Samraat ..The Tales of Debauchery, Hate & Revenge - Page 6 - SexBaba
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Samraat ..The Tales of Debauchery, Hate & Revenge

Episode:18

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*इन्सेस्ट की शुरुआत*

पुजारी : अलका बेटी तुम्हारे ये टिल कबसे है, क्या ये बनाया हुआ टिल है.

अलका : पुजारी जी कैसे बात करते हाँ, क्या टिल भी बनाया जा सकता है.

पुजारी मैं में-- शमा करना अलका बेटी, तुम बहुत समय बाद आई हो तोह परख करना ज़रूरी है.

पुजारी ऐसे hi कुछ और सवाल अलका से पूछता गया. और अलका पुजारी को जवाब देती गई.

पुजारी फिर बोलै : अलका बेटी क्या तुम अपने खानदानी राज़ के बारे में कुछ जानती हो.

अलका हैरान होक : कैसा राज़ पुजारी जी, मैं किसी राज़ के बारे में नहीं जानती.

पुजारी अलका की आँखों में देख रहा था. अलका की आँखों में देख के पुजारी को लगा, अलका सच में कुछ नहीं जानती. ये देख के पुजारी जी कुछ पुरसुकून हो गए..

पुजारी अलका के टिल को देख के, अलका की आँखों में देख संतुष्ट तोह हो गए थे. पर सतीश या दूसरों की और से वह संतुष्ट नहीं हो प् रहे थे. उन्हें कुछ सही नहीं लग रहा था. पर अलका भी तो अब लौट आई थी. और जो अलका परिवार का राज़ अलका की मिल्कयत था. वह अलका को लौटना भी ज़रूरी था.

पुजारी जी कश्मकश में भी थे और अलका को राज़ बता कर अपना धरम, अपना करम भी बिभा देना चाहते थे. कितने समय वो और जीते, मर जाते तोह फिर वह राज़ उनके साथ hi इस दुन्या से चला जाता.

पर पुजारी जी एक बात नहीं जानते थे, जिस राज़ को अपने तक hi समझ रहे हाँ, बरसों पहले hi वह राज़ कुछ लोग जान चुके थे, और उसी राज़ के कारण hi अलका का पूरा परिवार मारा जा चूका था. जिसे अबतक दुश्मनी समझा जा रहा था, वह दुश्मनी नहीं थी, वो राज़ के चलते हुई एक घटना थी. राजा ठाकुर भी अलका परिवार को मारने वळून को मार कर समझ रहे थे. वह अपने दोस्त के परिवार की हत्याओं का बदला ले चुके हाँ. पर ऐसा नहीं था. ऐसे तोह केवल उन्हें दिखाया गया था. असली मोहरे तोह और थे. जिनके बारे में कोई नहीं जनता था. पुजारी भी नहीं जनता था.

अलका : पुजारी जी आप मुझे मेरे खानदानी राज़ बारे सब बता क्यों नहीं देते.

पुजारी जी सतीश और सबको देखते हुए : अलका बेटी मुझे लगा था, तुम जब कभी भी लौटोगी तोह तुम्हारे साथ राजा ठाकुर होंगे. पर वो नहीं आये.

पुजारी जी और बस्ती के कुछ लोग अलका और राजा ठाकुर बारे इन्फो रखते थे. खुद से कभी सामने नहीं आये थे. कभी लौटने का नहीं कह सकते थे. अलका मालिकान थी और सब ालक के गुलाम. कैसे कह सकते थे.

एक यही बात भी अलका में ऐटिटूड को बढ़ावा दे दिए करती थी.

अलका : पुजारी जी मई लौट आयी हों न. और फिर दादा जी ने भी हमें आने से मन नहीं किया, आप नहीं जानते, वहां का सारा बिज़नेस दुश्मनो ने बर्बाद कर दिए है. दादा जी इसी कारण यहाँ नहीं आये हाँ. वहां वो सब देख रहे हाँ.

पुजारी जी एक लम्बी सांस लेके बोले.. बात ये है अलका बेटी, यहाँ से 6 मिले दूर के पहाड़ों में एक गुफा है, वहां केवल तुम hi जा सकती हो वो भी अपने पति के साथ. बिना अपने पति के तुम भी वहां कभी नहीं जा सकती अलका बेटी.

अलका बात सुनके हैरान रह गई थी. पुजारी जी फिर अलका को उस गफा में क्या है, उस बारे में बताने लगे. सब सुन और जान कर अलका पर हैरातो के पहाड़ टूट रहे थे. वही पुजारी जी सतीश और दूसरों को देख के कुछ परेशान थे. उनके भाव भी पुजारी जी को चिंता में डाले हुए थे.

पीर कुछ सोच के पुजारी जी के होंटो पर मुस्कान आ गई.. उस गुफा में जाने वाला, अगर कोई लालची हुआ तोह मारा जाएगा. वहां अलका केवल अपने पति के साथ, मैं के सच्चे पति के साथ hi जा सकती थी. कोई और मैं का पापी जाता तोह मारा जाता.

सब सुनके अलका बहुत एक्ससिटेड भी हो गई थी और डर भी गई थी. ऐसा सब उसने क़िस्से कहानियो में सुना था. ऐसा कोई राज़ उसके खंडन के साथ भी जुड़ा हुआ है, अलका को यकीं hi नहीं आ रहा था.

अलका ने अपनी मर्ज़ी बता दी थी. दिन के 2 बजे शादी का महूरत घोषित किया गया. सब तैयारियों में लग गए.

हवेली के hi एक कमरे की खिड़की में कड़ी हुई पायल सिंह दूर के पहाड़ों के मनाज़िर में खोई हुई थी. विनय सिंह पायल सिंह के चाचा का बीटा कमरे में दाखिल हुआ तोह पायल सिंह धयान नहीं दे पाई. विनय सिंह आगे बढ़ा और पीछे से पायल सिंह को हुग कर लिया. पायल सिंह को झटका लगा. मुर के देखा तोह विनय था. पायल सिंह ने लम्बी सांस लेके अपने चेहरे पर आये ग़ुस्से वाले भाव पर काबू पाया और विनय से बोली.

पायल : विनय ये क्या बेहूदगी है. छोडो मुझे! ये कैसे आज तुमने मुझे पदक है. पायल सिंह का घुसा पूरा नहीं गया था. पहले कभी विनय ने कोई ऐसी हरकत नहीं करि थी. इसी कारण पायल सिंह खुद पर काबू पा गई थी. ज़ोर लगा कर विनय से अलग हुई तोह विनय पायल सिंह को ऐसी नज़रों से देखने लगा. जो समझते हुए पायल सिंह को झटका लगा. विनय सिंह पयत के फिगर को घूर रहा था.

एक दो बार वहां भी पायल सिंह ने विनय को ऐसे खुद को घूरते देखा था. पर ज़यादा धयान नहीं दे पाई थी. अब उसकी 6तह सेंस जो लड़कियों में ख़ास हुआ करती है, सिग्नल देने लगी, विनय क्यों उसे देख रहा है..

पायल सिंह को बड़ा ग़ुस्सा आया. वो चीख पड़ी.

पायल सिंह : विनननननययययय!! तुम्हारी नज़रों में ऐसी गंदगी कबसे आ गई. छियई अपनी hi बेहेन को कोई ऐसे देखता है क्याआ.

विनय आगे बढ़ा और फिरसे पायल सिंह को अपनी बहन में भरने लगा तोह पायल सिंह दो कदम पीछे को हैट गई.

विनय कमीनेपन से हसने लगा : पायल डार्लिंग मैं कबसे आपके इस शराबी बदन का दीवाना हों. कसम से तुम्हारे जैसी कोई भी लड़की इस दुन्या में नहीं है. पास आने पर hi मैं बहकने लगता हों. जब मुझे तुम्हारे जिसम की शराब पिने का मौका मिलेगा तोह.. उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ मैं बयां नहीं कर सकता, तब मेरी कैसी हालत होगी. केवल इमेजिन hi कर सकता हों.. कसम से अभी से खुद पर कण्ट्रोल टूटने लगा है.

पायल सिंह को ऐसा ग़ुस्सा आया विनय सिंह की बात पर. वो आगे बढ़ी और खेंच के एक करारा थप्पड़ विनय सिंह के गाल पर झाड़ दिए.

पायल सिंह : चीखती हुई... मैं सोच भी नहीं सकती थी, हमारे खंडन में कोई ऐसी घट्टिया सोच रखने वाला भी हो सकता है. छियई दफा हो जाओ मेरे कमरे से. मई तुम्हे फिरसे देखना तोह दूर, तुम पर थूकना भी नहीं चाहती.. गेट लॉस्ट... पायल सिंह बहुत ज़यादा लॉडली चीख चीख कर बोल रही थी.

परची, ऋचा जिनके रूम पास में hi थे. वो कमरे में एंटर हुई तोह देखा पायल सिंह विनय पर चीख रही हाँ. दोनों भागी भागी पायल सिंह के पास पोहंची.

परची : क्या हुआ दीदी, आप इतने ग़ुस्से में क्यों हाँ, क्या किया है भाई ने.

ऋचा : हाँ दीदी भाई के गाल रेड हाँ, ज़रूर आपने भाई को मारा है. क्यों दीदी आपने भाई को क्यों मारा. दोनों के एक्सप्रेशन कमरे में आते hi पायल सिंह की फवौर में थे.

अंदर मैं में कुछ और था.


दोनों कभी पायल सिंह को तोह कभी विनय को देख रही थी. विनय सिंह दोनों बहनो के आने पर भी घबराया नहीं था. पायल सिंह के थप्पड़ पर ज़रूर उसका ग़ुस्सा बढ़ गया था.

पायल सिंह : घर वाली हवेली में भी एक दो बार मैंने इसकी गन्दी नज़रों को खाद पर पाया था, परची. पर धयान नहीं दे पाई थी. मैं नहीं जानती थी, हमारा भाई इतना नीच भी हो सकता है. ऐसी घट्टिया हरकत भी कर सटका है.

परची : कैसी हरकत! परची को अपने भाई के लिए पायल सिंह के ऐसे शब्द सहन नहीं हुए. पर वो खुद को नार्मल रखते हुए पूछने लगी.

पायल सिंह विनय को देखती हुई : अब लाओ अपनी गन्दी ज़ुबान पर वही शब्द घट्टिया इंसान. अपनी बहनो के सामने बोलो, जो कुछ देर पहले मेरे सामने बोल रहे थे.

विनय अपनी बहनो को देखते हुए आगे बढे और पायल सिंह के पास पोहंच के अपनी बहनो के सामने hi पायल सिंह को अपनी बहन में भर लिया. पायल सिंह जो ये समझ रही थी, विनय अपनी बहनो के सामने ऐसा कुछ नहीं कर सकेगा. पर वह गलत सबत हुई थी.

पायल सिंह इस बार चिकि नहीं, वो शॉकेड हो गई थी. परची, ऋचा पहले तो देख के हैरान हुई. फिर एक दूसरे को देख के हस्ते हुए विनय से बोली.

ऋचा : भाई तुम खुद पे काबू नहीं रख पाए न.

विनय : कैसे रखता काबू, अब तोह राजा ठाकुर का दर भी नहीं है..

परची : इसी लिए मुझे कहा था, पायल दीदी को साथ लेके चलना है. परची हस्ते हुए बोली.

विनय : और नहीं तोह क्या, कबसे मैं पायल के लिए मचल रहा था. अब और दूरी सहन नहीं होती.

ऋचा चहकती हुई : पर तुम ने हमें हमारे बॉय फ्रेंड्स से दूर रखा हुआ है अभी तक.

विनय : दो दिन में निकलते हाँ यहाँ से. फिर तुम सब भी अपनी लाइफ को एन्जॉय कर सकती हो. अब कोई रोकने टोकने वाला भी नहीं है. राजा ठाकुर की अब हमें कोई ज़रूरत नहीं रही.

पायल सिंह तोह बस सब की अंदाज़ और शब्दों पर hi झटके पर झटके खाये जा रही थी. ज़ोर लगा कर विनय से अलग हुई और साइड कड़ी होक तीनो को देखने लगी.


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परची आगे बढ़ी और पायल सिंह के सामने जा पोहंची.

परची : दीदी आप हैरान हाँ न, हमारे इस बदले रूप को देख के. जल्द hi वहां भी सब हैरान हो जायेंगे.

ऋचा : बस एक बार अलका की शादी सतीश भैया से हो जाये, फिर सब लौट चलेंगे, देहरादून में.

परची : वहीँ, परिधि को भी आपके पास पोहंचा दिया जाएगा. भाई सतीश भैया उसके लिए भी बहुत बेचैन हाँ. कसम से हमारी परिधि बहुत कमल का फिगर रखती है.

ऋचा : मैंने उसे भी कहा था, आने को, पर वो नहीं आयी. मैं जानती थी, वो कभी भी हमारे साथ नहीं आएगी. वो पहले भी कभी नहीं बदली थी, पहले भी हमारी बातों में नहीं आयी थी. हमेशा हमारी बातों पर बहकने की बजाये हमपर hi चढ़ जाया करती थी.

परची : पर पायल दीदी आप ने हमें कभी निराश नहीं किया. कितनी स्वीट हाँ आप दीदी. हमारी हर बात मन जाया करती थी अब भी ज़रूर मानती रहेंगी.. परची बेगरती से बोली तोह पायल सिंह का ग़ुस्सा और बेबसी बढ़ने लगी.

विनय हस्ता हुआ : तभी तोह पायल मेरे दिल में समय है. बरसों से इसे पाने के लिए मचल रहा हों मैं. पर राजा ठाकुर के कारण कभी आगे नहीं बढ़ पाया.

परची : कैसे बढ़ते आगे आप भाई! राजा ठाकुर ऐसो के साथ कैसा सलूक किया करते हाँ, उफ्फ्फ सोच कर hi रोंगटे खड़े हो जाते हाँ.

ऋचा : इसी लिए हमें अपनी मन पसंद लाइफ छुप के जीने पद रही थी. पर अब.. अब्ब से हम अपनी लाइफ अपने हिसाब से जियेंगी. फुल्ली एन्जॉय करेंगे. अब कोई रोक टोक, कोई पूछने वाला भी नहीं है.

विनय : हाँ जो काम वहां रहते हुए हम नहीं कर पाए, वो रपो वळून ने, दूसरे सभी दुशमनो ने कर दिखाया. हम राजा ठाकुर को बर्बाद नहीं कर सके, हमारे बड़े राजा ठाकुर को बर्बाद नहीं कर सके, रपो और दूसरे सब ने मिलके राजा ठाकुर की बंद बजा दी.

पायल सिंह को इतना बड़ा शॉक तब भी लगा था, जब दक्ष वाला मटर बना था. ऐसा कुछ भी उसे सुनने को मिल सकता था. वो सोच भी नहीं सकती थी. उसकी आँखों से आंसू बहने लगे. उसे अफ़सोस होने लगा, वह क्यों इस सब के साथ आ गई थी. क्यों इनकी बातों में आते हुए दादा ठाकुर की न सुनते हुए यहाँ आ गयी. इतनी बड़ी स्टुपिड तोह वह कभी भी नहीं थी.

पायल सिंह के आंसू देख के परची पायल सिंह के मज़ाक उड़ाती हुई बोली.

परची : अब क्यों आंसू बहा रही हो दीदी. क्या हमारे साथ आने पे अफ़सोस हो रहा है. अरे दीदी यहाँ रहते हुए, हमारे साथ रहते हुए आपको भी अपनी लाइफ के वह सरे मज़े मिलने लगेंगे जो आप पहले कभी प्राप्त नहीं कर पाई थी. ऐसी कॉर्फूल लाइफ जो अपने कभी सपने भी नहीं देखती होगी. हम सब मिलकर आपको लाइफ के वह सरे कलर दिखाएंगे, जिनके बारे में आप सिर्फ सोच hi सकती हाँ.

विनय : परची! क्यों न आज अलका और सतीश के साथ मैं भी पायल से शादी कर लूँ.

ऋचा : अरे नहीं भाई! इसकी क्या ज़रूरत है. पायल दीदी के साथ ऐसे hi रह लो. बिना शादी के बैडरूम पार्टनर... ऋचा पुरे हरामीपन से बोली तोह पायल सिंह उसे देखती रह गई. कितने भाव बदल बदल के उसके सामने आ रहे थे.

परची : पायल दीदी अब वापिस भी तोह नहीं लौट सकती.

विनय : वह तोह है, इसे लौटने hi कोण देगा वापिस. और फिर मैं पायल के साथ शादी किसलिए कर रहा हों, तुम दोनों भी तोह जानती हो न. शादी के बाद हमारा पलड़ा कितना भरी हो जायेगा राजा ठाकुर परिवार पर. और फिर मुझे भी पायल जैसी मस्त लड़की कोई और नहीं मिलेगी. इसे उम्र भर मई अपने साथ रखूँगा. जैसा फिगर इसने पाया है, सैलून तक मेरा नशा नहीं उतरेगा. मैं तोह अभी से hi झूमने लगा हों.

पायल सिंह पहले ग़ुस्से में थी, फिर शॉकेड और दुःख में तोह अब उसे अपना आप खतरे में महसूस होने लगा.

पायल सिंह : कैसे नहीं जा सकती मैं यहाँ से. देखती हों कोण मुझे रोकता है. पायल सिंह ग़ुस्से से बोली. पर दर के कारण उसकी आवाज़ काँप रही थी. डर का ऐसा एहसास उसे पहले कभी नहीं हुआ था. अगर विनय अकेला उसे सब बता कर धमकी देता तोह शायद वो इतनी ख़ौफ़ज़दा नहीं होती, जितनी परची और ऋचा के रहते हुए वो हो रही थी. कितना हैरान कर देने वाला सच उसके सामने आ रहा था. पर सब सच जानने से ज़यादा अब उसे अपनी फ़िक्र होने लगी थी.

पायल सिंह दूर की और घूमी तोह रुपाली दूर पर कड़ी नज़र आई. हमेशा प्यार वाले भाव अपने चेहरे पर सजा के रखने वाली रुपाली सिंह के चेहरे के भाव खूंखार hi नहीं दिख रहे थे, रुपाली एक नागिन दिख रही थी. ऐसी भयंकर चमक उसकी आँखों में थी, देख के पायल सिंह को वहीँ थम सी गयी. कुछ और भी ख़ौफ़ज़दा हो गई.

विनय : मम्मी आ गई. विनय रुपाली सिंह को देख के खुश हो गया.

रुपाली बड़ी कातिल चाल के साथ चलती हुई कमरे में एंटर हुई तोह पायल सिंह को लगा, ये उसकी चची तोह बिलकुल भी नहीं हो सकती. वो ऐसे तोह नहीं चला करती थी. अबकी रुपाली एज्ड होते हुए भी एक मॉडल की सी चाल चलते हुए अंदर प्रवेश करि थी.

रुपाली : मैंने सब सुन लिया है पायल. तुम यहाँ से नहीं जा सकती. तुम्हे मेरे बेटे से शादी करनी hi पड़ेगी. नहीं भी करोगी तोह कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. बिना शादी के hi तुम्हे मेरे बेटे की रखेल बनना पड़ेगा.

पायल सिंह को अपने परिजन के निचे से ज़मीन खिसकती हुई दिखाई देने लगी. वक़्त ने कैसी करवट बदली थी. कल hi तोह यहाँ आ कर उसे लगा था, सगाई टूटने के दर्द से वह निकल चुकी है.

सब अपने असल से निकल कर भयंकर चरक्टेर्स में आने लगे थे.. और असल बारे पायल सिंह कुछ नहीं जानती थी. पायल सिंह की आँखों में आये आंसू थम गए थे, अब वह दहशत में आने लगी थी. खुद को भेड़ियों में अकेली समझ गयी थी वह.

रुपाली : इसे कमरे में hi लॉक्ड कर दो. आज इसकी भी शादी विनय से कर देते हाँ. अब खेल को बदलने का समय आ गया है. विक्रम से अभी मई यही बात कर रही थी. अच्छा हुआ तुम सबने पायल को बता दिए. राजा ठाकुर जितना टेढ़ा था, कितने बरस लग गए इस समय को देखने के लिए. हम कुछ नहीं कर पाए तोह रपो और दुश्मनो ने मिलके राजा ठाकुर को बर्बाद करके हमारा काम आसान बना दिए है..

विनय आगे बढ़ा और रुपाली के चेहरे को चूम के अपने गले से लगा लिया.

विनय : मम्मी आप बेस्ट मम्मी हाँ. ी लव यू मम्मी उम्म्म्महः उम्म्म्महः उम्म्म्मम्ह्है

रुपाली : हाँ! बेस्ट मम्मी तोह मैं हों hi. कोण मेरे जैसी हो सकती है. अब ज़यादा मस्खा मत लगाओ मुझे. चलो मुझसे दूर राहु अब. तुम्हारे लिए पायल है. मेरे साथ मस्ती मत करो.. रुपाली अचानक से हसने लगी.

परची और ऋचा भी हसने लगी. पायल सिंह समझ गई थी, वह यहाँ से कहीं नहीं जा सकेगी. जितना कठिन सफर करके वह यहाँ तक आयी थी. अकेले वापिस लौट नहीं सकती थी. एक लड़की के लिए वापसी का सफर मुमकिन hi नहीं था. भयंकर जंगल और फिर इतना लम्बा सफर वह अकेले कैसे कर सकती थी.

उसे सही मानो में अफ़सोस होने लगा, कितनी मूर्खता कर बैठी थी वो सब के साथ आ कर.

सही बात जान्ने की हिम्मत भी वह खुद में नहीं पा रही थी. ऐसा सब क्यों कर रहे थे. सब उसके अपने थे. वह ये भी नहीं पूछ पाई, एक भाई अपनी बेहेन से शादी कैसे कर सकता है. सागा न सही, पर भाई तोह था hi, चाचा का बीटा था, हमेशा भाई बेहेन बन कर रहे थे, पायल सिंह ये भी नहीं पूछ पाई.

परिधि पर भी सबकी बुरी नज़र थी. पायल सिंह ये जान कर और भी ज़यादा ख़ौफ़ज़दा हो गई थी. उसके साथ शादी करके राजा ठाकुर को निचा दिखने की बात पर भी वह कोई सवाल नहीं कर पाई. कितनी बातें हो रही थी. सवाल करती तोह कितना कुछ जानने को मिल सकता था. पर पायल सिंह खुद के लिए चिंता में आते हुए कुछ भी जान नहीं पायी थी. ये बात भी उसके मंद में नहीं आयी. दक्ष के समय भी ऐसे hi रूप में सब सामने आये थे. पर दक्ष के काण्ड पर दुःख में रहते हुए उस समय धयान नहीं दे पाई थी. अब खुद के लिए भी वह चिंता में आई तोह कुछ भी जान्ने का नहीं सोचा.

सब कमरे से निकक्ने लगे तोह पायल सिंह परची को धक्का देते हुए बहार भाग निकली.

रुपाली : कहाँ जायेगी भाग के तू पायल. यहाँ से लौटने का कोई रास्ता hi नहीं है. एक hi रास्ता है, मेरे बेटे की रंडी बनने का, मेरे बेटे की पत्नी बनने का. इस के शिव तुझे कोई और राह दिखाई नहीं देगी. यहाँ तोह राजा ठाकुर की भी दाल नहीं गलने वाली. और फिर अब वह एक लंगड़ा शेर हाँ. तभी तोह तुझे यहाँ लाया गया है.

फिर सोचने लगी. अगर राजा ठाकुर बर्बाद न होते तोह आज भी वह ऐसा सब करने की हिम्मत खुद में नहीं पाते थे.

पायल घबराई हुई हवेली में भाग रही थी. अलका को चीख चीख पर पुकार रही थी. पर कोई उसकी सुनने वाला नहीं था. हवेली पर कोई भी बस्ती का आदमी भी नहीं था. होता भी तोह कोई कुछ नहीं कर सकता था.

अलका पायल सिंह की चीख ो पुकार सुनके बहार निकली तोह पायल सिंह उसे देख के उसके पास जा पोहंची.

पायल सिंह : अलका चलो यहाँ से, यहाँ हम सेफ नहीं हाँ. सब वैसे नहीं हाँ, जैसे दिख रहे हाँ. सतीश भी वो नहीं है, जैसा वह दिखाई देता है. अलका तुम्हारे साथ भी चीटिंग करके वह शादी कर रहे हाँ. ज़रूर कोई घट्टिया प्लान है सबके मैं में. चलो अलका भाग निकलें यहाँ से.

पायल सिंह बहुत ज़यादा दरी हुई थी. अलका उसे देख के कुछ हैरान हुई पर सतीश के आ जाने से वह सतीश का हाथ पकड़ कर सतीश को देखने लगी.

अलका : क्यों सतीश! जैसे पायल बोल रही है, क्या तुम वैसे हो.

सतीश कुछ कंफ्यूज तोह था, पर अलका के भाव देख के वो खुद पर काबू भी प् गया था. अलका के चेहरे के भाव भी पायल सिंह के लिए चिंता वाले नहीं थी. अलका जैसे खुद में मस्त थी. या अलका को जैसे खुद की परवा थी. उसे भी पायल सिंह की ज़्यादा फ़िक्र नहीं थी.

पायल सिंह अलका को देख के हैरान हुई पर अलका ने भी उसे भाव नहीं दिया तोह पायल सिंह समझ गयी. सब उसके खिलाफ हो चुके हाँ.

पायल सिंह फिरसे भागने लगी, इस बार उसका रुख हवेली के गेट की और था. वहां तक पोहचने से पहले hi 3 हट्टे काटते गुंडे उसके सामने आ गए. उनके हथु में भयंकर हथियार थे. पायल उन्हें देख के वही थम गई. पायल सिंह ने एक बार पीछे मुद के सबको देखा और फिर गुंडों को देख के घुटनो पर गिर पड़ी. बेबसी के कारण ज़ोर ज़ोर से चीखने लगी, चिल्लाने लगी. ऐसा समय भी कभी उसकी लाइफ में आएगा. उसने सोचा नहीं था.

शादी या फिर रखेल.. शादी या फिर रखे.. पायल सिंह ये सब सोचते हुए अंदर hi अंदर टूटने लगी..

पायल सिंह को इसी हालत में उठा के कमरे में कैद कर दिए gaya..Payal सिंह अब खुद के लिए कुछ नहीं कर पायी.

पायल सिंह कमरे में फर्श पर घुसतों पर दोनों हाथ, सर धरे रोने लगी. राजा ठाकुर को अपनी मदद के लिए पुकारने लगी. पर राजा ठाकुर कैसे उसकी सुन सकता था. राजा ठाकुर को नकार कर पायल सिंह खुद से सबके साथ आयी थी.

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मैं ठाकुर दक्ष सिंह! उर्फ़ डीके, उर्फ़ टाइगर....

मैं अपनी कहानी खुद से सुनना चाहुगा. कहानी अब तक वाया 3रद पर्सन चलती आ रही थी. पर मैं अपनी कहानी खुद से सुनना चाहूंगा. अब भी स्टोरी कहीं कहीं वाया 3रद पर्सन चलती रहेगी. पर जहाँ मैं हुआ, मेरा ज़िक्र हुआ, वहां मैं अपनी कहानी अपने अंदाज़ से आप सब के सामने पेश करूँगा. ऐसे मेरी बोरियत भी जाती रहेगी और आप सब का मज़ा भी कई गुना बढ़ जाएगा.

मेरे बारे में आपने शुरू से लेके अब तब बहुत कुछ पढ़ा, मेरे बारे में आप बहुत कुछ जान भी चुके हाँ. पर जो एक इंसान खुद के बारे में सही से बता सकता है, वो कोई और नहीं बता सकता.

मैं अपने बारे में बता डॉन....

मेरा जनम राजा ठाकुर की हवेली में हुआ था. मेरे जनम पर भी वही सब कुछ हुआ था, जो आज तब होता आया है. वही रस्मे, वही खुशियां मेरे जनम दिन पर भी मनाई गई थी.

एक लड़के के जनम पर जैसी खुशियां मनाई जाती है, मेरे इस दुन्या में आने पर कुछ ज़यादा मनाई गयी थी. हमारे ख़ास पंडित जी ने कहा था, ये बच्चा इस खंडन में सबसे अलग बच्चा होगा. सबसे महान बच्चा होगा. ये अपने कर्मो के चलते ऐसा नाम कमायेगा, जो पहले कोई नहीं कमा सका था.

और आज से 6 साल पहले पंडित जी का कहा सच सबत हुआ. एक घटना के कारण मेरा नाम मेरे अपने hi परिवार की नज़रों में उन बुलन्दियो को छू गया, जहाँ सच में hi कोई नहीं पोहंच पाया था.

पर ये बुलंदियां में पस्ती बदल गयी थी. मई इतना निचे गिर गया था, कोई सोच भी नहीं सकता था. जितनी मुझसे उम्मीदें लगाईं गई थी, सब मिटटी में मिल गयी थी. सबकी उम्मीदों पर पानी फेर कर मैंने सबके सर शर्म से झुका दिए थे.

ऐसा क्यों हुआ था. जब पंडित जी ने कहा था, दक्ष ठाकुर इस परिवार का सबसे महान पुरुष बनेगा. फिर क्यों वही दसख ठाकुर इस खंडन की इज़्ज़त पर धब्बा बन गया. क्यों अपने hi खंडन की इज़्ज़त के साथ खेल गया.

जी हाँ दोस्तों ऐसा hi कुछ हुआ था उस समय..

मुझे मारा पीटा गया, मुझे धुतकारा, पायल दीदी जो कभी मुझपर जान छिड़का करती थी. मुझे थप्पड़ मारे, मार मार कर मेरे दोनों गाल लाल कर दिए. मुझे गालियां दीं, क्या कुछ नहीं कर दिए था मेरी दीदी ने मेरे साथ.

मेरी जान अलका जिसके होने से मुझे इस दुन्या के सरे रंग हज़ारों गुना बढ़ के दिखने लगे थे. जब वो मेरी ज़िन्दगी में एक मासूम रोटी बिलक्ति डॉल की सूरत में आई थी तोह उसके मासूम चेहरे को देख कर मुझे अपनी ज़िन्दगी दिखाई देने लगी थी. क्या कुछ नहीं कर दिखाया था मैंने अपनी जान, अपनी ज़िन्दगी अलका को ग़म से बहार निकलने के लिए. उस बेचारी का पूरा परिवार जान से मार दिए गया था. कितने बड़े दुःख में आ गई थी मेरी अलका.

कुछ महीनो की मेरी म्हणत और मोहब्बत ने अलका के अंदर फिरसे ज़िन्दगी के गुमशुदा रंग वापिस लाने शुरू कर दिए थे. फिर जो अलका सबके सामने आई थी, वो एक ऐसी अलका थी. जिसके होने से दुन्या हसीं से भी हसीं तर दिखाई देने लगी थी. हवेली के डरो दिवार गुनगुना उठे थे. चरों और रंग hi रंग बिखरने लगे थे. कोई ऐसा नहीं था, जो अलका के इस रूप को देख कर ख़ुशी से निहाल नहीं हुआ था.

मेरी अलका बुलबुल थी बुलबुल.. उसकी सुरीली आवाज़ मुझ समेत सबको अपनी और खेंच लिया करती थी. जब वो खिलखिलाती थी, तोह लगता था, जैसे साज़िन्दों ने सुर छेड़ दिए हों.

बीतते समय ने हमें दो जिस्म एक जान बना दिए था. जितना मैं उससे प्यार करता था, उतना hi वह भी मुझसे प्यार करती थी. मेरी साडी एक्टिविटीज थी तोह केवल उसी के लिए. मेरा सोना जागना उठना बैठना, अलका की hi यादों में हुआ करता था. पढाई करनी, खेलना कूदना, फ्रेंड्स से मिलना. कहाँ कहाँ तक अलका मेरे साथ नहीं रही थी. मेरी ज़िन्दगी थी तोह उसे खुद से दूर नहीं कर सकता था मैं..

मैं भी उसके लिए उसकी लाइफ बन गया था. जैसी फिलिन्स मेरे अंदर थी उसके लिए, उसके अंदर भी सब वही था, जो मेरे दिल में था. जितना मैं उसे पा के खुश था, उतनी hi वह भी खुश थी. अपने परिवार को खो देने के ग़म को वो भूल चुकी थी. ऐसी hi थी मेरी मोहब्बत. कितने रंग भर दिए थे मैंने उसकी ज़िन्दगी में.

पर जब समय ने, अपना खेल खेला तोह अलका भी बदल गई. अलका ने भी मेरा वही हाल किया जो पायल दीदी ने किया था. अलका ने तोह हद hi पार कर दी थी, मुझपर थूक कर.

मुझे धुत्कार कर, मुझे हमेशा के लिए अपनी ज़िन्दगी से निकल कर मुझे कहीं का नहीं छोड़ा था.

हुआ hi कुछ ऐसा था. मेरी अलका या कोई और कैसे उसे सच न मानता.. जी हाँ दोस्तों, ज़माना हर इंसान को सीख देता है, किसी को अटूट विश्वास देता है तोह किसी को विश्वास की कमी..

पर समय ने खेल hi ऐसा खेला था, विश्वास सभी के चकनाचूर हो के रह गए. जब मेरे अपने, मेरे दादा ठाकुर, रानी दादी, मम्मी पापा, मेरी दीदी और सब मुझपर विश्वास खो बैठे तोह अलका जिसकी ज़िन्दगी hi केवल मई था. कैसे मुझपर विश्वास करती.

हुआ कुछ ऐसा था, मैं अपने कमरे में था. और अलका मुझे एक गिलास में शरबत ला के पिलाने लगी. उसे पीने के बाद कुछ देर अलका से बातें हुई, फिर अलका चली गई.

उसके जाने के कुछ hi देर बाद जैसे मैं खुद को भूल गया था. क्या हुआ था, कैसे हुआ था, मैं नहीं जनता. मुझे तोह होश तब आई जब अलका और पायल दीदी मेरे सामने थी और मैं रुपाली चची के कमरे में था. चची के कपडे उनके बदन पर नहीं थे. फर्श पर चीथड़ों की सूरत पड़े हुए थे. चची अपने हथु से अपने बूब्स छुपाये हुए रो रही थी. अलका और पायल दीदी मुझे और चची को ऐसी हालत में देख कर मुझपर चीख रही थी.

मैं भी फुल नुदे था और मेरा लुंड भी पुरे जोबन पर था. पता नहीं ऐसा सब क्यों था, मुझे कुछ होश नहीं थी.

मैं खुद को देख के शॉकेड था.

पायल सिंह : घट्टिया इंसान ये क्या कर दिए तुमने. अपनी hi चची का रपे कर दिए तुमने. अपनी hi चची की इज़्ज़त लूट ली तुमने. छिईई मेरे भाई होक भी तुम ऐसा सब कर गए थे.

ये सच था, मेरे लुंड पर चिकना पानी लगा हुआ था. जैसे चुदाई के बाद छूट से निकले हुए लुंड की हालत हुआ करती है, शामे वही मेरी भी हालत थी.

दीदी को जवाब नहीं दिए मैंने. होश में आते hi मैंने अपने कपडे जो सही हालत में कमरे के एक कोने में पड़े हुए थे, वह पहन लिए, चची ने भी उसी समय अपने बदन पर चादर लपेट ली थी. वह अब्ब भी रोये जा रही थी.

कपडे पहनने के बाद hi सब शोर सुनकर आये थे. फिर वही हुआ जो ऐसे समय पर होता है. मैंने कहा भी, मैं कुछ नहीं जनता, मैं तोह कुछ देर पहले अपने कमरे में था. मैं चची के पास कैसे आया, कुछ किया भी है तोह क्या किया है, ये भी नहीं जनता.

पर चची की इज़्ज़त लूटी जा चुकी थी, ये कोई और खेल खेला जा चूका था, मैं नहीं जनता था. दीदी और अलका इस सब की गवाह थी. वह चीख चीख कर सबको बता रही थी. मैंने चची का रपे कर डाला है. शायद दीदी और अलका मुझे चची को छोड़ते हुए देख चुकी थी. अगर सच में ऐसा था, तोह फिर मुझे कुछ भी याद क्यों नहीं था. मैंने बहुत सोचा था उस समय पर मुझे कुछ भी याद नहीं आ रहा था. हालत भी कुछ ऐसे हो रहे थे, सोचने का समय भी नहीं मिल प् रहा था.

चाचा, पापा और चाचा के बेटे मुझे पीटने लगे. गलियां देने लगे. कोई ऐसा नहीं था, जो मेरी बात सुन रहा हो. कोई ऐसा नहीं था, जो मुझे गलियां न दे रहा हो, मार न रहा हो. सिवाए एक परिधि के. जो एक साइड चुप कड़ी हुई रो रही थी. वह एक दो बार मेरी फवौर में बोली भी थी, पर उसे सख्ती से चुप रहने को बोल दिए गया था.

मुझे सच्चा माना जाता तोह फिर चची, पायल दीदी और अलका गलत सबत होती.. ये कैसे हो सकता था. सब मिलके चची, अलका और दीदी की hi बात मानते हुए मेरे साथ बुरा सलूक करते चले गए.

पापा तोह मुझे गन से शूट कर देना चाहते थे. मुझे जैसा घर की hi इज़्ज़तो का लुटेरा कैसे उसके घर पैदा हो गया था. बिना देरी के पापा मुझे शूट कर देना चाहते तेह. पर दादा जी ने उन्हें रोक दिया था. मामला खंडन की इज़्ज़त का भी था. मुझे शूट कर देते तोह फिर सबको जवाब देना पड़ता.

ये साडी घटना हवेली के अंदरूनी एरिया में हुई थी. जहाँ नौकर बगेरा नहीं हुआ करते थे. मामला परिवार के बीच में hi रह गया था.

जैसा सलूक मेरे साथ किया गया था. जैसे मेरी बात नहीं सुनी गई थी. मुझे मारा पीटा और धुतकारा गया था. मैं भी अब वहां नहीं रहना चाहता था. मैं बार बार अलका को hi देख रहा था. मुझे अलका से दूर होने को मैं नहीं हो रहा था. पर अलका मुझसे दूर हो चुकी थी. मेरी ज़िन्दगी मुझसे दूर हो चुकी थी.

काश वह hi मुझपर विश्वास बनाये रखती तोह आज मैं खुद को बेगुनाह भी सबत कर सकता था.

पर नहीं....

कर सकता था नहीं.. अब भगवन ने मुझे वह शक्ति दे दी थी. जिसके कारण मैं अपने साथ खेले गए खेल को सबके सामने ला सकता था.

भगवन ने जहाँ मुझसे बहुत कुछ छीना था, वहीँ अब मुझे बहुत कुछ दे भी दिया था. वो कुछ दे दिए था, जो सालों की कठिन तपस्या के बाद भी कइयों को प्राप्त नहीं होता. पर मैं प्राप्त कर चूका था. मैं टेलिपाथी सीख चूका था. मैं लोगों के दिमागों में घुस के उनके अंदर का भयंकर सच बहार निकल सकता था. मैं वो कुछ जान सकता था. जो कोई भी इंसान अपने दिमाग में रख के भूल चूका था. मैं किसी के भी दिमाग की अंत गहराइयो में उतर कर उनकी ज़िन्दगी का सारा कच्चा छठा जान सकता था.

थे ग्रेट मास्टर CHI-FANG द्वारा भगवन ने मुझे ऐसा ज्ञान दे दिए था. जिसके होने से मेरे सामने कोई चुप नहीं सकता था, मुझसे कुछ छुपा नहीं सकता था. मैं किसी के भी ब्रेन की अंत गहराइयो में उतरने लायक हो चूका था.

पिछली रात मुझे मास्टर CHI-FANG ने अपने पास बुलाया था. रात के 12 बजे का समय था. मास्टर उठ के मुझसे गले मिले और मेरे माथे को चुम लिया.

CHI-FANG : टाइगर बीटा पहले हालत के कारण तुम्हे दक्ष से टाइगर बनना पड़ा था. ये केवल तुम्हे सबकी की नज़रों से बचाये रखने के लिए था. अब तुम तेलपाथती सीख चुके हो, फाइटिंग में भी बहुत आगे बढ़ चुके हो. अब तुम्हारी यहाँ पर ट्रैंनिंग का समय समाप्त हुआ दक्ष बीटा. अब से तुम खुद को अपने नाम से सबके सामने आ सकते हो. या जिस नाम से मैं करे, सामने आ सकते हो. अब तुम्हे छुप के रहने की भी ज़रूरत नहीं है. लार्ड बुद्धा ने तुम्हे बहुत काम समय में टेलिपाथी का ज्ञान दे दिए है. जो आज तक एक रिकॉर्ड है. 3 महीनो में तुमने टेलिपाथी सीख ली है. 3 सालों में भी कोई नहीं सीख सकता. मैं भी lag-bhag एक साल में सीख पाया था. दक्ष बीटा तुम ख़ास हो, बहुत ख़ास. दुश्मनो ने बहुत से दर्द तुम्हे दिए हाँ तोह लार्ड बुद्धा ने भी तुम्हे वह कुछ दे दिए है, जो तुम्हारे दर्द से कहीं बढ़ कर है. तुम्हारे दर्द का इलाज भी तुम्हे टेलिपाथी द्वारा मिल जाएगा दक्ष बीटा. लार्ड बुद्धा सदा तुमसे खुश रहे.

दक्ष : मास्टर ये सब आपकी मोहब्बत है, वर्ण ये सब मुमकिन नहीं था. बहुत कठिन था मेरे लिए. एक समय पर मुझे ऐसा लगा था, मैं पागल hi हो जाऊँगा. पर आपने मुझे संभल लिया मास्टर! भगवन के बाद आप hi मेरे लिए सब कुछ हाँ मास्टर!

मेरी बात पर मास्टर ने एक बार फिरसे मेरे माथे को चुम लिया.

CHI-FANG : दक्ष बीटा, उस्ताद सभी को सिखाते हाँ, सीखता कोई कोई है. और फिर तुम्हारे जैसा स्टूडेंट भी तोह किसी को नहीं मिलता. असल में तुम तारीफ के लायक हो दक्ष बीटा. जितनी हार्ड ट्रैंनिंग तुमने करि है. ऐसी कोई नहीं कर सकता. अपने समय पर मैं भी ऐसी ट्रैंनिंग नहीं कर पाया था. तुम्हारे अंदर की आग ने भी तुम्हारी बड़ी मदद करि है. और षिमुना की लाइ हुई समुद्री जड़ी बूटियों ने इस सब को और भी आसान बना दिए था. वर्ण सच में ये सब आसान नहीं था. मेरा ज़यादा कमल नहीं है इसमें.

मास्टर CHI-FANG खुद बैठे और मुझे भी अपने सामने योग पोज़ में बैठने को कहा. मैं बैठ गया तोह मास्टर आगे बोले.

CHI-FANG : दक्ष बीटा अब अपनी ऑंखें बंद करो.. मैंने अपनी ऑंखें बंद करि तो मुझे अपने दिमाग में मास्टर की आवाज़ सुनाई दी. दक्ष बीटा! मैं चाहता हों तुम तेलपाथती द्वारा अपनी पहली परवाज़ शुरू करो. सबसे पहले तुम किसके दिमाग में जाना चाहोगे.

मास्टर की बात पर मई सोचने लगा. मेरी मेमोरी पहले से कई गुना बढ़ चुकी थी. मुझे अपने दिमाग के सरे हिस्से रोशन दिखाई देने लगे थे. ऐसे जैसे मेरे दिमाग में सेंकडो वाट की लाइट्स जल उठी हों.

मैं याद करने लगा, टेलिपाथी सीखने के बाद सबसे पहले किस के दिमाग में जाना सही रहेगा. षिमुना थी मेरी ज़िन्दगी में, wang-zhi भी मेरी अच्छी दोस्त थी.

CHI-FANG : अपनी मेमोरी को ओपन करू दक्ष बीटा. किसी अपने को याद करो, उसके चेहरे को सामने लाओ, खंगालो अपनी मेमोरी और सामने लाओ किसी अपने के चेहरे को. मास्टर CHI-FANG मेरे दिमाग में हो रही सभी करवाई देख रहे थे. मास्टर की बात पर अपने परिवार की याद करने पर मुझे कुछ दर्द का एहसास हुआ.. मैं कहाँ उन्हें याद करता था. कहाँ मैं उन्हें याद करना चाहता था.

CHI-FANG : अब याद करना पड़ेगा दक्ष बीटा! समय हमेशा अपने खेल बदलता रहता है. अब तुम घर नहीं भी लौटना चाहते तोह भी तुम्हे उनकी खबर तोह रखनी hi होगी. दुश्मन कैसी कैसी चालें चल कर तुम्हारे पुरे परिवार को बरदाद कर रहा है. तुम्हे तोह कोई खबर hi नहीं सबपर क्या बीत चुकी है. क्या तुम ये चाहते हो, तुम्हारे जैसा hi खेल परिवार के किसी और मेंबर्स के साथ भी कोई खेल जाए.

मास्टर की बात पर मुझे अपने साथ हुआ सब याद आया तोह वही मुझे घुसा भी आने लगा. मास्टर फ़ौरन मेरे दिमाग से निकल लिए. क्यूंकि सब याद करते हुए, कुछ नुदे सन भी मेरी मेमोरी में रोपें होने लगे था. मास्टर बिना मेरे दिमाग में घुसे बोले.

CHI-FANG : जनता हों दक्ष बीटा! जैसा तुम्हारे साथ हुआ था, वह सब बहुत भयंकर और बहुत घट्टिया था. वह सब गुज़रा समय था दक्ष बीटा. अब वो लौट के नहीं आ सकता. अब तुम टेलिपाथी सीख चुके हो तोह अपने दुश्मनो को बेनक़ाब करो और सबके सामने लाओ. बदला भी लो और जिसने जो जो किया है, उसे उसका दंड दो. पर तुम्हे अपने परिवार को याद ज़रूर करना है. अब भी बहुत से खतरे में हाँ. कुछ की जान को खतरा है तोह कुछ की इज़्ज़त को. दुश्मन इतना घट्टिया है. अब भी तुम नहीं लौटे अपने परिवार में तोह फिर कभी लौट नहीं पाओगे. फिर तुम कभी खुद का भी सामना करने लायक नहीं रहोगे दक्ष बीटा. अब तुम ऐसी पावर प् चुके हो. यहाँ पर बैठे बैठे hi तुम बहुत कुछ कर सकते हो. दुश्मनो के खेल को ख़तम कर सकते हो. अपना बदला ले सकते हो.

मास्टर की शोला उगलती बातों में मेरी हिम्मत बधाई और मैं अपने परिवार को सोचने लगा. मास्टर भी मुझे धयान में देख कर खामोश हो गए. मेरी नज़रों के सामने एक एक के चेहरे आते चले गए.

सबसे पहला चेहरा भी उसी ज़ालिम पारी सूरत का hi आया. जो कभी मेरी ज़िन्दगी हुआ करती थी. शायद अब भी थी. पर पता नहीं, अब मेरे अंदर की हालत क्या होने वाली थी. बहुत समय से उसे याद भी नहीं किया था. उसका चमकता चेहरा मेरे दिमाग में रोशन हुआ तोह मैं फिरसे उसी चेहरे में खोने लगा. इतना स्ट्रांग व्यू मुझे पहले कभी दिखाई नहीं दिए था. अब मेमोरी स्ट्रांग थी, तोह व्यू भी स्ट्रांग दिखाई देने लगा था. हस्ता हुआ चेहरा था अलका का, जो मुझे दिखाई दे रहा था. ऐसा लग रहा था, जैसे मैं अलका को लाइव देख रहा हों. हस्ते हुए अलका बहुत प्यारी लगा करती थी. फिर एकदुम्म से यादों ने यलग़र करि तोह अलका का बाद का बर्ताव और व्यू सब दिखाई देने लगा. तोह मैं दुखी होने लगा. बड़ी मुश्किल से खुद पर काबू पाते हुए अलका को धयान से निकल कर दूसरों को याद करने लगा. दादा, दादी, मम्मी पापा, पायल दीदी, भाई, परिधि सब के चेहरे मुझे दिखाई देने लगे. पर मैं किसी के दिमाग में नहीं गया. मेरा मैं नहीं हो रहा था किसी के भी दिमाग में घुसने का.

फिर मुझे परिधि का रोटा हुआ चेहरा दिखाई देने लगा. वह कह रही थी. "मेरे भाई ऐसा नहीं कर सकता. मम्मी, पापा, दादा जी, दादी जी, दीदी, अलका मेरा भाई ऐसा नहीं कर सकता. मुझे मेरे भाई पर पूरा विश्वास है, मेरा भाई ऐसा घिनोना काम नहीं कर सकता"

मेरी hi तरह मेरी बेहेन परिधि ने भी बहुत दर्द सहा था उस समय. जिसे यकीं था मेरा भाई ऐसा घट्टिया काम नहीं कर सकता. कितना विश्वास था मेरी बेहेन परिधि को mujhe.Kash सब मुझपर ऐसा hi विश्वास करते तोह कितना अच्छा होता. सब के साथ होते. लाइफ कितनी सुंदर होती.

मैंने परिधि के hi दिमाग में घुसने का मैं बना लिया. पर मुझे पता नहीं था, कैसे घुसना है. मुझे परेशानी बानी तोह मैंने मास्टर से पूछ लिया.

CHI-FANG : दक्ष बीटा, किसी भी इंसान की आँखों में देख के उसके दिमाग में घुसा जा सकता है. तुम किसी की भी आँखों में देख के उसके दिमाग में उतर सकते हो. आवाज़ और लहजे से भी तुम किसी के भी दिमाग में उतर सकते हो. याद करो किसी की आवाज़ या ऑंखें तुम्हे याद हाँ तोह उनपर अपना फोकस बनाओ. उन आँखों में उतरने की कोशिश करो. तुम ज़रूर सफल रहोगे.

मैं मास्टर की बात पर अपनी बेहेन परिधि की आँखों को याद करने लगा. फ़ौरन hi मुझे परिधि का चेहरा दिखाई दिए. मैंने अपना फोकस परिधि की आँखों पर किया तोह देर नहीं लगी और मैं परिधि के दिगमग में जा घुसा..

पर ये क्या..

मैं तो कहीं और hi जा पोहंचा था... एक बहुत hi हसीं वादी थी, जो मुझे दिखाई दे रही थी. इतनी सुंदर कह मैंने आज तक अपनी पूरी लाइफ में नहीं देखि थी. ऐसी हरियाली, ऐसी सुंदरता मैंने पुरे वर्ल्ड में कहीं नहीं देखि थी.

घोर किया तोह........

ओह्ह्ह्ह..

मेरी बेहेन परिधि सपना देख रही थी. और सपने में वो किसी लड़के के साथ एक नहर के किनारे साफ़ सुथरे पानी में दोनों पाओ लटका कर बैठी हुई थी. लड़के के बाज़ो को अपने दोनों हथु से थाम के अपने सीने से लगा रखा था परिधि ने. मेरे होंटो पर स्माइल आ गई. मेरी परिधि सपने में अपने लवर के साथ थी. कितनी हसीं और सुन्दर वादी में वो अपने प्रेमी के साथ थी. देख के मेरे दिल को बहुत सुकून मिला.. मुझे अपनी बेहेन पर और भी ज़यादा प्यार आने लगा. मेरी बेहेन जवान हो गई थी. अपने प्रेमी को लेके सुंदर सपने देख रही थी.

मुझे परिधि का साइड व्यू दिख रहा था. पर लड़के का नहीं. मैं घूम के लड़के को देखने लगा तोह लड़के को देख कर मेरे तोते hi उड़ गए..

लड़का कोई और नहीं मैं hi था. मेरी बेहेन मुझे hi खवाब में देख रही थी.

मतलब.. मेरी बेहेन मुझसे hi... चीई चीई ये कैसी गन्दी बात थी.

मैंने ऑंखें खोल दीं. और मास्टर से बोलै...

दक्ष : मास्टर मैंने देख लिया अपनी बेहेन को.

मास्टर खुश हुआ मेरी पहली परवाज़ को सक्सेस्फुल जान कर... मास्टर फिर मुझे आगे का सब बताने लगे, मैं भी मास्टर से सवाल जवाब करता चला गया. मास्टर मुझे टेलिपाथी का सारा ज्ञान देने लगे. दिमाग के घुस के क्या क्या किया जा सकता है. कैसे किया जा सकता था. ऐसे करने से ये होगा, वैसा करने से वो होगा. मास्टर मुझसे सब बताने लगे. स्ट्रांग मेमोरी के कारण अब मेरे लिए ज़यादा मसला नहीं रहा था. सब सुना फ़ौरन hi मेरी मेमोरी में स्टोर होता चला गया.

कुछ देर और मास्टर के पास बेथ के मैं अपने रेस्ट वाले कमरे में चला गया. बीएड पे लेट के मैं सोचने लगा.. परिधि मुझे लेके जो सोच रही है. वो बहुत गलत है. उसका मैं बदलना होगा. अब तोह मई इतनी पावर भी रखता था, यहीं रहते हुए hi कुछ भी कर सकता था.

पारर ये मेरी भूल थी.....

मैं लेते लेते hi फिरसे परिधि के दिमाग में जा घुसा. देखा तोह परिधि मेरे साथ उसी जगा, उसी अंदाज़ में बैठी हुई थी. और प्यार भरी बातें किये जा रही थी. हेरात की बात थी, खवाब में मैं भी अपनी बेहेन के साथ, खूब रोमांटिक बातें कर रहा था. सुन के जहाँ मुझे हैरान के झटके लगे, वहीँ मैं प्रेजेंट में स्माइल भी करने लगा. खवाबो की दुन्या देखने का पहला चांस था न. तोह सब गलत दिखने पर भी मुझे ख़ुशी और मज़ा दोनों मिल रहे थे. ये सब कुछ बहुत अजीब भी था न.

मैंने सोचा खवाब में hi परिधि से कुछ बातें कर ली जाएँ.

परिधि : जणू! तुम कब तक मुझसे यहीं पे मिलते रहोगे. घर कब लौटोगे.

परिधि की जवाब में खवाब वाला दक्ष बोलै.

दक्ष : आह्हः कैसे लौट सकता हों. घर में सब हमें एक होने hi नहीं देंगे. सबने मुझे धुत्कार दिया था. अलका ने भी धुत्कार दिए था. कैसे मई तुम्हे अपना सकूंगा. मैं लौट के भी क------ परिधि मुझे टोक गयी.

मैं हैरान रह गया. साला मेरे हमज़ाद होक ऐसी बातें कर रहा था. अलका को भूल के बेहेन के प्यार में खो गया था.

परिधि : जणू मेरे सामने उस चुदाई का नाम भी मत लिया करो. मुझे देखो, मेरे फिगर को देखो, कितनी हसीं, कितनी हॉट, कितनी सेक्सी हों मैं. मेरे सामने अलका क्या बेचती है, दाएं कहीं की. हहहहह

परिधि ग़ुस्से से, कुछ ऐडा से बोली तोह परिधि अपनी इस ऐडा में मुझे बहुत पसंद आई. मैं परिधि के दिमाग के घुसे, उसके खवाब में घुसे खोने लगा. पता नहीं, ये दिमाग की दुन्या का कोई खेल था, जिस हसीं वादी में परिधि मेरे साथ थी, उसका असर था या कुछ कुछ और. मुझे परिधि इतनी बहाने लगी थी, इतनी सुंदर दिखाई दे रही थी. सच कहूं तोह वाकई में अलका इस खवाब वाली परिधि के आगे कुछ भी नहीं थी.

मैं भी खवाब में मस्त होने लगा. पर मुझे याद आया मुझे तोह परिधि के मैं को बदलना है तोह खुद पर काबू पाते हुए मैं खवाब वाले दसख के मोह से बोलै.

दक्ष : देखो परिधि, तुम हसीं हो, जवान, और---

परिधि मुझे टोकते हुए, बड़ी अदा से बोली : और हॉट एंड सेक्सी भी..

दक्ष : पर हम भाई बेहेन भी तोह हाँ ना. ऐसा खवाबो में hi होता है, रियल लाइफ में ऐसा कुछ भी नहीं होता. मुझे लगता है, हमें खवाबो में भी ऐसी बातें नहीं करनी चाइये. ऐसी बातें तुम अपने पति से करना. जिससे तुम प्यार करो उससे करना.

परिधि मेरी बात पर मुझे दुःख से, ग़ुस्से से देखने लगी..

परिधि : जणू आज तुम क्यों दिल दुखने वाली बातें कर रहे हो. पहले तोह तुम कभी ऐसी बातें नहीं किया करते थे. कितने सालो से हम इस हसीं वादी में मिल रहे हाँ. पहले कभी तुमने ऐसा सब नहीं कहा. प्ल्ज़ जणू ऐसी बातें फिरसे कभी मत करना. तुम hi मेरा पहला और आखरी प्यार हो. मेरा कोई पति होगा तोह वो तुम हो जणू. तुम्हारे शिव मई कभी किसी की नहीं हो सकती और फिर कितनी hi बार तो तुमने भी मुझे प्यार किया है. अब क्यों बदल रहे हो..

मैं परिधि की इस बात पर कुछ हैरान हो गया था. प्यार, कैसा प्यार किया था मैंने. खवाब वाले दक्ष के भाव भी मेरे रियल वाले हो गए थे. क्यूंकि मैंने उसकी जगा ले ली थी. मुझे हैरत में देख कर परिधि ने मुझे धक्का दिए और मेरे ऊपर आ कर मुझे किश करने लगी. मुझे चूमने लगी.

परिधि : जणू मुझे भी किश करो na.(Paridhi बड़े लाड से बोली) जैसे रोज़ करते हो. मुझे आज भी तुम्हरे प्यार की ज़रूरत है जणू. तुम्हारे प्यार के सहारे hi तोह मैंने जीती आ रही हों. आज भी मुझे जी भर के प्यार करो न मेरे जणू. मुझे यकीं दिला दो, तुमने पहले जो कुछ भी कहा वह सब मज़ाक था. परिधि मेरे चेहरे पर आंसू बहाने लगी, मुझे फिरसे चूमने लगी.

उफ्फ्फ्फ़ कितनी शिद्दत थी परिधि के प्यार में. कितनी शिद्दत से वह मुझे चाहने लगी थी.

मैंने परिधि को किश नहीं किया तोह वो ग़ुस्से से उठ कड़ी हुई और मुझे देखते हुए अपने कपडे उतरने लगी. मैं ये देख के शॉकेड रह गया. ये.. ये परिधि क्या कर रही है..


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नुदे होक परिधि फिरसे मेरे ऊपर आई और मुझसे बोली.

परिधि : जणू कितनी hi बार तुम इस शरीर को सुंदर बोल चुके हो, कितनी hi बार इसे तुम प्यार कर चुके हो. जणू फिरसे करो न प्यार अपनी परिधि को. अपनी परिधि को फिरसे जीवन दे दो न जणू. वर्ण तुम्हारी परिधि मर जायेगी, कसम से मर जायेगी. तुम्हारा प्यार hi तो तुम्हारी परिधि को ज़िंदा रखे हुए है जणू. परिधि रोटी हुई मुझे चूमने लगी. मेरा दिल भी खून खून होने लगा था अपनी परिधि के आंसू देख के. कितना प्यार करती थी मुझसे और मैं. मैं कई सैलून से उससे दूर रहा था. अपनी कोई खबर नहीं दी थी. कितना ज़ुल्म किया था अपनी बेहेन के प्यार करने वाले दिल पर.

पर मैं अपनी बेहेन के साथ ऐसा प्यार नहीं कर सकता था.

मुझे महसूस हुआ मेरी जान, मेरी बेहेन परिधि अपने कमरे में बीएड पे लेती हुई नींद में भी मेरे बर्ताव पर बहुत बेचैन है. मुझे और भी दर्द होने लगा. मैं अपनी बेहेन को तरसा रहा था, तड़पा रहा था.

पारर...

पर मैं उसके साथ ऐसा प्यार भी तोह नहीं कर सकता था. मेरा धयान रूम में सो रही परिधि की और था. फिरसे खवाब में पोहंचा तोह देख के शॉकेड हो गया...

मैं खवाब वाले दक्ष को अपने कण्ट्रोल से निकल चूका था. वह साला हरामी आज़ाद होते hi मेरी परिधि को जी जान से प्यार कर रहा था. उसे चूम रहा था, उसके गोर दूध के जैसी रंगत वाले बूब्स को प्रेस कर रहा था, चाट चूस रहा था. आअह्ह्ह दोनों खवाब में कैसा प्यार कर रहे थे, मैं तोह सोच भी नहीं सकता था. मेरी परिधि मुझसे प्यार करते हुए इस हद तक भी उतर आएगी.

मुझे घुसे नहीं आया. पता नहीं क्यों ये सब देखते हुए मुझे अब मज़ा आने लगा था.

सब गलत था.......

बहुत ज़यादा गलत..

पर मैं कुछ कर भी तोह नहीं सकता था. अपनी बेहेन पर हमेशा के लिए खवाबो पर रोक नहीं लगा सकता था. उसके ब्रेन को अपने कण्ट्रोल में ले उसका मैं बदल सकता था.

पर कब तक.....

हमेशा के लिए तोह नहीं बदल सकता था मई परिधि का मैं. बदलने की कोशिश करता तोह वो पागल हो जाती. क्यूंकि उसके इमोशंस मुझे लेके बहुत ज़यादा स्ट्रांग थे. कुछ गड़बड़ ज़रूर होती.

और मैं ऐसा खवाब में भी नहीं सोच सकता था. एक hi बेहेन थी मेरी. जो मुझपर बेइंतेहा विश्वास करती थी. मुझे कभी गलत नहीं मानती थी.

मैं खवाब में दोनों को देखता चला गया दोनों एक दूसरे में खोये हुए ओरल सेक्स करने लगे थे. उफ्फ्फ परिधि मेरे लिए, मेरे साथ हर हद्द पार कर जाने के लिए कितनी बेक़रार थी. और साला मेरा हमज़ाद खवाब में मेरी बेहेन के हसीं अंगो को " जो उस वादी में रहते हुए और भी बेपनाह हसीं दिखाई दे रहे थे" प्यार कर रहा था. चूम रहा था, चूस रहा था, चाट रहा था.

कभी हरामी दक्ष मेरी फूल सी परिधि के ऊपर होता तोह कभी परिधि उसके ऊपर, दोनों क्या कुछ नहीं कर रहे थे.

पिछले 6 साल में मैंने भी बहुत ज़यादा सेक्स किया था. अलका की और से दिल टूट जाने के बाद, मुझे रेपिस्ट कह कर घर से निकल दिए जाने के मैं भी अपनी लाइफ अपने हिसाब से जीने लगा था. जब यादों से पीछा छुड़ाना मुश्किल हो जाया करता था तोह मैं भी खुद को दुन्या की रंगीनियो में गम कर दिया करता था.

सेक्स मेरी लाइफ में आम बात थी.....

दूसरा अब मई कुछ महीनो पहले वाला दक्ष भी नहीं रहा. बहुत ज़यादा चेंज मेरी लाइफ में आ गया था. समुद्री रेयर जड़ी बूटियों के कारन, योग ट्रैंनिंग के कारण मुझमे कई बदलाव आ चुके थे.

सबसे भयंकर बदलाव, उस समुद्री फूल को खाने पर आया था, जिसके कारण मैं सारा hi काला हो गया था, मेरे अंदर बेपनाह हीट पैदा हो गई थी, कई घंटे तक मेरा लुंड hi नहीं बैठा था.

अब भी मेरा लुंड पुरे चार्म पर था, मेरा लुंड और मैं बिला शक ो शुबा बहुत सुरूर में थे. सब गलत था, पर फिर भी सब बहुत बहुत कामुक और रोमांचक भी था. मैं परिधि के खवाब में खोया हुआ था. वहीँ से मैं अपनी यादों में जा पोहंचा था. लौटा तोह देखा परिधि मेरे पैरों में आ के मेरे लुंड को पकड़ के चूस रही थी.

अह्ह्ह परिधि कितनी आगे बढ़ गई थी, अपने भाई के लुंड को चूस रही थी. ये कैसा प्यार था उसका मेरे साथ. प्यार में सेक्स भी ज़रूरी होता है क्या, जो परिधि कर रही थी. पर सेक्स तोह वो कर hi नहीं रही थी. वह तोह बस एन्जॉय कर रही थी मुझे बेहला रही थी. मैंने उसे दुखी कर दिए था. मेरा बदला मैं देख के परिधि ऐसी हो गई थी.

मैं फिरसे बोल पड़ा.

दक्ष : आह्हः परिधि मेरी पायरी बेहेन ऐसा न करो न, क्यों अपने hi भाई के लुंड को चूस रही है. देखो ऐसा करना बहुत बड़ा पाप है. मैट करो तुम भी ये पाप.

साला मैं भी मज़ा करता हुआ ऐसा सब बोल रहा था. मैं भी तोह अपनी बेहेन के हसीं जिस्म को निहार चूका था. अब भी निहार रहा था.

मेरी बात पर परिधि तोह कुछ नहीं बोली.

पारर....... एक आवाज़ और ज़रूर सुनाई दी..

"परिधि...... परिधि कौन है दक्ष"

आवाज़ सुनके मैंने झटके से ऑंखें खोली तोह देखा, षिमुना फुल नंगी मेरे पैरों में बैठी दोनों हथु से मेरे लुंड को थामे चूस रही थी.


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साला, खवाब में परिधि मेरा लुंड चूस रही थी तोह रियल में षिमुना..... तभी मैं सोचों मुझे इतना मज़ा क्यों आ रहा था.

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आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..


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झटके तोह लगेंगे hi भाई. सतीश के साथ जो भी होगा वो भी जल्द सामने आ जायेगा. मय्बे 1 और 2 उड़पतेस में hi. नामर्द वाला सन तो नहीं होगा, देखते हाँ क्या सन बनता है. जो भी होगा आपके लिए सबके लिए अनएक्सपेक्टेड hi होगा.

प्यार के रंग ऐसे तोह नहीं होते मेरे भाई.. सब सब खुल के सामने आ जाये तो फिर अलका बारे में डिटेल से आप मुझे सुग्गेस्ट कर सकते हाँ. बिना सब जाने कैसे आप अलका के लिए ऐसा कह सकते हाँ. कौन जाने अलका का इस स्टोरी के क्या और कितना रोले है.

हेट एंड रिवेंज टाइटल मेंशनएड है न. तोह देखते जाइये.. क्या कुछ देखने को मिलता है. हेट कितनी और कैसे देखने को मिलती है और रिवेंज किसका और कैसे सामने आता है. वो भी पता चल जाएगा.;

थैंक्स फॉर थे रेविएवस 🙏🙏 बे हैप्पी इन यर लाइफ.. दो लव, फंड लव, गेट रेडी तो सैक्रिफाइस फॉर लव.. लव इस एवरीथिंग डिअर........ हेट हमेशा ख़तम होक रेहनी चाहिए.. वर्ण कोई अपना नहीं रहेगा...
 
Episode:19

सेक्स मेरी लाइफ में आम था तोह उसका असर भी दिखने लगा था. अपनी hi बेहेन को खवाब में अपने साथ इतना आगे बढ़ा हुआ देख के मैं बेचैन हो उठा था. जितना बेचैन था, उतना hi सुरूर में भी हो गया था. उतना hi बेचैन और मस्त भी हो गया था मैं.

कितना कमीना, कितना घट्टिया भी हो गया था मैं. ऐसा बदलाव कभी मेरी ज़िन्दगी में नहीं आया था. जितना अब आ रहा था. शेम ों में...

पर प्यार में शेम कैसा.......

सब कुछ तोह प्यार hi था. वो भी मेरी बेहेन hi मुझसे कर रही थी,. मैं तोह नहीं कर रहा था. जब वो खुद इतना आगे बढ़ चुकी थी तो मैं कैसे खुद को रोक पता. खवाब में और रियल में भी मैं मस्त होने से खुद को रोक नहीं पाया था.

रेयर जड़ीबूटियों ने मुझे कितना ज़ादादा बदल दिए था. ऊपर से टेलिपाथी की स्ट्रेंज वर्ल्ड ने मुझे और भी नए रंग दिखने शुरू कर दिए थे. सपनो की वादी में अपनी बेहेन के साथ मैं खुद पर काबू नहीं रख पाया था और मस्त होता चला गया था.

षिमुना को देखा तोह "परिधि कोण है" पूछ के प्रश्न भरी नज़रों से मुझे देखते हुए मेरे लुंड को चूस रही थी.

कामिनी जान गई थी अब मेरी ट्रैंनिंग ख़तम हो चुकी है, तोह अपने मज़े मारने आ गई थी.

दसख : ये सब क्या है षिमुना

षिमुना आँखों में चमक लिए मेरे लुंड को चूस के, लोल्लिपोप के जैसे होंटो को दबा के मोह से निकल के बेशर्मो के जैसी हंसी हसने लगी.

षिमुना : ेहेहेहेहे दक्ष!! ये... Ye(mere लुंड को कस के मसलते हुए) मेरा है दसख. मैं इसके साथ जो चाहे कर सकती हों. चुसू, मसलो, दबाऊं, खेंचू या----

दसख : बस बस!! बड़ी गर्मी चढ़ रही है तुझे.

षिमुना : ेहेहेहेहे गर्मी उत्तरी hi कब थी दक्ष! तुम्हारी ट्रैंनिंग के लिए मुझे खुद पर काबू रखना पड़ा. वर्ण (दन्त कचकचाते हुए) कब का तुम्हे खा चुकी होती.

दक्ष : मुझे?

षिमुना : नहीं! (लुंड को मसलते हुए) इसे. बहुत खुवार किया हुआ है इसने मुझे. रातों को सोने नहीं देता था मुझे. बहुत पॉवरफुल भी है न ये.. हाय, पता नहीं कितनी बार मेरी गीली हो चुकी है दक्ष तेरे एनाकोंडा को सोच सोच के. कसम से इतना समय मैं सेक्स के बिना कभी नहीं रही. अच्छा तुमने बताया नहीं ये परिधि कौन है.

मैं कुछ शर्मिंदा सा हो उठा. षिमुना मुझे देख के कुछ हैरान हुई

षिमुना : दक्ष, तुम शर्मशार भी हो सकते हो, हेरात की बात है. एक नाम hi तो पूछा है तुमसे और फिर तुमने मुझे बताया था न, सेक्स तुम्हारी लाइफ में आम बात रही है. परिधि के साथ भी ज़रूर तुम सेक्स कर चुके हो. फिर भी ऐसे भाव..

अब मैं षिमुना को क्या बताता. परिधि मेरी बेहेन है और उसे hi खवाब में देख रहा था खुद के लुंड को चूसते हुए.

दक्ष : क्या करोगी जान कर.

षिमुना ; क्या करुँगी जान कर? मैं दोस्त हों तुम्हारी दसख, मेरा ख्याल है मुझे अब तुम्हारे बारे में सब जान जाना चाहिए. इतना हक़ तोह बनता hi है मेरा. तुमने मुझे अपने पास्ट के बारे में कुछ नहीं बताया अभी तक. Wang-zhi भी कभी कभी बेचैन हो जाती है तुम्हारे बारे में सब जान्ने के लिए.

षिमुना सच में मेरी अच्छी दोस्त थी. उसका सब जानना ज़रूरी भी था. और फिर अब मुझे पहले जैसा दर्द भी नहीं होता था. मैं षिमुना को अपने बारे में बताने लगा. मेरी फॅमिली में कोण कोण है और क्या हुआ था उस समय मेरे साथ. किस ने क्या क्या किया था.

षिमुना : ओह्ह्ह माय गॉड! कितना बुरा किया था सबने मिलकर तुम्हारे साथ दक्ष! कितने घट्टिया, कितने स्टुपिड थे सब. जो ऐसा सब कर गए तुम्हारे साथ. ज़रूर तुम्हारे चची इस सब के बारे में जानती होगी.

दक्ष : हाँ मुझे भी ऐसा लगता है. पहले सब जान्ने का कोई ऑप्शन नहीं था मेरे पास और न hi मैं था. दर्द hi पहले इतना था मेरे दिल में. अलका के मेरी लाइफ से दूर हो जाने पर मैं अंदर से खली hi हो गया था. कुछ था तोह बस आग, बेइंतेहा आग. पर अब पहले वाली बात नहीं रही. अब तोह मैं सब सच खोज निकलूंगा. और जिसने जो जो किया था मेरे साथ. उसका दंड भी उसे दे के रहूँगा. चाहे वो फिर कोई भी हो.

षिमुना कामिनी नॉटी मूड में आते हुए : ह्म्म्मम्म दक्ष तो तुम अपनी hi बेहेन का नाम लेके कह रहे थे सब.. ये कब से चल रहा था तुम दोनों के बीच. अलका के होते हुए भी परिधि तुम्हे ब्लोजॉब दिया करती थी ना.

दक्ष : ये क्या कह रही हो तुम षिमुना, मैं ऐसा कभी नहीं था. अरे वो तोह.

षिमुना मेरे लुंड को मसलना नहीं भूली थी. बड़े महिराना अंदाज़ में वो मेरे लुंड को मसल रही थी.

षिमुना : क्या वो तोह? आगे बताओ दक्ष. अपने अंदर से शर्म निकल फेंको, फिर देखना तुम्हारा कैसा रूप सामने आता है.. कोई ऐसा मामला तुम्हारी लाइफ में नहीं होना चाहिए दक्ष, जिसपर तुम्हे ऐसे हेसिटते होना पड़े. खुले दिमाग वाले बनो दक्ष, मुझे देखो एक लड़की होक कितनी ओपन हों मैं. बेशरम होते हुए भी मैं हमेशा लिमिट में भी रही हों. कभी तुम्हे परेशान नहीं किया मैंने दसख. बहुत से चंगेस भी आ चुके हाँ तुममे, कुछ और चेंज भी ले आओ खुद में. इन्सेस्ट हमारे प्लेनेट पर एक कम्मोम चीज है दक्ष. और तुम्हारे प्लेनेट पर भी. टेम्पल में मैंने बहुत से ब्रेन्स सर्च किये हाँ दक्ष एअर्थ का पूरा पूरा ज्ञान है अब मुझे. इन्सेस्ट कहाँ नहीं है एअर्थ पर. तुम्हारे इंडिया में भी है और फिर परिधि तो तुमसे प्यार करती है. इन्सेस्ट में हवस हो तोह गलत है, प्यार हो तोह बहुत बढ़िया है. और चची के साथ जैसा हुआ था, हवस थी, कोई प्लान भी था, पर तुम इन्सेस्ट में दाखिल हो चुके हो दक्ष. सच सामने आ जाने के बाद जब तुम्हारी चची या फिर कोई और परिवार की औरत या लड़की सामने आती है तो क्या तुम उसके साथ कुछ नहीं करोगे. इज़्ज़त के साथ खेलने का आरोप तो तुम पर लग hi चूका है. तोह अब कुछ भी करना पड़े, पीछे मुद कर मत देखना.

षिमुना ने तो मुझे एक लम्बा लेक्चर hi दे दिया था. ये सच भी था, मेरे अंदर परिधि को खुद के साथ प्यार करते देख कर, ओरल सेक्स करते देख कर बहुत से चंगेस आ गए थे. ये भी सच कहा था षिमुना ने जैसा सब मेरे साथ किया गया था, सच अगर वैसे hi हुआ, जैसा षिमुना ने कहा था तोह फिर मैं सच में hi किसी भी हद तक जा सकता था. अब मई बदल चूका था, तोह बदले की आग भी मेरे अंदर दहकने लगी थी. मैं रेयर जड़ीबूटियां खा कर भी तोह अंदर से बहुत बदल गया था. सेक्स का नशा भी मेरे अंदर बहुत बढ़ गया था. सेक्स की चाह भी बहुत बढ़ गई थी. इस मामले में शायद मैं पहले से भी स्ट्रांग मन बन चूका था. परिधि के सपने में सब करके भी मैं अंदर से कुछ और बदल गया था. अपनी बेहेन के साथ सपने में मज़े करके अपने लुंड को मसल चूका था.

सच में hi अब मेरी लाइफ में इन्सेस्ट शामिल हो चूका था. एक लम्बी सांस के साथ मेने षिमुना को परिधि के ब्रेन के जाने के बाद जो कुछ हुआ था, सब बता दिए. सब सुनके षिमुना खूब हंसी थी.

षिमुना : मुझे भी उस वादी में जाना है दक्ष. षिमुना ऊपर आ के मुझे किश करते हुए बोली. बड़ी क्यूट स्माइल थी उसके होंटो पर, आँखों में चमक भी बहुत बढ़ गई थी.

मैं भी उसे किश करने लगा. किश के बाद षिमुना ने मेरी नक् की नोक को चुम लिया. फिर नाक की नोक पर जीब फेरने लगी.

दक्ष : जब कपल रोमांस में चरम पर होते हाँ तोह खवाबो से भी बढ़िया वादी में ट्रेवलिंग शुरू हो जाती है.

षिमुना मेरे लुंड पर हरकत करती हुई मुझसे बोली.

षिमुना : उम्म्म्म इस मामले में तोह तुम फुल्ली एक्सपर्ट हो दक्ष. चलो मुझे भी ट्रेवलिंग करवाओ. मुझे भी परिधि से बढ़कर हसीं वादी की सैर करनी है.

दक्ष : बेथ चुकी हो तोह खुद से hi सफर का जुगाड़ भी कर लो. मैंने षिमुना को किश करि तोह षिमुना खिल उठी. एक हाथ से मेरे लुंड के सुपड को अपनी गीली छूट पर रगड़ने लगी. फिर छेड़ पर सेट करके अंदर लेने लगी. मुझे महसूस हुआ षिमुना की छूट एक मिनी छूट है. देखि नहीं थी मेने अभी तक.

षिमुना : आह्हः दर्द हो रहा है दसख! बहुत दिनों बाद ले रही हों न एक स्ट्रांग डिक. बी गॉड बहुत पैन हो रहा है.

दक्ष : धक्का लगाएं क्या.. मैं षिमुना को छेड़ते हुए बोलै

षिमुना : no..No.. दक्ष.. प्ल्ज़ ऐसा कुछ मत करना. तुम्हारा हथियार बहुत भयंकर है. और मेरा होल अभी सुकदा हुआ है. कुछ देर में hi रवां होगा. प्ल्ज़ खुद से कुछ मत करना.

मैं है पड़ा. तो षिमुना धीरे धीरे मेरे लुंड पर दबाओ बढ़ाते हुए उसे अंदर लेने लगी.

षिमुना : निकल लो दांत, निकल लो. कभी मेरा भी टाइम आएगा. आह्ह्ह्हह दक्ष तब तक तुम मेरे बूब्स से खेलो न. कितने ज़ालिम हो, इतने महीनो बाद इतनी सूंदर लड़की तुम्हारी तन्हाई में आई है और तुम हो कह उसे भाव hi नहीं दे रहे हो.

दसख : हाहाहा सुंदरी.. कहाँ से हो तुम सूंदर.. मैं षिमुना के दिलकश शेप लिए बूब्स को दोनों हथु से प्रेस करते हुए बोलै तोह षिमुना दर्द भरे भाव चेहरे पर लाते हुए बोली

षिमुना : दक्ष इस कंडीशन में भी तुम मेरे मज़े ले रहे हो. कहाँ से मैं सुंदरी नहीं हों. तुम्हारी लाइफ में आने वाली कोई भी लड़की क्या मेरी जैसी देखि है तुमने.

दक्ष : हाहाहा इसी कंडीशन में hi मज़े लिए जाते हाँ. तुम भी तो मज़े के लिए hi मेरे घोड़े की सवारी करने लगी हो. हाँ ये सच है तुम्हारे जैसी एक भी मेरी लाइफ में नहीं आई. जिसके साथ मेने सेक्स किया हो.

षिमुना ने थोड़ा सा दबाओ बढ़ा दिया था. आधे से ज़यादा लुंड षिमुना की गोरी, बूत गीली, चिकिनी छूट में उतर गया था.

षिमुना : आठ दक्ष में तोह कबसे इसकी सवारी के लिए पागल थी. आज मौका मिला है तोह में मिस नहीं कर सकती, तुम्हारे घोड़े की सवारी को. उफ्फ्फ्फ़ इतना hi ले पाऊँगी दक्ष. इससे ज़यादा की मुझे हिम्मत नहीं हो रही. इतने से hi मुझे काम चलना पड़ेगा.

दक्ष : ये काम मेरा था न, तुम खुद से करोगी तोह कैसे सही से होगा. ठहरो में करता हु काम पूरा.

षिमुना बड़ी कातिल मुस्कान से मुझे देखती हुई बोली.

षिमुना : दक्ष परिधि के समय लगाम अपने हाथ में में लेना. पर अभी मुझे hi इस रेस में दौड़ने दो.

दक्ष : तुम तो मेरी बहन के पीछे hi पद गई हो.

षिमुना : पीछे तो अब मैं पड़ी hi रहूंगी दक्ष. काश मुझे भी टेलिपाथी आती होती तो मैं तुम्हारे ब्रेन में घुस के परिधि का सब कुछ देख लेती. देखती तोह सही, कितनी सूंदर है परिधि, कितनी सूंदर है परिधि की पारी, कितनी सूंदर है--- आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

षिमुना चुप hi नहीं हो रही थी. मैंने एक धक्का मार दिए, थोड़ा सा लुंड और उसकी छूट को खोलता हुआ और अंदर घुसा तोह वो चीख पड़ी.

षिमुना : हाय मार डाला रे तूने ज़ालिम मुझे तो.. आह्हः माआ..

षिमुना के बूब्स छोड़ के मैं षिमुना के चुत्तड़ पकड़ के अपने लुंड को बहार निकल कर अंदर करने लगा.

षिमुना ; बड़ी टाइट है तेरी राम प्यारी षिमुना..

षिमुना ; इतना दर्द दे दिए मुझे दक्ष तुमने. निमणिका की लड़कियों की छूट बहुत नाज़ुक होती है दक्ष. एअर्थ वळून के लुंड का सज़ा भी बड़ा है हमारे प्लेनेट से. उसी हिसाब से हमारी छूट का भी साइज काम होता है. ोीीी माआआआ कितना दर्द दे रहा है मुझे दक्ष का लौड़ा..

दक्ष : चल अब नौरान्की बंद कर. वर्ण तुझे बीएड पे गिरा के पूरा घोडा तेरी राम प्यारी में घुसा के चुदुँगा.

षिमुना ; जान न ले लुंगी मैं तुम्हारी, बाद आया मुझे निचे लिटा के छोड़ने वाला. हँ

मेने षिमुना की गांड के छेड़ पर ऊँगली लगाई तो षिमुना उछाल पड़ी.

दक्ष : क्या हुआ ऐसे क्यों उछली हो तुम.. मेरे होंटो पर स्माइल थी.

षिमुना मुझे दरी हुई दिखी.

षिमुना : दक्ष प्ल्ज़ मेरी गांड का कभी मत सोचना. वहां नहीं, कभी भूल कर भी नहीं सोचना..

दक्ष : क्यों ऐसी क्या खास बात है तुम्हारी गांड में. जो तुम ऐसे बोल रही हो

सिहमुना : दक्ष मुझे यहाँ एअर्थ पर आ के पता चला कह गांड के छेड़ में भी डाला जाता है. हमारे प्लेनेट पर अस्स फूकिंग जैसा कुछ भी नहीं है दक्ष..

दक्ष ; kyaaaaaaaaaa :शॉकेड:

षिमुना : हाँ दसख, हमारे प्लेनेट की सभी गांड वर्जिन hi हाँ. प्ल्ज़ तुम भी मुझे वर्जिन hi रहने देना. छूट में इतना दर्द हो रहा है मुझे. आह्हः मा. नहीं झेल पाऊँगी गांड का दर्द में. मर तोह मर hi जाऊँगी गांड में लेके, कसम से....

दक्ष ; अच्छा किया तुमने मुझे बता दिए. अब तुम मुझसे नहीं बच सकती.

मुझे ये जान कर बहुत मज़ा आया था, मेरी लाइफ में आज तक कोई भी वर्जिन लड़की नहीं आई थी. हमेशा खुली छूट वाली hi छोड़ी थी. षिमुना की छूट की तिघटनेस बहुत थी, तभी तो वो आधा hi ले पाई थी. जाने कितने सालों से चुदती आ रही थी. फिर भी सहन नहीं कर पा रही थी..

षिमुना : अब कुछ मत बोलो दक्ष मुझे इन लम्हो को जीने दो प्ल्ज़. अभी सिर्फ दर्द hi मिला है मुझे. मज़ा आने hi नहीं दे रहे तुम.

दक्ष : मैं भी तोह एक मुद्दत से इस मज़े से दूर हों षिमुना.

षिमुना ; तो मिल कर इन प्राप्त होने वाले लम्हो का आनंद लेते हाँ दक्ष. षिमुना दर्द को सहन करते हुए मुझे किश करते हुए मेरे लुंड पर ऊपर निचे होने लगी. मेरा लुंड 6इंच तक षिमुना की मिनी छूट में फस फस के इन आउट हो रहा था. बहुत गीली हो रही थी षिमुना निचे से. फिर भी फस फस कर जा रहा था मेरा लुंड.

इन 3 महीनो में मेरा लुंड भी 8.1 से बढ़कर 9.3 साइज का हो गया था. मोटाई तोह 3.5 तक जा पोहंची थी. तभी षिमुना चीख पड़ी थी. बड़ी मुश्किल से मेरे लुंड को अपनी छूट में ले पाई थी.

षिमुना प्यार से किश करते हुए मुझसे चुद रही थी. अब षिमुना सही से आनंद लेते हुए ऊपर निचे हो रही थी. मैं भी षिमुना के शरीर से प्राप्त होने वाले मज़े के आनंद में डूबने लगा.

षिमुना एक ग्रेट फिगर वाली लड़की थी. बहुत सूंदर थी तोह उसके बदन की महक भी बड़ी कामुकता को बढ़ा देने वाली थी. हीट छोड़ रहा था षिमुना का बदन बहुत ज़यादा हीट. जल रही थी षिमुना आग में. जल तो मई भी रहा था, बहुत समय के बाद मैं भी सेक्स कर रहा था.

षिमुना ने किश तोड़ कर मेरे सर से सर जोड़ दिए और भरी साँसों के साथ छोड़ने लगी.

कुछ देर में षिमुना की स्पीड बढ़ी तोह हम दोनों के शरीरो में भी अंगारे से भरने लगे. बहुत दिनों बाद सेक्स कर रहे थे तोह जल्द hi दोनों चार्म पर पोहचते जा रहे थे. मुझे भी लग रहा था, जैसे आज मैं जल्द hi झाड़ जाऊँगी. षिमुना की छूट भी तो आग की भट्टी थी. बहुत देहक रही अंदर से. कैसे में ज़यादा देर तक चल सकता था.

षिमुना : आह्हः दक्ष! बी गॉड एक लम्बे समय के बाद सेक्स का मज़ा hi कुछ और होता है. वो भी एक स्ट्रांग डिक से.. उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ मैं तोह गई दसख.. मई गई..

षिमुना की स्पीड और साँसे भड़ी तोह वो मुझपर ढेर होने लगी. पानी नहीं छोड़ा था षिमुना की छूट ने.. आग छोड़ी थी षिमुना की छूट ने. इतना गर्म पानी निकला उसकी छूट से. मेरा लुंड भी उसी समय हिम्मत हार बैठा. जाने कितनी पिछकारियाँ उसने षिमुना की मिनी छूट में छोड़नी शुरू कर दी थी. बहुत प्रेशर था मेरे लुंड से निकल रही पिछ्कादियो का. मुझे बहुत अच्छे से एहसास हो रहा था.

षिमुना मेरे ऊपर गिरी हांप रही थी. मई भी लम्बी लम्बी सांसे लेते हुए षिमुना को अपनी बहन में कसने लगा. बड़ा आनंद मिला था मुझे षिमुना के साथ ये लम्हे बिता के.

कुछ देर में षिमुना सीढ़ी हुई और मुझे किश करने लगी.

षिमुना : दक्ष ी लव यू दक्ष.. दक्ष तुम बहुत कमल के सेक्स पार्टनर हो, मुझे बहुत मज़ा आया तुम्हारे साथ दक्ष.

दक्ष : और मुझे भी. पर मेरा मज़ा तब पूरा होगा. जब------- षिमुना ने मुझे मोह पर हाथ रख दिए.

षिमुना : ेहेहेहेहे.. तुम अपने उस मज़े को भूल hi जाओ दक्ष. मैं नहीं देने वाली तुम्हे अपनी गांड. गांड के लिए तुम अपने hi प्लेनेट की किसी लड़की को ढूंढो. Wang-zhi मेरे ख्याल से सही रहेगी.

दक्ष : ये क्या कह रही हो तुम. Wang-zhi के बारे में ऐसे बात मत करो वो मेरे गुरु की पोती है षिमुना.

षिमुना : तो क्या हुआ दक्ष.. वो पगली भी तुमसे प्यार करती है.

दसख : और प्यार करने वळून के लिए मेरे दिल में कोई जगा नहीं है. और तुम भी मुझे कभी ये फॉर्मेलिटी वाले शब्द फिरसे मत बोलना कभी.

षिमुना : दक्ष! अलका का मटर भी बीच में है. सच सामने नहीं आया है अभी दक्ष. जैसा तुम्हारे साथ किया गया है, ज़रूर अलका को भी इस्तेमाल किया गया है. इस सब के पीछे कोई बहुत बड़ी बात ज़रूर होगी दक्ष.

दक्ष : प्ल्ज़ षिमुना अलका का ज़िक्र मत करो, अभी मैं अच्छे मूड में हों तोह उसका नाम लेके मेरा मूड मत ख़राब करो.

षिमुना ; okay..Okay.. नहीं लेती उसका नाम. पर तुम्हे सच को तो खोजना है न.

दक्ष : हाँ! वह तो अब मैं ज़रूर खोज के रहूँगा.

षिमुना : और wang-zhi का भी कुछ सोच लेना दक्ष. चीन एक आज़ाद कंट्री है. यहाँ सेक्स को लेके भी ज़यादा नहीं सोचा जाता. मास्टर जी की पोती है, पर तुम्हे दिल से पसंद करती है. यहाँ से जाने के बाद फिर कभी उससे मिलना हो क न हो. उसे थोड़ी सी खुशियां देते जाना. ीनता हक़ तो उसका बनता hi है.

दक्ष : इस पर भी सोच लूंगा, अभी तुम मेरी बहन में हो तोह मुझे खुद को महसूस करने दो. तुम दूसरों से बहुत अलग हो षिमुना. बहुत प्यारी, बहुत सूंदर और मेरी अच्छी दोस्त भी हो.

कुछ देर में हम दोनों एक दूसरे की बहन में सो रहे थे.

अगले दिन सुबह जल्दी उठ के मैं उसी पेड़ के पास बैठ के मैं फिरसे परिधि के ब्रेन में घुस गया. और जानकारी प्राप्त करने लगा.


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दिन के 3 बजे अलका की शादी सतीश से तोह पायल सिंह की शादी विनय के साथ कर दी गयी थी. पुजारी जी के मैं में बहुत से डाउट थे, फिर भी शादी करवा दी थी उसने.

जाने क्या क्या चल रहा था पुजारी जी के मैं में. सतीश समेत एक एक के चेहरे वो देख रहे थे. सब के सब उसे घट्टिया दिखाई दे रहे थे. पर वो कुछ नहीं बोलै था. कभी सबको देख कर विचारों में डूब जाता था तोह कभी सबको देख कर ऊपर आस्मां की ऑर्डर देखता हुआ मुस्कुरा दिए करता था.

पायल सिंह अब पिंजरे में बंद एक चिडया थी. खुद के लिए कुछ नहीं कर सकती thi.Toh

सारा समय वो खामोश hi रही थी. पुजारी जी ने पूछा था तोह अलका ने उसे रिलैक्स रहने के लिए कह दिए था. पुजारी जी फिरसे ऊपर आस्मां की ऑर्डर देख कर मुस्कुरा पड़े थे. ऐसे समय उनकी मुस्कान देख कर सब कुछ न कुछ सोचा करते थे. पर कोई भी समझ नहीं पता था, पुजारी जी की मुस्कान का मतलब.

परची इस शादी में शामिल नहीं हुई थी. उसकी तबियत अचानक से hi बिगड़ गई थी. सबने उसे रेस्ट करने को कह दिए था. तब से वो अपने कमरे में hi रही थी. उसने खुद से भी कह दिए था. कोई उसे डिस्टर्ब न करे, वो खुद से रूम से बहार आ जायेगी.

सबने भी okay बोल दिए था.

शादी के बाद पायल सिंह को कमरे में बीएड पर बिठा दिए गया था. ऋचा बहुत खुश दिखा दे रही थी. पायल के साथ मस्ती कर रही थी, छेड़ रही थी. कभी इधर हाथ लगाती तोह कभी उधर. पायल सिंह सर झुकाये खामोश बैठी हुई थी. उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे. न ख़ुशी के, न दुःख के, न दर्द के. एक शादी शुदा स्त्री वाला कुछ भी उसके चेहरे से दिखाई नहीं पद रहा था.

फिर भी सब बहुत खुश थे.

दूसरी ऑर्डर पुजारी जी, बस्ती वळून के साथ, अलका, सतीश, विक्रम सिंह और रुपाली के साथ गुफा वाले पहाड़ की और बढ़ रहे थे. सब अश्लोक पढ़ते हुए आगे बढ़ रहे थे. सतीश के चेहरे पर जितनी चमक थी, उससे कहीं बढ़कर, अलका, विक्रम सिंह, रुपाली के चेहरों पर चमक थी. सब जल्द से जल्द उस गुफा तक पोहंच जाना चाहते थे. पर पहाड़ी इलाका था. वहां तक पोहंच पाना आसान भी नहीं था. सब तेज़ कदमो से चलते हुए गुफा के करीब होते जा रहे थे.

शाम से एक घंटा पहले सब उस गुफा के पास पोहंच चुके थे. थकन से बहरपुर सफर था. फिर भी सब थकन को भूले हुए थे, सब बहुत बेचैन थे. बस्ती वाले अनजान थे, पर खुश थे. पुजारी जी भी चिंता में नहीं थे.

गुफा का मोह खुला हुआ था. अंदर एक और गुफा थी, असल काम उसके अंदर जाना था. पुजारी जी अलका सतीश, विक्रम के साथ अंदर दाखिल हुआ. कुछ मिनट्स वही बेथ के पूजा करि. फिर अलका को गुफा का दरवाज़ा खोलने के लिए कहा. गुफा का दरवाज़ा कैसे खुलना था, पुजारी जी बता चुके थे. बड़ी बड़ी टोर्च भी वही मौजूद थी. अँधेरे की कोई टेंशन नहीं थी. सतीश का हाथ थाम के अलका ने गुफा का दूर खोल दिया. एक बड़ी चट्टान थी, एक जगा दबाने पर गड़गड़ाहट के साथ वो चट्टान साइड हटने लगी और गुफा का रास्ता खुलने लगा. सबके दिलों की धड़कनो में बेपनाह इज़ाफ़ा होने लगा था.

ठीक उसी समय पर वहां से एक प्लेन भी गुज़र रहा था. जिसकी हाइट 800 मीटर थी. उसका दूर खुला और 60 के करीब स्कैडिवेर्स प्लेन से छलांग लगा कर गुफा वाले पहाड़ की और बहुत ज़यादा स्पीड के साथ निचे आने लगे..

अलका और सतीश अभी अंदर दाखिल नहीं हुए थे. बहार बेपनाह शोर सुनाई देने लगा. बस्ती वळून ने भी पलने से कूद रहे स्कैडिवेर्स को देख लिया था. वो ये सब देख कर शोर मचने लगे थे. वो कुछ समझ तोह नहीं पा रहे थे. पर ये देख कर चीख ज़रूर पड़े थे.

उसी समय पर उसी पहाड़ के आस पास पहले हुए जंगलों में अनगिनत भयंकर गन्स ने भी गरजना शुरू कर दिया. इतनी खौफनाक फायरिंग होने लगी. बस्ती के सभी लोग, बच्चे बूढ़े, महिलएं सब खौफजदा होक चीखने चिल्लाने लगे. जिसका रुख जिस दिशा में हुआ वो उसी दिशा में भाग खड़ा हुआ.

कुछ गन्स का रुख ऊपर से निचे आ रहे स्कैडिवेर्स की और था. तोह कुछ गन्स स्कैडिवेर्स को शूट करने वलु को शूट कर रही थी.

जल्द hi सब को पता चल गया, उस गुफा के गिर्द दो गैंग्स विथ हैवी गन्स के मौजूद हाँ.

एक गैंग स्कैडिवेर्स का साथी गैंग है.

विक्रम सिंह ये जान कर परेशान हो गया. वो सोचने लगा एक गैंग तोह उसका है दूसरा किसका हो सकता है. और फिर उनका यहाँ क्या काम. कहीं वो भी तोह राज़ बारे जान तोह नहीं गए. विक्रम सिंह परेशान हो गया. परेशान तोह रुपाली भी हो गयी थी.

विक्रम सिंह : पुजारी जी, हमें अंदर दाखिल हो जाना चाहिए. विक्रम सिंह को अपनी जान खतरे में महसूस हुई तोह बोल पड़ा.

पुजारी जी मुस्कुराते हुए.. अंदर केवल अलका बेटी अपने पति के साथ hi जा सकती हाँ. अगर आप ज़िंदा नहीं रहना चाहते तोह जा सकते हाँ.

विकरण सिंह लरज़ कर रह गया. उसे कुछ समझ तोह नहीं आया था. ऐसा सब उसने राज़ जानते समय नहीं सुना था. पर पुजारी बहुत देर से उसे खटक रहा था. और फिर जैसा राज़ था, ऐसा कुछ हो भी सकता है. विक्रम सिंह को पूरा पूरा ज्ञान था. वो दर गया और रुपाली का हाथ थाम कर बहार जाने लगा. पर बहार भी मौत का नंगा नाच शुरू हो चूका था. विक्रम सिंह बहार जा जल्द hi रुपाली के साथ अपने आदमियों में जा के शामिल हो गया. उसकी किस्मत अछि थी, जो हज़ारों गोलियां में से एक भी गोली उसे नहीं लगी थी. फायरिंग हो hi एंटी भयंकर रही थी. पूरा एरिया वर्ज़न में बदल चूका था.

स्कैडिवेर्स भी एक जगा उतर चुके थे. बड़ी स्पीड के साथ, बड़ी महारत के साथ वो वह लैंड हुए थे.

पुजारी जी : अलका बेटी देर न करो, अंदर प्रवेश करो, मैं यही बेथ के एक मंतर पढता हों. अलका ने हाँ में सर हिलाया और सतीश के साथ गुफा के अंदर प्रवेश कर गई.

पुजारी जी ने ाएस पास देखा और फिर वहीँ एक जगा दबा कर उस चट्टान को फिरसे गुफा के साँमे ला के बंद करने hi वाला था. मंतर बाद में पढ़ना था पुजारी जी ने.

पर देर हो चुकी थी.....

बहुत से गुंडे एक साथ उस गुफा में दाखिल हुए. पुजारी जी उन्हें देख कर चट्टानी रस्ते को बंद न करते हुए एक और भाग खड़े हुए. इतना समय hi नहीं था उनके पास. चट्टानी रास्ता बंद करते तोह खुद मारे जाते.

गुंडे फायरिंग करते हुए पुजारी के पीछे भागे, पर वो कहीं भी दिखाई नहीं दिए.

कैसे दिखाई देता, वो एक और चट्टान को हटा के एक और मिनी गुफा में प्रवेश कर चूका था. जितना वह इन गुफाओं को जनता था, कोई और नहीं जनता था.

पुजारी : मूर्खो तुम सब यहाँ मरने के लिए आये हो. यहाँ कोई भी मैं में पाप लेके नहीं आ सकता. यहाँ की रक्षा करने वाले महान हाँ. मरोगे सबके सब, कोई भी ज़िंदा बच कर नहीं जा पायेगा.

और हुआ भी ऐसा hi. अचानक से hi गुफा में गुंडों की भयंकर की चीखें गूंजने लगी. जितनी भयंकर उनकी चीखें थी, उल्टी hi भयंकर आवाज़ उनकी गन्स से निकल रही बुलेट्स की भी थी.

उन्ही आवाज़ों में दो आवाज़ें अलका और सतीश की भी थी.


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विनय जब कमरे में दाखिल हुआ तोह दूर को अंदर से लॉक नहीं किया विनय ने. विनय लड़खड़ाता हुआ बीएड पर पायल सिंह के सामने ाँ गिरा.. साला फुल नशे में टल्ली था.

विनय : आखिरकार तुम मेरी हो hi गयी पायल सिंह.. बहुत टेस्ट हों मैं तेरे इस सुन्दर शरीर के लिए. आज मैं तुम्हारे शरीर की साडी शराब निचोड़ जाऊँगा. एक कटरा भी नहीं रहने दूंगा मैं तुम्हारे शरीर में. बहुत सालों से इस शरीर ने मुझे बेचैन किये रखा है. आज साडी बेचैनी ख़तम हो जायेगी.

विनय बहुत ज़यादा पिए हुए था. साला बिवाड़ा कहीं का.. पायल कुछ नहीं बोली तोह विनय को भी पायल सिंह से बात करने की कोई ज़रूरत नहीं थी. विनय आगे बढे और एक एक करके पायल सिंह के बदन से कपड़ो को अलग करने लगा.

कुछ देर में पायल सिंह विनय के सामने नंगी थी. नशे में होने के कारण विनय पायल सिंह के भाव भी सही से नहीं देख प् रहा था. होश में होता तोह सोचता, पायल सिंह टेंशन में क्यों नहीं है. उसे पायल सिंह के भाव से कोई मतलब भी तोह नहीं था. खुद भी नंगा होक बिना कुछ और किये पायल सिंह के पैरों को उठा के, पायल सिंह की छूट पर अपने लुंड को सेट करके धक्का मार दिए.

पर ये क्याआ..

विनय का 5इंच का लुंड बिना किसी रुकावट के सारा hi एक hi बार में पायल सिंह की छूट में जा समाया था.

विनय : साली तू भी चूड़ी हुई निकली.. माँ की लौड़ी तूने कब अपनी छूट किसी को दी थी. मैंने तो तुझे कभी किसी के साथ नहीं देखा था. तू ऐसी तो नहीं थी. फिर तेरी छूट क्यों इतनी ज़यादा खुली हुई है. विनय को ग़ुस्सा आ गया, विनय पूरा पूरा लुंड निकल कर ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा. पर उसे मज़ा नहीं आ रहा था. नशे में होते हुए भी उसे पायल सिंह को छोड़ने में मज़ा नहीं आ रहा था.

विनय ने ग़ुस्से से पायल सिंह को पलटा और दो थप्पड़ दोनों नितम्बो पर मार दिए.

विनय : साली तेरी गांड ज़रूर सील पैक होगी. इसे hi खोल देता हों. विनय ने दोनों चुत्तड़ खेंच कर अपने लुंड को गांड पर सेट किया और पुरे जोरसे धक्का मार दिए.

यहाँ भी छूट वाला hi सन था.....

पूरा का पूरा लुंड पायल सिंह को कुछ दर्द देते हुए गांड में घुसता चला गया. विनय सिंह को और भी ग़ुस्सा आ गया.

ग़ुस्से से पुरे जोश से पायल सिंह की गांड मारने लगा. कभी चुत्तड़ पर थप्पड़ मर देता तोह कभी पीठ पर..

विनय : साली कुत्तिया तूने पहले से hi किसी के साथ मज़े ले लिए. पहले से hi दोनों छेड़ किसी कुत्ते को दे दिए. मैं तोह समझा था तोह अच्छी लड़की है. पर तू भी रंडी निकली साली कुत्तिया कहीं की..

विनय और भी ज़यादा ग़ुस्से में आते हुए पायल सिंह की गांड मारने लगा. गांड कुछ टाइट थी, तोह विनय को कुछ कुछ मज़ा आने लगा था. विनय कुछ देर में गांड में hi ढेर हो गया. ऐसे hi पायल सिंह के ऊपर गिर कर वो सो गया. नशा और फिर लुंड के खली हो जाने से उसके बचे खुचे होश भी जाते रहे थे.

कुछ मिंटो बाद पायल सिंह ने बढ़ा कर साइड टेबल की दराज़ में रख हुआ एक लोशन निकला और अपने फेस पर मलने लगी. ऐसा करते समय भी वो बिना भाव के थी.

लोशन को अच्छे से अपने फेस पर मलने के बाद लोशन को वापिस से दराज़ में रख दिए.

जब बहार फायरिंग हुई तोह ऋचा बहुत डरने लगी.. फायरिंग सुनकर वो बहुत परेशान हो गई थी. फायरिंग थी भी तोह बहुत भयंकर. मीलों दूर होते हुए भी ऐसे सुनाई दे रही थी. जैसे हवेली के पास hi हो रही हो.

ऋचा दर के पायल सिंह वाले कमरे की ऑर्डर आई. दूर को नॉक किया तोह वह खुलता चला गया. ऋचा फ़ौरन अंदर पोहंची और अंदर दोनों को नंगा देख कर कुछ शर्मा गयी.

ऋचा समेत सब ओपन माइंडेड थे. पर इन्सेस्ट विक्रम सिंह परिवार में नहीं था. नोक झोक और मस्ती मज़ाक सब था. पर इन्सेस्ट नहीं था. ऐसी हालत में भी कभी किसी ने एक दूसरे को नहीं देखा था.

ऋचा खुद भी सेक्स लाइफ जीने वाली लड़की थी. पर अपने भाई को अपनी भाभी के साथ ऐसी हालत में देख कर वह कुछ शर्माने लगी थी.

ऋचा बहार हो रही फायरिंग से दर भी रही थी और अंदर देख कर कुछ शर्म भी महसूस कर रही थी. वह पलट के परची के रूम में जाने लगी. जब उसकी नज़र पायल सिंह के फेस पर पड़ी तोह वो चीख पड़ी.

ऋचा : diiiiiiiiidiiiiiiiiiiiiiii

पायल सिंह भी अब होश में आ चुकी थी. ऋचा की चीख सुनके वो ऋचा को देखने लगी.

"क्या बात है ऋचा तुम ऐसे चीखी क्यों" इतना बोल के वह विनय को खुद से अलग करते हुए बीएड से उत्तरी तोह खुद भी चीख पड़ी. उसका हाथ अपनी गांड पर गया तोह अपनी गांड दबा के देखने लगी. विनय के लुंड को भी अपनी गांड से निकलते हुए उसने महसूस कर लिया था.

"आह्हः माँ मेरी गांड का दर्द"

फ़ौरन hi वह खुद को और विनय को नंगा देख कर भी चीख पड़ी थी.

उसका चीखना बनता भी था. वो पायल सिंह नहीं परची सिंह थी. जिसके बारे में सब सोच रहे थे, वह अपने कमरे में रेस्ट कर रही है.


पर नहीं...

जबसे परची सिंह कमरे में कैद हुई थी. तब से पायल सिंह का रोले वही निभा रही थी. शादी होने से लेके सुहागरात तक परची hi पायल सिंह बानी हुई थी. पायल सिंह तोह हवेली में थी hi नहीं.

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आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..


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सब सामने आ जाये भाई. लका का कितना रोले था दक्ष को फसाने में...

कुछ भी क्र गुज़ारना विक्रम सिंह या कसी के लिए भी आसान नहीं होगा.

थैंक्स भाई

थैंक्स भाई...

शुक्रिया भाई...

थैंक्स भाई...

थैंक्स..

पूरी स्ट्रोय hi थ्रिल है भाई.. बहुत झटके देने वाला हूँ मैं आप सबको..

थैंक्स ा लोट प्यारे भाइयो ऐसे hi साथ बने रहे ✨
 
थैंक्स भाई..

शुक्रिया भाई...

शुक्रिया भाई..

जी हाँ अब जल्द hi दक्ष इन एक्शन नज़र आएगा.. बूत मंद गेम ज़यादा देखने को मिलेगी...

जी भाई एक्शन hi तोह इस स्टोरी की जान है...

ये तोह है.. सब के सब बहुत घट्टिया हाँ.. जैसी करनी वैसी भरनी.. जल्द hi सबका काउंटडाउन शुरू होने वला है

शुक्रिया भाई....

थैंक्स डिअर....

थैंक्स आल डिअर रीडर्स .. ऐसे hi साथ बने रहे ✨
 
बहुत कुछ ऐसा है. जिसे जान कर आप सुरप्रीसेड होंगे. जल्द hi सब सामने आ जायेगा भाई..

गलत किया जाए तोह फिर बदल भी तोह देना पड़ता है. समय बदलता है तोह बहुत कुछ हिला के रख देता है.

ये तोह देखना पड़ेगा. दक्ष क्या करता है...

परिधि के मैं में अपने भाई के लिए अल्लाह hi फीलिंग्स आ चुकी हाँ. देखते हाँ दोनों जब मिलेंगे तोह कैसा सन बनता है..

शुक्रिया भाई बेस्ट रिव्यु के लिए... साथ बने रहे ✨
 
बहुत बहुत शुक्रिया ज़र्रों भाई मैं से रिव्यु देने के लिए.. मोहब्बत है आपकी, पढ़ कर अच्छा लगा.. सूर्य फॉर लेट रिप्लाई..

राज़ तोह अलका के परिवार कर बहुत hi मस्त है. सब सामने आएगा तो स्ट्रोय में जान पड़ती हुई महसूस होगी आपको. और मज़ा भी खूब आएगा. पायल सिंह भी वहां पोहंच के फस गई.. पर बचने वाले भी तोह मौजूद हाँ. दुश्मनो की हर चल hi कामयाब हो ये ज़रूरी तोह नहीं...

खवाब में परिधि भी अपने भाई के साथ प्यार का खेल खेलती है. दक्ष पहली बार अपनी बेहेन के ब्रेन में घुसा तोह सब जान के हैरान रह गया. मस्त भी हुआ और षिमुना भी इस मौका पर छक्का मरने के लिए आ पोहंची... 🙏🙏🙏🙏
 
घट्टिया हाँ तोह रंग तोह दिखाएंगे hi.. पहले राजा ठाकुर की पावर से डरते थे. अब वो पावर नहीं रही, राजा ठाकुर का वह पहले वाला दबदबा भी नहीं रहा था.. तोह दर भी कुछ काम हो गया है राजा ठाकुर का...

दक्ष टेलिपाथी न जनता होता तोह कभी नहीं जान पता उसकी बेहेन के मैं में क्या चल रहा है. वह उससे इतना प्यार करती है.. अब सब दक्ष के सामने आ गया है.

शुक्रिया भाई.. साथ बने रहे ✨
 
हम्म्म ये भी है. दसख का फर्स्ट एक्सपीरियंस भी था न. तोह डिटेल दिखा दी. उसके मन का भी तोह बताना था. टेलिपाथी की पहली परवाज़ पर दक्ष के साथ ऐसे होना hi था. इसलिए भी इतना सब दिखा दिए..

नेक्स्ट धयान रखूँगा भाई.. :थैंक्स:

समय चल बदल रहा है तोह फेस भी सब सामने आने hi होंगे. कोण केसा है. किसने क्या कुछ किया था गुज़रे समय में. वो भी तोह सामने आएगा hi..

जल्द hi सब सामने आ जायेगा. यहाँ सोफिए का कोई खेल है क नहीं.. अलका के साथ कुछ और मटर तोह नहीं. सब खुल जायेगा जल्द hi.

जो अलका का है, वो तोह पुजारी जी उसे लौटाएंगे hi. अब जो गलत हुआ वह खुद भगतेगा.

शुक्रिया भाई.. आप ऐसे hi मुझे सुग्गेस्ट करते रहें. ऐसे hi तोह सही से लिखने में आसानी बनती है. कुछ मंद से निकल जाये या कुछ एक्स्ट्रा लिख जा जाए तोह उसे सही किया जा सके.. थैंक ा लोट भाई.. 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
 
:थैंक्यू: 🙏🙏

पुजारी जी दुन्या देख चुके हाँ तोह सतीश और सबको देख कर उन्हें कुछ डाउट होना hi था.

:नू: ...... पर अब शुरुआत हो चुकी है. नेक्स्ट पोस्टेड अपडेट में......

ये बात भी खुल जाएगी जल्द hi....

देखते हाँ.. क्या सामने आता है

:लाफ:

बहुत बहुत शुक्रिया भाई... साथ बने रहे ✨
 
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