Mera Nikah Meri Kajin Ke Saath
02-02-2022, 01:06 PM,
#21
RE: Mera Nikah Meri Kajin Ke Saath
मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ

भाग 17



ज़ीनत आपा के साथ स्नान





फिर ज़ीनत आपा बोली मैं आती हूँ दो मिनट में और मैं अपनी चारो बीबियो की ख़ूबसूरती के बारे में सोच रहा था .

आपा आयी और बोली सलमान कल खेत पर काफी काम था और आप थक गए थे तो चलिए पहले थोड़ा फ्रेश हो जाईये। आपके स्नान के लिए आपका स्नानघर आपका इन्तजार कर रहा है । उसने स्नानागार की ओर इशारा किया। वाशरूम में एक छोटा स्टूल रखा हुआ था और उसके दाईं ओर गर्म पानी का एक बड़ा कुंड था। स्नानघर से पहले एक छोटा कपड़े बदलने का कमरा भी है . कमरे में प्रवेश करने पर ज़ीनत ने मेरी बाईं ओर इशारा किया और कहा, "सलमान यहाँ कपड़े उतारो. " दीवार पर मेरे कपड़े टांगने के लिए कई हुक थे और वहां बोथ टॉवल लटका हुआ था । और ज़ीनत बाथ रूम में चली गयी मैंने जल्दी से कपड़े उतारे और अपने कपड़े टांग दिए और फिर बाथ टॉवल अपने चारों ओर लपेट लिया। जैसे ही मैंने बाथ टॉवल को बंद किया, ज़ीनत एक धातु की बाल्टी लेकर वापस आ गई। लेकिन सबसे खास बात यह थी कि उसने अपना लाल रंग का नाईटगाउन अब निकाल दिया था । उसकी जगह एक बड़े सफेद तौलिये ने ले ली थी जिसे ज़ीनत ने अपने बायें हाथ के नीचे बांध रखा था। और सोचने के लिए, मैंने सोचा था कि मेरा लंड तो पहले से ही कड़ा था कठोर था! अब मेरा लंड फुल ऑन, फुल लेंथ पर पूरा उग्र था !






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मैंने उसके पीछे बाथरूम में प्रवेश किया जैसे ही मैंने फर्श पर कदम रखा वह फिर बोली, "पहले हम धोते हैं, फिर स्नान करते हैं।" "हम"? उसका क्या मतलब था हम? ज़ीनत स्टूल के पास गई और बाल्टी नीचे रख दी। उसने मुझे अपने पास आने और स्टूल पर बैठने का इशारा किया।

मैंने अपने होश में इससे पूर्व पहले कभी किसी महिला के साथ स्नान नहीं किया था, और इसी कारण से विशेष रूप से मे लंड खड़ा हो गया था ।जैसे ही मैं स्टूल के पास रुका, मेरे प्रश्न का उत्तर मिल गया। ज़ीनत ने तुरंत अपना तौलिया खींच दिया और उसे स्टूल के ठीक सामने दीवार से जुड़ी एक छोटी कपड़े की छड़ पर लपेट दिया। जब वह वापस मुड़ी और अपने पूरे खूबसूरत नग्न शबाब में मेरे सामने खड़ी हो गयी और उसके होठों से एक मुस्कान और एक हल्की सी हंसी छूट गई। मेरा मुंह खुला हुआ था और लटक रहा था और मेरा इरेक्शन बाथ टावल के दो फड़कों से बाहर झाँक रहा था ।

फिर उसने मेरा टॉवल खोलना शुरू कर दिया।

मैं बस हेडलाइट्स के बीच में एक हिरण की तरह खड़ा था क्योंकि उसने मेरे टावल को खींच लिया और टावल को उसी कपड़े की छड़ पर लटका दिया, मैं पूरा नग्न उसके सामने था और मेरा 8 इंच का लंड उसके सामने गर्व से खड़ा हो गया।

"बैठिये ।" उसने स्टूल की ओर इशारा करते हुए और बाल्टी को पकड़ते हुए कहा।

"आपा मुझे माफ़ कीजियेगा ," मैंने सीट लेते हुए उससे कहा। "मुझे इसकी आदत नहीं है।" और आपको देख कर मुझे जो होता है वो तो मैंने आपको बताया ही है इसी कारण देखो मेरा लंड बिलकुल कड़ा हो गया है .

"यह सामान्य है. बस तुम इसके मजे लो ," उसने बाल्टी से साबुन के स्पंज को खींचते हुए उत्तर दिया और मेरे कंधों को सहलाना शुरू कर दिया, "मुझे भी इसकी आदत नहीं है।"





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हालाँकि मैं आपा की चुदाई कई बार कर चूका था लेकिन कभी भी मैंने इससे पहले इस तरह मैं नहाया नहीं था जहाँ एक लड़की या स्त्री या महिला मुझे पूरा नंगा करके और खुद भी पूरा नंगी हो होकर मुझे नहलाय.

मैं आपा से नज़रें नहीं हटा पा रहा था। आपा के स्तन ठोस और दृढ़ थे, जिनके बीच में गहरे गुलाबी रंग के छोटे-छोटे गोले और कठोर हो चुके निप्पल थे। उसकी त्वचा एक चिकनी और गोरे रंग की थी, जो उनके के कोमल कर्व्स और टोंड टांगों से बहुत आकर्षक लग रही थी। लंबी नाजुक उंगलियों और मैनीक्योर किए हुए नाखूनों के साथ उसकी बाहें भी बहुत सुंदर लग रही थी । और उसकी योनि क्षेत्र पर हल्के बाल उग आये थे जिन्हे उन्हों साफ़ कर दिया था और योनि के थोड़ा ऊपर उसके सिर के बालो के रंग का एक छोटा त्रिकोण पैच बना लिया था । मेरी राय में, वह महिला सौंदर्य की सबसे उत्तम आकृति है। उसने पिछले दिनों का उपयोग अपनी काया को और सुंदर बनाने के लिए किया था .




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उसने मुझे स्पंज करना शुरू कर दिया पानी बहुत हल्का कुनकुना गर्म था . और मैं केवल बैठ और देख सकता था क्योंकि वह मेरे चारों ओर शान से घूम रही थी, मेरे सिर के ऊपर से मेरे पैरों के नीचे तक हर आखिरी इंच स्पंज से धो रही थी। कभी-कभी हमारी नजरें मिलतीं और वह मुझ पर मुस्कुराती, खासकर जब उसने मेरे लंड को धोने की प्रक्रिया शुरू की। ज़ीनत ने मेरे सामने घुटने टेक दिए और खुद को मेरे पैरों के बीच में कर लिया। मेरे खड़े लंड को अपने बाएं हाथ में धीरे से पकड़े हुए उसने धीरे-धीरे मेरे लंड को ऊपर से नीचे और फिर नीचे से ऊपर तक साबुन के स्पंज से थपथपाया। जब साबुन की झाग के कारण जब वह दिखाई नहीं दे रहा था, तो उसने स्पंज को वापस बाल्टी में रख दिया और दोनों हाथों से मुझे नीचे से ऊपर तक सहलाया। भावना अवर्णनीय थी! उसके कोमल हाथ मेरे लंड के ऊपर और नीचे फिसल रहे थे, साबुन से पर्याप्त रूप से चिकनाई थी और मैं लगभग स्खलित होने वाला था । और उसे पूरा यकीन था कि वह एक भी जगह नहीं चूकेगी। ऊपर से नीचे तक धीमे लेकिन दृढ़ स्ट्रोक के साथ, वह जल्दी से मुझे बिना किसी वापसी के बिंदु पर ला रही थी। जब मैंने जोर लगाना शुरू किया तो वह रुक गई और मेरे लेंस से उसने अपने हाथ को हटा लिया ।


ज़ीनत ने अपने चेहरे पर अजीब भाव से मेरी ओर देखा और जैसी उसकी आँखे बोली आपको यहाँ इस तरह स्खलित नहीं होना है और कहा, "अब हम धोते हैं।"



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ज़ीनत मेरे सिर के ऊपर से बाल्टी उठाकर खड़ी हो गई। उसने मेरी तरफ कदम बढ़ाया, मैं उसकी गंध को बहुत स्पष्ट रूप से सूंघ सकता था, पहले उसने मेरे ऊपरबाल्टी का बचा हुआ पानी डाला गया, सभी अंगो को एक बार फिर झाग से धो दिया.

यह थोड़ा कम अच्छा था, लेकिन मुझे फिर भी अच्छा लगा क्योंकि इसमें जीनत आप के कोमल हाथो का स्पर्श शामिल था । जैसे ही मैंने अपनी आँखों से पानी पोंछा ज़ीनत ने लगभग तुरंत एक और बाल्टी पानी लिया । मैंने उसे फिर से बाल्टी उठाते हुए देखा और अपनी आँखें बंद कर लीं। इस बार पानी गर्म पहले त्से थोड़ा ज्यादा गर्म था, लेकिन साबुन की सुगंध के बिना था । जैसे ही यह मेरे शरीर पर पड़ा, मैंने वास्तव में साफ महसूस किया।

"अब हम नहाते हैं," उसने कहा और भाप के पानी के कुंड की ओर इशारा किया।


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जैसे ही मेरा दाहिना पैर पानी में घुसा, मैं लगभग चौंक गया कि यह काफी गर्म था, लगभग दर्दनाक होने के बिंदु तक। कुछ झिझकने वाले क्षणों के बाद मैं पानी के ऊपर अपने सिर और कंधों के साथ आराम करते हुए, गर्म पानी में चला गया और नीचे झुक कर बाथ गया । ज़ीनत वापस छोटे कमरे में चली गयी और पानी की एक और बाल्टी लेकर लौट आयी । वह स्टूल पर बैठ कर सिर से पांव तक खुद को साबुन लगाने लगी। मैं वास्तव में शो का आनंद ले रहा था . उसने खुद को ऊपर उठाया, यह देखते हुए कि उसके निपल्स कितने सख्त हो गए जब उसने अपने गोल स्तन धोए । जब उसने साबुन लगाना समाप्त किया तो उसने अपने सिर पर बचा हुआ पानी डाला और सारा झाग धो दिया। फिर से उसने एक और बाल्टी निकाली और गर्म कुंड में आने से पहले खुद को फिर से धोया।



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"सलमान आपको पसंद आया ?" उसने धीरे से पानी में सरकते हुए पूछा
.


ईमानदारी से बोलों तो मैं नहीं जानता था कि वह किस बारे में बात कर रही थी। क्या उसका मतलब था कि क्या आपको अपना स्नान पसंद आया ? या उसका मतलब था कि क्या आप जो देख रहे हो वह आपको पसंद आया ? यह देखकर कि वह मेरे को उत्तेजित कर रही है और मेरा लंड खड़ा हुआ है मुझे लगता है कि वह बता जानती थी कि मुझे उसके स्नान का नजारा और उसके साथ स्नान करना और अपना इस तरह से स्नान बहुत पसंद आया है । मैंने एक आसान उत्तर चुना और कहा "हाँ। मुझे बहुत पसंद आया ।"

तब वह मुस्कुराई और कहा, "अच्छा।" और फिर मेरे पास आयी और मेरे से चिपक गयी और हमने कुछ देर किश की और उसने मेरे अंगो को छेड़ा और मैंने उसके अंगो को सहलाया , गर्म पानी के इस स्नान से मैं बिलकुल तरोताजा हो गया.



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ज़ीनत पूल से बाहर निकली और दो बड़े तौलिये निकाले। एक को अपने चारों ओर लपेटकर उसने मुझे पानी से बाहर आने के लिए कहा, जिस पर उसने मुझे सिर से पाँव तक सुखाया। ज़ीनत को वापस बाथ टावल डालने के बाद मुझे वापस सोने के कमरे में ले गयी और लेटने के लिए कहा । लेटते ही मैंने अपनी खूबसूरत बड़ी बेगम की तरफ देखा।



"बहुत खूब!" मैंने अपने बगल में बैठी सुंदरता की युवा मूर्त अपनी बेगम को देखते हुए कहा, "यह अविश्वसनीय और शानदार था!"

"शुक्रिया !" उसने एक हल्के से झुकते हुए उत्तर दिया.


कहानी जारी रहेगी
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02-02-2022, 07:42 PM,
#22
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मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ

भाग 18



ज़ीनत आपा का स्तनपान


जब आपा झुकी तो मैंने उनका टॉवल खींच कर उनके बदन से अलग किया और दूर फेंक दिया।

ज़ीनत आपा ने दिन में पूरे शरीर की वैक्सिंग और अभी नहाने के बाद शरीर पर तेल लगाया था, जिससे शरीर पर बालों का नामोनिशान नहीं था, जिसके कारन कंधो से लेकर कमर तक उसकी नरम गोरी त्वचा से ढका नाजुक बदन बल्ब की रौशनी में संगमरमर की तरह चमक रहा था। मैं सर झुकाकर अधखुली आँखों से जीनत के नंगे खूबसूरत शरीर को देखने लगा। उसके स्तन कठोर होकर समाने की तरफ तने हुए थे, जब उसने अपनी तनी हुई चुचियाँ को मुझे ताकते हुए देखा तो ज़ीनत की सांसे तेज हो गयी। उसकी गरम-गरम सांसे मक्खन जैसे मुलायम गोरे-गोरे सुडौल स्तनों पर से होती हुई चुचियों पर जाकर लग रही थी। वह बला की खूबसूरत लग रही थी। उसके स्तन अभी भी किसी कुंवारी लड़की की तरह सुडौल, ठोस और सामने की तरफ तने हुए थे। वह दूसरी तरफ जाने लगी

मैं जीनत को अपने से दूर और फिर अपनी तरफ आते हुए देखता रहा, वह थोड़ा घुम कर मेरे पास दूसरी तरफ रखे कुछ फल और मेवे उठा लायी मैं उसे आते और जाते हुए देखता रहा उसके हर कदम के साथ उछलते, दोल स्तनों और कुल्हे और चूतडो में संतुष्टि का एक भाव था, चाल में एक मादकता थी।



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फिर वह मेरे पास बैठी और मुझे चूम लिया औअर मैंने भी उनके चुंबन का जवाब दिया। आपा ने फिर अंगूरों का गुच्छा मेरे आगे कर दिया और बोली नहाने के बाद-बाद मेरे बच्चे को भूख लगी होगी। , मैंने अंगूर खाया नहीं। तो ज़ीनत आपा ने ओंठो में बड़ी अदा से अंगूर दबाया और अपने ओंठ मेरे पास ले आयी और जैसे चिड़िया अपने चूजों को अपनी चोंच में भर कर खाना खिलाती है वैसे ही अपने ओंठ में अंगूर रखकर मेरे पास अपने ओंठ ले आयी।

आपा ने मेरे की को गले लगा लिया और जोर से मेरे से लिपट गयी और मेरी की बांह के ऊपर सिरे पर हलके-हलके हाथो से सहलाने लगी।

ज़ीनत आपा के लिपट जाने से उसके स्तन और चूची मेरे सीने से टकराने लगे। मुझे भी ज़ीनत के स्तन और चुचियो का अहसाह हो रहा था, ज़ीनत ने अपनी बांहों का कसाव बढ़ा दिया और स्तन और चूची ज्यादा कसकर मेरे सीने से रगड़ने लगी। इस रगडन से मेरे लंड में हल्की-सी हरकत हुई। उसे मेरा कड़ा लंड अपने बदन पर चुबता हुआ महसूस हुआ।

उसके कोमल शरीर को उसका अहसास साफ साफ़ हो रहा था, उससे चिपकी होने की वजह से वह मेरे लंड के अन्दर के तनाव को अपनी नाजुक कमर के निचले हिस्से और केले के तने जैसी चिकनी नरम गुदाज जांघो और चुतड़ो पर महसूस कर रही थी।

हल्की मादक कराह के साथ ज़ीनत ने अपन चेहरा बिलकुल मेरे सामने किया, मेरी आँखों में हल्का आश्चर्य था, इससे पहले मैं ज़ीनत की आंखे और पढ़ पाता, ज़ीनत ने अपने भीग चुके होठो को मेरे ओठो पर रख दिया, तो मैने आपा के ओंठो को चूम लिया और अंगूर को मेरे ओंठो पर दबाया और मैंने ओंठ नहीं खोले और अंगूर अंदर नहीं लिया। तो आपा ने मेरी आँखों में देखा और मुझे उनके दूध की तरफ देखते हुए पाया तो वह समझ गयी मुझे क्या चाहिए।

वो थोड़ी ऊपर हुई और अपने स्तन को मेरे ओंठो के पास लायी और बोली ओह मेरा बच्चा दूधु पियेगा और मैंने उसकी चूची पर अपनी जीभ फिराई और फिर आपा ने स्तन को जोर से मेरे ओंठो पर दबा दिया तो मैं उनकी चूची चूसने लगा, फिर मैं उन्हें छोटे बच्चे की तरह चूसने लगता। फिर आपा ने कुछ देर बाद अपना दूसरा स्तन मेरे मुँह में दे दिया और मैं जीभ घुमा-घुमा कर चाटते हुए चूसने लगा ..., कुछ देर तक मैं उनकी चूचिया चूसने लगा और बीच-बीच में चुचियो पर अपने दांत गडा देता, तो ज़ीनत के मुहँ से सीत्कार भरी सिसकारी फूट पड़ती।



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तो ज़ीनत ने अब अपने मुँह में लिया हुआ अंगूर एक हल्की मादक कराह के साथ अपना चेहरा बिलकुल मेरे सामने किया और ज़ीनत ने अपने भीग चुके होठो को मेरे ओठो पर रख दिया और अंगूर को मेरे ओंठो पर दबाया और मैंने ओंठ नहीं खोले अंगूर अंदर नहीं लिया। तो आपा ने अंगूर को आधा काट कर दबा दिया और उस अंगूर कर रस मेरे मुँह में बहने लगा।

गजब स्वाद था इस अंगूर का। रसभरा और मीठा जो आपा की लार से और मीठा हो गया था। आपा मेरे ओंठ चूसने लगी और मैं अपने ओंठ चुसवा रहा था धीरे से साँस लेटे हुए ज़ीनत ने अपने ओठ खोलकर अपनी जीभ को मेरे दांतों के बीच से होते हुए उसके मुहँ की तरफ ठेल दिया वह अपनी जीभमेरे मुहँ में डालकर डीप किस कर रही है।



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दोनों के मुहँ की लार एक में मिलने लगी। ज़ीनत आपा अपनी जबान से मेरी जबान चूस रही थी चूम रही थी। उनकी बड़े-बड़े स्तनों से भरी पूरी छाती, मेरे सीने से टकरा रही थी। मैं आपा के दोनों स्तनों का भरपूर कसाव दबाव अपने सीने पर महसूस कर पा रहा है, आपा की सांसे तेज चल रही और उसका पूरा शरीर उत्तेजना के कारन कांप रहा था।

उधर आपा की कराहे सुन कर जूनि भी जग गयी थी और वह लेटी-लेटी चुपचाप पहले तो हमें चूमते और चाटते हुए देखती रही। फिर कुछ देर बाद उसने भी ने भी अपने हाथ ज़ीनत आपा की कमर पर रख दिए और हलके-हलके सहलाते हुए पीठ पर ऊपर बांहों तक ले जाने लगी, थोड़ी देर के बाद सहलाने से ज़ीनत आपा के बदन का कसाव मेरे बदन पर बढ़ गया, पीठ पर ऊपर की तरफ हाथ ले जाकर मैं भी ज़ीनत आपा को बाहो में कसने की कोशिश करने लगा। जिससे पहले से ही सीने से रगड़ रहे कुचल रहे ज़ीनत के बड़े स्तन और कसकर मेरे सीने से रगड़ने लगे। ज़ीनत आपा के शरीर की कंपकपी बता रही थी की उनकी उत्तेजना बहुत बढ़ गयी है, जूनि को भी ज़ीनत आपा की कंपकपी से उनकी उत्तेजना पता लग रही थी, ये सेक्स की लालसा जूनि और मेरे को भी उत्तेजित कर रही थी और जीनत की हरकतों से जूनि और मेरी उत्तेजना और बढ़ रही थी।

ज़ीनत और मेरे अन्दर वासना का समन्दर हिलोरे मार रहा था ऐसे में जूनि कहाँ से खुद को रोक पाती। ज़ीनत ने मेरे ओठो से ओठ हटा लिए, जूनि अपने चेहरे को मेरे गालो पर रगड़ने लगी, मेरे कानो में फूंक मारने लगी। इसी बीच जूनि का एक हाथ ज़ीनत के स्तन को मसलते हुए दोनों के चिपके शरीरो के बीच से फिसलता हुआ जीनत की छाती तक पंहुच गया और जूनि अपने हाथ से जीनत आपा के स्तनों को दबाने लगी।

दूसरी तरफ ज़ीनत की कमर के आस पास एक नयी झुनझुनी दौड़ गयी जब मेरा एक हाथ ज़ीनत की मखमली नरम जांघ पर हाथ फेरते हुए आगे कमर की तरफ बढ़ने लगा।

तो जीनत एक दम से रुक गयी और अलग हो गयी और धीरे से मेरे हाथ अपने स्तनों पर रख कर उन्हें दबाने लगी मानो कह रही हो सलमान आपको आज केवल मेरे स्तन दबाने की इजाजत हैं बाकी सब मैं करुँगी।


खैर फिर ज़ीनत ने मेरे को खूब प्यार किया मुझे चूम और मेरे ओंठ चूसे और मेरे निप्पल्स को अपने थूक गिला कर खूब चाटा और फिर धीरे से मेरे जिस्म को सहलाते हुए ज़ीनत का हाथ मेरे लंड तक पंहुच गया था उसने लंड को कसकर पकड़ लिया।



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ज़ीनत ने जैसे ही मेरे लंड को पकड़ा वैसे ही मेरी कमर ने उत्तेजना की कारन झटके लगने शुरू हो गए थे, जीनत ने एक हाथ से गरम, खून से भरे मांस की गरम राड, लोहे की तरह सख्त लंड को कसकर पकड़ा, दुसरे हाथ से उसने मेरे टॉवल गाउन को किनारे कर निकाल दिया और-और लंड को बाहर निकाल लिया, मेरा बड़ा कठोर लंड पत्थर की तरह कठोर हो चूका था। ज़ीनत ने लंड को जड़ से पकड़कर जोर से ऊपर नीचे किया और अपनी जीभ से अपने ओठो को गीला किया और तेज खून के बहाव के चलते कांपते लोहे की तरह सख्त हो चुके लंड को भूखी नजरो से देखते हुए ज़ीनत ने फुर्ती से पास रखा एक आयल निकाला और अपने हाथ पर तेल डाला और लंड के चारो और तेजी से हाथ ऊपर नीचे करने लगी। ज़ीनत का हाथ नीचे जाते ही तेल से सना सुपाड़ा चमकने लगता और ऊपर आते ही ज़ीनत के हाथ में गुम हो जाता। तेल लगाने से अब ज़ीनत के हाथ आसानी से मेरे लंड पर फिसल रहे थे।



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जैसे जैसे जीनत खड़े लंड पर हाथ फिराने को लयदार करती उसी तरह मेरी कमर झटके मारती रही। मामला अब मेरे नियंत्रण से बिल्कुल बाहर था जो जीनत कर रही थी उसी के हिसाब से मेरा शरीर अपनी प्रतिक्रिया दे रहा था। धीरे-धीरे ज़ीनत ने स्ट्रोक्स की रफ़्तार बढ़ा दी, बीच-बीच में उत्तेजना से सुख रहे ओठो पर अपनी जुबान फिराती रहती। अब उसने लंड पर हथेली की कसावट और तेज कर दी थी और अपनी पूरी स्पीड से लंड के अपने हाथ को ऊपर नीचे करने लगी। तभी लंड के सुपाड़ा फूलने लगा तो ज़ीनत ने हाथो के ऊपर नीचे करने की स्पीड कम कर दी और फिर धीरे-धीरे सुपाडे को दबाते हुए प्यार से उंगलियाँ लंड के सुपाडे पर फिराने लगी।



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02-02-2022, 07:50 PM,
#23
RE: Mera Nikah Meri Kajin Ke Saath
मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ


भाग 19



लंड चुसाई और चुदाई 






मैं बेड पर चित लेटा हुआ था और जीनत मेरे लंड की टोपी पर अपने नरम उंगलिया फिरा रही थी । फिर उसे लंड को छोड़ा और मुझे किस किया। मेरे लेटे हुए होने और ज़ीनत के उस प्यार के कारण मेरा लंड किसी सांप की तरहा खड़ा झूमने लगा था।


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फिर से उसने फूले हुए, खून से भरे फड़कते तने लंड को पकड़ कर नीचे की तरफ झुकी और पोजीशन बनाकर ऐसे झुकी की लंड उसके मुहँ के सामने आ गया। जब लंड की टोपी ज़ीनत के मुहँ से बस एक इंच दूर रहा गयी तो आपा ने थोड़े से ओठ खोले और एक हल्की-सी फूंक लंड की टोपी पर मारी। और उसकी फूक के साथ उसका कुछ थूक लंड पर गिरा पर लंड इतना गर्म था कि लंड पर से भाप उठने लगी और जिसे देख ज़ीनत की आँखे चौड़ी हो गयी उसकी उंगलियों ने हलके-हलके फिर से लंड को रगड़ना शुरू कर दिया था।

मैं दर्द और मजे से कराहने लगा। आह आह! उसके बाद ज़ीनत ने ओठो पर जीभ फिरा कर उसको गीला किया। और फिर लंड की एक बार किश किया । लंड से भाप फिर उठने लगी और आपा को स्वाद अच्छा लगा आपा ने मेरे लंड पर फिर मैं ने झुक कर लंड की टोपी से अपने होंठ मिला दिए. अब आपा ने के लंड की टोपी का ऐक लंबा किस लिया फिर जब आपा ने अपने होन्ट लंड की टोपी से हटाये तो टोपी के सुराख से परिकम का ऐक कतरा निकल आया। फिर थोड़ा-सा और झुक कर ओंठ खोले पूरी जीभ बाहर निकाल ली। जीभ का अगला हिस्सा सुपाडे के छेद तक पंहुच गया था। आपा ने अपनी ज़बान से कतरे को पूरी टोपी पर फेला दिया और फिर मैं टोपी को मुँह में लेकर चूसने लगी।

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प्रीकम की बूंदों के स्वाद ने ज़ीनत की हवस और बढ़ा दी। अब उसकी काम वासना और ज्यादा भड़क गयी, काफ़ी देर तक आपा ने लंड की टोपी को चूसा फिर वह मेरे लंड को चारों तरफ से अपनी ज़बान से चूम और फिर चाटने लगी। आपा जितनी हवस की भूख को शांत करने की कोशिश करती उतना ही हवस की आग भड़कती जा रहा थी।



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आपा से लंड चटवाने का मेरा ये पहला सेक्स एक्सपीरियेन्स था, इस लिए मैं अपनी आन्खै बंद किए मदहोश हो रहा था। आपा अब पागलों की तरहा चारों तरफ से मेरे लंड की टोपी को चाट रही थी ।

ज़ीनत के जीवन में ये पहला मौका था जब वह लंड चूस रही थी। आज उन्होंने अपने शौहर का लंड पहली बार मुहँ से लगाया था। एक दो बार लंड की टोपी चाटने के बाद ज़ीनत ने थोड़े और ओठ चौड़े किये और मुहँ खोला। धीरे से मेरे के लंड की टोपी के चारो ओर ओंठो का घेरा बना लिया। लार से सनी लसलसी जीभ अब लंड की टोपी के चारो ओर घूम रही थी।





मेरी सेक्सी कराहे उसकी उत्तेजना के साथ बढ़ रही थी, ज़ीनत अपने हाथ को फिर से लंड की जड़ में ले गयी और लंड के सुपाडे के थोड़ा-सा और मुहँ के अन्दर ठेल दिया, देखते ही देखते, खून से भरा लाल सुपाडा ज़ीनत के गीले और गरम मुहँ में समा गया। फिर आपा ने मेरा पूरा लंड अपने मुँह में ले लिया जो आप के गले के अंदर तक गया फिर वह मेरा लंड दबा कर मज़े से चूसने लगी। जैसे ने ज़ीनत ने लार से भरा मुहँ से मेरे हिलते हुए लंड के सुपाडे को पहली बार चूसा, मेरे मुहँ से हल्की-सी मादक आह निकल गयी।

इस बीच मैंने जूनि की तरफ देखा जूनि दूसरी तरफ लेटी हुई मेरे लंड की चुसाई देख रही थी और उसके हाथ अपने बूब्स को दबा रहे थे ।

ज़ीनत की लार से सनी गुनगुनी जीभ मेरे फूले हुए लाल टोपी के चारो तरफ नाच रही थी बीच-बीच में मुहँ खोलकर वह अपनी लम्बी जीभ लंड पर फिराती हुई नीचे की तरह ले जाती और फिर शरारतपूर्ण तरीके से वापस मुहँ में ले आती और ओंठो से लंड को चूस लेती।

ज़ीनत के लंड के सुपाडे पर जीभ फिरा रही थी। सुपाडे को जीभ से चाट रही थी और फिर चूस रही थी जैसे कोई लोलीपोप चूसता है।



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उसके बाद ज़ीनत ने मेरे लंड की टोपी को कसकर ओठो से जकड लिया। ओठ बंद करके और धीरे-धीरे अपना सर हिला कर टोपी चूसने लगी, जैसे बच्चे टॉफी चूसते है, मैं मजे ले रहा था और बेसाख्ता कामुक लम्बी कराहे भर रहा था। मेरा लंड उत्तेजना के कारण फटने की स्थिति में थाl

कुछ देर बाद अचानक मेरा हाथ ज़ीनत के सर तक पंहुच गया, और आपा के बालो को मजबूती से पकड़ लिया और उसके सर को नीचे की तरफ ठेलने लगा। ज़ीनत इस तरह के हमले के लिए तैयार नहीं थी। उसे पूरा लंड गटकना पड़ा। मेरा लम्बा बड़ा लंड उसके ओठो को चीरता हुआ, खुरधुरी जीभ पर से गुजरता हुआ ज़ीनत के गले तक पंहुच गया जिससे उन्हें लगा की उनका गला घो स घुट रहा है अन्दर की साँस अन्दर रह गयी बाहर की बाहर। कुदरती तौर पर उनको को तेज खांसी आ गयी लेकिन मुहँ में पूरा लंड होने की वजह से घुट कर रह गयी।




ज़ीनत ने मुहँ से ही लम्बी साँस ली और मेरे लंड की जड़ के चारो ओर सख्ती से अपने ओठ कसे दिए और इससे ज़ीनत के मुहँ में मेरे फूले हुए कठोर लंड पर ज़ीनत के दांत लग सकते थे ये बात ज़ीनत भली भांति जानती थी।

ज़ीनत ने अपना हाथ मेरे हाथ पर रखा और हाथ पीछे किया जो मुझे रुकने को सन्देश था। फिर ज़ीनत आपा ने झटके से-से खुद को अलग किया, खांसी और फिर कुछ लम्बी साँस ली, जैसे किसी का कुछ देर तक गला दबाये रखो फिर छोड़ दो। ज़ीनत की हालत भी कुछ ऐसी हो गयी थी। उसने दो तीन सांसे जोर-जोर से ली फिर बोली आप मुझे अपने तरीके से चूसने दो। मैंने पहले भी कहा था आज आपको कुछ नहीं करना है अगर अब आपने कुछ मेरे साथ किया तो मैं आप से कभी भी नहीं चुदवाउंगी । तुम तो सिर्फ पड़े रहो तुम्हारा लंड खड़ा कर के में ही ऊपर से चोदूंगी और तुम्हारे को जन्नत की हूर कैसे चोदती है वह दिखाऊंगी।



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उनके तेवर देख मैंने उनके के सर से तुरंत हाथ हटा लिया। और अपने हाथ अपने कानों पर ले गया और बोला सॉरी आपा । मैंने कुछ नहीं किया । इतना मजा आ रहा था कि मैं अपने इख्तियार से बाहर हो गया था और अपने आप मेरे हाथ आपके सर पर चले गए. तो आपा बोली जूनी तुम आमिर के हाथो का ध्यान रखना आमिर के हाथ ज्यादा न भटके




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और फिर आपा थोड़ा मेरा पास इस तरह बैठ गयी की अब मेरे हाथ उनके बूब्स पर जा रहे थे उन्हेने मेरे हाथ अपने बूब्स पर रखे ौरः थोड़े से दबाये और मुझे उनसे खेलने का इशारा किया और मुझे करने दो। मैं कर रही हूँ, तुम्हे मजा आ रहा है बस मजे लेते रहो।

इतना कहकर ज़ीनत ने फिर से मेरे लंड पकड़कर मुहँ में ले लिया और कसे ओठो के साथ पूरा अन्दर लेती चली गयी। मैंने आपा के बूब्स को हलके-हलके दबाने लगा ।

पहले वह जहाँ सिर्फ सुपाडे से खेल रही थी अब पूरा लंड मुहँ में लेकर चूस रही थी। ज़ीनत के कसे ओठो से गुजरता हुआ लंड पूरा का पूरा मुहँ में समा गया और फिर एक झटके में दिर ऊपर ले गयी और लंड बाहर आ गया लेकिन फिर भी टोपी ज़ीनत के मुँह में ही थी। उन्होंने अपने हाथ की उंगली और अंगूठे से एक छल्ला-सा लंड की जड़ में बना लिया था। इससे वह लंड के इधर उधर भागने या तिरछा हो जाने को रोक रही थी। बार-बार ज़ीनत गर्म खून के भरा, फड़कता गरम लंड अपने नरम-नरम गुनगुने गीले मुहँ में अंदर बाहर कर रही थी और फूला हुआ फड़कता सुपाडा जीभ की पूरी लम्बाई तय करके मुहँ के आखिरी छोर गले तक जा रहा था। आपा पहले धीरे-धीरे फिर स्पीड बढ़ा कर तेजी से अपना सर लंड पर ऊपर नीचे करने लगी । लंड अधिकतम जितनी गहराई तक मुहँ में जा सकता था जा रहा था। ज़ीनत की लार भरी जीभ लंड को गीला कर रही थी। इससे लंड आसानी से अन्दर बाहर हो रहा था। कमरे में बस लंड चूसने और मेरी कराहने की आवाजे ही सुनाई पड़ रही थी।





[Image: m0.jpg]
ओह्ह आअह्ह्ह उफफफ-उफफफ हाये चूसो । और चूसो ऐसे ही वाह आपा मजा आ गया ओह्ह्ह आह

वो मेरे लंड को और ज्यादा कसकर पकड़कर आक्रामक और वाइल्ड तरीके से चूसने लगी, ऐसा लग रहा था जैसे सालो से इस लंड की भूखी हो।

मैं आनद में गोते लगाते हुए-आह आपा बहुत मजा आ रहा है, क्या लंड चूसती हो आप। आह-आह आह...और जोर से और अन्दर तक लेकर चूसो आह-आह अह्ह्ह्ह। में भी ज़ीनत के ब्रैस्ट दबाने लगा और उसके निप्पलों को मरोड़ने लगा

ज़ीनत के शरीर में पहले से भी ज्यादा तेज सिहरन दौड़ गयी। ज़ीनत ने अब पागलो की तरह मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया। और उत्तेजना के मारे लंड पर दांत भी लगाने लगी, फिर और जोरदार तरीके से लंड को चूसने लगी। ज़ीनत लंड पर पूरी तरह झुककर तेजी से पागलो की तरह लंड को बेतहाशा मुहँ में पूरा का पूरा ले रही थी, इससे मेरे कराहने की आवाज और बढ़ गयी।



[Image: z1.jpg]

में भी ज़ीनत के ब्रैस्ट निचोड़ने लगा और उनके नीपल्लो को खींचने और मरोड़ रहा था और फिर हवस की आग ऐसी भड़की की ज़ीनत के होंठो से चुसवाते हुए मेरा 90 डिग्री पर खड़ा लंड ज़ीनत ने अपने मुँह से निकाल कर अपनी चूत का मुंह सुपारे पर रख एक ही धक्के में पूरा लंड घप्प से अंदर ले लिया और मेरे हाथ ज़ीनत के बूब्स पर थे और वह मेरे लंड पर उछल कर मुझे चोद रही थी ।



[Image: wot1.jpg]

मेरे मुँह से ऐक सिसकारी निकली और मैं ने खुद नीचे से अपने चूतड़ को उछाला और मेरा पूरा लंड ज़ीनत ने अपनी चूत में ले लिया, आपा ऊपर हुई और फिर लंड टोपी तक चूत से निकाला और फिर ऐक झटके से उसने वापिस चूत में ले दिया, अब आपा के मुँह से भी सिसकारी निकली और फिर मैं भी खूब ज़ोर-ज़ोर से झटके मारने लगा.


मुझे बोहत मज़ा आरहा था और आपा बुरी तरहा से सिसकने लगी, आआआअहह-आआआअहह उूउउफफफफफफफफफफफफ्फ़ और ज़ोर जोर से उछलने लगी आआअहह ऊऊऊऊीीईईईईईईईईईईईई मुझे बोहत माज़ा आरहा है मेरी जान । मैं उसके बूब्स दबा रहा था उउउउउउउउउउउफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ् फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ,



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जूनि भी हमारी चुदाई देख मस्त हो गयी और वह मुझे चूमने लगी और फिर उसने अपनी चूत मेरे मुंह पर रख कर ज़ीनत को चूमने लगी और मेरी जीभ उसकी गुलाबी चूत की क्लिट पर थी और ज़ीनत की क्लिट मेरे लंड से टकराने लगी और नीचे से सुष्मिता-सी ज़ीनत की मखमली गद्देदार चूत का मज़ा और मुंह पर अल्हड कमसिन जूनि की तब्बू जैसी चूत, मेरे बड़ो का ऐसी हूरो को पैदा करने के लिए शुक्रिया, और जूनि आई अहहा पिशाब निकल जायेगा कह कर झाड़ गयी और उसकी खट्टी-खट्टी चूत के जूस को मैं पी गया इतने में ही ज़ीनत भी झड़ चुकी थी और पस्त हो गयी थी । उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया और उसका जिस्म ढीला पड़ गया।

कहानी जारी रहेगी
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02-02-2022, 07:55 PM,
#24
RE: Mera Nikah Meri Kajin Ke Saath
मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ

भाग 20



लंड चुत चुदाई और चुदाई




जूनि पतली थी, और उसकी लगभग पारदर्शी पोशाक ने उसके दो नाजुक स्तनों की सही आकृति को मुश्किल से छुपाया था और इन दो आकर्षक मांस के टीले के नाजारेव ने मुझे उन्हें निचोड़ने के लिए लगभग आगे बढ़ा दिया था, लेकिन मैंने देखा वह पस्त है तो मैंने खुद को संयमित किया।

उसकी पोशाक या नाईटी जैसा कि मैंने कहा है, बहुत छोटी थी और जो की आजकल की सभी लड़कियों के साथ आम और काफी प्रचलित थी और जैसे कि वह-वह मेरे साथ चिपकी हुई थी तो उसकी टांग मेरे टांगो पर थी और उसकी सुंदर योनि की झलक मुझे दिखाई दी। उसके नंगे और चमकीले मांस की इस झलक पर, मुझे लगा कि मेरा लंड ऐसे उग्र हो गया जैसे कि उसे किसी बिजली का झटका लगा हो।


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मैंने अपना हाथ उसके सिर के पीछे से गुजारा और उसकी कमर के चारों ओर ले गया तो मुझे कम से कम प्रतिरोध का सामना नहीं करना पड़ा, इसलिए साहसपूर्वक उसे अपने पास खींच कर मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया और उसे होठों पर चूमने का प्रयास किया। फिर दूसरी तरफ ज़ीनत की पतली कमर के चारों ओर मेरी बाहों को पार करते हुए उसे कसकर गले से लगा लिया और उसने किसी भी प्रतिरोध के बिना मुझे अपने होठों को अपने ओंठो के पास रखने की अनुमति दी और गर्म चुंबन के साथ मैंने उसे कस कर पकड़ लिया क्योंकि अब ज़ीनत की बाहें मेरी गर्दन के चारों ओर घूम रही थीं।



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अपना हाथ उसकी कमर के सामने से घुमाते हुए, मैंने उसके स्तनों को निचोड़ा और निप्पल्स को खींचा और दबाया, एक उंगली से निष्क्रिय निप्पल को सीधा होने की स्थिति में आने दिया और फिर, अपना हाथ उसकी टांगो पर रखकर, मैंने उसे उसके बीच खिसका दिया और पूरी तरह से उसकी नंगी और चिकनी जांघों को सहलाया।

एक बार वह थोड़ा पीछे हट गई और मानो मुझे रोकने के लिए हटी हो लेकिन अब, मेरा लंड अभी भी लोहे की छड़ की तरह खड़ा था, मैंने उसे वापस अपनी ओर खींच लिया और अपना हाथ उसकी जांघों के बीच में रखते हुए, मैंने उसकी योनि के नंगे होंठ महसूस किये जो उसकी चूत से निकले पानी के कारण गीले थे।

इस पर जीनत मेरी छाती पर चिपक गयी, मेरी गर्दन के चारों ओर उसकी बाहें आ गयी और वह मेरे ओंठ चूमने लगी और यह देखकर कि उसका जो भी हल्का-सा प्रतिरोध था वह समाप्त हो गया था, मैंने उसकी चूत की फांक के गर्म नम होंठों को विभाजित किया और उसके कलिट को मसल दिया।

मैंने अब एक पल के लिए अपना हाथ हटा दिया और अपने रोड की तरह कठोर लंड को आगे बढ़ा दिया। मैंने मह्सूस किया ाकि दूसरी तरफ से जूनि मेरे गाल चूम रही थी और उसका हाथ मेरे धड़कते हुए लंड पर आया और उसके लंड को कस कर पकड़ा और उसकी एक दृढ़ आलिंगन में उसकी पकड़ को महसूस करते हुए इसे धीरे-धीरे ज़ीनत की चुत के ऊपर और नीचे रगड़ना शुरू कर दिया।

जुनून में मैंने उसे अपनी ओर खींचा उसे चूमकर और सहलाकर, अपने हाथ को फिर से उसकी योनि को सहलाकर उसे मेरी गोद में खींच लिया और अपने खड़े हुए लंड के सिर को उसके चुत के होठों पर रखकर, मैंने उसे धीरे-धीरे उस पर दबाया और उसे अपनी बाहों में मजबूती से पकड़ लिया और मेरी कूल्हों ने आगे पीछे नृत्य शुरू किया।



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'ओह, ओह, ओह, आह-हाय!' उसने सांस ली, 'ऐसे ही करो, ओह-ओह ओह।' वह धीरे-धीरे मेरे लंड पर आगे पीछे होने लगी। ओह, कितना मजा; ओह, ओह, ओह, आह, मैं ... ओह-ह—! ' और उसने फिर एक बार मेरे तूफानी डंडे के सिर पर अपने रसों की धारा बरसा दी।

मैंने महसूस किया की मेरा लंड भी लावा उगलने वाला है और मैंने उसे गहराई से चोदना चाहता था, मैंने उसे अपनी बाहों में उठा लिया और उसे उसकी पीठ पर लिटा कर, कुछ गहरे और रोमांचकारी और तेज धक्क्के लगाए और मैंने उसकी-उसकी कोमल और चिपकी हुई चुत के अंदर पिचकारियाँ मार दी!

हम कुछ देर के लिए इस तरह चिपक कर लेटे रहे और फिर मैंने अपने लंड को धीरे-धीरे बाहर निकाला।

मैंने उसे फिर से अपनी बाहों में लपेट लिया और उसके होठों पर चूमा।

वह पूरी तरह से कांप और हांफ रही थी, उसकी नब्ज बहुत तेज धड़क रही थी। तभी जूनि ने मेरा लंड एक बार फिर पकड़ लिया और उसे अपनी योनि के पास ले गयी और उसकी ऊपर रगड़ने लगी।


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उसकी इस हरकत और छुअन से मेरा लंड जल्द ही फिर से सख्त हो गया और उसे पटक कर मैंने उसे फिर से उसके भीतर एक ही झटके में लड़ जड़ तक घुसा दिया और थोड़ी-सी गुर्राहट और फिर वह मजे से कराहने लगी।

जूनि की कमसिन चुत इस धक्के को नहीं झेल पेयी मैंने फिर अपना लंड टोपी तक जूनि की चूत से निकाला और फिर ऐक झटके से वापिस पूरा चूत में पेल दिया। जूनि के मुँह से फिर सिसकारी निकली और फिर मैं खूब ज़ोर-ज़ोर से झटके मारने लगा। मुझे बोहत माज़ा आरहा था और जूनि बुरी तरहा से सिसकने लगी, और आईई ऊऊऊओ या आआआ आआह आपाआ सलमान भाई धीरे और लंड जूनि की चुत की धज्जिया उडाता हुआ मदहोश चुत की जम कर चुदाई करने लगा। मैंने उसे जी भर कर उसे चाटा और फिर चूमता हुआ चुदाई करने लगा।



[Image: MFF3.jpg]

आआआअहह आआआअहह उूउउफफफफफफफफफफफफ्फ़ प्यारे सलमान और ज़ोर लगाओ आआअहह ऊऊऊऊीीईईईईईईईईईईईई मुझे बोहत माज़ा आरहा है मेरी जान उउउउउउउउउउउफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्! फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ, 5 मिनिट बाद ही जूनि की चूत ने पानी छोड़ दिया और उसका जिस्म ढीला पड़ गया, लेकिन मैं अभी फारिग नहीं हुआ था और मैं झटके मारता रहा, मुझे मज़ा आरहा था और वह मज़े से सिसकारिया ले रही थी, 10 मिनिट बाद जूनिम की चूत ने फिर पानी छोड़ दिया और कुछ देर बाद मेरे लंड ने भी झटका खाया और मैंने उसकी चुत में धार मारी और उसकी चुत पूरी भर दी।


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फिर उसके बाद इसी तरह से पोज बदल-बदल कर मैंने उस रात बेदर्दी से उसकी 4 बार चुदाई की और उस गुलबदन पर निढाल हो कर सो गया।


कहानी जारी रहेगी
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02-06-2022, 07:10 PM,
#25
RE: Mera Nikah Meri Kajin Ke Saath
मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ

भाग 21

कमसिन और अल्हड़ जूनि की चुदाई









अपने नाम के मतलब के अनुसार जूनि बहुत 'प्यारी' थी और कमसिन और अल्हड़ जूनि की चुदाई करके मुझे बहुत मजा आया था ।


जूनि, जीनत और मैं तीनो ऐसी मस्त चुदाई से बहुत खुश थे और अब मैंने हिसाब लगाया की एक महीना पूरा होने वाला है और निकाह के बाद मेरी पहली सुहागरात ज़ीनत के साथ मनाने का फैसला करते हुए मैंने ये भी फैसला किया था कि हर एक महीने के बाद सुहागरात मनाऊंगा।






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तो अब मैंने अपना नया फैसला किया की अमीषा जैसी आरसी और रवीना जैसी रुखसार की चुदाई मुझे जल्द ही करनी है और फिर उनकी चुदाई का मन बनाकर उनको अपनी अम्मी को फ़ोन कर के बोला की आज कल खेत पर काम बहुत है और उन दोनों को ये कह कर वही पर बुलवा लिया की मौसम अच्छा है उनको यहाँ अच्छा लगेगा और साथ में जीनत आपा की भी काम में कुछ मदद हो जाएगी ।





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तो अम्मी बोली तो रिजवान आरसी और रुखसार को छोड़ने आजायेगा और अब आगे खेतो पर अब काम और बढ़ जाएगा इसलिए रिजवान भी वहीँ रुक जाएगा और मेरी बहनो रुखसाना, सलमा और फातिमा को भी रुखसार और आरसी के साथ भेज देंगी । सब मिल कर काम करना और रहना ।



जबतक वह आती ज़ीनत और जूनि मुझसे रोज़ 2-2 राउंड लगवाती थी और ड्राई फ्रूट्स का हलवा और खूब खिला पीला कर मेरी ज़िन्दगी में बहार ला दी थी । जहाँ ज़ीनत का स्वाद मीठा था वहीँ जूनि का स्वाद खट्टा था और मैं रोज इन दोनों सुंदर और खट्टी मीठी बहनो का पूरा स्वाद लेता था ।

निकाह के बाद चाचा और खाला की एक-एक लड़की को में चोद चूका था, मेरे मामा की कोई औलाद नहीं थी और मौसी मेरी चची ही थी क्योंकि मेरे अब्बू और चाचा के निकाह अपनी सेज माँ की लड़कियों से ही हुआ था ।

रोज की लम्बी और जोरदार चुदाई से अल्हड़ और कमसिन जूनि की चुत सूज गयी थी और ज़ीनत उसकी सिकाई करती थी लेकिन रात होते ही उसको फिर लंड खाने की आदत लग गयी थी

एक रात मैंने जूनि की बहुत देर तक चुदाई की और सुबह मैं देर तक उन दोनों बाहों में सोया, जूनी और जीनत और जब मैं उठा तो वह जूनि बोली आज मत जाओ और मुझे दिन में भी चोदो लेकिन खेत में जाना जरूरी था तो मैंने उसे अपने साथ खेतों में ले जाने का फैसला किया ताकि मैं दोपहर में उसकी चुदाई कर सकूँ। जीनत ने एक नौकरानी को जूनी के साथ उसकी मदद के लिए भेजा।

लंच के समय जूनी खुले मैदान में खाना लेकर मेरे पास आयी। मैंने उससे कहा कि हम आउटहाउस में लंच करेंगे। खेतो के बीच में हमारा एक आउटहाउस था और मैं जूनी के साथ आउटहाउस चला गया जब मैंने दरवाज़ा खोला जूनी में आउटहाउस के बरामदे में कदम रखा तो एक पल में वह मेरी बाँहों में झूल गयी और कसकर गले से लग गई। मैंने देखा कि हवा का एक झोका आया और हाल में बड़ी अलमारी का दरवाजा थोड़ा हिल गया मैंने यह सोचकर अनदेखा कर दिया कि शायद इसे ठीक से बंद नहीं किया गया है और अब हवा के दबाव के कारण दरवाजा हिल गया है।



मेरा लंड खड़ा हो गया और सूज गया और कपड़ों पर जोर से जोर पड़ने लगा।

' जूनी मुझे चुप रहने के लिए फुसफुसा रही थी उसे अंदेशा था कि नौकरों और अन्य खेत श्रमिकों या लोग हमारी आवाजे सुन सकते हैं लेकिन मैं बिलकुल बोल्ड हो गया और जल्द ही सीधे उसके घाघरे के नीचे मेरा हाथ गया और मैंने उसे नीचे खींच दिया अगले ही पल में मेरी आंखों के सामने उसकी चिकनी लम्बी और बिना कपड़े वाली जांघें थी और मेरे हाथ ने उसके चुत को सहलाया और मैंने अपने पास खींचा उसके ओंठो को चूम उसे करीब से दबाया और अपने खड़े लंड को उसकी चुत के खिलाफ रगड़ा।

' तब मुझे एहसास हुआ कि भोली जूनी अब और अधिक बोल्ड हो गई है और उसका हाथ मेरी पैंट के सामने की ओर चला गया और उसने मेरी पैंट को खोल दिया और मेरा खड़ा और लंड ने बाहर छलांग लगा दी। मेरे विशाल लंड की छलांग का दृश्य देखकर वह चौंक गई, वह मेरे विशाल गर्म हथियार को देखकर लगभग विस्मय से कराह उठी उफ़, इतना बड़ा और कठोर! , लेकिन अब जूनी को इससे कोई डर नहीं लग रहा था, उसने अपनी हथेली में प्यार के जादू के साथ लंड को पकड़ा, सहलाया और-और दबा कर उसे खींचती हुई अपनी योनि के द्वार पर ले गयी और मुझे इशारा किया कि वह अब इसे अपने अंदर चाहती है।






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' यह सब, निश्चित रूप से, मुझे यहाँ बताने और लिखने में जितना समय लगता है, उससे बहुत कम समय में हुआ और फिर उसकी ख़ुशी और मजे के लिए मैंने खुशी से जूनि को एक लंबे झूले पर बैठा दिया जो आंगन ने लगा हुआ और उसके कपड़े निकाल कर फेंक उसकी पूरी नंगी कर दिया और अब उसके सारे आकर्षक यौनांग मेरे सामने मुझे ललचा रहे थे मैंने उसके स्तनों को सहला कर चूमा और मैंने जल्दी से अपने सारे कपड़े निकाल दिए और उसने अपनी गुलाबी और उग्र चुत के प्रवेश द्वार पर मेरे खड़े हुए लंड के सुपारे को लगाया और उसने जल्द ही इसे अपने भीतर समा लिया और फिर लंड पर हुक पर फसी मछली की तरह थिरकने और तड़पने लगी!





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मैंने धक्के मारने शुरू किये और जूनि के मुँह से ऐक सिसकारी निकली और उसने खुद साथ में अपने चूतड़ को उछाला और मेरा पूरा लंड अपनी चूत में ले लिया, जूनि के मुँह से सिसकारी निकली लेकिन उसका मुँह मेरे मुँह में था इसलिए आवाज बाहर नहीं गयी और फिर मैंने खूब ज़ोर-ज़ोर से झटके मारे, मुझे बोहत मज़ा आ रहा था और जून बुरी तरहा से सिसकने लगी, आआआअहह-आआआअहह उूउउफ आह्हः आआअहह ऊऊऊऊीीईईईईई मुझे बोहत माज़ा आरहा है उम्म्म!

' मेरे बड़े लंड के तेज झटको के साथ और कमर की नियमित पंपिंग स्पीड के कारण मैंने लंड को लगातार उसकी कोमल चुत में अंदर बाहर किया और हम दोनों एक साथ झड़ गए ।

फिर हमने दोपहर का भोजन किया और फिर एक दूसरे की बाहों में कुछ देर आराम किया। फिर मैंने जूनि को एक बार और चौदा और उसकी चुत बिलकुल सूज गयी थी मैंने उसको कपड़े पहनने में मदद की, अपनी पैंट को पहना और एक चुंबन दिया और खेत की तरफ चला गया।






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रात की जीनत आपा ने जूनि की चूत का मुआयना किया और बोली इसकी चुत की तो बुरी हालत हो गयी है। तो मैंने पहले जीनत की चुदाई की , फिर जूनि जीनत आपा की चुदाई देखने के बाद चुदासी हो गयी थी,







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इसलिए ज़ीनत आपा ने कहा की इसकी गांड मारो और में तुम्हे इसकी इज़ाज़त देती हु और फिर मैंने जूनि की गुलाबी नाज़ुक गांड बड़ी बेरहमी से मारी और उसकी चीखो से घबरा कर बीच में ही उसकी गांड छोड ज़ीनत की गांड मार दी जिससे दोनों की हालत ख़राब हो गयी और 7 दिन चुदने लायक नहीं रही ।


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02-06-2022, 07:12 PM,
#26
RE: Mera Nikah Meri Kajin Ke Saath
मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ

भाग 22

तीसरी बेगम कमसिन अर्शी 



2 दिन बाद रिजवान के साथ अर्शी और रुखसार आयी और मैंने उन दोनों की चुदाई करने का फैसला ले लिया । रिजवान के साथ मेरी बहने और उसके तीनो बीविया रुखसाना, सलमा और फातिमा भी आयी थी ।

अर्शी जिसका मतलब होता है जन्नत की रानी और अपने नाम की-की तरह एक 18 साल की लड़की है जो बेहद सुंदर है जिसके पास गर्म शरीर है, वह 5' 5 "लंबी है और लगभग 50Kg वजन, बड़ी और सुंदर आंखे, 34सी-21-33 का माप घने लम्बे काले बाल, गोल और बड़े स्तन और एक छोटी कमर, अविश्वसनीय लम्बी टाँगे और एक बिल्कुल सुडोल नितम्ब, वह पुरुष की परम कल्पना जैसी है। जब वह मुझ से मिली तो मेरे गले लगी और जैसे ही मैंने उसे अपने शरीर में खींचा, मेरे मजबूत हाथ उसके कंधों और उसकी पीठ के चारों ओर खिसक गए। उसके निप्पल कस गए और मैं चाहता था कि हमारे कपड़े जादुई रूप से गायब हो जाएँ और हमारे बीच गर्मी और त्वचा के अलावा कुछ न बचे।"

जब रुख्सार और अर्शी आयी और जब उन्हें मालूम हुआ की जूनि की सुहागरात हो चुकी है तो खूब दुखी होकर रोने लगी और अर्शी ने कहा की दूल्हे भाई ने अच्छा नहीं किया, कमसिन लड़की को ठोक दिया, बेचारी चल भी नहीं पा रही है । मैंने उन्हें बताया की ज़ीनत की सुहाग रात को महीना पूरा हो गया है अब मेरा इरादा है की अब मुझे जल्द ही तुम दोनी के साथ भी सुहागरात मनानी है। तो मसला हुआ की पहले किसकी सुहागरात होगी और फिर बात अम्मी तक गयी तो मेरी अम्मी ने अर्शी को मेरे कमरे में जाने को कहा और निश्चित हुआ की हर हफ्ते के हिसाब से मेरी चारो बीविया अब मुझसे चुदवायेगी ताकि कोई झगड़ा नहीं हो ।

मैंने भी अगले दो दिन ज़ीनत और जूनि के साथ कोई चुदाई नहीं की ताकि मैं तरोताजा रहूँ।

अर्शी अमीषा की तरह कमसिन और नाज़ुक थी, लेकिन वह फ्रैंक भी बहुत थी और दिन में ही पूछ लिया दूल्हे भाई आज रात कैसी डिश चाहिए, दुल्हन की तरह, या लाइट ब्लू निघ्त्य में खुले बालों वाली गोरी मेम । मैंने कहा मेरी जान तुम्हे याद योग तुमने कहा था नमकीन डिश मिलेगी अब गोरी मेम दुल्हन की तरह नमकीनडिश पेश करे तो क्या कहने और वह मुस्कराते हुए चली गयी, और में भी दिन भर अपने चहेरे भाई रिजवान के साथ अपनी ज़मीन और खेती को देखने चला गया और फिर दोस्तों रात में चुदाई और हवस का ऐसा नंगा नाच हुआ की अर्शी ने मेरा दम ही निकाल दिया।

कमरे में जाते ही वह आयी और वह दुल्हन की तरह सजी हुई थी और उसने नीले रंग की चोली और घाघरा पहना हुआ था जो की पूरी तरह से पारदर्शी था। वह मेरी आँखों में आंखे डाल कर बोली

"Mr. Salman your wife Arsi welcomes you to a tour of forbidden pleasure free of cost, where satisfaction is guarnteed and fee is rupturing the entrance to the sensational cave".

("मिस्टर सलमान, आपकी पत्नी अर्सी, निषिद्ध आनंद के मुफ्त दौरे में आपका स्वागत करती है, जहाँ संतुष्टि की गारंटी है और शुल्क होगा सनसनीखेज गुफा के प्रवेश द्वार को तोड़ना ।" )


और फिर उसने मुझे सबसे अंतरंग फ्रेंच चुंबन दिया और उसकी लार के स्वाद ने मुझे एक एस्फोरैडिक-कामोत्तेजक की तरह उत्साहित किया,




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फिर वह बिस्तर पर घूंघट ओढ़ कर बैठ गयी । मेरे मुँह से निकला ओये होये-मजा आएगा आज तो गोरी मेम की जैसे दिखने वाली सजी धजी देशी दुल्हन नमकीन मजे देगी ।

मैं धीरे-धीरे बेड के करीब पहुँच जहाँ अर्शी घूंघट किए हुए बैठी गयी थी। अर्शी छई-मुई-सी बनी हुई ही नजरें झकाए बैठी हुई थी। शर्म में उसकी हालत खराब थी। सोचने और करने में वाकई फर्क होता है। वह सुहागरात मानने जा रही थी। आज उसकी चुदाई होने वाली थी। उसे ज़ीनत की चीखें याद आ रही थी।

अब बेड पर मैं अर्शी के बगल में जाकर बैठ गया ।मैंने एक हाथ उसके कंधे पर रखा और उसके माथे पर चूमा और तोहफे में लाया हार उसे पहना दिया। इस चुबन में उसके जिस्म को झकझोर दिया। फिर मैंने धीरे से घूंघट को उठाया और अपने हाथ उसे उसके चेहरे को उपर उठाया और फिर उसकी दोनों आँखों में बारी-बारी से किस किया ।

अर्शी की आँखें बंद हो गई थी अब। मेरे सामने उसके रसीले लब थे। मैंने अभी इन हसीन लबों का रस पीया था, और उसकी लार के स्वाद ने मुझे कामोत्तेजित किया था और, मेरी प्यास भड़क गयी थी। मैंने अर्शी को थोड़ा-सा अपनी ओर खींचा और अपने होंठ श्री के रसभरे लबो पर रख दिये और उनके रस को चूसते हुए अर्शी को बेड पर गिरा सिया। वह सीधी लेटी हुई थी और मैं उसकी बगल में आधा और आधा उसके ऊपर लेटा हुआ उसके अधरों को चूमने लगा और साथ ही साथ उसके पेट को भी सहलाने लगा था।

मैं अर्शी के पेंट को चूचियों से नीचे तक और लहँगे तक सहला रहा था। नीला पारदर्शी लहँगा और चोली के बीच में उसका गोरा चिकना पेट चमक रहा था। मैं उसके होठों को चूसता हुआ उसके पेट को सहला रहा था। अर्शी गरमा गयी। उसका पेंट अंदर होने लगा, मैंने अपनी जीभ को अर्शी के मुँह में डाल दी। वह भी अपनी जीभ बाहर करके मेरी जीभ से टकराने लगी। मैं उसकी जीभ को अपने होठों के बीच में पकड़ कर चूसने लगा। अर्शी अब पूरी तरह गरमा गई थी और उसकी चूचिया ऊपर नीचे होने लगी अब मैंने अपना हाथ आगे किया और अर्शी की चूचियों को उसकी पारदर्शी नीली चोली केअंदर घूरने लगा । अर्शी ने ब्रा नहीं पहनी हुई थी उसक निपल और गोरा जिस्म नीली चोली के अंदर से चमक रहा था। उसमें से अर्शी के हलके ब्राउन निप्पल जो गुलबी पण लिए हुए थे साफ-साफ दिखाई दे रहे थे।

मैंने अपना खाली हाथ उसके शरीर पर फिरा दिया, उसे सबसे अंतरंग स्थानों में छू लिया। जैसे ही मेरे हाथ उसके शरीर पर दौड़े, वह उत्साह में कराह उठी। जैसे ही मेरे हाथ उसके स्तनों के पास आए, उसने एक गर्म कराह दी। मैं चोली के ऊपर से ही उसके स्तन दबाने लगा।

चोली डीप कट की थी तो मैंने अपने हाथ को थोड़ा-सा तिरछा किया और मेरा हाथ अर्शी की चोली और बा के अंदर उसकी चूची पर पहुँच गया। मैंने अर्शी के स्तन के करारेपन को महसूस किया। चूची को हल्का-सा दबाया और अर्शी आह... करती हुई कमर को उठाकर बदन ऐंठने लगी। मैंने अपना हाथ उसकी ब्रा और नंगी त्वचा के बीच चिपकाते हुए उसके गोल स्तनों पर चलाया और उसके निप्पल को छेड़ा फड़फड़ाया, जिससे अर्शी जोर-जोर से कराहने लगी।

मैं चोली के डोरी को खोलने लगा। मैंने चोली के डोरी खोल कर चोली को किनारे कर दिया और एक चूची को चूमा और फिर कस के मसल डाला। उफफ्फ... अर्शी की हालत खराब होती जा रही थी। मैं उसकी एक चूची की चूमता हुआ दुसरे निपल को मसलने लगा और बीच-बीच में दोनों चूचियों को भी मसल देता था।

फिर मैं अर्शी की ज्वेलरी उतरने लगा। पहले उसने मांगटीका उतारा फिर गले से हार। फिर अर्शी को उठाया और उसके पीछे बैठते हुए उसके गर्दन पर किस किया और उसकी चिकनी पीठ को चूमकर पीठ को बगल को सहलाने लगा मैं उसकी चिकनी पीठ को अपने होठों से चूमता जा रहा था।

मैं उसकी नंगी पीठ को चूमने और सहलाने लगा। अब मैंने अर्शी को फिर से लिटा कर उसे करवट से कर उसके साथ उसके सामने उसके जिस्म से चिपकता हुआ लेट गया और फिर से अर्शी के होंठ चमने लगा और उसकी पीठ, पेट को सहलाने लगा।

अब मैंने अपने कपड़े भी निकाल दिए और-और पूरा नंगा हो गया

मैं उसके पेट को चूमने लगा । वह जोरो से सिसकारी लेते हुए गरम सांसे मेरे चेहरे पर निकाल रही थी और अपनी जीभ से मेरे पूरे बदन को चूमती और चाटती जा रही थी, मैं उसकी निपल्स अपने मुंह में लेकर चूसने लगा और अपने दूसरे हाथ से उसके नाज़ुक बदन को मसलता रहा और इस तरह पूरा कमरा हमारी मादक सिसकारियों और सांसो से भर गया ।

अब अर्शी ऊपर से बिकुल नंगी थी। और मैं उसकी चूचियों को चूस रहा था। मैं बारी-बारी एक एक निपल को मुँह में लेकर बच्चों की तरह चूस रहा था और दूसरे निपल को मसल रहा था। गोरी चूचियाँ लाल हो गयी थी। अर्शी आह्ह... उह्ह... कर रही थी। ओह, तुम्हें ये पसंद है, हुह? मैंने धीरे से अपना हाथ उस स्तन से जिसे मैं दबा रहा था, उसे उसके पेट पर फेरा जैसे ही मैं उसके पेट के पास गया, वह कांपने लगी, बेचैनी से हांफने लगी। फिर मैं अर्शी के पेंट और बगल को सहलाने लगा और पेंट सहलाते हए लहँगा के ऊपर से जांघों को सहला रहा था। मैं उसके पेट की चूमने लगा तो उसने पेट अंदर कर लिया जिससे मेरा हाथ आसानी से लहंगे के अंदर चला गया और मैंने अर्शी की चुत को सहलाया तो मुझे वह गीली लगी । '


मेरा हाथ नीचे पहुँच गया, जब तक कि वह उसके चूत के अधरों तक नहीं पहुँच गया। मैंने गीलापन महसूस किया और एक उंगली से जांच करने लगा। तो वह कसमसा उठी और उसका एक पैर सीधा था और उसने दूसरा पैर उसने मोड़ लिया। मैंने दुसरे हाथ से लहँगा ऊपर करना शुरू कर दिया और फिर लहँगे के अंदर हाथ डालकर अर्शी की नंगी जांघों को सहलाने लगा।



कहानी जारी रहेगी
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02-06-2022, 07:13 PM,
#27
RE: Mera Nikah Meri Kajin Ke Saath
मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ

भाग 23

तीसरी बेगम कमसिन अर्शी की चुदाई




अर्शी का जिस्म कांपने लगा था। मेरा हाथ पैंटी के ऊपर से चूत पर था और मैं चूत के आसपास के एरिया को सहला रहा था। मैंने लहँगा पूरा ऊपर कर दिया और अच्छे से पेंटी को देखता हुआ जाँघों और पैंटी को सहलाने लगा। अर्शी की चूत गीली थी और वह गीलापन पैटी पर भी आ चुका था।

मैंने अर्शी के लहंगे की डोर भी खोल थी और उसे नीचे की ओर खींचने लगा, अर्शी ने अपनी गांड हवा में उठाते हुए अपना लहंगा उतरवाने में मेरी मदद की। अब वह सिर्फ पेंटी में थी औरमैं उसकी बगल में आकर लेट गया और उसका चेहरा अपनी ओर कर उसके होठ चूसने लगता है और अपना एक हाथ नीचे लेकर जाकर अर्शी पेंटी के अंदर डाल दिया और उसकी चूत को सहलाने लगा और फिर धीरे से अपनी एक उंगली गरमाई अर्शी की गीली चूत के अंदर डाल दिया। उफफ्फ... चूत के अंदर का तापमान पूरा बढ़ा हुआ था। उंगली चूत में जाते ही अर्शी का बदन हिलने लगा और उसने मेरे को कस के पकड़ लीया और मेरे होठों को चमने लगी। मैंने चूत में उंगली अंदर-बाहर करने लगा और पैटी को नीचे करता गया। और उसकी पैंटी को उतार दिया।

[Image: ap1.jpg]



अर्शी अब पूरी नंगी लेटी हुई थी मेरे आगे। अब उसके जिस्म में बस चूड़ी, कंगन, पायल, नथ और गले में एक हार था जो मैंने उसे पहनाया था। मैं उसकी खूबसूरत कमसिन नंगे बदन की निहारता रहा और अर्शी ने शर्म के मारे अपनी आँखे अब बंद कर ली थी । मैंने उसके पैर फैलाए तो गोली चूत के होंठ आपस में खुल गये। और अपने हाथों से चूत को फैलाता हुआ चूत पर किस किया और फिर चूसने लगा और साथ में अपनी उंगली भी चूत के अंदर-बाहर कर रहा था और चूत को चूस भी रहा था। हाथ से चूत के छेद को फैलाकर अपनी जीभ को चूत के अंदरूनी हिस्से में सटा रहा था मैं अपनी जीभ से ही अर्शी की चुदाई कर रहा था। जीभ को चूत के अंदर सटाकर चूसा और फिर चूत के दाने को मुँह में भरकर खींचने लगा।

मैंने उसकी चुत में उंगली डाली। अर्शी ने कराहते हुए विलाप किया, उवो अपने कूल्हों को हिलाकर कसमसाने लगी " ओह, आह कर उसका जिस्म काम्पा और अर्शी की चूत का रस उसकी जाँघों से नीचे बहने लगा। और सिसकारी लेती हुई सेक्सी आवाज में बोली प्लीज मेरा पिशाब निकलने वाला है क्या कर रहे हो, मैं समझ गया की उसका लैंड खाये बिना ही क्लाइमेक्स हो गया है

उसके मुँह से आऽ5 उड्... की आवाज निकलने लगी। मैं अर्शी की चूत को चूसता जा रहा था और बीच-बीच में उंगली भी करता जा रहा था। अर्शी हाँफ रही थी। मैं अर्शीकी बगल में सीधा लेट गया।

और वह करवट होकर मेरे से चिपक गई, उसकी चूचियाँ मेरी छाती पर दब रही थी।




[Image: ap2.jpg]


और मैं उसको अपनी बाहो में लेकर प्यार से सहलाते हुए चूमने लगा । मैं इस तरह उसके जिस्म से करीब एक घंटे से भी ज्यादा खेला और फिर अर्शी ने पूछा मैं किसकी तरह लगती हु, तो मैंने जवाब दिया अमीषा जैसी, तो वह बोली अब तुम मुझे अमीषा ही कहा करो, आज से मेरा यही नाम है।



इस तरह करीब 2 घंटे चूमना चेतना चलता रहा, तभी जूनि की आवाज़ आयी चाटते ही रहोगे क्या अरे इसकी चुदाई तो करो और मैंने देखा वह मेरी तीनो बहनो और दोनों बेगमो के साथ रोशनदान से देख रही थी, मैंने उसे डांटा और बोलै भागो यहाँ से तो अमीषा उर्फ़ अर्शी बोली देखने दो इनसे क्या शर्म, फिर में रा लंड पकड़ कर बोली रुख्सार देख इसी शानदार बड़े लंड से तेरी भी चूत फटेगी और फिर उत्तेजना में भर बोली फाड़ दो मेरी चूत एक ही झटके में इस गुफा की झिल्ली अपने हथियार से चीयर कर रख दो और अपनी कजिन की चूत की धज्जिया उड़ा दो, छोड़ दो पटक कर मुझे और कसम है तुम्हे कोई भी रहम या दया मत करना

फिर मैंने उसकी चुत के रस की अपने खड़े लंड पर लगाया एक पतली, चिपचिपी फिल्म में ढके होने तक अपने लंड को मोटे तौर पर सहलाया। एक सेकंड बाद, लथपथ चुत के चारों ओर अपना बड़ा गर्म लंडमुंड रगड़ा।

फिर मैंने उसकी मुलायम झांटो पर अपना लंड टिकाया और फनफनाते हुए लुंड से उसकी चूत रगड़ने लगा और अमीषा उछल-उछल कर मज़े ले रही थी और सिसकारी लेती हुई सेक्सी आवाज में बोली प्लीज मेरा पिशाब निकलने वाला है क्या कर रहे हो, मैं समझ गया की उसका लैंड खाये बिना ही एक बार फिर क्लाइमेक्स हो गया है और फिर मैंने अपने लंड की रगड़े तेज़ की और जैसे ही वह झड़ी और उसने आनंद में आंखे बंद की मैंने उसकी चुत के छोटे से छेद पर लंड का सर टिका दिया। फिर मैं बोला। " अमीषा मेरी रानी, मेरी अर्शी तुम्हारी चूत पूरी तरह गीली है। उसे मेरे बड़े लंड की ज़रूरत है, लेकिन सावधान रहना। यह तुम्हारे लिए एक नया अनुभव होने जा रहा है। यह तुम्हारी अनुमान से कहीं अधिक बड़ा है और मैं यह सुनिश्चित करने जा रहा हूँ तुम पूरा अंदर ले लो। फिर मैंने अपने लंड का बड़ा सिर उसकी चूत पर केंद्रित किया।


[Image: ap3.jpg]


मैंने अपना औज़ार एक ही झटके में उसकी चूत में दे मारा, मेरा बड़ा लंड जबरदस्ती उसके अंदर घुस गया, एक बार लंडमंफ पूरी तरह से उसकी योनि में फिसल गया, एक हलकी-सी रुकावट और फिर फचक की आवाज़ से लंड पूरा जड़ तक समां गया और अर्शी की चीख निकल गयी आईई आआहा आआआआआईईईई इस्सस मगर गजब की हिम्मत थी अर्शी में उसने अपने हांथो में मेरा चेहरा लेकर अपना मुँह मेरे मुँह के साथ लगा कर अपने चीखे मेरे मुँह में निकाली

उसे पसीना आ रहा था और वह हांफ रही है, चूत में भरा लंड उसके पेट में ऐंठन पैदा कर रहा था। पूर्ण, संपूर्ण होने की भावना, के साथ उसने मेरे लंड को अपने अंदर गहराई से समाहित कर लिया मैं वासना से भर गया। उसकी चूत रिसने लगी यह सिर्फ उसकी चूत से रिसने वाला सिर्फ गर्म रस नहीं था इसमें उसकी झिल्ली फटने से निकला खून भी शामिल था और उसके पैरों को नीचे गिराकर विस्तर पर टपक रहा था, जिससे कमरे में गंध आ रही थी है। मेरा चेहरा उसकी गर्दन में दब गया, मेरी सांसें मेरे लंड की तरह ही गर्म, सख्त, भारी हो गयी। अर्शी अपनी कानो में मेरी कम खतरनाक कराह सुन रही थी अर्शी ने अपने जीवन में कभी भी किसी आदमी से आदिम जानवरों की कराह नहीं सुनी थी। वह अपनी भारी, श्तेज सांसों के बीच फुसफुसा और कराह रही थी। ये उसके लिए बहुत कठिन और तकलीफ भरा था। मैं उसके शरीर को जमकर लूट रहा था, मैं बार-बार अपने लंड को उसके भीतर दबा रहा था।

और फिर मो मेरे नंगे कूल्हों पर पाने हाथ रख कर मुझे चूमते हुए बोली बहुत दर्द हुआ लेकिन मुझे गर्व है की इसको तुमने एक धक्के में ही फाड़ दिया अब 2 मिनट शांत रहो और मेरे बदन को चूमो और जब में अपने चूतड़ उछालूं तो राजधानी की स्पीड से चोदना।


[Image: ap4.jpg]

और मैं पहले ही झड़ चुकी हु मेरी फ़िक्र न करते हुए मस्ती से अपना पूरा रस मेरी योनि में डाल देना, मुझे आज चौदवा दिन है और में तुम्हारे बचे की माँ आज ही की चुदाई में बनना चाहती हु ।

अर्शी की आँखों से आंसुओ की धारा बहने लगी और उसने उन्हें गिरने दिया। उसने परवाह नहीं की। उसने सिसकने के बीच जब दर्द थोड़ा कम हुआ तो उसने चूतड़ उछाल कर मुझसे चुदाई शुरू करने की गुहार लगाई, अब कोई परवाह नहीं थी।

फिर मेने ऐसे देखे मारे की उसकी नानी यद् आ गयी, वह अब चुप नहीं थी: वह जोर से कराह रही थी जोर से और लंबी, बिना शर्म के कराह रही थी और मुझे चूम रही थी, उसका शरीर मजे में डूबा, फिर भी एक लंबे समय तक नशे की लत की तरह वह बार-बार मुझसे और जोर से और जोर और तेज चोदने के लिए बोलती रही। मैं हर ज़ोरदार धक्के के साथ कराहने लगा, मैंने उसे जोर से जोर से धक्के मारे और मेरा लंड उसकी चूत के अंदर हर बार उसके गर्भाशय ग्रीवा से टकरा रहा था। हम कराह उठे और बार-बार कराह उठे, और 30 मिनट तक लगातार बड़े-बड़े धक्के मार कर छोड़ने के बाद मैं आनंद रस से भीग गया

मैंने मेरे लंड का सिर उसके गर्भाशय ग्रीवा के खिलाफ कसकर दबा दिया, और मैं हिंसक रूप से काँप रहा था क्योंकि लंड उसके भीतर सूज गया था। जैसे ही मैंने उसके भीतर विस्फोट किया, हमारी चीखें तेज हो गईं और वह भी कांपते हुए मेरे साथ ही झड़ गयी और मेरा रस पूरी तरह से उसके साथ घुलमिल गया, ताकि एक दिल की धड़कन के लिए, हम एक इकाई हों गए। उसकी चूत अभी भी ब्लास्ट फर्नेस की तरह गर्म थी, मैंने एक गहरी सांस ली।


कहानी जारी रहेगी
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02-06-2022, 08:47 PM,
#28
RE: Mera Nikah Meri Kajin Ke Saath
मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ

भाग 24

तीसरी बेगम की चुदाई



मैं झड़ने के बाद भी उसे किस करता रहा। करीब 30 मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों ही साथ में झड़ चुके थे। लेकिन हम दोनों साथ में चिपक कर लेटे रहे l कुछ ही देर में मैंने खुद को अर्शी के बदन से खुद को उठा लिया, उसका सिर पीछे की ओर लुढ़का हुआ था, उसकी आँखें बंद थीं, मुश्किल से साँस ले रही थी। हालाँकि, उसका दिल तेजी से धड़क रहा था पर वह उस चरमसुख को अनुभव कर रही थी जिससे वह अभी-अभी गुज़री थी। मैंने चादर को देखा, तो उस पर खून लगा हुआ थाl मैंने उसे फिर से चूमा तो वह मुस्कुराने लगी और मुझसे चिपक गई.

अर्शी की ऐसी जबरदस्त चुदाई के बाद, अर्शी का भी सारा दम ही निकल गया और मैं हांफती हुयी तेज-तेज सांस लेती हुए, निढाल अर्शी की बगल में गिर गयाl भयंकर उत्तेजना के साथ चमकते हुए, मेरी आँखें अर्शी को ही निहार रही थीl वह भी तेज-तेज साँसे ले रही थे और उसके साथ ही उसके स्तन और निप्पल ऊपर नीचे हो रहे थेl जिन्हे देख कर मेरे लंड जो की अर्शी की चूत में ही था और झड़ने के बाद आधा ढीला हुआ था, फिर से खड़ा हो गया l मैंने उसकी चूत के गहरे और संकीर्ण मार्ग में अपना जो लंड घुसा कर रास्ता बनाया था, उसे मेरे रस ने चिकना कर दिया था।



[Image: a1.png]

वह धीरे-धीरे यही और लंगड़ाती हुई चुपचाप बाथरूम में चली गई मैं उसके साथ चला गया उसने शावर चला का खुद की धोया और धीरे से अपना हाथ मेरे शरीर के सामने घुमाया और हल्के से मेरे लंड को पकड़ लिया। मेरा लंड उसके हाथ में बड़ा और सख्त हो गया। वह मेरे से चिपक गयी और जैसे-जैसे वह अपना हाथ लंड पर आगे-पीछे करती रही और उसके सख्त निप्पल मेरी छाती पर दब गए हैं। उसने मेरी गर्दन के पिछले हिस्से को पकड़ा और मेरे मुंह को अपनी ओर खींच मुझे लंबा और जोर से चूमने लगी है। धीरे-धीरे अपनी जीभ को मेरे मुंह में डालने से पहले उसने मेरे ओंठो को चूसा। मैं अपने बालों में उसके हाथों को महसूस कर सकता था, वह हल्के से मेरे सिर को तब तक अपने पास खींच रही थी जब तक कि उसके ओंठ और जीभ लगभग पूरी तरह से मेरे मुँह में नहीं थे, उसने मेरे मुँह पर लगा अपने सह और रस का स्वाद चखा जो मेरे मुँह म तब लगा था जब मैंने उसकी चूत का रस चाटा था। उसने घुटनों पर बैठने से पहले मेरे नीचे के होंठ को हल्का-सा काटा। फिर उसने नीचे बैठ कर अपना गर्म, गीला मुँह खोला और मेरे लंड के सिरे को चाटा। मेरा एक हाथ उसके मुंह को आगे-पीछे करने में मदद कर रहा था और मैं वहा तब के किनारे पर बैठ गया और अपना दूसरा हाथ उसके पैरों के बीच घुमाया। । मैंने दो अंगुलियों को उसकी चूत में फिराया उसने नीचे झुककर मेरी उंगलियों से अपनी नमकीन मिठास चूस ली।

हमने तौलिया ले कर एक दुसरे को सुखाया और वापिस कमरे में आ गए हम बेडरूम में गए, अर्शी बिस्तर पर लेट गयी, उसने अपनी आँखें बंद कर लीं।


अर्शी लंगडाते हुए चल रही थी, मैंने अर्शी से पुछा । कैसी लगी तुम्हे पहली चुदाई? तो वह बोली बहुत दर्द हुआ लेकिन मुझे गर्व है कि इसको तुमने एक धक्के में ही फाड़ दिया फिर मजा भी बहुत आया । फिर वह बोली आपको नमकीन और कमसिन का मज़ा आया?

मैंने कहा तुमने सच कहा था की ज़ीनत तो मीठी है और जूनि के साथ कमसिन और खट्टी मीठी का मजा आया लेकिन दोनों चिल्लाती बहुत हैं । अर्शी तुम गजब हौसले वाली हो । नमकीन और कमसिन का मजा तो तुम्हारे साथ ही आया और तुम मेरे बड़े लंड की चुदाई को आधे घंटे तक झेल गयी और तुम्हारी पहली चुदाई ने मेरा भी दम निकाल दिया ।



ऐसे ही प्यार और मस्ती भरी बाते करते करते मैंने उसके बदन पर हाथ फेरा और उसे चूमा और अपने अंगूठे और तर्जनी से उसकी जांघों के अंदरूनी हिस्से पर चुटकी ली। इस विधि का उपयोग करके मैंने उसे अपने पैरों को चौड़ा खोलने के लिए मजबूर किया। मुस्कुराते हुए, मैंने अपनी उंगली को उसके बहुत संवेदनशील सूजी हुए चूत के होंठों पर थपथपाया और अंदर डालने की कोशिश की चूत जबरदस्त चुदाई के कारण सूज गयी थी और बड़ी मुश्किल से मेरी ऊँगली थोड़ी-सी चूत में घुसी और उसकी सिसकारी निकल गयी और जिस्म कांप गया मैंने काम जारी रखा एक दम से उसने मेरा लंड पाकर लिए और दबा लिए।

अर्शी मुझे चूमने लगी उसके चेहरे पर वहशहत थी आँखें सुर्ख अंगारा हो रही थी .।. एक दम वह आगे हुई और मेरे गले लग गयी और मुझे भींच लिया। मुझे अपने सीने पर उसके नरम-नरम रास मलाई जैसे बूब्स महसूस हुए, उसके बदन से आग निकल रही थी और जिस्म से मोगरे की हलकी-हलकी मस्त खुशबु आ रही थी जो मुझ पर नशा तारी किये जा रहा था । फिर मैंने भी उसके मखमली होंठों को अपने होंठों मैं दबा लिए और उसका शहद पीने लगा । वह भी भरपूर साथ देने लगी और जानवरों की तरह मेरे होंठ चूसने लगी। मैंने अपना हाथ उसकी चूत पर फेरा तो उसकी सिसकारी निकल गयी ।आह! उह!,





[Image: ar.png]

उसने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ लिया और अपने सॉफ्ट हाथों से उसे सहलाने लगी। मेरा लंड फूल कर खीरा बन गया और उसके हाथ से बाहिर निकलने की कोशिश करने लगा। अब उसने दूसरा हाथ भी शामिल कर लिया और कभी मेरे लंड को और कभी मेरे अंडो को सहलाने लगी मैं भी उसकी फुद्दी पर ऊँगली चलने लगा जो की चुदाई के कारण बिलकुल सूज गयी थी और बिलकुल बंद थी।

मैं उसे लिए हुए बिस्तर पर लेट गया और हैवी किसिंग शुरू कर दी 15 मिनट किसिंग करने के बाद मैं दूर हुआ और आज स्पीड ब्रेकर को तोड़ने के बाद जो नयी-नयी सड़क बनी थी उस पर मुझे-मुझे अपनी बड़ी स्पोर्ट्स कार को फुल स्पीड से भागना था।

बिस्तर पर सीढ़ी लेटते हुए अर्शी ने अपनी बाँहें खोल दीं और मुझे अपने ऊपर आने का इशारा किआ उस का बदन काँप रहा था । मैं घुटनो के बल बैठ गया और उसकी चूत मैं ऊँगली डाली तो उसने मस्त कराह भरी उसकी सिसकीआं मुझे सब समझा रही थी ।.मैंने ऊँगली बाहर निकाली तो वह लैस दर पानी से भीगी हुई थी मैंने उसे चाटा तो नमकीन और स्ट्रांग टेस्ट महसूस हुआ । मैंने अपना मुँह उसकी रस भरी चूत पर रख दिया । मैंने पीछे दो तीन दिन चुदाई नहीं की थी इसलिए जब ऐसा नमकीन रसदार माल मिला तो मैं बोहोत अरसे बाद गोश्त खाने वाले की तरह हड्डी भी चूस के फेंकना चाह रहा था । मैंने उसे पकड़ लिया और दबा दिया और अपनी लम्बी ज़ुबान निकल कर उसकी चूत की लाइन पर फेरी तो वह मज़े से अपना सर इधर उधर करने लगी और अपने आप को मेरे रहमो करम पर छोड़ दिया...मैंने ज़ुबान को चूत के सुराख मैं घुसना शुरू कर दिया और फिर उसकी चूत के उभरे हुए और जूसी लिप्स को मुँह मैं दबा लिए और चूसना शुरू कर दिया.


उसके कुछ भी बोलने से पहले मैंने उसकी चूत पर जीभ फिरा दी । वो मीठे मजे के साथ कराह उठी । उत्सुकता से मैंने अपनी जीभ से, चूत के ओंठो को छेड़ते हुए चूत का मोटा दाना खोजा। उसके उसके सबसे संवेदनशील तंत्रिका के ऊपर मेरे स्पर्श ने उसके कंपा दिया।



कहानी जारी रहेगी


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02-21-2022, 05:50 PM, (This post was last modified: 02-21-2022, 05:52 PM by aamirhydkhan. Edit Reason: part 24 reposted by mistake now corrected )
#29
RE: Mera Nikah Meri Kajin Ke Saath
मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ

भाग 25

तीसरी बेगम की तृप्ति वाली चुदाई



इस के साथ मैंने अपने मुँह को खोलते हुए अपनी लंबी ज़ुबान निकाल कर नीचे से अर्शी की सूजी हुई चूत की मोटी दरार को चाटना शुरू कर दिया।

"ओह" मेरी नुकीली ज़ुबान अपनी पिंक चूत के अंदर घूमते हुए महसूस कर के अर्शी कराह उठी।

मेरी चुसाई ये अर्शी की गरम सिसकियाँ उन के मुँह से निकल-निकल कर कमरे में गूँज रही थी। " ओह, अह्ह्ह्ह! हाईईई! उफफफ़! उम्म्म! ओह्ह्ह!

"अर्शी अब तुम मुझ पर चढ़ कर मेरा लंड अपनी फुद्दि में डालो" थोड़ी देर उसकी फुद्दि को चाटने के बाद मैंने अर्शी को अपने जिस्म के ऊपर चढ़ा लिया।

फिर मैंने नीचे से अर्शी की गीली और गरम चूत के साथ अपना लंड मिला कर अर्शी को उस की कमर से पकड़ा और उसे नीचे की तरफ खैंचते हुए खुद अपनी गान्ड को ऊपर की तरफ उठा दिया।

मेरे चूसने और उसके बाद लौडे की रगड़ से अर्शी की चूत दुबारा से बुरी तरह गरम हो गयी थी।

अचानक मैं बिस्तर से थोड़ा उपर उछला और गुप्प्प्प से अर्शी की चूत के अंदर आधा लंड घुस गया। जब मेरा लंड फिसलता हुआ तक़रीबन आधा अंदर चला गया था मुझे लंड पर कुछ बोहोत गरम चीज़ महसूस हुई और मेरा लंड भीग गया उसके चेहरे को देखा जो की तकलीफ की वजह से बिगड़ गया था और उसकी आँखों से आंसू बहने लगे । मुझे उस पर तरस आया के लंड से चुदने के चककर के कितनी तकलीफ बर्दाश्त कर रही है और अपना लंड बाहर निकल कर अंदर डाला तो उसके रस से तर लंड थोड़ा फ्रीली आ जा रहा था अब मैंने बहरपुर अंदाज़ मैं उसे चोदना शुरू कर दिए और बैठ गया तो अर्शी मेरी गोदी में आ गयी और मैंने अपने होंठ उसके होंठों मैं डाल दिए अब वह भी मज़े ले रही थी मेरे लंड डालने के बाद मुझ से और चिपकने के कोशिश करती जैसे मुझे भी अंदर घुसने की कोशिश कर रही हो । मैं मुससल धक्के मारने लगा अब उसके जिस्म ने भी कांपना शुरू कर दिए और उसकी चूत एक गरम पानी छोडने लगी जिस मैं मेरा लुंड भीग गया और फच-फच की आवाज़ आने लगी ।

अर्शी की कमर को मैंने अपने दोनों हाथों से कस के पकड़ रखा था। फिर मैंने अर्शी के बदन को नीचे की तरफ खैंचा। तो चूत पहले से गीली होने की वजह से नेमेरा खड़ा लंड फिसलता हुआ अर्शी की चूत की गहराई में चला गया।

मेरे लंड के पहले धक्के पर अर्शी के मुँह सिसकारी निकली " आईईईईई! ऊओीईएईई! उफफफफ्फ़!

उसकी गरम फुद्दि में लंड डालते ही मैंने अपने हाथ नीचे ले जा कर अर्शी की चूत के सूजे हुए लिप्स को अपने हाथ में ले कर दबाया। तो उसकी चूत ने मेरे बड़े लंड को मुकम्मल तौर पर अपनी ग्रिफ्त में ले लिया था।



[Image: SF1.jpg]


मेरे तनकर खड़े लंड पर अर्शी धीरे-धीरे अपनी चूत दबाकर लंड को अन्दर घुसा रही थीं। मुझे उस समय बहुत मज़ा आ रहा था। वह मेरे लंड पर धीरे से उठतीं और फिर नीचे बैठ जातीं, जिसकी वजह से लंड अन्दर बाहर हो रहा था। वह खुद अपनी चुदाई मेरे लंड से कर रही थीं और बहुत मज़े कर रही थीं। सच में नंगी अर्शी मेरे लंड पर उछलते हुए मुझे बहुत मादक लग रही थीं। उनके रेशमी काले बाल चारों तरफ फ़ैल गए थे।

चूत के लिप्स को अपने लंड कर इर्द गिर्द ज़ोर से दबाते ज़ाहिद नीचे से अपनी बहन की फुद्दि में हल्के-हल्के धक्के लगाने लगा। अर्शी के मुँह से सिसकारियो का एक सैलाब उमड़ आया। "हाईईई! ओह!" और अब अर्शी खुद लंड के उपर नीचे होती हुई अपनी गरम चूत चुदवाने लगी। मैंने नीचे से एक ज़ोर दार झटका दिया। तो उस का पूरा लंड अर्शी की चूत के अंदर घुस गया और सीधा अर्शी की बच्चादानी से टकराया। "आअहह, मार डाला!" मैं अब अर्शी की कमर पकड़ के नीचे से लंबे-लंबे धक्के लगाने लगा।

मेरे जोश से अर्शी की चूत मेरे लंड पर ही वह झड़ने लगी। "ऊओ चोदो मुझे, आज फाड़ दो कीईईई! । चूऊऊओत, आ! उउफफफफ्फ़! हाइईइ!"।

मेरा लंड फ़च फ़चफ़ की आवाज़ के साथ अर्शी की फुद्दि में अंदर बाहर हो रहा था और अर्शी की चूत मेरे मोटे लंड को अपने अंदर ज़ोर से जकड रही थी। अर्शी को चोदते-चोदते मैं उसको अपनी बाहों में उठाए हुए बिस्तर से उतर कर फर्श पर खड़ा हो गया।

बिस्तर से उठ कर कमरे के फर्श पर खड़े होने के बावजूद मेरा मोटा और बड़ा लंड अभी तक उस की फूली हुई तंग चूत में जड़ तक ठूँसा हुआ था। मैंने बड़े आहतीमाद से अर्शी को अपने मज़बूत बाजुओं के ऊपर उछालते हुए अपना तना हुआ लंबा लंड उसकी चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। ये अंदाज मेरे लिए भी बिल्कुल नया और मज़ेदार था।

अर्शी ने अपने बाज़ू मेरी गर्दन के गिर्द लपेट लिये और मेरे साथ चिपट गयी और अब उसका पूरा भार मेरे ऊपर था । मुझे बहुत मजा आ रहा था ।

इसीलिए उस ने मज़ीद जोश में आते हुए अपने दोनों हाथों से अर्शी के रानों को थाम कर अर्शी के जिस्म को हवा में उछाल-उछाल कर तेज़ी के साथ उस की फुद्दिको लंड के ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया।





[Image: SF2.jpg]



इस चुदाई से अर्शी को भी मज़ा आने लगा। और वह भी अपने मोटे-मोटे चूतड़ उछाल कर और हिला कर मेरा मोटा लंड अपनी चूत के अंदर बाहर लेने लगी। उसकी चूत ने पहले जो पानी छोड़ा था उसके कारण उसकी चूत तर थी और इसीलिए उस की चूत मेरे हर धक्के पर फचाक-फचाक की आवाज़ निकल रही थी।

"ऊऊओिईई! मेरे राजा, अह्ह्ह्ह! मैं गयी अह्ह्ह्ह!" कहते हुए अर्शी ने अपना पानी छोड़ दिया और उसकी गीली चूत से पानी बह-बह कर मेरे लंड के साथ-साथ कमरे के फर्श को भी गीला कर दिया।

कोई 15, 20 सेकेंड्स तक अर्शी के जिस्म को झटके लगते रहे और फिर वह निढाल हो कर मेरी बाजुओं में ही झूल गई।

मैंने आहिस्ता से अर्शी को दुबारा बिस्तर पर लिटा दिया और खुद भी उस के ऊपर ही लेट गया। मैं अभी तक फारिग नहीं हुआ था। इसीलिए मेरा लंड अभी भी लोहे की रोड की तरहा अर्शी की चूत में घुस कर खड़ा था। अर्शी मेरे नीचे लेटी हुई गहरे-गहरे साँस ले रही थी।

मैं अर्शी को बेकरारी से चूमने लगा। चूमते हुए हमारे मुँह खुले हुए थे, जिसके कारण हम दोनों की जीभ आपस में टकरा रही थीं। फिर मैंने अर्शी की जम कर चुदाई की और उनको जन्नत की सैर कराई. फिर थोड़ी देर के बाद वह फिर झड़ गईं। अर्शी कई बार झड़ने के बाद निढाल हो रही थीं। मैं उनकी चूत में धक्के लगाने चालू रखता तो अर्शी फिर गर्म हो जाती थीं। आखिरी बार हम दोनों एक साथ झड़ गए. हम दोनों जन्नत में थे ... सच में बहुत मज़ा आ गया। मुझे अर्शी के चेहरे पर संतुष्टि साफ-साफ नजर आ रही थी।

उसके बाद मैं अपना लंड उसकी चूत में डाले हुए ही सो गया, सुबह 8 बजे जब मेरी नींद खुली तो अपना लंड उसकी झांटो पर पाया और पूरा बिस्तर उसके खून से लाल था, मैंने अर्शी को उठाया और उसे चूमा, ज़ीनत और जूनि तो चिल्ला-चिल्ला कर दिमाग ख़राब कर दी थी, पर तुमने मुझे बहुत मजा दिया है उसने कहा तुमसे महीने में 1 हफ्ते चुदना ही ठीक है नहीं तो चूत भोसड़ी बन जाएगी और तुम मुझे नहीं चोदोगे ।

इस तरह 7 दिनों तक मैंने अर्शी की जम कर चुदाई की और उसे तृप्त कर दिया ।

कहानी जारी रहेगी


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02-23-2022, 09:15 AM,
#30
RE: Mera Nikah Meri Kajin Ke Saath
मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ

भाग 26

तीन सौत कजिन 



मैंने इस तरह अपनी नमकीन जानेमन बेगम अर्शी की दिल खोल कर चुदाई की और फिर सातवे दिन ज़ीनत आपा मेरे पास आयी और शिकायत करते हुए बोली सलमान वही हुआ न जिसका मुझे डर था कि ऐसी कमसिन अल्हड जिस्म की मल्लिका को छोड़ सलमान तुम मेरे पास तो बड़ी मुश्किल से ही आओगे और तुम्हे नयी कमसिन दुल्हन क्या मिली तो मुझे भूल गए। कहाँ तो तुम कहते नहीं थकते थे की आपा आपके देखते ही मेरा दिल बेकाबू हो जाता है और अब 10 दिनों से भी ज्यादा दिनों से मेरे पास भी नहीं आये हो।

मैं ज़ीनत आपा से कान पकड़ कर बोला मुझे माफ़ कर दो मेरी जान मेरी आपा । ये सब अम्मी ने जो रूल मेरे लिए बनाया है उसके कारण हुआ और इसी कारण मैं पिछले हफ्ते से सिर्फ अर्शी की ही चुदाई कर रहा था और उससे पहले आपकी चुदाई आपकी गांड और चूत सूजने के कारण बंद हो गयी थी । उस दौरान मैं आपकी चुदाई के लिए बहुत तड़पा था ।



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कुछ दिन की जुदाई के बाद मिलने का मजा अलग ही है चलो अब मेरे पास आ जाओ मैंने उन्हें अपने पास खींचा और उनको चूमने लगा और फिर मैंने उन्हें नंगी किया और चोदना शुरू कर दिया।

इसी समय अर्शी ने भी कमरे में प्रवेश किया और मुझे और ज़ीनत को नग्न अवस्था में लेटे और एक-दूसरे से चिपट कर चुदाई करते देख चौंक गईं। अभी अर्शी की चुदाई का हफ्ता चालु था इसलिए ज़ीनत और अर्शी के बीच तीखी नोकझोंक हुई और फिर लड़ाई हुई और जूनी इस में शामिल हो गई। मेरी तरफ से बहुत बीच बचाव करने के बाद भी वह सभी लड़ती रही तो मैंने धमकी दी जो अब आगे लड़ेगी और उसे तलाक दे दूंगा।



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मैंने उन्हें सम्बोधित किया, "सुनो मेरी प्यारी जीनत, जूनी और अर्शी तुम सब मेरी कजिन बहनें हो और अब मेरी बेगमे हो। मैं तुम सभी के साथ समान व्यवहार करूंगा। मुझसे वादा करो कि अब आगे तुम आपस में कभी नहीं लड़ोगी, अन्यथा तुम सब मुझे ता उम्र के लिए खो दोगी।"

उन्होंने एक स्वर में मुझसे वादा किया की अब आप मेरे मालिक और शौहर और खाबिन्द हैं। हम आपको वादा करती हैं अब हम सब बहने वापिस में एक दुसरे के पहले जैसे करीब हैं। हम एक-दूसरी के साथ सब कुछ साझा करेंगी। अब हमारे बीच कोई ईर्ष्या, प्रतिद्वंद्विता और झगड़ा नहीं होगा। आप हमें एक बार में एक ही बिस्तर पर चोद सकते है या आप अपनी इच्छा से हमें अलग से जब चाहे जैसे चाहे चोद सकते हैं। "

और फिर लड़ाई शुरू करने वाली अर्शी ने ज़ीनत आपा से माफ़ी मांगी और जूनी ने ज़ीनत और अर्शी दोनों से माफ़ी भी मांगी और साथ में अर्शी और जूनि ने हमेशा ज़ीनत आपा की बात मानने का वादा किया तो उनमे समझौता हो गया और मामला समाप्त हो गया।

मैंने उस तीनो को गले लगाया और तीनो को प्यार से माथे पर चूमा। फिर मैंने ज़ीनत का चेहरा अपने हाथों में लिया, उसके गाल, उसके कान, ठुड्डी और उसके चेहरे के किनारे को अपनी उंगलियों से गालो पर सहलाया। जूनि मेरे पास हुई और मेरे ओंठ चूमने लगी तो मैंने अपने दूसरे हाथ से अर्शी के सिर के पिछले हिस्से को सहलाया और धीरे-धीरे उसकी सर को सहलाया, उसके घने बालों के बीच में से उँगलियाँ चलाईं, आँख से संपर्क करते हुई उसकी आँखों से बालों की लटे दूर कीं। मुझे उसके लंबे, घने आलीशान, चमकदार, चमकदार, रेशमी जेट-ग्रे बालों को सहलाने का अनुभव पसंद आया। मैंने उसके कानों को एक अतिरिक्त दुलार देने के लिए उसके दोनों कानों के पीछे उसके बालों की कुछ लटे टक दीं।

ज़ीनत आपा ने महसूस किया कि मेरे सुडौल हाथ उसके चौड़े कंधों तक चले गए थे। जब ज़ीनत आपा ने मेरे पसीने की प्राकृतिक महक को साँस में लिया, तो उसके शरीर से अधिक गर्मी निकलने लगी।

मैंने प्यार, के साथ उसके चेहरे को धीरे से अपने हाथों में सहलाया। मैं अब इन तीनों को प्यार करना चाहता था। मैं जूनी की चौड़ी अभिव्यंजक आँखों में देखा तो मैंने उनमे कामुक इच्छा को पाया। यह एक अनियंत्रित और तेज कामुक इच्छा थी जो उसके चूमने के तरीके से मुझे महसूस हुए। मेरे ओंठ चूमते हुए उसकी खुली हुई बड़ी-बड़ी आँखें मेरी आँखों में देख मुझे आमंत्रित और कामुक कर रही थीं।

ज़ीनत आपा ने आवेगपूर्ण ढंग से, उसने मेरे माथे, आँखों, पलकों और गालों पर चूमा। ज़ीनत आपा मेरे से लिपट गयी और अपने चेहरे को आसानी से मेरे कानो पर ले गयी और जैसे कि उसने मेरे कान को चूमा, चाटा और प्यार से, धीरे से, धीरे-धीरे और पूरी तरह से मेरे कानों को चाटा और कुतर दिया, जबकि उसकी उँगलियाँ ईयरलोब के पीछे सहलाती रही। उसने मेरे कान के लोब, कान के किनारों और कानों के पीछे के क्षेत्र को धीरे से चूमा।

मैं जूनि को चूमता रहा और उसके कानों पर हाथ फेरा और उसके कानों के पीछे अपने होठों से भी सहलाया और उसके कानों के लोबों को अपने मुंह में ले लिया और जूनि ने मेरी ठुड्डी और नाक को चूमा।

मेरा दूसरा हाथ अर्शी के बूब्स पर चला गया था और मैं उसके बूब्स दबा कर उसके निप्पलों से खेलने लगा। ये महसूस कर के की मैं उसके बूब्स से खेलना चाहता हूँ तो जीनत ने मुझे छोड़ कर अर्शी के कपडे निकालने शुरू कर दिए और अर्शी जुनि को चूमते हुए उसके कपडे निकालने लगी और उसे ऐसा करते चूमते समय ज़ीनत ने प्यार से अर्शी की गर्दन को सहलाया, वह उत्सुकता से जीनत के चुंबन स्वीकार कर रही थी और कामुकता से भर कर अर्शी प्यार से जूनि नंगी करती जा रही थी

और उसे चाट रही थी और जूनि प्यार से मेरी छाती को चूम रही थी और मेरे ओंठो की और आगे बढ़ रही थी और उसने मेरे चेहरे को बारीकी से और मेरे माथे, पलकें, आँखे फिर गाल फिर नाक गाल, ठोड़ी, गर्दन, कंधे और सभी को चूमा और फिर हमारे ओंठ जुड़े उससे पहले उसने मेरे रसदार मोटे होंठों पर एक उंगली चलाई और निचले होंठ को पकड़कर एक नरम चुंबन दिया, कुछ सेकंड के लिए चुंबन को पकड़कर मेरे होंठों को सहलाने के लिए रुक गयी। उसने अपनी जीभ की नोक को मेरे मोटे, गीले, रसीले ऊपर और नीचे के होठों पर चलाया। अंत में, उसने अपनी जीभ को मेरे गीले रसीले मोटे होंठों को आमंत्रित करते हुए मुझे मेरे मुंह को खोलने के लिए मजबूर किया।


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कुछ देर बाद मैंने जीनत को चोदना शुरू कर दिया और बाकी दोनों अर्शी और जूनि आपस में चूमने चाटने लग गयी ।
मेरा लंड बड़ी आपा जीनत की-की चूत की दीवारों को चौड़ा करता हुआ अंदर जाने लगा। जीनत आपा सब कुछ भूल कर मेरे सीने से लग गई। जैसे ही लंड जीनत आप की चूत को चीरता हुआ आगे बढ़ा जीनत मुँह से "आहहऽ" की आवाज निकली और मेरा लंड पूरा का पूरा आप की चूत में धंस गया और जूनि जीनत के एक निप्पल को सहलाने लगी और माथे पर प्यार से हाथ फिराने लगी और अर्शी जीनत के दुसरे निप्पल को सहलाने लगी और मैं जीनत को चूमते हुए उसे चोदने लगा l



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फिर मैं इस पोजीशन में अर्शी उसके बाद जूनि के होंठों को चूमने लगा। तो जीनत आपा अपने नितम्ब ऊपर उठा कर मेरे लंड को और अंदर लेने लगी l

मैं बोला अब पता चला कि मुझसे मिलने के लिये आपा आप कितनी बेसब्र हो ... कहकर मैंने एक जोर का शॉट मारा और मेरा लंड आपा की चूत को रगड़ता हुआ बाहर की ओर निकला और फिर वापस पूरे जोर से आपा की चूत में अंदर तक धंस गया।



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" ऊऊऊहह दर्द कर रहा है। आपा ने अब मेरी चुदाई में आगे-पीछे होने की गति से अपनी ताल भी मिलाई। मेरे जोर-जोर के धक्को से बिस्तर हिलने लगता और जीनत आपा जल्द ही झड़ गयी।


उसके बाद जीनत ने मेरा लंड जूनि के चूत में घुसाया और मैंने उसकी चुदाई की और फिर उसे झाड़ने के बाद जीनत आप ने मेरा लंड अर्शी की चूत में घुसाया और फिर मैंने अर्शी की चुदाई की और इस बार हम दोनों एक साथ झड़ गए इस बीच जो चुद रही होती थी उसे बाकी बेगमे छूती, सहलाती और चूमती रही और उन्हें ऐसा करते देख कोई सोच भी नहीं सकता था कि ये तीनो कुछ देर पहले जंगली बिल्लिओ की तरह लड़ी थी ।



कहानी जारी रहेगी
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