Maa Sex Kahani माँ का आशिक
10-08-2020, 12:55 PM,
#1
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माँ का आशिक

आज सुबह से शहनाज़ बहुत खुश थी क्योंकि इकलौता बेटा शादाब दस साल के बाद घर वापिस लौट रहा था। इन सालों के दौरान दोनो के बीच बहुत कम बात हुई क्योंकि बेटा हॉस्टल में रहता था।

दरअसल शहनाज़ के पति की मौत गांव में डॉक्टर ना होने की वजह से हो गई थी इसलिए वी बुरी तरह से टूट गई थी और उसने उसी दिन फैसला किया था कि वो अपने बेटे को हर हाल में एक डॉक्टर बनाएगी ताकि फिर गांव में किसी की मौत डॉक्टर ना होने की कमी के चलते ना हो सके। उसने अपने बेटे से कसम ली थी कि जब तक वो एमबीबीएस का एग्जाम पास नहीं करेगा वो उसकी शक्ल तक नहीं देखेगी।
कल ही सीपीएमटी का रिजल्ट आया था जिसमें उसके बेटे ने टॉप किया था और बस अब कुछ साल में अंदर ही उसका डाक्टर बन जाना तय था।

शाहनवाज जानती थी कि उसने अपने मासूम से बेटे पर बहुत ज़ुल्म किए हैं लेकिन वो गांव की भलाई के चलते मजबुर थी और ये उसके बाप की भी इच्छा थी कि उसका बेटा एक डॉक्टर बने। शाहनवाज की शादी रहमान से मात्रा 17 साल की उम्र में हो गई है और अगले ही साल उसने एक प्यारे से बेटे को जन्म दिया था। लेकिन उनकी ये खुशी ज्यादा दिन तक नहीं चल पाई और एक एक्सिडेंट में उसके पति की मौत हो गई थी, गांव से शहर तक ले जाते उसने दम तोड़ दिया था। काश उस वक़्त गांव में अस्पताल होता तो आज उसका मियां जिस्म होता।

शहनाज़ के शौहर एक शाही राजघरानों से थे। राज पाट तो चले गए लेकिन उनकी शानो शौकत अभी तक जिंदा थी। घर में पीछे छुट गई थे उसके सास ससुर जी की अब पूरी तरह से कमजोर होकर बेड का सहारा ले चुके थे। बस उनकी सेवा में लगी रहती थी, घर वालो और रिश्तेदारों ने दूसरी शादी का बहुत दबाव दिया लेकिन उसने अपने बेटे के लिए सब कुछ कुर्बान कर दिया और शादी ना करने का फैसला किया था। बेचारी नाज बचपन से लेकर अब तक दुख ही झेलती अाई थी, छोटी सी उम्र में ही मा का इंतकाल हो गया था, बाप ने दूसरी शादी कर ली और सौतेली मा ने नाज को बहुत परेशान किया जिस कारण वो सिर्फ 12 तक ही पढ़ सकी थी।

एक दिन रहमान के बाप की नजर उस पर पड़ी तो उन्हें लगा कि उन्हें अपने बेटे के लिए जिस परी की तलाश थी वो उन्हें मिल गई हैं बस फिर उसकी शादी हो गई।

पूरे घर को सजाया गया था और एक बहुत ही बड़ी पार्टी का आयोजन किया गया था क्योंकि आज शादाब ने एमबीवीएस का एग्जाम पास कर लिया था इसलिए पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई थी।

शहनाज़ सुबह जल्दी उठी और नहाने के लिए बाथरूम में घुस गई। उसने अपना बुर्का बाहर ही उतार दिया था और अब सिर्फ सूट सलवार पहने हुए थी। शाहनवाज एक गोरे बदन की भरी हुई औरत थी, दूध में चुटकी भर सिंदूर मिला दो तो ऐसा गजब का रंग था, एक दम चांद सा खुबसुरत चेहरा, गहरे काले घने बाल मानो ऐसे लहराते थे कि सावन की घटाए भी पनाह मांगती थी।उसके भरे हुए सुंदर गाल मानो कोई खूबसूरत सेब, गालों की लाली देखते ही बनती थी, उसकी बड़ी बड़ी प्यारी खूबसूरत बोलती हुई आंखे, छोटी सी प्यारी सी नाक जो उसकी सुन्दरता में चार चांद लगा देती थी। उसके होंठ बिल्कुल शबनम की बूंद की तरह से नाजुक, हल्का सा लाल रंग लिए हुए मानो कुदरत ने खुद ही उसके होंठो को सजाकर भेजा हो,एक दम पतले पतले होंठ मानो किसी गुलाब की आपस में जुड़ी हुई लाल सुर्ख फूल की दो पंखुड़ियां।

बस उसका ये कातिल चेहरा ही आज तक सभी ने देखा था क्योंकि वो अपने आपको पुरी तरह से ढक कर रखती थी। वो एक मर्यादा में रहने वाली औरत थी और उसने अपनी मर्यादा को कभी लांघने की कोशिश नहीं करी थी क्योंकि उसके संस्कार हमेशा आड़े अा जाते थे। वो इतनी शर्मीली थी कि आज तक किसी के आगे पूरी तरह से नंगी नहीं हुई थी यहां तक की सुहागरात को भी उसने अपने पति को पूरे कपड़े निकालने से साफ इंकार कर दिया था क्योंकि उससे ये सब नहीं हो सकता था। नहाते हुए भी हमेशा अपनी आंखे बंद करके ही नहाती थी क्योंकि उसमे इतनी हिम्मत भी नहीं थी कि वो अपने आपको खुद ही नंगा देख सके। आंखो की हया और खुदा का डर उसके उपर हमेशा हावी रहा।

उसने अपने कपड़े धीरे से एक एक करके बंद आंखो के साथ निकाले और जल्दी ही नहा धोकर तैयार हो गई। ब्रा पेंटी पहन लेने के बाद उसने एक काले रंग का सूट सलवार पहना और फिर बुर्का पहनकर एयरपोर्ट जाने के लिए तैयार हो गई।

ड्राइवर ने गाड़ी निकाली और जल्दी ही वो एयरपोर्ट पर खड़ी हुई थी। वो बाहर निकलते लोगो पर नजर गड़ाए हुए थी उसकी बेचैनी इस कदर बढ़ गई थी कि उसे आने वाले हर लड़के में अपना बेटा नजर अा रहा था। अपने लख्ते जिगर को वो कैसे पहचानेगी ये सोच सोच कर वो परेशान थी। एयरपोर्ट पर जाने वाले एक मात्र रास्ते पर उसका ड्राइवर उसके बेटे के नाम की तख्ती लिए खड़ा हुआ था।
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खुले कपडे पहने के बाद ही उसके जिस्म का हर उभार साफ नजर आता था। कपड़ों के ऊपर से ही उसकी भरी हुई भारी भरकम गांड़, एक दम उभरी हुई, बिल्कुल बाहर की तरफ निकली हुई ऐसे लगती थी मानो जबरदस्ती अंदर कैद की गई हो। उसकी गांड़ की मस्त गोलाई देख कर लोगो के लंड सलामी देने लगते थे और आज भी कुछ ऐसा ही हुआ। उससे थोड़ी दूर खड़े हुए दो मनचले बहक गए और उनमें से एक बोला:'

" ओए उधर देख, क्या माल है यार, उफ्फ ऐसी तगड़ी उभरी हुई गांड़ आज तक किसी की नहीं देखी, लंड खड़ा हो गया।

दूसरा:" हान भाई, क़यामत हैं क़यामत, काश इसकी नंगी गांड़ देख पाता,मसल मसल कर लाल कर देता मैं, साली ने लंड को तड़पा दिया।

शहनाज़ उनके बाते सुनकर हैरान हो गई, इतनी थोड़ी सी उम्र में ये लड़के बिगड़ गए हैं, क्या जमाना अा गया है। लेकिन लडको की बाते सुनकर वो अंदर ही अंदर मुस्कुरा उठी अपनी तारीफ सुनकर और उसके जिस्म में हलचल सी हुई।

पहला लड़का:" उसकी गांड़ का एक उभार तेरे दोनो हाथो में भी नहीं आएगा, तुझसे नहीं हो पाएगा, इसके लिए तो कोई सांड जैसा तगड़ा लड़का चाहिए।

तभी शादाब दूर से आता हुआ दिखाई दिया तो लड़को की नजर उस पर पड़ गई, छह फीट लंबा चौड़ा खूबसूरत जवान, एक दम अपनी मां की तरफ गोरा, चौड़ी छाती, आंखो पर काला चश्मा,।

उसे देखते ही पहले वाला मनचला बोल उठा:" वो देख यार, क्या खूबसूरत लड़का हैं, बिल्कुल सांड के जैसा मोटा तगड़ा, मेरे हिसाब से इस औरत के लिए ये सही है, हाथ देख उसके कितने बड़े और मजबूत लग रहे हैं। इसकी गांड़ तो वो ही ठीक से मसल सकता हैं।

मनचले की बात सुनकर शहनाज़ की नजर अपने आप उस शादाब की तरफ उठ गई। सच में खूबसूरत था वो, दूर से आता हुआ बिल्कुल कामदेव के जैसा लग रहा था, एक बार तो उसे देखकर सच में शहनाज़ का दिल धड़क उठा और नजरे गड़ाए उसे ध्यान से देखती रही। जैसे जैसे वो पास आता जा रहा था शहनाज़ की आंखे मस्ती से चोड़ी होती जा रही थी और पूरे जिस्म में कंपकपी सी दौड़ रही थी।

जैसे ही वो उसके सामने आया तो दोनो की आंखे टकराई और दोनो एक साथ मुस्कुरा दिए तो शादाब आगे बढ़ा और बोला:"

" अम्मी मैं शादाब, आपका बेटा,

शहनाज़ तो जैसे ख्वाबों से बाहर अाई और उसे पहचान लिया और एक दम से अपनी बांहे फैला दी तो बेटा अपनी मा की बांहों में समा गया। दोनो एक दुसरे की धड़कन सुनते रहे और बेटा पूरी तरह से अपनी मा को कसकर अपनी बांहों में भर लिया था और मा भी प्यार से अपने बेटे की कमर थपथपा रही थी।

थोड़ी देर बाद शहनाज़ ने उसे पुकारा:" बेटा बस छोड़ अब मुझे, घर चले, तेरे दादा दादी तेरा इंतजार कर रहे होंगे।

शादाब जैसे भावनाओ के आवेश से बाहर आया और अपनी मा की तरफ देखते हुए कहा:"

" हान अम्मी चलो, घर

बाहर आकर दोनो गाड़ी में बैठ गए और गाड़ी घर की तरफ चल पड़ी। शहनाज़ को अपना बेटा बहुत प्यारा लगा और वो बार बार उसे ही देखे जा रही थी। उसे रह रह कर उन मनचलों की बाते याद अा रही थी कि इसकी गांड़ को थामने के लिए तो इस लड़के जैसे मोटे और तगड़े हाथ चाहिए। ये बात मन में आते ही ना चाहते हुए भी शहनाज़ की नजर अपने बेटे के हाथो पर पड़ी। सच में उसके बेटे के हाथ बहुत तगड़े और मोटे ताजे थे। शहनाज़ का पूरा वजूद कांप उठा और उसकी सांसे अपने आप तेज गति से चलने लगी और माथे पर हल्का सा पसीना उभर आया। उफ्फ मैं ये क्या सोचने लगी, शहनाज़ को एक तेज झटका सा लगा और वो अपनी कल्पना से बाहर अाई और आगे की तरफ देखते हुए चुप चाप बैठ गई। ना चाहते हुए भी बीच बीच में रह रह कर उसकी नजर अपने बेटे के हाथो पर पड़ रही थी। खैर कुछ देर के बाद वो घर पहुंच गए।
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10-08-2020, 12:55 PM,
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शहनाज़ गाड़ी से उतरी और घर के अंदर की तरफ चल पड़ी। शादाब भी उसके साथ ही था। दोनो जैसे ही दरवाजे के अंदर दाखिल हुए तो शादाब के उपर छत पर से फूलो की बरसात होने लगी और लोगो ने माला पहना कर उसका स्वागत किया। गांव की औरतें और जवान लड़कियां उसे देख कर आंहे भर रही थी। इस सम्मान के बाद शादाब अपनी मा के साथ घर में चला गया और दोनो मा बेटे दादा दादी के कमरे की तरफ बढ़ गए। शादाब पीछे पीछे चल रहा था और शहनाज़ की गांड़ इतनी ज्यादा उछल रही थी कि ना चाहते हुए भी उसकी नजर अपनी मां की गांड़ पर जमी हुई थी। कर कदम पर शहनाज़ की गांड़ उपर नीचे हो रही थी और बुर्के में से साफ़ नजर आ रही थी। शादाब को अच्छा नहीं लगा रहा था अपनी सगी मा की गांड़ के इस तरह देखना इसलिए वो तेजी से चलता हुआ अपनी मा से आगे निकल गया। शहनाज़ के होंठो पर मुस्कान आ गई और बोली:"

" क्या बात हैं बेटा, बहुत जल्दी ही अपने दादा दादी से मिलने की तुझे जो इतनी तेजी से चल रहा है !!

शादाब ने मुड़कर अपनी मा की तरफ देखा तो उसकी नजर फिर से अपनी मा के खूबसूरत चेहरे पर पड़ी और वो मुस्कुरा दिया। शहनाज़ जैसे जैसे उसके पास आती जा रही थी शादाब की नजर एक पल के लिए ही सही लेकिन उसकी तनी चूचियों पर पड़ गई जो कि पूरी तरह से कपड़ों के ऊपर से ही उभरी हुई नजर आ रही थी।

शादाब की आंखे फिर से खुली की खुली रह गई। उफ्फ वो तो इसलिए आगे निकला था कि अपनी मा की गांड़ देखने से बच जाए लेकिन चूचियों का नजारा तो गांड़ से भी ज्यादा मादक था। शादाब जैसे अपने होश ही खो बैठा और एकटक अपनी मा की तरफ देखता रहा। शहनाज़ चलती हुई उसके पास पहुंची और उसकी आंखो के आगे चुटकी बजाई तो शादाब जैसे नींद से जागा ।

शहनाज़:" क्या हुआ बेटा कहां खो गए थे? तबियत तो ठीक हैं तुम्हारी ?

शादाब हकलाते हुए:" हान अम्मी, ठीक हैं सब, बस आपको देख रहा था कि मेरी अम्मी कितनी खूबसूरत है, बहुत दिनों के बाद देखा आपको ।

शहनाज़:" हान बेटा मैं भी तरस गई थी तुझे देखने के लिए, चल पहले तेरे दादा दादी से मिल लेते है, वो बेचारे नहीं तेरी एक झलक के लिए बेचैन हैं, हम तो बाद में भी बात कर लेंगे आराम से उपर जाकर !!

दोनो मा बेटे एक साथ आगे बढ़ गए और दादा दादी के कमरे में पहुंचे तो दोनो के चेहरे आपके इकलौते पोते को देख कर खुशी से खिल उठे। शादाब ने उन्हें सलाम किया तो उसकी दादा दादी ने उसे अपनी बांहों में भर लिया। शादाब भी अपनी दादी मा से लिपट गया।

दादी पूरी तरह से भावुक हो गई थी इसलिए भर्राए गले के साथ बोली:"

" आंखे तरस गई थी तुझे देखने के लिए मेरे बच्चे, अब जाकर सुकून मिला हैं। कितना बड़ा हो गया है तू, अल्लाह तुझे सलामत रखे बेटा।

दादा:" बेटा अगर दादी से मन भर गया तो अपने दादा के भी गले लग जा एक बार ताकि मुझ बूढ़े को भी थोड़ा सुकून मिल सके।

शादाब पागलों की तरह अपने दादा से लिपट गया तो ये देख कर दादी और शहनाज़ दोनो की आंखे छलक उठी। थोड़ी देर के बाद शादाब अलग हुआ और उन्हें अपने हॉस्टल की बात बताने लगा। सभी ध्यान से उसकी बात सुन रहे थे और शादाब बीच बीच में मजाक भी कर रहा था जिससे अब माहौल थोड़ा बदल चुका था। उसकी बाते सुनकर शहनाज़ बार बार मुस्कुरा रही थी जिससे उसका चेहरा और भी खूबसूरत लग रहा था।

शहनाज़ अपने ससुर से पर्दा नहीं करती थीं क्योंकि उसके ससुर ने उसे मना कर दिया था और उसे अपनी सगी बेटी की तरह प्यार करता था। शहनाज़ भी जानती थी कि सास ससुर का उसके सिवा इस दुनिया में कोई नहीं है इसलिए उसने भी अपने ससुर की बात मान ली थी और अपने ससुर से पर्दा खोल दिया था।

खैर दादा दादी खाना खा चुके थे। धीरे धीरे बाहर अंधेरा होने लगा और दादा दादी ने शादाब को बोला:

" बेटा उपर जाकर खाना खाकर तू भी आराम कर ले, थक गया होगा सारे दिन के सफर से। जा बेटा सुबह बात करेंगे क्योंकि तेरी अम्मी शहनाज़ भी सुबह से भूखी हैं तेरे लिए।

शादाब ने अपने दादा की बात सुनकर प्यार से अपनी अम्मी की देखा तो शहनाज़ ने उसे एक प्यारी सी स्माइल दी और दोनो मा बेटे एक साथ उपर की तरफ चल पड़े। घर थोड़े दिन पहले ही फिर से बनाया गया था इसलिए आगे आगे शहनाज़ चल रही थी और सीढ़ियों पर चढने की वज़ह से उसकी गांड़ उछल उछल पड़ रही थी और शादाब फिर से अपनी मा की गांड़ को थिरकते हुए देखने से खुद को नहीं रोक पाया और उसके लंड में हलचल सी होने लगी।

खैर जल्दी ही वो उपर पहुंच गए और शादाब नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया।

शहनाज़ अपने बेटे के लिए खाने की चीज टेबल पर सजाने लगीं। उसने सब कुछ अपने बेटे की पसंद का बनाया था ताकि उसके बेटे को खुशी महसूस हो। टेबल सजाते समय उसके मन में विचार उठ रहे थे कि उसका बेटा सच में बहुत खूबसूरत जवान बन गया है, एक दम किसी फिल्मी हीरो की तरह से सुन्दर, ऐसे ही शौहर की कल्पना वो किया करती थी जो कि इसके सपनों का राजकुमार था। कैसे सारे गांव की औरतें और लड़कियां उसके बेटे को आंखे फाड़ फाड़ कर देख रही थी ये सब याद आते ही उसने अपने बेटे की चिंता हुई और उसने अपने बेटे की नजर उतारने का फैसला किया।

थोड़ी देर बाद शादाब नहाकर बाहर अा गया और उसने एक सफेद रंग का ढीला कुर्ता पजामा पहन लिया ताकि कुछ सुकून मिल सके। बेटे के बाहर आते ही वो बोली :"

" शाद बेटे जरा पहले इधर अा तेरी नजर उतार दू, कहीं किसी की नजर ना लग गई हो मेरे बेटे को। सब तुझे अपने गौर से देख रहे थे।

शादाब के होंठो पर मुस्कान अा गई और उसने अपनी मम्मी से कहा:"

" क्या मम्मी आप भी इन बातो को मनाती हैं? ऐसा कुछ नहीं होता हैं

शहनाज़:" तुम ज्यादा मत सोचो और इधर आओ मेरे पास, मेरे दिल को तसल्ली नहीं मिलेगी जब तक कि तेरी नज़र नहीं उतर देती मैं।

शादाब अपनी अम्मी की खुशी के लिए आगे बढ़ गया और उनके सामने खड़ा हो गया। शहनाज ने कुछ लाल मिर्च ली और उसे शादाब के सिर पर से उतार कर गैस पर जला दी तो वो धुं धूं करके जलने लगी। लेकिन किसी को मिर्च के जलने की वजह से खांसी या धसका नहीं हुआ तो शहनाज़ बोली:"

" देख बेटे कितनी ज्यादा नजर थी तुझे, मिर्च कैसे आराम से जल गई और हमे कुछ नहीं हुआ !!

शादाब को अपनी अम्मी पर बड़ा प्यार आया क्योंकि वो उसकी बहुत फिक्र कर रही थी इसलिए अपनी मा की हान में हान मिलाते हुए बोला:"

" हान अम्मी सच में, आपने बहुत अच्छा किया जो मेरी नजर उतार दी, आप कितनी अच्छी हो और मेरा कितना ख्याल रखती हो।
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#4
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शहनाज़ अपने बेटे की बात से खुश हो गई और आगे बढ़ कर उसका माथा चूम लिया और बोली :" बेटा अल्लाह तुझे हमेशा बुरी नजर से बचाए।मेरा बेटा वैसे भी कितना सुंदर है तो ऐसे में नजर तो लग ही सकती हैं !!.

ऐसा कहकर वो अपने बेटे को एकटक देखने लगी तो शादाब ने अपनी अम्मी को मजाक में बोला : अम्मी अगर आप मुझे ऐसे देखती रहेगी तो और का तो मुझे पता नहीं लेकिन आपकी नजर जरूर लग जाएगी !!

शहनाज़: बेटे एक मा की नजर अपने बेटे को कभी नहीं लगती हैं, मैं तो बस ये देख रही थी कि तुम सच में बहुत खूबसूरत दिखते हो!

शादाब अपनी मा की बात पर झेंप सा गया और बात को बदलते हुए बोला:"

" अम्मी मुझे बहुत तेज भूख लगी हैं,अगर आपकी इजाज़त हो तो खाना खाया जाए !!

शहनाज़ थोड़ा फिक्र करते हुए:" अरे तेरी नजर उतारने के चक्कर में मैं तो भूल ही गई थी कि मेरा लाडला बेटा भूखा हैं, अा जा चल जल्दी खाना खाते हैं।

उसके बाद दोनो मा बेटे खाने की टेबल पर बैठ गए और शहनाज़ ने खाने का एक निवाला बनाया और शादाब के मुंह के करीब लाते हुए बोली: इतने साल के मेरा बेटा आया हैं अपने हाथ से खाना खिलाऊंगी तुझे।

शादाब अपनी मा का इतना प्यार देखकर खुश हो गया और बड़े प्यार के साथ अपना मुंह खोल कर निवाला खा लिया। एक के बाद एक निवाले बनाकर शहनाज़ अपने बेटे को खिलाने लगी।

शादाब को अपनी अम्मी का ख्याल आया और वो भी अपने हाथ से निवाला बनाकर अपनी मा के लाल सुर्ख होंठो के पास ले गया तो शहनाज़ ने अपना मुंह खोलते हुए निवाला खा लिया। दोनो मा बेटे बहुत प्यार के साथ एक दूसरे को खाना खिला रहे थे।

शादाब खाना खाते हुए:" अम्मी ये सब इतना जायकेदार खाना आपने खुद बनाया हैं क्या ?

शहनाज खुश होते हुए:" बिल्कुल बेटा, अपने लाडले के लिए मैंने खुश तेरी पसंद का सभी कुछ बनाया हैं।

शादाब:" ओह अम्मी, मन करता है कि आपके हाथ चूम लू।

इतना कहकर शादाब ने अपनी अम्मी के हाथो को चूम लिया तो शहनाज खुश के मारे फूली नहीं समाई और अपने बेटे को खीर खिलाते हुए बोली :"

" बेटा खीर कैसी लगी तुझे ? बचपन में तो तुझे बहुत पसंद थीं, रोज खीर खाया करते थे तुम

शादाब:" अच्छी बनी हैं अम्मी, मुझे पहले से ही दूध और उससे बनी चीज़े बहुत पसंद हैं।

दोनो मा बेटे बात करते हुए खाना खा रहे थे कि तभी शहनाज़ को एक झटका सा लगा और शादाब ने तेजी से पानी का गिलास अपनी अम्मी की तरफ उठा कर बढ़ा दिया तो जल्दबाजी में वो पूरा ग्लास शहनाज़ की छाती पर गिर गया जिस कारण उसका बुर्का पूरी तरह से भीग गया। शादाब ने दूसरा ग्लास उठा कर जल्दी से अपनी अम्मी को पिलाया तो उसे कुछ सुकून मिला और वो थोड़ा नॉर्मल हुई।

पानी से गीला हो जाने के कारण शहनाज का बुर्का उसके जिस्म से पूरी तरह से चिपक गया था जिस कारण उसकी चूचियो का उभार साफ़ नजर आने लगा और उनकी बनावट पुरी तरह से उभर रही थी जिससे साफ़ पता चल रहा था कि उसकी चूचियां सच में बहुत तगड़ी और मस्त है। शादाब की नजरे एकदम से अपनी अम्मी के सीने पर पड़ी तो उसकी सांसे तेज गति से चलने लगी। शहनाज को जैसे ही अपने बेटे की नजरो का आभास हुआ तो उसने अपनी चुचियों की तरफ देखा तो उसे बहुत शर्म महसूस हुई और तेजी से उठकर अंदर कमरे में भाग गई। उसकी सांसे तेज गति से चल रही थी और गला पूरी तरह से सूख गया था। उसका चेहरा शर्म के मारे लाल सुर्ख हो चुका था और चूचियां तेज सांसों के साथ उपर नीचे हो रही थी। उसने अपना बुर्का उतार दिया और उसके नीचे से गीला सूट भी उतार कर एक दूसरा सूट पहन लिया और उसके बाद फिर से बाहर की और चल पड़ी जहां उसका बेटा बैठा हुआ था। शहनाज़ के पैर बुरी तरह से कांप रहे थे और वो बहुत बड़ी उलझन में थी कि उसके इस तरह भागने से शादाब क्या सोच रहा होगा।

खैर कांपते हुए कदमों के साथ वो फिर से अपने बेटे के सामने टेबल पर बैठ गई और उसके कुछ भी बोलने से पहले खुद ही सफाई देने लगीं:

" बेटा वो पानी गिरने के कारण कपडे गीले हो गए थे जिस कारण मुझे ठंड लग रही थी इसलिए मैं एक दम से चली गई थी।

शादाब तो डर रहा था कि कहीं उसकी अम्मी उसे डांट ना करे क्योंकि वो अपनी मा की चूचियां घूरते हुए पकड़ा गया था। अपनी अम्मी की बात सुनकर शादाब ने सुकून की सांस ली और खीरे खाने लगा। दोनो मा बेटे जानते थे कि शहनाज़ के भागने की असली वजह क्या थी लेकिन दोनो ही डरे हुए थे इसलिए किसी की हिम्मत आगे सवाल पूछने की नहीं हो रही थी। शादाब के मुकाबले शहनाज की हालत ज्यादा खराब थी क्योंकि वो बहुत ज्यादा शर्मीली जिस्म की औरत थी इसलिए जब से अाई थी उसकी नजर एक बार भी शादाब से नहीं मिल पाई थी और वो चुपचाप मुंह नीचे किए हुए खीर खा रही थी और उसके हाथ कांप रहे थे। शादाब की नजर अपने आप ही ना चाहते हुए भी बार बार फिर से अपनी अम्मी के सीने पर पड़ रही थी लेकिन इस बार उसे पहले की तरह कुछ नजर नहीं आ रहा था।

शादाब:" अम्मी आप ठीक तो हो ? क्या हुआ आपके हाथ इतने क्यों कांप रहे है ?

अपने बेटे की बात सुनकर शर्म के मारे शहनाज़ का चेहरा शर्म से एक दम बिल्कुल लाल हो गया और उसे लगा जैसे उसकी सांसे रुक सी गई है। उसने बड़ी मुश्किल से अपनी हिम्मत बटोरकर नीचे ही मुंह किए हुए कहा:" बेटा वो पानी गिरने से ठंड ठंड लग गई थी ना शायद इसलिए!

कमरे में एसी चल रही थी और तापमान बिल्कुल ठीक था इसलिए सर्दी लगने का तो कोई सवाल नही था, शादाब को भले ही सेक्स और जिस्म के बारे में कुछ नहीं पता था लेकिन इतना वो जरूर समझ गया था कि उसकी अम्मी ठंड की वजह से नहीं बल्कि किसी और वजह से कांप रही है।
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10-08-2020, 12:56 PM,
#5
RE: Maa Sex Kahani माँ का आशिक
शादाब को अपनी अम्मी की फिक्र हुई और वो खड़ा होकर ठीक उसके सामने पहुंच गया और अपनी अम्मी का हाथ पकड़ लिया तो शहनाज़ का रोम रोम कांप उठा। उसके शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई और उसके रोंगटे खड़े हो गए। शादाब ने देखा कि उसकी अम्मी का हाथ तो ठंडा नहीं है फिर तो अम्मी को कांपना नहीं चाहिए।

शादाब ने कहा:" अम्मी आपका हाथ तो एक दम ठीक है, फिर आपको ठंड क्यों लग रही है ?
देखो ना बिल्कुल भी ठंडा नहीं है !!

ऐसा ऐसा कहकर वो अपनी मा के हाथ पर अपनी उंगलियां फिराकर देखने लगा। उफ्फ शहनाज़ को काटो तो खून नहीं, बेशक उसने ऐसे ही अपने सपनों के राजकुमार की कल्पना की थी और शादाब की उंगलियां उसके जिस्म को रोमांचित कर रही थी।

शादाब:" अम्मी मेरी तरफ देखो ना एक बार ? क्या हुआ आप ठीक तो हैं ?

शहनाज ने बड़ी मुश्किल से अपना चेहरा उपर की तरफ उठाया और जैसे ही उसकी नजर अपने बेटे के खुबसुरत चेहरे से होती हुई उसकी आंखो से टकराई तो हया के मारे उसकी पलके अपने आप नीचे गिर गई।

शादाब अपनी अम्मी का चेहरा पहली बार इतने पास से देख रहा था। एक दम खुबसुरत, बिल्कुल किसी परी की तरह, शर्म के मारे उसकी आंखे हल्की सी लाल हो गई थी और उसके सुर्ख लाल होंठ कांप रहे थे और अपने आप ही हल्का हल्का सा खुल रहे थे।

शादाब ऐसे ही अपनी अम्मी को देखता रहा।शहनाज़ ने बीच में हल्की सी अपनी पलके उठाई और देखा कि उसका बेटा फिर से उसके चेहरे को बड़े प्यार से देख रहा था तो उस बड़ी शर्म महसूस हुई और उसके गाल एक दम गुलाबी हो उठे और वो सीधी खड़ी हो गई जिससे उसके और शादाब के बीच की दूरी और कम हो गई और उसे शादाब की गर्म सांसे अपने चेहरे पर महसूस हुई तो शहनाज़ का दिल जोर जोर से धड़कने लगा और पूरा शरीर एक एहसास से और ज्यादा कांपने लगा। शादाब ने अपनी अम्मी के खूबसूरत चेहरे को अपने इतने पास पाकर खुद पर से काबू खो दिया और एक हाथ आगे बढ़ा कर अपनी अम्मी के गाल पर रख दिया तो शहनाज़ की आंखे इस मस्ताने एहसास से अपने आप बंद हो गई। उसके चेहरे पर हल्की सी स्माइल अा गई और होंठ अपने आप उपर की तरफ आते हुए हल्के से खुल गए।

शादाब उसके गाल पर अपने हाथ फिराते हुए बोला:" अम्मी आपके गाल तो एक दम गर्म हैं लेकिन हाथ कांप रहे थे।

शहनाज़ की तो जैसे आवाज ही गुम हो गई थी। उसके जिस्म ने उसका साथ पूरी तरह से छोड़ दिया था। शादाब ने अपनी अम्मी के गालों को अपने हाथ से सहलाते हुए कहा:"

" अम्मी आपके गाल सचमुच बहुत खूबसूरत हैं, आप दुनिया की सबसे खुबसुरत मा हो।

नारी सुलभ स्वभाव के कारण अपने बेटे के मुंह से अपनी तारीफ सुनकर शहनाज़ अंदर ही अंदर खुश हुई और शादाब के हाथो की छुवन उससे बर्दाश्त नहीं हुई और उसके पैर कांपने लगे तो अपने अपने सिर को शादाब के कंधे पर टिका दिया। अपने बेटे के कंधे पर सिर टिकाते ही उसका दिल जोर जोर से धड़कने लगा। शादाब के हाथ अपने आप अपनी अम्मी के गाल पर से हट गए और उसकी कमर पर जा लगे और उसकी कमर को सहलाना शुरू कर दिया। शहनाज़ भी एक पल के लिए अपने होश खो बैठी और कसकर अपने बेटे से चिपक गई।

शादाब को इससे बहुत हौसला मिला और उसने अपनी अम्मी के कान में कहा:"

" अम्मी में बहुत तड़पा हूं आपकी मोहब्बत के लिए, अब कभी मुझे अपने आप से जुदा मत करना।

अपने बेटे की बात सुनकर शहनाज़ को उस पर बहुत प्यार आया और वो उसकी कमर को थपथपाते बोली:"

" मैं भी तेरे लिए बहुत तड़पी हूं मेरे लाल, बस अब सब ठीक हो जाएगा। अच्छा छोड़ मुझे अब, रात बहुत हो गई हैं, सोना चाहिए अब।

शादाब अपनी अम्मी को छोड़ना नहीं चाहता था लेकिन पकड़े रखने का कोई बहाना भी नहीं था इसलिए ना चाहते हुए भी उसने अपने हाथ हटा लिए और दोनो अलग अलग हो गए।

शहनाज़:" बेटा तुम कमरे में चलो, तब तक मै काम निपटा कर आती हूं।

शादाब:" नहीं अम्मी, मैं भी आपकी मदद करूंगा काम खत्म करने में, आप अकेली नहीं करेगी।

शहनाज़ अपने बेटे की बात सुनकर खुश हुई और मुस्कराते हुए बोली:"

" बेटा आज तुम थके हुए हो इसलिए आराम करो, वैसे ही एक डॉक्टर का बर्तन साफ करना अच्छा नहीं लगेगा।

शादाब:" अम्मी मैं अभी डाक्टर बना नहीं हूं, और एक बेटे का सबसे बड़ा फर्ज़ होता हैं अपने अम्मी का ध्यान रखना और मदद करना, आज मै आपकी बात मान जाता हूं लेकिन कल से सारा काम हम दोनों साथ में करेंगे।

अपने बेटे की बात सुनकर शहनाज़ बर्तन उठा कर किचेन में धोने के लिए के गई और शादाब कमरे में चला गया। शादाब पूरे दिन का थका हुआ था लेकिन नींद उसकी आंखो से कोसो दूर थी, उसे रह रह कर अपनी अम्मी का खुबसुरत चेहरा याद आ रहा था। अम्मी कैसे कांप रही थी आज खाने के टेबल पर, सच में उसकी अम्मी जितनी खूबसूरत हैं उससे कहीं ज्यादा नाजुक हैं बिल्कुल एक दम छुईमुई की तरफ।
अम्मी अभी भी एक दम फिट हैं पूरी तरह से, इतना पैसा और जमीन जायदाद होने के बाद भी वो घर का सारा काम खुद ही करती है शायद इसलिए।
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10-08-2020, 12:56 PM,
#6
RE: Maa Sex Kahani माँ का आशिक
उधर बर्तन धोती हुई शहनाज़ भी अपने बेटे के बारे में ही सोच रही थी। उसे बार बार अपने बेटे का खूबसूरत चेहरा याद आ रहा था, बिल्कुल मुझ पर ही गया हैं मेरा बेटा। शहनाज समझ नही पा रही थी कि वो ज्यादा खुबसुरत है या उसका बेटा। ये तो बिल्कुल उस शहजाद की तरह से दिखता है जिसके मैं सपने देखा करती थी। उफ्फ हाय अल्लाह माफ करना मुझे, मैं ये क्या सोचने लगी थी। लेकिन वो भी तो कितने प्यार से मेरी तरफ देख रहा था, और मेरी कैसे तारीफ कर रहा था, ऐसे तो आज तो किसी ने भी नहीं करी। शहनाज़ को तभी एयरपोर्ट पर उन मनचले की बात याद आ गई तो उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया। क्या मेरी गांड़ सच में इतनी खूबसूरत और उभरी हुई हैं जो किसी को भी आशिक बना सकती हैं, उफ्फ क्या कहा था उस पागल लड़के ने कि मेरी गांड़ को सिर्फ मेरा बेटा ही अच्छे से संभाल कर मसल सकता हैं। हाय ये ख्याल मन में आते ही शहनाज़ की धड़कने तेज हो गई और उसकी चूचियां उपर नीचे होने लगी, सारे जिस्म ने मीठा मीठा खुमार छा गया। जैसे तैसे करके उसने अपने बरतन धोए और उन्हें किचेन में ही रख कर जल्दी से अंदर कमरे की तरफ चल पड़ी।
उसने देखा की शादाब आराम से बेड पर लेता हुआ छत की तरफ देख रहा था।

शहनाज़:" बेटे नींद नहीं आ रही है क्या ? क्या सोच रहे हो ?

शादाब:" अम्मी इतने सालो के बाद घर आया हूं, आपने सब का कितना ख्याल रखा, दादा दादी आपको बहुत मानते हैं। बस ये ही सोच रहा था कि आप दिल की कितनी अच्छी हो!!

शहनाज़:" बेटा वो तो मेरे फ़र्ज़ हैं, खैर छोड़ तू ये बता तेरा मन लग जाता था क्या हम सबके बिना?

शादाब:" बिल्कुल भी नहीं अम्मी, आपकी सबसे ज्यादा याद आती थी, खैर अब सब ठीक हो जाएगा।

शहनाज़:" बेटा कल हमने एक छोटी सी पार्टी रखी हैं जिसमें गांव के लोग और सब रिश्तेदार भी आएंगे, तेरी बुआ रेशमा तो तुझे बहुत याद करती थी

शादाब:" अच्छा अम्मी, कल मैं सबसे मिलूंगा, और सबसे ढेर सारी बातें करूंगा।

शहनाज़:" अच्छा बेटा तुम अब सो जाओ, ये कमरा अब तुम्हारा होगा, मैं चलती हूं बेटा सुबह जल्दी उठना होगा!! सब्बा खैर मेरे बच्चे !!

शादाब:" ठीक हैं अम्मी, शब्बा खैर!!

शहनाज एक बार हसरत भारी निगाहों से अपने बेटे के खूबसूरत चेहरे के देखती है और फिर उसे अच्छी सी स्माइल देकर अपने कमरे की तरफ बढ़ गई।
अम्मी के जाते ही शादाब ने नाईट बल्ब जला दिया और पूरा कमरा उसकी हल्की रोशनी से गुलाबी हो गया। शादाब सोचते सोचते ही थोड़ी देर बाद सो गया क्योंकि वो पूरे दिन का थका हुआ था।

दूसरी तरफ शहनाज़ अपने कमरे में घुस गई और अपने भारी भरकम कपड़ों को उतार कर एक ढीली सी काले रंग की मैक्सी पहन ली और बेड पर लेट गई। उसकी आंखो के सामने फिर से दिन भर हुई घटनाएं घूमने लगी। शादाब किस तरह से उसके चूचियो को घूर रहा था, ये ख्याल मन में आते ही उसकी नजर मैक्सी के उपर से ही अपनी चूचियों पर पड़ गई जो कि एक दम उठी हुई साफ नजर आ रही थी और बीच में से उसकी चूचियों के बीच की गहरी रेखा भी नजर आ रही थी। बेड पर बिखरे हुए उसके काले लम्बे बाल उसकी सुंदरता में चार चांद लगा रहे थे।

शहनाज को एक बार से उन मनचलों की बात याद आ गई कि कितनी मस्त और उभरी हुई गांड़ हैं इसकी, इसकी गांड़ को थामने और ठीक सेमसलने के लिए तो कोई जवान तगड़ा सांड जैसा लड़का चाहिए, उफ्फ शादाब को देखते ही कह रहे थे कि यहीं उसकी गांड़ को अच्छे से रगड़ कर संभाल सकता है। शहनाज को अपने बेटे के बड़े बड़े हाथ याद आ गए तो उसका जिस्म आग की भट्टी की तरह सुलगने लगा। शहनाज की आंखे अपनी उपर नीचे होती चुचियों पर पड़ी तो ये सब देख कर शहनाज का गला सूखने लगा और आंखे लाल हो गई। उसकी धड़कन बहुत तेजी से चलने लगी जिससे चुचिया पूरी तरह से उभरने लगी। शहनाज़ की आंखे मस्ती से अपने आप बंद हो गई थी और उसका हाथ अपनी चूचियों पर पहुंच गया। जैसे ही चूचियों पर उसकी हाथ की उंगलियों का स्पर्श हुआ तो शहनाज़ के मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल गई।उसका जिस्म पूरी तरह से कांपने लगा और वो अपनी टांगो को एक दूसरे से रगड़न लगी। कमरे में फैली गुलाबी रंग की रोशनी में उसका किसी शोले की तरह भड़कता हुआ जिस्म कमरे में आग लगा रहा था। शहनाज़ ने हल्के से अपनी चूचियों को मैक्सी के उपर से ही दबाया तो इसके पूरे जिस्म में मस्ती भरी लहर दौड़ गई और उसके मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी।
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10-08-2020, 12:56 PM,
#7
RE: Maa Sex Kahani माँ का आशिक
आज शहनाज के जिस्म की दबी हुई आग अपने सगे बेटे को देख कर पूरी तरह से भड़क उठी और और उसे कोई होश नहीं था कि वो कहां हैं और क्या कर रही है। उसने अपनी टांगो को एक दूसरे से रगड़ते हुए एक हाथ को अपनी मैक्सी के अंदर घुसा कर अपनी चूची को दबा दिया तो मस्ती से उसका जिस्म लहरा उठा। शहनाज ने अपनी चूची के निप्पल को अपनी उंगलियों के बीच में पकड़ कर जोर से भींच दिया तो उसके मुंह से एक तेज मस्ती भरी आह निकल पड़ी। शादाब अभी पूरी तरह से गहरी नींद में नहीं था इसलिए अपनी अम्मी की सिसकी सुनकर उसकी आंख खुल गई और उसे अपनी अम्मी की बड़ी फिक्र हुई तो उसके कदम अपने आप शहनाज़ के कमरे की तरफ बढ़ गए।

जैसे ही वो गेट के बाहर पहुंच गया तो उसने दरवाजे को हल्का सा खोला तो उसकी आंखे फटी की फटी रह गईं। उसे सामने बेड पर अपनी सगी अम्मी मदहोश पड़ी नजर आईं जिसकी मस्ती से आंखे बंद थी और उसका जिस्म बेड पर उधर इधर लहरा रहा था। उसने सिर्फ एक काले रंग की मैक्सी पहनी हुई थी जिसमें से उसकी चूचियों का आकार पूरी तरह से साफ नजर आ रहा था। शहनाज ने अपनी चूची को दबाते हुए अपनी टांगो को थोड़ा सा खोल दिया जिससे उसकी गोरी चिकनी जांघें साफ नजर आने लगी। उसने अपनी मैक्सी को उतार दिया और एक हाथ को अपनी चूची पर से लाते हुए अपनी चूत की तरफ बढ़ान लगीं

लिया। जैसे ही उसके हाथ चूत पर पड़े तो जिस्म हवा में लहराने लगा और चूची मैक्सी को फाड़ कर बाहर निकलने पर आमादा हो गई। शहनाज ने अपनी गांड़ और कंधो को बेड पर रगड़ना शुरू कर दिया और अपनी रसीली मीठी जीभ निकाल कर अपनी हाथ को कोहनी के उपर से चाटने लगी। मस्ती से उसकी आंखे पूरी तरह से बंद थी और वो जीभ निकाल निकाल कर अपनी बांह को चाट रही थी

शादाब अपने अम्मी के इस सेक्सी कामुक अवतार को देख कर अपनी पलके तक झपकाना भूल गया और उसके लंड ने भी अपना सिर उठाना शुरू कर दिया और शादाब के हाथ उसके लंड को थामने लगे।

शहनाज ने पेंटी के उपर से ही अपनी चूत को सहला दिया और जोर जोर से अपनी इधर उधर फेंकने लगी। मजे से उसका मुंह खुल गया और उसने और मजे लेने के लालच में अपनी एक ऊंगली को पेंटी के अंदर घुसा दिया और अपनी चूत की फांकों को सहलाने लगी। उसका पूरा जिस्म कांप रहा था, मचल रहा था, उछल रहा था। शहनाज की चूत में चिंगारी सी उठ रही थी इसलिए उसने अपनी एक अंगुली को अच्छे से चूत रस से भिगोकर अपनी चूत के मुंह पर दबा दिया तो जैसे ही चूत का मुंह खुला तो शहनाज़ के जिस्म में एक दर्द भारी लहर दौड़ गई और उसके मुंह से मस्ती भरी आह निकल पड़ी। आज 18 साल के बाद उसकी चूत पर किसी चीज का स्पर्श हुआ था। चूत का पुरी तरह से टाइट होकर बंद हो गया था जिस कारण उंगली हल्की सी घुसते ही उसे दर्द का एहसास हुआ था और उंगली अपने आप बाहर निकल गई।

" उफ्फ मा, हाय मेरे खुदा, कितना दर्द होता है, पूरी कसी हुई हो गई है। आज नहीं !!

शादाब ने जैसे ही अपनी अम्मी की सिसकियां सुनी तो उसके लंड ने एक जोरदार अंगड़ाई ली और पूरी तरह से खड़ा हो गया। शादाब ने कब अपने पायजामा का नाड़ा खोल दिया उसे पता ही नही चला और उसका लंड उछल कर बाहर आ गया। शादाब ने आज तक मूठ नहीं मारी थी क्योंकि उसे पता नहीं था कि कैसे मारी जाती हैं। शादाब की नजर एक पल के लिए अपनी अम्मी से हटकर अपने लंड पर टिक गई। उसने लंड को ध्यान से देखा, हाथ में पकड़े होने के बाद भी आधे से ज्यादा बाहर था और आगे का मोटा सुपाड़ा लाल होकर दहक रहा था।

शहनाज अपनी चूत को उपर से ही उंगली से मसलने लगी और उसकी सिसकियां ऊंची होती चली गई। शादाब भी अपनी अम्मी की चूची और चूत को मैक्सी के उपर से ही देख कर अपना लंड मसल रहा था। तभी शहनाज का जिस्म पूरी तेजी से उछलने लगा और उसकी उंगली की स्पीड बढ़ गई। उसके जिस्म में हलचल मच गई और उसकी जीभ खुद ही अपने होंठो को चाटने लगी। तभी शहनाज़ के मुंह से एक जोरदार मस्ती भरी आह निकली और उसने पूरी ताकत से अपनी टांगो को भींच लिया जिससे उसकी उंगलियां उसकी चूत पर कसती चली गई और उसका जिस्म ठंडा पड़ता चला गया। शहनाज बेड पर पड़ी हुई इस महान आनंद को महसूस करती हुई गहरी गहरी सांस ले रही थी। जैसे ही उसकी सांसे दुरुस्त हुई तो उसने बाथरूम जाने की सोची और अपनी मैक्सी को ठीक किया और उठ गई।
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10-08-2020, 12:56 PM,
#8
RE: Maa Sex Kahani माँ का आशिक
शादाब अपनी अम्मी को उठते हुए देख कर डर गया और तेजी से भागता हुआ अपने कमरे में घुस गया। उसका लंड अभी भी पूरी तरह से खड़ा हुआ था।

शादाब ने जल्दी से एक चादर उठाई और अपने जिस्म पर डालकर लेट गया जबकि डर और जल्दबाजी की वजह से उसका पायजामा अभी तक खुला ही पड़ा हुआ था। शहनाज़ कमरे से बाहर निकली जिसकी आंखो में अभी भी खुमारी छाई हुई थी। लड़खड़ाते कदमों के साथ वो बाथरूम की तरफ बढ़ने लगी तभी उसकी नज़र अपने बेटे के खुले हुए दरवाजे से आती हुई रोशनी पर पड़ी तो हल्के गुलाबी रंग की रोशनी में उसे अपने बेटे का चांद सा चमकता हुआ चेहरा नजर आया। उसे अपने बेटे पर बहुत प्यार आया और उसके कदम अपने आप शादाब के कमरे की तरफ बढ़ गए। उसका दिल बहुत तेजी से धड़क रहा था और गला सूख गया था। जैसी ही वो कमरे के अंदर घुसी तो वो अपने बेटे के चेहरे के पास पहुंच गई और उसके चेहरे को हाथो से सहलाने लगी। उसका जिस्म पूरी तरह से कांप उठा और उसे लगा कि अगर उसका बेटा जाग गया तो उसे इस हालत में देख कर क्या सोचेगा , ये ख्याल मन में आते ही उसका जिस्म पसीने से नहा उठा और उसने आगे होकर अपने बेटे के माथे को चूमने लगी।

शादाब जाग रहा था और अपनी अम्मी को आते देखकर अपनी आंखे बंद करके लेट गया था। जैसे ही शहनाज़ के नाजुक रसीले होंठों का एहसास उसे अपने माथे पर हुआ तो उसकी हालात खराब होने लगी। शादाब की गर्म गर्म सांसे अब शहनाज़ की गर्दन पर पड़ रही थी जिससे फिर से उसका जिस्म सुलगने लगा। उसने अपने बेटे के एक हाथ को पकड़ लिया और उस पर हाथ फेरने लगी। उफ्फ कितना बड़ी और चौड़ी हथेली थी सचमुच उसके बेटी की। शहनाज़ की गांड़ अपने आप थिरक उठी मानो अपने बेट के हाथ में जाने के लिए तड़प रही हो। शहनाज़ को तभी लगा कि वो गलत कर रही है उसे अपने सगे बेटे के साथ ऐसा नहीं करना चाहिए। अगर उसका बेटा जाग गया तो वो उसे मुंह दिखाने लायक नहीं रहेगी, तभी उसके जिस्म में दूसरा ख्याल आया कि बेटा हैं तो क्या हुआ, बिल्कुल मेरे सपनो के शहजादे जैसा हैं। मैंने तो अपने महबूब के रूप में ऐसे ही मर्द की कल्पना करी थी।

उसके अंदर विचारो की जंग चलती रही और अंत में उसके दिमाग की जीत हुई और उसने अपने बेटे के कमरे से बाहर जाने का फैसला किया। जैसे ही वो पलटी उसकी नजर शादाब की चादर में बने हुए उभार पर पड़ी तो उसकी सांसे जैसे रुक सी गई और आंखो हैरानी से फैलती चली गई। चादर उसके जिस्म से कम से कम आठ इंच से ज्यादा उपर उठी हुई थी जिसे देखकर शहनाज़ अपनी पलके तक झपकाना भूल गई। उसने हालाकि आज तक लंड नहीं देखा था क्योंकि अपने पति का लंड भी उसने बस बार ही उसके जिद करने पर हाथ में लिया था लेकिन वो तो उसके बेटे के सामने आधा भी नहीं लगा था। लंड को महसूस करते ही उसके बढ़े हुए कदम जैसे जाम से हो गए और उसकी चूचियां फिर से तनकर खड़ी होते हुए उपर नीचे गिरने लगीं।

उसने एक बार अपने बेटे की तरफ देखा तो शादाब अपनी आंखे बंद किए हुए लेटा हुआ था जिससे शहनाज़ के नाजुक होंठो पर एक कातिल मुस्कान अा गई और उसके कदम शादाब के पैरों की तरफ बढ़ चले।

चार कदम का फासला तय करने में शहनाज को बहुत समय लगा क्योंकि उसकी सारी शर्म लिहाज उसे रोक रही थी। आखिरकार वो अपने बेटे की टांगो के बीच पहुंच गई। शादाब का जिस्म पूरी तरह से मचल रहा था। शहनाज़ ने मन बना लिया था कि आज वो कम से कम एक बार जरूर अपने बेटे के लंड को हाथ से छुवेगी। उस बेचारी को क्या मालूम था कि अंदर उसके बेटे का लंड पुरी तरह से नंगा थे। उसने धड़कते दिल के साथ उसकी चादर को पकड़ लिया और जैसे ही चादर हटाई तो उसकी आंखो के सामने शादाब का लंड उछल कर बाहर आ गया जिसे देखते ही उसकी आंखे शर्म से बंद हो गई और उसके मुंह से एक आह निकल पड़ी

" हाय अल्लाह, ये क्या आफत हैं इतना लंबा मोटा !!

शहनाज़ ने आज पहली बार लंड देखा और वो भी अपने बेटे का ये सोच कर उसकी चूत गीली होने लगी और चूचियों के निप्पल अकड़ से गए। शादाब ने धीरे से अपनी अम्मी के चेहरे को देखा जो कि डर के मारे पसीने से भीग कर कांप रहा था और उसकी जीभ बार बार उसके सूखे होंठो पर घूम रही थी। शहनाज़ को लंड की पहली झलक दीवाना बना गई और उसके मन में फिर से लंड देखने की तमन्ना जाग उठी लेकिन शर्म के मारे आंखे नहीं खुल पा रही थी। आखिर कार उसने अपनी पूरी हिम्मत जुटा कर अपनी आंखे खोल दी और उसकी आंखे फिर से लंड पर टिक गई। शहनाज़ सब कुछ भूल कर एकटक लंड को देखने लगी तो उसे एहसास हुआ कि लंड लंबा होने के साथ साथ बहुत ज्यादा मोटा भी हैं। उसने एक बार अपने हाथ की कलाई की तरफ देखा और फिर से लंड को निहारा तो लंड सच में उसकी कलाई से भी बहुत ज्यादा मोटा था। लंड का टेनिस बॉल के आकार का सुपाड़ा लाल सुर्ख होकर दहक रहा था मानो किसी ने उसे पूरा गुस्सा दिलाया हुआ था। शहनाज़ उस लंड को कम से कम एक बार छूने का लालच अपने मन से नहीं निकाल पाई उसके हाथ अपने हाथ उसके बेटे के लंड की तरफ बढ़ गए। जैसे ही उसके हाथ लंड के सुपाड़े से टच हुए तो उसकी चूत ने अपना रस छोड़ दिया और वो चीखते हुए एक बार फिर से झड़ गई और उसने जोर से अपने बेटे के लंड के सुपाड़े को कसकर दबा दिया लेकिन उसे हैरानी हुई कि लंड का सुपाड़ा बिल्कुल भी नहीं दबा और उसने लंड का घमंड तोडने के लिए पूरी ताकत झोंक कर सुपाड़ा दबा दिया तो शादाब के होंठो से दर्द भरी आह निकल पड़ी तो शहनाज़ की सारी वासना उतर गई और वो डर के मारे तेजी से अपने कमरे की तरफ दौड़ पड़ी।

शादाब की आंखे खुल गई और उसने अपनी अम्मी की उछलती हुई गांड़ देखी तो अपना दर्द भूल कर गांड़ को देखने लगा। शहनाज़ अपने कमरे में घुस गई और अपनी सांसे दुरुस्त करने लगी। उसका दिल किसी बुलेट ट्रेन की गति से दौड़ रहा था और वो अपने आप पर यकीन नहीं कर पा रही थी कि उसने अपने बेटे का लंड ना सिर्फ देखा बल्कि हाथ में भर कर दबा भी दिया था। डर के मारे उसकी हालत खराब थी और वो आंखे बंद करके अपने किए पर पछतावा कर रही थी और उसने फैसला किया कि वो अब अपने बेटे से दूरी बनाकर रखेगी।इन्हीं ख्यालों के साथ कब उसे नींद आ गई पता नहीं चला और शादाब भी अपने खड़े हुए लंड को हाथ में लिए हुए ही सो गया।

अगले दिन सुबह मस्जिद में अजान की आवाज सुनकर शहनाज़ की नींद टूट गई और तेजी से उठ कर नहाने के लिए बाथरूम में घुस गई। जल्दी ही ठीक से गुस्ल किया और नमाज पढ़ने लगी। नमाज़ पढ़ने के बाद उसने ढेर सारी दुवाएं मांगी और अपने बेटे की खुशी मांग कर चाय बनाने के लिए किचेन में घुस गई क्योंकि उसके सास ससुर को सुबह नमाज़ के बाद चाय पीने की आदत थी। चाय बनाते हुए उसकी आंखो के आगे रात हुई घटनाए एक के बाद घटनाए किसी फिल्म की तरह चलने लगी । रात उसने अपने जिस्म से पूरी तरह से काबू खो दिया था ये सोचकर वो शर्म के मारे दोहरी हो गई। किस तरह उसने खुद ही अपनी मैक्सी उतार फैंकी थी और ऐसा पहली बार हुआ था कि उसने खुद अपनी चूत सहलाई थी। ये सब सोच सोच कर उसके गाल गुलाबी हो उठे और जैसे ही उसे अपने बेटे का लंड याद आया तो उसकी सांसे तेजी से चलने लगी और डर के मारे उसका गला सूख गया। कितना गर्म था उसका लंड और मोटा तो किसी घोड़े के जैसे था, सुपाड़ा आगे से कितना ज्यादा मोटा था मानो सूज कर इतना मोटा हुआ हो। लंड की याद आते ही उसे याद आया कि उसने कितनी बेदर्दी से उसके लंड को मसल दिया, उफ्फ उसका बेटा कैसे दर्द से कराह उठा था। मेरी किस्मत भी अजीब हैं कि लंड भी सबसे पहले देखा तो अपने सगे बेटा का। उसे अपने बेटे की बड़ी फिक्र हुई और उसके कदम एक बार फिर से शादाब के कमरे की तरफ बढ़ गए। खुले गेट से उसने देखा कि उसका बेटा आराम से सोया हुआ था लेकिन लंड अभी तक खड़ा हुआ था शायद पेशाब के दबाव के कारण अकड़ गया था। तभी उसने देखा कि नींद में ही उसका बेटा मुस्कुरा उठा तो उसे खुशी हुई कि उसका बेटा ठीक है। उसके दिल को बहुत सुकून मिला और वो वापिस किचन की तरफ अाई तो देखा कि सारी चाय उबल कर निकल गई थी। उसे दुख हुआ क्योंकि आज पहली बार उसकी ज़िंदगी में ऐसा हुआ था कि चाय बाहर निकली हुई। खैर उसने दुखी मन से दोबारा चाई बनाई और ट्रे में लेकर नीचे पहुंच गई।
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10-08-2020, 12:56 PM,
#9
RE: Maa Sex Kahani माँ का आशिक
उसने अपने सास ससुर को सलाम किया और चाय का कप दिया। दोनो खुश हो गए और उसे ढेर सारी दुआ दी और ससुर बोले:"
" बेटी आज काफी सारी मेहमान आएंगे, मैंने हलवाई को बोलकर सब इंतजाम करा दिया है , बस शादाब को अच्छे से तैयार करना ताकि मेरे पोता सबसे अलग दिखे !!

शहनाज़ :" जी अब्बू, अभी तो सो रहे हैं आपके नवाबजादे !!

सास;" अरे बेटा वो थका हुआ होगा और बहुत सालों कर बाद घर लौटा हैं तो सुकून की नींद सो रहा होगा।

ससुर:" हां बेटी, अपने घर में अलग ही सुकून मिलता हैं, उठ जाएगा थोड़ी देर बाद अपने आप ही। तुम एक काम करो कि नीचे कमरे में मेरी एक खानदानी पुरानी जैकेट रखी है जिसे मैं आज पहनना चाहता हूं। तुम उसे निकाल देना बेटी!!

शहनाज़:" ठीक हैं, मैं निकाल देती हूं अभी। वो आप पर बहुत ज्यादा सुंदर लगती हैं।

शहनाज़ अंदर कमरे में घुस गई और लाइट का स्विच ऑन किया तो देखा कि कमरे में काफी धूल जमा हो गई थी क्योंकि काफी दिन से उसकी सफाई नहीं हुई थी। कपड़ों का बॉक्स उपर रखा हुआ था और जैसे ही उसने बॉक्स की नीचे उतारना चाहा तो बॉक्स के साथ साथ उसके उपर ढेर सारी धूल अा गिरी। उसने अपने चेहरे को दुपट्टे से साफ किया और बॉक्स का ताला खोलने लगी। ताला खोलकर उसने देखा कि जैकेट पूरी तरह से साफ थी, कहीं कोई दाग धब्बा नहीं बस कुछ सलवटे पड़ गई थी जो कि प्रेस करने का बाद आराम से निकल सकती थी।

वो अपने सास के कमरे में घुस गई और उन्हें जैकेट दिखाई तो ससुर बड़ा खुश हुआ और जैसे ही उसके उपर पड़ी हुई धूल देखी तो पूछा:"

" अरे बेटी तेरे उपर तो पुरी तरह से धूल जम गई है, कितना परेशान किया मैंने तुझे इस जैकेट के चक्कर में ?

शहनाज़:" कोई बात हैं अब्बू, मैं फिर से नहा लूंगी लेकिन आपकी खुशी मेरे लिए अहम हैं।

सास:" अल्लाह तेरे जैसी बहू सबको दे, तू तो हमारे लिए बेटी से भी बढ़कर हैं। आप जल्दी से जाकर नहा ले कहीं कोई दिक्कत ना हो जाए धूल की वजह से।

अपनी सास की बात सुनकर शहनाज़ उपर की तरफ चल पड़ी और अपने कपड़े लेकर नहाने के लिए बाथरूम में घुस गई। शहनाज़ ने अपना सूट सलवार उतार दिया और अब सिर्फ ब्रा पेंटी में अा गई और उसका दूध सा गोरा जिस्म पुरी तरह से चमक उठा। उसके काले घने लहराते हुए बाल, उसका परियो जैसा गोल सुंदर मुखड़ा, गोल मटोल गाल हल्की लाला रंग की कुदरती रंगत लिए और उसके लाल सुर्ख होंठ जो एक दम पतले और रसीले लग रहे थे। उसकी खूबसूरत लम्बी सुराहीदार गर्दन, उसके गोरे चिट्टे कंधे। शहनाज़ की नजर एक बार फिर से अपनी काले रंग की ब्रा के कैद चूचियों पर पड़ गई तो उसकी आंख लाल होने लगी। उसकी आधे से ज्यादा चूची बाहर झांक रही थी और पूरी तरह से तन कर खड़ी हुई थी, निप्पल इतने सख्त हो चुके थे कि ब्रा के ऊपर से ही उनका आकार साफ नजर आ रहा था। हिम्मत करके उसने अपनी आंखे बंद कर ली और अपने हाथ कमर पर ले जाकर ब्रा का हुक खोल दिया तो उसकी चूचियां ऐसे उछल कर बाहर आई मानो अंदर उनका दम घुट रहा था। उसकी बड़ी बड़ी गोल गोल चूचियां, एक दम कठोर, उठी हुई तनी हुए, निप्पल हल्के गहरे रंग की रंगत लिए हुए किसी किशमिश के दाने की तरफ अपना मुंह उठाए हुए। अभी वो मात्र 36 साल की थी और खुद का बहुत ख्याल रखती थी जिस कारण उसकी चूचियां हल्की सी भी झुकी हुई नहीं थी बल्कि उसकी चूचियों की कठोरता देखकर तो आज कल की लड़कियां भी जल जाए। उसका दूध सा गोरा पेट एक दम अंदर की तरफ घुसा हुआ, चर्बी का कोई नामो निशान तक नहीं और उसकी गहरी नाभि उसके पेट की सुंदरता में चार चांद लगा रही थी। उसने बंद आंखो के साथ ही अपनी पेंटी को भी अपनी टांगो को फैला कर बाहर निकल दिया और उसके मुंह से अपने आप ही एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी।
उसकी एक दम गोरी, केले के तने के जैसी चिकनी जांघें, पतली नाजुक कमर और उसके ठीक नीचे उसकी उभरी हुई भारी भरकम गांड़ अपना आकार दिखाते हुए बिल्कुल नंगी थीं। उसकी गांड़ बाहर की तरफ निकली हुई और तरबूज के आकार की मोटी मोटी पटे। जांघो के बीच उगे हुए बाल उसकी चूत को ढके हुए थे। उसने अपने टांगो को थोड़ा सा खोलते हुए बालो को हल्का का हाथ से हटाया तो उसकी चूत चमक उठी। एक दम पतली सी, नाजुक सी गुलाबी रंग की झिर्री हल्की सी बाहर की तरफ निकली हुई, चूत एक दम अंदर की तरफ सिकुड़ी हुई जिसका दरवाजा पिछले 18 साल में पूरी तरह से बंद हो गया था जिस कारण रात उसे उंगली हल्की सी अंदर घुसाते हुए दर्द हुआ था। चूत के गुलाबी रंग के होंठ एक दूसरे से पूरी तरह से चिपके हुए उसकी सुंदरता में चार चांद लगा रहे थे।

शहनाज़ ने एक बार हाथ से अपनी चूत को सहलाया तो उसका जिस्म मस्ती से भर उठा और वो फिर से कांपने लगी। तभी उसे मनचलों की बात याद आ गई कि कितनी बड़ी उभरी हुई गांड़ हैं तो उसके हाथ अपने आप उसकी गांड़ की तरफ बढ़ गए। उसने मस्ती से बंद हुई अपनी आंखो के साथ एक हाथ से अपनी गांड़ को छुआ तो उसके जिस्म ने एक झटका सा खाया और उसकी सिसकियां निकलने लगीं। आवेश में आकर वो अपनी गांड़ को हाथो में भरने लगी लेकिन उसके छोटे हाथो में उसकी उभरी हुई तगड़ी गांड़ कहां समाने वाली थी, उसे आज एहसास हो गया कि उसकी गांड़ सचमुच बहुत बड़ी और उभरी हुई है जिसे हाथों में भर कर मसलना हर किसी के बस की बात नहीं। उसे अपने बेटे के बड़े बड़े हाथ याद आए तो उसकी चूचियां खुशी के मारे हिलने लगी और चूत ने सारे बंधन तोड़ते हुए एक बार फिर से अपना रस बहा दिया और वहीं बाथरूम में सिसकते हुए झड़ गई। उसके पैर कमजोर पड़ते गए और वो फर्श पर ही टिक गई। उफ्फ ये कैसा मादक एहसास था, उसे तो इतना मजा कभी नहीं आया था इससे पहले। आज पहली बार उसने अपनी गांड़ को खुद अपने हाथ से सहलाया था तो सचुमुच कितना मजा आया था, उफ्फ जब उसका बेटा पूरी तरह से उसकी गांड़ को अपने हाथो में पूरी भर कर मसलेगा तो कितना मजा आयेगा ये सोच कर वो मुस्कुरा उठी।

" उफ्फ ये मेरा बेटा भी ना, पता नहीं इतना खूबसूरत क्यों हैं, मैं एक मा होकर खुद को नहीं रोक पाती हू। वो बिल्कुल मेरे सपनो के शहजादे जैसा हैं !!
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10-08-2020, 12:57 PM,
#10
RE: Maa Sex Kahani माँ का आशिक
खैर आज अपनी चूत को साफ करने का फैसला लिया और बाथरूम में रखी ट्यूब उठा कर क्रीम को अपनी झांटों पर लगा दिया। थोड़ी देर के बाद उसने एक जग में पानी लिया और अपने सिर पर डालने लगी। पानी की बूंदे उसके जिस्म पर बहुत खूबसूरत लग रही थीं। वो खूब अच्छे से रगड़ रगड़ कर नहाई और पानी के साथ ही उसकी चूत के बाल बहते चले गए। उसकी चूत एक दम खिलकर सामने अा गई और चमक उठी। एक दम बिल्कुल छोटी सी,प्यारी की गुड़िया की तरह।

वो उठी और टॉवेल से अपने जिस्म को साफ किया और अपनी पेंटी पहनने लगीं। उसके बाद उसने अपनी ब्रा को अपनी चूचियो पर टिका कर पीछे की तरफ हाथ ले गई और ब्रा का हुक लगाने लगी। बड़ी मुश्किल से उसने अपनी ब्रा का हुक लगाते हुए अपनी चूचियों को जबरदस्ती कैद किया और सूट सलवार पहन कर बाहर आ गई।

शहनाज़ के बालो से पानी की टपकती हुई बूंदे और पीठ पर खुले हुए काले लहराते हुए बाल उसे दुनिया की सबसे कामुक औरत बना रहे थे। वो एकदम किसी ताजे गुलाब की तरह खिली हुई लग रही थी जिसकी खुसबू पूरे घर में फैल रही थी।

शादाब उठ गया था और बाहर गैलरी में ही कसरत कर रहा था, पसीने के कारण उसका जिस्म पूरी तरह से भीगा हुआ और सिर्फ अंडर वियर में था, उसकी मोटी तगड़ी भुजाएं, चौड़े कंधे, और एक दम चौड़ी छाती बिल्कुल काले घने बालों से घिरी हुई उसके कसरत करने के कारण उपर नीचे हो रही थी। शहनाज़ जैसे ही बाथरूम से निकली उसकी नजर अपने बेटे पर पड़ी तो एक बार फिर से उसकी आंखे फैलती चली गई, सबसे ज्यादा आकर्षित किया उसके बेटे की चौड़ी छाती पर घने बालों ने जो उसकी कमजोरी थे लेकिन उसके पति की छाती एक दम सपाट थी। उफ्फ ये तो बिल्कुल मेरे सपने के शहजादे जैसा ही है, सब कुछ मेरी पसंद का, वहीं चौड़ी छाती, मजबूत भुजाएं, सुंदर ललाट, मुझे ऐसा ही तो पति चाहिए था। शहनाज़ नजरे गड़ाए अपने बेटे को देख रही थी और आंहे भर रही थी। तभी शादाब को अपनी अम्मी की मौजूदगी का एहसास हुआ तो उसकी निगाह अपनी अम्मी पर टिक गई तो उसे अम्मी की नजरो का एहसास हुआ तो शहनाज एकदम से सकपका सी गई।

शादाब की आंखे अपनी अम्मी के सुंदर मुखड़े पर एक बार फिर से ठहर सी गई और वो उसे बिना पलके झपकाए देखता रहा। जैसे ही शहनाज़ को अपने बेटे की आंखो का एहसास हुआ तो दोनो की आंखे एक पल के लिए टकराई और शहनाज की आंखे हया के मारे झुक गई। वो आंखे नीचे किए ही धीरे धीरे आगे बढ़ती गई और अपने कमरे में घुस गई। शहनाज़ का दिल अब तक बुरी तरह से धड़क रहा था और आंखे फिर से लाल सुर्ख हो गई थी। उसे समझ नहीं अा रहा था कुछ भी, पता नहीं मैं क्यों अपने बेटे की और खींची चली जा रही हूं। उसकी वो प्यारी आंखे, खूबसूरत चेहरा, चौड़े कंधे और एकदम काले घने बालों से घिरी हुई चौड़ी छाती लगता हैं जैसे मेरे सपनो का शहजादा सपनो के निकल कर जमीन पर अा गया है।

उसने अपने आपको संयत किया और प्रेस लगा दी ताकि अपने ससुर की जैकेट पर प्रेस कर सके। वो अपने काम में लग गई और थोड़ी देर बाद ही सारे कपड़े प्रेस हो चुके थे। शादाब भी कसरत करने के बाद नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया और नहाने लगा, जैसे ही उसने अपने लंड को साबुन लगाया तो लंड के सुपाड़े में एक हल्की सी दर्द भरी टीस उठी, उसने अपने लंड को धीरे धीरे पानी से साफ किया और नहाकर बाथरूम से बाहर निकल गया। शहनाज़ ने सारे काम खतम करने के बाद अपने बेटे के लिए कपडे निकाल दिए और उसके कमरे में रख अाई ताकि वो तैयार हो सके। शादाब नहाकर अपने कमरे में अा चुका था और अपने कपड़े पहनने लगा। थोड़ी देर बाद वो तैयार हो गया। शादाब ने एक सफेद शर्ट और काले रंग का कोट पेंट पहना हुआ था। उसने अपने जिस्म पर एक परफ्यूम लगाया जिसकी महक उसके पूरे जिस्म में फैल रही थी।

दूसरी तरफ शहनाज भी तैयार होने लगी और उसने एक बहुत ही सुन्दर सफेद रंग की ड्रेस पहन ली जिसमें वो एक दम परी की तरफ खूबसूरत लग रही थी। आंखो में गहरा काला काजल और होंठो पर लाल रंग की लिपस्टिक उसे और सुंदर बना रहे थे। उसने खुद को एक बार शीशे में देखा और अपने आपको देख कर वो शर्मा गई जिससे उसके गाल एक दम गुलाबी हो उठे।

वो जानती थी कि उसका बेटा रात से भूखा हैं इसलिए वो एक गर्म दूध का ग्लास और कुछ ड्राई फ्रूट लेकर अपने बेटे के रूम की तरफ चल पड़ी। शादाब एक दम किसी फिल्मी हीरो की तरह लग रहा था जिसे देखकर शहनाज का दिल फिर से धड़क उठा। दूसरी तरफ शादाब को लगा जैसे उसकी अम्मी नहीं बल्कि आसमान से उतर कोई परी सामने अा गई है। वो पलके गड़ाए अपनी अम्मी को देखता रहा तो शहनाज की हालत खराब होने लगीं और उसने अपने बेटे से पूछा:"
" क्या हुआ बेटा? ऐसे क्यों देख रहे हो अपनी अम्मी को ?

शादाब जैसे किसी दूसरी दुनिया से बाहर आया और बोला:"

" देख रहा हूं कि मेरी अम्मी कितनी खूबसूरत हैं, अल्लाह ने आपको बनाने में कितनी मेहनत की हैं।

शहनाज अपने बेटे के मुंह से अपनी इतनी तारीफ सुनकर शर्मा गई और उसके गाल फिर से गुलाबी होने लगे और बोली:"

" चुप कर शैतान, कुछ भी बोलता हैं, इतनी भी खूबसूरत नहीं हूं मैं।

शादाब अपनी अम्मी के थोड़ा करीब अा गया तो शहनाज के जिस्म में हलचल सी हो गई और उसके हाथ में पकड़ी हुई ट्रे हिलने लगी तो उसने ट्रे को टेबल पर रख दिया और सीधी खड़ी हो गई। अब तक शादाब उसके पास अा चुका था और उसका एक हाथ पकड़कर बोला:

"अम्मी आप सच में बहुत खूबसूरत हैं, मैंने अपनी ज़िंदगी में आज तक आपसे हसीन कोई नहीं देखी।

शादाब ने जैसे ही उसका हाथ पकड़ा उसके जिस्म ने उसका साथ छोड़ दिया और उसे लगने लगा कि वो शर्म के मारे गिर ना जाए इसलिए उसने जोर से अपने बेटे का हाथ थाम लिया और मुंह नीचे किए हुए बोली:

" क्यों मजाक करता हैं बेटा, अब इतनी भी खूबसूरत नहीं हूं मैं, क्यों अपनी मा की झूठी तारीफ करता हैं।

शादाब ने अपना दूसरा हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मा के चेहरे को उसकी ठोड़ी से पकड़ कर उपर की तरफ उठाया तो शहनाज़ ने एक बार हिम्मत करके अपने बेटे की आंखो में झांका और उसकी नजरे फिर से शर्म से झुक गई और उसके होंठो पर हल्की सी मुस्कान थिरक उठी। शादाब ने आगे बढ़कर अपनी अम्मी का एक गाल चूम लिया तो शहनाज का पूरा जिस्म लरज उठा और उसने हाथ में पकड़े हुए अपने बेटे के हाथ को हल्का सा जोर से दबा दिया। शादाब ने जोश में आकर फिर से एक बार अपनी अम्मी का गाल चूम लिया तो एक कामुक एहसास से शहनाज की आंखे मस्ती से खुल गई।
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