Episode:28
कोमल : र्रिचड! बहुत घर बर्बाद किये तूने, रपो को बिल्डप करने के लिए बहुत सी ज़िन्दगियों से खेले हो तुम. ब्रेन मास्टर! हँ ब्रेन मास्टर हो तुम. बड़ा नाम कमाया है तुमने. अनगिनत घर उजाड़ कर नाम कमाया है तुमने. अमेरिकन सर्कार तुममे बहुत खुश है. आगे चल कर तुम और भी कई घर उजाड़ कर रपो को और भी स्ट्रांग बना देते. मेरी hi जैसी और कई बेटियों को उसके परिवार से अलग करते. ऐसे hi तुम रपो को पावरफुल बनाते.
पारर...
अबसे ऐसा नहीं होगा.. देखा कैसे तुम्हारी बरसों की म्हणत से कड़ी की गयी एम्पायर की धज्जियाँ उड़ रही हाँ मैं. देखो ब्रेन मास्टर देखो..
ब्रेन मास्टर तोह केवल चीख hi रहा था. जहाँ पहले कोमल की मिन्नतें कर रहा था. अब वहीँ कोमल को गलियां दे रहा था. उसे सब बंद देने के लिए बोल रहा था.
ये सच था, रपो जितनी स्ट्रांग र्रिचड के कारण हुई थी, उतना कोई भी रपो को पॉवरफुल नै बना सका था. र्रिचड बेस्ट ब्रेन था अपने देश का. रंडी का बचा होने के बावजूद भी वह अपने देश के लिए बहुत कुछ कर गया था.
कोमल ऐसे hi वहीँ बैठी बैठी तीनो अड्डों को ब्लास्ट कर रही थी. चाहती तोह एक hi बार में सभी हेडक्वार्टर ब्लास्ट कर सकती थी. पर कोमल ऐसा करना नहीं चाहती थी. अपने hi जैसे और भी कैयो को वह बचा लेना चाहती थी.
उसी समय तीनो मास्टर्स की और से मैसेज आने लगा. कोमल को पूरा सिस्टम्स समझने में देर नहीं लगी थी. वह ब्रेन मास्टर बनकर तीनो मास्टर्स से वहां की surat-e- हाल जान्ने लगी. ब्रेन मास्टर को बहुत करीब से जाना था उसने.. ब्रेन मास्टर के hi अंदाज़ में वह तीनो मास्टर्स के साथ बात करने लगी.
तीनो मास्टर्स को अपने सरे एजेंट्स के साथ तीन और अलग अलग आइलैंड पर पोहचने का आर्डर दे दिए.. अगले आर्डर तक कोई भी अपनी मर्ज़ी से कुछ न करे.
कोमल : कैसा लगा मेरा खेल डिअर सर!
ब्रेन मास्टर : तू बहुत बुरी तरह से पछताएगी कुत्तिया. तूने मुझे बर्बाद नहीं किया है. तूने अमेरिकन सर्कार को ललकारा है. उनके ग़ज़ब को दावत दी है. तू नहीं बचेगी कुत्तिया, तेरे साथ साथ तेरा परिवार और तेरा देश सब के साथ बहुत बुरा होने वाला है.
कोमल : हाहाहा! रस्सी जल गयी पर बल नहीं गया. ये बल कभी नहीं जायेगा. ऐसे hi हो तुम लोग. कोई न, सरे कास बल मैं निकल दूंगी. अब तोह तुम सब मेरे खुले दुश्मन बन बैठे हो. सोचा नहीं था, कभी तुम्हारे खिलाफ भी मुझे जाना पड़ेगा. मैं तोह बरसों से देश सेवा करती चली आ रही थी. कितनी खुश थी मैं अपने देश अमेरिका की सेवा करके. पर नहीं जानती थी, मैं तो एक घुलम बना दी गयी थी. मेरे देश तोह अमेरिका था hi नहीं. मैं तोह एक इंडियन नागरिक थी. मेरा चेहरा, मेरी पहचान तक बदल दी गयी थी. कितने संगदिल हो तुम लोग. अपने मतलब के लिए कितना घिनोना खेल खेल जाते हो. मैं हिंदी कैसे जानती हों, इसपर तुम ने कहा था मैं एक एजेंट हों तोह बहुत सी भाषाएँ मुझे सिखाई गई थी.
एक लम्बी सांस लेते हुए : अब मैं तुम्हे सबको अपनी संगदिली दिखाओगी. मुझे मेरे देश की सेवा से हटा कर तुमने मुझे अपना घुलम बनवा कर अपने देश के लिए काम करने पर मजबूर कर दिए. तुमने सबत कर दिए र्रिचड! तुम सच में hi एक रंडी के hi बच्चे हो. एक भर्तीअ नारी होने के नाते, अपने देश की सेवक होने के नाते मैं कसम कहती हों, अपने देश की सेवा करते हुए मैं रपो को कभी फिरसे खड़ा नहीं होने दूंगी. जीते जी रपो को कभी भी पॉवरफुल बनने नहीं दूंगी.
दोनों खंजरों से कोमल फिर ब्रेन मास्टर के पुरे शरीर के छोटे छोटे टुकड़े करने लगी. बड़ी आग रेहकने लगी थी कोमल के सीने में. ब्रेन मास्टर का कीमा बनाते हुए उसे बेहद शांति प्राप्त होने लगी थी.
पुरे सेटअप को डिस्ट्रॉय मोड पर सेट करने के बाद, ब्रेन मास्टर की लाश पर थूकने के बाद कोमल वहां से निकल पड़ी.
ब्रेन मास्टर के इस ठिकाने के बारे में कोई नहीं जनता था. केवल वही जानते थे. जिन्हो ने र्रिचड को ब्रेन मास्टर बनाया था.
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NO:4 जब सरकारी ईमारत से निकल कर रोड्स पर चलने लगी थी. उसी समय बाओ के स्पेशल ट्रैंनिंग सेण्टर में अलका एक रूम में बैठी हुई थी. उसके सामने उस ट्रैंनिंग सेण्टर के 3 बड़े इंस्ट्रक्टर्स बैठे हुए थे.
एक इंस्ट्रक्टर : अलका मैडम! आपकी प्रोग्रेस बहुत बढ़िया जा रही है. हमें आपकी क़ाबलियत देख कर बहुत ख़ुशी हुई. बहुत जल्द आप ट्रैंनिंग पूरी करके अपने देश लौट सकेंगी. वहां रहते हुए आप अपने देश की सेवा करते हुए कभी कभी हमारे काम भी आ जाया करना. आखिर इंडिया से हमारे ब्रद्राना रिलेशन्स हाँ. पास्ट में भी हमने बहुत बार इंडिया के लिए, रॉ के लिए अपनी खिदमात पेश की हाँ. आप को भी ट्रैंनिंग देकर हम एक एजेंट बनाने जा रहे हाँ. जिससे आप अपने देश की सेवा कर सकेंगी. और हम इंडिया को एक और बेस्ट एजेंट तोहफे में देकर अपने भाई होने का साबुत देंगे.
दूसरा इंस्ट्रक्टर : अलका मैडम! आप बहुत खुशकिस्मत हो जो आप इंडिया में पैदा हुई हाँ. इंडिया वर्ल्ड के बेस्ट कन्ट्रीज में से एक कंट्री है. बहुत से अज़ीम एजेंट्स इंडिया में पैदा होते आये हाँ. उन अज़ीम एजेंट्स ने हमेशा hi आपके देश को पहले से बढ़कर स्ट्रांग बनाने की कोशिश की है. अबसे आप जैसी एक ग्रेट फीमेल एजेंट भी अपने देश की सेवा करेगी. अपने देश का नाम और भी ऊंचा करेगी.
तीसरा इंस्ट्रक्टर : अलका मैडम! बहुत काम मुझे आपके जैसे स्टूडेंट्स को सीखने का मौका मिला है. सीखने के लिए तोह हज़ारों स्टूडेंट्स आते रहते हाँ. पर किसी किसी को hi सीखने में मज़ा आता है. बरसों बाद मुझे आप जैसी कोई मिली है. आपकी ट्रैंनिंग दे कर मैं खुद को बेहद खुशनसीब समझता हूँ. बस इतना hi कहूंगा आपसे, अपने देश की सेवा करते समय कभी हमें मत भूल जाना..
अलका जिसे बाओ ने अपने अंडर लेते hi ब्रेन वाश करने के बाद अपने साथ मिला लिया था. अलका का ब्रेन पूरी तरह से वाश नहीं हो सका था. ये बात उनके लिए हरणकूं थी. फिर भी जितना ब्रेन वाश हो सका.. करने के बाद अलका को प्रोटोकॉल के साथ ट्रैंनिंग दी जाने लगी थी. मीठी मीठी बातों से उसे अपने साथ मिलाया जा रहा था.
अलका भी उनकी मीठी मीठी बातों के असर में आती जा रही थी. पहले उसे कुछ हैरानगी हुई थी. अपने देश से यहाँ जिस अंदाज़ में उसे लाया गया था. अलका ने सख्त नाराज़गी का इज़हार किया था. ये टोटली ब्रेन वाश न हो पाने के कारण था. बाद में रेगुलर मीठी मीठी बातें और मिल रहे सम्मान के चलते अलका ठंडी पद गयी थी. जैसी ट्रैंनिंग उसे दी जा रही थी. ऐसा सब उसने पहले कभी नहीं सोचा था. अब ट्रैंनिंग के साथ साथ उसे देश सेवक के रूप में ढाला जा रहा था. अलका भी खुद को इस फील्ड में इन् देखते हुए खुश थी. दक्ष से मोहब्बत में धोका खाने के बाद उसके लिए टाइम निकलना बहुत मुश्किल हो जाया करता था. बार बार दक्ष के साथ बीते लम्हे उसकी आँखों के सामने आ जाया करते थे. पढाई के साथ साथ वह पेटिंग में खुद को गुम्म करने लगी थी.
पारर.....
पर अब उसे ट्रैंनिंग के बाद एक एजेंट बनकर अपने देश की सेवा का मौका मिलने जा रहा था तोह अलका बहुत खुश थी. एक तोह हार्ड ट्रैंनिंग के कारण उसे दक्ष को सोचने का मौका hi बहुत काम मिल रहा था. दूसरे उसके अंदर की उदासी भी काम हो रही थी. पहले वह एक कोमल बदन वाली लड़की थी. अब वह भी एक फौलाद बन रही थी. उसकी सोचें भी बदल रही थी.
ब्रेन वाश किये जाने के कारण उसकी सोच में बाओ के लिए वफादारी भी आने लगी थी.
तीनो इंस्ट्रक्टर्स की बातों के जवाब में अलका बोली.
अलका : जैसे मुझे यहाँ पर लाया गया था, पहले तोह मुझे सब बहुत गलत लगा था. बूत बाद में जैसी ट्रैंनिंग मुझे दी जाने लगी है. जैसा बर्ताव मेरे साथ किया जा रहा है. जितना सम्मान मुझे दिए जा रहा है. उसके लिए मैं दिल से आप सब को थैंक्स कहना चाहूंगी. आप सब के बारे में मैंने कई अलग अलग तरह की बातें सुनी थी. पर यहाँ आने के बाद, आप सबसे मिलने के बाद मुझे मेरी सोचों पर हंसी आती है. आप सब बहुत अच्छे हाँ. मुझे मेरे देश की सेवा के लिए तैयार कर रहे हाँ. अपने मतलब के लिए आप कुछ भी नहीं बोल रहे हाँ. कैसे फिर मैं ट्रैंनिंग के बाद आप सब को निराश कर सकती हों. जिससे भी थोड़ा सा रिलेशन बन जाए, उसके काम आना तोह फिर बनता hi है. मैं कभी भी आप सब को नहीं भूलूंगी.
तीनो इंस्ट्रक्टर्स एज्ड थे. फिर भी अलका को बहुत सम्मान दे रहे थे. अब अलका की बातें सुनी तोह उठ खड़े हुए और सलूट करने लगे.
"मैडम आप सच में बहुत ग्रेट हाँ. हमारा जितना भी वक़्त आपके साथ गुज़रेगा, हम हमेशा इस वक़्त को याद करते रहेंगे"
अलका भी उठ कड़ी हुई थी. कुछ देर की और बातों के बाद वह रूम से बहार निकलने लगे तोह उसी समय पर सेण्टर के बहार शोर की आवाज़ सुनाई देने लगी. अलका के मामले में सबको सावधान कर दिए गया था. कुछ भी हो, उन्हें डिस्टर्ब न किया जाए. इसलिए NO:4 से रिलेटेड कोई भी खबर उन तक नहीं पोहंचाई गयी थी.
अब शोर हुआ तोह सबके साथ साथ उन्हें भी खबर मिल गयी. फ़ौरन hi अलका को एक रूम में जाने का कह दिए गया. अलका एक अच्छे स्टूडेंट्स की तरह OK बोल कर अपने रूम की और बढ़ गयी.. वर्ण शोर की आवाज़ सुनकर उसके अंदर भी सब जान्ने की बेचैनी पैदा हो गयी थी.
तीनो इंस्ट्रक्टर्स आगे गेट की और बढ़ने लगे.. जैसे hi गेट से कुछ फैसले पर पोहंचे, गेट खुलता चला गया. दोनों ये देख कर हैरान रह गए. गेट को खोलने वाला कोई भी गेटकीपर, खुल रहे गेट के साथ नहीं था. गेट खुद से खुल रहा था.
तीनो एक दूसरे को देख कर फिरसे गेट की और देखने लगा.. NO:4 के पीछे अपने hi देश के कई सैनिक उन्हें दिखाई देने लगे. ऊपर 2 हेलिकोप्तेर्स भी उड़ रहे थे. वह बड़े हैरान हुए.
NO:4 चलती हुई इंस्ट्रक्टर्स के पास से गुज़रती चली गयी. तीनो इंस्ट्रक्टर्स NO:4 को रोक देना चाहते थे. क्यूंकि NO:4 का रुख अलका के रूम की और था. पर NO:4 के पीछे आने वळून ने उन्हें रोक दिए.. पुरे ट्रैंनिंग सेण्टर में सन्नाटा छ गया था. जिस जिस ने भी गेट को खुलते देखा था, वह सब अपनी ट्रैंनिंग छोड़ कर NO:4 को देखने लगे थे.
NO:4 अलका के रूम के दूर पर पोहंची तोह दूर खुद से खुलता चला गया. अब माला फिरसे चमकने लगी थी.
अलका जो अपने रूम में एक चेयर पर बैठी हुई एक बुक उठा कर रीड करने जा रही थी. दूर के खुलने तक वह शोर नहीं सुन पायी थी. रूम साउंडप्रूफ था. जैसे hi दूर खुला. अलका NO:4 को देखने लगी. प्रश्न भरी नज़रों से NO:4 को देखने लगी. उसी समय अलका की नज़र माला पर पड़ी तोह बस उसकी नज़र माला पर hi ठहर गयी..
माला के सभी डेन अब चमकने लगे थे. सबसे अलग अलग कोर्स की रेज़ निकलने लगी थी. NO:4 के रूम में घुसते hi दूर खुद से लॉक हो गया था. रूम के अंदर के सभी कामर्स और देवीकेस काम करना बंद कर गए थे. कोई भी नहीं जान पाया अंदर क्या सन चल रहा है.
अलका को 24 हरष मॉनिटर किया जा रहा था. इंस्ट्रक्टर्स दौड़ कर कण्ट्रोल रूम में पोहंचे. वहां वह अलका के रूम के अंदर का सन देखना चाहते थे.. बूत कोई भी कैमरा या डिवाइस वर्क नहीं कर रहा था.
अलका मेस्मेरिज़ेड कंडीशन में NO:4 की और बढ़ने लगी. पास पोहंची NO:4 के गले से माला निकल कर अपने गले में पहन ली. जैसे hi माला NO:4 के गले से निकली. NO:4 लहराते हुए निचे गिर पड़ी.
मेस्मेरिज़ेड कंडीशन में अलका बीएड की और बढ़ी. बीएड पर पोहंच कर वह लेट गयी.. माला से निकल रही रेज़ उसकी पूरी बॉडी को जगमगाने लगी.
अलका की ऑंखें बंद होती चली गयी. अलका अब फिरसे पहले वाली अलका बन चुकी थी. उसके ब्रेन के साथ की गयी छेड़ छड़ खुद से रिकवर होने लगी.
बंद आँखों के पीछे अलका को गुरु जी का चेहरा दिखाई देने लगा.. उन्हें देखते hi अलका लेती लेती hi सम्मानीय अंदाज़ में हो गयी.
गुरु जी : प्रणाम गुरु जी!
गुरी जी : तुम्हारा कल्याण हो पुत्री! अलका पुत्री तुम नहीं जानती, जैसे hi माला तुम्हारे गले में पोहंची थी. ठीक उसी समय 4 और अलग अलग रोशनियां माला से निकली थी..
चरों रोशनियां अलग अलग दिशाओं में पोहंच कर तुम्हारे hi जैसी चार और लड़कियों में जा समायी थी.
वह चरों लड़कियां भी इस समय तुम्हारे जैसी हालत में हाँ. तुम्हारी hi तरह से वह चरों भी मुझे देख और सुन रही हाँ. सुनो पुत्रियों, भगवन ने तुम पांचू को एक सम्मान बनाया है. तुम सबके नसीब एक साथ जुड़े हुए हाँ. क्यों जुड़े हुए हाँ, ये समय तुम पांचू को खुद से बता देगा. तुम पांचू एक बंद मुठी की तरह हो. जब पांचू एक साथ मिल जाओगी तोह तुम पांचू की शक्ति के आगे कोई भी शक्ति ठहर नहीं पायेगी. कोई भी बुरी शक्ति तुम्हे हानि नहीं पोहंचा सकेगी. कोशिश करना जितनी जल्दी हो सके सब एक साथ मिल जाओ. तुम पांचू को एक होने के लिए खुद से सब कुछ करना पड़ेगा. कुछ बातें ऐसी भी होंगी जो तुम्हे एक साथ होने नहीं देंगी. तुम पांचू पवित्र आत्मा हो. पर मैं से तुम पांचू कितनी पवित्र हो, ये तुम पांचू को सबत करना होगा. अबसे तुम पांचू की ज़िन्दगी का अर्थ बदलने जा रहा है. पांचू खुद को पुरे मैं से पवित्र सबत करके एक हो जाओ, एक मुठी बन जाओ. तुम सबका कल्याण हो पुत्रियों..
गुरु जी अलका के अंदर से चले गए.. अलका होश में आ गयी. उठ कर बैठी तोह अपने गले में मौजूद माला को थाम कर अपने होंटो से लगा गयी. उसकी आँखों से आंसू जारी थे. जहाँ उसे बहुत असीम शांति प्राप्त हुई थी. वही वह खुद को दूसरों से अलग जान कर ख़ुशी सहन नहीं कर पा रही थी. उसकी आँखों से आंसू जारी हो गए थे.
ये जान कर वह एक पवित्र आत्मा है. अलका की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा था.
अलका बीएड से उत्तरी और दूर का लॉक खोल कर रूम से बहार निकल पड़ी. सब वही मौजूद थे. कमरे के अंदर के सरे सिस्टम अलका के नार्मल होते hi एक्टिव हो गए थे. अलका को रूम से बहार जाते हुए देख लिया गया था. तीनो इंस्ट्रक्टर्स दौड़े दौड़े वहीँ जा पोहंचे.
अलका सबको ग़ुस्से से देख रही थी. और बाकि सब अलका की चमक दमक देख कर दांग थे. कुछ hi देर में अलका एक हुसैन की देवी में ढल गयी थी. उसकी सुंदरता में बेपनाह इज़ाफ़ा हो गया था. पर अलका की आँखों में ग़ुस्से भरे भाव देख कर सब दो कदम पीछे हैट गए थे. माला के बारे सब अच्छे से जान चुके थे. माला के अलका के गले में पोहचते hi अलका साडी की साडी बदल कर रह गयी थी.
इंस्ट्रक्टर्स भी अलका को देख कर समझ गए थे. अलका अब फिरसे पहली वाली अलका बन चुकी है. इतनी दिनों की उसपर की गयी म्हणत मिटटी में मिल चुकी है.
अलका चलती हुई तीनो इंस्ट्रक्टर्स के सामने जा पोहंची. वह तीनो बिना डरे अलका को देखने लगे.
अलका : ऐसे hi अंदाज़ में तुम सब मेरे देश की सेवा कर रहे हो. किसी की मर्ज़ी जाने बिना, उसका ब्रेन वाश करके उसे अपने मतलब के लिए इस्तेमाल करते हो. कितनी घट्टिया सोच के मालिक हो तुम सब. नफरत है मुझे तुम जैसे लोगों से. नफरत है मुझे तुम्हारे विचारो से. अब शराफत से मेरे इंडिया जाने का इंतेज़ाम करो. वर्ण तुम सबकी खैर नहीं.
एक इंस्ट्रक्टर डेरिंग दिखते हुए : मंद योर लैंग्वेज अलका.. मत भूलो तुम हमारे देश में हो. हमारी कस्टडी में हो. हमारी मर्ज़ी के बिना यहाँ कोई आ तोह सकता है. पर यहाँ से कोई भी बिना हमारी परमिशन के जा नहीं सकता. तुम भी नहीं जा पाओगी. सीधे सीधे जिस मकसद के लिए तुम्हे यहाँ लाया गया है. इसकी कम्पलीशन में हमारा साथ दो. बदले में हम तुम्हारे लिए और तुम्हारे देश के लिए बहुत कुछ कर जायेंगे. पहले की तरह अब भी तुम्हारे देश को वर्ल्ड का बेस्ट कंट्री बनाने के लिए सब कुछ कर जायेंगे. तुम्हे किसी भी हाल में हमारा साथ देना होगा. डीके को साथ मिला कर दूसरे प्लेनेट से जुडी जितनी भी इन्फो है, वह हमें चाहिए. साथ hi दूसरे प्लेनेट से आयी लड़की भी हमें चाहिए, जो डीके के साथ है. ऐसा किये बिना तुम यहाँ से नहीं जा सकती.
अलका बड़े सुकून से उसकी बातें सुन रही थी. जैसे जैसे उसकी बातें आगे बढ़ रही थी. अलका के होंटो पर मुस्कान आने लगी थी. जो धीरे धीरे बढ़ती चली गयी थी.
वह खामोश हुआ तोह अलका चरों और देखने लगी. सब दम साढ़े उसे hi देख रहे थे.
अलका : तुम मेरे देश को पॉवरफुल बनाने में मेरा और मेरे देश का साथ डोज.
तुम सब...
हाहाहा.....
अच्छा मज़ाक है.. तुम सब तोह खुद किसी के सहारे उठने वळून में से हो. मेरे देश को क्या पॉवरफुल कंट्री बनाने में मदद करोगे. मेरा देश अब भी तुम्हारे देश से कहीं बढ़कर पॉवरफुल है. भूल गए हो तो मेरे देश के जयलोन की हिस्ट्री निकल कर फिरसे रीड करो. क्या कुछ नहीं कर गया है मेरा देश. मेरा महान था और महान है. कोण है जो मेरे देश की बराबरी कर सकता है. कोण है जो मेरे देश से टकराने की हिम्मत खुद में रखता है. हम शांत रहते हाँ तोह इसका मतलब ये नहीं है, हम कुछ करने लायक नहीं है. हम इंडियन में और तुम सब में फर्क है तोह बस इतना hi, हम नीचे गिरना नहीं जानते.. घट्टिया सोच रख कर तरक्की करना नहीं जानते. बेबस, लाचारों और कमज़ोरों पर ज़ुल्म नहीं करते. हम अपने दुम्म पर अपने पैरों पर खड़े हुए हाँ. तुम्हारी तरह नहीं, जो देश बिदेश से टैलेंटेड लोगों को उठवा का, उनका ब्रेन वाश कर, अपना घुलम बना कर तरक्की करते हाँ.
अलका की आखरी बात पर सब चीख पड़े..
अलका भी चीखती हुई : चिल्ल्ल्लहाऊओ matttttttttt! चिल्लाना मुझे hi नहीं हर एक इंडियन नागरिक को भी आता है. सब एक साथ चिल्ला उठे तोह सोचो तुम सब का क्या हशर होगा.
सच हमेशा hi कड़वा होता है. तुम जैसे इसे कभी भी सहन नहीं कर सकते. जो भी कहा मैंने, उसका एक एक शब्द सच है. मेरे साथ जो भी इतने दिनों से तुम सब लोग कर रहे थे. वह सब जानते हुए भी सच के इस कड़वे ज़हर से अनजान हो. बड़े भोले बनते हो तुम लोग. खुद को होशियार और ज़हीन समझते हो और हम जैसो को बेकार के पुर्जे.
कुछ देर पहले क्या कह रहे थे तुम. मैं या कोई भी इस देश से अपनी मर्ज़ी से निकल नहीं सकता.
अलका आगे बढ़ी और जो इंस्ट्रक्टर बहुत बढ़ चढ़ कर बोल रहा tha.uski कलाई थाम ली. पहले तोह वह नार्मल रहा. फिर जैसे hi अलका ने अपने एक नाख़ून से उसकी स्किन को कुरेदा तोह उसके फेस एक्सपेरशन चेंज होने लगे..
अलका बुलंद आवाज़ में : देखो! तुम सब इसका हाल देखो.
अलका इतना बोल कर, उसकी कलाई छोड़ कर दो कदम पीछे को हैट गयी.. वह इंस्ट्रक्टर अपनी कलाई को थाम कर गेब्रियल के जैसे अंदाज़ में चीखने चिल्लाने लगा.. जहाँ अलका ने नाख़ून से कुरेदा था. वहां उस इंस्ट्रक्टर की स्किन नीली पड़ने लगी थी. वह चीखता चिल्लाता हुआ भागने लगा.
उसे भागते देख कर एक बार फिरसे सबकी दौड़ें लग गयी. सब डरने लगे कहीं वह इंस्ट्रक्टर से टच न हो जाये. कहीं वह भी उस की तरह से नीला न पड़ने लगे. कहीं उसकी भी जान न चली जाए.
गब्रेइल का एक बीटा भी वहीँ मौजूद था. वह ओहदे से आर्मी में कप्तान था. वह भी माला की दहशत में आया हुआ था. पर अपने डैड की मौत पर वह बेहद दुखी भी था. सब दौड़ रहे थे तोह वो अपनी गन को सीधा अलका की और करते हुए ट्रिगर दबा गया. एक45 गुणसे गोली निकली तोह भयंकर आवाज़ हुई. बहुत से लोग रुक कर उसे देखने लगे.
जैसे hi बुलेट एक45 से निकली, दूसरे hi लम्हे उसकी चीख उसके गले में hi अटकी रह गयी. बुलेट जो उसकी गुणसे निकली थी. अलका तोह नीले पद रहे इंस्ट्रक्टर को देख रही थी पर माला ने अलका को बचते हुए बुलेट को खुद पर ले लिया था. बुलेट माला से टकरा कर रिफ्लेक्ट हुई और पलट कर गेब्रियल के बेटे के माथे में जा घुसी..
अब सही से सब दहशत में आ गए थे. सब चीखते हुए वहां से निकलने लगे. आर्मी वाले और एजेंट्स दूर खड़े रह कर अलका की और गन्स के रुख किये खड़े थे. उन्हें न तोह अलका को शूट करने के ऑर्डर्स थे और न hi वह खुद में हिम्मत प् रहे थे. बुलेट के रिफ्लेक्शन को वह भी देख गए थे. कोई भी ट्रिगर दबाने की हिम्मत नहीं कर सका.
अलका भी माला को थाम कर चूमने लगी थी. वह भी उसी पल माला की करगेड़गी को जान गयी थी. उसकी ख़ुशी और भी बढ़ गयी थी. नाख़ून चुभा कर मारने वाली बात भी खुद से उसके मैं में आयी थी. अलका खुद को शक्तिशाली जान कर बहुत खुश थी.
कुछ hi देर में वहां कई हेलिकोप्तेर्स मंडळाने लगे. सभी बड़े अधिकारी वहां पोहंच रहे थे. ऐसी अजीब घटना इससे पहले उनके देश में नहीं घाटी थी.
बाओ के बड़े ऑफिसर्स भी वहीँ आ गए थे. बाओ के सात बड़े भी अपने हेडक्वार्टर में बैठे हुए सब देख रहे थे. वह भी अलका को देख कर परेशान थे. जहाँ कुछ समय पहले सब खुश थे. अब वहीँ वह भी बहुत परेशान थे. माला भी हाथ से निकलती दिखाई दे रही थी और अलका भी.
अलका के गले में मौजूद माला की पावर वह देख चुके थे. बा3 को छोड़ कर सब आपस में बहस कर रहे थे.
सब स्क्रीन्स पर अलका और देश के बड़े बड़े ऑफिसर्स को अलका के साथ बात करते हुए देख रहे थे.
अलका : मुझे तुममे किसी की भी बात नहीं सुन्नी है समझे. फ़ौरन से भी पहले मेरी रवानगी का इंतेज़ाम करो. वर्ण जितनी देर मुझे यहाँ लगेगी. उतनी hi देर तक मैं लाशें गिरती जाऊँगी. मुझे यहाँ पर मेरी मर्ज़ी के बिना लाया गया है. अब शराफत से मुझे मेरे देश पोहंचा दिए जाए. वर्ण-----
अलका ऊँगली उठा कर सबको वार्निंग देने लगी.
एक अफसर : ठीक है मैडम! जैसे आप कहेंगी, हम वैसा hi करेंगे. हमें कुछ समय दीजिये. सब इंतेज़ाम फ़ौरन hi कर दिए जाएंगे.
वह ऑफिसर धीमे और मीठे लहजे में बोलै तोह अलका कुछ शांत हो गयी.
बा1 उसी ऑफिसर से बोलै : अलका को एयरपोर्ट वाली बिल्डिंग में लेजाओ. उसे ऐसा लगने दो, जैसे हम उसे ख़ुशी से रुखसत कर रहे हाँ. वहीँ स्टीलरूम में इसे कैद कर दिए जाए.
वही अफसर एक से बोलै : मैडम को एयरपोर्ट लेजाने का इंतेज़ाम किया जाए. अलका एक एक को देखने के बाद बहार जा कर गाडी की बैक सीट पर जा बैठी.
एयरपोर्ट पोहंची तोह गाडी से उतर कर खुद से hi एयरपोर्ट के अंदर आगे बढ़ती चली गयी. अलका का अंदाज़ किसी प्रिंसेस के जैसा था. सब उसकी प्रजा के जैसे उसके पीछे चल रहे थे. वही अफसर भाग कर अलका के पास पोहंचा और बोलै.
"मैडम प्ल्ज़ आप मेरे साथ आइये.. जितनी देर में प्लेन फ्लाई करने के लिए रेडी होता है. तब तक आप प्ल्ज़ हमें अपनी खिदमत का मौका दें"
अलका ने स्माइल से उसे देखा फिर अफसर की कलाई को देखने लगी. वह दर के दो कदम पीछे हो गया. अलका हसने लगी.
अलका : डरो नहीं, मैं कुछ नहीं कहूँगी तुम्हे. तुम बहुत अच्छे हो. बड़ा मीठा बोलते हो. इतना मीठा सेहत के लिए हानिकारक होता है. तुम सब को इतने मीठे की आदत है. मुझे मीठे से दूर हुए बरसों बीत चुके हाँ. अब मीठा मुझे हज़म नहीं होता. लाओ अपनी कलाई मुझे दो.
वह दर कर दो कदम और पीछे हो गया. तोह अलका हलके से है पड़ी.
"मैडम प्ल्ज़ आप मेरी बात मान लें"
अलका : मान लोन.. तुम्हारी बात मान लोन.. ठीक है मान लेती हों मैं तुम्हारी बात. तुम्हे पहले अपनी कलाई मुझे थामनी होगी. अलका डेविल स्माइल से उसे देख कर बोली.
बा3 : इसे जाने दो. रोकोगे तोह बहुत नुकसान उठाना पद जायेगा.
बा3 की बात पर सब उसे देखने लगे.. वह बहस करने लगे और अलका और माला को अपने देश में लाने के लिए बहुत म्हणत करनी पड़ी थी. सोफिए जैसी महान एजेंट बुरी तरह से घायल हो गयी थी. अब कैसे वह उसे जाने दे सकते थे.
बा3 की सोच के अगेंस्ट थी सबकी सोच. इस बार किसी ने भी बा3 की बात नहीं मानी और अलका को स्टीलरूम में बंद करने के ऑर्डर्स जारी करने लगे.
अलका अब यहाँ एक पल भी रुकना नहीं चाहती थी. सबकी नेचर वह बहुत अच्छे से जान चुकी थी. वह आगे बढ़ने लगी. सरे रस्ते उसके लिए खली होने लगे.. एक कॉरिडोर से गुज़रते हुए अचानक से सामने के रस्ते को स्टील वाल से बंद कर दिए गया. अलका ने पीछे मुद कर देखा तोह पीछे वाला एरिया भी स्ट्रील वाल गिरा कर बंद कर दिए गया था. दोनों साइड्स पठ्रीली दीवारें थी.
बा3 को छोड़ कर बाकि के BA's ऑर्डर्स जारी करने लगे. देर नहीं लगी और जिस एरिया में अलका थी. उस एरिया की दीवारों को बहरी और से, जो कह रूम्स थे. उन्हें वाटर से भरा जाने लगा. पानी भरने के साथ hi उस पानी में करंट छोड़ दिए गया.. अलका अगर दीवारों को तोड़ भी देती है तोह इलेक्ट्रिक वाटर से वह बच नहीं सकती थी. माला हासिल करने के लिए वह अलका की जान लेने पर भी उतर आये थे..
ालक स्टील वाल को तोड़ नहीं सकती थी. ऐसा सबको लग रहा था.
जैसे hi अलका को वहां बंद कर दिए गया था. अलका को बहुत ग़ुस्सा आने लगा था. अलका खुद कुछ नहीं कर सकती थी. माला से उसी समय रेज़ निकालनी शुरू हो गयी थी. वहां भी कामर्स लगे हुए थे. पर रेज़ के निकलते hi वह बेकार हो गए.
अलका ने माला को गले से निकला तोह रेज़ ऊपर छत पर पड़ने लगी. फ़ौरन hi वहां छेड़ हो गया. अलका के हाथ में मौजूद माला की लेंथ अचानक से बहुत बढ़ गयी. अलका ने माला को ऊपर छेड़ में दिखाई दे रहे सरए में फंसाया और ऊपर चढ़ गयी.
रेज़ फिरसे निकली और दोनों दीवारों में छेड़ करती चली गयी. दीवार पार के रूम्स की दूसरी दीवारों में भी छेड़ बनती हुई आगे बढ़ने लगी. छेड़ के साथ hi पानी भी बहार निकलने लगा.. पानी की स्पीड बहुत ज़यादा थी.
देखते hi देखते वह सारा पानी उस पुरे फ्लोर पर फैलता चला गया. वहां कई एजेंट्स, आर्मी वाले और एयरपोर्ट पर तैनात वर्कर्स मौजूद थे. वह सब उस पानी की लपेट में आ गए.. सब पानी में मौजूद करंट के कारण वही गिर कर तड़पने लगे. किसी को भी चीखने का मौका नहीं मिला. हाई वोल्टेज करंट छोड़ा गया था, वह भी पानी में.. किसी को दूसरा सांस लेने की फुर्सत hi नहीं मिल सकीय.
जितनी देर में वहां की इलेक्ट्रिक सप्लाई बंद की गयी.. तब तक वहां लाशों के ढेर लग चुके थे.
बा3 : देख लिया मेरी बात न मानने का अंजाम.
बाकी सब उसकी बात सुनकर खुद के लिए फैसले पर अफ़सोस करने लगे.
उसके बाद अलका को किसी ने रोकने की कोशिश नहीं करि थी. एक प्राइवेट प्लान में बिठा कर अलका को वहां से जाने दिए गया.. अलका बड़ी शान से वहां से निकल गयी थी.
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मार्गरेट अपने कमरे में रेस्ट कर रही थी. गोली के ज़ख़्म और सफर की थकन के कारण वह बीएड पर लेती रेस्ट कर रही थी. बहुत समय से वह भाग दौड़ और ट्रैंनिंग में बिजी रही थी. बोहत काम समय उसे रेस्ट के लिए मिल पता था. जैसे मिशन उसे मिला करते थे. उसे ज़यादा समय तक रेस्ट करने का समय मिल hi नहीं पाया था कभी.
अब भी वह सो रही थी. अलका की माला से निकली एक रे मार्गरेट में समां गयी. फिर मार्गरेट की भी वही कंडीशन हुई जो अलका की हुई थी. मार्गरेट भी गुरु जी की बातें सुन रही थी. माला से निकली रे ने मार्गरेट को याद दिला दिए था. वह मार्गरेट नहीं है, वह तोह कोमल है. उसे अपनी गुज़री लाइफ बारे सब याद आता चला गया.
गुरु जी की बातें सुनी तोह खुद पर गर्व करने लगी. रपो की घुलम बनकर जो कुछ खो गयी थी. उससे कहीं बढ़कर उसने पा लिया था.
गुरु जी पांचू से एक साथ बात कर रहे थे. पर सब के लिए शब्द कहीं कहीं बदले हुए थे.
गुरु जी के जाने के मार्गरेट उठी तोह गुरु जी की ऑर्डर से ब्रेन मास्टर साडी इन्फो मार्गरेट के दिमाग में उतर चुकी थी.
मार्गरेट अब कोमल बन चुकी थी. वह पहले तोह वहीँ बीएड पर बेथ कर दोनों हाथ जोड़ कर ऑंखें बंद करके भगवन को कोठी कोठी धन्यवाद बोलने लगी.
फिर वह अपना खूंखार रूप धारण करती हुई कमरे से निकली और पूरी kothi"jo ब्रेन मास्टर का खुफ़िआ ठिकाना भी थी" वहां पर मौजूद सभी एजेंट्स का खून बहाने लगी. उसके बाद वह ब्रेन मास्टर के रूम में जा घुसी थी.
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नताशा भी अपने काले साथियों के साथ आइलैंड पर थी. बहुत से ब्लैकमैन वहां पोहंच कर आइलैंड को अपने अंडर ले चुके थे. आइलैंड को सब मिलकर कर अपने हिसाब से सेट कर रहे थे.
नताशा विज़िबल होकर दमें और जोसफ से बातें कर रही थी. मैं के सच्चे थे तोह नताशा ने खुद को उनके सामने एक्सपोज़ कर दिए था.
एकदुम्म से hi वह उठी और दोनों से एक्सक्यूज़ करती हुई अपने रूम में जा पोहंची. वहीँ वह बीएड पर जा लेती तोह अलका की माला से निकली एक रौशनी उसमे भी समां गयी.
उसके बाद फिर नताशा के साथ भी गुरु जी बातें करने लगे.. रे जैसे hi नताशा के वजूद में उत्तरी थी. नताशा को अपने पैदा होने के बाद से लेकर 1.5 साल तक का समय दिखाई देने लगा. कैसे वह अपनी माँ की गॉड में थी. कैसे वह अपनी माँ के वक्षो से लग कर दूध पि रही थी. कैसे वह सबकी आँखों का तारा थी. कैसे ने उसके जनम पर उसका नाम तारा रखा था. कैसे सब उससे बेपनाह मोहब्बत किया करते थे. 4 भाइयो की वह इकलौती बेहेन थी. उसके चाचा के तीन बेटे थे. चाचा की भी कोई बेटी नहीं थी. तारा चाचा चची के भी दिल का टुकड़ा बन गई थी.
नताशा के दुन्या में आ जाने से घर में जैसे लक्ष्मी उतर आई थी. जहाँ सब के दिलों का दर्द मिट कर रह गया था. वहीँ भगवन ने सबको बिज़नेस में इतनी तरक्की दी थी. वह संभल hi नहीं पा रहे थे...
वही एक दुश्मन ने उस घर में आई lakshmi(TARA) को उस घर से दूर कर दिए. पर भगवन की लीला वही जाने. नताशा के अपने परिवार से दूर हो जाने के बाद भी उसके परिवार का पैसो की हो रही बारिश थमी नहीं थी.
गुरु जी ने संपर्क ख़तम किया तोह नताशा भी झटके से उठ बैठी. अपने दिल पर हाथ रख कर असीम प्राप्त होने वाली शान्ति को पुरे मैं से महसूस करने लगी. वहीँ वह चीखने चिल्लाने लगी. ख़ुशी के आंसू उसकी आँखों से जारी हो गए थे.
"भगवन तेरा कोटि कोटि धन्यवाद.. तूने मुझे लावारिस नहीं किया. मेरा असली परिवार आज भी ज़िंदा है. जहाँ मुझे परवान चढ़ाया वह भी मेरा परिवार था. उसकी मौत का बदला तोह मई ले करहि रहूंगी भगवन.. पर मेरे असली परिवार की यादें मुझे लौटने के लिए मई जिंटा भी तेरा धन्यवाद करूँ, काम है"
दूर के बहार दमें और जोसफ के साथ कुछ और भी आ कर खड़े हो गए थे. वह नताशा के चीखने चिल्लाने की आवाज़ें सुनकर भागे भागे वहां आये थे.
नताशा भी अपने आंसू साफ़ करती हुई उठी और दूर खोल कर सबको देखने लगी..
दमें परेशान होक : क्वीन! सब ठीक है न. आप रो क्यों रही थी.
नताशा बेपनाह ख़ुशी के साथ : दमें! मैंने सच्चाई का साथ दिया hi था कह भगवन ने मुझे बहुत बड़ा इनाम दे दिए. अंडरवर्ल्ड ने मेरे जिस परिवार को ख़तम किया है. वह मेरा असली परिवार नहीं था. जब मैं डेढ़ साल की थी. मेरे परिवार के एक दुश्मन ने मुझे मेरे परिवार से अलग कर दिए था. वहीँ से मैं अपने बाद वाले परिवार में जा शामिल हुई थी.
सब एक साथ : क्वीन! कोंग्रटुलतिओं. नताशा भी ख़ुशी ख़ुशी सबको जवाब देने लगी.
जोसफ : क्वीन! आपके फेस का ग्लो भी बहुत बढ़ गया है.
नताशा : हाँ! भगवन की कृपया हो गई है मुझपर.. नताशा अपने चेहरे पर हाथ फेरते हुए बोली..
नताशा : दमें! मुझे इस आइलैंड पर एक मंदिर भी बनवाना है. यहाँ कुछ लोगों को रहने के लिए भी रखा जाएगा.
दमें : हाँ! क्यों नहीं! ज़रूर क्वीन! हम यहाँ पर एक शानदार मंदिर बनाएंगे.
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ऐसा hi कुछ सन षिमुना के साथ भी हुआ था. एक रे उसके अंदर भी समां गयी थी. उससे पहले hi गुरु जी ने उसे किसी के शरीर से निकलने पर मजबूर कर दिए था. षिमुना जान नहीं पायी थी.
गुरु जी : पुत्री! तुम्हारे meesa(pita) के साथ विश्वासघात होना नियति का hi एक खेल था. लोजान का तुम्हारे मीसा की जगा किंग बनना और तुम्हारा वहां से बच कर धरती पर आना कोई संयोग नहीं था पुत्री. दक्ष का और तुम्हारा मिलान सब नियति का रचा एक खेल था. धरती पर और तुम्हारे गृह पर दक्ष का सम्राट बनना सब नियति के रचे खेल का हिस्सा हाँ.
तुम बहुत भाग्यशाली हो पुत्री, जो नियति ने तुम्हे सम्राट के साथ जोड़ दिए. वह भी सबसे पहले. तुम पांचू में सबसे पहले सम्राट की पूरी तरह से हो चुकी हो. वर्ण पहला नंबर अलका का था.
खुले विचारों वाली होते हुए भी तुमने बड़े प्रेम से सम्राट को पाया है.
तुम्हारे लिए एक खुशखबरी है पुत्री : तुम्हारे गृह से बहुत से निमंस धरती पर आ चुके हाँ. पर तुम धयान नहीं दे पायी. जब भी तुम शरीर बदलती हो, वह एक जान जाते हाँ, तुम किस जगा पर हो. पर अब से वह तुम्हे कभी नहीं जान सकेंगे. अब से तुम्हे छुपे रहने की कोई ज़रूरत नहीं है. तुम सबकी तरह से कहीं भी घूम फिर सकती हो.
गुरु जी कुछ और बातें करने के बाद षिमुना के पास से भी चले गए.
षिमुना सोच भी नहीं सकती थी. उसे ऐसी खुशखबरी सुनने को मिलेगी. दक्ष का साथ उसे बेहद पसंद आया था. पर वह हमेशा के लिए दक्ष की हो सकेगी. ये कभी नहीं सोचा था. वह धरती की नहीं थी. अपने प्लेनेट को भी हमेशा के लिए नहीं छोड़ सकती थी. वहां उसका पूरा परिवार था. कैसे सब को छोड़ कर वह दक्ष की हो सकती थी. पर अब ये जान कर वह बहुत खुश थी. दक्ष के सम्राट बन जाने से न केवल वह दक्ष की पत्नी बनेगी. गुरु जी की बातों से उसे ये भी पता चल गया था. एक दिन उसके प्लेनेट पर सरमात का राज होगा. मतलब लोजान का खेल एक दिन ख़तम हो के रहेगा.
षिमुना उठी और उठ कर नाचने लगी. आज वह बहुत खुश थी. धरती पर आने के बाद आज उसे सुख मिला था. वर्ण अपने परिवार की चिंता में घुलने लगी थी वह. दक्ष का साथ भी उसकी बेचैनी को काम नहीं कर प् रहा था.
पर अब उसे किसी किसम का कोई ग़म नहीं रहा था. उसे दक्ष मिला था एक सम्राट के रूप में. उसे अपने प्लेनेट का किंग भी सम्राट के रूप में मिल गया था. ये भी उसे पता चल गया था. आज वह अपनी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी ख़ुशी प्राप्त होने पर झूम उठी थी.
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दिल्ली के एक स्कूल में कुछ टेर्रोरिस्ट्स घूम आये थे. 12 टेररिस्ट्स थे. जिन्हो ने पुरे स्कूल को अपने अंडर ले रखा था.
देश भर में ये खबर फेल चुकी थी. मीडिया द्वारा पूरा देश ये खबर जान चूका था. 1000+ स्टूडेंट्स विथ टीचर्स टेर्रोरिस्ट्स के कब्ज़े में थे.
पुरे स्कूल में पुरे देश में खौफ ो ह्रास पहला हुआ था. टेर्रोरिस्ट्स ने एक मेल टीचर और दो गार्ड्स को जान से मार दिए था. उनकी डिमांड थी अपने कुछ साथियो को जेल से आज़ाद करवाने की. इसलिए उन्हों ने दिल्ली शहर के सबसे बड़े स्कूल पर कब्ज़ा जमा लिया था.
उसी स्कूल में एक फीमेल टीचर भी थी. नाम था उसका संजना...
संजना उस समय स्टाफ रूम में थी. जब टेर्रोरिस्ट्स स्कूल में घुसे थे. बी चांस वह एक खिड़की के पास बैठी थी और बहार hi देख रही थी. जैसे hi उसने तेस्सोरिस्ट्स को देखा तोह फ़ौरन hi स्टाफ रूम से निकल कर ऊपर वाले फ्लोर पर बने स्टोररूम में जा घुसी थी.
संजना(20) एक अनाथ लड़की थी.. एक अनाथ आशाराम में रह के जवान हुई थी. काबिल थी तोह पढाई के साथ साथ टीचिंग भी कर रही थी. हिम्मतवाली लड़की थी. सबसे पहले तोह उसने अपनी जान बचाई. जब टेर्रोरिस्ट्स ने पुरे स्कूल पर कब्ज़े जमा लिया तोह वह सोचने लगी. कैसे वह इन सब को ख़तम कर सकती है. कैसे वह बच्चू को बचा सकती है.
संजना फाइटिंग नहीं जानती थी. पर देश के लिए, अपने स्कूल के स्टूंडेंट्स के लिए "जिन्हे वह अपने hi बच्चे मानती थी" कुछ कर सकती है. वह अकेली थी, उसका पूरी दुन्या में कोई नहीं था. अनाथ होते हुए भी अच्छे संस्कारो वाली लड़की थी.
अब टेर्रोरिस्ट्स के स्कूल में घुस आने पर उसकी और सबकी जान पर बन आयी तोह वह खुद की जान को भूल कर अपने स्टूडेंट्स, अपने बच्चू के लिए कुछ कर गुजरने को बेचैन होने लगी..
समय बीतने लगा पर वह कुछ भी सोच नहीं पायी. कुछ भी प्लान नहीं कर पायी. आखिर उसने सोच लिया, जान जाती है तोह जाए. वह कुछ न कुछ करने से अब पीछे नहीं रह सकती.
जैसे hi वह स्टोररूम का दूर खोल कर बहार जाने को हुई.. उसी समय वह खुद पर कण्ट्रोल भूल गयी और वहीँ फर्श पर लेट गयी. उसी समय अलका की माला से निकली एक रे संजना में समां गयी..
संजना नींद की सी कैफियत में गुरु जी को देखने, सुनने लगी..
गुरु जी : सबसे पहले बहुत बहुत बधाई हो पुत्री. तुम अनाथ नहीं हो. तुम्हारा बहुत बड़ा परिवार है. मेरे जाने के बाद तुम अपने परिवार के सभी सदस्य को देख सकोगी.
तुम्हारा जनम एक महान कार्य के लिए हुआ है पुत्री. जल्द hi तुम सब जान जाओगी. अब उठु पुत्री और अपने बच्चू को बचाओ. अब से तुम कमज़ोर लड़की नहीं हो. उठो और जाओ अपने बच्चू को बचाओ.
गुरु जी चले गए तोह संजना भी ख़ुशी से झूमती हुई उठ कड़ी हुई. अपने हथु को देखने लगी. अपने चेहरे को छूने लगी. खुद में वह बहुत से बदलाव महसूस कर पा रही थी.
अभी खुद पर धयान देने का समय नहीं था. उसे बिना देरी के अपने बच्चू को बचाना था. पहले जो दर था. समझ में नहीं आ रहा था. कैसे अपने स्टूडेंट्स को बचाये. वहीँ अब उसकी हिम्मत हज़ारों गुना बढ़ गयी थी. बहुत कुछ वह समझने लगी थी. बहुत से प्लान बनते जा रहे थे.
स्टोररूम के अंदर पड़े सामान में से उसने एक लोहे का रोड उठाया और दूर खोल कर बहार देखने लगी. उसे बच्चू के रोने की आवाज़ तोह सुनाई दे रही थी पर वह कोई भी टेर्रोरिस्ट्स उसे दिखाई नहीं दिए था.
क़दमों की चाप को दबाये वह बहार निकली और जिस दिशा से बच्चू के चीखने की आवाज़ें सुनाई दे रही थी. उस दिशा में आगे बढ़ने लगी.
संजना के हाल रूम में पोहंची तोह अंदाज़ा हुआ अंदर कोई टेर्रोरिस्ट्स मौजूद है. सनजना हाल रूम के दूर के साथ hi रुक कर दूर को हल्का सा नॉक कर गयी. चरों और वह पहले भी देख चुकी थी. अपने हाथ में पकडे रोड को उसने मज़बूती से थाम लिया था.
खटका होने पर अंदर से आवाज़ आई
"देख कोई बहार तोह नहीं है"
क़दमों की आवाज़ आई तोह संजना सावधान हो गई. लोहे के रोड पर उसकी ग्रिफ्ट और भी सख्त हो गयी. जैसे hi एक टेररिस्ट बहार झाँकने लगा. संजना ने पूरी ताक़त से उसके सर पर वह रोड मार दिए. वह चीख भी न सका. उसके सर के टुकड़े हो गए थे. संजना ने हैरान होने में समय वास्ते नहीं किया. फ़ौरन गन उठा कर अंदर घुसती हुई दो और टेर्रोरिस्ट्स को शूट कर गयी. गन चलनी उसने नहीं सीखी थी. ये सब गुरु जी की दें थी. माला से निकली रौशनी "जो रे संजना में समय थी" उसका कमल था.
सब बच्चे चीख पड़े. संजना हाल में देखने लगी. उसे कोई और दिखाई नहीं दिया.
संजना : डरो मत मेरे बच्चू. तुम्हारे लिए तुम्हारी टीचर अपनी जान भी दे दे गई.
सब दूर को अंदर से लॉक कर दो.
संजना ने दूसरी गन उठा कर अपने गले में डाली तीसरी गन वही पड़ी रहने दी और भाग कर बहार निकल पड़ी.
दूसरे टेर्रोरिस्ट्स फायरिंग की आवाज़ सुनकर अपने साथियो से राब्ता कर रहे थे. पर वह मरने के बाद रिप्लाई नहीं दे सकते थे. ऊपर 3 hi थे. बाकि सब नीचे थे.
संजना स्टैर्स पर पोहंची और एक साइड कड़ी होकर निचे की सुन गन लेने लगी. उसे निचे बहुत शोर सुनाई दे रहा था.
बहार मौजूद मीडिया की गाड़ियों ने भी उसे कैप्चर कर लिया था. फ़ौरन hi संजना टीवी में दिखाई देने लगी. सब उसे देख कर हैरान भी हुए और परेशान भी हुए. कुछ को अपने बच्चू की ज़िन्दगी संजना में नज़र आने लगी तोह कुछ दर गए. कहीं संजना के कारण उनके बच्चे मारे न जाएँ.
संजना ने निचे फायर करके चीखते हुए कहा
संजना : आज तुममे से कोई भी मेरे हथु से ज़िंदा बच कर नहीं जा पायेगा. आज सबका गन्दा खून उसके शरीर से निकल बहार करुँगी..
एक टीचर ने संजना की आवाज़ पहचान ली.. वह बोली संजना हमें बचा लो प्ल्ज़.
टेर्रोरिस्ट्स लीडर : तोह तुम्हारा नाम संजना है. कहाँ थी तुम अब तक. कहाँ चुप के बैठी थी तुम. तुम अकेली हमारा कुछ नहीं बिगड़ सकती. सीधे से खुद को हमारे हवाले कर दो.
संजना : एक भर्ती नारी तुम जैसे हज़ारों कुत्तों के लिए काफी है. मुझे काम मत समझना. मैं एक टीचर hi नहीं हों. मैं अपने स्टूंडेंट्स की माँ भी हों. उनकी रक्षा करते हुए अपनी जान भी दे सकती हों.
सनजना ने फिरसे निचे फायर किये और पैरों से शूज निकल पर पीछे को भाग गयी. वह जानती थी, निचे जाने का एक रास्ता और भी है. संजना एक साइड में सबका धयान लगा कर दूसरी और से निचे पोहंची और फिर चंडी देवी बनते हुए टाक टाक कर एक एक टेररिस्ट को शूट करने लगी. बाला की फुर्ती आ गई थी संजना में.
बहुत भयनकर फायरिंग होने लगी थी. टीचर्स और बच्चे दहशत में आते हुए चीखने चिल्लाने लगे थे. संजना अकेली थी. इसलिए भी उसे कण्ट्रोल में करने के लिए किसी बच्चे या स्टूडेंट को ढाल बनाने की नहीं सोची थी किसी टेररिस्ट ने.
यही बात उनके लिए शिकस्त का सबब बानी.. संजना की फुर्ती के आगे वह सब एक एक करके मरते चले गए.
आखरी दो बचे तोह वह संजना को सामने आने के लिए एक बच्चे को मारने की धमकी देने hi वाले थे.. संजना दौड़ कर, कूद कर, फर्श पर पलटी कहते हुए दोनों के सर में एक एक बुलेट घुसा गयी.
इसके साथ hi संजना का "टेर्रोरिस्ट्स मिशन" भी पूरा हो गया.
संजना : खुश हो जाओ बच्चू. अब तुम सब सेफ हो..
सब ख़ुशी से रोने लगे थे. सब संजना से लिपटने लगे थे. पूरा स्टाफ भी संजना के गिर्द इकठा हो चूका था. ऊपर से भी बच्चू को निचे लाया जाने लगा.
बाहर मौजूद मीडिया समेत सबको खबर हो गई थी. संजना ने सारे टेर्रोरिस्ट्स को ख़तम कर दिए है. गेट खोला गया तोह सब भागते हुए स्कूल में दाखिल होने लगे.
बच्चू के पेरेंट्स ख़ुशी से रोने लगे थे तोह मीडिया संजना को अपने अपने चैनल पर दिखने लगी.
सब को गर्व होने लगा था, देश की इस बहादुर बेटी पर. जिसने अकेले hi सारे टेर्रोरिस्ट्स मार कर हज़ारों बच्चू को बचा लिया था.
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रुपाली : विक्रम तुम सबके साथ दिल्ली वाली कोठी पर पोहंचो. मैं वहीँ आ कर तुमसे मिलती हों.
सब रुपाली की बात सुनकर हैरान रह गए थे.
विक्रम : सतीश और अलका की अभी तक कोई खबर नहीं आई है रुपाली. और तुम जाने की बात कर रही हो.
रुपाली : खबर अब आएगी भी नहीं. मुझे नहीं लगता अब अलका या फिर सतीश ज़िंदा भी होंगे. ज़िंदा होते तोह अब तक लौट चुके होते..
ऋचा : माँ! क्या हम भाई और भाभी को छोड़ के चले जाएँ.
रुपाली : तुम दोनों को वापिस ला सकती हो.
ऋचा : no माँ! मैं कैसे वापिस ला सकती हों. मैंने तोह वह गुफा भी नहीं देखि.
विनय : माँ आप सतीश भाई के ना आने पर दुखी नहीं दिखाई दे रही.
विक्रम : रुपाली सतीश हराम बीटा है. उसके वापिस आने तक तोह हमें रुकना hi होगा.
परची ; भगवन न करे अगर भाई कोई खतरा बन गया है तोह हम कैसे उसे छोड़ कर जा सकते हाँ. हमें उसके लिए कुछ करना चाहिए.
रुपाली : विक्रम! तुम अपने आदमियों को यही छोड़ कर चले जाओ. सतीश ज़िंदा हुआ तोह लौट आएगा.
विक्रम : रुपाली तुम सतीश के लिए मुझे दुखी नहीं लग रही. कैसे हो सकता है. एक माँ अपने बेटे के लिए------
रुपाली : (ग़ुस्से से) विक्खक्रममम!! अपनी हद में रहा करो. जितना कहा जाए, सिर्फ उतना hi किया करो. अगर उसे खतरा बन hi गया है तोह तुम, मैं या कोई और कुछ कर सकता है क्या. जो सोच कर हम सब ने ये सारा प्लान किया था. सतीश के साथ कुछ भी हो सकता था. क्या हम इस बात से अनजान थे.
विक्रम पजल होने लगा : ठीक है मैं जा रहा हों.
रुपाली : ऋचा तुम मेरे साथ चलोगी.
ऋचा हैरान होक : पर कहाँ माँ.
रुपाली : क्या तुम्हारा पहले से जानना ज़रूरी है. मैंने कह दिए मेरे साथ चलना है तुम्हे तोह क्या मेरा इतना कह देना तुम्हारे लिए काफी नहीं है.
ऋचा : यस माँ! सॉरी माँ.. आगे से ऐसा नहीं बोलूंगी..
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दो दिन के अनथक सफर के बाद मैं इंडिया पोहंच चूका था.
मैं बरैली शहर में था.. मुझे पोहंचे दो घंटे हो चुके थे. टेलिपाथी द्वारा मैं एक खली कोठी को अपना ठिकाना बना चूका था. कोठी के मालिकान लंदन में थे और कोठी की देखरेख के लिए एक चौकीदार रखा हुआ था. उसकी पत्नी भी साथ hi रहती थी.
मैंने दोनों को बहुत से पैसे देकर कुछ दिन रहने की बात कर ली थी.
मैं एक कमरे में घुसा नाहा धो कर फ्रेश हो चूका था. चौकीदार मेरे लिए कपडे और खाने पिने का सामान ला चूका था. वह बहुत खुश था. एक साल में जितने पैसे वह कमा रहा था. मैंने उससे बढ़कर उसे दे दिए थे.
खाना खा के फ्री हुआ तोह उसी समय कोठी के गेट पर गाडी के हॉर्न की आवाज़ सुनाई देने लगी. छुअकीदार को मैं पहले hi बता चूका था. मेरे मेहमान आ रहे हाँ.
कुछ देर में मेरे मेहमान मेरे सामने थे.
मेरे मेहमानो में मेरी चची रुपाली और ऋचा शामिल थी. रुपाली पहले तो मुझे देख कर नक् सिकोड़ने लगी. मैं उसके दिमाग में घुस के बोलै.
दक्ष : साली, रंडी, कुत्तिया अपने मालिक को भी नहीं पहचान पायी हो क्या.
रुपाली एकदुम्म से मेरे पैरों में गिर पड़ी.
रुपाली : मालिक! मेरे मालिक! आपने मुझे अपने दर्शन करवा दिए. मेरे तोह भाग hi खुल गए.
दक्ष : तेरी बेटी मेरे बारे में कुछ नहीं जानती क्या.
रुपाली चीख कर : रीइचछा! पैरों में पद मेरे मालिक के.
ऋचा हैरान होकर कभी मुझे तोह कभी अपनी माँ को देखने लगी
रुपाली : सुना नहीं तुमने मैं क्या कहा.. पैरों में गिर मेरे मालिक के.
ऋचा समझी मैं कोई महान पुरुष हों. वह भी अपनी माँ के तरह से मेरे पैरों में गिर पड़ी.
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आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..
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