The Super Boy - SexBaba
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The Super Boy

अपडेट 1

हिमालय के पहाड़ो के बिच एक बहुत बड़ा आश्रम था उस आश्रम के बगल से गंगा नदी कल कल करते हुए बहती थी उस आश्रम के चारो तरफ के पहाड़ी बर्फ से हमेशा ढाका रहता था.

उस आश्रम में बहुत सरे ऋषि मुनि रहते थे वो लोग यहाँ अपना ध्यान लगते थे और अपने शिस्यो को प्रशिक्षण देते थे इन ऋषियों में सबसे बड़े ऋषि को सब गुरुदेव बोलते थे यहाँ इस आश्रम में बहुत सरे शिष्य थे जो यहाँ पर ज्ञान प्राप्त करने के साथ साथ योग और मार्टिकल आर्ट्स सीखते थे.

इसी आश्रम के कुछ दुरी पर एक लड़का बर्फ से ढाका पहाड़ो के बिच ध्यान में बैठा हुआ था उसके शरीर के सरे कुंडलिनी चक्र अभी अभी जागृत हुए थे जिसके कारन उसके शरीर से प्रकश निकल रहा था.




तभी उस लड़के के कानो में एक दिव्या आवाज गूंजती है.

आवाज- अति उत्तम पुत्र तुमने आज कुंडलिनी चक्र के सत्व चक्र मूलाधार चक्र को भी जागृत कर लिया तुमने आज ये सिद्ध कर दिया की तुम अभी तक के हमारे शिस्यो में सबसे उत्तम शिष्य हो.

लड़का- प्रणाम गुरुदेव

(ये उसी आश्रम के सबसे बड़े ऋषि जिन्हे सब गुरुदेव कहते है वो है)

गुरुदेव- ोष्यमान भाव पुत्र

लड़का- गुरुदेव आज मई जो कुछ भी हु और मैंने जो कुछ भी सीखा और हासिल किया है वो मई यहाँ आश्रम में रहकर आपसे hi सीखा और हासिल किया है गुरुदेव अगर आप मेरे जीवन में न होते तो मई कुछ नहीं होता.

गुरुदेव- मैंने तो वही किया है पुत्र जो सरे गुरु अपने शिस्यो के लिए करते है मैंने तो यहाँ तुम्हारे साथ साथ और भी शिस्यो को शिक्षा दी है लेकिन तुम्हारे जैसा कोई नहीं बन पाया क्युकी तुमने कुछ पाने का और कुछ कर गुजरने का दृढ निश्चय है पुत्र.

तुम मेरे जीवन का सबसे आज्ञाकारी मेहनती और निष्ठावान शिष्य हो तुमने बहुत काम समय में वो हासिल कर लिया जिसे हासिल करने में बहुतो को हजारो साल निकल जाते है अब समय है तुम्हारे शिक्षा के अंतिम अध्याय का पुत्र.

लड़का- आज्ञा करे गुरुदेव.

गुरुदेव- पुत्र तुमने इस आश्रम में रहते हुए सरे ज्ञान हासिल कर लिए हमारे पास तुम्हारे लिए जितना भी ज्ञान था तुमने वो साडी ज्ञान हासिल कर लिए.

तुम पांच तत्त्व अग्नि जल वायु धरती और बिजली पर भी काबू पा लिए अब तुम्हे न तो यवु से दर है न आग तुम्हे जला सकेगी न पानी तुम्हे डूबा सकेगी.

तुमने पुराने ज़माने के साथ साथ नए ज़माने के आयुर्वेदिक चिकित्षा भी सिख लिए और उसके साथ साथ अश्विनी विद्या में भी माहिर हो गए और तो और दुनिया के सरे युद्ध कला सिख लिए तुम एक अकेले हजारो योद्धाओ पर भरी पड़ोगे पुत्र तुमने कुंडलिनी चक्र के सतो चक्रो को भी सिद्ध कर लिया तुम योग शक्ति पर भी महारथ हासिल कर लिया अब तुम्हारे सामने काली शक्ति या बुरी आत्मा छान भर भी टिक नहीं सकता इसके साथ साथ तुमने आधुनिक हथियार और आधुनिक ज्ञान भी हासिल किया है तुम कंप्यूटर में माहिर हो तुम्हारे सामने आधुनिक युग के कोई भी मनुष्य किसी भी ज्ञान में नहीं टिक सकता इसके साथ साथ तुम्हे मंद कण्ट्रोल करना और किसी दूसरे ब्यक्ति से मन में बात करना सिख लिए.

ितं कुछ हासिल करना कोई मामूली बात नहीं है पुत्र इतना कुछ हासिल करने में ऋषि मुनियों को भी हजारो साल लग जाते है जो ज्ञान तुमने महज 15 वर्षो में हासिल किया है यहाँ एक भी ऐसा शिष्य नहीं है जो तुम्हारा 5 प्रतिशत भी सिख पाया है.

लड़का- ये सब तो मैंने आपके कृपया से सीखा है गुरुदेव जिसका आपके जैसा गुरु हो उसको कुछ भी हासिल करना कोई बड़ी बात नहीं है मई तो एक कोयला था इस कोयले को हीरा अपने बनाया है गुरु देव.

गुरुदेव- बस बस अब मेरी बड़ाई करना बंद करो और मेरे बात को सुनो तुम्हारा यहाँ का शिक्षा समाप्त हो चूका है अब सिर्फ तुम्हे दो चीज और हासिल करना है इसके बाद तुम दुनिया के बुराइयों से टकराने के लिए तैयार हो जाओगे तुम एक बात यद् रखना जिसके पास भी शक्तिया आती है उनका जिमेवारी भी बढ़ जाता है क्युकी जहा शुद्ध शक्तिया होती है वह काली शक्तिया भी होती है इस लिए तुम्हे खुद को तैयार कर के रखना होगा तुम्हे शक्ति के साथ साथ जिमेवारी भी मिली है तुम्हे इस दुनिया को काली शक्तियों से रक्षा करना होगा और उसके लिए तुम्हे दिव्या दृष्टि और स्पेस शक्ति प्राप्त करना होगा.

लड़का- गुरुदेव ये दिव्या दृस्टि और स्पेस शक्ति क्या है.

गुरुदेव- पुत्र तुम जब दिव्या दृस्टि हासिल कर लोगे तो तुम्हे अपने दिव्या दृस्टि के मदत से किसी भी काली शक्ति या बुरी आत्मा को आराम से देख सकते हो तुम दिव्या दृस्टि से कोई होने वाली घटना को पहले hi देख सकते हो दिव्या दृस्टि का और भी उपयोग है लेकिन वो तुम्हे धीरे धीरे पता चलेगा और रही बात स्पेस शक्ति का तो तुम इसके मदद में किसी भी स्थान पर आ जा सकते अगर अभी के भासा में बोले तो टेलिपोर्ट कर सकते हो और तुम इस शक्ति का उपयोग काली शक्तियों को ख़तम करने के लिए भी कर सकते हो इसका एक और उपयोग है तुम इसके मदत से स्टोरेज अंगूठी के साथ साथ एक आभासी दुनिया भी बना सकते हो जिसका कण्ट्रोल तुम्हारे हाथ में होगा.

लड़का- मई समझ गया गुरुदेव लेकिन मई इसे कैसे हासिल कर सकता हु.

गुरुदेव- तुम्हे पहले दिव्या दृष्टि हासिल करना होगा इसके लिए मई तुम्हे एक मंत्र दूंगा तुम्हे उस मंत्र का उच्चारण करते हुए अपने तीसरी नेत्र यानि की दोनों नेत्रों के बिच ध्यान लगाना होगा लेकिन ये इतना आसान नहीं है तुम्हे ये करने में बहुत मुस्किलो का सामना करना होगा.

लड़का- चाहे कितना भी मुश्किल क्यों न हो गुरुदेव मई इसे हासिल कर के hi रहूँगा और स्पेस शक्ति कैसे हासिल करना होगा गुरुदेव.

गुरुदेव- तुम पहले दिव्या दृस्टि हासिल करो इसके बाद मई तुम्हे स्पेस शक्ति को हासिल करने के बारे में बताऊंगा.

इसके बाद गुरुदेव उस लड़के को एक मंत्र देते है और वह से चले जाते है इधर वो लड़का उस मंत्र को लेकर फिर से अपने ध्यान मुद्रा में बैठ जाता है और उस मंत्र का उच्चारण करते हुए अपने तीसरे नेत्र पर ध्यान लगाने लगता है.

जैसे hi वो अपने तीसरे नेत्र पर ध्यान लगता है वैसे hi उसे अजीब अजीब सी पिक्चर उसके दिमाग में आने लगते है कभी उसे एक रोटा हुआ लड़का दिखाई देता है तो कभी एक औरत बीटा बीटा छीलते हुए नजर आती है तो कभी उसी औरत को गोली लगते हुए दिखाई देता है ये सब देख कर उसका मन बिचलित हो जाता है और उसका ध्यान भांग हो जाता है.

लड़का- (अपने मन में सोचता है) ये तस्वीरें किसकी थी और ये मुझे क्यों दिखाई दे रहा है आज तक तो मुझे ध्यान लगाने में कभी ऐसा कुछ भी नहीं दिखा तो आज क्यों दिख रहा है कही ये तस्वीरें मुझसे तो जुड़ा हुआ नहीं है.

नहीं नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है ये सिर्फ मेरा भ्रम है और कुछ नहीं मुझे फिर से ध्यान लगाना होगा और इन सब बढ़ाओ को किसी भी तरह से पर करना होगा.

वो लड़का फिर से ध्यान लगाने लगता है लेकिन उसे फिर से वो सरे तस्वीरें दिखाई देने लगती है जिससे उसका ध्यान फिर से भांग हो जाता है.

वो बार बार ध्यान लगता और बार बार उसके ध्यान में वो सरे तस्वीरें आती जिससे उसका ध्यान भांग हो जाता लेकिन वो लड़का भी जीडी था उसने हर नहीं मणि और लगातार अपने दिमाग को काबू करने की कोशिश करता रहा.

उसे अपने दिमाग पर काबू करने में लगभग 15 दिन लग गए लेकिन आखिर कर वो लड़का अपने दिमाग पर काबू पा hi लिया अब उसे ध्यान लगाने में किसी भी तरह का कोई भी बढ़ा नहीं आ रहा था जिसके कारन वो अपने ध्यान के अनंत गहराइयों में खोता चला गया.

ऐसे hi ध्यान में बैठे बैठे और वो मंत्र का उच्चारण करते हुए 1 महीना बिट गया वो 1 महीने तक अपने ध्यान के अनंत गहराइयों में खोता रहा रहा उसे चारो तरफ अंधकार hi अंधकार दिखाई दे रहा था लेकिन वो फिर भी अपने ध्यान को भांग नहीं किया और आखिर कर वो ध्यान के उस उचतम कोटि पर पहुंच गया जहा उसे प्रकाश का एक दीपक जलते हुए दिखाई दिया.

जैसे hi उसके ध्यान में अंधकार छत कर प्रकाश का एक दीपक दिखाई दिया वैसे hi उसके माथे पर दोनों आँखों के बिच से रोशनी निकलने लगी वो रोशनी निकलते निकलते इतना फ़ैल गया की चारो तरफ रोशनी hi रोशनी हो गया फिर धीरे धीरे वो रोशनी एक आँख का रूप लेने लगा और जब वो रोशनी पूरी तरह से एक आँख में बदल गया तो वो आँख उस लड़के के माथे पर दोनों आँखों के बिच जाकर चिपक गया जिससे उस लड़के को भयानक दर्द होने लगा.

पहले तो वो लड़का उस दर्द को बर्दास्त करता रहा लेकिन जब वो दर्द हद से ज्यादा बढ़ गया तो उस लड़के से दर्द बर्दास्त करना मुश्किल हो गया जिसके कारन उसका ध्यान टूट गया और उसका भयंकर चीखे निकलने लगा उसके चीख से हिमालय के पहाड़ी का वातावरण भी गूंज गया उसका दर्द इतना बढ़ गया की वो वही पर गिर कर बेहोश हो गया.

वो आँख जो उस लड़के के माथे पर अभी अभी चिपका था वो धीरे धीरे गायब हो गया.

दूसरे दिन आशाराम के अंदर एक रूम उस लड़के को होश आता है तो वो अपने सामने गुरुदेव को देख कर चौक जाता वो उठकर अभी कुछ बोलने hi वाला होता है की गुरुदेव उसे कुछ भी बोलने से रोक देते है और खुद बोलते है.

गुरुदेव- तुम अभी आराम करो पुत्र तुमने बहुत hi कठिन तपस्या किया है बिना कुछ खाये पिए 45 दिनों तक ध्यान में बैठे रहे और अपने जिद के आगे तुमने वो कर दिखाया जो आज तक इस धरती पर मेरे आलावा और कोई नहीं कर पाया मई तुम्हारी इस परिश्रम से बहुत कुश हु.

वो लड़का गुरुदेव के बात को सुन कर बहुत कुश हुआ फिर उसने अपने मन में सोचा की आखिर कर मैंने दिव्या दृस्टि को प्राप्त hi कर लिया अब स्पेस शक्ति को प्राप्त करने का समय आ गया है.

लड़का- ये सब आपके कृपा से हुआ है गुरुदेव.

अब आप मुझे कृपया कर के ये बताये की मई स्पेस शक्ति कैसे प्राप्त कर सकता हु.

गुरुदेव- अभी तुम कुछ दिन आराम करो क्युकी तुमने दिव्या दृस्टि पाने में अपनी साडी ऊर्जा को ख़तम कर दिया है पहले तुम अपने ऊर्जा को प्राप्त करो इसके बाद मई तुम्हे बताऊंगा की तुम स्पेस शक्ति को कैसे प्राप्त कर सकते हो.


लड़का- जो आज्ञा गुरुदेव.
 
अपडेट 2

दिव्या दृस्टि प्राप्त करने के बाद वो लड़का कुछ दिन तक आराम किया और फिर दिव्या दृस्टि का अभ्यास करने लगा लगभग 1 सप्ताह तक अभ्यास करने के बाद वो दिव्या दृस्टि को अच्छे से इस्तेमाल करने लगा था.

अब वो अपने दिव्या दृस्टि के मदत से उस छोटे छोटे जिव और कीड़े मकौड़े को भी देख सकता था जिसे आगे आँखों से भी देखना मुश्किल था यहाँ तक की किसी भी सामान या वास्तु के अंदर और किसी के शरीर के अंदर भी आसानी से देख सकता था.

उसको उसके ऊपर होने वाले हमला या फिर उसके या उसके जानने वाले के साथ कोई भी घटना घटने से पहले hi पता चल जाता था.

वो दिव्या दृस्टि के मदत से किसी भी वास्तु के असली पहचान जान सकता था और यहाँ तक की वो जिस भी वास्तु या इंसान को देखता उसको उसके बारे में सब कुछ पता चल जाता था.

वो लड़का दिव्या दृस्टि पा कर बहुत खुस था वो अब अपना अगले शक्ति स्पेस शक्ति को पाने के लिए ब्याकुल था इस लिए वो जल्दी से गुरुदेव के पास पंहुचा और बोलै.

लड़का- प्रणाम गुरुदेव

गुरुदेव- यशश्वी भाव पुत्र कहो कैसा यहाँ आना हुआ.

लड़का- गुरुदेव मैंने दिव्या दृस्टि का अभ्यास कर के उसपे अच्छे से महारथ हासिल कर लिया है अब मई स्पेस शक्ति को पाने के लिए तैयार हु.

गुरुदेव- अच्छी बात है तो फिर स्पेस शक्ति को पाने के लिए तैयार हो जाओ लेकिन इस शक्ति को पाना इतना भी आसान नहीं है इस शक्ति को पाने के लिए भी बहुत hi भयंकर दर्द से गुजरना पड़ेगा तुम्हे इतना दर्द होगा की उस दर्द से तुम्हारी जान भी जा सकती है इस लिए तुम अच्छे से सोच लो.

वो लड़का गुरुदेव के बात सुन कर पहले तो दर गया लेकिन फिर अपने दर को अपने काबू में करते हुए बोलै.

लड़का- गुरुदेव मुझे उस शक्ति को पाने में चाहे जितना भी दर्द हो मई पीछे नहीं हटूंगा बस आप मुझे ये बताने का कृपया कीजिये की मई उसे कैसे हासिल कर सकता हु.

गुरुदेव- मुझे तुमसे यही उम्मीद थी पुत्र तो सुनो तुम्हे स्पेस शक्ति को पाने के लिए अंतरिक्ष में सितारों के बिच जाना होगा और तुम्हे उन सितारों में बेस हुए स्पेस शक्ति को अपने शरीर में धारण करना होगा तुम जैसे जैसे उन शक्तियों को अपने अंदर धारण करोगे वैसे वैसे तुम्हारी दर्द बढ़ते जायेगा लेकिन तुम्हे अपने दर्द को बर्दास्त करते हुए उन शक्ति को अपने शरीर में धारण कर के वही पर ध्यान लगाना होगा और फिर तुम्हे ध्यान के माध्यम से उन शक्तियों को अपने अंतर्मन की दुनिया में ले जाना होगा लेकिन यही काम सबसे दर्दनाक होगा और इसमें तुम्हारी जान भी जा सकती है.

लड़का- गुरुदेव मई किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार हु बस आप ये बताइये की मई अंतरिक्ष में जाऊंगा कैसे.

गुरुदेव- तुम्हे अंतरिक्ष में मई अपने तपोबल से भेजूंगा तुम तैयार हो जाओ.

इसके बाद गुरुदेव वह अपने ध्यान में बैठ गए और वो लड़का भी उनके सामने hi ध्यान में बैठ गया फिर गुरुदेव कुछ मंत्रो का उच्चारण करने लगे जिसके कारन उनके माथे से एक रोशनी निकली और उस लड़के को चारो तरफ से घेर लिया और वो लड़का धीरे धीरे बेहोश हो गया.

फिर वो रोशनी जिसमे वो लड़का था वो तीब्र गति से ऊपर आकाश में जाने लगा कुछ hi समय में वो रोशनी अंतरिक्ष में पहुंच गया और वह जाकर वो एक जगह पर रुक गया फिर धीरे धीरे वो रोशनी वह से गायब हो गया.

जब वो लड़के के ऊपर से वो रोशनी हटा तो उस लड़के को धीरे धीरे होश आया जैसे hi उसे होश आया वो अपने चारो तरफ का नजारा देख कर चौक गया वह चारो तरफ सितारे hi सितारे दिखाई दे रहा था जिसे देख कर वो लड़का खुश हो गया.

लड़का- अरे ये क्या मई तो सच में अंतरिक्ष में आ गया लेकिन मई यहाँ पर खड़ा कैसे हु.

अभी वो लड़का ये सब सोच hi रहा था की तभी उसके मन में गुरुदेव की आवाज सुनाई दी.

गुरुदेव- तुम अभी अंतरिक्ष में पुत्र यहाँ सभ कुछ चाहे वो वस्तु हो या कोई इंसान सब रुक जाते है क्युकी यहाँ का गुरुत्वाकर्षण 0 है.

अब आगे सुनो तुम्हे क्या करना तुम यही पर ध्यान मुद्रा मई बैठ जाओ और मई तुम्हे एक मंत्र देता हु उस मंत्र का उच्चारण करते हुए तुम यहाँ के स्पेस शक्ति को अपने अंदर धारण करने की कोशिश करो पहले पहले तो तुम्हे थोड़ा प्रॉब्लम होगा लेकिन फिर तुम आसानी से इसे अपने अंदर धारण कर सकोगे लेकिन इसमें जो दर्द होगा वो बहुत ज्यादा होगा तुम्हे अपने दर्द पर भी काबू करना होगा.

लड़का- जी मई समझ गया गुरुदेव.

इसके बाद गुरुदेव ने उसे एक मंत्र दिया वो लड़का उस मंत्र का उच्चारण करते हुए उन सितारों से स्पेस शक्ति को अपने अंदर खींचने का प्रयास करने लगा लेकिन वो असफल रहा क्युकी वो उन शक्तियों को अपने अंदर खींच नहीं पा रहा था.

वो धीरे धीरे उन शक्तियों को अपने अंदर खींचने का प्रयास कर रहा था लेकिन वो बार बार असफल हो जा रहा था.

लड़का- मई तो उन शक्तियों को अपने खींच नहीं पा रहा हु अब मई क्या करू.

ये सोचते हुए उस लड़के को अचानक एक युक्ति सूजी उसने सोचा की क्यों न अपने खिचाव को और बढ़ा कर स्पेस की शक्तियों को अपने अंदर खींचा जाये ये सोचते हुए उसने अपने शरीर के खिचाव को और बढ़ा दिया जिसके कारन स्पेस की शक्तियों उन सितारों से निकल कर उसके शरीर में धीरे धीरे कर के आने लगी लेकिन जैसे hi वो शक्तिया उसके शरीर में आने लगी उसके शरीर में एक तीव्र दर्द का लहार दौड़ गया.

लेकिन वो उस दर्द को बर्दास्त करते हुए उन शक्तियों को अपने अंदर धारण करता रहा तभी उसके मन में फिर गुरुदेव का आवाज सुनाई दिया.

गुरुदेव- बहुत अच्छा अब तुम उन शक्तियों को अपने अंतर्मन में डालो लेकिन यद् रखता तुम्हे दोनों काम एक साथ करना है तुम्हे स्पेस शक्ति को भी खींचना है और उन शक्तियों को अपने अंतर्मन में भी भेजना है और ये काम तुम्हे तब तक करना है जब तक की तुम्हारे अंतर्मन में स्पेस शक्ति का एक गोला तैयार न हो जाये.

गुरुदेव के बात को सुन कर वो लड़का वैसे hi करने लगा वो उन शक्तियों को अपने अंतर्मन में भेजने लगा लेकिन इससे उसका दर्द और बढ़ गया.

वो दर्द के कारन अपने मुथियो को भींच लिया और और उन शक्तियों को खींच कर अपने अंतर्मन में भेजता रहा जैसे जैसे शक्तियां उसके शरीर में जाती रही वैसे वैसे उसका दर्द और बाध्य गया.

वो शक्तिया उसके शरीर के मांस को धीरे धीरे गलने लगे अगर वो उन शक्तियों को अपने अंतर्मन में न भेज कर अपने शरीर में स्टोर कर के रखता तो अब तक उसका शरीर गाल कर गायब हो जाता.

उन शक्तियों को अंतर्मन में भेजने के बाद भी धीरे धीरे उसके शरीर का मांस गाल रहा था जिसके कारन उसको असीम पीड़ा हो रहा था एक समय ऐसा आया की उसका दर्द इतना बढ़ गया की उससे बर्दाश्त नहीं हुआ और वो वही जोरो से छिलने लगा लेकिन वो शक्तियों को खींचना और उसे अपने अंतर्मन में भेजना नहीं रोका.

धीरे धीरे उसके अंतर्मन में स्पेस शक्ति का एक गोला तैयार होने लगा था लेकिन उस लड़के के शरीर में इतना पीड़ा हो रहा था की उसे लगाने लगा अब वो जिन्दा नहीं बचेगा ये भयंकर दर्द hi उसका जान ले लेगा.

लड़का- अब मुझसे और नहीं होगा अगर अब मई इसे नहीं रोका तो जरूर इस दर्द से मेरा जान चला जायेगा.

ये सोचते हुए उस लड़के ने अपने अंतर्मन में देखा तो वो गोला लगभग लगभग तैयार हो hi गया था बस अब उसका कुछ हिंसा hi बनना बाकि था.

लड़का- ये तो लगभग लगभग तैयार hi हो गया है अब मई अगर यही पर रुकता हु तो मेरा सारा मेहनत बेकार हो जायेगा और गुरुदेव ने जो मुझपे बिस्वास दिखाया है वो भी टूट जायेगा नहीं नहीं मई ऐसे हर नहीं मन सकता अब एक उपाय इस स्पेस शक्ति के गोले को पूरा करने अगर मई पूरी ताकत लगा कर और ज्यादा स्पेस शक्ति को खींच कर अपने अंतर्मन में दालु तो ये गोला जल्दी hi पूरा हो जायेगा और मुझे ज्यादा देर तक दर्द का सामना भी नहीं करना पड़ेगा.

इतना सोच कर उसने अपने ताकत के साथ और ज्यादा स्पेस शक्ति को खींचने लगा लेकिन इसमें उसका दर्द भी पहले से बहुत ज्यादा बढ़ गया वो जोर से छीलते हुए स्पेस शक्ति को खींच कर अपने अंतर्मन में डालने लगा ऐसे थोड़े देर डालने के बाद वो दर्द के कारन वही बेहोश हो कर गिर गया.

जैसे वो बेहोश हुआ वह पे तुरंत गुरुदेव प्रकट हुए और उसको अपने हाथो में उठा कर वह से गायब हो गए और सीधा आश्रम में प्रकट हुए.

वो आश्रम में आ कर उसके रूम में जाकर उसको उसके बीएड पर सुला दिए इसके बाद वो कुछ मंत्र पढ़ कर अपने हाथ को उस लड़के के शरीर पर फेरा तो उनके हाथ से नील कलर के रोशनी निकल कर उस लड़के के शरीर में जाने लगा जिसके कारन उसके शरीर का घाव भरने लगा.

वो लड़का 2 दिन तक वैसे hi बेहोश रहा जब उसको होश आया तो खुद को अपने रूम में देख कर चौक गया.

लड़का- अरे मई तो अंतरिक्ष में था मुझे यहाँ कोण लाया लगता है जब मई बेहोश हो गया था तो मुझे गुरुदेव वह से लेकर यहाँ आ गए होंगे.

लेकिन क्या मई स्पेस शक्ति पाने में कामयाब हुआ ध्यान लगा कर देखता हु.

इसके बाद वो लड़का वही ध्यान के मुद्रा में बैठ गया और अपने अंतर्मन में देखने जब वो अपने अंतर्मन में स्पेस शक्ति के गोले को देखा तो वो चौक और फिर खुसी से छिलने लगा

लड़का- या हु.. मैंने कर दिखाया मई स्पेस शक्ति को हासिल कर लिया.

फिर वो वह से उठ कर गुरुदेव के पास गया और उनको प्रणाम करते हुए बोलै.

लड़का- प्रणाम गुरदेव.

गुरुदेव- यशस्वी भाव पुत्र तो आखिर कर तुम जग hi गए चलो अच्छा है अब ये बताओ की तुम्हारी तबियत कैसी है.

लड़का- अब मई बिलकुल ठीक हु गुरुदेव अब मेरे लिए क्या आज्ञा है गुरुदेव.

गुरुदेव- अब तुम्हे ध्यान लगा कर धीरे धीरे अपने अंतर्मन में बेस हुए स्पेस शक्ति के गोले को अपने पुरे शरीर में फैलाना है लेकिन यद् रहे की उस गोले से थोड़े थोड़े ऊर्जा को निकल कर अपने शरीर में फैलाना नहीं तो तुम्हारे शरीर के लिए ये नुकशान भी साबित हो सकता है.

लड़का- जैसा आप कहे गुरुदेव

फिर वो लड़का वह से निकल कर सीधा अपने ध्यान लगाने वाले स्थान पर जाता है यानि की वो बर्फीली पहाड़ियों पर जाता है और ध्यान लगाने लगता है और ध्यान के माध्यम से उस गोले से थोड़ा थोड़ा शक्ति निकल कर अपने पुरे शरीर में फैलते जाता है ऐसे करीब दो महीने ध्यान लगाने के बाद आखिर कर वो उस गोले से पूरी शक्ति निकल कर अपने पुरे शेर में फैला देता है.

इसके बाद वो स्पेस शक्ति का अभ्यास करने लगता है करीब 1 महीना और अभ्यास करने के बाद वो स्पेस शक्ति पर पूरी तरह से महारथ हासिल कर लेता अब वो टेलिपोर्ट हो कर एक जगह से दूसरे जगह पर आसानी से पहुंच सकता था और साथ में hi वो इस शक्ति को ऊर्जा के रूप में बदल कर किसी पर वॉर भी कर सकता था.

इतना कुछ हासिल करने के बाद वो गायब हो कर आश्रम पहुँचता है और फिर गुरुदेव से मिलता है और बोलता है.

लड़का- गुरुदेव मैंने स्पेस शक्ति पर पूरी तरह से महारथ हासिल कर लिया है.

गुरुदेव- बहुत अच्छा पुत्र मुझे तुमसे यही उम्मीद थी.

अब यहाँ तुम्हारी तुम्हारी शिक्षा सम्पत होती है हमारे पास जितना भी ज्ञान था वो सारा ज्ञान मैंने तुम्हे दे दिया है अब मेरा ऐसा कुछ भी नहीं बचा जो मई तुम्हे सीखा सकता हु.

अब समय आ गया है की तुम अपने कर्त्तव्य के मार्ग पर आगे बढ़ो और इस संसार कोई बुराइयों और काली शक्तियों से मुक्त करो.

तुम्हारा एक और कर्त्तव्य है की तुम अपने परिवार को ढूंढो वो लोग न जाने कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रहे है तुम्हारे परिवार पर एक बहुत बड़ी मुसीबत आने वाली है और उस मुसीबत से उन्हें तुम्ही निकल सकते हो.

लड़का- जैसी आपकी आज्ञा गुरुदेव परन्तु मई तो अपने परिवार के बारे में कुछ भी नहीं जनता तो मई उन्हें ढूंढूंगा कैसे और अगर मई उन्हें खोज भी लिया तो वो लोग मुझे पहचानेगे कैसे.

जबसे मुझे होश आया है तब से मई खुद को इसी आश्रम में पाया हु न तो मुझे मेरा नाम पता है न खंडन तो ाफी बताइये की मई कैसे अपने परिवार के बारे में पता करुंग.

गुरुदेव- मई तो तुम्हे ज्यादा कुछ नहीं बता सकता लेकिन इतना तो जरूर बता सकता हु की तुम्हारा परिवार मुंबई में रहता है अब ये तुमपे है की तुम उन्हें कैसे ढूंढोगे और रही बात पहचानने का तो एक खून अपने दूसरे खून को पहचान hi लेता है जब तुम उनके पास जाओगे तो तुम्हे जरूर कोई अनुभूति होगी बस तुम्हे उस अनुभूति पहचानना होगा.

और रही बात तुम्हारे नाम का तो तुम्हारा नाम प्रतिक है और तुम्हारे खंडन के बारे में तुम्हे hi पता करना होगा.

(इस लड़के का नाम प्रतिक है)

प्रतीक- गुरुदेव मुझे बस आप ये बता दीजिये की मई यहाँ पर कैसे आया था और मुझे इस आश्रम में आने से पहले का कुछ यद् क्यों नहीं है.

गुरुदेव- ( कुछ सोचते हुए) पुत्र आज से करीब 15 साल पहले तुम मुझे एक नदी किनारे बेहोश मिले थे और तुम्हारे सर पर गहरी चोट लगी हुयी थी और उसी चोट के कारन तुम्हारा यादास्त चला गया था.

प्रतिक- तो क्या वो यदि मुझे कभी नहीं मिलेगी गुरुदेव.

गुरुदेव- जब तुम अपने परिवार से मिलोगे तो वो यदि भी तुम्हे मिल जाएगी.

प्रतिक- गुरुदेव मेरे लिए कोई आज्ञा.

गुरुदेव- आज्ञा तो नहीं है पुत्र परन्तु कोई भी शिक्षा बिना गुरु दक्षिणा के सम्पूर्ण नहीं होता है इस लिए तुम्हे गुरु दक्षिणा देना होगा.

प्रतिक- आज्ञा करे गुरुदेव मई गुरु दक्षिणा में अपना जान भी देने के लिए तैयार हु.

गुरुदेव- मुझे तुम्हारा जान नहीं चाहिए पुत्र मैंने किसी को एक बचन दिया था बस तुम्हे गुरु दक्षिणा में मेरा वो बचन पूरा करना है.

प्रतिक- आप मुझे उस बचन के बारे में बताइये गुरुदेव आपका ये शिष्य अपनी जान दे कर भी आपकी बचन को पूरा करेगा.

गुरुदेव- दरअसल बात ऐसी है पुत्र की आज से कुछ साल पहले मेरे पास एक ब्यक्ति आया था वो ब्यक्ति को एक गंभीर बीमारी थी तो मैंने उसके बीमारी को ठीक कर दिया था जिससे खुस हो कर उसने इस आश्रम में 2 सालो तक रह कर मेरा बहुत सेवा किया तो मैंने उससे कुछ मांगने के लिए बोलै तो मुझसे बोलै की मई अपने पोती की शादी आपके सबसे प्रिये शिस्य से करना चाहता हु तो मैंने उसे बचन दे दिया था.

अब तुम्हे वही बचन को उसके पोती से शादी कर के पूरा करना है.

गुरुदेव के बात सुन कर प्रतिक चौक गया और वो थोड़ा परेशां होते हुए बोलै.

प्रतिक- लेकिन गुरुदेव ये कैसे संभव हो सकता है मैंने जिस लड़की को कभी देखा नहीं उस लड़की से सदी कैसे कर लू और अगर मई शादी के लिए तैयार भी होगया तो क्या वो लड़की मुझसे शादी करेगी.

और मन लिया वो मुझसे शादी कर भी ली तो मई उसको रखूँगा कहा और खिलाऊंगा क्या क्यों मेरे पास तो न रहने का कोई ठिकाना है और न hi मेरे पास धन दौलत है की मई उसे अच्छे से कुछ खिला भी सकूंगा.

गुरुदेव- सब शाम्भव है पुत्र तुम्हे अपने गुरु के बचन को निभाना hi होगा और यही मेरा गुरु दक्षिणा भी होगा रही उस लड़की की बात तो वो उसके दादा के ऊपर है अगर वो तुमसे शादी के लिए मन जाते है तो ठीक है नहीं तो मेरा बचन वही समाप्त हो जायेगा.

रहा बात रहने का और अपने जीविका चलने का तो वो तुम्हे hi सोचना पड़ेगा.

प्रतिक- ठीक है गुरुदेव ये आपका शिस्य आपके बचन को जरूर पूरा करेगा.

गुरुदेव- और है तुम अकेले नहीं जा रहे हो तुम्हारे साथ तुम्हारा पांचो दोस्त भी जायेंगे.

प्रतिक-( खुस होते हुए) क्या मेरे साथ कारन रोहन दीपक शंध्या और दीप्ती भी जायेंगे.

गुरुदेव- है पुत्र वो सब तुम्हारे साथ hi जायेंगे और तुम्हारे हर फैसले में वो लोग तुम्हारे कदम से कदम मिला कर चलेंगे.

अब थोड़ा ये लोग के बारे में भी बता देता हु.

कारन

प्रतिक का दोस्त ये भी बचपन से hi आश्रम में रह कर शिक्षा ग्रहण कर रहा है इसे दुनिया के सरे हथियार चलने आते है और ये दुनिया के हर युद्ध कला में महारथ हासिल कर लिया है इसे कोई भी हरा नहीं सकता लेकिन ये बार बार प्रतिक से हारता आ रहा है.

इसके पास पांच तत्त्व में से 1 तत्त्व है अग्नि तत्त्व.

रोहन

प्रतिक का दोस्त ये भी बचपन से hi आश्रम में रह कर शिक्षा ग्रहण कर रहा है इसे दुनिया के सरे हथियार चलने आते है और ये दुनिया के हर युद्ध कला में महारथ हासिल कर लिया है.

ये थोड़ा स्वभाव से चंचल और मजाकिया है लेकिन इसका दिमाग बहुत तेज़ है ये रणनीति बनाने में माहिर है इसके पास वायु तत्त्व है ये वायु को काबू कर सकता है.

दीपक

प्रतिक का दोस्त ये भी बचपन से hi आश्रम में रह कर शिक्षा ग्रहण कर रहा है इसे दुनिया के सरे हथियार चलने आते है और ये दुनिया के हर युद्ध कला में महारथ हासिल कर लिया है.

ये थोड़ा गंभीर किशम का आदमी है ये ज्यादा किसी से बाटे नहीं करता बस ये प्रतिक से ज्यादा क्लोज है ये अपने आप को प्रतिक का रक्षक मंटा है ये हमेशा प्रतिक के साथ साये की तरह रहता है इसके पास 2 तत्त्व है बिजली तत्त्व और पृथ्वी तत्त्व.

शंध्या

प्रतिक का दोस्त के साथ साथ कारन में गर्लफ्रेंड भी है ये भी बचपन से hi आश्रम में रह कर शिक्षा ग्रहण कर रही है इसे दुनिया के सरे हथियार चलने आते है और ये दुनिया के हर युद्ध कला में महारथ हासिल कर ली है.

इसके पास जल तत्त्व है.

दीप्ती

प्रतिक का दोस्त के साथ साथ रोहन की गर्लफ्रेंड भी है ये भी बचपन से hi आश्रम में रह कर शिक्षा ग्रहण कर रही है इसे दुनिया के सरे हथियार चलने आते है और ये दुनिया के हर युद्ध कला में महारथ हासिल कर ली है

इसके पास बिजली तत्त्व है.

ये पांचो अनत है जब ये छोटे थे तब इन्हे यहाँ लाया गया था इनको भी शिक्षा गुरुदेव ने hi दिया है ये लोग प्रतिक को अपना भाई मानते है और उसके लिए जान भी देने को तैयार रहते है.

गुरुदेव- प्रतिक पूर्ति तुम जाओ और जाकर अपने दोस्तों से मिल लो और यहाँ से जाने की तयारी करो.

प्रतिक- जी गुरुदेव.

(यहाँ से प्रतिक के जगह मई लिखूंगा)

इसके बाद मई वह से सीधा अपने दोस्तों से मिलने चला जाता हु मुझे उनलोगो से मिले भी बहुत समय हो गया था मई यहाँ से निकल कर आशाराम के बहार बने एक तालाब पर चला जाता हु जहा पर वो पांचो बैठ कर बाटे कर रहे थे जब मई वह पर पंहुचा तो वो लोग मुझे देख कर खुश हो गए और भागते हुए आ कर मेरे गले लग गए.

कारन- क्या तुमने वो हासिल कर लिया जिसके लिए तुम हम लोगो से इतने दिन नहीं मिले.

दीप्ती- ये तुम भी किस्से पूछ रहे हो इस धरती पर ऐसा कोई चीज नहीं जिसे हमारा प्रतिक हासिल न कर सके.

मई- है भाई मैंने उसे हासिल कर लिया

रोहन- चलो अच्छा है की तुमने वो हासिल कर लिया गुरुदेव को तुमसे बहुत आसा थी.

शंध्या- तो अब आगे का क्या प्लान है.

मई- गुरुदेव बोल रहे थे की अब हमारा यहाँ का शिक्षा समाप्त हो गया है इस लिए अब हम सब को कल मुंबई के लिए निकलना है.

कारन- वह तो क्या अब हम यहाँ से जा रहे है.

मई- है अब हमें यहाँ से जाना होगा.

दीपक- मुंबई hi क्यों और भी तो कही जा सकते है.

मई- है जा सकते है लेकिन वह पर गुरुदेव का कुछ काम करना है.

दीप्ती- क्या काम करना है.

मई उनलोगो को वो साडी बाटे बताता हु जो गुरुदेव ने मुझे बताई थी.

शंध्या- लेकिन गुरुदेव ऐसा कैसे कर सकते है.

रोहन- गुरुदेव ने कुछ सोच कर hi ऐसा करने के लिए बोलै होगा.

कारन- है ये तो है.


मई- ठीक है फिर कल हम सब यहाँ से निकलेंगे तुमलोग अपना अपना तयारी कर लेना.
 
अपडेट 3


मई अपने दोस्तों से बात कर के अपने रूम में चला गया फिर थोड़ी देर ध्यान लगाया और सो गया.

दूसरे दिन सुबह उठ कर पहले ध्यान लगाया और गुरुदेव से मिलने चला गया.

मई- प्रणाम गुरुदेव

गुरुदेव- यशश्वी भाव पुत्र.

मई- गुरुदेव अब मुझे आज्ञा दीजिये मई यहाँ से निकलने के लिए तैयार हु.

गुरुदेव- पुत्र तुम्हे यहाँ से सीधा मुंबई जाना है और वह जाकर तुम्हे अपना नामांकन मुंबई बिस्वा विद्यालय में करवाना है (एक लेटर देते हुए) ये लेटर तुम उस बिस्वा विद्यालय के प्रधानाध्यापक को दे वो तुम लोगो का नामांकन अपने बिस्वा विद्यालय में कर देगा.

(दूसरा लेटर देते हुए) और ये लेटते तुम्हे नारायण मल्होत्रा को देना है वो मुंबई के एक जानेमाने बिज़नेस मन है अगर वो इस लेटर को पढ़ कर तुम्हारा सदी अपने पोती से करा देते है तो ठीक है अन्यथा तुम मेरे गुरु दक्षिणा से आजाद हो जाओगे.

मई- ठीक है गुरुदेव और कोई आज्ञा गुरुदेव.

गुरुदेव- पृथ्वी पर काली शक्तियों का और बुरे लोगो का कुछ ज्यादा hi प्रभाव पड़ने लगा है इस लिए तुम्हे इन सब का खत्म करना होगा और अच्छे का रक्षा करना होगा.

और ये सब करने के लिए तुम्हे शक्ति के साथ साथ अपना एक अलग पहचान भी बनाना होगा और इसके लिए तुम्हे चाहिए धन क्युकी तुम हर जगह पर अपना शक्तियों को नहीं दिखा सकते.

मई- ठीक है गुरुदेव मई आपके बातो को यद् रखूँगा.

गुरुदेव- और है तुम वह पर एक नार्मल इंसान बन कर hi रहोगे एक बात यद् रखना जब बहुत ज्यादा जरुरी न हो जाये तुम अपने दिव्या शक्तियों का इस्तेमाल नहीं करोगे.

तुम दिव्या शक्तियों का इस्तेमाल सिर्फ काली शक्तियों के खिलाफ hi करोगे और आम इंसान के साथ तुम सिर्फ अपना शारीरिक बल का hi प्रयोग करोगे.

मई- जैसी आपकी आज्ञा गुरुदेव.

गुरुदेव- ठीक है तुम जा सकते हो और है जाने से पहले ये कुछ चीजे है जो तुम्हारी है जब तुम मिले थे तो ये चीजे तुम्हारे साथ hi थी.

इसके बाद गुरुदेव ने मुझे एक लॉकेट और एक डायमंड दिया जिसे लेकर मई वह से अपने दोस्तों के पास चला आया.

मई उस लॉकेट को अपने गले में पहन लिया और उस डायमंड को अपने सामान के साथ रख लिया इधर मेरे सरे दोस्त भी वह से निकलने के लिए अपना अपना तयारी कर लिए थे ये देख कर मैंने बोलै.

मई- दोस्तों हम मुंबई तो जा रहे है लेकिन वह पर हमें अपने शक्तियों को सबसे छुपा कर रखना होगा अगर वह हमें किसी मुश्किल से सामना हो गया और वो कोई मामूली इंसान हो तो हम सिर्फ अपना शारीरिक शक्ति का hi उसे करेंगे हम अपने दिव्या शक्तियों का उसे सिर्फ काली शक्तियों से लड़ने के लिए hi करना होगा.

कारन- ठीक है भाई तुम जैसा बोल रहे हो हम वैसा hi करेंगे.

मई- और है हमलोग वह पर अनजान की तरह रहेंगे वह पर जाने के बाद न मई तुम्हे जनता हु और न तुम लोग मुझे हम लोग वह जाने के बाद चार गट में बात जायेंगे

और जब जरुरत होगी तो हम आपस में टेलिपाथी से बात कर लेंगे.

मई और दीपक अकेले अकेले रहेंगे कारन और संध्या एक साथ और रोहन और दीप्ती एक साथ रहेंगे.

हम सब को एक अलग अलग बिज़नेस तैयार करना होगा और ये तुम कैसे करते हो ये तुमपर है.

पांचो एक साथ- हम समझ गए भाई हम ऐसा hi करेंगे.

मई- तो ठीक है अब हम चलते है.

मुंबई इंडिया का एक सुन्दर सा सहर जिसे लोग दिलवालो का सहर भी कहते है इसी सहर में एक बांग्ला है जिसका नाम है मल्होत्रा हाउस उसी मल्होत्रा हाउस के एक रूम में एक लड़की सोई हुयी थी तभी वह पर एक औरत आती है और बोलती है.

औरत- देखो इस महारानी को ये अभी तक सो रही है पता नहीं क्या होगा इस लड़की का.

(उस लड़की को उठाते हुए बोलती है)

शनाया बीटा वो शनाया बीटा चलो जल्दी से ुतो देखो तुम्हारे सोल्लगे जाने का समय हो गया है.

ये है शनाया मल्होत्रा अपने कहानी का नायिका और ये औरत जो उनको उठा रही है ये है शनाया का माँ पुस्पा मल्होत्रा.

बार बार पुस्पा अपनी बेटी शनाया को हिला कर जगती है जिससे परेशां हो कर शनाया बोलती है.

शनाया- क्या है माँ आप चैन से सोने भी नहीं देते प्लीज माँ थोड़ा सा और सोने दीजिये न.

पुस्पा- नहीं बिलकुल नहीं अब तुम नहीं सो सकती है क्युकी तुम्हारे सोल्लगे का समय हो गया है.

शनाया सोल्लगे के नाम सुन का तुरंत अपने बीएड से उठ जाती है और अपने माँ से पूछती है.

शनाया- टाइम क्या हुआ है माँ.

पुष्प- अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है बस 9 hi बजे है.

शनाया- क्या 9 बज गए माँ अपने मुझे पहले क्यों नहीं जगाया अब तो मई लेट हो जाउंगी.

पुष्प- मई तुमको कब से जगा रही हु लेकिन तुम्हारी ये नींद है जो टूटेगी तब न.

इसके बाद शनाया जल्दी से बाथरूम जाकर फ्रेश होती है और जल्दी जल्दी से तैयार होकर बिना कुछ खाये hi सोल्लगे के लिए निकल जाती है.

इधर मई भी अपने दोस्तों के साथ मुंबई पहुंच गया था मुंबई पहुंचने के बाद हमलोग अलग अलग हो गए फिर मई वह से पैदल hi निकल गया मई वह चारो तरफ देखते हुए जा रहा था क्युकी मई भीड़ भाड़ वाले इलाके में पहली बार आया था मेरे सरे दोस्त सहर में आते जाते रहते थे लेकिन मई सिर्फ अपने ट्रेनिंग पर hi ध्यान देता था इसलिए मई कभी आश्रम से बहार नहीं निकला.

जब मई मुंबई आया तो यहाँ के चकाचौंध और भीड़ भाड़ को देख कर चौक गया मुझे यहाँ के इमारते देख कर आश्चर्य हो रहा था.

इधर जब मई वह पर सरे चीजों को घूम घूम कर देख रहा था तो वही सरे लोग मुझे घूम घूम कर देख रहे थे क्युकी मेरे पहनावा hi ऐसा था मई एक धोती और कुरता पहना हुआ था मेरे औरतो के जैसे बड़े बड़े बल थे जो मई छोटी बनाये हुए थे.

जब वो लोग मुझे इस तरह से गुर कर देख रहे थे तो मई सोचने लगा की ये लोग मुझे ऐसे क्यों देख रहे है क्या ये लोग मेरे पहनावे से मुझे जज कर रहे है फिर कुछ सोच कर उसने उन पर ध्यान देना छोड़ दिया और वह से आगे बढ़ गए वो अभी सड़क के किनारे किनारे चल रहा था तभी वह से एक गाड़ी बहुत hi स्पीड में निकला और आगे जाकर डिविडेंड से टकरा गया एक्सीडेंट बहुत तगड़ा हुआ था उस गाड़ी में जो भी होगा उसका बचना असंभव था.

उस गाड़ी के पास लोगो के भीड़ जमा होने लगा तो मैंने भी वह जा कर देखने का मन बनाया जब मई वह पंहुचा तो देखा की उस गाड़ी का ड्राइवर वही मर गया था और उसके पिछले सीट पर एक अधेड़ उम्र का आदमी बैठा हुआ था वो काफी घायल हो गया था और वो बेहोश था.

वह पर जितने भी आदमी थे सब खड़ा हो कर सिर्फ तमाशा देखा रहे थे उस अधेड़ उम्र के आदमी को कोई आगे बढ़ कर निकलने नहीं गया ये देख कर मुझे बहुत दुःख हुआ की ये दुनिया कितना आपःस्वार्थी है यहाँ किसी को किसी से कोई मतलब नहीं है यहाँ बस सब दुसरो को देख कर उनका मज़ाक बनाते है.

फिर मई आगे बढ़ कर उस अधेड़ उम्र के आदमी को बहार निकला और फिर उस ड्राइवर को भी गाड़ी से बहार निकला उस अधेड़ उम्र के आदमी को बहुत ज्यादा छोटे आयी थी इस लिए उसका खून भी बहुत बढ़ रहा था इस लिए मई उसके कुछ नशो को दबाया तो उस आदमी का खून बहाना बंद हो गया.

इधर उन सब में से कोई एम्बुलेंस को कॉल कर दिया था इस लिए वह तुरंत hi एक एम्बुलेंस पहुंच गया फिर मैंने उन दोनों आदमी को एम्बुलेंस चढाने में मदद की वह पर पुलिस भू पहुंच गयी थी जब पुलिस वालो ने मुझे उस आदमी के इतना मदत करते हुए देखा तो एक पुलिस वाले ने मुझसे बोलै.

पुलिस- भाई आज के ज़माने में कोई किसी का मदत नहीं करता फिर भी तुम इनका मदत कर रहे हो ये तुम्हरा कोई रिस्तेदार है क्या.

मई- नहीं ये मेरा कोई रिस्तेदार नहीं है बस मई इनका मदत इंसानियत के नाते कर रहा था.

पुलिस- आज के ज़माने में तुम जैसा आदमी मिलना बहुत मुश्किल है जो दुसरो की मदत बिना कोई स्वार्थ के करे.

अभी हमलोग आपस ने बाटे कर hi रहे थे की तभी एम्बुलेंस के साथ में आया एक डॉक्टर बोलै.

डॉक्टर- ये आदमी इतना घायल है फिर भी इसका खून क्यों नहीं बाह रहा है.

डॉक्टर के बात सुन कर उस भीड़ में से hi एक आदमी ने बोलै.

आदमी- मैंने देखा की ये गवर जैसे दिखने वाला आदमी ने उस आदमी को गाड़ी से निकलने के बाद उस आदमी के साथ कुछ किया था तभी उसका खून बहाना बंद हो गया था जरूर ये उस आदमी को मरना छह रहा होगा.

मई उस आदमी के बात सुन कर चौक गया और उसे घर कर देखने लगा मेरा मन कर रहा था की अभी मई उस आदमी को अच्छा सबक सिखायु लेकिन कमजोरो पर हाथ उठाना ये मेरे उसूल के खिलाफ था इस लिए मई उसको इग्नोर कर के उस डॉक्टर से बोलै.

मई- डॉक्टर साहब मैंने hi उस आदमी के कुछ नशो को दबा कर उसका खून रोका है.

डॉक्टर- ( चौकते हुए) क्या सच में लेकिन तुम ऐसे कैसे कर पाए कही तुम एक्यूपंक्चर बिधि तो नहीं जानते.

मई- अपने ठीक सोचा डॉक्टर मुझे थोड़ा बहुत एक्यूपंक्चर बिधि का ज्ञान है.

डॉक्टर- वेल दोने यंग बॉय मुझे तुमसे मिल कर खुसी हुयी मेरा नाम डॉ. अमित है और सिटी हॉस्पिटल में काम करता हु कभी मेरी जरुरत हो तो मुझे यद् जरूर करना.

मई- धन्यवाद डॉक्टर अमित मुझे आपसे मिल कर कृषि हुयी वैसे मेरा नाम प्रतिक है.

फिर डॉक्टर उस आदमी को एम्बुलेंस में डालते है और फिर मुझसे पूछते है.

डॉ. अमित- क्या इस मरीज के साथ कोई और भी है.

मई- नहीं डॉ. अमित इस गाड़ी में सिर्फ ये ड्राइवर और ये आदमी hi थे.

डॉ. अमित- वह तो जबतक इस मरीज के घरवाले नहीं आ जाते आपको मेरे साथ हॉस्पिटल चलना होगा.

मई- ठीक है डॉ. अमित चलिए मई चलने के लिए तैयार हु.

इसके बाद मई भी उस एम्बुलेंस में बैठ कर उस मरीज के साथ हॉस्पिटल आ जाता हु हॉस्पिटल आने के बाद डॉक्टर ने उस आदमी के मोबाइल से hi उसके घर पर इन्फॉर्म कर देते है और फिर उस आदमी का इलाज सुरु कर देते है थोड़ी देर बाद एक आदमी आता है जो उस अधेड़ उम्र के आदमी का बीटा था जब वो वह आ जाता है तो मई डॉ. को बोल कर वह से जाने लगता हु अभी मई उस हॉस्पिटल से बहार hi निकलने वाला था की तभी कुछ वार्डबॉय एक स्ट्रेचर पर एक 10 साल के बचे को लेकर आ रहे थे और उस बचे के साथ एक आदमी और एक औरत भी थी उस औरत के रो रो कर बुरा हल था वो औरत और आदमी बार बार डॉक्टर डॉक्टर चीला रहे थे.

मई जब उस लड़के को देखा तो चौक गया क्युकी उस लड़के की आँख ऊपर की और उठी हुयी थी और वो लड़का बेहोश था जब मैंने उस लड़के को अपने दिव्या दृष्टि से देखा तो मुझे पता चल गया उसे क्या बीमारी है दरअसल उस लड़के को एक गंभीर बीमारी थी जिसे सायद hi कोई डॉक्टर ठीक कर सकता था.

मई ये देख कर वह पर रुक गया और देखने लगा की डॉक्टर इस बीमारी का इलाज कैसे करते है कुछ देर बाद उस लड़के को ऑपरेशन थिएटर में लेके जाया गया और डॉक्टर लोग जल्दी जल्दी से उस बचे की इलाज करने लगे कुछ देर तक इलाज करने के बाद डॉक्टर निराश हो कर बहार आ गए और उस आदमी से बोले.

डॉक्टर- सर मुझे ये समझ में नहीं आ रहा की आपके लड़के को हुआ क्या है मई उसके बीमारी को पकड़ hi नहीं पा रहा हु.

डॉक्टर के बात सुन कर वो आदमी भड़क गया और घुसे में बोलै.

आदमी- जब तुमलोग एक बीमारी का पता hi नहीं कर पा रहे तो तुम लोगो को डॉक्टर किसने बना दिया अगर मेरे बेटे को कुछ भी हुआ न तो न तुम रहोगे और न hi तुम्हारा ये हॉस्पिटल.

डॉक्टर- देखिये सर मई कोशिश कर रहा हु और मैंने आपके लड़के का ब्लड सैंपल भी डायग्नोसिस के लिए भेज दिया है अब रिपोर्ट आने के बाद hi पता चलेगा की आपके लड़के को क्या हुआ है.

आदमी- मुझे कुछ नहीं सुन्ना है डॉक्टर मुझे बस मेरे बेटे को ठीक कर दो नहीं तो तुम नहीं जानते की तुम लोगो के साथ क्या होगा.

मई वह खड़ा हो कर उनलोगो के बात को कबसे सुन रहा था जब मुझसे बर्दास्त नहीं हुआ तो मैंने बोलै.

मई- आपके लड़के को ये लोग कभी भी बता नहीं सकते क्युकी उसकी बीमारी को ये लोग पकड़ hi नहीं सकते.

डॉक्टर- ये लड़के तुम ये क्या बोले जा रहे हो

(मुझे ऊपर ने निचे तक देखते हुए) तुम तो देखने में एकदम गाओ देहात का गवर लगते हो तुम्हे कैसे पता की हम उसका बीमारी को पकड़ नहीं सकते तुम चुप चाप जाओ और हमें अपना काम करने दो.

मई- मई भले hi गाओ देहात से आया हु लेकिन मुझे पता है की उस लड़के को कोण सी बीमारी है और उसे कैसे ठीक किया जा सकता है आप लोग उसे यहाँ रख कर सिर्फ जाँच hi करते रह जायेंगे लेकिन उस लड़के को बचा नहीं पाएंगे.

मेरे बात को सुन कर उस आदमी को गुसा आ गया और वो घुसे में बोलै.

आदमी- तुम ये क्या बकवास लगाए हुए ये लोग इतने बड़े बड़े डॉक्टर है और ये लोग hi मेरे बेटे को बचा नहीं सकेंगे.

अगर तुम एक शब्द और बोले तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा.

मई- मेरा काम था आपको बताना आप मने या न मने लेकिन इस लड़के को मेरे शिवा कोई और नहीं ठीक कर सकता है.

आदमी- बहुत हो गया तेरा बकवास तुम्हे यहाँ आने किसने diya(fir डॉक्टर को) डॉक्टर अपने गॉर्ड को बुलाओ और इस लड़के को ढके मर कर बहार निकालो.

इस आदमी के साथ जो औरत थी वो कबसे चुप चाप रोये जा रही थी वो मेरे पास आकर बोली.

औरत- क्या आप सच बोल रहे हो क्या आप मेरे बेटे को बचा सकते हो.

मई- है मई आपके बेटे को बचा सकता हु.

डॉक्टर- मैडम आप कहा इस गवर का बात सुन रही हो ये ऐसे hi बोल रहा है जरूर ये कोई ठग होगा आजकल लोग ऐसे hi लोगो को लूटना स्टार्ट कर दिए है.

औरत- तुम चुप रहो तुमसे तो कुछ हो नहीं रहा है और जो मेरे बेटे को बचने आया है उसे भी तुम यहाँ से भागना चाहते हो.

डॉक्टर- मैडम मेरे बात को मानिये ये एक ठग hi है अच्छा चलिए मानते है ये एक डॉक्टर है और आपके बेटे को बचा लेगा तो इससे पूछिए की ये डॉक्टर की डिग्री कहा से लिया है ये पढ़ा भी है या सचमुच का गवर hi है.

उस डॉक्टर के बात सुन कर वो औरत सोच में पद जाती है और फिर मुझसे पूछती है.

औरत- क्या तुम्हारे पास डॉक्टर का डिग्री है तुम कहा से पढ़ाई किये हो.

मई- नहीं मैडम मेरे पास कोई डिग्री नहीं है लेकिन मेरे गुरुदेव ने मुझे आयुर्वेदिक का बहुत सारा ज्ञान दिया है मई सच बोल रहा हु मई आपके बेटे को बचा लूंगा.

डॉक्टर- देखा न मैडम इसके पास कोई डिग्री नहीं है ये झूठ बोल रहा है ये आपको लूटने आया है.

डॉक्टर के बात सुन कर उस औरत को डॉक्टर पर बिस्वास होने लगा और वो मुझे घुसे से घूरते हुए बोली.

औरत- छी है तुम जैसे इंसान पर तुम इस वक़्त भी मुझे लूटने आये हो तुम चुप चाप यहाँ से चले जाओ नहीं तो मई पुलिस को बुला लुंगी.

मई- ठीक है मैडम मई जाता हु लेकिन मेरी एक बात यद् रखियेगा आपके लड़के के पास ज्यादा समय नहीं है अभी कुछ देर में hi आपके लड़के का हालत और ख़राब हो जायेगा उसे खून का उलटी होगा.

अगर आपका मन बदल जाये और मुझसे अपने बेटे का इलाज करवाने के लिए तैयार हो जाये तो मई बहार hi रहूँगा आप मेरे पास आ जाना.

इतना बोल कर मई वह से बहार निकल गया

 
अपडेट 4


मई हॉस्पिटल से बहार आ गया और हॉस्पिटल के सामने hi एक ठेले पर जाकर कुछ खाने लगा क्युकी मुझे भूख भी बहुत तेज़ लगा हुआ था.

इधर हॉस्पिटल में डॉक्टर उस बचे को इलाज करने में लगे हुए थे वो लोग हर मुमकिन इलाज कर लिए लेकिन उस बचे को थोड़ा भी फर्क नहीं पड़ा थोड़ी देर ऐसे hi उस बचे का इलाज चलता रहा लेकिन उसकी बीमारी ठीक होने के जगह उसकी हालत और ख़राब होने लगी.

उस लड़के के आँखों की पुतलिया ऊपर की और चढ़ गयी और उसके चेहरा पूरा सफ़ेद हो गया और देखते hi देखते वो बचा खून की उल्टिया करने लगा उसके डिल के धरकन भी रुक रुक कर चलने लगा ये देख कर सरे डॉक्टर और उस बचे के माँ बाप सब चौक गए उस बचे की माँ ने जब अपने बेटे की ऐसे हालत देखि तो उसका रो रो कर बुरा हल हो गया.

आदमी- वो वो लड़का सही बोल रहा था वो मेरे बेटे को ठीक कर सकता था लेकिन हमने उसकी बात न मन कर उसका इंसल्ट किया और उसे यहाँ से बहार निकल दिया.

औरत- है वो मेरे बेटे को बचा सकता था हमें उसे एक बार इलाज करने देना चाहिए था लेकिन हम इस डॉक्टर के बातो में आ कर उसका इंसल्ट कर के उसे यहाँ से भगा दिया.

आदमी- अगर मेरे बेटे को कुछ हो गया न तो मई इस डॉक्टर को छोडूंगा नहीं.

डॉक्टर- ममम मुझे ममम माफ़ कर दीजिये मैंने जो भी किया आपके बचे के लिए किया मुझे नहीं मालूम था की वो एक डॉक्टर भी हो सकता है है यद् आया उसने जाने से पहले बोलै था की वो बहार hi रहेगा अगर मन हो तो बुला लीजियेगा.

डॉक्टर के बात को सुन कर उस पति पत्नी को यद् आया की मई अभी बहार hi हूँगा तो वो तो दोनों तेज़ी से बहार की और भागे इधर मई आराम ठेले पर पाव भाजी का मज़ा ले रहा था मैंने ये सब जीवन में कभी नहीं खाया था लेकिन यहाँ पर इसे देख कर खाने का मन हुआ तो आकर खाने लगा.

फिर थोड़ी देर बाद वो दोनों पति पत्नी मुझे खोजते हुए उस ठेले के पास पहुंच गए और अपने घुटनो के बल बैठ कर दोनों हाथ जोड़ते हुए बोले.

औरत- प्लीज प्लीज मेरे बेटे को बचा लो मई पागल थी जो बिना कुछ सोचे समझे आपको उल्टा सीधा बोल दिया उसके लिए हमें माफ़ कर दीजिये और हमारे बेटे को बचा लीजिये.

आदमी- हम तो माफ़ी के काबिल भी नहीं है लेकिन हो सके तो हमें माफ़ कर दीजिये और मेरे बेटे को बचा लीजिये अगर अपने मेरे बेटे को बचा लिया तो मई अपना सब कुछ आपको दे दूंगा.

मई चुप चाप उन लोगो के बात सुन रहा था फिर थोड़ा मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- मेरे पास कोई मेडिकल डिग्री नहीं है अगर आपके बचे को कुछ हो गया तो और वैसे भी मई एक फ्रॉड आदमी हु जो लोगो को लुटता हु अगर आपको कही लूट लिया तो.

औरत- प्लीज हमें माफ़ कर दीजिये हमें कोई मेडिकल डिग्री नहीं चाहिए बस मेरे बेटे को बचा लीजिये वो मेरा एकलौता बीटा है मई उसके लिए एक बार तो क्या 100 बार भी अपने पूरी धन को लुटाने के लिए तैयार हु.

मई- मुझे आपलोगो से कुछ भी नहीं चाहिए चलिए मई आपके बेटे का इलाज करता हु.

इसके बाद मई उन दोनों के साथ सीधा हॉस्पिटल के अंदर आ गया अंदर आने के बाद मई सीधा उस बचे के पास गया और उसे देखने लगा बचे का हालत बहुत ख़राब हो गया था जिसे देख मुझे बहुत गुसा आ रहा था मई घुसे में बोलै.

मई- आप लोगो के घमंड के कारन आज इस बचे का जान जा सकता था (फिर उस डॉक्टर को देखते हुए बोलै) और आपको जब इस बचे के बीमारी के बारे में मालूम hi नहीं था तो अपने इसे एंटीबायोटिक क्यों दिया क्या आप इस बचे का जान लेना चाहते थे क्या.

मेरे बात को सुन कर डॉक्टर का सर सरम से झुक गया और वो चुप चाप वही खड़ा रहा फिर मई अपने घुसे को संत करते हुए उस डॉक्टर से बोलै.

मई- अब जो होना था वो तो अपने कर दिया अब आप मुझे ये बताइये की आपके पास सिल्वर नीडल का सेट है आगे है तो आप उसे माँगा लीजिये.

डॉक्टर- है है लेकिन आप उसका क्या करेंगे.

मई- मई इस बचे का इलाज एक्यूपंक्चर बिधि से करूँगा जिसमे सिल्वर नीडल का उसे होता है.

मेरे बात को सुन कर वो डॉक्टर चौक गया फिर वो अपने एक नर्स को बोलै की वो जाकर एक सिल्वर नीडल का एक सेट लेकर आये.

इसके बाद वो नर्स जल्दी से गयी और एक सिल्वर नीडल 💉 के सेट लेकर आ गयी और मुझे दे दी मई उस सिल्वर नीडल का सेट लेकर उस बचे के पास गया और उसमे से कुछ नीडल निकला और उस बचे के सरीर में एक्यूपंक्चर बिधि से दाल दिया इसके बाद अपने सरीर के अश्विनी ऊर्जा को उस लड़के के शरीर में उस नीडल के माध्यम से डालने लगा कुछ देर ऐसे hi इलाज करने के बाद मैंने उस बचे के शरीर से सरे नीडल निकल लिए जैसे hi मई उस बचे के शरीर से वो नीडल निकला उस बचे ने फिर से खून का उल्टा किया लेकिन इस बार वो खून लाल नहीं बल्कि कला था ये देख कर सरे लोग चौक गए.

थोड़ी देर बाद उस बचे के हालत में सुधर आने लगा अब उस बचे के डिल की धरकन भी नार्मल हो गया था उसका चेहरा भी धीरे धीरे पहले जैसा हो गया अब वो बचा ठीक हो गया था.

डॉक्टर- ये तो चमत्कार हो गया आप सच में एक ग्रेट डॉक्टर है.

मई डॉक्टर के बातो को इग्नोर किया और उस बचे के पेरेंट्स से बोलै.

मई- अब आपके बचे की तबियत ठीक है अब ये खतरे से बहार है मई कुछ दवाइया लिख कर आपको देता हु वो दवा इसे देते रहिएगा ये कुछ hi दिन में पूरी तरह पहले जैसा हो जायेगा.

मेरे बात को सुन कर और अपने बचे को देख कर वो दो आदमी और औरत खुसी के मरे रोने लगे और मेरे सामने झुक गए.

आदमी- आज अपने जो भी हमारे लिए किया है मई उसे कभी नहीं भूलूंगा आप मुझे अपने पहले के किये गए बतमीज़ी के लिए माफ़ कर दीजियेगा.

औरत- अपने मेरे एकलौते बेटे को नया जीवन दिया है आज से आप मेरे लिए भगवन है मई भी अपने किये के लिए आपसे माफ़ी मांगती हु.

मई- अरे अरे आप दोनों ये क्या कर रही है प्लीज मुझे इंसान hi रहने दीजिये आप इस मामूली इंसान को भगवन बोल कर मेरे ऊपर पाप नहीं चढ़ाइये.

और मैंने आप दोनों पर कोई भी अहसान नहीं किया है क्युकी ये मेरा एक चिकित्सक होने का कर्त्तव्य है की मई अपने किसी भी मरीज़ को कुछ न होने दू.

आदमी- ये तो आपका बड़ापन है आज से आप मेरे छोटे भाई है आज से इस सहर में आपको कोई भी प्रॉब्लम हो बस मेरा नाम ले लीजियेगा.

मई ऑब्रे परिवार का वारिस हु मेरा नाम विशाल ऑब्रे है और ये मेरी पत्नी मधु ऑब्रे.

अगर आपको इस शहर में किसी भी चीज की जरुरत हो तो आप बस मुझे एक बार यद् कर लीजिये ये आपका बड़ा भाई आपके लिए हमेसा तैयार रहेगा.

मई- नहीं मुझे इसकी जरुरत hi नहीं पड़ेगी और अगर कभी ऐसा हुआ तो मई जरूर आपको यद् करूँगा वैसे मेरा नाम प्रतिक है.

ऑब्रे परिवार मुंबई के चार बड़े खानदानो में से एक है इनका बिज़नेस पुरे इंडिया में फैला हुआ है.

अब तक उस बचे को भी होश आ गया था अपने बचे को होश में देख कर विशाल और मधु को खुसी के मरे उनके आँखों से आंसू निकलने लगे वो भागते हुए अपने बचे के पास गए और दोनों उसको गले लगा लिए.

उनको अपने बचे के लिए इतना खुस देख कर मेरे चेहरे पर एक संतोष भरी मुस्कान आ गयी फिर मई चलते हुए उस बचे के पास गया और प्यार से उसके सर पर अपना हाथ फेरते हुए बोलै

मई- तो ठीक सर मई अब चलता हु

विशाल ने मेरे बात को सुन कर मुझे देखा और फिर अपने पॉकेट से एक कार्ड निकल कर मेरे तरफ बढ़ाया.

मई- ये क्या है सर.

विशाल- ये मेरे तरफ से तुम्हारे लिए थैंक यू है.

मई- लेकिन ये है क्या.

मेरे बात को सुन कर विशाल चौक गया मुझे अजीब नजरो से देखते हुए बोलै.

विशाल- क्या सच में तुम्हे मालूम नहीं है की ये क्या है.

मई- है सच में मुझे नहीं पता की ये क्या है मई तो बचपन से हिमालय पर रहा हु मुझे कैसे पता होगा की ये क्या है.

मेरे बात को सुन कर वह सरे लोग चौक गए.

विशाल- क्या सच में तुम हिमालय से आये हो.

मई- है सर मई झूठ क्यों बोलूंगा.

मेरे बात को सुन कर उसने एक कॉल किया और फिर मेरे से बोलै.

विशाल- ये एक एटीएम कार्ड है और इसमें मैंने करीब 5 करोड़ रूपए रखे है ये अब तुम रख लो मेरे तरफ तुम्हारे लिए ये एक छोटा सा गिफ्ट है

मई उनकी बातो को सुन कर चौक गया मई भले hi कभी एटीएम कार्ड नहीं देखा था लेकिन मई उसके बारे में पढ़ा था और मई सबसे ज्यादा इस लिए चौका था की इन्होने एक छोटी सी इलाज के लिए मुझे 5 करोड़ दे रहे है.

मई- सॉरी सर लेकिन मई ये नहीं ले सकता मैंने आपके लड़के को पैसे के लिए नहीं बचाया आप मेरी विद्या को पैसो से नहीं तौल सकते.

विशाल मेरे बात को सुन कर हड़बड़ा गया.

विशाल- नहीं नहीं आप गलत समझ रहे है मई आपको ये इलाज के बदले नहीं दे रहा मई ये अपने छोटे भाई को अपने तरफ से एक छोटा सा गिफ्ट दे रहा हु और मई न नहीं सुनुँगा आपको ये लेना hi होगा.

मई विशाल के बात सुन कर उसे बहुत समझने की कोशिश किया लेकिन वो नहीं मन आखिर में मुझे उनके जिद के आगे झुकना hi पड़ा फिर मई उनसे वो कार्ड ले कर अपने सामान के साथ रख लिया.

मई- तो ठीक है सर अब मई चलता हु.

विशाल- इतनी भी क्या जल्दी है बस थोड़ी देर और रुक जाओ.

जैसे hi विशाल अपना बात पूरा किया तभी रूम का दरवाज़ा खुला और एक लड़की वह आयी और विशाल के हाथो में कुछ दे कर चली गयी फिर वो सामान मेरे हाथो में देते हुए बोलै.

विशाल- मई जनता हु की तुम हिमालय से आये हो इस लिए तुम्हारे पास मोबाइल भी नहीं होगा इस लिए मई अपने सेक्रेटरी से बोल कर तुम्हारे लिए एक नया फ़ोन विथ सिम कार्ड मंगवाया है ये लो.

मई- इसकी क्या जरुरत थी.

विशाल- जरुरत क्यों नहीं थी अगर मुझे बाद में तुमसे संपर्क करना होता तो मई कैसे करता इस लिए तुम्हे मई ये मोबाइल दे रहा हु.

मई विशाल के बात सुन कर उससे बहस नहीं किया और उस मोबाइल को अपने पास रख लिया फिर विशाल ने उस मोबाइल से अपने नंबर पर कॉल किया और मेरा नंबर अपने मोबाइल और अपना नंबर मेरे मोबाइल में सेव का दिया इसके बाद मई उन लोगो से बीड़ा लेकर वह से निकल गया जब मई बहार आया तो देखा की अभी भी लोग मुझे आते जाते हुए घर घर कर देख रहे थे.

मई- लगता है ये लोग मेरी पहनावे को देख कर ऐसे घर रहे है अगर मुझे इस सहर में रहना है तो मुझे इन जैसे hi बन कर रहना होगा.

फिर मई वह से सीधा एक सलून में गया और अपने बल और दाढ़ी को कटवाया इसके बाद मई एक कपडे के दुकान में जाकर अपने लिए 5 सेट सिंपल कपडा खरीद के उसे पहन कर आईने में खुद को देखा.

मई- हम्म मुझे पता hi नहीं था की मई इतना हैंडसम दीखता हु है कही मुझे मेरी hi नजर न लगे.

इतना बोल कर मई मुस्कुराने लगा फिर मई बैग के स्टोर में गया और वह से एक बैग और एक पर्स ले लिया इसके बाद मैंने अपने झोले से जोकि मई आश्रम से साथ लाया था उसमे से सामान को निकल कर अपने बैग में रख लिया और एटीएम कार्ड और साथ में कुछ पैसे भी थे जो मई आश्रम से hi लाया था उसे पर्स में रख लियाफिर मई शूज के स्टोर में जाकर खुद के लिए एक शू भी ले लिया और उसे पहन लिया.

मई- हम्म अब मई परफेक्ट लग रहा हु अब मुझे देख कर कोई बोल hi नहीं सकता है की मई गाओ देहात से या फिर किसी आश्रम से आया हु अब मुझे खुद के रहने के लिए एक घर भाड़े पर लेना होगा क्युकी मुझे कल से सोल्लगे भी ज्वाइन करना है.

इसके बाद मई वह से निकल कर एक घर ढूंढने लगा आखिर में शाम सैम होते होते मुझे एक छोटा सा घर मिल hi गया जिसका रेंट 5000 था और 20000 एडवांस था.

घर किराये पर लेने के बाद मई वही का एक सुपर मार्किट में जेक घर में उसे होने वाला सारा सामान ले लिया क्युकी अब मुझे यही रहना था तो खाने का भी बेवस्था तो करना hi था सारा सामान घर में सेट करने के बाद मई खुद के लिए खाना बनाया और खा कर सो गया.

दूसरे दिन सुबह उठ कर मई ध्यान लगाया मई यहाँ अपने दिव्या शक्तियों का ट्रेनिंग नहीं कर सकता था इस लिए मुझे केवल ध्यान से hi काम चलना पड़ा.

मई- मुझे एक ऐसी जगह देखनी पड़ेगी जहा मई ध्यान लगाने के साथ साथ अपने दिव्या शक्तियों का ट्रेनिंग भी कर सकू लेकिन मई पहले सोल्लगे जाता हु वह से आने के बाद देखूंगा क्या करना है.

फिर मई जल्दी से रेड्डी हुआ रूम से बहार आया और एक ऑटो ले कर सोल्लगे के लिए निकल गया जहा मई रूम किराये पर लिया था वह सोल्लगे आधे घंटे की दुरी पर था.

आधे घंटे के बाद मई सोल्लगे में पहुंच गया और फिर वह एक स्टूडेंट से प्रिंसिपल के केबिन पूछ कर सीधा प्रिंसिपल के केबिन में चला गया.

मई- मई ी के इन सर

प्रिंसिपल- यस कमिंग

मई- गुड मॉर्निंग सर

प्रिंसिपल- गुड मॉर्निंग बोलो क्या काम है

मई- एक्चुअली सर मई यहाँ एडमिशन लेने के लिए आया हु.

प्रिंसिपल- सॉरी तो से लेकिन यहाँ एडमिशन फुल हो गया है

मई- लेकिन सर पहले आप इस लेटर को तो पढ़ लीजिये.

फिर मई गुरुदेव के द्वारा दिए गए लेटर को प्रिंसिपल को दे दिया प्रिंसिपल उस लेटर को पढ़ कर चौक गए और मुझसे बोले.

प्रिंसिपल- तुमने पहले क्यों नहीं बोलै की तुम्हे गुरुदेव भेजे है लाओ अपना डॉक्यूमेंट दो तुम्हारा एडमिशन हो जायेगा.

मई- लेकिन सर अपने तो अभी बोलै था की एडमिशन फुल हो गया है.

प्रिंसिपल- गुरुदेव का मुझपे बहुत अहसान है इस लिए मई अपने कोटा वाला एडमिशन तुम्हे दे रहा हु.

फिर मई प्रिंसिपल को अपना सारा डॉक्यूमेंट दे दिया (जब मई आश्रम में था तो मई वही पास के सोल्लगे से डिग्री हासिल किया था ये सब गुरुदेव ने भविस्य के बारे में सोच कर किये थे) जा मैंने डॉक्यूमेंट दे दिया तो प्रिंसिपल ने मुझसे बोलै.

प्रिंसिपल- ठीक है तुम्हारा एडमिशन हो जायेगा तुम एक जानते बाद जाकर एडमिशन काउंटर से रिसिप्ट ले लेना.

मई- ठीक है सर.



इतना बोल कर मई प्रिंसिपल केबिन से निकल गया और जाने लगा अभी मई कॉरिडोर से बहार hi निकलने वाला था की तभी मई किसी से टकरा गया जिसके कारन वो शख्स निचे गिरने लगा जब मैंने देखा तो वो एक लड़की थी मई झट से उस लड़की को पकड़ लिया वो लड़की तो गिराने से बच गयी लेकिन मई गिर गया उसके प्यार में क्युकी वो लड़की बाला की खूबसूरत थी उसके नैन नक्श बहुत सुन्दर थे उसके आँखे किसी नागिन की जैसी नशीली थी न जाने कब मई उस लड़की के आँखों में खो गया ये मेरे साथ पहली बार हुआ था जब मई किसी को देख कर ऐसे खो गया था नहीं तो मई आज तक लड़कियों से दूर hi भागता था.
 
अपडेट 5


मई सोल्लगे के कॉरिडोर से होते हुए बहार जा hi रहा था की तभी मई किसी लड़की से टकरा गया जिसके कारन वो गिरने वाली थी इसलिए मई झट से उस लड़की को पकड़ लिया वो लड़की तो गिराने से बच गयी लेकिन मई गिर गया उसके प्यार में क्युकी वो लड़की बाला की खूबसूरत थी उसके नैन नक्श बहुत सुन्दर थे उसके आँखे किसी नागिन की जैसी नशीली थी न जाने कब मई उस लड़की के आँखों में खो गया ये मेरे साथ पहली बार हुआ था जब मई किसी को देख कर ऐसे खो गया था नहीं तो मई आज तक लड़कियों से दूर hi भागता था.

मई अभी उस लड़की में खोया हुआ hi था की तभी मुझे उस लड़की के तेज़ आवाज मेरे कानो में सुनाई दी.

लड़की- तुम अंधे हो क्या देख के नहीं चल सकते और मुझे ऐसे पकडे हुए क्यों हो छोडो मुझे.

Mai-(Badbadate हुए) सॉरी सॉरी मुझे माफ़ कर दीजिये मुझसे गलती हो गयी.

वो लड़की मुझे ध्यान से ऊपर से निचे तक देखती है फिर अपना मुँह सिकुड़ते हुए बोलती है.

लड़की- मई तुम जैसे लड़के को अच्छे से जानती हु पहले लड़की से जान बुझ के टकराते हो और फिर माफ़ी मांगते हो ब्लडी पुअर पीपल.

मई- देखिये मई आपसे गलती से टकरा गया और मई आपसे सॉरी तो बोल रहा हु न.

लड़की- तुम्हारे सॉरी का मई अचार दालु अगर मई अभी गिर जाती और मुझे छोट आ जाता तो.

उस लड़की के साथ एक और लड़की भी थी वो बात को सँभालते हुए पहली लड़की को समझते हुए बोली.

2ंद लड़की- छोडो न शनाया सायद ये गलती से hi टकरा गया होगा अभी जल्दी यहाँ से चलो नहीं तो क्लास के लिए हमलोग लेट हो जायेंगे फिर मम हमारी क्लास लगाएंगी.

शनाया- ठीक है स्नेहा चलो हम चलते है ( फिर मेरे तरफ देखते हुए ) हे यू अभी मई जा रही हु लेकिन मई बाद में तुम्हे देख लुंगी.

इतना बोल कर वो लड़की वह से चली जाती है मई भी उसे प्यार से जाते हुए देखने लगता हु तभी मुझे गुरुदेव के गुरु दक्षिणा के बारे में यद् आता है फिर यद् आता है की मुझे तो किसी और लड़की से सदी करना है ये सोच कर मई मायूस हो जाता हु मुझे किसी और लड़की के तरफ देखना भी नहीं चाहिए जबतक की नारायण मल्होत्रा सदी के लिए न नहीं कह देते ये सब सोचते हुए मई वह से निकल जाता हु फिर थोड़ी देर बाद जाकर एडमिशन काउंटर से एडमिशन का रिसीप्ट लेता हु इसके बाद कॉलेज से बहार आ जाता हु.

बहार आने के बाद मई ऑटो पकड़ता हु और अपने रूम पर आ जाता हु रूम पर आने के बाद सोचता हु की थोड़ा दोस्तों से बात कर लिया जाये फिर मई वही ध्यान में बैठ जाता हु और मन की शक्ति से पांचो दोस्तों को कांनेक्ट करता हु.

मई- कैसे हो दोस्तों.

रोहन- अच्छा हु भाई तू बता भाभी से मिला की नहीं.

मई- क्या यार तुम हर समय मजाक hi करते रहते हो.

कारन- इसको छोडो भाई ये ऐसा hi है आप बताओ सोल्लगे में एडमिशन हुआ या नहीं

मई- हो गया यार वैसे तुम लोग अभी कहा हो.

रोहन- मई और दीप्ती साउथ मुंबई में है.

कारन- मई और संध्या नार्थ मुंबई में है

दीपक- और मई वेस्ट मुंबई में हु

मई- चलो अच्छा है तुम लोग बाकि के मुंबई सम्भालो और मई ईस्ट मुंबई संभालता हु वैसे तुमलोगो के पास पैसे है या नहीं.

दीप्ती- थोड़े बहुत है लेकिन कोई न हम लोग मैनेज कर लेंगे.

मई- ठीक है तुम लोग अपना अपना अकाउंट no दो मई तुमलोगो के पास पैसे भेज दे रहा हु और है तुम लोगो को जो मई पैसे भेजूंगा उससे तुमलोगो को बिज़नेस स्टार्ट करना होगा मई सबके पास एक एक करोड़ भेज रहा हु सब अलग अलग फील्ड में बिज़नेस सुरु करो और है अब तुमलोग अपना अपना मोबाइल ले लो और मेरे पास कॉल कर देना.

दीपक- ठीक है भाई हम तैयार है.

शंध्या- लेकिन हमलोग किस चीज का बिज़नेस करेंगे.

मई- ये तुम लोगो को डीडे करना है की तुम लोग किस चीज का बिज़नेस करोगे.

रोहन- ठीक है हम बिज़नेस करने के लिए रेड्डी है.

कारन- हम भी रेड्डी है.

मई- और सबसे इम्पोर्टेन्ट बात तुम लोग अपने अपने एरिया में होने वाले गलत धंधे को बर्बाद करो अब मुंबई में कोई भी गैंगेस्टर नहीं रहना चाहिए और है अगर तुम लोगो को कही भी काली शक्ति का अनुभूति हो तो तुम लोग पहले मुझे इन्फॉर्म करोगे और सबसे जरुरी बात जब जरुरी हो तभी मुझसे संपर्क करना वो भी गुप्त रूप से किसी को ये नहीं लग्न चाहिए की हम सब एक दूसरे को जानते है जबतक जरुरी न हो कोई एक दूसरे से नहीं मिलेगा कपल को छोड़ कर रोहन निधि और कारन शंध्या एक दूसरे से मिल सकते है बाकि कोई भी नहीं और है तुम लोग दुनिया के हर कोने से एक्स्ट्रा टैलेंटेड बचे ढूंढो जिनका िक के साथ साथ उन सब का फिजिकल स्ट्रेंथ भी अच्छा होना चाहिए और ये भी ध्यान में रखना की तुम जो भी लड़के या लड़की को लाओ वो इतना सक्छम हो की वो अपने सप्त चक्रो को जागृत कर सके.

दीपक- और हम इतने सरे लड़के और लड़कियों का करेंगे क्या.

मई- मई एक ऐसा सेना तैयार करना चाहता हु जो दुनिया में किसी से भी टकरा जाये और इतना सब करने का कारन है की मुझे ऐसा लग रहा है की हमें फ्यूचर में काली शक्तियों से एक भयानक युद्ध लड़ना पड़ेगा और इसके लिए हमें एक सेना की जरुरत होगा.

दीप्ती- लेकिन ये सब करने के लिए हमें बहुत सरे पैसो की जरुरत होगी.

मई- अरे है मई तो इस बारे में सोचा hi नहीं अच्छा एक काम करो अभी तुम लोग सिर्फ बिज़नेस पर ध्यान दो बाकि मई देखता हु की पैसो का जुगाड़ कैसे होता है लेकिन ये यद् रखना की अगर जैसा मैंने बोलै है वैसा कोई भी तुम लोगो को मिले तो उसे अपने साथ रख लेना.

सब- ठीक है भाई हम ऐसा hi करेंगे.

मई- ठीक है तो फिर अब मई कनेक्शन हटा रहा हु और मई थोड़ी देर में तुम सब के पास पैसे भेजता हु.

उनसे बात करने के बाद मई ध्यान से उठ जाता हु इसके बाद मई विशाल के पास कॉल करता हु.

मई- हैल्लो विशाल भाई.

विशाल- है बोलो प्रतिक कैसे यद् किया कुछ काम था क्या.

मई- है भाई एक काम था आपसे.

विशाल- है है बोलो क्या काम है.

मई- वो अपने मुझे जो पैसे दिए थे न उसे मुझे किसी के पास भेजना है.

Vishal-Kiske पास भेजना है.

Mai-Hai कोई क्या आप भेज सकते है.

Vishal-Ha क्यों नहीं बस मुझे उसका अकाउंट no. सेंड करो.

मैंने विशाल के पास चारो का अकाउंट no. सेंड कर देता हु

Mai-bhai आप इन चारो अकाउंट में एक एक करोड़ भेज दीजिये.

इतना बोल कर मई फ़ोन कट कर दिया फ़ी सोचा की अब क्या किया जाये तो फिर सोचा की क्यों न जा कर नारायण मल्होत्रा से मिला जाये ये सोच कर मई तैयार होने चला गया थोड़ी देर बाद तैयार हो कर ऑटो पकड़ा फिर ऑटो वाले से मल्होत्रा हाउस चलने के लिए बोलै थोड़ी देर बाद मैंने मल्होत्रा हाउस पहुंच गया.

मल्होत्रा हाउस के गेट पर गॉर्ड घड़े थे जब मक ऑटो से उतर कर गेट के पास पंहुचा तो मुझे गॉर्ड ने रोक लिया और बोलै.

गॉर्ड- अरे अरे भाई तुम इधर कहा चले आ रहे हो.

मई- काका मुझे इस बंगले के मालिक से मिलना है.

मेरे बात को सुन कर वो गॉर्ड मुझे ऊपर से निचे तक गुरा और फिर बोलै.

गॉर्ड- देखो भाई इस बंगले के मालिक तुमसे नहीं मिलेंगे.

मई- क्यों क्यों नहीं मिलेंगे.

गॉर्ड- वो कोई छोटा मोटा आदमी नहीं है बल्कि वो बहुत बड़े बिज़नेस मन है वो तुम जैसे छोटे मोठे आदमी से नहीं मिलते इस लिए तुम अभी यहाँ से चले जाओ.

मई- क्या इस बंगले के मालिक का नाम नारायण मल्होत्रा है.

गॉर्ड- है

मई- तो ठीक है तुम उनसे बोलो की हिमालय से कोई उनसे मिलने आया है वो जरूर मुझसे मिलेंगे.

गॉर्ड- तुम मेरे टाइम क्यों ख़राब कर रहे हो मैंने बोलै न की वो तुमसे नहीं मिलेंगे.

मई- तुम एक बार उनसे बात कर के तो देखो अगर वो मुझसे मिलने के लिए नहीं बोलेंगे तो मई चला जाऊंगा.

मेरे बात को सुन कर गॉर्ड झलते हुए बोलै ठीक है क्या बोलना है जल्दी बोलै.

मई- तुम उनसे बोलना की हिमालय से गुरुदेव का शिष्य उनसे मिलने आया है.

गॉर्ड मेरे बात को सुन कर इण्टरकॉम से बांग्ला के अंदर कॉल किया तो उधर से एक नौकर ने कॉल उठाया.

गॉर्ड- बड़े मालिक से कोई मिलने आया है वो अंदर आना चाहता है.

नौकर- कोण आया है और क्या नाम बताया उसने.

गॉर्ड- वो बोल रहा है की हिमालय के गुरुदेव का शिष्य है.

नौकर- ठीक है मई बड़े मालिक को बोलता हु जबतक मई न बोलू तुम उसे अंदर नहीं आने देना.

गॉर्ड- ठीक है.

इसके बाद वो नौकर सीधा नारायण मल्होत्रा के रूम में जाता है और बोलता है.

नौकर- बड़े मालिक बहार कोई हिमालय से आपसे मिलने आया है.

नारायण- क्या क्या बोलै तुमने कोई हिमालय से आया है कहा है वो.

नौकर- वो बहार गेट पर खड़ा है.

नारायण- उसे इज्जत के साथ अंदर मेरे रूम में लेके आओ.

नौकर नारायण मल्होत्रा के बात सुन कर कर तुरंत बहार आता है और मुझे अंदर आने के लिए बोलता है फिर मई नौकर के साथ नारायण मल्होत्रा के रूम में आ जाता हु मुझे वह पर आया देख कर नारायण मल्होत्रा खड़े हो जाते है फिर वो नौकर को बोलते है.

नारायण- रामु मई इनसे यहाँ पर मीटिंग कर रहा हु मई जब तक न बोलू मेरे रूम में कोई नहीं आएगा समझे.

रामु- ठीक है मालिक.

इतना बोल कर रामु वह से चला जाता है उसके जाने के बाद नारायण मल्होत्रा मुझसे बोलते है.

नारायण- क्या आप हिमालय से आये है.

मई- जी मई हिमालय से hi आया हु.

नारायण- (अपना हाथ जोड़ते हुए) कहिये मई आपका क्या सेवा कर सकता हु क्या गुरुदेव का मेरे लिए कोई आदेश है.

मई- है गुरुदेव ने आपके लिए ये लेटर दिए है

फिर मई गुरुदेव का वो लेटर नारायण मल्होत्रा को दे देता हु थोड़ी देर तक नारायण मल्होत्रा उस लेटर को पढ़ते रहते है फिर जब वो उस लेटर को पूरा पढ़ लिए तो मुझे ऊपर से निचे तक घूरते हुए बोले.

नारायण- तो तुम्हारा नाम प्रतिक है और तुम गुरुदेव के मुख्या शिष्य हो.

मई- है मेरा नाम प्रतिक है और मई गुरुदेव का मुख्या शिष्य हु.

नारायण- तो तुम्हे मालूम hi होगा की तुम्हे यहाँ किस लिए भेजा गया है.

मई- जी गुरुदेव का आज्ञा है की मई आपके पोती से विवाह करू.

नारायण- हम्म अच्छा है अगर ये बात तुम्हे पहले से hi मालूम है तो वैसे तुम अगर गुरुदेव का मुख्या शिष्य हो तो तुममे कोई खाश बात तो होगी hi ठीक है मई अपना बचन निभाउंगा लेकिन तुम्हे पहले मेरे परिवार से मिलना होगा वैसे तो मेरे बात को मेरे परिवार में कोई नहीं टालता है लेकिन फिर भी तुम एक बार आ कर उनसे मिल लेना एक काम करो तुम आज सैम में यहाँ हमारे साथ hi खाना खा लेना उस समय तुम्हे यहाँ सबसे मुलाकात भी हो जाएगी.

मई- ठीक है जैसा आप कहे.

नारायण- वैसे एक बात बताओ तुम इस सदी के लिए तैयार कैसे हो गए.

मई- गुरुदेव का आज्ञा है तो मुझे तो उनकी आज्ञा का पालन करना hi होगा.

नारायण- हम्म ठीक है तुम अब जा सकते हो है लेकिन आज शाम में जरूर आना.

मई- ठीक है.

इतना बोल कर मई वह से निकल गया और एक ऑटो पकड़ कर वह से निकल गया कुछ दूर आगे जाने के बाद मई ऑटो वाले से पूछा.

मई- तुम्हारा नाम क्या है भाई.

ऑटो ड्राइवर- सर मेरा नाम हरी है

मई- वो अच्छा है हरी अच्छा नाम है अच्छा भाई एक बात बताना तुम इस सहर में कितने समय से हो.

हरी- सर आप ये क्यों पूछ रहे हो.

मई- कुछ नहीं ऐसे hi वो क्या है न की मई इस सहर में नया हु इस लिए पूछ लिया ताकि अगर तुम्हे इस सहर के बारे पता हो तो हमें तुम अच्छे से यहाँ घुमा सको.

हरी- सर मई यहाँ तो बचपन से hi रहता हु आप बताइये आपको कहा घूमना है मई घुमा दूंगा बस आप मुझे ऑटो का किराया दे देना.

मई- हरी भाई अगर आप यहाँ बहुत समय से रह रहे है तो आपको तो यहाँ के बारे में सब पता होगा.

हरी- हरी है सर.

मई- ये तो अच्छा है फिर आप मेरी हेल्प कर सकते है.

हरी- कैसी हेल्प सर.

मई- मुझे एक ऐसी जगह के बारे में जानकारी चाहिए जो सुनसान हो और वह पर कोई आता जाता न हो.

मेरा बात सुन कर हरी घबरा गया और मुझे शक भरी निगाहो से देखते हुए बोलै.

हरी- आपको ऐसी जगह के बारे में क्यों जानना है कोण है आप.

मई- अरे डरो नहीं मई कोई गलत आदमी नहीं हु बस मुझे ऐसी जगह इस लिए चाहिए की मई वह अपना एक आलीशान घर बनाना चाहता हु वो क्या है न की मई हिमालय से आया हु और मुझे अकेले सुनसान जगह रहने का आदत है मुझे भीड़ भाड़ वाले इलाको में रहने में बेचैनी होती है इस लिए पूछा अगर तुम्हारी नजर में ऐसी जगह है तो बताओ.

इतना बोल कर मई अपने पॉकेट से 500 का पांच नोट निकल कर हरी को दे दिया ये देख कर हरी खुस हो गया और बोलै.

हरी- सर एक ऐसा जगह तो है लेकिन लोग वह जाते नहीं है मैंने सुना है की उस जगह पर बुरे आत्माओ का निवेश है वह जो भी जाता है कभी वापस नहीं आता दरअसल वो एक हवेली है हलाकि उस हवेली को बने हुए ज्यादा समय तो नहीं हुआ है लेकिन मैंने सुना है आज तक जो भी उस हवेली में रुका है वो कभी जिन्दा वापस नहीं लौटा है.

Mai-Achha ऐसा है क्या मुझे तो ऐसे hi जगह रहने में मज़्ज़ा आता है तुम्हे पता है की उस हवेली का मालिक कोण है.

हरी- नहीं सर मुझे ये तो पता है की उस हवेली का मालिक कोण है लेकिन मुझे एक ऐसे ब्रोकर के बारे में पता है जो वो हवेली आपको दिला सकता है.

मई- बहुत अच्छा तो तुम एक काम करो पहले मुझे वो हवेली दिखा दो इसके बाद हम उस ब्रोकर के पास चलेंगे.

मेरे बात को सुन कर हरी दर गया और डरते हुए बोलै.

हरी- नहीं नहीं सर मई वह नहीं जा सकता वह जो भी गया वो जिन्दा वापस नहीं लौटा है.

मई- अरे तुम डरो नहीं मेरे होते हुए तुम्हे कुछ नहीं होगा.

हरी- नहीं सर मई वह नहीं जा सकता (जो पैसा मई उसको दिया था उसे मुझे देते हुए) आप अपना पैसा भी ले लीजिये.

मई- अरे भाई तुम तो खामखा दर रहे हो तुम ये पैसे अपने पास hi रखो और है तुम उस हवेली के पास नहीं जाना चाहते तो ठीक है मुझे उस हवेली को थोड़ी दूर से hi दिखा देना.

मई उसे बहुत समझाया तब जाकर वो वह जाने के लिए मन उसने बोलै की वो उस हवेली से कुछ दूर पर hi रुकेगा फिर करीब आधे घंटे बाद हम उस हवेली के कुछ दुरी पर रुक गए वह से वो हवेली मुझे साफ साफ दिखाई दे रहा था.

मई- हरी भाई तुम यही रुको मई उस हवेली को नजदीक से देख कर आता हु और है मई जबतक वापस नहीं तुम यही पर रहना.

हरी- सर आप वह मत जाइये ये आपके लिए खतरनाक हो सकता है.

मई- तुम मेरे लिए चिंता मत करो मुझे कुछ नहीं होगा.

इतना बोल कर मई उस हवेली के पास जाने लगा करीब 10 मिनट चलने के बाद मई उस हवेली के पास पहुंच गया ये हवेली सहर से बिलकुल अलग था यहाँ कोई भी आता जाता नहीं था ये हवेली मेरे ध्यान लगाने के लिए और ट्रेनिंग करने के लिए सबसे अच्छी जगह थी.

मई जैसे hi उस हवेली के पास पहुंच मुझे वह बुरी शक्तियों का अनुभूति हो गया.

मई- हम्म तो वो ड्राइवर सही hi बोल रहा था यहाँ पर बुरी शक्तियों का निवास है अच्छा कोई बात नहीं जब मई यहाँ आऊंगा तो इन सब को यहाँ से भगा दूंगा और हवेली तो बहुत अच्छा है थोड़ा अंदर जेक के देखता हु.

जैसे hi मई उस हवेली में अंदर जाने के लिए आगे बढ़ा तो देखा की हवेली के गेट पर टाला लगा हुआ था.

मई- यहाँ तो टाला लगा हुआ है अब मई अंदर कैसे जाऊंगा एक काम करता हूँ मई अपने दिव्या दृस्टि से देखता हु की ये हवेली अंदर से कैसा है.

फिर मई अपने दिव्या दृस्टि को जागृत करते हुए हवेली के अंदर देखने लगा वो हवेली बहार से जितना खूबसूरत था वो अंदर से भी उतना hi खूबसूरत था हवेली के पीछे एक बाहत बड़ा गार्डन था जहा मई ध्यान लगा सकता तह और ट्रेनिंग कर सकता था ये हवेली मुझे बहुत पसंद आया मई अभी उस हवेली को देख hi रहा था की मुझे वह पर कुछ आत्माये दिखाई दी वो दिखने में बहुत खतरनाक लग रहे थे मई उन्हें देख कर कुछ सोचा और फिर मुस्कुराते हुए अपने आवाज को योगिक शक्ति से उस हवेली के अंदर पहुंचते हुए बोलै.

मई- तुम लोग यहाँ बहुत रह लिए अब तुम लोगो का यहाँ से जाने का समय आ गया है मई अभी तो यहाँ से जा रहा हु लेकिन मई जब दोबारा यहाँ आऊंगा तब तुम लोग मुझे यहाँ दिखाई नहीं देना चाहिए अगर तब भी तुम लोग मुझे यहाँ दिखाई दिए तो मई सब को जला कर भस्म कर दूंगा.

इतना बोल कर मई अपने सकरात्मक ऊर्जा को उस हवेली में भेजा वह पर रहे वाले बुरी आत्मा मेरे आवाज सुन कर दर गयी थी लेकिन जैसे hi मेरी सकरात्मक ऊर्जा वह पंहुचा उन लोगो की चीखे निकलने लगी.

इधर मई हवेली के अंदर अपना सकरात्मक ऊर्जा छोड़ कर वह से निकला और ऑटो के पास आ गया मई जनता था की मेरे सकारात्मक ऊर्जा के कारन अब वह कोई भी बुरी आत्मा नहीं रुकेगा जब मई ऑटो के पास आया तो देखा की हरी डरा हुआ था वो जैसे hi मुझे वह सही सलामत देखा तो थोड़ा संत हुआ और मुझसे बोलै.

हरी- सर आप ठीक तो है न.

मई- है मुझे क्या होना था चलो अब हमें यहाँ से चलना चाहिए.

हरी- ठीक है सर लेकिन अब हमें कहा जाना है सर.

मई- तुम मुझे उस ब्रोकर के पास ले चलो जो मुझे इस हवेली का डील करा सके.

हरी- आप सचमे ये हवेली खरीदना चाहते है.

मई- है इसलिए तो मई तुम्हे उस ब्रोकर के पास चलने के लिए बोल रहा हु.

हमलोग वह से निकल कर सीधा ब्रोकर के पास पहुंच गए फिर हरी सीधा जेक उस ब्रोकर से कुछ बात किया तो वो ब्रोकर मुझे अपने ऑफिस में ले गया और बोलै.

ब्रोकर- सर क्या आप सच में उस हवेली को खरीदना चाहते है.

मई- है भाई तुम बस उसका डैम बताओ.

मेरे बात को सुन कर वो ब्रोकर कुछ सोचने लगा और फिर बोलै.

ब्रोकर- देखिये सर मई आपसे झूठ बोल कर वो हवेली नहीं बेचना चाहता आपको उस हवेली के बारे में मई कुछ बताना चाहता हु.

मई- मुझे सब पता है बस तुम उसका डैम बढ़ाओ.

ब्रोकर- ठीक है जब आपको सब पता hi है तो अब मई क्या कर सकता हु वैसे उस हवेली का मालिक ने उसका डैम 1 करोड़ रखा है.

मई- आप उस हवेली के बारे में जानते है न फिर भी इतना डैम क्यों मेरे शिवा उस हवेली को कोई और खरीद भी नहीं सकता आप इस हवेली के ओनर से बात कीजिये मई उनको सिर्फ 50 लाख दे सकता हु न इससे एक रुपया ज्यादा दूंगा और न hi एक रुपया काम.

ब्रोकर- ठीक है मुझे कुछ समय दीजिये मई उनसे बात कर के आपको बताता हु.

इतना बोल कर ब्रोकर अपने मोबाइल से किसी के पास कॉल लगाया और ऑफिस से बहार निकल गया फिर थोड़ी देर बात करने के वो मेरे पास आ कर बोलै.

ब्रोकर- कोंग्रटुलतिओन्स सर हवेली के ओनर 50 लाख में डील फाइनल करने के लिए मन गए है.

मई- तो ठीक है आप डॉक्यूमेंट रेड्डी कीजिये और ये लीजिये कार्ड आप इसमें से 50 लाख स्वैप कर लीजिये.

ब्रोकर- (कार्ड लेते हुए) ठीक है लेकिन आपको डॉक्यूमेंट सिग्नेचर करने के लिए कल आना होगा क्युकी हवेली के ओनर अभी बहार है.

मई- Ok कोई बात नहीं फिर हम कल मिलते है चलिए हरी भाई मुझे मल्होत्रा हाउस छोड़ दीजिये.
 
अपडेट 6


आज मैंने एक हवेली का डील बहुत hi सस्ते में कर लिया था जिस हवेली का डील मैंने किया वो लगभग 10 एकर में फैला हुआ था उसका गार्डन जो की हवेली के पीछे hi था वो hi सिर्फ 5 एकर में था और इतना सारा मुझे सिर्फ 50 लाख में hi मिल गया इस लिए मई बहुत खुस था.






हलाकि मई उस हवेली को सिर्फ सामने से hi देखा था लेकिन मई अपने दिव्या दृस्टि से पुरे हवेली को अंदर तक देख लिया था वो हवेली कमल का था और मुझे इतने सस्ते में मिलने का कारन था की वो हवेली हुन्तेद था इस लिए उस हवेली को कोई भी खरीदने के लिए तैयार नहीं था खैर जो भी हो आज मई बहुत खुस था क्युकी मुझे वो हवेली मिल गया था अब मई उस हवेली में आराम से अपना ट्रेनिंग कर सकता था वह मुझे डिस्टर्ब करने वाला कोई नहीं था.

हवेली के डील फाइनल करने के बाद मई ऑटो ड्राइवर यानि की हरी को बोलै की मुझे मल्होत्रा हाउस छोड़ दे मरे बात को सुन कर हरी ऑटो स्टार्ट किया और हम वह से निकल गए ऐसे hi भाग दौड़ करने में शाम हो गयी थी इसलिए मैंने सोचा की अब रूम न जाकर सीधा मल्होत्रा हाउस hi चला जय.

खैर करीब 1 ऑवर बाद मई मल्होत्रा हाउस के गेट पर पहुंच गया था.

इधर मल्होत्रा हाउस में मेरे जाने के कुछ hi देर बाद एक फॅमिली मीटिंग रखा गया था और इस मीटिंग को बुलाने वाले और कोई नहीं बल्कि खुद नारायण मल्होत्रा थे इस मीटिंग में परिवार के सरे लोग मौजूद थे ऐसे अचानक से मीटिंग रखे जाने पर मल्होत्रा परिवार के सरे लोग कंफ्यूज थे की आखिर ये मीटिंग राखी किस लिए गयी है.

मल्होत्रा फॅमिली इंट्रोडक्शन

नारायण मल्होत्रा- मल्होत्रा फॅमिली हेड ये अपने पुरे परिवार से प्यार करते है लेकिन अपने छोटे बेटे के परिवार से थोड़ा काम प्यार करते है क्युकी इनका छोटा बीटा इनको वरिष्ठ नहीं दे पाया और बड़े बेटे ने एक वरिष्ठ दिया है इस लिए






रुक्मिणी मल्होत्रा- नारायण मल्होत्रा वाइफ

ये अब इस दुनिया में नहीं है.

राजेश मल्होत्रा- नारायण मल्होत्रा के बड़ा बीटा ये एक नंबर के लालची इंसान है इसे पैसो से बहुत प्यार है अगर इसे इसके फॅमिली के बदले कोई इसे पैसा दे तो ये अपने फॅमिली को भी बेच सकता है ये अपने आगे किसी को भी नहीं समझता खास कर के अपने छोटे भाई के परिवार को.






राधिका मल्होत्रा- राजेश मल्होत्रा का वाइफ ये भी बिलकुल अपने पति पर गयी है इसे सिर्फ और सिर्फ साजिश करना hi आता है.






विक्की मल्होत्रा- राजेश मल्होत्रा का बीटा ये एक नंबर का घटिया इंसान है ये भी अपने बाप पर hi गया है इसका काम सिर्फ लड़की को छेड़ना और सरब पीना है फिर भी इसे इसके माँ बाप और दादा दादी बहुत प्यार करते है.








अमृता मल्होत्रा- ये एक नंबर के हरामी लड़की है है इसे दुनिया में सबसे ज्यादा अगर किसी से नफरत है तो वो है अपने छोटे चाचा के परिवार से और खास कर के शनाया से ये अपने आगे किसी को नहीं समझती है गरीबो को तो अपने पेअर के धूल समझती है.






अजय मल्होत्रा- नारायण मल्होत्रा का छोटा बीटा. ये बहुत hi नेकदिल इंसान है ये सबसे बहुत प्यार करते है और अपने पिता जी के बातो को पत्थर के लकीर मानते है अगर वो रत को दिन बोले और दिन को रत बोले तो ये वो भी मन जायेंगे.






पुस्पा मल्होत्रा- अजय मल्होत्रा के वाइफ ये भी अंदर से नरम दिल कर और ऊपर से कठोर एकदम नारियल के जैसे ये अपने बेटी शनाया से बहुत प्यार करते है ये अपने बेटी के आँखों में एक भी आंसू देख ले तो पुरे घर को सर पे उठा लेती है.






शनाया मल्होत्रा- अजय मल्होत्रा के बेटी ये अपने पुरे परिवार को बहुत प्यार करती है खास कर के अपने दादा जी और अपने पिता जी को ये उनके लिए कुछ भी करने को तैयार रहती है






शानवी मल्होत्रा- अजय मल्होत्रा के छोटी बेटी ये भी अपने माँ के जैसे hi है ये भी शनाया को बहुत प्यार करती है ये शनाया को अपनी माँ के जैसे मानती है.






तो ये था मल्होत्रा परिवार के इंट्रोडक्शन आज मल्होत्रा परिवार में ये सरे लोग फॅमिली मीटिंग के लिए जमा हुए थे और आपस में hi बाटे कर रहे थे की आखिर ये फॅमिली मीटिंग किस लिए रखा गया है.

विक्की- डैड आपको पता है क्या की दादा जी ने ये फॅमिली मीटिंग क्यों राखी है.

राजेश- नहीं मुझे नहीं पता वैसे भी तेरे दादा जी कोई काम किसी को बता कर करते है क्या.

राधिका- है अपने सही बोलै पता नहीं आज क्या होने वाला है जो पिता जी ने ये मीटिंग राखी है है जरूर अजय और उसके परिवार ने कुछ किया होगा तभी ये मीटिंग राखी गयी है.

अजय- आप ये क्या बोल रही है भाभी जी हम लोगो ने कुछ भी नहीं किया है जरूर कोई और बात है.

पुष्प- बस इन लोगो को तो मौका चाहिए हम लोगो को निचा दिखने के लिए.

शनाया- छोड़ा न माँ आप भी कैसी बात लेके बैठ गयी वो देखो दादा जी आ रहे है अब खुद hi पता चल जायेगा की ये मीटिंग क्यों राखी गयी है.

सरे लोग शनाया के बात सुन कर ऊपर सीधी के तरफ देखने लगते है क्युकी नारायण मल्होत्रा के रूम ऊपर 1सत फ्लोर पर था.

नारायण मल्होत्रा को आते देख अभी जो लोग बक बक कर रहे थे सब संत हो जाते है इधर नारायण मल्होत्रा वह पर आकर सीधा फॅमिली हेड के कुर्शी पर बैठ जाते है और सरे लोगो को घूम कर देखते है वह पर जितने भी लोग थे सरे लोगो के चेहरे पर सवाल दिखाई दे रहा था जिसे देख कर वो मुस्कुराते हुए बोलते है.

नारायण- मई देख प् रहा हु की तुम लोगो के चेहरे पर सवाल है सायद तुम लोग ये सोच रहे होंगे की मई आज अचानक से फॅमिली मीटिंग क्यों रखा है.

विक्की- है दादा जी हम सब यही जानना चाहते है क्युकी आज से पहले ऐसे अचानक फॅमिली मीटिंग नहीं रखा गया.

नारायण- हम्म आज मीटिंग रखने का खास कारन है की मई आज तुम लोगो के सामने अपने अतीत का एक सच रखना चाहता हु और फिर किसी से मिलवाना भी चाहता हु.

अजय- कैसी सचाई डैड.

नारायण- बताता हु आज से लगभग 20 साल पहले मई किसी को ये वडा किया था की मई अपने पोती के सदी उसके आदमी से कराऊंगा.

सब एक साथ- क्या.....

राजेश- लेकिन ऐसा वडा आप किसी से कैसे कर सकते है.

राधिका- मई अपनी बेटी की शादी कभी नहीं करुँगी न जाने वो कैसा आदमी होगा

अजय- डैड अपने बिना सोचे समझे ऐसे कैसे किसी से वडा कर दिए.

पुष्प- देखिये पिता जी मई भी अपनी लड़की के शादी किसी अनजान से नहीं करुँगी न जाने वो कैसा आदमी होगा.

अमृता- आप अपने बेटी के सदी नहीं करेंगी तो क्या मई उस आदमी से सदी करुँगी ये कभी नहीं हो सकता समझी उससे शनाया को hi सदी करना होगा.

नारायण मल्होत्रा इन लोगो को आपस में बहस करते हुए देख रहे थे उनको इन लोगो पर बहुत गुसा आ रहा था इस लिए वो घुसे में बोले.

नारायण- बस सब चुप हो जाओ अगर मेरा बात सुने कोई बिच में बोलै तो उसे मई मल्होत्रा हाउस से बहार निकल दूंगा.

नारायण मल्होत्रा को ऐसे घुसे में देख सब चुप हो जाते है सबको चुप होते देख अजय डरते हुए बोलता है.

अजय- ठीक है डैड आप थोड़ा संत hi जाइये अब कोई भी कुछ नहीं बोलेगा लेकिन आप एक बात बताइये की ऐसा क्या कारन था की आपको इतना बड़ा वडा करना पद गया.

अजय के बाद सुन कर नारायण मल्होत्रा कुछ देर तक सोचते रहते है थोड़ी देर तक सोचने के बाद वो बोलते है.

नारायण- दरअसल आज से 20 साल पहले मेरे ऊपर एक हमला हुआ था और लगभग लगभग मई उस हमले में मारा hi गया था लेकिन फिर एक आदमी वह फरिस्ता बन कर आया और मेरी जान बचा ली और लगभग 6 महीने तक मेरा इलाज किया तो मई इसी अहसान के कारन उस आदमी को ये वडा कर दिया की मई अपने पोती की सदी उसके सबसे खास आदमी से करवाऊंगा अब तुम hi लोग बताओ क्या मई गलत किया.

अजय- नहीं डैड अपने कोई गलत नहीं किया अगर आपके जगह पर कोई भी होता तो वो भावनाओ में बाह कर यही करता.

राजेश- वो सब तो ठीक है डैड लेकिन अब आगे क्या करना है.

नारायण- मैंने वडा कर दिया है तो अब मई अपना वडा नहीं तोड़ सकता मुझे उसके आदमी से अपनी पोती के सदी करवाना hi होगा.

राधिका- अपने बस वडा hi तो किया है कोई लिखित प्रणाम तो नहीं दिया है और वैसे भी वडा तोड़ने के लिए hi होता है.

नारायण- अगर मई ये वडा तोड़ दिया तो हमारा इतने वर्षो से बनाया हुआ इज्जत प्रतिष्ठा पर डेग लग जायेगा मई ये वडा नहीं तोड़ सकता.

अमृता- ठीक है दादा जी आप अपना वडा मत तोड़िये आप शनाया की सदी उससे करवा दीजिये.

पुस्पा- शनाया क्यों सदी करेगी बाबू जी के पोती तुम भी तो हो तो तुम क्यों नहीं कर लेती हो उससे सदी.

राधिका- ये कैसे सदी कर लेगी ये तो शनाया से छोटी है और सदी तो सबसे पहले बड़ो की hi होती है.

राधिका के बात सुन कर नारायण भी बोले.

नारायण- राधिका ठीक बोल रही है पुस्पा अमृता अभी छोटी है और शनाया उससे 1 साल बड़ी है मैंने फैसला किया है की उस आदमी से शनाया की सदी होगी.

शनाया- लेकिन दादा जी मई कैसे मई तो अभी पढ़ रही हु अगर मेरी सदी हो गयी तो मेरी पूरी लाइफ बर्बाद हो जायेगा.

नारायण- देखो शनाया सदी होने में बाद भी लोग पढ़ते है और तुम्हे पढ़ने से कोण रोकेगा तुम्हे जितना पढ़ना होगा पढ़ सकती हो.

शनाया- लेकिन दादा जी.

नारायण- (इमोशनल ब्लैकमेल करते हुए) देखो शनाया बेटी अब ये तुम्हारे ऊपर है की तुम अपने दादू की इज्जत का मन रखते हो या नहीं ये तुम्हारा दादू अपने किये वेड से पीछे नहीं हटेगा अगर मेरा वडा पूरा नहीं हुआ तो मुझे अपना जान देना पड़ेगा.

राधिका- अरे कैसी लड़की हो तुम जिस दादा ने तुम्हे ऐसो आराम दिया उनका एक वडा भू तुम पूरा नहीं कर सकती.

राजेश- अरे अजय समझाओ अपनी बेटी को अगर बाबू जी ने कुछ कर लिया तो हमारा क्या होगा.

अमृता- मई नहीं कहती थी माँ की देखना एक दिन हम लोगो को इसकी जरुरत होगी तो ये मुँह मोड़ लेगी.

विक्की- मुझे तो लगता है की इसको सदी से इस लिए प्रॉब्लम है की इसको सोल्लगे में किसी के साथ चक्कर चल रहा होगा इस लिए ये सदी नहीं करना चाहती है.

राधिका- बस बहुत बोल लिया तुमने अब एक सब्द भी मेरी बेटी के बारे में बोलै तो ये तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा.

अमृता- तो गलत क्या बोलै मेरे भाई ने उसने तो सही hi बोलै है अगर तुम्हारी बेटी का बहार की चाकर नहीं चल रहा है तो वो सदी क्यों नहीं कर लेती.

शनाया को इन लोगो के बात सुन कर उसकी आँखों में आंसू आ गए जब नारायण ने शनाया को रट देखा तो वो घुसे में बोलै.

नारायण- बस बहुत हो गया सब एकदम चुप हो जाओ अब कोई कुछ भी नहीं बोलेगा और है विक्की तुम्हे भी सोच समझ कर बोलना चाहिए चलो सॉरी बोलो शनाया को.

विक्की- सॉरी शनाया.

नारायण- देखो शनाया बेटी अब चुप हो जाओ देखो विक्की ने भी तुम्हे सॉरी बोल दिया और तुम पर कोई जोर जबरदस्ती नहीं है सदी करने के लिए वडा मई किया हु तो इसका परिणाम भी मई hi भोगूँगा.

शनाया- (अपने आंसू को पोछ कर) ठीक है दादा जी मई सदी करने के लिए तैयार हु.

नारायण- ये तुमने अच्छी खबर सुनाई है बेटी तुम बिलकुल चिंता मत करो तुम्हे आगे की पढ़ाई के लिए मई उससे बात करूँगा और है वो लड़का अभी आने वाला है हम साडी बाटे यही पर डिसकस कर लेंगे.

इधर मई मल्होत्रा हाउस के गेट पर आ गया था गेट पर आने के बाद मई ऑटो से उतरा और गेट से अंदर जाने लगा इस बार गॉर्ड ने मुझे देखा लेकिन कुछ बोलै नहीं सायद इसको पहले hi मेरे आने के बारे में बता दिया गया होगा.

थोड़ी देर चलने के बाद मई जब हॉल में गया तो देखा की वह पर बहुत सरे लोग थे सायद घर का सारा मेंबर वह पर था मई सीधा जाकर सिर्फ नारायण के पेअर छुए और किसी का नहीं क्युकी मई वह पर सिर्फ नारायण को hi जनता था फिर मई वह पर बैठे हुए सरे लोगो को देखने लगा जो अजीब नजरो से मुझे hi देखे जा रहे थे.

जब मई सबको देख रहा था तभी मेरी नजर शनाया पर पड़ी और उसे देख कर मई चौक गया उधर शनाया भी मुझे देख कर चौक गयी थी.

मई- (मन में) ये लड़की यहाँ क्या कर रही है वह लगता है ये लड़की इसी घर की मेंबर है कास की मेरी सदी इसी से हो.

शनाया- (मन में) वह तो ये लंगूर है इसी से मेरी सदी होनी है एक अब मई क्या करू दादा जी है भी बोल दिया है वैसे ये बुरा भी नहीं दीखता देखने से तो स्मार्ट डैशिंग और हैंडसम लग रहा है लेकिन ये कपडे ऐसा पहना है इसका मतलब ये करीब है लेकिन क्या अब मई क्या करू भगवन.

अमृता- (मन में) हां बच गयी मई तो अच्छा किया जो मई सदी के लिए तैयार नहीं हुयी नहीं तो मेरी पूरी जिंदगी बर्बाद हो जाती शनाया बहुत उड़ती थी अब मई देखूंगी की इससे सदी के बाद कैसे उड़ेगी.

पुस्पा- (मन में) हे भगवन अपने ये क्या किया किस लड़के से मेरी बेटी की सदी करवा रहे है अब मई क्या करू मई मन भी नहीं कर सकती नहीं तो बाबू जी हम लोगो को अपने जायदाद से बेदखल कर देंगे लेकिन मई भी अपनी बेटी के जिंदगी बर्बाद होने नहीं दूंगी अभी तो ये सदी होने से मई नहीं रोक सकुंगी लेकिन सदी के बाद मई इसकी जिंदगी नर्क बना दूंगी जिससे परेशां होक ये खुद मेरी बेटी को तलाक दे देगा.

सरे लोग बस ऐसे hi बाटे सोचे जा रहे थे की तभी नारायण मुझसे बोलै.

नारायण- बीटा ये मेरा परिवार है इनसे मिलो.

इसके बाद नारायण मुझे एक एक से परिचय करवाते गए और मई सबको नमस्ते बोलते गया.

मई- नमस्ते अंकल और ौंटी मेरा नाम प्रतिक है.

मेरे नमस्ते पर सरे लोगो ने जबाब दिया सिर्फ पुस्पा और शनाया को छोड़ कर मई बार बार छुपा चोरी से शनाया को देख रहा था तभी नारायण मल्होत्रा फिर से बोले.

नारायण- प्रतिक बीटा आपको जिससे सदी होनी है वो है मेरी बड़ी पोती शनाया और है तुम लोगो को अगर प्रतिक से कुछ पूछना है तो पूछ सकते हो.

अजय- बीटा तुमने अपना सिर्फ नाम hi बताया अपने सुर्नामे नहीं बताया.

मई- (हिचकिचाए हुए) वो दरअसल क्या है न की मई एक अनाथ हु तो मुझे मेरा सुर्नामे पता नहीं है इस लिए मई सबको सिर्फ अपना नाम hi बताता हु.

अजय- क्या तुम अनाथ हो.

मई- जी अंकल

अजय- सॉरी बीटा.

मई- कोई बात नहीं अंकल.

पुस्पा- (रौदे आवाज में) तुम करते क्या हो.

मई- मई अभी मुंबई यूनिवर्सिटी से ब कर रहा हु.

पुस्पा- यानि की तुम अभी पढ़ाई कर रहे हो कुछ कमाते नहीं हो.

मई- जी ौंटी

पुस्पा- जब तुम कमाते hi नहीं हो तो मेरी बेटी से सदी करने के बाद उसे रखोगे कहा और खिलाओगे क्या.

मई- जी मई मैनेज कर लूंगा.

पुस्पा- मई तो नहीं चाहती थी की शनाया की सदी तुमसे हो लेकिन बाबू जी ने वडा किया है इस लिए मई कुछ कर नहीं सकती लेकिन तुम मेरी बेटी से सदी तब hi कर सकोगे जब तुम मेरी 2 शर्त मानोगे.

मई- जी मई आपके शर्त मैंने के लिए तैयार हु आप बताइये.

पुस्पा- मेरी पहली शर्त ये है की तुम्हे सदी के बाद हमारे साथ रहना होगा घरजमाई बन कर.

पुस्पा के बात सुन कर में कुछ देर तक सोचता रहा और फिर बोलै.

मई- ठीक है मुझे आपको पहली शर्त मंजूर है अब आप अपनी दूसरी शर्त बताओ.

पुस्पा- तुम अभी अभी बोले थे की तुम मेरी बेटी से सदी के बाद उसे अच्छे से रखोगे तो ठीक है जब तुम सब मैनेज कर hi लोगे तो तुम मेरी दूसरी शर्त भी पूरी कर सकते हो इसलिए मेरी दूसरी शर्त ये है की मुझे 1 साल में 10 करोड़ रूपए लेकर तुम डोज अगर तुम नहीं दे पाए तो तुम मेरी बेटी को तलाक दे डोज बोलो मंजूर है.

मई- ठीक है मुझे ये शर्त भी मंजूर है.

विक्की- देखने में तो फटीचर लग रहा है और बाटे देखो 1 साल में 10 करोड़ ले कर आएगा हँ..

अमृता- है है है सही बोलै भाई अगर ये खुद को भी बेच देगा तब भी 1 साल में 10 करोड़ नहीं ला पायेगा.

राधिका- अजय को घरजमाई में एक नौकर मिल गया हाहाहाहाहा.

नारायण- अब अगर सरे लोग बात कर चुके है तो आज से ठीक दो दिन बाद हम शनाया और प्रतिक की सदी करेंगे.

शनाया- दादा जी मुझे आपसे कुछ कहना था.

नारायण- है बेटी बोलो न क्या बोलना था.

शनाया- दादा जी मई चाहती हु की ये सदी सिंपल तरीके से हो मेरे सदी में सिर्फ घरवाले hi रहे और बाकि कोई नहीं और मेरी सदी कोर्ट में सिंपल तरीके से हो.

नारायण- आप क्या चाहते है प्रतिक.

मई- जैसा आप लोगो को अच्छा लगे.

नारायण- तो ठीक है दो दिन बाद हम कोर्ट में शनाया की सदी प्रतिक से करेंगे.

इसके बाद मई वह पर सबके साथ खाना खाया सुर वह से निकल गया वो ऑटो वाला हरी अभी भी बहार गेट पर मेरा इंतजार कर रहा था फिर मई हरी के ऑटो में बैठा और उसे अपने रूम माँ अड्रेस दिया और मुझे वही छोड़ने के लिए बोल दिया ऑटो में बैठने के बाद मई अभी अभी जो अंदर हुआ उसके बारे में सोचने लगा.

मई- (मन में ) लगता है शनाया मुझसे सदी नहीं करना चाहती या हो सकता है की वो अभी सदी hi नहीं करना चाहती हो लेकिन कुछ भी हो बेचारी गुरुदेव और अपने दादा के बचन में बंद गयी जैसे मई बंधा था लेकिन अब मई कर भी क्या सकता हु मई अपने गुरु के वेड को खली नहीं जाने दे सकता मुझे तो उससे शादी करना hi होगा लेकिन यदि वो ये सदी नहीं करना चाहती तो वो तो न बोल hi सकती थी फिर वो सदी के लिए क्यों मणि सायद जैसे मई अपने गुरुदेव के बात को ताल नहीं सकता वो भी अपने दादा जी के बात को ताल नहीं सकती अच्छा चलो कोई बात नहीं अभी भले hi उसको मुझसे सदी करने में प्रॉब्लम है लेकिन मई पूरी कोशिश करूँगा की उसको सदी के बाद कुछ भी प्रॉब्लम न हो मई कोशिश करूँगा की उसकी वो है मनोकामना पूरा करू जो वो सदी के बाद अपने हस्बैंड से चाहती होगी और मई एक न एक दिन उसके दिल में अपने लिए प्यार जगा hi दूंगा उसे मुझे अपने पति के रूप में पाकर गर्व होगा.

और उसके चाचा के फॅमिली में सरे लोग कितने कमीने है सब के सब एक नोम्बेर के लालची इंसान है और उन लोगो को खुद पर hi बहुत घमंड है मई सदी के बाद कोशिश करूँगा की उन लोगो से दूर राहु और अपना लौ प्रोफाइल मेंटेन कर के राखु खास कर के राजेश के फॅमिली के साथ. और सबसे बड़ी बात मुझे किस तरह से शनाया जे मम्मी का डिल जितना होगा.

यही सब सोचते हुए मई कब अपने रूम पर पंहुचा मुझे पता hi नहीं चला वो tom7jhe हरी ने बोलै की मई अपने रूम पर पहुंच गया हु तब मेरा इस तरफ ध्यान गया खैर मई रूम पर आने के बाद थोड़ा ध्यान लगाया और फिर सोने चला गया.

दूसरे दिन सुबह में उठ कर मई सबसे पहले फ्रेश हुआ और फिर सोचा की क्यों न हवेली में जा कर देखा जाये वही पर ट्रेनिंग भी कर लूंगा.

फिर मैंने तुरंत अपने स्पेस शक्ति को जागृत किया और वह से टेलिपोर्ट हो कर सीधा हवेली के अंदर पहुंच गया जब मई हवेली के अंदर आया तो मुझे यहाँ पर बहुत सारा नेगेटिव शक्ति महसूस हुआ इस लिए मई तुरंत hi एक मंत्र का उच्चारण करते हुए अपने शरीर से पॉजिटिव शक्ति निकलने लगा जिसके कारन हवेली में कोहराम मच गया वह पर नेगेटिव शक्ति का रोने और छिलने की आवाजे आने लगी.

मई- मई तुम लोगो को कल hi वार्निंग दे दिया था यहाँ से चले जाने के लिए लेकिन फिर भी तुम लोग यहाँ रुके रहे अब ये प्रॉपर्टी मेरी है और मई इस प्रॉपर्टी में किसी भी नेगेटिव शक्ति को बर्दास्त नहीं कर सकता इस लिए मई आज और अभी तुमलोगो को जला कर भस्म कर दूंगा.

नेगेटिव शक्ति- (रट और गिड़गिड़ाते हुए) हमें मत मारिये मालिक हमारी जान बक्श दीजिये हमसे गलती हो गयी हम अभी यहाँ से चले जायेंगे हमें छोड़ दीजिये मालिक हमें छोड़ दीजिये.

मई- मई तुम सब को छोड़ दू ताकि तुम लोग बहार जाकर मासूम लोगो को परेशां कर सको ऐसा कभी नहीं होगा.

इतना बोल कर मई कुछ मंत्र पढ़ने लगा तो मेरे हटो में आगे जलने लगी मई उस आगे को हवेली के चारो तरफ फैला दिया ये आग एक ऐसा आग था की इससे सिर्फ नेगेटिव शक्ति hi खत्म होती बाकि किसी भी चीज को कोई नुकशान नहीं होता क्युकी ये आग कोई मामूली आग नहीं बल्कि योग शक्ति से उत्पन आग थी कुछ देर में सरे नेगेटिव एनर्जी ख़तम हो गए अब वो जगह बिलकुल शुद हो गया था.

मई सरे नेगेटिव एनर्जी को जला कर मरने के बाद एक मंत्र पढ़ा और मेरे शरीर से एक एनर्जी निकल कर सीधा आसमान में गया और फिर आसमान से एक अदृस्य जल जैसा निचे गिरा और पूरी हवेली को उसके गार्डन के साथ धक् लिया ये एक सुरक्षा कवच था जो अब कभी भी नेगेटिव एनर्जी को हवेली के आस पास भी भटकने नहीं देगा.

खैर ये सब करने के बाद मई पुरे हवेली को एक बार घूम कर देखा और फिर गार्डन में आ गया ये जगह देख कर मई खुस हो गया क्युकी ये जगह मेरे ट्रेनिंग के लिए बहुत अच्छी थी सरे जगहों को अच्छी तरह से देखा.

मई- जगह तो बहुत अच्छी है लेकिन ये सालो से बंद पड़ी है जिसके करना यहाँ पर धूल और मकड़ी के जले आ गयी है जिससे ये देखने में अच्छा नहीं लग रहा है मुझे यहाँ साफ सफाई करवानी पड़ेगी लेकिन यहाँ तो कोई आता है नहीं तो मई ये कैसे करवाऊंगा एक काम करता हु इस मई hi अपने जल तत्त्व और वायु तत्त्व के मध्यान से साफ शाफ़ई कर दे रहा हु.

इसके बाद मैंने अपने शरीर से वायु तत्त्व को निकला और उसे पुरे हवेली में फैला दिया मेरे ऐसा करने से उस हवेली में एक हवा का अंधी आया और फिर हवेली के अंदर से बहार तक के सरे धूल मिटटी और मकड़ी के जल को उड़ाते हुए बहार लेके चला गया.

Mai-Hmm धूल मिटटी और मकड़ी के जल तो वायु तत्त्व से साफ हो गए अब बचा है हवेली के गन्दगी जो की सालो से बंद रहने के कारन यहाँ फैला है चलो इसे भी जल तत्त्व से साफ कर देता हु.

फिर मैंने अपने जल तत्त्व को बुलाया और फिर पुरे हवेली में बढ़ आ गयी फिर क्या था जितने भी हवेली में गन्दगी थी सब साफ हो गया ये देख कर मैंने अपने हाथ को दुबारा हिलाया तो सरे पानी वह से गायब हो गया.

अब जा कर वो हवेली देखने में हवेली लग रहा था नहीं तो पहले ऐसा लग रहा था की कचरे का ढेर लगा हुआ है.

मई- हम्म हवेली तो अच्छा है लेकिन है पुराने ज़माने का इस लिए इसे रेनेवते करवाना पड़ेगा कोई नहीं अभी इसी से काम चला लेता हु रेनेवते का बाद में देखेंगे.

अभी मुझे यहाँ आये हुए ज्यादा समय नहीं हुआ था इस मई सोचा की चलो अभी मेरे पास जितना समय है उतना ट्रेनिंग कर लिया जय इस लिए मई गार्डन में गया और अपने दिव्या दृस्टि और स्पेस शक्ति का ट्रेनिंग करने लगा ट्रेनिंग करते करते 2 ऑवर कब निकल गए पता hi नहीं चला.

फिर मई वह से टेलिपोर्ट हो कर सीधा अपने किराये वाले रूम में पंहुचा और फ्रेश हो कर रूम से बहार आया और एक ऑटो पकड़ कर सोल्लगे के लिए निकल गया फिर रस्ते में एक जगह रुक कर कुछ नास्ता किया और फिर सोल्लगे निकल गया.

 
अपडेट 7


मई हवेली से वापस आ कर पहले फ्रेश हुआ और फिर तैयार हो कर सोल्लगे के लिए निकल गया मुझे ऑटो ड्राइवर हरी ने अपना नंबर दे दिया था इस लिए मई उसे कॉल कर के बुलाया थोड़ी देर बाद वो आ गया तो मई उसे सोल्लगे चलने के लिए बोलै रस्ते में मैंने एक रेस्टोरेंट देख कर उसे गाड़ी रोकने के लिए बोलै और जाकर रेस्टुरेंट में नास्ता किया और फिर सोल्लगे आ गया.

आज मेरा कॉलेज में पहला दिन था इस लिए मुझे ब का क्लास ढूंढने में थोड़ी दिक्कत हुयी फिर जब मुझे क्लास मिल गया तो मई क्लास रूम के पास गया.

मई- मई ी के इन मम.

मम- नहीं तुम 5 मिनट लेट हो इस लिए बहार खड़े रहो.

मम के बात सुन कर मैंने अपने मोबाइल में समय देखा तो सच मई पांच मिनट लेट था.

मई- सॉरी मम वो क्या है की आज मेरा इस सोल्लगे में पहला दिन है इस लिए मुझे क्लास रूम ढूंढने में थोड़ा समय लग गया.

Mam-woh तो आज तुम्हारा पहला दी है ठीक है तुम अंदर आ सकते हो.

मम ने बोलै तो मई क्लास रूम में आ गया क्लास रूम में आने के बाद मैंने देखा की पूरा क्लास भरा हुआ था सिर्फ पीछे में एक सीट खली था इसलिए मई वही जाकर बैठ गया और पुरे क्लास को देखने लगा तभी मेरी नजर आगे के सीट पर बैठी एक लड़की पर पड़ी.

मई- हम्म तो ये भी इसी क्लास में है चलो अच्छा है अब तो रहना और पढ़ना सब साथ में hi होगा.

ये लड़की और कोई नहीं बल्कि शनाया थी जो आगे के सीट पर अपने दोस्त के साथ बैठी थी मैंने जब उसे ध्यान से देखा तो पाया की वो कुछ उदास सी है.

मई- ये सायद सदी वाली बात को लेकर उदास है.

अभी मई उसे देख hi रहा था की तभी मुझे मम की आवाज सुनाई दी.

मम- हे नई एडमिशन.

मई- यस मम

मम- चलो अपना इंट्रोडक्शन दो.

मई- मेरा नाम नाम प्रतिक है और मई हिमालय के पास के एक बस्ती से आया हु और मई अपना सारा पढ़ाई लॉन्ग डिस्टेंस से किया हु और मैंने अपने लास्ट एग्जाम में 98.9% मार्क हासिल किया था.

मम- हम्म तो वो तुम थे जो पिछले एग्जाम में आल इंडिया टॉप किये थे.

Mai-jee मम

मम- हाउ इस पॉसिबल तुम लॉन्ग डिस्टेंस से पढ़ कर इतना इतना मार्क कैसे ला सकते हो.

मेरे बात को सुन कर मम hi नहीं बल्कि पुरे क्लास आश्चर्य चकित थे शनाया भी आश्चर्य से मुझे hi घूरे जा रही थी.

Shanaya(man में) हु तो ये लंगूर पढ़ाई में इतना तेज़ है चलो कुछ तो खुबिया है इस लंगूर में.

इधर मम ने सबको संत किया और फिर वो पढ़ने लगी थोड़ी देर बात उनका समय समाप्त हुआ तो वो चली गयी उनके जाने में बाद मेरे बगल में जो लड़का बैठा था वो मुझसे बोलै.

लड़का- ही प्रतिक मेरा नाम सोनू है वैसे क्या तुम सच में आल इंडिया टॉप किये थे.

मई उसके लड़के के बात को सुन कर उसके तरफ देखने लगा वो लड़का देखने में अच्छा था लेकिन उसके पहनावे से लग रहा था की वो एक मिडिल क्लास फॅमिली से बिलोंग करता होगा.

मई- तुम्हे क्या लगता है.

सोनू- मुझे क्या लग्न है वैसे मम ने बोलै है तो सच hi बोलै होगा.

मई- है ये सच है.

सोनू- वैसे क्या तुम सच में हिमालय के पास से हो.

मई- है और तुम कहा से हो.

सोनू- मई तो यही मुंबई से hi हु.

इस तरह से बात करते हुए हमारा समय बीतता गहा और लंच का समय आ गया तो सोनू बोलै.

सोनू- चलो भाई कैंटीन चलते है.

इसके बाद मई उसके साथ कैंटीन आ गया और एक टेबल पर बैठ गया वही पास के hi एक टेबल पर शनाया और उसकी कुछ फ्रेंड बैठे हुए थे.

सोनू- मई जा रहा हु आर्डर देने तुम क्या खाओगे.

मई- कुछ भी चलेगा.

फिर सोनू आर्डर देने के लिए चला और मई वही बैठा हुआ था और मई बार बार शनाया को hi देखे जा रहा था पता नहीं उसमे ऐसी क्या जादू थी की उसकी चेहरे से मेरी नजर hi नहीं हैट रही थी मई अभी उसे देख hi रहा था की तभी सोनू आर्डर दे कर आ गया और मुझे इस तरह से शनाया को देखते हुए पा कर वो मुझसे बोलै.

सोनू- भाई उसे मत देख वो नहीं पत्नी वाली है.

मई- अरे ऐसा कुछ भी नहीं है भाई.

सोनू- और ऐसा सोचना भी नहीं.

मई- क्यों ऐसा सोचने में क्या बुराई है.

सोनू- भाई तुम्हारा आज इस सोल्लगे में पहला दिन है इस लिए तुम्हे कुछ भी लता नहीं है.

मई- अच्छा ऐसा है तो तुम्हे बता दो जो मुझे नहीं पता है.

सोनू- ठीक है तो सुनो शनाया इस सोल्लगे की no. 1 बेठी है इसे सोल्लगे का हर लड़का चाहता है यहाँ तक की इस सोल्लगे के ट्रस्टी का लड़का जिसका नाम नीरज है वो भी इसे चाहता है लेकिन ये लड़की किसी को भाव नहीं देती यहाँ तक की नीरज इसको कितने बार प्रपोज़ भी कर चूका है लेकिन ये हर बार उसे मन कर देती है ट्रस्टी के बीटा होने के कारन नीरज का इस सोल्लगे में बहुत चलता है तुम ये भी कह सकते हो की नीरज इस सोल्लगे के दादा है और जो भी लड़का शनाया के करीब आने की कोशिश करता है नीरज उसे या तो हाथ पेअर तोड़ कर सोल्लगे से निकलवा देता है या फिर उसे सदा के लिए गायब कर देता है और यही सब कारन है की मई तुम्हे बोलै की अगर तुम्हारे दिल में शनाया के लिए कुछ भी हो तो उसे निकल दो क्युकी हम लोग मिडिल क्लास फॅमिली से बिलोंग करते है और हमें इतने बड़े बड़े सपने नहीं देखना चाहिए.

मई सोनू में बात सुन कर मुस्कुराने लगा और धीरे से बोलै.

मई- हम्म नीस तो इस सोल्लगे में मेरी होने वाली वाइफ के दीवाने भी है और अब इसे क्या बताऊ मई की शनाया तो मेरी जान बन गयी है और इस से मुझसे अब कोई अलग नहीं कर सकता और यहाँ तक की कल मेरी इससे सदी भी होनी है

सोनू- कुछ बोलै क्या तुमने अभी.

मई- नहीं तो सायद तुम्हारी कण बज रही होगी.

इधर हम दोनों वह पर बैठ कर नास्ता कर रहे थे तभी शनाया की नजर मुझपे पड़ी वो मेरी तरफ एक नजर देख कर फिर अपना सर दूसरे तरफ फेर ली उसके चेहरे पर अभी भी उदासी छायी हुयी मुझसे उसकी उदासी देखि नहीं जा रही थी लेकिन मई अब कर भी क्या सकता था.

मई और सोनू ने अपना लंच फिनिश किया इसके बाद सोनू जाकर लंच का बिल पाय किया हलाकि बिल मई पाय करना चाहता था लेकिन सोनू जबरदस्ती बिल कर दिया और बोलै

सोनू- भाई ये मेरे तरफ से हमारी नए दोस्ती का एक छोटा सा ट्रीट था इस लिए ये बिल्क मई पाय किया अब हम दोस्त है तो हमें बहुत बार साथ में लंच करने माँ मौका मिलेगा इस लिए नेक्स्ट तुम तुम बिल पाय कर देना.

मई उसकी बात को सुन कर मुस्कुराने लगा और अपना सर है में हिला दिया सोनू एक बहुत अच्छा लड़का था उसके शरीर से पॉजिटिव विवे आ रही थी इसलिए मई उससे बात कर रहा था नहीं तो मुझे किसी अनजान के साथ इतनी जल्दी घुलने मिलने की आदत नहीं है.

इसके बाद हम दोनों वह से जाने लगा तभी सोनू के मोबाइल पर एक कॉल आया वो उस कॉल को अटेंड कर के बात करने लगा जैसे hi सोनू ने दूसरे तरफ की बात सुनी वो परेशां हो गया और हड़बड़ी ने वह से जाने लगा तो मई उससे पूछा.

मई- वैसे तो हमलोग आज hi मिले है और हमारी कोई खास जान पहचान भी नहीं है लेकिन तुम मुझे अपना दोस्त मन है और इसी दोस्ती के कारन मुझे ये जानने का हक़ है की मेरा दोस्त इतना परेशां क्यों है इसलिए तुम मुझे बता सकते हो की अभी किसका कॉल था और उसने ऐसा क्या बोलै की तुम इतना परेशां हो गए.

सोनू मेरी बात को सुन कर मुझे देखा उसके आँखों में आंसू थे उसने रुवासी आवाज में बोलै.

सोनू- पता नहीं कैसे लेकिन अचानक मेरी माँ का तबियत बहुत ज्यादा ख़राब हो गयी उसे लेके हॉस्पिटल गए है और मुझे अभी वह जाना होगा.

मई- तुम ज्यादा टेंशन मत लो आंटी ठीक हो जाएँगी चलो मई भी तुम्हारे साथ हॉस्पिटल चलता हु.

इसके बाद मैंने हरी को कॉल किया तो हरी कुछ hi देर में अपना ऑटो ले कर सोल्लगे के गेट के पास आ गया और हम दोनों उसमे बैठ कर हॉस्पिटल के लिए निकल गए.

इधर हॉस्पिटल में स्ट्रेचर पर एक औरत को िक में ले कर जाया जा रहा था और वही पर एक मिडिल आगे आदमी उदासी से और नाम आँखों से उस स्ट्रेचर को जाते हुए देख रहे थे और भगवन से प्रार्थना कर रहे थे.

इधर डॉक्टर जल्दी से उस औरत को लेकर िक में गए और उसका इलाज करने लगे तब तक मई और सोनू भी हॉस्पिटल पहुंच गए थे सोनू हॉस्पिटल के रिसेप्शन एरिया में जाकर पूछता है.

सोनू- एक्सक्यूज़ में मम

रिसेप्शनिस्ट- यस सर बोलिये क्या काम है.

सोनू- मम अभी अभी यहाँ पर एक पेटेंट आयी है उनका नाम गीता वर्मा है वो की फ्लोर पर है.

रिसेप्शनिस्ट- एक मिनट सर मई चेक कर के बताती हु.

इसके बाद वो रिसेप्शनिस्ट चेक करती है और कुछ देर बोलती है सर उन्हें 3रद फ्लोर पर ले कर जाया गया है आप वह जा सकते है.

सोनू- थैंक्स मम

इसके बाद हम दोनों 3रद फ्लोर पर गए जब हम दोनों 3रद फ्लोर पर पहुंचे तो मैंने देखा की एक मिडिल आगे आदमी िक के बहार एक चेयर पर उदास बैठा था और बार बार िक के तरफ देख रहा था जैसे hi सोनू के नजर उस आदमी पर जाता है वो भागते हुए उसके पास जा कर बोलता है.

सोनू- पापा मम्मी कैसी है उनको क्या हुआ है वो ठीक तो है न.

सोनू के फादर का नाम विजय वर्मा है.

विजय- अभी डॉक्टर ने कुछ भी नहीं बोलै है अभी तुम्हारी माँ िक में है और उसका इलाज चल रहा है.

अभी ये लोग बात कर hi रहे थे की तभी िक का दरवाजा खुला और एक डॉक्टर बहार आया जिसे देख कर सोनू जल्दी से उनके पास गया और बोलै.

सोनू- डॉक्टर साहब मेरी माँ कैसी है उनको क्या हुआ है.

डॉक्टर- देखिये उनकी हालत बहुत ख़राब है उनको पहले से hi अपेंडिक्स था जो अब अंदर की कट हो गया है और उसका पाइजन पुरे पेट में फ़ैल गया है अगर उनका जल्दी hi ऑपरेशन नहीं किया गया तो उनको बचाना मुश्किल हो जायेगा मुझे तो ये समझ में नहीं आ रहा की उनको इस बीमारी के चलते पहले भी बहुत बार पेट दर्द करता होगा तो आपलोग इन्हे पहले क्यों नहीं दिखाए अगर आप लोग पहले hi देखा देते तो ऐसा नौबत आता hi नहीं.

विजय- हम लोगो को इसके बारे में कुछ भी पता नहीं था आप जल्दी से ऑपरेशन कर के मेरे वाइफ को बचा लीजिये.

डॉक्टर- ठीक है मई ऑपरेशन की तयारी करता हु आप बिलिंग काउंटर पर जा कर 10 लाख जमा कर दीजिये.

विजय- क्या 10 लाख लेकिन अभी मेरे पास इतने पैसे नहीं है आप ऑपरेशन की तयारी कीजिये तब तक मई पैसे का बेवस्था करता हु.

डॉक्टर- देखिये ऐसा नहीं होता है आप पहले पैसे जमा कीजिये इसके बाद ऑपरेशन होगा.

डॉक्टर के बात सुन कर विजय और सोनू दोनों रोने लगते है और उस डॉक्टर के आगे घुटने तक देते है और हाथ जोड़ कर बोलते है.

सोनू- प्लीज डॉक्टर मेरी माँ को बचा लीजिये हम कही से भी 10 लाख रूपए ला कर जमा कर देंगे प्लीज डॉक्टर प्लीज.

मई अभी तक साइड में खड़ा हो कर डॉक्टर के बाटे सुन रहा था और उसका ड्रामा देखा रहा था लेकिन डॉक्टर की नजर अभी तक मुझ पर नहीं पड़ी थी अगर वो मुझे देख लेता तो वो इतना बहस hi नहीं करता वो चुप चाप ऑपरेशन स्टार्ट कर देता.

सोनू और उसके पिता जी को ऐसे घुटनो पर बैठ कर डॉक्टर के आगे गिड़गिड़ाते देख कर मुझे अच्छा नहीं लगा तो मई डॉक्टर के पास जा कर बोलै.

मई- एक्सक्यूज़ में डॉक्टर क्या मई एक बार पेशेंट को देख सकता हु.

डॉक्टर- (बिना मेरे तरफ देखे ) आप लोग समझते क्यों नहीं की पेशेंट का हालत बहुत ख़राब है और आप उसे देख कर क्या करेंगे वो पेशेंट आपको देखने से ठीक..

इसके आगे उसको कुछ बोलै hi नहीं गया क्युकी वो बोलते बोलते मेरे तरफ मुद गया और उसकी जैसे hi नजर मुझ पर पड़ी वो चौक गया.

डॉक्टर- अरे आप सॉरी सॉरी मुझे माफ़ कर दीजिये मैंने आपको देखा hi नहीं.

दरअसल ये डॉक्टर वही था जो विशाल ओबेराय के बेटे का इलाज कर रहा था इस लिए वो मुझे देखते hi पहचान गया.

मई- डॉक्टर साहब मैंने पूछा की क्या मई एक बार पेशेंट को देख सकता हु.

डॉक्टर- है है क्यों नहीं आइये मेरे साथ.

जैसे hi मई डॉक्टर के साथ अंदर जाने लगा सोनू भी बोलै साथ में चलने के लिए बोलै लेकिन डॉक्टर उसको मन कर दिया जिसके कारन उसका चेहरा उतर गया मुझे उसके लटका हुए चेहरा देख कर अच्छा नहीं लगा इस लिए मई उसे अंदर आने के लिए बोल दिया मेरे बोलने के कारन फिर उसे कोई भी नहीं रोका.

मई अंदर आ कर सोनू के माँ का निरिक्षण करने लगा मई अपने दिव्या दृस्टि से सोनू के माँ के शरीर को देखा तो मई चौक गया क्युकी डॉक्टर सही hi बोल रहा था अपेंडिक्स का पोईसिओं उनके पुरे शरीर में फैल रहा था अगर सच में कुछ नहीं किया गया तो वो मर जाएँगी.

मई- हम्म पेशेंट की हालत तो बहुत ख़राब है अगर अभी कुछ नहीं किया गया तो इनको बचाना मुश्किल हो जायेगा.

मेरे बात को सुन कर डॉक्टर और सोनू सब चौक गए डॉक्टर इस लिए चौका की जो जांच वो मशीन द्वारा किया उसे मई बस देखते hi बता दिया और सोनू इस लिए चौका की मुझे कैसे पता चला जो मई ऐसा बोल रहा हु.

सोनू- तुम्हे कैसे पता चला.

मई- बस पता चल गया.

सोनू- ठीक है डॉक्टर साहब आप मी माँ का जल्दी से ऑपरेशन कीजिये प्लीज.

मई- ऑपरेशन करते करते बहुत समय हो जायेगा तब तक इनको बचना मुश्किल है.

सोनू- देखो प्रतिक भले hi तुम मेरा दोस्त हो लेकिन अगर मेरी माँ के बारे में ऐसे उल्टा सीधा बोले तो ठीक नहीं होगा समझे.

मई- मई सही बोल रहा हु सोनू तुम मेरे बातो पर विश्वास करो.

सोनू- तुम कोई डॉक्टर नहीं हो जो तुम कुछ भी बोल सकते हो प्लीज अब चुप रहो.

डॉक्टर- ये तुम अभी चुप रहो और इनको बालने दो मुझे इन पर पूरा विश्वास है अगर ये ऐसा बोल रहे है तो जरूर कुछ बात होगा तुम अभी इन्हे अच्छे से नहीं जानते आप बताइये अब हमें क्या करना होगा.

मई- आप बस एक सिल्वर नीडल के सेट ले कर आइये इसके बाद मई इनका इलाज करूँगा.

डॉक्टर मेरे बात को सुन कर वह से चला गया और इधर सोनू मेरे बात को सुन कर चौक गया और बोलै.

सोनू- तुम मेरे माँ की इलाज करोगे क्या तुम कोई डॉक्टर हो.

मई- ऐसा hi समझ लो.

सोनू- मुझे तुमपर विश्वास नहीं है अगर मेरी माँ को कुछ हो गया तो.

मई- कुछ भी नहीं होगा आंटी को तुम मुझ पर एक बार विश्वास कर के देखो.

मेरे इतना बोलने के बाद फिर सोनू कुछ नहीं बोलै इधर थोड़ी देर बाद डॉक्टर एक सिल्वर नीडल के सेट लेकर आ गया और मुझे दिया फिर मैंने अपने दिव्या दृस्टि से आंटी के बॉडी में एक्यूपंक्चर पॉइंट को ढूंढा और उसमे सिल्वर नीडल को दाल दिया.

सिल्वर नीडल डालने के बाद मई अपने योगिक शक्ति को उनके शरीर में डालने लगा जिसके कारन उनके शरीर में जितने भी पोईसिओं था वो सब वास्प बन गया.

मई- आप सब लोग मास्क लगा लो क्युकी मई उस पोईसिओं को बहार निकलने वाला हु.

मेरा इतना बोलना hi था की डॉक्टर भागते हुए गया और मास्क ला कर सरे लोगो को दे दिया फिर सरे लोग मास्क लगा कर मेरे और आंटी के तरफ देखने लगे.

मैंने जब देखा की सरे लोग मास्क लगा लिए है तो मैंने अपने योगिक शक्ति के प्रेसर को अन्त्य के शरीर में बढ़ने लगा जिसके कारन उनके शरीर से पोईसिओं वास्प बन कर सिल्वर नीडल से बहार निकलने लगा ये प्रक्रिया काम से काम 10 मिनट तक चला मेरा पूरा शरीर पसीने से भीग गया था और मुझे थोड़ी कमजोरी जैसे लगने लगी थी क्युकी मैंने अपने शरीर के सरे योगिक शक्ति को पोईसिओं निकलने में झोक दिया था.

जब सारा पोईसिओं निकल गया तो मई सिल्वर नीडल को बहार निकल लिया जैसे hi आंटी के शरीर से सिल्वर नीडल निकला वैसी hi तुरंत आंटी को वोमिटिंग होने लगा आंटी के वोमिटिंग से हरे कलर के पदार्थ निकल रहा था थोड़ी देर वोमिटिंग करने के बाद आंटी संत हो गयी और फिर धीरे धीरे अपनी आँखे खोली.

आंटी को आँखे खोलता देख कर सरे लोग चौक गए और सोनू तो खुसी से छिलने लगा.

डॉक्टर- ये तो चमत्कार हो गया बिना कोई ऑपरेशन के अपेंडिक्स का पोईसिओं निकलते मैंने पहली बार देखा है आप सच में महँ है आप एक चमत्कारी डॉक्टर है.

सोनू अपने माँ को सही सलामत देख कर मेरे पैरो में गिर गया और बोलै.

सोनू- तुम सच में महँ हो तुम मेरे लिए मेरे भगवन बन कर आये हो तुमने आज मेरी माँ को बचा कर मेरे ऊपर बहुत बड़ा उपकार किया है आज से मई सोनू सदा तुम्हारा वफादार रहूँगा आज से तुम hi मेरे सच्चे मित्र हो.

मई- अरे बस बस अब कितना नौटंकी करेगा और मई तुमपर कोई उपकार नहीं किया है तुम मेरे दोस्त हो इस लिए तुम्हारी माँ भी मेरे माँ के सामान हुयी तो बताओ की अपने माँ को बचने में कैसा उपकार.

सोनू- तुम सच में महँ हो प्रतिक मई भाग्यशाली हु जो मुझे तुम जैसा दोस्त मिला.

अभी हमलोग बात hi कर रहे थे की तभी मेरे मोबाइल पर किसी का कॉल आने लगा जब मैंने कॉल अटेंड किया तो उधर से आवाज आयी.

आवाज- हैल्लो मई प्रॉपर्टी एजेंट बोल रहा हु कल हमारी डील हुयी थी न उस हवेली को लेकर.

मई- है है बोलिये कैसे कॉल किया.

एजेंट- वो क्या है न की अभी अभी हवेली के मालिक यहाँ आये है और उनको तुरंत hi किसी दूसरे सहर के लिए निकलना है तो क्या आप अभी आ कर पेपर सिग्नेचर कर सकते है.

मई- है मई अभी आ रहा हु उनको थोड़ा वेट करने के लिए बोलिये.

एजेंट- ठीक है आप जल्दी आइये मई उन्हें रोक कर रखता हु.

कॉल पर बात करने के बाद मई सोनू के पास आया और बोलै.

मई- यार सोनू मुझे एक अर्जेन्ट काम आ गया है इस लिए मुझे अभी जाना होगा (फिर डॉक्टर से) डॉक्टर साहब इनके शरीर में अभी बहुत कमजोरी है एक बार आप इनके पुरे शरीर को जाँच कर लीजियेगा और फिर इनको ताकत का इंजेक्शन लगा दीजियेगा.

डॉक्टर- ठीक है नर्स जांच की तयारी करो.

मई- ठीक है तो मई चलता हु.

सोनू- भाई रुको थोड़ी देर मेरे पापा से मिल लो इसके बाद जाना.

मई- ठीक है चलो.

फिर हम दोनों िक से बहार आये तो देखा की विजय अंकल परेशानी से इधर उधर घूम रहे थे और उनका चेरा भी उदास था अपने पापा को ऐसे देख कर सोनू जल्दी से उनके पास गया और बोलै.

सोनू- पापा अब टेंशन लेने की जरुरत नहीं है माँ अब ठीक है.

विजय- (खुस होते हुए) क्या सच में लेकिन डॉक्टर तो बोल रहे थे की उसका ऑपरेशन करना होगा तो वो ठीक कैसे हो गयी.

सोनू-( मुस्कुराते हुए ) ये मेरे दोस्त प्रतिक का कमल है वो एक चमत्कारी डॉक्टर है.

विजय- (खुस होते हुए) कोण प्रतिक और वो अभी कहा है क्या वो अभी भी अंदर hi है मुझे उनसे मिलना है और उनको थैंक यू बोलना है.

सोनू- वह सॉरी मई तो आपको उससे इंट्रो hi नहीं करवाया पापा ये है मेरा दस्त प्रतिक और प्रतिक ये है मेरे पापा विजय वर्मा

मई आगे बढ़ कर उनको प्रणाम किया.

विजय- खुश रहो बीटा क्या सच में तुमने hi मेरी वाइफ को नयी जिंदगी दी है.

सोनू- है पापा यही है जिसने माँ का इलाज किया है.

विजय- तुमने मेरे ऊपर बहुत बड़ा उपकार किया है बीटा मई आज से तुम्हारा कर्जदार हो गया.

मई- ये गलत है अंकल आप बीटा भू बोल रहे है और उपकार का भी बात कर रहे है भला एक बीटा कैसे अपने पैरेंट पर उपकार कर सकता है बस मुझे आप सब का आशीर्वाद चाहिए और कुछ नहीं.

विजय- बीटा अभी डॉक्टर बोल रहे थे की मेरे वाइफ के ऑपरेशन में 10 लाख लगेगा तो मेरे पास तो 10 लाख नहीं अभी सिर्फ 5 लाख है इसे तुम रख लो क्युकी तुमने hi मेरी वाइफ की जान बचाई है इस लिए इस्पे तुम्हारा हक़ है.

मई- सॉरी अंकल मई इसे नहीं ले सकता क्युकी मैंने आंटी की जान पैसो के लिए नहीं बचाया है और अभी आप मुझे बीटा बोल रहे थे दूसरे hi पल पैसा दे कर मुझे पराया कर रहे है.

विजय- हमें माफ़ कर दो बीटा मुझे तुम्हारा दिल दुखने का इरादा नहीं था ठीक है बीटा जब तुम मुझे अपना परिवार मानते hi वो तो मई तुम्हे पैसा नहीं दूंगा लेकिन उसके बदले में मई तुम्हे कुछ और दूंगा और इसे तुम्हे लेना hi होगा वो चीज तो अभी नहीं है मेरे पास लेकिन तुम जब भी सोनू के साथ मेरे घर आओगे तब तुम्हे मई वो चीज दूंगा.

मई- और वो चीज है क्या जो आप मुझे इतना प्यार से देना चाहते है.

विजय- वो तो तुम्हे मई तब hi बताऊंगा जब तुम मेरे घर पर आओगे.

मई- ठीक है अंकल मई आपके घर जल्द hi आने की कोशिश करूँगा अब मई चलता हु और है सोनू कल 10 बजे रजिस्ट्रार ऑफिस आ जाना वह तुम्हारे लिए एक सरप्राइज है.

सोनू- क्या सरप्राइज है अभी बता नहीं सकते है.

मई- (मुस्कुराते हुए) मई ज्यादा तो नहीं बताऊंगा लेकिन तुम इतना जान लो की कल के बाद हमारे सोल्लगे के बहुत से लड़को की दिल टूटने वाली है और है तुम कल यद् से आ जाना ठीक है.

इतना बोल कर मई वह से निकल गया और इधर सोनू मेरे बात का मतलब समझने की कोशिश कर रहा था जब उसे कुछ नहीं समझ में आया तो वो बोलै.

सोनू- इतना दिमाग लगाने से अच्छा है की मई कल वह जाकर hi देख लूंगा.

इधर मई वह से निकल कर सीधा प्रॉपर्टी एजेंट के पास पंहुचा और हवेली के पेपर पर सिग्नेचर किया और वो पेपर लेकर वह से अपने रूम के लिए निकल गया.

रूम पर आने के बाद मई अपना दरवाजा अच्छे से लॉक किया और फिर टेलिपोर्ट हो कर सीधा हवेली पहुंच गया.

हवेली जाने के बाद मई सीधा गार्डन में गया और वह चारो तरफ घूम कर देखने लगा.

मई- गार्डन तो अच्छा है और ये काफी बड़ा भी है अगर मई यहाँ पर आयुर्वेदिक औषधियों का खेती करू तो मुझे औषधि ढूंढने के लिए कही और नहीं जाना पड़ेगा और वैसे भी मई हिमालय से आते समय बहुत सरे औषधीय का बीज साथ में लेकर आया था मई उन बीजो को यही पर ऊगा दे रहा हु वैसे भी यहाँ पर मेरे आलावा और कोई आएगा नहीं और जो आएगा वो मेरे hi परमिशन से आएगा इस लिए मुझे इन औषधियों का चिंता करने की जरुरत नहीं hai.aur वैसे भी मई यहाँ भ्रम फार्मेशन लगा दूंगा ताकि ये औषधि मेरे शिवा किसी और को दिखे hi नहीं.

इसके बाद मई वह से टेलिपोर्ट हो कर अपने रूम में आया और बैग से औषधियों के बीज को निकल लिया और फिर से टेलिपोर्ट हो कर हवेली आ गया और फिर गार्डन में जा कर उन औषदीयो को जमीं में बो दिया.

मई- अगर इन औषधियों को किध अंकुरित हो कर बड़ा होने में बहुत समय लग जायेगा तो मई इनका जल्दी में उपयोग कर hi नहीं पाउँगा. है एक काम करता हु मई अपने अश्विनी बिद्या से इन औषधियों को पांच साल बड़ा कर देता हु.

फिर मई वही पर बैठ कर एक मंत्र का उच्चारण करते हुए अपने अश्विनी बिद्या को जागृत करने लगता हु थोड़ी देर बाद मेरे अश्विनी बिद्या जागृत हो जाता है जिसके कारन वह से जो पौधे सुख भी गए थे वो पुनः हरा भरा हो गए फिर मई अपने अश्विनी बिद्या को वाटर एलिमेंट में मिला कर उन बीजो पैट पानी डालता हु तो देखते hi देखते वो बीज अंकुरित हो जाते है और धीरे धीरे बढ़ने लगते है लेकिन मेरे अश्विनी विद्या से

भी वो औषधि ज्यादा नहीं बढ़ पते है.

मई- ये औषधि तो मेरे अश्विनी विद्या से भी ज्यादा नहीं बढ़ा मई अब क्या करू (कुछ देर सोचने के बाद मुझे एक उपाय सुझा ) क्यों न मई अश्विनी देव को प्रसन कर के उनके वनस्पति का जीवन सर मांगू और वैसे भी मुझे अश्विनी देव का आशीर्वाद प्राप्त है की मई जब भी उनसे कोई अपनी इक्छा प्रकट करूँगा वो मुझे जरूर देंगे.

मई फिर से वही पर बैठ गया और एक मंत्र उच्चारण करने लगा थोड़ी देर मंत्र उच्चारण करने के बाद मई अपने मन में बोलै.

मई- हे अश्विनी देव मुझे आपसे वनस्पति का जीवन सर चाहिए हे देव मेरी मदत कीजिये.

मेरा इतना बोलना hi था की मेरे हाथ में एक कलश आ गया जिसमे वनस्पति का जीवन सर भरा हुआ था मेरे हाथ में कलश प्रकट होने के बाद मेरे मन में एक आवाज भी सुनाई दी.

आवाज- पुत्र इस कलश में वनस्पति का जीवन सर है इस जीवन सर का एक बून्द किसी भी तरह के वनस्पति को एक साल के बराबर ऊर्जा देता है और ये जीवन सर सिर्फ वनस्पति पर hi काम नहीं करता बल्कि इसके मदद से किसी भी मनुष्य के जीवन ऊर्जा को बढ़ा सकते हो इस जीवन सर का एक बून्द किसी भी मनुष्य के जीवन को 10 साल बढ़ा सकता है और ये उस मनुष्य पर सिर्फ एक बार hi काम करेगा इस लिए तुम इसे सोच समझ कर इस्तेमाल करना और है ये कलश एक जादुई कलश है ये तुम्हारे सोचने भर से गायब हो जायेगा और फिर तुम इसे यद् करोगे तो ये पुनः तुम्हारे हाथ में आ जायेगा और इसमें में से जीवन सर कभी भी ख़तम नहीं होंगे.

मई- आपको कोटि कोटि नमन प्रभु और धन्यवाद् प्रभु मुझे इतने बहुमूल्य उपहार देने के लिए.

मई आज बहुत कुश था क्युकी मई अब किसी का भी जीवन ऊर्जा को बढ़ा सकता था और ये मुझे आगे बढ़ने में बहुत मदत करता फिर वह से उठ कर सरे अंकुरित हुए औषधि के पौधों में पांच पांच बून्द जीवन सर का डाला और वो सरे पौधे देखते hi देखते पांच पांच साल के हो गए इसके बाद मई वह चारो तरफ एक भ्रम जल बना दिया जिसके कारन वो जगह अब दिखाई hi नहीं दे रहा था अब उस गार्डन के आधा हिंसा hi गायब हो गया था.



मई ये सब करने में बहुत थक गया था इस लिए मई वही पर बैठ कर ध्यान करने लगा और अपनी खोई हुयी ऊर्जा को प्राप्त करने लगा जब मेरी खोयी हुयी ऊर्जा वापस आ गया तो मई वह से टेलिपोर्ट हो कर अपने किराये वाले रूम में आ गया.
 
अपडेट 8


मई हवेली से सीधा अपने किराये वाले रूम में टेलिपोर्ट हो गया रूम में पहुंचने के बाद अपने लिए खाना रेड्डी किया और फिर खाना खा कर सो गया.

दूसरे दिन सुबह में उठ कर फ्रेश हुआ फिर हवेली टेलिपोर्ट हो गया और वह पर अपने दैविक शक्तियों का ट्रेनिंग करने लगा करीब 3 घंटे तक ट्रेनिंग और ध्यान करने के बाद वापस अपने रूम में आ गया और स्नान किया और फिर रेड्डी हो कर मई कोर्ट के लिए निकल गया फिर कुछ hi देर में मई कोर्ट में था वह पर अभी कोई भी नहीं आया था इस लिए मई वही खड़ा हो कर सकबा इंतजार करने लगा.

थोड़ी देर बाद मुझे सोनू आते हुए दिखाई दिया तो मई उसे हाथ के इशारो से अपने तरफ बुलाया हलाकि आज मेरा सदी जरूर था लेकिन मई अभी भी नार्मल कपडा hi पहने हुआ था इस लिए सोनू को शक भी नहीं हुआ की मई यहाँ पर क्यों आया हु सोनू मेरे पास आया तो मई उससे पूछा.

मई- सोनू आंटी की तबियत अब कैसी है.

सोनू- माँ अब बिलकुल ठीक है आज सैम तक उनको हॉस्पिटल से डिस्चार्ज भी मिल जायेगा ये सब तुम्हारे कारन हुआ है अगर तुम न होते तो सायद मेरी माँ आज जिन्दा नहीं होती.

मई- अब वो सब बाटे छोडो भी यार.

हम दोनों अभी बाटे कर hi रहे थे की तभी सोनू की नजर आते हुए शनाया पर पड़ी जिसे देख कर वो मुझसे बोलै.

सोनू- ये हमारी कॉलेज की क्वीन शनाया यहाँ क्या कर रही है.

जब सोनू ने मुझे बताया की शनाया आ चुकी है तो जिधर वो देख रहा था मई भी उधर hi देखने लगा हलाकि शनाया भी नार्मल कपडे में hi आयी थी ऐसा लग hi नहीं रहा था की वो यहाँ सदी करने के लिए आयी है शायद उसको मुझसे सदी करने का बिलकुल मन नहीं था इस लिए उसके चेहरे पर उदासी छायी हुयी थी लेकिन वो इस सिंपल ड्रेस में भी बहुत खूबसूरत लग रही थी मई तो उसमे खो सा गया था इधर जब सोनू ने देखा की मई उसके बातो का कोई जबाब नहीं दिया तो वो मुझे हिलाते हुए फिर से वही सवाल किया तो मई उसे मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- (मुस्कुराते हुए) मुझे क्या पता तुम खुद जाकर उससे पूछा लो.

सोनू- नहीं नहीं मुझे मर नहीं खाना है वैसे तुम मुझे ये बताओ की तुम मुझे यहाँ कोण सी सरप्राइज देने वाले थे.

मई- चलो अंदर तुम्हे वही पर तुम्हारे सवाल का जबाब मिल जायेगा.

इधर शनाया के साथ उसकी फॅमिली के सरे लोग आये थे सिर्फ उसके चाचा के फॅमिली और शनाया के छोटी बहन को छोड़ कर वो सब बिना मेरे तरफ देखे सीधा कोर्ट के अंदर चले गए जब मैंने देखा की वो लोग कोर्ट में चले गए तो मई भी सोनू को लेकर अंदर चला गया.

अंदर जाने के बाद मई सीधा नारायण मल्होत्रा के पास गया और उनको प्रणाम किया इसके बाद मई शनाया के मम्मी पापा को प्रणाम किया लेकिन मुझे आशीर्वाद सिर्फ और सिर्फ नारायण मल्होत्रा ने दिया बाकि सब मुझसे मुँह फेर लिए मुझे इस तरह से शनाया के फॅमिली को प्रणाम करता देख कर सोनू चौक गया और मेरे पास आ कर धीरे से बोलै.

सोनू- तुम ये शनाया के फॅमिली को प्रणाम क्यों कर रहे हो क्या बात है यार सच सच बताओ अब मुझसे और इंतज़ार नहीं होता.

मई- बस कुछ देर और रुको तुम्हे सब पता चल जायेगा.

इसके बाद हम सब मैरिज अफसर के पास गए और फिर अपना अपना डॉक्यूमेंट दिया इसके बाद वो मैरिज अफसर ने फॉर्म फिलुप किया और फिर मुझसे उसपर सिग्नेचर करने के लिए बोलै तो मई उसके सिग्नेचर कर दिया इसके बाद उस मैरिज अफसर ने शनाया को सिग्नेचर करने के लिए बोलै तो शनाया थोड़ा घबराई हुयी थी उसने पहले अपने माँ को देखा फिर अपने पापा को और लास्ट में अपने दादा जी को देखते हुए उसके आँखों में आंसू आ गए जिसे उसने तुरंत साफ कर लिया और फिर उस डॉक्यूमेंट पर सिग्नेचर कर दिया इसके बाद मैंने अपने पॉकेट से एक रिंग और एक मंगलसूत्र निकला जो मैंने आज आते समय hi ज्वेलरी शॉप से करीब 10 लाख में ख़रीदा था फिर मई उस अंगूठी को शनाया के हैट में पहना दिया और फिर उस मंगलसूत्र को उसके गले में बांध दिया वो किसी रोबोट की तरह मुझे अंगूठी और मंगलसूत्र पहन रही थी जब मैंने वो मंगलसूत्र शनाया के गले में बंधा तो आज पहली बार शनाया मुझे देखि उसके चेहरे पर आंसुओं के बून्द थे जिसे देख कर मेरा डिल छलनी हो गया और मेरे आँखों से भी कुछ बून्द आंसू गिर पड़े लेकिन मई अभी यहाँ कुछ बोल भी नहीं सकता था इस लिए मई अभी चुप hi रहा.

अब उस डॉक्यूमेंट पर दो गवाह को सिग्नेचर करना था तो शनाया के तरफ से उसके दादा जी ने सिग्नेचर किया और मेरे तरफ से सिग्नेचर करने के लिए मैंने सोनू के तरफ देखा तो सोनू ये सब देख कर सदमे में चला गया था तो मई उसे आवाज देते हुए बोलै.

मई- भाई मेरे तरफ से यहाँ सिर्फ तुम hi आये हो इस लिए क्या तुम मेरे तरफ से गवाह के रूप सिग्नेचर कर सकते हो.

मेरे बोलने के बाद सोनू होश में आया और फिर उसने उस डॉक्यूमेंट पर सिग्नेचर कर दिया इसके बाद मैरिज अफसर ने हमें मैरिज सर्टिफिकेट दिया इसके बाद हमलोग वह से बहार निकल आये बहार आते hi सोनू मुझे गले लगा लिया और बोलै.

सोनू- मुबारक हो भाई तुम्हे तुम्हारी पसंद की लड़की से सदी हो गयी मई तुम्हारे लिए बहुत खुस हु तो बताओ इस सदी के खुसी में तुम पार्टी कब दे रहे हो.

मई- दे दूंगा पार्टी तुम चिंता मत करो अभी मई चलता हु तुम मुझे अपना नंबर दे दो मई बाद में फ़ोन करता हु तुम्हे.

इसके बाद मई सोनू से उसका नंबर लिया और मई शनाया के साथ में hi उसके गाड़ी में बैठ कर मल्होत्रा हाउस के लिए निकल गया बेचारी शनाया अभी भी उदास hi थी उसे इस तरह से उदास देख कर मुझे अच्छा नहीं लग रहा था तो मैं मन hi मन उससे एक वडा किया.

Mai-(apne मन में) देखना शनाया एक दिन मई तुम्हारा दिल जरूर जीतूंगा और तुम्हे दुनिया के हर खुसी दूंगा तुम्हारे आँखों में एक बून्द भी आंसू नहीं आने दूंगा फिर उसके बाद तुमसे दोबारा सदी करूँगा और वो सदी इतना भव्य होगा की पूरा मुंबई हम दोनों के सदी देख कर दांग रह जायेगा.

इधर हम सब मल्होत्रा हाउस में पहुंच गए थे जहा एक मेलो ड्रामा हमारा इंतजार कर रहा था जैसे hi हमलोग घर के अंदर आये तो सामने शनाया के चाचा की पूरी फॅमिली खड़ा था और हम सब को आते देख शनाया के चाचा नारायण मल्होत्रा से बोलै.

राजेश मल्होत्रा- पिता जी अब हम सब इस हर में नहीं रह सकते है इस लिए हमलोग यहाँ से जा रहे है.

नारायण मल्होत्रा- क्या... ये तुम क्या बोल रहे हो.

राधिका मल्होत्रा- है पिता जी ये सही बोल रहे है हम सब ये घर छोड़ कर जा रहे है.

नारायण- लेकिन तुम लोग ये घर छोड़ कर क्यों जा रहे हो.

राजेश- क्युकी पिता जी हम सब इस गवर के साथ इस घर में नहीं रह सकते पता नहीं ये गवर कहा से आया है और अब ये हम लोगो के साथ इस घर में रहेगा ये मुझे मंजूर नहीं है इस लिए हम सब जा रहे है.

नारायण- तुम लोग बस इतनी सी बात लेकर घर छोड़ कर जा रहे हो.

राजेश- ये छोटी सी बात नहीं है पिता जी आप जानते है की हमारी मुंबई में कितनी इज्जत है अगर किसी को मालूम हो गया की मल्होत्रा परिवार के एक लड़की का सदी एक गवर से हुयी है तो हमारी इज्जत hi क्या रह जाएगी.

नारायण- लेकिन शनाया ये सदी खुद नहीं की है बल्कि उसे मैंने ये सदी करने के लिए बोलै था.

राधिका- अपने उसे ये सदी करने के लिए बोलै था उस गवर को घरजमाई बनाने के लिए नहीं बोलै था और ये गवर भी चुप चाप से घरजमाई बनाने के लिए मन गया.

अमृता- मानेगा क्यों नहीं माँ इसके लिए तो और अच्छा हो गया की अब ये ससुराल में बैठ कर मुफ्त के रोटी तोड़ेगा.

विक्की- और नहीं तो क्या ये तो कमाने से बच गया अब इसे कही काम भी नहीं करना पड़ेगा चुप चाप यहाँ बैठा रहेगा और हमारा खून पिता रहेगा.

नारायण- अजय तुम्हे क्या जरुरत थी इसे घरजमाई बनाने की.

अजय- तो और क्या करता पिता जी अभी शनाया और प्रतिक दोनों पढाई कर रहे है इनके पास अभी कही रहने का भी कोई जगह नहीं है तो क्या मई ऐसे hi अपने बेटी को इसके साथ भेज देता.

विक्की- दादा जी एक काम कीजिये इनको ठाणे वाला घर दे दीजिये और वही पर जो हमारी कंपनी है वो इन्हे दे दीजिये वैसे भी चाचा अपना अलग बिज़नेस करने के बारे में सोच hi रहे थे तो ये उनके लिए भी अच्छा hi रहेगा.

विक्की के बात सुन कर नारायण मल्होत्रा कुछ देर सोचने लगे वैसे भी उन्हें अजय के परिवार से ज्यादा लगाओ नहीं था क्युकी अजय उनको उनके परिवार का वरिष्ठ नहीं दिया था कुछ देर सोचने के बाद नारायण मल्होत्रा बोले.

नारायण- विक्की सही बोल रहा है अजय तुम ठाणे वाले घर से शिफ्ट हो जाओ और वही पर जो हमारी कंपनी है तुम उसको सम्भालो.

पुस्पा- लेकिन पिता जी आप ऐसे कैसे हम लोगो को अपने से अलग कर सकते है.

नारायण- मई तुम लोगो को अपने से अलग कैसे कर सकता हु तुम लोगो को जब मन हो तुम सब यहाँ आ सकते हो और मई भी तुम सब से मिलने वह आता रहूँगा हम लोग भले hi अलग अलग रहेंगे लेकिन हमारा परिवार एक hi रहेगा.

शनाया- लेकिन दादा जी आप ये कैसे कर सकते है आप ने मेरी सदी करवाई और फिर आप hi हम लोगो को यहाँ से भेज रहे है आखिर हमलोगो की गलती क्या है.

नारायण- देखो शनाया सदी होने के बाद बेटी परायी हो जाती है इस लिए अब तुम इस घर की सिर्फ और सिर्फ मेहमान हो इस लिए तुम सब को यहाँ से जाना पड़ेगा ये मेरा आखिरी फैसला है.

नारायण मल्होत्रा के बात सुन कर राजेश के फॅमिली में चेहरे पर में कुटिल मुस्कान आ गयी और वही अजय के फॅमिली के चेहरे उदासी से भर गया और इन सब को मुझ पर बहुत गुसा आने लगा क्युकी यहाँ जो भी हो रहा था मेरे hi कारन हो रहा था ऐसा ये लोग सोच रहे थे हलाकि ऐसा कुछ भी नहीं था राजेश के फॅमिली कब से इन लोगो को घर से निकलने का प्लान बना रहा था आज मेरे घरजमाई बनाने वाला बात को लेकर मौका भी मिल गया.

शनाया- (मन में) ये सब तुम्हारे चलते हो रहा है प्रतिक भले hi तुमसे मेरी सदी हो गयी है लेकिन तुम कभी भी मुझे अपने पत्नी के रूप में नहीं पा सकोगे.

पुस्पा- (अपने मन) ये मनहूस इस घर में आते hi हमारे परिवार को अलग कर दिया इसे मई कभी माफ़ नहीं करुँगी.

ये सब के मन में सिर्फ सिर्फ मेरी hi बाटे चल रहा था और ये लोग इन सब का कुसूर वॉर मेरे को hi समझ रहे थे सिर्फ अजय मल्होत्रा को छोड़ कर लेकिन वो भी कुछ नहीं बोल सकते थे.

इधर नारायण के बात सुन कर शनाया के फॅमिली ने अपना अपना सामान पैक किया और फिर गाड़ी में बैठ कर दूसरे घर के लिए निकल गए थेड़ी देर बाद दूसरे घर के गेट पर गाड़ी रोकी और पुस्पा मुझसे बोली.

पुस्पा- अब यही पर बैठे रहना है क्या जाओ और जा कर गाड़ी से सामान निकल कर अंदर लाओ समझे.

मई- जी माँ जी.

पुस्पा- ये माँ जी किसको बोल रहा है तुम्हारा शनाया से सिर्फ नाम का सदी हुआ है इस लिए तुम उसका पति नहीं बन गए मई इस सदी को कभी नहीं मानूगी इस लिए तुम मुझे आंटी बुलाना मम्मी नहीं समझे.

मई- जी.

पुस्पा- अब जाओ और जाकर गाड़ी से सामान निकालो और घर में लेकर आओ.

फिर मई गाड़ी से सारा सामान निकल और उसे लेकर घर के अंदर आ गया ये घर मल्होत्रा हाउस जैसा बड़ा नहीं था फिर भी अच्छा था इस घर में टोटल 8 रूम थे 4 रूम ग्राउंड फ्लोर पर और 4 रूम 1सत फ्लोर पर थे.

खैर गाड़ी से सारा सामान निकल कर ले आया फिर सबने अपना अपना रूम सेलेक्ट किया और अपना अपना सामान ले कर अपने अपने रूम में जाने लगे तो मई शनाया का सामान उसके रूम में ले जाने में मदत करने लगा जब मई शनाया के सामान लेकर उसके रूम में पंहुचा तो देखा की शनाया अपने बीएड पर बैठी है और रो रही है.

उसे इस तरह से रोटा देख मेरा दिल बेचैन हो गया और मई भागते हुए उसके पास गया और उससे पूछा.

मई- क्या हुआ शनाया तुम रो क्यों रही हो.

मेरी बात को सुन कर शनाया घुसे से घर कर मुझे देखि और घुसे में बोली.

शनाया- तुम्हारी हिमत कैसे हुयी मेरा रूम में आने की तुम अभी के अभी मेरे रूम से बहार निकलो.

मई- देखो तुम मेरी पत्नी हो और तुम जहा रहोगी मेरा रूम भी वही होगा न.

शनाया- (हस्ते हुए) क्या बोलै पत्नी है है है भले hi मेरी तुमसे सदी हो गयी है लेकिन तुम मुझे पत्नी के रूप में कभी पा नहीं सकोगे तुम कोई दूसरा रूम अपने लिए देख लो और उसी रूम में जाकर रहो और फिर भूल कर भी मेरे रूम में मत आना समझे.

मई- लेकिन क्यों तुम्हारा सदी मुझसे हुआ इसमें मेरी क्या गलती है मैंने तो तुमसे जबरदस्ती सदी नहीं की है.

शनाया- भले तुमने मुझसे जबरदस्ती सदी नहीं की है लेकिन मेरी सदी तुमसे जबरदस्ती से हुआ है मई दादा जी के बचन के आगे मजबूर हो कर तुमसे सदी की है.

मई- तो तुम क्या सोच रही हो की मई तुमसे सदी अपने मन से किया है नहीं जिस तरह से तुम अपने दादा जी के बचन निभाने के लिए सदी की है वैसे hi मैंने भी अपने गुरुदेव को वचन का मन रखने के लिए तुमसे सदी की है. जानती हो शनाया भले hi मेरी सदी मेरे मन से नहीं हुआ है लेकिन फिर भी मेरा सदी तुमसे हुआ है और इस लिए तुम मेरी पत्नी हो और हमेशा तुम्हारा दर्जा मेरे जिंदगी में मेरी पत्नी के तरह hi रहेगा लेकिन मई भी तुमसे आज एक वडा करता हु की जब तक तुम मुझे खुद नहीं अपनाओगे तब तक मई तुम्हारे पास नहीं आऊंगा और है तुम इस सदी को भूल जाओ तुम जैसे पहले अपनी जिंदगी जीती थी वैसे hi अब भी जिओ मेरे तरफ तुम्हारी जिंदगी में कोई दखलंदाजी नहीं होगा और एक बात आंटी जी ने मुझे 1 साल का समय दिया है तो सुनो उन्ही एक साल में मई तुम्हारा अगर दिल नहीं जीत पाया न तो मई तुम्हे खुद तलाक दे दूंगा और तुमसे अलग हो जाऊंगा.

शनाया- ये कभी नहीं होगा तुम मेरे दिल में कभी भी जगह नहीं बना पाओगे अगर तुम मेरे दिल में थोड़ा भी जगह बना लिए तो मई खुद आगे बढ़ कर तुम्हे अपना लुंगी.

फिर मई उस रूम से निकल कर निचे आ गया जहा पर पुस्पा बैठी हुयी थी वो मुझे देखते hi घुसे से बोली.

पुस्पा- तुम यहाँ के महाराज नहीं हो इस लिए तुम इस घर में रहोगे तो तुम्हे कुछ काम भी करना होगा जाओ और जाकर मार्किट से राशन का सारा सामान ले कर आओ और आने के बाद सबके लिए खाना बनाओ.

इतना बोल कर पुस्पा ने अपने पर्स से कुछ पैसे निकल कर मुझे दिया और फिर मई वह से किचन में गया और लिस्ट तैयार करने लगा क्या क्या लाना है.

लिस्ट तैयार करने के बाद मई मार्किट गया और सारा सामान ले कर आ गया घर आने के बाद सीधा किचन में गया और सबके लिए खाना रेडी किया फिर सबको डाइनिंग टेबल पर बुलाया सरे लोग आ कर खाना खाने लगे खाना खाने के बाद सरे लोगो के चेहरे पर प्रसन्ता की भाव आ गया लेकिन कोई ये दिखाया नहीं.

और वो लोग खुस होंगे भी क्यों नहीं मेरे ऊपर अन्नपूर्णा माँ का आशीर्वाद है मई खाना बहुत अच्छा बना लेता हु सरे लोग खाना खाने के बाद अपने अपने रूम में चले लेकिन जाते जाते शनाया के माँ ने मुझे धमकी देना नहीं भूली.

पुस्पा- देखो तुम शनाया से दूर रहना जबतक तुम मेरी शर्त पूरा नहीं कर देते तब तक तुम शनाया के पास क्या उसके रूम में भी नहीं जा सकते इस लिए तुम निचे hi गेस्ट रूम के बगल वाले रूम में रहोगे समझे.

मई- जी आंटी समझ गया.

पुस्पा- और है सारा बर्तन धो कर किचन में रख देना.

मई- जी ठीक है.

इतना बोल कर मई सारा बर्तन क्लीन किया और फिर फ्रेश हो कर अपने किराये वाले रूम में आया और अपना सारा सामान लेकर और रूम मालिक को बोल कर की मई अब यहाँ नहीं रहूँगा वह से सीधा शनाया के घर आ गया फिर आंटी ने मुझे जिस रूम में बोलै था उसी रूम में जाकर अपना सारा सामान सेट किया और थोड़ा रेस्ट करने लगा.

फिर मुझे यद् आया की मई सोनू को कॉल करने के लिए बोलै था और उसे कॉल किया hi नहीं तो मई तुरंत hi सोनू को कॉल लगाया थोड़ी देर बाद सोनू कॉल उठाया और बोलै.

सोनू- हैल्लो कोण बोल रहा है.

मई- अरे यार मई प्रतिक बोल रहा हु एहि मेरा नंबर है पहले तुम इस नंबर को सेव कर लो.

सोनू- ठीक है भी सेव कर लेता हु लेकिन तुम मुझे पहले ये बताओ की पार्टी कब दे रहे हो.

मई- ठीक है तुम आधे घंटे के बाद सोल्लगे में पास मिलो.

इतना बोल कर मई कॉल कट कर दिया और तैयार हो कर सोनू से मिलने के लिए निकल गया थोड़ी देर बाद जब मई जब सोल्लगे के पास पंहुचा तो देखा की सोनू वह मेरा पहले से hi इंतजार कर रहा था सोनू को देखते hi मई उससे पूछा.

मई- बताओ कहा चलना है.

सोनू- चलो कही रेस्टुरेंट में चलते है.

मई- ठीक है चलो.

फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों एक रेस्टोरेंट में गए वह जाकर कुछ खाने के लिए आर्डर किये क्युकी मई घर पर कुछ खाया नहीं था.

थोड़ी देर बाद हमलोगो का आर्डर आ गया और हम खाना खाने लगे तभी सोनू मुझसे बोलै.

सोनू- अब तुम मुझे बताओ की ये कैसे हुआ तुमसे हमारे सोल्लगे के क्वीन से सदी कैसे कर ली और जो लड़की किसी भी लड़के के तरफ देखती भी नहीं थी वो तुमसे सदी करने के लिए कैसे तैयार हो गयी.

मई सोनू के बात को सुन कर थोड़ी देर सोचने लगा फिर बोलै

मई- हमारा सदी हमारे मन से नहीं हुआ बल्कि मज़बूरी में हुआ है.

सोनू- मज़बूरी में लेकिन वो कैसे मुझे पूरी बात बताओ.

मई- तुम तो जानते hi हो की मई एक आयुर्वेदिक डॉक्टर हु और मुझे जो इसका ज्ञान दिए है वो मेरे गुरुदेव है उन्होंने शनाया के दादा जी को एक बचन दिया था की उनका शिष्य नारायण मल्होत्रा के पोती से सदी करेगा इस लिए मैंने गुरुदेव बचन के चलते और शनाया ने अपने दादा जी का वचन निभाने के लिए सदी की है.

सोनू- कुछ भी हो लेकिन तुम दोनों की सदी तो हो गयी नह.

मई- सदी तो hi गयी लेकिन शनाया और उसके परिवार इस सदी को मानाने के लिए तैयार नहीं है.

सोनू- क्या..

मई- है ये सच है लेकिन मई किसी भी तरह से शनाया का दिल जीत कर hi रहूँगा भले hi मेरी सदी उससे मज़बूरी में हुयी हो लेकिन मई उससे प्यार करने लगा हु.

सोनू- देखना एक दिन तुम दोनों के बिच सब कुछ ठीक हो जायगा.

मई- है मुझे भी यही लगता है लेकिन तुम हमारी सदी के बारे में किसी से भी कुछ नहीं बोलोगे.

सोनू- ठीक है मई किसी को कुछ नहीं बोलूंगा.

इसके बाद हम लोग वह पर खाना खा कर के बिल पाय किया और वह से निकल गए मई सोनू को बी बोल कर शनाया के घर आ गया और फिर अपने रूम में जा कर रेस्ट करने लगा.

फिर सैम में उठा और उठा कर सबके लिए डिनर रेडी किया और सबको खाने के लिए बुलाया वह पे सब खाना खाने आ गए लेकिन मुझसे कोई भी बात नहीं कर रहा था सरे लोग मुझे इग्नोर कर रहे थे खैर मई भी उनको तरफ ध्यान नहीं दिया और अपना सारा काम ख़तम कर के रूम में आ गया और रेस्ट करने लगा.

दूसरे दिन सुबह में मई 3 बजे hi उठ गया और टेलिपोर्ट हो कर सीधा हवेली पहुंच गया फिर वह पर ट्रेनिंग किया और ध्यान लगाया फिर वापस से टेलिपोर्ट हो कर अपने रूम में आ गया फिर किचन में जा कर सबके लिए चाय बनाया और एक कप चाय लेकर सीधा शनाया के रूम में पहुंच गया जब मैंने देखा की शनाया अभी भी सो रही है तो मई उसको दूर से hi आवाज देते हुए बोलै.

मई- शनाया शनाया उठा जाओ.

जैसे hi शनाया को मेरी आवाज नींद में सुनाई दिया उसका नींद hi टूट गया और वो मुझसे घबराये हुए मुझसे बोली.

शनाया- तुम मेरे कमरे में क्या कर रहे हो तुम्हारी हिमत कैसे हुयी यहाँ आने की.

मई- माफ़ करना अगर तुम्हे बुरा लगा हो तो मई तो यहाँ तुम्हे सुबह का चाय देने आया था.

इतना बोल कर मई चाय वह रखा और वह से निकल गया मुझे इस तरह से मुँह लटका कर जाते देख शनाया को थोड़ा बुरा लगा तो वो मुझे बोल.

शनाया- सॉरी मुझे तुमसे ऐसे बात नहीं करनी चाहिए थी और थैंक्स इस चाय के लिए.

मई- कोई बात नहीं.

मई इतना बोल कर वह से निकला और फिर सबको चाय के लिए आवाज दिया तो सरे लोग चाय पिने के लिए आ गए इसके बाद मई किचन में जा कर सुबह के लिए नास्ता रेडी किया और फ्रेश हो कर सोल्लगे जाने के लिए तैयार होने लगा जब मई तैयार हो कर बहार आया तो देखा की शनाया और उसके मम्मी पापा डाइनिंग टेबल पर बैठ कर नास्ता कर रहे थे मई भी चुप चाप वही पर बैठ कर नास्ता किया और फिर ऑटो पकड़ कर सोल्लगे निकल गया इधर शनाया भी अपनी कार से सोल्लगे निकल गयी.

अभी इस घर में मई शनाया और शनाया के मम्मी पापा hi रह रहे थे शनाया की छोटी बहन शानवी अभी हॉस्टल में रह कर पढ़ाई कर रही थी वो भले hi घर पर नहीं थी उसको सब पता था की उसके घर में क्या चल रहा है.

खैर मई थोड़ी देर में सोल्लगे पहुंच गया और सीधा अपने क्लास रूम में पहुंच गया और जेक पूछे सोनू के पास बैठ गया फिर थोड़ी देर बाद मम आ गयी और हमें पढ़ने लगी जब उनका क्लास ख़तम हुआ तो हम दोनों कैंटीन में आ गए फिर थोड़ी देर बाद शनाया भी कैंटीन में आ गयी और अपने दोस्तों के सतग बैठ कर बाटे करने लगी मई ध्यान से उन लोगो के बातो को सुन रहा था तभी मुझे शनाया के दोस्त पायल की आवाज सुनाई दी.

पायल- क्या बात है शनाया मई देख रही हु की तुम दो दिनों से कुछ उदास उदास सी लग रही हो.

शनाया- नहीं ऐसी कोई बात नहीं है.

पायल- देख तुम जानती हो की तुम मुझसे कभी झूठ नहीं बोल सकती तो अब मुझे सच सच बताओ की क्या बात है.

शनाया- सच में ऐसी कोई बात नहीं है.

पायल- तुम्हे मेरी कसम है मुझे सच सच बताओ की क्या बात है मई तुम्हे ऐसे उदास नहीं देख सकती.

शनाया- अरे यार ये क्या किया तुमने तुम्हे कसम देने की क्या जरुरत थी.

पायल- देख अगर तुम मुझे थोड़ा भी अपना मानती है तो मुझे सच सच बताओ क्या बात है.

शनाया- तुम नहीं मानोगी न तो ठीक है सुनो मेरी सदी हो गयी है कल

पायल- क्या तुम ये क्या बकवास कर रही है तुम्हे पागल बनाने के लिए मई hi मिली थी क्या अगर तुम्हे नहीं बाटना है तो मत बता लेकिन ऐसे झूठ तो मत बोलो.

शनाया- ये झूठ नहीं है ये देखो.

फिर वो अपना मंगलसूत्र जो की अपने कपडे के अंदर पहन कर राखी थी उसे बहार निकल कर दिखती है जिसे देख कर पायल चौक गयी.

शनाया- देखि न अब विश्वास हो गया न की मेरी सदी हो गयी है.

पायल- लेकिन ये कब हुआ और कैसे हुआ तुमने मुझे कुछ बताया क्यों नहीं और सबसे बड़ी बात मेरे जीजू दीखते कैसे है.

शनाया- सबसे पहले तो तुम उसे जीजू बुलाना बंद कर वो कोई तेरा जीजू नहीं है समझी और राहु बात सदी की तो वो कल hi हुआ है.

फिर शनाया पायल को सब कुछ बता देती है जिसे सुन कर पायल बोलती है.

Payal-Ye तो तुम्हारे साथ गलत हुआ लेकिन मुझे एक बात बताओ वो है कोण जिससे तुम्हारी सदी हुयी मई भी तो देखु की हमारे सोल्लगे के क्वीन कोण उदा ले गया अगर अब नीरज का क्या होगा.

शनाया- नीरज का वही होगा जो पहले होना था न वो मुझे पहले पसंद था न अभी पसंद है और न मुझे आगे पसंद आएगा.

तभी कैंटीन में एक लड़के की ग्रुप की एंट्री होती है और इस ग्रुप का लीडर था नीरज वो सीधा चलते हुए शनाया के पास गया और बोलै.

नीरज- ही शनाया कैसी हो देखो मई तुमको कहा कहा नहीं ढूंढा और तुम यहाँ कैंटीन में बैठी हो.

शनाया- (थोड़ा रूखे आवाज में) है बोलो क्या काम था जो मुझे धुंध रहे थे.

नीरज- वो क्या है न की आज मेरा बर्थडे है तो मई ओबेराय होटल में पार्टी दे रहा हु इस तुम्हे अपने सरे फ्रेंड्स के साथ पार्टी में आना होगा.

Shanaya-Sorry नीरज लेकिन मई पार्टी में नहीं आ सकती मुझे थोड़ा काम है.

नीरज- देखा शनाया सरे लोग आ रहे है अगर एक तुम hi नहीं आओगी तो कैसा लगेगा प्लीज प्लीज शनाया.

शनाया- ठीक है मई आने की कोशिश करुँगी.

शनाया के बात सुन कर नीरज बहुत खुस हो गया तभी सोनू उससे बोलै.

सोनू- भाई क्या हम भी आ सकते है.

नीरज- अरे सोनू तुम है है तुम भी आ सकते हो और साथ में अपने इस दोस्त को भी लेते आना

इतना बोल कर नीरज वह से खुसी खुसी निकल गया और इधर शनाया को पार्टी में जाने के है बोलते देख पायल बोली.

पायल- तुम पागल हो क्या तुम्हे क्या जरुरत थी उसे है करने की तुम जानते नहीं को क्या की वो कैसा लड़का है वो जरूर पार्टी में कुछ न कुछ गड़बड़ करेगा.

Shanaya-Wo कुछ भी नहीं करेगा क्युकी वह पर बहुत सरे लोग होंगे और सबसे बड़ी बात वह पर तुम भी तो होगी hi.
 
सॉरी फ्रेंड अगर आपको ये स्टोरी बोरिंग कर रही है उसके लिए मई आपके सरे सवाल का जबाब तो नहीं दूंगा मई बस आपसे इतना hi बोलूंगा की प्रतिक खुद को अपने परिवार वालो के सामने लौ प्रोफाइल दिखा रहा है ताकि कोई भी अभी उसके बारे में न जान सके और ये सब करने पीछे उसका कुछ मकसद है और रही बात चाचा चची को जबाब देने का तो ये उनलोगो का फॅमिली मटर था इस लिए वो बिच में नहीं पड़ा अब आप hi बताओ अगर आपका सदी हो और आप अपने ससुराल जाओ और वह पर आपके ससुर और उनके भाई लड़ रहे हो तो क्या आप अपने ससुर के तरफ से जाकर उनके भाई से लड़ने लगोगे.

और रही बात उनको जबाब देने का तो सही समय आने पर सबको जबाब मिलेगा
 
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