The Super Boy - Page 7 - SexBaba
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The Super Boy

मृत्युंजय की मुलाकात जल्द hi प्रतिक से होने वाली है और जब वो प्रतिक से मिलेगा तब hi उसकी जिंदगी का मकसद उसे मिलेगा

अब प्रतिक के फॅमिली के मरने में किसका हाथ है ये तो आपको आगे की स्टोरी में hi पता चल सकता है

और प्रतिक ऑक्शन से पहले वह जरूर पहुंचेगा और कैसे पहुंचेगा ये आपको अगले अपडेट में पता चल जायेगा.

थैंक्स फॉर योर लवली कमैंट्स ऐसे hi साथ बने रहिये
 
अपडेट 46



स्पेस स्टोरेज की दुनिया और समय की शक्ति हासिल करना



इस वक़्त मई तीसरा परीक्षा वासना का परीक्षा दे रहा था और मई इस वक़्त एक ऐसे बगीचे में था जहा की सुंदरता अतुलनीय थी मई उस बगीचे में सुंदरता में खो सा गया था इस बगीचे में तरह तरह के खूबसूरत फूल लगे हुए थे और उनसे मनमोहक सुगंध निकल रही थी जो दिल को छू रही थी साथ में उस बगीचे में एक ऐसा सुगंध भी फैला हुआ था जो दिल में तरंगे उठा रही थी और मन काम वासना के तरफ खींचा जा रहा था.

अभी मई उस बगीचे के सुंदरता में खोया हुआ hi था की तभी उस बगीचे के दूसरे साइड से कुछ लड़कियों के हसने की आवाजे सुनाई देने लगी मई जैसे hi लड़कियों के हसने की आवाज सुना तो मई खुद को उस तरफ जाने से नहीं रोक पाया जब मई बगीचे के दूसरे साइड पंहुचा तो देखा की वह एक सुन्दर सा तालाब था और उस तालाब में 10 अप्सरा सा सुन्दर लड़किया अर्धनग्न अवस्था में स्नान कर रही थी और आपस में मस्ती मजाक करते हुए है रही थी.

जब मई उन लड़कियों को देखा तो मई उन सब के सुंदरता में खो सा गया और उन लड़कियों में प्रति मेरे मन में वासना में हिलोरे मरने लगी हलाकि मेरे मन में किसी के प्रति कभी भी कोई वासना नहीं रहा है लेकिन ये इस बगीचे का उस सुगंध का कमल था जिसके कारन में मन में वासना उठ रही थी और इसी कारन मेरे मन में इन लड़कियों के प्रति वासना जागृत हो रहा था लेकिन मई किसी तरह से अपने मन में उठ रहे वासना को दबाया और वह से जाने लगा तभी उन लड़कियों में से एक लड़की की नजर मुझ पर पद गयी और वो जोर से छीलते हुए बोली.

लड़की- कोण है वह.

जैसे मैंने उस लड़की के आवाज सुनी तो मेरी हालत ख़राब हो गयी और मेरे मन में एक दर बैठ गया की अगर इन लड़कियों ने मुझे यहाँ देख लिया तो मेरे बारे में क्या सोचेंगी ये सोच कर मई वह से निकलने के बारे में सोचने लगा इधर उन साडी लड़कियों ने देखा की एक लड़की उस तालाब के बहार बगीचे में देख रही है तो एक लड़की ने उससे पूछा.

दूसरी लड़की- लता तुम उधर क्या देख रही हो और ये तुम आवाज किसे लगा रही हो.

उस लड़की के बात सुन कर लता जिधर मई खड़ा था इधर देखते हुए बोली.

लता- रुक्मिणी मैंने अभी वह पर किसी लड़के को देखा है जो छुप कर हमें नहाते हुए देख रहा था.

लता के बात सुन कर रुक्मिणी लता को छेड़ते हुए बोली.

रुक्मिणी- लगता अब तुम्हारे लिए जल्दी hi कोई लड़का ढूंढ़ना पड़ेगा क्युकी अब तुम्हे हर जगह लड़का hi दिखने लगा है.

रुक्मिणी के बात सुन कर साडी लड़किया हसने लगी लेकिन लता रुक्मिणी के बात सुन कर थोड़ा घुसे से उससे बोली.

लता- तुम्हे मेरी बात मजाक लग रहा है मई सच में अभी वह पर एक लड़के को देखा है.

लता को सीरियस देख कर सर लड़कियों को उसके बातो पर बिस्वास होने लगा.

रुक्मिणी- अगर तुम्हारी बात सही है तो एक बार हमें चल कर देखना चाहिए की इस बगीचे में कोण लड़का आया हुआ है.

रुक्मिणी के बात सुन कर साडी लड़किया तालाब से बहार आ गयी और अपने कपडे पहन कर मुझे ढूंढने लगी इधर मई उस तालाब के पास से भागते हुए वह से बहार जाने का रास्ता धुंध रहा था लेकिन मुझे वह से निकलने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा था तभी वह पर वो साडी लड़किया वह आ गयी और मुझे घेर कर कड़ी हो गयी.

जैसे hi वो लड़किया मेरे पास आयी तो मेरे अंदर का वासना और बढ़ गया एक तो इस बगीचे में कुछ ऐसा था जो मेरे अंदर के वासना को बढ़ा रहा था और दूसरे इन साडी लड़कियों ने ऐसे कपडे पहने थे जिससे इनके आधे शरीर दिख रहा था हलाकि मैंने अपने अंदर के वासना को बहुत दबाने की कोशिश कर रहा था बहुत प्रयास करने के बाद आखिर कर मई अपने अंदर के वासना को बढ़ा hi दिया लेकिन मई जैसे hi अपने अंदर के वासना को दबाया तो उस बगीचे में जो सुगंध आ रही थी जिससे मेरे अंदर वासना जग रहा था वो और बढ़ गया इधर उन लड़कियों ने जब मुझे चारो तरफ से घेर कर कड़ी हो गयी तब उन में से एक लड़की को की उन लड़कियों में सबसे खूबसूरत थी इसका नाम लगा था वो मुझसे बोली.

लता- ये नौजवान तुम कोण हो और तुम इस बगीचे में कैसे आ गए तुम्हे पता नहीं की इस बगीचे में किसी पुरुष को आना मन है.

उस लड़की के बात सुन कर मई थोड़ा सा दर गया लेकिन दर को अपने चेहरे पर आने नहीं दिया और कॉन्फिडेंस के साथ उस लड़की को बोलै.

मई- माफ़ करना मई यहाँ गलती से आ गया और मई ये नहीं जनता था की यहाँ पर किसी पुरुष को आना मन है और आप यकीं मानिये अगर मुझे पता होता तो मई यहाँ पर नहीं आता वैसे आप सब कोण है और ये कोण सा जगह है वो क्या है न की मई इस जगह पर पहली बार आया हु.

मेरी बात को सुन कर पहले तो वो लड़किया हैरान हो गयी फिर एक लड़की घुसे से बोली.

रुक्मिणी- पहले तो तुम इस बगीचे में आ गए और अब हमसे झूठ भी बोल रहे हो तुम जानते नहीं हो की तुम्हारी इस झूठ के चलते तुम्हे क्या सजा मिल सकती है इस लिए तुम मुझे सच सच बताओ की तुम यहाँ क्यों आये हो कही तुम कोई घुसपैठियाँ तो नहीं हो न.

मई- नहीं मई कोई घुसपैठियाँ नहीं हु और आप लोग यकीं मानिये मई सच बोल रहा हु मई यहाँ भटकते हुए आ गया हु मई एक मुसाफिर हु इस लिए आप सब मुझे यहाँ से जाने दीजिये.

मेरी बात को सुन कर वो साडी लड़किया सोच में पद गयी कुछ देर सोचने के बाद रुक्मिणी बोली.

रुक्मिणी- तुम यहाँ से जाना चाहते हो ठीक है (अपने होठ को काट कर मदहोशी भरे आवाज में) लेकिन तुम्हे यहाँ से जाने के लिए हम सब के साथ एक रत बितानी होगी वो क्या है न की हम सब जब से तुम्हे देखा है हम खुद पर अपना कण्ट्रोल खो रहे है हम सब ने आज से पहले तुमसे ज्यादा सुन्दर लड़का नहीं देखा.

रुक्मिणी के बात सुन कर साडी लड़किया मुझे अजीब सी नजर से देखने लगी मई उन सब के नजरो को देख कर हड़बड़ा गया और उनसे जल्दी से हकलाते हुए बोलै.

मई- ययय ययय ये आप सब क्या बोल रही है देखिये आप सब मुझसे दूर रहिये मई ऐसा वैसा लड़का नहीं हु इस लिए आप सब कृपया मुझे जाने दीजिये.

मेरी बात को सुन कर वो साडी लड़किया और भी लस्ट भरी नजरो से मुझे देखने लगी उनको इस तरह से खुद को देखता हुआ देख कर मेरे शरीर में भी झुरझुरी दौड़ने लगी उन लड़कियों के जिस्म देख कर और इस बगीचे के उस सुगंध को स्मेल करने के बाद मेरे शरीर के रोम रोम में वासना भर गयी थी और अब इन लड़कियों को इस तरह से मुझे घूरना देख कर मेरा कण्ट्रोल छूटता जा रहा था और मेरे ऊपर वासना हावी होते जा रहा था और ये बात उन लड़कियों को भी पता चल गया था की मेरे ऊपर वासना हावी हो रहा है इस लिए लता चलते हुए मेरे पास आयी और मेरे छाती से लगते हुए मेरे कण में अपने मधुर और सेक्सी आवाज में बोली.

लता- मई जानती हु की तुम्हे भी हम सब के साथ मजे करने है तो क्यों तुम खुद को कण्ट्रोल करने की कोशिश कर रहे है अपने ऊपर से सारा कण्ट्रोल छोड़ दो और आओ हमारे साथ हम तुम्हे अपने दुनिया के वो सुख देंगे जिसे पाने के लिए लोग तरसते है है तुम अगर एक बार हमारे साथ आये तो तुम्हे पता चलेगा की जो सुख काम क्रीड़ा में है वो सुख किसी और चीज में नहीं है मई तुम्हे हर वो सुख दूंगी जो तुम्हे चाहिए हम जैसी अप्सराये तुम्हे कही भी नहीं मिलेंगी इस लिए आओ और हमारे अंदर समां जाओ.

लता के मधुर और सेक्सी बाटे सुन कर मई खुद पर से अपना कण्ट्रोल पूरी तरह से खो दिया था मेरे दिमाग काम करना बंद कर दिया था क्युकी अब मेरे ऊपर वासना पूरी तरह से हावी हो गया था अब मुझे सिर्फ उन लड़कियों के जवान और खूबसूरत जिस्म दिख रही थी मेरा मन उनको अपने बहो में लेने के लिए मचलने लगा था और लता को अपने बहो में भरने वाला हु था की तभी मेरे मन में एक लड़की के छवि नजर आयी और वो लड़की कोई और नहीं बल्कि मेरी जान शनाया थी जैसे hi मेरे मन में शनाया का चेहरा आया तो मई अपने होश में आया और अपना डट अपने होठ पर इस तरह से दबाया की मेरे होठ से खून निकलने लगा अब मई पूरी तरह से होश में आ गया.

जैसे hi मई होश में आया तो मई लता को जोर से ढाका दिया जिसके कारन वो मुझसे कुछ दूर जा कर निचे गिर गयी जैसे hi मैंने लता को ढाका दिया तो ये देख कर साडी लड़किया हैरान हो गयी तभी एक लड़की रुक्मिणी के कण में धीरे से बोली.

लड़की- ये कैसे संभव है ये तो पूरी तरह से वासना के बस में आ गया था तो फिर ये वासना से बहार कैसे आ गया जरूर इस लड़के में कुछ बात है.

रुक्मिणी- है तुम बोल तो सही रही हो लेकिन मई भी देखती हु की ये कब तक हमसे बचता है.

इतना बोलने के बाद रुक्मिणी के चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान आ गयी और वो चुपके से अपने हाथ को हिलाया तो उसके हाथ में एक अदृस्य तीर आ गया रुक्मिणी ने जो अदृस्य तीर प्रकट किया था वो पिंक कलर का था और उस तीर के अगले भाग पर दिल बना हुआ था और वो उस तीर को मेरे ऊपर छोड़ दिया इसके बाद वो मुस्कुराते हुए खुद से बोली.

रुक्मिणी- (अपने आप से) मई भी देखती हु की ये मेरे इस काम वासना के तीर से कैसे बचता है अगर ये तीर किसी देवता को भी लग गया तो वो खुद को काम वास्सना से नहीं बचा सकता फिर ये तो एक मामूली इंसान है जैसे hi ये तीर इसको लगेगा ये हमारे साथ सम्भोग करने के लिए उतावला हो जायेगा.

रुक्मिणी इतना बोल कर मन hi मन मुस्कुराने लगी इधर मई बगीचे के सुगंध और इन लड़कियों के ाद्दाओ से खुद को किसी तरह से बचा रहा था तभी कुछ आ कर मुझसे से टकरा गया और जैसे hi वो तीर मुझसे टकराया तो मेरे चारो तरफ पिंक कलर का स्मोक फ़ैल गया और वो स्मोक धीरे धीरे मेरे शरीर के अंदर जाने लगा कुछ hi देर वो वो सारा पिंक कलर का स्मोक मेरे शरीर के अंदर चला गया.

जैसे वो पूरा स्मोक मेरे शरीर के अंदर गया वैसे hi मेरे पुरे शरीर में वास्सना का एक तेज़ लहार दौड़ गया और मई पूरी तरह से वास्सना के बस में आ गया ऐसा लग रहा था मनो मई इस वासना का एक कठपुतली बन गया हु इधर रुक्मिणी ने जब देखा की मई ुरी तरह से वास्सना के बस में आ गया हु तो उसके चेहरे पर एक कुटिल भरी मुस्कान आ गया और वो बड़े ादवो से अपने कमर को हिलती हुयी मेरे पास आयी और अपने मादक भरे सुरीली आवाज में मुझसे बोली.

रुक्मिणी- हे नौजवान तुम मेरे साथ चलो मई और मेरे सभी सहेलिया आज तुम्हे दुनिया के वो सुख देंगे जिसे पाने के लिए बड़े बड़े राज्यों के बिच युद्ध तक छोड़ जाता है आज हम सब तुम्हे अपने यौवन को सुख देंगे.

इतना बोल कर रुक्मिणी ने मेरे हाथ को पकड़ लिया और मुझे खींचते हुए अपने साथ ले कर जाने लगी इधर मई भी भाव सुण्या हो कर रुक्मिणी के साथ जाने लगा रुक्मिणी मुझे अपने साथ लेकर आगे आगे चल रही थी तो वही साडी लड़किया हम दोनों के पीछे पीछे आ रही थी.

थोड़ी देर चलने के बाद हम उस बगीचे के बीचो बिच आ गए जहा पर खुले आसमान के निचे फूलो से एक सुन्दर सा पलंग सजाया हुआ था रुक्मिणी मुझे लेकर उसी पलग के पास आ गयी और मुझे उस पलंग पर ढाका दे कर गिरा दी और खुद मेरे ऊपर आ कर मेरे शरीर के साथ छेड़खानी करने लगी तो वही उसकी साडी सहेलियां भी उस पलंग पर आ कर मुझे चारो तरह से घेर लिया और सब मेरे अश्लील भरी छेड़खानी करने लगी इधर मई इन सब बातो से दूर की मेरे साथ क्या हो रहा है मई भी सब कुछ भूल कर उन लड़कियों के छेड़खानी का मजा ले रहा था और अपने मर्यादा को भांग करने की कोशिश कर रहा था.

मई इन लड़कियों के जल में इस तरह से फास गया था की मुझे सही और गलत को कोई आभास hi नहीं था मुझे बस इन लड़कियों के द्वारा छेड़खानी करना बहुत अच्छा लग रहा था मुझे ऐसा लग रहा था की ये लोग मेरे साथ ऐसे hi पूरी जिंदगी करते रहे.

इधर साडी लड़कियों ने मेरे साथ छेड़खानी करते हुए अपने शरीर का एक एक कपडा उतरना सुरु कर दी फिर कुछ hi देर में वो साडी लड़किया पूरी तरह से निर्वस्त्र हो गयी और मेरे पास आ कर मुझे भी निर्वस्त्र करने लगी उन सब ने मिल कर मेरे शरीर के ऊपर से एक एक कपडे को निकलना सुरु कर दिया थोड़ी hi देर में मेरे शरीर पर कपडा के नाम सिर्फ मेरे शरीर एक अंडर वियर hi बचा था वो लोग उसे भी उतरने वाले थे लेकिन रुक्मिणी ने कुछ देर के लिए उसे उतरने से मन कर दिया.

फिर रुक्मिणी और लता के साथ श्री लड़किया मेरे शरीर के साथ खेलना सुरु कर दिया जिसके कारन मई आनंद के एक ऐसी स्थिति में पहुंच गया था जिसे बताना बहुत मुश्किल है मई सब कुछ भूल कर उन लड़कियों के खेल में उनका साथ देने लगा अभी मई इन लड़कियों के साथ उनके खेल में मगन hi था की तभी मुझे एक लड़की की तस्वीर दिखाई दिया जिसके आँखों में आंसू थी और वो लड़की रट हुए बोल रही थी की तुम धोखेबाज hi तुमने मुझे धोखा दिया है तुम तो बोलते थे की तुम मुझसे प्यार करते हो फिर तुम इन परायी लड़कियों के साथ ये सब क्या कर रहे हो.

जैसे hi उस लड़की की तस्वीर मेरे दिमाग में आयी और उसकी बाटे सुनाई दी मेरे ऊपर वासना इतना हावी था की मई उस लड़की को पहचान भी नहीं पाया बस मुझे ऐसा लग रहा था की ये लड़की मेरी कोई अपनी है और मुझे उसके में आंसू देखे नहीं जा रहे थे फिर मई अपने दिमाग पर जोर डालने लगा की आखिर ये लड़की है कोण और ये मुझसे ऐसे क्यों बात कर रही है.

जब मैंने अपने दिमाग पर जोर दाल कर उस लड़की के बारे में जानने की कोशिश की तो कुछ देर के लिए मेरे ऊपर से वासना का जादू हाथ गया और मुझे उस लड़की के बारे में पता चल गया ये लड़की कोई और नहीं बल्कि मेरी शनाया थी जैसे hi वास्सना के जादू मेरे ऊपर से हटा तो मुझे अपने स्थिति का बहन हुआ की मई अभी किस स्तिथि में हु जब मुझे ये एहसास हो गया तो मुझे इन लड़कियों पर बहुत गुसा आया और मई उन लड़कियों को अपने शरीर से दूर किया और घुसे से उन लड़कियों से बोलै.

मई- तुम लोगो ने मेरे साथ क्या किया है मई कैसे तुम लोगो के जल में पास गया तुम सब ने मेरे साथ जो भी किया है न वो अच्छा नहीं किया है तुम सब को इसकी सजा जरूर मिलेगी.

मई इतना बोल कर उन लड़कियों के तरफ बढ़ने hi वाला था की तभी रुक्मिणी मुस्कुराते हुए मुझसे बोली.

रुक्मिणी- हम सबने तुम्हारे साथ कोई गलती नहीं की है बल्कि हम सब तो तुम्हे दुनिया के सबसे बड़ी सुख देना चाहते है जिसे पाने के लिए देवता भी छल करने पर उतर जाते है इस दुनिया में योन सुख से बड़ा कोई सुख नहीं है इस लिए तुम दुनिया के मोह माया को छोडो और मेरे साथ योन सुख का आनंद लो.

इतना बोल कर रुक्मिणी ने अपना हाथ हिलाया जिसके चलते मेरे शरीर में संत हुयी वासना फिर से भड़काने लगी जब मैंने देखा की मेरे मन में फिर से वास्सना भड़क रहा है तो मई वही साधना करने के लिए बैठ गया और साधना के माध्यम से वासना को काबू करने की कोशिश करने लगा.

मई वैसे hi ध्यान में बैठे बैठे वासना को काबू करने की कोशिश करते रहा ऐसे hi कोशिश करते करते 2 दिन बिट गए और मई अपने शरीर के अंदर उठ रही वासना को पूरी तरह से काबू कर लिया जैसे hi मई अपने शरीर में उठ रहे वास्सना को काबू किया वैसे hi वह का दृस्य बदल गया और मई फिर से उसी जगह पर पहुंच गया जहा से मेरा ये परीक्षा सुरु हुआ था मई इस वक़्त उसी जगह पर था जहा समय की शक्ति मौजूद थी मई जैसे hi यहाँ पर आया तो मुझे अमरनाथ की आवाज सुनाई दी.

अमरनाथ- बहुत अच्छा तुमने वास्सना को काबू कर के ये सिद्ध कर दिया है की अब तुम्हारे ऊपर किसी भी तरह का वास्सना कभी भी हावी नहीं होगा तुमने वासना को काबू कर के पांचवा परीक्षा भी पास कर लिया है तुमने आज वो कर दिखाया जो आज तक किसी ने नहीं किया था तुमने पांचो परीक्षा को पास कर के ये सिद्ध कर दिया है की ये समय शक्ति मैंने यहाँ तुम्हारे लिए hi छोड़ा था इस समय शक्ति के सच्चा उत्तराधिकारी तुम hi हो लेकिन तुम्हे इस समय शक्ति को पाने के लिए मेरे साथ एक युद्ध करना होगा और इस युद्ध में तुम्हे मुझे हराना होगा तो क्या तुम तैयार हो मुझसे युद्ध करने के लिए.

अमरनाथ के बात सुन कर मई सोच में पद गया फिर कुछ देर सोचने के बाद मई उनसे बोलै.

मई- मई आपको कैसे हरा सकता हु मई तो आपका लेवल का पता भी नहीं लगा प् रहा तो भला मई कैसे आपसे युद्ध कर सकता हु.

मेरी बात को सुन कर अमरनाथ मुस्कुराते हुए मुझसे बोले.

अमरनाथ- तुम्हारी बात भी सही है क्युकी तुम अभी डेमी गॉड रैंक के मध्यम लेवल पर हो और मई गॉड रैंक के एडवांस लेवल पर इस लिए तुम्हारा मुझसे कोई मुकाबला hi नहीं है (फिर कुछ सोचते हुए) मई एक काम करता हु मई अपने लेवल को दबा कर तुम्हारे लेवल जितना कर देता हु अगर मई तुम्हारे जितना hi ताकतवर रहा तब तो तुम मुझसे लड़ सकते हो न.

मई- जी बिलकुल अगर आपका लेवल भी मेरे जितना hi जायेगा तो मुझे आपसे लड़ने में कोई प्रॉब्लम नहीं होगी.

मेरी बात को सुन कर अमरनाथ मुस्कुराते हुए अपना लेवल काम करने लगे और देखते hi देखते वो डेमी गॉड रैंक के मध्यम लेवल पर आ गए जब उनका लेवल मेरे जितना hi हो गया तो मई उनसे लड़ने के लिए तैयार हो गया आज मई बहुत खुस था क्युकी आज मुझे पहली बार अपने बराबर के शक्ति वाले योद्धा से लड़ने का मौका मिला था आज मई अपने शक्तियों को अच्छे से परख सकता था इधर अपना लेवल काम करने के बाद अमरनाथ मुझसे बोले.

अमरनाथ- लो अब मैंने अपना लेवल काम कर लिया अब आओ और मुझसे युद्ध करो अगर तुम मुझसे जित गए तो समय शक्ति के साथ साथ ये मेरे द्वारा बनाया गया स्पेस स्टोरेज की दुनिया भी तुम्हारी हो जाएगी लेकिन अगर तुम हर गए तो तुम्हे यहाँ से खली हाथ वापस जाना होगा.

अमरनाथ के बात सुन कर मई भी उनसे लड़ने के लिए तैयार हो गया मुझे लड़ने के लिए तैयार होता देख कर अमरनाथ अपने शरीर से शक्तियां निकल कर दौड़ते हुए मेरे तरह आने लगे मैंने जब अमरनाथ को अपने शक्तिया निकल कर मेरे तरफ आते हुए देखा तो मई भी अपने शरीर से श्री शक्तिया निकल कर उनके तरफ बढ़ गया थोड़ी देर बाद मई और अमरनाथ एक दूसरे से टकरा गए जिसके कारन वह पर एक भयानक विस्फोट हुआ और हम दोनों 10 10 फ़ीट पीछे चले गए.

मई जैसे hi वह से पीछे हुआ तो मई खुद को सँभालते हुए अमरनाथ पर फिर से हमला करने के लिए अपने शक्तियों को अपने हाथ में इक्कठा करने लगा जब मेरी शक्तियां मेरे हाथ में इक्कठा हो गयी तो मई अपने हाथ का मुठी बनाते हुए एक पंच अमरनाथ के तरफ मर दिया जिसके कारन मेरे हाथ से एक रोशनी निकल कर एक पंच में बदल गया और तेज़ गति से अमरनाथ के तरफ बढ़ने लगा.

इधर अमरनाथ जी मुझसे टकराने के बाद करीब 10 फ़ीट पीछे चले गए थे लेकिन वो खुद को सँभालते हुए मुझे देखने लगे जब उन्होंने देखा की मई उन पर अपने पंच से हमला किया हु तो वो भी अपने शक्तियों को अपने मुठी में भर हर मुझ पर हमला कर दिया थोड़ी देर बाद दोनों का हमला आपस में टकरा गया और वह एक तेज़ दमका हुआ और चारो तरफ रौशनी फैल गया इस हमले के बाद हम दोनों 5 5 कदम पीछे चले गए

ऐसे hi हम दोनों में बहुत hi खतरनाक मुकाबला होती रही और हम दोनों कुछ देर में एक दूसरे पर दर्जनों हमले कर दिए लेकिन हम दोनों में से किसी को कुछ भी नुकसान नहीं हुआ जब अमरनाथ ने देखा की मई उनको कड़ी मुकाबला दे रहा हु तो उनकी होती पर एक मुस्कान आ गयी और वो मुस्कुराते हुए मुझसे बोले.

अमरनाथ- मई मन गया तुम्हे बचे की तुम एक ताकतवर योद्धा हो तुम्हारे लेवल में कोई भी तुम्हे हरा नहीं सकता इस बचे अब बहुत हो गया मामूली हमले अब मई तुम पर अपने तकनीक से हमला करूँगा अगर तुम बच सको तो बचा लो खुद को मेरे तकनीक से.

इतना बोल कर अमरनाथ अपने हाथ को ऊपर उठा कर अजीब तरह से घूमने लगे जिसके कारन ऊपर हवा में एक चक्र बन गया और उस चक्र में से खंजर निकल कर मेरे तरह आने लगे जब मैंने उस चक्र से खंजर निकल कर अपने तरह आता हुआ देखा तो मई अपने स्टोरेज रिंग से अपना पंचतत्व तलवार निकल लिया और उससे उस खंजर को रोकने की कोशिश करने लगा लेकिन जब वो खंजर आ कर मेरे तलवार से टकराया तो मुझे समझ में आया की उस खंजर में कितनी ताकत थी इस खंजर में इतनी ताकत थी की उस खंजर को मेरे तलवार से टकराते hi मई उड़ते हुए पीछे जा गिरा मई ये देख कर हैरान था की उस खंजर में कितनी ताकत थी जो मुझे उड़ाते हुए इतना पीछे कर दिया अगर वो खंजर मुझे लग जाती तो पता नहीं मेरा क्या होता.

अभी मई ये सब सोच hi रहा था की तभी मैंने देखा की उस चक्र से एक एक कर के बहुत सरे खंजर निकल कर मेरे तरफ आने लगे जब मैंने इतने सरे खंजर को अपने तरफ आते हुए देखा तो मई थोड़ा परेशां हो गया लेकिन फिर मई खुद को सँभालते हुए अपना एअर्थ एलिमेंट को एक्टिव किया और मैंने अपने सामने चटानो का एक कवच तैयार कर दिया जैसे hi मैंने कवच तैयार किया वैसे hi वो सरे खंजर आ कर मेरे द्वारा बनाये हुए कवच से टकराने लगे उन सरे खंजारो में इतनी ताकत थी की मेरे द्वारा बनाया हुआ चटानो के कवच में भी दरारे आने लगी जब मैंने देखा की कवच में दरार आने लगा है और वो कवच कभी भी नस्ट हो सकता है तो मई परेशां हो गया की कैसे मई अमरनाथ के इस हमले को नस्ट करू तभी मुझे कुछ यद् आया और मई अपने स्टोरेज रिंग से पंचतत्व खंजर निकला और उस खंजर के सम्पूर्ण शक्ति को एक्टिव करते हुए उस चक्र पर हमला कर दिया.

जब उस खंजर के फाइव एलिमेंट्स एक्टिव हुए तो उस खंजर के ताकत और उसकी गति बहुत बढ़ गया था इस वो खंजर पालक झपकते hi अमरनाथ के द्वारा बनाये हुए चक्र से जाकर टकरा गया जिसके करना वह एक तेज़ धमाका हुआ जिसके वो चक्र नस्ट हो गया उस चक्र को नस्ट करने के बाद मेरा खंजर मेरे पास वापस लौट कर आ गया.

इधर जब अमरनाथ ने देखा की मई एक खंजर से उनके इतने ताकत हमले को नस्ट कर दिया है तो उनको बहुत आचार्य हुआ वो उसी आश्चर्य से अपने आप से बोले.

अमरनाथ- नहीं ऐसा नहीं हो सकता ये इतने ताकतवर हमले को इतनी आसानी से कैसे नस्ट कर दिया मेरे इस ताकतवर हमले का सामना आज तक कोई भी नहीं किया है तो इसने इसे नस्ट कैसे कर दिया (फिर कुछ देर रुक कर) अब मुझे लगता है की इसे हारने के लिए अपना सबसे खतरनाक हमला करना होगा.

खुद से बाटे करने के बाद अमरनाथ अपने हाथ को हवा में उठाया और फिर से उसे अजीब तरह से घूमने लगे जैसे जैसे वो अपने हाथ को घुमा रहे थे वैसे वैसे उनके शरीर से फायर एलिमेंट निकल कर ऊपर आसमान में जा रही थी और वह एक आकृति तैयार हो रही थी कुछ देर तक ऐसे hi करते रहने के बाद वो अपने शरीर से श्री अग्नि तत्त्व को निकल कर आसमान में बन रहे आकृति में दाल दिया जिसके कारन ऊपर आसमान में एक अग्नि पक्षी तैयार हो गया जो एक फायर फ़ीनिक्स था जब वो फ़ीनिक्स तैयार हो गया तो उस फ़ीनिक्स से इतनी भयंकर शक्ति निकल रही थी की उसके शक्ति से आस पास के अयं भी चरमराने लगे थे इधर मैंने जब उस फिओनिक्स से निकलते शक्ति को महसूस किया तो मुझे थोड़ी परेशानी होने लगी और मेरे माथे पर पसीना आने लगा फिर मई खुद को सँभालते हुए अमरनाथ के उस हमले का सामना करने के बारे में सोचने लगा इधर अमरनाथ अपना हमला तैयार करने के बाद मुझसे बोले.

अमरनाथ- बचे मई अभी तक तुमसे लड़ाई करने के बाद ये समझ गया हु की तुमसे जितना किसी के बाद की बात नहीं है इस लिए ये मेरा आखिरी हमला है अगर तुम इस हमले से खुद को बचा लिया तो मई अपना हर मन लूंगा.

इतना बोल कर वो उस फ़ीनिक्स को मेरे ऊपर हमला करने का इशारा कर दिया अमरनाथ के इशारा मिलते hi वो फ़ीनिक्स मुझ पैर हमला करने के लिए मेरे तरफ आने लगा इधर मई उस फ़ीनिक्स को अपने तरफ आता हुआ देख कर सोचने लगा की इस फिओनिक्स से कैसे सामना किया जाये तभी कुछ सोचते हुए मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी फिर मैंने अपना वाटर एलिमेंट को एक्टिव किया और उससे एक वाटर ड्रैगन तैयार कर दिया इसके बाद मई लाइटिंग एलिमेंट को एक्टिव करते हुए उसके कुछ शक्ति अपने वाटर ड्रैगन में दाल दिया जिसके कारन मेरा तैयार किये हुए हमले से भी खतरनाक शक्तियां निकलने लगी फिर मई अपने वाटर ड्रैगन को फायर फिओनिक्स पर हमला करने का इशारा किया मेरे इशारे को प् कर ड्रैगन अपने तेज़ गति के साथ फायर फिओनिक्स के तरफ बढ़ गया थोड़ी देर बाद फायर फिओनिक्स और वाटर ड्रैगन दोनों एक दूसरे से टकरा गए जिसके कारन उनसे निकलने वाली शक्तिया चारो तरफ फैल गयी और उस शक्तियों के चपेट में आ कर मई और अमरनाथ उड़ते हुए पीछे जा कर गिरे और मेरे मुँह से खून निकलने लगा और वही हम दोनों के हमला आपस में टकरा कर एक दूसरे को ख़तम करने की कोशिश करने लगे थोड़ी देर बाद दोनों के हमला एक भयंकर विस्फोट के साथ नस्ट हो गया और उनकी शक्तियां चारो तरफ फैल गयी.

इधर मई जो दोनों हमको के टकराने से उत्पन शक्तियों के कारन थोड़ा घायल हो गया तो वही अब उन शक्तियों में विस्फोट के कारन निकले हुए शक्तियों से मई बुरी तरह से घायल हो गया था उधर अमरनाथ के भी हालत कुछ ठीक नहीं था शक्तियों के विस्फोट के कारन उनकी आत्मा के शक्ति भी कमजोर हो गयी थी और अब उनका वो आत्मा रूप हल्का धुंधला नजर आने लगा था.

इधर मई अपने मुँह से खून को थूकते हुए खड़ा हुआ और आगे बढ़ते हुए अमरनाथ के पास चला गया जब मई उनके पास जा कर उनको देखा तो उनकी हालत भी बहुत ख़राब हो गयी थी उनकी आत्मा से निकलने वाली रौशनी बहुत काम हो गयी थी ऐसा लग रहा था की उनका आत्मा कभी भी नस्ट हो सकता है मई उनकी ऐसी हालत देख कर उनसे बोलै.

मई- आप ठीक तो है न.

मेरी बात को सुन कर अमरनाथ अपने चेहरे पर एक फीकी सी मुस्कान लेट हुए मुझसे बोले.

अमरनाथ- नहीं बचे मई बिलकुल ठीक नहीं हु मेरी आत्मा इस युद्ध में बहुत घायल हो चूका है और मई यहाँ से कभी भी जा सकता हु.

अमरनाथ के बात सुन कर मुझे बहुत दुःख हुआ इसलिए मई उनसे माफ़ी मांगते हुए बोलै.

मई- मुझे माफ़ कर दीजियेगा आपकी ये हालत मेरे कारन हुआ है अगर मई आप पर इतना ताकतवर हमला नहीं करता तो आपकी ऐसी हालत नहीं होती.

अमरनाथ- अरे बचे तुम मुझसे माफ़ी मत मानगो इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं थी बल्कि ये तो मेरी एक परीक्षा थी मई इस परीक्षा से ये देखना चाहता था की जिसको मई अपना विरासत देने वाला हु वो मेरे विरासत के काबिल है या नहीं और जब मई तुमसे युद्ध किया तो मुझे पूरा बिस्वास हो गया की मुझे तुमसे अच्छा उत्तराधिकारी कभी नहीं मिलता आज मई बहुत खुस हु और तुम मेरी इस हालत चिंता मत करो क्युकी मई इस युद्ध में घायल होता या नहीं होता फिर भी मुझे इस दुनिया से जाना hi था क्युकी मेरी आत्मा मेरी विरासत से जुडी हुयी थी और जैसे hi मई तुम्हे अपना विरासत देता मेरी आत्मा मुक्त हो जाती तो क्या तुम मेरे विरासत पाने के लिए तैयार हो.

मई- जी मई तैयार हु.

मेरा इतना बोलना hi था की तभी अमरनाथ ने अपना हाथ को हिलाया तो उनके हाथ से एक रौशनी निकल कर एक अंगूठी में बदल गयी फिर वो उस अंगूठी को मुझे देते हुए बोले.

अमरनाथ- ये स्पेस स्टोरेज की दुनिया इस अंगूठी से जुडी हुयी है तुम इस अंगूठी पर अपना एक बून्द खून दाल कर इसे अंगूठी पर अपने आत्मा चिन्ह अंकित कर दो जिससे ये अंगूठी ये स्पेस स्टोरेज दुनिया तुम्हारा हो जायेगा और फिर इसे तुमसे कोई भी अलग नहीं कर पायेगा अगर तुमसे ये अंगूठी कही खो भी जायेगा तब भी तुम इसे अपने आत्मा के शक्ति से इसे अपने पास बुला सकते हो और है तुम चाहो तो अपने स्टोरेज रिंग को भी इस दुनिया से जोड़ सकते हो जिससे तुमको दो अंगूठी पहने की जरुरत नहीं होगी और और सबसे बड़ी बात से जिस जगह पर समय की शक्ति 100 गुना फ़ास्ट किया हुआ है तुम अगर यहाँ 100 दिन रुकते हो तो बाहेर के दुनिया में सिर्फ एक दिन hi होगा.

अमरनाथ के बात सुन कर मई बहुत खुस हो गया और तुरंत अपने ऊँगली पर एक कट लगा कर अपने खून के कुछ बून्द उस रिंग पर दाल दिया जैसे hi मई अपना खून उस रिंग पर डाला तो उस रिंग ने मेरे खून को अपने अंदर अब्सोर्बेद कर लिया और उस रिंग से एक रोशनी निकल कर मेरे दिमाग में चली गयी जिसके कारन मई उस रिंग से जुड़ गया और मुझे इस स्पेस स्टोरेज दुनिया के बारे में साडी जानकारी पता चल गया.

मुझे जो जानकारी पता चली थी वो ये थी की इस जगह में बहुत hi सुध स्प्रिचैल एनर्जी और मातृ पितृ एनर्जी थी जो योद्धाओ को अपना लेवल बढ़ने में बहुत मदद करती इस जगह के बारे में मुझे और भी बहुत साडी बाटे पता चली थी जो आगे चल कर आप सब को पता चलेगा इधर अमरनाथ मुझे वो अंगूठी देने के बाद मुझसे बोले.

अमरनाथ- बचे मैंने ये दुनिया तो तुम्हे दे दिया लेकिन अब मई तुम्हे अपनी 3 तकनीक देने जा रहा हु इन 3 तकनीक में से तुमने 2 तकनीक तो तुमने अभी मेरे साथ के लड़ाई में देख hi लिया है वो दोनों तकनीक रैंक 4 के लौ लेवल तकनीक है इन दोनों तकनीक का मुकाबला आज तक कोई भी नहीं कर पाया है आज पहली बार ऐसा हुआ है की तुमने मेरी इन दोनों तकनीक को विफल कर दिया और जो तीसरी तकनीक है वो रैंक 5 के मध्यम लेवल तकनीक है हलाकि ये तकनीक तो मेरे पास जरूर है लेकिन मई इसे सिख नहीं पाया मई बहुत बार इसे सीखने की कोशिश की है लेकिन मई हर बार बिफल रहा लेकिन मुझे तुम पर बिस्वास है की तुम इस तकनीक को जरूर सिख लोगे.

इतना बोल कर अमरनाथ ने अपने एक ऊँगली को मेरे तरफ किया तो उनके ऊँगली से एक रोशनी निकल कर मेरे दिमाग में चली गयी जिसके कारन मेरे दिमाग में उन तीनो तकनीक के नाम और उसे सिखने की बिधि आ गयी जब मैंने उन तीनो तकनीक के नाम पढ़ा तो वो इस प्रकार थे पहला तकनीक का नाम चक्र खंजर तकनीक था दूसरा तकनीक का नाम फायर फिओनिक्स तकनीक था और आखिर में जो तकनीक था और ये दोनों तकनीक रैंक 4 के लौ लेवल तकनीक था और तीसरा तकनीक का नाम सुण्या विनाशक तकनीक था और ये तकनीक रैंक 5 के मध्यम लेवल का तकनीक था इन तीनो तकनीक को मुझे देने के बाद अमरनाथ मुझसे बोले.

अमरनाथ- बचे मैंने अपना तीन विरासत में से 2 विरासत तुम्हे दे दिया अब तुम्हे मेरा तीसरा विरासत खुद hi प्राप्त करना होगा मेरा तीसा विरासत समय की शक्ति है और वो शक्ति वो सामने रही अब तुम आगे बढ़ो और उस शक्ति को प्राप्त करो.

इतना बोल कर अमरनाथ अपने हाथ को हवा में हिलाया तो वह के सरे कोहरा धीरे धीरे कर के हटने लगी और जब वो सारा कोहरा वह से हैट गया तो मुझे वह से कुछ दूर पर एक मंच बना हुआ दिखा और उस मंच के बीचो बिच एक रोशनी का गोला दिख रहा था जो हवा में लटका हुआ था उस गोले से ब्लू कलर के रोशनी निकल रही थी मैंने जब उस ब्लू कलर के गोले को देखा तो मेरे पैन में उसे पाने के लिए लालच आ गयी और मई बिना देरी किये उस गोले के तरफ बढ़ने लगा अभी मई कुछ hi कदम चला था तभी मुझे अमरनाथ की आवाज सुनाई दी.

अमरनाथ- बचे तुम आगे बढ़ने से पहले मेरी एक बात का ध्यान रखना तुम्हे समय की शक्ति इतनी आसानी से नहीं मिलेगी तुम्हे समय के शक्ति को पाने के लिए उसे अपने मानसिक शक्ति से उसे कण्ट्रोल करना होगा लेकिन ये यद् रखना की समय की शक्ति इतनी आसानी से तुम्हारे कण्ट्रोल में नहीं आएगी और जब तुम उसे कण्ट्रोल करने की कोशिश करोगे तो वो तुम पर हमला भी करेगी और अगर तुम उसे अपने कण्ट्रोल में करना है तो तुम्हे उसके हमले को सहते हुए उसे अपने कण्ट्रोल में करना होगा और तुम समय शक्ति को कण्ट्रोल नहीं कर पाए तो तुम्हारी जान भी जा सकती है अगर तुम्हे मेरी बात समझ में आ गयी है तो तुम अब आगे बढ़ सकते हो.

अमरनाथ के बात सुन कर मई अपना गर्दन है में हिलाया और उस मंच के तरफ बढ़ने लगा मई पहले तो अमरनाथ के बात सुन कर सोच में पद गया था की अगर मई समय शक्ति को कण्ट्रोल नहीं कर पाया तो कही मई मारा न जाऊ फिर मई खुद से hi बोलै अगर मुझे इस दुनिया को शैतानो से बचाना है तो मुझे ये कदम उठाना hi होगा यही सब सोचते हुए मई आगे बढ़ गया और थोड़ी hi देर में मई उस ब्लू कलर के रोशनी के गोले के पास खड़ा था और उसे ध्यान से देख रहा था थोड़ी देर ऐसे hi उसे देखने के बाद मैंने अपने दोनों हाथ को उठाया और उस रोशनी के गोले पर रख दिया.

मई जैसे hi अपना हाथ उस गोले पर रखा तो उसमे से एक ब्लू कलर के रोशनी निकली और मेरे शरीर के अंदर चली गयी जैसे hi वो रोशनी मेरे शरीर के अंदर गयी तो मेरे शरीर में एक भयानक दर्द उठाने लगा जिसके कारन मेरे मुँह से एक दर्दनाक चीख निकल गयी मुझे ऐसा लग रहा था की मेरे शरीर के साडी में कोई सुई चुभा रहा है दरअसल जो रोशनी मेरे शरीर में गयी थी वो एक समय की शक्ति थी जो धीरे धीरे मेरे उम्र को बढ़ा रही थी और मेरे शरीर के हडियो को अंदर से कमजोर और खोखला कर रही थी.

मेरे शरीर में इतना दर्द हो रहा था की मुझे कुछ समझ में hi नहीं रहा था की मई क्या करू थोड़ी देर तक ऐसे hi दर्द में तड़पता रहा फिर मई किसी तरह से अपने दर्द को कण्ट्रोल करते हुए अपना ध्यान समय शक्ति पर लगाया और अपने दिमाग से मानसिक शक्ति को समय शक्ति के गोले में भेज कर उसे कण्ट्रोल करने की कोशिश करने लगा.

मई जैसे hi समय शक्ति को कण्ट्रोल करने की कोशिश करने लगा तो समय शक्ति को ये पता चल गया की मई उसे कण्ट्रोल करने की कोशिश कर रहा हु तो उसने अपने समय शक्ति को और बढ़ा दिया जिसके कारन मेरे शरीर का दर्द और बढ़ने लगा मुझे कमजोरी महसूस होने लगी क्युकी उस समय शक्ति के असर से मेरी उम्र तेजी से बढ़ने लगा और मई कुछ hi देर में 50 साल के उम्र के ब्यक्ति में बदल गया जब मई अपना उम्र देखा तो मई घबरा गया फिर मई मन hi मन सोचा की अगर मई जल्दी hi समय शक्ति को कण्ट्रोल नहीं किया तो मेरी उम्र इसी तरह से बढ़ते हुए ख़तम हो जायेगा और मई मारा जाऊंगा.

ये बात सोचते hi मई समय शक्ति को कण्ट्रोल करने की तीव्रता को और बढ़ा दिया और अपने पूरा फोकस समय शक्ति को कण्ट्रोल करने में लगा दिया करीब 5 घंटा तक मई समय शक्ति को कण्ट्रोल करने की कोशिश करता रहा इन 5 घंटो में मेरा उम्र बहुत बढ़ गया था अगर मई 1 घंटा के अंदर समय शक्ति को कण्ट्रोल नहीं कर पाया तो मई मारा जाऊंगा.

मई मरने के दर से समय शक्ति को कण्ट्रोल करने की तेज़ी को और बढ़ा दिया लेकिन समय शक्ति मेरे कण्ट्रोल में आ hi नहीं रहा था और इधर धीरे धीरे मेरा शरीर कमजोर होते जा रहा था अब मेरा शरीर इतना कमजोर हो गया था की मुझे साँस भी लेने में दिक्कत होने लगी थी ऐसे hi समय बीतता गया और 59 मिनट और बिग गया अब मेरा शरीर में कोई जान hi नहीं बचा था बस धीरे धीरे में धड़कन चल रही थी जिससे ये पता चल रहा था की मई अभी भी जिन्दा हु लेकिन अगर ऐसी hi स्थिति रहती तो मई बहुत जल्द hi मारा जाता.

मई इतना कमजोर हो गया था की मेरी सांसे कभी भी बंद हो सकती थी लेकिन मेरे साथ इतना कुछ होने के बाद भी मई अपना ध्यान समय शक्ति के गोले से नहीं हटाया था जिसका परिणाम ये हुआ की समय शक्ति का गोला तीव्र रोशनी से चमकाने लगा और उसका चमक इतना बढ़ गया की वह उस चमक से सब कुछ दिखाई देना बंद हो गया फिर वो गोला धीरे धीरे पूरी तरह से रोशनी में बदल कर मेरे शरीर में के अंदर जाने लगा कुछ hi देर में समय शक्ति का गोला पूरी तरह से रोशनी में बदल कर मेरे शरीर के अंदर चला गया.

जैसे hi समय शक्ति मेरे अंदर शमय तो मई वही बेहोश हो कर गिर गया मेरे बेहोश होने के बाद मेरा शरीर धीरे धीरे ठीक होने लगा और करीब 2 घंटे बाद मेरा शरीर पूरी तरह से ठीक हो गया जैसे hi मेरा शरीर ठीक हुआ तो मुझे होश आ गया होश में आने के बाद मैंने जब सामने देखा तो मुझे समय शक्ति कही नहीं दिखी ये देख कर मई समझ गया की समय शक्ति को मई कण्ट्रोल कर लिया है जैसे hi मुझे अंदाजा लगा की समय शक्ति को मई कण्ट्रोल कर लिया है तो मुझे बहुत खुसी हुयी फिर मई वह से उठ कर अमरनाथ के पास चला गया जैसे hi अमरनाथ ने मुझे देखा तो वो मुझसे बोले.

अमरनाथ- तुम्हे बधाई हो बचे तुमने आखिर कर समय शक्ति को हासिल कर hi लिया तुम्हारे अंदर बहुत प्रतिभा है बचे तुम अपने इस प्रतिभा को जाया मत जाने देना और है मेरे विरासत को कभी गलत काम के लिए प्रयोग मत करना इसे हमेशा अच्छे काम में hi उसे करना.

अमरनाथ के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए उनसे बोलै.

मई- आपका बहुत बहुत धन्यवाद् बुजुर्ग अगर आप मेरी मदत न करते तो मई कभी भी समय शक्ति को हासिल नहीं कर पता और है मई आपको बचन देता हु की मई आपके विरासत का कभी भी गलत प्रयोग नहीं करूँगा इससे मई हमेशा अन्याय के खिलाफ hi उसे करूँगा.

अमरनाथ- मुझे तुमसे यही उम्मीद है बचे ठीक है बचे अब मेरे जाने का समय हो गया है लेकिन जाने से पहले मई तुम्हे ये बता देना चाहता हु की तुम जितना समय शांति का अभ्यास करोगे ये शांति इतना hi बढ़ेगा.

मई- ठीक है बुजुर्ग मई आपके बातो का हमेसा ध्यान में रखूँगा वैसे बुजुर्ग मुझे यहाँ आये हुए कितना समय हो गया है.

अमरनाथ- तुम्हे यहाँ आये हुए पुरे 10 दिन बिट गए है अगर तुम यहाँ 90 दिन और रुकते हो तो बाहरी दुनिया में सिर्फ एक दिन hi बीतेगा ठीक है बचे मई अब चलता हु तुम अपना ध्यान रखना.

इतना बोल कर अमरनाथ के आत्मा छोटे छोटे कण में बिखर कर हवा में गायब हो गया अमरनाथ के वह से जाने के बाद मैंने सोचा की अभी मेरे पास बाहरी दुनिया में एक दिन पूरा होने में इस दुनिया 90 दिन बाकि है तो क्यों न मई बुजुर्ग अमरनाथ के दिए हुए तकनीक को सिख कर उस में महारथ हासिल कर लू ये सोच कर मई सबसे पहले चक्र खंजर तकनीक पर ध्यान लगाया और उसे समझने की कोशिश करने लगा थोड़ी देर बाद मुझे समझ में आया की चक्र खंजर तकनीक को अगर कोई मास्टर कर लेता है तो वो उस चक्र से हजारो शक्ति से बानी हुयी खंजर निकल सकता है और एक बार में हजारो दुश्मनो को इस तकनीक से मर सकता है.

इसके बाद मैंने उस तकनीक को कैसे सीखना है इस पर ध्यान दिया जब मुझे साडी बाटे समझ में आ गयी तो मई उस तकनीक को सीखने की कोशिश करने लगा.

मुझे उस तकनीक को सीखने में करीब 10 दिन लग गया इसके बाद मई अपने ध्यान से बहार आया और चक्र खंजर तकनीक की प्रैक्टिस करने लगा सुरु सुरु में मुझे बहुत दिक्कत हो रही थी लेकिन धीरे धीरे मेरा पकड़ उस तकनीक पर बढ़ने लगा पहले पहले तो मई उस चक्र से एक hi खंजर निकल पता था लेकिन धीरे धीरे प्रैक्टिस करने के बाद करीब 20 दिन में मई उस तकनीक पर महारथ हासिल कर लिया अब मई उस चक्र से 1000 शक्तियों से बना खंजर निकल कर हमला कर सकता था.

मुझे इस तकनीक को सीखने से लेकर इस पर महारथ हासिल करने में करीब 30 दिन लग गए थे फिर मई बुजुर्ग अमरनाथ के दूसरा तकनीक फायर फिओनिक्स को सिखने की कोशिश करने के लिए उस पर ध्यान लगाया तो मुझे समझ में आया की ये तकनीक चक्र खंजर तकनीक से ज्यादा शक्तिशाली है इस तकनीक को वही सिख सकता है जिसका एलिमेंट फायर हो और अगर किसी के दिव्या अग्नि है तो इस तकनीक के हमला और भी ज्यादा खतरनाक हो जाता है ये जान कर मुझे बहुत खुसी हुयी क्युकी मेरे पांचो एलिमेंट एक दिव्या एलिमेंट थे पहले मेरे पास भी जो पांच एलिमेंट थे वो नार्मल एलिमेंट hi थी लेकिन मई गुरुदेव की कृपया से कड़ी तपस्या और म्हणत कर के अपने पांचो एलिमेंट को दिव्या एलिमेंट में बदल दिया था इस लिए मेरे पास जो फायर एलिमेंट थी वो एक दिव्या अग्नि थी इस लिए अगर मई इस फायर फिओनिक्स तकनीक को सिख लिया तो मेरा हमला बहुत बढ़ जायेगा फिर मई इस तकनीक को कैसे सीखना इसके बारे समझने लगा तो मुझे समझ में आया की अगर मई इस तकनीक को सीखने की कोशिश करता हु तो मेरे शरीर के फायर एलिमेंट को काबू कर के उसे एक फायर फिओनिक्स में बदलना होगा और ऐसा करने में मुझे बहुत दर्द कर सामना करना होगा ये सब समझने के बाद मेरा एक मन किया की मई इस तकनीक को न सिखु लेकिन फिर मई अपना मन बदल कर उस तकनीक को सीखने की कोशिश करने लगा.

जब मई इस तकनीक को सीखने की कोशिश कर रहा था तो मेरे शरीर के फायर एलिमेंट बहुत ज्यादा भड़क गया था जिसके कारन मेरे शरीर से आग निकलने लगी और धीरे धीरे वो आग इतना बढ़ गया की अगर मेरे पास कोई और होता तो उस आग की गर्मी से hi जल कर भसम hi जाता मेरे शरीर के फायर इतना भड़क गया था की उस फायर में मेरा hi शरीर जलने लगा था और मुझे बहुत तेज़ दर्द हो रहा था लेकिन मई अपने दर्द को बर्दाश्त करते हुए अपने शरीर से निकले हुए फायर को एक फ़ीनिक्स में बदलने की कोशिश करने लगा लेकिन अपने फायर को फ़ीनिक्स में बदलना इतना भी आसान नहीं था.

मई बहुत बार प्रयास किया की मई अपने अग्नि को फ़ीनिक्स में बदल लू लेकिन मई हर बार नाकामयाब रहा लेकिन मई हर न मानते हुए अपने अग्नि को फ़ीनिक्स में बदलने की कोशिश करता रहा और ऐसे hi समय बीतता रहा करीब 20 दिनों तक ऐसे hi प्रयास करने के बाद आखिर कर मई अपने अग्नि को फ़ीनिक्स में बदलने में कामयाब हो hi गया लेकिन इतने दिनों में मेरा अग्नि मेरे hi शरीर को बहुत बुरी तरह से जला दिया था ये तो शुक्र है की मेरे पास हीलिंग शक्ति थी जिसके कारन मेरा शरीर अपने आप hi हील हो जाता है अगर ऐसा नहीं होता तो मई कब का मर जाता.

जब मई फायर फिओनिक्स तकनीक को सिख लिया तो इसका प्रैक्टिस कर के इस पर महारथ हासिल करने लगा करीब 30 दिन कड़ी अभ्यास करने के बाद मई इस तकनीक पर पूरी तरह से महारथ हासिल कर लिया था जब मैंने बुजुर्ग अमरनाथ के 3 तकनीक में से 2 तकनीक को सिख लिया तो मेरे मन तीसरा तकनीक को भी सिखने का करने लगा लेकिन मेरे पास समय hi नहीं बचा था क्युकी मुझे इस स्टोरेज स्पेस की दुनिया में आये हुए 90 दिन हो चुके थे यानि की अब मेरे पास सिर्फ 10 दिन hi बचे थे.

फिर मई सोचने लगा की जब मई 10 दिनों में सुण्या विनाशक तकनीक नहीं सिख सकता तो अब मई इन 10 दिनों तक यहाँ क्या करू क्या मई अभी hi बहार चला जाऊ मई अभी यही सब सोच रहा था की तभी मेरे मन में ख्याल आया की क्यों न इस पुरे स्टोरेज स्पेस की दुनिया को एक बार देखा जाये ये सोच कर मई ऊपर हवा में उड़ गया और पुरे स्टोरेज स्पेस की दुनिया को घूम घूम कर देखने लगा जब मई इस दुनिया को देख रहा था तब मुझे पता चला की ये दुनिया बहुत बड़ा है ये दुनिया लगभग 50 किलोमीटर में फैला हुआ था जिसमे 40 किलोमीटर में सिर्फ जंगल और पहाड़ था और इन सरे जंगली में बहुत hi मात्रा में सुध स्प्रिचैल एनर्जी और मातृ पितृ एनर्जी मौजूद था और बाकि के जो 10 किलोमीटर जगह था उसमे बहुत hi सुन्दर सा बगीचा और एक रहने के लिए हवेली बना हुआ था जिसे सायद बुजुर्ग अमरनाथ खुद यहाँ पर रुकने के लिए बनवाया था और यहाँ पर बाकि सभी जगहों से जायदा सुध और घनी स्प्रिचैल एनर्जी और मातृ पितृ एनर्जी मौजूद था.

जब मैंने उस बगीचे और हवेली को देखा तो मई उसे नजदीक से देखने के बारे में सोचने लगा फिर मई उड़ते हुए सबसे पहले उस बगीचे के पास चला गया जब मई वह पंहुचा तो देखा की वह पर बहुत तरह के फूल पौधे और जड़ी बुटिया लगाया हुआ है और उस बगीचे के बीचो बिच एक सुन्दर सा तालाब था जिसमे से बहुत hi सुध और घनी स्प्रिचैल एनर्जी निकल रही थी ये फूल पौधे और तालाब उस बगीचे को बहुत सुन्दर बना रहे थे साथ में बगीचे में मौजूद जड़ी बूटियों और फूलो के वजह से वह पर एक बहुत hi मनमोहक खुसबू फैली हुयी थी जिसके कारन शरीर में ताजगी महसूस हो रही थी ये सब देखने के बाद ऐसा लग रहा था की मई किसी स्वर्ग में आ गया हु.

मई वह के खूबसूरती को देख कर उसी में खो सा गया था फिर थोड़ी देर तक वही पर रुकने के बाद मई वह से उस हवेली के पास चला गया और हवेली को ध्यान से देखने लगा ये हवेली पुराने ज़माने की लग रही थी जो पुराने ज़माने के कलाकृतियों से भरा हुआ था भले hi ये पुराने ज़माने की हवेली थी लेकिन देखने से ऐसा लग रहा था की किसी ने इसे कुछ साल पहले hi बनाया हो सायद इस हवेली को बुजुर्ग अमरनाथ ने खुद के रहने के लिए बनाया था लेकिन जब उनके पास समय शक्ति और स्पेस शक्ति आया तो इस पुरे जगह को उन्होंने स्टोरेज स्पेस की दुनिया में बदल दिया था ताकि वो समय समय पर यहाँ आ कर ध्यान लगा सके.

मई उस हवेली को देख कर उसके अंदर चला गया जब मई अंदर गया तो वो हवेली अंदर से भी बहुत खूबसूरत दिख रही थी हवेली के दीवारों पर पुराने ज़माने के कलाकृतिया बानी हुयी थी जो उस हवेली को और भी सुन्दर बना रही थी उस हवेली में बहुत सरे कमरे थे जब मई उन सरे कमरों को देखने के लिए उनके अंदर गया तो मई चौक गया क्युकी वो सरे कमरे अंदर से बहुत सुन्दर थे और उन सरे कमरों के अंदर को भी सामान राखी हुयी थी वो सब बिलकुल साफ सूत्र था यहाँ तक की उन सरे कमरों में जो बीएड लगी हुयी थी उसे देख कर लग रहा था की उन सरे बेड़ो को अभी अभी कोई लगाया है ये सब देख कर मई समझ गया की इन सब को अभी तक सही सलामत रखने में बुजुर्ग अमरनाथ के आत्मा का काम था.

जब मई उन सरे कमरों को देखने के बाद मई उस हवेली के आखिर में आया तो वह पर एक और कमरा बना हुआ था जो लगभग 100 मीटर का था जब मई उस कमरे में गया तो वह के नजारा देख कर चौक गया क्युकी वह पर बहुत सरे स्प्रिचैल स्टोन रखे हुए थे साथ में वह पर सोने के सिको का पहाड़ लगा हुआ था जब मैंने अपने दिव्या दृष्टि से उन सब को देखा तो पाया की वह पर रखे हुए स्प्रिचैल स्टोन में 10 लाख लौ लेवल 5 लाख मध्यम लेवल और 1 लाख हाई लेवल स्प्रिचैल स्टोन है और करीब 10 करोड़ के लगभग में सोने के सीके थे.

ये सब देख कर मई हैरान हो गया और साथ में मई बहुत खुस भी था क्युकी मई अपना लेवल बढ़ने में इन सरे स्प्रिचैल स्टोन का उसे कर सकता था और इन सोने के सिको की कीमत मार्किट में काम से काम 50 हजार करोड़ के बराबर होगी जब मई इन सरे सामने को देखा तो मुझे समझने में देर नहीं नहीं की ये सब जरूर बुजुर्ग अमरनाथ का खजाना है जो वो अपने पुरे जिंदगी में जमा किये होंगे और वो ये सब अपने उत्तराधिकारी के लिए रखे होंगे मई ये सब देख कर खुद को खुशनसीब समझ रहा था जो वो मुझे अपना उत्तराधिकारी समझा.

ऐसे hi मई बहुत देर तक उस हवेली को घूम घूम कर देखता रहा मुझे इस हवेली और इस जगह को देख कर बहुत खुसी हो रहा था क्युकी ये स्पेस स्टोरेज की दुनिया अपने आप में hi एक बेमिसाल खजाना था क्युकी मई इस जगह पर कभी भी आ सकता था अगर मई किसी खतरे में भी पद जाता तो वह से अपना जान बचा कर यहाँ आ सकता था और इस दुनिया में मेरे शिवा कोई और नहीं आ सकता था जब तक की मई परमिशन न दू.

मई इस स्पेस स्टोरेज की दुनिया को प् कर इतना खुस था की मई बार बार मन hi मन बुजुर्ग अमरनाथ को इसे मुझे देने के लिए धन्यवाद बोल रहा था और मई सबसे ज्यादा इस लिए खुस था की अब मई अपना सेना इस स्पेस स्टोरेज की दुनिया के वजह से जल्दी hi तैयार कर लूंगा क्युकी यहाँ पर योद्धा बहार के दुनिया से 100 गुना तेज़ी अपना लेवल बढ़ा सकते है.

फिर मैंने सोचा की मुझे इस दुनिया को फार्मेशन से 3 भागो में बात देना चाहिए एक भाग में मुंबई के स्कूल के योद्धा ट्रेनिंग करने के लिए आ सकते है और दूसरे भाग में आइसलैंड के स्कूल के योद्धा और रही बात तीसरा भाग की तो वो मेरे और मेरी वाइफ के लिए होगा हमें जब भी मन होगा हम यहाँ आ कर अपना ट्रेनिंग कर सकेंगे.

इतना सब सोचने के बाद मई हवा में उड़ गया और ऊपर हवा में जा कर खड़ा हो गया इसके बाद मई अपने शक्तियों से 2 फार्मेशन लगा दिया जिसके करना वो पूरा जगह 3 भागो में बात गया 2 भाग 20 20 किलोमीटर का था और एक भाग 10 किलोमीटर का जो 10 किलोमीटर का भाग था वो वही बगीचा और हवेली वाला भाग था जिसको मैंने खुद के लिए रखा हुआ था इन तीन भाग में मेरे शिवा कोई और नहीं आ सकता था जो भाग जिसके लिए बना हुआ था वो सब सिर्फ उसी भाग में जा सकते थे.

फार्मेशन लगाने के बाद मई वह से उस हवेली में आ गया और उस 100 मीटर के कमरे के पास आया और उस कमरे को स्पेस के शक्ति से अपने स्टोरेज रिंग से जोड़ दिया जैसे hi मई अपने स्टोरेज रिंग को इस रूम से जोड़ा तो मेरे स्टोरेज रिंग का सारा सामान इसी रूम में आ गया अब मई अपना सारा सामान इस डायरेक्ट इस रूम में रख सकता था इसके बाद मई उस कमरे पर एक फार्मेशन लगाया जिसके कारन वो कमरा अदृस्य हो गया अब उस कमरे को मेरे अलावा कोई नहीं देख सकता था न hi इस कमरे में मेरे अलावा कोई न सकता था.

इतना सब करने के बाद आखिर में मैंने इस दुनिया के एक द्वार अपने स्टोरेज रिंग में बना दिया जिसके चलते अब मई अपने स्टोरेज रिंग के मदत से भी इस दुनिया में आ जा सकता था अब मेरे स्टोरेज रिंग में दो द्वार थे एक द्वार में अगर मई कोई सामान रखता तो वो सीधा उस कमरे में आ जाती और दूसरा द्वार से मई इस हवेली के बहार आ सकता था.

इतना सब करने के बाद मई बहुत थक गया था इस लिए मई उस हवेली के एक कमरे में चला गया और वह पर लगे हुए बीएड पर जा कर सो गया मई जब से यहाँ आया था तब से सोया नहीं था भले hi बाहरी दुनिया में 1 दिन हुआ था लेकिन इस दुनिया में पुरे 95 दिन बिट गए थे और मई 95 दिनों से सोया नहीं था इस लिए मई जैसे hi बीएड पर गया तो मुझे नींद आ गयी और मई वही सो गया.

इधर पटना में जब वो लोग मृत्युंजय को खंजर मरने के बाद उसे मारा हुआ समझ कर गंगा नदी में फेक दिया तो मृत्युंजय का शरीर गंगा नदी में गिरते hi उसका सर एक पत्थर से टकरा जाता है जिसके चलते उसके सर में एक गहरा चोट लग जाता है हलाकि जब बसंत चौहान और पूनम चौहान मृत्युंजय को खंजर मरते है उस समय मृत्युंजय मारा नहीं था बल्कि उसकी साँस इतनी धीमी हो गयी थी की उन लोगो को लगा की मृत्युंजय मर गया है लेकिन जब मृत्युंजय का सर उस पत्थर से टकराया तो उसके शरीर में जो धीरे धीरे सांसे चल रही थी वो एकदम से रुक गयी.

जैसे hi मृत्युंजय के सांसे रुकी तो उसके पीठ पर बना हुआ त्रिशूल का चित्र नील रोशनी से चमकने लगा और वो रोशनी धीरे धीरे मृत्युंजय के शरीर में जाने लगी जिसके कारन मृत्युंजय के सांसे फिर से चलने लगी और उसके शरीर में लगे हुए अंदरूनी जखम ठीक होने लगे लेकिन मृत्युंजय के सिर्फ अंदरूनी जखम hi ठीक हुए ताकि वो मर न जाये उसके बाहरी जखम वैसे hi थे फिर मृत्युंजय के शरीर गंगा में बहते हुए धीरे धीरे किनारे पर आ गया.

मृत्युंजय के शरीर नदी के जिस जगह किनारे पर लगा था वह पर एक सैमसन घाट था और वह पर एक अघोरी मुर्दो के रख को अपने शरीर पर लगा रहा था तभी उसकी नजर नदी के किनारे पर गया जहा मृत्युंजय मूर्छित अवस्था में पड़ा हुआ था जैसे hi उस अघोरी ने मृत्युंजय को देखा तो वो जल्दी से उसके पास गया और जैसे hi उसकी नजर मृत्युंजय के चेहरे पर गया तो उसको आंखे अपने आप बंद हो गयी और उसके दिमाग में भगवन शिव का एक तस्वीर नजर आया जिसे देख कर उसके मुँह से अपने आप hi निकल गया भगवन शिव का अंश और उसकी ऐसी हालत फिर वो उसको चेक कर के देखा तो पाया को मृतुन्जय अभी भी जिन्दा है बस वो बेहोश है ये देख कर वो अघोरी मृत्युंजय को ले कर अपने कुटिया में चला गया इसके बाद वो मृत्युंजय के अपने कुटिया में रखने के बाद बहार चला गया.

जब वो थोड़ी देर बाद वापस लौटा तो उसके हाथो में कुछ जड़ी बुटिया थी जिसे वो अपने हाथो से मसल कर उस जड़ी बूटियों के आर्क निकला और मृत्युंजय के शरीर पर लगे हुए जखम पर डालने लगा इसके बाद वो उन जड़ी बूटियों को पिश कर उसके जखमो पर लगा दिया.

इधर मृत्युंजय को मरने के बाद जब बसंत चौहान और पूनम अपने घर जा रहे थे तभी पूनम थोड़ी चिंता भरी आवाज में बसंत से बोली.

पूनम- डैड आपको उसे इतनी जल्दी मरने की क्या जरुरत थी पहले हम उससे उस पेपर पर सिग्नेचर करवा लेते इसके बाद मरते अब वो बिना सिग्नेचर किये hi मर गया तो हम इसके जायदाद कैसे अपने नाम करेंगे.

पूनम के बात सुन कर बसंत सोच में पद गया थोड़ी देर सोचने के बाद अचानक उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गयी और वो मुस्कुराते हुए बोलै.

बसंत- अगर मई उसे नहीं मरता तो वो तुम्हे मर देता और रही बात उसको प्रॉपर्टी की तो मेरे पास उसके लिए एक उपाय है.

पूनम- क्या उपाय है डैड.

बसंत- मेरे पास एक ऐसा आदमी है जो किसी के भी हैंडराइटिंग को कॉपी कर सकता है हम उससे hi इस पेपर पर मृत्युंजय का फेक सिग्नेचर करवा लेंगे और उससे मृत्युंजय के हैंडराइटिंग में एक लेटर लिखवाएंगे की वो किसी और लड़की से प्यार करता था इस लिए वो उसे लड़की के साथ सब कुछ छोड़ कर यहाँ से जा रहा है और वो तुमसे माफ़ी के नाम पर अपना पूरी प्रॉपर्टी तुम्हारे नाम कर रहा है.

अपने डैड के बात सुन कर पूनम के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी और वो मुस्कुराते हुए बसंत से बोली.

पूनम- वह डैड अपने क्या प्लान बनाया है मन गयी मई आपको इस प्लान से सांप भी मर जायेगा और लाठी भी नहीं टूटेगी.

इतना बोलने के बाद पूनम हसने लगती है तो वही बसंत भी उसके साथ ठहाके मर कर है रहा था.

दूसरे दिन सुबह कुशवाहा हाउस में हंगामा मचा हुआ था क्युकी मृत्युंजय उन सब को कही मिल नहीं रहा था सुरेंद्र कुशवाहा मृत्युंजय को बहुत जगह धुंध लिए थे लेकिन उनको वो कही नहीं मिला तो उनको कुछ आशंका होने का शक हो रहा था इस लिए उसने तुरंत पुलिस स्टेशन में कॉल कर के मृत्युंजय के गुमशुदा होने का रिपोर्ट लिखाया इसके बाद सरे पुलिस वाले मृत्युंजय को ढूंढने में लग गए ऐसे hi 2 दिन बिट गया लेकिन मृत्युंजय का कही कुछ पता नहीं चला जिसके कारन सुरेंद्र कुशवाहा बहुत परेशां थे.

उसी दिन सुबह सुबह पूनम और बसंत चौहान अपने कुछ आदमियों के साथ मृत्युंजय के घर आये और बहार से hi हंगामा करने लगे बसंत चौहान घुसे से चीला रहे थे तो वही पूनम रोने की नाटक कर रही थी.

बसंत- देखो देखो भाइयो आप सब जिस कुशवाहा परिवार को महँ समझते हो उसने मेरी बेटी के साथ क्या किया है.

बसंत के बात सुन कर कुशवाहा मेंशन के आस पास लोगो के भीड़ लगने लगी तो वही जब सुरेंद्र कुशवाहा ने बहार से आते हुए शोर को सुना तो वो भी बहार ये देखने के लिए आ गए की उनके दरवाजा पर कोण शोर कर रहा है लेकिन जब वो बहार आये और पूनम को रोटा हुआ और बसंत चौहान को छीलते हुए देखा तो वो बहुत हैरान हो गए फिर वो बसंत चौहान के पास गया और उनसे आराम से बोलै.

सुरेंद्र- क्या हो गया भाई साहब आप ऐसे चीला क्यों रहे है क्या बात है.

सुरेंद्र के बात सुन कर बसंत चौहा घुसे से छीलते हुए उनसे बोलै.

बसंत- अपने गंदे जुबान से तुम मुझे भाई मत बोलै तुम सब बस महँ बनाने के नाटक करते हो लेकिन तुम सब एक no. के कमीने इंसान हो.

बसंत चौहान के बात सुन कर सुरेंद्र पहले तो हैरान हो गए लेकिन फिर वो घुसे से बसंत से बोले.

सुरेंद्र- आप ये क्या बोल रहे है आप जरा सोच समझ कर बोलिये समझे मई आपकी इज्जत करता हु इसका मतलब ये नहीं है की आप हमारे बारे में कुछ भी बोलेंगे यहाँ हमारा बहुत इज्जत है आप इस तरह से हमारा इज्जत को बर्बाद नहीं कर सकते.

सुरेंद्र कुशवाहा के बात सुन कर बसंत सिंह चौहान जोर जोर से हस्ते हुए बोलता है.

बसंत- है है है है इज्जत अरे ठु है तुम जैसे लोगो के इज्जत पर जो तुम सब सगाई तो किसी और लड़की से कर लेते हो लेकिन अपना चाकर किसी और लड़की से चलते हो.

बसंत के बात सुन कर सुरेंद्र न समझने वाले भाव से बसंत से बोलते है.

सुरेंद्र- आप कहना क्या चाहते है जरा साफ साफ बोलिये.

बसंत- मई कहना ये चाहता हु की तुम्हारे भतीजे ने मेरी बेटी से सगाई कर की और किसी और लड़की के साथ भाग गया अगर उसे किसी लड़की के साथ जाना hi था तो मेरी बेटी से सगाई कर के हमें बदनाम क्यों किया.

बसंत के बात सुन कर सुरेंद्र कुशवाहा और वह मौजूद सरे लोग हैरान हो जाते है फिर सुरेंद्र बसंत चौहान से बोले.

सुरेंद्र- नहीं ये झूठ है मृत्युंजय ऐसा लड़का नहीं है की वो किसी को धोका दे जरूर आपको कुछ गलत फहमी हुआ होगा.

बसंत- ठीक है अगर तुम्हे मेरे बात पर यकीं नहीं है तो बुलाओ अपने भतीजे को.

बसंत चौहान के बात सुन कर सुरेंद्र कुशवाहा सोच में पद जाते है सुरेंद्र को इस तरह से सोचता हुआ देखा कर बसंत चौहान बोलता है.

बसंत- क्या हुआ बुलाओ उसे मई जनता हु की तुम उसे बुला नहीं सकते क्युकी वो अपने घर है hi नहीं वो तो किसी और लड़की के साथ यहाँ से भाग गया है.

बसंत के बात सुन कर सुरेंद्र उदास होते हुए बोलते है.

सुरेंद्र- मृत्युंजय 2 दिन से लापता है पता नहीं वो कहा चला गया है मई इसका रिपोर्ट भी पुलिस स्टेशन में लिखवा दिया है मुझे लग रहा है की जरूर उसके साथ कुछ अनहोनी हुआ है.

बसंत- उसके साथ कुछ अनहोनी नहीं हुआ है वो किसी लड़की के साथ यहाँ से भाग गया है और इसका साबुत भी है मेरे पास.

बसंत चौहान के बात सुन कर सुरेंद्र कुशवाहा उससे हैरानी के साथ बोलते है.

सुरेंद्र- साबुत कैसे साबुत है आपके पास.

सुरेंद्र के बात सुन कर बसंत चौहान अपने पॉकेट से एक लेटर निकल कर उसे देखते हुए बोलता है.

बसंत- ये देखो ये है साबुत तुम्हारे उस कमीने भतीजे ने खुद मेरी बेटी को लिखा है तुम उसे खुद पढ़ लो.

बसंत के बात सुन कर सुरेंद्र जल्दी से उसके हाथ से वो लेटर लेते है और उसे पढ़ने लगते है उस लेटर में लिखा हुआ था की.

पूनम मई तुमसे प्यार नहीं करता हु इस लिए मई तुमसे सदी नहीं कर सकता हु मई किसी और से प्यार करता हु और मई उसके बिना नहीं रह सकता हु मई सगाई अपने डैड के आखरी इच्छा के चलते किया था लेकिन मुझे बाद में अहसास हुआ की अगर मई तुमसे सदी करता हु तो तीन लोगो को जिंदगी बर्बाद हो जाएगी एक मेरा दूसरा तुम्हारा और तीसरा उस लड़की का जिससे मई प्यार करता हु इस लिए मई यहाँ से उस लड़की के साथ जा रहा हु अगर मई यहाँ रहा तो मेरे चाचा मेरे डैड के आखरी इच्छा को पूरा करने के लिए तुमसे जबरदस्ती सदी करवा देंगे इस लिए तुम मुझे माफ़ कर देना और है मुझे जमीं जायदाद से कोई मतलब नहीं है इस लिए मई तुमसे माफ़ी के तौर पर अपना सारा प्रॉपर्टी तुम्हारे नाम कर रहा हु ब्ययी हो सके हो मुझे माफ़ कर देना तुम्हरा मंगेतर मृत्युंजय.

उस लेटर को पढ़ने के बाद सुरेंद्र के आँखों में आंसू आ जाता है और वो घुसे से बोलते है.

सुरेंद्र- तुमने ये अच्छा नहीं किया मृत्युंजय तुम हम सब के इज्जत को मिटटी में मिला दिया अगर तुम्हे कोई और लड़की पसंद थी तो तुम इस सगाई से मन कर देते (फिर गुस्से से थोड़े तेज़ आवाज में) सब कोई कण खोल कर सुन लो अब से मृत्युंजय का इस परिवार से कोई लेना देना नहीं है अब से वो कुशवाहा परिवार से निकला जाता है.

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तो बे कंटिन्यू..


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अपडेट 47

प्रतिक Hi रूद्र है
बसंत चौहान सुरेंद्र कुशवाहा को जो लेटर देता है उस लेटर को पढ़ने के बाद सुरेंद्र के आँखों में आंसू आ जाता है और वो घुसे से बोलते है.

सुरेंद्र- तुमने ये अच्छा नहीं किया मृत्युंजय तुम हम सब के इज्जत को मिटटी में मिला दिया अगर तुम्हे कोई और लड़की पसंद थी तो तुम इस सगाई से मन कर देते तुम्हारे ऊपर मुझे और भैया का बहुत विस्वास था लेकिन तुमने हम दोनों का विस्वास थोड़ दिया और इसमें इस बेचारी के क्या गलती थी जो तुम इसका दिल तोड़ कर किसी और के साथ भाग गए नहीं मई इस लड़की के साथ कुछ भी गलत नहीं होने दूंगा (फिर गुस्से से थोड़े तेज़ आवाज में) सब कोई कण खोल कर सुन लो अब से मृत्युंजय का इस परिवार से कोई लेना देना नहीं है (फिर पूनम के सामने अपना हाथ जोड़ कर माफ़ी मांगते हुए) मुझे माफ़ कर देना बेटी ये सब गलती मेरी है अगर मई तुम दोनों के सगाई के लिए तैयार नहीं होता तो तुम्हारे साथ ये सब नहीं होता मैंने एक गलती तो कर दी की मैंने तुम दोनों के सगाई करवाई लेकिन अब मई दूसरा कोई गलती नहीं करूँगा आज से मृत्युंजय के नाम पर जितनी भी सम्पति है वो सब तुम्हारे नाम पर हो जायेगा.

सुरेंद्र इतना बोल कर अपने घर के अंदर चले जाते है और जाते जाते अपने मन में में सोच रहे थे.

सुरेंद्र- (अपने मन में) जरूर दाल में कुछ कला है क्युकी मेरा मृत्युंजय ऐसा नहीं वो तो अपने डैड और परिवार के इज्जत के लिए अपना जान भी गवा सकता है जरूर उसके साथ कुछ हुआ है और उसका फायदा ये दोनों बाप बेटी उठाना चाहते है और जब तक मुझे मृत्युंजय के बारे में कुछ पता नहीं चल जाता मुझे इन दोनों का साथ देने का नाटक करना होगा.

यही सब सोचते हुए सुरेंद्र अपने घर के अंदर चले जाते है और किसी को कॉल कर के गुप्त रूप से मृत्युंजय का पता लगाने के लिए बोलते है.

इधर सुरेंद्र के वह से जाने के बाद बसंत और पूनम के चेहरे पर एक कामिनी मुस्कान आ जाती है और फिर वो दोनों वह से अपने घर के लिए निकल जाते है घर जाने के बाद बसंत चौहान पूनम से बोलते है.

बसंत- पूनम मई चाहता हु की तुम कुछ दिनों के लिए मुंबई चली जाओ और अपने बॉयफ्रेंड के साथ में और नजदीकियां बढ़ाओ और मई यहाँ मृत्युंजय के नाम का सारा प्रॉपर्टी अपने नाम करवाने की कोशिश करता हु अगर यहाँ कुछ गड़बड़ भी होगी तो तुम्हारा बॉयफ्रेंड इसमें हमारा बहुत मदत कर सकता है.

बसंत के बात सुन कर पूनम अपना गर्दन है में हिलती है और अपने रूम में जा कर मुंबई निकलने की तयारी करने लगती है इधर 2 दिन बाद शाम के समय में मृत्युंजय को होश आता है और जब उसको होश तो वो खुद को सही सलामत और एक अनजान जगह पर पता है जिसके कारन वो चौक जाता है और खुद से hi बोलता है.

मृत्युंजय- (अपने आप से) मई मई मई अभी जिन्दा हु मई मई मारा नहीं हु (फिर रहत के साँस लेते हुए) मैंने तो सोचा था की अब मेरा आखरी वक़्त आ गया है और मई एक बेवफा के बेवफाई के चलते मारा जाऊंगा लेकिन शुक्र है भगवन का की मई अभी जिन्दा हु लेकिन ये कोण सी जगह है मई अभी कहा हु ये तो देखने में कोई झोपडी लग रहा है.

मृत्युंजय अभी अपने आप से बात कर hi रहा था की तभी वह वही अघोरी आता है और मृत्युंजय के होश में आया हुआ देख कर मुस्कुराते हुए उससे बोलता है.

अघोरी- तो आखिर कर तुम्हे होश आ hi गया तुम अब कैसा फील कर रहे हो.

इधर जैसे hi मृत्युंजय ने अघोरी के बात सुना तो उसके तरफ देखने लगा अपने सामने एक अघोरी को खड़ा देख कर मृत्युंजय बहुत हैरान हो गया और उसी हैरानी में वो उनसे बोलै.

अघोरी- मई अब अच्छा फील कर रहा हु लेकिन आप है कोण और क्या अपने hi मेरी जान बचाई है और अगर मेरी जान बचाई है तो आपको मेरी तरफ बहुत बहुत धन्यवाद्.

अघोरी के बात सुन कर वो अघोरी मुस्कुराते हुए मृत्युंजय से बोलै.

अघोरी- मई कोण होता हु किसी के जान बचने वाला जब तक वो ऊपर वाला न चाहे तो यहाँ न तो कोई जिन्दा रह सकता है और न hi मर सकता है इस तुम ये समझो की तुम्हे ऊपर वाला मरने नहीं देना चाहता था इस लिए वो मुझे यहाँ तुम्हारी सहायता करने के लिए भेज दिया और वैसे भी तुम्हारा जनम इतनी जल्दी मरने के लिए नहीं हुआ है तुम्हे तो अभी बहुत सरे काम करने है और अपने जनम के मकसद को पूरा करना है.

उस अघोरी के बात सुन कर मृत्युंजय बस उसे देखता रहा क्युकी मृत्युंजय को उसका कुछ बात तो समझ में आयी लेकिन उसके कुछ ऐसी बाटे थी जो उसके समझ से बहार थी इस लिए वो अघोरी से बोलै.

मृत्युंजय- बाबा आप ये कैसी बाटे कर रहे है मुझे कोण से बड़े बड़े काम करने है और मेरे जनम का मकसद क्या है जो मुझे पूरा करने है.

मृत्युंजय के बात सुन कर वो अघोरी मुस्कुराते हुए उससे बोलै.

अघोरी- तुम अभी अपने घर जाओ क्युकी तुम्हारे दुश्मनो ने वह पर अपना दूसरा चल चल दिया है अगर तुम जल्द hi अपने घर नहीं पहुंचे तो तुम अपने पुरखो के म्हणत से जमा किये हुए जयादा को गवा डोज और रही बात तुम्हारे मकसद का तो वो तुम्हे मुंबई जाने के बाद पता चलेगा तुम अपने दुश्मनो से निपटने के बाद मुंबई के लिए निकल जाना और वह पर एक मार्टिकल आर्ट्स स्कूल में अपना अड्मिशन करवा लेना वही तुम्हे अपने जीवन का मकसद मिलेगा ठीक है अब तुम यहाँ से जा सकते हो लेकिन मेरी ये बात यद् रखना अगर तुम्हे अपने जनम के मकसद के बारे में जानना है तो तुम्हे मुंबई जाना hi होगा और वही से तुम्हारी जिंदगी का असली सफर सुरु होगा.

इतना बोल कर अघोरी उस झोपडी से बहार निकल जाता है और इधर बस वह खड़े खड़े अघोरी के कही गयी बातो को समझने की कोशिश कर रहा था थोड़ी देर वही पर खड़े रहने के बाद आखिर कर मृत्युंजय वह से बहार आया और अपने घर जाने के लिए निकल गया हलाकि मृत्युंजय अभी पूरी तरह से ठीक नहीं हुआ था उसके शरीर पर अभी भी हलकी फुल्की छोटो के निशान मौजूद थे लेकिन उसके अंदरूनी जखम बिलकुल ठीक हो गया था वो गंगा नदी में बहते हुए पटना से काफी दूर आ गया था इस लिए उसे पटना जाने के लिए बस का सवारी करना पड़ा और वो करीब 3 घंटा सफर करने के बाद आखिर कर पटना पहुंच hi गया.

जब मृत्युंजय पटना सहर में पंहुचा तो रत काफी हो गयी थी क्युकी जब वो उस झोपडी से निकला था तो शाम का समय हो रहा था और वह से पटना पटना आते आते काफी ज्यादा समय लग गया था खैर वो बस से उतर कर सीधा अपने घर के लिए निकल गया करीब आधे घंटे पैदल चलने के बाद वो अपने घर पर पहुंच गया उसको घर आते हुए किसी ने नहीं देखा था इस लिए वो चुप चाप अपने चाचा के रूम के पास गया और उनका दरवाजा खटखटाया.

इधर सुरेंद्र अपने रूम में परेशां हो कर इधर उधर टहल रहे थे वो बस मृत्युंजय के बारे में hi सोच रहे थे की आखिर वो गया कहा क्युकी वो अपने सोर्स से सब जगह पता लगा लिए थे लेकिन उनको मृत्युंजय का कही कुछ पता नहीं चला था इस लिए उनका मन आशंकाओं से भर गया था की कही मृत्युंजय के साथ कुछ हो तो नहीं गया अभी वो अपने उधेड़ बन में इधर उधर घूम hi रहे थे की तभी उनको दरवाजा खटखटाने की आवाज सुनाई दी जिसे सुन कर वो दरवाजा खोलने के लिए चले गए.

जब वो दरवाजे के पास जा कर दरवाजा खोला तो अपने सामने मृत्युंजय को खड़ा देख कर हैरान हो गए कुछ देर तक वैसे hi हैरान खड़ा हो कर बस मृत्युंजय को देखते रहे लेकिन जब उनको होश आया तो वो जल्दी से भाग कर मृत्युंजय के पास गए और उसको गले लगा लिए मृत्युंजय को वह सही सलामत खड़ा देख कर उनके आँखों में आंसू आ गया था और अपने भरे हुए गले से मृत्युंजय से बोले.

सुरेंद्र- तुम तुम कहा चले गए थे मैंने तुमको कहा कहा नहीं ढूंढा लेकिन तुम मुझे कही भी नहीं मिले ऐसे अपने चाचा के साथ कोई करता है क्या और देखो तो कैसी हालत बना की है अपनी आखिर तुम गए कहा थे और ऐसी हालत कैसे हो गयी तुम्हारी (फिर मृत्युंजय के शरीर को गौर से देखते हुए) और और तुम्हारे शरीर पर छोटे भी है आखिर तुम्हारे साथ हुआ क्या था.

सुरेंद्र के बात सुन कर मृत्युंजय भी भावुक हो गया था लेकिन फिर वो खुद को ठीक करते हुए सुरेंद्र से बोलै.

मृत्युंजय- चाचा चलिए हम अंदर चल बाटे करते है और मई आपको वो बस बताऊंगा जो मेरे साथ हुआ था.

मृत्युंजय के बात सुन कर सुरेंद्र दरवाजे के पास से साइड हो गए इसके बाद मृत्युंजय अंदर रूम में चला गया और वह लगे हुए सोफे पर बैठ गया इसके बाद सुरेंद्र मृत्युंजय के पास आये और उससे बोले.

सुरेंद्र- मृत्युंजय तुमको इस तरह से बिना बताये नहीं जाना चाहिए था तुम पता है तुम्हे जाने के बाद हम सब पर क्या बीती रही थी और सबसे ज्यादा परेशां तो पूनम थी रुको मई उसको कॉल कर के बोल देता हु की तुम वापस आ गए हो नहीं तो बेचारी न जाने और कितना परेशां होगी.

मृत्युंजय ने जैसे hi सुरेंद्र के मुँह से पूनम का नाम सुना तो गुस्से से उसने मुठी भींच लिया और उसके आंखे लाल हो गयी इधर सुरेंद्र इन सब बातो से बेखबर अपना बात बोल कर वो पूनम के पास कॉल लगाने लगे तभी जल्दी से मृत्युंजय उसके हाथो से मोबाइल छीन लेता है और थोड़ा घुसे से सुरेंद्र से बोलता है.

मृत्युंजय- कोई जरुरत नहीं है उसके पास कॉल करने की और आप क्या बोल रहे थे की पूनम मेरे लिए परेशां हो रही थी है है है आप बहुत अच्छा मजाक कर लेते है चाचा आपको पता है मेरे गायब होने के पीछे उन्ही दोनों बाप बेटी का हाथ था वो तो सुकर है इस अघोरी बाबा के जिसने मेरी जान बचा ली नहीं तो आपको सायद मेरी लाश भी नहीं मिलती.

मृत्युंजय के बात सुन कर सुरेंद्र हैरान हो गए उनको तो मृत्युंजय के बातो पर बिस्वास hi नहीं हो रहा था और होता भी कैसे पूनम सुरेंद्र के नजरो में अपना छवि इतनी अच्छी जो राखी थी.

सुरेंद्र- तुम ये क्या बकवास कर रहे हो भला पूनम और बसंत तुम्हे क्यों गया करवाना चाहेगा.

सुरेंद्र के बात को सुन कर मृत्युंजय जोर जोर से हसने लगा और उनको दया भरी नजरो से देखते हुए बोलै.

मृत्युंजय- है है है अंकल आप कितने भोले आप पूनम और बसंत जैसे कमीनो लोगो पर बिस्वास कर लिया और आपको मई क्या कहु मई खुद hi उस नागिन पर हद से ज्यादा भरोसा कर लिया था और उसी भरोसे के कारन मई आज मरते मरते बचा हु.

मृत्युंजय के बात सुन कर सुरेंद्र न समझने वाली भाव से मृत्युंजय को देखते हुए बोले.

सुरेंद्र- तुम कहना क्या चाहते हो देखो तुम मुझे सब सच सच बताओ की आखिर तुम्हारे साथ हुआ क्या था और उन दोनों का उसमे क्या हाथ है.

सुरेंद्र के बात सुन कर मृत्युंजय थोड़ी देर संत रहा फिर फिर वो उनसे बोलना सुरु किया.

मृत्युंजय- आपको पता है चाचू पूनम मुझसे कोई प्यार नहीं करती थी बल्कि उसको मुझसे प्यार करना एक दिखवा था दरअसल वो मेरे जरिये मेरे जायदाद पाना चाहती थी इस लिए वो पहले मुझे प्यार की नाटक की फिर दोनों बाप बेटी ने मिल कर मेरे डैड को अपने रस्ते से हटाया और फिर मुझे.

इतना बोल कर मृत्युंजय दो दिन पहले उसके साथ क्या हुआ था सब सुरेंद्र को बताने लगा जैसे जैसे वो सुरेंद्र को सचाई बता रहा था वैसे वैसे सुरेंद्र के आंखे घुसे से कल हो रहा था जब मृत्युंजय सुरेंद्र को साडी बाटे बता दी तब सुरेंद्र घुसे से अपने जगह से उठाते हुए बोलै.

सुरेंद्र- उन दोनों बाप बेटी की इतनी हिमत की वो जायदाद के लिए पहले मेरे देवता जैसे भाई को मारा और अब उन्होंने तुम्हे मरने की कोशिश की है मई उन सब को छोडूंगा नहीं मई उन दोनों को जान से मर दूंगा.

इतना बोल कर सुरेंद्र वह से जाने लगे तभी मृत्युंजय उनके हाथ को पकड़ कर उन्हें समझते हुए बोलै.

मृत्युंजय- संत हो जाइये चाचा ऐसे गुसा करना ठीक नहीं है.

सुरेंद्र- गुसा न करू तो क्या करू उन दोनों ने मेरे जान से प्यार भाई को मर डाला और उन लोगो ने तुम्हे भी मरने की कोशिश की है.

मृत्युंजय- मई जनता हु चाचा और सच पूछिए तो मेरा भी मन कर रहा है की मई उन दोनों को जान से मर दू लेकिन अगर हम उन्हें जान से मर दिया तो ये उनके लिए बहुत काम सजा होगी मई चाहता हु की वो लोग जिंदगी भर मरने के लिए तापडे लेकिन उनको मौत नहीं आणि चाहिए और यही सजा उनके लिए बेस्ट होगी.

मृत्युंजय के बात सुन कर सुरेंद्र थोड़ा संत होते है और मृत्युंजय से बोलते है.

सुरेंद्र- तो अब हमें क्या करना चाहिए.

मृत्युंजय- चाचू जैसे पहले से सब चलता आ रहा है वैसे hi चलने दीजिये आप ये किसी को मत बताइयेगा की मई घर वापस आ गया हु बस आप ऐसा दिखाया कीजियेगा की आप मुझसे मेरे घर छोड़ने से बहुत नाराज है आप ये सब ऊपरी तौर पर कीजियेगा लेकिन आप अंदर hi अंदर उनके खिलाफ साबुत इक्कठा करने की कोशिश कीजियेगा मई जनता हु की बसंत चौहान बहुत सरे गैर क़ानूनी धंधे है जो वो कानून के नजरो से छुपा कर करता है बस आप उसके गैर क़ानूनी धंधे का साबुत ले आइये ताकि हम उसे बर्बाद कर सके जब वो पूरी तरह से जंगल हो जायेगा तब हम उन सब को बताएँगे की कुशवाहा परिवार से टकराने का क्या नतीजा होता है और अगर आप उनके साथ अच्छे से रहिएगा तो उनको आपके ऊपर शक भी नहीं होगा की आप उनके खिलाफ साबुत इक्कठा कर रहे है और है डैड को भी उन लोगो ने hi एक्सीडेंट करवाया था तो हो सके तो आप इसका भी साबुत इक्कठा करवाइये और है उनको आपके ऊपर थोड़ा भी शक नहीं होना चाहिए नहीं तो हमारा प्लान फ़ैल हो जायेगा.

मृत्युंजय के बात को सुन कर सुरेंद्र कुछ देर तक सोचने के बाद बोले.

सुरेंद्र- ठीक है जैसा तुम छह रहे हो वैसा hi होगा बस मई चाहता हु की उन सब की ऐसी बर्बादी होनी चाहिए की दुनिया ये देख ले की किसी के साथ धोखा करने का नतीजा क्या हो सकता है.

सुरेंद्र के बात सुन कर मृत्युंजय हलकी मुस्कान के साथ बोलै.

मृत्युंजय- बस मई आपको जितना बोलै हु आप इतना कर दीजिये इसके बाद आप देखिएगा की मई उनके साथ क्या करता हु बस आप एक काम कीजियेगा की उन सब को पल पल की खबर मुझे मिलनी चाहिए वो लोग कहा जाते है क्या करते है.

सुरेंद्र- ठीक है तुम उसकी चिंता मत करो मई ऐसा बेवस्था करूँगा की उनकी एक एक पल की हर खबर हम तक पहुंच जायेगा अब तुम जाओ और खाना खा कर आराम करो.

इसके बाद मृत्युंजय अपने चाचा के रूम से निकल कर अपने रूम में चला जाता है और जाते hi बीएड पर सो जाता है इधर सुरेंद्र मृत्युंजय को वह से जाने के बाद सुरेंद्र किसी को कॉल करता है और बोलता है.

सुरेंद्र- हैल्लो शंकर मुझे तुमसे कुछ काम था क्या तुम कल मुझे मिल सकते हो.

शंकर- हैल्लो नमस्ते सर और कैसे है सर आप और सर आपको मुझसे क्या काम आ गागा जो आप मुझसे मिलना छह रहे है.

सुरेंद्र- एक बहुत जरुरी काम है और खतरनाक भी वो काम तुम्हारे शिवा कोई और नहीं कर सकता तो क्या तुम कल मुझसे मिलने आओगे.

शंकर- सर मई अभी पटना में तो नहीं हु लेकिन आप मुझे काम बता दीजिये अगर मुझे लगा की ये काम मेरे शिवा कोई और नहीं कर सकता तो मई जल्द hi आपसे मिलने के लिए आ जाऊंगा.

शंकर के बात सुन कर सुरेंद्र एक गहरी साँस लेते है और शनकर से बोलते है.

सुरेंद्र- तुम बसंत चौहान को तो जानते hi हो बस मुझे उसके बारे में सरे रिपोर्ट्स चाहिए वो कहा जाता है क्या करता है और सबसे बड़ी बात बसंत चौहान जो गैर क़ानूनी काम करता है मुझे उसका सारा साबुत चाहिए और है मुझे शक है की उसने hi मेरे बड़े भाई का एक्सीडेंट भी करवाया था तो मुझे उसका भी छान बिन करवाना है.

सुरेंद्र के बात सुन कर शंकर थोड़ी देर के लिए संत हो जाता है फिर वो कुछ सोचते हुए बोलता है.

शंकर- सर आपके काम में तो सच में बहुत रिस्क है लेकिन कोई बात नहीं मुझे रिस्क वाले hi काम करने में मजा आता है लेकिन सर इस काम के लिए आपको पुरे 10 करोड़ देने होंगे.

सुरेंद्र- ठीक है तुम काम सुरु करो तुमको तुम्हारे पैसे मिल जायँगे लेकिन तुम्हारे पास ज्यादा समय नहीं है मुझे 1 सप्ताह में hi सरे साबुत चाहिए.

शंकर- कोई बात नहीं सर आपको 1 सप्ताह के अंदर hi सारा साबुत मिल जायेगा.

शंकर के बात सुन कर सुरेंद्र कुशवाहा कॉल डिसकनेक्ट कर देता है और अपने बीएड पर जा कर सो जाता है.

इधर मई उस स्पेस स्टोरेज की दुनिया में 2 दिनों तक आराम किया जिसके कारन मई एक डैम फ्रेश महसूस कर रहा था फिर मई वह से बहार के दुनिया में निकलने के बारे में सोचने लगा क्युकी मुझे इस दुनिया में आये हुए पुरे 100 दिन हो गए थे यानि की बहरी दुनिया में पुरे एक दिन बिट गए थे इस लिए मई अपने मन hi यहाँ से बहार जान के बारे में सोचा और वह से गायब हो कर बाहरी दुनिया में आ गया जब मई उस स्पेस स्टोरेज की दुनिया से बहार आया तो उस समय बहार के दुनिया में शाम के 9 बज रहे थे.

मैंने जब ध्यान दिया तो मुझे पता चला की मुझे स्पेस स्टोरेज की दुनिया में गए हुए सिर्फ 12 जानते hi बाईट थे यानि की यहाँ का 12 घंटा स्पेस स्टोरेज की दुनिया में पुरे 100 दिन के बराबर थे ये जान कर मई बहुत खुसी हुआ की मई और मेरे साथ अब बहुत काम समय में खुद को ताकतवर बना सकते थे फिर मई इन सब बातो को दिमाग से निकल कर वह गुरुदेव को ढूंढने लगा तो मुझे वह पर गुरुदेव कही दिखाई नहीं दिए ये देख कर मई समझ गया की गुरुदेव यहाँ से आश्रम लौट गए है.

इसलिए मई भी वह से गायब हो कर आश्रम में पहुंच गया जब मई आशाराम में पंहुचा तो सीधा गुरुदेव के रूम में गया और उनसे अंदर आने की अनुमति मांगी जब मुझे अंदर जाने की अनुमति मिल गयी मई मई सीधा गुरुदेव के रूम में चला गया और जाते hi उनको प्रणाम किया इधर जब गुरुदेव मुझे अपने सामने देखे तो उनके चेहरे पर एक मुस्कान फैल गयी और वो मुस्कुराते हुए मुझसे बोले.

गुरुदेव- यशस्वी भाव पुत्र पुत्र तुम्हारे चेहरे पर मुस्कान और और तुम्हारा आत्मविश्वास देख कर मुझे लग रहा है की तुम जिस कार्य से गए थे वो कार्य पूरा हो गया मई सही बोल रहा हु न.

गुरुदेव के मुख से ऐसी बाटे सुन कर मई पहले तो हैरान हो गया फिर मई उनके सामने अपना सर झुकाते हुए बोलै.

मई- गुरुदेव आपको तो सब पहले से hi पता है है गुरुदेव मई समय शक्ति को हासिल करने में कामयाब हो गया और साथ में मुझे 2 तकनीक और एक स्पेस स्टोरेज की दुनिया भी विरासत में मिली है.

मेरी बात सुन कर गुरुदेव बहुत खुस हुए और वो खुसी से मुझसे बोले.

गुरुदेव- बहुत अच्छा पुत्र मुझे तुमसे यही अपेक्षा थी की तुम इस में जरूर कामयाब होंगे मई आज धन्य हो गया की मेरा तुम जैसा सौभाग्यशाली बुद्धिमान और ताकतवर शिस्य है पुत्र तुमने समय शक्ति को हासिल कर लिया है इसलिए अब से तुम्हे समय शक्ति पर ध्यान लगा कर उसके सम्पूर्ण शक्ति को जानना होगा और उसे इस्तेमाल करना सीखना होगा.

मई- जी गुरुदेव मई ऐसा hi करूँगा अब से मई रोजाना समय शक्ति का ट्रेनिंग करूँगा और उसपे ध्यान लगाऊंगा वैसे गुरुदेव मुझे आपसे कुछ बाटे करनी थी.

गुरुदेव- है बोलै न पुत्र तुम मुझसे और क्या बाटे करना चाहते हो.

मई- गुरुदेव मई बस आपसे एक बिनती करना चाहता हु की जब मई राठौर परिवार के आइसलैंड पर एक मार्टिकल आर्ट्स स्कूल खोल लू तो आप इस आश्रम के सरे गुरुओं और शिष्यों के साथ उस स्कूल का कार्य भर संभाले क्युकी वह पर यहाँ से ज्यादा स्प्रिचैल एनर्जी है और उस एनर्जी का सही तरीके इस्तेमाल करना आपसे अच्छा और कोण सीखा सकता है मई चाहता हु गुरुदेव की आप उस मार्टिकल आर्ट्स स्कूल के मुख्या गुरु के साथ साथ वह के प्रिंसिपल भी बने अगर आपकी इच्छा हो तो.

मेरी बात को सुन कर गुरुदेव कुछ देर सोच में पद गए थोड़ी देर तक सोचने के बाद गुरुदेव बोले.

गुरुदेव- ठीक है मई तैयार हु मई भी चाहता हु की मई कुछ ऐसे योद्धाओ को तैयार करू जो इंसानो और सैतानो के युद्ध में तुम्हारे साथ कंधे से कंधे मिला कर चल सके और अगर उस जगह पर सच में यहाँ से ज्यादा स्प्रिचैल एनर्जी है तो ये हम सब के लिए और भी अच्छा होगा.

गुरुदेव के बात सुन कर मई बहुत खुस हो गया और उसी खुसी के साथ मई उनसे बोलै.

मई- गुरुदेव आपके इस निर्णय से मेरा बहुत समय बच गया अब मई फ्री हो कर इस दुनिया से सैतानो को ख़तम कर सकूंगा और अगर आप हमारे मार्टिकल आर्ट्स स्कूल के मुख्या गुरु होंगे तो मुझे यकीं है की मुझे बहुत जल्द hi बहुत सरे साथी मिल जायेंगे वैसे गुरुदेव अपने मुझसे बोलै था की आप मुंबई वाले मैरिटल आर्ट्स स्कूल के लिए 4 ट्रेनर की बेवस्था करेंगे तो गुरुदेव वो चार लोग कोण कोण है और वो अभी कहा है.

मेरी बात को सुन कर गुरुदेव मुस्कुराते हुए किसी के पास अपना मानसिक सन्देश भेजते है मानसिक सन्देश भेजने के बाद वो मुझसे बोलते है.

गुरुदेव- है मैंने तुम्हारे मार्टिकल आर्ट्स स्कूल के लिए 4 ट्रेनर बेवस्था किया है वो कुछ hi देर में यहाँ आने वाले है तुम उनसे खुद hi मिल लेना.

अभी गुरुदेव मुझे बता hi रहे थे की तभी गुरुदेव के रूम में बहार से दरवाजा खटखटाने का आवाज आया जिसे सुन कर गुरुदेव बोले.

गुरुदेव- तुम सब अंदर आ जाओ.

गुरुदेव के बोलने के बाद वह 4 लोग आये मई उन चारो को देख कर चौक गया क्युकी ये चारो गुरुकुल के बहुत पुराने ट्रेनर थे और सब के सब सम्राट लेवल के योद्धा थे मई आप सब को इनका इंट्रोडक्शन दे देता हु.

1. सोमदेव- इनके पास बिजली की शक्ति है साथ में योद्धाओ को मैडिटेशन करना और अपने शक्तियों को काबू करना सिखाते है और ये एक आयुर्वेदिक चिकित्सक भी है.

2. मंगलदेव- इनके पास पृथ्वी तत्त्व की शक्ति है और ये योद्धाओ को शक्तियों काबू करने के साथ अस्त्र सत्र चलने की ट्रेनिंग देते है.

3. रविनाथ- इनके पास अग्नि तत्त्व है ये योद्धाओ को शक्तियों को काबू करना और तकनीक को सही तरह से इस्तेमाल करना सिखाते है.

4. रंगनाथ- इनके पास वायु को शक्ति है ये योद्धाओ को ट्राइंग में अपने शक्तियों को साधना लेवल बढ़ाना और फिर सभी तरह के अस्त्र सस्त्र का ज्ञान देते है.

जब उन चारो को देखा तो मई हैरान हो गया क्युकी मुझे गुरुदेव के साथ साथ इन लोगो ने भी ट्रेनिंग दिया था फिर मई उन सब को प्रणाम करते हुए उनसे बोलै.

मई- आप सब को बहुत बहुत सुक्रिया जो आप सब मेरे मार्टिकल आर्ट्स स्कूल में योद्धाओ को ट्रेनिंग देने के लिए तैयार हो गए.

मेरी बात सुन कर सोमदेव मुस्कुराते हुए बोले.

सोमदेव- अरे तुम हमें सुक्रिया मत बोलो बल्कि हमें तुम्हे सुक्रिया बोलना चाहिए की तुम्हारी वजह से हमें उन योद्धाओ को तैयार करने का मौका मिल रहा है जो आगे चल कर अच्छे और बुराई के युद्ध में अपना अहम् भूमिका निभाएंगे और वैसे भी हमारा काम hi है योद्धाओ को ट्रेनिंग देना और उन्हें ताकतवर बना कर बुराइयों के साथ लड़ने के लिए तैयार करना इस लिए तुम हमें सुक्रिया मत बोलो.

उनके बात सुन कर मेरे चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी फिर मई अपने मानसिक आवाज में गुरुदेव से बोलै.

मई- गुरुदेव मई चाहता हु की आप hi इन चारो में से किसी एक को मार्टिकल आर्ट्स स्कूल का प्रिंसिपल चुन में मेरी मदत करे क्युकी मुझे समझ में नहीं आ रहा है की मई किनको मार्टिकल आर्ट्स स्कूल का प्रिंसिपल सेलेक्ट करू.

मेरी बात कोण गुरु देव एक बार इन चारो को देखा और फिर वो मानसिक आवाज में hi मुझसे बोले.

गुरुदेव- तुम्हारे स्कूल के लिए वैसे तो चारो hi ट्रेनर प्रिंसिपल के पद के लिए परफेक्ट है लेकिन तुम चारो को तो प्रिंसिपल नहीं बना सकते न लेकिन इन सब में सबसे ज्यादा ताकतवर और समझदार टैनर सोमदेव है और वो इन सब में सबसे बड़े भी है तो तुम उनको hi अपने स्कूल का प्रिंसिपल बनाओ वो तुम्हारे मार्टिकल आर्ट्स स्कूल को बहुत अच्छे से संभल लेंगे.

मई- ठीक है गुरुदेव मई गुरु सोमदेव को hi अपने स्कूल का प्रिंसिपल बनाऊंगा.

मई गुरुदेव से ये साडी बाटे अपने मानसिक आवाज में बात कर रहा था जिससे उन चारो को कुछ पता नहीं चला फिर मई उन चारो से बोलै.

मई- तो आप सब गुरु मेरे साथ चलने के लिए तैयार है.

मंगलदेव- है हम सब तुम्हारे साथ चलने के लिए तैयार है.

मंगलदेव की बाटे सुन कर मई गुरुदेव से वह से जाने के लिए अनुमति लिया और वह पर एक पोर्टल खोल दिया इसके बाद मई उन चारो के साथ उस पोर्टल के माध्यम से हवेली में आ गए हवेली में आने के बाद मुझे पता चला की सरे लोग हवेली के दिंनिंग होल में खाना का रहे है तो मई उन चारो गुरुओ को ले कर सीधा हवेली के के गेस्ट रूम में ले कर आ गया और उन सब को थोड़ी देर वही आराम करने के लिए बोल कर दिंनिंग होल में आ गया जब मई वह पंहुचा तो सब मुझे वह पर देख कर खुस हो गए

कारन- अरे भाई तुम बहुत सही समय पर आये हो अभी हम सब खाना खाने वाले थे अब तुम आ गए हो तो आओ हम सब साथ में hi कहते है.

मई- अरे नहीं कारन तुम सब खाना खाओ मुझे अभी घर निकलना होगा क्युकी मई सुबह में शनाया को बोल कर निकला था की मई शाम तक वापस आ जाऊंगा और देख मुझे यही पर आते आते 10 बज गए है.

कारन- क्या यार एक बार भी तो हमारे साथ बैठ कर खाना खा लो.

मई- फिर कभी भाई लेकिन अभी मुझे जाना होगा मई बस तुम सब को ये बताने के लिए आया था की हमारे मार्टिकल आर्ट्स स्कूल के लिए प्रिंसिपल और ट्रेनर मिल गए है और मई उनको अपने साथ लेकर यहाँ आ गया हु वो सब अभी गेस्ट रूम में आराम कर रहे है.

रोहन- क्या सच में लेकिन वो लोग है कोण.

मई- तुम सब उनलोगो को अच्छे से जानते हो वो हमारे आश्रम के गुरुओ में से hi है बस तुम सब का कर उनसे मिल लो और उनके रहने के लिए कोई रूम का इंतेज़ाम कर दो और है बलदेव ये तुम्हारे ऊपर है की उन्हें किसी भी चीज की कमी नहीं होनी चाहिए.

बलदेव- जी बॉस आप चिंता मत कीजिये उन सब को किसी भी चीज की कमी नहीं होने दूंगा.

मई- ठीक है अब मई जा रहा हु तुम सब का कर उनसे मिल लो और है उन्हें बोल देना की है घर चला गया हु इन सब से मई सुबह में आ कर मिलूंगा.

रोहन- ठीक है तुम जाओ यहाँ का सब कुछ हम सब मिल कर देख लेंगे.

मई- ठीक है.

इतना बोल कर वह से बहार आया और टेलिपोर्ट हो कर शनाया के घर के पास आ गया इसके बाद मई दरवाजे पर गया और दुर्बल बजाय तो कुछ देर बाद पुस्पा माँ आ कर दरवाजा खोला और दरवाजे पर मुझे देख कर बोली

पुस्पा- तुम सुबह से कहा गायब थे और तुम्हारा ये कोण सा टाइम है घर आने का अब तुम अकेले नहीं हो जो तुम इतने रत रत तक बहार घूमते रहो.

पुस्पा के डट सुन कर मई मुस्कुराते हुए उनसे बोलै.

मई- सॉरी मम्मी जी मई किसी काम से बहार गया था और वही पर लेट हो गया मई आगे से ध्यान रखूँगा.

मेरी बात सुन कर पुस्पा माँ कुछ नहीं बोली और अंदर चली गयी उनको अंदर जाने के बाद मई भी उनके पीछे पीछे घर के अंदर आ गया जब मई घर के अंदर आया तो देखा की शनाया और डैड दिंनिंग टेबल पर बैठ कर खाना खा रहे है जब शनाया ने मुझे देखा तो वो मुझसे बोली.

शनाया- प्रतिक ये क्या बात हुयी तुम मुझे शाम तक आने के लिए बोल कर गए थे और तुम इतनी रत गए आ रहे हो.

मई- सॉरी शनाया वो क्या है न की मई जिस काम से गया था उसमे hi देरी हो गयी.

शनाया- कोई बात नहीं जाओ फ्रेश हो कर आओ तब तक मई तुम्हारे लिए खाना निकल देती हु.

शनाया के बात सुन कर मई तुरंत वाशरूम में गया और फ्रेश हो कर दिंनिंग होल में आ गया और फिर सबके साथ खाना खाया खाने के दौरान शनाया के डैड मुझसे बोले.

अजय- बीटा प्रतिक तुमने आज बहुत बड़ी गलती की है.

शनाया के डैड के बात सुन कर मई हैरान हो गया और उसी हैरानी में उनको देखते हुए बोलै.

मई- डैड आप ये क्या बोल रहे है मैंने ऐसी कोण सी गलती कर दी.

अजय- तुमसे ये गलती हुयी है की तुम शाम को आने को बोल कर इतनी रत में आये hi तुम्हे पता है की शनाया को कल ऑक्शन में जाने के लिए शॉपिंग करनी थी और कब से तैयार हो कर तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी लेकिन तुम अब आ रहे हो.

शनाया के डैड के बात सुन कर मई एक बार उनको देखा और फिर शनाया से माफ़ी मांगने के अंदाज में बोलै.

मई- सॉरी शनाया तुमको मेरे लिए इंतज़ार करना पड़ा वैसे तुम शॉपिंग के लिए अकेले भी तो जा सकती थी न तो तुम मेरा इतने समय तक इंतज़ार क्यों किया.

मेरी बात को सुन कर शनाया कुछ नहीं बोली बस वो चुप चाप खाना खा रही थी ये देख कर मई समझ गया की वो मुझे समय पर न आने के कारन नाराज है इस लिए मई उससे बोलै.

मई- ऑक्शन कल शाम 3 बजे से सुरु होगा इस लिए हम कल सुबह में hi शॉपिंग करने चलेंगे और कल के पूरा शॉपिंग मेरे तरफ से आप सब के लिए.

मेरी बात को सुन कर शनाया खुस हो गयी और मुस्कुराने लगी इसके बाद हमारे बिच कोई बात नहीं हुआ और हम सब खाना खा कर अपने अपने रूम में आ गए रूम में आने के बाद मई शनाया से बोलै.

मई- शनाया तुम्हारे लिए मेरे पास एक सरप्राइज है और ये सरप्राइज ऐसा है की जिसे देख कर तुम्हे बहुत खुसी होगी.

मेरे मुँह से सरप्राइज के बात सुन कर शनाया के चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है और वो मुस्कुराते हुए मुझसे बोलती है.

शनाया- अच्छा तुम्हारे पास मेरे लिए सरप्राइज है जरा दिखाओ तो मई भी देखु की ऐसा कोण सा सरप्राइज है तुम्हारे पास जिसे देख कर मेरी मन खुस हो जायेगा.

शनाया के बात सुन कर मई उसे मुस्कुराते हुए देखा और फिर उससे बोलै.

मई- शनाया मई चाहता हु की तुम उस सरप्राइज को देखने से पहले मेरी कुछ बाटे जान लो और समझ लो क्युकी मेरे बारे में कुछ ऐसी बाटे है जो तुम्हे जानना जरुरी है वैसे तो तुम्हे मेरे बारे में कुछ बाटे पता है लेकिन मई चाहता हु की तुम्हे मेरे बारे में कुछ बाटे छोड़ कर सारा पता चल जाये.

मेरी बात सुन कर शनाया हैरान हो गयी और वो उसी हैरानी से मुझे देखने लगी फिर वो कुछ देर वैसे hi मुझे देखने के बाद वो बोली.

शनाया- ऐसी कोण सी बात है तुम्हारे बारे जो मुझे पता नहीं है.

मई- शनाया जैसा की तुम जानती हो की मई अनाथ हु लेकिन हकीकत में मई कोई अनाथ नहीं हु बल्कि मेरे भी परिवार है बस मुझे पता नहीं है की मेरा परिवार कोण है और कहा है बस मेरे पास उनका कुछ निशानी है और मई हिमालय से यहाँ अपने परिवार को hi ढूंढने के लिया आया था.

मेरी बात को सुन कर शनाया शौक हो गयी फिर वो कुछ देर वैसे hi शौक में रहने के बाद वो मुझसे कुछ बोलने hi वाली थी की मई उसे चुप करते हुए उससे बोलै.

मई- शनाया तुम अभी कुछ मत बोलै पहले मुझे अपनी बात बोलने दो इसके बाद तुम्हे जो भी बोलना होगा वो बोलना लेकिन अभी चुप चाप मेरी बात सुनो.

मई- तुम जानती हो शनाया जब मई 8 साल का था तब मई गुरुदेव को मिला था और वो मुझे अपने साथ लेकर हिमालय चले गए थे इसके बाद मुझे उन्होंने में बहुत साडी सिक्षाए हुए शक्तिया दी मुझे आयुर्वेदिक की शिक्षा भी उन्होंने hi दी थी और उन्होंने मुझे मार्टिकल आर्ट्स में पारंगत बनाया तुम जानती हो इंडिया में ऐसा कोई भी नहीं है जो मुझे मार्टिकल आर्ट्स में हरा सके जब मई वह का शिक्षा समाप्त कर लिया तब मुझे गुरुदेव ने यहाँ पर तुम्हारे दादा के द्वारा लिखा हुआ पत्र देकर भेज दिए और साथ में मुझसे बचन भी लिया की मुझे तुमसे सदी करनी होगी और मई तो तुमसे ये सब पते पहले भी बताना चाहा था लेकिन मुझे मौका hi नहीं मिला.

मई- तुम जानती हो शनाया गुरुदेव ने मेरे hi जैसे बहुत सरे योद्धा तैयार किये है ताकि हम सब बुराइयों से लड़ सके तुम जानती को कुछ समय बाद हमारी दुनिया पर सैतानो का हमला होने वाला है और उन सरे सैतानो से निपटने की जिम्मेदारी हम सब के hi ऊपर है और अब तुम मुझसे जुड़ गयी हो तो ये जिम्मेवारी तुम्हारे ऊपर भी आ गयी है इसलिए अब तुम्हे भी कड़ी म्हणत करनी होगी और खुद को और भी ज्यादा ताकतवर बनाना होगा शनाया मेरे बारे में कुछ और भी ऐसी बाटे है जो तुम्हे जानना जरुरी है लेकिन वो बाटे मई तुम्हे नहीं बता सकता वो बाटे तुम्हे गुरुदेव hi बता सकते है इस लिए तुम्हे गुरुदेव से मिलना होगा.

इतना बोल कर मई संत हो गया और शनाया को देखने लगा इधर शनाया मेरी बाटे सुन कर पूरी तरह से हैरान थी फिर वो कुछ देर तक ऐसे hi चुप चाप तक बैठी रही फिर वो मुझसे बोली.

शनाया- मुझे नहीं पता था प्रतिक की तुम मुझसे इतनी बड़ी बात भी छुपाओगे क्या तुम्हे मुझ पर थोड़ा भी भरोसा नहीं था जो तुम मुझसे ये सब बाटे छुपाया था.

इतना बोलने के बाद hi शनाया के आँखों में आंसू आ गया मई उसके आँखों में आंसू देख कर तड़प गया और मई जल्दी से उसके पास गया और उसके आँखों से आंसू साफ करते हुए बोलै.

मई- सॉरी शनाया मई तो हमेशा से तुम्हे ये साडी बाटे बताना चाहता था लेकिन मुझे सही समय hi नहीं मिला मई तुमसे प्रॉमिस करता हु शनाया की अब से मई तुमसे कोई भी बात नहीं छुपाऊंगा प्लीज तुम रोना बंद करो प्लीज.

मेरे बात को सुन कर शनाया के अपने आँख से आंसू पोची और मुझसे बोली.

शनाया- हम्म तो क्या तुम्हे तुम्हारे फॅमिली में से कोई मिला.

मई- नहीं अभी तक तो कोई भी नहीं मिला है लेकिन मुझे थोड़ा थोड़ा अंदाजा है की वो लोग कोण हो सकते है.

शनाया- तो मुझे भी बताओ की वो लोग कोण हो सकते है.

शनाया के बात सुन कर मई कुछ देर के लिए चुप गया फिर मई उससे बोलै.

मई- तुम जानती हो शनाया मई कुछ दिन पहले आउट ऑफ सिटी गया था दरअसल मई उस समय राठौर फॅमिली के आइसलैंड पर गया था क्युकी राठौर फॅमिली के मुखिया बहुत बीमार थे और उनके hi इलाज के लिए मुझे के जाया गया था जब मई वह पर पंहुचा तो उन सब को देख कर मेरे अंदर एक अजीब सी फीलिंग आने लगी मुझे ऐसा लग रहा था की मई इन सब से पहले भी मिल चूका हु और जब मई राठौर परिवार के सबसे छोटी बहु से मिला तो मुझे ऐसा लगा की वो hi मेरी माँ है और सबसे बड़ी बात उनका भी एक बीटा था जो सालो पहले गम हो गया था इस लिए मुझे लगता है की हो न हो वही मेरी फॅमिली है.

मेरी बात सुन कर शनाया पहले तो बहुत हैरान हुयी लेकिन फिर जोर जोर से हसने लगी और हस्ते हुए मुझसे बोली.

शनाया- राठौर परिवार तुम्हारा परिवार है तुम जानते भी हो की तुम क्या बोल रहे हो राठौर परिवार दुनिया के 5 आमिर परिवारों में से एक है और तुम बोल रहे हो की वो तुम्हारा परिवार है.

शनाया के बात सुन कर मुझे अच्छा नहीं लगा इस लिए मई उससे थोड़े उखड़े हुए अंदाज में बोलै.

मई- मैंने कब कहा की वो मेरा परिवार है बस मुझे उन्हें देख कर जो एहसास हुआ मई वो तुम्हे बता रहा हु और अगर वो दुनिया के 5 आमिर फमिल्यो में से एक है तो क्या वो मेरी फॅमिली नहीं हो सकती.

मेरी बात सुन कर शनाया को ये एहसास हो गया की मुझे उसके बातो का बुरा लगा है तो वो मुझसे बोली.

शनाया- सॉरी प्रतिक अगर तुम्हे मेरी बातो का बुरा लगा हो अब छोडो ये सब बाटे और मुझे बताओ की क्या सच में इस दुनिया में सैतान जैसा कुछ होता है और अगर सच में सैतान है तो फिर उन्हें ख़तम करने की जिम्मेवारी तुम्हे hi क्यों मिली है.

शनाया के बात सुन कर मई कुछ सोचते हुए उससे बोलै.

मई- शनाया क्या तुम मानती हो की इस दुनिया में भगवन का अस्तित्व है.

शनाया- है मई मानती हु की इस दुनिया में भगवन का अस्तित्व है.

मई- तो अगर इस दुनिया में भगवन है तो सैतान भी होंगे hi क्युकी जहा अच्छे होती है वह बुराई भी होती है इस लिए तुम मनो या न मनो लेकिन मई तो मंटा हु की इस दुनिया में सैतान भी होते है और रही बात की मुझे hi क्यों चुना गया है उन सैतानो को ख़तम करने के लिए तो इसका जबाब तुम्हे गुरुदेव hi देंगे.

मेरी बात को सुन कर शनाया बोली.

शनाया- तो मई कब गुरुदेव से मिलूंगा.

मई- आज hi.

शनाया- आज लेकिन आज कैसे.

मई- शनाया वो सब छोडो और तुम बताओ की तुम्हे वो सरप्राइज चाहिए या नहीं.

शनाया- है है चाहिए न दिखाओ तुम मेरे लिए क्या सरप्राइज लाये हो.

शनाया के बात सुन कर मई उसके सामने से स्टोरेज रिंग से एक रिंग निकल लिया इधर शनाया ने देखा की मई अपने अंगूठी से एक अंगूठी निकल लिया हु तो वो हैरान हो गयी और एक तक उस अंगूठी को देखने लगी थोड़ी देर उस अंगूठी को देखने के बाद वो मुझसे बोली.

शनाया- तुमने ये कैसे किया तुम इस अंगूठी के अंदर से दूसरी अंगूठी कैसे निकल लिया.

शनाया के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए उससे बोलै.

मई- शनाया क्या तुमने कभी स्टोरेज अंगूठी के बारे में सुना है.

मेरी बात को सुन कर शनाया न समझने वाली अंदाज में मुझसे बोली.

शनाया- है मैंने स्टोरेज रिंग के बारे में एक कहानी में पढ़ी थी (फिर कुछ सोचने के बाद) कही तुम ये तो नहीं कहना चाहते हो की ये एक स्टोरेज रिंग है.

इतना बोल कर शनाया मुझे देखने लगी लेकिन जब उसने देखा की मई उसके बातो का कोई जबाब नहीं दिया बल्कि वह सन्ति से खड़ा हो कर सिर्फ मुस्कुरा रहा हु तो वो बोली.

शनाया- क्या सच में ये वही है लेकिन ऐसे कैसे हो सकता है वो तो सिर्फ किसे और कहानियो में हुआ करती थी न नहीं नहीं ये स्टोरेज रिंग नहीं हो सकती कह दो की तुम मुझसे मजाक कर रहे हो.

शनाया के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- नहीं शनाया मई कोई मजाक नहीं कर रहा हे सच में एक स्टोरेज रिंग है इसमें हम जो चाहे वो स्टोर कर के रख सकते है.

शनाया उस अंगूठी को लालच भरी नजरो से देख रही थी उसे ऐसे अंगूठी को देखता हुआ देख कर मई उससे बोलै.

मई- अगर तुम्हे ये अंगूठी पसंद है तो मेरे पास ऐसे और भी अंगूठी है मई उन में से एक तुम्हे दे दूंगा अब इस स्टोरेज अंगूठी के बारे में सोचना छोडो और जो तुम्हारे लिए सरप्राइज है उसे देखो.

इतना बोल कर मई उस अंगूठी को शनाया के तरफ बढ़ा दिया तो शनाया ने उस अंगूठी को अपने हाथो में ले कर उसे उत्सुकता से देखते हुए बोली.

शनाया- क्या ये भी एक स्टोरेज रिंग है.

मई- नहीं ये एक स्टोरेज अंगूठी नहीं है लेकिन ये उससे भी कही ज्यादा कमल की अंगूठी है.

मेरी बात को सुन कर शनाया उस अंगूठी को देखते हुए बोली.

शनाया- इस अंगूठी में ऐसा क्या है जो ये एक स्टोरेज अंगूठी से भी कमल की है.

मई- तुम सब समझ जाओगी पहले तुम इस अंगूठी पर अपने खून का एक बून्द डालो.

मेरी बात सुन कर शनाया तुरंत एक पिन को अपने ऊँगली पर चुभाया और एक बून्द खून उस अंगूठी पर दाल दिया जैसे hi शनाया के खून उस अंगूठी पर गिरा तो उस अंगूठी से तुरंत शनाया के खून को अपने अंदर सोख लिया और जैसे hi उसने शनाया के खून को शाखा तो वो रिंग शनाया से पूरी तरह से जुड़ गया अब शनाया उस रिंग के माधयम से कभी भी उस स्पेस स्टोरेज की दुनिया में आ जा सकती थी.

मई- अब तुम इस रिंग को अपने ऊँगली में पहन लो और मेरे हाथ को पकड़ कर अपनी एनर्जी को इस अंगूठी में डालो और अपने अपनी आँखे बंद कर लेना मई जब कहूंगा तब तुम अपनी आँखे खोलना.

मेरी बात को सुन कर शनाया ने वैसा किया जैसा मैंने उसको करने के लिए बोलै था शनाया ने मेरे हाथ को पकड़ कर जैसे hi अपनी एनर्जी को उस रिंग में डाला तो हम दोनों वह से गायब हो कर स्पेस स्टोरेज की दुनिया में आ गए.

अभी स्पेस स्टोरेज की दुनिया में दिन का समय था इस लिया वह चारो तरफ उजाला फैला हुआ था और हम इस स्पेस स्टोरेज की दुनिया में जहा पर गायब हो कर पहुंचे थे वो वही फूलो और औषधियों वाला बगीचा था और हम इस समय उस बगीचे के बीचो बिच बने हुए तालाब के पास खड़े थे.

इधर शनाया ने उस अंगूठी में एनर्जी डालने के बाद अपनी आँखे बंद कर ली थी इस लिए उसे पता नहीं था की हम अभी कहा पर है फिर मई शनाया को अपनी आँखे खोलने के लिए बोलै शनाया ने मेरी बात को सुन कर

जैसे hi अपनी आँखे खोली तो वो हैरान हो गयी और अपनी आँखे बड़ी बड़ी कर के कभी मुझे तो कभी उस जगह को देखने लगी वो उस जगह को देख कर पूरी तरह से हैरान थी उसे समझ में hi नहीं आ रहा था की वो अभी अपने रूम थी तो अचानक से यहाँ कैसे आ गयी जब मैंने देखा की वो किस तरफ से हैरान हो कर कभी मुझे तो कभी इस जगह को देख रही है तो मेरे होठो पर एक मुस्कान आ गयी इधर जब शनाया को समझ में नहीं आया की वो यहाँ कैसे आयी तो वो मुझसे बोली.

शनाया- प्रतिक ये कोण सी जगह है और हम यहाँ कैसे आ गए अभी तो हम अपने रूम में थे न तो अचानक हम यहाँ कैसे आ गए और यहाँ अभी दिन क्यों है जबकि हम जब अपने रूम में गए थे तब रत के 10 बज रहे थे.

शनाया के इतने सरे सवाल सुन कर मई खुद को मुस्कुराने नहीं रोक सका और मुस्कुराते हुए उससे बोलै.

मई- बस बस यार तुम और कितना सवाल पूछोगी रुको मई तुम्हे एक एक कर के सब समझाता हु लेकिन उससे पहले तुम मुझे ये बताओ की तुम्हे ये जगह कैसी लगी.

मेरी बात को सुन कर शनाया उस बगीचे को ध्यान से देखने लगी क्युकी पहले वो हैरान थी इस लिए वो उस बगीचे को अच्छे से नहीं देख पायी थी जैसे hi वो ध्यान से उस बगीचे को देखने लगी तो वो उस बगीचे के खूबसूरती में खो गयी और न्यास hi उसके मुँह से निकल गया.

शनाया- वाओ ये कितनी खूबसूरत जगह है ऐसा लग रहा है की मई स्वर्ग में आ गयी हु ये किसी जानत से काम नहीं है.

मई शनाया के मुँह से ऐसी बाटे सुन कर मुस्कुराने लगा और वैसे hi मुस्कुराते हुए उससे बोलै.

मई- है है है जब मई भी पहली बार इस जगह को देखा था तो मुझे भी ऐसा hi लगा था ये सच में बहुत खूबसूरत है लेकिन इसकी खूबसूरती और भी बढ़ गयी क्युकी इस बगीचे में आज एक नयी फूल आ गयी है.

मेरी बात को सुन कर शनाया समझने की कोशिश करने लगी की मेरे बोलने का मतलब क्या था लेकिन जब उसे समझ में आया की मई उसके बारे में hi बाटे कर रहा हु तो उसकी चेहरा शर्म से लाल हो गया फिर वो बात को बदलते हुए मुझसे बोली.

शनाया- अब तुम ये सब बाटे छोडो और मुझे ये बताओ की ये कोण सी जगह है और हम अचानक से यहाँ कैसे आ गए मुझे अंदाजा तो है की हम यहाँ उस अंगूठी के वजह से पहुंचे लेकिन समझ में नहीं आ रहा है की कैसे.

शनाया के बात सुन कर मई उसे बताये हुए बोलै.

मई- शनाया सबसे पहली बात की तुम अभी जहा हो उस जगह को स्पेस स्टोरेज की दुनिया बोलै जाता है और मैंने तुम्हे जो अंगूठी दी है वो अंगूठी इस जगह के आने जाने की चाभी है तुम उस अंगूठी के माध्यम से यहाँ कभी भी आ जा सकती हो बस उसके लिए तुम्हे उस अंगूठी में अपने एनर्जी को डालना होगा.

मेरी बात को सुन कर शनाया ज्यादा हैरान नहीं हुयी क्युकी उसे पहले से अंदाजा था की वो इस जगह पर उस अंगूठी के माध्यम से hi आयी है फिर वो कुछ सोचते हुए बोली.

शनाया- लेकिन ये स्टोरेज की दुनिया है किसकी और ये अंगूठी तुम मुझे क्यों दे रहे हो इसे तुम अपने पास भी तो रख सकते हो न क्युकी इस जगह का मुझसे ज्यादा तुम्हे जरुरत है.

शनाया के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- ये जगह कल तक किसी और की थी लेकिन ये अब मेरी है और रही बात इस अंगूठी को तुम्हे देने की तो मई चाहता हु की अब से तुम यही पर आ कर अपना ट्रेनिंग किया करो क्युकी इस जगह में बहुत साडी स्प्रिचैल एनर्जी है और यहाँ स्प्रिचैल एनर्जी के साथ साथ मातृ और पितृ एनर्जी भी है इस लिए जब तुम यहाँ ध्यान लगा कर यहाँ के एनर्जी को अपने अंदर ऑब्सेर्वे करोगी तो तुम्हारी लेवल के साथ साथ तुम्हारी शरीर भी शक्तिशाली हो जायेगा और यहाँ पर ध्यान लगाने का एक और फायदा है की तुम यहाँ ध्यान करने से बहुत जल्दी ताकतवर बनोगी क्युकी बहार का 12 घंटा यहाँ 100 दिन के बराबर है तुम बाहरी दुनिया के अपना सारा काम दिन में ख़तम कर के नाईट में यहाँ आ कर ध्यान कर सकती हो जिससे तुम्हारी ट्रेनिंग भी हो जाएगी और तुम यहाँ पर आराम भी कर लोगो और रही बात की ये मैंने तुम्हे क्यों दिया तो ये इस लिए है की मई इसका मालिक हु और मई जितना चहु उतना यहाँ आने जाने की चाभी बना सकता हु और मैंने खुद के लिए भी एक चाभी बना ली है.

मेरी बात सुन कर शनाया बहुत हैरान हो गयी थी उसे मेरी बातो पर बिस्वास hi नहीं हो रहा था कुछ देर तक वो वैसी hi हैरानी के साथ मुझे देखते रही फिर वो मुझसे बोली.

शनाया- क्या तुम अभी अभी जो बोले वो सच है क्या दुनिया में ऐसी भी कोई जगह है जिसका समय हमारे दुनिया से इतना तेज़ हो.

मई- है ऐसी बहुत साडी जगह है लेकिन इस जगह के समय शक्ति इतना तेज़ प्राकृतिक के चलते नहीं है बल्कि इस जगह के समय चक्र को इतना तेज़ एक शमय शक्ति के धारक ने किया था और वही इस जगह को मुझे दिए है.

शनाया- वो ऐसा है थैंक प्रतिक इस अनमोल सरप्राइज के लिए मई बहुत खुस हु की अब मई अपनी लेवल को जल्दी जल्दी बढ़ा कर और ताकतवर हो जाउंगी और सैतानो के साथ होने वाले युद्ध में मई तुम्हारा साथ दूंगी.

मई- मुझे भी तुमसे यही उम्मीद है तुम यही पर रह कर ट्रेनिंग करो और जब तुमको यहाँ से जाने का मन हो तो तुम अपने अंगूठी में अपने एनर्जी को दाल देना.

इतना बोल कर मई वह से गायब हो गया और सीधा स्पेस स्टोरेज की दुनिया के हवेली में पहुंच गया वह जाने के बाद मई अपने खजाने वाले रूम में गया और वह से एक स्टोरेज रिंग लिया और उसमे 100 हाई लेवल के स्प्रिचैल स्टोन और नेचुरल मिल्क के 50 बून्द उसमे रखने के बाद मई फिर से गायब हो कर शनाया के पास पहुंच गया फिर मई उसे वो स्टोरेज रिंग देते हुए बोलै.

मई- शनाया ये एक स्टोरेज रिंग है तुम इस्पे अपने खून के एक बून्द दाल कर अपना बना लो और है इसमें 100 हाई ग्रेड के स्प्रिचैल स्टोन और 50 बून्द नेचुरल मिल्क मैंने रखे है तुम स्प्रिचैल स्टोन के एनर्जी को ऑब्सेर्वे कर के अपना लेवल बढ़ाना और जब स्प्रिचैल स्टोन ख़तम हो जायेंगे तो तुम नेचुरल मिल्क का भी उसे कर सकती हो.

इतना बोल कर मई अपने पास से दो तकनीक निकला एक तकनीक लेवल 3 के मध्यम लेवल के तीरंदाजी तकनीक था जिसका नाम असंख्य तीर तकनीक था और दूसरा लेवल 3 के एडवांस लेवल के फाइटिंग तकनीक निकला जिसका नाम ड्रैगन पंच तकनीक था फिर मई उन तकनीक को शनाया को देते हुए बोलै.

मई- शनाया तुम्हारे पास पुरे 100 दिन है तुम्हे इन 100 दिनों में अपने लेवल को ग्रांडमास्टर लेवल के एडवांस लेवल पर लेकर जाना है और साथ में तुम्हे इन तकनीकों पर भी महारथ हासिल करना है.

मेरी बात को सुन कर शनाया दोनों तकनीक को अपने हाथो में ले कर देखने लगी जैसे जैसे वो उस तकनीक के बारे में समझने लगी वैसे वैसे उसके आँखों में एक चमक आ गया फिर वो मुझसे बोली.

शनाया- मई कोशिश करुँगी की मई 100 दिनों में अपने लेवल को बढ़ा कर इन दोनों तकनीकों पर महारथ हासिल कर लू लेकिन एक प्रॉब्लम है.

मई- क्या प्रॉब्लम है.

शनाया- असंख्य तीर तकनीक एक तीरंदाजी का तकनीक है और इसके चलने के लिए तीर कर धनुष की जरुरत होगी लेकिन मेरे पास तीर और धनुष तो है नहीं फिर मई कैसे इस तकनीक को सीखूंगी.

शनाया के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए उससे बोलै.

मई- बस इतनी सी बात रुको मेरे पास एक धनुष है तुम उस धनुष के साथ ट्रेनिंग करना.

इतना बोल कर अपने स्टोरेज रिंग से एक धनुष निकल लिया ये धनुष देखने में बहुत खूबसूरत थी और साथ में बहुत शक्तिशाली ये धनुष उन्ही ास्त्रो में से एक थी जिसे मैंने और गुरुदेव ने मिल कर बनाया था मई उस धनुष को शनाया को देते हुए बोलै.

मई- शनाया ये धनुष लो तुम इसके साथ प्रैक्टिस करना लेकिन तुम्हे इसके साथ प्रैक्टिस करने से पहले इसे अपना बनाना होगा क्युकी ये धनुष कोई आम धनुष नहीं इस धनुष में फाइव एलिमेंट्स की शक्ति है और इस धनुष में तीर को जरुरत नहीं है जब भी तुम इसकी प्रत्यंचा खींचोगी इस्पे खुद बा खुद तीर आ जाएगी अब तुम इसे लो और अपना ट्रेनिंग सुरु करो मई अब चलता हु.

मेरी बात को सुन कर शनाया बहुत खुस हो गयी और मुझसे बोली.

शनाया- तुमने मुझे पहले hi इतना हैरान कर दिया है की अब मई तुम्हारे पास किसी भी चीज को देखती हु तो मुझे हैरानी नहीं होती वैसे थैंक्स मुझे आज ये तीसरा गिफ्ट देने के लिए तुम्हारे सरे गिफ्ट बहुत बेमिसाल है.

शनाया के बात सुन कर मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी और मई मुस्कुराते हुए उससे बोलै.

मई- अगर तुम्हे मेरा गिफ्ट इतना hi पसंद आ गया तो तुम भी मुझे मेरा रेतुर्न गिफ्ट दे दो.

मेरी बात को सुन कर शनाया मुस्कुराते हुए बोली.

शनाया- मई बहुत जल्द hi तुम्हारे जिंदगी के सबसे खूबसूरत गिफ्ट दूंगी तब तक तुम इंतज़ार करो.

शनाया के बात सुन कर मुझे कुछ समझ में नहीं आया लेकिन फिर उस बात को वही छोड़ कर वह से जाने लगा तभी शनाया मुझसे बोली.

शनाया- प्रतिक क्या तुम यहाँ नहीं रुक सकते तुम्हे आराम hi करना है न तो तुम यही पर आराम कर लो.

मई- शनाया मई कही नहीं जा रहा बल्कि मई दूसरे साइड जा कर अपना ट्रेनिंग करूँगा ताकि तुमको डिस्टर्ब न हो तुम अब अपना ट्रेनिंग सुरु करो मई चलता हु.

इतना बोल कर मई वह से दूसरे साइड चला गया और वह जा कर ध्यान करने लायक जगह देखा और वही पर बैठ कर अपने स्टोरेज रिंग से सुण्या विनाशक तकनीक निकल कर उसे पढ़ने लगा.

इधर राठौर आइसलैंड पर शैलेन्द्र सिंह राठौर अपने मेंशन से निकल कर हेलिपैड के तरफ जा रहे थे सायद वो किसी काम से इस आइसलैंड से बहार जा रहे थे तभी उनका मोबाइल रिंग करने लगा उसके मोबाइल पर किसी का कॉल आ रहा था इस लिए सिकंदरा अपने पॉकेट से मोबाइल निकल कर देखने लगा की किसका कॉल आ रहा है जब उसने मोबाइल पर वही डॉ. का कॉल आते हुए देखा जिसे वो मेरा डीएनए टेस्ट करने के लिए बोलै था वो सिकंदरा जल्दी से कॉल उठाते हुए बोलै.

सिकंदरा- है डॉक्टर साहब बोलिये क्या डीएनए का रिपोर्ट आ गया है.

डॉ.- है राठौर साहब अपने सही बोलै अपने जो डीएनए का सैंपल दिया था उसका रिजल्ट आ गया है.

डॉ. के बात सुन कर सिकंदरा बहुत खुस हो जाते है और हड़बड़ाते हुए डॉ. से बोलते है.

सिकंदरा- क्या आया है डीएनए रिजल्ट में क्या डीएनए मैच कर गया.

सिकंदरा के बात सुन कर और उनके उतावले पैन को देख कर डॉ. समझ गया की सिकंदरा ने जिस किसी का भी डीएनए टेस्ट करने के लिए दिया था वो जरूर राठौर परिवार का कोई खास है इस लिए वो देर न करते हुए डीएनए रिपोर्ट को सिकंदरा के पास मेल कर दिया और उनसे बोलै.

डॉ.- मई आपको रिपोर्ट मेल कर दिया है आप खुद hi देख लो वैसे राठौर साहब ये डीएनए रिपोर्ट है किसकी.

इधर सिकंदरा ने जैसे hi सुना की डॉ. ने रिपोर्ट उसको मेल कर दिया है तो वो डॉ. के आगे की बात सुने बिना hi कॉल कट कर दिया और जल्दी से अपने मोबाइल में मेल ओपन कर के डीएनए रिपोर्ट देखने लगे जैसे hi उनकी नजर उस डीएनए रिपोर्ट पर गया तो उसमे जो लिखा था उसे पढ़ कर उनके हाथो से मोबाइल छूट कर गिर गया और उनके आँखों से आंसू जहर जहर कर के गिरने लगे वो वही घुटनो के बल बैठ गए और फिर वो अपने कपट हाथो से मोबाइल उठाया और वह से उठ कर भागते हुए राठौर मेंशन के तरफ जाने लगे.

इधर जब सरे गॉर्ड ने सिकंदरा के ऐसी हालत देखि तो सब हैरान हो गए और आपस में hi बाटे करने लगे.

पहला गॉर्ड- क्या हो गया सर को जो उनकी हालत ऐसी हो गयी.

दूसरा गॉर्ड- उनको तो हमने कभी ऐसी हालत में नहीं देखा जरूर कुछ गंभीर बात है.

पहला गॉर्ड- है यार जब से उनके पास किसी का कॉल आया है तबसे उनकी हालत ऐसी हो गयी है जरूर उस कॉल में उनको ऐसी जानकारी मिली है जिससे उनकी हालत ऐसी हो गयी है चलो हमें भी उनके पीछे चलना चाहिए.

पहले गॉर्ड के बात सुन कर सरे गॉर्ड सिकंदरा के पीछे भागने लगे इधर शैलेन्द्र पागलो को तरह भागते हुए राठौर मेंशन के अंदर गए और जोर जोर से चीला कर सबको बुलाने लगे डैड माँ भैया भाभी पायल सूर्य पूजा सब कहा है जल्दी से आप सब बहार आइये.

इधर घर के अंदर जब सबने सिकंदरा के इस तरह से चीला कर सबको बुलाते सुना तो सब समझ गए की जरूर कुछ बात हुयी है तभी सिकंदरा इस तरह सबको बुला रहा है इस लिए सब जल्दी से अपने अपने रूम से बहार निकल कर सिकंदरा के पास आ गए लेकिन जब वो लोग सिकंदरा के पास पहुंचे तो उनकी हालत को देख कर सबके चेहरे पर टेंशन आ गए क्युकी सिकंदरा के दोनों आँख आंसुओं से भरा हुआ था और रोने से उनकी आँखे लाल हो गयी थी जब महेंद्र सिंह राठौर और कौशल्या देवी ने अपने बेटे को ऐसी हालत देखि तो दोनों जल्दी से सिकंदरा के पास पहुंच गए और कौशल्या देवी शैलेन्द्र के आंसू पोछते हुए उनसे बोली.

कौशल्या- क्या हुआ बीटा तुम्हे कुछ हुआ है क्या जो तुम्हारे आँखों में ऐसे आंसू आ गए मेरा दिल घबरा रहा है मुझे जल्दी से बताओ की आखिर बात क्या है.

महेंद्र- है बीटा मुझे भी जानना है की आखिर बात क्या क्युकी मई तुम्हे बचपन से देखा है तुम किसी भी परिस्थिति में कभी नहीं डगमगाते हो लेकिन आज पहली बार हुआ है की तुम्हारे आँखों में आज आंसू है इससे साफ पता चलता है कुछ ऐसा हुआ है जो तुम्हारे दिल तक को कमजोर कर दिया है तुम बताओ सिकंदरा की तुम्हारे आँखों में ये आंसू कैसे आ गए आखिर ऐसा हुआ क्या है जो तुम्हे इस स्थिति में ले आया.

अपनी माँ और डैड के बात सुन कर सिकंदरा अपने आँखों से आंसू पोछते हुए बोले.

सिकंदरा- माँ डैड ये आंसू दुःख के नहीं बल्कि ये आंसू खुसी के है आज मई इतना खुस हु की मेरे आँखों से अपने आप hi आंसू बहने लगे.

सिकंदरा के बात सुन कर सब हैरान हो गए की आखिर ऐसी कोण सी खुसी की बात है जिससे सिकंदरा के आँखों में आंसू आ गया.

महेंद्र- तुम्हे ऐसी कोण सी खुसी मिल गयी जो तुम्हारे आँखों में आंसू आ गया.

अपने डैड के बात सुन कर सिकंदरा अपना मोबाइल उनको देते हुए बोले.

सिकंदरा- ये ऐसी खुसी की बात है की अगर आपको पता चलेगा तो आपके आँखों में भी आंसू आ जायेगा आप लीजिये खुद hi देख लीजिये.

इतना बोल कर सिकंदरा अपना मोबाइल अपने डैड को दे देते है जब महेंद्र सिंह राठौर मोबाइल ले कर जैसे hi मोबाइल में डीएनए रिपोर्ट देखते है तो वो लड़खड़ाते हुए दो कदम पीछे हो जाते है और उनके आँखों में भी आंसू आ जाती है और बस से इतना निकलता है.

महेंद्र- उसे जल्दी से लेकर घर आओ मई जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी उससे मिलना चाहता हु.

जब कौशल्या देवी ने अपने पति की हालत भी अपने बेटे जैसे देखि तो वो उनके हाथ से मोबाइल ले कर खुद देखने लगी और जैसे hi उसकी नजर डीएनए रिपोर्ट पर पड़ी उनकी साबरा का बांध टूट गया और वो जोर जोर रोने लगी और वो रट हुए चीला कर बोली.

कौशल्या- जल्दी से मेरे जिगर के टुकड़े को यहाँ ले कर आओ मई उसे अपने गले से लगाना चाहती हु मई अपने रूद्र को प्यार और दुलार करना चाहती हु मेरे जिगर के टुकड़ा रूद्र का पता मुझे इतने सालो बाद लगा है अब मई उससे एक पल की भी देरी बर्दास्त नहीं कर सकती.

जब सबने कौशल्या देवी के बात सुनी तो सब चौक गए और उन्हें समझ में भी आ गया की उन सब को ऐसी हालत क्यों थी जब सबने सुना की रूद्र का पता चल गया है तो सबके आँखों में आंसू आ गए फिर संजय सिंह राठौर आगे बढ़ते हुए सिकंदरा से पूछे.

महेंद्र- आज मेरी वर्षो की तमना पूरी हो गयी आज मेरा जिगर कर टुकड़ा रूद्र मिल गया बस मई एक बार उससे मिल लू इसके बाद अगर मेरी मौत भी हो जाये तो मुझे भगवन से कोई शिकायत नहीं होगी.

संजय- क्या सचमे हमारा रूद्र मिल गया कहा है वो और कैसा है वो ठीक तो है न चलो हम अभी चलते है और उसे लेकर घर आते है.

शालिनी- क्या सच में मेरा बीटा मिल गया आप सब जाइये और उसे ले कर आइये मेरी कण कब से बड़ी माँ सुनाने के लिए तरस गया है.

पूजा- और मेरी कण छोटी माँ सुनाने के लिए तरस गया है वो तो हमारे लिए पायल और सूर्य से भी बढ़ कर था प्लीज आप लोग उसे जल्दी ले आइये.

सूर्य- है चाचू आप उसे ले कर आइये मई भी अपने छोटे भाई से मिलने के लिए बेचैन हु मई ये देखना चाहता हु की मेरा छोटा भाई दीखता कैसा है क्या हम सब उसे अभी भी यद् है या वो हम सब को भूल गया.

उन सब के बात सुन कर सिकंदरा सिंह खुद को संत करते है और उन सब से बोलते है.

सिकंदरा- मेरा रूद्र लाखो में एक है और इतना शक्तिशाली है की हमारे जैसे 10 सुडो ग्रांडमास्टर लेवल के योद्धा भी उसे हरा नहीं सकते और साथ में वो एक डॉक्टर भी है वो कोई ऐसा वैसा डॉक्टर नहीं है वो तो मरते हुए लोगो में भी जान फुक दे और सबसे बड़ी बात आप सब उससे मिल भी चुके है.

सिकंदरा के बात सुन कर महेंद्र सिंह राठौर और कौशल्या देवी को छोड़ कर सब हैरान हो गए तभी संजय सिंह राठौर सिकंदरा से बोले.

संजय- क्या हम सब उससे पहले भी मिले है लेकिन हम उससे पहले कब मिले (फिर कुछ सोचते हुए) वो एक डॉक्टर है और मरे हुए ब्यक्ति को भी जिन्दा कर सकता है तो कही वो वही तो नहीं जिसके बारे में मई सोच रहा हु.

संजय के बात सुन कर सिकंदरा मुस्कुराते हुए बोले.

सिकंदरा- जी भैया आप सही सोच रहे है हमारा रूद्र कोई और नहीं बल्कि प्रतिक hi है प्रतिक Hi हमारा जिगर का टुकड़ा रूद्र है.

शालिनी- तभी जब वो हमारे घर आया था तो मुझे ऐसा लग रहा था की हमारा उससे कोई खास रिस्ता है.

महेंद्र- अब साडी बाटे छोडो और प्रतिक को यहाँ लेन की तयारी करो हमारे खंडन के वारिस के स्वागत में इस पुरे आइसलैंड को फूलो से सजा दो उसके स्वागत में किसी भी तरह की कोई कमी नहीं होनी चाहिए.

कौशल्या- तुम दोनों अभी के अभी मुंबई निकल जाओ और उसे लेकर जल्दी से यहाँ आओ तुम दोनों भाइयो की जिमेवारी है की हमारे रूद्र को खाने के लिए छपन भोग की तयारी करो मई चाहती हु की हमारे जिगर के टुकड़े का इस आइसलैंड पर किसी महाराजा की तरह स्वागत हो.

दोनों बहु- जी माँ आप चिंता मत कीजिये प्रतिक हमारा भी जिगर का टुकड़ा है हम उसके स्वागत में कोई कमी नहीं होने देंगे.

इधर सिकंदरा जी कबसे इन सब के बात सुन रहा था और वो कुछ सोच रहा था उसने सबको संत करते हुए बोलै.

सिकंदरा- आप सब संत हो जाइये मई आप सब से एक बात बोलना चाहता हु बात दरअसल ऐसी है की कल मुंबई में एक ऑक्शन होने वाला है और वो ऑक्शन प्रतिक के लिए बहुत जरुरत है क्युकी उस ऑक्शन में कुछ ऐसे बेशकीमती वस्तुए है जो प्रतिक के hi है और अगर प्रतिक hi उस ऑक्शन में नहीं रहेगा तो अच्छा नहीं होगा इस लिए हम उसे यहाँ आज न ला कर कल लेट है.

सूर्य- है चाचू सही बोल रहे है ये बात मुझे भी पता है और मई क्या बोलता हु की हम उसे अभी कुछ भी नहीं बताएँगे बल्कि हम उसे किसी और बहाने से यहाँ के कर आएंगे और उसे यहाँ लेन के बाद सरप्राइज देंगे तब तक हम सबको भी उसके स्वागत की तयारी करने का समय मिल जायेगा.

महेंद्र- ठीक है तो हम उसे कल hi किसी और बहाने से यहाँ लाएंगे और उसे यहाँ लेन के बाद साडी सचाई बताएँगे.

अभी सब बाटे कर hi रहे थे की तभी कौशल्या देवी को कुछ यद् आता है और वो सबसे बोलती है.

कौशल्या- हम सब प्रतिक के मिलने खुसी में ये तो भूल hi गए की प्रतिक की शादी हो गयी जब उस बेचारी को ये पता चलेगा तब उसपे क्या बीतेगी जो इतने सालो से रूद्र का इंतज़ार कर रही है.

कौशल्या देवी के बात सुन कर सरे लोग खामोश हो जाते है तभी महेंद्र सिंह राठौर बोलते है

महेंद्र- हम इसके बारे में रूद्र को यहाँ आने के बाद बात करेंगे अभी ये बाटे सब से छुपा कर रखना होगा की हमें रूद्र मिल गया है क्युकी अगर ये खबर उस लड़की को मिली तो वो पागलो की तरह भागते हुए यहाँ आ जाएगी और मई नहीं चाहता की रूद्र को ये सचाई पता चलने से पहले उस लड़की को उसके बारे में पता चले.

इधर अनन्य और उसका भाई मुकेश आज मुंबई पहुंच चुके थे वो लोग अपने आइसलैंड से अपने पर्सनल हेलीकाप्टर से मुंबई आये थे जब दोनों अपने आइसलैंड से निकले थे तब उनके पिता सतीश चंद्र सूर्यवंशी ने मुखर्जी परिवार के मुखिया सुखदेव मुखर्जी को उन दोनों के मुंबई जाने की बाटे बता दी थी इस लिए सुखदेव मुखर्जी अपने बड़े पोते संजीत मुखर्जी को अपने पास बुलाता है और उससे बोलता है.

सुखदेव- संजीत मैंने तुम्हे इस लिए यहाँ बुलाया है की सूर्यवंशी परिवार की लड़की और उसका भाई आज मुंबई आने वाले है तो मई चाहता हु की तुम इन दोनों को रइवे करने के लिए खुद जाओ और कोशिश करना की उस लड़की का दिल जित सको ताकि हम तुम्हारी सदी उसके साथ करा सके.

संजीत- दादा जी आप चिंता मत कीजिये मई उस लड़की को अपने प्यार के जल में ऐसा फसाऊँगा की वो खुद मुझसे सदी करने के लिए बोलेगी.

सुखदेव- यद् रखना संजीत ज्यादा ओवर कॉन्फिडेंस hi आदमी को ले डूबता है इस लिए तुम जो भी करना सोच समझ कर करना और है उस लड़की को किसी भी कीमत पर हमारे घर की बहु बनानी hi पड़ेगी चाहे वो अपने इच्छा से बने या जोर जबरदस्ती से.

संजीत- आप चिंता मत कीजिये दादा जी अगर वो प्यार से मन जाएगी तब तो ठीक है नहीं तो उसे मानाने के और भी बहुत तरीके है मेरे पास.

सुखदेव- ठीक है तुम अब जा सकते हो लेकिन यद् रखना कोई भी गलती नहीं होनी चाहिए.

अपने दादा के बात सुन कर संजीत अपना सर है में हिलता है और वह अनन्य और मुकेश को रइवे करने के लिए निकल जाता है.

इधर मुंबई के सूर्यवंशी परिवार के एक निजी जमीं में जहा बहुत सरे हेलिपैड बने हुए थे वह पर एक हेलीकाप्टर लैंड होता है और उसमे से अनन्य और मुकेश बहार निकलते है जब वो दोनों बहार निकलते है तो देखते है की उनके सामने एक 24 साल का लड़का कुछ बोडीगॉर्डों के साथ खड़ा है तो वो दोनों उसके तरफ बढ़ जाते है इधर वो लड़का जो कोई और नहीं बल्कि संजीत मुखर्जी था वो जब मुकेश को देखता है जो की अनन्य के आगे आगे चल रहा था तो उसके चेरे पर मुस्कान आ जाती है लेकिन जब थोड़ी देर बाद उसकी नजर अनन्य के ऊपर जाता है वो उसकी खूबसूरती देख कर बस उसे hi निहारता रह जाता है और न्यास hi उसके मुँह से निकल जाता है.

संजीत- वाओ ये कितनी खूबसूरत है अगर इसे पाने के लिए मुझे किसी भी हद तक जाना पड़ेगा तो मई किसी भी हद तक चला जाऊंगा.

हलाकि की ये बात उसके मुँह से न्यास hi निकल गया था लेकिन किसी ने उसकी बातो को सुना नहीं था इधर अनन्य की नजर जब उस लड़के पर जाती और वो उसे खुद को हवस भरी नजरो से देखते हुए पति है तो उसको संजीत के ऊपर बहुत गुसा आ जाता है और वो समझ जाती है की ये एक नंबर का गठिया इंसान है फिर वो उसको इग्नोर कर के मुकेश के पीछे पीछे जाना जारी रखती है इधर थोड़ी देर बाद जब संजीत अपने होश में वापस लौटता है तो वो आगे बढ़ कर मुकेश से हाथ मिलाये हुए बोलता है.

संजीत- हैल्लो मर. मुकेश आपका और आपकी सिस्टर का मुंबई में स्वागत है मेरा नाम संजीत मुखर्जी है सायद आपके डैड आपको मेरे बारे में बताये hi होंगे.

संजीत मुकेश को देख कर मुस्कुराते हुए उससे अपना हाथ मिलता है और संजीत से बोलता है.

मुकेश- वो तो आप है संजीत मुखर्जी मुझे आपसे मिल कर खुसी हुयी वैसे आप यहाँ क्या कर रहे है.



संजीत- जी वो मई आप सब को यहाँ रइवे करने के लिए आया हु मई चाहता हु की आप दोनों का यहाँ जितने समय तक रुकना है उतना समय आप मेरे मेहमान बन कर मेरे विला में रुके.
 
सॉरी दोस्तों इतना दिन अपडेट न देने के लिए वो क्या है न की मई कुछ दिनों पर्सनल प्रॉब्लम के कारन डिप्रेशन में था मई अपना जॉब भी छोड़ दिया था और दिन रत सरब में बिजी रहता था इस लिए मई न तो आपके कमैंट्स का कुछ जबाब नहीं दे पाया और न hi अपडेट दे पाया लेकिन अब मई उस ट्रामा से बहार निकल गया हु मई 2 दिन बाद एक अपडेट दूंगा तब तक आप सब पीछे वाले अपडेट को एक बार पढ़ लीजिये ताकि आप अगर इस स्टोरी को भूल गए हो तो आप सब को दोबारा यद् आ जाये.

वन्स अगेन सॉरी
 
अपडेट 48

मुखर्जी परिवार का सडयंत्र

जब अनन्य और मुकेश मुंबई में स्थित अपने हेलिपैड पर लैंड किया तो उन्होंने देखा की उनको वह रइवे करने के लिए संजीत मुखर्जी आया हुआ है जब मुकेश ने वह पर संजीत को देखा तो उसके चेहरे पर एक बनावटी मुस्कान आ गयी लेकिन अनन्य के चेहरे पर उसको देख कर कोई भाव hi नहीं आया वो बस अपने चेहरे पर उदासिता के भाव से उसे देख रही थी इधर जब संजीत ने मुकेश को देखा तो उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी लेकिन जैसे hi उसकी नजर अनन्य पर पड़ी तो वो अनन्य के सुंदरता में खो गया और उसके चेहरा पूरी तरह से अनन्य के प्रति हवस से भर गयी वो अनन्य को हवस भरी नजरो से देखने लगा.

जब अनन्य ने देखा की संजीत उसको हवस भरी नजरो से देख रहा है तो उसे बहुत गुसा आया और घुसे से उसकी मुठी बंद हो गयी लेकिन फिर वो खुद को सँभालते हुए उसपर से अपना ध्यान हटा कर आगे बढ़ गयी इधर संजीत मुकेश के पास गया और उससे अपना हाथ मिलाये हुए बोलै.

संजीत- हैल्लो मर. मुकेश आपका मुंबई से स्वागत है ऊप्स मैंने तो अपना परिचय आपको दिया hi नहीं मई हु संजीत मुखर्जी मुखर्जी परिवार का वारिस.

संजीत के बात सुन कर मुकेश उससे अपना हाथ मिलाये हुए बोलता है.

मकेश- अरे संजीत जी आपको अपना परिचय देने को जरुरत नहीं है क्युकी आपको यहाँ कोण नहीं जनता है.

मुकेश के बात सुन कर संजीत के चेहरे पर घमंड आ गया फिर वो मुकेश को इग्नोर करते हुए अनन्य के पास पंहुचा और अन्य से हाथ मिलाने के लिए अपना हाथ आगे किया जिसे देख कर अनन्य के भावे सिकुड़ गयी इस लिए वो उसे इग्नोर कर के आगे बढ़ गया जब संजीत ने देखा की अनन्य उसको इग्नोर कर के आगे बढ़ गयी है तो उसको बहुत बेइज्जती महसूस हुआ और उसको अनन्य पर बहुत गुसा आया लेकिन वो किसी तरह से अपना गुसा कण्ट्रोल कर के अनन्य को देखने लगा और मन hi मन सोचा.

संजीत- (मन में ) तुमने मुझे इग्नोर कर के अच्छा नहीं किया अब तो मई किसी भी तरह से तुम्हे अपने बिस्तर पर ला कर hi रहूँगा फिर मई देखूंगा की तुम्हे अपने सुंदरता पर कितना घमंड है.

इधर जब मुकेश ने देखा की अनन्य संजीत को इग्नोर कर के आगे बढ़ गयी है और इसके कारन संजीत को गुसा आ रहा है तो वो बात को बदलते हुए संजीत से बोलै.

मुकेश- वैसे मर. संजीत आप यहाँ क्या कर रहे है.

मुकेश के बात सुन कर संजीत अनन्य पर से अपना ध्यान हटाता है और मुस्कुराते हुए मुकेश से बोलता है.

संजीत- मुझे यहाँ पर मेरे डैड जी ने भेजा है और मई यहाँ आप दोनों को रइवे करने के लिए आया हु दरअसल मेरे दादा जी चाहते है की आप दोनों का यहाँ जितने समय तक रुकना है उतना समय आप हमारे मेहमान बन कर हमारे विला में रुके.

संजीत के बात सुन कर मुकेश उसको कुछ जबाब देता उससे पहले hi अनन्य बोल पड़ी.

अनन्य- आपके इस उपकार के लिए सुक्रिया लेकिन हमारा यहाँ पर अपना होटल है और हम उसी होटल में रुकेंगे.

अनन्य के मुँह से ये शब्द सुन कर संजीत हैरान हो गया और उसको बहुत तेज़ गुसा आने लगा क्युकी आज तक कोई भी ऐसा ब्यक्ति नहीं था जो उसको न कह सके लेकिन अनन्य बार बार उसको बेइज्जती कर रही थी.

संजीत- (अपने आप से) कण्ट्रोल संजीत कण्ट्रोल अगर तुम गुसा करोगे तो बात बनाने से पहले hi बिगड़ जाएगी.

फिर वो अपने घुसे को कण्ट्रोल किया और खुद को नार्मल करते हुए अनन्य से बोलै.

संजीत- अगर आप हमारे साथ हमारे में बिल्ला में नहीं चलना चाहती है तो कोई बात नहीं लेकिन आप आज का डिनर तो हमारे साथ कर hi सकते है.

संजीत के बात सुन कर इस बार मुकेश उससे बोलै.

मुकेश- सॉरी मर. संजीत हम आज बहुत थके हुए है इस लिए आज हम आपके साथ डिनर नहीं करेंगे लेकिन मई आपसे वडा करता हु की कल के डिनर हम दोनों आपके साथ hi करेंगे.

मुकेश बात को सुन कर संजीत को बुरा तो लगा लेकिन फिर वो कल के डिनर के बारे में सुन कर खुस हो गया और अपने मन में बोलै.

संजीत- (अपने मन में) चलो कोई बात नहीं मई तुम्हे पाने के लिए और तुम्हारा घमंड तोड़ने के लिए एक दिन और रुक जाऊंगा लेकिन मई तुमसे वडा करता हुआ अनन्य की कल के दिन को तुम कभी भी नहीं भूल पाओगी.

संजीत- ठीक है फिर आप दोनों अपने होटल के लिए निकालिये मई भी अपने घर जा रहा हु मुझे कुछ इम्पोर्टेन्ट काम है.

मुकेश- ठीक है.

मुकेश के बात सुन कर संजीत वह से निकल जाता है संजीत को वह से जाने के बाद अनन्य रहत के साँस लेती है तभी उसे मुकेश के घुसे से भरे हुए आवाज उसे सुनाई देता है.

मुकेश- आखिर तुम्हे हो क्या गया है अनन्य तुम संजीत से इस तरह से बात क्यों कर रही थी तुम जानती हो न की डैड तुमसे क्या बोले थे.

अनन्य- है मई जानती हु की डैड मुझसे क्या बोले थे लेकिन आप संजीत के बारे में नहीं जानते वो कितना घटिया आदमी है और आप नहीं जानते है की वो अभी मुझे किस घटिया नजर से देख रहा था मेरा तो मन कर रहा था की मई उसे जान से मर दू लेकिन मई डैड के चलते hi उसे छोड़ दिया और है कल डिनर के लिए आपको जाना होगा तो आप अकेले hi जाइएगा मई नहीं जाने वाली समझे.

इतना बोल कर अनन्य वह पर लगी हुयी एक कार में जा कर बैठ गयी और उसके ड्राइवर को होटल चलने के लिए बोल दी अनन्य के बात सुन कर उस कार के ड्राइवर ने अपना गर्दन है में हिलाया और कार स्टार्ट कर के वह से चल दिया इधर मुकेश बस अनन्य को जाते हुए देखते रहा गया.

कार थोड़ी देर बाद सूर्यवंशी प्राइम डीलक्स होटल के पास रुका हे होटल सूर्यवंशी परिवार का hi था और इस होटल में 2 डीलक्स रूम हमेशा सूर्यवंशी परिवार के लिए बुक रहता था इस लिए अनन्य कार से निकली और सीधा होटल के अंदर डीलक्स रूम में चली गयी और जा कर सीधा बीएड पर गिर गयी कुछ देर तक वैसे hi बीएड पर पड़े रहने के बाद वो खुद से बोली.

अनन्य- पता नहीं मई जब से मुंबई में लैंड हुयी हु मेरा दिल बेचैन है मुझे ऐसा लग रहा है जैसे यहाँ मेरा कोई अपना मेरा इंतज़ार कर रहा है पता नहीं आज मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है.

अनन्य को ये सब सोचते सोचते कब नींद आ गयी उसे पता hi नहीं चला.

इधर पटना में मृत्युंजय को अपने घर आज पुरे एक सप्ताह हो गए थे और इन एक सप्ताहों में बहुत कुछ बदल चूका था जिस दिन मृत्युंजय अघोरी बाबा के पास से अपने घर लौटा था उसी दिन उसने साडी सचाई अपने चाचा यानि की सुरेंद्र कुशवाहा को बता दिया था और साथ में उसने बसंत चौहान के सरे काळा कारनामों के साबुत इक्कठा करने के लिए बोलै था.

सुरेंद्र कुशवाहा मृत्युंजय के बोले अनुसार इन एक सप्ताहों में बसंत चौहान के सरे काळा चिठे मीडिया और पुलिस के सामने खोल दिए थे जिसमे चाइल्ड किडनैपिंग ड्रग्स ऑर्गन्स सप्लाई मर्डर और ऐसे hi न जाने कितने ऐसे धंधे थे जो बसंत चौहान अपने बिज़नेस के आड़ में करता था और इन सब काळा धंधे के सरे साबुत सुरेंद्र कुशवाहा के हाथ लग गया था और इसमें सुरेंद्र कुशवाहा का साथ बसंत चौहान के घर में काम करने वाला एक नौकर ने दिया था ये नौकर भी सुरेंद्र कुशवाहा के hi आदमी था.

उन सरे सबूतों में विनोद कुशवाहा के मर्डर का भी साबुत सुरेंद्र कुशवाहा के हाथ लग गया था जिसके कारन सुरेंद्र कुशवाहा बहुत घुसे में था वो तो उसी वक़्त बसंत चौहान को मरने जाने वाला था ये देख कर मृत्युंजय उनको बहुत समझने की कोशिश कर रहा था लेकिन वो मन hi नहीं रहे थे.

सुरेंद्र- बस बहुत सुन लिया मैंने मृत्युंजय तुम्हारी बात अब मई तुम्हारी कोई भी बात नहीं सुनूंगा जिसने मेरे जान से भी प्यार भाई को मारा और तुम्हे मरने की कोशिश की है उसे जिन्दा देख कर मेरा खून खौल रहा है छोडो मुझे जाने दो आज या तो वो बसंत चौहान रहेगा या मई रहूँगा.

सुरेंद्र को इस तरह से घुसे से जाता हुआ देख कर मृत्युंजय उनको पकड़ लेता है और समझते हुए बोलता है.

मृत्युंजय- रुकिए आप मेरी बात मानिये रुकिए चाचा आप ये क्या करने जा रहे है आप उसको मर कर खुद फांसी पर चढ़ जाना चाहते है आपको क्या लगता है की जिसने मेरे डैड को मारा और मुझे मरने की कोशिश की है उसे जिन्दा देख कर मुझे अच्छा लग रहा है नहीं बल्कि मेरा गुसा उन सब पर आपसे भी ज्यादा आ रहा है हमें उनको इतनी आसान मौत नहीं देना है हम उन्हें तड़पा तड़पा कर मरेंगे लेकिन उससे पहले आप सरे साबुत मीडिया और पुलिस को दे दीजिये.

मृत्युंजय के बात सुन कर सुरेंद्र कुछ संत होते है और फिर मृत्युंजय से बोलते है.

सुरेंद्र- अगर हम साबुत पुलिस और मीडिया को दे देंगे तो उसे पुलिस पकड़ कर ले जायेगा और वो कुछ दिन जेल में रह कर फिर पैसो के डैम पर बहार आ जायेगा नहीं मई ऐसा नहीं होने दूंगा मई अब उसे एक पल भी जिन्दा नहीं देख सकता.

मृत्युंजय- नहीं चाचा आप ये गलत सोच रहे है आपको क्या लगता है की आप सरे साबुत मीडिया वालो और पुलिस को दे देंगे तो वो आसानी से उसे गिरफ्तार कर लेंगे नहीं बल्कि बसंत चौहान एक ऐसा आदमी है जो कभी भी पुलिस के हाथ नहीं आएगा जानते है अगर उसके काळा कारनामे बहार आ जाते है तो वो सबसे पहले अंडर ग्राउंड हो जायेगा और बाद में वो इस देश से बहार भाग जायेगा और मई यही चाहता हु की वो अंडर ग्राउंड हो जाये इससे होगा ये की पुलिस और मीडिया को ये लगेगा की वो डरकर भाग गया है और हम इसी बात का फायदा उठाएंगे और उसे मर देंगे.

सुरेंद्र- लेकिन ये हम करेंगे कैसे क्युकी अगर वो अंडरग्राउंड हो गया तो उसे कोई भी नहीं धुंध सकता है.

मृत्युंजय- है आप सही बोल रहे है लेकिन हम उसे जरूर धुंध लेंगे और इसके लिए आपको बसंत चौहान के सबसे खास आदमी को खरीदना होगा चाहे वो जितने भी पैसे में बाइक आप उसे खरीद लीजिये जब आप उसे खरीद लेंगे फिर बसंत चौहान चाहे जहा भी छिपे हम उसे आसानी से धुंध लेंगे.

सुरेंद्र- ठीक है हम ऐसे hi करेंगे.

इतना बोल कर सुरेंद्र वह से चला जाता है फिर करीब दो घंटे बाद सुरेंद्र कुशवाहा एक खण्डार में एक आदमी के साथ खड़ा था वो आदमी कोई और नहीं बल्कि बसंत चौहान के खास आदमी था.

सुरेंद्र- देख लो रखा ये तुम्हारे फायदे की बात है तुम बसंत चौहान के साथ रह कर कभी भी इतना पैसा नहीं कमा सकते मई तुम्हे पुरे 100 करोड़ दे रहा हु बस तुम्हे बसंत चाहें के बारे में साडी जानकारी मुझे देनी होगी और साथ में उसका लोकेशन भी मुझसे शेयर करना होगा बोलो क्या कहते हो मिलाओगे मुझसे हाथ.

सुरेंद्र के बात सुन कर वो आदमी कुछ देर तक सोचते रहा फिर वो सुरेंद्र से बोलै.

आदमी- आपका ऑफर कोई बुरा नहीं है मई इतने पैसो के लिए तो अपने बाप को भी मर दू तो ये बसंत चौहान की क्या बात है लेकिन अगर मुझे बसंत चौहान से गाडरी करुणा हाउ तो मई अकेला नहीं करूँगा मेरे कुछ साथी भी है अगर आप हमें 50 करोड़ और दे दे तो हम आपका सारा काम कर दूंगा अगर आप उसे मरने के लिए बोलेंगे तो हम उसे मर देंगे तो बताइये आप क्या कहते है.

सुरेंद्र- ठीक है चलो मैंने तुम्हे और 50 करोड़ दिया लेकिन मुझे बसंत चौहान को इतनी आसान मौत नहीं देना है बस तुम मुझे हमेसा उसकी लोकेशन शेयर करते रहना और हम आज से बसंत चौहान के गार्ड के लिए भी तुम अपना hi आदमी रखना मई.

आदमी- ठीक है आप मुझे पैसे ट्रांसफर कर दीजिये आपका काम हो जायेगा.

सुरेंद्र कुशवाहा अपने साथ लाये हुए बैग को उस आदमी को देते हुए बोलै.

सुरेंद्र- इसमें पुरे 50 करोड़ है तुम इसे अभी रखो बाकि के पैसे मई तुम्हे काम होने के बाद दूंगा.

आदमी- ठीक है.

इतना बोल कर वो आदमी सुरेंद्र के हाथ से वो बैग ले लेता है और वह से चला जाता है उस आदमी को वह से जाने के बाद सुरेंद्र एक अननोन no से मीडिया और पुलिस को बसंत चौहान के सरे काळा कारनामों के साबुत भेज देता है और उसे पब्लिक करने के लिए बोल देता है इसके बाद वो वह से अपने घर आ जाता है.

इधर जैसे hi वो सरे साबुत पुलिस और मीडिया को मिलती है तो दोनों जगह हड़कंप मच जाती है मीडिया वाले अपने टॉप के लिए इस जल्दी से जल्दी पब्लिश करना चाहते थे तो वही पुलिस इस छान बिन में लग गयी की इस साबुत को उनके पास भेजा किसने है इस लिए सरे पुलिस वाले सरे काम छोड़ कर उस आदमी को ढूंढे लगे हो उनके पास ये रिपोर्ट भेजा था वो लोग ऐसा इस लिए कर रहे थे की वो लोग जानते थे की बसंत चौहान बहुत कमीना आदमी है अगर वो सब उसके ऊपर हाथ डालते तो उनके फॅमिली वाले को नुकशान पंहुचा सकता था और दूसरी बात ये थी की बसंत चौहान का पुलिस के बहुत अंदर तक कनेक्शन थे इस लिए वो लोग उसे गिरफ्तार नहीं करना चाहते थे.

वही मीडिया वालो को जब वो साबुत मिला था उनका खुसी का कोई ठिकाना hi नहीं रहा क्युकी उनको बैठे बिठाये hi एक मसालेदार न्यूज़ हाथ लग गयी थी जिससे उनका टॉप मिनटों में आसमान छू लेता इस वो लोग देरी न करते हुए उस साबुत को न्यूज़ पर चलना सुरु कर दिया जिसके कारन पूरा पटना शहर में हड़कंप मच गया क्युकी सुरेंद्र कुशवाहा ने जो मीडिया और पोलिश को साबुत दिया था उससे बहुत कुछ सामने आने वाला था इस साबुत से सिर्फ बसंत चौहान hi नहीं बल्कि बहुत सरे अफसर और मंत्री भी कानून के घेरे में आने वाले थे इस लिए सरे नेता और अफसर जिनका नाम इस साबुत में था वो सब डरे हुए थे कुछ तो अंडरग्राउंड भी हो गए थे.

वही पब्लिक ने जब देखा की बसंत चौहान नेता और कुछ अफसर का नाम लड़कियों के धंधा किडनैपिंग ऑर्गन सप्लाई और ड्रग्स जैसे गैर क़ानूनी धंधो में शामिल है तो सब के गुसा फुट पड़ा और सरे लोग पुलिस प्रशासन है है बसंत चौहान और उसके साथियो के सजा दो जैसे नारे लगते हुए रस्ते पर उतर गए जिसके कारन ये बात इतना फैल गया की ये बात दिल्ली के मिनिस्टरी तक चली गयी और वह एक अर्जेंट मीटिंग बैठाया गया और उस मीटिंग में ये फैसला लिया गया की जिस जिस का नाम इस साबुत में शामिल है उन सब को गिरफ्तार किया जाये और उन सब पर सीबीआई की इन्क्वारी बैठाया जाये.

इधर जब बसंत चौहान को पता चला की उनके काळा कारनामे का भन्दा फुट गया है और उनके खिलाफ सरे साबुत पब्लिक हो गया है तो वो उसका गुसा सातवे आसमान पर चढ़ गया और वो अपने घर में रखे हुए सामान की तोड़ फोड़ करने लगा और जोर से छीलते हुए बोलै.

बसंत- किसने आखिर किसने मेरे खिलाफ साबुत इक्कठा कर के मीडिया वालो को दिया है ये काम जिसने भी किया है मई उसे और उसके पुरे खंडन को इस धरती से मिटा दूंगा मई उसको ऐसी मौत दूंगा की वो दोबारा जनम लेने के नाम से घबराएगा.

इधर जैसे hi बसंत चौहान घुसे अपने घर के सामान तोड़ने लगा और जोर से छिलने लगा तभी अंदर से उसकी आवाज सुन कर उसकी बीवी बहार आयी और बसंत को घुसे में देख कर बोली.

रुपमा- (बसंत के वाइफ)- अरे आप इतने घुसे में क्यों हो आप पहले संत हो जाइये और मुझे बताइये की आखिर ऐसी क्या बात हो गयी जो आप इतने घुसे में हो.

रुपमा के बात सुन कर बसंत चौहान घुसे से बोले.

बसंत- किसी ने मेरे सरे गैर क़ानूनी धंधो का साबुत पुलिस और मीडिया को दे दिया है.

बसंत चौहान के बात सुन कर रुपमा हैरान हो गयी और वो उसी हैरानी में बोली.

रुपमा- क्या लेकिन ये हुआ कब और ये सब किया किसने.

बसंत- वही तो नहीं पता की ये सब आखिर किया किसने है अगर मुझे पता चल जाता की ये सब किसने किया है तो मई उसे उसके पुरे फॅमिली के साथ जला कर मर देता.

Rupma-Aap इतना गैर जिमेवार कैसे हो सकते है कोई आपके नक् के निचे सारा खेल खेल गया और आपको पता भी नहीं चला आप जानते है न की ये बात सामने आने से अब हमारे साथ क्या क्या होगा.

बसंत- है मई जनता हु इसी लिए मई परेशां हु मुझे समझ में नहीं आ रहा है की मई क्या करू.

रुपमा- अभी हम कुछ दिनों के लिए अंडरग्राउंड हो जाते है जब ये मामला कुछ संत होगा तो हम बहार आएंगे और यहाँ से विदेश चले जायेंगे लेकिन जाने से पहले ये सब हमारे खिलाफ जिसने भी किया है उसे दर्दनाक मौत दे कर जायेंगे.

बसंत- है तुम सही बोल रही हो हमें अंडरग्राउंड होने में hi समझदारी है लेकिन मुझे ये समझ में नहीं आ रहा है की ये सब आखिर हमारे साथ किया किसने है.

बसंत चौहान के बात सुन कर रुपमा कुछ सोचने लगती है फिर कुछ सोचते हुए अचानक से उसे कुछ समझ में आता है और बोलती है.

रुपमा- मुझे थोड़ा थोड़ा समझ में आ रहा है की ये सब हमारे साथ कोण कर सकता है.

बसंत- तुम किसके बारे में बात कर रही हो.

रुपमा- मई सुरेंद्र कुशवाहा और मृत्युंजय कुशवाहा के बात कर रही हु.

रुपमा के बात सुन कर बसंत चौहान पहले तो हैरान हो जाता है फिर वो जोर जोर से हसने लगता है फिर वो हस्ते हुए रुपमा से बोलता है.

बसंत- और ये तुम्हे क्यों लगता है की ये सब उन दोनों चाचा भतीजो ने मिल कर किया है जबकि तुम्हे पता है की मैंने पहले hi मृत्युंजय को मर दिया था.

बसंत के बात सुन कर रुपमा कुछ देर के लिए चुप हो गयी फिर वो कुछ सोचते हुए बोली.

रुपमा- अच्छा आप मुझे ये बताओ की इस शहर में आपका ऐसा कोण सा दुश्मन है जो आपसे टकराने का डैम रखता हो.

रुपमा के बात सुन कर बसंत चौहान कुछ सोचते हुए बोले.

बसंत- कुशवाहा फॅमिली को छोड़ कर और कोण हो सकता है जो मुझसे दुश्मनी कर सके लेकिन इसका मतलब ये नहु है की ये सब उन लोगो ने hi किया है.

रुपमा- नहीं तुम गलत सोच रहे हो क्युकी मेरे हिसाब से ये सब उनके शिव कोई और नहीं कर सकता मुझे लगता है की उन्हें किसी तरह से ये पता चल गया है विनोद कुशवाहा के मर्डर और मृत्युंजय के गायब होने के पीछे हमारा hi हाथ है इस लिए हो न हो इन सब में सुरेंद्र का hi हाथ है.

बसंत- अगर इन सब में उस सुरेंद्र का हाथ है तो मई उसे भी उसके भाई और भतीजे के पास भेज दूंगा.

रुपमा- नहीं अभी उसकी जरुरत नहीं है अभी हमें खुद को बचने के बारे में सोचना चाहिए हम उससे बाद में निपट लेंगे.

रुपमा के बात सुन कर बसंत चौहान अपना गर्दन है में हिलता है तभी उसे कुछ ध्यान आता है और वो रुपमा से बोलता है.

बसंत- मुझे एक बात समझ में नहीं आ रही है की जब सुरेंद्र कुशवाहा को ये पता चल गया है की मैंने hi उसके भाई और भतीजे को गायब करवाया है तो मुझ पर सीधा हमला करने के बजाय हमारे खिलाफ साबुत इक्कठा कर के मीडिया और पुलिस को क्यों दिया.

रुपमा- यही बात तो मुझे भी समझ में नहीं आ रही है खैर छोडो ये सब बात को और हमें यहाँ से निकलना चाहिए नहीं तो यहाँ पर कभी भी पुलिस आ कर हमें गिरफ्तार कर सकते है.

बसंत- हम तो अंडरग्राउंड हो जायेंगे लेकिन पूनम का क्या वो तो अभी भी बहार hi है.

रुपमा- आपको पूनम की चिंता करने की जरुरत नहीं है क्युकी वो मुंबई में अभी जिसके साथ और जहा है वह पुलिस को पहुंचना नामुमकिन है इस लिए उसकी चिंता छोड़ कर हमें अपने बारे में सोचना चाहिए और है यहाँ से हम अपने खास आदमी के साथ hi निकालेंगे नहु तो कही ऐसा न हो की हमारा कोई आदमी उनसे मिला हो और हम पकडे जाये.

बसंत- ठीक है चलो चलते है.

इसके बाद दोनों अपना एक खास आदमी और उसके खास आदमियों के साथ आये बोडीगॉर्डों के साथ बसंत और रुपमा वह से निकल कर एक फार्महाउस में आ जाते है ये फार्महाउस दुनिया के नजरो से छुपाया हुआ था इस फार्महाउस को बसंत चौहान ने कैमूर के पहाड़ो में जंगलो के बीचो बिच बनाया था जहा तक किसी भी पुलिस वाले या आम आदमी का पहुंचना नामुमकिन था और अगर कोई यहाँ तक पहुंच भी जाता तो वो इस फार्महाउस के रक्षको द्वारा मारा जाता.

बसंत चौहान ने इस फार्महाउस के 100 खूंखार लोगो की एक आर्मी बना राखी थी जो मार्टिकल आर्ट्स में एक्सपर्ट थे उन 100 लोगो में ज्यादातर लोग मार्टिकल आर्ट्स के 6तह और 7तह रैंक पर थे इस लिए बसंत चौहान को यहाँ पर कोई टेंसन नहीं था और इस फार्महाउस को बसंत चौहान ने ऐसे hi किसी खास मौके के लिए बनवाया था ताकि वो आराम से यहाँ छुप सके और उसको भनक तक किसी को न लगे और अगर किसी को पता नहीं चल जाये तो वो उसका बल भी न उखड सके हलाकि वो खुद एक हाफ ग्रांडमास्टर योद्धा था इस लिए उसे किसी का दर नहीं था लेकिन फिर भी वो अपने सेफ्टी के लिए यहाँ एक आर्मी खड़ा कर रखा था.

इधर जैसे hi बसंत और रुपमा चौहान अपने फार्महाउस पर पहुंचे वैसे hi सुरेंद्र कुशवाहा के पास एक लोकेशन आ गया जिसे देख कर सुरेंद्र कुशवाहा खुस हो गया और मृत्युंजय से बोलै.

सुरेंद्र- मृत्युंजय अब हमें चलना चाहिए अब वक़्त आ गया है अपना बदला लेने की क्युकी शिकार हमारे जल में फस चूका है.

मृत्युंजय- अपने बहुत अच्छा किया चाचा जी चलिए अब हम चलते है शिकार का शिकार करने.

इसके बाद दोनों अपने कुछ फरोसे मंद आदमियों के साथ वह से उसे लोकेशन के तरफ निकल जाते है जो लोकेशन अभी अभी सुरेंद्र के मोबाइल पर आया था ये लोकेशन बिहार में स्थित कैमूर पहाड़ी का था वो लोग अभी आधे रस्ते hi आये थे की तभी सुरेंद्र के मोबाइल पर एक मस्सगे आया जिसे पढ़ कर सुरेंद्र के चेहरे पर परेशानी दिखने लगी जिसे देख कर मृत्युंजय उनके हाथ से मोबाइल लिया और उस मस्सगे को पढ़ने लगा ये मस्सगे बसंत चौहान के खास आदमी का था जिसने मस्सगे में लिखा था की.

मस्सगे- आप अगर इस जगह पर आना चाहते है और बसंत चौहान को ठिकाने लगाना चाहते है तो ये बहुत मुश्किल है क्युकी इस जगह पर बसंत चौहान के बहुत सरे आदमी मौजूद है जो आटोमेटिक गन से लेस है और हाथ में वो सरे के सरे मार्टिकल आर्ट्स योद्धा है जो मार्टिकल आर्ट्स के 6तह और 7तह लेवल पर है इस लिए आपको जो भी करना hi आप सोच समझ कर कीजियेगा.

मस्सगे को पढ़ने के बाद मृत्युंजय के चेहरे पर भी परेशानी आ जाती है फिर वो कुछ देर तक सोचने के बाद सुरेंद्र से बोलै.

मृत्युंजय- अंकल आप एक संत जगह देख कर गाड़ी खड़ा कीजियेगा क्युकी मई वह पर ध्यान लगाना चाहता हु और अपना लेवल बढ़ाना चाहता हु.

मृत्युंजय के बात सुन कर सुरेंद्र हैरान हो जाते है और उसी हैरानी में मृत्युंजय से बोलते है.

सुरेंद्र- तुम ये क्या बोल रहे हो तुम जानते हो न की ऐसे जल्दी बजी में तुम्हे लेवल पर करना भरी भी पद सकता है.

मृत्युंजय- है अंकल मई ये जनता हु लेकिन मुझे ये करना hi होगा क्युकी मई अब बसंत चौहान को जिन्दा नहीं छोड़ सकता अगर वो जिन्दा रहा तो और न जाने कितने फॅमिली को तबाह करेगा और अगर मुझे उससे टकराना है तो मुझे अपने लेवल को किसी भी तरह से ग्रांडमास्टर लेवल पर ले कर जाना hi होगा तभी मई उससे और उसके आदमियों से मुकाबला कर सकता हु और वैसे भी मई हाफ ग्रांडमास्टर लेवल के चरम पर हु इस लिए मुझे लेवल पर करने में ज्यादा मुश्किल नहीं होगी.

मृत्युंजय के बात सुन कर सुरेंद्र संत हो जाते है और मृत्युंजय से बोलते है.

सुरेंद्र- करीब 20 किलोमीटर के बाद एक जंगल आने वाला है हम उसी jan888gal में एक सुरक्षित जगह देख कर रुकेंगे तुम वही पर अपना लेवल बढ़ने की कोशिश करना और वह पर तुम्हे प्राकृतिक एनर्जी भी ज्यादा मत्रं में मिलेगी जिससे तुम्हे लेवल बढ़ने में काफी मदत मिलेगी.

इसके बाद दोनों में से कोई कुछ नहीं बोलता है फिर करीब 45 मिनट गाड़ी ड्राइव करने के बाद वो लोग एक ऐसी जगह पहुंचते है जहा एक पहाड़ी था और उस पहाड़ी के चारो तरफ जंगल मौजूद था मृत्युंजय इस जगह को देख कर सुरेंद्र से बोलता है.

मृत्युंजय- अंकल मेरे ध्यान करने के लिए ये अच्छी जगह है यहाँ से मुझे बहुत hi शुद्ध प्राकृतिक एनर्जी महसूस हो रही है इस लिए आप यही पर गाड़ी को रोकिये.

मृत्युंजय के बात सुन कर सुरेंद्र वही गाड़ी रोक देता है फिर सब वही उतर कर उस पहाड़ के तरफ बढ़ गए करीब 10 मिनट चलने के बाद वो सब उस पहाड़ के पास पहुंच गए फिर मृत्युंजय एक अच्छी जगह देख कर ध्यान करने के लिए बैठ गया उसे ध्यान करता हुआ देख कर सुरेंद्र अपने आदमियों से बोलता है.

सुरेंद्र- तुम सब इस जगह का निगरानी करो और है किसी भी तरह से तुम सब मृत्युंजय को डिस्टर्ब नहीं करना.

इतना बोल कर वो भी वह से कुछ दूर जा कर ध्यान करने लगते है सुरेंद्र कुशवाहा भी एक लेवल 9तह का योद्धा थे वो बस एक कदम दूर से हाफ ग्रांडमास्टर लेवल से इस लिए वो भी वह बैठ कर ध्यान करने लगे और अपने अगले लेवल में जाने की कोशिश करने लगा.

इधर मृत्युंजय अपने ध्यान में बैठ कर अपना लेवल बढ़ने की कोशिश कर रहा था ऐसे hi कोशिश करते करते करीब 10 घंटे बिट गए लेकिन मृत्युंजय इन 10 घंटो में भी अपना लेवल आगे नहीं बढ़ा पाया ऐसा लग रहा था की कोई चीज है जो उसके लेवल को आगे बढ़ने में बढ़ा पंहुचा रही है इस लिए मृत्युंजय किसी भी तरह से उस बढ़ा को तोडना चाहता था ऐसे hi ध्यान लगते लगते 2 घंटे और बिट गए लेकिन मृत्युंजय अपने लेवल को आगे बढ़ने में नाकाम रहा वो मायुश हो कर ध्यान से बहार आने hi वाला था की तभी उसके पीठ पर बना हुआ त्रिशूल चमकने लगा और उसमे से एनर्जी निकल कर मृत्युंजय के शरीर में जाने लगी.

जैसे वो एनर्जी मृत्युंजय के शरीर में गया तो मृत्युंजय को ये एहसास हो गया कोई एक शक्तिशाली एनर्जी उसके शरीर में प्रवेश किया है और ये एनर्जी उसके लेवल को बढ़ा सकता है ये महसूस होते hi मृत्युंजय उस एनर्जी को अपने शक्तियों के रस्ते पर बहाने लगा उस एनर्जी को अपने शरीर के शक्तियों में बहते हुए उस एनर्जी को अपने शक्ति चक्र में ले गया जैसे hi वो एनर्जी मृत्युंजय के शक्ति चक्र में गया तो जो चीज मृत्युंजय को आगे के लेवल में बढ़ने में बढ़ा बन रही थी वो बढ़ा टूट गयी और मृत्युंजय के शरीर में बढ़ की तरह शक्तियां बढ़ने लगी देखते hi देखते मृत्युंजय धरती से 2 फ़ीट ऊपर हवा में उठ गया और आस पाश के साडी सुध प्राकृतिक एनर्जी उसके शरीर में जाने लगा ऐसे hi करीब आधे घंटे तक प्राकृतिक एनर्जी को सोखने के बाद मृत्युंजय अपना आँख खोल दिया इसके आँखों में एक अजीब सी चमक थी और उसके होतो पर एक मुस्कान था.

मृत्युंजय- आखिर कर मई ग्रांडमास्टर लेवल पर पहुंच hi गया लेकिन मुझे समझ में नहीं आ रहा है की वो अंजनी एनर्जी क्या थी जो मेरे लेवल बढ़ने में मेरी सहायता की और वो आया कहा से था उसने न सिर्फ मेरी लेवल बढ़ने में मदत की बल्कि मेरी लेवल को भी पका कर दिया वो एनर्जी जहा से भी आया हो मई उसका पता जरूर लगाऊंगा अभी तो फ़िलहाल मुझे बसंत चौहान के पास जाना है.

खुद से इतना बोलने के बाद मृत्युंजय के चेहरे पर एक रहस्यमई मुस्कान आ गया और वो जोर से छीलते हुए बोलै.

मृत्युंजय- अब मुझसे तुम्हे कोण बचाएगा बसंत चौहान तुम अपने सुरक्षा में चाहे जितना भी आदमी लगा लो लेकिन तुम्हारा अंत आज जरूर होगा बस तुम मेरा इंतज़ार करो मई जल्द hi तुम्हारे कर्मो की सजा देने तुम्हारे पास आ रहा हु.

इधर सुरेंद्र जी अभी ध्यान में बैठा था उसकी आंखे अचानक से मृत्युंजय के आवाज के कारन खुल गयी और वो मृत्युंजय को इतना खुस देख कर पूछा.

सुरेंद्र- क्या तुम कामयाब हो गए.

मृत्युंजय- जी अंकल मई कामयाब हो गया मई ग्रांडमास्टर लेवल में पहुंच गया अब मई आराम से बसंत चौहान और उसके आदमियों को संभल सकता हु.

मृत्युंजय के बात सुन कर सुरेंद्र बहुत खुस हो जाता है और वो उसी खुसी के साथ मृत्युंजय से बोलता है.

सुरेंद्र- बहुत अच्छा मुझे तुमसे यही उम्मीद थी तुम हमारे खंडन के सबसे होनहार लड़का हो अब मुझे पूरा यकीं हो गया है बसंत चौहान और उसके आदमियों को तुम आराम से संभल सकते हो.

मृत्युंजय- ठीक है अंकल अब हमें चलना चाहिए मई अब और देरी नहीं करना चाहता हु मई उसे जल्द से जल्द अपने हाथो से मरना चाहता हु.

सुरेंद्र- ठीक है चलो चलते है.

इतना बोल कर सुरेंद्र कुशवाहा अपने आदमियों को वह से चलने के लिए इशारा करता है और फिर सब वह से गाड़ी में बैठ कर कैमूर पहाड़ी के लिए निकल जाते है करीब 6 घंटा गाड़ी ड्राइव करने के बाद वो लोग कैमूर पहाड़ी के जगल के शरहद पर पहुंच जाते है यहाँ पर पहुंचते पहुंचते उन लोगो को रत हो गयी थी.

कैमूर पहाड़ी के जंगल के सरहद पर पहुंचने के बाद सुरेंद्र अपना गाड़ी वही रोकता है और फिर सबसे बोलता है.

सुरेंद्र- हमें गाड़ी को यही छोड़ना होगा और यहाँ से पैदल hi आगे जाना होगा और है सब सावधान रहना क्युकी ये कैमूर पहाड़ी का जंगल है और इसी जंगल में बसंत चौहान छुपा हुआ है और वो अपने सुरक्षा के लिए इस जंगल में अपने आदमियों को चारो तरफ लगा रखा होगा लेकिन हमें फिक्र करने की जरुरत नहीं है क्युकी हम यहाँ रत में पहुंचे है और हमारे पास नाईट विशन चस्मा भी है जिससे हम उन्हें आसानी से देख सकते है और उनका सीकर कर सकते है.

मृत्युंजय- आपने नाईट विशन चस्मा यहाँ ला कर अच्छा किया अंकल अब हम इस रेट का फायदा उठा कर उन सब को आसानी से मर सकते है और वैसे भी बसंत चौहान एक चालक और जालसाज इंसान है वो जरूर अपने आदमियों को इस जंगल में निगरानी पर लगा रखा होगा हमें यहाँ से सावधानी से आगे बढ़ना होगा मई आगे आगे जा कर रास्ता क्लियर करता हु आप सब मेरे पीछे पीछे मेरे बैकअप बन कर आइयेगा अगर मेरे नजरो से कोई आदमी बच जायेगा तो आप सब अपने सीलेंसर लगे हुए गन से उसे वही शूट कर दीजियेगा.

मृत्युंजय के बात सुन कर सुरेंद्र घबरा जाते है और वो घबराते हुए उससे बोलते है.

सुरेंद्र- नहीं तुम इस तरह से रिस्क ले कर अंदर नहीं जा सकते तुम मेरे खंडन के आखरी चिराग हो अगर तुम्हे कुछ हो गया तो मई ऊपर जा कर भैया और भाभी को क्या मुँह दिखाऊंगा और रही बात रास्ता क्लियर करना का तो मई अपने कुछ आदमियों को आगे भेज दे रहा हु वो लोग आगे जा कर रस्ते क्लियर कर देंगे.

सुरेंद्र के बात सुन कर मृत्युंजय उनको समझते हुए बोलै.

मृत्युंजय- अंकल अगर हम अपने आदमियों को भेज कर रस्ते में पहरा दे रहे बसंत के आदमियों को ठिकाने लगाएंगे तो बसंत को जरूर पता चल जायेगा क्युकी हमारे आदमियों की शक्तियों लगभग उन्ही लोगो के बराबर है और अगर ये लोग उन सब पर हमला करेंगे तो इन्हे उन लोगो के साथ लड़ना पड़ेगा और लड़ाई से जोर शोर उठेगी उससे सबको पता चल जायेगा और सब सतर्क हो जायेंगे इस लिए आप मुझे जाने दीजिये मई अब ग्रांडमास्टर लेवल पर पहुंच गया हु इस लिए मई आराम से उन सब को निपटा दूंगा और किसी को पता भी नहीं चलेगा और वैसे भी आपको मेरे बारे में चिंता करने की जरुरत नहीं है क्युकी मई अब ग्रांडमास्टर लेवल पर पहुंच गया हु और उन लोगो में इतनी ताकत नहीं है की वो लोग एक ग्रांडमास्टर लेवल के योद्धा के कुछ भी बिगड़ सके.

मृत्युंजय के बहुत समझने के बाद आखिर कर सुरेंद्र उसे आगे भेजने के लिए मन गया सुरेंद्र को मानते हुए देख कर मृत्युंजय के चेहरे पर एक खतरनाक मुस्कान आ गयी और वो वह से अपने तेज़ रफ़्तार के साथ जंगल के अंदर चला गया ग्रांडमास्टर लेवल पर पहुंचने के बाद मृत्युंजय की रफ़्तार इतना तेज़ हो गया था की अगर कोई आम आदमी उसे देखता तो उसे सिर्फ वह परछाई hi दिखाई देती.

इधर बसंत चौहान जब यहाँ पर आया था तो उसने अपने 50 आदमियों को अपने फार्महाउस के चारो तरफ सुरक्षा के लिए लगा दिया था और बाकि के 50 आदमियों को जंगल में निगरानी रखने के लिए भेज दिया था जब बसंत ने अपने 50 लोगो को जंगल के अंदर निगरानी रखने के लिए भेजा तो वो 50 लोग पुरे जंगल में 2 जोड़ी में फैल गए ताकि वो सब आराम से निगरानी कर सके.



इधर मृत्युंजय और उसके साथी सब सावधानी से आगे बढ़ रहे थे तभी मृत्युंजय को कुछ दूर आगे कुछ हलचल सुनाई दी जिसे सुन कर वो सुरेंद्र से बोलै.

मृत्युंजय- ससशस आप सब सावधान हो जाइये क्युकी हमसे कुछ hi दूर पर हमारे दुश्मन मौजूद है मई आगे जा कर उनसे निपटा हु आप सब भी अपने गन पर सीलेंसर लगा कर तैयार हो जाइये और मुझे कवर कीजिये.

सुरेंद्र- ठीक है तुम आगे बढ़ो और दुश्मनो के विनाश का खेल सुरु करो लेकिन जो भी करना सावधानी से करना ताकि दूसरे लोगो को पता न चले की हम इस जंगल में आ गए है और सावधान रहना और खुद को सेफ रखना.

मृत्युंजय- ठीक है आप सब भी सावधान रहिएगा.

इतना बोल कर मृत्युंजय सावधानी से उस तरफ बढ़ गया जिस तरफ से उसे हलचल महसूस हुयी थी थोड़ी देर सावधानी से चलने के बाद उसे दो लोग दिखाई दिए जो एक पेड़ के सहर बैठे हुए थे मृत्युंजय ने जब उनको ध्यान से देखा तो उनके हाथो में उसे आटोमेटिक गन दिखाई दिया जिसे देख कर वो सावधान हो गया वो सावधान अपने लिए बल्कि अपने आदमियों के लिए हुआ था क्युकी ग्रांडमास्टर लेवल पर पहुंचने के बाद गोली उसका कोई नुकसान नहीं पंहुचा सकती थी लेकिन ये बात सुरेंद्र और उसके आदमियों के लिए नहीं कहा जा सकता था क्युकी उन सब का लेवल अभी बहुत निचे था.

खैर जैसे hi मृत्युंजय उन दोनों गुंडों के हाथो में आटोमेटिक गन देखा तो तुरंत सबको पीछे रहने का इशारा किया और खुद अपने बेल्ट में लगे निफे पॉकेट से एक खंजर निकला और उसे मजबूती से पकड़ते हुए अपने तेज़ रफ़्तार में उन गुंडों के तरफ बढ़ गया उसका रफ़्तार आम ग्रांडमास्टर लेवल के योद्धाओ से ज्यादा था क्युकी जब उसे मर कर नदी में फेक दिया गया था तब उसको त्रिदेव के शक्ति का कुछ अंश प्राप्त गया था इस लिए उसका गयी इतना तेज़ हो गया था की वो जहा से भी न रहा था वह सिर्फ एक हवा के निकलने का आवाज आ रहा था वो कुछ hi पल में उन दोनों गुंडों के सामने पहुंच गया.

जैसे hi वो उन दोनों गुंडों के सामने जा कर रुका वैसे hi दोनों हुँदा हड़बड़ा गए और दो कदम पीछे हाथ गए फिर वो दोनों जल्दी से अपने गन उठा कर मृत्युंजय के ऊपर तन दिए लेकिन वो दोनों कुछ कर पते उससे पहले hi मृत्युंजय का खंजर बिजली की तरह चला और उन दोनों के सर काट कर उनके शरीर से अलग हो गया खंजर चलने की गति इतनी तेज़ थी की वह खंजर के जगह सिर्फ उसकी एक चमक hi दिखाई दिया.

जब मृत्युंजय ने उन दोनों गुंडों को ख़तम कर दिया तो वो सुरेंद्र और उसके साथियो को आगे बढ़ने का इशारा किया मृत्युंजय के इशारा प् कर सरे लोग आगे बढ़ गए अभी वो लोग कुछ hi दूर गए थे की तभी उन सब को एक आवाज सुनाई दी.

आवाज- तुम सब जहा वो वही रुक जाओ अगर तुम लोग एक कदम भी आगे बढ़ाया तो गोलियों से भून दिए जाओगे.

इधर स्पेस स्टोरेज की दुनिया में हमें पुरे 100 दिन बिट गए थे इन 100 दिनों में मई सुण्या विनाशक तकनीक जो की रैंक 5 के मध्यम लेवल तकनीक थी उसका 2 चरण सिख लिया था और उनपे महारथ भी हासिल कर लिया था और फिर सोचा की इस तकनीक का इस्तेमाल कर के देखा जाये की ये कितनी शक्तिशाली है ये सोच कर मैंने सुण्या विनाशक तकनीक से एक हमला तैयार करने लगा जैसे जैसे मई इस हमले को तैयार कर रहा था वैसे वैसे मेरे शरीर से शक्तियां निकल कर उस हमले में जा रही थी जब वो हमला पूरी तरह से तैयार हो गया तो मुझे मेरे शरीर में कमजोरी महसूस होने लगी क्युकी इस हमले ने मेरे शरीर के सरे शक्तियों को सोख लिया था.

मई ये सोच कर हैरान हो रहा था की आखिर ये हमला है कितना ताकतवर जो इसे तैयार करने में मेरी साडी शक्ति ख़तम हो गयी अगर इस हमले को तैयार करने में मेरी साडी शक्ति ख़तम हो गयी तो ये हमला आखिर कितना ज्यादा ताकतवर होगा.

ये सोचने के बाद मई इस हमले को परखने के लिए और ज्यादा उतावला होने लगा लेकिन मुझे समझ में नहीं आ रहा था की मई इस हमले को इस्तेमाल कहा करू तभी मेरी नजर अपने सामने एक बड़ा सा पत्थर पर गया जो लगभग 15 मीटर्स बड़ा था उस पत्थर को देख कर मई खुद से hi बोलै.

मई- है ये पत्थर मेरे हमले को चेक करने के लिए अच्छा रहेगा जिस हिसाब से मेरा ये हमला ताकतवर है उस हिसाब से ये पत्थर एक hi बार में धूल में मिल जाना चाहिए.

इतना बोलने के बाद मई अपने हमले को उस पत्थर पर कर दिया थोड़ी देर बाद मेरा हमला उस पत्थर से टकरा गया लेकिन वह पर कोई विस्फोट नहीं हुआ और न hi कोई आवाज हुयी लेकिन वह पर जो हुआ उसे देख कर मई हैरान हो गया और अपने बड़ी बड़ी आँखों से वह पर घाट रही घटना को देखने लगा.

दरअसल हुआ ये की जैसे hi मेरा हमला जाकर इस पत्थर से टकराया वैसे hi मेरे हमले ने वह पर एक ब्लैक होल का निर्माण कर दिया और ब्लैक होल वह 10 किलोमीटर के अंदर के सरे वस्तुओं को नस्ट कर दिया और उन नस्ट हुए वस्तुओं को एनर्जी में बदल कर अपने अंदर खींचने लगा और सबसे हैरानी की बात ये थी की वो एनर्जी उस ब्लैक होल के माध्यम से मेरे शरीर में आ रही थी फिर धीरे धीरे मेरे शरीर के कमजोरी दूर होती गयी करीब वो ब्लैक होल 5 मिनट तक वह रही और उस पांच मिनट में hi वह पर भयंकर तबाही मचा दिया इधर मई भी इन 5 मिनट में अपने खोये हुए शेयर शक्ति को प्राप्त कर लिया था अब मुझे ऐसा लग रहा था की मेरे शरीर में पहले से भी ज्यादा शक्ति है.

मई सुण्या विनाशक तकनीक के एक और कारनामे को देख कर पहले तो चौक गया था फिर मई ख़ुशी झूम उठा मई इस तकनीक को पा कर बहुत खुस था क्युकी ये तकनीक हमला करने के साथ साथ मेरे शक्तियों को भी बढ़ा सकता था.

मई इस तकनीक के शक्ति को देख कर हैरान हो गया था और साथ में बहुत खुस भी था सुण्या विनाशक तकनीक के कुल 5 चरण थे अगर मई पुरे 5 चरणों को सिख कर उन पर महारथ हासिल कर लूंगा तो मई इसके एक हमले से 100 किलोमीटर के अंदर के सरे वस्तुओं को नस्ट कर सकता हु और उसके एनर्जी से अपने शक्तियों को भी बढ़ा सकता हु और इस तकनीक को सीखने के बाद मुझे एक बात पता चली की मई अपने मन के मुताबिक इस तकनीक के मामले को कण्ट्रोल कर सकता हु मई अगर चहु ये हमला सिर्फ 100 मीटर के अंदर hi तो इसका प्रभाव 100 मीटर के अंदर hi रहेगा.

इस तकनीक के 2 चरण सिखने और उस पर महारथ हासिल करने में मुझे पुरे 100 दिन लग गए थे ये देख कर मई हैरान था की अगर मुझे इस तकनीक के 2 चरण सिखने में इतना दिन लग गया तो आगे के 3 चरणों को सिखने और उस पर महारथ हासिल करने में कितने दिन लगेंगे खैर मई इन सब बातो को अपने दिमाग से बहार निकला और शनाया के पास जाने लगा जब मई कुछ देर बाद शनाया के पास पंहुचा तो देखा की शनाया वह पर नहीं है ये देख कर मई हैरान हो गया.

मई- (खुद से) शनाया कहा चली गयी कही वो यहाँ से बहार तो नहीं निकल गयी नहीं उसे पता था की मई भी यही पर ध्यान लगा रहा हु तो वो मुझे बताये बिना बहार नहीं जा सकती तो आखिर वो गयी कहा (फिर कुछ सोचते हुए) मई उसका आभा को ढूंढता हु उससे मुझे पता चल जायेगा की वो इस स्पेस स्टोरेज की दुनिया में है या बहार चली गयी है.

इतना सोचने के बाद मई अपने अंदरूनी शक्ति से शनाया के आभा को इस स्पेस स्टोरेज की दुनिया में ढूंढने लगा थोड़ी देर तक उसके आभा को ढूंढने के बाद मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी क्युकी शनाया अभी यही पर थी बस वो इस जगह को घूम कर देख रही थी और अभी जो जिस जगह पर थी वो हवेली थी.

ये देख कर मई सीधा वह से गायब हो कर हवेली के पास चला गया जब मई वह पंहुचा तो देखा की वो हवेली के सुंदरता में खोयी हुयी है मई उसे इस तरह से हवेली को देखता हुआ देख कर उसके पास गया और मुस्कुराते हुए उससे बोलै.

मई- बहुत सुन्दर है न.

मेरे आवाज को सुन कर वो होश में आती है और मुझे देख कर मुस्कुराते हुए बोलती है.

शनाया- तुम कब आये.

मई- अभ जस्ट आया हु वैसे मई पूछ रहा था की क्या तुम्हे ये हवेली कैसी लगी.

मेरी बात को सुन कर शनाया उस हवेली को देखते हुए बोली.

शनाया- ये बहुत सुन्दर है काश की मई यही पर रह पति.

मई- तो इसमें प्रॉब्लम क्या है ये हवेली तुम्हारी hi है जब तुम्हे मन करे तुम यहाँ आ कर रह सकती हो वैसे तुम्हारी ट्रेनिंग का क्या हुआ क्या तुम सफल रही.

शनाया- है मई असंख्य तीर तकनीक को अच्छी तरह से सिख लिया है और उसपे महारथ भी हासिल कर लिया और रही लेवल बढ़ने की बात तो तुम खुद hi पता लगा लो.

शनाया के बात सुन कर मई उसकी लेवल का कच किया तो मई हैरान हो गया क्युकी वो 100 दिनों के अंदर hi हाफ ग्रांडमास्टर लेवल के एडवांस लेवल से सुडो ग्रांडमास्टर लेवल के लौ लेवल पर पहुंच गयी थी जिसे देख कर मई खुस हो गया और उसी खुसी के साथ उससे बोलै.

मई- कोंग्रटुलतिओन्स शनाया तुमने सिर्फ 100 दिन में hi हाफ ग्रांडमास्टर रैंक से सीधा सुडो ग्रांडमास्टर रैंक के लौ लेवल में पहुंच गयी तुमने सीधा 2 रैंक पर कर लिया है.

मेरी बात को सुन कर शनाया मुस्कुराते हुए मुझसे बोली.

शनाया- ये सब तुम्हारे चलते hi हुआ है तुम अगर मुझे इस जगह पर नहीं लेट और स्प्रिचैल स्टोन नहीं देते तो मई कभी भी इस रैंक तक नहीं पहुंच पति टैंक यू मुझे यहाँ लेन के लिए और स्प्रिचैल स्टोन देने के लिए.

मई- अरे इसमें थैंक यू की क्या बात हुयी तुम मेरी वाइफ हो अगर मई ये सब तुम्हारे लिए नहीं करूँगा तो भला और किसके लिए करूँगा अगर तुम आज के बाद मुझसे कभी थैंक यू बोलोगी तो मई तुमसे कभी बात नहीं करूँगा समझी.

मेरी बात को सुन कर शनाया के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी और वो मुस्कुराते हुए मुझसे बोली.

शनाया- ठीक है मई तुम्हे अब कभी भी थैंक यू नहीं बोलूंगी अब खुस वैसे हमें यहाँ आये हुए पुरे 100 दिन बिट गए है तो अब हमें बहार चलना चाहिए.

मई- है है क्यों नहीं चल अब हम बहार चलते है.

मेरी बात को सुन कर शनाया मेरे हाथ को पकड़ लेती है और फिर रिंग में अपना आत्मिक एनर्जी को डालती है जिसके कारन हम दोनों वह से गायब हो कर सीधा शनाया के रूम में निकलते है जिस वक़्त हम स्पेस स्टोरेज की दुनिया से बहार निकले उस वक़्त बहार के दुनिया में सुबह हो गयी थी फिर हम दोनों बरी बरी से वाशरूम में जा कर फ्रेश हुआ इसके बाद हम दिंनिंग होल में नास्ता करने के लिए चला गया जब हम दोनों वह पहुंचे तो देखा की माँ एंड डैड वही पर बैठ कर नास्ता कर रहे थे फिर हम दोनों दिंनिंग टेबल पर बैठते हुए दोनों को विश किया इसके बाद नास्ता करने लगा.

जब से मेरा माँ के साथ अच्छा बनाने लगा था तब से पुस्पा माँ घर में खाना बनाने के लिए एक सर्वेंट रख लिया था नास्ता करते हुए पुस्पा माँ मुझसे बोली.

पुस्पा- प्रतिक तुम कल शनाया से वडा किया था की तुम आज उसे शॉपिंग पर ले जाओगे तो कब जा रहे हो तुम दोनों शॉपिंग के लिए.

पुस्पा माँ के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए उनसे बोलै.

मई- मुझे यद् है माँ की मैंने सिर्फ शनाया को hi शॉपिंग पर ले जाने का वडा नहीं किया था बल्कि आपको और डैड को भी ले जाने का वडा किया था इस लिए आप दोनों को भी हमारे साथ चलना होगा.

अजय- अरे बीटा हम दोनों बूढ़े लोग तुम दोनों के साथ जा कर क्या करेंगे बेकार में hi हम कबाब में हदी बनेंगे तुम दोनों जाओ और एन्जॉय करो.

पुस्पा- है बीटा तुम्हारे डैड ठीक बोल रहे है तुम दोनों जाओ और जाकर शॉपिंग करो हम बुधो को क्यों परेशां कर रहे हो.

शनाया- नहीं माँ और डैड आप दोनों को भी हमारे साथ चलना होगा और आप दोनों हमारे साथ नहीं चलेंगे तो हम भी नहीं जायेंगे.

अजय- ये क्या बात हुयी शनाया तुम और दामाद जी जाओ हमें क्यों परेशां कर रही हो.

शनाया- नहीं डैड आप दोनों को भी हमारे साथ चलना होगा और वैसे भी मई सोच रही थी की आज हम सब बहार hi लंच करेंगे क्युकी हम सब एक साथ बहार कभी भी लंच नहीं किया है इस लिए आप दोनों को हमारे साथ चलना hi होगा.

पुस्पा- ठीक है अगर तुम दोनों का यही जिद है हम चलने के लिए तैयार है.

मई- तो माँ और डैड आप दोनों जल्दी से जा कर रेडी हो जाइये हम आध घंटा बाद निकालेंगे.

इतना बोलने के बाद मई और शनाया अपने रूम में रेडी होने चला गया इधर हम दोनों के जाने के बाद अजय पुस्पा से बोले.

अजय- ये बचे भी न ये दोनों कभी नहीं सुधरेंगे इनको समझना चाहिए की हम दोनों उन दोनों पति पत्नी के बिच कबाब में हदी नहीं बनाना चाहते है लेकिन उन्हें समझ में hi नहीं आ रहा है.

पुष्प- अब छोड़िये भी इनमें उन बचो की क्या गलती है वो तो बस हमें खुश रखना चाहते है अगर हम उनके साथ चलते है तो हम और उनके करीब आ जायँगे और वैसे भी मैंने अब तक प्रतिक के साथ बहुत गलत किया है अब मई उसे एक माँ की प्यार देना चाहती हु ताकि वो पीछे की साडी बाटे भूल जाये और इसके लिए हमें उसकी बात माननी पड़ेगी.

इतना बोलने के बाद वो भी अपने रूम में तैयार होने चली गयी उसको वह से जाने के बाद अजय भी तैयार होने चले गए करीब आधा घंटा में सरे लोग तैयार हो कर अपने रूम से बहार आये शॉपिंग पर जाने के लिए अपने घर से निकल गए.

इधर संजीत मुखर्जी अनन्य के पास से बेइज्जती हो कर घुसे से अपने घर चला गया जब वो अपने घर ने एंटर किया तो शैलेन्द्र मुखर्जी के नजर के नजर संजीत पर पड़ी तो वो समझ गए की संजीत किसी बात को ले कर घुसे में है और संजीत जब घुसे में होता है तो जरूर कुछ न कुछ गड़बड़ करता है इस लिए वो जल्दी से संजीत के पास गया और उससे बोलै.

शैलेन्द्र- क्या बात है संजीत तुम इतने घुसे में क्यों हो कुछ हुआ है क्या (फिर कुछ सोचते हुए) तुम तो सतीशचंद्र के लड़की से मिलने गए थे न क्या हुआ वो मिली नहीं क्या तुम्हे.

अनन्य के बारे में सुन कर संजीत को और गुसा आता है और वो घुसे से पास में रखे हुए फ्लावर पॉट को उठा कर निचे पटक देता है और शैलेन्द्र से घुसे में बोलता है.

संजीत- नाम मत कीजिये उस लड़की के डैड मेरा मन तो कर रहा है की मई उसे बिच बाजार में नंगा कर के मरू.

संजीत के बात सुन कर शैलेन्द्र हैरान हो जाते है फिर वो घुसे से संजीत से बोलते है.

शैलेन्द्र- तुम ये क्या बोल रहे हो वो लड़की तुम्हारी बीवी और इस घर के बहु बनाने वाली है इस लिए तुम उसकी तोड़ी तो इज्जत करो वैसे उसने ऐसा क्या कर दिया की तुम उस पर इतना भड़के हुए हो.

शैलेन्द्र के बात सुन कर संजीत घुसे से उससे बोलता है.

संजीत- भड़कु नहीं तो और क्या करू डैड आप नहीं जानते की उस लड़की ने मेरे साथ क्या किया है आज तक किसी भी लड़की के इतना औकात नहीं था की वो संजीत मुखर्जी को कुछ बोल सके या बेइज्जती कर सके लेकिन उस लड़की ने मेरी सरेयाम बेइज्जती की है और अगर वो सिर्फ मेरी बेइज्जती करती तो मई थोड़ा बर्दास्त भी कर लेता लेकिन उसने पूरा मुखर्जी परिवार की बेइज्जती की है और मई ये बर्दास्त नहीं कर सकता मुझे उसे सबक सीखना hi होगा.

संजीत के बात सुन कर शैलेन्द्र और हैरान और परेशां हो जाता है फिर वो खुद को सँभालते हुए उससे बोलता है.

शैलेन्द्र- मुझे साफ साफ बताओ की आखिर वह पर हुआ क्या था.

शैलेन्द्र के बात सुन कर संजीत उसे साडी बात बता देता है जिसे सुन कर वो परेशां हो जाता है.

शैलेन्द्र- तुम्हारी बात सुन कर तो ऐसा लग रहा है की वो बहुत गमंडी है और वो तुम्हे थोड़ा भी पसंद नहीं करती है और न hi वो तुमसे सदी करना चाहती है अगर तुम्हारा सदी उसके साथ नहीं हुआ तो हमें सूर्यवंशी परिवार का सपोर्ट नहीं मिलेगा और अगर सूर्यवंशी परिवार का सपोर्ट हमें नहीं मिला तो हम राठौर को छू भी नहीं सकते है नहीं ऐसा नहीं होना चाहिए तुम्हे कुछ भी कर के उससे मानना hi होगा.

शैलेन्द्र के बात सुन कर संजीत कुछ सोचने लगता है फिर वो कुछ सोचते हुए शैलेन्द्र से बोलता है.

संजीत- डैड मुझे किसी भी तरह से उससे कल अकेले में मिलना hi होगा अगर मई उससे अकेले में मिलने में कामयाब हो गया तो मई किसी भी तरह से उसे अपना बना कर hi रहूँगा और अगर वो एक बार मेरे बिस्तर में आ गयी तो फिर वो खुद मुझसे सदी करने के लिए बोलेगी बस आप किसी भी तरह से उससे मिलने का जुगाड़ बना दीजिये.

संजीत के बात सुन कर शैलेन्द्र कुछ सोचते हुए बोलता है.

शैलेन्द्र- ठीक है मई सतीशचंद्र से बात करता हु वो जरूर अपनी लड़की को तुमसे मिलने के लिए मन लेगा बस तुम कल उससे मिलने की तयारी करो और है तुम कल जो भी करना वो किसी को पता नहीं चलना चाहिए खास कर के सतीशचंद्र और मुकेश को समझे.

संजीत- आप चिंता मत कीजिये डैड किसी कुछ भी पता नहीं चलेगा और अगर चल भी गया तो कोई हमारा क्या बिगड़ लेगा लेकिन डैड मुकेश के वह रहते हुए मई अनन्य से अकेले में कैसे मिल पाउँगा और अपना प्लान आगे कैसे बढ़ाऊंगा.

शैलेन्द्र- तुम मुकेश को चिंता मत करो उसको मई संभल लूंगा.

इतना बोल कर शैलेन्द्र अपना मोबाइल निकलता है और सतीशचंद्र को कॉल लगा देता है.

इधर सतीश चंद्र अपने लिविंग रूम में बैठे हुए थे की तभी उनका मोबाइल रिंग करने लगा जब उन्होंने देखा की उनके मोबाइल पर शैलेन्द्र मुखर्जी का कॉल आ रहा है तो वो जल्दी से कॉल रिसीव किया और बोलै.

सतीशचंद्र- हैल्लो है शैलेन्द्र जी बोलिये आज आपको मेरी यद् कैसे आ गयी.

शैलेन्द्र- क्या करे सतीशचंद्र जी कुछ काम hi ऐसा आ गया की मुझे आपको यद् करना पद गया.

सतीशचंद्र- वह... तो बताइये मर. मुखर्जी मई आपकी कैसी मदत कर सकता हु.

शैलेन्द्र- वो बात ऐसी है की हम एक बिज़नेस डील करने वाले है तो मई सोच रहा हु की ये बिज़नेस डील मई आपके साथ करू आप क्या बोलते है.

शैलेन्द्र के बात सुन कर सतीश चंद्र बहुत खुस हो गए और वो खुसी के साथ बोले.

सतीश चंद्र- ये तो बहुत खुसी की बात है मई तैयार हु आपके साथ बिज़नेस करने के लिए आप बताइये की मुझे कब अपने साथ डील सिग्नेचर करने आ होगा.

शैलेन्द्र- आना तो आपको आज hi पड़ेगा क्युकी वो हमारा मैं क्लाइंट है वो आज hi आ रहा है.

शैलेन्द्र के बात सुन कर सतीशचंद्र टेंशन में आ जाते है क्युकी वो आज किसी भी हालत में मुंबई नहीं जा सकते थे तभी उनको यद् आया की उनका बीटा और बेटी अभी मुंबई में hi है तो वो कुछ सोचते हुए शैलेन्द्र से बोले.

सतीश चंद्र- शैलेन्द्र जी मई तो आज मुंबई नहीं आ सकता हु लेकिन मेरा बीटा वही पर है तो क्या वो मेरे जगह डील सिग्नेचर कर सकता है.

सतीश चंद्र के बात सुन कर शैलेन्द्र के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गया और वो मुस्कुराते हुए सतीशचंद्र से बोलै.

शैलेन्द्र- अरे इसमें भी कुछ पूछने की जरुरत है आपका बीटा ये डील सिग्नेचर कर सकता है वैसे भी आगे चल कर आपका बिज़नेस वही तो सँभालने वाला है.

सतीशचंद्र- अगर ऐसी बात है तो मई उसे अभी आपके पास भेजता हु वो अभी आपके पास जा कर डील सिग्नेचर कर लेगा.

शैलेन्द्र- जी जरूर आप उसे यहाँ भेज दीजिये बाकि का मई संभल लूंगा वैसे सतीशचंद्र जी मुझे आपसे एक और बात करनी थी.

सतीशचंद्र- है बोलिये न शैलेन्द्र जी क्या बात करनी थी.

शैलेन्द्र- अपने अपनी बेटी और मेरे बेटे के सदी के बारे में क्या सोचा है.

सतीशचंद्र- मई तो इस सदी के लिए तैयार हु लेकिन सायद इस सदी के लिए अनन्य तैयार नहीं है और मई अपनी बेटी के इक्छा के खिलाफ जा कर उसकी सदी नहीं कर सकता लेकिन आप चिंता मत कीजिये अभी उसे कुछ वक़्त और दीजिये सायद कुछ वक़्त बाद वो तैयार हो जाये.

शैलेन्द्र- है आपकी बात तो सही है वैसे मई क्या बोलता हु की अनन्य भी मुंबई आयी हुयी है तो क्यों न आप उसे एक बार मेरे बेटे से मिलने के लिए बोलिये सायद जब वो मेरे बेटे से मिलो तो वो सदी के लिए तैयार हो जाये.

सतीशचंद्र- आप ठीक बोल रहे है अगर हमें इन दोनों के सदी करवानी है तो उन दोनों को एक दूसरे को समझना जरुरी है मई अनन्य से बात कर के उसे आपके बेटे से मिलने के लिए बोलता हु ठीक है मई अन्य से बात कर के आपको बताता हु.

इतना बोल कर सतीश चंद्र अनन्य के पास कॉल कर देते है.
 
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