Samraat ..The Tales of Debauchery, Hate & Revenge - Page 11 - SexBaba
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Samraat ..The Tales of Debauchery, Hate & Revenge

दहशत में सब आये हाँ या नहीं.. ये भी देखने वाली बात होगी.. प्वॉयरफुल्ल लोग इतनी जल्दी तोह किसी से दहशत ज़ादा नहीं होते.. देखते हाँ आगे चल के कैसी सीटुएशन्स क्रिएट होती है.. नताशा दक्ष और इतर समाज सेवक के लिए वर्ल्ड के पावरफुल लोगों से टकराना आसान होगा या मुश्किल..

देखना मज़े का होगा..


देखते हाँ कैसी एंट्री होती है अपने हीरो की अपने hi घर में.. कुछ तोह अनएक्सपेक्टेड होगा.. 🙏🙏
 
:thank_you:

अभी तोह खुद को इंट्रोडस करवा रहा है. देखते हाँ कितने बुरे लोग दक्ष की दहशत की लपेट में आते हाँ

षिमुना अभी खुल कर सामने नहीं आ rahi..warna तोह किसी की भी खैर नहीं रहती..

नताशा भी अपने मिशन को अंजाम देने के लिए टूट पड़ी है. उसे भी अब टाइम वास्ते नहीं करना है. दक्ष को जान कर वह भी खुल कर सामने आ गई है.

मज़े का सन होगा.. दोनों जब मिलेंगे..

इस बार निमंस भी खूब तयारी से आएं हाँ.. इस बार का टकरा खूब दिलचस्पी से भरा होगा..

बहुत बहुत शुक्रिया ज़र्रों भाई... 🙏🙏🙏🙏
 
ये सब किसी ख़ास मकसद के तहत किया है दक्ष ने.. देखते हाँ उसने ऐसा क्यों किया.

निमंस इस बार जाते हुए एअर्थ बारे खूब कनौलेगे लेकर गए थे. उसी को काम में लाते हुए आगे का प्लान भी कर गए.. अब तयारी में लगे हुए हाँ.. डायरेक्ट वॉर के लिए.

ये तोह है नताशा और दक्ष का मिल जाना अच्छा ट्विस्ट सबत होगा.. दोनों मिलकर खूब धमाल मचाएंगे. बुराई को काम करके नेकी को सामने लाने की कोशिश करेंगे.

हम्म्म ये तोह सच में देखने वाला सन होगा. जब साडी शेरनियां एक साथ होंगी.. शुक्रिया भ खूबसूरत कमेंट के लिए🙏🙏
 
हाहाहा भेजा तोह फ्राई करना hi था.. बरसों से दूसरों के ब्रेन वाश करवा रहा था. घुलम बना रहा था. खुद के साथ होने लगा तोह पागल होने लगा.

लातों की भूत तोह बातों से नहीं मानेंगे.. जहाँ लात पड़ेगी.. वही सही से समझ भी आएगी.

मास्टर है न.. हमेशा बरतर रहा है. अब सम्राट को जान कर भी शयना बन रहा है. पगला गया है साला..

ये तोह जानने में मज़े आएगा.. देखते हाँ अपना हीरो कैसे लेता है नताशा के बयां को. अभी तोह उसके मैं में किसी क्वीन के लिए कोई विचार नहीं हाँ.

इस बार की कमान लिनिजुना के हाथ में है. वह कुछ अलग टाइप की है. मिशन बड़ा है तोह सावधानी से hi आगे बढ़ेगी..

धंन्यवाद बीआरओ! खूबसूरत रिव्यु के लिए दिल की अंत गहराइयो से सलाम.. 🙏🙏🙏🙏👌👌👏👏👏♥️♥️♥️
 




Episode:27






मैं रिलैक्स्ड मूड में manzil(india) की और बढ़ रहा था.




अचानक से मुझे ऐसा लगा, जैसा मेरा पूरा वजूद ठण्ड की लपेट में आ गया हो.

ऐसी ठण्ड जो मुझे सर्दी का एहसास नहीं करा रही थी. बहुत ज़यादा शांति पोहंचा रही थी मुझे. मैं चला जा रहा था. फ़ौरन hi वहीँ एक जगा मई बैठ गया. मैं समझ गया था ऐसा क्यों है.

गुरु जी आये थे मेरे दिमाग में..

गुरु जी : दक्ष बीटा! सम्राट के नाम से दुन्या के सामने आना अच्छी बात है. बुरों के साथ साथ अच्छे भी दहशत में आ गए हाँ. बुरे करम करने वाले ऐसी चेतावनियों से दर भी जाएँ तोह भी बुराई का रास्ता नहीं छोड़ सकते. पहले वह खुल कर बुरे करम कर रहे थे. तुम्हारे सामने आ जाने से अब वह छुप कर करने लगेंगे. बुरों करम करते रहने से उनके मैं पूरी तरह से काले हो चुके होते हाँ. इसलिए वह बुरे काम नहीं छोड़ सकते.

जिस रस्ते को तुमने चुना है दक्ष बीटा. वह रास्ता बहुत कठिन है. पर हिम्मत बनाये रखना. तुम्हे सदा सफलता प्राप्त होती रहेगी.

समय आने पर जब दुश्मन नज़रों में न आएं तोह घबराना नहीं. अपनी बुड्ढी का सही से उपयोग करना. अच्छे करम करने वळून का साथ तोह भगवन देता है. तुम्हे तोह फिर भी ख़ास तुअर पर चुना गया है. सदा अपनी हिम्मत बनाये रखना.

कुछ भी करो, कभी ये मत सोचना, तुम गलत कर रहे हो. सम्राट कुछ भी करे, वह गलत नहीं होगा. कई ऐसे मोके आएंगे, जहाँ तुम्हे लगेगा, तुमने कुछ गलत कर दिए है. ऐसा कभी मत सोचना, कुछ गलत कर जाने पर हिम्मत टूटने लगती है. पर तुमसे कभी कुछ भी गलत नहीं होगा. जो भी गलत दिखे तोह उसे सही करने की शक्ति भी तुममे hi है. तुम्हारी बुद्धि hi तुम्हे सही राह दिखाए..

तुम्हारा कल्याण हो पुत्र.

गुरु जी अचानक से आये थे. अचानक से चले भी गए. जो कुछ भी वह कह देते थे. मुझे समझने में देर नहीं लगती thi.GURU जी की बातों का मतलब मैं समझ चूका था. मेरे खुल कर सामने आ जाने से अब दुश्मन सावधान होने वाले थे. जो नहीं जान पाया सम्राट टेलिपाथी द्वारा सामने आया है. वह मरेगा मेरा हथुन. और जो मेरी टेलिपाथी को समझ गए थे, वह खुद को मुझसे बचने के लिए तैयारियों में लग गए होंगे.. मुझे कोई चिंता नहीं थी. खुद को सम्राट के नाम से सामने लाने के कई मकसद थे. मेरे लिए ऐसा करना ज़रूरी हो गया था. बहुत कुछ मैं सोच चूका था. वर्ण मैं कोई स्टुपिड तोह नहीं था. दुश्मनो को पहले से hi अपनी टेलिपाथी बारे बता देता..

मैं उठा और फिरसे अपनी मंज़िल की और बढ़ने लगा..



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पूरी दुन्या में सम्राट को लेके चर्चा होने लगी थी. दुन्या वळून के सामने केवल एक नाम "सम्राट" hi आया था. वर्ण कोई नहीं जान पाया था. सम्राट कोण है. कहाँ से बिलोंग करता है. सम्राट नाम से सब ने अंदाज़ा लगा लिया था, सम्राट का ताल्लुक़ एशिया से है. पर अंदाज़ा सही भी हो, ये ज़रूरी नहीं था. कोई भी खुद को सबकी नज़रों से बचाये रखने के लिए अपनी आइडेंटिटी बदल दिए करता था. सम्राट के मामले में भी ऐसा हो सकता था.

आल वर्ल्ड के न्यूज़ चैनल वाले सम्राट को लेके hi चर्चा कर रहे थे. सम्राट किस देश से हो सकता है. इस बारे चर्चा कर रहे थे.

इंडिया के न्यूज़ चैनल भी ऐसी hi ख़बरें टेलीकास्ट कर रहे थे. कामर्स के सामने बैठे हुए सम्राट बारे अपने अपने विचार पेश कर रहे थे. देश भर की जनता टीवी के सामने बैठी हुई उन्हें सुन रही थी. वह भी बहुत एक्ससिटेड थी.. सोच रही थी, सम्राट नाम इंडियन है तोह ज़रूर वह एक इंडियन hi होगा. सम्राट के इंडियन होने के नाते फीलिंग्स को लेकर के पुरे देश की जनता बहुत खुश थी. मैं में दुआ भी कर रही थी, सम्राट इंडिया से hi बिलोंग करता हो.

वही बहुत से ऐसे भी थे. जो सम्राट को सच नहीं मान रहे थे. ऐसे लोग एक hi घटना बारे जान कर सम्राट को एक फेक न्यूज़ बता रहे थे.

पर बाद में जब नताशा की वीडियो वायरल हुई.. जहाँ दो व्यक्ति हवा में लटके हुए थे. ये देख कर सब सम्राट और क्वीन पर यकीं करने लगे.. कुछ अब्ब भी नहीं मान रहे थे. कुछ इसलिए भी नहीं डरे थे. कोई अलादीन का चिराग़ तोह था नहीं सम्राट और क्वीन के पास, जो पल भर में hi पूरी दुन्या से पापियों का सफाया करदें.. जब कभी सम्राट और क्वीन सामने आये तोह देख लेंगे.. ये सोच कर वह अपनी लाइफ में मस्त होने लगे. तोह कुछ ऐसे भी थे, जो दर कर कहीं छुप गए थे.

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अमेरिका कंट्री में सही मानो में खलखली मची थी. सम्राट वाला काण्ड उसके देश में हुआ था.. एक पुलिस वाला मीडिया के सामने मारा गया था. ये जान कर पुरे देश में जैसे भूकंप आ गया था.

रपो के सभी बड़े एक मीटिंग हाल में मौजूद थे.. बड़ी बड़ी स्क्रीन्स लगी हुई थी. एक स्क्रीन पर ब्रेन मास्टर, एक पर रेड मास्टर, तोह दो और स्क्रीन्स पर दो दूसरे मास्टर्स दिखाई दे रहे थे.

सब मिलकर सम्राट और क्वीन पर चर्चा कर रहे थे. रेड मास्टर ने अपने अड्डे पर हुई साड़ी घटना बयां कर दी थी. अब वह कुछ नार्मल था. पर सम्राट की दहशत के आसार उसके फेस पर दिखाई पद रहे थे.

वहां इस बात पर चर्चा हो रही थी. ये सब क्या है, क्यों है. ऐसा कैसा हो सकता है. कोई कैसे किसी को अपने कण्ट्रोल में लेकर इतनी तबाही मचा सकता है.

टेलिपाथी एशिया के हिस्से में आई थी. आल वर्ल्ड वाले इस बारे ज़यादा इन्फो नहीं रखते थे.

एक बॉस जो इंडियन hi था, उसके साथ इंडियन बॉस से बोलै : शर्मा! क्या आप भी कोई इन्फो नहीं रखते इस बारे में.

शर्मा : नहीं यार! मैं भी इस बारे कोई इन्फो नहीं रखता. (बेशर्मो के जैसे हसने लगा) मैं तोह पढाई लिखे भी बाद में की थी. पहले तोह एक गुंडा hi था.. कैसे ऐसी बातों को जान सकता हों.

शर्मा हस्ते हुए बोलै तोह उसका साथी भी हसने लगा.

ब्रेन मास्टर खामोश था. सब को देख रहा था. उसके सामने कुछ बुक्स राखी हुई थी. एक कंप्यूटर भी था उसके साइड में.. कभी वह सबको देख कर उनकी बातें सुनता तोह कभी बुक्स उठा के देखने लगता. कभी कंप्यूटर उसे करने लगता.. पिछले 2 घंटे से ये सब चल रहा था. मीटिंग हाल में सभी रपो के ख़ास लीडर थे. जो अमेरिका में रह कर रपो के काम कर रहे थे.

ब्रेन मास्टर ने सबको देख कर वहीँ लगा हुआ एक बटन प्रेस कर दिए..

बटन दबते hi मीटिंग हाल में धुआं फैलने लगा. सब उठ कर चीखने चिल्लाने लगे. अपने अपने गले पकड़ कर खांसने लगे.. ब्रेन मास्टर सबको देख कर मैं में बोल रहा था.. सम्राट तूने मुझसे टक्कर लेकर अच्छा नहीं किया. रपो को तुमने कोई मामूली ऑर्ग समझ लिया था. मैं तुझे बताऊंगा रपो क्या है और ब्रेन मास्टर क्या है.. जल्द hi तुम मेरी कस्टडी में होंगे. मैं जानता हों तुम कोई टेलिपाथी के माहिर हो. लोगों के ब्रेन्स से खेलने में तुम्हे कमल हासिल है. दूसरों के ब्रेन्स को कण्ट्रोल में लेकर उन्हें नाचना तुम्हारे बाहें हाथ का खेल है. पर मैं बिना टेलिपाथी के hi तुमसे बढ़कर hon.aise hi तोह नहीं बरसों से पूरी रपो को कण्ट्रोल कर रहा हों. तुम्हे भी मेरा घुलम बनना hi होगा. तुम्हारे जैसो को hi तोह हम अपना घुलम बना कर पूरी दुन्या पर राज कर रहे हाँ. एक दिन तुम भी मेरे घुलम बनोगे सम्राट.. हमसे बढ़ कोण हो सकता है इस दुन्या में.. कोई भी नहीं..

जितने भी रपो बॉस वहां पर मौजूद थे. ब्रेन मास्टर सबको मरते हुए देख रहा था. तीनो मास्टर्स भी ये सब देख रहे थे. वह हैरान परेशान हो कर कभी मीटिंग्स हाल में मर रहे अपने आदमियों को देख रहे थे तोह कभी ब्रेन मास्टर को..

एक एक करके सब तड़प तड़प कर मर्डर गए.. ब्रेन मास्टर ने अपने मोबाइल में कुछ टाइप करने के बाद सेंड किया. तोह तीनो मास्टर्स जहाँ थे. वहीँ 3 गार्ड्स ब्लैक ड्रेस में तीनो मास्टर्स के पीछे ाँ पोहंचे.

तीनो गार्ड्स ने अपनी गन्स की नाल तीनो मास्टर्स के सर पर लगा दीं. तीनो मास्टर्स खुद को बचा पाते. उससे पहले hi तीनो गार्ड्स की गन्स के ट्रिगर दबे. एक hi लम्हे में तीनो मास्टर्स के सरों में छेड़ बन गए.

ब्रेन मास्टर : सम्राट! तुम रपो से कभी जीत नहीं सकोगे.. टेलिपाथी क्या, तुम सुपरमैन भी बनकर आ जाओ. तब भी तुम हमारे लिए एक मामूली इंसान hi रहोगे..



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बाओ के हेडक्वार्टर में हलचल मची हुई थी. वहां की surat-e-haal कुछ और भी ज़यादा घम्बिर थी. जहाँ वह भी सम्राट और क्वीन के सामने आ जाने पर नर्वस होने की बजाये खुश हो रहे थे. वहीँ उनके देश में भी हालत कुछ टेंशन वाले बन चुके थे.

बाओ को दुन्या की दो बड़ी पावर बारे ज्ञान मिला था. वह ये जान कर खुश थे. और प्लान बना रहे थे, जल्द hi सम्राट और क्वीन को अपने कब्ज़े में करके अपना घुलम बना लेंगे. फिर दुन्या पर उसकी बरतरी और भी स्ट्रांग हो जाएगी. सम्राट और क्वीन के कारन उनकी पावर और भी कई गुना बढ़ जायेगी.

न्यूज़ पर दोनों के बारे में जान पर रपो और बाओ वाले खुश hi हुए थे. डरे नहीं थे.

ऐसो के बारे में जान्ने के लिए तोह वह बेचैन रहा करते थे. अब दोनों की खबर आयी तोह वह एक्ससिटेड हो गए थे.

वहीँ चिंता में भी थे. सोफिए, उनकी बेस्ट एजेंट बुरी तरह से घायल थी. दूसरा इजराइल में पोहचने के बाद भी एक घटना घाट चुकी थी.

गेब्रियल जो इजराइल अमरय में जनरल था. कुछ खड़ूस किसम का इंसान था. खुद को किसी से काम नहीं समझता था. हमेशा कुछ न कुछ ऐसा कर जाया करता था. जिसके करने से वह कुछ और भी फेमस हो जाया करता था.

सोफिए, NO:4 और दूसरे एजेंट्स जब इजराइल में पोहंचे तोह उन्हें हथुन हाथ लिया गया. जहाँ सोफिए को फोरि ट्रीटमेंट के लिए बेस्ट हॉस्पिटल में लेजाया गया था. वहीँ NO:4 और दूसरे एजेंट्स को एक सरकारी ईमारत में लेजाया गया.. माला अब भी NO:4 के गले में थी. माला बारे जैसा सुनने में आया था. वह किसी के लिए भी यकीन करने लायक नहीं था.

गेब्रियल भी उन लोगों में शामिल था, जो सोफिए की इंजरी को लेकर ये सोच रहे थे. सोफिए माला के कारण इन्जुरेड नहीं हुई है. ज़रूर कुछ और कारण रहा होगा.

गेब्रियल भी वहीँ ाँ पोहंचा. उसे देख कर सब पीछे हैट गए. देश की और भी कई बड़ी बड़ी हस्तियां वहां पोहंच रही थी. सब माला बारे जान चुके थे. सोफिए एक माला के कारण बुरी तरह से घायल हो गयी थी. ये जान कर सब बहुत हैरान भी थे. सब माला देखने के लिए बड़े पुरजोश थे.

कुछ hi देर में वहां एक मजमा लग चूका था. सब NO:4 के गले में मौजूद माला को देख रहे थे.

गेब्रियल : मैं नहीं मंटा. हमारी महान एजेंट सोफिए इस मामूली माला से ज़ख़्मी हो सकती है. वह अपना एक हाथ और कन्धा hi तुड़वा बैठी. अगर ऐसा हुआ है तोह वह हमारी बेस्ट एजेंट हो hi नहीं सकती.

गेब्रियल ने अपनी शर्ट सबके सामने उतरनी शुरू कर दी. उसके ऐसा करने से सब खुसर फुसर करने लगे.. कुछ देर में गेब्रियल शिरट्लेस्स था.

गेब्रियल : मुझे देखो, देखो घोर से देखो. कई गोलियां खा कर भी मैं अभी तक ज़िंदा हों. मेरा सीना एक चटनी सीना है. देखो मेरे देश के लोगो देखो. मैं हों अज़ीम गेब्रियल.. मैं कहीं से भी सोफिए से काम नहीं हों.. आज फिरसे मैं सबत कर दिखाऊँगा. मैं आज भी सबसे बेस्ट हों. मेरा सीना hi क्या मेरा जिस्म का एक एक अंग चेतन से भी ज़यादा सख्त और पॉवरफुल है.

इतना बोल कर वह चलता हुआ NO:4 के सामने जा पोहंचा और बोलै : NO:4 अपने गले से माला निकल कर मेरे गले में दाल दो..

गेब्रियल गरजता हुआ NO:4 से बोलै तोह NO:4 के साथ खड़े हुआ एजेंट बोलै : सर ये माला-------- वह एजेंट आगे नहीं बोल पाया.. गेब्रियल ने घूम कर एक लात उस एजेंट की गर्दन पर दे मारी थी. उसकी गर्दन की हड्डी कडक्क की आवाज़ के साथ टूट गयी. ऐसा hi चटनी जिस्म का मालिक था गेब्रियल.

दूसरे एजेंट्स दर कर पीछे को हैट गए और माफ़ी मांगने लगे.. गेब्रियल फिरसे चरों और देखने लगा. गेब्रियल की अकड़ी गर्दन कुछ भी अकड़ गई थी.

गेब्रियल : मैंने सही बोलै न.. आज भी मैं किसी से काम नहीं हों. देखा कैसे एक hi किक में गर्दन तोड़ दी.

गेब्रियल NO:4 को देखने लगा.. जो माला उतर कर गेब्रियल के गले की और बढ़ा रही थी.

सब गेब्रियल और NO:4 को देख रहे थे.. माला धीरे धीरे गेब्रियल के गले की और बढ़ रही थी. जहाँ गेब्रियल नार्मल था. माला को अपने चटनी गले में पहन कर एक बार फिरसे अपनी बरतरी सबत कर देना चाहता था.

वहीँ सब माला को देख कर परेशान हो गए थे. जो सोफिए को करीब से जानते थे. वह माला को देख कर बहुत ज़यादा ख़ौफ़ज़दा थे.

लम्बे क़द काठ वाले गेब्रियल को अपनी गर्दन कुछ झुकानी पड़ी थी. NO:4 ने फ़ौरन hi अपने हथु में फुर्ती लेट हुए माला गेब्रियल के गले में दाल दी.. उसी समय गेब्रियल भी घूम कर सबको देखने लगा.

वह बोलना hi चाहता था..

देखो मैंने अपने गले में वही माला दाल ली है... जिसे छूटे hi महान सोफिए इन्जुरेड हो गयी थी. देखो मैं हों गेब्रियल जो किसी भी तरह से सोफिए से काम नहीं हों.

पररर....

वह ऐसा कुछ नहीं बोल पाया.. NO:4 ने जैसे hi माला गेब्रियल के गले में डाली ,वह घुमा तोह

दूसरे hi लम्हे उसकी देह्शत्दाज़ा कर देने वाली चीखें उसके मोह से निकलने लगी थी. गेब्रियल की चीखों से सबको ऐसा लगने लगा था. जैसे कोई गेब्रियल के गले को थोड़ा थोड़ा करके काट रहा था.

माला गेब्रियल के मास्स को छूटे hi रौशनी में नाहा गयी थी. रंग बरंगी रौशनी माला के हर एक डेन से ख़ारिज होने लगी थी. वही रौशनी गेब्रियल के गले से उतारते हुए पुरे वजूद में उतरने लगी. गेब्रियल को ऐसा लग रहा था. जैसे पिघला हुआ लावा उसके शरीर में इंजेक्ट कर दिया गया हो..

गेब्रियल दीवानावार चीखते हुए चरों और भागने लगा.. सब उसे खुद की और भागते देख कर चीखते हुए भाग खड़े हुए.. सब को दर था, कहीं गेब्रियल के छूने से उनका हाल भी वही न हो. देखते hi देखते वह पूरी सरकारी ईमारत खली हो गयी. जिसे जहाँ जहाँ से भी जगा मिली वह भाग निकला..

NO:4 ट्रान्स्ड कंडीशंस में गेब्रियल को देख रही थी. तोह दूसरे एजेंट्स भी सब देख कर खामोश थे. सब की भी हालत पतली हो चुकी थी. सबकी गांड पहात चुकी थी. गेब्रियल की हालत थी hi इतनी ख़राब.

गेब्रियल पूरी ईमारत में चीखता हुआ भाग रहा था.. कुछ देर में वह अचानक से एक जगा गिर पड़ा. उसका बदन अब जलने लगा था. गहरे नीले रंग में बदलने लगा था. देखते hi देखते गरिएल की चीखें धीमी पड़ने लगी.

बहार खड़े हुए लोग अब अंदर आ कर मर रहे रहे गेब्रियल को देख रहे थे. सब गेब्रियल को काम तोह माला को ज़यादा देख रहे थे. माला में सबको अपनी मौत दिखाई दे रही थी.

कुछ देर में गेब्रियल ठंडा पड़ने लगा.. NO:4 इस बार खुद से गाब्रिएल के पास पोहंची. सब उसे देख कर भागने के अंदाज़ में पीछे को सरक गए थे. NO:4 का अंदाज़ hi कुछ ऐसा था.

NO:4 गेब्रियल के पास बैठी और माला को पकड़ कर खेंचने लगी. माला गाब्रिएल के गले से निकलते हुए गाब्रिएल की गर्दन को चीयर गयी थी. माला फिरसे NO:4 के गले में पोहंच कर नार्मल रंगत में आ गई. सब कुछ जैसे एकदुम्म से शांत पद गया था.

वहां बस गेब्रियल की सर कटी नीले रंग की लाश पड़ी रह गई थी.

NO:4 खुद से उस सरकारी ईमारत से बहार निकल पड़ी. एजेंट्स चीख पड़े..

"उसे कोई रूक्खकोऊ"

पारर...

किस्मे इतनी हिम्मत थी. जो NO:4 को रोक सकता.. NO:4 ट्रांस हालत में सड़कों पर चलती हुई एक साइड में आगे बढ़ने लगी. उसे देख कर बाकि सब भी उसके पीछे चलने लगे.. कुछ एजेंट्स आगे भाग कर ट्रैफिक को साइड करने लगे.. वह नहीं चाहते थे, गेब्रियल के बाद कोई और जान से जाए. NO:4 को रोकने की हिम्मत भी किसी में नहीं हो रही थी. सिटीजन दूर रहते हुए NO:4 को देख कर हैरान थे. NO:4 ट्रांस हालत में बड़े सुकून से चलती हुई आगे बढ़ रही थी.

फ़ौरन hi दो हेलिकोप्तेर्स भी NO:4 के ऊपर उड़ने लगे. वह लाउड स्पीकर पर जनता को साइड होने को बोल रहे थे. अब सही मानो में जनता भी परेशान हो गई थी. देखते hi देखते वह पूरा इलाका वरन होने लगा.. रोड पर केवल NO:4 और सरकारी आदमी hi रह गए थे. पीछे से आर्मी की गाड़ियां भी आती हुई दिखाई देने लगी.

अजीब सा खौफ पहला हुआ था. NO:4 5कम चलने के बाद लेफ्ट साइड मुद गयी..

कोई चीखा......

"ये तोह देश के सबसे बड़े ट्रैंनिंग सेण्टर की और बढ़ रही है"



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मार्गरेट भी अमेरिका पोहंचा दी गयी थी. ब्रेन मास्टर के आर्डर पर मार्गरेट को फ़ौरन एक प्राइवेट प्लेन द्वारा अमेरिका पोहंचा दिए गया था..

मार्गरेट जब ब्रेन मास्टर के सामने पोहंची तोह ब्रेन मास्टर के होंटो पर बड़ी प्यार भरी मुस्कान ा गयी थी.. वह अपनी सीट से उठा और मार्गरेट की और लपका.. मार्गरेट जिसका ट्रीटमेंट बीच रस्ते में hi कर शुरू हो चूका था. अब वह बहुत बेहतर थी. बस कुछ वीकनेस थी. बड़ी हिम्मत से लड़ते हुए उसने गुंडों को मारा था. पेट में छेड़ होने पर भी वह सबको मार कर hi थमी थी.

ब्रेन मास्टर : मार्गरेट मेरी बेटी, देश की सबसे कैबल एजेंट. मुझे गर्व है तुझ पर मेरी बेटी. तुम्हारा कोई भी मिशन फ़ैल नहीं हुआ.. दुश्मन अगर पावर और क्लेवेर्नेस में बढ़ जाए तोह उससे होने वाली मात हार नहीं काउंट होती. तुमने बहुत अच्छे से अपने मिशन को अंजाम दिया था. मुझे हमेशा तुझपर गर्व रहा है. डीके हाथ नहीं लगा कोई बात नहीं. तुम्हारी ट्रैंनिंग भी पूरी हो गयी है. अब तोह सच में तुम्हारी टक्कर का इस दुन्या में कोई नहीं है. ी ऍम सो प्राउड ऑफ़ यू माय डॉटर...

गले लगा कर मार्गरेट के माथे को चूमते हुए ब्रेन मास्टर ने कहा तोह मार्गरेट भी बड़े चयन से ब्रेन मास्टर से मिली. उसे भी हमेशा से ब्रेन मास्टर बहुत पसंद था. हमेशा एक बाप के जैसी मोहब्बत मार्गरेट को ब्रेन मास्टर से मिली थी. वह भी ब्रेन मास्टर के लिए अपनी मोहब्बत को बयां करते हुए बोली.

मारग्रेट : सर! गर्व तोह मुझे हमेशा से रहा है. आपकी मोहब्बत प् कर जितना सुकून मुझे मिलता है. कभी लगा hi नहीं मैं इस दुन्या में अकेली हों. इस दुन्या में अकेली होते हुए भी आपको प् कर मैं खुद को लावारिस नहीं समझती. आप hi मेरे बॉस, मेरे डैड, मेरे सब कुछ हाँ.

ब्रेन मास्टर खुश हो गया मार्गरेट की बातें सुनकर..

ब्रेन मास्टर : ी लव यू माय चाइल्ड! मार्गरेट बेटी पहले तुम फ्रेश होकर रेस्ट करो, हम फिर सुकून से बेथ कर बातें करते हाँ. बहुत सी बातें ऐसी हुई हाँ जिन्हे जाना तुम्हारे लिए बहुत ज़रूरी है. तुम सफर कर के आई हो, ज़ख़्मी भी हो, थक गयी होगी. रेस्ट कर लो. फिर बहुत मसरूफ हो जाना है तुम्हे. रपो में सब कुछ बदल चूका है. बहुत कुछ बिगड़ चूका है. अब उसे हम दोनों को मिलकर सही करना है.

मार्गरेट : सर! मैं कुछ समझी नहीं.

ब्रेन मास्टर : वही समझने के लिए तुम्हारा टोटली फ्रेश होना ज़रूरी है. अभी तुम रेस्ट करो. फिर बेथ कर बात करते हाँ.

मार्गरेट कंधे उचका कर एक रूम की और बढ़ गयी. जब भी वह ब्रेन मास्टर के पास आती थी. एक खास रूम जो उसके लिए hi हमेशा से रिज़र्व रहता था. मार्गरेट हमेशा उसमे रहा करती थी..

मार्गरेट दिन के 10 बजे के करीब ब्रेन मास्टर के पास पोहंची थी. बाथ लेकर वह बीएड पर गिर कर सो गयी थी.

आफ्टर 5 हॉर्स.....

ब्रेन मास्टर अपने स्पेशल रूम में बैठे हुए थे..

ब्रेन मास्टर के स्पेशल रूम कोई मिछ नहीं था. वह बोल रहे थे तोह सामने मौजूद कंप्यूटर में उनके मोह से निकले शब्द राइटिंग में कन्वर्ट हो रहे थे.

रपो के तीनो हेडक्वार्टर्स में तीनो नए अप्पोइंट किये गए मास्टर्स भी अपने सामने रखे हुए कम्प्यूटर्स को देख रहे थे. ब्रेन मास्टर की बातें वह रिटेन सूरत में जान पा रहे थे. वह बहुत खुश थे.. सम्राट के कारण पहले तीनो मास्टर्स मार दिए गए थे. उनकी जगा इनको मिल गयी थी. वर्ण सालों की खवाहिश के बावजूद भी उन्हें मास्टर बनने का मौका नहीं मिल प् रहा था.

अब वह रपो मास्टर्स बन चुके थे.

1..रेड मास्टर..

2..ग्रीन मास्टर..

3..गोल्डन मास्टर..

तीनो नंबर्स के हिसाब से वैल्यू रखते थे.. सम्राट से खुद को कैसे सेफ रखना है. ब्रेन मास्टर ये साडी बातें उन्हें बता रहा था. कैसे उसे काबू में करना है. ये भी समझा रहा था. कुछ भी आसान नहीं था. पर सम्राट को काबू में तोह करना hi था. उसके लिए ब्रेन मास्टर तीनो ब्रीफ कर रहा था.

मार्गरेट तीनो की बॉस रहेगी. ये बात भी ब्रेन मास्टर ने उन्हें बोल दी थी.. तीनो को इस बात पर भी ख़ुशी मिली थी. मार्गरेट रपो की सबसे बेस्ट एजेंट थी. उसके अंडर काम करते हुए वह गर्व महसूस किया करते थे.

उसी पल ब्रेन मास्टर के रूम का दूर ओपन हुआ.. ब्रेन मास्टर ने पलट कर देखा तोह. मार्गरेट रूम में दाखिल हो रही थी. ब्रेन मास्टर ने एक बटन प्रेस कर दिए.. अब उसका कोई भी शब्द रिटेन सूरत में टाइप होकर फॉरवर्ड नहीं हो सकता था.

ब्रेन मास्टर : आओ! आओ! मार्गरेट बेटी! बड़ी जल्दी तुम तोह नींद पूरी करके आ गयी. एक अच्छी एजेंट की यही तोह खासियत हुआ करती है. इतने थका देने वाले सफर के बाद भी तुम इतनी एक्टिव हो. बुलेट के घाव आने पर भी तुम्हारे चेहरे पर दर्द के भाव नहीं हाँ. तुम्हे देख कर मुझे हमेशा hi गर्व होता रहा है मार्गरेट बेटी. बहुत सहन शक्ति है तुममे..

मार्गरेट एक स्माइल के साथ ब्रेन मास्टर के सामने एक चेयर घसीट कर बेथ गयी.. फ़ौरन hi मार्गरेट ने ब्रेन मास्टर की चेयर को भी घसीट कर अपनी और थोड़ा सा खेंच दिए.. मार्गरेट की आँखों ने अचानक से hi रंग बदल दिए था..

ब्रेन मास्टर पहले तोह मार्गरेट के ऐसा करने पर हैरान रह गया था. दूसरा अब मार्गरेट की आँखों का बदला रंग देख कर उसके तोह छक्के छूट गए थे.

ब्रेन मास्टर : मार्गरेट बेटी! ये सब क्या है. तुम्हारा बेहेवियर और तुम्हारी आँखों में दिखाई देने वाली ये आग.. मैं इसका मतलब नहीं समझा..

मार्गरेट : मार्गरेट! हम्म्म! तोह मर. र्रिचड! मेरा नाम मार्गरेट है.

मार्गरेट की इस बात पर तोह ब्रेन मास्टर गड़बड़ा hi गया था. वह बड़े घोर से मार्गरेट को देख रहा था.

ब्रेन मास्टर : र्रिचड?? तुम मेरा पुराण नाम कैसे जानती हो.

मार्गरेट : हाहाहा!! कैसे जानती हों. ठीक वैसे hi जानती हों रंडी के बच्चे.. जैसे तेरी माँ एक रंडी थी. ठीक वैसे hi जानती हों, जैसे तू अपने बाप के नाम से आज भी अनजान है. न तू जनता है तेरा बाप कोण है और न hi तेरी माँ जानती है तू किसी के गंदे खून की पैदावार हो..

बरिन मास्टर मार्गरेट की बातें सुनकर ग़ुस्से में नहीं आया. वह हड़बड़ा कर उठने लगा.. वह बहुत ज़यादा परेशान हो गया था. जो बातें कोई नहीं जनता था. वह मार्गरेट कैसे जानती थी. मार्गरेट अपनी बैक पर हाथ ले गयी.. जब उसका हाथ सामने आया तोह उसमे एक मिनी खंजर दिखाई दे रहा था. मार्गरेट ने फ़ौरन hi वह झंकार चेयर पर धरी ब्रेन मास्टर की कलाई में घुसा दिए..

aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

ब्रेन मास्टर पूरी जान से चिल्ला उठा.. दर्द के कारण उसके चेहरे पर पसीना आने लगा. वह चेयर पर बैठा हुआ hi उछलने लगा.. ब्रेन मास्टर अब दहशत ज़ादा होने लगा था. मार्गरेट क्या बाला बन चुकी है. वह बहुत अच्छे से जानता था. खुद वह ब्रेन के मामले में बेस्ट था. लड़ना नहीं जनता था. गन वह हर किसम की चला लेता था. बेस्ट फाइटर भी होता तोह भी वह मार्गरेट का सामना नहीं कर सकता था.

मार्गरेट : तोह रंडी के बच्चे! मेरा नाम मार्गरेट है. मैं लावारिस हों. मेरा कोई परिवार नहीं है. ऐसा सब hi बोलै गया था मुझसे. बरसों पहले जब मैं होश में आई थी तोह तुमने कहा था मैं तुम्हारी बेस्ट एजेंट हों और एक मिशन में चोट लगने के कारण खुद को भूल गयी हों.. रंडी के बच्चे तूने सबत कर दिए तोह एक बीज से इस दुन्या में नहीं आया. तू पुरे शहर के कुत्तों के मिलान का नतीजा है.. मैं तोह तुझ पर थूक भी सकती.. तुझ जैसो के साथ क्या किया जाता है.. वह मैं तुझे लाइव दिखाऊँगी...

ब्रेन मास्टर की पहात के चार हो चुकी थी.. उसका चेहरा ज़र्द पड़ने लगा था. मार्गरेट के ठन्डे लहजे से उसकी बैकबोन में संसानत होने लगी थी.. खजर के कारण हो रहा दर्द भी उसकी जान ले रहा था.

मार्गरेट ने एक और खनजर अपनी बैक बेल्ट से निकला और ब्रेन मास्टर के दूसरे हाथ को थाम कर चेयर पर सेट करते हुए, ब्रेन मास्टर की आँखों में देख कर स्माइल करते हुए पुरे ज़ोर से ब्रेन मास्टर की कलाई में उतार दिए..

ब्रेन मास्टर पूरी जान से चीख पड़ा.. GUUUUUAAAAAAAARRRRRRDDDDDDDDSSSSSSSSSS

मार्गरेट : HAHAHAHA..randi के बच्चे इस कोठी में तेरा एक भी कुत्ता अब ज़िंदा नहीं है. मार्गरेट ब्रेन मास्टर के कंप्यूटर को उसे करने लगी. फ़ौरन hi कोठी में लगे कामर्स से ब्रेन मास्टर को सबकी कटी हुई लाशें दिखाई देने लगी. बरिन मास्टर लाशें देख कर और भी दर गया.. कभी अपनी दोनों खून खून हो रही कलाइयों को देखता तोह कभी कंप्यूटर स्क्रीन कर नज़र आने वाली लाशों को..

ब्रेन मास्टर : mmmm...mujhe..mm..maaf कर दो बेटी.. mmm..mujhse बहुत बड़ी गलती हो gayi..mm..mujhe तुम्हारे साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था.. aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh

aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh.....aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh...aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh

मार्गरेट ने एक खंजर को को घूमना शुरू कर दिए था. ब्रेन मास्टर की कलाई की हड्डी का दर्द ब्रेन मास्टर को अपनी गांड में महसूस हो रहा था.

मार्गरेट : रपो ने तुम्हे चुन कर बहुत सही किया है रंडी के बच्चे.. अब देखना रपो की मैं कैसे धज्जियाँ उड़ाती हों.. तुम्हे अभी नहीं मारूंगी.. मरने से पहले तुझे रपो के पूरा स्ट्रक्चर तबाह ो बर्बाद होते हुए देखना है रंडी के बच्चे.. बहुत से लोगों को उतने अपने मतलब के लिए घरों से उठवाया है न. उनके ब्रेन वाश करके तूने कई घरों को खून के आंसू रुलाये हाँ न.. अब तुझे अपने सब किये का भुगतान देना पड़ेगा. उतने hi खून के ाअनुस तुम को और तुम्हारे देश वळून को बहाने पड़ेंगे.

मार्गरेट की उँगलियाँ कीबोर्ड पर ऐसे चलने लगी. जैसे मार्गरेट की उँगलियों मचिनी सिस्टम के कण्ट्रोल में हों.

ब्रेन मास्टर अपने दर्द को दबाये मारगेट से बोलै : प्ल्ज़ तुम ऐसा कुछ मत करो. हमारी बरसों की म्हणत को यौन बर्बाद मत करो..

मार्गरेट ने एक स्माइल के साथ सर घुमा कर ब्रेन मास्टर को देखा फिरसे अपने काम में लग गयी..

ब्रेन मास्टर : फॉर गॉड सके! इसे बंद कर दो. सब बर्बाद मत करो.... मार्गरेट अपने काम में लगी रही. उसकी उँगलियों की स्पीड हर समय और भी बढ़ती जा रही थी... तुम्हे तुम्हारे भगवन की कसम है कोमल बेटी.. प्ल्ज़ इसे बंद कर दो.. हमारा बरसों का बनाया हुआ सेटअप यौन बर्बाद मत करो..

उसी पल मार्गरेट ने अपने दोनों हाथ उठा कर ब्रेन मास्टर को स्माइल से देखा. फिर अपनी के मिडिल फिंगर से एंटर के बटन को प्रेस कर दिए..

ब्रेन मास्टर ख़ौफ़ज़दा नज़रों से कंप्यूटर स्क्रीन को देखने लगा.. उसी समय उस कमरे में मौजूद साडी दीवरें स्क्रीन में बदलने लगी. सभी दीवारों पर तीनो हेडक्वार्टर्स का व्यू दिखाई देने लगा..

मार्गरेट घूम कर ब्रेन मास्टर को देखने लगी.. ओह्ह तो बरसों बाद भी तुम मेरा नाम नहीं भूले हो रंडी के बच्चे....

ब्रेन मास्टर तोह बस दीवारों पर दिखाई देने वाले व्यूज को hi देख रहा था.

मार्गरेट : हाहाहा!! क्या देख रहे हो थे ग्रेट ब्रेन मास्टर! तुम्हारे hi कारण रपो वर्ल्ड बेस्ट ऑर्ग बानी है.. अब तुम्हारी hi आँखों के सामने सब तबाह हो रहा है.

बरिन मास्टर : कोमल बेटी! तुम चाहो तोह मेरे बदन के हज़ारों टुकड़े कर दो. पर हमारे देश को इतना बड़ा लोस्स मत पोहनचाओ.

मार्गरेट : कोमल! कोमल का मतलब समझते हो तुम रंडी के bachhe..narm.. नाज़ुक.. फूल की पतियों से भी नाज़ुक.. पर तुमने उसी कोमल को एक फौलाद बना दिए. अब भुगतो. भुगतना तोह तुम्हारे और तुम्हारे देश के नसीब में है रंडी के बच्चे.. अभी तोह शुरुआत है. आगे आगे देखते जाओ. मैं करती क्या हों तुम्हारे देश के साथ. मार्गरेट फिरसे कीबोर्ड पर मसरूफ हो गई. कुछ देर लगी रही. फिरसे एंटर के बटन को प्रेस कर दिए..

तीनो दीवारों पर कुछ hi सेकण्ड्स में ब्रेन मास्टर को तीनो हेडक्वार्टर्स पर धमाके होते हुए दिखाई देने लगे..

ब्रेन मास्टर पागलों की तरह चीखने लगा तोह कोमल ज़ोर ज़ोर से हसने लगी..


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आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..


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Episode:28


कोमल : र्रिचड! बहुत घर बर्बाद किये तूने, रपो को बिल्डप करने के लिए बहुत सी ज़िन्दगियों से खेले हो तुम. ब्रेन मास्टर! हँ ब्रेन मास्टर हो तुम. बड़ा नाम कमाया है तुमने. अनगिनत घर उजाड़ कर नाम कमाया है तुमने. अमेरिकन सर्कार तुममे बहुत खुश है. आगे चल कर तुम और भी कई घर उजाड़ कर रपो को और भी स्ट्रांग बना देते. मेरी hi जैसी और कई बेटियों को उसके परिवार से अलग करते. ऐसे hi तुम रपो को पावरफुल बनाते.

पारर...

अबसे ऐसा नहीं होगा.. देखा कैसे तुम्हारी बरसों की म्हणत से कड़ी की गयी एम्पायर की धज्जियाँ उड़ रही हाँ मैं. देखो ब्रेन मास्टर देखो..

ब्रेन मास्टर तोह केवल चीख hi रहा था. जहाँ पहले कोमल की मिन्नतें कर रहा था. अब वहीँ कोमल को गलियां दे रहा था. उसे सब बंद देने के लिए बोल रहा था.

ये सच था, रपो जितनी स्ट्रांग र्रिचड के कारण हुई थी, उतना कोई भी रपो को पॉवरफुल नै बना सका था. र्रिचड बेस्ट ब्रेन था अपने देश का. रंडी का बचा होने के बावजूद भी वह अपने देश के लिए बहुत कुछ कर गया था.

कोमल ऐसे hi वहीँ बैठी बैठी तीनो अड्डों को ब्लास्ट कर रही थी. चाहती तोह एक hi बार में सभी हेडक्वार्टर ब्लास्ट कर सकती थी. पर कोमल ऐसा करना नहीं चाहती थी. अपने hi जैसे और भी कैयो को वह बचा लेना चाहती थी.

उसी समय तीनो मास्टर्स की और से मैसेज आने लगा. कोमल को पूरा सिस्टम्स समझने में देर नहीं लगी थी. वह ब्रेन मास्टर बनकर तीनो मास्टर्स से वहां की surat-e- हाल जान्ने लगी. ब्रेन मास्टर को बहुत करीब से जाना था उसने.. ब्रेन मास्टर के hi अंदाज़ में वह तीनो मास्टर्स के साथ बात करने लगी.

तीनो मास्टर्स को अपने सरे एजेंट्स के साथ तीन और अलग अलग आइलैंड पर पोहचने का आर्डर दे दिए.. अगले आर्डर तक कोई भी अपनी मर्ज़ी से कुछ न करे.

कोमल : कैसा लगा मेरा खेल डिअर सर!

ब्रेन मास्टर : तू बहुत बुरी तरह से पछताएगी कुत्तिया. तूने मुझे बर्बाद नहीं किया है. तूने अमेरिकन सर्कार को ललकारा है. उनके ग़ज़ब को दावत दी है. तू नहीं बचेगी कुत्तिया, तेरे साथ साथ तेरा परिवार और तेरा देश सब के साथ बहुत बुरा होने वाला है.

कोमल : हाहाहा! रस्सी जल गयी पर बल नहीं गया. ये बल कभी नहीं जायेगा. ऐसे hi हो तुम लोग. कोई न, सरे कास बल मैं निकल दूंगी. अब तोह तुम सब मेरे खुले दुश्मन बन बैठे हो. सोचा नहीं था, कभी तुम्हारे खिलाफ भी मुझे जाना पड़ेगा. मैं तोह बरसों से देश सेवा करती चली आ रही थी. कितनी खुश थी मैं अपने देश अमेरिका की सेवा करके. पर नहीं जानती थी, मैं तो एक घुलम बना दी गयी थी. मेरे देश तोह अमेरिका था hi नहीं. मैं तोह एक इंडियन नागरिक थी. मेरा चेहरा, मेरी पहचान तक बदल दी गयी थी. कितने संगदिल हो तुम लोग. अपने मतलब के लिए कितना घिनोना खेल खेल जाते हो. मैं हिंदी कैसे जानती हों, इसपर तुम ने कहा था मैं एक एजेंट हों तोह बहुत सी भाषाएँ मुझे सिखाई गई थी.

एक लम्बी सांस लेते हुए : अब मैं तुम्हे सबको अपनी संगदिली दिखाओगी. मुझे मेरे देश की सेवा से हटा कर तुमने मुझे अपना घुलम बनवा कर अपने देश के लिए काम करने पर मजबूर कर दिए. तुमने सबत कर दिए र्रिचड! तुम सच में hi एक रंडी के hi बच्चे हो. एक भर्तीअ नारी होने के नाते, अपने देश की सेवक होने के नाते मैं कसम कहती हों, अपने देश की सेवा करते हुए मैं रपो को कभी फिरसे खड़ा नहीं होने दूंगी. जीते जी रपो को कभी भी पॉवरफुल बनने नहीं दूंगी.

दोनों खंजरों से कोमल फिर ब्रेन मास्टर के पुरे शरीर के छोटे छोटे टुकड़े करने लगी. बड़ी आग रेहकने लगी थी कोमल के सीने में. ब्रेन मास्टर का कीमा बनाते हुए उसे बेहद शांति प्राप्त होने लगी थी.

पुरे सेटअप को डिस्ट्रॉय मोड पर सेट करने के बाद, ब्रेन मास्टर की लाश पर थूकने के बाद कोमल वहां से निकल पड़ी.

ब्रेन मास्टर के इस ठिकाने के बारे में कोई नहीं जनता था. केवल वही जानते थे. जिन्हो ने र्रिचड को ब्रेन मास्टर बनाया था.




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NO:4 जब सरकारी ईमारत से निकल कर रोड्स पर चलने लगी थी. उसी समय बाओ के स्पेशल ट्रैंनिंग सेण्टर में अलका एक रूम में बैठी हुई थी. उसके सामने उस ट्रैंनिंग सेण्टर के 3 बड़े इंस्ट्रक्टर्स बैठे हुए थे.

एक इंस्ट्रक्टर : अलका मैडम! आपकी प्रोग्रेस बहुत बढ़िया जा रही है. हमें आपकी क़ाबलियत देख कर बहुत ख़ुशी हुई. बहुत जल्द आप ट्रैंनिंग पूरी करके अपने देश लौट सकेंगी. वहां रहते हुए आप अपने देश की सेवा करते हुए कभी कभी हमारे काम भी आ जाया करना. आखिर इंडिया से हमारे ब्रद्राना रिलेशन्स हाँ. पास्ट में भी हमने बहुत बार इंडिया के लिए, रॉ के लिए अपनी खिदमात पेश की हाँ. आप को भी ट्रैंनिंग देकर हम एक एजेंट बनाने जा रहे हाँ. जिससे आप अपने देश की सेवा कर सकेंगी. और हम इंडिया को एक और बेस्ट एजेंट तोहफे में देकर अपने भाई होने का साबुत देंगे.

दूसरा इंस्ट्रक्टर : अलका मैडम! आप बहुत खुशकिस्मत हो जो आप इंडिया में पैदा हुई हाँ. इंडिया वर्ल्ड के बेस्ट कन्ट्रीज में से एक कंट्री है. बहुत से अज़ीम एजेंट्स इंडिया में पैदा होते आये हाँ. उन अज़ीम एजेंट्स ने हमेशा hi आपके देश को पहले से बढ़कर स्ट्रांग बनाने की कोशिश की है. अबसे आप जैसी एक ग्रेट फीमेल एजेंट भी अपने देश की सेवा करेगी. अपने देश का नाम और भी ऊंचा करेगी.

तीसरा इंस्ट्रक्टर : अलका मैडम! बहुत काम मुझे आपके जैसे स्टूडेंट्स को सीखने का मौका मिला है. सीखने के लिए तोह हज़ारों स्टूडेंट्स आते रहते हाँ. पर किसी किसी को hi सीखने में मज़ा आता है. बरसों बाद मुझे आप जैसी कोई मिली है. आपकी ट्रैंनिंग दे कर मैं खुद को बेहद खुशनसीब समझता हूँ. बस इतना hi कहूंगा आपसे, अपने देश की सेवा करते समय कभी हमें मत भूल जाना..

अलका जिसे बाओ ने अपने अंडर लेते hi ब्रेन वाश करने के बाद अपने साथ मिला लिया था. अलका का ब्रेन पूरी तरह से वाश नहीं हो सका था. ये बात उनके लिए हरणकूं थी. फिर भी जितना ब्रेन वाश हो सका.. करने के बाद अलका को प्रोटोकॉल के साथ ट्रैंनिंग दी जाने लगी थी. मीठी मीठी बातों से उसे अपने साथ मिलाया जा रहा था.

अलका भी उनकी मीठी मीठी बातों के असर में आती जा रही थी. पहले उसे कुछ हैरानगी हुई थी. अपने देश से यहाँ जिस अंदाज़ में उसे लाया गया था. अलका ने सख्त नाराज़गी का इज़हार किया था. ये टोटली ब्रेन वाश न हो पाने के कारण था. बाद में रेगुलर मीठी मीठी बातें और मिल रहे सम्मान के चलते अलका ठंडी पद गयी थी. जैसी ट्रैंनिंग उसे दी जा रही थी. ऐसा सब उसने पहले कभी नहीं सोचा था. अब ट्रैंनिंग के साथ साथ उसे देश सेवक के रूप में ढाला जा रहा था. अलका भी खुद को इस फील्ड में इन् देखते हुए खुश थी. दक्ष से मोहब्बत में धोका खाने के बाद उसके लिए टाइम निकलना बहुत मुश्किल हो जाया करता था. बार बार दक्ष के साथ बीते लम्हे उसकी आँखों के सामने आ जाया करते थे. पढाई के साथ साथ वह पेटिंग में खुद को गुम्म करने लगी थी.

पारर.....

पर अब उसे ट्रैंनिंग के बाद एक एजेंट बनकर अपने देश की सेवा का मौका मिलने जा रहा था तोह अलका बहुत खुश थी. एक तोह हार्ड ट्रैंनिंग के कारण उसे दक्ष को सोचने का मौका hi बहुत काम मिल रहा था. दूसरे उसके अंदर की उदासी भी काम हो रही थी. पहले वह एक कोमल बदन वाली लड़की थी. अब वह भी एक फौलाद बन रही थी. उसकी सोचें भी बदल रही थी.

ब्रेन वाश किये जाने के कारण उसकी सोच में बाओ के लिए वफादारी भी आने लगी थी.

तीनो इंस्ट्रक्टर्स की बातों के जवाब में अलका बोली.

अलका : जैसे मुझे यहाँ पर लाया गया था, पहले तोह मुझे सब बहुत गलत लगा था. बूत बाद में जैसी ट्रैंनिंग मुझे दी जाने लगी है. जैसा बर्ताव मेरे साथ किया जा रहा है. जितना सम्मान मुझे दिए जा रहा है. उसके लिए मैं दिल से आप सब को थैंक्स कहना चाहूंगी. आप सब के बारे में मैंने कई अलग अलग तरह की बातें सुनी थी. पर यहाँ आने के बाद, आप सबसे मिलने के बाद मुझे मेरी सोचों पर हंसी आती है. आप सब बहुत अच्छे हाँ. मुझे मेरे देश की सेवा के लिए तैयार कर रहे हाँ. अपने मतलब के लिए आप कुछ भी नहीं बोल रहे हाँ. कैसे फिर मैं ट्रैंनिंग के बाद आप सब को निराश कर सकती हों. जिससे भी थोड़ा सा रिलेशन बन जाए, उसके काम आना तोह फिर बनता hi है. मैं कभी भी आप सब को नहीं भूलूंगी.

तीनो इंस्ट्रक्टर्स एज्ड थे. फिर भी अलका को बहुत सम्मान दे रहे थे. अब अलका की बातें सुनी तोह उठ खड़े हुए और सलूट करने लगे.

"मैडम आप सच में बहुत ग्रेट हाँ. हमारा जितना भी वक़्त आपके साथ गुज़रेगा, हम हमेशा इस वक़्त को याद करते रहेंगे"

अलका भी उठ कड़ी हुई थी. कुछ देर की और बातों के बाद वह रूम से बहार निकलने लगे तोह उसी समय पर सेण्टर के बहार शोर की आवाज़ सुनाई देने लगी. अलका के मामले में सबको सावधान कर दिए गया था. कुछ भी हो, उन्हें डिस्टर्ब न किया जाए. इसलिए NO:4 से रिलेटेड कोई भी खबर उन तक नहीं पोहंचाई गयी थी.

अब शोर हुआ तोह सबके साथ साथ उन्हें भी खबर मिल गयी. फ़ौरन hi अलका को एक रूम में जाने का कह दिए गया. अलका एक अच्छे स्टूडेंट्स की तरह OK बोल कर अपने रूम की और बढ़ गयी.. वर्ण शोर की आवाज़ सुनकर उसके अंदर भी सब जान्ने की बेचैनी पैदा हो गयी थी.

तीनो इंस्ट्रक्टर्स आगे गेट की और बढ़ने लगे.. जैसे hi गेट से कुछ फैसले पर पोहंचे, गेट खुलता चला गया. दोनों ये देख कर हैरान रह गए. गेट को खोलने वाला कोई भी गेटकीपर, खुल रहे गेट के साथ नहीं था. गेट खुद से खुल रहा था.

तीनो एक दूसरे को देख कर फिरसे गेट की और देखने लगा.. NO:4 के पीछे अपने hi देश के कई सैनिक उन्हें दिखाई देने लगे. ऊपर 2 हेलिकोप्तेर्स भी उड़ रहे थे. वह बड़े हैरान हुए.

NO:4 चलती हुई इंस्ट्रक्टर्स के पास से गुज़रती चली गयी. तीनो इंस्ट्रक्टर्स NO:4 को रोक देना चाहते थे. क्यूंकि NO:4 का रुख अलका के रूम की और था. पर NO:4 के पीछे आने वळून ने उन्हें रोक दिए.. पुरे ट्रैंनिंग सेण्टर में सन्नाटा छ गया था. जिस जिस ने भी गेट को खुलते देखा था, वह सब अपनी ट्रैंनिंग छोड़ कर NO:4 को देखने लगे थे.

NO:4 अलका के रूम के दूर पर पोहंची तोह दूर खुद से खुलता चला गया. अब माला फिरसे चमकने लगी थी.

अलका जो अपने रूम में एक चेयर पर बैठी हुई एक बुक उठा कर रीड करने जा रही थी. दूर के खुलने तक वह शोर नहीं सुन पायी थी. रूम साउंडप्रूफ था. जैसे hi दूर खुला. अलका NO:4 को देखने लगी. प्रश्न भरी नज़रों से NO:4 को देखने लगी. उसी समय अलका की नज़र माला पर पड़ी तोह बस उसकी नज़र माला पर hi ठहर गयी..

माला के सभी डेन अब चमकने लगे थे. सबसे अलग अलग कोर्स की रेज़ निकलने लगी थी. NO:4 के रूम में घुसते hi दूर खुद से लॉक हो गया था. रूम के अंदर के सभी कामर्स और देवीकेस काम करना बंद कर गए थे. कोई भी नहीं जान पाया अंदर क्या सन चल रहा है.

अलका को 24 हरष मॉनिटर किया जा रहा था. इंस्ट्रक्टर्स दौड़ कर कण्ट्रोल रूम में पोहंचे. वहां वह अलका के रूम के अंदर का सन देखना चाहते थे.. बूत कोई भी कैमरा या डिवाइस वर्क नहीं कर रहा था.

अलका मेस्मेरिज़ेड कंडीशन में NO:4 की और बढ़ने लगी. पास पोहंची NO:4 के गले से माला निकल कर अपने गले में पहन ली. जैसे hi माला NO:4 के गले से निकली. NO:4 लहराते हुए निचे गिर पड़ी.

मेस्मेरिज़ेड कंडीशन में अलका बीएड की और बढ़ी. बीएड पर पोहंच कर वह लेट गयी.. माला से निकल रही रेज़ उसकी पूरी बॉडी को जगमगाने लगी.

अलका की ऑंखें बंद होती चली गयी. अलका अब फिरसे पहले वाली अलका बन चुकी थी. उसके ब्रेन के साथ की गयी छेड़ छड़ खुद से रिकवर होने लगी.

बंद आँखों के पीछे अलका को गुरु जी का चेहरा दिखाई देने लगा.. उन्हें देखते hi अलका लेती लेती hi सम्मानीय अंदाज़ में हो गयी.

गुरु जी : प्रणाम गुरु जी!

गुरी जी : तुम्हारा कल्याण हो पुत्री! अलका पुत्री तुम नहीं जानती, जैसे hi माला तुम्हारे गले में पोहंची थी. ठीक उसी समय 4 और अलग अलग रोशनियां माला से निकली थी..

चरों रोशनियां अलग अलग दिशाओं में पोहंच कर तुम्हारे hi जैसी चार और लड़कियों में जा समायी थी.

वह चरों लड़कियां भी इस समय तुम्हारे जैसी हालत में हाँ. तुम्हारी hi तरह से वह चरों भी मुझे देख और सुन रही हाँ. सुनो पुत्रियों, भगवन ने तुम पांचू को एक सम्मान बनाया है. तुम सबके नसीब एक साथ जुड़े हुए हाँ. क्यों जुड़े हुए हाँ, ये समय तुम पांचू को खुद से बता देगा. तुम पांचू एक बंद मुठी की तरह हो. जब पांचू एक साथ मिल जाओगी तोह तुम पांचू की शक्ति के आगे कोई भी शक्ति ठहर नहीं पायेगी. कोई भी बुरी शक्ति तुम्हे हानि नहीं पोहंचा सकेगी. कोशिश करना जितनी जल्दी हो सके सब एक साथ मिल जाओ. तुम पांचू को एक होने के लिए खुद से सब कुछ करना पड़ेगा. कुछ बातें ऐसी भी होंगी जो तुम्हे एक साथ होने नहीं देंगी. तुम पांचू पवित्र आत्मा हो. पर मैं से तुम पांचू कितनी पवित्र हो, ये तुम पांचू को सबत करना होगा. अबसे तुम पांचू की ज़िन्दगी का अर्थ बदलने जा रहा है. पांचू खुद को पुरे मैं से पवित्र सबत करके एक हो जाओ, एक मुठी बन जाओ. तुम सबका कल्याण हो पुत्रियों..

गुरु जी अलका के अंदर से चले गए.. अलका होश में आ गयी. उठ कर बैठी तोह अपने गले में मौजूद माला को थाम कर अपने होंटो से लगा गयी. उसकी आँखों से आंसू जारी थे. जहाँ उसे बहुत असीम शांति प्राप्त हुई थी. वही वह खुद को दूसरों से अलग जान कर ख़ुशी सहन नहीं कर पा रही थी. उसकी आँखों से आंसू जारी हो गए थे.

ये जान कर वह एक पवित्र आत्मा है. अलका की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा था.

अलका बीएड से उत्तरी और दूर का लॉक खोल कर रूम से बहार निकल पड़ी. सब वही मौजूद थे. कमरे के अंदर के सरे सिस्टम अलका के नार्मल होते hi एक्टिव हो गए थे. अलका को रूम से बहार जाते हुए देख लिया गया था. तीनो इंस्ट्रक्टर्स दौड़े दौड़े वहीँ जा पोहंचे.

अलका सबको ग़ुस्से से देख रही थी. और बाकि सब अलका की चमक दमक देख कर दांग थे. कुछ hi देर में अलका एक हुसैन की देवी में ढल गयी थी. उसकी सुंदरता में बेपनाह इज़ाफ़ा हो गया था. पर अलका की आँखों में ग़ुस्से भरे भाव देख कर सब दो कदम पीछे हैट गए थे. माला के बारे सब अच्छे से जान चुके थे. माला के अलका के गले में पोहचते hi अलका साडी की साडी बदल कर रह गयी थी.

इंस्ट्रक्टर्स भी अलका को देख कर समझ गए थे. अलका अब फिरसे पहली वाली अलका बन चुकी है. इतनी दिनों की उसपर की गयी म्हणत मिटटी में मिल चुकी है.

अलका चलती हुई तीनो इंस्ट्रक्टर्स के सामने जा पोहंची. वह तीनो बिना डरे अलका को देखने लगे.

अलका : ऐसे hi अंदाज़ में तुम सब मेरे देश की सेवा कर रहे हो. किसी की मर्ज़ी जाने बिना, उसका ब्रेन वाश करके उसे अपने मतलब के लिए इस्तेमाल करते हो. कितनी घट्टिया सोच के मालिक हो तुम सब. नफरत है मुझे तुम जैसे लोगों से. नफरत है मुझे तुम्हारे विचारो से. अब शराफत से मेरे इंडिया जाने का इंतेज़ाम करो. वर्ण तुम सबकी खैर नहीं.

एक इंस्ट्रक्टर डेरिंग दिखते हुए : मंद योर लैंग्वेज अलका.. मत भूलो तुम हमारे देश में हो. हमारी कस्टडी में हो. हमारी मर्ज़ी के बिना यहाँ कोई आ तोह सकता है. पर यहाँ से कोई भी बिना हमारी परमिशन के जा नहीं सकता. तुम भी नहीं जा पाओगी. सीधे सीधे जिस मकसद के लिए तुम्हे यहाँ लाया गया है. इसकी कम्पलीशन में हमारा साथ दो. बदले में हम तुम्हारे लिए और तुम्हारे देश के लिए बहुत कुछ कर जायेंगे. पहले की तरह अब भी तुम्हारे देश को वर्ल्ड का बेस्ट कंट्री बनाने के लिए सब कुछ कर जायेंगे. तुम्हे किसी भी हाल में हमारा साथ देना होगा. डीके को साथ मिला कर दूसरे प्लेनेट से जुडी जितनी भी इन्फो है, वह हमें चाहिए. साथ hi दूसरे प्लेनेट से आयी लड़की भी हमें चाहिए, जो डीके के साथ है. ऐसा किये बिना तुम यहाँ से नहीं जा सकती.

अलका बड़े सुकून से उसकी बातें सुन रही थी. जैसे जैसे उसकी बातें आगे बढ़ रही थी. अलका के होंटो पर मुस्कान आने लगी थी. जो धीरे धीरे बढ़ती चली गयी थी.

वह खामोश हुआ तोह अलका चरों और देखने लगी. सब दम साढ़े उसे hi देख रहे थे.

अलका : तुम मेरे देश को पॉवरफुल बनाने में मेरा और मेरे देश का साथ डोज.

तुम सब...

हाहाहा.....

अच्छा मज़ाक है.. तुम सब तोह खुद किसी के सहारे उठने वळून में से हो. मेरे देश को क्या पॉवरफुल कंट्री बनाने में मदद करोगे. मेरा देश अब भी तुम्हारे देश से कहीं बढ़कर पॉवरफुल है. भूल गए हो तो मेरे देश के जयलोन की हिस्ट्री निकल कर फिरसे रीड करो. क्या कुछ नहीं कर गया है मेरा देश. मेरा महान था और महान है. कोण है जो मेरे देश की बराबरी कर सकता है. कोण है जो मेरे देश से टकराने की हिम्मत खुद में रखता है. हम शांत रहते हाँ तोह इसका मतलब ये नहीं है, हम कुछ करने लायक नहीं है. हम इंडियन में और तुम सब में फर्क है तोह बस इतना hi, हम नीचे गिरना नहीं जानते.. घट्टिया सोच रख कर तरक्की करना नहीं जानते. बेबस, लाचारों और कमज़ोरों पर ज़ुल्म नहीं करते. हम अपने दुम्म पर अपने पैरों पर खड़े हुए हाँ. तुम्हारी तरह नहीं, जो देश बिदेश से टैलेंटेड लोगों को उठवा का, उनका ब्रेन वाश कर, अपना घुलम बना कर तरक्की करते हाँ.

अलका की आखरी बात पर सब चीख पड़े..

अलका भी चीखती हुई : चिल्ल्ल्लहाऊओ matttttttttt! चिल्लाना मुझे hi नहीं हर एक इंडियन नागरिक को भी आता है. सब एक साथ चिल्ला उठे तोह सोचो तुम सब का क्या हशर होगा.

सच हमेशा hi कड़वा होता है. तुम जैसे इसे कभी भी सहन नहीं कर सकते. जो भी कहा मैंने, उसका एक एक शब्द सच है. मेरे साथ जो भी इतने दिनों से तुम सब लोग कर रहे थे. वह सब जानते हुए भी सच के इस कड़वे ज़हर से अनजान हो. बड़े भोले बनते हो तुम लोग. खुद को होशियार और ज़हीन समझते हो और हम जैसो को बेकार के पुर्जे.

कुछ देर पहले क्या कह रहे थे तुम. मैं या कोई भी इस देश से अपनी मर्ज़ी से निकल नहीं सकता.

अलका आगे बढ़ी और जो इंस्ट्रक्टर बहुत बढ़ चढ़ कर बोल रहा tha.uski कलाई थाम ली. पहले तोह वह नार्मल रहा. फिर जैसे hi अलका ने अपने एक नाख़ून से उसकी स्किन को कुरेदा तोह उसके फेस एक्सपेरशन चेंज होने लगे..

अलका बुलंद आवाज़ में : देखो! तुम सब इसका हाल देखो.

अलका इतना बोल कर, उसकी कलाई छोड़ कर दो कदम पीछे को हैट गयी.. वह इंस्ट्रक्टर अपनी कलाई को थाम कर गेब्रियल के जैसे अंदाज़ में चीखने चिल्लाने लगा.. जहाँ अलका ने नाख़ून से कुरेदा था. वहां उस इंस्ट्रक्टर की स्किन नीली पड़ने लगी थी. वह चीखता चिल्लाता हुआ भागने लगा.

उसे भागते देख कर एक बार फिरसे सबकी दौड़ें लग गयी. सब डरने लगे कहीं वह इंस्ट्रक्टर से टच न हो जाये. कहीं वह भी उस की तरह से नीला न पड़ने लगे. कहीं उसकी भी जान न चली जाए.

गब्रेइल का एक बीटा भी वहीँ मौजूद था. वह ओहदे से आर्मी में कप्तान था. वह भी माला की दहशत में आया हुआ था. पर अपने डैड की मौत पर वह बेहद दुखी भी था. सब दौड़ रहे थे तोह वो अपनी गन को सीधा अलका की और करते हुए ट्रिगर दबा गया. एक45 गुणसे गोली निकली तोह भयंकर आवाज़ हुई. बहुत से लोग रुक कर उसे देखने लगे.

जैसे hi बुलेट एक45 से निकली, दूसरे hi लम्हे उसकी चीख उसके गले में hi अटकी रह गयी. बुलेट जो उसकी गुणसे निकली थी. अलका तोह नीले पद रहे इंस्ट्रक्टर को देख रही थी पर माला ने अलका को बचते हुए बुलेट को खुद पर ले लिया था. बुलेट माला से टकरा कर रिफ्लेक्ट हुई और पलट कर गेब्रियल के बेटे के माथे में जा घुसी..

अब सही से सब दहशत में आ गए थे. सब चीखते हुए वहां से निकलने लगे. आर्मी वाले और एजेंट्स दूर खड़े रह कर अलका की और गन्स के रुख किये खड़े थे. उन्हें न तोह अलका को शूट करने के ऑर्डर्स थे और न hi वह खुद में हिम्मत प् रहे थे. बुलेट के रिफ्लेक्शन को वह भी देख गए थे. कोई भी ट्रिगर दबाने की हिम्मत नहीं कर सका.

अलका भी माला को थाम कर चूमने लगी थी. वह भी उसी पल माला की करगेड़गी को जान गयी थी. उसकी ख़ुशी और भी बढ़ गयी थी. नाख़ून चुभा कर मारने वाली बात भी खुद से उसके मैं में आयी थी. अलका खुद को शक्तिशाली जान कर बहुत खुश थी.

कुछ hi देर में वहां कई हेलिकोप्तेर्स मंडळाने लगे. सभी बड़े अधिकारी वहां पोहंच रहे थे. ऐसी अजीब घटना इससे पहले उनके देश में नहीं घाटी थी.

बाओ के बड़े ऑफिसर्स भी वहीँ आ गए थे. बाओ के सात बड़े भी अपने हेडक्वार्टर में बैठे हुए सब देख रहे थे. वह भी अलका को देख कर परेशान थे. जहाँ कुछ समय पहले सब खुश थे. अब वहीँ वह भी बहुत परेशान थे. माला भी हाथ से निकलती दिखाई दे रही थी और अलका भी.

अलका के गले में मौजूद माला की पावर वह देख चुके थे. बा3 को छोड़ कर सब आपस में बहस कर रहे थे.

सब स्क्रीन्स पर अलका और देश के बड़े बड़े ऑफिसर्स को अलका के साथ बात करते हुए देख रहे थे.

अलका : मुझे तुममे किसी की भी बात नहीं सुन्नी है समझे. फ़ौरन से भी पहले मेरी रवानगी का इंतेज़ाम करो. वर्ण जितनी देर मुझे यहाँ लगेगी. उतनी hi देर तक मैं लाशें गिरती जाऊँगी. मुझे यहाँ पर मेरी मर्ज़ी के बिना लाया गया है. अब शराफत से मुझे मेरे देश पोहंचा दिए जाए. वर्ण-----

अलका ऊँगली उठा कर सबको वार्निंग देने लगी.

एक अफसर : ठीक है मैडम! जैसे आप कहेंगी, हम वैसा hi करेंगे. हमें कुछ समय दीजिये. सब इंतेज़ाम फ़ौरन hi कर दिए जाएंगे.

वह ऑफिसर धीमे और मीठे लहजे में बोलै तोह अलका कुछ शांत हो गयी.

बा1 उसी ऑफिसर से बोलै : अलका को एयरपोर्ट वाली बिल्डिंग में लेजाओ. उसे ऐसा लगने दो, जैसे हम उसे ख़ुशी से रुखसत कर रहे हाँ. वहीँ स्टीलरूम में इसे कैद कर दिए जाए.

वही अफसर एक से बोलै : मैडम को एयरपोर्ट लेजाने का इंतेज़ाम किया जाए. अलका एक एक को देखने के बाद बहार जा कर गाडी की बैक सीट पर जा बैठी.

एयरपोर्ट पोहंची तोह गाडी से उतर कर खुद से hi एयरपोर्ट के अंदर आगे बढ़ती चली गयी. अलका का अंदाज़ किसी प्रिंसेस के जैसा था. सब उसकी प्रजा के जैसे उसके पीछे चल रहे थे. वही अफसर भाग कर अलका के पास पोहंचा और बोलै.

"मैडम प्ल्ज़ आप मेरे साथ आइये.. जितनी देर में प्लेन फ्लाई करने के लिए रेडी होता है. तब तक आप प्ल्ज़ हमें अपनी खिदमत का मौका दें"

अलका ने स्माइल से उसे देखा फिर अफसर की कलाई को देखने लगी. वह दर के दो कदम पीछे हो गया. अलका हसने लगी.

अलका : डरो नहीं, मैं कुछ नहीं कहूँगी तुम्हे. तुम बहुत अच्छे हो. बड़ा मीठा बोलते हो. इतना मीठा सेहत के लिए हानिकारक होता है. तुम सब को इतने मीठे की आदत है. मुझे मीठे से दूर हुए बरसों बीत चुके हाँ. अब मीठा मुझे हज़म नहीं होता. लाओ अपनी कलाई मुझे दो.

वह दर कर दो कदम और पीछे हो गया. तोह अलका हलके से है पड़ी.

"मैडम प्ल्ज़ आप मेरी बात मान लें"

अलका : मान लोन.. तुम्हारी बात मान लोन.. ठीक है मान लेती हों मैं तुम्हारी बात. तुम्हे पहले अपनी कलाई मुझे थामनी होगी. अलका डेविल स्माइल से उसे देख कर बोली.

बा3 : इसे जाने दो. रोकोगे तोह बहुत नुकसान उठाना पद जायेगा.

बा3 की बात पर सब उसे देखने लगे.. वह बहस करने लगे और अलका और माला को अपने देश में लाने के लिए बहुत म्हणत करनी पड़ी थी. सोफिए जैसी महान एजेंट बुरी तरह से घायल हो गयी थी. अब कैसे वह उसे जाने दे सकते थे.

बा3 की सोच के अगेंस्ट थी सबकी सोच. इस बार किसी ने भी बा3 की बात नहीं मानी और अलका को स्टीलरूम में बंद करने के ऑर्डर्स जारी करने लगे.

अलका अब यहाँ एक पल भी रुकना नहीं चाहती थी. सबकी नेचर वह बहुत अच्छे से जान चुकी थी. वह आगे बढ़ने लगी. सरे रस्ते उसके लिए खली होने लगे.. एक कॉरिडोर से गुज़रते हुए अचानक से सामने के रस्ते को स्टील वाल से बंद कर दिए गया. अलका ने पीछे मुद कर देखा तोह पीछे वाला एरिया भी स्ट्रील वाल गिरा कर बंद कर दिए गया था. दोनों साइड्स पठ्रीली दीवारें थी.

बा3 को छोड़ कर बाकि के BA's ऑर्डर्स जारी करने लगे. देर नहीं लगी और जिस एरिया में अलका थी. उस एरिया की दीवारों को बहरी और से, जो कह रूम्स थे. उन्हें वाटर से भरा जाने लगा. पानी भरने के साथ hi उस पानी में करंट छोड़ दिए गया.. अलका अगर दीवारों को तोड़ भी देती है तोह इलेक्ट्रिक वाटर से वह बच नहीं सकती थी. माला हासिल करने के लिए वह अलका की जान लेने पर भी उतर आये थे..

ालक स्टील वाल को तोड़ नहीं सकती थी. ऐसा सबको लग रहा था.

जैसे hi अलका को वहां बंद कर दिए गया था. अलका को बहुत ग़ुस्सा आने लगा था. अलका खुद कुछ नहीं कर सकती थी. माला से उसी समय रेज़ निकालनी शुरू हो गयी थी. वहां भी कामर्स लगे हुए थे. पर रेज़ के निकलते hi वह बेकार हो गए.

अलका ने माला को गले से निकला तोह रेज़ ऊपर छत पर पड़ने लगी. फ़ौरन hi वहां छेड़ हो गया. अलका के हाथ में मौजूद माला की लेंथ अचानक से बहुत बढ़ गयी. अलका ने माला को ऊपर छेड़ में दिखाई दे रहे सरए में फंसाया और ऊपर चढ़ गयी.

रेज़ फिरसे निकली और दोनों दीवारों में छेड़ करती चली गयी. दीवार पार के रूम्स की दूसरी दीवारों में भी छेड़ बनती हुई आगे बढ़ने लगी. छेड़ के साथ hi पानी भी बहार निकलने लगा.. पानी की स्पीड बहुत ज़यादा थी.

देखते hi देखते वह सारा पानी उस पुरे फ्लोर पर फैलता चला गया. वहां कई एजेंट्स, आर्मी वाले और एयरपोर्ट पर तैनात वर्कर्स मौजूद थे. वह सब उस पानी की लपेट में आ गए.. सब पानी में मौजूद करंट के कारण वही गिर कर तड़पने लगे. किसी को भी चीखने का मौका नहीं मिला. हाई वोल्टेज करंट छोड़ा गया था, वह भी पानी में.. किसी को दूसरा सांस लेने की फुर्सत hi नहीं मिल सकीय.

जितनी देर में वहां की इलेक्ट्रिक सप्लाई बंद की गयी.. तब तक वहां लाशों के ढेर लग चुके थे.

बा3 : देख लिया मेरी बात न मानने का अंजाम.

बाकी सब उसकी बात सुनकर खुद के लिए फैसले पर अफ़सोस करने लगे.

उसके बाद अलका को किसी ने रोकने की कोशिश नहीं करि थी. एक प्राइवेट प्लान में बिठा कर अलका को वहां से जाने दिए गया.. अलका बड़ी शान से वहां से निकल गयी थी.





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मार्गरेट अपने कमरे में रेस्ट कर रही थी. गोली के ज़ख़्म और सफर की थकन के कारण वह बीएड पर लेती रेस्ट कर रही थी. बहुत समय से वह भाग दौड़ और ट्रैंनिंग में बिजी रही थी. बोहत काम समय उसे रेस्ट के लिए मिल पता था. जैसे मिशन उसे मिला करते थे. उसे ज़यादा समय तक रेस्ट करने का समय मिल hi नहीं पाया था कभी.

अब भी वह सो रही थी. अलका की माला से निकली एक रे मार्गरेट में समां गयी. फिर मार्गरेट की भी वही कंडीशन हुई जो अलका की हुई थी. मार्गरेट भी गुरु जी की बातें सुन रही थी. माला से निकली रे ने मार्गरेट को याद दिला दिए था. वह मार्गरेट नहीं है, वह तोह कोमल है. उसे अपनी गुज़री लाइफ बारे सब याद आता चला गया.

गुरु जी की बातें सुनी तोह खुद पर गर्व करने लगी. रपो की घुलम बनकर जो कुछ खो गयी थी. उससे कहीं बढ़कर उसने पा लिया था.

गुरु जी पांचू से एक साथ बात कर रहे थे. पर सब के लिए शब्द कहीं कहीं बदले हुए थे.

गुरु जी के जाने के मार्गरेट उठी तोह गुरु जी की ऑर्डर से ब्रेन मास्टर साडी इन्फो मार्गरेट के दिमाग में उतर चुकी थी.

मार्गरेट अब कोमल बन चुकी थी. वह पहले तोह वहीँ बीएड पर बेथ कर दोनों हाथ जोड़ कर ऑंखें बंद करके भगवन को कोठी कोठी धन्यवाद बोलने लगी.

फिर वह अपना खूंखार रूप धारण करती हुई कमरे से निकली और पूरी kothi"jo ब्रेन मास्टर का खुफ़िआ ठिकाना भी थी" वहां पर मौजूद सभी एजेंट्स का खून बहाने लगी. उसके बाद वह ब्रेन मास्टर के रूम में जा घुसी थी.





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नताशा भी अपने काले साथियों के साथ आइलैंड पर थी. बहुत से ब्लैकमैन वहां पोहंच कर आइलैंड को अपने अंडर ले चुके थे. आइलैंड को सब मिलकर कर अपने हिसाब से सेट कर रहे थे.

नताशा विज़िबल होकर दमें और जोसफ से बातें कर रही थी. मैं के सच्चे थे तोह नताशा ने खुद को उनके सामने एक्सपोज़ कर दिए था.

एकदुम्म से hi वह उठी और दोनों से एक्सक्यूज़ करती हुई अपने रूम में जा पोहंची. वहीँ वह बीएड पर जा लेती तोह अलका की माला से निकली एक रौशनी उसमे भी समां गयी.

उसके बाद फिर नताशा के साथ भी गुरु जी बातें करने लगे.. रे जैसे hi नताशा के वजूद में उत्तरी थी. नताशा को अपने पैदा होने के बाद से लेकर 1.5 साल तक का समय दिखाई देने लगा. कैसे वह अपनी माँ की गॉड में थी. कैसे वह अपनी माँ के वक्षो से लग कर दूध पि रही थी. कैसे वह सबकी आँखों का तारा थी. कैसे ने उसके जनम पर उसका नाम तारा रखा था. कैसे सब उससे बेपनाह मोहब्बत किया करते थे. 4 भाइयो की वह इकलौती बेहेन थी. उसके चाचा के तीन बेटे थे. चाचा की भी कोई बेटी नहीं थी. तारा चाचा चची के भी दिल का टुकड़ा बन गई थी.

नताशा के दुन्या में आ जाने से घर में जैसे लक्ष्मी उतर आई थी. जहाँ सब के दिलों का दर्द मिट कर रह गया था. वहीँ भगवन ने सबको बिज़नेस में इतनी तरक्की दी थी. वह संभल hi नहीं पा रहे थे...

वही एक दुश्मन ने उस घर में आई lakshmi(TARA) को उस घर से दूर कर दिए. पर भगवन की लीला वही जाने. नताशा के अपने परिवार से दूर हो जाने के बाद भी उसके परिवार का पैसो की हो रही बारिश थमी नहीं थी.

गुरु जी ने संपर्क ख़तम किया तोह नताशा भी झटके से उठ बैठी. अपने दिल पर हाथ रख कर असीम प्राप्त होने वाली शान्ति को पुरे मैं से महसूस करने लगी. वहीँ वह चीखने चिल्लाने लगी. ख़ुशी के आंसू उसकी आँखों से जारी हो गए थे.

"भगवन तेरा कोटि कोटि धन्यवाद.. तूने मुझे लावारिस नहीं किया. मेरा असली परिवार आज भी ज़िंदा है. जहाँ मुझे परवान चढ़ाया वह भी मेरा परिवार था. उसकी मौत का बदला तोह मई ले करहि रहूंगी भगवन.. पर मेरे असली परिवार की यादें मुझे लौटने के लिए मई जिंटा भी तेरा धन्यवाद करूँ, काम है"

दूर के बहार दमें और जोसफ के साथ कुछ और भी आ कर खड़े हो गए थे. वह नताशा के चीखने चिल्लाने की आवाज़ें सुनकर भागे भागे वहां आये थे.

नताशा भी अपने आंसू साफ़ करती हुई उठी और दूर खोल कर सबको देखने लगी..

दमें परेशान होक : क्वीन! सब ठीक है न. आप रो क्यों रही थी.

नताशा बेपनाह ख़ुशी के साथ : दमें! मैंने सच्चाई का साथ दिया hi था कह भगवन ने मुझे बहुत बड़ा इनाम दे दिए. अंडरवर्ल्ड ने मेरे जिस परिवार को ख़तम किया है. वह मेरा असली परिवार नहीं था. जब मैं डेढ़ साल की थी. मेरे परिवार के एक दुश्मन ने मुझे मेरे परिवार से अलग कर दिए था. वहीँ से मैं अपने बाद वाले परिवार में जा शामिल हुई थी.

सब एक साथ : क्वीन! कोंग्रटुलतिओं. नताशा भी ख़ुशी ख़ुशी सबको जवाब देने लगी.

जोसफ : क्वीन! आपके फेस का ग्लो भी बहुत बढ़ गया है.

नताशा : हाँ! भगवन की कृपया हो गई है मुझपर.. नताशा अपने चेहरे पर हाथ फेरते हुए बोली..

नताशा : दमें! मुझे इस आइलैंड पर एक मंदिर भी बनवाना है. यहाँ कुछ लोगों को रहने के लिए भी रखा जाएगा.

दमें : हाँ! क्यों नहीं! ज़रूर क्वीन! हम यहाँ पर एक शानदार मंदिर बनाएंगे.





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ऐसा hi कुछ सन षिमुना के साथ भी हुआ था. एक रे उसके अंदर भी समां गयी थी. उससे पहले hi गुरु जी ने उसे किसी के शरीर से निकलने पर मजबूर कर दिए था. षिमुना जान नहीं पायी थी.

गुरु जी : पुत्री! तुम्हारे meesa(pita) के साथ विश्वासघात होना नियति का hi एक खेल था. लोजान का तुम्हारे मीसा की जगा किंग बनना और तुम्हारा वहां से बच कर धरती पर आना कोई संयोग नहीं था पुत्री. दक्ष का और तुम्हारा मिलान सब नियति का रचा एक खेल था. धरती पर और तुम्हारे गृह पर दक्ष का सम्राट बनना सब नियति के रचे खेल का हिस्सा हाँ.

तुम बहुत भाग्यशाली हो पुत्री, जो नियति ने तुम्हे सम्राट के साथ जोड़ दिए. वह भी सबसे पहले. तुम पांचू में सबसे पहले सम्राट की पूरी तरह से हो चुकी हो. वर्ण पहला नंबर अलका का था.

खुले विचारों वाली होते हुए भी तुमने बड़े प्रेम से सम्राट को पाया है.

तुम्हारे लिए एक खुशखबरी है पुत्री : तुम्हारे गृह से बहुत से निमंस धरती पर आ चुके हाँ. पर तुम धयान नहीं दे पायी. जब भी तुम शरीर बदलती हो, वह एक जान जाते हाँ, तुम किस जगा पर हो. पर अब से वह तुम्हे कभी नहीं जान सकेंगे. अब से तुम्हे छुपे रहने की कोई ज़रूरत नहीं है. तुम सबकी तरह से कहीं भी घूम फिर सकती हो.

गुरु जी कुछ और बातें करने के बाद षिमुना के पास से भी चले गए.

षिमुना सोच भी नहीं सकती थी. उसे ऐसी खुशखबरी सुनने को मिलेगी. दक्ष का साथ उसे बेहद पसंद आया था. पर वह हमेशा के लिए दक्ष की हो सकेगी. ये कभी नहीं सोचा था. वह धरती की नहीं थी. अपने प्लेनेट को भी हमेशा के लिए नहीं छोड़ सकती थी. वहां उसका पूरा परिवार था. कैसे सब को छोड़ कर वह दक्ष की हो सकती थी. पर अब ये जान कर वह बहुत खुश थी. दक्ष के सम्राट बन जाने से न केवल वह दक्ष की पत्नी बनेगी. गुरु जी की बातों से उसे ये भी पता चल गया था. एक दिन उसके प्लेनेट पर सरमात का राज होगा. मतलब लोजान का खेल एक दिन ख़तम हो के रहेगा.

षिमुना उठी और उठ कर नाचने लगी. आज वह बहुत खुश थी. धरती पर आने के बाद आज उसे सुख मिला था. वर्ण अपने परिवार की चिंता में घुलने लगी थी वह. दक्ष का साथ भी उसकी बेचैनी को काम नहीं कर प् रहा था.

पर अब उसे किसी किसम का कोई ग़म नहीं रहा था. उसे दक्ष मिला था एक सम्राट के रूप में. उसे अपने प्लेनेट का किंग भी सम्राट के रूप में मिल गया था. ये भी उसे पता चल गया था. आज वह अपनी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी ख़ुशी प्राप्त होने पर झूम उठी थी.




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दिल्ली के एक स्कूल में कुछ टेर्रोरिस्ट्स घूम आये थे. 12 टेररिस्ट्स थे. जिन्हो ने पुरे स्कूल को अपने अंडर ले रखा था.

देश भर में ये खबर फेल चुकी थी. मीडिया द्वारा पूरा देश ये खबर जान चूका था. 1000+ स्टूडेंट्स विथ टीचर्स टेर्रोरिस्ट्स के कब्ज़े में थे.

पुरे स्कूल में पुरे देश में खौफ ो ह्रास पहला हुआ था. टेर्रोरिस्ट्स ने एक मेल टीचर और दो गार्ड्स को जान से मार दिए था. उनकी डिमांड थी अपने कुछ साथियो को जेल से आज़ाद करवाने की. इसलिए उन्हों ने दिल्ली शहर के सबसे बड़े स्कूल पर कब्ज़ा जमा लिया था.

उसी स्कूल में एक फीमेल टीचर भी थी. नाम था उसका संजना...

संजना उस समय स्टाफ रूम में थी. जब टेर्रोरिस्ट्स स्कूल में घुसे थे. बी चांस वह एक खिड़की के पास बैठी थी और बहार hi देख रही थी. जैसे hi उसने तेस्सोरिस्ट्स को देखा तोह फ़ौरन hi स्टाफ रूम से निकल कर ऊपर वाले फ्लोर पर बने स्टोररूम में जा घुसी थी.

संजना(20) एक अनाथ लड़की थी.. एक अनाथ आशाराम में रह के जवान हुई थी. काबिल थी तोह पढाई के साथ साथ टीचिंग भी कर रही थी. हिम्मतवाली लड़की थी. सबसे पहले तोह उसने अपनी जान बचाई. जब टेर्रोरिस्ट्स ने पुरे स्कूल पर कब्ज़े जमा लिया तोह वह सोचने लगी. कैसे वह इन सब को ख़तम कर सकती है. कैसे वह बच्चू को बचा सकती है.

संजना फाइटिंग नहीं जानती थी. पर देश के लिए, अपने स्कूल के स्टूंडेंट्स के लिए "जिन्हे वह अपने hi बच्चे मानती थी" कुछ कर सकती है. वह अकेली थी, उसका पूरी दुन्या में कोई नहीं था. अनाथ होते हुए भी अच्छे संस्कारो वाली लड़की थी.

अब टेर्रोरिस्ट्स के स्कूल में घुस आने पर उसकी और सबकी जान पर बन आयी तोह वह खुद की जान को भूल कर अपने स्टूडेंट्स, अपने बच्चू के लिए कुछ कर गुजरने को बेचैन होने लगी..

समय बीतने लगा पर वह कुछ भी सोच नहीं पायी. कुछ भी प्लान नहीं कर पायी. आखिर उसने सोच लिया, जान जाती है तोह जाए. वह कुछ न कुछ करने से अब पीछे नहीं रह सकती.

जैसे hi वह स्टोररूम का दूर खोल कर बहार जाने को हुई.. उसी समय वह खुद पर कण्ट्रोल भूल गयी और वहीँ फर्श पर लेट गयी. उसी समय अलका की माला से निकली एक रे संजना में समां गयी..

संजना नींद की सी कैफियत में गुरु जी को देखने, सुनने लगी..

गुरु जी : सबसे पहले बहुत बहुत बधाई हो पुत्री. तुम अनाथ नहीं हो. तुम्हारा बहुत बड़ा परिवार है. मेरे जाने के बाद तुम अपने परिवार के सभी सदस्य को देख सकोगी.

तुम्हारा जनम एक महान कार्य के लिए हुआ है पुत्री. जल्द hi तुम सब जान जाओगी. अब उठु पुत्री और अपने बच्चू को बचाओ. अब से तुम कमज़ोर लड़की नहीं हो. उठो और जाओ अपने बच्चू को बचाओ.

गुरु जी चले गए तोह संजना भी ख़ुशी से झूमती हुई उठ कड़ी हुई. अपने हथु को देखने लगी. अपने चेहरे को छूने लगी. खुद में वह बहुत से बदलाव महसूस कर पा रही थी.

अभी खुद पर धयान देने का समय नहीं था. उसे बिना देरी के अपने बच्चू को बचाना था. पहले जो दर था. समझ में नहीं आ रहा था. कैसे अपने स्टूडेंट्स को बचाये. वहीँ अब उसकी हिम्मत हज़ारों गुना बढ़ गयी थी. बहुत कुछ वह समझने लगी थी. बहुत से प्लान बनते जा रहे थे.

स्टोररूम के अंदर पड़े सामान में से उसने एक लोहे का रोड उठाया और दूर खोल कर बहार देखने लगी. उसे बच्चू के रोने की आवाज़ तोह सुनाई दे रही थी पर वह कोई भी टेर्रोरिस्ट्स उसे दिखाई नहीं दिए था.

क़दमों की चाप को दबाये वह बहार निकली और जिस दिशा से बच्चू के चीखने की आवाज़ें सुनाई दे रही थी. उस दिशा में आगे बढ़ने लगी.

संजना के हाल रूम में पोहंची तोह अंदाज़ा हुआ अंदर कोई टेर्रोरिस्ट्स मौजूद है. सनजना हाल रूम के दूर के साथ hi रुक कर दूर को हल्का सा नॉक कर गयी. चरों और वह पहले भी देख चुकी थी. अपने हाथ में पकडे रोड को उसने मज़बूती से थाम लिया था.

खटका होने पर अंदर से आवाज़ आई

"देख कोई बहार तोह नहीं है"

क़दमों की आवाज़ आई तोह संजना सावधान हो गई. लोहे के रोड पर उसकी ग्रिफ्ट और भी सख्त हो गयी. जैसे hi एक टेररिस्ट बहार झाँकने लगा. संजना ने पूरी ताक़त से उसके सर पर वह रोड मार दिए. वह चीख भी न सका. उसके सर के टुकड़े हो गए थे. संजना ने हैरान होने में समय वास्ते नहीं किया. फ़ौरन गन उठा कर अंदर घुसती हुई दो और टेर्रोरिस्ट्स को शूट कर गयी. गन चलनी उसने नहीं सीखी थी. ये सब गुरु जी की दें थी. माला से निकली रौशनी "जो रे संजना में समय थी" उसका कमल था.

सब बच्चे चीख पड़े. संजना हाल में देखने लगी. उसे कोई और दिखाई नहीं दिया.

संजना : डरो मत मेरे बच्चू. तुम्हारे लिए तुम्हारी टीचर अपनी जान भी दे दे गई.

सब दूर को अंदर से लॉक कर दो.

संजना ने दूसरी गन उठा कर अपने गले में डाली तीसरी गन वही पड़ी रहने दी और भाग कर बहार निकल पड़ी.

दूसरे टेर्रोरिस्ट्स फायरिंग की आवाज़ सुनकर अपने साथियो से राब्ता कर रहे थे. पर वह मरने के बाद रिप्लाई नहीं दे सकते थे. ऊपर 3 hi थे. बाकि सब नीचे थे.

संजना स्टैर्स पर पोहंची और एक साइड कड़ी होकर निचे की सुन गन लेने लगी. उसे निचे बहुत शोर सुनाई दे रहा था.

बहार मौजूद मीडिया की गाड़ियों ने भी उसे कैप्चर कर लिया था. फ़ौरन hi संजना टीवी में दिखाई देने लगी. सब उसे देख कर हैरान भी हुए और परेशान भी हुए. कुछ को अपने बच्चू की ज़िन्दगी संजना में नज़र आने लगी तोह कुछ दर गए. कहीं संजना के कारण उनके बच्चे मारे न जाएँ.

संजना ने निचे फायर करके चीखते हुए कहा

संजना : आज तुममे से कोई भी मेरे हथु से ज़िंदा बच कर नहीं जा पायेगा. आज सबका गन्दा खून उसके शरीर से निकल बहार करुँगी..

एक टीचर ने संजना की आवाज़ पहचान ली.. वह बोली संजना हमें बचा लो प्ल्ज़.

टेर्रोरिस्ट्स लीडर : तोह तुम्हारा नाम संजना है. कहाँ थी तुम अब तक. कहाँ चुप के बैठी थी तुम. तुम अकेली हमारा कुछ नहीं बिगड़ सकती. सीधे से खुद को हमारे हवाले कर दो.

संजना : एक भर्ती नारी तुम जैसे हज़ारों कुत्तों के लिए काफी है. मुझे काम मत समझना. मैं एक टीचर hi नहीं हों. मैं अपने स्टूंडेंट्स की माँ भी हों. उनकी रक्षा करते हुए अपनी जान भी दे सकती हों.

सनजना ने फिरसे निचे फायर किये और पैरों से शूज निकल पर पीछे को भाग गयी. वह जानती थी, निचे जाने का एक रास्ता और भी है. संजना एक साइड में सबका धयान लगा कर दूसरी और से निचे पोहंची और फिर चंडी देवी बनते हुए टाक टाक कर एक एक टेररिस्ट को शूट करने लगी. बाला की फुर्ती आ गई थी संजना में.

बहुत भयनकर फायरिंग होने लगी थी. टीचर्स और बच्चे दहशत में आते हुए चीखने चिल्लाने लगे थे. संजना अकेली थी. इसलिए भी उसे कण्ट्रोल में करने के लिए किसी बच्चे या स्टूडेंट को ढाल बनाने की नहीं सोची थी किसी टेररिस्ट ने.

यही बात उनके लिए शिकस्त का सबब बानी.. संजना की फुर्ती के आगे वह सब एक एक करके मरते चले गए.

आखरी दो बचे तोह वह संजना को सामने आने के लिए एक बच्चे को मारने की धमकी देने hi वाले थे.. संजना दौड़ कर, कूद कर, फर्श पर पलटी कहते हुए दोनों के सर में एक एक बुलेट घुसा गयी.

इसके साथ hi संजना का "टेर्रोरिस्ट्स मिशन" भी पूरा हो गया.

संजना : खुश हो जाओ बच्चू. अब तुम सब सेफ हो..

सब ख़ुशी से रोने लगे थे. सब संजना से लिपटने लगे थे. पूरा स्टाफ भी संजना के गिर्द इकठा हो चूका था. ऊपर से भी बच्चू को निचे लाया जाने लगा.

बाहर मौजूद मीडिया समेत सबको खबर हो गई थी. संजना ने सारे टेर्रोरिस्ट्स को ख़तम कर दिए है. गेट खोला गया तोह सब भागते हुए स्कूल में दाखिल होने लगे.

बच्चू के पेरेंट्स ख़ुशी से रोने लगे थे तोह मीडिया संजना को अपने अपने चैनल पर दिखने लगी.

सब को गर्व होने लगा था, देश की इस बहादुर बेटी पर. जिसने अकेले hi सारे टेर्रोरिस्ट्स मार कर हज़ारों बच्चू को बचा लिया था.





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रुपाली : विक्रम तुम सबके साथ दिल्ली वाली कोठी पर पोहंचो. मैं वहीँ आ कर तुमसे मिलती हों.

सब रुपाली की बात सुनकर हैरान रह गए थे.

विक्रम : सतीश और अलका की अभी तक कोई खबर नहीं आई है रुपाली. और तुम जाने की बात कर रही हो.

रुपाली : खबर अब आएगी भी नहीं. मुझे नहीं लगता अब अलका या फिर सतीश ज़िंदा भी होंगे. ज़िंदा होते तोह अब तक लौट चुके होते..

ऋचा : माँ! क्या हम भाई और भाभी को छोड़ के चले जाएँ.

रुपाली : तुम दोनों को वापिस ला सकती हो.

ऋचा : no माँ! मैं कैसे वापिस ला सकती हों. मैंने तोह वह गुफा भी नहीं देखि.

विनय : माँ आप सतीश भाई के ना आने पर दुखी नहीं दिखाई दे रही.

विक्रम : रुपाली सतीश हराम बीटा है. उसके वापिस आने तक तोह हमें रुकना hi होगा.

परची ; भगवन न करे अगर भाई कोई खतरा बन गया है तोह हम कैसे उसे छोड़ कर जा सकते हाँ. हमें उसके लिए कुछ करना चाहिए.

रुपाली : विक्रम! तुम अपने आदमियों को यही छोड़ कर चले जाओ. सतीश ज़िंदा हुआ तोह लौट आएगा.

विक्रम : रुपाली तुम सतीश के लिए मुझे दुखी नहीं लग रही. कैसे हो सकता है. एक माँ अपने बेटे के लिए------

रुपाली : (ग़ुस्से से) विक्खक्रममम!! अपनी हद में रहा करो. जितना कहा जाए, सिर्फ उतना hi किया करो. अगर उसे खतरा बन hi गया है तोह तुम, मैं या कोई और कुछ कर सकता है क्या. जो सोच कर हम सब ने ये सारा प्लान किया था. सतीश के साथ कुछ भी हो सकता था. क्या हम इस बात से अनजान थे.

विक्रम पजल होने लगा : ठीक है मैं जा रहा हों.

रुपाली : ऋचा तुम मेरे साथ चलोगी.

ऋचा हैरान होक : पर कहाँ माँ.

रुपाली : क्या तुम्हारा पहले से जानना ज़रूरी है. मैंने कह दिए मेरे साथ चलना है तुम्हे तोह क्या मेरा इतना कह देना तुम्हारे लिए काफी नहीं है.

ऋचा : यस माँ! सॉरी माँ.. आगे से ऐसा नहीं बोलूंगी..





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दो दिन के अनथक सफर के बाद मैं इंडिया पोहंच चूका था.

मैं बरैली शहर में था.. मुझे पोहंचे दो घंटे हो चुके थे. टेलिपाथी द्वारा मैं एक खली कोठी को अपना ठिकाना बना चूका था. कोठी के मालिकान लंदन में थे और कोठी की देखरेख के लिए एक चौकीदार रखा हुआ था. उसकी पत्नी भी साथ hi रहती थी.

मैंने दोनों को बहुत से पैसे देकर कुछ दिन रहने की बात कर ली थी.

मैं एक कमरे में घुसा नाहा धो कर फ्रेश हो चूका था. चौकीदार मेरे लिए कपडे और खाने पिने का सामान ला चूका था. वह बहुत खुश था. एक साल में जितने पैसे वह कमा रहा था. मैंने उससे बढ़कर उसे दे दिए थे.

खाना खा के फ्री हुआ तोह उसी समय कोठी के गेट पर गाडी के हॉर्न की आवाज़ सुनाई देने लगी. छुअकीदार को मैं पहले hi बता चूका था. मेरे मेहमान आ रहे हाँ.

कुछ देर में मेरे मेहमान मेरे सामने थे.

मेरे मेहमानो में मेरी चची रुपाली और ऋचा शामिल थी. रुपाली पहले तो मुझे देख कर नक् सिकोड़ने लगी. मैं उसके दिमाग में घुस के बोलै.

दक्ष : साली, रंडी, कुत्तिया अपने मालिक को भी नहीं पहचान पायी हो क्या.

रुपाली एकदुम्म से मेरे पैरों में गिर पड़ी.

रुपाली : मालिक! मेरे मालिक! आपने मुझे अपने दर्शन करवा दिए. मेरे तोह भाग hi खुल गए.

दक्ष : तेरी बेटी मेरे बारे में कुछ नहीं जानती क्या.

रुपाली चीख कर : रीइचछा! पैरों में पद मेरे मालिक के.

ऋचा हैरान होकर कभी मुझे तोह कभी अपनी माँ को देखने लगी

रुपाली : सुना नहीं तुमने मैं क्या कहा.. पैरों में गिर मेरे मालिक के.

ऋचा समझी मैं कोई महान पुरुष हों. वह भी अपनी माँ के तरह से मेरे पैरों में गिर पड़ी.




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आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..


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थैंक्स भाई.. नेक्स्ट पोस्टेड अपडेट में बहुत सी बातों का खुलासा कर दिए है. कीप रीडिंग ंद एंजोयिंग

थैंक्स

देखते हाँ आगे चल के क्या देखने को मिलता है. साथ बने रहे ✨

थैंक्स... शॉकिंग तोह हर अपडेट होगी भाई

शुक्रिया भाई

थैंक्स ा लोट..

साथ बने रहने के लिए दिल से धंन्यवाद :थैंक्यू:
 
:thank_you:

डूबने का समय आये तोह खुद को बचने के लिए हाथ पाऊँ चलने hi पड़ते हाँ. बुरे लोग भी कुछ ऐसा hi कर रहे हाँ. मगर भूल रहे हाँ. बुराई का अंत एक न एक दिन होक hi रहता है.

जब तक खुद की गांड न फटे, गांड फटने के दर्द का एहसास नहीं होता. :ेविलौगह: गेब्रियल भी ऐसी सोच रखने वाला व्यक्ति था.

ऑफ़ कोर्स वह वहां अलका के लिए जा रही है.

मार्गरेट के साथ सही नै किया गया था. कैसे फिर वह खुद को याद करने के बाद किसी को माफ़ कर सकती थी. बदला लेने उसका हक़ भी बनता है.

थैंक्स फॉर थे कमेंट भाई..
 
:thank_you:

ब्रेन मास्टर को लगा था, सम्राट सबके दिमाग में घुस चूका है. इसलिए उसने सबको मार दिए.

अब आप भी जान सकते हाँ भाई. नेक्स्ट पोस्टेड अपडेट में डिटेल मौजूद है. :)

और भी बहुत कुछ अनएक्सपेक्टेड देखने को मिलने वाला है आपको भाई.

लंका तो लगनी hi थी. मार्गरेट कोमल थी. उसका ब्रेन वाश करके उसे एक हिन्दू नारी से क्रिस्चियन बना दिए. कैसे सहन कर पति. तबाही तोह अब वह मचाएगी hi.

:डी

:अप्प्रोवे:

बाओ वाले ऐसे hi तोह किया करते हाँ. अपने मतलब के लिए लोगों को उठवाते हाँ. उनका ब्रेन वाश करके उन्हें अपने मतलब के लिए इस्तेमाल करते हाँ.

गुरु जी वह जानते हाँ जो दक्ष नहीं जनता.. दक्ष के साथ गुज़रे समय में जो हुआ था. उसके चलते भी बहुत कुछ दक्ष के साथ हो सकता है. दक्ष की सोच हो सकता है समय के साथ जल्दी न बदले.. इसलिए भी गुरु जी दक्ष को गाइड कर रहे हाँ.

बहुत बहुत शुक्रिया भाई..
 
सम्राट और क्वीन के नाम का डंका पूरी दुन्या में बजने लगा. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था. अब हुआ है तोह बुरा करम करने वाले परेशान हो उठे.

गेब्रियल ने माला को हलके में लिया. पर माला ने गेब्रियल को बहुत भरी चोट पोहंचा दी.

मार्गरेट भी कोमल नाम की एक लड़की निकली. उसे अपना अतीत याद आया तोह ग़ुस्से में आ कर ब्रेन मास्टर पर टूट पड़ी.

ट्विस्ट तोह अब आते hi रहेंगे भाई..

शक्रिया भाई बेहतरीन कमेंट और साथ बने रहने के लिए.. ✨
 
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