अपडेट 39
“सिक्योरिटी कैमरा से साफ़ साफ़ पता चल रहा है की बुर्के वाली तुम्हारी भाभी hi है , लेकिन मैंने सब फुटेज मिटा दिए है “
काजल ने मेरे कानो में कहा ,
“लेकिन वो लोग है कहा “
न hi भाभी और न hi नेहा की माँ दिखाई दे रही थी ,तिवारी भी पहले इधर उधर की चीजों में लगा फिर उन दोनों को ढूंढने लगा ..
“नेता जी वो दोनों तो चले गए ..”
सिक्योरिटी के एक आदमी ने कहा और तिवारी ने बस एक गहरी साँस छोड़ी ..
पूरा माहौल hi बदल चूका था , नेहा बहुत hi ुप्सताते दिखाई दे रही थी , वही बाकि लोग भी ख़ामोशी hi थे, उनमे से अभी तक किसी को ये नहीं पता था की दो महिलाओ में एक मेरी भाभी है लेकिन वो इसलिए दुखी और परेशां थे क्योकि दूसरी महिला नेहा की माँ थी …
“तुम दोनों मेरे साथ चलो मैं तुम्हे छोड़ देती हु”
काजल ने मुझे और नेहा से कहा , उसने मेरी आँखों में देखते हुए ये कहा था , मुझे समझ आ चूका था की इसके पास कोई अलग hi प्लान होगा ..
मैंने नेहा के कंधे पर हाथ रखा
“चलो चलते है, अक्की तुम अज्जू के साथ आ जाना “
अक्की ने भी हामी भर दी थी
“मुझे अभी भी यकीं नहीं हो प् रहा है अंकित की मेरी माँ.. वो तो एक सीधी सधी सी इंसान है वो इन सब में .. नहीं इन गोलियों के चलने इस उनका कोई भी कनेक्शन नहीं हो सकता , लेकिन वो यंहा आयी क्यों थी “
नेहा मेरे सेल से लग कर रोने लगी थी , मैंने उसकी पीठ को सहलाया
“अभी घर चलो नेहा , इन सब के बारे में बाद में सोचेंगे “
उसने है में सर हिलाया और आँखों से आंसू को पोछते हुए मेरे और काजल के साथ बहार आयी ..
काजल ने एक गाड़ी की तरफ इशारा किया, वो काळा कांच वाली एक सुव थी ..
दरवाजा खुलते hi नेहा थोड़ी हड़बड़ाई .
“कुछ मत बोलो चुप चाप बैठ जाओ “ मैंने उसके कानो में कहा था ..
“लेकिन ये लोग “
नेहा ने अंदर देखते हुए कहा , मैंने उसके कंधे को पकड़कर हलके से दबा दिया
“बस बैठ जाओ “
काजल और मैं भी उसमे बैठ गए और कार चल पड़ी..
“आपने ये क्यों किया माँ और ये कोण है “
कार के चलने पर नेहा ने कार में बैठी हुई अपनी माँ से कहा ..
उसने भाभी की तरफ इशारा किया ..
“अभी इन सब सवालो का समय नहीं है नेहा .. पहले हम किसी सुरक्षित जगह पर पहुंच जाए “
काजल ने गाड़ी चलते हुए नेहा को जवाब दिया ..
सभी चुप थे , कोई भी किसी से कुछ नहीं बोल रहा था ,,
काजल ने hi नेहा की माँ और मेरी भाभी को वंहा से सबकी नजरो से बचाकर निकाला था ..
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“ये आखिर हो क्या रहा है आप वंहा क्या कर रही थी और आपके साथ वो आदमी कौन था “
हम अभी शहर से दूर एक घर के एक कमरे में थे , मैं अभी भाभी के सामने खड़ा हुआ था , उनके चेहरे में चिंता के भाव घूम रहे थे..
“मैं सम्पत मां के साथ hi सोनू …”
अभी तक नेहा को समझ आ गया था की ये ायरत मेरी भाभी है , वो जैसे अब चुप hi हो गयी थी ..
“लेकिन आप उनके साथ वंहा .. क्या आप तिवारी को मरने गयी थी ??”
“नहीं .. मुझे तो कहा गया था की सागेर को बेहोश करना है , इसके लिए उसके मोबाइल में एक मश्ग डालकर उसका ध्यान मेरी तरफ आकर्षित कराया जाता फिर मुझे बस उसे ये कहना था की वो बंगले के मुख्या माकन से लगे स्टोरी रूम की तरफ मुझे मिले … वंहा मुझे एक सुई चुभनी थी ताकि वो बेहोश हो जाए और हम उसे उठा कर ले जाए …”
“लेकिन वो मश्ग देखर क्यों..??”
काजल भाभी की बातो को बड़े hi ध्यान से सुन रही थी
“क्योकि तिवारी के हेड ऑफ़ सिक्योरिटी सम्पत मां से मिला हुआ था , उसने सागेर को पार्टी में लड़की सप्लाई करने के लिए कहा था ..”
“और आप वो लड़की थी “उनका बात सुनकर मेरा मनो खून खोल गया ये सम्पत भाभी से ये सब करवा रहा था..
“है .. मैं बस एक चारा थी , हेड ऑफ़ सिक्योरिटी hi हमारा आदमी था इसलिए प्रॉब्लम नहीं होती लेकिन फिर पता चला की और भी कई लोग को सिक्योरिटी की जिम्मेदारी मिली है और सब साथ मिलकर काम करेंगे , फिर भी हमारा प्लान तो एकदम बढ़िया था, इसी तरह की कोई प्रॉब्लम नहीं थी ,, फिर पता नहीं मां ने गोलिया क्यों चलाई ये तो प्लान में था hi नहीं … “
सभी सोच में पद गए थे ..काजल अचानक से hi बोल पड़ी
“कुछ तो गड़बड़ जरूर है .. जीवा कहा था ..”
“मुझे नहीं पता शायद कालिया बनकर अपनी बस्ती में ..”
काजल बहुत देर तक सोचती रही फिर बोल उठी
“जिस तरह से गोलिया चलाई गयी थी और जैसे गोली चलने वाला गायब हो गया था इससे दो चीजे तो साफ़ है ..पहली ये गोलिया किसी को मरने के लिए नहीं बल्कि बस डरने के लिए चलाई गयी थी , वर्ण ऐसी जगह से गोली चलने पर तिवारी और उसके साथ के सभी लोग आराम से मारे जा सकते थे , और दूसरा जैसा तुमने बताया कोई अंदर का आदमी उनसे मिला हुआ था इसलिए गोली चलने वाला आराम से निकल गया , तुम सागेर की और जा रही थी फिर अंकित को देखकर तुमने अपनी दिशा बदल ली थी , क्या उससे प्लान चेंज हुआ होगा ..”
“मुश्किल है क्योकि बात तो बस सागेर को उस कमरे तक लेन की थी , मश्ग मिलने के बाद तो वो वंहा आता hi आता ऐसे भी उसने मुझे देख लिया था, भले hi मैं दिशा बदल दी हो लेकिन इससे प्लान तो चेंज नहीं हो जाता “
“मतलब सम्पत पहले से hi गोली चलने के लिए वंहा आया था “
“है शायद इसलिए मैं और भी घबरा गयी , मुझे तो सब पर से भरोषा hi उठ सा गया है , क्या सही है क्या गलत कुछ समझ hi नहीं आ रहा .. सम्पत और जीवा मां ने मुझसे कहा था की तिवारी ने मेरी माँ की जिंदगी बर्बाद कर दी , और जीवा गैंग को भी धोखा दे कर बर्बाद कर दिया..
उन्होंने मुझे तिवारी के बारे ऐसे ऐसे चीजे बताई की मुझे लगा की तिवारी एक दरिंदा है , मुझे लड़ना सिखाया गया , और गैंग को फिर से चालू करने की बात कही गयी लेकिन …….
लेकिन जो हुआ उससे वो मैं भी हस्तप्रद हु, और तिवारी की वो आंखे …….. वो किसी दरिंदे की आंखे तो नहीं लगी मुझे , जैसे उसने माँ का नाम लिया और जैसे वो मेरे चेहरे कोई देख रहा था ………और जैसा उसने मेरे साथ वयवहार किया ..”
भाभी की ये बात तो सही थी , तिवारी की आँखों में नफरत तो नहीं थी , ना hi दर था जब उसने भाभी को देखा तो उसके चेहरे के भाव कुछ अलग hi थे , बात सोचने वाली थी की उसके घर में हमला हुआ था और जो मेजर सस्पेक्ट थी उसे तिवारी ने बचा लिया ..
लेकिन तिवारी भाभी से कुछ बोल पाए उससे पहले hi काजल ने उन्हें और नेहा की माँ को वंहा से बहार निकाल दिया ..
“शायद जीवा गैंग को तुम्हारी नहीं तुम्हारे चेहरे की जरुरत थी जो तुम्हारे माँ से मिलती है “
काजल ने एक सिगरेट सुलगा ली थी , और वो नेहा की माँ की और मुड़ी
“और महिमा जी आप वंहा क्यों गयी थी “
महिमा ने एक गहरी साँस छोड़ी
“मेरी कहानी तो सभी जानते है , जब नेहा छोटी hi थी तो तिवारी और जीवा ने मिलकर मेरे पति इंस्पेक्टर सत्यप्रकास की हत्या कर दी थी , उस समय मेरी बच्ची छोटी थी इसलिए मैंने जहर का घुट पि लिया और शहर आकर इसकी परवरिश करने लगी , नेहा को हमेशा इस बदले की आग से दूर रखा ताकि वो सलामत रह सके , लेकिन मैं उसे कैसे भूल सकती थी , इसलिए मैंने अपने तरीके से काम करना शुरू किया .. दिन भर जॉब करती अपनी बेटी को पलटी लेकिन जीवा और तिवारी के बारे में जानकारी इकठ्ठा करते रहती थी , इसी उम्मीद में की एक दिन कुदरत मुझे भी मौका देगी और सही मौका आने पर मैं अपने पति की मौत का बदला ले सकुंगी …. मैं वंहा भी जानकारी जुटाने hi गयी थी लेकिन मुझे नहीं पता था की वंहा ये सब हो जायेगा , और मेरी बेटी भी वंहा मौजूद होगी ..”
नेहा ने अपनी माँ को कास कर जकड लिया
“नहीं माँ अब तो हर लड़ाई हम साथ मिलकर hi लड़ेंगे ..”
“नहीं बेटी इन सबसे दूर रहना hi सही है..”
“नहीं माँ .. पापा के कातिलों को तो सजा मिलेगी .. जरूर मिलेगी “
मैं कमरे से बहार आ चूका था काजल मेरे बाजु में कड़ी हुई थी , हम दोनों hi सिगरेट की गहरी गहरी कास लगा रहे थे ..
“तुम्हे क्या लगता है तुम्हारी भाभी सही बोल रही है ??”
काजल की बात सुनकर मेरे माथे में बल आ गयी
“क्या पता ?? अब तो किसी की बात पर भरोषा hi नहीं होता “
मैंने एक गहरा कास लगाया ..
“तो अब .. अगर भाभी सही कह रही होगी तो समझ लो की वापस जीवा के पास जाना भी खतरे से खली नहीं है , पता नहीं की उनका प्लान क्या था जिसमे इसे घुसा दिया गया था , और अगर वो झूठ बोल रही है अगर वो सम्पत के साथ इस प्लान में शामिल थी तो भी उनको जीवा के पास ले जाना सही नहीं होगा, पता नहीं वो फिर इससे क्या करवाए ..”
“तो… कहा ले जाओ भाभी को , कितने दिन लोगो की नजरो से छुपा कर रख पाउँगा ..”
काजल सोच में पढ़ गयी
“आखिर ये सब चल क्या रहा है वो तब hi पता चल पायेगा जब हमें ये पता चलेगा की आखिर पास्ट में हुआ क्या था , क्यों की सबकी अपनी अपनी कहानी मिलेगी .. लेकिन एक शख्स है जो तुम्हे सही कहानी बता सकती है ..”
काजल की बात सुनकर मेरी आंखे सिकुड़ गयी
“कौन..??”
“कोमल .. आरती की माँ.. आखिर सब कुछ उससे hi तो जुड़ा हुआ है “
मैंने भी हां में सर हिलाया …