Raveena Tandon Nude Porn Sex Chudai Pics - Page 27 - SexBaba
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1000188309.jpgरवीना टंडन की वो भारी-भारी, झूलती हुई चुचिया… एक-एक चुची दो मुट्ठी में भी नहीं समाती, इतनी रसीली और गर्म कि मुंह में लेकर चूसो तो दूध की तरह मीठा रस निकले। निप्पल्स हमेशा खड़े रहते हैं, जैसे कह रहे हों “काटो, चाबो, दांतों से नोंचो”। ब्लाउज के ऊपर से ही दिखता है कितनी भूखी हैं चूसने की।
 
रवीना टंडन और अनिल थडानी का हनीमून: मालदीव्स की लहरों में डूबी चुदाई की कहानी
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शादी के ठीक एक हफ्ते बाद, 29 फरवरी 2004। मालदीव्स के एक प्राइवेट रिसॉर्ट में – विलासिनी आइलैंड। नीले समंदर की लहरें रिसॉर्ट के ओवरवॉटर विला को चूम रही थीं। विला का फ्लोर-टू-सीलिंग ग्लास वॉल से समंदर दिखाई दे रहा था, जहां डॉल्फिन कूद रहे थे। कमरे में किंग-साइज़ बेड पर सफेद सिल्क की चादरें, हवा में नारियल तेल और वैनिला की खुशबू। बाहर प्राइवेट पूल और सनडेक, जहां सिर्फ़ वो दो थे – दुनिया से कटे हुए।

रवीना ने सफेद बिकिनी पहन रखी थी – जो उसके भरे-भरे स्तनों को मुश्किल से समेट पा रही थी। 35C के दूध ऊपर से उफन रहे थे, और निचली स्लिप उसके 38 के कूल्हों पर तनी हुई। सूरज की आखिरी किरणें उसके गोरे बदन पर पड़ रही थीं, जो शादी की रात के निशानों से अभी भी हल्के लाल थे। अनिल ने सिर्फ़ लूज शॉर्ट्स पहने थे – उसके मोटे लंड का सिल्हूट साफ़ दिख रहा था। वो एक हाथ में कोकोनट वॉटर का गिलास लिए, दूसरे हाथ से रवीना की कमर थामे खड़ा था।

“ये हनीमून तो सुहागरात का एक्सटेंडेड वर्ज़न है, रवी… यहां कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा।” अनिल ने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा, और जीभ से कान की लोब चाट ली।
रवीना का बदन कांप गया। शादी की रात की यादें ताज़ा हो गईं – वो दर्द, वो मज़ा, वो चीखें। “अनिल… यहां तो समंदर भी सुन रहा होगा… शरम आती है…” लेकिन उसकी आंखों में वही भूख थी।

अनिल ने गिलास नीचे रखा और उसे पूल के किनारे ले गया। सूरज डूब रहा था। उसने रवीना की बिकिनी की स्ट्रैप्स खींचे। ऊपरी हिस्सा गिर गया। उसके स्तन बाहर उछल आए – गुलाबी निप्पल्स हवा में तने हुए। अनिल ने दोनों को मुट्ठियों में भरा और दबाया।
“तेरे ये बूब्स… समंदर से भी ज्यादा लहराते हैं।” उसने एक निप्पल मुंह में लिया और ज़ोर से चूसा। दांतों से काटा। रवीना की सांसें तेज़ हो गईं। “आआह्ह… अनिल… दांत मत लगाओ… उफ्फ़… और चूसो… हां…”

अनिल का एक हाथ नीचे सरका – बिकिनी की स्लिप के अंदर। उसकी उंगलियां रवीना की चूत पर फेरने लगीं। वहां पहले से ही गीलापन था। क्लिटोरिस सूजा हुआ। अनिल ने दो उंगलियां अंदर ठूंस दीं और तेज़-तेज़ चलाने लगा। “च्वप-च्वप” की आवाज़ पूल के पानी में घुल गई। रवीना की कमर उछलने लगी।
“तेरी चूत तो हमेशा तैयार रहती है… शादी की रात से ज्यादा गीली लग रही है।”

रवीना ने अनिल के शॉर्ट्स नीचे सरका दिए। उसका 7.5 इंच का मोटा लंड बाहर आ गया – नसें फूली हुईं, टोपे पर पानी चमक रहा। वो घुटनों पर बैठ गई और लंड को मुंह में ले लिया। जीभ से टोपे को चाटा, फिर पूरा मुंह भर लिया। अनिल ने उसके सिर पकड़ लिया और मुंह चोदने लगा। “ग्लक-ग्लक” की आवाज़ें समंदर की लहरों से टकरा रही थीं। रवीना की लार लंड पर लटक रही थी, आंखों में आंसू। लेकिन वो रुकी नहीं – चूसती रही, गेंदों को सहलाती रही।

पांच मिनट बाद अनिल ने उसे खींचा और पूल में धकेल दिया। ठंडा पानी उनके बदनों पर गिरा। अनिल ने रवीना को पूल के किनारे सटा दिया। उसकी टांगें पानी में लहरा रही थीं। अनिल ने बिकिनी स्लिप पूरी तरह फाड़ दी। रवीना की चूत पानी में चमक रही थी – हल्के बाल, गुलाबी लेबिया फैली हुई। अनिल ने अपना मुंह उसकी चूत पर रखा। पानी के छींटों के बीच जीभ अंदर-बाहर। रवीना चीख पड़ी, “आआआह्ह्ह… अनिल… पानी में… उफ्फ़… जीभ और अंदर… मत रुको… आआह्ह्ह…”

अनिल ने तीन उंगलियां डालीं और क्लिटोरिस को चूसा। रवीना का पहला ऑर्गेज़्म आया – चूत से रस पानी में मिल गया। वो कांपती हुई लेट गई। अनिल ने उसे उठाया और विला के अंदर ले गया। बेड पर पटक दिया। अब अंधेरा हो चुका था। सिर्फ़ मंद लाइट और समंदर की चांदनी।

अनिल ने रवीना को डॉगी स्टाइल में किया। उसकी गांड ऊपर – गोल, भरी, शादी की रात के झापड़ों के निशान अभी भी हल्के थे। अनिल ने थूक लगाया और लंड चूत पर रगड़ा।
“तेरी गांड देख कर मन करता है पहले उसे मारूं…”
रवीना डरते हुए बोली, “नहीं… चूत पहले… धीरे डालना…”

अनिल ने एक झटका मारा – पूरा लंड अंदर। रवीना की चीख कमरे में गूंजी, “आआआआह्ह्ह… बहुत गहरा… फाड़ दिया… हां… अब ज़ोर से…” दर्द मज़े में बदल गया। अनिल ने बाल पकड़ कर खींचे और तेज़-तेज़ ठोकने लगा। थप-थप-थप… बेड हिल रहा था। रवीना के स्तन लहरा रहे थे। वो खुद पीछे ठोक रही थी। “चोदो… अपनी बीवी को रंडी बना दो… हनीमून पर चोद-चोद कर थका दो…”

अनिल ने स्पीड बढ़ाई। 10 मिनट बाद रवीना फिर झड़ी – चूत ने लंड को कस लिया। अनिल बाहर निकला और उसे पलटा। मिशनरी में टांगें कंधों पर। लंड फिर अंदर – गहराई तक। रवीना की नाखून अनिल की पीठ पर खरोंच रहे थे। “उफ्फ़… लंड बहुत मोटा… चूत फुल रही है… आह्ह… झाड़ दो अंदर… प्रेग्नेंट कर दो…”

अनिल ने 20-25 जोरदार झटके मारे। गरम वीर्य की धारें रवीना की चूत में छूट गईं। दोनों पसीने से तर, लिपटे लेटे रहे। समंदर की लहरें बाहर गुनगुना रही थीं।

**दूसरी दिन : प्राइवेट बीच पर**
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अगली शाम, प्राइवेट बीच पर। रेत नरम, लहरें पैरों को छू रही थीं। रवीना ने ट्रांसपेरेंट साड़ी पहनी थी – अंदर कुछ नहीं। अनिल ने उसे रेत पर लिटाया। साड़ी ऊपर की और चूत पर मुंह रख दिया। जीभ से चाटा, रेत के कणों के साथ। रवीना की चीखें हवा में उड़ रही थीं। “आह्ह… रेत लग रही है… लेकिन मज़ा आ रहा… चाटो और…”

फिर 69 पोज़िशन – रेत पर। रवीना अनिल का लंड चूस रही थी, अनिल उसकी चूत और गांड चाट रहा था। अनिल ने पहली बार गांड में उंगली डाली। रवीना सिहर गई, लेकिन मज़ा आया। फिर अनिल ने लंड गांड पर रगड़ा। थूक लगाया और धीरे से अंदर किया। रवीना दर्द से चीखी, “नहीं… बहुत तंग है… आह्ह… धीरे…” लेकिन आधे लंड के बाद वो खुद पीछे ठोकने लगी। “हां… गांड चोदो… पूरी कर दो…”

पीछे से गांड मारी, फिर चूत में। रवीना तीन बार झड़ी। अनिल ने वीर्य गांड में ही छोड़ा। रेत पर दोनों लेटे, तारे गिनते।

**तीसरी दिन: स्पा सूट में**
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स्पा सूट में मसाज टेबल पर। ऑयल मसाज के बहाने अनिल ने रवीना को नंगा कर दिया। उसके पूरे बदन पर नारियल तेल मला। स्तनों पर, चूत पर, गांड पर। फिर उंगलियां अंदर। रवीना तेल से चिकनी हो चुकी थी। अनिल ने उसे टेबल पर चढ़ाया और खड़े-खड़े चोदा। स्लिपरी बॉडीज़ आपस में फिसल रही थीं। “उफ्फ़… तेल में चुदाई… कितना स्लिपरी… आह्ह… लंड अंदर फिसल रहा…”

चार राउंड – टेबल पर, फर्श पर, दीवार से सटाकर। रवीना की चूत और गांड दोनों तेल और वीर्य से भरी।

**चौथी दिन: यॉट पर**
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प्राइवेट यॉट पर समंदर के बीच। लहरें यॉट को हिला रही थीं। रवीना डेक पर नंगी लेटी थी। अनिल ने उसे बांध लिया – हाथ-पैर रस्सियों से। BDSM स्टाइल। चाबुक से हल्के झापड़ मारे – स्तनों पर, गांड पर। रवीना चिल्लाई, “मारो… दर्द दो… फिर चोदो…” अनिल ने लंड मुंह में ठूंस दिया। फिर चूत में, गांड में। यॉट की हलचल से झटके और ज़ोरदार। रवीना पागल हो गई – पांच ऑर्गेज़्म। अनिल ने चेहरे पर वीर्य मारा।

**पांचवीं और आखिरी दिन: विला में विदाई**
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वापसी से पहले। विला में। रवीना ने अनिल को बाउंस किया – काउगर्ल में। उसके स्तन उछल रहे थे। “तुम्हारा लंड… मेरा एडिक्शन… रोज़ चाहिए…” अनिल ने नीचे से झटके मारे। फिर रिवर्स काउगर्ल – गांड दिखाते हुए। आखिर में मिशनरी में, आंखों में देखते हुए। “प्रेम से चोदो… बीवी को…” वीर्य चूत में।

हनीमून खत्म हुआ, लेकिन उनकी भूख नहीं। रवीना अनिल की छाती पर लेटी, समंदर देखते हुए बोली, “ये हनीमून तो ज़िंदगी भर चले…” अनिल हंसा, “घर जाकर भी चलेगा, मेरी रंडी रानी।”

मालदीव्स की वो लहरें आज भी उनकी चीखों को याद करती हैं।
 
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### टिप टिप... वो गंदी वाली रात

बारिश ज़ोरों पर थी। सेट पर कोई नहीं बचा था। रवीना की पीली साड़ी अब पूरी तरह उसके जिस्म से चिपकी हुई थी, जैसे दूसरी त्वचा बन गई हो। उसके चुचे ब्रा में कैद होने को तैयार नहीं थे, निप्पल्स सख़्त होकर ब्लाउज़ फाड़ने पर आमादा। कमर के नीचे साड़ी उसकी गाँड की गोलाई को और उभार रही थी, और जाँघों के बीच वो गीली पैंटी अब लथपथ थी, बारिश से नहीं, रंडीपन से।

अक्षय ने उसे दीवार से सटाया और एक झटके में पल्लू खींचकर फेंक दिया।
“साली आज तेरी चूत फाड़ दूँगा।”

रवीना की साँसें फूल रही थीं। उसने कोई जवाब नहीं दिया, बस अपनी चुँनी खुद ही खींचकर साइड फेंकी और ब्लाउज़ के बटन उखाड़ दिए। उसके भारी-भारी बूब्स उछलकर बाहर आए। अक्षय ने दोनों हाथों से मसलना शुरू किया, इतनी ज़ोर से कि निशान पड़ गए।

“आह्ह... मदरचोद... दबा ना ऐसे...” रवीना चिल्लाई।

अक्षय ने अपना मुँह उसके एक चूची पर चिपका दिया। दाँतों से निप्पल काटा, जीभ से चाटा, फिर पूरा बूबा मुँह में ठूँस लिया। दूसरी चूची को उँगलियों से मरोड़ रहा था। रवीना की चीख़ें बारिश में घुल रही थीं।

उसने रवीना का पेटीकोट ऊपर खींचा और पैंटी एक झटके में फाड़ दी। अब रवीना की चिकनी, गीली चूत पूरी नंगी थी। अक्षय ने दो उँगलियाँ सीधे अंदर घुसेड़ दीं।

“हरामज़ादी, कितनी गीली हो चुकी है तेरी चूत... आज तक किसी ने इतना रस नहीं निकाला होगा।”

रवीना की कमर अपने आप उछल रही थी। “चोदो ना... बस चोदो मुझे... लंड अंदर डालो...”

अक्षय ने पैंट खोली। उसका मोटा, काला लंड बाहर आया, नसें फूली हुईं, सुपारा लाल। रवीना ने उसे हाथ में लिया और मुँह में ठूँस लिया। लार टपकाते हुए चूसने लगी, गले तक ले जा रही थी। अक्षय उसके बाल पकड़कर मुँह चोदने लगा।

“हाँ रंडी... चूस... पूरा निगल ले...”

फिर उसने रवीना को घुमाया, दीवार से सटा दिया। उसकी गाँड ऊपर उठी हुई थी। अक्षय ने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ा, फिर एक ही झटके में जड़ तक घुसा दिया।

“आआआह्ह्ह... मादरचोद... फट गई...!” रवीना चीख़ी।

अक्षय ने कोई रहम नहीं किया। कमर पकड़कर पेलना शुरू कर दिया। हर धक्का इतना ज़ोर का कि रवीना का जिस्म आगे धकेल जाता। उसके बूब्स लटककर झूल रहे थे। बारिश उनके ऊपर गिर रही थी, लेकिन दोनों के जिस्म से पसीना और चूत का रस टपक रहा था।

“बोल... किसकी रंडी है तू?”
“तेरी... सिर्फ़ तेरी... चोद मुझे... फाड़ दे...”

अक्षय ने स्पीड और बढ़ा दी। अब वो गाँड पर थप्पड़ मार रहा था। लाल निशान पड़ गए। रवीना की चूत से फच-फच आवाज़ें आ रही थीं। वो झड़ने वाली थी।

“निकल रहा है... आ रहा है... आआह्ह्ह...!”

दोनों एक साथ झड़े। अक्षय ने पूरा माल रवीना की चूत के अंदर ही उड़ेल दिया। दोनों काँपते हुए दीवार से लिपट गए।

बारिश अभी भी नहीं थमी थी।
लेकिन उस रात जो गंदी, ज़ोरदार चुदाई हुई थी,
उसे आज भी “टिप टिप बरसा पानी” सुनकर रवीना की चूत में सिहरन दौड़ जाती है।
उस लंड की याद।
उस पेलाई की याद।
उस रंडीपन की याद। 🔥
 
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अरे वाह भाई, रवीना टंडन की चूत तो आज भी बॉलीवुड का सबसे लज़ीज़, रसीला और गर्मागर्म खज़ाना है!

देखो ज़रा, वो गुलाबी फूल जैसी नाजुक चूत, एकदम मक्खन की तरह मुलायम, ऊपर से हल्की सी क्रीम चढ़ी हुई। टाइट-टाइट जैसे अभी-अभी १८ की हुई हो, लेकिन अंदर से इतनी रसीली कि दस मिनट लगातार पेलो तब भी फचाक-फचाक आवाज़ करती रहेगी।

सोचो, वो अपनी मोटी-मोटी जाँघें चौड़ी करके लेटेगी और बोलेगी, “आजा मेरे राजा, आज ठकुराइन की इज़्ज़त लूट ले!” उसकी चूत में इतना मीठा रस भरा है जैसे कश्मीरी सेब काटो तो लाल-लाल रस बह निकले।

एक बार जीभ लगाओ तो स्वाद ऐसा कि पूरा मुहँ मीठा हो जाए, और लंड डालो तो अंदर की गर्माहट से लगे जैसे भट्टी में घुस गए हो। आज भी उसकी एक झलक याद करो तो लौड़ा तुरंत खड़ा हो जाता है, “मोहरा” वाली स्माइल के साथ चूत खोलेगी तो दिनभर मुठ्ठ मारते रह जाओगे!

रवीना की चूत नहीं, पूरा स्वर्ग का दरवाज़ा है यार, जिसमें डुबकी लगाकर मरना भी जन्नत लगे! 🔥🍯💦😈
 
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अरे यार, अब रवीना टंडन का भीगा बदन सुनो तो लौड़ा अपने आप खड़ा हो जाए... 🚿💦😈

पानी की पतली-पतली धाराएँ उसके माथे से शुरू होकर, गालों को चूमती हुई उन गुलाबी होंठों तक पहुँच रही हैं... होंठ इतने गीले कि चूमो तो रस चूने लगे।
एक बूँद उसके होंठों से टपकी और सीधी उसकी गहरी क्लीवेज में समा गई... वो भारी-भारी बूब्स पानी से चमक रहे हैं, निप्पल्स इतने टाइट और गुलाबी कि चूसने को जीभ खुद-ब-खुद बाहर आ जाए। हर साँस के साथ बूब्स ऊपर-नीचे हो रहे हैं, पानी की बूँदें उन पर लटककर झूम रही हैं जैसे मोती की माला हो।

नीचे उसकी पतली कमर... पानी की लकीरें उसकी नाभि में गिरकर गायब हो रही हैं, जैसे कोई चुंबक खींच रहा हो।
और फिर वो रसीली जाँघें... पानी उसकी चूत के ऊपर से होता हुआ अंदर की गुलाबी दरार में घुस रहा है... चूत के होंठ इतने फूले हुए और चमकदार कि लगे जैसे अभी-अभी चोदकर निकले हों। एक बूँद उसकी क्लिट पर रुकी है, हल्की सी हवा लगी और वो काँप गई – रवीना सिसकारी – “उफ्फ्फ... देख क्या रहा है... आ ना, जीभ से चाट के साफ कर दे...”

पीछे की तरफ़ मुड़ी तो गांड के गोले पानी से भीगे-भीगे चमक रहे हैं, बीच की दरार में पानी की एक पतली नदी बह रही है... उँगली डालो तो फिसल जाए इतनी चिकनी।
बाल पूरी तरह गीले होकर उसकी पीठ और गांड से चिपके हुए, कुछ लटें उसके निप्पल्स पर लिपटी हुईं... वो मुड़ी, आँखें कामुकता से भरी हुईं, होंठ काटते हुए बोली – “पूरा बदन भीग गया है तेरा नाम ले-लेकर... अब आके रगड़ के सुखा दे ना... या यहीं खड़ा रहेगा देखता हुआ?”

भीगा हुआ रवीना का बदन नहीं भाई... पूरा चलता-फिरता सेक्स का झरना है, जिसमें नहाओ तो लंड डूब जाए और बाहर निकलने का नाम ही न ले! 😈🔥🍯💦
 
रवीना टंडन का जिस्म “पिघला हुआ सोना” है – चमकदार, गर्मागर्म, मुलायम और इतना रसीला कि छूते ही हाथ में फैल जाए! ✨🔥🍯
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उनकी गोरी त्वचा पर जब लाइट पड़ती है तो सच में पिघले सोने की तरह चमकती है।
स्तन? दो बड़े-बड़े सोने के घड़े – भारी, गोल, गर्म और इतने मुलायम कि दबाओ तो उंगलियाँ धंस जाएँ।
कमर पतली जैसे कोई सुनार ने बारीकी से गला कर बनाई हो।
हिप्स और गांड? चौड़े, भरे-भरे, पिघले सोने की तरह लहराते हुए – जब चलती हैं तो पूरा जिस्म ऐसे हिलता है जैसे तरल सोना लहरा रहा हो।

पसीना आए तो वो बूँदें मोतियों की तरह उनके क्लिवेज में लुढ़कती हैं,
और जब गीली होकर नाचती हैं तो लगता है कोई सोने की मूर्ति को किसी ने जादू से जिंदा कर दिया हो – हर अंग चमक रहा है, हर कर्व चिलका रहा है।

हाथ लगाओ तो गर्माहट महसूस होगी,
होंठ लगाओ तो मीठा स्वाद आएगा,
और पूरा जिस्म दबाओ तो ऐसा लगेगा जैसे सच में पिघला हुआ सोना हाथों में बह रहा हो – नरम, गर्म और लिजलिजा!

सच में, रवीना का जिस्म नहीं... पूरा खजाना है भाई –
पिघला हुआ सोना, जिसे छूने के लिए दुनिया दीवानी है! 🔥🍒✨
 
रवीना टंडन –वो आती हैं नंगी, सिर्फ़ सोने के ज़ेवर पहने जन्नत की सबसे ख़ूबसूरत हूर-ए-जन्नत का पूरा वर्णन 🌙🕌💎
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जन्नत के सातवें आसमान पर एक महल है, सिर्फ़ सोने और मोतियों का नहीं, बल्कि कामुकता और हुस्न का बना हुआ।
उस महल के बीच में एक हौज़ है – अमृत का नहीं, रवीना के रस का।
और उस हौज़ के किनारे खड़ी होती हैं जन्नत की सबसे ख़ूबसूरत हूर – रवीना टंडन।

### उनका हुस्न ऐसा है कि...

चेहरा:
चाँद भी शर्मा जाए। बड़ी-बड़ी काजल लगी आँखें, जो एक झपकती हैं तो 72 हूरें भी फीकी पड़ जाएँ। होंठ गुलाबी, जैसे अभी-अभी चूमें गए हों। मुस्कान ऐसी कि देखते ही लंड में आग लग जाए।

बाल:
कमर से नीचे तक काले, घुँघराले, लहराते हुए। जब वो सिर हिलाती हैं तो खुशबू फैलती है – चंदन और मुत्र की हल्की मस्की मिली-जुली।

गला:
लंबा, गोरा, ऐसा कि किस करने को जी चाहे। आवाज़ में मस्तानी की वो सेक्सी हुस्की – “आजा मेरे शहीद...” बोलते ही दिल पिघल जाए।

स्तन:
दो बड़े-बड़े रसभरे आम, 38DD, इतने सख़्त और उछाल वाले कि दबाओ तो दूध की फुहार निकले। निप्पल्स डार्क ब्राउन, हमेशा खड़े, जैसे अभी-अभी चूसे गए हों। एक दबाओ तो रवीना कराह उठती हैं – “हाय... पी लो मेरा अमृत...”

कमर:
पतली, नाभि गहरी, ऐसी कि जीभ डालो तो घंटों निकलने का मन न करे।

चूत:
जन्नत की सबसे कीमती चीज़। गुलाबी, रस से लथपथ, होंठ मोटे-मोटे। झाँटें घनी, काली, घुँघराली – जंगल जैसी। अंदर इतनी गर्मी कि लंड घुसते ही पिघल जाए। रस ऐसा मीठा-नमकीन कि एक चाटो तो हमेशा के लिए गुलाम हो जाओ।

गांड:
गोल, भरी हुई, मटकती हुई। एक थप्पड़ मारो तो “टिप टिप बरसा पानी” की धुन खुद बजने लगे। अंदर से इतनी टाइट कि पहली बार घुसते ही रवीना की चीख निकल जाए – “हाय मारा... फाड़ दिया!”

पैर:
लंबे, गोरे, उँगलियाँ ऐसी कि चूसो तो स्वर्ग यहीं लगे।

मुत्र:
सुनहरी शर्बत। जब वो पैर फैलाती हैं और धार छोड़ती हैं – स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स... एक मिनट तक लगातार। स्वाद? शहद मिली शैंपेन, पीने से सीधा जन्नत का VIP पास।

### जन्नत में उनका रुतबा:
सारी हूरें उनकी दासी हैं। जब कोई नेक बंदा आता है तो ऊपरवाला खुद कहते हैं –
“ये लो मेरी सबसे ख़ास हूर... रवीना... बाकी 71 तो सामान्य हैं, ये एक अकेली काफ़ी है।”

वो आती हैं नंगी, सिर्फ़ सोने के ज़ेवर पहने।
फिर शुरू होता है अनंत सुख:
पहले मुत्र पिलाती हैं, फिर दूध, फिर चूत में लेती हैं, फिर गांड...
और हर राउंड के बाद बोलती हैं –
“और चाहिए मेरे राजा? मैं तो अनंत काल तक तेरी गुलाम हूँ...”

जो एक बार रवीना हूर को देख ले, वो जन्नत में भी सिर्फ़ उसी को माँगता है।
बाकी हूरें जलती रहती हैं, पर कर क्या सकती हैं?
रवीना तो रवीना है – जन्नत की सबसे ख़ूबसूरत, सबसे रसदार, सबसे कामुक हूर !
 
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रवीना टंडन शावर में खड़ी है, दोनों हाथों से अपने भारी-भारी स्तनों को उठा-उठा कर धो रही है...
पानी की मोटी धार उसके निप्पल्स पर सीधे टकरा रही है, वो सुर्ख़ गुलाबी निप्पल्स तनके हुए हैं, जैसे कोई मर्द का मुँह चिपका हो।
वो झाग लगा-लगा कर मम्मों को मसल रही है, उंगलियाँ निप्पल्स के चारों तरफ़ घूम रही हैं, हल्के-हल्के चुटकी काट रही है, और होंठों से छोटी-छोटी कराहत निकल रही है... "उफ्फ़... आह्ह..."

स्तन इतने भरे-भरे हैं कि हाथों में समा नहीं रहे, झाग और पानी मिलकर नीचे की तरफ़ लुढ़क रहे हैं, उसकी कमर पर, नाभि में, और फिर चूत की दरार में घुस रहे हैं।
वो एक हाथ से अपना बायाँ मम्मा दबा रही है, दूसरा हाथ नीचे सरका कर चूत पर फेर रही है, उँगलियाँ आपस में रगड़ रही हैं, जैसे खुद को चोदने की तैयारी कर रही हो।

पानी उसके मम्मों से छलक-छलक कर गिर रहा है, हर बार जब वो उन्हें ऊपर उठाती है तो नीचे से गुलाबी एरिओला झलक जाता है, निप्पल्स इतने सख़्त कि लग रहा है दर्द कर रहे हों।
वो आँखें मूंदे, सिर पीछे करके, मम्मों को ज़ोर-ज़ोर से रगड़ रही है, मानो कोई मर्द उन्हें चूस रहा हो, दाँतों से काट रहा हो।

देख के जी चाहता है शावर में घुस जाऊँ, उसके हाथ हटा कर खुद उसके दोनों स्तनों को मुँह में भर लूँ, एक को चूसूँ, दूसरे को मसलूँ, निप्पल्स को दाँतों से खींचूँ जब तक वो चीख न पड़े।
फिर उसे दीवार से सटा के, अपना लंड उसके मम्मों के बीच में फँसा कर टिट-फक करूँ, झाग और पानी से लिपटा हुआ लंड उसके गले तक पहुँचा दूँ।

रवीना अपने स्तनों को धो नहीं रही... वो तो बस हमें पागल कर रही है, चोदने पर मजबूर कर रही है!
 
रवीना के स्तनों की विशेषताएं
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रवीना टंडन के स्तन... भाई, बॉलीवुड की सबसे रसीली और भारी-भारी जोड़ी में से एक हैं।

- बड़े, गोल, और एकदम भरे-भरे... हाथ में आने लायक नहीं, दोनों हाथों से भी मुश्किल से समाने वाले।
- क्लीवेज इतना गहरा कि लंड फँसा के टाइट-फक करने का मन करे।
- निप्पल्स गुलाबी-भूरे, हमेशा थोड़े तने हुए लगते हैं, जैसे अभी-अभी किसी ने चूसा हो।
- उभार ऐसा कि ब्लाउज़ या साड़ी में भी ढक नहीं पाते, हर समय झलक मारते रहते हैं।
- जब हिलते हैं तो लय में हिलोरे लेते हैं, जैसे दो बड़े-बड़े रसीले आम पानी में तैर रहे हों।
- छूने में मुलायम मगर भारी, दबाओ तो उंगलियाँ धंस जाएँ, छोड़ो तो वापस उछल के आकार में आ जाएँ।
- शावर में या भीगे कपड़ों में तो क़यामत ढा देते हैं – पारदर्शी होकर निप्पल्स साफ़ चमकते हैं, पानी की बूँदें उनसे लुढ़कती हैं तो जी चाहता है मुँह लगा के सारी नमी चूस लूँ।
- चूसने-दबाने-काटने लायक बने हैं, एक बार मुँह में लिए तो घंटों छोड़ने का मन न करे।

संक्षेप में: रवीना के मम्मे देखकर सिर्फ़ एक ही ख़याल आता है – इन्हें नंगा करके घंटों चूसो, मसलो, और इनके बीच में लंड फँसाकर झड़ जाओ... फिर दोबारा शुरू करो!
 
रवीना टंडन से नंगा लिपटने का एहसास..
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रवीना टंडन से नंगा लिपटने का एहसास... उफ़्फ़, वो तो मौत से भी शानदार लगेगा!

उसकी नरम-गर्म त्वचा आपके बदन से चिपक जाएगी, जैसे कोई रेशमी चादर पूरा लपेट ले।
उसके भारी-भारी मम्मे आपके सीने पर दब कर फैल जाएँगे, निप्पल्स सख़्त होकर आपकी छाती में चुभेंगे, हर साँस के साथ रगड़ खाएँगे।
उसकी कमर में हाथ डालो तो हड्डियाँ तक महसूस होंगी, लेकिन इतनी मुलायम कि उंगलियाँ धंस जाएँ।

उसकी जाँघें आपकी जाँघों से लिपट जाएँगी, बीच में आपका तना हुआ लंड उसकी गीली चूत से रगड़ खाएगा, बस फिसलन और गर्मी... जैसे कोई आग का गोला आपस में घुल रहा हो।
उसके होंठ आपके गले पर, कान में गर्म साँसें, कभी हल्का सा काट ले, कभी चाट ले... पूरा बदन काँप जाएगा।

उसके लंबे बाल आपके चेहरे पर बिखर जाएँगे, खुशबू ऐसी कि दिमाग़ सुन्न हो जाए।
गांड आपके हाथों में, दोनों गाल दबाओ तो निशान पड़ जाएँ, फिर वापस गोल हो जाएँ... वो सिसकारी भरेगी “और ज़ोर से दबाओ...”

दोनों के पसीने मिल जाएँगे, बदन एक-दूसरे में घुलने लगेंगे... लंड उसकी चूत के होंठों के बीच फँसा रहेगा, बस हल्का सा हिलाओ तो अंदर चला जाए।
वो आपको इतना कस कर लिपटाएगी कि साँस लेना मुश्किल हो जाएगा... लेकिन मर भी जाओ तो कोई ग़म नहीं।

एहसास सिर्फ़ एक ही होगा:
“रवीना से नंगा लिपटना मतलब जन्नत नहीं, जन्नत भी जल जाए ऐसी आग में डूब जाना... और फिर कभी अलग होने का नाम न लेना!”
 
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