Thriller "विश्वरूप" ( completed ) - Page 19 - SexBaba
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Thriller "विश्वरूप" ( completed )

👉एक सौ त्रेसठवाँ अपडेट

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स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट यशपुर

कोर्ट रुम में विश्व, पत्री बाबु, सुधांशु मिश्रा और इंस्पेक्टर दास के साथ कुछ गाँव वाले बैठे हुए हैं l कोर्ट रुम के बाहर सुप्रिया और कुछ दूसरे चैनल वाले कोर्ट रुम मैं घुसने की कोशिश कर रहे थे जिन्हें पुलिस सख्ती से रोक दिया था इसलिए सारे न्यूज चैनल वाले बाहर हल्ला कर रहे थे l थोड़ी देर बाद तीनों जजों के गाडियाँ एक के बाद एक परिसर में आते हैं l उनके आते ही पुलिस वाले उन्हें मीडिया वालों से बचाते हुए कोर्ट के अंदर पहुँचा देते हैं l आज मीडिया वालों के साथ राजगड़ और यशपुर के लोग भी भीड़ बना कर खड़े थे l हाँ यह बात और है कि वे लोग अंदर आने के लिए जरा भी प्रयास नहीं कर रहे थे l कोर्ट रुम के भीतर हॉकर सबको ज़जों के आने की सूचना देता है l सभी सम्मान में खड़े हो जाते हैं l

तीनों जज, अपनी अपनी जगह पर बैठ जाते हैं l मुख्य ज़ज औपचारिक परंपरा निभाते हुए गैवल को टेबल पर मारते हुए 'ऑर्डर' 'ऑर्डर' कहता है l

ज़ज - आज की कारवाई शुरु की जाए... वादी पक्ष अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं... (विश्व एक काग़ज़ निकाल कर राइटर के हाथ में देता है) प्रतिवादी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं... (कोर्ट रुम में सन्नाटा था, क्यूँकी ना तो कोर्ट में भैरव सिंह था ना ही उसके तरफ़ से कोई और) (ज़ज अपनी नजरें घुमा कर चारों तरफ़ देखता है, उसे भैरव सिंह की अनुपस्थिति का एहसास होता है, तो ज़ज इंस्पेक्टर दास से पूछता है) इंस्पेक्टर दास... आप अपनी केस पर जो छानबीन की है... उस पर रौशनी डालें...

इंस्पेक्टर दास अपनी जगह से उठता है और एक फाइल को राइटर के हाथ में देता है l राइटर जज को फाइल सौंप देता है l जज फाइल हाथ में लेकर कुछ पन्ने पलटता है और फिर

जज - इंस्पेक्टर दास... इस केस के बाबत अदालत को... क्या आप मौखिक रूप से संपूर्ण विवरण देंगे...

दास - जी माय लॉर्ड...

इंस्पेक्टर दास कटघरे में जाता है और अपनी टोपी निकाल कर काख में दबा कर खड़ा हो जाता है l फिर दास कहना शुरू करता है l

दास - माय लॉर्ड... अदालत से हमें जैसे ही आदेश मिला... हमने तुरंत कमल कांत जी की खोज के लिए जो मुमकिन था... वह सब हमने किया... हाँ कुछ हद तक... हमें क्षेत्रपाल जी से मदत मिली... पर वह नाकाफी था... इसलिए इन सात दिनों में... जितना संभव हुआ... उतना हमनें खोजबीन की... उसके आधर पर रिपोर्ट बना कर... अदालत के सामने प्रस्तुत कर दिया...

जज - ठीक है... अब अपनी रिपोर्ट को विस्तृत रूप में... अदालत को अवगत कराएं...

दास गवाह वाली कटघरे में आता है l गावही के पूर्व अपनी सारी औपचारिकताओं को पूर्ण करता है फिर जजों को देखते हुए कहना शुरु करता है

दास - माय लॉर्ड... तारीख xxxx को हमें एसपी ऑफिस से एक ऑर्डर फैक्स के थ्रु मिला... आप फाइल की पहली ऐनेक्स्चर में देख सकते हैं... जिसमें कहा गया था... राजा साहब के घर में... विवाह उत्सव होने वाला है... उनके होने वाले दामाद को सुरक्षा मुहैया करते हुए... बाराती की तरह महल तक पहुँचाया जाए... माय लॉर्ड... मैं और मेरी पुरी टीम... इसको बखूबी अंजाम दिया... उसके बाद वर... उर्फ कमल कांत जी को... परंपरा निभाते हुए... राजा साहब के अपनों के द्वारा... विवाह बेदी तक ले जाया गया... बेदी पर रस्म खत्म होने पर... वर को... उनके लिए... उपलब्ध करायी गई प्रकोष्ठ को... राजा साहब के निजी सुरक्षा कर्मचारियों के द्वारा ले जाया गया... हम केवल वहाँ मूक दर्शक थे... कुछ देर बाद... सत्तू नाम का महल का नौकर राजा साहब के कान में कुछ कहा... उसके बाद राजा साहब और उनके निजी सुरक्षा अधिकारी अंदर गए... तत्पश्चात कुछ समय बाद... मेरे फोन पर... अमिताभ रॉय जो कि राजा साहब के निजी सुरक्षा अधिकारी हैं और वर्तमान ESS के निर्देशक भी हैं... उनका फोन आया... फिर मैं अकेला... केके जी के प्रकोष्ठ में गया... और वहाँ पर मुआयना करने के बाद... उस समय मुझे लगा... शायद साहब केके भाग गए हैं... पर राजा साहब... उनके अपहरण होने की संभावना व्यक्त करते हुए... केस दर्ज करने के लिए कहा... पर चूंकि चौबीस घंटे नहीं हुए थे... इस लिए उन्हें मैंने सुबह तक इंतजार करने के लिए कहा था... आगे जो भी हुआ... वह अदालत के संज्ञान में है...

जज - आपने केवल एक ऐनेक्स्चर रिपोर्ट में प्रस्तुत की है... बाकी जो रिपोर्ट बनाया है... उसका आधार क्या है...

दास - (एक पेन ड्राइव निकाल कर राइटर के हाथ में देता है, जिसे राइटर जज को दे देता है) माय लॉर्ड यह वह वीडियो है... जिसे राजकुमारी जी की एक दोस्त ने शूटिंग की थी... इससे आप मेरी कही बातों को पुष्टि कर सकते हैं... इस वीडियो में... वर के पहुँचने से लेकर... मुझ तक खबर आने की सारी बातें रिकार्डिंग हुई है...

जज - ठीक है... पर महल के भीतर की तहकीकात के बारे में... आपने ज्यादा कुछ नहीं लिखा है... और सबसे अहम बात... कमल कांत... अभी भी लापता हैं...

दास - जी माय लॉर्ड... पर सच्चाई यह भी है... महल के जिस हिस्से तक.. मैं अपनी तहकीकात को ले जा पाया... वहाँ तक... आज तक कोई भी... सरकारी या गैर सरकारी अधिकारी नहीं पहुँच पाया है... उससे आगे जाकर तहकीकात करने के लिए... हमें कोई... सर्च वारंट नहीं मिला है... अब चूँकि... महल में कोई सरकारी सुरक्षा नहीं थी... राजा साहब की निजी सुरक्षा प्रबंधन थी... हम अभी उन्हीं लोगों को... रंग महल में... नजर बंद कर पूछताछ कर रहे हैं... पर अभी तक कोई भी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच पाए हैं...

जज - तो... केस में फिर कैसे आगे बढ़ा जाए...

विश्व - एस्क्युज मी माय लॉर्ड... क्या मैं कुछ कहूँ...

जज - हाँ जरूर... कहिये...

विश्व - माय लॉर्ड... यह एक स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट है... और इस कोर्ट का गठन किसी और केस के लिए की गई थी... इस कोर्ट की मकसद कुछ और थी... एक गैर जरूरत केस में... सात दिन बर्बाद हो चुके हैं... और सात दिन पुरे होने के बावजूद... राजा भैरव सिंह... आज कोर्ट में उपस्थित नहीं हैं...

जज - मिस्टर विश्व प्रताप... आप यह मत कहिये... हम यहाँ क्यूँ हैं... किस लिए हैं.... इस कोर्ट को मकसद ना समझाये... एक बात याद रखें... लॉ बुक हमेशा यह कहती है... जस्टिस हरिड... मतलब जस्टिस बरीड...

विश्व - लॉ बुक यह भी कहती है... जस्टिस डिले... मतलब जस्टिस डिनाय...

जज - (चीख उठता है) होल्ड योर टोंग...(कोर्ट में सन्नाटा पसर जाता है) आप अपनी सीमा से बाहर जा रहे हैं...

विश्व - नहीं माय लॉर्ड... (एकदम शांत लहजे में) मैं ऐसी गुस्ताखी नहीं कर सकता... जिस केस के लिए... जो दिन तय किए गए थे... उसमें से सात दिन बीत चुके हैं... केके साहब के गायब होने को... इस केस से क्यूँ जोड़ा जा रहा है... और राजा साहब... मुल्जिम हैं... प्रतिवादी हैं... जिन्हें अपनी तहकीकात में... एक्जिक्युटीव मैजिस्ट्रेट माननीय श्री नरोत्तम पत्री जी के द्वारा... आरोपित स्थापित किया जा चुका है...

जज - मिस्टर... विश्व प्रताप... आप अदालत की तौहीन कर रहे हैं....

विश्व - नहीं योर ऑनर...

जज - (गैवेल को टेबल पर मारते हुए) ऑर्डर ऑर्डर ऑर्डर... यह अदालत आपको अंतिम चेतावनी देती है... अगर आप कारवाई पर प्रश्न चिन्ह लगाएंगे... तो आपको इस केस से हटा दिया जाएगा...

विश्व - आई एम एक्सट्रीमली सॉरी माय लॉर्ड... मुझे माफ कर दीजिए...

जज - यह अदालत एक घंटे के लिए मुल्तवी किया जाता है...

तीनों जज अपनी जगह से उठते हैं और कमरे से बाहर निकल जाते हैं l अपनी जबड़े भिंच कर विश्व वहीँ खड़ा रह जाता है l पीछे से पत्री बाबु आकर उसके कंधे पर हाथ रखते हैं l विश्व मुड़ कर देखता है l

पत्री - चलो बाहर चलते हैं...

दास - हाँ... थोड़ी चाय बाय पीते हैं... बहुत गर्म हो गए हो... थोड़ा ठंडा हो लो...

विश्व, पत्री, दास और सुधांशु मिश्र चारों बाहर आते हैं l बाहर विश्व के चारों दोस्त चाय की दुकान पर खड़े थे l उनसे भी कुछ दूर गाँव के बहुत सारे लोग विश्व की ओर टकटकी लगा कर देखे जा रहे थे l दुकान पर पहुँच कर विश्व एक बहुत गहरी साँस लेता है और बेंच पर बैठ जाता है l दास इशारा करता है तो सीलु एक चाय की ग्लास लेकर विश्व के हाथ में देता है l तभी उनके पास सुप्रिया चल कर आती है l

पत्री - मुझे लगा नहीं था... तुम इस कदर भड़क जाओगे... रिएक्ट करोगे...

दास - तुमने जज का मुड़ ऑफ कर दिया...

विश्व - आई एम सॉरी... पर मैं शर्मिंदा नहीं हूँ...

पत्री - हाँ... जानता हूँ...

विश्व - इस केस को यहाँ लाया गया... उसके लिए... तीस दिन मुकर्रर किया गया... अब... आज आठवाँ दिन हैं...

दास - हाँ... यह बात तो है...

पत्री - मैं समझ रहा हूँ...

सुप्रिया - तुम्हें पहली बार इतनी फ्रस्ट्रेशन में देख रही हूँ...

विश्व - आप कुछ समझी...

सुप्रिया - अब तक जितना सुना... समझा... केस फाइल का पहला पन्ना तक शायद नहीं पलटा गया है....

विश्व - हाँ... राजा केस को यहाँ लेकर आया... उसके लिए... तीस दिन की सुनवाई मुकर्रर किया गया... पहली ही दिन... सात दिन को सम्वेदना के रूप में बर्बाद कर दिया... और आज अभी तक नहीं आया है...

दास - इसी बात के फ्रस्ट्रेशन में... आज विश्व बाबु अदालत में... अपना टेंपरामेंट लूज कर बैठे... जज साहब ने फ़िलहाल के लिए वॉर्न किया है...

टीलु - पर इसमे विश्वा भाई का दोष कहाँ है... जो मुज़रिम है... उसकी सहूलियत देखी जा रही है... सिर्फ एक आदमी की... जब कि इस केस में हज़ारों लोग जुड़े हैं... वह देखो... (लोगों की ओर इशारा करते हुए) क्या यह लोग... इनके हालत... वक़्त... कुछ भी मायने नहीं रखते... लोग ही नहीं... सिस्टम... सिस्टम से जुड़े लोग... सिस्टम का वक़्त और पैसा... सब बर्बाद हो ही रहा है...

पत्री - ना.... आज दिन खत्म हुआ है... ना केस... घंटे भर के लिए... ब्रेक लिया गया है... राजा आ गया तो ठीक... वर्ना... अदालत... राजा के खिलाफ शो कॉज नोटिस इश्यू करेगा... इसलिए... हैव पेशेंस...

सुप्रिया - हाँ सिस्टम की इसी चाल के वज़ह से... న जानें कितने केसेस अदालत के फाइलों में साड़ती रहती है... इंसाफ़ के लिए आँखे तरस जाती हैं... वेल... क्या इस बात को... अभी के अभी न्यूज ब्रीफिंग में टेलीकास्ट कर दूँ...

विश्व - नहीं... अभी नहीं... थोड़ी देर में... सुनवाई फिर से शुरू हो जाएगी... आज का दिन खत्म हो जाने दो...

विश्व उठता है, उसके साथ सुधांशु, दास और पत्री अदालत के कमरे में जाते हैं l कुछ मिंटो बाद तीनों जज अपनी अपनी आस्थान में बैठ कर औपचारिकता निभाते हैं l

जज - इंस्पेक्टर दास...

दास - तो आपकी फाइनल रिपोर्ट क्या है...

दास - माय लॉर्ड... केके कोई आम आदमी नहीं हैं... कंस्ट्रक्शन किंग के नाम से जाना जाता है... और यह सच है... उनकी शादी राजकुमारी जी से तय हुई थी... मतलब यह केस एक हाई प्रोफाइल केस हो गया है... और जिस दिन यह कांड हुआ... हमें और गाँव वालों को लगा कि वह शादी का दिन था... पर राजा साहब ने अदालत में उसे मंगनी कहा है... खैर... सच यह है कि... केके साहब... गायब हुए हैं... वह भी महल के भीतर से... उनको दी गई... उन्हीं की कमरे से... मौका ए वारदात को मध्य नजर रखते हुए... हमें यह लगा कि वह महल से भाग गए हैं... पर अभी भी वह लापता हैं... हमने पूछताछ कर ली... पर अभी तक किसी के भी नजर में आए नहीं हैं... ना राजगड़ अथवा यशपुर में... ना ही कटक या भुवनेश्वर में...

जज - तो आप इस केस को किस तरह से कंक्लुड करना चाहते हैं...

दास - केके साहब का ना मिलना... मेरा मतलब है... किसी को नज़र ना आना... हो सकता है... महल के भीतर ही कुछ हो गया हो... महल के भीतर तहकीकात करना... हमारी वश की बात नहीं है...

जज - क्यूँ...

दास - महल की चौखट लाँघ कर... नहीं जज साहब... यह एक हाई प्रोफाइल केस है... हमारी औकात के बाहर की... बेशक अभी तक राजा साहब ने... तहकीकात में साथ दिया है... पर इससे आगे... या तो सीआईडी जा सकती है... या फिर... कोई स्पेशल टास्क फोर्स.... हम सरेंडर करते हैं...

कुछ देर के लिए अदालत में सन्नाटा छा जाता है l जज हैरानी भरे नजरों से दास को देखे जा रहा था, के तभी कमरे में बल्लभ का प्रवेश होता है l वह एकदम से बदहवास दिख रहा था l

बल्लभ - मे आई बी एक्सक्युज्ड माय लॉर्ड... क्या मैं अंदर आ सकता हूँ...

जज - आइए... प्रधान बाबु... (बल्लभ अंदर आता है)

बल्लभ - माय लॉर्ड... राजा साहब... आने ही वाले थे... पर... (रूक जाता है)

जज - आप अपनी बात पूरी कीजिए...

बल्लभ - राजा साहब के पिता... बड़े राजा.. नागेंद्र सिंह जी का देहांत हो गया है... यह रहा मेडिकल रिपोर्ट और डेथ सर्टिफिकेट...

नागेंद्र की मौत की खबर सुन कर विश्व और दूसरे लोग अपनी अपनी कुर्सी से उछल पड़ते हैं l बल्लभ फाइल से डेथ सर्टिफिकेट निकाल कर राइटर के हाथ में देता है l राइटर उसे लेकर जज के हाथ में दे देता है l जज उस सर्टिफिकेट को देखते हुए पहले विश्व को देखता है जैसे वह विश्व को अनुताप कराना चाहता हो फिर बल्लभ की ओर देखता है l

जज - यह बहुत ही दुख की बात है...

बल्लभ - जी माय लॉर्ड... इसलिए राजा साहब ने... अदालत को एक अनुरोध पत्र दिया है... के उन्हें उनके पिता जी के मरणोपरांत मुखाग्नि सहित श्राद्ध के अनुष्ठान करने तक पंद्रह दिनों की मोहलत दी जाए... उसके बाद वह बिना किसी शर्त के... अदालत को... सुनवाई और कारवाई मैं पूर्ण सहयोग प्रदान करेंगे... (फाइल से एक और काग़ज़ निकाल कर राइटर को देता है जिसे राइटर जज को दे देता है)

जज - ह्म्म्म्म... वादी पक्ष के वकील... अब तो आप समझ गए होंगे... राजा साहब अभी तक अदालत में क्यूँ नहीं पहुँचे...

विश्व - जी... माय लॉर्ड...

जज - अदालत... राजा साहब के दिए इस अनुरोध पत्र पर... आपकी राय जाननी चाहती है...

विश्व - (अपनी जबड़े भिंच कर चेहरा नीचे कर लेता है)

जज - मिस्टर विश्व प्रताप... अदालत आपसे... आपकी राय जानना चाहती है...

विश्व - (अपना सिर ऊपर उठाता है, एक सरसरी निगाह बल्लभ पर डालता है और फिर जज की ओर देखते हुए) राजा जी की पत्र पर... न्यायलय जो भी न्याय संगत निर्णय ले... वादी पक्ष के वकील होने के नाते... मुझे वह स्वीकार्य होगा...

जज - ठीक है... यह अदालत.. राजा साहब की... अनुरोध पत्र को स्वीकार करती है... आज से ठीक पंद्रह दिनों बाद... राजगड़ मल्टिपर्पोज कोऑपरेटिव सोसाईटी केस पर सुनवाई... सोनपुर में शुरु करेगी... तब तक के लिए... यह अदालत स्थगित किया जाता है... नाउ दी कोर्ड इज़ एडजॉर्नड...

विश्व मुट्ठीयाँ भिंच कर कुर्सी पर बैठ जाता है l तीनों जज और बल्लभ कमरे से निकल चुके थे l बहुत भारी कदमों और झुके कंधों के साथ विश्व बाहर आता है l उसके पीछे दास, पत्री और सुधांशु आते हैं l उसी चाय की दुकान पर बैठ जाते हैं l विश्व को देख कर सुप्रिया और उसके दोस्त विश्व के पास आते हैं l

सुप्रिया - विश्वा... क्या हुआ... यह वकील प्रधान... आँधी की तरह आया... और तूफान की तरह चला गया...

दास - हमें इंतजार था... भैरव सिंह के आने का... पर प्रधान आया... बड़े राजा की मरने की खबर लेकर..

सुप्रिया - ह्वाट... यु मीन... नागेंद्र सिंह...

पत्री - हाँ... और अदालत ने... भैरव सिंह को पंद्रह दिन की मोहलत और दे दी है...

सुधांशु - आज का आठवाँ दिन और पंद्रह दिन... हो गए तेईस दिन... चौबीसवें दिन अदालत खोलेगी... उसके बाद... (एक पॉज) क्या किस्मत पाया है यह राजा भैरव सिंह ने... वह दिन और वक़्त बर्बाद किए जा रहा है... किस्मत और अदालत... उसका साथ दिए जा रहे हैं...

विश्व - (सिर उठा कर देखता है) गाँव वाले कोई भी नहीं दिख रहा था) यह गाँव वाले... कहाँ गए...

सीलु - उन्हें इंतजार था... इंसाफ़ का.. पर खबर बाहर लेकर आया... वकील प्रधान... सब के सब... गाँव वापस लौट गए... शायद... बड़े राजा को कंधा देने... रूदाली बन कर रोने धोने...

दास - विश्वा... तुम तो राजकुमारी के कॉन्टैक्ट में रहते हो ना... नागेंद्र सिंह की मौत की खबर तुम्हें क्यूँ नहीं मिली... आई मीन...

विश्व अपनी जेब से मोबाइल निकाल कर कॉल चार्ट देखता है l उसे आज सुबह भी कॉल नहीं आया था, जिसे विश्व ने नजर अंदाज कर दिया था l विश्व कॉल रजिस्टर से नकचढ़ी नाम ढूंढ कर कर कॉल डायल करता है, और सबको चुप रहने का इशारा करता है l कॉल रिंग हो रही थी l चार या पाँच रिंग के बाद कॉल पीक होता है, हैलो कहने जा रहा था पर कुछ सोच का विश्व खामोश रहता है l उधर से भी, विश्व को कोई जवाब नहीं आ रहा था l तकरीबन दो मिनट तक विश्व मोबाइल को कान से लगाए बैठा था ना वह कुछ कह रहा था ना ही उसे फोन से कोई जवाब मिल रहा था l विश्व कॉल काट देता है और फोन अपनी जेब में रख लेता है l

दास - क्या हुआ... तुमने कॉल किया... पर ना कोई सवाल ना कोई जवाब...

विश्व - फोन... भैरव सिंह ने उठाया था...

सब - क्या...

टीलु - भाभी सही सलामत तो हैं ना...

विश्व - हाँ.. होंगी...

दास - तुम्हें कैसे पता... आई मीन... तुमने कॉल किया... तुम्हारा... नाम या नंबर डिस्प्ले तो हुआ होगा...

विश्व - नहीं... मेरी मोबाइल... एंक्रिप्टेड है.. डिस्प्ले में सिर्फ ऑननॉन लिखा आयेगा...

सीलु - पर भाभी की मोबाइल... राजा साहब के पास आई कैसे...

सुप्रिया - क्या... राजा भैरव सिंह को... फोन पर तुम्हारा अंदाजा हो गया होगा...

विश्व - मालूम नहीं... पर अब मुझे राजगड़ जाना होगा...

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दास अपने दो कांस्टेबलों के साथ पुलिस की जीप लेकर क्षेत्रपाल महल के परिसर में आता है l देखता है महल की पहरेदारी पहले जैसी हो गई थी l उसके लगाए दो कांस्टेबल नहीं दिख रहे थे l चप्पे-चप्पे पर ESS के गार्ड्स और पहलवान खड़े थे l बाहर बरामदे पर एक कुर्सी पर भैरव सिंह बैठा हुआ था l उसके बाल बिखरे हुए थे l चेहरा मुर्झाया हुआ था l दास जीप से उतर कर सीढ़ियां चढ़ते हुए भैरव सिंह के सामने खड़ा होता है l भैरव सिंह अपनी रुबाब से भरी नजर से दास की ओर देखता है l

दास - आई एम सॉरी राजा साहब... बड़े राजा जी के बारे में... मुझे अदालत में मालूम हुआ...

भैरव सिंह - ह्म्म्म्म...

दास - यह... आई मीन... बड़े राजा जी का देहांत कब हुआ...

भैरव सिंह - (चेहरे पर कोई भाव नहीं था) तुम जान कर क्या करोगे... जान फूंकने आए हो क्या...

दास - नहीं बस...

भैरव सिंह - डॉक्टर... डेथ सर्टिफिकेट दे चुका है... वैसे तुम्हें किस बात की चूल मची है...

दास - मैं यहाँ आपसे... दुख जताने आया था...

भैरव सिंह - जता दिए...

दास - जी..

भैरव सिंह - दफा हो जाओ...

दास - जी चला जाता हूँ... पर मैं आपसे यह पूछने आया था... के... मेरे दो कांस्टेबल नहीं दिख रहे हैं... और आपने हमसे क्लियरेंस लिए वगैर... अपनी सिक्योरिटी रिइंस्टीट भी कर लिया...

भैरव सिंह - (सीरियस व रौब भरी आवाज में) इंस्पेक्टर... आज तलक... किसी माई के लाल ने... जो हिम्मत नहीं की... वह तु कर गया... हमने तुझे जितनी इज़्ज़त देनी थी दे दी... अब तु किसी लायक नहीं रह गया है... के तुझे हम इज़्ज़त और इजाजत बख्शें... तूने ही... केके की केस में... अदालत में सरेंडर हो गया ना... तेरी सरेंडर होने के बाद ही... मेरी सेक्योरिटी पर तेरी कानूनी कब्जा भी सरेंडर हो गई.... आज महल में मातम है... इसलिए यहाँ तक तु आ गया... कल से यह हिमाकत गलती से भी मत करना... (हाथ से इशारा करते हुए गेट की ओर दिखता है) अगली बार... उस गेट के बाहर से ही बात करना... वर्ना...

भैरव सिंह चुप हो जाता है l तब तक दास और उसके दो कांस्टेबलों को भीमा और उसके गुर्गे घेर लेते हैं l दास अपनी हॉलस्टर से रीवॉल्वर निकाल लेता है l सारे पहलवान वहीँ रुक तो जाते हैं पर कोई पीछे नहीं हटता l सबके चेहरे पर गुस्सा और नफरत झलक रही थी l दास और उसके दो कांस्टेबल घेरे में थे l कुछ और पहलवान दास की खड़ी की हुई जीप के पास आते हैं और धक्का लगा कर गाड़ी को बाहर निकाल देते हैं फिर ताकत लगा कर जीप को गेट के बाहर पलटा देते हैं l सारे पहलवाल यह सब जिस तरह से आवाज निकाल कर चिल्लाते हुए गाड़ी पलट रहे थे माहौल को डरावना कर रहा था l दास इससे पहले कभी डरा नहीं था l पर आज जिस तरह से सारे पहलवान आवाज निकाल कर जीप को गेट के बाहर ले गए और पलट दिए, दास और उसके साथ आए कांस्टेबल दोनों भी डर गए l वे दोनों, दोनों तरफ़ से दास के बाजुओं को पकड़ लेते हैं l गाड़ी के पलटने के बाद पहलवान जो उन्हें घेर कर खड़े हुए थे, वे सारे किनारे हो जाते हैं और दास और कांस्टेबलों को बाहर जाने का रास्ता देते हैं l दास दो सीढ़ियां उतरा ही था के भैरव सिंह उसे कहता है

भैरव सिंह - दास... (दास मुड़ कर वापस देखता है) हमने थोड़ी ढील क्या दी... तो सबने हमारे बाप बनने की होड़ में शामिल हो गए... तुम भी... अपनी औकात भूल कर... हमारे बाप बनने की कोशिश की... पर यह मत भूलना... बाप हमेशा बाप ही होता है... यह सब आज जो तेरे साथ हुआ... समझ तो तु जरूर गया होगा... आज... (बेहद कड़क आवाज में) अगर महल में मातम ना होता... तो... खैर... अब तु... और तेरे साथ आए यह दो लंगूर इन्हें उठा कर ले जाओ.... (दास जो दो कांस्टेबल को महल के पहरेदारी पर छोड़ गया था, उन्हें मरियल हालत में पहलवान उठाकर सीढियों के नीचे फेंक देते हैं) तु इन्हें भूल कैसे गया... जा आज अपने पैरों पर जा रहे हो... इस बात का शुक्र मनाओ के आज तुम लोग... वर्दी में जा रहे हो... जाओ... इन दो हराम खोरों को उठा कर लेके जाओ.... (दास उनकी हालत देख कर हैरान हो जाता है, वह लोग जिंदा तो थे पर बेहद बुरी तरह से मार खाए हुए थे l दर्द से कराह रहे थे l दास अपने साथ आए कांस्टेबलों को उन्हें उठाने के लिए इशारा करता है) दास... यह ऐलान है... तुम्हारी दुनिया... तुम्हारे सिस्टम के खिलाफ... जाओ... जिसको जो कहना है... जाकर कहो... जो उखाड़ना है उखाड़ लो...

दास अपने दो कांस्टेबलों को उन्हें उठाने के लिए कहता है l दोनों कांस्टेबल अपने साथियों को कंधे पर उठा लेते हैं और चलते हुए गेट से बाहर जाते हैं l तीनों पैदल चलते हुए अपने साथियों को कंधे पर उठा कर चले जा रहे थे l गाँव के लोग उन्हें हैरानी भरे निगाह में देख रहे थे l पहली बार दास को अपनी लाचारी महसुस हो रही थी l घुटन भरी बेबसी के साथ सिर झुकाए गाँव के बीचोबीच गुजर रहा था l आज उसका और कानून का भैरव सिंह ने लोगों के सामने तमाशा बना दिया था l

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वैदेही के दुकान में विक्रम मौजूद था, विश्व और उसके चारों दोस्त भी बैठे हुए थे l विश्व बहुत ही गहरी सोच में खोया हुआ था l फिर अचानक से अपनी सोच से बाहर आता है और वैदेही से पूछता है

विश्व - दीदी... तुम्हें कितने बजे मालूम हुआ... बड़े राजा के बारे में...

वैदेही - तुम लोग सुबह नास्ता कर के जल्दी निकल गए थे... उसके कुछ देर बाद विक्रम ने आकर मुझे खबर किया... (विश्व विक्रम की ओर देखता है)

विक्रम - मुझे सुबह सुबह... सेबती ने खबर दी...

विश्व - सुबह सुबह...

विक्रम - हाँ... मतलब आठ... साढ़े आठ बजे...

विश्व - (और भी टेंशन में आ जाता है) (उसे टेंशन में देख कर वैदेही उससे पूछती है)

वैदेही - क्या बात है तु इतनी टेंशन में क्यों है...

टीलु - भाई टेंशन में तो होंगे ही... राजा साहब ने जब भाभी का फोन छिन लिया था... तब सेबती के हाथों भाई ने एक दुसरा मोबाइल भाभी को दिया था... अब वह मोबाइल भी राजा साहब के कब्जे में है... और भाभी की खबर और सलामती के बारे में... भाई कुछ जान नहीं पा रहे हैं...

विक्रम - क्या... नंदिनी के पास मोबाइल था...

टीलु - हाँ... क्यूँ आपको नहीं पता...

विक्रम - नहीं... हाँ पता लगता भी कैसे... मैंने अपना सब कुछ... मोबाइल भी... राजा साहब के पास छोड़ आया था... (थोड़ा रुक जाता है, फिर) पर तुम्हें कैसे पता चला... मोबाइल राजा साहब के पास है...

विश्व - हर सुबह मुझे जगाने के लिए राजकुमारी फोन करतीं थीं... पर आज नहीं किया... मैंने ध्यान भी नहीं दिया था... पर जब बड़े राजा जी के बारे में पता चला... तब राजकुमारी जी को मैंने फोन किया था... राजकुमारी जी के बजाय... फोन राजा साहब ने उठाया था...

वैदेही - क्या... मतलब... राजा को मालूम हो गया होगा... के नंदिनी से तुम रोज फोन पर बात कर रहे हो...

विश्व - नहीं... पता नहीं... पर शायद नहीं मालुम हुआ होगा...

विक्रम - यह तुम कैसे कह सकते हो...

विश्व - क्यूँकी मेरा मोबाइल... ऐंक्रीप्टेड है... और राजा ने जब फोन उठाया... मैंने फोन पर कोई बातचीत भी नहीं की...

वैदेही - ओ... मतलब तुमने फोन पर राजा साहब को सुन कर कोई बात नहीं की...

विश्व - नहीं... उस तरफ़ से.. राजा साहब ने भी कोई बात नहीं की...

गौरी - तो तुझे मालूम कैसे हुआ... दुसरी तरफ राजा साहब ही थे...

गौरी की इस सवाल पर सब विश्व की ओर देखने लगते हैं l विश्व सबकी और देखता है और अपनी जबड़े भिंच कर कहता है

विश्व - रिश्ता ही कुछ ऐसा है... मैं अपनी दोस्तों और दुश्मनों की... खामोशी तक पहचान सकता हूँ... सुन सकता हूँ...

वैदेही - ओ... तो अब तुम्हें इस बात का चिंता है... कहीं नंदिनी...

विश्व - नहीं... राजकुमारी जी की राज... भैरव सिंह को... शायद पता नहीं चला होगा... मेरा दिल कह रहा है... नहीं पता चला होगा...

विक्रम - तुम्हारा दिल तुमसे झूठ नहीं कह रहा होगा... और अगर तुम इतना श्योर हो... तो फिर तुम चिंता क्यूँ कर रहे हो....

विश्व - मैं श्योर नहीं हूँ.. बस अंदाजा लगा रहा हूँ... क्यूँकी... महल में... बड़े राजा जी का देहांत हो गया है... इस बात की जानकारी... मुझे राजकुमारी जी ने नहीं दी... पर जब इस बात की पुष्टि करना चाहा तो.... मोबाइल राजा भैरव सिंह ने उठाया था...

विक्रम - ह्म्म्म्म... ठीक है... तुम्हारी चिंता जायज है... पर महल की अंदर की खबर देने के लिए... अभी सेबती तो मौजूद है ना... और वह महल में... नंदिनी की साये की तरह रहती है... अगर कुछ गड़बड़ हुई होती तो सेबती... मुझे ज़रूर बताती...

वैदेही - हाँ... तुम बे-फिजूल चिंता कर रहे हो...

विश्व - शायद तुम ठीक कह रही हो... मैं शायद... राजकुमारी जी को लेकर बहुत हाइपर हो रहा हूँ...

टीलु - हाँ क्यूँ ना हो... आखिर नई नई शादी जो हुई है... (सब उसे खा जाने वाली नजरों से घूरते हैं) नहीं... मैं.. वह... माहौल को... थोड़ा हल्का करने की कोशिश कर रहा था... हे हे...

विश्व - (विक्रम से) तुम्हें अगर सुबह ही खबर मिल गई थी... तो तुम यहाँ क्या कर रहे हो... तुम्हें तो इस वक़्त महल में होना चाहिए... (अब सबकी नजरें विक्रम की ओर मुड़ जाती है)

विक्रम - हाँ बात तो तुम सही कह रहे हो... पर... मैंने और मेरे साथ चाचाजी ने... मतलब हमने राजा साहब और महल से रिश्ता तोड़ दिया था... लगता है... राजा साहब ने भी हमसे सारे रिश्ते तोड़ दिए हैं...

विश्व - मैं कुछ समझा नहीं...

विक्रम - देखो... सुबह जब सेबती काम पर गई थी... तब उसे ख़बर लगी... के बड़े राजा नहीं रहे... तो उसने अपना फर्ज निभाते हुए मुझे आकर खबर की... मैं जाने के लिए तैयार था भी... इसलिए जब घर से निकल कर जाने लगा... तो पाया... भूरा, शुकुरा और उनके कुछ आदमी घर घर घूम कर... गाँव में लोगों को बड़े राजा जी के बारे में जानकारी दे रहे थे... चूँकि गाँव में ज्यादातर मर्द केस के सिलसिले में यशपुर में थे.... तो यह हिदायत देते हुए कहा कि... दोपहर के बाद सबको महल पहुँचना है... पर... हमारे पास.... कोई नहीं आया...

विश्व - तो इस बात को तुमने दिल से ले लिया...

विक्रम - (एक गहरी साँस छोड़ते हुए) नहीं बात ऐसी नहीं है... मैं जाऊँगा जरूर... पर गाँव वालों के बीच में... एक हो कर... उस महल में से एक हो कर नहीं...

सीलु - ऐसा क्यों...

विक्रम - मैं खुद को... राजकुमार नहीं... इन्हीं गाँव वालों में से एक बनना चाहता हूँ...

क्यूँकी राजकुमार कभी इन गाँव वालों था ही नहीं... पर विक्रम जरूर इन गाँव वालों में से एक है... मैं उस महल में जाऊँगा तो राजगड़ वालों के भीड़ में से एक दिखना चाहूँगा... ना कि महल में से कोई... इसलिए मैं यहाँ आ गया... क्यूँकी... सारे गाँव वाले इसी रास्ते से महल जायेंगे... तो उनकी भीड़ में शामिल हो कर जाऊँगा... पर बात कुछ समझ में नहीं आ रहा... अभी तक तो गाँव वालों को... महल की ओर चले जाना चाहिए...

विक्रम के जवाब के बाद सभी चुप हो जाते हैं, क्यूँकी बात विक्रम ने सही कहा था l गाँव वालों को वैदेही के दुकान के सामने से गुजर कर महल की ओर जाना चाहिए l पर अब तक कोई भी गाँव वाला वहाँ से गुजरा नहीं था, तभी सत्तू आ पहुँचता है l उसे देख कर वैदेही सवाल करती है l

वैदेही - क्या बात है...

सत्तू - आज बहुत बड़ा कांड हो गया है दीदी...

वैदेही - क्या हो गया है...

सत्तू - आज थानेदार दास बाबु... महल गए थे...

महल में जो भी हुआ वह सारी बातेँ उन्हें बताता है l सब सुनने के बाद वहाँ पर मौजूद सभी को हैरत होती है l विश्व उससे पूछता है l

विश्व - तुम्हें यह सब कैसे पता चला...

सत्तू - कांस्टेबल जगन बाबु ने मुझे बताया... जब मैं गाँव में... बड़े राजा साहब की मौत की... लोगों की प्रतिक्रिया देखने गया था... लौटते वक़्त देखा... थानेदार बाबु पैदल आ रहे थे... और उनके दो कांस्टेबल... अपने दो साथियों के साथ उठा कर ला रहे थे... मैंने तुरंत एक ठेला का जुगाड़ किया और... उन्हें हस्पताल पहुँचा कर आ रहा हूँ...

विक्रम - ह्म्म्म्म... इस वक़्त राजा साहब... ऐसा क्यूँ कर रहे हैं...

विक्रम के सवाल पर सब चुप्पी साध लेते हैं l थोड़ी सोच विचार के बाद विश्व कहता है l

विश्व - लगता है... मैं कुछ कुछ... (पॉज) समझ रहा हूँ...

विक्रम - क्या समझ रहे हो...

विश्व - इंस्पेक्टर दास ने... राजा साहब की... पर्सनल सेक्यूरिटी हटा दी थी... और दो कांस्टेबलों को... महल के बाहर खड़ा कर दिया था... इस बीच उन्हें नंदिनी जी की मोबाइल मिली होगी... मोबाइल पर सबकुछ ढूंढने की कोशिश की होगी... पर उन्हें कुछ मिला नहीं होगा... क्यूँकी... इस मोबाइल में... राजकुमारी जी ने मेरा नाम सेव ही नहीं किया था... उन्हें मेरा नंबर याद है... और उस मोबाइल से वह किसी और को फोन करती भी नहीं हैं... तो जाहिर है.. कॉल रजिस्टर में... किसीका भी नाम नहीं मिला होगा... अब चूँकि सत्तू के सामने आ जाने से... राजा साहब को अभी अपने आदमियों पर शक हो रहा होगा... मतलब कोई ना कोई... महल में हमारा कोई आदमी था... जिसने उन्हें गच्चा देकर बाहर चला आया... यही सोच रहे होंगे... अगर उनकी अपनी सेक्यूरिटी होती तो उसे पकड़ लेते... इसी बात का खीज उन पुलिस वालों पर उतार दी...

विक्रम - पर इससे क्या उनकी पोजीशन खराब नहीं हो जाएगी...

विश्व - जब किस्मत और कानून उनकी मदत कर रहा हो.. उन्हें अब किसी बात की फिक्र नहीं है...

वैदेही - तो... अगली सुनवाई कब और कहाँ होगी... क्यूँकी हर दसवें दिन... केस की जगह बदलनी थी ना...

विश्व - हाँ पर जज साहब ने कोई ऑर्डर अभी निकाला नहीं है... अब मैं खुद पसोपेश में हूँ... केस में और बाइस या तेईस दिन जोड़े जाएंगे... और केस को शुरु से शुरु करेंगे... या फिर... ऐसे ही धीरे धीरे... तीस दिन ख़तम कर देंगे...

वैदेही - ऐसे कैसे हो सकता है...

विश्व - सब हो सकता है दीदी... सब हो सकता है... निजी कारणों के वज़ह से... अगर पहले के तीस दिन बेकार गया... फिर से हाइकोर्ट बेंच को रेफर किया जाएगा... वह बेंच फिर से वक़्त देने के लिए... विचार करेंगे... उसके बाद... इलेक्शन आ जाएगा... इलेक्शन के बाद... केस को आगे बढ़ाने के लिए कहेंगे... फिर वक़्त देंगे... इस बीच कुछ प्रमुख गवाह मार दिए जाएंगे... या कुछ गायब कर दिए जाएंगे... बिल्कुल रुप फाउंडेशन केस की तरह...

विश्व कहते कहते रुक जाता है, पाता है सब उसे गौर से सुन व देख रहे हैं l फिर विश्व कहना शुरू करता है l

विश्व - सब जानते हैं... केके ग़ायब हो गया है... या यूँ कहूँ... केके को गायब कर दिया गया है... यह असल में एक हींट था... इस केस से जुड़े हर एक शख्स के लिए... और इस सिस्टम के लिए.... और इसका असर मुझे दिखने लगा है...

वैदेही - क्या... क्या तु यह कहना चाहता है... की अदालत से हमें उम्मीद नहीं रखनी चाहिए...

विश्व - दीदी... यह एक युद्ध है... हर एक इस लड़ाई में... अपना पक्ष चुन चुके हैं... और हर एक को अपने अपने किरदार के साथ.. न्याय करना होगा...

विश्व फ़िर से चुप हो जाता है l उसकी बातों का यूँ असर हुआ था कि सारे लोग वहाँ पर चुप्पी साध लिए थे और गहरी सोच में खो गए थे l विक्रम की बात सबकी ध्यान खींचती है l

विक्रम - क्या बात है... सभी गाँव वालों को क्या हो गया है आज... इसी रास्ते से महल जाएंगे ना... फ़िर अब तक कोई गाँव वाला दिख क्यूँ नहीं रहा है...

तभी विश्व का फोन बजने लगती है l विश्व झट से अपना फोन उठा लेता है, डिस्प्ले पर डैनी भाई नाम दिख रहा था l विश्व तुरंत फोन उठाता है l

डैनी - कैसे हो हीरो...

विश्व - ठीक नहीं हूँ... आज की केस के बारे में... आपको पता लग गया होगा...

डैनी - हाँ लग तो गया है... पर तुम क्यूँ उदास हो रहे हो... तुम्हें तो एक दिन चाहिए राजा को क्रिमिनल साबित करने के लिए...

विश्व - हाँ पर केस की सुनवाई तो हो... जब इस केस की हालत ऐसी है... तो वह रुप फाउंडेशन की केस की सुनवाई कब और कैसे होगी...

डैनी - जरूर होगी.. तुम्हें इसीलिए तो फोन किया है...

विश्व - (आँखों में चमक आ जाती है) मतलब...

डैनी - हाँ हीरो... श्रीधर परीड़ा का पता चल गया है... और भी एक खुस खबर है..

विश्व - क्या... कैसी खबर...

डैनी - एक मिनट... मैं तुम्हारे एक दोस्त को कंफेरेंशींग में ले रहा हूँ... (विश्व का फोन कुछ सेकेंड के लिए होल्ड पर चला जाता है फिर उसे सुभाष सतपती की आवाज़ सुनाई देती है)

सुभाष - हैलो विश्व...

विश्व - सतपती जी आप...

सुभाष - हाँ.. मैं अपनी टीम के साथ... यशपुर आ रहा हूँ... और तुम्हारे लिए एक खुश खबरी ला रहा हूँ...

विश्व - कैसी खुश खबरी...

सुभाष - तुम्हारा शक बिलकुल सही था... रुप फाउंडेशन का एक गवाह... जिंदा गवाह मिल गया है...

विश्व - (उछल पड़ता है) ह्वाट...

डैनी - हाँ... सुभाष बाबु पहुँच रहे हैं... उनके पास पूरी डिटेल्स है... जो तुम्हारे साथ शेयर करेंगे... और फिक्र मत करो... तुम्हारे गवाह मेरे पास हिफाज़त में हैं... सुभाष बाबु के साथ बैठ कर... प्लान चॉक ऑउट करो... फिर उसके हिसाब से आगे बढ़ो...

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शाम ढल रही थी l महल में भैरव सिंह और उसके आदमीओं के नजरें गेट की ओर देखते देखते थक चुकी थी l सूरज की तपिश कम हो चुकी थी पर भैरव सिंह के मन में गुस्से का तपिश बढ़ता ही जा रहा था l चेहरा सख्त हो गया था और जबड़े भिंच चुकी थी l लंबी लंबी साँसे ठहर ठहर कर ले रहा था l उसकी यह हालत देख कर उसके सारे आदमी डर रहे थे l कुछ दूरी पर खड़े बल्लभ, रॉय और रंगा एक दुसरे को देख रहे थे पर भैरव सिंह के पास जाने की कोई हिम्मत नहीं कर रहा था l अब तक कुर्सी पर बैठा भैरव सिंह उठ खड़ा होता है l अपने दोनों हाथ पीछे बाँध गर्दन को दोनों तरफ़ झटका देता है l बल्लभ थोड़ा हिम्मत कर उसके पास जाता है l

बल्लभ - राजा साहब... लगता है... गाँव वाले नहीं आयेंगे...

भैरव सिंह - (बल्लभ की ओर बिना देखे) हूँ... नहीं आयेंगे... जब गाँव वालों ने फैसला कर लिया है... तो यही सही...

बल्लभ - तो... अब हमें क्या करना चाहिए...

भैरव सिंह - (बल्लभ की ओर देखते हुए) क्या करना चाहिए मतलब... बड़े राजा जी का देहांत हुआ है... उनका दाह संस्कार होगा...

बल्लभ - तो ठीक है... (भीमा की ओर देख कर) भीमा... बड़े राजा जी का दाह संस्कार करना है... इसलिए... बड़े राजाजी के पार्थिव शरीर को उनके कमरे से लाने की व्यवस्था करो...

भीमा अपने कुछ साथियों को साथ लेकर महल के अंदर जाता है और कुछ देर के बाद नागेंद्र के शव को सब उठा कर ले आते हैं l भीमा और उसके साथी बाँस से अंतिम यात्रा की सवारी तैयार करते हैं l ठीक उसी वक़्त शुकुरा, भूरा और दो चार आदमी भैरव सिंह के सामने आकर सिर झुका कर घुटनों पर बैठ जाते हैं l भैरव सिंह उनकी ओर सवालिया दृष्टि से देखते हुए अपनी कुर्सी पर बैठ जाता है, पर वे सब अपना सिर झुकाए वैसे ही घुटनों पर बैठे रहे l

भैरव सिंह - सिर झुकाए हुए हो... मतलब कोई ऐसी खबर लाए हो... जिसे हमारी कान सुनना मंजूर नहीं करेगा... (एक पल के लिए सब भैरव सिंह को देखते हैं फिर सब स्वीकृति के साथ दोबारा सिर झुका लेते हैं) बको जो भी बकना चाहते हो बको...

भूरा - हुकुम... (डरते डरते) श्मशान में कोई नहीं आया... यहाँ तक कोई पंडित भी नहीं आया... सबको खबर कर दी गयी थी... अब चिता के लिए लकड़ियां हमें ही इंतजाम करना होगा... (भूरा की इस बात से सबका मुहँ हैरत से खुल जाता है, पर भैरव सिंह के चेहरे पर कोई भाव नहीं आता)

भैरव सिंह - ह्म्म्म्म... कोई बात नहीं... अब इस महल के मातम में... गाँव वाले शामिल नहीं होंगे...

रंगा - गुस्ताख़ी माफ राजा साहब... राजकुमार जी तो इसी गाँव में हैं...

भैरव सिंह रंगा की ओर देखता है, रंगा के शरीर में एक शीत लहर दौड़ जाती है l हालत कुछ ऐसी थी के कोई कुछ भी कहने से पहले सौ बार सोच रहा था l भैरव सिंह भूरा से सवाल करता है

भैरव सिंह - तुमने गाँव वालों से क्या कहा था...

भूरा - राजा साहब... मैंने और शुकुरा ने... घर घर जाकर सबको खबर की थी... (कहते कहते भूरा जिस तरह से पॉज लेता है भैरव सिंह समझ जाता है जरूर कोई ऐसी बात है जिसे भूरा कहने से डर रहा है)

भैरव सिंह - बेफिक्र... बेखौफ हो कर कहो... जवाब में गाँव वालों ने क्या प्रतिक्रिया दी... (भूरा एक नजर शुकुरा को देखता है और अपना सिर झुका लेता है l भैरव सिंह को गुस्सा आ जाता है) यहाँ क्या कोई तमाशा हो रहा है... बताओ क्या हुआ...

भूरा - (डरते डरते) हम जब बड़े राजा जी की देहांत की खबर दे कर लौट रहे थे... तब हमने देखा गाँव के कुछ लोग हमारे पीछे... (रुक जाता है)

भैरव सिंह - हाँ... क्या तुम्हारे पीछे...

भूरा - बड़े राजा जी के नाम पर... धुल उड़ा रहे थे...

भैरव सिंह अपनी कुर्सी छोड़ कर खड़ा हो जाता है, भूरा और शुकुरा और उनके साथी डर जाते हैं l पर भैरव सिंह उनकी ओर जाने के बजाय भीमा की ओर जाता है और कहता है

भैरव सिंह - जाओ... बड़े राजा जी के कमरे में जाओ... उस कमरे में खाट से लेकर अलमारी तक जितने भी लकड़ी के सामान है... उन्हें बाहर लेकर आओ और कुल्हाड़ी से काट कर... इसी बरामदे के नीचे... चिता सजाओ... आज बड़े राजा जी की चिता यहीँ जलेगी... (भीमा कुछ समझ नहीं पाता, मुहँ खोले बेवक़ूफ़ों की तरह भैरव सिंह को देखे जा रहा था) (चिल्ला कर) जाओ...

भीमा अपने साथ कुछ आदमियों को लेकर नागेंद्र के कमरे में जाता है l बिस्तर से लेकर कुर्सी, सोफा अलमारी टेबल जो भी लकड़ी के थे सब बाहर ले आते हैं l कुल्हाड़ी से काट काट कर चिता बनाते हैं l भैरव सिंह अपनी बाहों में नागेंद्र की लाश उठाता है और लकड़ियों पर रख देता है l फिर बिना किसी औपचारिकता के चिता में आग लगा देता है l वहाँ पर मौजूद सभी लोग भैरव सिंह को देख रहे थे l चिता से उठती आग की रौशनी में भैरव सिंह का चेहरा बहुत ही भयानक दिख रहा था l थोड़ी देर बाद भैरव सिंह अपने लोगों के तरफ़ मुड़ता है l

भैरव सिंह - आज जो भी यहाँ मौजूद है... हम उनके आभारी हैं... आज आपकी मौजूदगी को... हम रूपयों और दौलत से तोल देंगे... फिलहाल आज का मातम का दायरा महल की परिसर तक ही था... पर बड़े राजा जी की मृत्य की चौथ की मातम... पुरा राजगड़ मनाएगा... अब तुम सब... जा सकते हो...

सभी लोग उल्टे पाँव लौटने लगते हैं l बल्लभ भी लौट रहा था तो भैरव सिंह उसे इशारे से रुकने के लिए कहता है l बल्लभ रुक जाता है और सभी वह जगह खाली कर चले जाते हैं l

भैरव सिंह - देखा प्रधान... गाँव वालों में कितनी हिम्मत आ गई... हमारे लोगों के पीठ के पीछे धूल उड़ाए हैं... (बल्लभ चुप रहता है) आज... बड़े राजा जी की अंतिम संस्कार के लिए... ना नाई आया.. ना धोबी.. ना लोग आए ना पंडित... (एक पॉज लेता है) एक विश्व.... क्या उनके लिए सीना तान कर खड़ा हो गया... हमारी मान पर बट्टा लगाने की हिम्मत कर ली... कोई नहीं... अब तुम देखना... इतिहास कैसे खुद को दोहराएगी... (फ़िर कुछ देर के लिए शांत हो जाता है, पर इसबार अपनी जेब से मोबाइल निकाल कर बल्लभ को देता है) तुम इसकी मालिक को ढूंढो... पता लगाओ... यह सबूत है... अभी भी महल में... कोई है... जो विश्व के लिए काम कर रहा है... (बल्लभ उस फोन को अपनी हाथ में लेता है)

बल्लभ - यह आपको कहाँ मिला...

भैरव - बड़े राजा जी के... कमरे के बाहर... और हमें इसकी मालिक का नाम पता दे दो...

बल्लभ - गुस्ताखी माफ राजा साहब... आपको ऐसा क्यूँ लग रहा है कि... यह मोबाइल और इसका मालिक विश्व से जुड़ा हुआ है...

भैरव सिंह - इस पर एक कॉल आया था...

बल्लभ - क्या... किसने किया था...

भैरव सिंह - विश्व ने...

बल्लभ - विश्वा ने... किस किसका नाम लिया...

भैरव सिंह - नहीं उसने कुछ नहीं कहा... या यूँ कहो... उसने कोई आवाज ही नहीं निकाली...

बल्लभ - फ़िर आप यह कैसे कह सकते हैं... फोन के दूसरी तरफ विश्वा था..

भैरव सिंह - उसकी खामोशी को... हम साफ सुन पा रहे था... महसूस कर पा रहे थे... उसके किसी साथी का मोबाइल है यह... मुझे यकीन है... तुमने जब बड़े राजा जी की देहांत का खबर दी होगी... तब उसने चिढ़ कर अपने साथी को फोन लगाया होगा... जिसने गलती से बड़े राजा जी के कमरे के बाहर... छोड़ गया था...

बल्लभ - ओह माय गॉड... इसका मतलब..

भैरव सिंह - हाँ प्रधान... अभी भी उसका कोई आदमी हमारे महल में है... हमें शक तो है... पर बिना सबूत के... बे वज़ह कोई तमाशा नहीं करना चाहते... इसलिये जितनी जल्दी हो सके... इस मोबाइल के मालिक को ढूंढो...

बल्लभ - राजा साहब.. इसमें तो दो तीन दिन लगेंगे...

भैरव सिंह - दो दिन... सिर्फ दो दिन...

बल्लभ - सिर्फ दो दिन...

भैरव सिंह - हाँ... प्रधान हाँ... क्यूँकी... दो दिन बाद बड़े राजा जी का चौथ है... और चौथ का मातम... पूरा राजगड़ मनाएगा... इसलिए सिर्फ दो दिन है तुम्हारे पास...

बल्लभ - राजा साहब...

भैरव सिंह - जाओ...

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बल्लभ की गाड़ी अपने घर पर रुकती है l गाड़ी बंद कर के बल्लभ गाड़ी से उतरता है l जेब से घर की चाबी निकाल कर दरवाजा खोलता है l अंदर आकर ड्रॉइंग रुम की लाइट ऑन करता है फिर बेड रुम में जाकर भैरव सिंह की दी हुई मोबाइल को निकाल कर बेड पर फेंकता है और अपने कपड़े उतार कर बाथ रोब लेकर बाथरुम में घुस जाता है l शॉवर चला कर नहाने लगता है l नहाते नहाते उसके कानों में टीवी चलने की आवाज़ सुनाई देती है l वह शॅवर बंद कर बाथ रोब पहन कर बाहर आता है l बेड रुम से देखता है कि ड्रॉइंग रुम की लाइट बंद है l वह चुपके से अपना वॉर्ड रोब खोलता है और एक रीवॉल्वर निकाल लेता है l धीरे धीरे बेड रुम से निकल कर ड्रॉइंग रुम में आता है l उसे एक सोफ़े पर काला अक्स, एक साया सा दिखता है l चूँकि टीवी चल रही थी उसकी रौशनी में वह शख्स काले लिबास और एक हैट पहने सोफ़े पर बैठा हुआ था l

बल्लभ - कौन हो तुम...

साया - तुम्हारा बहुत बड़ा फैन...

बल्लभ - किसलिए यहाँ आए हो...

साया - तुम्हारा ऑटोग्राफ लेने...

बल्लभ - खबरदार अपनी जगह से हिले तो... तुम मेरे गन पॉइंट पर हो...

साया - नहीं हिलता... आओ सामने बैठो... बात करते हैं... पहले यह न्यूज देखते हैं...

बल्लभ - शॅट अप... मेरे घर में... अंधेरा कर... मुझे अपने सामने बैठने के लिए कह रहे हो... हाऊ डैर यु... जब कि तुम मेरे गन पॉइंट पर हो...

साया - श् श् श् श्.... पहले यह न्यूज सुनो तो सही...

टीवी पर नभ वाणी न्यूज चैनल पर सुप्रिया न्यूज पढ़ रही थी -

" राजगड़ मल्टिपल को-ऑपरेटिव सोसाइटी के आर्थिक भ्रष्टाचार पर केस का आठवां दिन था और आज भी राजा भैरव सिंह ने अपनी हाजिरी नहीं दी l उनके बदले उनके वकील एडवोकेट श्री बल्लभ प्रधान जजों के सामने प्रस्तुत हुए और बड़े राजा जी श्री नागेंद्र सिंह क्षेत्रपाल जी की देहांत की खबर दी और अदालत से बड़े राजाजी की मरणोपरांत क्रिया कर्म व शुद्धीकरण के लिए अदालत से पंद्रह दिन की मोहलत मांगी जिसे सहसा अदालत ने स्वीकर कर ली l इस तरह से हाइकोर्ट के द्वारा निर्धारित तीस दिनों में तेईस दिन बिना सुनवाई के खत्म हो गई l अब प्रश्न यह है कि जो मुल्जिम हैं उनके निजी कारण को अदालत ने तवज्जो देकर जो तेईस दिन बिना सुनवाई के समाप्त हो गए उसकी भरपाई के लिए क्या अदालत शुरु से केस सुनवाई करेगी या बचे हुए साथ दिनों में निपटारा करेगी "

बल्लभ - बंद करो यह टीवी... इस न्यूज से तुम्हारा क्या वास्ता...

साया - मेरा ही नहीं... तुम्हारा भी वास्ता है... हम सबका वास्ता है...

बल्लभ - बस बहुत हुआ... बहुत बकवास कर ली तुमने... अब अपनी पहचान बताओ... या फिर... मरने के लिए तैयार हो जाओ...

साया - तुम मुझे गोली नहीं मार सकते...

बल्लभ - अच्छा... यह तुम्हारी खुशफहमी है... मैं चाहूँ तो अभी के अभी तुम्हें गोली मार सकता हूँ...

साया - और पुलिस से क्या कहोगे...

बल्लभ - सेल्फ प्रोटेक्शन... आत्म रक्षा...

साया - पर मैं तो तुम्हारे सामने... चुप चाप बैठा हुआ हूँ... कोई हरकत भी तो नहीं कर रहा...

बल्लभ - वह इसलिए... के तुम मेरे इन पॉइंट पर हो...

साया - हाँ बात तो तुम ठीक कह रहे हो... पर फिर भी तुम मुझ पर गोली नहीं चला सकते...

बल्लभ - ओ... अभी भी तुम खुशफहमी पाले बैठे हो...

साया - नहीं... यकीन है... क्यूँकी यहाँ मैं अकेला नहीं आया हूँ... अपने साथियों के साथ आया हूँ... और तुम इस वक़्त मेरे साथी के रीवॉल्वर के निशाने पर हो... तुमने जरा सी भी हरकत की... यकीन जानो.. अगले पल... तुम्हारी खोपड़ी उड़ चुकी होगी...

बल्लभ - (डर के मारे हलक से थूक गटकता है) तुम झूठ बोल रहे हो...

नहीं... (एक और आवाज़ बल्लभ के पीछे गूंजती है, अभी जो नहाया हुआ आया था वह अब पसीने से भीगने लगा था, वह झट से पीछे मुड़ता है पर अभी वह दूसरा शख्स उसके हाथों से रीवॉल्वर छीन लेता है, वह साया जो सोफ़े पर बैठा था वह कहता है)

साया - देखा... अब तुम मेरे आदमी के गन पॉइंट पर हो...

बल्लभ - तुम हो कौन चाहते क्या हो...

साया - अभी अभी जो न्यूज तुमने सुनी... उस केस के... तुम सुपर स्टार हो... और हम तुम्हारे बड़के वाले फैन हैं... (बल्लभ को अपनी पीठ पर गन की बैरेल चुभती हुई महसूस होती है) आओ... मेरे सामने बैठ जाओ...

बल्लभ सामने वाली सोफ़े पर बैठ जाता है l सामने सोफ़े पर बैठ साया टीवी बंद कर देता है l थोड़ी देर के लिए ड्रॉइंग रुम में अंधेरा छा जाती है फिर धीरे धीरे बेड रुम की हल्की रौशनी में बल्लभ को थोड़ा थोड़ा दिखने लगता है l तभी उसके कानों में किचन में बर्तनों की आवाज़ सुनाई देती है l

बल्लभ - तुम लोग मुझसे चाहते क्या हो... और तुम कितने आदमियों के साथ आए हो...

साया - सिर्फ तीन... हम तीन लोग आए हैं... और रुप फाउंडेशन केस हो या यह... राजगड़ मल्टिपल को-ऑपरेटिव सोसाइटी की केस... तुमने अपना क्या रोल प्ले किया है... हम सब तुम्हारे फैन हो गए हैं...

बल्लभ - ओ समझा... तो तुम अंधेरे में क्यों हो...

साया - क्यूँकी तुम अंधेरे के माहिर खिलाड़ी हो... राजा साहब तक को अंधेरे में रखा हुआ है...

बल्लभ - शॉट अप... मैंने राजा साहब से कोई धोखा नहीं किया है... उनका वफादार हूँ मैं...

साया - हाँ वफादार तो हो... पर कुछ बातेँ राजा साहब से छुपा कर... अपनी मतलब कि खिचड़ी पका लेते हो...

बल्लभ - देखो... अगर तुम विश्व हो... तो मैं तुम्हें बता दूँ... तुम गलत दरवाजे पर दस्तक दे रहे हो...

साया - चलो... एक बात क्लियर कर दूँ... मैं विश्वा नहीं हूँ... दूसरी बात... मैंने तुम्हारे सारे राज पता कर लिया हूँ... बल्कि अपने कब्जे में कर लिया हूँ...

बल्लभ - किस राज की बात कर रहे हो तुम...

साया - (हँसने लगता है) हा हा हा हा... सिर्फ बाथ रोब में हो... एक झटका काफी होगा... नंगे हो जाओगे... या यूँ कहूँ.. नंगे हो चुके हो...

बल्लभ - क्या... क्या मतलब है तुम्हारा...

साया - राजा के किसी खतरे को गायब करना हो या... हटाना हो... यह काम तुम और मरहुम रोणा बखूबी अंजाम देते रहे... रोणा तुम्हारा जिगरी यार था... पर कुछ राज की बातेँ तुमने रोणा को भी नहीं बताई...

बल्लभ - कौन से राज की बात कर रहे हो...

साया - तुम वकील हो... राजा के हर ईलीगल को लीगल कर कर के... अपने ईलीगल को भी छुपा गए... रुप फाउंडेशन केस में जयंत सर ने पाँच गवाह बनाया था... पर राजा साहब के कहने पर... तुमने एक को गायब कर दिया... याद है...

बल्लभ - (चुप रहता है)

साया - नाम मैं बताऊँ... या तुम बताओगे...

बल्लभ - ऐ के सुबुद्धी... तहसील ऑफिस का क्लर्क...

साया - शाबाश... और जब विश्व ने पीआईएल फाइल की... तब तुमने अपने एक और दोस्त को... अंडरग्राउंड करवा दिया...

बल्लभ - श्रीधर परीड़ा...

साया - शाबाश... और कमाल की बात यह है कि.. राजा को नहीं मालूम... यह सब तुमने किया... राजा को मालूम है कि... तुमने सुबुद्धी को मरवा दिया... और श्रीधर परीड़ा खुद को गायब कर दिया... जब कि... मास्टर माइंड तुम थे...

बल्लभ - ओ... अब समझा... यह दोनों अब तुम्हारे कब्जे में हैं... इस इंफॉर्मेशन के बदले... मुझसे क्या चाहते हो...

साया - मैंने कहा ना... हम सब तुम्हारे कमीने पन के कायल हो गए हैं... तुम अब हमारे लिए सुपर स्टार का दर्जा रखते हो... हम बस तुम्हारा ऑटोग्राफ लेना चाहते हैं...

बल्लभ - ऐसी कमीनेपन की बातेँ बहुत कर ली... सच सच बताओ.. क्या चाहते हो...

किचन से और एक आवाज गूंजती है - ज्यादा कुछ नहीं... पहले चाय पीते हैं... फिर... तुम जो चाहोगे वही करते हैं... क्यूँकी तुम हमारे सुपर स्टार हो... इसलिए हमारी टीम वही करेगी जो तुम कहोगे.. जैसा तुम चाहोगे...

बल्लभ किचन की ओर मुड़ता है वहाँ पर अंधेरे में एक शख्स ट्रे पर चाय की केतली और कुछ कप के साथ खड़ा था l

 
भाई यह हमारी न्याय व्यवस्था की पीड़ा दायक दृश्य है l वर्ना अदालतों में केसेस बर्षों तक खाक ना छान रहे होते l

आंदोलन का यही रूप रेख होता है l आम लोग तभी हिंसक होते हैं जब उनके अंदर की पीड़ा बदले की रुप ले लेता है

शुक्रिया मेरे भाई आपका बहुत बहुत शुक्रिया

बस एक अनुरोध है कहानी को अंतिम रूप दे रहा हूँ l इतना गाइड कर दीजिये कंप्लीटेड कैसे लिखूँ
 
यह आपने सौ फीसदी सच कही

इसी विषय पर सरकार और न्यायपालिका आमने सामने हैं l

विश्व अपना प्रयत्न करेगा l और प्रभावित प्रयत्न करेगा l

सभी पाठकों का यही अंदेशा है l क्यूँकी भैरव सिंह का चरित्र ही ऐसा है l

भैरव सिंह भी अपने लिए कुछ सोचा है l जिसको वह एक्जीक्यूट कर रहा है

धीरे धीरे ही सही गाँव वालों में आत्म बोध और शत्रु बोध जाग्रत हो रहा है बस एक संगठना और आंदोलन हो जाएगा

विश्व तो नहीं पर जो भी है विश्व से संबंधित है

शुक्रिया मेरे भाई आपका बहुत बहुत शुक्रिया

सोचा था एक सौ पैंसठवाँ अपडेट अंतिम होगा पर मुमकिन नहीं लग रहा l एक और अपडेट ज्यादा होगा
 
👉एक सौ चौंसठवाँ अपडेट

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कमरे में अंधेरा ज्यों का त्यों था l किसीने भी अब तक लाइट ऑन नहीं की थी l वह काला साया बल्लभ के सामने वैसे ही बैठा हुआ था l चाय का ट्रे लेकर तीसरा शख्स बल्लभ के सामने वाली टी पोय पर रख देता है l कमरे में चेहरा साफ दिखे उतना उजाला भले ना हो पर इतना अंधेरा भी नहीं था के तीनों का अक्स ना दिखे और चाय की केतली कप सब दिख रहे थे l तीसरा शख्स एक कप में चाय डाल कर बल्लभ को देता है l बल्लभ उसे अंधेरे में भी पहचानने की कोशिश करता है l

साया - अगर मुश्किल हो रहा है... तो लाइट ऑन कर दें...

बल्लभ - (चौंक कर) क्या...

साया - मुझे साफ महसूस हो रहा है... तुम परेशान लग रहे हो... और पहचानने की कोशिश भी कर रहे हो...

बल्लभ - (थोड़ा संभल कर) हाँ... मैं जानना तो चाहता हूँ... अगर तुम विश्व नहीं हो... तो मेरे सारे राज जानने वाले.. कौन हो...

साया - हाँ मैं विश्व नहीं हूँ... पर हम तीनों विश्व से ताल्लुक रखते हैं...

बल्लभ - क्या... मैं... मैं समझा नहीं....

साया - ठीक है... (चुटकी बजाता है) लाइट जला दो... अंधेरे का काम ख़तम... अब वकील साहब को मिलकर चलो उजाले की ओर ले चलते हैं...

जो शख्स रीवॉल्वर बल्लभ पर ताने खड़ा था l लाइट का स्विच ऑन करता है l अब कमरे में उजाला था बल्लभ सामने बैठे शख्स को देख कर चौंकता है l सामने सोफ़े पर डी सी पी सुभाष सतपती बैठा था l पीछे मुड़ कर देखता है उदय गन पकड़ कर स्विच बोर्ड के पास खड़ा था l और बगल वाली सोफ़े पर कांस्टेबल जगन बैठा था l

बल्लभ - ओ... तुम लोग हो...

उदय - लगता है... अंधेरे में बहुत भारी महसूस कर रहे थे... उजाले में हमें देखते ही हल्का महसूस करने लगे...

बल्लभ - शॅट अप... तुमने जो अनिकेत के साथ किया... मैं भुला नहीं हूँ...

उदय - बात तो ऐसे कर रहे हो... जैसे... उस सुअर की मौत से... किसी को कोई फर्क़ पड़ता था...

बल्लभ - (सोफ़े की आर्म रेस्ट को भिंच लेता है) यु...

उदय - येस.. इट्स मी... वह इंस्पेक्टर के भेष में... जिसके दम पर... सबका दोहन करता था... उन्हीं के हाथों उसका दहन हो गया... फ़िर तुम क्यूँ उसका दुख मना रहे हो... ना मारने वाला मैं था... ना ही जलाने वाला... वह जो कुछ भी हुआ... वह राजगड़ के भगवान राजा साहब के इच्छानुसार हुआ... हम तुम तो बस तुच्छ प्राणी थे...

बल्लभ - और अब... तुम मुझे फ़ंसाने आए हो...

सुभाष - फंसे हुए को क्या फ़ंसाना... राजा को डबल क्रॉस किया तुमने... हमने तो बस पता किया... और दोष हम पर मढ़ रहे हो...

बल्लभ - ठीक है... आई एपोलाइज... पर यह सब तुमने पता कैसे किया...

जगन - बे तु वकील है तो क्या हुआ... यह हमारे साहब हैं... और यह मत भूल... रुप फाउंडेशन के नए एसआईटी के चीफ हैं... अभी तु उनके सामने अपराधी है...

बल्लभ - (सुभाष से) अच्छी तैयारी के साथ आए हो... तुमने मुहँ खोला भी नहीं... और तुम्हारे आदमी टुट पड़ रहे हैं... (सुभाष मुस्करा देता है) मुझे मालूम था... मेरा यह राज.. एक दिन फास होगा... और इसे विश्व क्रैक करेगा... पर वह लगता है... चूक गया...

सुभाष - वह चुका नहीं है... पता असल में उसीने ही लगाया है... हम तो बस जरिया हैं...

बल्लभ - कैसे...

सुभाष - उसने जब रिट पिटीशन फाइल किया... तभी उसे तुम पर ही शक हो गया था... तुम भैरव सिंह के सभी ईलीगल को लीगल करते हो... इसलिए... उसीने हमें आईडिया दिया था.. तुम्हारे बैंक अकाउंट पर नजर रखने के लिए... तुम्हारे एक नहीं तीन तीन अलग अलग बैंक में अकाउंट है... पर एक ही बैंक के सेविंग अकाउंट में एटीएम कार्ड के जरिए.. कटक में विथड्रॉ हो रहा था... और उसी समय फोन बैंकिंग के जरिए... तुम राजगड़ और उसके आसपास पैसा विथड्रॉ कर रहे थे... आगे हमने कैसे ढूंढ निकाला कहने की जरूरत नहीं...

बल्लभ - (चुप रहता है)

सुभाष - वकालत करते हुए जब यशपुर में तुम भैरव सिंह से जुड़े... तुम्हारा काम देखने के बाद... भैरव सिंह ने तुम्हें अपना लीगल एडवाइजर रख लिया... और सालों से... तुमने उसका बखूबी साथ भी दिया... पर पेच तब आया... जब रुप फाउंडेशन करप्शन में तुम अनिल कुमार सुबुद्धी के बहन के संपर्क में आए... तुम शादी सुदा थे... फिर तुमने अपनी चाल चली... अपने बीवी बच्चों को एब्रॉड भेज दिया... यहाँ सुबुद्धी की

बहन प्रज्ञा को यकीन दिला दिया... के तुमने अपनी बीवी से तलाक ले लिया... और उसके साथ नाजायज संबंध स्थापित किया... रुप फाउंडेशन केस में...जब विश्वा.. खुल कर भैरव सिंह के खिलाफ आया... तब इस केस में.. जो भी कमजोर कड़ी थे... सबको रोणा के साथ मिल कर या तो गायब कर दिया... या फिर मरवा दिया... पर तुमने राजा साहब को... कंवींश कर सुबुद्धी भाई बहन को बचाए रखा... पर जैसे ही जयंत सर ने... जिरह के लिए... पाँच गवाहों की लिस्ट अदालत में पेश की... तुमने चालाकी से... सुबुद्धी भाई बहन को गायब कर दिया... गवाह दिलीप कुमार कर को बना दिया... उन्हें लाकर तुमने कटक में... श्रीधर परीड़ा की मदत से... नई पहचान के साथ... रखवा दिया... रोजाना गुजारा के लिए... अपना एटीएम कार्ड दे दिया... और कमाल की बात यह है कि... इस बात को तुमने... अनिकेत रोणा से छुपाए रखा... क्यूँकी वह औरतों के मामले में... नियत का फिसड्डी था... है ना...

बल्लभ - (अपना सिर हाँ में हिलाता है)


सुभाष - अब बारी श्रीधर परीड़ा की थी... वह जानता था... राजा खुद को पाक साफ रखने के लिए... किसी भी हद तक जा सकता था... इसलिए उसने तुम्हें खबर किया... और खुद को अंडरग्राउंड कर लिया... इसमें तुमने उसकी मदत भी की... क्यूँ सही कहा ना...

बल्लभ - (इस बार भी अपना सिर हाँ में हिलाता है) अगर यह आईडिया विश्व का है... तो वह सामने क्यूँ नहीं आया...

उदय - वह इसलिए... विश्व की हर हरकत पर... राजा अपनी आदमियों के जरिए नजर रख रहा है...

बल्लभ - नजर तो... नए एसआईटी ऑफिसर पर भी रखा हुआ है...

सुभाष - चिंता ना करो... मैं जिस तरह आया हूँ... राजा साहब का जासूस.. कंफ्यूज हो गया होगा...

बल्लभ - चलो... मैंने जैसा सोचा था... के विश्व ही मेरे राज खोज पाएगा... सो वही हुआ... पर विश्व ने इस बार थोड़ी देर कर दी है...

सुभाष - देर कर दी... कैसे... रुप फाउंडेशन केस को दोबारा खोलने के लिए अभी तो वक़्त मिला है...

बल्लभ - ऐसा तुमको लगता है... पर सच यह है कि... तुम लोगों के पास वक़्त कम है...

सुभाष - तुम कहना क्या चाहते हो...

बल्लभ - तुम तीनों... पुलिस वाले... मेरा अतीत व काला इतिहास लेकर आए हो... वज़ह मैं जानता हूँ... पर तुम लोग... विश्व को बुलाओ... दोनों ही केस में जो डील होगा... वह मैं विश्व से करूँगा...

सुभाष - ह्म्म्म्म... बात अगर किसी कंफेशन की है... तो विश्व इस वक़्त हमारी सारी बातेँ सुन रहा है...

इतना कह कर सुभाष अपनी पॉकेट से मोबाइल निकाल कर स्पीकर ऑन कर देता है और सामने की टी पोए पर रख देता है l

सुभाष - विश्वा...

विश्व - हाँ...

सुभाष - एडवोकेट प्रधान... तुमसे कुछ बात करना चाहता है...

विश्व - हाँ प्रधान बाबु... कहिये... क्या कहना चाहते हैं...

बल्लभ - विश्वा... मैं सरकारी गवाह बनने के लिए तैयार हूँ... बदले में तुमसे... मेरी और प्रज्ञा की जान की हिफाजत का वादा चाहता हूँ...

विश्व - मुझसे... यह वादा तो तुम... डीसीपी सतपती जी से भी मांग सकते थे...

बल्लभ - नहीं... जब तक भैरव सिंह... जैल नहीं चला जाता... या ख़तम नहीं हो जाता... मैं कानूनी मदत नहीं लेना चाहता...

विश्व - पर मैं इसमें... तुम्हारी क्या मदत कर सकता हूँ...

बल्लभ - वही मदत... जो इस वक़्त... तुम राजकुमारी जी की दोस्तों को दे रहे हो... मैं जानता हूँ... उनको राजगड़ से भेज कर और उन्हें भुवनेश्वर और कटक में अपनी प्रोटेक्शन में तुमने ही रखा है...

विश्व - प्रधान बाबु... आप भूल रहे हैं... मैंने राजा के डर से... अपनी माँ बाप को छुपा रखा है..

बल्लभ - जानता हूँ... पर एक बात यह भी है... राजा जिसे टार्गेट करता है... उसे हर हाल में... ख़तम कर देता है... राजा के आदमी और जासूस अभी भी... पुलिस और प्रशासन में हैं... मुझे इन सबके बाहर वाले आदमी पर भरोसा है...

विश्व - (चुप हो जाता है)

बल्लभ - देखो विश्व... यह वक़्त की नजाकत है... हम दोनों को एक दूसरे का साथ चाहिए...

विश्व - साथ... मैं तुम्हारा साथ क्यूँ दूँ... और क्यूँ लूँ...

बल्लभ - वह इसलिए... कुछ बातेँ मैं जानता हूँ... पर राजा साहब से बताया नहीं... बता देता... तो राजकुमारी जी की जान पर बन आती...

विश्व - अच्छा... ऐसी कौन सी बात तुम जानते हो... जो भैरव सिंह नहीं जानता...

बल्लभ - राजा साहब ने मुझे एक मोबाइल दिया है... और उसके मालिक को ढूंढने का काम दिया है... और मैं यह अच्छी तरह से जानता हूँ... इस मोबाइल का कोई मालिक नहीं.. मालकिन है... मैंने बताया नहीं... उनसे वक़्त लिया है...

विश्व - ह्म्म्म्म... मुझे एक बात कंफर्म करो... क्या राजकुमारी सही सलामत हैं...

बल्लभ - हाँ... हैं...

विश्व - चलो फिर... किया... वादा किया...

बल्लभ - ठीक है फिर... देखो दो दिन बाद... बड़े राजा जी की... चौथ की... पहली छोटी शुद्धि है... पर उससे पहले... भैरव सिंह के खिलाफ हमारी गवाही दिलवा दो... क्यूँकी... चौथ के दिन... और उसके बाद... भैरव सिंह को... हाथ लगाना... ना तुम्हारे बस की बात होगी... ना ही सिस्टम की... हाथ लगाना तो दूर... उन तक पहुँचना... मुश्किल हो जाएगा...

विश्व फोन पर और कमरे में मौजूद लोग एक साथ उछल पड़ते हैं - क्या....

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ब्रेकिंग न्यूज

आज सुबह तड़के श्री बीरजा किंकर सामंतराय अपने पैतृक घर पारादीप से पुरी जाते वक़्त रास्ते में उनके कार का एक ट्रक के साथ एक्सीडेंट हो गया l इस एक्सीडेंट में बीरजा किंकर सामंतराय गम्भीर रूप से चोटिल हुए हैं l सुना है कुछ दिनों से वह तनाव में थे l कुछ पहले अपनी बेटी व दामाद से मिलने राजगड़ गए हुए थे l उनके पत्नी के कहे अनुसार उनकी बेटी शुभ्रा सामंतराय गर्भवती हैं और हाल ही में उनके ससुराल के साथ उनका संबंध कुछ ठीक नहीं चल रहा है l इसी वज़ह से भगवान जगन्नाथ जी के पास माथा टेकने और अपनी बेटी दामाद और गर्भ में पल रहे शिशु की सलामती के लिए प्रार्थना करने जा रहे थे l सुबह चार बजे का समय था इसी वक़्त एक्सीडेंट हो गया है l उन्हें तुरंत कैपिटल हास्पिटल को ले जाया गया है l डॉक्टर उनकी हालत को स्थिर बता रहे हैं और हर एक घंटे के बाद उनकी स्वास्थ की बुलेटिन हस्पताल के द्वारा जारी किया जाएगा l

टीवी पर यह ख़बर सुनते ही वैदेही गौरी को दुकान पर बिठा कर शुभ्रा से मिलने चली जाती है l वहाँ पहुँच कर देखती है विश्व और उसके दोस्त वहाँ पर मौजूद हैं l शुभ्रा रो रही है और उसे सुषमा दिलासा दे रही है l विक्रम और पिनाक हाथ बांधे बैठे हुए थे l जब वहाँ वैदेही पहुँचती है तो शुभ्रा उसे देखते ही गले जा लगती है l वैदेही भी उसे गले लगा कर सहारा देती है l

वैदेही - रो मत... रो मत... सब ठीक हो जाएगा...

शुभ्रा - पापा हम सबसे मिलने आए थे... पर...

वैदेही - श् श् श्... कहा ना सब ठीक हो जाएगा... (विक्रम की ओर देख कर) क्या फैसला किया है...

विक्रम - जाने का फैसला किया है... मैंने प्रताप से बात की... थोड़ी देर के बाद... गाड़ी आ जाएगी...

वैदेही - अच्छा किया...

विक्रम - पर मैं एक असमंजस में हूँ...

वैदेही - कैसी असमंजस...

विक्रम - पता नहीं... लोग क्या कहेंगे... मैं अपने दादा जी के अंत्येष्टि के लिए नहीं गया... पर... अपने ससुर जी के...

वैदेही - तुम लोगों की नहीं... अपनी दिल की सुनो... तुम्हारे आँखों से जब आँसू बहेंगे... उसे पोंछने तुम्हारा या तुम्हारे अपनों का ही हाथ उठेगा... इसलिए ज़माने की मत सोचो...

विश्व - मैं भी यही बात... कब से समझा रहा था...

पिनाक - आप ठीक कह रही हैं वैदेही जी...

एक गाड़ी आती है l विश्व और वैदेही सबको बिठा देते हैं l विक्रम और विश्व गाड़ी से कुछ दूर जाते हैं कुछ बातेँ करते हैं फिर हाथ मिलाते हैं l यह सब वैदेही देख रही थी l विक्रम आकर गाड़ी में बैठ जाता है l गाड़ी फिर वहाँ से भुवनेश्वर के लिए रवाना हो जाती है l गाड़ी आँखों से ओझल होने के बाद वैदेही कुछ सोचते हुए बरामदे पर बैठ जाती है l विश्व अपने दोस्तों को देखता है और आँखों से कुछ इशारा करता है l वे लोग भी अपना सिर हिला कर वैदेही को टाटा बाय बाय कर वहाँ से निकल जाते हैं l विश्व और टीलु दोनों आते हैं और वैदेही के पास बैठ जाते हैं l

वैदेही - विशु...

विश्व - हाँ दीदी...

वैदेही - यह विक्रम उतना दुखी नहीं लग रहा था... जितना होना चाहिए...

विश्व - नहीं ऐसा कुछ नहीं है दीदी... मर्द थोड़े ना अपना दर्द... यूँही सबके सामने लाते हैं..

वैदेही - अब तु मुझसे झूठ बोलेगा...

विश्व - (चुप हो जाता है)

वैदेही - तु किसी को भी... बना ले... पर मुझे बना नहीं सकता... तेरी रग रग से वाकिफ हूँ... अब तु मुझे सब सच सच बता...

विश्व - ठीक है दीदी... (विश्व सब कुछ कहने लगता है जो उसे बल्लभ से पता चला था) दीदी... उससे ही मालुम हुआ... भैरव सिंह को फोन तो मिल गया था... और उसे राजकुमारी जी पर शक भी है... पर उसका और राजकुमारी जी का रिश्ता उस मोड़ पर पहुँच चुका है कि... बिना सबूत के जलील होना नहीं चाहता... इसलिए बल्लभ प्रधान को दो दिन की मोहलत दी है उसने...

वैदेही - तो अब प्रधान कहाँ है...

टीलु - हमारे ही हिफाजत में दीदी... हमने उसे रातों रात साथ ले लिया और हमारी खास जगह पर छुपा दिया...

वैदेही - ह्म्म्म्म... पर चौथ के दिन ऐसा क्या होने वाला है...

विश्व - यह मैं नहीं जानता... पर प्रधान का कहना है कि... राजा का अपने यहाँ के गुर्गों.. और सेक्यूरिटी वालों पर भरोसा उठ गया है... वह एक प्राइवेट आर्मी हायर किया है... वह आर्मी दो दिन में आने वाली है... उससे पहले... हमें गवाहों से उन जजों के सामने गवाही दिलवाना है... उसके बाद... करप्शन.. मैनीपुलेशन... मर्डर... और टेरर जितने भी चार्जेस है लगा कर... हर हाल में गिरफतार करवाना है...

वैदेही - गवाही तो कटक में भी ली जा सकती है...

विश्व - हाँ दी जा सकती है... पर जिन केसेस के लिए... स्पेशल कोर्ट बना है... स्पेशल टास्क फोर्स बना है... वहाँ पर उनकी गवाही मायने रखती है... सीधे कटक में गवाही कराना... उसके लिए कुछ कानूनी पचड़े हैं... और दीदी... अभी भी सिस्टम में कुछ लोग हैं... जो भैरव सिंह के लिए काम कर रहे हैं... डीसीपी सतपती... होम मिनिस्ट्री के थ्रु... परमिशन ग्रांट करवायेंगे... उसके बाद... हम उन तीन गवाहों को... सोनपुर ले जाएंगे... जजों के सामने गवाही दिलवायेंगे...

वैदेही - तुझे यह सब... आसान लगता है...

विश्व - बिल्कुल नहीं... बिल्कुल भी नहीं... अगर आसान होता... तो मैं खुद उन गवाहों को लाने गया होता... मैं नहीं गया... इसलिए गवाहों को लाने विक्रम को भेजा है...

वैदेही - (चौंकती है) क्या... विक्रम... तो क्या... वह एक्सीडेंट...

विश्व - (एक पॉज लेकर) नहीं हुआ है...

वैदेही - (जैसे झटका खाती है) क्या...

विश्व - दीदी... कल रात... जब... सुभाष बाबु... सारी जानकारी फोन पर मुझे दी... तब रात को ही.. मैं विक्रम से मिलने आ गया था... उसे सारी बातें बता कर... अपने प्लान में शामिल कर लिया... वह तैयार भी हो गया... कल रात मेरी ही फोन से... विक्रम अपने ससुर से बात की... और सतपती जी... सुप्रिया से...

वैदेही - और आज... सुप्रिया के वज़ह से... सुबह सुबह पुरे स्टेट को न्यूज से मालूम हुआ... कि बीरजा किंकर सामंतराय का एक्सीडेंट हो गया...

विश्व - हाँ... भैरव सिंह के आदमी... मेरे और सतपती जी के पीछे लगे हुए हैं... और हम पर बराबर नजरें जमाए हुए हैं... इसलिए गवाहों को लाने का काम... सिर्फ विक्रम ही कर सकता था... बाकी कागजाती कामों के लिए... सुभाष बाबु अलग से भुवनेश्वर गए हैं...

वैदेही - ठीक है... मतलब तुम्हारे हिसाब से... एसटीएफ गवाहों का डिक्लेरेशन कराएगा... जिसे होम मिनिस्ट्री अप्रूव् करेगी... उसके बाद... उनकी गवाही मान्यता होगी... पर क्या तब तक... भैरव सिंह को पता नहीं चल जाएगा...

विश्व - हाँ... चल जाएगा... जैसे ही गवाहों का डिक्लेरेशन होगा... उसे खबर लगेगी... पर उसे यह लगेगा कि गवाहों को.... अगले सुनवाई के दिन बाद पेश किया जाएगा... और इस बीच... वह गवाहों को ना सिर्फ गवाही से रोकने की कोशिश करेगा... बल्कि... ख़तम भी करने की कोशिश करेगा...

वैदेही - और तु कह भी रहा है... वह कोई प्राइवेट आर्मी ला रहा है.. पर क्यूँ... किसलिए... क्या कोई जंग छेड़ने वाला है...

विश्व - हाँ शायद... अभी उसके लोगों ने हमसे सिर्फ हार देखी है... शायद इसीलिए बाहर से प्राइवेट आर्मी ला रहा है...

वैदेही - सिर्फ हमसे लड़ने के लिए...

विश्व - शायद हाँ... क्या पता... शायद सिस्टम से भी... (वैदेही के हाथ पर अपना हाथ रखकर) दीदी... हम उसे छकायेंगे... हमने पूरी प्लान कर रखा है... तुम घबराओ मत... इस बार उसकी कोई भी चाल कामयाब नहीं होगी...

तभी विश्व का फोन बजने लगता है l जेब से फोन निकाल कर देखता है इंस्पेक्टर दास डिस्प्ले हो रहा था l विश्व फोन उठा कर बात करने लगता है, पर वैदेही के कानों में कुछ घुस नहीं रहा था क्यूँकी विश्व के सारे खुलासे के बाद वैदेही थोड़ी चिंतित हो गई थी l

विश्व - (फोन बंद कर, वैदेही की ओर देखता है) दीदी... तुम अपने भाई पर भरोसा रखो.. किस्मत भैरव सिंह का जितना साथ देना था दे दिया... अब और नहीं... हाँ थोड़ा खतरा तो है... पर अगर हम उसके आर्मी के आने से पहले कामयाब हो गए... तो यह गाँव और इंसाफ़... दोनों बच जाएंगे... अच्छा मैं थोड़ा इंस्पेक्टर दास से मिलने हास्पिटल जा रहा हूँ... उन कांस्टेबलों को देख भी लूँगा... और कल परसों के लिए प्लान भी बना लूँगा... (विश्व जाने लगता है तो पीछे से वैदेही आवाज देती है)

वैदेही - विशु... (विश्व मुड़ कर देखता है) क्या गाँव वालों के ऊपर भी खतरा हो सकता है...

विश्व - दीदी... भैरव सिंह इस वक़्त... एक घायल दरिंदा है... बेशक हमारे पीछे उसके लोग आयेंगे... पर गाँव वालों की सुरक्षा भी तो.... मुझे... निश्चित करना पड़ेगा... आ रहा हूँ...

यह बात कह कर विश्व वहाँ से चला जाता है l वैदेही को अब खतरे का अंदेशा हो रहा था l वह थोड़ी बैचैन होने लगती है l पास बैठा टीलु वैदेही की हालत पर गौर कर रहा था l

टीलु - दीदी... तुमसे एक बात पूछूं...

वैदेही - हाँ पूछ...

टीलु - तुम... अभी... मल्लिका के बारे में सोच रही हो ना...

वैदेही - (कोई जवाब नहीं देती पर सवालिया नजर से टीलु को देखती है)

टीलु - तुम इस बारे में... विश्वा भाई से बात क्यूँ नहीं करती...

वैदेही - विशु... का लक्ष... सिर्फ एक ही है... उसे यह काम इसी दो दिन में साधना है... वैसे भी... राजा का कहर... चौथ के दिन टुटेगा... तब तक अगर विशु कामयाब हो गया... तो राजा सलाखों के पीछे होगा...

टीलु - बुरा ना मानना दीदी... अगर कुछ गड़बड़ हो गया तो...

वैदेही - विशु ने अभी कहा ना... वह गाँव वालों की सुरक्षा का प्रबंध करने... इंस्पेक्टर दास से मिलने गया है... पुलिस भी हमारे साथ होगी उस दिन... (इस बार टीलु वैदेही को सवालिया नजर से देखता है) देख... कुछ भी हो जाए... विशु से इस बात का जिक्र भी मत करना... मैं नहीं चाहती... उसके लक्ष में... कुछ भी... कोई बाधा आए... उसे अर्जुन की तरह अपनी लक्ष को भेदना है... यहाँ अगर कुछ गड़बड़ हुई... तो मैं और पुलिस वाले संभाल लेंगे... (वैदेही बरामदे से उतरती है और जाने लगती है फिर अचानक मुड़ती है) टीलु... जो मेरे साथ हुआ... वह किसी के साथ नहीं होगा... मैं रक्षा करुँगी... मल्लि और उसके जैसे लड़कियों की... भैरव सिंह ना विश्वा से जीत पाएगा... ना वैदेही से... उसकी हार तय है... विधाता ने लिख दिया है... यही उसकी नियति है...

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अगले दिन

गौरी तैयार होकर कमरे से निकल कर बाहर आती है, देखती है वैदेही आज दुकान नहीं खोला था l एक कोने में वैदेही अपनी कुर्सी पर अपने में खोई हुई बैठी थी l गौरी देखती है वैदेही अंदर से बहुत बैचैन दिख रही थी l गौरी वैदेही से सवाल करती है

गौरी - वैदेही...

वैदेही - (ध्यान टूटती है) हूँम्म्म...

गौरी - आज क्या हो गया है तुझे... कहाँ खोई हुई है...

वैदेही - कहीं नहीं काकी... बस ऐसे ही...

गौरी - क्यों झूठ बोल रही है... देख ग्राहक दुकान देख कर लौट रहे हैं... तूने अबतक दुकान नहीं खोला... क्यूँ... क्या चिंता तुझे खाए जा रही है...

वैदेही - कुछ नहीं काकी... बस मन थोड़ा बैचैन है...

गौरी - (उसके पास बैठ जाती है) अब बोल... तुझे आज से पहले इतना बैचैन.. इतना परेशान कभी नहीं देखा...

वैदेही - बात ही कुछ ऐसी है काकी... (वैदेही अपनी जगह से उठती है और दुकान की दरवाजे पर खड़े हो कर गाँव की तरफ देखते हुए) एक आस पर... उम्मीद डगमगा रहा है.. क्या पीढियों से गुलाम... इस गाँव का भाग्य बदलने वाला है...

गौरी - पता नहीं बेटी... पर बदलेगा जरूर... (वैदेही मुड़ कर गौरी को देखती है) हाँ बेटी... बदलेगा जरूर... अब मुझे यकीन हो चला है... यकीन तब भी नहीं हुआ था... जब गाँव वाले महल से उल्टे पाँव लौटने के बजाय... राजा की ओर पीठ कर लौटे थे... पर अब यकीन हो रहा है... महल में बड़े राजा की मौत के बाद भी... कंधा देने तो दूर... किसी ने भी... महल जाकर दुख भी नहीं जताया... उल्टा... शुकुरा और भूरा के पीछे बड़े राजा के नाम पर धूल उड़ाए हैं... यह आक्रोश... पीढ़ियों से दबी हुई थी... अब बाहर निकल रहा है...

वैदेही - पर राजा अभी कमजोर नहीं हुआ है... पता नहीं इस बात का... राजा पर क्या असर हुआ होगा... कहीं उसने पलटवार किया... तब... तब क्या होगा...

गौरी - भीमा.. उसके गुर्गे... एक नहीं कई बार... विश्व के हाथों धूल चाट चुके हैं... यह देख देख कर.. जो भी डर था लोगों के मन में... सब गायब हो गया है... और अब... अब तो गाँव की पुलिस भी राजा के साथ नहीं है...

वैदेही - हाँ पुलिस राजा के साथ नहीं है... पर क्या... हमारे साथ है... या होगा...

गौरी - क्या मतलब है तेरा...

वैदेही गौरी को बताती है कि कैसे विक्रम को गायब हुए गवाहों को लाने के लिए विश्व ने सपरिवार भेज दिया है, और राजा की एक प्राइवेट आर्मी कभी कभी भी पहुँचने वाली है l

गौरी - क्या... (भय के साथ) राजा ने... बाहर से एक फौज बुलाई है...

वैदेही - हाँ काकी...

गौरी - क्या तुमने विशु से बात की...

वैदेही - विशु... आधी रात को ही... टीलु को लेकर यशपुर चला गया है...

गौरी - आधी रात को...

वैदेही - हाँ.. जाने से पहले... मुझसे इजाजत लेने आया था.. राजा की फौज आने से पहले... वह सरकारी सुरक्षा राजगड़ को मुहैया कराने की कोशिश करेगा... इसीलिए जल्दबाजी में रात को निकल गया...

गौरी - भगवान करे... वह कामयाब रहे... गनीमत है... राजा ने रस्म के नाम पर... किसी को उठाया नहीं...

वैदेही - मुझे इसी बात की चिंता है... अभी महल की पहरेदारी पुख्ता है... पुलिस को राजा औकात दिखा चुका है... इसी दौरान.. अगर कुछ... (वैदेही आगे कुछ कह नहीं पाती)

गौरी - तो तुने... विशु को जाने क्यूँ दिया...

वैदेही - विशु को मैंने इस बारे में कुछ बताया नहीं... हाँ टीलु रुकना चाहता था... मैंने ही उसे चुप करा कर विशु के साथ भेज दिया...

गौरी - (कांपती आवाज में) तेरी बातेँ सुन कर लगता है... अगर राजा किसी को उठवा कर महल ले गया... कोई भी उसे बचाने महल जा नहीं पाएगा... पुलिस भी नहीं...

वैदेही - हाँ... अगर महल ले जा सके तो...

गौरी - क्या मतलब है तेरा...

वैदेही - काकी... विशु आने तक... मैं जिन लड़कियों के बारे में जानती हूँ... उन्हें राजा की आदमियों के नजर से छुपा रखूंगी... कम से कम.. महल तक तो... ले जाने नहीं दूंगी...

गौरी - विशु कब तक आ जाएगा...

वैदेही - कल रात तक... या फिर परसों सुबह तक...

गौरी - इस बीच कुछ हुआ तो...

वैदेही - जो भी होगा कल ही होगा...

गौरी - तुझे कैसे पता...

वैदेही - क्यों कि राजा ने... इंस्पेक्टर दास से वादा किया है... बड़े राजा की मौत की चौथ का मातम... पुरा राजगड़ मनाएगा...

इतना कह कर वैदेही चुप हो जाती है l गौरी आने वाले पल की अंदेशा करते हुए बैचैन होने लगती है l तभी दोनों के ध्यान तोड़ते हुए वैदेही के सामने वाली चौराहे पर आठ दस गाड़ियों का काफिला गुजरती है l सभी गाडियाँ सफेद रंग के थे l जिस अनुशासन से गाडियाँ गुजरी वैदेही को समझ आ जाती है कि कोई सरकारी मंत्री राजगड़ आया हुआ है l वैदेही अपनी दुकान से निकल कर बाहर आती है और गाड़ियों की काफिलों को महल की ओर जाते हुए देखती है l यह गाडियों की काफिला राज्य की होम मिनिस्टर का था l सारी गाडियाँ लाइन से राजगड़ महल के मुख्य फाटक के सामने रुक जाती है l होम मिनिस्टर के गाड़ी से एक अधिकारी उतर कर फाटक पर तैनात एक पहरेदार से कुछ बातेँ करता है l उसके बाद पहरेदार फाटक खोल देता है, सभी गाडियाँ महल की परिसर में आजाती है l गाड़ी से होम मिनिस्टर उतरता है l तब तक भैरव सिंह को खबर हो चुकी थी वह भी बाहर आजाता है और कॅरीडर पर खड़े होकर होम मिनिस्टर का इंतजार करता है l

होमी - नमस्ते राजा साहब... (कहते हुए सीढ़ियां चढ़ते हुए भैरव सिंह के पास पहुँचता है)

भैरव सिंह - आइए मंत्री जी... आइए... आपके आने की अपेक्षा तो थी... पर... आज नहीं...

होमी - हाँ या तो... चौथ को... यानी कलआना चाहिए था... या फिर तेरहवीं पर... पर आया हूँ तो अकारण नहीं...

भैरव सिंह - भीमा...

भीमा - हुकुम...

भैरव सिंह - मंत्री जी के साथ आए लोगों को... दिवान ए आम हॉल में आवभगत करो..

भीमा - जी हुकुम...

भैरव सिंह - आइए मंत्री जी... आज आप हमारे खास अतिथि हैं...

होम मिनिस्टर और भैरव सिंह महल के अंदर जाने लगते हैं l अंदर घुसते ही भैरव सिंह सवाल करता है

भैरव सिंह - आप अकारण नहीं आए हैं... तो कारण बताइए..

होमी - राजा साहब... आपको तो अपने समधी जी की खबर मिल चुकी होगी...

भैरव सिंह - हाँ... फोन पर नहीं... न्यूज पर मिल चुकी है... हम जा नहीं सके... कारण तुम समझ सकते हो...

होमी - राजा साहब... आपके समधी जी ने ऐसा कुछ किया है कि... मुझे चौथ से पहले आना पड़ा...

दोनों ड्रॉइंग रुम में पहुँचते हैं l होम मिनिस्टर ठिठक जाता है l भैरव सिंह उसे एक कुर्सी पर बैठने के लिए इशारा करता है और खुद एक कुर्सी पर बैठ जाता है l

भैरव सिंह - मंत्री जी... बेहतर होगा... आप ज्यादा भूमिका बनाने के बजाय... सीधे मुद्दे पर आए... और मेरे समधी जी ने ऐसा क्या कर दिया है... जिसके कारण आपको यहाँ आना पड़ा...

होमी - बताता हूँ राजा साहब... आप तो जानते हैं... सामंतराय बाबु... कभी हमारी पार्टी की सर्वेसर्वा हुआ करते थे... इसलिए जब उनके एक्सीडेंट के बाद कैपिटल हास्पीटल में जॉइन होने की खबर मिली... हम मुख्यमंत्री जी के साथ उनसे मिलने... हस्पताल गए... और सामंतराय को जैसे हमारा ही इंतजार था... हमें... फंसा दिया...

भैरव सिंह - ह्म्म्म्म... हम सुन रहे हैं... बोलते जाइए...

होमी - उन्हें पहले से अंदाजा था... मैं और मुख्यमंत्री जी उनसे मिलने जाएंगे... हम लोग हाथ में गुलदस्ता लिए... उनसे उनके कमरे में मिले... गलती यह हो गई के हम साथ में मीडिया लेकर गए थे... कमरे में मीडिया के सामने उनसे हाल चाल पूछ रहे थे... तभी डीसीपी सतपती एक फाइल लेकर पहुँचा... तब सामंतराय जी ने कहा कि उन्होंने ही डीसीपी सतपती को बुलाया है... और होम मिनिस्टर होने के नाते... डीसीपी के लाए फाइल पर दस्तखत करने के लिए कहा...

भैरव सिंह - (भौंहे तन जाती हैं) कैसी फाइल...

होमी - यह सवाल मैंने भी पूछा...

तब डीसीपी ने कहा कि... रुप फाउंडेशन के दो प्रमुख गुमशुदा गवाह मिल गए हैं... और सबसे अहम... राजगड़ मल्टिपरपोज को-ऑपरेटिव सोसाइटी में हुए आर्थिक घोटाले का सबसे बड़ा सबूत और गवाह डिक्लेरेशन...

भैरव सिंह - गवाह... कौन हैं वह गवाह...

होमी - (एक फाइल निकाल कर टेबल पर रख देता है) वह आपके आस्तीन में पलते थे... आप ही देख लीजिए...

भैरव सिंह फाइल को लेकर एक के बाद एक कई पन्ने पलट कर देखता है l हर एक पन्ना देखने के बाद फाइल टेबल पर रख देता है और होम मिनिस्टर से पूछता है

भैरव सिंह - जो हुआ... जो भी हुआ... उसकी कानूनी पहलु के बारे बताइए...

होमी - आप नाम देख कर चौंके नहीं...

भैरव सिंह - हम इतना चौंक चुके हैं कि अब इस तरह की झटके... हमें और चौका नहीं रहे हैं... हमें बस इसकी कानूनी वैधता और क्या कर सकते हैं कहिये...

होमी - इसमें... तीन नाम हैं... अनिल कुमार सुबुद्धी... श्रीधर परीड़ा... और बल्लभ प्रधान... अब चूँकि... अदालत स्थगित है... और यह दोनों केस... होम मिनिस्ट्री के अंतर्गत आते हैं... इसलिए जो भी नए गवाह जुड़ें... उनकी डिक्लेरेशन होम मिनिस्ट्री में किया जाता है और उन्हें वीटनेस प्रोटेक्शन में लेकर... सुरक्षा में रखा जाता है...

भैरव सिंह - तो.. क्या यह तीनों भुवनेश्वर में हैं...

होमी - नहीं... यहीँ पर गेम हो गया है राजा साहब... इस केस में वीटनेस प्रोटेक्शन का भी इनचार्ज डीसीपी सतपती है... उसका भी अपना स्टैंडर्ड ऑफ प्रोसिजर है... प्रधान शायद यहीँ कहीं है... डीसीपी ने... सुबुद्धी और परीड़ा को भुवनेश्वर से गायब कर दिया है और वह रातों रात यशपुर लौट आया है... पर अकेला...

भैरव सिंह - ह्म्म्म्म...

होमी - जैसे ही यह सब हुआ... मुख्य मंत्री जी ने... मुझे आपको आगाह करने के लिए भेज दिया... बड़े राजा जी के मृत्यु पर सम्वेदना व्यक्त करने...

भैरव सिंह - अभी तो अदालत स्थगित है... है ना...

होमी - स्थगित तो है... पर अगर इमर्जेंसी की हालात हो... तो अदालत आधी रात को... छुट्टी के दिन भी खुल सकती है...

भैरव सिंह - ह्म्म्म्म... अब हम... बात को पूरी तरह से समझ गए...

होमी - हाँ राजा साहब... हमें आपके समधी जी ने बुरी तरह से फंसा दिया... मीडिया सामने थी... और इलेक्शन भी आने वाली है... इसलिये... मजबूरी में... हमने मीडिया के सामने फाइल पर दस्तखत कर दिया...

भैरव सिंह - ह्म्म्म्म...

होमी - हाँ राजा साहब... मुख्य मंत्री जी ने इसी कारण मुझे यहाँ भेज दिया... अब आप अपनी ताकत लगा कर कुछ किजिए... (भैरव सिंह के चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है) राजा साहब... सरकारी तौर पर हमसे कोई मदत नहीं हो पाएगा... पर आप जो भी करेंगे... हम आपके साथ हैं...

भैरव सिंह - कल चौथ है... आप अपने कारवाँ के साथ... रंग महल में रुक जाइए... जो भी करना है... हम करेंगे... (आवाज देता है) भीमा...

भीमा - (भागते हुए आता है) आज मंत्री जी ने... हम पर बहुत बड़ा उपकार किया है... इन्हें रंग महल ले जाओ...

होमी - (अपनी कुर्सी पर उठते हुए) आपकी आतिथेयता के लिए बहुत बहुत शुक्रिया राजा साहब... पर मुझे इजाजत दिजिए... मैं भले ही मुख्यमंत्री जी की वार्ता लेकर आया हूँ... पर आया तो सरकारी गश्त में...

भैरव सिंह - सरकारी गश्त में... अगर आप सरकारी गश्त में हैं... तो लोकल पुलिस कहाँ है...

होमी - जी खबर कर दी गयी थी... अचानक गश्त थी... और वह आईआईसी अपने दो साथियों के साथ...मेडिकल में है... आपको इंफॉर्मेशन देना भी जरूरी था... इसलिए बिना लोकल पुलिस के हम यहाँ आ गए...

भैरव सिंह - (होम मिनिस्टर के साथ बाहर की ओर जाते हुए) अच्छा किया... आपने हमें आगाह कर दिया... इसका इनाम तो बनता है... इसलिए हम दरख्वास्त करते हैं... आप और आपके कारिंदे... आज की रात रंग महल में विश्राम करें.. कल की छोटी शुद्धि के बाद.. आप चले जाइएगा...

होमी - नहीं राजा साहब... आपसे यह सौजन्य मुलाकात थी... कल आकर औपचारिक मुलाकात करूँगा... तब तक... मैं यशपुर में... आईवी में रुकूंगा...

कहते कहते जब होम मिनिस्टर बाहर कॉरीडोर में आता है तो देखता है उसके सभी सुरक्षा कर्मि घुटनों पर बैठे हैं और राजा साहब के लोग उन पर बंदूक ताने खड़े हुए हैं l होम मिनिस्टर यह सब देख कर चौंकता है, भीमा अपना खुखरी होम मिनिस्टर के पीठ पर लगा देता है l

होमी - यह... यह क्या है राजा साहब...

भैरव सिंह - पिछली बार भी तुमने हमारी बेकद्री की थी... तब अपने ही जुते से... अपने गाल पर सीकाई की थी...

होमी - पर इस बार तो मैंने कोई बेकद्री नहीं की है... आपको सबूतों के साथ... आगाह किया है..

भैरव सिंह - बे मादरचोद... यह आज हम जिस मुकाम पर पहुँचे हैं... इसके पीछे गलीच... तु ही है... तूने हमसे बदला लेने के लिए... हमारे खिलाफ... हमारे दुश्मनों को लामबंद किया और उनकी मदत की... जब तुझे लगा तेरा पलड़ा हमारी बराबर हो गई... तब तु हमारे बराबर बैठने आ गया...

होमी - र.. राजा साहब...

भैरव सिंह - चुप... तुने हमें बेबस लाचार करने की कोशिश की... कामयाब भी रहा... जश्न तो बनता है ना... इसलिए जश्न रंग महल में मनेगी... तुझे क्या लगता है.. तु यहाँ कैसे आया... कल जब चीफ मिनिस्टर के सामने साइन किया... उसके बाद चीफ मिनिस्टर ने हमें फोन पर सारी बातें इंफॉर्म कर दी थी... उसके और हमारे बीच एक डील हुआ था... हम रुप फाउंडेशन और राजगड़ मल्टिपरपोज को-ऑपरेटिव सोसाइटी के केस को... हमारी तरीके से क्लॉज करेंगे... और तुझे... तेरी मुकम्मल अंजाम तक पहुँचाएँगे...

होमी - नहीं... नहीं राजा साहब... ऐसा मत कीजिए... मैं होम मिनिस्टर हूँ... अगर मुझे कुछ हुआ... तो आप भी...

इससे पहले कि होम मिनिस्टर अपनी बात पूरी कर पाता भीमा होम मिनिस्टर के गाल पर एक झन्नाटेदार थप्पड़ जड़ देता है l

भैरव सिंह - मेरे आदमी का यह चांटा... इस बात का सबूत है... के तु कभी हमारे बराबर नहीं हो सकता... बड़े राजा जी की चौथ का मातम... हम तुम्हारे साथ ही मनाएंगे मंत्री... इसलिए जाओ... पहले रंग महल में आराम करो... जाओ...

भीमा होम मिनिस्टर को धक्का देते हुए नीचे ले जाता है l वहाँ पर होम मिनिस्टर के सभी सुरक्षाकर्मियों को भैरव सिंह के आदमी रंग महल की ओर ले जाते हैं l इतने में रंगा और रॉय आते हैं और वह लोग विशेष प्रकोष्ठ में आते हैं l

रॉय - राजा साहब... लगता है आपने हमें किसी खास काम के लिए बुलाया है...

भैरव सिंह कोई जवाब नहीं देता, एक किताबों वाली अलमारी के पास आता है और उसका दरवाजा खोलता है l अलमारी के दरवाजे पर लगी एक बोर्ड पर कुछ नंबर पंच करता है l एक दीवार सरक जाती है l दीवार के पीछे नोटों का पहाड़ था l जिसे देख कर रंगा और रॉय के आँखे हैरान और शॉक से फैल जाती हैं l

भैरव सिंह - एक काम है... आखिरी.... अगर पूरा करने में कामयाब हो गए... तो आने के बाद... इस कमरे में मौजूद सारे पैसे तुम्हारे...

रॉय - (आँखों में चमक आ जाती है) तो फिर हुकुम कीजिए राजा साहब...

भैरव सिंह - अभी के अभी यशपुर... जितने आदमी हो सके लेकर जाओ.... विश्व... और उसके साथ जो भी दिखे सबको खत्म कर आओ...

रंगा - विश्व... यशपुर में...

भैरव सिंह - हाँ... वह अभी राजगड़ में नहीं है... वह यशपुर में है... उसे ढूंढो... उसे और उसके पास... उसके साथ जो भी दिखे... सबको खत्म कर दो... उसका लाश... या उसका कटा हुआ सिर लेकर आओ... और यह सारी दौलत ले जाओ...

रॉय - मतलब हमें... उसे यशपुर में ढूंढना पड़ेगा...

भैरव सिंह - हाँ... इसलिए सबसे पहले जाओ... पुरे यशपुर को अपने कब्जे में ले लो... अपने तरीके से एक सौ चौवालीस लगा दो... मगर ध्यान रखो... यशपुर में आने तो पाए... मगर... यशपुर छोड़ कर कोई जाने ना पाए... जो भी जाने की कोशिश करेगा... उसे वहीँ वहीँ के खत्म कर देना... अब सब समझ में आ गया होगा...

रंगा - जी राजा साहब...

भैरव सिंह - तो जाओ...

रंगा और रॉय अंदर ही अंदर खुशी मनाते हुए बाहर चले जाते हैं l भैरव सिंह फिर से उस इलेक्ट्रॉनिक लॉक पर कुछ नंबर पंच करता है l वह दीवार जो सरक गया था फिर से बंद हो जाता है l तभी एक नौकर आकर खबर करता है

नौकर - हुकुम... आपसे मिलने कुछ लोग आए हैं...

भैरव सिंह - (मुस्कराते हुए) उनको.... xxxx पर ठहराओ...

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यशपुर में

एक विरान जगह पर वर्जित क्षेत्र में एक टूटा फूटा घर l बाहर से भले ही टूटा फूटा भूतीया दिख रहा था, पर अंदर से वह घर अच्छा दिख रहा था l एक कमरे में विश्व दरवाजे की तरफ मुहँ कर बाहर की ओर देखे जा रहा था, कमरे में उदय, कांस्टेबल जगन और एडवोकेट बल्लभ प्रधान भी थे l विश्व टकटकी लगाए दरवाजे पर नजर गड़ाए देखे जा रहा था l उसे इंतजार था विक्रम और सुभाष की l

उदय - विश्वा... अब तक तो आ जाना चाहिए था उन्हें..

विश्व - आ रहे होंगे... प्रधान बाबु... उतावला पन ठीक नहीं है...

उदय - वैसे तुम्हारे दोस्त भी नहीं दिखाई दे रहे हैं...

विश्व - वह भी आ जाएंगे... अभी वक़्त ही कितना हुआ है...

बल्लभ - वक़्त... वक़्त कितना हुआ है... बात यह नहीं है... (सबकी ध्यान बल्लभ की ओर जाता है) वक़्त कब तक अच्छा चल रहा है... तब तक... जब तक.... राजा के आदमी हम तक नहीं पहुँच जाते...

उदय - ऐ... बकवास बंद कर...

बल्लभ - मैं... बकवास नहीं कर रहा हूँ... आने वाला वक़्त.. या तो अच्छा होगा... या फिर बुरा होगा... और मुझे लगता है... अब तक राजा को... हमारे बारे में पता लग चुका होगा... और वह हरकत में आ चुका होगा...

विश्व - तो आने दो... हम तक पहुँचने के लिए... भैरव सिंह को बहुत तैयारी करना पड़ेगा... और अपने तरफ से मैंने पहले से ही... तैयारी कर रखा है...

बल्लभ - एक बात पूछूं...

विश्व - हाँ पूछो...

बल्लभ - परसों डीसीपी सतपती... यह उदय और यह कांस्टेबल जगन... मेरी काउंसिलिंग किए... जब कि मुझे लगा था... जब मेरी भेद खुलेगी... तब काउंसिलिंग तुम करोगे...

विश्व - प्रधान बाबु... आपके घर में जो भी हुआ... वह एक ऑफिशियल प्रोसीजर था... आप एसटीएफ के डीसीपी के द्वारा... ट्रेस किए गए और गिरफ्तार किए गए... उसके बाद आपको गवाह बनाया गया... जिसकी अप्रूवल और डिक्लेरेशन... होम मिनिस्ट्री से लिया गया है... वह भी ऑफिशियल... इसलिए मैं आपके सामने नहीं आया... इससे आगे... आपकी गवाही के लिए मेरा होना जरूरी है... इसलिए आपके सामने आया... क्यूँकी यह भी...

बल्लभ - हाँ... ऑफिशियल है...

उदय - एडवोकेट प्रधान बाबु... क्या आप डरने लगे हैं...

बल्लभ - डर.. हाँ... डरने लगा हूँ नहीं... डरा हुआ था.. और अब भी हूँ...

जगन - डरे हुए हो... तो अपने डर के खिलाफ क्यूँ जा रहे हो..

उदय - (मजाकिया लहजे में) क्यूँकी डर के आगे जीत है... क्यूँ

बल्लभ - जीत और हार दोराहा होता है... मैं वह दोराहा लाँघ चुका हूँ.... और डरते डरते थक गया हूँ...

जगन - डरे हुए थे.... शायद इसलिए जिंदा हो... डर से थक गए हो... मतलब... मतलब समझ रहे हो ना...

बल्लभ - हाँ... इस डर को ढोते ढोते थक गया हूँ... पर मैं जिंदा रहना चाहता हूँ... इसीलिए तो... हार का वह मोड़ छोड़ कर... अब तुम लोगों के साथ हूँ...

विश्व कुछ कहना चाहता था पर तभी उसकी मोबाइल बजने लगती है l मोबाइल उठा कर कान से लगाता है l उसी वक़्त घर के बाहर गाड़ी रुकने की आवाज़ सुनाई देती है l सबकी बातों में विराम लग जाता है l सब बाहर की ओर देखने लगते हैं l एक गाड़ी आकर रुकती है l उस गाड़ी से सुभाष सतपती और उसकी एसटीएफ वाली टीम के बंदे उतरते हैं l पीछे पीछे और एक आर्मोर्ड वैन आती है l उससे विक्रम, सु बुद्धी, श्रीधर परीड़ा के दास भी उतर कर विश्व के सामने आते हैं l सभी कमरे में आ जाते हैं l सुबुद्धी और श्रीधर की नजरें बल्लभ से मिलती है l उन्हें देख कर सुभाष कहता है l

सुभाष - हाँ भाई... भरत मिलाप कर लो... बहुत जल्द हम निकलने वाले हैं... (विश्व से) तुम्हारा प्लान क्या है विश्व..

विश्व - अभी गाँव से सत्तू ने फोन किया था... होम मिनिस्टर महल गया था...

बल्लभ - ह्वाट... वह कब भुवनेश्वर से निकला...

दास - कल ही... मुझे उसके कॉनवोय में शामिल होने के लिए कहा गया था... पर मैंने अपने दो कांस्टेबलों का मेडिकल में होने को बात कर... मेरे थाने की सबॉर्डिनेट को चार्ज हैंड ओवर किया था... पर उन्होंने कहा कि... होम मिनिस्टर ने... लोकल पुलिस की प्रोटोकॉल एक्सेप्ट नहीं किया...

विश्व - ह्म्म्म्म... होम मिनिस्टर कल के चौथ वाली मातम के लिए आया है शायद... और (बल्लभ, सुबुद्धी और श्रीधर की ओर देख कर) लगता है... इनके बारे में जानकारी भी दे दी...

इतना सुनते ही तीनों की हालत खराब होने लगती है l सुबुद्धी विश्व से कहने लगता है

सुबुद्धी - विश्वा बाबु... अब...

विश्व - में भी यही चाहता था... के राजा तुम लोगों के बारे में जान जाए...

श्रीधर - ऐ... तु हमारा बलि चढ़ाने लाया क्या... (सुभाष से) यह... यह क्या डीसीपी साहब... यह तो हमें मरवाने की बात कर रहा है...

जगन - वह कहावत है ना... जैसी करनी... वैसी भरनी...

दास - हाँ... विश्व को फ़ंसाने वाली टीम का... तु भी तो एक हिस्सा था...

श्रीधर - ओ.. अब समझा... तुम लोग कोई गवाही दिलाने नहीं लाए हो... इस विश्वा के नाम पर... राजा भैरव सिंह के हवाले करने लाए हो...

इससे पहले कि श्रीधर और कुछ कहता, चटाक की आवाज़ आती है l श्रीधर अपना गाल सहलाते हुए बल्लभ की ओर देखता है l बल्लभ उसे उंगली दिखा कर

बल्लभ - चुप... चुप... विश्वा हमें ना सिर्फ बचाएगा... बल्कि... हमसे गवाही दिलवा कर... हर गुनाह से माफी भी दिलवाएगा... चुप... जरा सोच... कटक भुवनेश्वर में... पागलों की तरह राजा के आदमी ढूंढ रहे हैं... वहाँ से यहाँ तक बच कर आए हो... तो आगे के लिए भी भरोसा करो....

अपनी गाल सहलाते सहलाते श्रीधर विश्व की तरफ़ आस भरी नजर से देखने लगता है l

सुभाष - चलो... कोई तो हम पर भरोसा कर रहा है... (विश्व से) वैसे विश्वा तुम्हारा प्लान और तैयारी क्या है...

उदय - हाँ... तुम्हारे दोस्त अभी तक नहीं आए हैं...

विश्व - आ जाएंगे... पहले हम प्लान पर बात करें... सतपती बाबु... पहले आप बताएं... मैंने जो कहा था... उसका क्या...

सुभाष - मैं यशपुर पहुँचते ही... सबसे पहले यही किया... दास को साथ लेकर... बारह बुलेट प्रूफ जैकेट ले आया हूँ... गाड़ी में ही है... और अभी कुछ देर बाद... मेरी टीम जाकर... राजगड़ थाने को... हमारे आने तक सम्भाले रखेगी...

विश्व - मैंने कुछ और भी कहा था...

सुभाष - हाँ यार... आर्म एंड एम्युनिशन भी लाया हूँ... वह भी गाड़ी में है... पर एक बात बताओ... तुमने खान सर से... यह आर्मोर्ड वैन क्यूँ मंगवाया...

विश्व - ह्म्म्म्म सब परफेक्ट है... तो सुनिए... यह वैन... आपकी प्रोमोशन हो कर जाने के बाद... जैल में आया था... जैल में क्या हुआ था... आप जानते ही हैं... इसलिए तब... डैड... आई मीन.. सेनापति जी यह आर्मोर्ड वीइकल खरीदे थे... पर मालूम नहीं था... इस वीइकल की अब हमें ज़रूरत पड़ने वाली है...

दास - मतलब... हम पर हमला होगा...

विश्व - हाँ... वे लोग राजगड़ से निकल भी चुके हैं... उनकी टीम को अमिताभ रॉय और रंगा लीड कर रहे हैं...

विक्रम - (गुस्से से) रंगा... रॉय...

विश्व - कुल विक्रम... तो प्लान यह है कि... हम टोटल बारह लोग हैं... पर टीम दो बनेगी... एक टीम में... यह तीन गवाह... मैं... सतपती जी और दास बाबु... इस आर्मोर्ड वीइकल से... रंगा और रॉय के आँखों के सामने से राजगड़ से निकलेंगे...

विक्रम - और हम... हम लोग...

विश्व - बताता हूँ... मेरे दोस्त... तीन बाइक जुगाड़ कर चुके हैं... हमारे यहाँ से निकलते ही.. वे लोग तीन बाइक लेकर यहाँ पहुँच जाएंगे... आप दोनों... विक्रम और उदय बाबु... उनके साथ निकल जाइए...

उदय - ओ... समझा... मतलब... इन तीनों को अपने काबु में लेने के लिए... इसलिए सारे लोग तुम्हारे पीछे जाएंगे...

विक्रम - तो फिर हमारा काम क्या है...

विश्व - तुम लोग बाइक से... पीछे से... राणी पत्थर हो कर... उतम गड़ हाईवे पर हम से पहले पहुँच जाओगे... आगे जाने के बाद... पाँच किलोमीटर दूर सोनपुर हाईवे जाने के लिए... बीन्का बाईपास में उतरोगे... वहाँ... एक झाड़ी में छुपाये एक और आर्मोर्ड वीइकल... बिल्कुल ऐसी ही होगी... तुम... उदय और मेरे चारों दोस्त... वह गाड़ी ले लेना... और वहीं बाइकें उसी झाड़ी में छोड़ देना... हम किसी भी हाल में... उनसे दस मिनट का लूप लेकर... वहाँ पहुँच जायेंगे... हम जैसे ही पहुँचेंगे... तुम लोग आर्मोर्ड वीइकल लेकर चले जाना...

उदय - ओ... उसके बाद वे लोग... हमारे पीछे जाएंगे...

विश्व - हाँ... उस गाड़ी में सब बंदोबस्त होगी... बाकी उदय बाबु... मेरा दोस्त सीलु अच्छा ड्राइवर हैं...

विक्रम - ठीक है...

बल्लभ - विश्व... हम कहाँ जा रहे हैं... क्यों जा रहे हैं... मैं समझ गया... पर एक बात पूछूं...

विश्व - हूँ...

बल्लभ - तुमको इस तरह की लॉजिस्टिक सपोर्ट कौन दे रहा है...

विश्व - (मुस्कराते हुए) मेरे गुरु...

सुभाष - विश्व - तुमने हथियार कहा.. हम ले आए हैं... और लगता भी है... शायद जरूरत पड़ेगी... पर हम इमर्जेंसी कैसे क्रिएट करेंगे... जिससे जज... इनकी गवाही लेने के लिए तैयार हो जाएंगे...

विश्व - यह जो वीइकल है... इसमें मैंने... जोडार साहब से कह कर एक... सिस्टम लगवाया है... (विक्रम और सुभाष से मोबाइल मंगाता है) आप दोनों प्लीज... अपना अपना मोबाइल देंगे...

विश्व उनसे मोबाइल लेकर अपने मोबाइल से एक ऐप भेजता है और उनके मोबाइल में इंस्टाल कर देता है l फिर उनके मोबाइल उन्हें लौटा देता है l

विश्व - गाड़ी में... डैश बोर्ड पर इमर्जेंसी स्विच मार्क किया गया हुआ है.. जैसे ही हम उसे दबायेंगे... एक ड्रोन... जो गाड़ी की छत पर फिक्स है... वह गाड़ी के तीस फुट की ऊँचाई से गाड़ी की नेवीगेशन को फॉलो करते हुए उड़ेगी... तकरीबन दो घंटे तक... उस ड्रोन को कैमरा से... हर और से हो रही हमला रिकार्ड होगा... (सुभाष से) और आप उस लाइव रिकार्ड को... सुप्रिया से साझा करते रहेंगे... पूरा स्टेट... हम पर हो रहे हमले को लाइव देखेगी... यह बात अपने आप में इमर्जेंसी बनाएगी... जजों को गवाही लेने के लिए मजबूर करेगी... (विक्रम को देखते हुए) गाड़ी बदलने के बाद... तुम्हें भी ड्रोन उड़ाना है... और वीडियो कॉल से... सतपती से साझा करना है...

विक्रम - ह्म्म्म्म... मैं सब समझ गया... तो निकलना कब है...

विश्व - जैसे ही मुझे मेरे दोस्त कॉन्टेक्ट करेंगे...

इतने में दास से इशारा पाकर जगन सबके लिए बुलेट प्रूफ जैकेट ले आता है l पहले विश्व और उसके टीम पहन लेते हैं l विक्रम और उदय भी पहन लेते हैं l उन्हें अब इंतजार था तो विश्व के किसी दोस्त के फोन की l कुछ देर बाद सीलु का फोन आता है l विश्व सब सुनने के बाद विक्रम उदय और जगन को छूपने के लिए कहता है और वह दास और सुभाष के साथ तीनों गवाहों को लेकर गाड़ी में घुस जाते हैं l दास ड्राइविंग सीट पर बैठ जाता है और गाड़ी उस जगह से निकाल कर सड़क पर ले आता है l थोड़ी ही दुर जाने के बाद एक मोड़ पर कुछ गाड़ियां इनकी गाड़ी को घेरने की कोशिश करते हैं पर चूँकि यह एक आर्मोर्ड वीइकल थी l सामने आने वाली सभी गाड़ियों को धक्का मारते हुए निकल जाती है l

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"ब्रेकिंग न्यूज

दर्शकों आज यशपुर में एक पुलिस की वैन जो सोनपुर जा रही थी, तभी उस वैन पर बहुत सी गाड़ियों से कुछ अज्ञात लोगों ने धाबा बोल दिया है l आप अपनी टीवी स्क्रीन पर एक्सक्लूसिव तस्वीरें देख सकते हैं l जिस तरह से पुलिस की वैन पर तकरीबन पंद्रह सोला गाडियों से हमला किया गया स्थानीय लोग इसे पुलिस पर गुंडों का आक्रमण कह रहे हैं l हमारे सम्वाददाता को जैसे ही खबर मिली वह ड्रोन कैमरा की सहायता से हो रही झड़प को रिकार्ड कर रहे हैं और हमसे संपर्क करते हुए विजुअल्स उपलब्ध करा रहे हैं l"

हर एक टीवी के स्क्रीन पर लाइव न्यूज में एरियल व्यू से दिख रहा था l एक वैन आगे आगे सड़क पर दौड़ रही थी और उसके पीछे कई गाड़ियों से पीछा किया जा रहा था l पूरे राज्य में लोग इसी न्यूज को देख रहे थे l राजगड़ की महल में भीमा भैरव सिंह को खबर करता है तो भैरव सिंह टीवी ऑन कर देता है l वह टीवी पर यह सब दृश्य देख कर और न्यूज चैनल में चल रहे स्कोलिंग देख कर समझ जाता है कि गाड़ी में विश्व और गवाह हैं और उनका पीछा रंगा और रॉय की टीम कर रहा था l भैरव सिंह भीमा कॉर्डलेस है लाने को इशारा करता है l भीमा जैसे ही फोन लाता है उसे रॉय का नंबर डायल करने के लिए कहता है l भीमा भी बिना देर किए रॉय का नंबर लगा कर कॉल करता है l उधर रॉय फोन उठाता है l

रॉय - हैलो..

भीमा - एक मिनट लाइन में रहिए... राजा साहब बात करेंगे... (कह कर भैरव सिंह के हाथ में कॉर्डलेस दे देता है)

भैरव सिंह - क्या चल रहा है...

रॉय - राजा साहब... वह जिस गाड़ी में भाग रहे हैं... विश्वा और उन तीन गवाहों के साथ... दो लोग और भी हैं... पता नहीं चल पा रहा है...

भैरव सिंह - जो तुम और तुम्हारी टीम कर रही है... उसे पूरा स्टेट देख रहा है...

रॉय - क्या... जी मैं कुछ समझा नहीं...

भैरव सिंह - तुम उसकी चिंता मत करो... जो भी हो रहा है... ठीक हो रहा है... हमें यह सब डंके की चोट पर करना था... वही हो रहा है...

रॉय - जी... जी राजा साहब...

भैरव सिंह - अब लौटना... तो विश्व और उन हराम खोरों के कटे हुए सिरों के साथ ही लौटना...

कह कर भैरव सिंह अपना कॉल काट देता है और अपनी नजरें टीवी स्क्रीन पर गाड़ देता है l इधर फोन अपनी जेब में रख कर वॉकि टॉकी पर सबको हुकुम देता

रॉय - सब ध्यान से सुनो... तुम में से जो भी कोई इन्हें पकड़ लेगा... मैं उसे उसकी वजन बराबर नोट से तोल दूँगा... जाओ... टक्कर मारो... गाड़ी पलटाओ कुछ भी करो... इन हराम खोरों को पकड़ो...

रॉय की यह बात उसके सारे बंदे सीरियसली ले लेते हैं l पंद्रह गाड़ियों में सवार लोगों में विश्व और बाकी लोगों को पकड़ने के लिए होड़ में लग जाते हैं l जिसके वज़ह से उनके बीच तालमेल बिगड़ जाता है l कोई कोई गाड़ी टक्कर भी मार रहे थे l इधर गाड़ी के भीतर टक्कर के वज़ह से सब थोड़ी देर के लिए अस्तव्यस्त हो जाते हैं l

सुभाष - हमें लगता है... हथियारों का इस्तेमाल करना पड़ेगा...

विश्व - नहीं... उन्होंने अब तक... हथियार इस्तेमाल नहीं किया है... यह ठीक नहीं रहेगा... (फिर गाड़ी पर टक्कर लगता है, जिससे सबको झटका लगता है)

सुभाष - यह लोग पागल हो गए हैं... दास... यार... यह पुलिस वैन है... तेज चलाओ...

दास - मैं अपनी कैपासिटी से भी तेज चला रहा हूँ...

तभी विश्व का फोन बजता है, विश्व फोन निकाल कर देखता है, स्क्रीन पर डैनी डिस्प्ले हो रहा था, विश्व फोन उठाता है l

डैनी - लगे रहो हीरो... पूरा स्टेट तुम लोगों को लाइव देख रहा है...

विश्व - हमें...

डैनी - आई मीन... तुम्हारी गाड़ी को...

विश्व - हाँ आखिर यह आइडिया... आपका जो था...

डैनी - तुम लोग उन्हें छका क्यूँ नहीं रहे हो... ऐसी स्पीड रही तो... तुम लोग सोनपुर नहीं पहुँच पाओगे...

विश्व - क्या करें... वह लोग हम पर गोली भी तो नहीं चला रहे हैं... अगर एक बार... हमारी तरफ़ से फायरिंग हो गई... तो दूसरी तरफ से... बम गोले बरस पड़ेंगे...

डैनी - गाड़ी में... दो फर्स्ट ऐड बॉक्स होंगे देखो...

विश्व - हाँ देखा...

डैनी - वह दूसरी बड़ी वालीं निकालो...

विश्व इशारा करता है तो सुभाष बड़ी वाली फर्स्ट ऐड बॉक्स निकालता है, उसे खोलने पर बॉक्स उपरी ढक्कन पर एलसीडी स्क्रीन थी एक रिमोट ट्रिगर था और कुछ घड़ी आकार के गैजेट्स l

विश्व - यह... यह सब क्या है...

डैनी - देखो... गाड़ी के बीचों-बीच एक शटर नुमा दरवाजा होगा... नीचे से उतरने के लिए... (विश्व देखता है)

विश्व - हाँ है...

डैनी - तो अब ध्यान से सुनो... तुमने मुझसे जब लॉजिस्टिक्स मांगा था... तब मुझे एहसास हो गया था... ऐसा ही कुछ होगा... यह गैजेट्स... ईएमपी ट्रेंकुलाईजर है... किसी भी गाड़ी की... इलेक्ट्रॉनिक या इलेक्ट्रिक सर्किट को पूरी तरह से जाम कर सकता है... अब उन सबको रोकने के लिए... इन ट्रेंकुलाईजर्स का इस्तेमाल करो...

विश्व - समझ गया...

विश्व फोन काट देता है l गाड़ी के फर्श पर वह शटर को किनारे करता है l फिर उस बॉक्स को ऑन करता है l उपरी कवर का एलसीडी ऑन हो जाती है l रिमोट को भी ऑन करता है और फिर एक ईएमपी ट्रेंकुलाईजर ऑन करता है और गाड़ी की फर्श से उसे नीचे सड़क पर गिरा देता है l तभी एलसीडी स्क्रीन पर एक लाल रंग का डॉट दिखने लगता है l विश्व ट्रिगर रिमोट की स्विच ऑन कर देता है l एलसीडी स्क्रीन पर एक स्पाइक जम्प लेता है l सभी पीछे देखते हैं एक गाड़ी में इमर्जेंसी ब्रेक लग जाते हैं l गाड़ी की तेजी के वज़ह से गाड़ी झटके के साथ बीस पच्चीस फुट ऊंचाई पर गुलाटी मारते हुए सड़क पर गिरती है l यह देख कर रॉय और उसकी टीम हैरान हो जाते हैं l

रॉय - गाड़ी तेजी से चलाओ... और सड़क पर नजर भी रखो... गाड़ियों को जीगजाग चलाओ... अंदर से कोई... ईएमपी ट्रेंकुलाईजर इस्तेमाल कर रहा है...

रंगा - अगर उन्होंने सारे गाडियों पर इस्तेमाल कर दिया... तब...

रॉय - अगर एक और गाड़ी की पलटी होती है... तो उन्हें रोकने के लिए गोली... गोला जो भी दाग दो...

अब सारी गाड़ियां पीछा तो कर रही थीं पर जीगजाग तरीके से l यह देख कर सुभाष कहता है "अब मुझे इस्तेमाल करने दो" इतना कह कर विश्व के हाथों से अपना वह रिमोट और ट्रेंकुलाईजर ले जाता है और वह नीचे सड़क पर फेंक देता है l रिमोट पर स्विच ऑन करता है पर कोई फायदा नहीं होता है l वह ईएमपी ट्रेंकुलाईजर बेकार जाता है l सुभाष और एक ट्रेंकुलाईजर डालता है थोड़ा गाड़ियों के मूवमेंट देखने के बाद रिमोट दबाता है इसबार सबसे पीछे वाली गाड़ी मुड़ कर पलट जाती है l यह देख कर रंगा रॉय की हाथ से वॉकि टॉकी लेकर सारे अपने आदमियों से कहता है l

रंगा - हम यहाँ चोर पुलिस नहीं खेल रहे हैं... उस गाड़ी में एक हारामी है.... उसे ही नहीं... उसके साथ जो भी गाड़ी में उन सबको मारना है... चलाओ गोली...

अब हर एक गाड़ी में से एक एक स्नाइपर अपनी अपनी गन लेकर अपनी अपनी गाड़ी में पोजीशन बनाते हैं और फायर करने लगते हैं l चूँकि आर्मोर्ड गाड़ी बुलेट प्रूफ था इस लिए गाड़ी को कुछ नहीं होता l पर गाड़ी पर गोलियों की बरसात होते ही सुबुद्धी चिल्लाने लगता है l उसे डांट कर सुभाष चुप कराता है l

सुभाष - दास... और कितना दूर है... बिन्का बाई पास...

दास - नेवीगेशन के हिसाब से... दस किलोमीटर और...

श्रीधर - हम क्यूँ नहीं... गोली चलाते उनपर...

विश्व - हम...

श्रीधर - ठीक है... तुम... तुम क्यूँ नहीं गोली चला रहे...

विश्व - हमारी मर्जी...

सुभाष जितनी भी ट्रेंकुलाईजर थे सभी को ऑन करता है l एलसीडी में सीरियल नंबर डालता है और सबको बारी बारी से नीचे सड़क पर डाल देता है l विश्व रिमोट लेकर लगातार ट्रिगर दबाता चला जाता है l इसके वज़ह से आगे पीछे हो कर पाँच छह गाड़ियां पलट जाते हैं l जिसके कारण कुछ गाड़ियां आपस में टकरा जाती हैं l जिसके वज़ह से सारी गाड़ियां रुक जाती हैं l रॉय और रंगा दोनों उतरते हैं

रंगा - जिस जिसकी गाड़ी की माँ बहन हो गई है... वह यहाँ रह कर अपनी माँ चुदाए... बाकी गाडियों को सम्भल कर... जैम से निकालो... वे लोग ज्यादा दूर नहीं गए होंगे... अब उनको नहीं पकड़ेंगे... उन सबको गोली मार देंगे...

रॉय - अब की बार गाड़ी नहीं... टायरों पर निशाना लगाओ... गाड़ी की दूरी कम हो... तो ग्रेनेड फेंक मारो... मगर मार डालो... हम यशपुर से बहुत दूर आ चुके हैं... वह लोग बीन्का बाईपास से सोनपुर जा रहे होंगे... जल्दी पहुँचो...

बाकी जितनी गाड़ियां थीं सब धीरे धीरे से उस जैम से निकल कर बिन्का बाईपास की ओर जाने लगते हैं l और उस तरफ बाईपास ओवर ब्रिज के नीचे पहले से ही विक्रम उदय और सीलु, मिलु टीलु और जिलु विश्व और गाड़ी की इंतजार कर रहे थे l कुछ ही देर बाद विश्व और उनकी गाड़ी इनके सामने थी l जैसे ही विश्व गाड़ी से उतरता है सीलु झाड़ियों में छुपी हुई दूसरी आर्मोर्ड वैन निकाल लेता है l उदय और विश्व के चारों दोस्त उस गाड़ी में बैठ जाते हैं l विश्व उस गाड़ी का मुआयना करता है l देखता है इस गाड़ी में भी दो दो फर्स्ट ऐड बॉक्स थीं l विश्व समझ जाता है इस गाड़ी में भी डैनी ने वही व्यवस्था करी हुई है, विश्व विक्रम को ट्रेंकुलाईजर्स के बारे में जानकारी दे देता है और सारे हथियार जो इनके गाड़ी में थे वह सब विक्रम वाली गाड़ी में रखवा देता है l विक्रम सब समझ जाता है और फिर वह जल्दी से जाकर गाड़ी में बैठ जाता है l पर कुछ सोच कर विश्व आवाज देता है

विश्व - विक्रम... (विक्रम गाड़ी से उतरता है)

विक्रम - हाँ...

विश्व - (आता है विक्रम के गले लग जाता है और कहता है) हमने अब तक कोई गोलियां नहीं चलाई है... पर तुम लोग गोली का जवाब गोली से देना.. और विक्रम... तुम और तुम्हारे साथ.. (कुछ कह नहीं पाता, एक पॉज लेने के बाद) जिंदा लौटना... प्लीज...

विश्व की इस भावुक बात सुन कर सभी दोस्त उतर कर विश्व के गले लग जाते हैं l

सुभाष - ओ भई... अगर मिशन सक्सेस हुआ... तो भरत मिलाप और भी होंगे... अभी हमने सिर्फ उन्हें छकाया है...

विश्व - जाओ...

सभी गाड़ी चढ़ जाते हैं l सीलु गाड़ी स्टार्ट कर गाड़ी को बिन्का हाईवे पर दौड़ा देता है l वहीँ सुभाष, दास विश्व और तीनों गवाहों को लेकर झाड़ियों में से हो कर सड़क के नीचे उतर जाते हैं l वहीँ पर तीन बाइक्स रखे हुए थे l पर जल्द बाजी में पुरानी वैन को छुपाना भूल जाते हैं l इधर ब्रिज के नीचे छह सात गाड़ी आकर रुकती हैं l रॉय और रंगा का चेहरा उतर जाता है, क्यूँकी जो वैन उन्हें दिखा वह खाली था l वह लोग इधर उधर झाँकने लगते हैं कि उन्हें बिलकुल इसी तरह एक और वैन को बिन्का हाईवे पर जाते हुए दिखता है l

रॉय - ओ... हमें बेवक़ूफ़ बनाने के लिए... यहाँ गाड़ी छोड़ दिए... वह देखो... और एक वैन... बिल्कुल सेम टू सेम... चलो...

सभी जो गाड़ियों से उतरे थे, जल्दी जल्दी गाड़ी चढ़ कर बिन्का हाईवे पर उस आर्मोर्ड वीइकल का पीछा करने लगते हैं l उनके जाते ही तीनों बाइकें सड़क पर आ जाती हैं l सारी गाड़ियां जब इनके आँखों से ओझल हो जाते हैं तो सुभाष सुप्रिया को फोन करता है l

सुभाष - तुम मेरी बात को ऑडियो लाइव कराना... और उसी ऐरियल रिकार्डिंग को बार बार रिपीट कराते रहना...

सुप्रिया - ठीक है...

विक्रम - और वहाँ पर क्या चल रहा है...

सुप्रिया - सब कुछ प्लान के हिसाब से चल रहा है... पत्री सर... सुधांशु मिश्रा भी आ गए हैं...

विक्रम - ओके...

सुप्रिया - ऑल द बेस्ट...

विश्व - एक गलती तो हुई... पर वह लोग पकड़ नहीं पाए...

विक्रम - हाँ... हम इस वैन को छुपा नहीं पाए... पर किस्मत हमारे साथ है...

इस बार उत्तम गड़ के रास्ते विश्व और उसके बाइकर्स जाने लगते हैं l उधर गुस्से से तमतमाये रंगा और रॉय और उनके साथी गाड़ी के पास आते आते गोलियाँ बरसाने लगे l गाड़ी में एक राइफ़ल उदय और एक स्नाइपर गन विक्रम लिए तैयार थे l जैसे ही गाड़ी पर गोलियां लगने लगी जवाब में विक्रम और उदय काउंटर फायर करने लगे l इनकी काउंटर फायर से दो तीन आदमी उनकी चलती गाड़ी से गिर गए l काउंटर फायर होते ही जिस तेजी के साथ यह लोग गाड़ी का पीछा कर रहे थे गाड़ी थोड़ी धीमा कर कुछ दूरी बरकरार रखते हुए पीछा करने लगे l

रंगा - इनके पास गन है...

रॉय - हम ही बेवक़ूफ़ निकले... यह पुलिस की आर्मोर्ड वीइकल है... हमें पहले से ही समझ जाना चाहिए था..

एक आदमी - अगर... इनके पास गन था... तो पहले हम पर काउंटर फायर क्यूँ नहीं किया...

रॉय - अब समझा... उन्होंने दूसरी गाड़ी क्यों ली... मतलब पहली वाली गाड़ी में... हथियार नहीं थे... इसलिए इन लोगों ने... दूसरी गाड़ी का इंतजाम करवाया....

रंगा - हाँ... वह भी हथियारों के साथ...

रॉय - एक मिनट एक मिनट... (गाड़ी रुक जाती है, उसके गाड़ी रुकते ही सारी गाड़ियां वहीं रुक जाती हैं ) कहीं ऐसा तो नहीं... हम बेवक़ूफ़ बन रहे हैं... सोनपुर जाने के लिए... यह जंक्शन... एक बिन्का... और दूसरा... उत्तम गड़... ए.. ऐ... हमारे साथ खेल हो गया... विश्व और वह गवाह... उत्तम गड़ के रास्ते गए हैं... चलो चलो... गाड़ी घुमाओ...

रॉय के इतना कहते ही सभी अपनी अपनी गाड़ी घुमाने लगते हैं l आगे आगे जा रहे विक्रम और उदय यह सब देख लेते हैं l

विक्रम - गाड़ी रोको सीलु... गाड़ी रोको...

उदय - लगता है उन्हें शक हो गया है... वह लौट रहे हैं...

सीलु - क्या...

मिलु - हाँ... उन्हें शक हो गया है... जल्दी हमें उनके पीछे जाना पड़ेगा...

टीलु - हाँ... विश्वा भाई लोगों के पास हथियार भी नहीं है... जल्दी...

सीलु भी बिना देरी किए गाड़ी घुमाता है और एक्सीलेटर पर पैर दबा देता है l गाड़ी अब बिन्का रोड छोड़ कर रंगा और रॉय के पीछे जाने लगता है l बहुत दूर से ही सही मगर रंगा को अपने पीछे आती हुई आर्मोर्ड वीइकल दिख जाती है l

रंगा - रॉय बाबु... अपने सही पकड़ा... उस आर्मोर्ड गाड़ी में... विश्वा है ही नहीं... अब जो भी कोई है... वह हमारे पीछे आ रहा है..

रॉय - सबको बोलो... रेंज में आते ही... गोलीयों से भुन डाले..

रंगा - ऐ सुनो रे... हमारे चाहने वाले... हमारे पीछे आ रहे हैं... अपनी रेंज में इन्हें लो... और सब हरामीयों का तन्दूरी फ्राई कर दो...

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"जैसा कि हमें हमारी रिपोर्टर जो कि फिल्ड से अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर रहे हैं कि जो पुलिस की गाड़ी थी उसमें एसटीएफ हेड डीसीपी सुभाष सतपती वीटनेस प्रोटेक्शन की कार्य को हाथ में लेकर अपने साथ कुछ गवाहों को बचा कर राजगड़ सीमा के बाहर जा चुके हैं l फिर भी उनके पीछे न्याय के दुश्मन बंदूक और बमों के साथ पीछे लगे हुए हैं l हम कोशिश कर रहे हैं एसटीएफ हेड श्री सुभाष सतपती जी से संपर्क करने की l

हाँ हाँ.. हाँ तो दर्शकों हमारे टेक्निशियन श्री सुभाष सतपती जी से संपर्क करने में सफल हो गए हैं l अभी कुछ ही देर में हम श्री सतपती जी को लाइव सुन पायेंगे, हाँ तो डीसीपी सुभाष जी क्या आप मुझे सुन पा रहे हैं..

सुभाष - जी... जी..

सुप्रिया - डीसीपी सुभाष जी... ड्रोन कैमरा से... हम जो भी अब तक देखे हैं... वह बहुत ही भयाभय है... इस वक़्त आप कैसे हैं...

सुभाष - हम सुरक्षित हैं... क्यूँकी हम एक आर्मोर्ड वीइकल में हैं... इसलिए इस पर गोलियों का फिलहाल कोई असर नहीं हुआ है..

सुप्रिया - हमारे सम्वाददाता कह रहे थे... यह एक वीटनेस प्रोग्राम है...

सुभाष - जी... जैसा कि आप जानती होंगी... गृह मंत्रालय ने... रुप फाउंडेशन केस में जो नया एसटीएफ बनाया था... उसमें मुझे प्रमुख बनाया गया था.. अपनी तहकीकात के दौरान... मैंने कुछ नए और छुपे हुए गवाहों को ढूंढ निकाला... मैंने उनकी डिक्लेरेशन बस किया था... और वीटनेस प्रोटेक्शन के तहत... सुरक्षा प्रदान करना चाहता था... पर रुप फाउंडेशन के शत्रुओं को खबर लग गई... इसलिए वे लोग हमारे ऊपर हमला कर मिटना चाह रहे हैं...

सुप्रिया - एक आखिरी प्रश्न... क्या आप गवाहों को... सुरक्षित कर... केस की समाधान करा पायेंगे...

सुभाष - आशा यही है... और प्रयत्न भी... बाकी जो भगवान की इच्छा...

सुप्रिया - लगता है... हमारा संपर्क कट गया है... फिर भी हमारे पास जो फुटेज उपलब्ध है... उसे देख कर... "

सारा राज्य टीवी पर प्रसारित हो रही न्यूज में पहली वाली रिकार्डिंग बार बार चल रहा था, उसे देख रहा था l उधर सीलु जितना करीब होता जा रहा था रंगा और रॉय के आदमी गोलियाँ बरसाने लगते हैं l ज़वाब में उदय और विक्रम काउंटर फायर करने लगते हैं l सामने से इतनी ज्यादा गोली बरस रही थी के आर्मोर्ड गाड़ी के विंड शील पर क्रैक्स आने लगते हैं l विंड शील बेशक बुलेट प्रूफ थी पर गोलियों के निशानों के क्रैक्स बढ़ते ही जा रहे थे l सामने से ग्रेनेड भी फेंका जा रहा था पर रेंज से बाहर होने के कारण कोई नुकसान नहीं हुआ था l

उदय - उनकी अटेकिंग पोजीशन बढ़िया है... हमारा काउंटर... फ्रंट साइड... असरदार नहीं हो रहा है...

विक्रांत - हाँ... मैं भी महसूस कर रहा हूँ...

मील - अगर यह लोग इसी तरह से गए... तो एक आध घंटे में... विश्व भाई तक तो पहुँच भी जाएंगे...

सीलु - और यहाँ... विंडशील पर इतने क्रैक्स आ गए हैं कि... विजिबिलिटी कम हो रहा है...

टीलु - हम अगर आगे होते... (ट्रेंकुलाईजर्स को दिखा कर) इन सबका सही इस्तेमाल भी कर सकते थे...

विक्रम - (कुछ सोच कर) उदय बाबु... अपनी गूगल मैप के जरिए... कोई शॉर्ट कट ढूंढो... हमें हर हाल में इनके आगे रहना है...

सीलु - वैसे मैं एक शॉर्ट कट जानता हूँ... पर आप लोगों को कंफर्ट ना लगे...

विक्रम - भाड़ में जाए कंफर्ट... हमें विश्व और रंगा एंड रॉय कम्पनी के बीच में आना है...

उदय - पर अगर हमने रास्ता बदला तो... उन्हें शक नहीं हो जाएगा...

विक्रम - एक काम करो सीलु... इस बार ग्रेनेड के रेंज में चलो...

सील - समझ गया...

सीलु गाड़ी की स्पीड बढ़ा देता है l एक गाड़ी के पास आ जाता है l इस बीच विक्रम और उदय सीलु की गाड़ी को कवर फायर देने लगते हैं l जिसके कारण सबसे आखिर में जा रही गाड़ी के पास पहुँच जाते हैं l उस गाड़ी में से एक आदमी ग्रेनेड फ़ेंक मारता है l सीलु सावधान था, गाड़ी की स्टीयरिंग को ऐन मौके पर मोड़ देता है l जिसके वज़ह से ग्रेनेड गाड़ी से टकराने के बजाय दूसरी दिशा में सड़क पर फूटता है l जिसके शॉक वेव से गाड़ी हिल जाती है और उसी समय सीलु गाड़ी में ब्रेक लगा देता है l रंगा और रॉय को लगता है गाड़ी में कुछ डैमेज हुआ है जिसके वज़ह से गाड़ी रुक गई है l सबसे आखिरी वाले गाड़ी में जितने बंदे थे वह सब जश्न मनाने लगते हैं l उनकी गाड़ी आगे बढ़ चुकी थी l पीछे आर्मोर्ड गाड़ी रुक गई थी l कुछ देर बाद सीलु गाड़ी घुमाता है और हाईवे के नीचे पगडंडी वाली रस्ते पर उतार देता है l गाड़ी जितनी तेजी से आगे बढ़ रही थी गाड़ी उतनी ही ज्यादा झटके खा रही थी l पर सीलु पर इस बात का कोई असर नहीं पड़ रहा था l सीलु गाड़ी भगाए जा रहा था l कुछ देर बाद हाईवे से दूर कच्ची पक्की सड़क पर पेड़ और जंगल के ओट में गाड़ी सरपट भाग रही थी l

विक्रम - तुम्हें इन सब रास्तों के बारे में कैसे पता...

सीलु - मैं दो साल यहाँ हर चप्पे-चप्पे को छान मारा हुआ है... हम उनसे पहले पहुँच जायेंगे...

विक्रम - तो हम कहाँ पहुँचेंगे...

सीलु - कुछ दूरी पर... महानदी ब्रिज आएगी... वह ब्रिज एक किलोमीटर लंबा है... उनसे पहले हम ब्रिज तक पहुँच जाएंगे...

विक्रम और कोई सवाल नहीं करता है l सीलु उन संकरी रास्तों पर गाड़ी को किसी गोली की तेजी से दौड़ा रहा था l कुछ ही मिंटो में ब्रिज तक पहुँच जाते हैं l जैसे ही गाड़ी ब्रिज पर दौड़ने लगती है विक्रम टीलु को ट्रेंकुलाईजर्स को इस्तमाल करने के लिए कहता है l टीलु गाड़ी की फर्श की शटर को सरका कर सारे ट्रेंकुलाईजर्स को ऐक्टिव कर सड़क पर डालने लगता है l इस दौरान गाड़ी ब्रिज के अंतिम छोर पर पहुँच जाती है l सीलु गाड़ी को घुमा कर आढा कर गाड़ी को ब्रिज पर खड़ा कर देता है l टीलु वह ट्रेंकुलाईजर्स का एलसीडी और रिमोट लेकर उतर जाता है l गाड़ी के दोनों सिरे पर विक्रम और उदय पोजीशन ले लेते हैं l कुछ ही देर बाद रंगा और रॉय की टीम को आते हुए देखते हैं l उधर रंगा और रॉय के टीम की सभी गाड़ियां ब्रिज के दूसरे सिरे पर रुक जाती हैं l रंगा अपनी आँखे मलता है l

रॉय - लगता है... कोई शॉर्ट कट लेकर आए हैं...

रंगा - हाँ... अब क्या करें...

रॉय - (अपने साथियों की तरफ़ मुड़ता है) देखो... हमें आज... इन सबकी लाशों को... या तो लेकर जाना है... या फिर इन सबकी लाशों पर गुजर कर जाना है... दोनों ही सूरत में... पैसा है पैसा मिलेगा... बे हिसाब.. पैसा मिलेगा... तुम लोगों के लिए यह नया नहीं है... ऐसी हालात से... तुम लोग बहुत बार गुजरे हो... यह लास्ट टाइम है... सोच लो...

सभी लोग अपनी अपनी गाड़ी लेकर आगे बढ़ने लगते हैं l टीलु तैयार था जैसे उसके एलसीडी में ट्रैक पर पॉइंट क्रॉस ओवर हुआ, टीलु रिमोट दबाता गया l चार पाँच गाड़ियां ब्रिज के ऊपर ही पलटने लगी l यह देख कर रंगा और रॉय हैरान होते हैं l जैसे ही पलटी हुई गाड़ी से लोग निकलने लगे उन्हें उदय और विक्रम उन्हें अपने निशाने पर लेकर ठोकने लगते हैं l यह देख कर रंगा चिल्लाता है

रंगा - सब अपनी अपनी गाड़ी के पास पोजीशन ले लो...

सभी गाडियों के ओट लेकर खुद को बचाने लगते हैं l रंगा काउंटर फायर करने लगता है l जिसके वज़ह से विक्रम और उदय की फायरिंग थोड़ी देर के लिए बंद हो जाती है l जिसके आड़ में रंगा और रॉय अपने लोगों को इकट्ठा कर सबसे पहले वाली गाड़ी तक पहुँच जाते हैं l अब उनके बीच तीस या चालीस मीटर की ही दूरी थी l एक दूसरे को एक दूसरे की पोजीशन के बारे में जानकारी भी थी l

विक्रम - (विश्व की दोस्तों से) एक काम करो... मैं और उदय... कवर फायर देते हैं... तुम लोग.. ब्रिज से उतर जाओ...

जिलु - नहीं विक्रम बाबु... हम आपको अकेले कैसे छोड़ दें..

विक्रम - समझा करो... यहाँ गन सिर्फ दो हैं... और हम छह... तुम लोगों को अगर कुछ हो गया... तो तुम लोगों के चक्कर में.. हम लोग भी फंस जाएंगे...

सीलु - तो एक काम कीजिए... यह गन आप मुझे दे दीजिए... और आप यहाँ से नीचे उतर जाइए...

विक्रम - शॉट अप... यहाँ तुम लोग मेरी जिम्मेदारी हो... ना कि मैं... अगर मेरी जिम्मेदारी हल्का करोगे... तो मैं... भी तुम लोगों के साथ... यहाँ से निकल सकता हूँ...

मीलु - नहीं...

उदय - देखो... यहाँ सेंटी होने से कुछ नहीं होगा... उस तरफ़ हर कोई... बंदूक से लैस है... और यहाँ हमारे पास सिर्फ दो...

विक्रम - देखो... तुम लोग जाओ... और हमें पाँच मिनट टाइम दो... फिर मिलकर... हम सब वापस जाएंगे...

सीलु - मगर...

विक्रम - देखो.. वह लोग भी कुछ प्लान बना रहे होंगे... और हम... हम सिर्फ वक़्त बर्बाद कर रहे हैं... इसलिए जाओ जल्दी से उतरो...

विक्रम फायर करता है, उसकी देखा देखी उदय भी फायर करता है l इसी एनगेजमेंट के दौरान ब्रिज से सीलु और उसके साथी उतर कर सड़क के किनारे आ जाते हैं l चारों एक दूसरे को देखते हैं और नीचे उतर कर ब्रिज के नीचे से दूसरे छोर की ओर भागने लगते हैं l नदी सुखी हुई थी l किन्हीं किन्ही जगहों पर पानी का बहाव था l जिसे अनदेखा कर चारों दोस्त ब्रिज के दूसरे छोर की जाने लगते हैं l ब्रिज के उपर फायरिंग चल रही थी l तभी किसीने एक ग्रेनेड फेंका था जो आर्मोर्ड वीइकल के पास फटता है l जिसके शॉक वेव के चलते दोनों उदय और विक्रम गाड़ी से झटका खाते हैं l यही मौका समझ कर दो तीन आदमी विक्रम का गाड़ी की ओर भागते हुए आते हैं तभी उन्हें उदय शूट कर देता है l विक्रम और सजग हो जाता है l उन्हें गिरता हुआ देख कर रंगा और दो लोगों को फायर करते हुए आगे बढ़ने के @लिए कहता है l वह दोनों वही करते हैं l इस बार विक्रम उदय को निशाना देने के लिए कहता है l उदय अपना निशाना देते हुए जब फायर करने लगता है तो उसकी मैग्ज़ीन खाली हो जाता है l तभी एक गोली आकर उसके जांघ पर लगती है पर तब तक विक्रम उन दोनों को टपका देता है l विक्रम उदय को खिंच कर गाड़ी के पीछे लाता है l विक्रम अपनी एक पोजीशन बना कर जिस गाड़ी के पीछे रंगा और रॉय छुपे हुए थे उसे ऑब्जर्व करता है l फिर छुप कर अपनी स्नाइपर गन से उस गाड़ी की फ्यूल टैंक को निशाना बना कर फायर करता है l निशाना एक दम सही लगा था l गाड़ी में धमाका होता है जिसके चपेट में बहुत से लोग आ जाते हैं और तितर-बितर हो कर सड़क पर बिछ जाते हैं l रंगा और रॉय की हालत भी ऐसी ही थी l धमाके के बाद विक्रम थोड़ा इंतजार करता है l कोई हल चल ना होता देख विक्रम बाहर निकलता है धीरे धीरे आगे बढ़ने लगता है कि तभी एक घायल आदमी विक्रम पर ग्रेनेड फेंकता है l विक्रम पीछे भागते हुए आर्मोर्ड गाड़ी के पीछे छलांग लगा देता है l धमाके से बाल बाल विक्रम बच जाता है पर थोड़ा घायल ज़रूर हो जाता है और उसका बंदूक भी छूट जाता है l जब तक सम्भल कर उठता है तो देखता है रंगा और रॉय तीन चार लोगों के साथ विक्रम के सिर पर खड़े थे l

रंगा - यह मैं क्या देख रहा हूँ... क्षेत्रपाल घर का चराग ही... घर को आग लगा रहा है...

रॉय - साला हम यहाँ विश्व के लिए आए थे... और यहाँ विकी बाबु हमें पोपट बना दिए...(विक्रम संभल कर पीठ टिकाए गाड़ी से टिक पर बैठ जाता है) अब इसका क्या करें...

रंगा - इसे... इसके बाप की जरूरत नहीं... इसकी बाप को... इसकी जरूरत नहीं... हमारी जरूरत के बीच आ गया... तो इसे मार ही देते हैं...

रॉय - हाँ... मार दे यार... मुक्ति दे दे... हमें थोड़ी देर के लिए सुकून मिल जाएगा... विश्वा को नहीं मार पाए... उसके बदले यही सही...

रंगा अपना पिस्टल निकालकर विक्रम पर जैसे ही निशाना लगाया ठीक उसी समय सीलु जिलु मीलु और टीलु पीछे से आकर इन पर छलांग लगा देते हैं l कुछ देर के लिए सही सभी का बैलेंस बिगड़ जाता है l अब उनके बीच हाथापाई शुरू हो जाती है l इतने में विक्रम खुद को सम्भल कर रॉय पर टूट पड़ता है l थोड़ा सा ही हाथ पैर चलाने के बाद रॉय को घुटनों पर लाकर उसकी गर्दन को अपनी बाहों में कस लेता है l यह सब देख कर रंगा धीरे धीरे पोंछे खिसकने लगा था कि एक गोली उसके टांग पर लगती है l रंगा दर्द से बिलबिलाते हुए नीचे गिरता है l विक्रम को छोड़ कर सबका ध्यान वहाँ टिक जाता है, जहाँ से गोली चली थी l किसी का भी ध्यान घायल उदय की तरफ नहीं था l जब सब हाथापाई में गुत्थम गुत्था कर रहे थे तब उदय ने नीचे गिरी पड़ी गन उठा लिया था l अब रंगा नीचे पड़ा था और सभी उदय के निशाने पर थे इसलिए सब शांत हो गए पर विक्रम रॉय का गर्दन दबोच रखा था l यह देख कर सीलु अपने दोस्तों के साथ विक्रम से रॉय को बचाने की कोशिश करते हैं l पर तब तक रॉय का जिस्म ठंडा पड़ चुका था l उदय लंगड़ाते हुए विक्रम के पास आता है और उसे झिंझोडता है l जब रॉय का जिस्म कोई हरकत नहीं करता तब उसके बदन को विक्रम छोड़ता है l

सीलु - विक्की बाबु... यह क्या किया आपने...

विक्रम - यह मेरे इकलौते दोस्त... महांती का बदला था... जो इसने मृत्युंजय के साथ मिलकर मार डाला था... (गुर्राते हुए) अब रंगा...

तब तक रंगा भी सम्भल चुका था उसके हाथ में एक ग्रेनेड था l जब सब उसके तरफ़ देखते हैं तब वह ग्रेनेड से पिन निकाल चुका था l उदय अपना गन तान देता है l

रंगा - खबर दार... कोई आगे मत बढ़ना... मुझे अब... यहाँ से जाने दो... नहीं तो... मेरे साथ तुम लोग भी मरोगे...

सब वहीँ चकित खड़े हो जाते हैं l रंगा अपने लोगों को इशारे से बुलाता है l उदय किसी को भी नहीं रोकता l वह सब रंगा के पीछे खड़े हो जाते हैं l

विक्रम - अब क्या करोगे... तुम कितना दूर जा पाओगे... पीछे जाओगे तो हम तेरे रेंज से बाहर हो जायेंगे... पर तु हमारे रेंज में होगा... हम तुम सबको गोली मार देंगे...

रंगा - हाँ बात तो तुने सही कही... पर कोई बात नहीं... रॉय को क्यूँ मारा... मुझे समझ में आ गया... पर मुझे तु क्यूँ मारना चाहता है...

विक्रम - तुझे एक नहीं कई मौतें मारना चाहता हूँ... तु भूल गया... मेरी शुब्बु को... किडनैप कर छूने की कोशिश की थी... विश्व ने बचाया था... शुब्बु को...

रंगा - पर देर हो गई विक्रम... देर हो गई... विश्वा आज ना सही.. कभी भी मारा जाएगा... पर आज... तुम सब मारे जाओगे...

कह कर ग्रेनेड विक्रम की ओर उछाल देता है l विक्रम उदय सीलु मीलु सब पीछे भागते हुए वैन के ओट में जाकर नीचे कूदी लगाते हैं l ग्रेनेड फट जाता है गाड़ी को झटका लगता है जिससे गाड़ी कुछ फिट सरक जाता है l गाड़ी के पीछे जो ओट बना कर कूदी लगाए थे वह लो गाड़ी के चपेट में आ जाते हैं l विक्रम थोड़ा सावधान था इसलिए उसका स्नाईपर गन उसके हाथ लग जाता है l उधर रंगा और उसके साथी अपने गाड़ियों के पास भाग रहे थे l विक्रम गन उठता है एक एक को निशाने पर लेटे हुए फायर करने लगता है l चार बंदे गिर चुके थे l रंगा और बाकी तीन बंदे एक गाड़ी के ओट में आ जाते हैं l उन्हें वहाँ पर हथियार भी मिल जाते हैं l रंगा उन्हें विक्रम को रोकने के लिए कह कर पीछे जाने लगता है l इसलिए वे हथियार हाथ में लेकर विक्रम पर फायर करने लगते हैं l पर विक्रम निशाना ले चुका था l दो बंदे ढेर हो जाते हैं, और एक घायल हो जाता है l विक्रम जब उस कार तक पहुँचता है तीसरा बंदा ज़ख्मी हालत में छटपटा रहा था l विक्रम अपनी नजरें घुमाता है पर उसे रंगा नहीं दिखता है वह इधर उधर देखता है के तभी एक खंजर पीछे से उसके कंधे पर घुस जाता है l विक्रम पीछे मुड़ कर देखता है रंगा एक भद्दी हँसी हँस रहा था l रंगा खंजर को विक्रम के कंधे से निकलता है फिर विक्रम के कमर पर घुसा देता है l विक्रम चिल्लाता है पर अपना हाथ पीछे लेकर रंगा को पकड़ लेता है और उसे सामने खिंच कर लाता है l

रंगा - साले.. हरामी... कुत्ते... छोड़... छोड़ मुझे...

विक्रम अपनी कमर से खंजर निकाल कर रंगा के सीने में गाड़ देता है l रंगा छटपटाते हुए जमीन पर गिरता है l विक्रम भी धीरे धीरे गिरने लगता है l सीलु और उसके साथी भागते हुए विक्रम के पास पहुँचते हैं l
 
शुक्रिया मेरे भाई आपका बहुत बहुत शुक्रिया

आप दिल से पढ़ रहे थे इसलिए कहानी आपके आँखों के सामने चल रहा था

हाँ दोनों एक दूसरे पर हावी होने की चेष्टा कर रहे हैं और भैरव सिंह एक तरह से पागल हो गया है विश्व को मात देने के लिए

हाँ यह बल्लभ की मजबूरी है

क्यूँकी जितना विश्व के आगे वह खुल गया है जाहिर है उतना भी वह भैरव सिंह के सामने भी खुल गया है

भैरव सिंह की नई आर्मी चार्ज टेक ओवर करेगी और गाँव वालों के ऊपर तांडव होगा

होम मिनिस्टर को बंदी बनाना भी एक स्ट्रैटिजी है आगे मालूम पड़ेगा

विक्रम घायल हुआ है मतलब अंतिम लड़ाई में विश्व अकेला होगा

रंगा और रॉय के लिए गुस्सा था जब हाथ लगे उतार दिया l

शुक्रिया फिर से लियोन भाई
 
वैदेही की अभिशाप को याद कीजिए

अंत में भैरव सिंह अकेला हो जाएगा ना उसके साथ उसका परिवार होगा ना साथी l यही हो रहा है और यह स्वाभाविक भी है l क्यूँकी उसके साथ जुड़े कोई संत तो थे नहीं l अपनी अपनी मजबूरी अपना अपना स्वार्थ था l होम मिनिस्टर को बंदी बनाना एक स्ट्रैटिजी है यह आपको आगे मालूम होगा

हाँ भैरव सिंह भी अब खुलकर सिस्टम के सामने आ गया है l इतने हार के बाद कोई भी पगला जा सकता है l वही भैरव सिंह के साथ हुआ है वह अब बचने से कहीं ज्यादा गाँव वालों को और खास कर विश्व को झुकाना चाहता है, किसी भी कीमत पर

नहीं होगा विक्रम चूँकि अब घायल है वह अब अगले और सबसे महत्वपूर्ण लड़ाई में साथ नहीं होगा

भाई वैदेही ने इसी लिए तो विश्व को सरपंच बनाया था l एक आम आदमी किसी ताकतवर से टकरा जाए अपनी हस्ती बस्ती इज़्ज़त और आत्मसम्मान के लिए l राजा का अंत आम लोग ही करेंगे जहां कानून बेबस होगा

ठीक है मित्र आपकी यह बात याद है अगली पोस्ट पर ध्यान रखूँगा

थैंक्स शुक्रिया आभार फिर से
 
आपकी इस अनुपम टिप्पणी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

जाहिर है बल्लभ प्रधान, भैरव सिंह के शतरंज का वजीर था जो विश्व और कानून के हाथ लग गया l अब सिस्टम और भैरव सिंह आमने सामने होंगे

जी विक्रम अभी ज़ख्मी है

पर उसे अफसोस रहेगा कि विश्व की अंतिम लड़ाई में उसके साथ नहीं होगा

हाँ जैसे कि विश्व ने कहा कि जैल पर हमले के बाद वह गाड़ी जैल प्रशासन ने खरीदी थी और तापस ने खान से कोऑर्डिनेट कर विश्व और उसकी टीम को उपलब्ध कराया है l

बात तो आपने सच कहा

मैं अभी उसी पर लेखन चला रहा हूँ

देखते हैं नतीज़ा क्या आ रहा है

हाँ यह एक स्पॉइलर है फिर भी लोग ही इंसाफ़ में प्रमुख भूमिका निभाएंगे

चीफ मिनिस्टर एक इमर्जेंसी मीटिंग बुलाएगा और कुछ खाना पूर्ति करेगा बाकी इंसाफ़ राजगड़ और उसके आस-पास गाँव वाले मिलकर करेंगे

शुक्रिया मेरे दोस्त आपका बहुत बहुत शुक्रिया

तह दिल से शुक्रिया आभार धन्यवाद
 
मेरे साथियों मेरे मित्रों अगला अपडेट अंतिम ही होगा l हाँ चूँकि यह अंतिम अपडेट होने वाला है इसलिए अपडेट बहुत लंबा होने वाला है l

जो साथी मेरे कहानी के साथ पाठक बन कर, टिप्पणी कार बनकर और विश्लेषक बन कर जुड़े रहे सभी को मेरा तह दिल से वंदन l

साथियों आप लोग ना होते तो कहानी यहाँ तक कभी भी ना पहुँच पाती बस और एक अंतिम पड़ाव फिर कहानी समाप्त हो जाएगी l

हज़ारों कहानियाँ है इस फोरम में l कुछ पढ़ने में अच्छे लगते हैं और कुछ कहानी की ओर आँख फ़ेर कर देखता भी नहीं l यह अपनी अपनी चॉइस और कंफर्टे की बात है l

पर यह कहना चाहूँगा इस फोरम में एक से बढ़कर एक लेखक हैं l जिन्हें मैंने पढ़ा वह कहानीकार, और वह टिप्पणीकार और वह सभी विश्लेषक सबको शुक्रिया, कारण कहानी को आप लोगों ने ही अपने रंगों से रंग भरा और आप लोग ही इसे सँवारा l

बस सात या आठ दिन और बहुत धमाकेदार और सूखांत के साथ कहानी का अंतिम भाग आपके सामने होगा l

आप सबको 🙏🙏🙏🙏
 
मित्रों मैं अभी भी कहानी को अंतिम रूप देने के लिए उलझा हुआ हूँ

बहुत कोशिश करने के बावजूद मैं अंत प्रदान करने में नाकाम रहा l

क्यूंकि बड़ी कोशिशों के बाद भी अपडेट छोटा नहीं कर पाया l खैर अगला भाग अवश्य अंतिम भाग होगा चाहे कितना भी बड़ा अपडेट क्यूँ ना हो

बस मित्रों थोड़ी देर और प्रतीक्षा करें एक आध घंटे में प्रस्तुत कर देता हूँ
 
👉एक सौ पैंसठवाँ मेगा अपडेट (A)

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"आज जिस तरह से यशपुर क्षेत्र से लेकर बीन्का रोड तक एक पुलिस वैन जिसके भीतर रुप फाउंडेशन और राजगड़ मल्टिपर्पोज कोऑपरेटिव सोसाईटी के गवाहों के साथ साथ पुलिस व उनके वकील पर हमला हुआ, यह घटता राज्य के आम जन जीवन को हिला कर रख दिया है l यह घटना टीवी पर प्रसारित होने पर आम लोगों से लेकर बुद्धिजीबी तक शासन और प्रशासन पर प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं l यह घटना केवल राज्य भर ही नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र में अब चर्चा का विषय बन गया है l जिससे राज्य की चावी खराब हुई है l अब सुनने में आ रहा है कि मुख्यमंत्री ने इस विषय को गंभीरता से लिया है और मंत्रियों और अधिकारियों को एक आपातकालीन बैठक के लिए तुरंत तलब किया है l"

शाम धीरे धीरे ढल रहा था, सारे टीवी चैनल और दूसरे गण माध्यम इस खबर को अपने अपने हिसाब से लोगों तक पहुँचा रहे थे l दूसरी ओर सोनपुर की सरकारी आईवी के बाहर बहुत सारे न्यूज एजेंसीयों की ट्रांसमिशन वैन खड़ी हुई है l सारे न्यूज एंकर अपनी अपनी चैनल पर लाइव न्यूज प्रसारण कर रहे हैं l थोड़ी देर बाद तीनों बाइक पर सवार होकर विश्व और गवाहों के साथ साथ सुभाष और दास पहुँचते हैं l आईवी के कॉमन रुम में तीनों जजों के साथ बैठ कर नरोत्तम पत्री सुधांशु मिश्रा बात कर रहे हैं l तभी कॉमन रुम में छह लोगों की प्रवेश होता है l विश्व पत्री को देखता है पत्री निराशा के साथ अपना सिर ना में हिलाता है l

सुभाष - (जजों से) सर... आई एम... सुभाष सतपती... डेपुटी कमिश्नर एंड... द इनचार्ज ऑफ एसआईटी रुप फाउंडेशन... इट्स एन इमर्जेंसी...

जज - मुझे... पत्री बाबु यही समझा रहे थे... डीसीपी सतपती... पर आई एम सॉरी... मुझे लगता है... यह इमर्जेंसी आर्टिफिशल है... इसलिए सुनवाई... तय किए गए दिन पर होगी...

विश्व - आई एम सॉरी सर... यह तीन गवाह.. रजिस्टर्ड गवाह नहीं हैं... यह केस में पूरी तरह नए हैं... आपकी तय किए गए दिन... इन गवाहों की... जिरह हो सकती है... पर उससे पहले इनका बयान तो रजिस्टर्ड किया जा सकता है...

जज - मिस्टर डीसीपी... मजिस्ट्रेट या जज किसी आपातकालीन परिस्थिति में ही गवाही ले सकते हैं...

सुभाष - जी सर... यह आपातकालीन परिस्थिति ही है... हम अपनी और इनकी जान बचा कर आपके पास आए हैं...

जज - ओ... तो अब हमें... आपसे कानून सीखनी पड़ेगी...

विश्व - नहीं जज साहब... हम किसी कोर्ट में नहीं आए हैं... इमर्जेंसी के बयान... हमेशा पुलिस के द्वारा मैजिस्ट्रेट या जज के सामने ही दिलवाया जाता है... हम यहाँ कोई पेशगी कराने नहीं आए हैं... बल्कि... आपके सामने... पुलिस इन गवाहों से बयान दर्ज कराएगी...

जज - मिस्टर विश्व प्रताप... तुम अपनी हद पार् कर रहे हो... यह बात डीसीपी भी कह सकते हैं...

विश्व - सर... रुप फाउंडेशन केस को पुनर्जीवित मैंने किया है... और राजगड़ मल्टिपर्पोज कोऑपरेटिव सोसाईटी के केस में... मैं राजगड़ के गाँव वालों की तरफ से वकील हूँ... इस केस में कोई गवाह या सबूत जुड़ते हैं... यह जानना और उनकी सुरक्षा की माँग करना... मेरा कर्तव्य भी है...

जज - (सुभाष से) ह्म्म्म्म... तुम कुछ कहना चाहोगे डीसीपी...

सुभाष - सर... मैंने ना सिर्फ इन गवाहों को... अपनी तहकीकात के दौरान खोजा है... बल्कि.. होम मिनिस्ट्री में डिक्लेरेशन के साथ साथ... इन्हें वीटनेस प्रोटेक्शन में मैंने अपने अंडर शामिल भी कर लिया है... पर फैक्ट आप देख सकते हैं... इनकी खबर बाहर लीक हो गई... इसलिए... कुछ भी अनहोनी होने से पहले... हमने इन सबको आपके सामने लाने और गवाही दिलाने के लिए फैसला किया... बाकी आप और पूरा स्टेट जानता है...

जज - हाँ... हम सब जानते हैं... इंफैक्ट... हमने भी वह लाइव देखा है... पर हमें... यह सब फिल्मी लगा... आई मीन आर्टिफिशल लगा...

सुभाष - माय एक्सट्रीम एपोलोजी सर... क्या मैं जान सकता हूँ आपने ऐसा क्यूँ सोचा...

जज - इसलिए सोच पाए... क्यूँकी तुमने इसे मीडिया में ले आए... प्री प्लान्ड... इसके बारे में तुम हमें इंफॉर्म भी कर सकते थे...

डीसीपी - हाँ कर सकते थे... अगर यह राज लीक ना हुई होती तो... हम मजबूर थे... इसलिए... मीडिया वालों से कॉन्टैक्ट किए... अपनी और गवाहों की सेफ्टी के लिए...

जज - सरकार से क्यूँ नहीं सेफ्टी और सेक्यूरिटी माँगी...

सुभाष - मैं और इंस्पेक्टर दास... दोनों ही सरकारी मुलाजिम हैं... दोनों ही सरकारी आदेश पालन कर रहे थे...

जज - तो यह मीडिया...

सुभाष - सर... हम सब एक लोकतांत्रिक व्यवस्था के एक एक कड़ी हैं... उसी लोकतांत्रिक व्यवस्था का चौथा स्तंभ यह मीडिया भी है.. इसलिए मैंने उनसे भी मदत माँगी...

जज - तो मीडिया को तुम्हें... आईवी के बाउंड्री के बाहर ही रखना था... वह देखो... (चारो तरफ खिड़कियों से,बाहर से सभी मीडिया वाले अपनी अपनी कैमरा से झाँक रहे थे) तुम इसे... इनकी सहायता से... मैटर को पब्लिक कर रहे हो... इसलिए... मैं यह गवाही नहीं ले सकता...

सुभाष - सर... यह जो मीडिया वाले... अपनी अपनी कैमरा से झाँक रहे हैं... यह पूरे स्टेट को... नहीं... पूरे देश को बता रहे हैं... दिखा रहे हैं... हमारा जुडिशल सिस्टम बायस्ड नहीं है... इंडिपेंडेंट है... जस्टिस के लिए... यहाँ कुछ भी किया जा सकता है...

जज - बहुत अच्छा बोल रहे हो... तुम्हें यह पुलिस का जॉब छोड़ कर... राजनीति करनी चाहिए... तुम यह सब बता कर... दिखा कर... मुझ पर प्रेसर कर रहे हो... और कह रहे हो... जस्टिस इंडिपेंडेंट है...

पत्री - (अपनी जगह से उठता है) आई एम सॉरी सर... यह केस जब से शुरु हुई है... तब से.. इसकी डेवलपमेंट देख कर हमें लगता है... आप किसी और के प्रेसर में हैं...

जज - माइंड योर टॉंग मिस्टर पत्री... यु आर एक्युजिंग मी...

पत्री - नहीं सर... आपसे पहले... मैं भी राजगड़ के लोगों की गवाही ले चुका हूँ... हम यहाँ आप से अनुरोध कर रहे हैं... यह जो मीडिया देख रहे हैं... यह इन गवाहों के सुरक्षा के लिए है... केस की तहकीकात में... जब नए सबूत और कंक्रीट गवाह जुड़ते हैं... चाहे वह सस्पेक्ट हो या एक्युज्ड... उसे मिटाने की कोशिश करते हैं... आपको मीडिया से प्रॉब्लम है... पर यह सब जो भी हुआ... यह मेरा ही आइडिया था... मैं नहीं चाहता था... न्याय की बेदी में कोई बलि चढ़ जाए... (सबसे) चलो... (बाहर जाने के लिए तैयार होता है)

जज - अब आप पत्री बाबु... फिर से एक्युज कर रहे हैं... और अपने साथ इन्हें बाहर कहाँ ले जा रहे हैं...

पत्री - मैं इन्हें लेकर... कल... भुवनेश्वर से लेकर अब तक... और जो इस कमरे में हुआ... वह सब मीडिया में कह दूँगा... क्यूँकी व्यवस्था में रह कर... अगर व्यवस्था से ही पीड़ित हों... तो न्याय की उम्मीद व्यवस्था के बजाय... हम... आम लोगों से ही कर सकते हैं... पता नहीं... हम कल जिंदा रहे... या ना रहे...

जज - (खड़ा हो जाता है) ह्वाट... ह्वाट डु यु मीन...

पत्री - आई मीन... ह्वाट यु मीन्ड... (कह कर बाहर जाने लगता है)

जज - होल्ड... (पत्री रुक जाता है) तुम.....तुम... (कुछ कह नहीं पाता, एक पॉज लेकर) ओके... आई एम रेडी... मैं... आई मीन... हम सब... इनकी गवाही लेने के लिए तैयार हैं... बट इट विल बेटर... तुम इन मीडिया वालों को कहो... यह लोग... यह जगह खाली करेंगे...

पत्री - नहीं सर... हम सब यहाँ लाइव हैं... आज पूरा स्टेट हमें जज कर रहा है... इनकी गवाही के बाद आपका क्या एक्शन होगा... यह भी लोग देखेंगे... अगर आप तैयार हैं तो...

जज - (हथियार डालते हुए) ओके... डीसीपी... गवाही की प्रोसीजर शुरु करो... और हाँ... गवाही के दौरान... सबका मोबाइल ऐरोप्लेंन मोड पर होना चाहिए...

सुभाष - जी सर... (दास को इशारा करता है l दास एक फाइल लेकर एक जगह बैठ जाता है, फिर सुभाष सुबुद्धी का परिचय कराता है,) सर... रुप फाउंडेशन के मिसींग वीटनेस.. मिस्टर अनिल कुमार सुबुद्धी... (इस दौरान सभी अपने अपने मोबाइल को ऐरोप्लेंन मोड पर रख देते हैं)

फिर सुबुद्धी अपना गवाही देने लगता है l उसकी गवाही ख़तम होने के बाद दास उससे फाइल पर दस्तखत लेता है और उसके नीचे तीनों जज दस्तखत करते हैं l उसके बाद श्रीधर परीड़ा अपना गवाही देता है और फाइल पर दस्तखत करता है l अंत में बल्लभ अपनी गवाही देता है जिसे रजिस्टर करने के बाद दास बल्लभ से दस्तखत लेने के लिए फाइल आगे कर देता है l

बल्लभ - (जज से) सर.. यह मैंने अब तक जो भी कहा... सब सच हैं... आगे चल कर हर एक बात पर... मैं डॉक्यूमेंट्री सबूत भी पेश करूँगा... पर अभी आपको... राजा भैरव सिंह की गिरफ्तारी के लिए... एक आदेश पारित करना होगा...

जज - वह किसलिए...

बल्लभ - सर.. वह शख्स... अगर बंद रहेगा... तब इस केस का कोई भविष्य है... वर्ना अंधकार ही अंधकार है... सर जब से विश्व राजगड़ आया है... तब से... राजा के सिपाही... हर कदम पर विश्वा से मात खाए हुए हैं... सर इसीलिये... राजा ने... ESS के सभी... हालिया रिक्रूट्स को.. राजगड़ बुलाया था... और हमें ख़तम करने के लिए... उन्हीं ESS वालों में से... कुछ लोगों को भेजा था... पर अब बात अलग है...

जज - अलग है... मतलब..

बल्लभ - राजा ने एक प्राइवेट आर्मी हायर किया है... यह एक फ्री लैंस मर्सिनरिज ग्रुप है... और जहां तक मेरा अंदाजा है... अब तक वह आर्मी... राजगड़ में अपना चार्ज ले चुके होंगे...

जज - तो...

बल्लभ - सर... कल... बड़े राजा जी की मौत का चौथ है... कल से राजगड़ पर सितम का पहाड़ टूटने वाला है... इसलिए किसी भी तरह... कुछ भी कर के... उन्हें रोक लीजिए...

जज - (सुभाष से) यह एक आर्मी की बात कह रहा है... क्या ऐसा पॉसिबल है... इतने बड़े ग्रुप का मूवमेंट हो... इंफ्रिटेंशन हो... और हमारी इंटेलिजेंस को कोई खबर ना हो.... (सुभाष चुप रहता है)

बल्लभ - मुमकिन है सर... वे लोग प्रोफेशनल हैं... वह ग्रुप टुकड़ियों में बंट कर आया था... आधे से ज्यादा... ESS के रिक्रूट बन कर आए हैं... और कोई फेरी वाला बन कर... कोई मदारी बन कर... ऐसे आम आदमियों की तरह आए होंगे... तभी तो उन्हें जमा होने में इतना वक़्त लगा... वर्ना... कब के आ चुके होते...

जज - दास... तुम्हारे थाने में इंफॉर्म करो... भैरव सिंह और उसके आदमियों पर कड़ी नजर रखी जाए...

दास - सर... अब भैरव सिंह और उसके लोग... हमारे बस की बात नहीं हैं...

जज - क्या मतलब...

दास - (महल में उसके साथ और कांस्टेबलों के साथ जो कुछ हुआ सब बताता है) और सर हम अपने साथियों को कंधे पर लाद कर... हस्पताल लेकर गए... गाँव में भैरव सिंह के जितने आदमी हैं... प्लस ESS के लोग... प्लस अगर प्राइवेट आर्मी आ गई है तो... आई एम सॉरी सर... भैरव सिंह को पकड़ने के लिए... एक नहीं पाँच से छह बटालियन की जरूरत पड़ेगी...

जज - ह्वाट...

दास - हाँ सर... उन्हें सिर्फ होम अरेस्ट करने के लिए... तीन प्लेटुन की जरूरत पड़ी थी... पर अब की बार...

जज - पर प्राइवेट आर्मी... हमें हवा हवाई बात लग रही है... फिर भी दास... अभी मैं एक वारंट इशू किए देता हूँ... राजगड़ थाने में इंफॉर्म करो... और जितने भी बंदे हो सकते हैं... उन सबको कहो... राजा भैरव सिंह को चौबीस घंटे तक होम अरेस्ट पर रखें... और इस बात की राजगड़ से पुष्टि करो... तब हम सीएमओ से बात कर... उन्हें रिपोर्ट कर कोई ऑर्डर निकाल सकें..

दास - आई एम सॉरी... पर ठीक है... मेरे थाने के लोग... जितना सम्भव हो उतना अवश्य करेंगे....

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"आज एसआईटी के प्रमुख श्री सुभाष सतपती जी के द्वारा स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के तीनों जजों के समक्ष तीन अहम गवाहों को प्रस्तुत किया जिनकी गवाही पुलिस के द्वारा जजों के उपस्थिति में लिया गया l उसके तुरंत बाद जज xxxx जी ने राजा भैरव सिंह जी को तुरंत हिरासत में लेने के लिए यशपुर एसपी को आदेश दे दिया है और इस बात की जानकारी उन्होंने सीएमओ को दे दिया है l अब तक की प्राप्त सूचना के अनुसार यशपुर से रिजर्व बटालियन निकल चुकी है l हो सकता है राजा भैरव सिंह जी की गिरफ्तारी की खबर आज देर रात तक प्राप्त हो जाए l इसीके साथ मैं सुप्रिया रथ आपसे इजाजत चाहती हूँ l"

टीवी पर चल रही न्यूज को भैरव सिंह रिमोट से बंद कर देता है l बगल में खड़ा भीमा भैरव सिंह से सवाल करता है l

भीमा - अब क्या हुकुम है...

भैरव सिंह - (एक गहरी साँस लेकर) भीमा... सरकारी मेहमान आ रहे हैं... स्वागत में कोई कमी नहीं होनी चाहिए...

भीमा - जी हुकुम... (भीमा उल्टे पाँव जाने लगता है)

भैरव सिंह - और हाँ ध्यान रहे... जब तक हम इजाजत ना दें... कोई हरकत या होशियारी मत करना...

भीमा - जी हुकुम...

भीमा चला जाता है, उसके जाने के तुरंत बाद हाथ में गन लिए आर्मी के लिबास में एक व्यक्ति अंदर आता है और भैरव सिंह को सैल्यूट ठोकता है l

-डेविड.... रिपोर्टिंग टू प्राईवेट जनरल.. सर..

भैरव सिंह - ह्म्म्म्म... प्राईवेट जनरल... सुन कर अच्छा लगा... (अपनी कुर्सी से उठ कर) क्या ख़बर है डेविड...

डेविड - सर... मेरे साथ... वॉर रूम में चलिए सर...

किसी आर्मी पर्सनल की तरह डेविड पीछे मुड़ता है और बाहर जाने लगता है l भैरव सिंह उसके पीछे चल देता है l बाहर और चार लोग खड़े थे जो भैरव सिंह को सैल्यूट करते हैं और एक सुरक्षा घेरा बना कर भैरव सिंह के साथ चलने लगते हैं l डेविड और भैरव सिंह एक कमरे में पहुँचते हैं l बड़ी सी हॉल दीवान ए खास को वॉर रुम बनाया गया है l एक तरफ के दीवार पर पच्चीस से तीस के करीब टीवी स्क्रीन लगे थे l टीवी के सामने कुछ ऑपरेटर बैठे हुए थे l

डेविड - (एक रिमोट भैरव सिंह के हाथ में दे कर) इसे ऑन कीजिए सर...

भैरव सिंह रिमोट को ऑन करता है l सारे टीवी एक साथ ऑन हो जाते हैं l हर एक स्क्रीन पर लोगों के कुछ ना कुछ हरकतें दिख रही थी l

डेविड - सर... हमने... कुछ दिनों से अपने अपने काम में लगे हुए थे... आज पूरा हो गया... गाँव के एंट्रेंस से लेकर एक्जिट तक.. हर गली... हर चौराहे पर... हमने सर्विलांस कैमरा इंस्टाल कर दिया है... कोई पत्ता भी कहीं हिलेगा... तो भी हमें मालूम हो जाएगा...

भैरव सिंह - ह्म्म्म्म... बढ़िया... बहुत बढ़िया... तो... अब तैयार हो जाओ... मेहमान आ रहे हैं... उनका स्वागत कुछ इस तरह से करेंगे... के पूरी दुनिया में त्राहि त्राहि मच जाएगा.... राजा... भैरव सिंह... क्षेत्रपाल...

कमरे में मौजूद सभी एक सुर में - यस सर...

उधर बाहर एक पुलिस की वैन आ रही थी जिसके आगे दो पुलिस की जीप और पीछे दो पुलिस की जीप आ रही थी l पाँचों गाड़ी एक के बाद एक बगल में महल के सामने रुक जाते हैं l क्यूँकी महल के गेट के सामने चार सफेद गाड़ियाँ रास्ते को बंद कर खड़ी थीं l सभी पुलिस वाले उतरते हैं और एक दूसरे की ओर देखते हैं l एक पुलिस ऑफिसर जगन को बुलाता है l

ऑफिसर - इधर आओ... (जगन उसके पास जाता है) यह... यह सब क्या है...

जगन - साहब... मैंने तो बताया ही था.. जब दिन दहाड़े हमारे पुलिस के दो सिपाहियों को अधमरा कर... हमें चल कर वापस जाने के लिए मजबूर कर सकता है... आप उस राजा भैरव सिंह को गिरफ्तार करने रात में आए हैं...

ऑफिसर - आ... ह्ह्ह्... (अपने ट्रूप्स को) आगे बढ़ने के लिए तैयार हो जाओ...

ऑफिसर का इतना कहना ही था कि एक के बाद एक चार जोरदार धमाके होते हैं l हर एक धमाके के साथ एक एक गाड़ी बीस फिट ऊँचाई तक उड़ जाती है और फिर परखच्चे उड़ने के साथ जलती हुई नीचे गिरतीं हैं l जो पुलिस वाले महल की ओर जाने की सोच रहे थे वह चुप चाप अपनी जगह पर चिपके खड़े हो जाते हैं l सबकी नजर उन जलती हुई गाडियों पर टिक जाती है l उन गाडियों के बीच से भीमा बाहर आता है और इनके सामने आकर खड़ा हो जाता है l

ऑफिसर - क... क.. कौन हो तुम... (भीमा जगन की तरफ़ देखता है)

जगन - यह... यह भीमा जी हैं... राजा साहब के... सबसे खास...

भीमा - समझा ऑफिसर...

ऑफिसर - ओके... देखो... हम... हम यहाँ... सरकारी आदेश पर आए हैं...

भीमा - शुक्र करो... राजा साहब तुम्हें जिंदा वापस जाने दे रहे हैं...

ऑफिसर - क्या... क्या मतलब है तुम्हारा...

भीमा - ऐसा हो नहीं सकता... के तुम्हें इतिहास मालूम ना हो... ऑफिसर... आज जो सरकारी काग़ज़ लेकर यहाँ आए हो... वह सरकार... राजा साहब के हुकुम के तलवे चाटती है... राजा साहब... जितना सह सकते थे... सह लिए... अब कोई भी सरकारी खाकी वर्दी वाला कुत्ता... महल की सरहद लाँघ कर महल के अंदर जा नहीं सकता... अगर वर्दी में गर्मी है... तो कोशिश कर देख लो... (ऑफिसर बहुत असहाय हो जाता है वह कभी अपने साथियों को तो कभी भीमा को देखने लगता है)

जगन - (ऑफिसर से) साहब... भलाई इसी में है कि... आप... अपने ऊपर तक खबर पहुँचाये... वर्ना इनकी तैयारी इतनी है कि हम लोग वापस ही ना जा पाएँ...

ऑफिसर - (जगन की बात मानते हुए) ओके... हम... उपर तक खबर पहुँचाएंगे... (अपने सिपाहियों से) मूव... बैक...

सभी सिपाही गाड़ी के अंदर जाने लगते हैं ऑफिसर भी जब जाने लगता है तभी भीमा उसे आवाज देता है

भीमा - रुको ऑफिसर... आए हो... तो खाली हाथ मत जाओ... (ऑफिसर मुड़ कर हैरत भरी नजर से देखता है, भीमा के साथी कुछ लोगों को सहारा देते हुए बाहर लाते हैं और ऑफिसर के सामने फेंक देते हैं) इन्हें ले जाओ...

ऑफिसर - (घबराई हुई आवाज़ में) यह... यह लोग कौन है...

भीमा - इन्हीं से पूछ लेना.. जब इन्हें होश आए... फ़िलहाल इनकी हालत बहुत नाजुक है... हस्पताल ले जाओ... जाओ...

कहकर भीमा मुड़ कर अंदर चला जाता है l ऑफिसर अपनी जेब से रुमाल निकाल कर पहले अपना मुहँ साफ करता है और बेहद लाचारी भरी नजर से जगन की ओर देखता है l जगन कुछ पुलिस वालों को लेकर आता है और नीचे पड़े अधमरे लोगों को उठाने लगता है l

उधर यह सब भैरव सिंह सीसीटीवी पर देख रहा था l उसके चेहरे पर एक मुस्कान बिखर जाती है l तभी कमरे में भीमा का प्रवेश होता है l

भीमा - हुकुम...

भैरव सिंह - शाबाश भीमा शाबाश... तुम वाकई हमारे सच्चे वफादार और नमकख्वार हो... हम बहुत खुश हुए...

भीमा - शुक्रिया हुकुम...

भैरव सिंह - भीमा... क्या तुम्हें याद है... हमने इंस्पेक्टर दास से एक वादा किया था... बड़े राजा जी की चौथ की मातम पूरा राजगड़ मनाएगा...

भीमा - जी हुकुम... कल चौथ है...

भैरव सिंह - तो आज की रात कहर टूटना चाहिए...

भीमा - हुकुम...

भैरव सिंह - तो जाओ... अपने सभी पहलवान कारिंदों को साथ लेकर जाओ... आज कोई भीमा, भूरा या शुकुरा नहीं... बल्कि रंगमहल के दुशासन बन कर जाओ... अर्सा हो गया है... रंगमहल में कोई रौनक नहीं है... रंगमहल की रंगीनी के लिए... जितने भी कमसिन द्रौपदी हैं सबको... उठा कर लाओ... जो भी बीच में आए... मौत के घाट उतार दो...

भीम - जी.. हुकुम... पर अगर... (चुप हो जाता है)

भैरव सिंह - आज तुम लोग तांडव मचाने जा रहे हो... पुलिस भी नहीं आनी चाहिए... अब पुलिस सिर्फ डरी हुई है... आज रात की तांडव में... उन्हें उनकी लाचारी भी जताओ... दिखाओ... समझे...

भीमा - जी हुकुम... सब समझ गया...

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डॉक्टर बाहर आता है l बाहर विश्व, उसके दोस्त, सुभाष, और दास बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे l डॉक्टर को देखते ही सभी भाग कर उसके पास जाते हैं l

डॉक्टर - उदय जी... ऑउट ऑफ डेंजर हैं...

विश्व - यह बहुत अच्छी बात है... और विक्रम...

डॉक्टर - विक्रम जी को होश आ रहा है... पर.... कमजोरी बहुत है... खून बहुत बह गया था... ज़ख़्म भी गहरा था... उनका कंधे का कलर बोन फैक्चर है... इसलिये टेंपोररी पैरालाइज है... मेरी इल्तिजा है... आप बस थोड़ी देर के लिए ही... बात चित करें... उन्हें नींद आ जाएगी... उनको आराम की सख्त जरूरत है...

विश्व - ठीक है डॉक्टर... आपका बहुत बहुत शुक्रिया...

इतना कह कर सभी विक्रम के बेड के पास आते हैं l विश्व देखता है l जिस्म लगभग सभी जगहों पर पट्टी बंधी हुई है l सैलाइन और खून दिया जा रहा है l विक्रम आँखे मूँदे लेटा हुआ था l विश्व धीरे से आवाज देता है

विश्व - विक्रम...

विक्रम - हम्म... (अपनी आँखे खोलता है) आह... (थोड़ा कराहता है) प्रताप... गवाही हो गई...

विश्व - हाँ... सॉरी यार... मैंने तुमसे... बहुत जोखिम भरा काम लिया...

विक्रम - (हल्का सा मुस्कान चेहरे पर लाते हुए) कोई ना... शायद आज के बाद... सत्तू मुझे.. गाँव वालों में से एक समझे... और राजकुमार ना बुलाए...

विश्व - (आकर विक्रम का हाथ पकड़ लेता है) एक शिकायत भी है यार... तुमने... उनका पीछा क्यूँ किया... हम तब तक... सोनपुर में दाखिल हो चुके थे... सतपती जी ने... अपना पुलिस बटालियन को तैयार का रखा था.. हमने तो बस उन्हें डायवर्जन देने के लिए... तुम्हें कहा था...

विक्रम - (विक्रम भी विश्व के हाथ को कस कर पकड़ लेता है) अगर वे लोग... तुम्हारे पीछे पीछे... सोनपुर पहुँच जाते... तो वीर की आत्मा मुझे कभी माफ नहीं करती... मैंने जो भी किया... वीर के खातिर...

विश्व - अगर तुम्हें कुछ हो जाता... तो मैं... ना तो राजकुमारी जी को अपना चेहरा दिखा पाता... ना ही... शुभ्रा जी का सामना कर पाता...

विक्रम - हाँ... तुम्हारी बात की गहराई को समझ रहा हूँ... वह कहते हैं ना... सारी जहाँ की खुदाई एक तरफ... और जोरु का भाई एक तरफ... (यह सुन कर कमरे में सभी मुस्कुराने लगते हैं) तुम्हें अपनी बीवी से जुते पड़ते... है ना...

विश्व - (मुस्कुरा देता है) मत भूलो... शुभ्रा जी ने भी मुझे भाई कहा था... अगर कुछ.... (फफक पड़ता है) तो मैं... उनके अनजाने में ही... तुम्हें अपने मिशन में शामिल कर लिया...

विक्रम - श्श्श्श्.... तुम भी तो मेरे जोरु के भाई निकले... तो यह खतरा उठाना बनता था...

विश्व - आज वाकई तुमने मुझे हरा दिया... तुमने आज ऐसा कर्ज मुझ पर लाद दिया... के मैं जिंदगी भर तुम्हारे सामने... अपना सिर नहीं उठा पाऊँगा...

विक्रम - अरे यार... मरा नहीं हूँ... जिंदा हूँ... हाँ... राजा साहब की गिरफ्तारी नहीं देख पाऊँगा तो क्या हुआ... जब राजा साहब अपने अंजाम भुगतेंगे... उस जश्न में गाँव वालों के साथ तो होऊंगा ना...

डॉक्टर - (कमरे में आता है) आई थिंक... आपकी सारी बातचीत हो गई होगी... अब प्लीज... पेशेंट को आराम करने दीजिए...

विश्व - इट्स ओके डॉक्टर...

सुभाष - आपका बहुत बहुत शुक्रिया डॉक्टर...

सभी विक्रम को अलविदा कह कर कमरे के बाहर आते हैं l विश्व अपने सभी दोस्तों को गले लगा लेता है l सबकी आँखों में पानी बह रहा था l तभी सुभाष की मोबाइल बजने लगती है l सुभाष फोन निकाल कर देखता है जगन का कॉल था l वह इन सबसे थोड़ी दूर जाकर जगन से बातेँ करने लगता है l तभी विश्व की भी मोबाइल बजती है l विश्व सबसे अलग हो कर मोबाइल निकालता है l डिस्प्ले पर डैनी नाम देख कर कॉल उठाता है

विश्व - हैलो..

डैनी - विश्वा... मैंने वही आर्मर्ड वीइकल जो तुमने बिन्का बाईपास पर छोड़ा था... हास्पिटल तक पहुँचा दिया है... जितनी जल्दी हो सके... उस गाड़ी में राजगड़ पहूँचो...

विश्व - क्या... क्या हुआ है डैनी भाई...

डैनी - मुझे खबर मिली है... आज रात गाँव में कुछ गड़बड़ होने वाली है... पुलिस को अलर्ट न्यूज भेज दिया गया है... पर... खबर मिली है कि... भीमा और उसके लोग... इस बार गाँव में.. धार धार हथियार लेकर निकले हैं... इसलिए तुम भी पहुँचने की कोशिश करो... और हाँ... इसबार तुम अकेले नहीं होगे... मैं भी आ रहा हूँ...

फोन कट जाता है l विश्व परेशान हो कर अपने दोस्तों को देखने लगता है कि तभी सुभाष दास को साथ लेकर विश्व के पास पहुँचता है l

सुभाष - विश्व... एक इमर्जेंसी आ गई है...

विश्व - हाँ मुझे अभी अभी पता चला...

दास - क्या पता चला...

विश्व - भीमा और उसके गुर्गे... गाँव में हथियारों के साथ निकले हैं...

सुभाष - हाँ... जानते हो... अभी जब हम... विक्रम के ऑपरेशन के लिए यहाँ परेशान थे... तब राजगड़ में... (पुलिस वालों के साथ जो भी कुछ हुआ सब बताने लगता है) मेरे स्क्वाड के जितने भी बंदे थे... सबको... हमारे पहुँचने तक थाना टेक ओवर करने के लिए कहा था... उनको कॉर्डिनेट जगन कर रहा था... आज जिन लोगों को... अधमरा कर पुलिस के हवाले किया गया है... वे सब... होम मिनिस्टर के... सेक्यूरिटी के आदमी थे...

विश्व - ह्वाट...

दास - हाँ... इसका मतलब हुआ... अब होम मिनिस्टर... भैरव सिंह के कब्जे में है...

टीलु - (विश्व से) भाई... भाई... जरा दीदी को फोन करो...

विश्व वैदेही को फोन करता है l पर फोन लग नहीं रहा था l विश्व फिर सत्तू को फोन लगाता है पर उसका भी फोन नहीं लगता है l थक हार गए कर विश्व सुभाष की ओर देखता है l सुभाष जगन को फोन करता है पर इस बार सुभाष का कॉल भी नहीं जाती l

सुभाष - यह क्या... अभी अभी तो मैंने बात किया था...

टीलु - हो सकता है... उन्होंने मोबाइल टावर उड़ाया हो...

दास - हाँ... य़ह हो सकता है...

विश्व - तो फिर चलिए... जितनी जल्दी हो सके निकलते हैं...

दास - हम चाहे जितनी भी तेजी से जाएं... सुबह से पहले नहीं पहुँच सकते...

टीलु - यहाँ बातों से वक़्त जाया करने से अच्छा है कि... हम राजगड़ के लिए निकल जाएं...

सुभाष - यस.. ही इज राईट... लेट्स गो...

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भीमा और उसके साथी वैदेही की नाश्ते की दुकान वाली चौराहे पर लक्ष्मी और उसके पति हरिया, बिल्लू आदि कुछ गाँव वालों को लेकर आते हैं l

भीमा - (चिल्ला कर) ओ रंग महल की रंडी... बाहर निकल हराम जादी... सभी लड़कियों को अपने यहाँ छुपा कर रखी है... कुत्तीआ साली... बाहर निकल... (कोई हरकत नहीं होती) साली दरवाजा खोल कर बाहर निकल.... और उन ल़डकियों को हमारे हवाले कर... बर्षों बाद.. रंग महल में रौनक लौटेगी... बाहर निकल... (फिर भी कुछ जवाब नहीं मिलता है) भूरा... शनिया

भूरा और शनिया - जी... सरदार...

भीमा - जाओ... दरवाजा तोड़ डालो...

भूरा और शनिया कुछ लोगों को साथ लेकर भागते हुए दुकान की दरवाजे तक पहुँचते हैं कि तभी दरवाजा खुल जाता है l अंदर से गौरी निकलती है l सामने भूरा और शनिया को आकर थमते देखती है l अपनी नजरें घुमा कर देखती है, भीमा और उसके लोग बिल्लू, लक्ष्मी हरिया जैसे आठ दस लोगों को बालों से गर्दन से पकड़ रखे हुए हैं l

गौरी - क्या हुआ भीमा...

भीमा - अरे यह तो रंग महल की थूकी हुई बुढ़िया है... (सभी हा हा हा हा करके ठहाका लगाते हैं)

गौरी - यहाँ क्यूँ और किस बात के लिए हल्ला कर रहे हो...

भूरा - ओ हो... नखरे देखो तो बुढ़िया के... रौब ऐसे झाड़ रही है... जैसे दुकान की मालकिन हो...

गौरी - हाँ हूँ... इस दुकान की मालकिन मैं ही हूँ... गल्ले पर मालकिन ही बैठती है... इतना भी अक्ल नहीं है क्या तुझे...

शनिया - ओ तेरी... दो गज दूर श्मशान से... जुबान आठ गज की... ऐ चल बता... वह वैदेही कहाँ है...

गौरी - वह नहीं है यहाँ पर...

भूरा - (आगे बढ़ कर गौरी को बालों से पकड़ कर) क्या बोली बुढ़िया... (गौरी दर्द के मारे कराहती है) चिल्ला... और जोर से चिल्ला... बुला... उस कुत्तीया को...

गौरी - मैं सच कह रही हूँ... वैदेही घर में नहीं है... शाम को यह कह कर गई थी... आज नहीं लौटेगी...

भीमा - ऐ... (अपने कुछ लोगों से) जाओ... अंदर जाकर छान मारो...

कुछ लोग वैदेही के घर और दुकान में घुस जाते हैं l अंदर सामान तितर-बितर तोड़फोड़ कर देते हैं और बाहर आकर कहते हैं l

आदमी - बुढ़िया सच कह रही है... अंदर वह रंडी नहीं है...

भीमा हरिया को उल्टे हाथ का एक थप्पड़ मार देता है, जिससे हरिया कुछ दूर घूम कर गिरता है l लक्ष्मी रोते हुए हरिया के पास जाने लगती है तो भीमा उसे पकड़ लेता है l

भीमा - ऐ हरिया... राजा का हुकुम है... जितने भी ल़डकियों की माँ को अपने नीचे लाए थे... उन सभी ल़डकियों को रंग महल की रौनक बनायेंगे... चल बता तेरी बेटी कहाँ है...

बिल्लू - भीमा भाई... शाम को वैदेही दीदी आई थी... ल़डकियों को अपने साथ ले गई... कहाँ ले गई हम नहीं जानते... विश्वास करो... हम नहीं जानते...

भीमा - पुछा मैंने हरिया से था... तेरी चूल क्यूँ मची बे बिल्लू...

लक्ष्मी - सच ही तो कह रहे हैं बिल्लू भैया.. शाम को वैदेही दीदी आई थीं... हमारी बच्चियों को अपने साथ ले गईं... हम नहीं जानते... अब दीदी और बच्चे कहाँ हैं...

भीमा - (अपने आदमियों से) ऐ... जानते हो... आज राजा साहब ने हम सबको क्या कहा...

सभी - दुशासन...

भीमा - हाउउउ... तो... (लक्ष्मी को खिंच कर) यह रही द्रौपदी... लो इसकी चिर हरण शुरु करो...

भीमा की बात सुन कर सब ऐसे हँसते हैं जैसे पिशाचों की टोली हँसती है l लक्ष्मी भागने लगती है तो उसे भूरा और शनिया दबोच लेते हैं l लक्ष्मी को सब ऊपर उठा लेते हैं और सब उसे अपनी अपनी तरफ़ खिंचने लगते हैं l यह सब देख कर हरिया भीमा के पैर पकड़ कर लक्ष्मी को छोड़ने के लिए गिड़गिड़ाने लगता है l तब तक लक्ष्मी की साड़ी फट कर अलग हो चुकी थी l बिल्लू भी भीमा के पैर पर गिर कर लक्ष्मी को छोड़ने के लिए कहता है l पर उन सब शैतानों की हँसी कह कहा मंजर को और भी वीभत्स कर रहा था l उनकी शैतानी हँसी के आगे लक्ष्मी की चीखें सुनाई नहीं दे रही थी l तब तक लक्ष्मी की ब्लाउज फट कर अलग हो चुकी थी l गौरी से और बर्दास्त नहीं होती वह अपनी पूरी ताकत से चीखती है l

गौरी - रुक जाओ... मैं कहती हूँ रुक जाओ... (कॉफ.. ऑफ.. कॉफ) (गला फाड़ कर चिल्लाने के वज़ह से वह खांसने लगती है)

भीमा - ऐ... रुक जाओ...

सब लक्ष्मी को छोड़ देते हैं l लक्ष्मी की पेटीकोट फट चुकी थी बस कमर में लटक रही थी l दुबक कर नीचे खुद को छुपाकर बैठ जाती है l हरिया रेंगते हुए रोते हुए आता है और लक्ष्मी को गले लगा कर रोता है l

भीमा - हाँ तो बुढ़िया... बोल अभी... वैदेही कहाँ है...

गौरी - क्यूँ अपनी मौत को ढूंढ रहा है भीमा...

शनिया - उम्र देख... कमिनी... वर्ना साली की गाली देता तुझे... रंग महल की... थूकी हुए गुठली... चल बोल... वैदेही लड़कियों को लेकर कहाँ छुपी है...

भूरा - वर्ना... चिर हरण फिर से शुरू करें...

गौरी - तुम लोगों को विश्वा का डर नहीं है... अरे उससे तो तुम्हारा राजा भी डरता है...

भीमा - ऐ तुम लोग फिर से शुरू हो जाओ... यह डायन बकचोदी करने लगी है...

गौरी - नहीं रुक जाओ... मैं बताती हूँ...

भीमा - हाँ बोल...

गौरी - वह... वैदेही... बच्चों को लेकर... ग्राम देवी माँ की मंदिर में छुपी हुई है...

शनिया - ले... बुढ़िया ने मुह खोली... तो झूठ ही पेली... अबे बुढ़िया... ग्राम देवी की मंदिर सदियों से बंद है...

भीमा - बुढ़िया सच कह रही है... हम सब जगह ढूंढते... ढूंढते ही रह जाते... पर मंदिर कभी नहीं जाते.... क्यूँकी मंदिर... पाइकराय परिवार के खात्मे के साथ ही बंद हुई थी... हा हा हा हा हा हा... समय भी कहाँ घूम कर पहुँची... जिस परिवार को खत्म कर दसियों पहले मंदिर बंद किया गया था... उसी खानदान की अंतिम चिराग... मंदिर खोल कर छुपी हुई है... अपनी मौत से... हा हा हा हा हा हा... (भीमा के साथ सभी हँसने लगते हैं)

भीमा सभी गाँव वालों को वहीँ छोड़ कर अपने लोगों के साथ आगे बढ़ जाता है l उनके जाते ही बिल्लू गौरी से सवाल करता है

बिल्लू - यह... यह आपने क्या कर दिया काकी... हमारे बच्चों की खबर दे कर उनकी जान खतरे में डाल दी...

हरिया - हाँ... काकी... आपने ऐसा क्यूँ किया...

गौरी - चुप रह... कितने लोग आए थे... बीस आदमी... और तुम लोग... पूरा का पूरा मुहल्ला... अपनी दुम दबा कर छुपे हुए हैं... तुम लोगों को खिंच कर बाहर निकल कर... तुम्हीं लोगों से... तुम्हारे ही बच्चों का पता पूछ रहे हैं... और तुम्हारे ही घर की लक्ष्मी को बेइज्जत कर रहे हैं... फिर भी... तुम लोग पलटवार करने से कतरा रहे हो... अरे जितनी हिम्मत अपनी जमीन जायदाद की पूछने की की थी... अपनी बच्चियों के बारे में पूछने पर भूरा और शनिया को पीटने में दिखाई थी... और जिस नफरत को ढाल बना कर बड़े राजा के मातम पर नहीं गए थे... वह हिम्मत... वह नफरत कहाँ सो गई... क्या तुममे मर्दानगी तभी करवट लेती है... जब जब वैदेही और विश्व होते हैं... डूब मरो... लानत है तुम सब पर... अरे वह दो बहन भाई... अपनी जिंदगी तबाह और बर्बाद कर दिए... सिर्फ तुम लोगों के लिए... पर तुम लोग... वही गटर की जिंदगी छोड़ने के लिए तैयार ही नहीं हो... तुम्हारे आने वाले कल के लिए... तुम्हारे बच्चों के लिए... अपनी जिंदगी दाव पर लगा दिया है... पर तुम लोग... थू है तुम पर... उनके पैरों पर गिड़गिड़ा रहे हो...

हरिया - हम... हम और कर ही क्या सकते हैं काकी... देखा नहीं... उन्होंने पुलिस को भी कितना लाचार कर दिया है...

गौरी - अरे बच्चों पर आ जाए तो हिरण भी सिंग लड़ा कर बाघ को फाड़ देती है... तुम लोग तो इंसान हो... किसका इंतजार कर रहे हो... याद रखो भगवान भी उसी के लिए धरती पर आते हैं... जो अपनी मान मर्यादा और पुरूषार्थ के लिए लड़ मर सकते हैं... वर्ना... तुम जैसों को बचाने के लिए भगवान का धरती पर उतरना भी... भगवान के लिए अपमान की बात होगी...

इतना सुनने के बाद भी बिल्लू, हरिया और वहाँ पर मौजूद लोगों में कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखती l पर लक्ष्मी अपनी जगह से उठती है और नीचे पड़ी एक लाठी को उठाती है l

हरिया - ऐ... तु क्या कर रही है... कहाँ जा रही है...

लक्ष्मी - अपनी बेटी को बचाने...

हरिया - पागल हो गई है तु... अभी अभी तेरे साथ क्या हो सकता था...

लक्ष्मी - हो सकता था... बर्षों पहले राजा ने कर दिया था... तब भी तु रोया था... गिड़गिड़ाया था... पर किया कुछ नहीं था... मेरी बेटी के लिए... वैदेही दीदी... लड़ेगी... तु और मैं... किसी कोने में छुप कर... रोयेंगे... नहीं अब ऐसा हरगिज नहीं होगा... मेरी बच्ची को... मेरे जीते जी... कुछ भी होने नहीं दूँगी...

हरिया - ऐ... ऐ... हम लड़ मर लेंगे उसके बाद क्या... हमारा बबलू... उसका क्या होगा...

लक्ष्मी - अभी भी... होने को क्या बचा है... कम से कम उसे इतना याद रहेगा... उसकी माँ... उसकी दीदी को बचाने के लिए... मर्दानी लड़ी थी...

कह कर लक्ष्मी आगे बढ़ जाती है l उसकी देखा देखी जितनी भी औरतें थीं वहाँ पर सभी अपने अपने घर भाग कर हाथों में कुछ ना कुछ ले लेते हैं और लक्ष्मी की गई दिशा में चल देते हैं l यह सब देख कर बिल्लू भी जाने लगता है l

हरिया - बिल्लू... कहाँ जा रहा है...

बिल्लू - लक्ष्मी भाभी जी के साथ... आज तक वैदेही दीदी अकेली लड़ती आई हैं... पर अब नहीं... आज से उनकी हर लड़ाई में मैं रहूँगा... हाँ तेरी बात और है... तेरा झुका हुआ सिर.. लक्ष्मी भाभी देख लेगी शायद... पर अगर मर मरा गया... तो गर्व के साथ... तेरी भाभी को ऊपर अपना शकल दिखाऊँगा... जो उसकी मौत पर भी ना कर सका... वह उसकी और मेरी बेटी के साथ नहीं होगा...

बिल्लू भी निकल जाता है l जिसे देख कर वहाँ पर मौजूद सभी मर्द एक के बाद एक बिल्लू के पीछे जाने लगते हैं l हरिया अपनी नजर घुमा कर देखता है गौरी उसे देख रही थी l हरिया अपनी नजर झुका लेता है l

गौरी - क्या तुझमें अब भी गैरत नहीं जाग रही... तेरी ना मर्दानगी में तेरी बीवी... तेरे दोस्त सब छोड़ गए हैं.. इससे पहले कि तेरा साया तुझे छोड़ दे... जा कुछ कर जा... मत भूल कल को तेरे बच्चे... तुझसे सवाल करेंगे... तब तु क्या जवाब देगा...

हरिया अपना गमछा कमर पर कस कर बाँध देता है और उसी ओर भागता है जिस और सभी गए थे l

उधर भीमा और उसके आदमी लठ और हथियारों के साथ मंदिर के पास पहुँचते हैं l सभी देखते हैं मंदिर के गेट पर ताला टूटा हुआ है और मंदिर के अंदर घना अंधेरा भी है l टूटा हुआ ताला देख कर भीमा मुस्कराता है l

भीमा - वाह... कमीनी ने क्या दिमाग चलाई है... हम सभी जगह ढूंढते रह जाते... पर मंदिर कभी नहीं आते... (चिल्ला कर) ऐ वैदेही... उन ल़डकियों को लेकर बाहर आ... हमें मालूम है... तु उन ल़डकियों को लेकर मंदिर के अंदर छुपी हुई है... ( कोई जवाब नहीं आता)

शनिया - कहीं बुढ़िया ने हमें झूठ तो नहीं बोला... हम सब जोश जोश में यहाँ तक आ गए...

भूरा - हाँ मुझे भी यही लग रहा है...

भीमा - चुप रहो सब... (फिर से चिल्लाता है) ऐ... हरामजादी वैदेही... कमीनी साली कुत्तीआ... बाहर आ रही है... या हम सब अंदर आयें...

शनिया - (चिल्लाते हुए) हाँ वैदेही... मैं याद हूँ ना तुझे... वादा किया था... तेरी एक दिन लूँगा... ले मैं आ गया...

मंदिर के गर्भ गृह में देवी के मूर्ति के पास वैदेही और सत्तू बच्चियों के साथ दरवाज़ा बंद कर सभी नींद में सोए हुए थे l भीमा और शनिया की आवाज़ सुन कर वैदेही और सत्तू की नींद टूटती है l

सत्तू - है भगवान... यह लोग यहाँ तक कैसे आ गए... हम यहाँ हैं... यह तो बस काकी को पता था...

वैदेही - काकी कभी अपनी परवाह नहीं करेगी... ज़रूर कुछ ऐसा हुआ होगा... जिसने काकी को मुहँ खोलने पर मजबूर कर दिया होगा...

सत्तू - अब हम क्या करें...

वैदेही - तुम बच्चियों के साथ गर्भ गृह में रहोगे... जब तक खोलने के लिए मैं या विश्व ना कहें...

सत्तू - मैं यहाँ रहूँ... और आप...

वैदेही - मैं बाहर जाकर इन्हें रोकुंगी...

सत्तू - नहीं दीदी... आप नहीं... मैं जाऊँगा...

वैदेही - (गुर्राती हुई) हूँह्हम्म्म... बच्चियों को मैं लेकर आई हूँ... इन्हें मैं कुछ भी होने नहीं दूँगी... (वैदेही उठती है)

सत्तू - दीदी...

बच्चे - मासी...

वैदेही - घबराओ मत... सत्तू... यह बच्चियाँ अब तेरी अमानत हैं... अंदर से कील लगाके रखना... सुबह होने को ज्यादा वक़्त भी नहीं है... सुबह तक मेरा विशु आ जाएगा... मैं उन्हें तब तक उलझाए रखूँगी... ठीक है.... (मल्लि आकर वैदेही को पकड़ लेती है) घबरा मत... कल इन सबका काल आ रहा है... मैं इन सबको तब तक रोक लूँगी... सत्तू... बच्चियां अब तुम्हारे हवाले...

वैदेही मल्लि को छुड़ाती है और गर्भ गृह से निकल कर बाहर आती है l अंदर से सत्तू दरवाजा बंद कर कुंडी लगा कर कील लगा देता है l वैदेही जैसे ही प्रांगण में आती है आसमान में बिजली कौंधती है l धीरे धीरे आगे बढ़ कर सीडियां उतर कर भीमा और उसके लोगों के सामने खड़ी होती है l

भीमा - लड़कियाँ... लड़कियाँ कहाँ हैं...

वैदेही - यह देवी माँ का मंदिर है... और लड़कियाँ उनकी शरण में हैं...

भीमा - हा हा हा हा हा हा... यह वही मंदिर है... जहाँ से तेरे परिवार को उठा लिया गया था... और मर्दों को काट दिया गया था... हा हा हा हा.. तब.. तब कहाँ गई थी देवी माँ... (भीमा के साथ सभी हँसने लगते हैं)

वैदेही - हँस ले कुत्ते हँस ले... जितना हो सके उतना हँस ले... क्यूँकी यह हँसी... आज के बाद कभी नहीं गूंजेगी...

शनिया - (भीमा से) भीमा भाई... तुम लोग आज इसे मेरे लिए छोड़ दो... तुम अंदर जाओ.. ल़डकियों को उठा लो...

भूरा - ल़डकियों के लिए... सबको जाने की क्या जरूरत है... मैं अकेला जाता हूँ... शनिया... आज तु बस ऐश कर...

सभी भद्दी हँसी हँसने लगते हैं l भूरा हँसते हुए आगे बढ़ता है और और वैदेही के सामने कमर पर हाथ रख कर खड़ा हो जाता है l वैदेही के सामने वैदेही को घूरते हुए पेट पकड़ कर हँसने लगता है l फिर वैदेही को किनारे छोडकर आगे बढ़ने को होता कि अचानक उसकी हँसी रुक जाती है l वह डरते और कांपते हुए अपनी कमर को देखता है वैदेही ने उसके कमर पर दरांती पूरी की पूरी घुसेड दी थी l इस बात का एहसास होते ही चिल्लाता है पर इससे पहले कि वह पूरा चिल्ला पाता वैदेही की दूसरी हाथ में कुल्हाड़ी निकल आती है और घुम कर चला देती है जो भूरा के सीने में धँस जाती है l तभी बिजली फिर से कौंधती है l सीडियों के नीचे भीमा और उसके साथ आए सभी गुर्गों की हँसी रुक जाती है l सभी की आँखे हैरत के मारे फैल चुकी थी l भूरा का शरीर धीरे धीरे प्राण छोड़ते घुटनों पर आ रहा था l अब आसमान में बिजलियाँ लगातार कौंधने लगती हैं l ठंडी ठंडी हवा बहने लगती है जो भीमा और उसके लोगों के हड्डियों में सर्द पैदा कर रही थी l वैदेही का चेहर सख्त दिख रहा था l जबड़े भिंचे हुए थे, हवाओं में लहराता हुआ उसके जुल्फें ऐसा लग रहा था जैसे खुद देवी उसके शरीर में आ गई हों l

अब तक कहकहे लगाने वाले के भीमा और शनिया का मुहँ खुला हुआ था l वैदेही भूरा की लाश को अपने पैर से धक्का देकर दरांती और कुल्हाड़ी निकाल लेती है l लाश सीडियों से लुढ़कती हुई भीमा के पैर के पास रुकती है l

वैदेही - शनिया... आजा... तेरी ख्वाहिश आज पूरा कर ले...

सब ऐसे खड़े थे जैसे सबको सांप सूँघ गया था l कोई अपने जगह से हिल भी नहीं पा रहा था क्यूँकी आज तक कोई राजा के आदमी को उन्हीं के आँखों के सामने मार दे ऐसा हुआ नहीं था l धीरे धीरे भीमा का चेहरा कठोर हो जाता है l

भीमा - (चिल्ला कर) आ आ आ... मारो इस कमीनी को... आज इसकी लाश को घसीटते हुए रंग महल ले जाएंगे... और मगरमच्छ को खिलाएँगे... टूट पड़ो इस पर...

भीमा अपनी जगह पर खड़ा रहता है और उसके सभी साथी, कोई ख़ंजर, कोई कटना, कोई खुख़री जैसे धार धार हथियार हाथों में लेकर वैदेही की भागते हुए जाते हैं l वैदेही भी तैयार थी दाएँ हाथ में कुल्हाड़ी और बाएं हाथ में दरांती लेकर इन सब पर टूट पड़ती है l वैदेही के आँखों में लेश मात्र डर नहीं था पर एक औरत से मात खा जाएं उस अपमान से कहीं ज्यादा मरजाना बेहतर समझ कर वैदेही के पास पहुँचे थे l पर उनकी तेजी से कहीं ज्यादा आज वैदेही तेज थी l किसी का पेट फट चुका था, किसी का हाथ कट चुका था और किसी का पैर कट गया था l एक के बाद एक सभी वैदेही के हाथों से बुरी तरह से ज़ख्मी हो रहे थे l वैदेही सबसे लड़ी जा रही थी, जब तीन तीन लोगों की वार रोक रखी थी तभी शनिया अपनी गुप्ति निकाल कर पीछे से वैदेही के पीठ में आरपार घुसेड़ देता है l इस वार ने पता नहीं कैसे वैदेही के अंदर अचानक ताकत भर देती है वह एक झटका देती है जिससे वह तीन जो वैदेही पर वार कर उलझाए रखे थे l गुलाटी खाते हुए नीचे गिरते हैं l वैदेही लड़खड़ाते हुए पीछे मुड़ कर देखती है l शनिया भद्दी हँसी हँस रहा था

भीमा - शाबाश... शनिया... शाबाश...

शनिया - साली कमीनी... तुझे अपने नीचे लाने की सोचा था... पर तु तो सबको ऊपर पहुँचाने में तूल गई है... अब उन ल़डकियों को हम पूरे गाँव में घसीटते हुए ले जायेंगे... तु उन्हें जाते हुए देखना फिर मर जाना... हा हा हा... (सभी शनिया के साथ हँसने लगते हैं)

वैदेही खुद को संभालती है और वह भी हँसने लगती - हा हा हा हा हा हा हा हा... I फिर

याआ आ आ... चिल्लाते हुए शनिया की ओर भाग कर उसके गले लग जाती है l जो गुप्ति शनिया ने वैदेही के पीठ पर आरपार घुसेड़ा था वही गुप्ति शनिया के पेट में घुस जाती है l वैदेही के इस हमले ने ना सिर्फ शनिया को बल्कि सभी को शॉक में डाल देती है l सबकी हँसी फिर से रुक जाती है l वैदेही शनिया के सिर को पकड़ कर अपनी दरांती को चला देती है l शनिया का सिर धड़ से अलग हो जाती है l वैदेही शनिया के सिर को हाथ में लेकर चिल्लाती है

या आ आ आ आ....

जो लोग वैदेही को घेरे खड़े थे वह सब डर के मारे नीचे भीमा के पास भाग जाते हैं l वहीँ से वैदेही की ओर देखने लगते हैं वैदेही, एक हाथ में दरांती और एक हाथ में शनिया कटा हुआ सिर था l चेहरा पूरा खून से सना हुआ था और हवा में उसके बाल लहरा रहे थे l बिजली की रौशनी में वैदेही देवी काली की प्रतिरूप दिख रही थी l वैदेही के इर्द गिर्द कुछ लोग मरे और ज़ख्मी हो कर गिरे पड़े थे और कुछ लोग भीमा के पास खड़े हो कर डर से कांप रहे थे l

वैदेही सीडियों पर बैठ जाती है अपनी कुल्हाड़ी को उठा कर उसे सीधा खड़ा करती है और उसे टेक लगा कर ऊपर अपना हाथ रखती है l दूसरी हाथ में दरांती लेकर भीमा की ओर देखती है l

वैदेही - (दहाड़ते हुए) है कोई माई का लाल... तो मुझे हटा कर ले जाओ उन बच्चियों को... आ...

भीमा और उसके साथी थर थर कांप रहे थे l वैदेही की इतना वीभत्स रूप को देख कर l एक आदमी भीमा से कहता है

आदमी - भीमा भाई... चलो चलते हैं...

भीमा - अबे चुप... खाली हाथ गए... तो मौत मिलेगी...

और एक आदमी - और आगे गए तो... साक्षात मौत बैठी है...

भीमा - घबराओ मत... कितनी देर जियेगी... थोड़ा ठहरते हैं... जब यह लुढ़क जाएगी... तब हम... ल़डकियों को ले जायेंगे...

वैदेही वैसे ही बैठी रहती है l उसकी आँखे एक टक भीमा की ओर देख रही थी l भीम की साँसे उपर नीचे हुए जा रही थी l तभी उसके कान में चीखने चिल्लाने की आवाज़ पीछे से सुनाई देती है l जब वह अपनी साथियों के साथ पीछे मुड़ कर देखता है तो उसके होश उड़ जाती है l गाँव के लोग हाथों में लाठी से लेकर हथियार तक लेकर भागते हुए मंदिर की ओर आ रहे थे l

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राजा जी... हुकुम...

यह भीमा की आवाज़ थी, भैरव सिंह के कानों में पड़ती है l रंग महल में भैरव सिंह उस तांत्रिक को लेकर अनुष्ठान प्रकोष्ठ में भीमा और उसके साथियों का इंतजार कर रहा था l उसे यकीन था आज सुबह होने से पहले जिन ल़डकियों की लिस्ट बनाई गई थी उन ल़डकियों को उठा कर ला रहे होंगे l भीमा की आवाज़ कानों में पड़ते ही भैरव सिंह के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है l क्यूँकी जैसा उसने तय किया था पिनाक के मौत के चौथे दिन पूरे राजगड़ में मातम मनेगी l

तांत्रिक - देखा यजमान... अनुष्ठान के लिए, हमने जो मुहूर्त मुकर्रर की थी... वह कितना शुभ है... हमने कहा था... कोई बाधा नहीं आएगी... कोई विघ्न नहीं आएगी... आपका प्रमुख शत्रु राजगड़ में नहीं है... आपने अपने द्वार से पुलिस वालों को धमका कर... चमका कर विदा करवा दिया... इसलिये संदेह नहीं... रखा गया मुहूर्त पर आपका रस्म... जरूर प्रारम्भ होने जा रही है... आप निश्चिंत हो कर रस्म अदायगी कीजिए... मैं आपको अस्वास्थ्य कर रहा हूँ... जब जब आपके परिवार ने इस अनुष्ठान का आयोजन किया है... आपका परिवार अविजित हो गया है... कोई भी सांसारिक शक्ति आपको परास्त कर नहीं सकता... इसलिये आप जाइए... आपके सारे कार्य अनुकूल होते जा रहे हैं... मैं अपनी तंत्र विद्या से अनुष्ठान को उत्कर्ष प्रदान करूँगा... आप अपनी राक्षसी विवाह पर ध्यान केंद्रित करें... चलिए कन्याओं का अवलोकन करते हैं...

तांत्रिक के साथ कमरे से बाहर निकल कर भैरव सिंह भीमा से मिलने बाहर जाता है l बाहर पहुँच कर देखता है भीमा लहुलुहान हो कर अकेला खड़ा है l भैरव सिंह को देखते ही जमीन पर गिर पड़ता है l पास खड़े एक गार्ड उसे उठाता है l भीमा हांफ रहा था l

भैरव सिंह - यह... क्या हुआ भीमा... तुम इस तरह...

भीमा - हम सब ना कामयाब रहे...

भैरव सिंह - (गुर्राते हुए) क्या... क्या कहा...

भीमा - हमने पुलिस वालों को डरा कर लोगों के मन में डर बिठा दिया था... लड़कियों को उठा लाने में कामयाब भी हो गये होते.... पर... वह.. वह वैदेही बीच में आ गई... उसने अकेले ही... हमारे आधे आदमियों को... भूरा और शनिया के साथ काट डाला...

भैरव सिंह - क्या...

भीमा - हाँ... हाँ हुकुम... वह एक हाथ में दरांती... और दूसरे हाथ में कुल्हाड़ी लेकर... हमारे सारे लोगों के साथ अकेली भीड़ गई... हमारे लोगों को ऐसे काट रही थी... जैसे रण चंडी... राक्षसों को काटती है.... फिर भी... हम उसे घायल करने में कामयाब हो गए थे.... पर उसी वक़्त हम पर... गाँव वाले... अपनी अपनी हथियारों के साथ टूट पड़े... सारे मारे गए... मैं... मैं किसी तरह खुद को बचा पाया... और आप तक खबर पहुँचाने आ गया...

भैरव सिंह - (चेहरा सख्त हो जाता है) तो तुम... उन कीड़े मकोड़ों से हार कर... डर कर... पीठ दिखा कर... भाग आए... (भीमा हांफ रहा था) (गार्ड से) ले जाओ इसे... आखेट गृह में... मगरमच्छ के हवाले कर दो...

भीमा - नहीं.. नहीं राजा सहाब... मेरे साथ ऐसा मत कीजिए... मैं आपका वफादार हूँ... सबसे भरोसेमंद हूँ... मेरी सेवा को याद कीजिए... राजा सहाब...

भैरव सिंह - तुम एक औरत से हारे... उसे पीठ दिखा कर आए... अपनी जान बचा कर आए... ऐसी जिंदगी से क्या फायदा... (गार्ड से) ले जाओ उसे...

भीमा चिल्लाता रहता है, पर कोई फायदा नहीं होता l गार्ड अपने साथियों के साथ साथ मिलकर भीमा को घसीटते हुए वहाँ से ले जाता है l यह सब देख कर तांत्रिक बड़ा ही शॉक में था l भैरव सिंह उसके तरफ मुड़ कर देखता है l तांत्रिक के चेहरे पर हवाईयां उड़ने लगती है l

भैरव सिंह - तांत्रिक.. तुने तो कहा था... बहुत ज़बर्दस्त मुहूर्त है... कोई बाधा कोई विघ्न नहीं आने वाली...

तांत्रिक - जी... कहा तो था...

भैरव सिंह - एक बात बताओ तांत्रिक... तुम्हें अपनी गणना पर विश्वास था... या हम पर...

तांत्रिक - जी... राजा साहब... आपकी शौर्य... अपकी पराक्रम पर... मेरी विद्या... मेरी गणना टिकी हुई थी...

भैरव सिंह - और तु हमें चूरन बेचता रहा... की तेरी गणना ऐसी है... की रस्म के साथ साथ भविष्य गढ़ने मे... कोई बाधा.. कोई विघ्न नहीं आएगी...

तभी सबकी कानों में भीमा की चीखें सुनाई देने लगती है l धीरे धीरे भीमा की चीखें सुनाई देना बंद हो जाती हैं l भैरव सिंह तांत्रिक से फिर से कहता है l

भैरव सिंह - हाँ तो तांत्रिक... हमने तेरी विद्या पर भरोसा किया... जबकि तु और तेरी विद्या... हमारे शौर्य और पराक्रम के दम पर टिकी थी... (तांत्रिक कोई जवाब नहीं देता) (जब वह गार्ड वापस आता है तो उसे कहता है) अब इस तांत्रिक को ले जाओ... लकड़बग्घे के सामने डाल दो...

तांत्रिक - यह क्या अनर्थ कर रहे हैं राजा साहब...

भैरव सिंह - कमीने... अब तक यजमान था... मौत दिखी तो... राजा साहब...

तांत्रिक - हम कुछ और हल निकाल सकते हैं...

भैरव सिंह - अब हल हो या हलाहल... जो भी निकालना होगा... राजा भैरव सिंह निकलेंगे... (गार्ड से) ले जाओ इसे... हमारी कानों में... इसकी चीखें सुनाई देनी चाहिए...

दो गार्ड्स तांत्रिक को पकड़ कर घसीटते हुए ले जाते हैं l तांत्रिक चिल्ला चिल्ला कर भैरव सिंह से माफी मांग रहा था l पर भैरव सिंह के कान में जु तक नहीं रेंग रहा था l भैरव सिंह रंग महल से बाहर आता है और अपनी गाड़ी में बैठ कर क्षेत्रपाल महल और जाता है l क्षेत्रपाल महल में पहुँच कर सीधे दीवान ए खास कमरे में जाता है l वहीँ पर लगे टीवी स्क्रीन को ऑन करने के लिए जॉन से कहता है l जॉन कोई सवाल किए वगैर सीसीटीवी के सारे स्क्रीन ऑन कर देता है l

उधर अंधेरा छट रहा था सूरज निकलने में अभी भी थोड़ा वक़्त था l विश्व उसके सारे दोस्त इंस्पेक्टर दास और सुभाष सतपती उसी बख्तर बंद गाड़ी में जो बिन्का बाईपास ओवर ब्रिज के नीचे रख छोड़े थे, डैनी के सतर्क करने और गाड़ी को हस्पताल के पास पहुँचाने के बाद उसी गाड़ी में सवार हो कर राजगड़ लौट रहे थे l गाड़ी सबसे पहले थाने के पास रुकती है, थाने की हालत देख कर सभी हैरान होते हैं l एक जला हुआ खंडर जैसा दिख रहा था जिसके कुछ जगहों से धुआं उठ रहा था l सभी गाड़ी से उतर कर तुरंत अंदर जाते हैं l सभी पुलिस वाले एक सेल में बंद बेहोश पड़े थे l सेल के बाहर ताला लगा हुआ था l धुएँ के प्रभाव में आकर सभी बेहोश थे l सारे संचार के साधन तितर बितर हुए पड़े थे l

दास - यह राजा पागल हो गया है क्या...

सुभाष - तुम अपना दिमाग ठंडा रखो... जिसने भी किया है... किसी को मारने के लिए नहीं किया है...

विश्व - पर बेबस और लाचार बना कर खौफ पैदा करने के लिए यह सब किया है... बेहतर होगा... पहले इन्हें यहाँ से रेस्क्यू किया जाए... (सभी सेल की ताला तोड़कर भीतर बेहोश पड़े पुलिस वालों को निकालने के लिए लग जाते हैं)

दास - राजा ने कहा था... आज का दिन पूरे राजगड़ में मातम होगा... अपनी बात को साबित करने के लिए... उसके लोगों ने... हर कम्युनिकेशन को डेश्ट्रॉय कर डाला होगा... फिर यह सब तांडव किया होगा...

टीलु - कहीं उसके लोगों ने यह सब... पुलिस को रोके रखने के लिए तो नहीं किया... (सभी उसके तरफ देखते हैं) कहीं इसी बीच गाँव में कोई आतंक तो नहीं मचाया...

विश्व इतना सुन कर बाहर की ओर भागता है, उसके पीछे पीछे उसके दोस्त सभी भाग जाते हैं l विश्व बाहर आकर गाड़ी में बैठता है सीलु ड्राइव कर गाड़ी को गाँव के भीतर ले जाता है l एक मोड़ पर टीलु सबको इशारा कर दिखाता है l सीलु उसी तरफ गाड़ी मोड़ देता है क्यूँकी उन्हें मंदिर के पास सभी गाँव वालों का जमावड़ा दिखता है l गाड़ी गाँव वालों के पास रुकती है l सभी गाड़ी से उतरते हैं l गाँव वाले मुड़ कर इन्हीं के तरफ़ देखते हैं, विश्व देखता है सबके आँखों में आँसू बह रहा था l टीलु विश्व के बाजू को जोर से पकड़ लेता है l सभी आगे बढ़ते हैं और गाँव वाले उन्हें रास्ता देते हैं l मंदिर के सीडियों के पास आकर रुक जाते हैं l गौरी विश्व को देखती है और रोते बिलखते आकर विश्व के गले लग जाती है l

गौरी - अनर्थ हो गया विशु... तेरी दीदी को... (कह नहीं पाती रोने लगती है, सत्तू और बच्चे भी विश्व के पास आते हैं )

सत्तू - विशु भैया... दीदी ने हम सबको मंदिर के अंदर बंद कर दिया और अकेली इन जानवरों से भीड़ गई...

विश्व गौरी को अपने से अलग करता है l आगे बढ़ता है लाश के पास लक्ष्मी और कुछ औरतें बैठ कर रो रहीं थीं l विश्व एक बुत की तरह वैदेही की लाश को घूर रहा था l विश्व के सभी दोस्त रो रहे थे पर विश्व नहीं रो रहा था या फिर रो नहीं पा रहा था l उसके आँखों से आँसू बह नहीं रहे थे l उसकी यह हालत देख कर हरिया पास आता है

हरिया - विशु... ऐ विशु भाई... दीदी... हमारे घर की लाज लक्ष्मी को बचाने के लिए.. हमारी ना मर्दानगी की बेदी पर... खुद की बली चढ़ा दी... (विश्व फिर भी एक मूक की तरह देखे जा रहा था)

टीलु - भाई यह सब मेरी गलती है... दीदी को मालूम था... यह सब होगा... पर उसने मुझे कसम दी थी... तुम्हें ना कहने के लिए... मुझे भी अपने पास नहीं रहने दिया... (विश्व टीलु के कंधे पर हाथ रखता है फिर भी नहीं रोता)

गौरी - (पास आ कर) विशु... तु रोता क्यूँ नहीं है... तेरी दीदी तुझे छोड़ कर चली गई है...

विश्व अपने दीदी के लाश के पास आता है और घुटने पर बैठ जाता है l अपनी बाहें बढ़ा कर वैदेही के शव को उठा लेता है और वैदेही के दुकान की ओर ले जाने लगता है l सारे गाँव वाले विश्व के पीछे पीछे चलने लगते हैं l विश्व दुकान के सामने पहुँच कर

विश्व - टीलु... जाओ एक कुर्सी लेकर आओ...

टीलु कोई सवाल जवाब किए वगैर अंदर जाता है उसी कुर्सी को उठा कर लाता है जिस पर वैदेही अक्सर बैठा करती थी l विश्व वैदेही की लाश को उस कुर्सी पर बिठा देता है l फिर गाँव के औरतों को हाथ जोड़ कर कहता है

विश्व - आप लोग दीदी को नहलाके... हल्दी लगा के.. अर्थी की तैयारी कीजिए... मैं अभी आया...

इतना कह कर विश्व दुकान के अंदर घुस जाता है l सभी गाँव वाले पहले एक दूसरे को देखते हैं फिर औरतें सभी वैदेही की अंतिम विदाई की तैयारी करने की तैयारी करते हैं l सारे मर्द विश्व की हरकत से हैरत में थे l थोड़ी देर बाद विश्व एक बैग लेकर आता है

विश्व - सत्तू... (बैग उसके हाथ में दे कर) इस बैग में... गाँव वालों की जमीनों की कागजात हैं... जिसे दीदी ने... भैरव सिंह के महल से हासिल किया था... बांट दो इन्हें...

सत्तू विश्व के हाथ से वह बैग ले लेता है l सत्तू के बैग ले जाने के बाद विश्व गाँव वालों के बीच से होते हुए मंदिर की ओर जाता है l विश्व को अकेले ऐसे जाते देख सीलु जिलु और मीलु भी विश्व के साथ जाने लगते हैं l गाँव के कुछ और मर्द भी पीछे पीछे जाने लगते हैं l मंदिर के पास विश्व आर्मर्ड गाड़ी के अंदर चला जाता है l बाहर लोग खड़े होकर विश्व की हरकत देखने लगते हैं l थोड़ी देर बाद विश्व गाड़ी से उतर कर इन सबको देख सीलु से कहता है

विश्व - सीलु... तुम लोग जाओ... दीदी की अर्थी तैयार करो... मैं कुछ देर में आता हूँ...

हरिया - अर्थी... हम सब मिलकर तैयार करेंगे... विशु... इससे पहले गाँव में किसी आम लोगों को कभी भी कंधा नहीं मिला है... पर आज हम गाँव वाले... दीदी को कंधा देंगे...

विश्व - नहीं... गाँव में कभी ऐसा हुआ नहीं... लोग... आज तक ना तो किसीकी खुशी में शामिल हुए थे... ना ही किसीकी मातम में..

बिल्लू - तो क्या हुआ... गाँव का यह मिथक टूटा भी तो है... कोई राजा को तो क्या... महल तक को पीठ कर लौटा नहीं था.. दीदी के साथ हमने किया था... राजा के घर खुशियों में शामिल हो ना हो... मातम में शामिल जरूर होते थे... दीदी साक्षी थी... हममे से किसी ने भी... बड़े राजा के मातम में शामिल नहीं हुए हैं... सिवाय राजा के खानदान के... किसी और परिवार की अर्थी गाँव में नहीं घूमी है... पर आज दीदी की अर्थी गाँव के हर गली से... हर चौराहे से... हर दरवाजे के सामने गुजरेगी... हम... हम अपने कंधो पर लेकर जायेंगे..

सभी - गाँव वाले चिल्लाते हैं... हाँ हाँ... हमने बड़े राजा का अर्थी गाँव में घूमने नहीं दिया... पर आज दीदी की अर्थी गाँव के हर गली से... हर घर के आँगन के आगे से गुजरेगी...

कुछ देर के लिए विश्व स्तब्ध हो जाता है l वह एक गहरी साँस लेता है फिर गाँव वालों से कहता है

विश्व - ठीक है... आप सब... दीदी की अर्थी की तैयारी कीजिए... मैं महल जा रहा हूँ... थोड़ी देर के बाद आकर शामिल हो जाऊँगा...

जिलु - महल... महल किसलिए जाओगे... क्यूँ...

मीलु - भाई... पहले दीदी की अंतिम संस्कार कर देते हैं ना... उसके बाद... हम महल की ईंट से ईंट बजा देंगे...

विश्व - मैं महल दीदी की आखरी ख्वाहिश पूरा करने जा रहा हूँ...

सीलु - आखरी ख्वाहिश...

विश्व - दीदी ने कहा था... उसे उसकी बहु के हाथ से विदा होना है... इसलिए... मैं महल... उसकी बहु को लाने जा रहा हूँ...

मीलु - भाई तुम अकेले... नहीं... भाभी को लाने हम सब जाएंगे...

गाँव वाले जो सुन रहे थे सब हैरत में थे, महल में विश्व की पत्नी कौन है l वे यह सब सुन कर एक दूसरे के मुहँ ताकने लगते हैं l

विश्व - नहीं... मुझे कुछ नहीं होगा... वैसे भी राजकुमारी जी से मैंने वादा किया था... उन्हें.. भैरव सिंह के आँखों के सामने लेकर जाऊँगा... अभी वह वक़्त आ गया है...

इतना कह कर विश्व महल की ओर जाने लगता है l गाँव के कुछ लोग विश्व के दोस्तों के साथ विश्व के पीछे पीछे चलने लगते हैं और कुछ लोग अर्थी का सामान जुटा कर अर्थी बनाने लगते हैं l विश्व महल के कुछ दूरी पर पहुँच कर सबको रुकने के लिए कहता है l विश्व की बात मान कर सभी रुक जाते हैं l विश्व अकेले महल की ओर बढ़ता है l उसे आता देख एक सिक्यूरिटी गार्ड वायर लेस से भैरव सिंह को इंफॉर्म करता है l

गार्ड - जनरल... सम वन इज कमिंग...

भैरव सिंह - आई नो... डोंट स्टॉप हिम... लेट हिम कम...

गार्ड - ओके जनरल...

भैरव सिंह अपनी सर्विलांस रूम में बैठ कर विश्व को महल की परिसर में दाखिल होते हुए देख रहा था l वायरलेस को रख कमरे से भैरव सिंह निकल कर बाहर बरामदे तक आता है l विश्व सीढ़ीयों तक पहुँच चुका था l भैरव सिंह को देख कर विश्व रुक जाता है l दोनों की नजरें मिलती है l विश्व भैरव सिंह के आँखों में देखते हुए सीढ़ी चढ़ कर भैरव सिंह के सामने खड़ा होता है l भैरव सिंह विश्व के आँखों में उठ रहे तूफान को साफ महसुस कर पा रहा था l

भैरव सिंह - आ विश्वा आ... तु वह पहला इंसान है... जिससे मिलने और बात करने बाहर तक आए हैं... (भैरव सिंह आगे बढ़ने लगता है, विश्व भी उसके साथ चलने लगता है) जो हुआ... हम वैसा नहीं चाहते थे... पर हो गया... अगर हुआ... तो ऐसा क्यूँ हुआ... जब कि उसे होना नहीं चाहिए था... (विश्व खामोश रहता है) यह एक बहुत बड़ा सच है... जो कोई नहीं सोचता... प्रकृति का अपना नियम है... पहाड़ से.. कोई कंकर टकराता नहीं है... पर तुने... और तेरी बहन ने वह सब किया... जो प्रकृति के विरुद्ध है... परिणाम ऐसे ही सामने आता है... हम जानते हैं... तेरे अंदर बहुत गुस्सा... बहुत आग है... तेरे अंदर की ज़ज्बात... जोश मार रहा होगा... तेरे अंदर की आग में.. यह महल... इस सल्तनत को जला देने के लिए... पर तु पढा़ लिखा है... इस सच को तु अच्छी तरह से समझता होगा... हर क्रिया का प्रतिक्रिया होता है... यह बात तुझे ही नहीं... बल्कि इस स्टेट में सबको पता होना चाहिए... की यहाँ क्रिया करना हमारा हक है... हर हमारे खिलाफ क्रिया का प्रतिक्रिया देना भी हमारा ही हक है... (विश्व फिर भी शांत था) अपनी दीदी की चिता को आग देने के बजाय तुम यहाँ आए हो... हम समझ सकते हैं... बदला चीज़ ही ऐसी है... पर हर किसी को... प्रकृति का नियम याद रखना चाहिए... कंकर की औकात ठोकर पर होती है... पहाड़ से टकराने की नहीं... (अब तक दोनों सर्विलांस कमरे में आ चुके थे) विश्वा.. यह देख... सारा गाँव हमारी नजरों में है... क्यूँकी हम हज़ारों आँखों से सब देख रहे हैं... हमने यह भी देखा... कैसे तेरे बंदे ने... हमारे जमीनों की कागजात... गाँव के लोगों में बांट दिया... (इतना कह कर भैरव सिंह एक कुर्सी पर बैठ जाता है) तुने जितना करना था... कर लिया... जमीनों की कागजात हम हासिल कर ही लेंगे.... (गम्भीर हो कर) तेरे वज़ह से हमसे हमारा परिवार बिखर गया... पर बदले में तेरा बहुत कम ही नुकसान हुआ है... अब बोल... आगे क्या करना चाहता है... अपनी दीदी की लाश की चिता में आग देना चाहता है... या तेरी भी लाश को लावारिस करना चाहता है...

विश्व - सुना है... तेरे खानदान को... ताकत और हुकूमत.. एक टूटी हुई नंगी तलवार से मिला था...

भैरव सिंह - हाँ... सही सुना है...

विश्व - और क्या यह भी सच है... की तलवार जिस दिन सलामती पर आ जाएगा... उस दिन तेरी हुकूमत... तेरी सल्तनत... सब खत्म हो जाएगा...

भैरव सिंह - (भौहें सिकुड़ जाते हैं) तुझे उस तलवार में इतनी दिलचस्पी क्यूँ है... कोई हरकत करने की सोचना भी मत... वर्ना... यहाँ से जिंदा वापस नहीं जा पाएगा...

विश्व - मैं तब भी जिंदा वापस गया था... जब कुछ नहीं था... आज भी जाऊँगा... मेरी अमानत है तेरे महल में... उसे लेकर जाऊँगा... और इस बार... तु... बाहर तक मुझे मेरे अमानत के साथ... छोड़ने जाएगा... (यह कह कर विश्व सीसीटीवी की ओर देख कर मुस्कराता है)

भैरव सिंह हैरान हो कर पीछे मुड़ कर सीसीटीवी की ओर देखता है, उसे सीसीटीवी पर कोई हलचल नजर नहीं आता, वह सतर्क हो जाता है और पीछे मुड़ कर देखता है, विश्व वहाँ पर नहीं था l अपनी चेयर से उठ खड़ा होता है, मुट्ठियाँ भिंच कर कमरे से बाहर निकल कर अंतर्महल की ओर जाता है l रुप की कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था l गुस्से में भैरव सिंह का चेहरा थर्राने लगता है l एक लात मारता है, दरवाजा धड़ाम से खुल जाता है l अंदर का दृश्य देख कर वह स्तब्ध हो जाता है l
 
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