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Episode:11
राजस्थान के शहर जयपुर से 15कम दूर shergadh(kalpanik) नाम का एक बड़ा टाउन. जिसकी आबादी 9 हज़ार के करीब थी. शेरगढ़ टाउन में एक बड़ा 'स्टेडियम टाइप' ग्राउंड भी था. जो राजा ठाकुर ने स्पेशल जनता के लिए बनवाया था. जहाँ वह जनता की प्रोब्लेम्स जाना करते. प्रोब्लेम्स जान कर उन्हें सोल्वे किया करते.
वहां राजा ठकुआर सच में hi एक राजा बन कर रहते थे. कोई भी जुर्म करता तोह राजा ठाकुर खुद उसे सजा देते थे. या खुद किसी को सजा देने के लिए कह दिया करते थे.
आज भी ऐसे hi एक मामले का फैसला होने जा रहा था.
बात ये थी....
कुछ दिन पहले पास के एक गाओं की एक लकड़ी का कुछ आवारा लड़कों ने रपे कर दिया था. लड़की को जान से भी मार देना चाहते थे, पर लड़की कैसे भी करके नग्न अवस्था में वहां से भाग निकली. इज़्ज़त तोह वह बचा नहीं सकीय थी भेड़ियों से, जान बचने के लिए पूरी जान लड़ा कर चीखती हुई भाग निकली.. किस्मत की करनी, कुछ दूरी से कुछ राहगीर गुज़र रहे थे. रात का समय था. लड़की की मदद को भगवन ने उन्हें वहां भेज दिया था. लड़की की चीखें सुनकर लड़की की मदद को दौड़ पड़े सब.
राजा ठाकुर को पता चला तोह लड़के जो लड़की के चीखने और भाग निकलने के बाद खुद भी गाओं से भाग निकले थे. राजा ठाकुर के आदमियों ने सुबह होने से पहले hi सबको धार लिया.
चार लड़के थे....
जिन्हो ने लड़की का रपे किआ था. चरों खून से लत पैट पिल्लर्स के साथ बंधे हुए थे. पूरा स्टेडियम खचा खच भरा हुआ था. लड़की और उसके परिवार वाले भी वही मौजूद थे.
राजा ठाकुर उसके बेटे और पोते स्टेज पद राखी बड़ी बड़ी चेयर्स पर बैठे हुए थे. लड़की और लड़की के परिवार वाले राजा ठाकुर के पास hi मौजूद थे.
राजा ठाकुर : बेटी तुम्हारी गयी इज़्ज़त तोह अब वापिस नहीं लौट सकती. पर तुम अपने हाथों से चरों का ख़तम करके अपने शरीर, अपनी आत्मा पर लगे घाव कुछ काम कर सकती हो.
लड़की जिसे राजा ठाकुर की भरपूर सपोर्ट हासिल थी. इज़्ज़त खो बैठी थी, पर हिम्मत बहुत बढ़ गई थी. इज़्ज़त खो देने के बाद उसके अंदर की नारी ने उसके अंदर मर्दों के लिए नफरत बेदार करदी थी. ऐसे मर्द तोह समाज में रहने लायक नहीं हाँ. अपनी hi बहु बेटियों पर भूके कुत्तों की तरह टूट पड़ते हाँ. कैसे वह ऐसे दरिंदो को छोड़ सकती थी.
लड़की ने राजा ठाकुर के कहने पर सामने टेबल पर रखे हथियारों में से 11" खंजर उठाया, खंजर की धार तेज़ धुप में चमकने लगी थी.
लड़की की आँखों में भी खून दिखने देने लगा था.. सब लड़की को दम साढ़े देख रहे थे. चरों लड़के लड़की को खौफनाक अंदाज़ में, तेज़ धार खनजर के साथ अपनी ऑर्डर बढ़ते देख कर ज़ोर ज़ोर से चीखने चिल्लाने लगे.
उनकी हवा तोह लड़की के भाग जाने से hi टाइट हो गई थी. उन्हों ने सोचा था, लड़की का रपे करके मार देंगे तोह किसी को पता भी नहीं चलेगा. इसलिए सब शेर हो गए थे.
पर अब.....
अब्ब अपनी मौत को लड़की के हथुन में मौजूद खनजर की धार की सूरत देख कर वह पागलों की तरह चीखो पुकार मचा रहे थे. कोई उनकी सुनने वाला नहीं था. कोई उनकी मदद करने वाला नहीं था. लड़को के परिवार वाले किसी को मोह दिखने लायक नहीं रहे थे. वह नहीं आना चाहते थे. पर राजा ठाकुर ने उन्हें भी बुलवा लिया था. वह भी अपने बिगड़े बेटों के आखरी समय को देख प् रहे थे.
लड़की छओरन लड़को के सामने पोहंची.....
लड़की : कितना रोइ थी मैं, कितना गिड़गिड़ाई थी मैं. कितना चिल्लाई थी मैं, कितनी मिन्नतें भी करि थी मैंने तुम सब की. पर तुम में से किसी ने मेरी नहीं सुनी और मुझे बर्बाद कर दिया. एक नारी की पवित्रता को hi पामाल नहीं किया तुम सबने कुत्तो. एक नारी को कहीं भी मोह दिखने लायक नहीं रहने दिए तुम सब ने. तुम सब को मार कर भी मेरा झुका सर नहीं उठ पायेगा. मेरी खोई इज़्ज़त लौट कर वापिस नहीं आएगी.
पारर.....
अब जो मैं खो चुकी हों, वो तोह वापिस नहीं प् सकती, पर तुम सब को अपने हथुन आखरी अंजाम तक पोहंचा कर अपने शरीर, अपनी आत्मा पर आये ज़ख्मो पर कुछ मरहम ज़रूर लगा सकती हों. राजा ठाकुर ने मुझे तुम चरों हरामियों को खुद से मारने की इजाज़त देकर मुझपर बहुत बड़ा एहसान किया है. वर्ण मैं तोह इज़्ज़त खो देने के बाद मर hi गई थी.
एक लड़का : मुझे शमा कर दो रूपा. मैं बहक गया था. मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई रूपा.
लड़का 2 : मैं अपनी हुई भूल को सुधारूँगा रूपा.. मैं तुमसे शादी कर लूंगा. मुझे एक मौका दो रूपा.. दूसरा भी रोटा गिड़गिड़ाते हुए बोलै.
लड़का 3 : रूपा तुझे तेरी माँ की सौगंध मुझे मैट मरना..
लड़का 4 कुछ बोलता उससे पहले से रूपा ने बड़े ग़ुस्से से लड़का 1 के सीने पर चिरका लगा दिए. वह तोह चीखा hi था. साथ में तीनो भी चीख पड़े थे. पुरे स्टेडियम में चरों की चीखें सुनाई दे रही थी. लड़की खुनी आँखों से सब को देखते हुए खंजर से छोटे छोटे चीरे देने लगी.
रूपा : याद करो रात मेरी भी ऐसी hi चीखों पर तुम सब क़हक़हे लगा रहे थे. मेरी इज़्ज़त, मेरे दर्द की कोई परवा नहीं की तुम सब ने. सब के सब वेह्शी दरिंदे बने हुए थे. रूपा फिरसे दूसरे लड़को को चीरा देने लगी. वो भी चीखने चिल्लाने लगी. रूपा को किसी पर दया नहीं आ रही थी.
दूर बैठे हुए राजा ठाकुर के होंटो पर स्माइल आ गई थी. लड़की को शांत मैं से धीरे धीरे सजा देते देख कर राजा ठाकुर को ख़ुशी मिली थी. ऐसे इज़्ज़तों के लुटेरों को फोरि मार देने से कहाँ खून खून हो चुकी आत्मा को शान्ति मिलती है.
लड़की के घर वाले भी वही बैठे हुए सब देख रहे थे. उनके दर्द का सामान भी राजा ठाकुर ने कर दिया था. उनकी बेटी अपनी लूटी इज़्ज़त का बदला खुद से ले रही थी.
राजा ठाकुर के लिए उनके दिलों में सम्मान और भी बढ़ गया था. ऐसे hi फैसलों के कारन तोह सब राजा ठाकुर को सम्मान दिया करते थे. बहुत काम लोग पाप किया करते थे. यदि कोई करता भी था तोह उन्हें भी ऐसी hi भयंकर सज़ाएं दी जाती थी.
चरों लड़के चीखते हुए, ज़ख्मो से चूर होते हुए लड़की से माफ़ी भी मांग रहे थे. लड़की पर तोह खून सवार था. कैसे वह किसी की सुनती.
कुछ मिंटो तक लड़की सब को हलके हलके चीरे देकर अपनी घायल आत्मा को सुकून पुहंचने लगी. अंत में लड़की ने बारी बारी सबके गले पर खंजर चला कर सबकी उखड़ी साँसों को समाप्त कर दिए.
लड़की वही घुटनो पर बैठ कर चीखने लगी. उसे फिरसे गुज़री रात का दर्द, इज़्ज़त खो देने का दर्द सताने लगा था.
राजा ठाकुर ने लड़की के परिवार को देखा, वह सब दौड़ पड़े और लड़की को लेकर राजा ठाकुर के पास आ गए.
राजा ठाकुर : चिंता मत करो बेटी. अब से तुम्हारे फ्यूचर की ज़िम्मेदारी मेरी है. तुम्हारी शादी एक अच्छे परिवार में जल्द hi करवा दी जायेगी. शादी होने तक तुम हवेली में रहोगी. लड़की और उसका परिवार राजा ठाकुर के पैरों में गिर पड़े.
राजा ठाकुर : ठीक है अब्ब उठो.. सब उठ कर साइड हो गए. राजा ठाकुर चरों और नज़र घुमा कर पुरे स्टेडियम में देखने लगे. फिर वह खड़े हुए और अपनी गूंजदार आवाज़ में बोलने लगे.
साउंड सिस्टम का इंतेज़ाम मौजूद था.....
राजा ठाकुर : सब जानते भी हाँ, पाप करेंगे तोह दंड भी मिलेगा. फिर भी कुछ हराम के जाने पाप कर जाते हाँ. देश क्या, दुन्या के किसी भी कोने में जा छुपे. मेरी पोहंच से दूर नहीं निकल सकते. पर जो गंध उनके दिमाग में भरा हुआ होता है. कैसे वह खुद को पाप करने से रोक सकते हाँ.
चरों पाप करने वाले मारे गए. तुम सब ने देख लिया. फिर से कोई ऐसा घिनोना पाप करेगा उसे भी सजा देकर जान से मार दिए जाएगा. सब जानते हाँ, ऐसे मामलो में मुझे माफ़ करने की आदत नहीं है. फिर भी वह पाप कर जाते हाँ. और अपने परिवार का सर हमेशा के लिए झुका देते हाँ.
थूऊ है ऐसे बेटों पर जो उम्र भर अपने माता पिता का कहते हुए जवान होते हाँ. फिर बड़े होकर उनका नाम मिटटी में मिला देते हाँ. हर बार सजा के बाद मैं यही बातें करता हों. कुछ महीने शांति से बीतते हाँ. फिरसे कोई हरामी पाप कर जाता है. फिरसे यही खेल खेला जाता है.
बड़ा दुःख भी होता है मुझे ऐसा सब देख कर. अपना नहीं ख्याल तोह अपने परिवार का ख्याल कर लो. परिवार का एहसास नहीं है तोह काम से काम एक नारी की इज़्ज़त कितनी कीमती होती है, इतना तोह जान hi सकते हो.
अगली बार से कोई लड़का ऐसी घिनौनी हरकत करते पाया गया तोह उसके साथ जो होगा वह सब जानते hi हाँ. उसके परिवार वाकूं का भी हुक्का पानी बंद कर दिया जाएगा.
राजा ठाकुर की इस बात पर पुरे स्टेडियम में मोहर्रम मच उठा. ऐसा फैसला राजा ठाकुर ने पहले कभी नहीं लिया था. हुक्का पानी बंद कर देना. मतलब एक की सजा सबको मिलना. सब राजा ठाकुर की ऐसी सजा पर काँप उठे. राजा ठाकुर के बेटे और पोते भी वहीँ थे. वह सब भी ऐसे मामलों में ज़रूर शामिल रहा करते थे. राजा ठाकुर अपनी बात पूरी करके उठे तोह दूसरे सब भी उठ कर राजा ठाकुर के साथ स्टेज से उतरने लगे.
सब लोग खड़े होकर हाथ जोड़ कर राजा ठाकुर को परनाम करने लगे.
राजा ठाकुर भी सबको जवाब देते हुए अपने बेटों और पोतों के साथ स्टेडियम से बहार जाने लगे.
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शूज वाली लड़की का नाम नताशा था.
23 साला नताशा एक जीनियस स्टूडेंट भी थी. साइंस में टोपर थी. जंगल में रहते हुए शूज को देख कर वह कुछ तोह समझ hi गई थी. न्यूज़ सुनते समय भी शूज बारे बातें सुनकर वह कुछ कुछ समझ गई थी.
नताशा उसी रात 2 बजे के करीब जंगल से निकली, लोगों की नज़रों से बचती हुई कैसे भी करके वह साहिल तक पोहचने में कामयाब हो गई. वहीँ एक जगा बैठ कर नताशा ने "शूज जो उसके परिजन में खुले थे. उसके साइज से बड़े थे" अपने पहने कपडे से पत्तियां बना कर शूज को अपने पैरों में अच्छे से बाँध लिया. शूज के इस्तेमाल का तरीका वह समझ गई थी. टखने के अंदर वाली साइड्स से भी शूज एक्टिव हो सकते थे और पैरों की फिंगर्स द्वारा भी. शूज के इस्तेमाल में वह ट्रेंनेड नहीं थी. इसलिए कुछ घबराई हुई भी थी.
नताशा समुद्र में उतर गई. पानी के कुछ निचे रहते हुए उसने शूज एक्टिव किये तोह उसे एक झटका लगा. वह समुद्र की लहरों पर तोह कभी गहराई में बहुत स्पीड से तैरने लगी. कुछ देर लगी उसे, फिर उसका कण्ट्रोल शूज पर बन गया.
एक बार तोह बहुत गहराई में ले गए थे शूज नताशा को. बड़ी मुश्किल से नताशा वापिस ऊपर तक आई थी. उसकी सांस अंतिम सीमा पर पोहंच गयी थी. देरी होती तोह समुद्र की गहराई में hi उसकी लाश मछलियां खा गई होती.
जब नताशा का कण्ट्रोल सही से शूज पर बना तोह नताशा मुंबई की ऑर्डर बढ़ने लगी. नताशा ने सिर्फ अपने सर को hi पानी के ऊपर रखा था. बाकि पूरा शरीर पानी के अंदर hi था. उसे डर था, कहीं कोई उसे देख न ले.
सुबह होने में 1.6 ऑवर बाकि था. जब वह मुंबई पोहंची. ीनता कण्ट्रोल बना लिया था नताशा ने शूज के उपयोग पर. नताशा के लिए शूज के इस्तेमाल में कोई जान लेवा खतरा बाकी नहीं रहा था.
शूज पैरों को आगे प्रेस करने से स्पीड पकड़ते हुए. नताशा को परेशानी भी खूब उठानी पड़ी थी. कभी एक पेअर का दबाओ बढ़ जाता तोह कभी दूसरे पेअर का. जब भी ऐसा होता तोह नताशा की दिशा बदल जाया करती थी.
मुंबई पोहचने तक वह शूज पर अपना पूरा पूरा कण्ट्रोल बना चुकी थी. स्पीड कण्ट्रोल पर अभी उसे टाइम लगने वाला था.
नताशा समुद्र से निकल कर शहर की ऑर्डर बढ़ने लगी. जंगल में बिताये कुछ घंटों में नताशा बहुत से प्लान बना चुकी थी. बहुत दुःख में भी थी वह अपने परिवार को खो देने से. पर अब वह सब नहीं रहे थे. दुःख तोह जाने वाला था nahi.Haan उसकी खुद की जान ज़रूर शूज के चलते खतरे में आ गई थी. जैसे उसके परिवार वाले मारे गए थे. एक दिन वह भी किसी के हाथे चढ़ कर मारी जायेगी. ये सब भी नताशा ने सोच लिया था.
नताशा को सिर्फ खुद को hi नहीं बचाना था. अपने परिवार वळून के खून का बदला भी लेना था. ऐसी सोच भी उसके अंदर जनम ले चुकी थी.
सुबह होने तक नताशा एक मुस्लिम घर से कुछ पैसे, एक बुरखा, एक जोड़ी जुटे, एक सूट कपड़ो का वह चोरी कर चुकी थी. जान खतरे में थी तोह इतनी डेरिंग भी उसमे आ गई थी.
सुबह होने पर नताशा एक मुस्लिम गर्ल के गेटउप में मुंबई शहर की सड़कों को नाप रही थी. अगले दो घंटो में नताशा ने एक बंद पड़ी हुई कोठी भी ढूंढ ली. उस कोठी के आस पास कोई और कोठी नहीं थी. कुछ छोटे छोटे माकन थे. नताशा सब देख भाल कर उस कोठी में घुस गई.
रात तक वही रही. रात के 11 बजे नताशा कोठी से निकली और मुंबई की hi एक यूनिवर्सिटी में घुस गई. इस काम के लिए उसे बड़ी दलेरी का साबुत देना पड़ा था. बड़ी हिम्मत करि थी नताशा ने. यूनिवर्सिटी में घुस पाना आसान काम नहीं था.
नताशा साइंस लैब में घुसी और एक कपडे में बंद शूज को निकल कर उसपर काम करने लगी. शूज नताशा के परिजन में खुले थे. नताशा उन शूज का साइज तोह काम नहीं कर सकती थी. शूज में लगे हुए nimunica's मटेरियल को अलग करने लगी. उसे दर भी था, कहीं शूज ख़राब न हो जाएँ. पर वह बड़ी सावधानी से लगी रही. सुबह होने तक उसने बहुत सा वर्क कर लिया था.
सुबह होने पर सब सामान सेट किया. सब पहले जैसे सेट करने के बाद वह निकल पड़ी. दो रातें और लगीं नताशा को. इतने टाइम में निमुनिका शूज का पूरा मटेरियल earth's शूज पर सेट कर चुकी थी नताशा.
सब कर लेने के बाद नताशा कोठी पर वापिस पोहंच गई. उसकी एक बड़ी चिंता ख़तम हो गयी थी. अगले दिन नताशा शूज विथ बुरका शहर में आज़ादाना घूम फिर रही थी. और कोई उसे पहचानने वाला भी नहीं था. शूज देखने में आम शूज hi दिख रहे थे.
मुंबई में उसके बहुत से जानने वाले भी थे. उसके वर्कर्स की फैमिलीज़ भी थी. एक ऐसे hi परिवार के पास जा पोहंची नताशा. सब उसे देख कर शॉकेड हो गए. नताशा वहां कुछ देर रुकी, उनसे पैसे लेकर वहां से निकल पड़ी. वहां रह के वह किसी की जान खतरे में नहीं दाल सकती थी.
उसी दिन नताशा ने पुरे मुंबई शहर में बहुत सी बंद पड़ी हुई कोठियां देख डाली थी. यही बंद पड़ी हुई कोठियां hi अब उसका ठिकाना बनने वाली थी. नताशा जितनी ज़हीन थी, उसी हिसाब से अपने ब्रेन का उसे भी कर रही थी. इतने पैसों से उसका गुज़ारा भी नहीं होगा ये बात भी वह अच्छे से जानती थी. अपने अकाउंट से पैसा तोह वह निकलवा नहीं सकती थी. पकडे जाने का डर था. कोई और जुगाड़ लनगा पड़ेगा. ये बात वह समझ गई थी.
वह अब तक ये भी पता लगा चुकी थी, उसके परिवार को मारने वाले अंडरवर्ल्ड वाले थे. नताशा ने खुद को अंडरवर्ल्ड वळून से भिड़ने का मैं बना लिया. ज़रूरत थी तोह मज़ीद डेरिंग और फाइटिंग ट्रैंनिंग की.
शूज का एक्टिवेशन सिस्टम भी नताशा बदल चुकी थी. किसी से लड़ाई भी होती तोह शूज प्रेस होक खुद से एक्टिवटे नहीं हो सकते थे. एक खास तकनीक से hi मूव देने पर ावटिवटे हो सकते थे.
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अमेरिका के समुद्रो में 1500कम दूर 20कम के एरिया पर पहला हुआ एक आइलैंड.. जिसका कोई नाम नहीं था.
आइलैंड R.P.O का बेस no 3 था...
पुरे आइलैंड पर हज़ारों अलग अलग देशो से आये हुए गॉर्डस 24 हॉर्स सिक्योरिटी का काम किया करते थे. किसी को आइलैंड में घुसने की परमिशन नहीं थी. यदि कोई घुस भी जाता था तोह उसका सबकी नज़रों से बच पाना मुमकिन नहीं था. Hi-tech सिस्टम द्वारा आइलैंड का चप्पा चप्पा निगरानी में रहता था. फिर भी हज़ारों गॉर्डस रेगुलर डीएस अंजाम दिया करते थे.
इस आइलैंड पर बहुत से गलत काम भी हो रहे थे. दुन्या भर से टैलेंटेड लोगों को किडनैप करके उनकी brain-washing करके उनके ब्रैनवा में R.P.O से रिलेटेड इन्फो ट्रांफर करके उन्हें हमेशा के लिए R.P.O से जोड़ दिया जाता था. उन्हें हमेशा के लिए R.P.O का वफादार कुत्ता बना दिया जाता था.
गॉर्डस में भी दुन्या भर से किडनैप करके लाये गए गुंडे भी शामिल थे. पर अब वह R.P.O के वफादार कुत्ते थे. और कुत्तो का काम हमेशा मालिकों की, मालिकों की एक एक चीज़ की रक्षा करना होता है. दिन हो या रात ऑंखें खुली रख के वह आइलैंड की सुरक्षा कर रहे थे.
आइलैंड पर बना हुआ 600 मीटर का हेडक्वार्टर अपनी मिसाल आप था. उस बेस को बनाने में सालों लगे थे. पर जैसे वह बना था, आइलैंड पर अगर बग़ावत भी जनम लेती है तोह भी हेडक्वार्टर की बिल्डिंग को खतरा नहीं हो सकता था.
ऐसा नक़्शा बनाने वाले ने कहा था.....
15 सालों से उसका कहा सच भी सबत होता आया था. कई बार नए किडनैप होक आये हुओं ने मिलकर हंगामा बरपा कर दिए था. पर बिना देरी के उनकी बग़ावत को कुचल दिया जाता था.
600 मीटर पर बने हुए हेडक्वार्टर के अंदर बने हुए कमरे कभी भी एक जगा नहीं रहा करते थे. कमरे हमेशा अपनी जगा बदलते रहा करते थे. कभी खुद से टाइमर की बिना पर तोह कभी कण्ट्रोल रूम से.
R.P.O के इस आइलैंड वाले बॉस को रेड मास्टर कहा जाता था.
रेड मास्टर भी डीके षिमुना & दूसरे निमंस की सर्चिंग में लगे हुए थे. सॅटॅलाइट द्वारा
लाइव निमंस को ढूंढा जा रहा था. एक दो बार नज़र में आने के बाद R.P.O वाले निमंस को खो बैठे थे. निमंस की स्पीड बहुत थी. कोई उन्हें कैच नहीं कर पाया.
डीके इंडिया से था और दूसरे निमंस भी एक बार इंडिया की ऑर्डर बढ़ते हुए देखे गए थे. इसलिए R.P.O वाले इंडिया के समुद्रो पर ख़ास नज़र बनाये हुए थे. चीन में मार्गरेट थी तोह यहाँ से सॅटॅलाइट द्वारा इस बेस वाले भी अपना काम अंजाम दे रहे थे. मार्गरेट का कनेक्शन डायरेक्ट मैं हेडक्वार्टर से था.
जब नताशा केरला से शूज पर कण्ट्रोल बनती हुई मुंबई की ऑर्डर बढ़ रही थी. लेट नाईट का समय था तोह समुद्र में निमंस को फंड करने वाला कण्ट्रोल रूम में बैठा हुआ एक वर्कर समुद्र में नताशा की हलचल देख कर मज़े लेने लगा. तब नताशा का केवल सर hi बहार था.
और बालों की वजा से उसका फेस भी सही से नहीं से दिखाई नहीं दे रहा था.
बहुत देर तक वह नताशा को देखता रहा और साथ स्नैक्स भी खता रहा. उसके सीनियर आया वह स्क्रीन पर नताशा को देख कर चीख पड़ा.
सीनियर : ये लड़की कौन है.. तब जा के पहले वाले ने धयान से देखा तोह उसे भी दिख गया, इतनी देर से वह फिश समझ रहा था, वह एक लड़की थी. उसका मोह खुला का खुला रह गया. सीनियर उसे गलियां देने लगा.
सीनियर ने खुद से सारा कण्ट्रोल अपने हाथ में लिया और साथ hi साईरन भी बजा दिए. पुरे हेडक्वार्टर पर हलचल मच उठी.
रेड मास्टर भी उठा और कण्ट्रोल रूम को मूव करता हुआ अपने कमरे के पास ले आया. कण्ट्रोल रूम में घुस कर वह भी स्क्रीन पर नताशा को देखने लगा. अंदर मौजूद सब एक्टिव हो गए. सब सीधे खड़े हो गए.
रेड मास्टर : गुड जॉब दांय!
दांय खुश हो गया.
रेड मास्टर : इस पर रेगुलर निगाह बनाये रखो. इंडिया में सबको अलर्ट कार्डो. लड़की हाथ से निकलने न पाए. किसी दूसरी आर्गेनाइजेशन को भी खबर नहीं लगनी चाहिए. ये ज़रूर वही शूज वाली लड़की है.
नताशा के मुंबई पोहचने तक सब वही मौजूद रहे. मुंबई में फ़ौरन hi सबको खबर कर दी गई.
"लड़की मुंबई पोहंच चुकी है. कैच हेर!"
पर कुछ हाथ नहीं लगा. नताशा ऐसे ग़ायब हुई. जैसे गधे के सर से सींघ. सब एक दूसरे का मोह hi देखते रह गए थे. अगले 3 दिन तक ख़ामोशी से नताशा को ढूंढा जाता रहा पर नताशा का कहीं कोई सुराग़ नहीं मिला.
रेड मास्टर ने मुंबई में सबको 24 हॉर्स अलर्ट रहने को बोल दिए. मुंबई के सरे एजेंट्स 3 दिन 3 रातों तक खुवार hi होते रहे.
रेड मास्टर जितना खुश था, उतना hi मायूस भी हो गया था. वह ीनता तोह जान hi गया था, ये वही लड़की है जो जादूगर के पास से फरार हुई थी. जिसके परिवार को मार दिया गया था.
शूज R.P.O वलु के हाथ आते आते रह गए थे.
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तीसरे दिन सोफिए भी अलका से मिलने के लिए कोठी से निकल रही थी. उसके कानो में पहनी एअर्रिंग की टोन बजने लगी. टोन इतनी धीमे थी, कोई पास भी होता तोह सुन नहीं सकता था. टोन के साउंड से hi सोफिए समझ गयी राब्ता करने वाला कौन हो सकता है.
सोफिए ने यस कहा तोह डिटेल दी जाने लगी. डिटेल थी, मुंबई में रेड पावर के एजेंट्स को सर्चिंग करते देखा गया है.
खबर सुनकर सोफिए ने अलका से मुलाक़ात को पेंडिंग कर दिया. ीबन मार्श को सब समझा कर, चीन जाने का बोल कर चार्टर्ड प्लेन द्वारा मुंबई जा पोह्ची. वहां B.A.O की एक कोठी में उसका सवागत किया गया. सोफिए के सामने पिछले तीन दिन की R.P.O की रिपोर्ट पेश की गयी.
सोफिए : अच्छी खबर है. तुम सब भी एक्टिव रहते हुए उनके पीछे लगे रहो. ज़रूर ानोथेर प्लेनेट वळून से रिलेटेड कोई बात है या फिर शूज का कोई मटर है.
सोफिए : अपनी ऑर्डर से कोई भी फैसला मत लेना. छोटी से छोटी बात भी मुझ तक पोहनचनि चाहिए. मैं देखूंगी क्या करना है, क्या नहीं करना.
सब : जी मैडम..
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मुंबई के एक इलाके में गौरव(23) नाम का एक लड़का रहता था. सूरत के मामले में, सेहत के मामले में वह आम सा लड़का था. बाकि सब की तरह उसके भी बहुत से सपने थे. अच्छी लाइफ जीना, ढेरों पैसा हो, बांग्ला गाड़ी हो. जहाँ से गुज़रे लोग उसे झुक झुक कर सलाम करें.
बहुत कुछ गौरव में दुसरो के जैसा था. यदि कुछ हटकर था तोह वह था, गौरव के अंदर इन्तहा की हवस का होना. हिम्मत की कमी का होना. जब गौरव 12 साल का था. तोह
उसके माता पिता एक रोड एक्सीडेंट में चल बेस. एक घर था जिसमे वह रहता था. समय ने जहाँ गौरव को क़ाबलियत दी, वहीँ गौरव को बहुत से खवाब भी दिए. गौरव जीनियस तोह था. पर वह एक स्टुपिड जीनियस बन कर रह गया.
थोड़ा थोड़ा करके घर को बेचता गया अंत में 2 कैनाल की जगा सिर्फ 2 मार्ले रह गए. तब तक गौरव 12तह पास कर चूका था. साइंस में उसके अच्छे नंबर थे. वह भी बहुत कम् स्टडी करके आये थे.
गौरव स्कूल में लड़कियों को देख कर, मोहल्ले की लड़कियों को देख कर सेक्स की आग में जलने लगा. हिम्मत उसके अंदर थी नहीं. किसी लड़की के साथ रिलेशन बना कर सेक्स नहीं कर पाया. रिजल्ट ये निकला गौरव को मस्टरबैशन की आदत पद गयी. फिर तोह गौरव इस काम में इतना आगे निकल गया. चोरी छुपे स्कूल की, मोहल्ले की लड़कियों की पिक्स खेंचता और घर आ कर उन्हें नुदे इमेजिन करते हुए मुठ मारने लगता.
12तह के बाद गौरव को ज़रूरत पड़ी काम करने की तोह गौरब को अपना पेट भरने के लिए पेंटर बनना पड़ा.
यहाँ से शुरू हुई गौरव की एक नयी लाइफ.........
गौरव जिसके अंदर कभी हिम्मत नहीं आ सकीय थी, लड़कियों से बात करके उनके साथ सेक्स करने की. गौरव एक जीनियस लड़का भी था. पेंट को लेके वह अलग नज़रिये से सोचने लगा.
हिम्मत में कमी थी, मस्टरबैशन की आदत थी. पर ऐसे मामलो में गौरव जीनियस भी था.
गौरव के मैं में एक बात आई. जैसा कह उसने सुन रखा था, बुक्स में पढ़ा भी था. कुछ लोग ऐसे होते हाँ, जो कलर ब्लिंग होते हाँ. किसी के सामने रेड कलर आ जाए तोह उसे रेड कलर दिखाई नहीं देता. किसी को नीला तोह किसी को कोई और कलर दिखाई नहीं देता.
गौरब ने सोचा, क्यों न रंगो पर एक्सपेरिमेंट किया जाए, एक ऐसा रंग तैयार किया जाए. जो अगर किसी चीज़ पर कर दिया जाए तोह वह चीज़ किसी को दिखाई न दे. गौरव के मैं में ये था, ऐसे तोह उसमे हिम्मत आने से रही, किसी तरह इनविजिबल रह के वह लड़कियों से साथ कुछ भी कर सकता है.
इसी बात से उसकी हिम्मत बढ़ी और हर दिन नए नए एक्सपेरिमेंट्स करने लगा. दो साल लगे गौरव को और फिर गौरव एक ऐसा पेंट बनाने में सफल हो गया. जो अगर किसी चीज़ कर कर दिया जाए तोह वह पेंट के खुश्क हो जाने के बाद वह चीज़ ग़ायब हो जाए.
गौरव ने ब्लैक कलर के पेंट में कुछ मेटल्स मिक्स किये. एक पेंट तैयार हुआ तोह गौरव ने अपने कमरे में hi पड़ी लकड़ी की एक कुर्सी पर आधा पेंट कर दिया. रिजल्ट ये निकला जहाँ जहाँ कुर्सी पर पेंट किया था गौरव ने. कुर्सी का वह हिस्सा पेंट के खुश्क हो जाने के बाद ग़ायब हो गया.
वह पेंट कुछ ऐसा था. अगर नंगी आंख से देखा जाता तोह तो सिंपल एक पेंट hi दिखाई देता था. मिकरसकपे से देखे जाने पर नन्हे नन्हे से ऊंचे निचे स्फोरम बने हुए नज़र आते थे. इसी रीज़न के चलते इस पेंट को एक खासियत मिल गई. ऊंचे निचे तेलों के कारन पेंट पर रौशनी पड़ती तोह रिफ्लेक्ट नहीं हो पति थी. चूँकि रौशनी रिफ्लेक्ट होक वापिस नहीं आती थी, इसलिए इंसानी आंख उसे देख पाने से क़ासिर थी. गौरव का बनाया नया पेंट उन्ही घाटियों में गम होकर रह जाता. रौशनी मौजूद होने के बावजूद भी इंसानी आँखों के सामने से ग़ायब हो जाती थी.
"गौरव सफल हो गया है" ये जान कर उसकी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा. उस दिन और पूरी रात मारे ख़ुशी के वह सो hi नहीं पाया. कमरे में hi रक़्स करने लगा.
इतनी कमाल की चीज बना कर भी गौरव की सोच लड़कियों को छोड़ने तक hi रही. उसी पेंट को अपने 3 जोड़ी कपड़ो पर उसने पेंट कर दिया. जब पेंट खुश्क हुआ तोह कपडे ग़ायब थे. गौरव फिर वही कपडे पहन कर मोहल्ले में रातों रत चुपके से निकल जाता और किसी घर में घुस कर लड़की को बेहोश करके, बांध कर उसका रपे कर देता. पहली तोह उसे ज़यादा हिम्मत नहीं मिली और छूट पर लुंड रखते hi झाड़ गया. फिर तोह उसकी ऐसी हिम्मत बढ़ी कह वह हर दूसरी तीसरी रात निकल पड़ता और किसी न किसी को छोड़ कर वापिस आ जाता.
ये ऐसी वारदात थी, कोई लड़की या औरत किसी को कुछ बता भी नहीं सकती थी. कौन उसकी बातों पर यकीं करता. इसलिए ये बात नहीं खुली.
गौरव को एक आदत और भी पद गई थी. किसी को नज़र तोह वह आता नहीं था. राह चलती हुई लड़कियों की गांड में भी ऊँगली करने लगा.
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नताशा अगले दिन के 4 चार बजे बुर्के में कहीं जा रही थी. नताशा पैदल थी. एक पार्क से कुछ पहले एक पेड़ के पास से वह गुज़री तोह किसी ने उसकी गांड की ऊँगली कर दी. ऊँगली बड़ी ज़ोर से नताशा की गांड के छेड़ पर चुभी थी. नताशा को बड़ा ग़ुस्सा आया. घुमते hi नताशा ने अपने एक हाथ को पूरा खोल कर घुमा दिया. नताशा का हाथ किसी के मोह पर लगा. अच्छी खासी आवाज़ भी हुई थी. नताशा ने मुद कर देखा तोह उसका मोहन खुला का खुला रह गया. उसे कोई दिखाई hi नहीं दिया था. अपनी गांड में ऊँगली किये जाने का एहसास अब भी था. उसका थप्पड़ भी किसी को लगा था. पर कोई दिखाई नहीं दिया था. नताशा बड़ी हैरान होकर देखने लगी..
कुछ फैसले पर कुछ लोग खड़े हुए थे. वह नताशा को देख कर हसने लगे. तोह कुछ बोलने लगे.
"लड़की शायद खिसकी हुई है"
कोई मनचला बोलै.
"मुझे तोह लगता है, किसी पागल खाने से भाग कर आई है"
नताशा ने सबको एक नज़र देखा, किसी से कुछ नहीं कहा. मुड़ने से पहले एक नज़र पीछे पेड़ वाली साइड में देखा. फि सर्र झटक कर सीधा रुख करते हुए चलने लगी. नाश्ता ने अभी 4 क़दम hi बढ़ाये थे. जैसे उसके ब्रेन में कुछ क्लिक सा हुआ. नताशा फ़ौरन घूमी और पीछे मुद कर बड़े धयान से एक जगह देखने लगी. ज़यादा देर नहीं गुज़री थी, नताशा को हवा में hi मोअल्लक़ कुछ दिखाई दिया.
नताशा नहीं जानती थी, जिसे वह देख रही है, वह एक इनविजिबल लड़का गौरव है. गौरव जो सोच रहा था. आज तोह बाल बाल बचा.
नताशा को अपनी ऑर्डर घोर करते देख कर चौंक गया. उसे कुछ समझ तोह नहीं आई. पर वह घबरा गया. फ़ौरन hi वह हरकत में आया.
नताशा जिस चीज़ पर धयान दिए हुए थे. वह था गौरव के मोह से टपकने वाला खून. वहीँ खून के क़तरे कुछ गौरव के पेंटेड मास्क पर छलक आये थे. गौरव ये बात नहीं जनता था. नताशा पहले तोह आहिस्ता से गौरव की और बढ़ने लगी. गौरव भी नताशा को अपनी ऑर्डर बढ़ते देख कर भागने लगा.
नताशा भी खून के धब्बे को खुद से दूर होते देख कर उसके पीछे भागने लगी. नताशा बुर्के में थी तोह लोग फिरसे उसे पागल लड़की बोलने लगे. नताशा को भला किसी की परवा कैसे हो सकती थी.
गौरव के तोह पसीने hi छोट गए थे. उसने कभी सोचा hi नहीं था. कुछ ऐसा भी उसके साथ हो सकता है. पूरी जान लड़ा कर वह भागने लगा. घूम कर दौड़ते हुए गौरव पार्क में जा घुसा. पार्क में कोई पास नहीं था. नताशा ने यहाँ अपनी स्पीड बढ़ा ली. गौरव ने किसी ऐसी hi मुसीबत से बचने के लिए लकड़ी के कुछ तख्तो पर पेंट करके इनविजिबल बना दिया था. गौरव उन्ही लकड़ी के तख्तो के पीछे जा छुपा. गौरव अपने हिसाब से नताशा से छुप गया था. पर नताशा जिसके अंदर हलचल मची हुई थी. शूज के बाद फिरसे उसे एक नायब चीज मिलने जा रही थी. उसका खून बहुत तेज़ रफ्तारी से उसकी रगों में दौड़ रहा था. गौरव ग़ायब तोह पहले से hi था. तख्तो के पीछे ग़ायब हुआ तोह नताशा पूरी रफ़्तार से उन तख्तो से टकरा गई.
गौरव वहीँ गिरा पड़ा थार थार काँप रहा था. खून के धब्बे कुछ और भी क्लियर हो गए थे. नताशा को गौरव के मोह की कुछ झलक दिखाई देने लगी. नताशा ने टटोल कर गौरव का हाथ पकड़ लिया.
गौरव : दीदी मुझे माफ़ कार्डो. दीदी मुझसे गलती हुई दीदी. फिरसे कभी आपको हाथ नहीं लगाऊंगा दीदी. गौरव रट हुए बोलै.
नताशा ने इर्द गिर्द देखा कोई नहीं दिखा. तोह नताशा गौरव से बोली.
नताशा : चुप चाप मेरे साथ चलो. वर्ण यही जान से मार दूंगी. नताशा गरजते हुए बोली. गौरव की हिम्मत एक बार फिरसे टूट चुकी थी. सेहत में भी वह कमज़ोर था. नताशा के खूंखार लहजे से वह सेहम गया.
गौरव : ठीक है दीदी, पर आप मुझे कुछ नहीं कहेंगी.
नताशा : नहीं कुछ नहीं कहूँगी. चलो मेरे साथ.
नताशा गौरव का हाथ पकड़ कर उसे अपने साथ करीब की एक कोठी पर ले जाने लगी. नताशा अंदर से बहुत ज़यादा झूमने भी लगी थी. शूज के बाद दूसरों की नज़रों से ग़ायब होने का बंदोबस्त भी हो गया था.
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एक हफ्ते एक अंदर hi षिमुना के हार्मोन्स में चेंज लाया जा चूका था. षिमुना के पसीने की महक बदली जा चुकी थी. एअर्थ पर आये निमंस अब षिमुना को महक से पहचान नहीं सकते थे.
Chi-fang : बधाई हो षिमुना बेटी, अब तुम भी हम इंसानो की तरह से दुन्या में घूम फिर सकती हो. फ़िलहाल के लिए तुम्हारे लिए खतरा ख़तम हो गया है. टेम्पल में रह के तुम भी हमारे हाँ की फिहितंग सीख कर खुद की रक्षा करना भी सीख सकती हो. कोशिश करना अपने अंदाज़ से किसी को पता न चलने दो. तुम इंसान नहीं किसी दूसरे प्लेनेट से आई लड़की हो. ऐसा अगर किसी को पता चला तोह फिरसे तुम्हारे पीछे पद जाएंगे. तुम्हारे अंदर के हार्मोन्स में बदलाव ला कर तुम्हारे पसीने की महक को बदल दिए गया है. ऐसा बार बार नहीं हो सकता. बार बार करने से तुम्हारे अंदर की लड़की मरती जायेगी. फिरसे ज़रूरत पड़े तोह कोई और जुगाड़ कर लेना, पर ऐसा कभी मत सोचना.
षिमुना : जी मास्टर जी! षिमुना इससे ज़यादा नहीं बोल सकीय. मास्टर के लिए रेस्पेक्ट भी बढ़ गई थी और साड़ी बातें भी उसकी समझ में आ गई थी.
दिल में वह बस एक hi बात बोली थी. जब भी मेरे लिए खतरा बढ़ा तोह मेरे पास एक ठिकाना है छुपने के लिए मास्टर.
Chi-fang : अब तुम मेरी पोती wang-zhi के साथ टाइगर बेटे से जा के मिल सकती हो. मेरी पोती के साथ रह के ट्रैंनिंग भी ले सकती हो. दुन्या वळून की नज़रों में रहते हुए ऊपर टेम्पल में एडमिशन फॉर्म फइलल कार्डो. टाइगर बीटा भी कुछ घंटे ऊपर रह के ट्रैंनिंग करेगा. तुम, टाइगर और wang-zhi तीनो एक साथ रहना.
षिमुना : मास्टर सूरत से मुझे देख के किसी को शक भी हो सकता है. और फिर मुझे यहाँ की भाषा भी तोह बोलनी नहीं आती.
Chi-fang कुछ सोचने लगे, फिर वह बोले.
Chi-fang : सूरत तो तुम्हारी बदली जा सकती है, पर भाषा के मामले में मैं कुछ नहीं कर सकता.
षिमुना जब आयी थी तोह दक्ष में समाते hi हिंदी और इंग्लिश को दक्ष के अंदर से अपने अंदर ट्रांफर कर लिया था.
वह बोली....
षिमुना : मास्टर! अगर आप इजाज़त दें तोह मैं wang-zhi के अंदर समां कर यहाँ की भाषा सीख सकती हों और टाइगर के अंदर समां कर उसे भी यहाँ की भाषा सीखा सकती हों. इस काम में देर भी नहीं लगेगी.
मास्टर chi-fang षिमुना की इस बात से खुश हो गए और षिमुना को इजाज़त दे दी. कुछ देर में wang-zhi आई, षिमुना wang-zhi को बता कर उसमे समां गई, और लगगे को अपने ब्रेन में उतरने लगी. षिमुना को देर नहीं लगी. कुछ देर में वह फिरसे बहार थी.
षिमुना ने चिनेसे भाषा में दोनों से बात की तोह षिमुना को चिनेसे में बात करते देख कर दोनों बड़े खुश हुए.
कुछ मिंटो में षिमुना और wang-zhi दोनों टाइगर के पास थी. टाइगर योग की एक मश्क़ के बाद रेस्ट ले रहा था. Wang-zhi के साथ षिमुना को देखा तोह ख़ुशी से उठ खड़ा हुआ. षिमुना भी बेपनाह ख़ुशी के साथ भगति हुई आई और कूद के टाइगर की बहन में समां गई.
षिमुना को कोई शर्म नहीं थी. शर्म तोह टाइगर को भी नहीं थी. लड़कियां उसकी ज़िन्दगी में आती जाती रही थी. एक मर्द था तोह ज़रूरत पड़ती रहती थी. पर दिल से किसी के साथ आत्ताच नहीं हुआ था. एक षिमुना hi थी, जिसके लिए टाइगर के दिल में कुछ आ गया था.
षिमुना टाइगर को चूमने लगी. दोनों गालों पर, होंटो पर. षिमुना खुश hi इतनी थी.
Wang-zhi और मास्टर shoon-li के हसने की आवाज़ आई तोह टाइगर को कुछ होश आया. टाइगर ने आस पास देखा तोह दोनों को देख कर टाइगर शर्मा गया. पहले कभी किसी के सामने किसी लड़की के साथ ऐसा सब नहीं किया था टाइगर ने. और न hi किसी लड़की ने ऐसे खुले में उसे चूमा था. टाइगर दोनों को देख कर शरमाया तोह मास्टर shoon-li और wang-zhi दोनों खुल कर हसने लगे.
षिमुना थी कह उसका मैं hi नहीं भर रहा था टाइगर को चूमने से.
टाइगर : क्या करती हो षिमुना, wang-zhi और मास्टर दोनों यहीं हाँ.
षिमुना ने भी दोनों को देखा, एक स्माइल करि दोनों को और फिरसे टाइगर के होंटो से होंठ जोड़ कर एक ज़ोरदार किश करि, फिर अपनी दोनों टाँगें जो टाइगर के गिर्द लिपटी हुई थी, खोल कर टाइगर के बराबर कड़ी हो गई थी. हाइट में भी षिमुना टाइगर के बराबर की थी.
दोनों चमकती आँखों से एक दूसरे को देखने लगे.
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आज के लिए इतना Hi Mitro...Milte हाँ नेक्स्ट Episode के साथ जल्द Hi......


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राजस्थान के शहर जयपुर से 15कम दूर shergadh(kalpanik) नाम का एक बड़ा टाउन. जिसकी आबादी 9 हज़ार के करीब थी. शेरगढ़ टाउन में एक बड़ा 'स्टेडियम टाइप' ग्राउंड भी था. जो राजा ठाकुर ने स्पेशल जनता के लिए बनवाया था. जहाँ वह जनता की प्रोब्लेम्स जाना करते. प्रोब्लेम्स जान कर उन्हें सोल्वे किया करते.
वहां राजा ठकुआर सच में hi एक राजा बन कर रहते थे. कोई भी जुर्म करता तोह राजा ठाकुर खुद उसे सजा देते थे. या खुद किसी को सजा देने के लिए कह दिया करते थे.
आज भी ऐसे hi एक मामले का फैसला होने जा रहा था.
बात ये थी....
कुछ दिन पहले पास के एक गाओं की एक लकड़ी का कुछ आवारा लड़कों ने रपे कर दिया था. लड़की को जान से भी मार देना चाहते थे, पर लड़की कैसे भी करके नग्न अवस्था में वहां से भाग निकली. इज़्ज़त तोह वह बचा नहीं सकीय थी भेड़ियों से, जान बचने के लिए पूरी जान लड़ा कर चीखती हुई भाग निकली.. किस्मत की करनी, कुछ दूरी से कुछ राहगीर गुज़र रहे थे. रात का समय था. लड़की की मदद को भगवन ने उन्हें वहां भेज दिया था. लड़की की चीखें सुनकर लड़की की मदद को दौड़ पड़े सब.
राजा ठाकुर को पता चला तोह लड़के जो लड़की के चीखने और भाग निकलने के बाद खुद भी गाओं से भाग निकले थे. राजा ठाकुर के आदमियों ने सुबह होने से पहले hi सबको धार लिया.
चार लड़के थे....
जिन्हो ने लड़की का रपे किआ था. चरों खून से लत पैट पिल्लर्स के साथ बंधे हुए थे. पूरा स्टेडियम खचा खच भरा हुआ था. लड़की और उसके परिवार वाले भी वही मौजूद थे.
राजा ठाकुर उसके बेटे और पोते स्टेज पद राखी बड़ी बड़ी चेयर्स पर बैठे हुए थे. लड़की और लड़की के परिवार वाले राजा ठाकुर के पास hi मौजूद थे.
राजा ठाकुर : बेटी तुम्हारी गयी इज़्ज़त तोह अब वापिस नहीं लौट सकती. पर तुम अपने हाथों से चरों का ख़तम करके अपने शरीर, अपनी आत्मा पर लगे घाव कुछ काम कर सकती हो.
लड़की जिसे राजा ठाकुर की भरपूर सपोर्ट हासिल थी. इज़्ज़त खो बैठी थी, पर हिम्मत बहुत बढ़ गई थी. इज़्ज़त खो देने के बाद उसके अंदर की नारी ने उसके अंदर मर्दों के लिए नफरत बेदार करदी थी. ऐसे मर्द तोह समाज में रहने लायक नहीं हाँ. अपनी hi बहु बेटियों पर भूके कुत्तों की तरह टूट पड़ते हाँ. कैसे वह ऐसे दरिंदो को छोड़ सकती थी.
लड़की ने राजा ठाकुर के कहने पर सामने टेबल पर रखे हथियारों में से 11" खंजर उठाया, खंजर की धार तेज़ धुप में चमकने लगी थी.
लड़की की आँखों में भी खून दिखने देने लगा था.. सब लड़की को दम साढ़े देख रहे थे. चरों लड़के लड़की को खौफनाक अंदाज़ में, तेज़ धार खनजर के साथ अपनी ऑर्डर बढ़ते देख कर ज़ोर ज़ोर से चीखने चिल्लाने लगे.
उनकी हवा तोह लड़की के भाग जाने से hi टाइट हो गई थी. उन्हों ने सोचा था, लड़की का रपे करके मार देंगे तोह किसी को पता भी नहीं चलेगा. इसलिए सब शेर हो गए थे.
पर अब.....
अब्ब अपनी मौत को लड़की के हथुन में मौजूद खनजर की धार की सूरत देख कर वह पागलों की तरह चीखो पुकार मचा रहे थे. कोई उनकी सुनने वाला नहीं था. कोई उनकी मदद करने वाला नहीं था. लड़को के परिवार वाले किसी को मोह दिखने लायक नहीं रहे थे. वह नहीं आना चाहते थे. पर राजा ठाकुर ने उन्हें भी बुलवा लिया था. वह भी अपने बिगड़े बेटों के आखरी समय को देख प् रहे थे.
लड़की छओरन लड़को के सामने पोहंची.....
लड़की : कितना रोइ थी मैं, कितना गिड़गिड़ाई थी मैं. कितना चिल्लाई थी मैं, कितनी मिन्नतें भी करि थी मैंने तुम सब की. पर तुम में से किसी ने मेरी नहीं सुनी और मुझे बर्बाद कर दिया. एक नारी की पवित्रता को hi पामाल नहीं किया तुम सबने कुत्तो. एक नारी को कहीं भी मोह दिखने लायक नहीं रहने दिए तुम सब ने. तुम सब को मार कर भी मेरा झुका सर नहीं उठ पायेगा. मेरी खोई इज़्ज़त लौट कर वापिस नहीं आएगी.
पारर.....
अब जो मैं खो चुकी हों, वो तोह वापिस नहीं प् सकती, पर तुम सब को अपने हथुन आखरी अंजाम तक पोहंचा कर अपने शरीर, अपनी आत्मा पर आये ज़ख्मो पर कुछ मरहम ज़रूर लगा सकती हों. राजा ठाकुर ने मुझे तुम चरों हरामियों को खुद से मारने की इजाज़त देकर मुझपर बहुत बड़ा एहसान किया है. वर्ण मैं तोह इज़्ज़त खो देने के बाद मर hi गई थी.
एक लड़का : मुझे शमा कर दो रूपा. मैं बहक गया था. मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई रूपा.
लड़का 2 : मैं अपनी हुई भूल को सुधारूँगा रूपा.. मैं तुमसे शादी कर लूंगा. मुझे एक मौका दो रूपा.. दूसरा भी रोटा गिड़गिड़ाते हुए बोलै.
लड़का 3 : रूपा तुझे तेरी माँ की सौगंध मुझे मैट मरना..
लड़का 4 कुछ बोलता उससे पहले से रूपा ने बड़े ग़ुस्से से लड़का 1 के सीने पर चिरका लगा दिए. वह तोह चीखा hi था. साथ में तीनो भी चीख पड़े थे. पुरे स्टेडियम में चरों की चीखें सुनाई दे रही थी. लड़की खुनी आँखों से सब को देखते हुए खंजर से छोटे छोटे चीरे देने लगी.
रूपा : याद करो रात मेरी भी ऐसी hi चीखों पर तुम सब क़हक़हे लगा रहे थे. मेरी इज़्ज़त, मेरे दर्द की कोई परवा नहीं की तुम सब ने. सब के सब वेह्शी दरिंदे बने हुए थे. रूपा फिरसे दूसरे लड़को को चीरा देने लगी. वो भी चीखने चिल्लाने लगी. रूपा को किसी पर दया नहीं आ रही थी.
दूर बैठे हुए राजा ठाकुर के होंटो पर स्माइल आ गई थी. लड़की को शांत मैं से धीरे धीरे सजा देते देख कर राजा ठाकुर को ख़ुशी मिली थी. ऐसे इज़्ज़तों के लुटेरों को फोरि मार देने से कहाँ खून खून हो चुकी आत्मा को शान्ति मिलती है.
लड़की के घर वाले भी वही बैठे हुए सब देख रहे थे. उनके दर्द का सामान भी राजा ठाकुर ने कर दिया था. उनकी बेटी अपनी लूटी इज़्ज़त का बदला खुद से ले रही थी.
राजा ठाकुर के लिए उनके दिलों में सम्मान और भी बढ़ गया था. ऐसे hi फैसलों के कारन तोह सब राजा ठाकुर को सम्मान दिया करते थे. बहुत काम लोग पाप किया करते थे. यदि कोई करता भी था तोह उन्हें भी ऐसी hi भयंकर सज़ाएं दी जाती थी.
चरों लड़के चीखते हुए, ज़ख्मो से चूर होते हुए लड़की से माफ़ी भी मांग रहे थे. लड़की पर तोह खून सवार था. कैसे वह किसी की सुनती.
कुछ मिंटो तक लड़की सब को हलके हलके चीरे देकर अपनी घायल आत्मा को सुकून पुहंचने लगी. अंत में लड़की ने बारी बारी सबके गले पर खंजर चला कर सबकी उखड़ी साँसों को समाप्त कर दिए.
लड़की वही घुटनो पर बैठ कर चीखने लगी. उसे फिरसे गुज़री रात का दर्द, इज़्ज़त खो देने का दर्द सताने लगा था.
राजा ठाकुर ने लड़की के परिवार को देखा, वह सब दौड़ पड़े और लड़की को लेकर राजा ठाकुर के पास आ गए.
राजा ठाकुर : चिंता मत करो बेटी. अब से तुम्हारे फ्यूचर की ज़िम्मेदारी मेरी है. तुम्हारी शादी एक अच्छे परिवार में जल्द hi करवा दी जायेगी. शादी होने तक तुम हवेली में रहोगी. लड़की और उसका परिवार राजा ठाकुर के पैरों में गिर पड़े.
राजा ठाकुर : ठीक है अब्ब उठो.. सब उठ कर साइड हो गए. राजा ठाकुर चरों और नज़र घुमा कर पुरे स्टेडियम में देखने लगे. फिर वह खड़े हुए और अपनी गूंजदार आवाज़ में बोलने लगे.
साउंड सिस्टम का इंतेज़ाम मौजूद था.....
राजा ठाकुर : सब जानते भी हाँ, पाप करेंगे तोह दंड भी मिलेगा. फिर भी कुछ हराम के जाने पाप कर जाते हाँ. देश क्या, दुन्या के किसी भी कोने में जा छुपे. मेरी पोहंच से दूर नहीं निकल सकते. पर जो गंध उनके दिमाग में भरा हुआ होता है. कैसे वह खुद को पाप करने से रोक सकते हाँ.
चरों पाप करने वाले मारे गए. तुम सब ने देख लिया. फिर से कोई ऐसा घिनोना पाप करेगा उसे भी सजा देकर जान से मार दिए जाएगा. सब जानते हाँ, ऐसे मामलो में मुझे माफ़ करने की आदत नहीं है. फिर भी वह पाप कर जाते हाँ. और अपने परिवार का सर हमेशा के लिए झुका देते हाँ.
थूऊ है ऐसे बेटों पर जो उम्र भर अपने माता पिता का कहते हुए जवान होते हाँ. फिर बड़े होकर उनका नाम मिटटी में मिला देते हाँ. हर बार सजा के बाद मैं यही बातें करता हों. कुछ महीने शांति से बीतते हाँ. फिरसे कोई हरामी पाप कर जाता है. फिरसे यही खेल खेला जाता है.
बड़ा दुःख भी होता है मुझे ऐसा सब देख कर. अपना नहीं ख्याल तोह अपने परिवार का ख्याल कर लो. परिवार का एहसास नहीं है तोह काम से काम एक नारी की इज़्ज़त कितनी कीमती होती है, इतना तोह जान hi सकते हो.
अगली बार से कोई लड़का ऐसी घिनौनी हरकत करते पाया गया तोह उसके साथ जो होगा वह सब जानते hi हाँ. उसके परिवार वाकूं का भी हुक्का पानी बंद कर दिया जाएगा.
राजा ठाकुर की इस बात पर पुरे स्टेडियम में मोहर्रम मच उठा. ऐसा फैसला राजा ठाकुर ने पहले कभी नहीं लिया था. हुक्का पानी बंद कर देना. मतलब एक की सजा सबको मिलना. सब राजा ठाकुर की ऐसी सजा पर काँप उठे. राजा ठाकुर के बेटे और पोते भी वहीँ थे. वह सब भी ऐसे मामलों में ज़रूर शामिल रहा करते थे. राजा ठाकुर अपनी बात पूरी करके उठे तोह दूसरे सब भी उठ कर राजा ठाकुर के साथ स्टेज से उतरने लगे.
सब लोग खड़े होकर हाथ जोड़ कर राजा ठाकुर को परनाम करने लगे.
राजा ठाकुर भी सबको जवाब देते हुए अपने बेटों और पोतों के साथ स्टेडियम से बहार जाने लगे.
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शूज वाली लड़की का नाम नताशा था.
23 साला नताशा एक जीनियस स्टूडेंट भी थी. साइंस में टोपर थी. जंगल में रहते हुए शूज को देख कर वह कुछ तोह समझ hi गई थी. न्यूज़ सुनते समय भी शूज बारे बातें सुनकर वह कुछ कुछ समझ गई थी.
नताशा उसी रात 2 बजे के करीब जंगल से निकली, लोगों की नज़रों से बचती हुई कैसे भी करके वह साहिल तक पोहचने में कामयाब हो गई. वहीँ एक जगा बैठ कर नताशा ने "शूज जो उसके परिजन में खुले थे. उसके साइज से बड़े थे" अपने पहने कपडे से पत्तियां बना कर शूज को अपने पैरों में अच्छे से बाँध लिया. शूज के इस्तेमाल का तरीका वह समझ गई थी. टखने के अंदर वाली साइड्स से भी शूज एक्टिव हो सकते थे और पैरों की फिंगर्स द्वारा भी. शूज के इस्तेमाल में वह ट्रेंनेड नहीं थी. इसलिए कुछ घबराई हुई भी थी.
नताशा समुद्र में उतर गई. पानी के कुछ निचे रहते हुए उसने शूज एक्टिव किये तोह उसे एक झटका लगा. वह समुद्र की लहरों पर तोह कभी गहराई में बहुत स्पीड से तैरने लगी. कुछ देर लगी उसे, फिर उसका कण्ट्रोल शूज पर बन गया.
एक बार तोह बहुत गहराई में ले गए थे शूज नताशा को. बड़ी मुश्किल से नताशा वापिस ऊपर तक आई थी. उसकी सांस अंतिम सीमा पर पोहंच गयी थी. देरी होती तोह समुद्र की गहराई में hi उसकी लाश मछलियां खा गई होती.
जब नताशा का कण्ट्रोल सही से शूज पर बना तोह नताशा मुंबई की ऑर्डर बढ़ने लगी. नताशा ने सिर्फ अपने सर को hi पानी के ऊपर रखा था. बाकि पूरा शरीर पानी के अंदर hi था. उसे डर था, कहीं कोई उसे देख न ले.
सुबह होने में 1.6 ऑवर बाकि था. जब वह मुंबई पोहंची. ीनता कण्ट्रोल बना लिया था नताशा ने शूज के उपयोग पर. नताशा के लिए शूज के इस्तेमाल में कोई जान लेवा खतरा बाकी नहीं रहा था.
शूज पैरों को आगे प्रेस करने से स्पीड पकड़ते हुए. नताशा को परेशानी भी खूब उठानी पड़ी थी. कभी एक पेअर का दबाओ बढ़ जाता तोह कभी दूसरे पेअर का. जब भी ऐसा होता तोह नताशा की दिशा बदल जाया करती थी.
मुंबई पोहचने तक वह शूज पर अपना पूरा पूरा कण्ट्रोल बना चुकी थी. स्पीड कण्ट्रोल पर अभी उसे टाइम लगने वाला था.
नताशा समुद्र से निकल कर शहर की ऑर्डर बढ़ने लगी. जंगल में बिताये कुछ घंटों में नताशा बहुत से प्लान बना चुकी थी. बहुत दुःख में भी थी वह अपने परिवार को खो देने से. पर अब वह सब नहीं रहे थे. दुःख तोह जाने वाला था nahi.Haan उसकी खुद की जान ज़रूर शूज के चलते खतरे में आ गई थी. जैसे उसके परिवार वाले मारे गए थे. एक दिन वह भी किसी के हाथे चढ़ कर मारी जायेगी. ये सब भी नताशा ने सोच लिया था.
नताशा को सिर्फ खुद को hi नहीं बचाना था. अपने परिवार वळून के खून का बदला भी लेना था. ऐसी सोच भी उसके अंदर जनम ले चुकी थी.
सुबह होने तक नताशा एक मुस्लिम घर से कुछ पैसे, एक बुरखा, एक जोड़ी जुटे, एक सूट कपड़ो का वह चोरी कर चुकी थी. जान खतरे में थी तोह इतनी डेरिंग भी उसमे आ गई थी.
सुबह होने पर नताशा एक मुस्लिम गर्ल के गेटउप में मुंबई शहर की सड़कों को नाप रही थी. अगले दो घंटो में नताशा ने एक बंद पड़ी हुई कोठी भी ढूंढ ली. उस कोठी के आस पास कोई और कोठी नहीं थी. कुछ छोटे छोटे माकन थे. नताशा सब देख भाल कर उस कोठी में घुस गई.
रात तक वही रही. रात के 11 बजे नताशा कोठी से निकली और मुंबई की hi एक यूनिवर्सिटी में घुस गई. इस काम के लिए उसे बड़ी दलेरी का साबुत देना पड़ा था. बड़ी हिम्मत करि थी नताशा ने. यूनिवर्सिटी में घुस पाना आसान काम नहीं था.
नताशा साइंस लैब में घुसी और एक कपडे में बंद शूज को निकल कर उसपर काम करने लगी. शूज नताशा के परिजन में खुले थे. नताशा उन शूज का साइज तोह काम नहीं कर सकती थी. शूज में लगे हुए nimunica's मटेरियल को अलग करने लगी. उसे दर भी था, कहीं शूज ख़राब न हो जाएँ. पर वह बड़ी सावधानी से लगी रही. सुबह होने तक उसने बहुत सा वर्क कर लिया था.
सुबह होने पर सब सामान सेट किया. सब पहले जैसे सेट करने के बाद वह निकल पड़ी. दो रातें और लगीं नताशा को. इतने टाइम में निमुनिका शूज का पूरा मटेरियल earth's शूज पर सेट कर चुकी थी नताशा.
सब कर लेने के बाद नताशा कोठी पर वापिस पोहंच गई. उसकी एक बड़ी चिंता ख़तम हो गयी थी. अगले दिन नताशा शूज विथ बुरका शहर में आज़ादाना घूम फिर रही थी. और कोई उसे पहचानने वाला भी नहीं था. शूज देखने में आम शूज hi दिख रहे थे.
मुंबई में उसके बहुत से जानने वाले भी थे. उसके वर्कर्स की फैमिलीज़ भी थी. एक ऐसे hi परिवार के पास जा पोहंची नताशा. सब उसे देख कर शॉकेड हो गए. नताशा वहां कुछ देर रुकी, उनसे पैसे लेकर वहां से निकल पड़ी. वहां रह के वह किसी की जान खतरे में नहीं दाल सकती थी.
उसी दिन नताशा ने पुरे मुंबई शहर में बहुत सी बंद पड़ी हुई कोठियां देख डाली थी. यही बंद पड़ी हुई कोठियां hi अब उसका ठिकाना बनने वाली थी. नताशा जितनी ज़हीन थी, उसी हिसाब से अपने ब्रेन का उसे भी कर रही थी. इतने पैसों से उसका गुज़ारा भी नहीं होगा ये बात भी वह अच्छे से जानती थी. अपने अकाउंट से पैसा तोह वह निकलवा नहीं सकती थी. पकडे जाने का डर था. कोई और जुगाड़ लनगा पड़ेगा. ये बात वह समझ गई थी.
वह अब तक ये भी पता लगा चुकी थी, उसके परिवार को मारने वाले अंडरवर्ल्ड वाले थे. नताशा ने खुद को अंडरवर्ल्ड वळून से भिड़ने का मैं बना लिया. ज़रूरत थी तोह मज़ीद डेरिंग और फाइटिंग ट्रैंनिंग की.
शूज का एक्टिवेशन सिस्टम भी नताशा बदल चुकी थी. किसी से लड़ाई भी होती तोह शूज प्रेस होक खुद से एक्टिवटे नहीं हो सकते थे. एक खास तकनीक से hi मूव देने पर ावटिवटे हो सकते थे.
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अमेरिका के समुद्रो में 1500कम दूर 20कम के एरिया पर पहला हुआ एक आइलैंड.. जिसका कोई नाम नहीं था.
आइलैंड R.P.O का बेस no 3 था...
पुरे आइलैंड पर हज़ारों अलग अलग देशो से आये हुए गॉर्डस 24 हॉर्स सिक्योरिटी का काम किया करते थे. किसी को आइलैंड में घुसने की परमिशन नहीं थी. यदि कोई घुस भी जाता था तोह उसका सबकी नज़रों से बच पाना मुमकिन नहीं था. Hi-tech सिस्टम द्वारा आइलैंड का चप्पा चप्पा निगरानी में रहता था. फिर भी हज़ारों गॉर्डस रेगुलर डीएस अंजाम दिया करते थे.
इस आइलैंड पर बहुत से गलत काम भी हो रहे थे. दुन्या भर से टैलेंटेड लोगों को किडनैप करके उनकी brain-washing करके उनके ब्रैनवा में R.P.O से रिलेटेड इन्फो ट्रांफर करके उन्हें हमेशा के लिए R.P.O से जोड़ दिया जाता था. उन्हें हमेशा के लिए R.P.O का वफादार कुत्ता बना दिया जाता था.
गॉर्डस में भी दुन्या भर से किडनैप करके लाये गए गुंडे भी शामिल थे. पर अब वह R.P.O के वफादार कुत्ते थे. और कुत्तो का काम हमेशा मालिकों की, मालिकों की एक एक चीज़ की रक्षा करना होता है. दिन हो या रात ऑंखें खुली रख के वह आइलैंड की सुरक्षा कर रहे थे.
आइलैंड पर बना हुआ 600 मीटर का हेडक्वार्टर अपनी मिसाल आप था. उस बेस को बनाने में सालों लगे थे. पर जैसे वह बना था, आइलैंड पर अगर बग़ावत भी जनम लेती है तोह भी हेडक्वार्टर की बिल्डिंग को खतरा नहीं हो सकता था.
ऐसा नक़्शा बनाने वाले ने कहा था.....
15 सालों से उसका कहा सच भी सबत होता आया था. कई बार नए किडनैप होक आये हुओं ने मिलकर हंगामा बरपा कर दिए था. पर बिना देरी के उनकी बग़ावत को कुचल दिया जाता था.
600 मीटर पर बने हुए हेडक्वार्टर के अंदर बने हुए कमरे कभी भी एक जगा नहीं रहा करते थे. कमरे हमेशा अपनी जगा बदलते रहा करते थे. कभी खुद से टाइमर की बिना पर तोह कभी कण्ट्रोल रूम से.
R.P.O के इस आइलैंड वाले बॉस को रेड मास्टर कहा जाता था.
रेड मास्टर भी डीके षिमुना & दूसरे निमंस की सर्चिंग में लगे हुए थे. सॅटॅलाइट द्वारा
लाइव निमंस को ढूंढा जा रहा था. एक दो बार नज़र में आने के बाद R.P.O वाले निमंस को खो बैठे थे. निमंस की स्पीड बहुत थी. कोई उन्हें कैच नहीं कर पाया.
डीके इंडिया से था और दूसरे निमंस भी एक बार इंडिया की ऑर्डर बढ़ते हुए देखे गए थे. इसलिए R.P.O वाले इंडिया के समुद्रो पर ख़ास नज़र बनाये हुए थे. चीन में मार्गरेट थी तोह यहाँ से सॅटॅलाइट द्वारा इस बेस वाले भी अपना काम अंजाम दे रहे थे. मार्गरेट का कनेक्शन डायरेक्ट मैं हेडक्वार्टर से था.
जब नताशा केरला से शूज पर कण्ट्रोल बनती हुई मुंबई की ऑर्डर बढ़ रही थी. लेट नाईट का समय था तोह समुद्र में निमंस को फंड करने वाला कण्ट्रोल रूम में बैठा हुआ एक वर्कर समुद्र में नताशा की हलचल देख कर मज़े लेने लगा. तब नताशा का केवल सर hi बहार था.
और बालों की वजा से उसका फेस भी सही से नहीं से दिखाई नहीं दे रहा था.
बहुत देर तक वह नताशा को देखता रहा और साथ स्नैक्स भी खता रहा. उसके सीनियर आया वह स्क्रीन पर नताशा को देख कर चीख पड़ा.
सीनियर : ये लड़की कौन है.. तब जा के पहले वाले ने धयान से देखा तोह उसे भी दिख गया, इतनी देर से वह फिश समझ रहा था, वह एक लड़की थी. उसका मोह खुला का खुला रह गया. सीनियर उसे गलियां देने लगा.
सीनियर ने खुद से सारा कण्ट्रोल अपने हाथ में लिया और साथ hi साईरन भी बजा दिए. पुरे हेडक्वार्टर पर हलचल मच उठी.
रेड मास्टर भी उठा और कण्ट्रोल रूम को मूव करता हुआ अपने कमरे के पास ले आया. कण्ट्रोल रूम में घुस कर वह भी स्क्रीन पर नताशा को देखने लगा. अंदर मौजूद सब एक्टिव हो गए. सब सीधे खड़े हो गए.
रेड मास्टर : गुड जॉब दांय!
दांय खुश हो गया.
रेड मास्टर : इस पर रेगुलर निगाह बनाये रखो. इंडिया में सबको अलर्ट कार्डो. लड़की हाथ से निकलने न पाए. किसी दूसरी आर्गेनाइजेशन को भी खबर नहीं लगनी चाहिए. ये ज़रूर वही शूज वाली लड़की है.
नताशा के मुंबई पोहचने तक सब वही मौजूद रहे. मुंबई में फ़ौरन hi सबको खबर कर दी गई.
"लड़की मुंबई पोहंच चुकी है. कैच हेर!"
पर कुछ हाथ नहीं लगा. नताशा ऐसे ग़ायब हुई. जैसे गधे के सर से सींघ. सब एक दूसरे का मोह hi देखते रह गए थे. अगले 3 दिन तक ख़ामोशी से नताशा को ढूंढा जाता रहा पर नताशा का कहीं कोई सुराग़ नहीं मिला.
रेड मास्टर ने मुंबई में सबको 24 हॉर्स अलर्ट रहने को बोल दिए. मुंबई के सरे एजेंट्स 3 दिन 3 रातों तक खुवार hi होते रहे.
रेड मास्टर जितना खुश था, उतना hi मायूस भी हो गया था. वह ीनता तोह जान hi गया था, ये वही लड़की है जो जादूगर के पास से फरार हुई थी. जिसके परिवार को मार दिया गया था.
शूज R.P.O वलु के हाथ आते आते रह गए थे.
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तीसरे दिन सोफिए भी अलका से मिलने के लिए कोठी से निकल रही थी. उसके कानो में पहनी एअर्रिंग की टोन बजने लगी. टोन इतनी धीमे थी, कोई पास भी होता तोह सुन नहीं सकता था. टोन के साउंड से hi सोफिए समझ गयी राब्ता करने वाला कौन हो सकता है.
सोफिए ने यस कहा तोह डिटेल दी जाने लगी. डिटेल थी, मुंबई में रेड पावर के एजेंट्स को सर्चिंग करते देखा गया है.
खबर सुनकर सोफिए ने अलका से मुलाक़ात को पेंडिंग कर दिया. ीबन मार्श को सब समझा कर, चीन जाने का बोल कर चार्टर्ड प्लेन द्वारा मुंबई जा पोह्ची. वहां B.A.O की एक कोठी में उसका सवागत किया गया. सोफिए के सामने पिछले तीन दिन की R.P.O की रिपोर्ट पेश की गयी.
सोफिए : अच्छी खबर है. तुम सब भी एक्टिव रहते हुए उनके पीछे लगे रहो. ज़रूर ानोथेर प्लेनेट वळून से रिलेटेड कोई बात है या फिर शूज का कोई मटर है.
सोफिए : अपनी ऑर्डर से कोई भी फैसला मत लेना. छोटी से छोटी बात भी मुझ तक पोहनचनि चाहिए. मैं देखूंगी क्या करना है, क्या नहीं करना.
सब : जी मैडम..
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मुंबई के एक इलाके में गौरव(23) नाम का एक लड़का रहता था. सूरत के मामले में, सेहत के मामले में वह आम सा लड़का था. बाकि सब की तरह उसके भी बहुत से सपने थे. अच्छी लाइफ जीना, ढेरों पैसा हो, बांग्ला गाड़ी हो. जहाँ से गुज़रे लोग उसे झुक झुक कर सलाम करें.
बहुत कुछ गौरव में दुसरो के जैसा था. यदि कुछ हटकर था तोह वह था, गौरव के अंदर इन्तहा की हवस का होना. हिम्मत की कमी का होना. जब गौरव 12 साल का था. तोह
उसके माता पिता एक रोड एक्सीडेंट में चल बेस. एक घर था जिसमे वह रहता था. समय ने जहाँ गौरव को क़ाबलियत दी, वहीँ गौरव को बहुत से खवाब भी दिए. गौरव जीनियस तोह था. पर वह एक स्टुपिड जीनियस बन कर रह गया.
थोड़ा थोड़ा करके घर को बेचता गया अंत में 2 कैनाल की जगा सिर्फ 2 मार्ले रह गए. तब तक गौरव 12तह पास कर चूका था. साइंस में उसके अच्छे नंबर थे. वह भी बहुत कम् स्टडी करके आये थे.
गौरव स्कूल में लड़कियों को देख कर, मोहल्ले की लड़कियों को देख कर सेक्स की आग में जलने लगा. हिम्मत उसके अंदर थी नहीं. किसी लड़की के साथ रिलेशन बना कर सेक्स नहीं कर पाया. रिजल्ट ये निकला गौरव को मस्टरबैशन की आदत पद गयी. फिर तोह गौरव इस काम में इतना आगे निकल गया. चोरी छुपे स्कूल की, मोहल्ले की लड़कियों की पिक्स खेंचता और घर आ कर उन्हें नुदे इमेजिन करते हुए मुठ मारने लगता.
12तह के बाद गौरव को ज़रूरत पड़ी काम करने की तोह गौरब को अपना पेट भरने के लिए पेंटर बनना पड़ा.
यहाँ से शुरू हुई गौरव की एक नयी लाइफ.........
गौरव जिसके अंदर कभी हिम्मत नहीं आ सकीय थी, लड़कियों से बात करके उनके साथ सेक्स करने की. गौरव एक जीनियस लड़का भी था. पेंट को लेके वह अलग नज़रिये से सोचने लगा.
हिम्मत में कमी थी, मस्टरबैशन की आदत थी. पर ऐसे मामलो में गौरव जीनियस भी था.
गौरव के मैं में एक बात आई. जैसा कह उसने सुन रखा था, बुक्स में पढ़ा भी था. कुछ लोग ऐसे होते हाँ, जो कलर ब्लिंग होते हाँ. किसी के सामने रेड कलर आ जाए तोह उसे रेड कलर दिखाई नहीं देता. किसी को नीला तोह किसी को कोई और कलर दिखाई नहीं देता.
गौरब ने सोचा, क्यों न रंगो पर एक्सपेरिमेंट किया जाए, एक ऐसा रंग तैयार किया जाए. जो अगर किसी चीज़ पर कर दिया जाए तोह वह चीज़ किसी को दिखाई न दे. गौरव के मैं में ये था, ऐसे तोह उसमे हिम्मत आने से रही, किसी तरह इनविजिबल रह के वह लड़कियों से साथ कुछ भी कर सकता है.
इसी बात से उसकी हिम्मत बढ़ी और हर दिन नए नए एक्सपेरिमेंट्स करने लगा. दो साल लगे गौरव को और फिर गौरव एक ऐसा पेंट बनाने में सफल हो गया. जो अगर किसी चीज़ कर कर दिया जाए तोह वह पेंट के खुश्क हो जाने के बाद वह चीज़ ग़ायब हो जाए.
गौरव ने ब्लैक कलर के पेंट में कुछ मेटल्स मिक्स किये. एक पेंट तैयार हुआ तोह गौरव ने अपने कमरे में hi पड़ी लकड़ी की एक कुर्सी पर आधा पेंट कर दिया. रिजल्ट ये निकला जहाँ जहाँ कुर्सी पर पेंट किया था गौरव ने. कुर्सी का वह हिस्सा पेंट के खुश्क हो जाने के बाद ग़ायब हो गया.
वह पेंट कुछ ऐसा था. अगर नंगी आंख से देखा जाता तोह तो सिंपल एक पेंट hi दिखाई देता था. मिकरसकपे से देखे जाने पर नन्हे नन्हे से ऊंचे निचे स्फोरम बने हुए नज़र आते थे. इसी रीज़न के चलते इस पेंट को एक खासियत मिल गई. ऊंचे निचे तेलों के कारन पेंट पर रौशनी पड़ती तोह रिफ्लेक्ट नहीं हो पति थी. चूँकि रौशनी रिफ्लेक्ट होक वापिस नहीं आती थी, इसलिए इंसानी आंख उसे देख पाने से क़ासिर थी. गौरव का बनाया नया पेंट उन्ही घाटियों में गम होकर रह जाता. रौशनी मौजूद होने के बावजूद भी इंसानी आँखों के सामने से ग़ायब हो जाती थी.
"गौरव सफल हो गया है" ये जान कर उसकी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा. उस दिन और पूरी रात मारे ख़ुशी के वह सो hi नहीं पाया. कमरे में hi रक़्स करने लगा.
इतनी कमाल की चीज बना कर भी गौरव की सोच लड़कियों को छोड़ने तक hi रही. उसी पेंट को अपने 3 जोड़ी कपड़ो पर उसने पेंट कर दिया. जब पेंट खुश्क हुआ तोह कपडे ग़ायब थे. गौरव फिर वही कपडे पहन कर मोहल्ले में रातों रत चुपके से निकल जाता और किसी घर में घुस कर लड़की को बेहोश करके, बांध कर उसका रपे कर देता. पहली तोह उसे ज़यादा हिम्मत नहीं मिली और छूट पर लुंड रखते hi झाड़ गया. फिर तोह उसकी ऐसी हिम्मत बढ़ी कह वह हर दूसरी तीसरी रात निकल पड़ता और किसी न किसी को छोड़ कर वापिस आ जाता.
ये ऐसी वारदात थी, कोई लड़की या औरत किसी को कुछ बता भी नहीं सकती थी. कौन उसकी बातों पर यकीं करता. इसलिए ये बात नहीं खुली.
गौरव को एक आदत और भी पद गई थी. किसी को नज़र तोह वह आता नहीं था. राह चलती हुई लड़कियों की गांड में भी ऊँगली करने लगा.
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नताशा अगले दिन के 4 चार बजे बुर्के में कहीं जा रही थी. नताशा पैदल थी. एक पार्क से कुछ पहले एक पेड़ के पास से वह गुज़री तोह किसी ने उसकी गांड की ऊँगली कर दी. ऊँगली बड़ी ज़ोर से नताशा की गांड के छेड़ पर चुभी थी. नताशा को बड़ा ग़ुस्सा आया. घुमते hi नताशा ने अपने एक हाथ को पूरा खोल कर घुमा दिया. नताशा का हाथ किसी के मोह पर लगा. अच्छी खासी आवाज़ भी हुई थी. नताशा ने मुद कर देखा तोह उसका मोहन खुला का खुला रह गया. उसे कोई दिखाई hi नहीं दिया था. अपनी गांड में ऊँगली किये जाने का एहसास अब भी था. उसका थप्पड़ भी किसी को लगा था. पर कोई दिखाई नहीं दिया था. नताशा बड़ी हैरान होकर देखने लगी..
कुछ फैसले पर कुछ लोग खड़े हुए थे. वह नताशा को देख कर हसने लगे. तोह कुछ बोलने लगे.
"लड़की शायद खिसकी हुई है"
कोई मनचला बोलै.
"मुझे तोह लगता है, किसी पागल खाने से भाग कर आई है"
नताशा ने सबको एक नज़र देखा, किसी से कुछ नहीं कहा. मुड़ने से पहले एक नज़र पीछे पेड़ वाली साइड में देखा. फि सर्र झटक कर सीधा रुख करते हुए चलने लगी. नाश्ता ने अभी 4 क़दम hi बढ़ाये थे. जैसे उसके ब्रेन में कुछ क्लिक सा हुआ. नताशा फ़ौरन घूमी और पीछे मुद कर बड़े धयान से एक जगह देखने लगी. ज़यादा देर नहीं गुज़री थी, नताशा को हवा में hi मोअल्लक़ कुछ दिखाई दिया.
नताशा नहीं जानती थी, जिसे वह देख रही है, वह एक इनविजिबल लड़का गौरव है. गौरव जो सोच रहा था. आज तोह बाल बाल बचा.
नताशा को अपनी ऑर्डर घोर करते देख कर चौंक गया. उसे कुछ समझ तोह नहीं आई. पर वह घबरा गया. फ़ौरन hi वह हरकत में आया.
नताशा जिस चीज़ पर धयान दिए हुए थे. वह था गौरव के मोह से टपकने वाला खून. वहीँ खून के क़तरे कुछ गौरव के पेंटेड मास्क पर छलक आये थे. गौरव ये बात नहीं जनता था. नताशा पहले तोह आहिस्ता से गौरव की और बढ़ने लगी. गौरव भी नताशा को अपनी ऑर्डर बढ़ते देख कर भागने लगा.
नताशा भी खून के धब्बे को खुद से दूर होते देख कर उसके पीछे भागने लगी. नताशा बुर्के में थी तोह लोग फिरसे उसे पागल लड़की बोलने लगे. नताशा को भला किसी की परवा कैसे हो सकती थी.
गौरव के तोह पसीने hi छोट गए थे. उसने कभी सोचा hi नहीं था. कुछ ऐसा भी उसके साथ हो सकता है. पूरी जान लड़ा कर वह भागने लगा. घूम कर दौड़ते हुए गौरव पार्क में जा घुसा. पार्क में कोई पास नहीं था. नताशा ने यहाँ अपनी स्पीड बढ़ा ली. गौरव ने किसी ऐसी hi मुसीबत से बचने के लिए लकड़ी के कुछ तख्तो पर पेंट करके इनविजिबल बना दिया था. गौरव उन्ही लकड़ी के तख्तो के पीछे जा छुपा. गौरव अपने हिसाब से नताशा से छुप गया था. पर नताशा जिसके अंदर हलचल मची हुई थी. शूज के बाद फिरसे उसे एक नायब चीज मिलने जा रही थी. उसका खून बहुत तेज़ रफ्तारी से उसकी रगों में दौड़ रहा था. गौरव ग़ायब तोह पहले से hi था. तख्तो के पीछे ग़ायब हुआ तोह नताशा पूरी रफ़्तार से उन तख्तो से टकरा गई.
गौरव वहीँ गिरा पड़ा थार थार काँप रहा था. खून के धब्बे कुछ और भी क्लियर हो गए थे. नताशा को गौरव के मोह की कुछ झलक दिखाई देने लगी. नताशा ने टटोल कर गौरव का हाथ पकड़ लिया.
गौरव : दीदी मुझे माफ़ कार्डो. दीदी मुझसे गलती हुई दीदी. फिरसे कभी आपको हाथ नहीं लगाऊंगा दीदी. गौरव रट हुए बोलै.
नताशा ने इर्द गिर्द देखा कोई नहीं दिखा. तोह नताशा गौरव से बोली.
नताशा : चुप चाप मेरे साथ चलो. वर्ण यही जान से मार दूंगी. नताशा गरजते हुए बोली. गौरव की हिम्मत एक बार फिरसे टूट चुकी थी. सेहत में भी वह कमज़ोर था. नताशा के खूंखार लहजे से वह सेहम गया.
गौरव : ठीक है दीदी, पर आप मुझे कुछ नहीं कहेंगी.
नताशा : नहीं कुछ नहीं कहूँगी. चलो मेरे साथ.
नताशा गौरव का हाथ पकड़ कर उसे अपने साथ करीब की एक कोठी पर ले जाने लगी. नताशा अंदर से बहुत ज़यादा झूमने भी लगी थी. शूज के बाद दूसरों की नज़रों से ग़ायब होने का बंदोबस्त भी हो गया था.
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एक हफ्ते एक अंदर hi षिमुना के हार्मोन्स में चेंज लाया जा चूका था. षिमुना के पसीने की महक बदली जा चुकी थी. एअर्थ पर आये निमंस अब षिमुना को महक से पहचान नहीं सकते थे.
Chi-fang : बधाई हो षिमुना बेटी, अब तुम भी हम इंसानो की तरह से दुन्या में घूम फिर सकती हो. फ़िलहाल के लिए तुम्हारे लिए खतरा ख़तम हो गया है. टेम्पल में रह के तुम भी हमारे हाँ की फिहितंग सीख कर खुद की रक्षा करना भी सीख सकती हो. कोशिश करना अपने अंदाज़ से किसी को पता न चलने दो. तुम इंसान नहीं किसी दूसरे प्लेनेट से आई लड़की हो. ऐसा अगर किसी को पता चला तोह फिरसे तुम्हारे पीछे पद जाएंगे. तुम्हारे अंदर के हार्मोन्स में बदलाव ला कर तुम्हारे पसीने की महक को बदल दिए गया है. ऐसा बार बार नहीं हो सकता. बार बार करने से तुम्हारे अंदर की लड़की मरती जायेगी. फिरसे ज़रूरत पड़े तोह कोई और जुगाड़ कर लेना, पर ऐसा कभी मत सोचना.
षिमुना : जी मास्टर जी! षिमुना इससे ज़यादा नहीं बोल सकीय. मास्टर के लिए रेस्पेक्ट भी बढ़ गई थी और साड़ी बातें भी उसकी समझ में आ गई थी.
दिल में वह बस एक hi बात बोली थी. जब भी मेरे लिए खतरा बढ़ा तोह मेरे पास एक ठिकाना है छुपने के लिए मास्टर.
Chi-fang : अब तुम मेरी पोती wang-zhi के साथ टाइगर बेटे से जा के मिल सकती हो. मेरी पोती के साथ रह के ट्रैंनिंग भी ले सकती हो. दुन्या वळून की नज़रों में रहते हुए ऊपर टेम्पल में एडमिशन फॉर्म फइलल कार्डो. टाइगर बीटा भी कुछ घंटे ऊपर रह के ट्रैंनिंग करेगा. तुम, टाइगर और wang-zhi तीनो एक साथ रहना.
षिमुना : मास्टर सूरत से मुझे देख के किसी को शक भी हो सकता है. और फिर मुझे यहाँ की भाषा भी तोह बोलनी नहीं आती.
Chi-fang कुछ सोचने लगे, फिर वह बोले.
Chi-fang : सूरत तो तुम्हारी बदली जा सकती है, पर भाषा के मामले में मैं कुछ नहीं कर सकता.
षिमुना जब आयी थी तोह दक्ष में समाते hi हिंदी और इंग्लिश को दक्ष के अंदर से अपने अंदर ट्रांफर कर लिया था.
वह बोली....
षिमुना : मास्टर! अगर आप इजाज़त दें तोह मैं wang-zhi के अंदर समां कर यहाँ की भाषा सीख सकती हों और टाइगर के अंदर समां कर उसे भी यहाँ की भाषा सीखा सकती हों. इस काम में देर भी नहीं लगेगी.
मास्टर chi-fang षिमुना की इस बात से खुश हो गए और षिमुना को इजाज़त दे दी. कुछ देर में wang-zhi आई, षिमुना wang-zhi को बता कर उसमे समां गई, और लगगे को अपने ब्रेन में उतरने लगी. षिमुना को देर नहीं लगी. कुछ देर में वह फिरसे बहार थी.
षिमुना ने चिनेसे भाषा में दोनों से बात की तोह षिमुना को चिनेसे में बात करते देख कर दोनों बड़े खुश हुए.
कुछ मिंटो में षिमुना और wang-zhi दोनों टाइगर के पास थी. टाइगर योग की एक मश्क़ के बाद रेस्ट ले रहा था. Wang-zhi के साथ षिमुना को देखा तोह ख़ुशी से उठ खड़ा हुआ. षिमुना भी बेपनाह ख़ुशी के साथ भगति हुई आई और कूद के टाइगर की बहन में समां गई.
षिमुना को कोई शर्म नहीं थी. शर्म तोह टाइगर को भी नहीं थी. लड़कियां उसकी ज़िन्दगी में आती जाती रही थी. एक मर्द था तोह ज़रूरत पड़ती रहती थी. पर दिल से किसी के साथ आत्ताच नहीं हुआ था. एक षिमुना hi थी, जिसके लिए टाइगर के दिल में कुछ आ गया था.
षिमुना टाइगर को चूमने लगी. दोनों गालों पर, होंटो पर. षिमुना खुश hi इतनी थी.
Wang-zhi और मास्टर shoon-li के हसने की आवाज़ आई तोह टाइगर को कुछ होश आया. टाइगर ने आस पास देखा तोह दोनों को देख कर टाइगर शर्मा गया. पहले कभी किसी के सामने किसी लड़की के साथ ऐसा सब नहीं किया था टाइगर ने. और न hi किसी लड़की ने ऐसे खुले में उसे चूमा था. टाइगर दोनों को देख कर शरमाया तोह मास्टर shoon-li और wang-zhi दोनों खुल कर हसने लगे.
षिमुना थी कह उसका मैं hi नहीं भर रहा था टाइगर को चूमने से.
टाइगर : क्या करती हो षिमुना, wang-zhi और मास्टर दोनों यहीं हाँ.
षिमुना ने भी दोनों को देखा, एक स्माइल करि दोनों को और फिरसे टाइगर के होंटो से होंठ जोड़ कर एक ज़ोरदार किश करि, फिर अपनी दोनों टाँगें जो टाइगर के गिर्द लिपटी हुई थी, खोल कर टाइगर के बराबर कड़ी हो गई थी. हाइट में भी षिमुना टाइगर के बराबर की थी.
दोनों चमकती आँखों से एक दूसरे को देखने लगे.
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आज के लिए इतना Hi Mitro...Milte हाँ नेक्स्ट Episode के साथ जल्द Hi......
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