XXX Sex Stories डॉक्टर का फूल पारीवारिक धमाका
02-27-2021, 12:37 PM,
#1
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दोस्तो मैं आपका सलिल फिर एक नई कहानी शरू करने जा रहा हु जो एक पारिवारिक इन्सेस्ट कहानी है जो एक डॉक्टर के परिवार पर आधारित है अगर कुछ स्पेलिंग में त्रुटि हो तो माफ करना और अच्छी हो या बुरी कमेंट जरूर करना
आपका अपना
सलिल
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02-27-2021, 12:37 PM,
#2
RE: XXX Sex Stories डॉक्टर का फूल पारीवारिक धमाका
अपडेट 1

हाय आय ऍम ऋषभ शहा, में सूरत में रहता हू. मैं एक फिजिशियन डॉक्टर हू. मेरी उमर
२६ साल है. फ्रंड्स में एक डॉक्टर हूँ इसीलिए आप सब से कह ता हूँ की अपना खयाल
रखे. दिन में १० गिलास पाणी पिए यह आप के चेहरे को खिला देगा और वजन भी कम कर
देगा, और अपने चेहरे पर से पसिना पोछते रहे, कयूंकि आपने अक्सर देखा होगा की डॉक्टर हमेशा फेयर और गुड लुकिंग होता है, क्यूँकि वो अपनी
केअर करते हे. प्लीज् टेक केअर
अब में अपनी स्टोरी पर आता हू. यह बात तब की हे जब में २० साल का था और मेडिकल
कॉलेज में पढता मेरे घर में मेरे परेंट्स है. पापा डॉ. सतीश शहा जो एक कैंसर
सर्जन हैं और माँ भी एक जनरल डॉक्टर . उनका नाम नीता शहा है. शायद आप जानते
होंगे की हर डॉक्टर अपने बच्चों को डॉक्टर ही बनाना चाहता हे, इसीलिए मैं भी मेडिकल
कॉलेज में एंटर हो गया. मेरे १२थ में थोड़े नंबर कम आये थे इसीलिए मुझे अहमदबाद
जाना पडा मेरे घर में मेरे पापा से बड़े एक चाचा हे वह अहमदाबाद में ही डॉ. हे और मेरी
चाची भी पर वह डॉक्टरी छोड़ कर सोशल एक्टिविटी में ज्यादा पार्ट लेती हे. वह बहुत ही
अच्छी हे. मेरे चाचा का नाम प्रदीप शहा वह ५० साल के हे और बहुत बिजी रहते हे. मेरी
चाची का नाम शीला शहा हे. वह ४२ साल की हे लेकिन ३२ की लगती हे. बहोत अच्छे से उन्होंने
अपने आप को फिट रक्खा हे. और थैंक्स टू फेयरनेस क्रीम्स और ब्यूटी अवरेनेस्स, अब हर
आच्छे घर में बड़ी उम्र औरतें भी अपने आप को मेन्टेन करने में बिजी रहती हे.
१स्ट स्टोरी : बड़ी चाची की चुदाई
जी तो में सूरत से अहमेदाबाद शिफ़्ट हो गया, वैसे तो में अहमदाबाद में चाचा चाची के
यहाँ रह चुका हूँ इसीलिए मुझे कोई परेशानी नहीं हुई. मैं मेडिकल कॉलेज में पहले दिन
गया और देखा तो बहुत सी अच्छी लड़कियां थी, जैसे में कोई फैशन कॉलेज में आ गया
हूं. बहोत अच्छा लगा. फिर में शाम को घर आया तो चाची कहीं बाहर गयी थी. मैं अपने
रूम में गया और अपने लैपटॉप पर ब्लू फिल्म्स देखने लगा. थोड़ी देर के बाद जब डोर बेल
बजी तो मैंने डरवाजा खोला तो चाची आई थी. आते ही उन्होंने मेरे पहले दिन के बारे में
पूछ. जी में यह बता दून की मेरे चाची का कोई बेटा नहीं था, एक बेटी थी वह भी
मैरिड थी, जिन्हे में कोमल दीदी कहता था अब घर मे मैं और चाचा चाची ही रहते है चाची को में कई बार में अपने ड्रीम्स में फैंटसी कर चुका हूँ लेकिन कभी उससे
आंगे बढ्ने की हिम्मत नहीं हुई, क्यूँकि वह मुझे अपने बेटे जैसा मानती थी और हमेशा
रेशु बेटा ही कह कर पुकारती थी. जहाँ तक मुझे पता है उनके मन में भी मेरे बारे में
शायद कोई गन्दा ख्याल नहीं होगा. तक़रीबन एक महिना बीत गया था, की एक दिन में अपने
रूम में एक दम नंगा हो कर मूठ मार रहा था और ब्लू फिल्म देख रहा था की मुझे तभी
खयाल आया की में तो खिड़की के सामने खड़ा हू, और मैंने नोटिस किया की सामने वाली आंटी
मुझे देख रही हे. मेरे तो पसीने छूट गए क्यूँकि में पहली बार ऐसा काम करते हुए पक़डा
गया था, ऐसे टाइम पर डर सभी को लगता हे. मैंने फटाक से खिड़की बंद की और अपने रूम
मे छुप कर बैठ गया. शाम को आंटी घर आई उन्होंने मुझे पुकारा पर मैंने उनके सामने
जाना ठीक नहीं संमझा क्यूँकि वो आंटी मेरी चाची को अच्छे से जानती थी. लेट जब ९ बजे
चाचा घर लौटे तो में अपने रूम से बाहर निकला और फ़टाफ़ट उनके साथ डिनर निपटा के
वापस अपने रूम में चला गया और जा के सोचने लगा की उस आंटी ने चाची को कुछ बताया
भी की नहीं पर में कुछ नहीं समझा दूसरे दिन भी में लेट उठा, बाहर देखा तो कोई
नही था मैं नहा धो कर कॉलेज के लिए निकल गया. जैसे ही मैंने घर लॉक किया तो
देखा की वो आंटी मेरे सामने थी और अपना बरंडा साफ़ कर रही थी लेकिन मुझे देख कर
वह अपने घर में चलि गयी और धडाम से डरवाजा बंद कर दिया. शाम को में घर लौटा
तो भी सब नार्मल था मुझे यकीन हो गया की उस आंटी को बस गुस्सा आया हे उन्होंने मेरी
चाची को कुछ नहीं बताया. चाची भी नार्मल थी और चाचा भी. मैं अब बिन्दास था,
ऐसे ही दो दिन निकल गये, में अपने काम में मस्त था लेकिन अब ध्यान रखने लगा था की कोई
मुझे पकड़ न ले. फिर उस दिन शाम को चाचा का कॉल आया की वह सर्जरी में हे उन्हें इसी
वजह से लेट हो जायेगा तो चाची ने मुझे डिनर के लिये बुलाया और में डिनर टेबल पर आ
गया और किचन में उनकी हेल्प करने लगा और मैंने सारा खाना डायनिंग टेबल पर सजा दिया.

चाची आज खुश लग रही थी और में भी की में बच गया.
हम खाना खाने लगे और बातें करने लगे,
चाची : "खाना कैसा बना हे, रेशु"
मे : "बहुत अच्छा, आपके हाथ से कभी खाना बुरा बनता ही नहि...!
चाची:"अच्छा, तो फिर एक रोटी और लो".
मे: "नहीं आंटी अभी पेट् भर चुका है
चाची: "अच्छा, रेशु एक बात तो बताओ..
मे: "हाँ औंटी..?
चाची: "तुममे अक्कल हे की नहीं?
मे: "क्यों औंटी.. मैंने क्या किया?
चाची:"तुम पडोसवाली आंटी के सामने क्या कर रहे थे?
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02-27-2021, 12:37 PM,
#3
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अपडेट 2

मैन तो चौंक ही गया..कुछ समझ में नहीं आ रहा था क्या बोलू और क्या करू पहिले. मैंने इतने में सोच लिया की आंटी से बहाना करने में कोई फायदा नहीं वह मुझसे ज्यादा
होशियर हे तो पकड़ ही लेगी तो मैंने अपनी गर्दन शर्म से निचे झुका ली, मुझे पता था
की अब वह कुछ नहीं कहेगी क्यूँकि में परिवार में एक ही लड़का था और वह भी मुझे बेटे
जैसे मानती थी. मै शर्म से निचे देख रहा था और कोई जवाब देणे की कोशिश नहीं की “अरे बोलते क्यों नहि”.. “तुम नहीं जानते की तुमने क्या किया?या फिर में बताऊ की तुम ने क्या
किया?
मैं:”सॉरी चाची अब आगे से ऐसा नहीं केरुंगा.
चाची- “देखो रेशु, मुझे पता है की तुम जवान हो गए हो और यह सब लड़के करते ही हे, लेकिन
हमारी आज सोसाइटी में कुछ इज्जत हे, तुम ऐसे करोगे तो फिर हम सबको जवाब कैसे दे
पायेंगे”.
मैं-"आए ऍम सॉरी चाची लेकिन में वोह..
चाची-“आच्छा.. ठीक हे, सामने वाली आंटी मेरी अच्छी दोस्त हे, इसीलिए उसने सिर्फ मुझसे बात कि, सोचो अगर तुम्हारे अंकल को इस बात का पता चल गया हो तो”
मैं- “चाची अब आगे से नहीं करुँगा..
चाची-“फिर से झूठ, ऐसे कहो के आगे से खिड़की और दरवाजा बंद करके करोगे, क्यूँकि मुझे
पता हे की तुम आखिर मर्द हो. समझे...?
मैं-“जी चाची..
पहले वो खाना निपटा के उठी और सब प्लेट्स डायनिंग टेबल से किचन में रखने लगी, में
भी उनका हाथ बटाने लगा और जब सब ख़त्म हो गया तब मैंने आंटी से कहा.
मैं-“चाची. एक बात पुछू?
चाची-”हाँ रेशु”
मैं-“चाची आप मुझसे नाराज़ तो नहीं है ना..
चाची-“अम्म थोड़ी सी डिस्टर्ब तो हुई थी, लेकिन नाराज़ नहीं हू”
मैं- “थैंक्स, आंटी कैन आए हैवे टाइट हग फ्रॉम यू?चाची क्यू नही.पहले में चाची से जोर से गले लग गया और उन्हें कस के जैसे अपने में समेट ही लिया, यह
मेरा पहली बार था जब में किसी औरत के गले लगा था मैंने अपने हाथ आंटी के पीछे
शॉल्डर से लेकर चाची की हिप्स तक फेरने लगा. आंटी अब मुझे शायद समझ रही थी, वह
भी मुझसे मानो एकदम टाइट सटी हुई थी. फिर उन्हें समझ आया और वह मुझसे दूर हो गयी
ओर उन्होंने मुझे देखा और आँखें मुझसे न मिलाकर वो अपने काम में लग गयी और मुझसे
कहा की जाओ तुम जा कर सो जाओ.मै वहॉ से अपने रूम में चला गया. लेकिन में अपनी चाची को फैंटेसी कर रहा था और
मुझे लगा की वह बाहर जा रही हे तो मैं भी उनके पीछे पीछे चल निकला और दरवाजे की आडसे मैंने देखा की वह उस आंटी से बात कर रही हे. मैं उनकी बातें सुन्ने लगा

.वह आंटी पूछ रही थी, की क्या तूने अपने भतीजे से बात की या नहीं? तो आंटी ने जवाब
दीया की वह तो बिचारा डर ही गया. फिर मैंने उसे समझाया की यह सब नार्मल हे पर ध्यान
रखा करो. फिर वह कुछ ठीक लगा. फिर सामने वाली आंटी ने कहा जो भी हो पर तेरे
भतीजे का हथियार बहुत बड़ा हे, एक बार तो लगा की बस देखति रहू पर फिर अपनी इज्जत
क ख्याल आया और में चुप हो गयी. इस पर मेरी आंटी ने कहा क्या तुम सच कह रही हो,

यह सब बातें सुनकर मुझे लगा की अब चाची भी मेरे लंड को देखने में इंटेरेस्टेड होगी तो
अगर मेरा लंड वो देखले तो शायद काम बन सकता हे. फिर में अपने रूम में आ गया और
चाची को पटाने का प्लान बनाने लगा, इतने में चाची मेरे रूम में आई और कहा
चाची : आरे रेशु तुम अब तक क्या सोच रहे हो..? क्या तुम अब भी उस बात को लेकर परेशान हो?
देखो मैंने सामनेवाली आंटी से अभी बात की हे और उन्हें संमझा दिया हे. तुम चिंता मत करो
ओर अपनी पढाई पर फोकस करो.
मैं- थैंक्स आंटी और फिर इस बार में आंटी से बिना पूछे ही उनके गले लग गया और
पिछले बार से भी जोर से गले लगा लिया और शायद इस बार आंटी अपनी पैरों की फिंगर्स
पर उंची भी हो गयी थी. में उन्हें सहलाने लगा था, लेकिन वह भी अब मेरे पर डाउट
रख रही थी, लेकिन कुछ बोली नहीं और चुपचाप मुझसे सटी रही, में अपने दोनों हाथ से
उनके दोनों शोल्डर पकडे और जोर से दबाया और फिर दोनों हाथ चाची के ठीक ब्लाउज पर ले
जाकर उनके ब्लाउज को दोनों हाथों से दबाया इस लिए उनके बॉब्स मेरे सीने में और भी धँस
गये और अब वह मुझे गौर से देखने लगी, लेकिन कुछ कहा नहि, वह मुझे देख रही थी,
लेकीं मैंने उन्हें अंनदेखा कर के अपने दोनों हाथ नीचे ले जाते हुए कमर को सहलाते हुए अपने
दोनो हाथ उनके अस्स पर रख दिए और उतने में डोरबेल बजी और आंटी को होश आया और वह
फटाफ़ट निकल गयी
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02-27-2021, 12:37 PM,
#4
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अपडेट 3

अब मेरी समझ में आ गया था की चाची को सिड्यूस किया जा सकता हे. अब तक में इन्सेस्ट
साहित्य में बिलीव नहीं करता था लेकिन इस इंसीडेंस में मैंन लगा और फिर मैंने अपना लैपटॉप
निकाला और इन्सेस्ट में सिड्यूस करने वाली स्टोरीज पढना शुरू कर दिया. अब मुझे कुछ कुछ
ट्रिक्स समझ में आ रही थी. अब में जानने लगा था की उम्र के साथ मर्द को सेक्स में काम
इंट्रेस्ट होता हे लेकिन औरतों को अब भी प्यास होती हे. इसिलिये उम्र वाली औरतेँ टीनएज
को सिड्यूस भी करती हे.
अब मैंने सोचा की चाची को स्टोरीज के हिसाब से और अपने आइडियाज भी लगा के पटाना होगा.
दूसरे दिन मैंने अपने बाथरूम में टप ओपन कर के पाइप में एक कपडा फसा दिया और चाची के
पास गया, देखा तो वह किचन में नाश्ता बना रही थी, अभी वह नहाई नहीं थी तो मैंने
चाची से कहा की मेरे बाथरूम में पाणी नहीं आ रहा हे, तो क्या में आपका बाथरूम यूज़
करलूं, तो उन्होंने मुझसे कहा की जाओ लेकिन जल्दी करना मुझे नहाणा हे. मैन बाथरूम में गया और देखा तो चाचा ने नहा लिया था और वह मंदिर के पास भगवन की
पूजा कर रहे थे, में बाथरूम में गया और चाची के कपडे खोजने लगा और मुझे उनकी ब्रा
ओर पेन्टी मिल गयी, मैंने उन्हें हाथ में लिया और चाची को सोचते हुए मूठ मारना शुरू कर
दीया, थोड़ी ही देर में मैंने अपना वीर्य उनके इनरवेयर पर उडेल दिया और फिर आराम से नहा
कर बाहर आ गया और चाची के नहाने की वेट करने लगा. मैं अब चाचा के साथ डायनिंग टेबल पर था और चाची की वेट कर रहा था वह जब नहा
कर बाहर आई तो उन्होंने सबसे पहले मुझे देखा और बस एक हलकी सी नज़र मिलाके शर्म से
नज़रें निचे झुका ली. मैंने भी पुरे नाश्ते के दौरान थोड़ी शर्म और थोड़े डर के मारे
नजरे नहीं मिलायी. फिर में चाचा के साथ ही उनकी कार में कॉलेज चला गया ताकि चाची
मुझे दाँट न सके. शाम को लौटते वक़्त मेरे मन में थोड़ा डर था, क्यूँकि मैंने ऐसे पहली
बार किया था मैं घर आया तो चाची घर पर नहीं थी, वह कोई सोशल काम से बाहर गयी
थी. मुझे कुछ राहत मिली और में तुरंत चाची के बाथरूम में गया और देखा तो चाची
की वह ब्रा और पेन्टी नहीं थी. मुझे बहुत ख़ुशी हुई और मैंने फिर से मुठ मारी और इस में
थोडी देर हो गयी और में जैसे ही बाहर निकला तो चाची बाथरूम में ही जा रही थी. वह
मुझे देखकर शॉक तो हो गयी पर जरा सी भी बात नहीं की और बाथरूम में चलि गयी. अब
मुझे पता था की वह चाहती तो हे सेक्स करना पर थोड़ा नाटक कर रही हे. मैंने भी उन्हें
अपणे हाल पर छोड़ दिया और अपने रूम में जाकर पढ़ने लगा. पढाई भी जरूरी हे भाई. थोडी देर में किसीने मेरे दरवाजे पर नॉक किया. मैं- कौंन..?चाची-अरे में हू.मैं- चाची आप तो अंदर आइये ना...और चाची अंदर आई तो उन्हें देखकर में उन्हें ही देखने लगा. उन्होंने ब्लैक साडी विथ
ब्लैक स्लीवलेस ब्लाउज पहना था चाची ऐसे क्या देख रहे हो?मै अब होश में आ गया और टॉपिक चेंज करते हुए मेंने कहा
मैं- अरे चाची आपको नॉक करने की क्या जरूरत हे? चाची-अरे बेटा नॉक करना अब जरूरी लगता हे, क्या पता तुम क्या काम कर रहे हो?मै थोड़ा सा शर्मिंदा हो गया, चाची ने मुझे ताना मरा था
मैं- क्या चाची, आप भी मुझे शर्म फील करवा रही हे, अब तक में सामनेवाली चाची के
सामने नहीं गया हू. चाची तो फिर ऐसे काम ही क्यों करते हो की किसी से नज़रें भी मिला न सको अब में शर्मिंदा था, में बस मुँह लटका के बैठा रहा. फिर उन्हें भी समझ में आया
तो वह मेरे बालों में अपने हाथ फेरने लगी और कहा की तुम अच्छे बच्चे हो पर थोड़े से
शैतान हो रहे हो. फिर मैंने मौका देखकर कह दिया की लेकिन चाची मेरी शैतानी अच्छी
लगति है ना..तो वह मुस्कुरायी और चलि गयी. अब मुझे ग्रीन सिग्नल मिल रहा था अब मैंने
चाची को सेक्स के भुखे जानवर की तरह घूरना स्टार्ट किया. मैं अब उनके बूब्स, क्लीवेज और
अस्स को देखता रहता था चाची को भी इस बात का पता था लेकिन वो कुछ बोलती नहीं थी
कयूंकि में कोई हलकी हरकत नहीं करता था और वह भी सेक्स के टॉपिक के बारे में बात नहीं
करना चाहती थी. तो मैंने ऐसे १०-१५ दिन उन्हें देखना शुरू किया और साथ साथ रात में उनके
कमरे के बाहर से यह भी देखना स्टार्ट किया की चाचा और चाची सेक्स करते भी हे की नही.
करीब १०-१५ दिन पता लगने के बाद मैंने देखा की दोनों की सेक्स लाइफ निल हे. तो मैंने अब
थोड़ा सा पहल लेना स्टार्ट किया और अब आते जाते मेरा हाथ चाची के अस्स और साइड से
बूब्स पर टकराने लगा. फिर मैंने एक दिन फेक आयडी से अपनी आंटी के मेल पर एक मेल किया जिसमे में अपने बेटे को
कैसे सिड्यूस किया जाये उसकी सब ट्रिक्स भेजि. तक़रीबन दो घंटे बाद उनका रिप्लाई आया था
ओर पूछा था की हु आर यू? तो मैंने एक अच्छी सी सेडिक्टिव इन्सेस्ट स्टोरी उन्हें भेज दी. ईस बात को कुछ हफ्ता बीता होगा लेकिन मुझे चाची में कोई बदलाव नहीं दिखा. फिर थोड़े ही
दीनो में दिवाली आनेवाली थी और मेरा वेकेशन स्टार्ट हो गया था, तो आंटी ने एक दिन कहा की
रेशुबेटा आज घर की सफाई करनी हे, क्या तुम मेरा हाथ बटा डोगे? तो मेंने हामी भर दी.उनहोने कहा ठीक हे तो फिर अपने पुराने कपडे या फिर वेस्ट और छोटे शार्ट में स्टोर
रूम में आ जाओ, क्यूँकि सब रूम तो ठीक हे, सिर्फ स्टोर रूम में से कचरा निकालना हे. मैंने
इस मौके का फायदा उठना ठीक संमझा और में सिर्फ शॉर्ट्स पहन कर स्टोर रूम में गया.
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02-27-2021, 12:38 PM,
#5
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अपडेट 4

चाची मुझे दो सेकंड के लिए देखति रही, फिर उन्होंने मुझसे कहा ठीक किया, वर्ना
बानियाँन भी ख़राब हो जाती. फिर हम सफाई करने लगे.
तक्रीबन दो घंटे सफाई का काम चला, और मैंने गोर किया की आंटी मेरे अंडर वेअर को कई
बार देखति और फिर आँखें चुरा लेती थी. फिर जब सफाई ख़त्म करके हम ड्राइंग रूम में
आये तो में सोफ़े पर पैर फैला के बैठ गया, जिससे मेरे अंडर वेअर में से कुछ बाल और
शायद मेरा लंड भी दिख रहा था चाची भी मेरे पीछे पीछे आई और मेरे अंडर वेअर को
देखने लगी, फिर ३-४ सेकण्ड्स के बाद उन्होंने कहा की रेशु जाओ तुमने अपना शॉर्ट्स क्यों उतार
दीया? और ऐसे अपने चाची के सामने बैठने से शर्म नहीं आती? तो मैंने कहा की आरे चाची
मुझे बाद में याद् आया की यह शॉर्ट्स तो मैंने पिछले हफ्ते ही ख़रीदा हे और ज्यादा ख़राब हो
गया तो खराब हो जायेगा इसीलिए मैंने इसे भी उतार दिया और रही दूसरी बात, आपके सामने कैसी
शर्म? बचपन में आपने मुझे बहुत बार नुड देखा होगा ना.तो इस पर चाची ने कहा, की तब की बात और थी, तब तुम अच्छे बच्चे थे, लेकिन अब ऐसी
हरकते करने लगे हो की पडोसी के सामने जाने से भी डर लगता हे. मैं फिर थोडा सा
शर्मिंदा हो गया और चाची के सामने से नज़रें हटाकर दूसरी तरफ देखने लगा. चाची मेरी फीलिंग्स को समझ गयी थी, इसीलिए बाद में हंस पड़ी और कहा की अरे बाबा में
तो मज़ाक़ कर रही थी. फिर उन्होंने कहा,चाची अरे रेशु, एक बात बताओगे?
मैं- हा, चाचि..चाची- तुमने उस दिन के बाद फिर वो किया हे क्या?
मै थोड़ा सा चोंक गया, पर मैंने कहा “नही औंटी”. तो वो बोलि,”नहीं मुझे नहीं लगता, तुम सच बताओ.मैं- हा, आंटी दो तीन बार किया हे. चाची “आच्छा, इसका मतलब तुमने कमसे काम १०-१५ बार किया होगा,. “अच्छा एक और बात बताओ? उस दिन
तूम किसे सोचकर कर रहे थे, की तुम खिड़की बंद करना भी भूल गए थे. सच
बताना, में सच सुनना चाहती हू. मुझे पता चल रहा था की चाची अब अपने बारे में सुनना चाहती हे. तो मैंने कहा की में
नही बताऊंगा. तो उन्होंने कहा की में तुम्हे नहीं डाटूंगी. तुम खुल के अपनी चाची से बातचीत
करो.
मैं- नहीं चाचि, आप नराज़ हो जाएगी.
चाची- नहीं में बिलकुल गुस्सा नहीं करुँगी.
मैं- चाची, में इस बात को यही तक रखना चाहता हू, मुझे पता हे आप इसे सुन नहीं
पयेंगी, इसलिए में आपसे नहीं कह पाऊंगा.
इतने में डोरबेल बजी और मैंने चाची से कहा की में शॉर्ट्स पहन कर आता हू. और में
उठकर अपने रूम में चला गया और चाची दरवाजा खोलने लगी. देखा तो चाचाजी आये हुए
थे, उन्होंने आते ही कहा कि, मुझे जरा आज मुंबई जाना पड़ेगा, अपना खुद का हॉस्पिटल खोलने
के लिए मेरे दोस्त ने एक कंपनी से बात करके रक्खी हे, में अब शायद कल ही आउंगा. मैं
शोर्ट्स पहन कर आया तो चाचा ने कहा, आरे वाह भाई आज तो तुमने काफी अच्छी मदद की अपनी
चाची की, अच्छा आज में रात को नहीं आउंगा, तो घर पर ही रहना. मैंने कहा ठीक हे, और
चाची के बारे में पूछ, तो उन्होंने कहा की वह किचन में खाना गरम कर रही हे. मैं फिर
किचन में चला गया और देखा तो चाची गैस पर कुछ गरम कर रही थी, अरे क्या मस्त
उनकी बैक और अस्स लग रही थी. मैं बस उन्हें देखता रहा. लेकिन पता नहीं उन्हें कैसे पता चल गया,वह फिर डबल मीनिंग में बोलि, वही से क्या देख रहे हो, पास आ कर देखो. में
हीम्मत कर के ठीक चाची के पीछे चला गया और उनसे सट कर उनके कंधे पर अपना मुँह
रखा और पूछा
मैं- क्या कर रही हो आंटी?
चाची- बस खाना गर्म कर रही हू.मै तो बस वहॉ से चाची के बॉब्स की क्लीवेज देख रहा था चाची भी यह जानती थी लेकिन कुछ बोली नही. मैं खड़ा रहा था थोड़ी देर बाद चाची ने
कहा, कुछ काम नहीं हे तो अपने चाचा के पास जा कर बैठ में आती हू.मै अब सोच में पड़ गया की क्या बहाना बनाऊ, तो मैंने कहा की चाची मुझे आपसे कुछ्
कहना हे.
चाची- हाँ बोलो
मैं- चाची, आप पुछ रही थी न की में किसे देख कर वह सब कर रहा था?
चाची-“ह्म्म्म” अब मेरा हाथ चाची के अस्स पर रक्खा था
मैं- वोह...क्या है..चाची- आरे बताना?
मैं- चाची, वह आप थी,मैने हिम्मत कर के बोल दिया और चाची के रिस्पांस का इंतज़ार करने लगा.मुझे पता था की वह दिखावे के लिए गुस्सा करेंगी, पर उससे उल्टा हुआ.चाची रेशु....यह, बेटा यह तू क्या कह रहा हे? तुझे पता भी हे? चल तू अब यहाँ से जा,तेरे
चाचा सुन लेंगे, तो क्या से क्या हो जायेगा? हे भगवन इसे तो यह भी नहीं पता की कब क्या
बोलणा चाहिए और क्या नहीं?मैं- आय ऍम सॉरी, चाची.चाची- तू अभी जा ना..मै वहॉ से आ कर डायनिंग टेबल पर बैठ गया और चाची के आने का इंतज़ार करने लगा.
चाची आई और हम खाना खाने लगे, लेकिन चाची मुझसे बात नहीं कर रही थी. बाद में एक
घँटे के बाद चाचा निकल गए और में उन्हें एयरपोर्ट तक छोड़ कर वापस आया.चाची अपने रूम में नहीं थी, मैंने कॉल किया तो डिसकनेक्ट कर दिया. फिर एक घंटे के बद
चाची घर आयी
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02-27-2021, 12:38 PM,
#6
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अपडेट 5

मै उन्हें देखते ही उनसे जोर से गले लग गया, और कहा की फ़ोन क्यों अटेंड नहीं कर रही
थी? कह के तो जाना चाहिए ना.चाची मुझे कंसोल करते हुए कहा की आरे बाबा में कार में थी और ट्रैफिक पुलिस मुझे ही
देख रहा था की में फ़ोन हाथ में लु और वह चालान काटे.मै अब ठीक था चाची भी मुझे परेशानी में देखकर थोड़ी परेशांन और थोड़ा मुस्कुरा भी रही थी.फिर मेरी जान में भी जान आयी. और मैंने अपने आप को सम्भाला. मुझे लगा की चाची मेरी
बात को भूल गयी हे इसीलिए में भी बाहर चला गया और एक ड़ेढ़ घंटे के बाद वापस
लौटा. तब शाम के सात बाजे थे, चाची सब्जी काट रही थी और वो टीवी देख रही थी. में
अपणे रूम में गया और फ्रेश हो कर शॉर्ट्स और वेस्ट में अपने रूम में पढाई करने लगा. तभी
थोडी देर में चाची ने आवाज़ लगायी और कहा की रेशु डिनर रेडी हे, आजाओ. मैं फौरन
बाहर आया और चाची की हेल्प करने लगा. चाची कुछ मन में सोच रही थी, मुझसे बात नही
कर रही थी, शायद वो मेरे कॉन्फेशन के इशु को फिर से स्टार्ट करना चाहती थी, पर
कैसे करे वह सोच रही थी. फिर हम खाना खाने बैठे और डिनर करने लगे. चाची
मुझसे नजरें नहीं मिला रही थी. चाची ने फ़टाफ़ट खाना निपटाया और उठने लगी की ओह्ह
मूँह से आह निकलि तो मैंने झट से पूछा की “क्या हुआ चाची?
चाची- “कुछ नही
मैं- नहीं चाची, कुछ तो हुआ हे.
चाची- नहीं बेटा, कुछ नही, कहकर वो किचन में जा कर बर्तन धोने लगी. मैंने भी अपना
डिनर निपटाया और किचन में जा कर फिर से पूछा लेकिन चाची ने बताया नही. तक़रीबन ८
बज रहे थे. चाची कुछ दर्द में लग रही थी. मैं ड्राइंग रूम में टीवी देखने लगा.
चाची भी बर्तन धो कर मेरे पास बैठी और फिर से उनके मुँह से दर्द की आह निकली,तो
मैने टीवी बंद किया और कहा की
मैं- चाची, आप कुछ परेशानी में हो. शायद कुछ हो रहा हे, आपको?चाची कुछ नहीं बोली. मैं उन्हें ही देख रहा था, वह समझ गयी की बात जाने बिना में
मानूँगा नहीं तो वह बोलि, की में जब बाहर गया था, तब वो ग़लती से किचन में गिर गयी
ओर अंदरूनी चोट आई हे.
मैं- कहा..चाची?
चाची ने निचे देखा और अपनी थाय पर हाथ रखा. मैंने कहा की चलो चाची में तुम्हे
आइंटमेंट लगा देता हू.
चाची-“नहीं बेटा, में खुद लगा देती हू
मैं- अरे चाची, आप तो डॉक्टर हे और समझती हे की मरीज़ अपने आप कभी अच्छे से मालिश या दवा नही लेता. चलिये आपके रूम में चलते हे.में उन्हें उनके रूम में हलकी सी जबरदस्ती
के साथ ले गया. फिर मैंने पूछ
मैं- चाची, ऑइंटमेंट कहाँ हे?
चाची-“अरे बाबा इस दर्द में में यह भूल ही गयी की घर में ऑइंटमेंट हे ही नही.मैने तुरंत आइडिया निकाला और कहा, कोई बात नहीं चाची, में फ़्रीज में से बर्फ ले कर लगा
देता हू.ओर में बिना चाची की सुने बर्फ लेने चला गया और दो ही मिनट में बर्फ ले कर वापस आया
ओर देखा की चाची को हलकी सी शर्म आ रही हे.ईसीलिये मैंने हल्का सा बनते हुए कहा की अरे चाची तुम सोचो मत्, और मुझसे क्या शरमाना आपका? आपको दर्द हो रहा हे और में आपका इलाज कर रहा हू.
चाची- अच्छा बाबा ठीक हे. फिर वो अपने पेट् के बल लेट गयी और आँखें बंद कर ली.ओह माय गोड़ चाची की बैक क्या मस्त लग रही थी. गोरी गोरी फिर लोव कट ब्लैक ब्लाउज मे
छुपा हुआ बैक और फिर मस्त मस्त कमर और फिर.. मस्त अस्स और फिर लांग लेगस, में
ऐसेही ही चाची का चक्षु चोदन करने लगा. तभी चाची ने मेरी और देखा और में उनके कुछ्
कहने से पहले ही होश में आगया और एक बर्फ का टुकड़ा अपने हाथ के पंजे में रख कर चाची
की साडी ऊपर करने लगा, तो चाची ने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहा की में खुद कर देती
हूं. फिर चाची ने अपनी ब्लैक साड़ी उठानि शुरू की और उनके उठाने के अंदाज़ से लग रह
था की वो मुझे सिड्यूस करने के लिए ही यह सब कर रही हे. उन्होंने बड़े आराम से अपनी साड़ी उठायी और अपने घूटनों तक ले कर आई और फिर मेरी और देखा और उनका इशारा पाते ही में
समझ गया की अब बर्फ लगाने की बरी आ गयी हे. मैंने हलके से बर्फ जानबूझ कर उनके
घुटने के ऊपर रक्खा और बर्फ रखते ही वो ठण्ड से और सिडक्शन से कांप गयी. मैंने फिर
बर्फ गोल गोल घूमाना शुरू किया और चाची की अस्स को ही देखने लगा. थोड़ा ही टाइम हुआ थाकी मैंने चाची से कहा की
मैं- चाची, अरेरेरे आपकी साडी थोड़ी सी गीली हो रही हे, अगर आप कहे तो में इसे थोड़
उपर उठादू?ओर चाची के जवाब की परवा किये बिना मैंने साडी हाथ में ले ली और इतने में चाची ने मेरी
ओर देखा और एक अजीब सी स्माइल के साथ उन्होंने हा में सर हिलाया और मैंने भी नॉटी सी
स्माइल रिटर्न्स किया और थोड़ा उठाने के बजाये मैंने उनकी पूरी थाय ओपन कर दी और साड़ी बिलकुल उनके अस्स के पास रख दी. अब मैंने थाय को देखने के बाद मैंने दूसरे हाथ में भी
बर्फ का टुकड़ा ले लिया और दोनों थाय पर मसाज करने लगा, बस एक दो बार ही मसाज किया ओर कहा की
मैं- चाची, एक साइड से दूसरी और मसाज करना ठीक से आ नहीं रहा, मुझे आपके लेग्स के बीच में बैठ्ना पड़ेगा, तो क्या आप...ओर मेरे सेंटेंस ख़त्म करने से पहले ही उन्होंने मेरी और देखे बिना और आँखें खोले बिना
अपणे दोनों पैर फिर से कामुक अंदाज़ में बड़े आराम से फैला लिये, ओह माय गॉड उनकी ब्लाक
सारी में गोर गोरे पांव फ़ैलाने का अंदाज़ सच में क़ातिलाना था.
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02-27-2021, 12:38 PM,
#7
RE: XXX Sex Stories डॉक्टर का फूल पारीवारिक धमाका
अपडेट 6

मेरा तो लंड अब खड़ा हो चुका
था और चाची को मुझे अब इस बात का अंदाजा दिलवाना था इसीलिए में उनके पांव के बीच मे
बैठ गया और अपने दोनों हाथो में बर्फ ले कर आराम से थोड़ा थोड़ा प्रेस कर के बर्फ घुमाने
लगा और घूमाते घूमाते बर्फ उनकी गांड तक ले जाने लगा, जब जब मेरे हाथ उनके गांड तक जाता
तो उनकी पेन्टी की स्लाइड्स मुझे महसूस हो रही थी. मैं अब अपने आपे से बाहर होता जा रहा था एक दम सेक्सी चाची और में इस सिचुएशन में, मैंने फिर बड़े आराम से अपने हाथ चाची
की पेन्टी में सरकाने का ट्राय किया पर चाची की पेन्टी बहुत टाइट थी, इसीलिए हो नहीं पाया.
फिर मैंने चाची से पूछा
मैं- चाची, आराम मिल रहा हे?
चाची- हाँ बेटा आराम तो मिल रहा हे. लेकिन अब तुम रहने दो, अब में ठीक हू.
मैं- नहीं चाची,मै और मालिश कर देता हू.
चाची- नहीं रेशु, मैंने कहा ना.. की अब हो गया, में ठीक हूं.
फिर मुझे अपने आप पर गुस्सा आया की क्यों मैंने खुद ही बात छेडी, सब कुछ ठीक चल
रहा था लेकिन में यह समझ नहीं पा रहा था की चाची को भी मज़ा आ रहा था फिर क्यूं
उनहोने मुझे जाने को कहा? लेकिन मुझे और मेहनत करने पड़ेगी ऐसा सोच कर में अपने रूम
मे जा कर बैठ गया. फिर शाम तक कुछ नहीं हआ
अब रात के आठ बज रहे थे, और हम दिनर
पर बैठे, लेकिन एक बात मेरी समझ में नहीं आ रही थी की मैंने इतना बड़ा सेंटेंस कहा
की आंटी में आपको फेंटीसी करता हूँ पर आंटी ने अब तक कुछ नहीं कहा में इस बात
पर बहुत हैरान था इसीलिए मैंने ही बात शुरू करना ठीक समझा
मैं- चाची...?
चाची- हा
मैं- चाची एक बात पूछनी हे?
चाची- किस बारे में, मैंने अब तक तुमसे फैंटेसी के बारे में पूछा नही, इस बारे मे? मै तो शॉक ही हो गया. चाची यह देख कर हंस पडी.चाची अरे बेटा, इस उम्र में ऐसा बच्चे करते हे, लेकिन मुझे तुम्हारी आनेस्टी पसंद आई.
मैं- थैंक्स चाची लेकिन एक बात कहूंगा, आप मुझे अच्छी तरह से समझने लगी हे.
चाची- अच्छा बाबा चलो अब फिनिश करो.ऐसे कह के चाची ने अपना डिनर फिनिश किया और उठि तो उनके मुँह से आह निकली
मैं- क्या चाची, अब भी दर्द हे?
चाची- हाँ बेटा, अभी डिनर कर के एक और बार मालिश कर देना.
मैं- ठीक हे चाची, कहकर मैंने फ़टाफ़ट खाना ख़त्म किया
इतने में चाची ने भी अपना काम फिनिश किया और मेरी और मुस्कुराई, में भी किचन में बर्फ
लेने चला गया और बर्फ ले कर चाची के बैडरूम में दाखिल हुआ और देखा तो चाची अपने आप
ही पेट् के बल लेटी हुई थी. मेरे अंदर आते ही उन्होंने कहाँ रेशु, बेटा अब तक दर्द नहीं गया हे, थोड़ी हार्ड मालिश करो और दर्द और जगह भी हे,
तो वहॉ भी मालिश कर दो.मैने ठीक हे कहा और चाची के पाँव के पास बैठ गया और बिना पूछे चाची की सारी
उनकी थाय तक उठाई और चाची ने मेरे कहने से पहले ही अपने पाँव फैला लिये. मेरा तो
लंड फनफना ने लगा. मैंने बिना बर्फ के ही चाची के थाइस पर हाथ फिराया और फिर बर्फ
हाथ में ले लिया, में दोनों हाथों में बर्फ ले कर चाची के थाइस पर बर्फ रगड़ने लगा,
चाची को मज़ा आ रहा था लेकिन चाची ने कहा “बेटा रेशु, एक और बात हे की चोट मुझे कहीं और लगी है, पता नहीं कैसे कहूं, पर
जो हे वो हे.
मैं- चाची, बिना कोई झिजक मुझे बताइये,चाची में बता नहीं पाउँगी
मैं- अच्छा तो मेरे हाथ वहॉ रख दिजिये जहा दर्द हो रहा हे,फिर उन्होंने अपने दोनों हाथो में मेरे हाथ लिए और अपने पेन्टी पर रख दिये. मेरा तो मन ही
नाच उठा. मैंने अपने हाथो से बर्फ छोड़ कर चाची के गांड को पहले तो देखा फिर चाची की
सारी उठा कर चाची की कमर पर रख दि, अब पूरी पेन्टी मेरे सामने थी,
मैने पहली बार किसी औरत की गांड को छुआ था मैंने अपने दोनों हाथ उनके गांड पर रक्ख
ओर गोल गोल घुमाया.
मैं- चाची, अगर यहाँ पर बर्फ लगाउंगा, तो आपकी यह गीली हो जाएन्गि, तो क्या आप..?चाची- नही, नही... रेशु में तेरे सामने कैस, इसे उतार सकती हू.
मैं- अगर आपको शर्म आ रही हो तो में इसे उतार देता हू,
चाची- हाय हाय रेशु, तुम तो बड़े बेशर्म हो रहे हो
मैं- चाची, में आपके भले के बारे में ही कह रहा हू.
चाची- नही..नही
मैं- क्या नहीं चाची....नही में जरूर लगाउंगा, आपको सुबह से दर्द हे और आप बताती भी
नही हे.फिर चाची कुछ नहीं बोलि, मैंने इसे चाची की इजाज़त मान ली और चाची की पेन्टी पर फिर से
हाथ रखकर दोनों हाथों में दबा लिया. चाची अब बस आँखें बंद कर के लेटी रही, कुछ्
बोल नहीं रही थी. फिर मैंने पेन्टी के अंदर अपने हाथ डाल दिये और चाची की गांड को
सेहलाने लगा. चाची भी मजे ले रही थी. फिर मैंने दोनों हाथों से चाची की गांड को
दबाने लगा, चाची के मुँह से आह... ओह की आवाज़ निकलने लगी, में जानता था की यह
मॉनिंग हे पर मैंने जानबूझ कर कहा की
मैं- देखा चाची, दर्द ज्यादा हो रहा है ना,,आप बस मुझे
अपने तरीके से इलाज करने
दीजीए"
चाची- अच्छा बाबा, तू ही अपने तरीके से कर दे, वैसे भी तू अच्छा इलाज कर रहा हे
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02-27-2021, 12:38 PM,
#8
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अपडेट 7

फिर मैंने चाची की पेन्टी को छोड़ा और चाची की कमर के साइड से दोनों हाथ पेन्टी में डाल
कर पेन्टी निचे करने लगा, चाची ने भी हल्का सा उठ कर मेरा काम असान कर दिया, फिर
मैने बड़े आराम से चाची की पेन्टी उतारि और उसे सूँघने लगा, मुझे सच में पसंद आने
वाली खुशबू थी पेन्टी कि, मैंने थोड़ी देर लगायी तो चाची ने मुझे सूंघते हुए देख लिया
ओर कहा
चाची: अरे रेशु, यह क्या कर रहा हे?
मैं- चाची, इसमें से अच्छी खुशबू आ रही हे, इस लिए इसे सूँघ रहा हू, मुझे बड़ा मजा
आ रहा हे.
चाची- रेशु, मेरे दर्द के बारे में सोच्.
मैं- अच्छा चाची, क्या में यहाँ सूँघ सकता हूँ? मैंने चाची की गांड की और पॉइंट करते
हुए कहा चाची ने कहा ठीक हे, पर इलाज भी साथ में करना.फिर में चाची की गांड के पास बैठ गया और चाची की गांड को देखने लगा और दबाने
लगा, चाची की फिर से मॉनिंग स्टार्ट हो गयी और फिर मैंने चाची की गांड को सूँघने के
बहाने चाची के ऊपर आ गया और उलटा लेट गया, जिससे अब में चाची के ऊपर था पर
चाची पेट के बल लेटी थी, इसीलिए वह मेरा तना हुआ लंड महसूस कर सकती थी पर कुछ
कर नहीं सकती थी, चाची की इस हालत पर मुझे मज़ा आ रहा था और मैं चाची की गांड
को सूँघने के बहाने, चाची की गांड को खोलकर किस करने लगा, और मेरी नाक चाची की
बूर पर थी इसीलिए चाची और भी मदहोश हो रही थी. चाची की चुत से रस निकलना
चालु हो गया था मेरा लंड भी काबू में नहीं था इसीलिए मैंने चाची को हिंट देणे के
लिये वहा खुजाया और दो तीन बार किया तो चाची ने भी आखिर पूछ ही लिया
चाची : क्या हो रहा हे बेटा?
मैं- कुछ नहीं चाची, बस खुजली हो रही है
चाची- ला में देखू तो?मैने बिना टाइम वेस्ट किये, नादान बनते हुए अपना लंड चाची के सामने खुला कर दिया अब
चाची पीठ के बल घूम गयी और मेरी आँखों के सामने चाची की चुत थी, हलके से बाल
भी थे, पहली बार चुत देख कर मेरे से रहा नहीं गया और मेरा प्री कम निकलने लगा. और
उसे चाची ने देख लिया लेकिन अन्जान बनते हुए फिर से कहा की ले में इस खुजली का इलाज
करति हूँ और मौका पाते ही मेरा लंड पकड़ कर अपने मुँह में रख लिया और मस्त चुसने
लगी. मैं भी समझने लगा था की चाची चुदना जरूर चाहती हे पर नादान बनकर. इस
लिये मैंने चाची से कहा “चाचि यहाँ पर चींटी अंदर गयी लगता हे, इसीलिए पाणी निकल रहा हे, क्या में इसे निकाल दूँ?'
चाची- ने कहा आरे जल्दी निकाल यह भी कोई पूछने वाली बात हे क्या?
मैंने भी चाची की चुत में अपनी ऊँगली डाल दी और आराम से उसे अंदर
बाहर करने लगा, चाची भी मेरा लंड चुस चुस कर बरसो की प्यास बुझा रही थी. फिर
मैने चाची की चुत में अपनी जीभ दाल कर चुस्ने लगा. मेरी जीभ की नर्माहट से चाची की
एक्साइटमेंट बढ़ती जा रही थी लेकिन वो खुल कर मुझे चोदने के लिए बोल नहीं रही थी,
मै यह सोच रहा था की इतने बहाने कैसे बनाऊँगा? लेकिन मैंने आईडिया निकला और चाची के मूँह को चोदने लगा, वह भी बुरा नहीं मान रही थी. शायद चाचा ने कभी चाची के साथ माउथ-फूकिंग किया नहीं होगा, यह उनके लिए पहली बार था मैंने अपनी स्पीड बढाई और
चाची के गले में और अंदर और अंदर लंड डालने लगा. चाची तो मानो पागल हो रही थी,
फिर मुझे जब लगा की में अब झडने वाला हूँ तो मैंने अपना लंड बाहर निकाला और चाची
के पूरे बदन पर अपना सारा माल निकल दिया. मेरे ९ इंच के लंड में से पहली बार इतना सारा
माल निकला. चाची का ब्लाउज पूरा चिकना हो गया था फिर उन्होंने अन्जान बनते हुए ग़ुस्से मे कहा 'रेशु यह क्या किया तूने पूरे कपडे गंदे कर दिए?' मैंने तुरंत चाची के कहने पर
कहा की “लाओ चाची में इसे उतार देता हू, आपके हाथ गंदे हो जाएंगे”.इस बात पर उन्होंने बनते हुए कहा की “अच्छा ठीक हे, पर आगे से ऐसा मत करना”. फिर वो बैठ
गई और मैंने अपने हाथ चाची के शोल्डर पर रख दिए और चाची के शोल्डर को सहलाते
हुए उनके आर्मपिट से होते हुए मैंने दोनों साइड से चाची के बॉब्स पर हाथ रख दिया और
सहलाने लगा, चाची बस आँखें बंद कर के एन्जॉय कर रही थी. फिर मैंने चाची के ब्लाउस के हुक खोलना शुरू किया और फिर एक दो तीन और चार कर के सारे हुक खोल दिए और चाची
का ब्लाउज आराम से उतार दिया. अब चाची ब्लैकब्रा और पेन्टी में थी. बाय गॉड मेरा लंड फिर से
खड़ा हो गया और वो चाची के कमर को छु रहा था चाची को इस बात का पता चल
रहा था फिर उन्होंने मेरी और देखते हुए कहा की 'रुक क्यों गये, इसे भी उतार कितना गन्दा हो गया हे?' मैंने तुरंत अज्ञाधारी स्टूडेंट की तरह चाची की ब्रा के हुक को पीछे से खोला और निकाल दिया. अब चाची कुछ और ही रंग में थी.
चाची-“बेटा इसको भी मसाज कर दे” और ऐसा कहकर उन्होंने मेरे हाथ अपने हाथों में ले कर
आपणे बॉब्स पर रक्खा और सहलाने लगी. वह अब सिडक्शन फील कर रही थी. मैं भी अब
चाची से एक दम सट के बैठ गया और बॉब्स मस्त दबाने लगा. दोनों बॉब्स मेरे हाथों मे
मैने गोल गोल घुमाये और फिर दोनों हाथों में निप्पल्स ले कर उसे प्रेस किया चाची के मुँह
से एक आआआह्....निकला पर उनको मज़ा आया. फिर मैंने उन्हें लीटा दिया और उनके ऊपर चढ गया
ओर चाची के बॉब्स दबाने लगा और बिना पूछे उन्हें अपने मुँह में ले लिया और जोर जोर से
चुसने लगा. चाची के फेस पर शिकन की लकीरे देख कर में रूक गया तो चाची ने
आंखेँ खोलकर कहा “अरे रूक क्यों गया और करो अच्छा लगता हे”.
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02-27-2021, 12:38 PM,
#9
RE: XXX Sex Stories डॉक्टर का फूल पारीवारिक धमाका
अपडेट 8

मैं फिर से चाची के
बूब्स मसलने में लग गया फिर मैंने चाची की नाभि में अपनी ऊँगली डाली और उसे घूमाया
ओर अंदर प्रेस भी करने लगा. थोड़ा ज्यादा जोर डालतेहि चाची अपने आप को रोक नहीं पायी
ओर बोल पड़ी की 'रेशु बेटा जरा धीरे करो' फिर मैंने चाची के पेन्टी में हाथ डाला और
चाची की क्लिप को मसलने लगा और थोड़ी देर ऐसा करने के बाद मैंने चाची की चुत मे
उंग्ली दाल दी और उसे अंदर बाहर करने लगा. चाची को मस्त लग रहा था अब उनसे रहा
नही गया और बोल पडी चाची “येस, रेशु बेटा, और करो, अच्छा लग रहा हे,. “प्लीज फ़क मि”...चाची के मुँह से फ़क सुनने का ही इंतज़ार था फिर मैंने चाची के चुत में दो उंगलिया
दाल दी और चाची मचल उठि और अंगडाई लेने लगी. में चाची की नाभि को किस कर रहा
था और दो ऊँगलियों से चुत मसल रहा था फिर मैंने फिर से उठकर चाची के ऊपर 69 की
पोजीशन में आ गया और चाची की पेन्टी को निकाल दिया और चाची की चुत को मुँह में ले कर
चुसने लगा चाची भी बिना कुछ सोचे मेरे लंड को चूसने लगी और अपने मुँह में जी
भर के लंड उतारने लगी, फिर उन्होंने मेरे दोनों बॉल्स को पकड़ा और दबाया, में भी उत्तेजित
हो गया और चाची की चुत में और जीभ डालने लगा चाची अब जोर से अब मॉनिंग कर रही
थी. फिर मैंने अपनी दो उंगलिया फिर से चाची की चुत में डालि और जोर जोर से अंदर बाहर
करने लगा और अपनी जीभ से चाची को चाटने भी लगा. अब मेरे बस में में नहीं था,
ईसीलिये मैंने चाची के दोनों पाँव फैला लिए और चाची के चुत पे अपना लंड रक्खा और
चाची को धक्का मारने लगा पर लंड अंदर गया नही. फिर चाची हंस के बोली 'बेटा चाहे
जितना ब्लू फिल्म देख लो, पहली बार तो औरत से पूछना ही पडता हे” फिर उन्होंने मेरे लौडे
को अपने छेद पर रक्खा और अब जोर लगाने को कहा. फिर मैंने जोर लगाया और इस बार चाची
मे मेरा लंड चला गया पूरा नहीं गया था पर दूसरी बार में पूरा चला गया. अब चाची ने
कहा की “धीरे धीरे शुरू करना फिर अपने आप स्पीड आ जाएगी”. मैंने फिर अपना लंड चुत मे
ही रहने दिया और चाची के ऊपर लेट गया और चाची के लिप्स को चुस्ने लगा, चाची भी मेरे
लिप्स को चुस रही थी. फिर उन्होंने मेरी जीभ को पकड़ लिया और उसे चुस्ने लगी, मेर
लिये यह पहलीबार था लेकिन मज़ा आया और में भी उनकी जीभ को चुस्ने लगा. वह इस किस मे
मस्त थी और मैंने वहॉ चोदना शुरू कर दिया था तक़रीबन पांच मिनट तक चुस्ने के बाद मैने
चाची की जीभ को छोड़ा और अब सीधा बैठ गया और जोर जोर से चाची को धक्के लगाना
शुरु कर दिया, चाची की चुत में से मस्त लिक्विड निकल रहा था जिसके साथ मेरे लौडे के
टकराने से छपाक....छप्पाक आवाज़ आ रही थी, मेरी साँसे तेज़ हो रही थी और चाची
भी जोर जोर से मॉनिंग कर रही थी. फिर मैंने चाची को साइड से लिटा कर चोदना शुरु
किया और साथ में ही उनके बॉब्स भी दबाने लगा, मेरी चुदाई और भी तेज़ हो रही थी. पुरा
बिस्तर हिल रहा था पता नहीं चाची को चाचा ने ऐसे कभी चोदा भी होगा या नही. फिर
साइड से होते हुए मैंने चाची को पलटा दिया और चोदना शुरू कीया था अब में चाची को और
जोर से धक्के लगाने लगा, वह भी जानबूझ कर जोर से वापस आती थी. तक़रीबन आधे
घँटे तक मैंने चाची को बिना रुके चोदा, अब मुझे कुछ झटका सा लग रहा था मैने
चाची से कहा तो उन्होंने कहा की पहली बार कर रहे हो इसीसलिए पता नही, इसे ओर्गाजम
कहते हे, तुम अब झड़ने वाले हो, प्लीज और भी जोर से करो में भी क्लाइमेक्स पर
पहुँचनेवाली हू, फिर मैंने तो जैसे चाची जो डॉगी स्टाइल में थी मैंने उन्हें उनके पेट से
पकड़ के उठा लिया और दम लगाके झटके मारने लगा, चाची भी क्लाइमेक्स के लिए जोर लगाणे
लगी और फिर एक दम से उनके चुत में से लिक्विड छुटा और वह शांत हो गयी और दो ही
मिनट में मैंने भी चाची के अंदर ही अपना सारा वीर्य झटके से उडेल दिया. और चाची के
उपर ही लेट गया. चाची पेट के बल लेटी थी. मैंने चाची के ऊपर अपना फेस रक्खा और
उनके गाल को किस करने लगा, फिर उनके कान में कहा
मैं- “थैंक्स चाची, यु आर सो नाइस”
चाची- “रेशु, आए एम थैंकफुल टू यु, आज बहुत दिनों के बाद अपने औरत होने का एह्सास हुआ हे”. फिर
ओ मेरी और पलटि और मैंने उनकी आँखों में देखा, अब उसमे एक सटिस्फैक्शन था जो की सेक्स के
लिये मुझे कब से उकसा रहा था फिर मैंने उनके लिप्स पर किस करने लगा.

दूसरे दिन में देर तक नहीं उठा और जब तक़रीबन १०.३० बज चुके थे तब अचानक मैंने अपने बदन में पैन महसूस किया और में जग गया और उठा तो होश में आया तो पता चला की पेनिस में दर्द हो रहा था मैं उठा और नहाकर फ्रेश हो कर बाहर आया तब भी दर्द कंटिन्यू था मुझे कुछ शक़ सा हुआ की शायद यह पिछ्ली रात के वजह से तो नही, इसीलिए में तुरंत अपनी चाची से पूछ्ने उनके रूम के लिए निकला. लेकिन वो उनके रूम में नहीं थी, मैंने पूरा घर छान मारा पर चाची मिली नही, चाचा पहले से क्लिनिक के लिए निकल चुके थे. मैं अकेला था और चाचा के बारे में सोच रहा था तक़रीबन आधे घंटे बाद चाची कहीं बाहर से आई और जैसे ही मैंने डरवाजा खोला तो वो मेरी और देखे बिना ही किचन में चल दी और अपना काम करने लगि, में भी उनके पीछे गया और कहा
मैं-चाचि???
चाची- “रेशु प्लीज में बहुत डिस्टर्ब हूँ और मुझे तुमसे अभी कोई बात नहीं करनी हे, प्लीज लीव में आलोन”. मैं काफी टेंशन में आ गया पर चाची की सिचुएशन को समझते हुए में कॉलेज जा रहा हूँ कह कर निकल गया. फिर मैं कॉलेज में अपने जिगरी दोस्त से अपने दर्द के बारे में बताया तो उसने मुझे समझाया की ऐसे पहलीबार सेक्स करते हे तो चमड़ी छील जाने से ऐसा होता हे, लेकिन फिर ठीक हो जाएगा. पूरा दिन में चाची के बारे में सोचता रहा, कहीं मन नहीं लग रहा था मैं शाम को घर आया तो मैंने चाची से बात करनी चाही पर चाची मुझे अवाइड कर रही थी, में फ्रेश हो कर आया तो चाची अपने रूम में थी. मैंने चाची के रूम पर दस्तक दी और दरवाजा खटखटाया.
चाची- “कौन???
मैं- “चाची में हू चाची क्या काम हे?
मैं- “चाची प्लीज मुझे आपसे बात करनी है”
चाची : “बाद में बात करेंगे, अभी नही”.मैने यह सुना लेकिन में दरवाजा खोलकर अंदर चला गया और चाची को देखा, मुझे देखते ही चाची ने कहा की “रेशु मुझे अभी कोई बात नहीं करनी हे, प्लीज मुझे अकेला छोड़ दो”. मैं चाची के सामने बैठा और कहा
मैं- “क्या बात हे चाची??? प्लीज मुझे बताइये..आप बहुत अपसेट लग रही हे”. “मैं कुछ मदद कर सकता हूँ?
चाची- “नही..
मैं- “चाची..कल रात जो भी हुआ वो मुझे गलत नहीं लग रहा, अगर आपको कुछ गिल्टी फीलिंग हो रही हे तो में आपसे माफ़ी मांगता हूँ और आगे से ऐसा कुछ नहीं होगा पर एक बात कहूं”
चाची- “क्य..? (चाची अब भी मुझसे नज़रें नहीं मिला रही थी)
मैं- “चाची कल रात के लिए थैंक्स?? वो बहुत हसींन पल थे और में बहुत खुश हु,. “आप के मन के बारे में तो नहीं पता पर अगर आप कुछ कहना चाहे तो कह सकती हैं??
चाची-“रेशु बेटा कल जो हुआ उसमे मेरी ग़लती थी और प्लीज मुझे माफ़ कर देना मुझे बहुत गलत लग रहा हे,. “और प्लीज आगे से ऐसा कुछ नहीं होगा और तू कुछ गलत सोचना भी मत?? प्लीज अभी तुम जाओ और जो भी कल हुआ उसे भूल जाओ”.
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02-27-2021, 12:40 PM,
#10
RE: XXX Sex Stories डॉक्टर का फूल पारीवारिक धमाका
अपडेट 10

इतना बोलते तो मेरी मनो जान ही थम गयी. फिर मैंने चाची की और देख, वो मुझे ही देख रही थी. बिलकुल एक्सप्रेशन नहीं थे उनके चेहरे पर, लेकिन मैंने उन्हें फिर से प्लीज कहा. मुझे लग रहा था की चाची मान जायेगी पर कोई विश्वास नहीं था में अपनी सोच में था की क्या होगा पर इतने में चाची उठी. मैं ठीक उनके सामने बैठा था और वो एक दम से उठकर मेरे चेहरे को हाथों में पकड़ लिया और अपने लिप्स से मेरे लिप्स को पकड़ लिया. एक सेकंड के लिए में कुछ संमझा नहीं पर बाद में समझा मैंने फिर चाची को बाँहों में पकड़ लिया और अपने सीने से जोर से सटा लिया, मेरे हाथ उनके बैक पर घूम रहे थे और वो मेरे लिप्स को चुसे जा रही थी, ओह गॉड वो तो मानो खो गयी थी. फिर उन्होंने मुझे बेड पर गिरा दिया और पगलों की तरह मेरे पूरे चेहरे को किस करने लगी, किस क्या वो मुझे शायद चाट रही थी. मैं तो कुछ करने के हालत में नहीं था मेरे पूरे चेहरे को चूमने के बाद फिर से वो मेरे लिप्स को चुस्ने लगी तो मैंने भी अपने ऊपर से उन्हें घुमा दिया और उनके ऊपर हो गया और में भी उनके लिप्स को किस करने लगा, अब मैंने अपनी जीभ उनके मुँह में दे दी और वो भी मेरी जीभ का स्वाद लेने लगी. मैंने दोनों हाथ उनके गालों पर रक्खे थे, हलकी पीली रौशनी में उनके गाल एक दम सिडक्टिव लग रहे थे. फिर मैंने अपना राईट हैंड उनके गाल से हटा कर उनके गले पर घूमाते हुए स्लोवली उनके शोल्डर पर ले गया और वह शोल्डर को दबाते हुए मैंने अपना हाथ उनके बूब पर ले जाने लगा, तभी चाची ने एक दम से अपने हाथ से मेरा हाथ थाम लिया और अब तक जो आँखें बंद कर के बस चुमे जा रही थी तो अब उन्होंने आँखें खोल ली और मेरी और देखने लगी.लेकिन में भी अब चाची को छोड़ने के मूड में नहीं था मैंने चाची को एक आँख मार कर इशारा किया और चाची के ब्लाउज से हाथ हटा कर चाची की नाभि पर रक्खा और अपनी मिडिल फिंगर को उसमे अंदर करने लगा, इससे चाची काफी उत्तेजित होने लगी थी, चाची अपने पेट् को ऊपर करके मुझे अपनी ऊँगली निकालने के लिए इशारा कर रही थी, पर मैंने ऊँगली निकालने के बजाय ऊँगली को चाची के नाभि में गोल गोल जोर से घुमाने लगा अब रफ़ बिहेवियर करने लगा जैसे में फिंगर फकिंग कर रहा हू, अब चाची से नहीं रहा जा रहा था इसीलिए उन्होंने अपने एक हाथ से मेरी ऊँगली को पकड़ लिया और न चाहते हुए भी उसे निकालने लगि, अब मैंने चाची के लिप्स को छोड़ा और चाची को गर्दन के आसपास चूमने लगा, चाची को अब नशा चढ़ रहा था वो बोली ??रेशु, प्लीज् रुक जाओ, ऐसा मत करो.?? वो मुझे रुक्ने को बोल रही थी पर अपने हाथों से मेरे सर को पकड के सेहला रही थी और मेरे सर को अपने बदन पर चुब्वा रही थी. मैं समझने लगा था मैंने अब चाची के बॉब्स पर फिर से हाथ रक्खा और आराम से गोल गोल घुमाने लगा, अब चाची के बस में कुछ नहीं था अब चाची की निप्पल्स कड़क होने लगी थी. मैंने चाची की दोनों निप्पल्स को पकड़ा और उसे पिंच किया, फिर से छोड़ा और पिंच किया, फिर से छोड़ा और पिंच किया अब चाची के बस में वो खुद नहीं थी. फिर वो भी अपने बॉब्स को ऊपर उठा के जैसे मुझे इनवाइट कर रही हो ऐसे इशारे करने लगी. मैंने अब चाची के ब्लाउज के हुक पे अपने हाथ डाले पर चाची ने फिर से मेरे हाथो को रोक लिया पर मैंने थोड़ी आक्रामकता दिखाते हुए चाची के लिप्स पर फिर से किस करने लगा और इस दौरान मैंने चाची के ब्लाउज के बटन खोल डाले और ब्लाउज को दोनों बाजुओं के साइड कर दिया, ओह माय गॉड मैंने देखा तो चाची ने ब्लाउज के निचे कुछ नहीं पहना था ब्लाउज पर हाथ फेरते समय ऐसा लगा था पर यकीन नहीं हो रहा था और पार्टी में शिफोन साडी के ट्रांसपेरंट न देख पाने की वजह से शक़ नहीं हुआ, खैर अब चाची के बॉब्स मेरे सामने ओपन थे और मैंने अपने दोनों हाथ चाची के बॉब्स पर रख दिए और चाची आराम से बॉब्स को दबवानेन लगी, जल्दी में में कुछ नहीं कर सकता था स्लोवली ही चाची को सिड्यूस किया जा सकता हे यह अब में जान चुक्का था चाची के बॉब्स अब फर्म होने लगे थे, मैंने अब चाची की निप्पल्स को हाथो में ले लिया और उस पर ऊँगली और अँगूठे से थोड़ा सा प्रेशर करने लगा, चाची की और से कोई रिस्पांस ना पाया तो थोड़ा और प्रेशर से दबा दिया, चाची के मुँह से एक दम चीख निकल गयी पर लिप् किस की वजह से आवाज़ नहीं हुई. लेकिन उन्होंने किस करना बंद कर दिया और मैंने चाची की आँखों में देखते हुए प्यार से सॉरी कहा और चाची मुस्कुरा दी. फिर मैंने चाची के दोनों बॉब्स को हाथों में पकड़ के चाची के दोनों बॉब्स को बारी बारी चूसने लगा, चाची अब मोअन करने लगी थी, फिर मैंने अपने एक हाथ से चाची की साडी को ऊपर उठना चालू किया और चाची के थाय तक साडी को उठा दिया और फिर मैंने अपने दोनों पैरों से चाची के दोनों पैरों को फैला लिया, चाची ने थोड़ी सी हरकत की पर मैंने आखिर में दोनों पैरों को फैला लिया और साडी जो थाइस तक थी वो अब चाची के पेन्टी तक आ गयी. मैं तक़रीबन चाची को दस मिनट तक चूसता रहा फिर मैंने चाची को पीछे से पीठ पकड़ के उठा लिया, में चाची के दोनों पैरों के बीच में था और चाची को उठाने की वजह से चाची अब मेरे लौडे पर बैठ गयी,
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