Porn Story गुरुजी के आश्रम में रश्मि के जलवे
05-03-2021, 01:59 PM,
#91
RE: Porn Story गुरुजी के आश्रम में रश्मि के जलवे
औलाद की चाह

CHAPTER 6 - पांचवा दिन

महायज्ञ की तैयारी-

‘महायज्ञ परिधान'

Update -30

यज्ञ से सुसन्तति की प्राप्ति 

यज्ञों का आश्चर्यजनक प्रभाव, जहाँ मनुष्य की आत्मा, बुद्धि एवं निरोगता पर पड़ता है वहाँ प्रजनन प्रणाली की भी शुद्धि होती है। याज्ञिकों को सुसंतति प्राप्त होती है। रज वीर्य में जो दोष होते हैं उनका निवारण होता है। साधारण और औषधियों का सेवन केवल शरीर के ऊपरी भागों तक ही प्रभाव दिखाता है पर यज्ञ द्वारा सूक्ष्म की हुई औषधियाँ याज्ञिक स्त्री पुरुषों के श्वाँस तथा रोम कूपों द्वारा शरीर के सूक्ष्म तम भागों तक पहुँच जाती हैं और उन्हें शुद्ध करती हैं। गर्भाशय एवं वीर्य कोषों की शुद्धि में यज्ञ विशेष रूप से सहायक होता है।

जिन्हें संतति नहीं होतीं, गर्भ पात हो जाते हैं, कन्या ही होती है, बालक अल्प जीवी होकर मर जाते हैं वे यज्ञ भगवान की उपासना करें तो उन्हें अभीष्ट संतान सुख मिल सकता है। कई बार कठोर प्रारब्ध संतान न होने का प्रधान कारण होता है, वैसी दशा में भी यज्ञ द्वारा उन पूर्ण संचित प्रारब्ध का शमन हो सकता है।

गर्भवती स्त्रियों को पेट से बच्चा आने से लेकर जन्म होने तक चार बार यज्ञ संस्कारित करन का विधान है ताकि उदरस्थ बालक के गुण, कर्म, स्वभाव स्वास्थ्य रंग रूप आदि उत्तम हो।

गर्भाधान, पुँसवन, सीमन्त, जातक यह चार संस्कार यज्ञ द्वारा होते हैं जिनके कारण बालक पर उतनी छाप पहुँचती है जितनी जीवन भर की शिक्षा दीक्षा में नहीं पड़ती। ऋषियों ने षोडश संस्कार पद्धति का आविष्कार इसी दृष्टि से किया था। उस प्रणाली को जब इस देश में अपनाया जाता था तब घर घर सुसंस्कृत बालक पैदा होता था। आज उस प्रणाली को परित्याग करने का ही परिणाम है कि सर्वत्र अवज्ञाकारी, कुसंस्कारी संतान उत्पन्न होकर माता पिता तथा परिवार के सब लोगों को दुख देती है।

सन्तान उत्पादन के कार्य में यज्ञ का अत्यन्त ही महत्वपूर्ण स्थान है। जिनके सन्तान होती है, वे अपने भावी बालकों को यज्ञ भगवान के अनुग्रह से सुसंस्कारी, स्वस्थ, बुद्धिमान, सुन्दर और कुल की कीर्ति बढ़ाने वाले बना सकते हैं। जिन्हें सन्तान नहीं होती है वे उन बाधाओं को हटा सकते हैं जिनके कारण वे सन्तान सुख से वञ्चित हैं। प्राचीन काल में अनेक सन्तान हीनों को, सन्तान प्राप्त होने के उदाहरण उपलब्ध होते हैं,।

अयोध्या नरेश श्री दशरथ जी विप्रों की अनुमति से राजा ने उस यज्ञ पुरुष के हाथ से खीर लेकर प्रसन्नता से सूँघा और अपनी पत्नी को खाने के लिये दे दिया
रानी ने खीर खाकर पति के गर्भ को धारण किया और समय पूरा होने पर पुत्र उत्पन्न किया

करन्धम के पुत्र अवीक्षित, अवीक्षित के मरुत, जो चक्रवर्ती राजा मुए; जिनको, अंगिरा के पुत्र महायोगी संवर्त्त ने यज्ञ कराया था
इस मरुत के यज्ञ के समान किसी का यज्ञ प्रसिद्ध नहीं है। उनके यज्ञ में सभी पात्र स्वर्ण के थे। इनके यज्ञ में सोमपन करके सुरेन्द्र बहुत प्रसन्न हुए। अधिकतम दक्षिणा पाकर ब्राह्मण हर्षित हो रहे थे। इस [b]महायज्ञ[/b] में मरुद्गण परोसने वाले और विश्वेदेव गण सभासद हुए थे

इक्ष्वाकु आदि पुत्रों के पहिले मनु जी निःसन्तान थे, इसलिये महर्षि वशिष्ठ जी ने उनसे मित्रावरुण का यज्ञ कराया

मनु की भार्या श्रद्धा ने, जो उस यज्ञ में पयोव्रत धारण किये हुई थीं—जो विधिपूर्वक केवल दूध पीकर ही यज्ञ संलग्न थीं, वह होताओं के निकट गयी और उन्हें प्रणाम करके प्रार्थना की कि आप ऐसा होम करें, जिससे मुझे कन्या उत्पन्न हो

मनु ने भगवान वासुदेव का यज्ञ, सन्तान की कामना से किया। इस यज्ञ को करने से उन्हें दश पुत्रों की प्राप्ति हुई, जिनमें इक्ष्वाकु सबसे बड़े थे।
राजा दिलीप को सन्तान नहीं होती थी। सन्तान के हेतु वे पत्नी सहित (महर्षि) वशिष्ठ गुरु के आश्रम में रहे। वहाँ वे गुरु की गायें चराते थे और आश्रम के यज्ञीय वातावरण में रह कर निरन्तर औषधि सेवन करते रहते−वैसा यज्ञ धूम्र शरीर में प्रवेश करने के स्वर्णिम अवसर प्राप्त करते थे। इस साधना से दिलीप को बड़ा ही प्रतापी पुत्र प्राप्त हुआ।

पुत्र जन्म के विफल हो जाने से भरत ने पुत्र की कामना से मरुत्सोम नामक यज्ञ किया। उन यज्ञ के अन्त में मरुद्गण ने उन्हें भरद्वाज नामक पुत्र दिया, जिसकी उत्पत्ति बृहस्पति के वीर्य और ममता के गर्भ से हुआ था।


कहानी जारी रहेगी

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05-04-2021, 02:53 PM,
#92
RE: Porn Story गुरुजी के आश्रम में रश्मि क...
(01-17-2019, 01:40 PM)sexstories Wrote: गोपालजी मुझे कन्विंस करने लगे की हाथ से नाप लेने की उनकी स्टाइल सही है.

गोपालजी – मैडम, उस कपड़ों के ढेर को देखो. ये सब ब्रा , पैंटी शहर भेजी जानी हैं और शहर की दुकानों से आप जैसे लोग इन्हें अच्छी कीमत में ख़रीदेंगे. अगर मेरे नाप लेने का तरीका ग़लत होता , तो क्या मैं इतने लंबे समय से इस धंधे को चला पाता ?

मैंने कपड़ों के ढेर को देखा. वो सब अलग अलग रंग की ब्रा , पैंटीज थीं. कमरे के अंदर आते समय भी मैंने इस कपड़ों के ढेर को देखा था पर उस समय मैंने ठीक से ध्यान नहीं दिया था. मुझे मालूम नहीं था की ब्रा , पैंटी भी ब्लाउज के जैसे सिली जा सकती हैं.

“गोपालजी मैं तो सोचती थी की अंडरगार्मेंट्स फैक्ट्रीज में मशीन से बनाए जाते हैं. “

गोपालजी – नहीं मैडम, सब मशीन से नहीं बनते हैं. कुछ हाथ से भी बनते हैं और ये अलग अलग नाप की ब्रा , पैंटीज मैंने विभिन्न औरतों की हाथ से नाप लेकर बनाए हैं.
मैडम, आप शहर से आई हो , इसलिए मुझे ऐसे नाप लेते देखकर शरम महसूस कर रही हो. लेकिन आप मेरा विश्वास करो , इस तरीके से ब्लाउज में ज़्यादा अच्छी फिटिंग आती है. 

आपको समझाने के लिए मैं एक उदाहरण देता हूँ. बाजार में कई तरह के टूथब्रश मिलते हैं. किसी का मुँह आगे से पतला होता है, किसी का बीच में चौड़ा होता है , होता है की नहीं ? लेकिन मैडम , एक बात सोचो की ये इतनी तरह के टूथब्रश होते क्यूँ हैं ? उसका कारण ये है की टूथब्रश उतना फ्लेक्सिबल नहीं होता है जितनी हमारी अँगुलियाँ. आप अपनी अंगुलियों को दाँतों में कैसे भी घुमा सकते हो ना , लेकिन टूथब्रश को नहीं. 

मैं गोपालजी की बातों को उत्सुकता से सुन रही थी. वो गांव का आदमी था लेकिन बड़ी अच्छी तरह से अपनी बात समझा रहा था.

गोपालजी – ठीक उसी तरह , औरत के बदन की नाप लेने के लिए टेप सबसे बढ़िया तरीका नहीं है. अंगुलियों और हाथ से ज़्यादा अच्छी तरह से और सही नाप ली जा सकती है. ये मेरा पिछले 30 साल का अनुभव है.

गोपालजी ने अपनी बातों से मुझे थोड़ा बहुत कन्विंस कर दिया था. शुरू में जितना अजीब मुझे लगा था अब उतना नहीं लग रहा था. मैं अब नाप लेने के उनके तरीके को लेकर ज़्यादा परेशान नहीं होना चाहती थी , वैसे भी नाप लेने में 5 मिनट की ही तो बात थी. 

गोपालजी – ठीक है मैडम. अब आप अपनी समस्या बताओ. ब्लाउज में आपको क्या परेशानी हो रही है ? ये ब्लाउज भी मेरा ही सिला हुआ है.

हमारी इस बातचीत के दौरान मंगल सिलाई मशीन में किसी कपड़े की सिलाई कर रहा था. 

“गोपालजी , आश्रम वालों ने इस ब्लाउज का साइज़ 34 बताया है पर ब्लाउज के कप छोटे हो रहे हैं.”

गोपालजी – मंगल , ट्राइ करने के लिए मैडम को 36 साइज़ का ब्लाउज दो.

मुझे हैरानी हुई की गोपालजी ने मेरे ब्लाउज को देखा भी नहीं की कैसे अनफिट है.

“लेकिन गोपालजी मैं तो 34 साइज़ पहनती हूँ.”

गोपालजी – मैडम , आपने बताया ना की ब्लाउज के कप फिट नहीं आ रहे. तो पहले मुझे उसे ठीक करने दीजिए , बाकी चीज़ें तो मशीन में 5 मिनट में सिली जा सकती हैं ना .

मंगल ने अलमारी में से एक लाल ब्लाउज निकाला. फिर ब्लाउज को फैलाकर उसने ब्लाउज के कप देखे और मेरी चूचियों को घूरा. फिर वो ब्लाउज मुझे दे दिया. उस लफंगे की नज़रें इतनी गंदी थीं की क्या बताऊँ. बिलकुल तमीज नहीं थी उसको. गंवार था पूरा.

मंगल – मैडम , उस साड़ी के पीछे जाओ और ब्लाउज चेंज कर लो.

“लेकिन मैं यहाँ चेंज नहीं कर सकती …..”

पर्दे के लिए वो साड़ी तिरछी लटकायी हुई थी. उस साड़ी से सिर्फ़ मेरी छाती तक का भाग ढक पा रहा था. वो कमरा भी छोटा था , इसलिए मर्दों के सामने मैं कैसे ब्लाउज बदल सकती थी ?

गोपालजी – मैडम , आपने मेरा चश्मा देखा ? इतने मोटे चश्मे से मैं कुछ ही फीट की दूरी पर भी साफ नहीं देख सकता. मैडम , आप निसंकोच होकर कपड़े बदलो , मेरी आँखें बहुत कमजोर हैं.

“नहीं , नहीं , मैं ऐसा नहीं कह रही हूँ…...”

गोपालजी – मंगल , हमारे लिए चाय लेकर आओ.

गोपालजी ने मंगल को चाय लेने बाहर भेजकर मुझे निरुत्तर कर दिया. अब मेरे पास कहने को कुछ नहीं था. मैं कोने में लगी हुई साड़ी के पीछे चली गयी. मैंने दीवार की तरफ मुँह कर लिया क्यूंकी साड़ी से ज़्यादा कुछ नहीं ढक रहा था और वो जगह भी काफ़ी छोटी थी तो गोपालजी मुझसे ज़्यादा दूर नहीं थे.

गोपालजी – मैडम , फर्श में धूल बहुत है , ये आस पास के खेतों से उड़कर अंदर आ जाती है. आप अपनी साड़ी का पल्लू नीचे मत गिराना नहीं तो साड़ी खराब हो जाएगी.

“ठीक है, गोपालजी.”

साड़ी का पल्लू मैं हाथ मे तो पकड़े नहीं रह सकती थी क्यूंकी ब्लाउज उतारने के लिए तो दोनों हाथ यूज करने पड़ते. तो मैंने पल्लू को कमर में खोस दिया और ब्लाउज उतारने लगी. पुराना ब्लाउज उतारने के बाद अब मैं सिर्फ़ ब्रा में थी. मंगल के बाहर जाने से मैंने राहत की सांस ली क्यूंकी उस गंवार के सामने तो मैं ब्लाउज नहीं बदल सकती थी. फिर मैंने नया ब्लाउज पहन लिया. 36 साइज़ का ब्लाउज मेरे लिए हर जगह कुछ ढीला हो रहा था, मेरे कप्स पर, कंधों पर और चूचियों की जड़ में . 

अपना पल्लू ठीक करके मैं गोपालजी को ब्लाउज दिखाने उनके पास आ गयी. पल्लू तो मुझे उनके सामने हटाना ही पड़ता फिर भी मैंने ब्लाउज के ऊपर कर लिया.

गोपालजी – मैडम , मेरे ख्याल से आप साड़ी उतार कर रख दो. क्यूंकी एग्ज़ॅक्ट फिटिंग के लिए बार बार ब्लाउज बदलने पड़ेंगे तो साड़ी फर्श में गिरकर खराब हो सकती है.

“ठीक है गोपालजी.”

मंगल वहाँ पर नहीं था तो मैंने साड़ी उतार दी. गोपालजी ने एक कोने से साड़ी पकड़ ली ताकि वो फर्श पर ना गिरे. आश्चर्य की बात थी की एक अंजाने मर्द के सामने बिना साड़ी के भी मुझे अजीब नहीं लग रहा था, शायद गोपालजी की उमर और उनकी कमज़ोर नज़र की वजह से. अब ब्लाउज और पेटीकोट में मैं भी उसी हालत में थी जिसमे वो घाघरा चोली वाली लड़की थी , फरक सिर्फ़ इतना था की उसने अंडरगार्मेंट्स नहीं पहने हुए थे.

तभी मंगल चाय लेकर आ गया.

मंगल – मैडम, ये चाय लो , इसमे खास…...

मुझे उस अवस्था में देखकर मंगल ने अपनी बात अधूरी छोड़ दी और मुझे घूरने लगा. मेरी ब्लाउज में तनी हुई चूचियाँ और पेटीकोट में मांसल जांघें और सुडौल नितंब देखकर वो गँवार पलकें झपकाना भूल गया. मैंने उसकी तरफ ध्यान ना देना ही उचित समझा.

मंगल – …….. अदरक मिला है.

अब उसने अपना वाक्य पूरा किया.

मेरे रोक पाने से पहले ही उस गँवार ने चाय की ट्रे गंदे फर्श पर रख दी. फर्श ना सिर्फ़ धूल से भरा था बल्कि छोटे मोटे कीड़े मकोडे भी वहाँ थे. 

“गोपालजी , आप इस कमरे को साफ क्यूँ नहीं रखते ?”

गोपालजी – मैडम , माफ़ कीजिए कमरा वास्तव में गंदा है पर क्या करें. पहले मैंने इन कीड़े मकोड़ो को मारने की कोशिश की थी पर आस पास गांव के खेत होने की वजह से ये फिर से आ जाते हैं , अब मुझे इनकी आदत हो गयी है.

गोपालजी मुस्कुराए , पर मुझे तो उस कमरे में गंदगी और कीड़े मकोडे देखकर अच्छा नहीं लग रहा था.

गोपालजी – चाय लीजिए मैडम, फिर मैं ब्लाउज की फिटिंग देखूँगा.

गोपालजी ने झुककर ट्रे से चाय का कप उठाया और चाय पीने लगे. मंगल भी सिलाई मशीन के पास अपनी जगह में बैठकर चाय पी रहा था. मैं भी एक दो कदम चलकर ट्रे के पास गयी और झुककर चाय का कप उठाने लगी. जैसे ही मैं झुकी तो मुझे एहसास हुआ की उस ढीले ब्लाउज की वजह से मेरे गले और ब्लाउज के बीच बड़ा गैप हो गया है , जिससे ब्रा में क़ैद मेरी गोरी चूचियाँ दिख रही है. मैंने बाएं हाथ से ब्लाउज को गले में दबाया और दाएं हाथ से चाय का कप उठाया. खड़े होने के बाद मेरी नज़र मंगल पर पड़ी , वो कमीना मुझे ऐसा करते देख मुस्कुरा रहा था. गँवार कहीं का !

फिर मैं चाय पीने लगी.

गोपालजी – ठीक है मैडम , अब मैं आपका ब्लाउज देखता हूँ.

ऐसा कहकर गोपालजी मेरे पास आ गये. गोपालजी की लंबाई मेरे से थोड़ी ज़्यादा थी , इसलिए मेरे ढीले ब्लाउज में ऊपर से उनको चूचियों का ऊपरी हिस्सा दिख रहा था.

गोपालजी – मैडम ये ब्लाउज तो आपको फिट नहीं आ रहा है. मैं देखता हूँ की कितना ढीला हो रहा है.

गोपालजी मेरे नज़दीक़ खड़े थे. उनकी पसीने की गंध मुझे आ रही थी. सबसे पहले उन्होने ब्लाउज की बाँहें देखी. मेरी बायीं बाँह में ब्लाउज के स्लीव के अंदर उन्होने एक उंगली डाली और देखा की कितना ढीला हो रहा है. ब्लाउज के कपड़े को छूते हुए वो मेरी बाँह पर धीरे से अपनी अंगुली को रगड़ रहे थे. 

गोपजी – मंगल , बाँहें एक अंगुली ढीली है. अब मैं पीठ पर चेक करता हूँ. मैडम आप पीछे घूम जाओ और मुँह मंगल की तरफ कर लो.
Rolleyes
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05-05-2021, 08:59 PM,
#93
RE: Porn Story गुरुजी के आश्रम में रश्मि के जलवे
औलाद की चाह

CHAPTER 6 - पांचवा दिन

महायज्ञ की तैयारी-

‘महायज्ञ परिधान'

Update -31


योनि तंत्र साधना

जिन्हे इस विषय पर कोई भी आपत्ति है वो इस अंश के लिए योनि तंत्र नामक पुष्तक पढ़े


[b]निश्चित तौर पर योनि तंत्र काफी रह्स्य पूर्ण है और गुप्त विद्या है और इसे बिना गुरु की आज्ञा, समर्पण के बिना और सहायता के नहीं करना चाहिए. [b][b]योनि [/b]तंत्र साधना सम्पूर्ण तौर पर योनि पूजा पर ही आधारित है .[/b][/b]

[b]योनि तंत्र..... सृष्टि का प्रथम बीज रूप उत्पत्ति योनि से ही होने के कारण तंत्र मार्ग के सभी साधक ‘योनि’ को आद्याशक्ति मानते हैं । लिंग का अवतरण इसकी ही प्रतिक्रिया में होता है । लिंग और योनि के घर्षण से ही सृष्टि आदि का परमाणु रूप उत्पन्न होता है । इन दोनों संरचनाओं के मिलने से ही इस ब्रह्माण्ड और सम्पुर्ण इकाई का शरीर बनता है और इनकी क्रिया से ही उसमें जीवन और प्राणतत्व ऊर्जा का संरचना होता है । यह योनि एवं लिंग का संगम प्रत्येक के शरीर में चल रहा है ।[/b]

[b]शक्तिमन्त्रमुपास्यैव यदि योनिं न पुजयेत् । तेषा दीक्षाश्चय मन्त्रश्चय ठ नरकायोपेपधते ।। ७ ।।
अहं मृत्युञ्जयो देवी तव योनि प्रसादतः । तव योनिं महेशनि भाव यामि अहर्निशम् ।। ८ ।।

योनी तंत्र के अनुसार ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों शक्तियों का निवास प्रत्येक नारी की योनी में है । क्योंकि हर स्त्री देवी भगवती का ही अंश है । दश महाविद्या अर्थात देवी के दस पूज्नीय रूप भी योनी में निहित है ।अतः पुरुष को अपना आध्यात्मिक उत्थान करने के लिए मन्त्र उच्चारण के साथ देवी के दस रूपों की अर्चना योनी पूजन द्वारा करनी चाहिए । योनी तंत्र में भगवान् शिव ने स्पष्ट कहा है की श्रीकृष्ण, श्रीराम और स्वयं शिव भी योनी पूजा से ही शक्तिमानहुए हैं ।

भगवान् राम, शिव जैसे योगेश्वर भी योनी पूजा कर योनीतत्त्वको सादर मस्तक पर धारण करते थे । योनी तंत्र में कहा गया है क्यों कि बिना योनी की दिव्य उपासना के पुरुषकीआध्यात्मिक उन्नति संभव नहीं है ।
[/b]


[b]सभी स्त्रियाँ परमेश्वरी भगवती का अंश होने के कारण इस सम्मान की अधिकारिणी हैं । अतः तंत्र साधक हो या फीर आम मनुष्य कभी भी स्त्रियों का तिरस्कार या अपमान नहीं करना चाहिए[/b]


मैं काफी लंबे समय के लिए पुस्तक से चिपके हुए थी और विस्तृत यज्ञ प्रक्रियाओं में तल्लीन थी , और उत्सुकता से पुराण से निकाले गए अंशो और छंदों को पढ़ रही थी निम्न अंश मुझे दिलचस्प लगे :

महादेवी पार्वती और भगवान शिव के बीच संवाद: दस महाविद्या, काली, तारा, सोडासी, छिन्नमस्तका, भगलामयी, मातंगी, भुवनेश्वरी, महालक्ष्मी के रूप में योनी तंत्र के तीसरे पटल में सूचीबद्ध हैं और योनी के विभिन्न भागों से जुड़ी हैं। महाविद्या की यह सूची टोडाला तंत्र में भिन्न है।

एक योनि साधक कालिका की पुत्र के तौर पर प्रसिद्ध हो जाता है. देवी योनी का आधार है और नागानंदिनी आप ही योनी में है। काली और तारा योनी चक्र में हैं और छिन्नमस्तका योनि के बालो में हैं । बागलामुखी और मातंगी, योनी के रिम पर हैं। महालक्ष्मी, षोडशी और भुवनेश्वरी योनी के भीतर हैं। योनी की पूजा करके एक निश्चित रूप से शक्ति की ही पूजा की जाती है। महाविद्या, मंत्र और मंत्र की तैयारी योनी की पूजा के बिना सिद्धि नहीं देती है।

योगी को तीन बार फूलो के साथ योनी के सामने झुक कर प्रणाम करना चाहिए, अन्यथा महेश्वरी 1000 जन्मों की पूजा बेकार है। शिव स्पष्ट रूप से गुरु हैं और उनकी साथी देवी का असली रूप है।

रजस्वला योनी के साथ ही युगल होना चाहिए ( अर्थात जिसे मासिक धर्म होता हो ऐसी योनि के साथ ही युगल करना चाहिए )

मेरी सबसे प्रिय, अगर सौभाग्य से कोई ब्राह्मण लड़की का साथी है, तो उस व्यक्ति को उस ब्राह्मण कन्या या स्त्री के योनी तत्व की पूजा करनी चाहिए। अन्यथा, अन्य योनियों की पूजा करें।

देवी आप ही सबसे आगे, योनी के केंद्र में स्तिथ हैं है। इस तरह से पूजा करने से, साधक निश्चित रूप मेरे ही बराबर बन जाता है। अन्यथा ध्यान, मंत्रों का पाठ, उपहार या कुलअमृत देने से कोई फायदा नहीं है ? हे दुर्गा, बिना योनी पूजा के, सभी फल रहित हैं।

कैलाश पर्वत के शिखर पर विराजमान, देवों के देव, समस्त सृष्टि के गुरु, दुर्गा- ने -मुस्कुराते हुए, नागानंदिनी ने पुछा । । महासागर का अनुकंपा, भगवान, 64 तंत्रों का निर्माण हुआ है इनमें से प्रमुख के बारे में मुझे बताइए,।

महादेव ने कहा: सुनो, पार्वती, इस महान रहस्य को। यह आप अपनी स्त्री प्रकृति के कारण है कि आप मुझसे लगातार पूछती है । वैसे तो मुझे इसे छुपाना चाहिए। पार्वती, मंत्र पीठ यन्त्र पीठ तंत्र पीठ और योनी पीठ को छुपा कर रखना चाहिए । इनमें से, निश्चित रूप से मुख्य योनी पीठ है, जो मैं आपको मेरे आपके स्नेह के कारण स्नेह से प्रकट करता हूँ । नागानंदिनी, करीब से और ध्यान से सुनो! हरि, हार और ब्रह्मा ---- सृजन, रखरखाव और विनाश के देवता ---- सभी की उत्पत्ति योनी में हुई है। और इसी से वे शक्तिशाली हुए हैं

यदि किसी व्यक्ति के पास शक्ति मंत्र नहीं है, तो उसे योनी की पूजा नहीं करनी चाहिए। यह मंत्र और नरक से मुक्ति देने वाला है। मैं मृत्युंजय हूँ । सुरसुंदरी, मैं हमेशा अपने हृदय कमल में दुर्गा आपकी ही पूजा करता हूं। यह मन को दिव्य और विराट जैसे भेदों से मुक्त करता है। हे देवी! इस तरह से पूजा करने से व्यक्ति को मुक्ति मिलती है।

एक योनी उपासक को शक्ति मंत्र तैयार करना चाहिए। वह धन, पवित्र, ज्ञान और सर्वज्ञता प्राप्त करता है। वह एक करोड़ कल्प के लिए चार मुख वाला ब्रह्मा बन जाता है।

इस बारे में सिर्फ करने बात करने का कोई फायदा नहीं है । यदि कोई व्यक्ति मासिक धर्म के फूलों के साथ पूजा करता है, तो उसके भाग्य पर भी उसका अधिकार होता है। इस तरह से अधिक से अधिक पूजा करने से वह मुक्त हो सकता है। इस प्रकार की मासिक धर्म के फूलो वाली योनी की पूजा करने का फल, दुख के सागर से मुक्ति देने वाला, जीवन और उन्नत जीवन शक्ति है। जिस योनी से मासिक धर्म का रक्त निकलता है वह पूजा के लिए सर्वथा उपयुक्त है।

एक ऐसी योनी की पूजा न करें, जिसमें कभी मासिक धर्म नहीं हुआ है । अगर हर बार एक कुंवारी कन्या की योनि (जिसका कौमार्य भंग) नहीं हुआ है की पूजा करना संभव न हो तो ऐसे योनि की अनुपस्थिति में किसी युवती या किसी सुंदर महिला की धोनी की , बहन की या महिला की योनि या पुतली की पूजा करें। प्रतिदिन योनी की पूजा करें, अन्यथा मंत्र का उच्चारण करें। योनी पूजा के बिना बेकार पूजा न करें।

पार्वती ने कहा: हे दया का महासागर, योनी, जो कि ब्रह्मांड का सार है, की पूजा किस विधि से की जानी चाहिए? साधक को या आप को किस प्रकार योनी की पूजा करनी चाहिए, और यह पूजा कैसे कृपा करती है? यह मुझसे बोलो! मैं अपनी महान जिज्ञासा के कारण यह सब सुनना चाहती हूं।

महादेव ने कहा: एक योनी की पूजा करने की इच्छा रखने वाला साधक को जो कि ब्रह्मांड का रूप है, उसे स्तंभन होना चाहिए और योनी जो कि शक्ति है उसमे प्रवेश करना चाहिए . योनि महामाया है और लिंग सदाशिव है। इनकी पूजा करने से व्यक्ति जीवित रहते हुए ही मुक्त हो जाता है

इसमें कोई संदेह नहीं है। हे दुर्गा इन पर बली, फूल आदि चढ़ाने चाहिए, यदि इसमें असमर्थ हैं, तो शराब के साथ पूजा करें,।

हे दुर्गा। साधक को योनी क्षेत्र में प्राणायाम और मेरी छह अंगों वाली पूजा करनी चाहिए। योनी के आधार पर मंत्र का 100 बार पाठ करने के बाद, लिंग और योनी को एक साथ रगड़ना चाहिए। मैंने अपने सभी साधकों के लिए आगे बढ़ने का तरीका घोषित किया है।

साधक को स्नान करते समय योनी में टकटकी लगानी चाहिए, तो उसका जीवन फलदायी हो जाता है। इसमें कोई शक नहीं है।

एक को अपनी संगिनी की योनी में, उसकी अनुपस्थिति में ही किसी दूसरी युवती की योनि या फिर किसी कुंवारी की योनि और उसकी अनुपस्थिति में अपनी शिष्य की योनि पर श्रद्धा से टकटकी लगानी चाहिए। योनि के माध्यम से ही आनद और मुक्ति मिलती है । भोग के माध्यम से सुख प्राप्त होता है। इसलिए, हर प्रयास से, एक साधक को भोगी होना पड़ता है । देवी , इस तंत्र को कभी प्रकट न करें! इसे दूसरे के शिष्य को या अघोषित को मत दो। महादेवी, योनी तंत्र मेरे तुम्हारे प्रति प्रेम के कारण मैंने प्रकट किया है ।

बुद्धिमान व्यक्ति को हमेशा योनी के दोष, घृणा या शर्म से बचना चाहिए। जब तक कुलचेरा विधि का उपयोग करके योनी की पूजा नहीं की जाती, तब तक एक लाख साधनाएं भी बेकार हैं।

योनी के किनारे पर अमृत चाटना चाहिए, जिससे किसी के शरीर या निवास स्थान में बुराई निश्चित रूप से नष्ट हो जाती है। इससे सब पाप भी नष्ट हो जाते हैं और अभीष्ट फल प्राप्त होता है

योनि साधना के बिना, सभी साधना व्यर्थ है इसलिए, योनी पूजा करें।

महेसनी, गुरु के प्रति समर्पण के बिना कोई सिद्धि नहीं है।


भगवान शिव नें जो महादेवी पार्वती और भारत के ऋषियों नें जो भी मनुष्य को दिया वो अत्यंत श्रेष्ठ और उच्चकोटि का ज्ञान ही था. जिसमें तंत्र भी एक है. तंत्र में एक दिव्य शब्द है 'योनी पूजा' जिसका बड़ा ही गूढ़ और तात्विक अर्थ है. किन्तु कालान्तर में अज्ञानी पुरुषों व वासना और भोग की इच्छा रखने वाले कथित धर्म पुरोधाओं ने स्त्री शोषण के लिए तंत्र के महान रहस्यों को निगुरों की भांति स्त्री शरीर तक सीमित कर दिया. हालांकि स्त्री शरीर भी पुरुष की भांति ही सामान रूप से पवित्र है. लेकिन तंत्र की योनी पूजा सृष्टि उत्पत्ति के बिंदु को 'योनी' यानि के सृजन करने वाली कह कर संबोधित करता है. माँ शक्ति को 'महायोनी स्वरूपिणी' कहा जाता है. जिसका अर्थ हुआ सभी को पैदा करने वाली. उस 'दिव्य योनी' का यांत्रिक चित्र ही 'श्री यन्त्र' है. वो 'महायोनी' ही 'श्री विद्या' हैं.

योनी तंत्र चर्चा का नहीं प्रत्यक्ष सिद्धि का क्षेत्र है. इसलिए तंत्र की खोज करने वाले रहस्य चित्रों को यथारूप न ले कर उसे 'स्वरुप रहस्यानुसार' समझें. योनी तंत्र सृष्टि उत्पत्ति का परा विज्ञान है. न की स्त्री शरीर का अवयव. 'माँ करुणाकारिणी स्वर्ण सिंहासनमयी कामरूपिणी कामाख्या योनी' ब्रह्माण्ड उत्तपत्ति का प्रतीक हैं व शक्ति उतपत्ति का प्रतीक....वो प्रत्यक्ष विग्रह है. जिसकी तुलना किसी अंग विशेष से करना.......'मातृस्वरूपिनी पराम्बा' का घोर अपमान ही होगा.


मुझे पता ही नहीं चला पुस्तक पढ़ते हुए समय कैसे बीता ,

लगभग पौने नौ बजे जब मैं अपना मुँह धो रही थी तब मास्टर-जी और दीपू फिर से प्रकट हुए .

कहानी जारी रहेगी
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