Samraat ..The Tales of Debauchery, Hate & Revenge - Page 7 - SexBaba
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Samraat ..The Tales of Debauchery, Hate & Revenge

होना तोह ऐसा hi चाहिए.. अब देखते हाँ आगे क्या होता है. दक्ष एंड अलका एक साथ होते हाँ क नहीं. दोनों एक दूसरे के गुज़रे कल को कैसे यद् करते हाँ. अच्छे अंदाज़ में या बुरे अंदाज़ में.. अलका के सामने सच खोल पायेगा दकढ़ या नहीं.. ये भी दहकने वाली बात होगी.

यो बात तोह आपने सोला आने सही कही भाई...

ये भी सही है.......... थैंक्स ा लोट भाई.. ऐसे hi रिव्यु देते रहे.. ✨
 
Episode:20

परची सिंह खुद को अपने hi भाई के साथ एक hi बीएड पर नुदे देख कर हैरान रह गयी थी. जहाँ उसे बहुत ज़यादा हैरानगी हो रही थी. वहीँ वह बहुत ज़यादा शॉकेड भी थी.

उसे कुछ समझ नहीं आ रही थी, खुद को अपने hi भाई से चूड़ी देख कर बहुत परेशान भी थी. ऐसा कैसे सब हो गया था.

वह तोह अपने कमरे में सोने गई थी. उसके बाद का उसे कुछ भी याद नहीं था.

अब अपने hi भाई के साथ थी, अपने hi भाई से चुद गई थी. अपने hi भाई के लुंड को अपनी गांड से निकलते देख चुकी थी, दर्द भी उसे हो रहा था. ऋचा भी वहीँ मोह पर हाथ रखे उसे हेरात से देख रही थी.

ऋचा : दीदी आप यहाँ कैसे? वह भी ऐसी हालत में..

जितनी पहले ऋचा को शर्म आ रही थी, उतनी hi अब उसे हेरात भी हो रही थी. वो समझ गयी थी, सेक्स सन पायल सिंह के साथ नहीं उसकी दीदी परची सिंह के साथ बना है.

परची भी पजल होने लगी. वह घबराई हुई बोली : ऋचा mm...main नहीं जानती, मैं यहाँ कैसे आ गयी. mm..main तोह अपने कमरे में रेस्ट करने गई थी न.

ऋचा की भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था. इतना तोह समझ रही थी, जितना समय बीता है, इतने समय तक उसकी दीदी और भाई hi सेक्स करते रहे हाँ. ये जान कर वह और भी हैरान थी. पर कुछ भी उसकी समझ में नहीं आ रहा था. उसकी दीदी यहाँ थी तोह फिर पायल कहाँ गयी. उसके भाई को क्यों पता नहीं चला, वह अपनी hi बेहेन को छोड़ बैठा.

ऋचा जितना सोचती, उतना hi उसके सर में दर्द बढ़ने लगता. सब देख कर परेशान hi इतनी हो उठी थी वह. कुछ भी उसकी समझ में नहीं आ रहा था.

दर्द तोह परची की गांड और सर में भी बहुत होने लगा था. वह इधर उधर देखती हुई अपने कपडे तलाशने लगी. पर उसे दुल्हन ड्रेस के शिव कोई और ड्रेस नहीं मिला. वहीँ पहन के वह ऋचा के साथ कमरे से बहार निकलने लगी.

विनय ने बड़े ग़ुस्से से परची की गांड मार ली थी. परची लंगड़ाती हुई चल रही थी. अपने hi भाई से चुद के जहाँ उसे झटका लगा था. वहीँ वह बेहद परेशान भी थी. अपने भाई से चुद जाने पर जहाँ उसे शर्म आ रही थी, सब सोच क्र उसे घिन भी आ रही थी. अपने hi भाई से वह चुद जायेगी, उसने खवाब में भी नहीं सोचा था. वहीँ ऐसी सिचुएशन पर वह शॉकेड भी बहुत थी.

सोच सोच उसके सर में दर्द होने लगा था. ऊपर से बहार निकलने पर फायरिंग की आवाज़ सुनकर वह दर भी गयी थी. ऋचा से फायरिंग बारे पूछने लगी.

ऋचा : पता नहीं दीदी, ये कैसे फायरिंग है. मेरा दिल बहुत घबरा रहा है. सब उसी दिशा में गए हाँ, जिस दिशा में ये भयंकर फायरिंग हो रही है.

परची : भगवन भली करे ऋचा. पता नहीं सब क्या हो रहा है. मेरा भी दिल बहुत घबरा रहा है. पता नहीं हमारे साथ क्या रहा है. मुझे तोह कुछ समझ नहीं आ रही.

ऋचा : और मुझे भी. ऋचा परची सिंह की चाल देखते हुए बोली.

परची ने ऋचा की निघून में जाना तोह शर्मा गयी. कुछ कंफ्यूज भी हो गई.

परची : ऋचा मुझे ऐसे मत देखो प्ल्ज़. कसम से मैं कुछ नहीं जानती.


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बेचारी परची जान भी कैसे सकती थी. ये सारा खेल मेरा hi रचा हुआ था.

परिधि के दिमाग में घुस के मैंने सब जानकारी प्राप्त कर ली थी. सब जान गया था मैं. पिछले कुछ दिनों से हवेली में क्या कुछ हुआ. मेरे परिवार के साथ क्या हो रहा था. एक दिन पहले सब मिलकर क्या बातें कर रहे थे, वह सब भी में जान गया था.

वहीँ से मुझे पता चला, सब देहरादून अलका की खानदानी हवेली गए हाँ. ये जान कर भी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ा था. फर्क तब पड़ा जब मुझे परिधि के दिमाग से दादा ठाकुर के ये शब्द जान्ने को मिले. वहां जाना किसी के लिए भी सही नहीं है. वहां बहुत से खतरे भी हाँ. खतरे किसके लिए थे, ये सही से कोई नहीं जनता था. मैं भी नहीं जान पाया.

पायल दीदी भी वहीँ गयी थी. अलका भी वहीँ गयी थी. अलका की मुझे उतनी चिंता नहीं हुई, जितनी पायल दी के लिए होने लगी थी. हमारे जो भी मटर था, वह हमारा आपसी मटर था. किसी और से उनकी जान को खतरा हो, ये कैसे देख सकता था मैं.

ख़ामोशी से सबके दिमाग में घुस गया मैं. वहीँ मुझे पता चला, कैसे कैसे खेल खेले जा चुके हाँ. और अब कैसे कैसे खेल खेले जा रहे थे.

जान कर हैरानगी भी हुई और ग़ुस्सा भी बहुत आया. दुश्मनी के रंग देख और जान कर हंसी भी आई. लोग क्या कुछ नहीं कर जाते दुश्मनी निभाने के लिए. अक्सर बात उतनी नहीं हुआ करती, जितनी बढ़ा दी जाती है.

मैंने षिमुना को देहरादून भेज दिया था. दिन के 11 बजे वह उस बस्ती के आस पास थी. हवेली में पोहचने, पायल दी की जगा परची को लाने में कोई दिक्कत नहीं हुई थी. फेस चेंज करने वाला आयल, फेस को वापिस पहली वाली हालत में लाने वाला लोशन भी वह अपने साथ hi ले गयी थी. जिस चिनेसे ने मेरा और षिमुना का फेस बलदा था, उसमे समां कर षिमुना फेस चेंजिंग से रिलेटेड साडी इन्फो भी निकल चुकी थी.

परची को पहले hi में अपने ट्रांस में ला चूका था. वह खुद को पायल सिंह समझने लगी थी. पर मैंने फिर भी उसे खामोश hi रहने का आर्डर दे दिया था. जैसा सब मेरे साथ किया गया था. वैसा hi खेल मेने भी खेल दिए था.

जैसे को तैसे वाले फॉर्मूले पर अमल किया था मैंने. परची के बारे में जान कर मैं हैरान हुआ था. कहाँ ऋचा खुद को लिमिट में रखने की आदि थी, वहीँ परची एक रंडी की ज़िन्दगी भी जी रही थी. बहुत से लड़कों के साथ उसके नाजायज़ सम्बन्ध रहे थे. ऐसी के साथ ये सब करने में मुझे कोई परेशान नहीं हुई. कोई रिग्रेट वाला चक्कर भी नहीं हुआ था मेरे साथ. सब बहुत घट्टिया लेवल के थे. अपने hi परिवार के साथ घट्टिया कर रहे थे. मेरे बाद अब मेरी बेहेन को निशाना बनाया जा रहा था. मेरे बाद उसके साथ खेल खेला जा रहा था. कैसे मैं ये सब देख सकता था.

पायल दी को षिमुना वहां से किसी की भी नज़रों में लाये बिना निकल चुकी थी. दीदी सिंपल लड़की थी. पर षिमुना एक बाला थी. कैसे कोई उसे देख पता. कैसे कोई उसके सामने टिक सकता था. बहुत से पेंतरे वह तिम्ले में wang-zhi के साथ रहते हुए सीख चुकी थी. पहले भी वह किसी से काम नहीं थी.


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जिस गुफा से जुड़ा हुआ था अलका के परिवार का रहस्य. वहां क्या था, कोई नहीं जनता था. केवल पुजारी जी जानते थे. आय अलका के परिवार वाले जानते थे, जो अब नहीं रहे थे.

गुफा के अंदर एक और गुफा थी. (उसके आगे क्या था, शायद पुजारी जी भी नहीं जानते थे.) अंदर वाली गुफा का चटनी रास्ता खोल कर पुजारी जी ने अलका और सतीश को अंदर जाने को बोल दिए था. बहार होने वाली गड़बड़ के चलते दोनों को फ़ौरन hi अंदर घुसना पड़ा और विक्रम सिंह को रुपाली के साथ बहार लौटना पड़ा. कोई और चारा भी नहीं था उनके पास.

किस्मत से बहार हो रही गोलियों की बारिश से वह बचते बचते अपने आदमियों तक जा पोहंचे थे. पुजारी जी भी एक गुफा में घुस कर, बाद में अंदर घुस आने वाले गुंडों से बच गए थे.

पुजारी जी गुफा में छुपा हुआ बोल रहे थे -:- मूर्खो तुममे से कोई भी बच कर जा नहीं पायेगा, यहाँ कोई भी मैं का पापी अपने मकसद में सफल नहीं हो सकता. अंदर प्रवेश करने के बाद ज़िंदा लौट नहीं सकता.

विक्रम सिंह और रुपाली की किस्मत अच्छी थी जो वह आगे बढ़ने की बजाये वापिस लौट गए थे.

जैसे hi गुंडों ने गुफा में घुस कर पुजारी के पीछे दौड़ लगायी तोह उसी गुफा में बने छोटे छोटे छेड़ो से अनगिनत डिफरेंट कोर्स के सांप निकलने लगे. जो भी गुंडा दिखाई देता, उनकी और रेंगते हुए, उड़ते हुए डसने लगे.

गुंडों सांपो की संख्या देख कर घबरा गए, फायरिंग करने लगे. पर सांप बहुत ज़यादा मात्रा में थे. एक के करके गुंडे मरने लगे. कुछ सांप भी गुंडों की गोलियों से मारे गए. पर वह बहुत ज़यादा थे. कुछ गुंडे चीखते हुए जान बचा कर गुफा से बहार को भाग निकले.

बाकी सब मारे गए......

अलका और सतीश भी गुंडों की चीखें, फिर फायरिंग की आवाज़ सुनकर और भी ज़यादा दर गए थे. पर उन्हें आगे तोह बढ़ने hi था. गुफा अंदर से और भी ज़यादा भयंकर होती जा रही थी. दोनों एक एक हाथ में टोर्च पकडे हुए आगे बढ़ रहे थे. 10 मीटर hi आगे बढे होंगे. उन्हें सांपो की फुंकार की आवाज़ सुनाई दी.

दोनों चीख पड़े......

दोनों के रोंगटे खड़े हो गए.....

दोनों थार थार कांपने लगे.....

टोर्च की लाइट्स घुसा कर गुफा में देखने लगे. गुफा की चौड़ाई 3 मीटर थी. खुला रास्ता था. पर दोनों को कोई भी सांप दिखाई नहीं दिया. सतीश ने पीछे मुद कर देखा तोह उसका रुअन रुअन खड़ा हो गया. पीछे देखने पर गुफा का रास्ता उसे बंद दिखाई दे रहा था. सतीश थार थार काँप रहा था. सर्दी नहीं थी, दांत बजने लगे थे.

काँप तो अलका भी रही थी. वह भी बहुत ज़यादा दर गयी थी. पर उसकी हालत सतीश से कुछ बेहतर थी. डरावनी गुफा में सतीश के साथ हथु में टोर्च लिए वह मौजूद थी. ऐसा सब पहले कब उसने देखा था. एक लड़की के लिए ऐसा सब देख पाना बड़े दिल गुर्दे वाली बात थी.


सतीश की तोह गांड की हवा hi टाइट हो चुकी थी. उनकी कनपटियों से निकलने वाला पसीना एक धार की सूरत में निचे कान की और बहने लगा था. पुरे जिस्म के रुएँ खड़े हो चुके थे. खौफ की ऐसी शिद्दत सतीश की लाइफ में पहले कभी नहीं आई थी.

अलका का भी कुछ ऐसा hi हाल था.

सांपो की फुंकार ने उनके रहे सही होश भी गम करने शुरू कर दिए थे. कांपते शरीर, धड़कते दिलों के साथ वह आगे बढ़ने लगे. वापिस भी नहीं लौट सकते थे. यहाँ तक आने के लिए भी जाने कितने बरसों का इन्तेज़ात किया था सतीश, विक्रम सिंह और रुपाली ने.

10 मीटर और बढे तोह 5 मीटर आगे टोर्च की रौशनी में दोनों को गुफा और भी खुली हुई दिखाई दी. वहीँ से लेफ्ट में रास्ता भी टर्न होता हुआ दिखाई दे रहा था. दोनों अपने होंटो पर जीब फेरते हुए, गुफा की दीवारों को देखते हुए, लड़खड़ाते हुए उसी मोड़ तक पोहनहचने लगे. सोच रहे थे, किसी छेड़ से कोई सांप निकलेगा और पालक झपकते उन्हें दस लेगा.

कुछ पलों का सफर 2 मिंट में पूरा किया दोनों ने. ऐसी hi हालत हो चुकी थी दोनों की. वहां पोहंच कर मुड़े तोह देखा वहां से आगे जाने का रास्ता था. दोनों एक दूसरे का हाथ थामे, दूसरे हाथ में टोर्च लिए आगे बढ़ने लगे.

10 मीटर और आगे बढे तोह राइट साइड में एक और टर्न था. उस टर्न पर दूधिया रंग की रौशनी सी दिखाई पद रही थी. दोनों ने एक दूसरे को देखा और उस मोड़ तक जा पोहंचे. जैसे hi वह टर्न पर पोहंचे उसी दिशा में सामने देखा तोह सतीश ने अलका का हाथ झटके में छोड़ दिए और चीख पड़ा.

"मिल गया.... मिल गया, खज़ाना मिल गया"

जो रौशनी थी वह डिमांड्स की रौशनी थी, और डायमंड्स हज़ारों की तादाद में थे. कोई भी देख कर पागल हो सकता था. सतीश भी सब दर, खतरे को भूल कर बावला हो उठा और चीखने लगा. अलका का हाथ भी वह छोड़ बैठा था. अलका इतने बड़े ख़ज़ाने के सामने हैसियत hi क्या रखती थी. अलका जैसी हज़ारों वह अपने पैरों में ढेर कर सकता था. असल अहमियत तोह ख़ज़ाने की थी.

सतीश पागल सा होने लगा ख़ज़ाने के ढेर को देख कर.


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वह ख़ुशी से चीखता हुआ ख़ज़ाने की और भाग खड़ा हुआ. उसे अलका का भी कोई होश नहीं रहा था. अलका अब उसकी पत्नी बन चुकी थी. वह भी उसके साथ इस गुफा में अकेली थी. सतीश भूल गया, अलका अकेली रह कर कहीं खतरे में न गिर जाए. पर सतीश सब भूल कर ख़ज़ाने की चमक के आगे अकाल का अँधा बन चूका था.

अलका भी ख़ज़ाने को देख कर अपने होश खोने लगी थी. इतना बड़ा खज़ाना उसने पहले कभी नहीं देखा था. हीरों की चमक देख कर उसका दर खौफ भी कहीं जा सोया था.

गुफा में सतीश का पागलों की तरह से चीखना सुनाई दे रहा था. तोह अलका की साँसों का शोर जैसे थम सा गया था.

कुछ पल ऐसे hi बीते तोह अलका के कानो में पहनी एअर्रिंग में से आवाज़ सुनाई देने लगी.

"NO:4...NO:4 अरे यू लिसनिंग में.. NO:4..NO:4 अरे यू लिसनिंग में..."

आवाज़ सुनते hi अलका जैसे होश में लौटने लगी...

अलका : yy..yes..yes सोफिए मैडम.. मैं आपको सुन रही हों.

सोफिए : मैं सब देख रही हों तुम्हारी आँखों से NO:4.. देर मत करो और माला धुंडु.

अलका सब दर खौफ भूल कर हरकत में आ गई और ख़ज़ाने की और बढ़ने लगी. सतीश जो ख़ज़ाने के ढेर पर लूट पूत हो रहा था. कभी एक हीरे को उठा कर देखता, उछलता तोह कभी दोनों मुठियाँ भर कर हीरों को ऊपर उछाल देता.

अलका : मैडम ये तोह लगता है पागल हो गया है.

सोफिए : NO:4 देर न करो, वहां तक कोई पोहंच नहीं प् रहा, तुम तुरंत माला ढूंढ कर वहां से निकलने की कोशिश करो. वहां तुम्हारी जान को भी खतरा हो सकता है.

अलका : मैडम अभी तक तोह मुझे कोई खतरा दिखाई नहीं दिया. हाँ सांपो की फुंकार ज़रूर सुनाई दी थी.

सोफिए : सांप तोह पूरी गुफा में हज़ारों की मात्रा में हाँ.. NO:4 जल्दी करो और माला ढूंढ कर फ़ौरन निकलो वहां से...

अलका पुरे ख़ज़ाने की चरों और घूम घूम कर माला ढूंढ़ने लगी. पर वह उसे कहीं दिखाई नहीं दे रही थी. सतीश की हालत को नज़र अंदाज़ करते हुए अलका अपने काम में लगी रही.

अलका दूसरी और पोहंच कर सर्च कर रही थी. जब उसे सतीश की चीखो की आवाज़ सुनाई दी. सतीश जो पहले ख़ुशी से चीख चिल्ला रहा था. अब की उसकी चीखें दहशत से भरपूर चीखें थी. अलका ने मुद कर सतीश को देखा तोह वह इतनी ज़ोर से काँपी, लड़खड़ा गई, गिरते गिरते बची..

सन hi कुछ ऐसा था...........

अलका सोच भी नहीं सकती था. ऐसा भी कोई सन उसे देखने को मिल सकता था. वह भी इंडिया की किसी गुफा में.

दो विशाल नाग, जिनकी लेंथ 8 मीटर के करीब थी. एक का कलर डार्क ब्लैक तोह दूसरे का कलर गोल्डन था. देख कर hi अलका के रोंगटे खड़े हो गए थे. पसीना पानी की तरह से उसके बदन से बहने लगा.

दोनों सांप सतीश से कुछ फासले पर रहते हुए, फोन उठाये बड़े सुकून से सतीश को देख रहे थे. जैसे वह सतीश की चीखों से लुत्फ़ अन्दोज़ हो रहे हों.

सोफिए : NO:4 बिना देरी के माला को ढूंढो और तुरंत निकलो वहां से. तुम्हारी जान को खतरा है.

अलका : mm..madam mm..mujhe बचा लो मैडम..

सोफिए : तुम बिना देरी के माला धुंडु और निकलो वहां से. मैं दूसरे एजेंट्स से बात करती हों. देखती हों अंदर घुसने का कोई रास्ता मिलता है क नहीं.

सोफिए दूसरी और मसरूफ हो गई और अलका वहीँ कड़ी दोनों विशाल नागो को देख कर माला ढूंढ़ना भूल गई थी. भयंकर गुफा में वह अब अकेली रह गई थी. सतीश ख़ज़ाने के ढेर पर पड़ा हुआ दशहत से चीख रहा था, चिल्ला रहा था. अब यक़ीनन उसके पागल होने में कोई कसार बाकि नहीं रह गई थी. दोनों विशाल नागो को देख कर ख़ज़ाने की छह उसके अंदर से जा चुकी थी. अब तोह बस जान की hi फ़िक्र रह गई थी. ख़ज़ाने पर रहते हुए वह ख़ज़ाने को भूल चूका था.

दोनों नागो ने के बार एक दूसरे को देखा, अलका को ऐसा लगा, जैसे आँखों hi आँखों में दोनों ने कोई बात करि हो. फिर दोनों ने एक नज़र अलका को देखा, फिर सतीश की और रेंगने लगे. सतीश की चीखों में भयंकर बदलाव आ गया. उसकी चीखो से साफ़ ज़ाहिर हो रहा था. उसने अपनी मौत को देख लिया है.

दोनों नाग सतीश के पास पोहंचे और अचानक से hi दोनों ने एक साथ सतीश के दोनों बाज़ो अपनी अपनी टेल की लपेट में लिए और सतीश को उठा दिए.

दोनों नागो के बीच सतीश लटका हुआ था. अलका बस ये सब देखती hi रह गई थी. कुछ और करने लायक नहीं रही थी. माला ढूंढ़ना भी वह भूल चुकी थी. थार थार कांपती हुई वह दोनों डार्क बालक एंड गोल्डन नागो को देख रही थी. सतीश को कैसे दोनों ने पालक झपकते अपनी लपेट में लेके उठा लिया था.

अलका कैसे कुछ और कर पाने की हालत में रहती.. उसी समय फिरसे उसे सोफिए की आवाज़ सुनाई दी. NO:4 माला ढूंढ सकती हो तोह ढूंढ लो. कहीं से भी अंदर घुसने का रास्ता नहीं बन पा रहा. अब अगर माला मिल भी जाती है तोह भी उसे लेके निकलना इम्पॉसिबल है. तुम खुद को बचा सकती हो तोह बचा लो. मैं तुम्हारे लिए कुछ नहीं कर सकती. सॉरी NO:4... सोफिए ने ऐसे सॉरी बोली, जैसे उसे अलका के मारे जाने पर कोई अफ़सोस न हो रहा हो. ये सच भी था. एजेंट्स तोह हज़ारों थे उनके पास. जितने मरते, उससे कहीं गुना बढ़कर और आ जाते.

अलका तो जैसे सदमे में आ गयी थी. सोफिए कुछ नहीं बोली तोह अलका को अब अपनी जान के लाले पर गए थे, फ़ौरन hi अपनी कमर पर बंधी बेल्ट से पिस्तौल निकल कर हाथ में थाम गयी.

ये जान कर उसकी हालत बहुत ख़राब जो रही थी, उसे बचने के लिए कोई नहीं आने वाला था. उसे खुद hi खुद को बचाना था. पहले वह जानती थी, बाओ एजेंट्स उसे कुछ नहीं होने देंगे. जल्द hi वह भी उसके पीछे गुफा में घुस जाएंगे. पर ऐसा नहीं हो पाया था. कोई नहीं घुस पाया था. अलका को अब खुद से hi खुद की रक्षा करनी थी.

अलका दबे पाऊँ पीछे हटने लगी तोह दोनों नागो ने अपने फोन घुमा कर अलका को देखा तोह इस बार दोनों नागो की आँखों से जैसे रौशनी सी बहार निकलती हुई दिखाई देने लगी. ऐसा अलका को लगा. दोनों नागो की आँखों में इतनी कशिश थी, अलका जहाँ थी, वही थम के रह गई. अलका सम्मोहित हो चुकी थी. वह देख सकती थी, महसूस कर सकती थी. पर हिल नहीं सकती थी. दोनों नागो को, सतीश को वह देखती रह गयी. वह जान गई, इस गुफा में घुस कर उसने अपनी लाइफ की सबसे बड़ी गलती कर दी है.

दोनों नागो ने एक दूसरे को देखा और फिर सतीश की आँखों में देखते हुए, सतीश के चेहरे पर फूँक मार दी. डांक मारने की ज़रूरत hi नहीं पड़ी. दोनों की फूँक पर ज़हरीला थूक सतीश के मोहन पर फुवार की सूरत में गिरा तोह सतीश का फेस hi गलने लगा. बहुत भयंकर ज़हर था दोनों नागो का. सतीश की आखरी चीखें उसके मोह से निकलने लगी. दोनों ने सतीश को छोड़ा तोह सतीश धड़ाम से निचे गिर पड़ा.. सतीश एड़ियां रगड़ रगड़ कर मर रहा था. उसका फेस पूरा गाल रहा था. उसके मोह से, नाक से, कानो से झाग निकलने लगा था. कितना खतरनाक ज़हर था. पल भर में hi सतीश को

दोनों नाग घूमे और सम्मोहित अलका की ऑर्डर बढ़ने लगे. अलका सम्मोहित थी, सतीश को मरते देख कर भी हिल नहीं सकीय थी. पर वह सतीश की भयानक मौत को देख चुकी थी. हिल नहीं सकती थी, पर देख कर अंदर hi अंदर आधी वह भी मर चुकी थी. उसके दिल की धड़कन इस हद बढ़ चुकी थी. जैसे वहां पर कोई धमाके कर रहा हो. अलका को अपने दिल की धड़कन की आवाज़ ऐसे सुनाई दे रही थी. जैसे उनके कानो के पास कोई तन तन स्कूल का घंटा बजा रहा हो.

उसके दोनों हाथ वैसे hi थे, एक हाथ में टोर्च तोह दूसरे हाथ में पिस्तौल था.. दोनों नाग अलका के पास पोहंच के गोल गोल घूमने लगे.. अलका हिल कर दोनों को देख नहीं सकती थी. बस उन्हें सामने से hi देख प् रही थी. या एड़ियां रगड़ रगड़ कर मर रहे सतीश को देख प् रही थी.


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रूस का एक इलाका, जिसे गैंगस्टर जोन के नाम से भी जाना था.. वहां पुलिस कभी नहीं जाया करती थी. जाती भी तोह हमेशा सेंकडो की संख्या में जाय करती थी.

5-10 पुलिस जाते तोह उनकी लाशें तक नहीं मिल पति थी. ऐसा hi खतरनाक इलाका था वह. कई बार उस इलाका पर पुलिस ने सर्चिंग करि. पर किसी गंगतर को भी पकड़ नहीं पाई थी.. वहां मारे गए पुलिस वळून की लाशें भी ढूंढ नहीं पायी थी.

वह इलाका था अफ्रीका के कालों का इलाका.. उस इलाके में आधे से ज़यादा नीग्रो रहते थे. एक हिसाब से वही इलाके में बेताज बादशाह थे. कोई नहीं था वहां कालों से बढ़कर पावर में..

ये आज से पहले की बात थी.......

आज से वहां से सिस्टम भी बदलने वाला था....

वहां कोई और प्रवेश कर चूका था....

वहां कोई और राज करने के लिए पोहंच चूका था....

उसके आगे गोर या काले कोई भी कुछ भी नहीं था....

उसी इलाके के सबसे बड़े गैंग के सबसे बड़े अड्डे पर... जो एक फाइव स्टार होटल भी था.

उस फाइव स्टार होटल के लास्ट फ्लोर पर बने एक ऑफिस का दूर खुला और कोई अंदर प्रवेश कर गया. अंदर बैठा बॉस और उसके साथी, दूर को खुलते देख कर हैरान रह गए. क़दमों की चाप पर धयान दिया जाने लगा.. क्यूंकि कोई दिखाई नहीं दे रहा था. कोई साया तक भी दिखाई नहीं दे रहा था...

वह जान नहीं पाए.. पर समझ बहुत कुछ गए.. सबके सब कोट पॉकेट से पिस्टल्स निकल कर फ़ौरन hi कदमो की चाप वाली दिशा की ऑर्डर कर गए..


आवाज़ आई.....

NO.. NO.. NO.. फायर कर के तुम सब बहुत कुछ खो डोज.. मेरा यहाँ आना तुम सबके लिए पॉजिटिव है, न कह नेगिटिव.. मेरे विसहर अगर बुरे होते तोह मुझे ऐसे आने की क्या ज़रूरत थी. दूर रहते हुए HI मैं एक एक करके तुम सब की जान ले सकती थी. तुम छह कर भी मेरा कुछ नहीं बिगड़ सकते थे.. इस बार अपने आने की चाप मैंने खुद से तुम सबको सुनाई है.. न चहुँ तोह तुममे से कोई जान भी नहीं सकता. मैं यहाँ हों भी कह नहीं हों..

मैं चहुँ तोह इस इलाके की क्वीन भी बन सकती हों. पर मुझे इस इलाके की क्वीन नहीं बनना है. मुझे बनना है इस पुरे वर्ल्ड की क्वीन..

तुम सब इस इलाके में पॉवरफुल हो. अगर पुरे देश में, पुरे वर्ल्ड में पॉवरफुल बनना चाहते हो तोह मेरा ख्याल है. तुम्हे मेरे साथ हाथ मिला लेना चाहिए...


I.....THINK.....ITS.....A.....PROFITABLE डील फॉर यू....

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आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..


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शुक्रिया ज़ोरो भाई ब्यूटीफुल रिव्यु के लिए.. पायल के साथ क्या हुआ आप जान गए हाँ.. कैसे दक्ष ने पायल की जगा परची को बदल दिए.

गुफा के अंदर क्या है, वह भी आप जान गए है. सीक्रेट्स भी जल्द hi आप जान जायेंगे. सब सामने आ जायेगा भाई. विकरण सिंह गैंग के साथ बाओ वाले भी उसी सीक्रेट के चलते आमने सामने आ गए.. नेक्स्ट अपडेट में कुछ और भी खुल कर सामने आ जायेगा.

थैंक यू सो मच भाई! 🙏👌
 
लास्ट की 2 अपडेट में सस्पेंस क्रिएट हुआ है न तोह ऐसा लगा आपको.. जैसे मज़ा नहीं आ रहा.. वर्ण तोह लास्ट की 3 अपडेट से स्ट्रोय की वैल्यू कई गुना बढ़ गई है.

कुछ जगा पर स्टोरी को धीरे करना पड़ता है भाई. वर्ण बहुत कुछ मिस हो जाता है. ऐसे सही से समझ भी नहीं आएगी.. अभी और भी बहुत कुछ सामने आएगा. कुछ स्टोरी लाइन और भी धीरे हो जाएगी.. जैसे hi स्ट्रोय फिरसे ट्रैक पर आएगी, स्पीड पकड़ने लगेगी.

सेक्स ज़बरदस्ती नहीं था मेरे भाई. षिमुना एक ओपन माइंडेड लड़की थी. दक्ष के लिए सेक्स आम बात थी. षिमुना तोह दक्ष के लिए मचल रही थी. तोह बी चांस सन बन गया. जैसा सन था, वैसा hi दिखा दिए..

सेडक्टिव भी होगी भाई. ये लव स्ट्रोय षिमुना को लेके नहीं है न भाई. तोह षिमुना के साथ ऐसे hi होना था.. षिमुना इस ा स्ट्रेंज करैक्टर आवर स्ट्रोय.. बूत षिमुना मैं हीरोइन नहीं है..

पायल सिंह अपने हीरो की सीस है भाई तोह ऐसा लोचा कैसे हो सकता था. दसख कुछ न करता तोह मास्टर chi-fang ऐसा कभी न होने देते..

स्टोरी अपने रूटीन के हिसाब से सही स्पीड लिए हुए है भाई..

धन्यवाद भाई! साथ बने रहे ✨
 
🙏🙏

:अप्प्रोवे:

😆

नेक्स्ट पोस्टेड अपडेट में डिटेल मौजूद है भाई...

बाओ वाले हाँ.. उप एयरोप्लेन से कूड़े थे..

maybe..lets सी

जल्द hi.. अब तोह दक्ष पर समाज सेवा की जिम्मेदारी भी ाँ पड़ी है. सब साथ साथ चलता रहेगा भाई.. थैंक्स भाई फॉर ब्यूटीफुल रिव्यु 🙏🙏🙏🙏
 
ये तो समय hi बताएगा. दिल के ज़ख़्म कितने भरे हाँ. भरे भी हाँ या नहीं. अलका और दक्ष जब आमने सामने होंगे तोह पता चलेगा..

पायल और दूसरे भी जब दक्ष के सामने आएंगे तोह hi सब देखने को मिलेगा..


:अप्प्रोवे:

ऐसा hi हुआ था.. नेक्स्ट पोस्टेड अपडेट में डिटेल मौजूद है भाई... शुक्रिया भाई! साथ बने रहे ✨
 
बचाना hi था पायल सिंह को... आखिर हीरो जो ठहरा अपनी स्ट्रोय का :)

👧

:गायलॉग़:

लालच किया था सतीश एंड विक्रम ने. ऐसा तोह होना hi था. अलका का सस्पेंस अभी बाकि रहेगा मेरे दोस्त.. नेक्स्ट अपडेट में कुछ डिटेल भी पोस्ट होगी..

देखते हाँ.. अलका का क्या सीक्रेट है. गुफा वाली असली है या असली कहीं और.. या वह बाओ वळून के पास है.. सब पता चल जायेगा दोस्त

नताशा hi थी वह रूस वाली.. वह भी अब मैदान में उतर आई है. उसकी डिटेल भी नेक्स्ट अपडेट में पोस्ट होगी. शुक्रिया भाई प्यारे रिव्यु के लिए 🙏🙏🙏🙏🙏
 
बेहेन को बचाना उसका कर्तव्य और परची को फसाना उसके बदले की शुरुआत..

:अप्प्रोवे:

हम्म्म सांपो वाला सन सच में hi बहुत इंटरेस्टिंग होने वला है. वेट टिल नेक्स्ट.

एस्सस

अकेली भी बहुत कुछ कर सकती है. पर कहते हाँ न पावर मिले तोह सोचें भी बदलने लगती है. नताशा भी बदल रही है. देखते हाँ, उसकी सोचें किस लेवल तक जाती हाँ.

शुक्रिया भाई बेस्ट रिव्यु के लिए ✨
 
:थैंक्स:

😀

ये तोह ख़ास दिखाया जाएगा.. ये तोह बेस्ट सन है.. देखने से ताल्लुक़ रखता है.

सब पता चल जायेगा भाई. no4 hi अलका है या अलका कहीं और है. बड़ा ट्विस्ट है इसमें भी..

सोफिया को एजेंट्स की परवा कभी नहीं रही. कोई भी कितना भी ख़ास. मिशन एहम होता है उसके लिए

हिरे कभी इतनी ज़यादा मात्रा में देखे भी नहीं थे सतीश ने.. साला पागल कुत्ते की जैसे हो गया. और सब भूल गया. भूल गया था अलका के रहते है वो सेफ रह सकता है.. पर जब मौत का समय आ जाये तोह ऐसी hi हालत हो जाया करती है

दोनों नाग अलका या no4 के साथ क्या करते हाँ.. नेक्स्ट hi पता चलेगा. कुछ तोह हटके होने वाला है no4 के साथ.

सोफिया सुपर एजेंट है. ऐसे मामला ज़यादा देर उससे छुपे नहीं रह सकते..

:अप्प्रोवे:

शुक्रिया भाई 🙏🙏🙏🙏♥️♥️
 
:थैंक्स:

:अप्प्रोवे:

एसससससस

:लाफिंग:

😸

हीरों की चमक ने उसे पगल बना दिए था. बावला हो गया था.

😲

सोचें

इस बात का खुलासा भी समय पर होगा भाई

देखते हाँ सांप क्या करते हाँ अलका या no4 के साथ

सब पता चल जायेगा भाई. अगली अपडेट कुछ और ट्विस्ट लेके आने वाली है

बहुत बहुत शुक्रिया भाई डिटेल्ड रिव्यु के लिए ✨
 
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