KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION - Page 42 - SexBaba
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KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION

नवाज़ ने बाइक को घर के आँगन में लेकर रोका. बारिश अब हलकी हो चुकी थी, पर दोनों अभी भी पूरी तरह भीगे हुए थे. आरती धीरे से बाइक से नीचे उत्तरी

अब जाऊ मई

तब आरती अपनी साड़ी संभालती हुई नवाज़ की तरफ मुड़ी.

"घर पर बाइक से छोड़ने के बाद अब सीधे जा रहे हो...? रुकोगे नहीं खाना खाने के लिए?"

आरती ने तिरछी नज़र से देखा और बड़े हक़ से पूछा.

नवाज़ ने एक शैतानी मुस्कराहट दी और हैंडल पर हाथ रखते हुए बोलै,

"खाना तोह खा लून रानी... पर तुझे पता है न मुझे non-veg पसंद है."

आरती ने गुस्से और नखरे से अपनी आँखें बड़ी किन,

"अच्छा? तोह क्या अब आपके लिए अलग से non-veg बनाना पड़ेगा क्या?!"

नवाज़ ने कंधे उचकाए,

प्यार करती है तो बनायेगे

तोह आरती ने आगे बढ़कर दबी आवाज़ में कहा,

"बिलकुल नहीं! जो अंदर बनाया है, वही चुपचाप खा लेना... आपके नखरे आज कल बोहोत बढ़ते हो रहे हैं."

नवाज़ ने झूठे गुस्से का नाटक किया और बाइक स्टार्ट करने का बहाना बनाते हुए बोलै,

"अच्छा, तोह फिर ठीक है, मैं चला जाता हूँ अपने घर."

आरती ने फ़ौरन आगे बढ़कर उसकी बाइक की चाबी पर हाथ रखा और बड़े hi रोमांटिक अंदाज़ में मुस्कुराते हुए बोली,

"अरे रुकिए न...! एक बार मेरे हाथ का बना हुआ वेग खाना खाओगे न... तोह आप अपना सारा non-veg भूल जाओगे."

नवाज़ का दिल आरती के इस अंदाज़ पर एक बार फिर आने लगा. उसने बाइक को बंद किया और उसकी आँखों में देखते हुए बोलै,

"अच्छा? ऐसा है क्या...?"

"हाँ...!"

आरती ने ख़ुशी से सर हिला कर इक़रार किया.

नवाज़ ने बाइक को स्टैंड पर लगाया और बोलै,

"थिइक है फिर... चलो मैं भी किचन में चलता हूँ और तेरी थोड़ी हेल्प कर देता हूँ."

आरती ने खिलखिला कर हंसी और उसे रोकते हुए बोली,

"नहीं, बिलकुल नहीं! मुझे पता है आप किचन में मेरी हेल्प करने से ज़्यादा... मुझे डिस्टर्ब करोगे!"

आरती का यह मज़ाक़िया और शर्मीला इशारा सुनकर नवाज़ अंदर hi अंदर बेहद खुश हो गया, क्यूंकि उसे पता था की किचन की उस गर्मी में अब उनका एक नया साइलेंट रोमांस शुरू होने वाला था...

नवाज़ ने बेसब्री से मुस्कुरा कर कहा,

"अच्छा बाबा, non-veg जाने दे... काम से काम अंडा तोह बना के दे दे!"

आरती ने बाइक के हैंडल पर हाथ रख कर साफ मन किया,

"बिलकुल नहीं! उस दिन बनाया, वही बोहोत बड़ी बात थी."

नवाज़ ने उसे और छेड़ते हुए कहा,

"अरे, जब उस दिन बनाया था, तोह आज भी बना दो... इसमें क्या बड़ी बात है."

"नहीं... बोलै न, नहीं!"

आरती ने नखरे से अपना चेहरा घुमा लिया.

नवाज़ ने एक गहरी सांस ली और मायूस होने का नाटक करते हुए बोलै,

"हम्म... लगता है तू अब मुझसे प्यार नहीं करती."

नवाज़ के मुँह से यह बात सुनते hi आरती ने पलट कर उसे देखा. उसके होठों पर एक प्यारी और नखरीली मुस्कान आ गयी. उसने नवाज़ की आँखों में देखते हुए कहा,

"अच्छा जी...! अब प्यार के बहाने मुझे इस तरह इमोशनल ब्लैकमेल कर रहे हो?"

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान दी,

"हाँ... ऐसा hi समझो!"

आरती का दिल नवाज़ के इस भोलेपन और शरारत पर पूरी तरह पिघल गया. उसे अब अपने गुस्से और नखरों पर काबू नहीं रहा. उसने दबे पाऊँ आगे बढ़कर, सब डर भूल कर नवाज़ के गले में अपनी दोनों नरम बाहें दाल दिन. उसने नवाज़ की आँखों में पूरे हक़ और शिद्दत से देखते हुए बेहद नरम आवाज़ में फुसफुसाई:

"आप अच्छी तरह जानती हो न... की मैं आप से कितना बोहोत ज़्यादा प्यार करती हूँ."

इतना कहते hi आरती ने बेसब्री से अपना चेहरा आगे बढ़ाया और नवाज़ के गरम लबों पर एक बेहद hi प्यारी और जुनूनी किश करने लगी. बारिश के भीगे माहौल और बंगलो के गर्दन के इस सुनसान जगह उनका यह खुलेआम इक़रार उनके जिस्म की गर्मी को और बढ़ा रहा था, जहाँ कल खेत में होने वाले मिलान की तड़प अब दोनों के बीच साफ़ महसूस हो रही थी.
 
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