा ने बिना कुछ बोले झुक कर लुंड मुँह में लिया, छूट और गांड का अपना hi मज़ा और रोहन का माल choos-choos के साफ़ करने लगी.

रोहन ने उसके सर को दबा के गले तक दाल दिया, दो बार मुँह छोड़ दिया फिर छोड़ दिया.

फिर उसने नेहा के गाल पे हल्का सा थप्पड़ मारा,

“अब बोल… तू किसकी है?”

नेहा की आवाज़ काँप रही थी,

“तेरी… तेरी हूँ मैं…”

रोहन ने मुस्कुराते हुए,

“पूरा बोल… किसकी छूट, किसकी गांड, किसका मुँह?”

नेहा ने आँखें नीचे किये, शर्माते हुए,

“तेरी छूट… तेरी गांड… तेरा मुँह… सब तेरा है… अब से तू मेरा मालिकिन है.”

रोहन ने उसको खींच कर अपने पास लाया, उसके होंठों पे एक गहरी किश की,

“और अब से जब बुलाऊंगा, बिना पंतय के आएगी… समझी?”

नेहा ने सर हिला दिया,

“हाँ… जब बुलाएगा… बिना पंतय के आ जाउंगी… तेरे लिए हमेशा गीली रहूंगी.”

रोहन ने उसकी गांड पे एक और थप्पड़ मारा,

“और अब से ‘रोहन’ नहीं… ‘बेबी’ बोलेगी… या ‘जानू’… जैसे अच्छी रखैल बोलती है.”

नेहा ने शर्मा के उसके सीने पे सर रख दिया,

“जानू… अब से तू जो कहेगा वह करुँगी… तेरी रखैल बन गयी हूँ मैं.”

रोहन ने उसको जफ्फी में जकड लिया,

“अब हर रात 12 बजे के बाद मेरे कमरे में आएगी… या मैं तेरे कमरे में आ जाऊंगा… कोई सवाल नहीं, कोई ना नहीं.”

नेहा ने धीमे से “ठीक है जानू…” बोलै और उसके सीने पे किश कर दिया.

रोहन ने फ़ोन उठाया, दोनों वीडियोस डिलीट करने का ऑप्शन खोला,

“अब ये वीडियोस डिलीट कर देता हूँ… पर अगर कभी ना बोली तो वापस बन जाएंगी… समझी?”

नेहा ने डर के मारे जल्दी से सर हिला दिया,

“नहीं बेबी… कभी ना नहीं बोलूंगी… तेरा हुकुम sar-aankhon पे.”

रोहन ने वीडियोस डिलीट कर दी, फ़ोन साइड पे रखा और नेहा को फिर से नीचे लिटा दिया,

“अब एक राउंड और… अबकी बार तू ऊपर चढ़ के दिखा अपनी सबमिशन.”

नेहा ने बिना कुछ बोले उसके ऊपर चढ़ गयी, लुंड को हाथ से पकड़ के छूट में डाला और dheere-dheere उछलने लगी,

“जानू… अब से तेरी hi हूँ… छोड़ ले मुझे जब दिल करे…”

कमरे में फिर वही thap-thap और नेहा की “ाः… जानू…” की आवाज़ें गूंजने लगी…


नेहा की पूरी सबमिशन हो चुकी थी, अब वह सिर्फ रोहन की पर्सनल रखैल थी.
 
सॉरी दोस्तों कुछ दिनों के लिए पत्नी जी के साथ घूमने गया था. औरों के साथ तो मेरा खूब चलता रहता है पर उसके साथ टाइम नहीं लग पता. अब अच्छा टाइम स्पेंड किया आप लोग बेसब्री से अगले PART का इंतज़ार कर रहे होंगे . आज अगला भाग दाल रहा हूँ. कमेंट किया कीजिये दोस्तों. आने वाले टाइम में आपको इतना मज़ा दूंगा के छूट और लुंड पर से आपका हाथ HI परे नहीं होगा. धन्यवाद
 
Part 91

अगले दिन सुबह के 10 बज चुके थे. घर में अब सिर्फ फॅमिली वाले बचे थे, बाकी मेहमान निकल चुके थे.

मेहुल अपने कमरे में थी, एक लाइट पिंक साड़ी पहने हुए, पल्लू शोल्डर पे डाला हुआ, बिलकुल फ्रेश और खूबसूरत लग रही थी. रोहन धीरे से दरवाज़ा खोला और अंदर घुस गया.

रोहन (मुस्कुराते हुए): “दीदी… ज़रा ऊपर वाले store-room में आना… एक चीज़ दिखानी है.”

मेहुल (हैरानी से): “अभी? क्या है?”

रोहन ( आँख मारते हुए): “बस आ जा न… तेरी hi फवौरीते चीज़ है.”

मेहुल हंस दी और उसके peeche-peeche चली गयी. ऊपर store-room में पहुँचते hi रोहन ने दरवाज़ा अंदर से लॉक कर दिया. अंदर पुराने सोफे और एक बड़ा सा पलंग पड़ा था जो कभी मेहमानों के लिए उसे होता था.

मेहुल (हैरानी से): “यह क्या ड्रामा है भाई? बोल न क्या दिखाना है?”

रोहन उसके बिलकुल पास आ गया, दोनों हाथों से उसकी कमर पकड़ ली और धीमे से बोलै,

“कल रात नेहा दीदी को छोड़ दिया मैंने… छूट भी मारी, गांड भी मारी… और अब वह मेरी पर्सनल रंडी बन गयी है.”

मेहुल के मुँह से एक छोटी सी चीख निकली, आँखें बड़ी हो गयी,

“क्या?! रोहन… तू पागल हो गया है? वह तेरी मां की बेटी है… अपनी बहिन जैसी! ऐसा मत बोल उसके लिए भाई… प्लीज!”

रोहन हंस पड़ा, उसने मेहुल को पलंग पे धकेल दिया और खुद उसके ऊपर चढ़ गया.

“अरे दीदी… बहुत बनती थी साली अपने आप में… ‘मैं मॉडर्न हूँ, मैं इंडिपेंडेंट हूँ’… गांजा पीती थी, वाइब्रेटर से खुद को छोड़ती थी, बॉयफ्रेंड के सामने नंगी वीडियो कॉल करती थी… सब वीडियोस मेरे पास हैं. कल रात दिखाए तोह खुद hi घुटने पे बैठ गयी और मुँह में ले लिया.”

मेहुल की साँसें तेज़ हो गयी, चेहरा लाल पद गया, उसने विरोध करने की कोशिश की,

“रोहन… यह गलत है… उसको छोड़ दे… वह बेचारी…”

पर रोहन ने उसकी साड़ी का पल्लू एक झटके में साइड कर दिया, ब्लाउज के ऊपर से hi बूबे दबाने लगा,

“बेचारी? कल जब मैंने उसकी छूट में पूरा लुंड पेल दिया था तब वह चिल्लाई थी… ‘ाः जानू… फाड् दे… रोज़ छोड़ना मुझे’… गांड मारता हुआ भी उसने खुद टाँगे चौड़ी कर दी थी. अब बोलती है ‘जानू जब बुलाएगा बिना पंतय के आ जाउंगी’.”

मेहुल की आँखें बंद हो गयी, उसका बदन गरम होने लगा. उसने पहले हाथ से रोहन को धक्का देने की कोशिश की, पर उसका हाथ सुस्त पद गया.

रोहन ने अपनी पंत की ज़िप खोली, अपना खड़ा लुंड बहार निकाला और मेहुल के हाथ में थमा दिया.

“देख दीदी… नेहा की छूट और गांड की बातें सुन कर hi तेरा भाई खड़ा हो गया… अब तू hi ठंडा कर.”

मेहुल की उँगलियाँ अपने आप लुंड के गिर्द लिपट गयी, dheere-dheere हिलने लगी. उसकी सांस तेज़ थी,

“तू… तू बहुत बुरा है रोहन… उसके साथ ऐसा क्यों किया?”

रोहन ने उसकी ब्लाउज के हुक खोल दिए, ब्रा ऊपर उठा दिया और एक निप्पल मुँह में ले लिया, ज़ोर से चूसने लगा.

“क्यूंकि उसको अपनी औकात दिखानी थी दीदी… अब वह मेरी गुलाम है. कल रात उसने खुद मेरे लुंड को छूट और गांड का अपना माल साफ़ किया मुँह से… और बोलै ‘जानू अब से तेरी रखैल हूँ’.”

मेहुल के मुँह से एक लम्बी सिसकी निकली, उसका हाथ अब तेज़ी से लुंड हिला रहा था,

“आआह… रोहन… तू सच में मॉन्स्टर है… उस बेचारी को छोड़ दिया तूने…”

रोहन ने उसकी साड़ी ऊपर उठा दी, पेटीकोट का नाडा खोला और पंतय साइड कर दी. मेहुल की छूट बिलकुल गीली थी. उसने दो उँगलियाँ अंदर दाल दी और zor-zor से andar-bahar करने लगा.

मेहुल की कमर ऊपर उठ गयी,

“आआह… भाई… धीरे… आआह… तू उसको छोड़ता रहा और अब मुझे गरम कर रहा है…”

रोहन ने उसके कान में गुंजडा,

“हाँ दीदी… अब तू भी देख… कैसे मैंने उसकी गांड मारी थी… वह रो रही थी पर खुद hi झाड़ गयी तीन बार…”

मेहुल की आँखें बंद हो गयी, उसने खुद hi रोहन का लुंड पकड़ा और अपनी छूट पे रगड़ने लगी,

“दाल… दाल दे अंदर… तेरी दीदी तड़प रही है…”

रोहन ने एक hi धक्के में पूरा लुंड पेल दिया. मेहुल की चीख निकल गयी,

“आआह माँ… फाड् दिया तूने… छोड़ मुझे ज़ोर से… जैसे नेहा को छोड़ा था!”

रोहन ने स्पीड पकड़ ली – thap-thap-thap-thap… store-room में आवाज़ें गूँज रही थी.

मेहुल चिल्लाई,

“हाँ भाई… ऐसे hi… तेरी दीदी की छूट भी फाड् दे… आआह… झाड़ रही हूँ मैं!”

दस मिनट तक तेज़ी से छोड़ने के बाद रोहन ने अंदर hi माल छोड़ दिया. मेहुल कांप रही थी, उसने रोहन को जकड लिया.

दोनों सांस फूलते हुए एक दुसरे पे गिर गयी. मेहुल ने शर्मा के बोलै,

“तुझे कुछ नहीं हो सकता रोहन… तू सच में सबको अपनी रंडी बना लेगा…”

रोहन ने उसके माथे पे किश किया,

“तू तो पहले से hi मेरी बीवी है दीदी… और नेहा अब मेरी नया शिकार… अब रूही की बारी है.”

मेहुल ने उसके सीने पे सर रख दिया और धीमे से मुस्कुरायी,

“बस रूही को मत छोड़ना… उसको भी अपना बना ले… तीनो साथ में रहेंगे.”

रोहन ने उसको ज़ोर से जफ्फी दी,

“पक्का… अब तीनो मेरी… और घर में कोई नहीं रोक सकेगा.”

Store-room में दोनों लिपट के लेते रहे… बहार धुप तेज़ थी, अंदर गर्माहट और भी तेज़.

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Part 91 (कॉन्टिनोएड)

अचानक store-room का दरवाज़ा खटखटाया भी नहीं गया, सीधा खुल गया.

निधि (रोहन और मेहुल की माँ) अंदर दाखिल हुई. उसके हाथ में एक पुराण photo-album था, शायद कुछ ढूंढने आयी थी.

एक पल के लिए वक़्त जैसे रुक सा गया.

निधि की नज़र सीधा पलंग पर पड़ी:

- मेहुल बिलकुल नंगी, साड़ी और पेटीकोट ज़मीन पर बिखरे हुए,

- रोहन भी नंगा, उसका ढीला सा लुंड अभी भी मेहुल के हाथ में,

- रोहन का एक हाथ मेहुल की बड़ी सी चुकी पर, निप्पल को उँगलियों से दबाये हुए,

- दोनों के बदन पसीने से चमक रहे थे, कमरे में सेक्स की बू और साँसों की आवाज़ें अभी भी गूँज रही थी.

निधि का मुँह खुला रह गया. एल्बम उसके हाथ से नीचे गिर गया.

निधि (तेज़, कांपती आवाज़ में):

“रोहन… मेहुल… यह… यह सब क्या हो रहा है?!”

मेहुल ने एक झटके में हाथ हटा लिया, अपने आप को छुपाने के लिए पल्लू खींचने लगी, लेकिन पल्लू तो ज़मीन पर था. उसने दोनों हाथों से अपने बूबे छुपा लिए, चेहरा एकदम लाल.

रोहन पहले तो चौंक गया, फिर धीरे से उठ कर बैठा रह गया, लुंड अभी भी थोड़ा सा खड़ा था, उसने भी कुछ छुपाने की कोशिश नहीं की. बल्कि उसने एक ठंडी सी मुस्कान चेहरे पे लाते हुए माँ को देखा.

रोहन (बिलकुल शांत आवाज़ में):

“माँ… दरवाज़ा बंद कर दो पहले. बात करते हैं.”

निधि का बदन काँप रहा था. उसने पीछे मुद कर दरवाज़ा ज़ोर से बंद किया, लॉक भी लगा दिया, जैसे कोई बहार न आ जाए. फिर पलटी और आँखें लाल कर के बोली,

निधि:

“मैं पूछ रही हूँ… यह क्या तमाशा है? अपनी बहिन के साथ… अपनी hi दीदी के साथ… तू यह सब कर रहा है? मैं तुम दोनों की माँ हूँ!”

मेहुल रोने लगी, आँखों में आंसू भर आये,

“माँ… सॉरी… हम… हम बस…”

रोहन ने मेहुल को चुप कराया, उसका हाथ अपने जांघ पर रख दिया और माँ की तरफ सीधा देखते हुए बोलै,

रोहन:

“माँ, जो हो गया सो हो गया. अब छुपाने से क्या फायदा?

हाँ, मैं मेहुल दीदी को छोड़ता हूँ. रोज़ छोड़ता हूँ.

और अब नेहा दीदी को भी छोड़ा है कल रात.

और रूही की सुहागरात भी मैं hi करूँगा… जब उसका पीरियड ख़तम होगा.”

निधि के कान पर जैसे बिजली गिरी. उसके घुटने लड़खड़ाने लगे, उसने दीवार का सहारा लिया.

निधि (रोटी हुई आवाज़ में):

“तूने… तूने नेहा को भी…? और रूही को भी…? रोहन, तू पागल हो गया है क्या? यह सब… यह घर बर्बाद कर देगा!”

रोहन धीरे से उठा, बिलकुल नंगा hi माँ के पास गया, उसके कंधे पर हाथ रख कर बोलै,

रोहन (बिलकुल ठंडी, दबंग आवाज़ में):

“माँ, बर्बाद कुछ नहीं होगा.

सब अपनी मर्ज़ी से हो रहा है.

मेहुल दीदी खुद मुझसे प्यार करती हैं… वह मेरी बीवी हैं अब.

नेहा दीदी को मैंने उनकी औकात दिखा दी… अब वह मेरी रखैल हैं.

रूही भी तैयार है.

और अब… अब तुम भी समझ लो… घर में जो भी होगा, मेरे रूल से होगा.”

निधि ने पीछे हटने की कोशिश की, लेकिन दीवार थी. उसके बदन में एक अजीब सी कम्पन थी – गुस्सा, दर, और शायद कुछ और भी.

निधि (कांपती आवाज़ में):

“तू… तू मुझे भी धमकी दे रहा है… अपनी माँ को?”

रोहन ने माँ के चेहरे के बिलकुल पास अपना चेहरा लाया, धीमी सी मुस्कान के साथ बोलै,

रोहन:

“धमकी नहीं माँ… सच्चाई.

अब तुम तीन ऑप्शन हैं तुम्हारे पास:

1. चिल्ला दो, rona-dhona मचा दो – पूरा घर, पूरा रिश्तेदार सब जान जायेगा. तुम्हारी इज़्ज़त, हम सब की इज़्ज़त ख़तम.

2. चुप रह जाओ, सब जैसे चल रहा है, वैसे चलने दो – कोई बहार नहीं जानेगा, घर खुश रहेगा.

3. या फिर…”

रोहन ने माँ की कमर पर हाथ रख दिया, धीमे से सहलाने लगा,

“या फिर तुम भी समझ लो… की तुम्हारा बीटा बड़ा हो गया है… और अब वह जो चाहे, वह करेगा… और शायद… तुम्हे भी बुरा न लगे.”

निधि का बदन एकदम से ठंडा पद गया. उसने रोहन को देखा – उसका नंगा बदन, अभी भी थोड़ा खड़ा लुंड, आँखों में वह दबंग चमक.

मेहुल पलंग पर बैठी रो रही थी, लेकिन कुछ बोल नहीं प् रही थी.

निधि की सांस तेज़ हो चली थी. उसने एक लम्बी सांस ली, फिर धीरे से बोली,

निधि (कांपती आवाज़ में):

“तू… तू सच में शैतान बन गया है रोहन…

लेकिन… लेकिन मैं अपने बच्चों की इज़्ज़त के लिए… चुप रहूंगी.

बस यह सब… घर के अंदर hi रखना. बहार एक शब्द भी नहीं जाना चाहिए.”

रोहन ने माँ के माथे पे एक हलकी सी किश की, बिलकुल प्यार से,

रोहन:

“प्रॉमिस माँ. यह सब हमारे घर का राज़ रहेगा.

और अब से… जब भी मैं बुलाऊंगा… तुम तीनो (मेहुल, नेहा, रूही) और… शायद एक दिन तुम भी… मेरे पास आओगी.

कोई सवाल नहीं, कोई ना नहीं.”

निधि ने आँखें बंद कर ली. उसके बदन में एक अजीब सी बेचैनी थी, जैसे कुछ टूट गया हो, और कुछ नयी शुरुआत भी हो रही हो.

उसने बस धीमे से सर हिला दिया.

रोहन मुस्कुराया. उसने माँ को धीरे से जफ्फी में ले लिया – बिलकुल नंगा, अपनी माँ को जकड कर.

मेहुल हैरान होकर दोनों को देख रही थी.

कमरे में सिर्फ सांसें और एक नए, खामोश समझौते की खनक थी.

घर का सबसे बड़ा राज़ अब माँ के पास भी आ चूका था…


और शायद, अब माँ भी उसी खेल का हिस्सा बनने वाली थी.
 
Part 92

निधि अभी भी रोहन की बाहों में थी.

उसके बदन पर एक अजीब सी गर्माहट थी – गुस्से की नहीं, कुछ और की.

रोहन का नंगा बदन उसके सामने चिपका हुआ था, उसका अभी भी गीला लुंड माँ की थिगह से टकरा रहा था.

रोहन ने माँ के कान में धीमे से गुंजडा,

“माँ… सच बताओ… दिल में थोड़ी सी जलन तो हुई न?

की तेरा बीटा पहले मेहुल दीदी को छोड़ता है, नेहा को छोड़ता है… और अब रूही की बारी है…

और अपनी माँ को सिर्फ देखने को छोड़ दिया?”

निधि की सांस रुक गयी.

उसने आँखें बंद कर ली, पर उसका बदन खुद hi रोहन के बदन से और चिपक गया.

निधि (बहुत धीमी, कांपती आवाज़ में):

“तू… तू शैतान है रोहन…

मुझे… मुझे ऐसा फील क्यों करा रहा है?”

रोहन ने माँ की कमर को और ज़ोर से जकड लिया, उसका लुंड अब माँ की लोअर बेल्ली पर डाब रहा था – बिलकुल सख्त हो चूका था.

रोहन:

“क्यूंकि मैं जानता हूँ माँ…

पापा के जाने के बाद तुमने कितने साल अकेली रातें गुज़ारी हैं…

कितनी बार रात को खुद को हाथ से शांति दी है…

अब तेरा बीटा बड़ा हो गया है… अब वह तेरी हर तड़प दूर करेगा.”

निधि के मुँह से एक लम्बी, गरम सांस निकली.

उसने अपने आप को रोकने की आखरी कोशिश की, पर उसका हाथ खुद hi रोहन की छाती पर फेरने लगा.

निधि (रोटी हुई लेकिन गरम आवाज़ में):

“मैं तेरी माँ हूँ… यह पाप है…”

रोहन ने माँ के होंठ अपने होंठों से बिलकुल पास लाया,

“पाप तो तब होता माँ… जब दिल न माने.

पर तेरा दिल तो अभी भी जवान है… और तेरी छूट भी…”

इतना कहते hi रोहन ने माँ की सिल्क साड़ी का पल्लू धीरे से नीचे गिरा दिया.

निधि ने विरोध नहीं किया.

उसने सिर्फ आँखें बंद कर ली और खुद hi अपनी साड़ी के प्लेट्स खोलने लगी.

मेहुल पलंग पर बैठी हैरान होकर देख रही थी – उसकी माँ खुद कपडे उतार रही थी अपने बेटे के सामने.

निधि की साड़ी ज़मीन पर गिर गयी.

उसने ब्लाउज के हुक खुद खोले, ब्रा के स्ट्राप नीचे किये…

और अपने bade-bade, थोड़े से ढीले पर गरम मुम्मे बिलकुल खुल्ले कर दिए.

रोहन ने माँ को दीवार से सत्ता दिया, एक हाथ से उसकी एक चुकी को ज़ोर से दबाया, दूसरा हाथ पेटीकोट के अंदर दाल के पंतय के ऊपर से छूट को सहलाने लगा.

निधि की सांस तेज़ी से चलने लगी,

“आआह… रोहन… बीटा… नहीं… आआह…”

रोहन ने पेटीकोट का नाडा खोला, पंतय एक झटके में नीचे कर दी.

निधि की छूट बिलकुल गीली थी – सालों बाद किसी मर्द के हाथ लगी थी.

रोहन ने घुटनो के बल बैठ गया, माँ की दोनों टाँगे थोड़ी चौड़ी की और मुँह लगा दिया छूट पर.

Zor-zor से जीभ से चाटने लगा, क्लीट को चूसने लगा.

निधि की कमर दीवार से टकरा गयी,

“आआह… हाय… मेरा बीटा… मेरी छूट… आआह… कितने साल बाद… आआह झाड़ रही हूँ मैं!”

सिर्फ दो मिनट में निधि ज़ोर से काँप उठी, उसका पानी रोहन के मुँह पर गिरने लगा.

उसने रोहन के सर को जकड लिया और ज़ोर से चीख दी.

फिर वह धीरे से नीचे बैठ गयी, रोहन के सामने घुटनो के बल.

उसने खुद hi रोहन का लुंड पकड़ा, आँखों में आंसू और हवस दोनों,

“बीटा… अब माँ को भी अपना बना ले…

तेरी माँ की भी सुहागरात कर दे आज…”

रोहन ने माँ को गॉड में उठा लिया और पलंग पर लेता दिया – मेहुल के बिलकुल बगल में.

मेहुल हैरान होकर देखती रह गयी, पर उसने कुछ नहीं बोलै.

बल्कि उसने माँ का हाथ पकड़ लिया – जैसे दोनों साथ में हैं अब.

रोहन माँ के ऊपर चढ़ गया, दोनों टाँगे पूरी चौड़ी कर दी, लुंड छूट के मुँह पर रगड़ा.

निधि ने खुद hi कमर ऊपर उठा के बोलै,

“दाल दे बीटा… तेरी माँ की छूट में अपना लुंड दाल दे…

आज से मैं भी तेरी हूँ… तेरी बीवी… तेरी रंडी… जो भी तू चाहे.”

रोहन ने एक hi ज़ोर का धक्का मारा – पूरा लुंड माँ की छूट में अंदर तक घुस गया.

निधि की चीख निकल गयी,

“आआआह माँ… कितना मोटा है तेरा… फाड् दी मेरी छूट… आआह छोड़ मुझे बीटा!”

रोहन ने स्पीड पकड़ ली – thap-thap-thap-thap…

पलंग हिल रहा था, maa-bete की चुदाई का आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रहा था.

निधि चिल्लाई,

“हाँ बीटा… ज़ोर से… तेरी माँ की छूट फाड् दे…

सालों से तड़प रही थी… आज तू ने पूरी कर दी… आआह झाड़ रही हूँ मैं… फिर से!”

मेहुल साइड में बैठी माँ के मुम्मे दबा रही थी, उसके होंठ चूस रही थी – जैसे दोनों साथ में अपने bhai-pati को सटिस्फी कर रही हों.

रोहन ने 10 मिनट तक माँ को तेज़ी से छोड़ता रहा,

फिर ज़ोर के 8-10 धक्के मारे और माँ की छूट में hi अपना गरम माल भर दिया.

निधि का बदन एक बार फिर काँप उठा, उसने रोहन को ज़ोर से जकड लिया,

“बीटा… अब से हर रात… तेरी माँ तेरे पास सोयेगी…

तेरी बीवी बांके… तेरी रंडी बांके…”

रोहन ने माँ के माथे पे किश किया,

“अब से घर में चार बीवियां होंगी माँ…

मेहुल दीदी, नेहा दीदी, रूही… और सबसे बड़ी बीवी – तू.”

निधि ने शर्मा के मुस्कुराते हुए सर हिला दिया,

“हाँ मेरा पति… अब से तेरा हुकुम sar-aankhon पे…”

मेहुल ने माँ को जफ्फी दे दी,

“वेलकम तो थे फॅमिली, मम्मी… अब हम सब साथ में हैं.”

तीनो लिपट कर लेते रहे…

store-room के अंदर एक नया रिश्ता जनम ले चूका था –

maa-bete का नहीं… pati-patni का.

घर का सबसे बड़ा राज़ अब पूरा घर बन चूका था…

और अब कोई रोकने वाला नहीं था.

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Part 92 – माँ की गांड

दोनों साँसें अभी भी तेज़ थी.

निधि पलंग पर पीठ के बल लेती थी, छूट से माल टपक रहा था, आँखें बंद, चेहरे पर एक अजीब सी शांति और थकन.

रोहन ने माँ के बाल सहलाते हुए धीमे से बोलै,

“माँ… अभी तो शुरुआत है.

तेरी सुहागरात पूरी तभी होगी… जब तेरी गांड भी मेरी हो जाएगी.”

निधि की आँखें एकदम खुल गयी.

उसने घबरा कर रोहन को देखा,

“बीटा… नहीं… गांड में नहीं… मैंने कभी नहीं किया… बहुत दर्द होगा…”

रोहन ने मुस्कुराते हुए माँ को पलटा दिया – घोड़ी बना दिया.

निधि के bade-bade हिप्स ऊपर उठ गए, गांड का छेद बिलकुल सामने.

रोहन ने पहले माँ की गांड पर एक ज़ोर का थप्पड़ मारा,

“चुप माँ… अब से तेरा हर छेद मेरा है.

जो तेरी बेटियां दे सकती हैं, उनकी माँ क्यों नहीं दे सकती?”

मेहुल साइड में बैठी माँ का हाथ दबा रही थी,

“मम्मी… डर मत… पहली बार थोड़ा दर्द होता है, फिर मज़ा आता है.

मैं भी देती हूँ भाई को… अब तू भी दे दे.”

निधि ने आँखें बंद कर ली, सर झुका लिया,

“ठीक है बीटा… जो करना है कर ले… तेरी माँ तेरी hi है अब.”

रोहन ने अपना लुंड – जो अभी भी गीला और सख्त था – माँ की गांड के छेद पर रगड़ा.

फिर थूक लगा कर टोपा सेट किया.

निधि की सांस रुक गयी.

रोहन ने धीरे से धक्का मारा – टोपा अंदर घुस गया.

निधि की चीख निकल पड़ी,

“आआआह… निकाल बीटा… बहुत मोटा है… पहात जाएगी!”

रोहन रुक गया, माँ की कमर सहलाने लगा,

“शठ… माँ… रिलैक्स कर… सांस ले… अभी मज़ा आएगा.”

मेहुल ने माँ के मुँह पर अपना बूब रख दिया, निप्पल चूसने को बोलै.

निधि ने jaise-taise चूसना शुरू किया.

रोहन ने दोबारा dheere-dheere धकेलना शुरू किया.

आधा लुंड अंदर गया तो निधि के आंसू निकल आये,

“आआह… हाय… कितना दर्द है…”

रोहन ने एक ज़ोर का धक्का मारा – पूरा लुंड माँ की गांड में समां गया.

निधि का मुँह खुला रह गया, सिर्फ एक लम्बी सिसकी निकली,

“आआआहहहहह… माँ मर गयी… पूरा अंदर… आआह!”

रोहन ने पहले dheere-dheere andar-bahar करना शुरू किया.

हर धक्के के साथ माँ की गांड थोड़ी खुलने लगी.

5 मिनट बाद दर्द काम हुआ, निधि की आवाज़ें बदल गयी,

“आआह… अब… अब थोड़ा मज़ा आ रहा है… आआह… धीरे बीटा…”

रोहन ने स्पीड बढ़ा दी – thap-thap-thap-thap…

माँ की गांड अब पूरी तरह से खुल चुकी थी.

निधि चिल्लाने लगी,

“हाँ बीटा… अब ज़ोर से… तेरी माँ की गांड फाड् दे…

आआह… कितना मज़ा आ रहा है… पहली बार… आआह झाड़ रही हूँ मैं!”

मेहुल हंस पड़ी, माँ के क्लीट को ऊँगली से रगड़ने लगी.

निधि तीन बार झाड़ गयी – गांड से भी पानी निकलने लगा.

रोहन ने 10 मिनट तक माँ की गांड मारी,

फिर ज़ोर के 8-10 धक्के मारे और गांड के अंदर hi गरम माल भर दिया.

निधि का बदन एकदम से ढीला पद गया, वह पलंग पर गिर पड़ी, सांस फूलती हुई.

रोहन ने माँ को सीधा किया, उसके होंठों पे एक गहरी किश की,

“अब तेरी गांड भी मेरी हो गयी माँ…

अब से जब भी बुलाऊंगा, छूट हो या गांड… बिना पंतय के आ जाएगी… समझी?”

निधि ने शर्मा के, थकी हुई आवाज़ में बोलै,

“हाँ मेरा पति… अब से तेरी माँ तेरी गुलाम है…

छूट भी तेरी… गांड भी तेरी… मुँह भी तेरा…

जब बुलाएगा, नंगी hi आ जाउंगी.”

मेहुल ने माँ को जफ्फी दे दी,

“वेलकम प्रॉपरलय, मम्मी… अब हम तीनो तेरी तरह hi हैं.”

रोहन ने दोनों को बाहों में भर लिया,

“अब घर में चार बीवियां हैं… और एक hi मालिकिन – मैं.”

तीनो लिपट कर लेते रहे…

माँ की गांड से भी अब माल टपक रहा था,

और उसके चेहरे पर एक नयी, गरम सबमिशन की चमक थी.

अब घर सच में रोहन का था…

हर औरत, हर रिश्ता, हर छेद – सब उसका.



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Part 93

(रूही स्पेशल)

आज रूही के पीरियड का आखरी दिन था.

घर में सब apne-apne काम में व्यस्त थे, और दोपहर के 3 बज रहे थे.

रोहन चुपके से रूही के कमरे में घुस गया और दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया.

रूही बीएड पे लेती थी, फ़ोन चला रही थी. उसने लाइट पिंक टॉप और छोटी सी शॉर्ट्स पहनी थी, बाल खुले हुए, चेहरा थोड़ा थका हुआ पर खूबसूरत.

रोहन बीएड के पास गया, पंत की ज़िप खोलते हुए बोलै,

“रूही… आज तेरा आखरी दिन है न?

कल से तेरी सील टूटेगी… आज पहले मुँह की प्रैक्टिस कर ले.”

रूही ने फ़ोन साइड पे रखा, शैतानी मुस्कान के साथ रोहन को देखा,

“भैया… आज तो बस लाइट स्पॉटिंग है… अब तो ऑलमोस्ट ख़तम hi है.

पर तू बोले तो मुँह में ले लून?”

रोहन ने पंत और अंडरवियर नीचे कर दी.

लुंड पूरा खड़ा था, टोपा लाल और गीला.

रूही घुटनो के बल बीएड से नीचे उत्तरी, दोनों हाथ से लुंड पकड़ा और ऊपर देख कर बोली,

“कितना तड़प रहा है मेरा भैया… आज तेरी छोटी बहिन पूरा मज़ा देगी.”

फिर उसने जीभ निकाल कर टोपा पे एक लम्बी चाट मारी, फिर मुँह में ले लिया और गले तक दाल दिया.

रोहन की “सससस… हाय रूही…” आवाज़ निकल गयी.

उसने रूही के सर पे हाथ रख कर dheere-dheere मुँह छोड़ने लगा.

रूही zor-zor से चूसने लगी:

कभी गले तक लेके,

कभी बहार निकाल के लार laga-laga के,

कभी गोटियों को मुँह में भर के चूसती,

कभी लुंड को गाल के अंदर से दबती.

रोहन आँखें बंद किये मज़े ले रहा था,

“आआह रूही… तू नंबर ओने है… कल जब तेरी छूट में डालूंगा तो तू रोने लगेगी इतना मोटा देख कर…”

रूही ने मुँह से निकाल कर लुंड पे थप्पड़ मारा और बोली,

“रोने नहीं दूंगी भैया… ख़ुशी से चिल्लायूँगी…

आज मुँह से hi झाड़ जा… कल छूट और गांड दोनों में लेगा न?”

फिर उसने तेज़ी से चूसना शुरू कर दिया, दोनों हाथ से लुंड के नीचे वाली जगह को मसलते हुए.

सिर्फ तीन मिनट में रोहन की कमर कांपने लगी.

उसने रूही के सर को ज़ोर से दबाया और गले के अंदर hi पूरा माल छोड़ दिया.

रूही ने एक बूँद भी बहार नहीं होने दिया, सब पी गयी, फिर लुंड साफ़ करके ऊपर किश कर दिया.

रोहन ने उसको गॉड में उठा कर बीएड पे बैठा लिया, उसके होंठों पे ज़ोर से किश किया,

“मेरी जान… कल रात 12 बजे के बाद… तेरी सुहागरात… मैं खुद आऊंगा… लाल जोड़ा पहना के… तेरी सील तोडूंगा… इतना प्यार से, इतना वाइल्ड… तू ज़िन्दगी भर याद रखेगी.”

रूही ने शर्मा के उसके गले में बाहें दाल दी,

“भैया… अब तो मेरा दिल धड़क रहा है… जल्दी से कल आ जाये…”

रोहन ने उसके कान में गुंजडा,

“कल रात तेरी छूट भी मेरी… तेरी गांड भी मेरी… और तू पूरी तरह मेरी बीवी बन जाएगी… जैसे मेहुल दीदी, नेहा दीदी और मम्मी बन चुकी हैं.”

रूही की आँखें चमक उठी,

“पक्का भैया… अब से मैं भी तेरी रखैल… तेरी बीवी… जो भी तू बोले.”

दोनों एक दुसरे में लिपट गए.

रोहन का लुंड अभी भी रूही के हाथ में था… और रूही के दिल में सिर्फ एक hi ख्याल:

कल रात उसकी ज़िन्दगी बदल जाएगी…

अपने भैया के नीचे… पूरी तरह से.

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** नेहा की विदाई से पहले फाइनल चुदाई**

सुबह के 9 बज रहे थे.

नेहा का ट्रैन दोपहर 2 बजे का था. उसका बैग पैक हो चूका था, लेकिन वह अपने कमरे में अकेली बैठी थी, चेहरा थोड़ा उदास और थोड़ा बेचैन.

रोहन चुपके से अंदर घुस आया और दरवाज़ा बंद कर दिया.

नेहा ने उसको देखा, शर्मा गयी, नज़रें झुका ली.

रोहन बीएड के पास गया, नेहा के बगल में बैठा और सीधा उसकी जांघ पर हाथ रख दिया.

रोहन (धीमी आवाज़ में):

“नेहा दीदी… जाने से पहले एक बार और… तेरी छूट और गांड को याद दिलाना चाहता हूँ की अब यह दोनों मेरी प्रॉपर्टी हैं.”

नेहा की सांस तेज़ हो गयी. उसने विरोध नहीं किया, बस धीरे से सर हिला दिया.

रोहन ने उसकी t-shirt ऊपर उठा दी – अंदर ब्रा नहीं थी.

दोनों bade-bade मुम्मे एकदम खुल्ले. उसने एक निप्पल मुँह में ले लिया और ज़ोर से चूसने लगा.

नेहा की “ाः…” निकल गयी, उसका हाथ खुद hi रोहन के सर पर चला गया.

रोहन ने जीन्स की बटन खोली, ज़िप नीचे की और पंतय के अंदर हाथ दाल दिया.

छूट पहले से hi गीली थी.

रोहन (मुस्कुराते हुए):

“देखा… जाने का टाइम हो गया फिर भी गीली हो रही है मेरी रंडी दीदी…”

नेहा ने शर्मा के आँखें बंद कर ली और खुद hi जीन्स उतरने लगी.

दो मिनट में नेहा बिलकुल नंगी बीएड पर लेती थी – टाँगे पूरी फैला के.

रोहन ने कपडे उतरे, लुंड पूरा खड़ा.

उसने नेहा की दोनों टाँगे कंधे पे रख दी और एक hi धक्के में छूट में पूरा लुंड पेल दिया.

नेहा की चीख निकल गयी:

“ाआअह… रोहन… हर बार इतना ज़ोर से… आआह फाड् दे आज!”

रोहन ने तेज़ी से धक्के मरने शुरू कर दिए – thap-thap-thap-thap…

बीएड हिल रहा था, नेहा के मुम्मे upar-neeche उछाल रहे थे.

नेहा चिल्लाई:

“हाँ… ऐसे hi… तेरी दीदी की छूट में आज फाइनल पेल दे… आआह झाड़ रही हूँ मैं!”

5 मिनट में नेहा तीन बार झाड़ चुकी थी.

रोहन ने पलटा दिया – घोड़ी बना दिया.

उसने गांड पे दो ज़ोर के थप्पड़ मारे और लुंड गांड में दाल दिया.

नेहा रो पड़ी:

“आआह… गांड में भी… ट्रैन मिस हो जाएगी… आआह फोड़ दे आज!”

रोहन ने गांड मारनी शुरू कर दी – तेज़ी से, zor-zor से.

नेहा के मुँह से सिर्फ आवाज़ें निकल रही थी:

“जानू… ज़ोर से… तेरी रंडी को याद रहे… जब तक वापस न आऊं… आआह!”

8 मिनट बाद रोहन ने गांड के अंदर hi पूरा माल छोड़ दिया.

दोनों सांस फूला रहे थे.

रोहन नेहा के ऊपर लेट गया, उसके कान में गुंजडा:

रोहन:

“अब वादा कर… जब भी मैं फ़ोन करूँगा, मैसेज करूँगा, बुलायुंगा… तू छूट छोड़ के आ जाएगी.

ट्रैन हो, जॉब हो, बॉयफ्रेंड हो… सब छोड़ के… मेरी रंडी बन के आ जाएगी. बोल!”

नेहा ने आंसुओं और मज़ा के साथ रोहन को जकड लिया,

“हाँ जानू… वादा है…

जब भी बुलाएगा… चाहे रात हो, चाहे दिन… चाहे पीरियड हो…

मैं आ जाउंगी… बिना पंतय के… तेरी छूट लेके… तेरी गांड लेके…

अब से तेरी ज़िन्दगी भर की रखैल हूँ मैं… कभी ना नहीं बोलूंगी.”

रोहन ने उसके होंठों पे एक गहरी किश की,

“गुड गर्ल… अब जा, ट्रैन पकड़ ले…

लेकिन याद रखना – तेरी छूट और गांड अब मेरी प्रॉपर्टी हैं…

कभी किसी और को नहीं देना… वर्ण वीडियोस वायरल.”

नेहा ने शर्मा के सर हिला दिया,

“नहीं जानू… अब सिर्फ तेरी हूँ… किसी और का नाम भी नहीं लुंगी.”

रोहन उठा, कपडे पहने और नेहा को गॉड में उठा कर बाथरूम तक ले गया – दोनों ने साथ में नहाया, एक दुसरे को साफ़ किया.

नहाते वक़्त भी रोहन ने एक बार और मुँह में ले लिया नेहा से.

फाइनली नेहा तैयार हुई, बैग उठाया, रोहन ने उसको गेट तक छोड़ा.

कार में बैठते वक़्त नेहा ने रोहन के कान में गुंजडा:

“जल्दी बुला लेना जानू… अभी से तड़प शुरू हो गयी है.”

रोहन ने उसकी गांड पे एक थप्पड़ मारा और मुस्कुराया:

“एक हफ्ते में बुलाऊंगा… तब तक अपनी छूट को मेरे लिए गीली रखना.”

नेहा ट्रैन में बैठ गयी…

लेकिन उसका दिल और उसकी छूट दोनों वहां रह गए थे – रोहन के पास.

अब नेहा भी पूरी तरह से उसकी हो चुकी थी… दूर से भी, पास से भी.
 
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