अपडेट 54
थोड़ी देर में माहौल थोड़ा शांत हुआ था
“लेकिन आपने बताया नहीं की आप कोमल से कैसे मिली “
महिमा की बात सुनने के बाद मैंने सवाल किया ..
इस बात का जवाब महिमा ने नहीं बल्कि डॉ. चुटिया ने दिया ..
“अंकित बात असल में ऐसी है की जब भुवन और कोमल ने सब कुछ छोड़ने मन बनाया था तो वो उसी सिलसिले में मुझसे भी मिले थे , मैं भुवन को पहले से जनता था , मेरे hi मदद से ये लोग इस गांव में बेस थे .. उसके बाद जब कोमल अपनी बेटी को ढूंढते हुए मेरे पास आयी तब मैंने कोमल और महिमा को मिलवाया था ….. “
“ओह्ह्ह “
मैंने कोमल की और देखा , फिर भाभी की और आपसे ये कैसे मिली
इससे पहले भाभी कुछ बोले कोमल बोल पड़ी
“मैं तुम दोनों को पुरे शहर में धुंध राइ थी जब मुझे इंस्पेक्टर पाण्ड्य के मर्डर की बात पता चली तो जब मैंने पता किया तो मुझे समझ आने लगा था की जरूर तुम जीवा या सम्पत के हाथ लग चुकी हो…. जीवा अब तिवारी से छुप कर रहता था या ये कहो की दोनों एक दूसरे के आमने सामने आने से बचते है , क्योकि इसी में दोनों की भलाई है , तिवारी ने पठान गैंग को हथियार लिया और करीम की लड़कियों के जिस्म की चाह ने तिवारी का काम और भी आसान कर दिया , उसने गैंग वालो को hi करीम के खिलाफ भड़क के उसका मर्डर करवा दिया .. लेकिन फिर जीवा और उसकी सीधी टक्कर थी , तिवारी ने दिमाग लगाया और लड़ने झगड़ने के बजाय एक मौन समझौता दोनों में हो गया ……
तो मुझे लग hi गया था की जब जीवा ने आरती देखा होगा तो उसके no.1 डॉन बनने की ख्वाहिश बलवती हो गयी होगी और आरती को अपने काबू में लेने की कोशिस करेगा , शायद इमोशनली, मेरे पास अब इतनी ताकत नहीं बची की मैं एक पुरे गैंग से भीड़ जाऊ , ये सकती बड़ी अजीब है जो प्रेम के साथ रहने से hi आती है लेकिन फिर धीरे धीरे गायब होने लगती है , मेरे पास अब बस स्किल्स बचे है जो मैंने सीखी थी लेकिन वो ताकत नहीं रह गयी , इसलिए मैं चाहती थी की अपने दिमाग से काम ताकत लगाए hi आरती तक पहुँचू ..
और मैंने वेट किया पता किया मुझे तुम दोनों के बारे में कई इनफार्मेशन का पता चलता गया , लेकिन अभी आरती के अंदर की ताकत बहार नहीं आयी थी मतलब साफ है की अभी उसे अपना प्यार नहीं मिला है, या उसने उसे अच्छे से पहचाना नहीं है ..
सम्पत और जीवा भी इसी खोज में थे की कैसे आरती के अंदर की ताकत को जगाया जाये , उन्होंने इसका ब्रेन वाश तो कर hi दिया था …
अपने जूठी कहानिया सुना कर ये तो यकीं दिला दिया था की तिवारी गलत है और उसने मेरे साथ बहुत गलत किया है , आरती तिवारी से बदला लेने को आतुर हो गयी थी ..
लेकिन फिर मैं उसे मिली उसे समझाया की तिवारी बुरा इंसासन है लेकिन जीवा और सम्पत भी कोई दूध के धुले नहीं है …
मैं अपनी सकतिया खो चुकी हु इसलिए सीधे लड़ना तो अब मेरे लिए पॉसिबल नहीं था, और न hi आरती को वंहा से भागते hi बना क्योकि कोई न कोई तो उसके साथ होता hi था, अधिकतर वो रानी , और कुछ लोग भी हमेशा इसके साथ रहते थे …
वो इसे इसकी सकती दिलवाने की कोशिस कर रहे थे , इसे कभी कॉलेज में ले जाते तो कभी माल में तो कभी मार्किट ये सोचकर की कोई लड़का इसे पसंद आ जायेगा :lol1:
अब अनपढ़ लोग तो सेल रहेंगे hi बेअकल , लड़ने की ट्रेनिंग दिलवाना और घूमते रहना यही चल रहा था, उन्हें इतना तो पता था की जब किसी लड़के से प्यार में पड़ेगी तो सकती जाग जायेगी , लेकिन इन्होने वो पुस्तक नहीं पढ़ी इसलिए इन्हे ये नहीं पता की उस लड़के जो ढूंढने में इसे किंतनी दिक्कत होनी है , इसे तो खुद भी पता नहीं चेलगा की यही वो है जिससे ये धुंध रही है ……
बहुत मुश्किल होता है समझना, उन लोगो को ये भी शक हुआ की आरती में पावर है भी की नहीं, क्योकि इसका पहला प्यार तो इसका पति hi था फिर भी सकती जागृत नहीं हुई थी ..
अगर सकती न भी होता तो भी इसका चेहरा hi काम में ले आते ये लोग, ये बोलकर की सकती वापस आ गयी है और तिवारी की ऐसे hi फैट जानी थी ……..
इन्ही सभी चीजों की सोचकर मैंने इसे शांत hi रहने को कहा था , मौका देखकर hi कोई काम करने की हिदायत दी थी …. फिर जब पता चला की तिवारी के घर में पार्टी है और तिवारी के घर से hi कोई जीवा के साथ मिलकर तिवारी को रस्ते से हटाना चाहता है तब वो मौका मिल गया , असल में कुछ करने का नहीं बल्कि तुम्हे लेकर वंहा से भागने का ……
सम्पत और जीवा का प्लान था की वो आरती को किसी तरह तिवारी के सामने लेकर खड़ा कर दे ताकि इसे देखकर वो शॉक में चला जाये , मैं नहीं चाहती थी की तिवारी की नजर आरती पर पड़े , इससे तिवारी सतर्क हो जायेगा और हो सकता है की जीवा और सम्पत से फिर से मिल जाए , तिवारी का कोई भरोषा नहीं है वो इसे ख़त्म करने के लिए या इसकी पावर को अपना बनाने के लिए कोई भी चाल चल सकता था ..
भला हो की तुम वंहा मौजूद थे और तुम्हे देखकर आरती को भागने का बहाना मिल गया और साथ hi , और मुझे गोली चलने का “
“क्या , आपको गोली चलने का ??”
मैं चौक गया था
“है असल में वो पठान सूट वाला सम्पत था , उसने जब गोलिया चलनी शुरू की तभी मैंने भी चलनी शुरू कर दी लेकिन रिमोट कण्ट्रोल से … जो दूसरी तरफ से गोलिया चल रही थी वो मैं चला रही थी “
“तो आपने तिवारी को मारा क्यों नहीं “
“उसे मार्कर क्या मिलना था , और ऐसे भी इन लोगो ने इतने पाप किये है की इन्हे इतनी आसान मौत नहीं दे सकती मैं , मुझे तो कोई मतलब भी नहीं था इन लोगो से वो तो मेरी बेटी के कारण मुझे यंहा आना पद गया……..”
मैंने एक नजर भाभी को देखा न जाने क्यों लेकिन उन्होंने नजर निचे कर ली थी …
हम सबने बस हां में सर हिलाया था …..
“भाभी आपको सब के बारे में मुझे बताना था , आपको सब पता होते हुए भी आपने मुझे कुछ नहीं बताया “
मैंने भाभी से शिकायत की
आश्रम से बहहर जंगल के बीचो बिच एक ट्रैन की पटरी पर मैं और भाभी पैदल hi चल रहे थे …
रात का अंदर था और जंगली कीड़ो की आवाजे उस शांति को चिर रही थी ..
हम वही एक जगह बैठ गए थे ..
“मैं क्या करती सोनू , माँ ने जब मुझे इन सबके बारे में बताया था तब से मैं बहुत hi परेशां थी , यही सोचती थी की वो सच्चा प्यार कोण होगा , अगर मुझे मिलेगा तो क्या मैं उसे पहचान पाऊँगी ..”
भाभी मुझे घूरने लगी , अन्धेले में उनकी नजरे मुझे उतनी साफ़ दिखाई तो नहीं दे रही थी लेकिन उनके देखने आभास मुझे जरूर हो रहा था , एक अजीब निगाह थी उनकी
“क्या अपने उसे पहचान लिया ??”
मेरे सवाल से वो थोड़ी चुप हो गयी ……
“तुम्हे क्यों लगता है की वो मेरे सामने भी आया होगा “
मुझे उनकी बात पर हंसी सी आ गयी
“न सिर्फ आपके सामने आया है बल्कि आपके बाजु में बैठा भी है .. “ मैं उनके मुलायम जुल्फों को सरकते हुए अपने हाथ उनके गले तक ले गया ..
मैंने हलके से उनके चेहरे को अपनी और खिंचा था ,
“आह..”
उनकी आंखे बंद हो चुकी थी , होठो से एक हलकी उनकी हलकी सी सिसकी ने मेरे दिल में न जाने इतना तूफ़ान सा मचा दिया था ….
मैं उनके सर को और भी खिचका उनके होठो को अपने होठो के बेहद hi करीब ले आया ..
हमारी सांसे तक आपस में टकरा रही थी
“बोलो न भाभी क्या आपने उसे पहचान लिया , क्या अपने दिल की धड़कने उसके लिए तेजी से धड़कती है “
इस शांत वातावरण में भाभी की दिल की धड़कनो की आवाजे मेरे कानो तक स्पस्ट आ रही थी , उनकी सांसे अप्रत्यासित रूप से तेज हो चुकी थी , मेरे होठो उनके नाजुक होठो से टकरा रहे थे ..
मैं उनके होठो का फड़कना तक महसूस कर सकता था ..
“क्या वो प्यार मैं hi नहीं हु , क्या आपने ये महसूस नहीं किया ..”
मेरी बात के जवाब में वो हलके से रो पड़ी थी ,
“हुम्म्म” उत्तेजना के शीर्ष पर वो भी खुद को सम्हाल नहीं पा रही थी और मैं भी नहीं , वो कुछ बोल hi नहीं प् रही थी और इसी मजबूरी ने उनके मुँह से वो आह निकल दी , वो हलके से रो पड़ी .. कुछ न कह पाने की मजबूरी ने उन्हें जकड लिया था ..
“ी लव यू भाभी “
मैंने उनके जनहो पर अपने हाथ रख दिए थे , ये भाभी की सहन सिमा की परीक्षा थी और बांध टूट गया , उन्होंने मुझे अपने और जोरो से खिंच लिया था और मेरे होठो को अपने होठो में भर लिया ……
प्यार का वो अनकहा सा इजहार था , लेकिन अपने में सम्पूर्ण था , वो भाभी की अभी तक बीते सभी वेदनाओ का निचोड़ था , अभी तक जो उन्होंने खुद को रोका था जा जैसे बांध टूट गया हो , पूरा पानी हमें भिगोने लगा ..
हमारे होठ एक दूसरे के होठो में ऐसे गुल रहे थे जैसे मुँह में सहद गुल रही हो , उस चासनी के सुख ने हमारे जीभ को एक दूसरे में घुसाने पर मजबूर कर दिया था , हमारे लार से हमारे चेहरे सनाने लगे ..
हम दोनों ने hi एक दूसरे को कसकर जकड लिया , और तभी एक तेज प्रकाश हमारे ऊपर पड़ा ..
ट्रैन के हॉर्न की आवाज कानो में गूंज उठी थी और प्रकाश हमारे शरीर को नहला रहा था , लेकिन एक दूसरे से अलग होने का दिल hi नहीं कर रहा था , मैंने उन्हें और उन्होंने मुझे और भी जोरो से जकड लिया , लेकिन वो आवाज और प्रकाश और भी गहरी हो गयी थी , बस वो तरीन मेरे आँखों के सामने आ चूका था और ऐसा लगा जैसे अब बस भाभी के बांहो में समाकर hi ये शरीर छूट जायेगा , जब मरना hi था तो अलग होक कौन मरता और शायद उनका भी वही हाल था उन्होंने मुझे धक्का दिया , मैं पटरी के बीचो बिच गिर गया था और अब वो मेरे ऊपर थी ………..
होठो से होठ मिले थे , एक दूसरे के बालो को हाथ जकड़े हुए थे , जिस्म एक दूसरे में सामने को बेताब था , वो मेरे ऊपर थी मैं पटरी के पतथरो के बिच सीमेंट की पट्टी पर लेया हुआ था, ऐसा लगा जैसे हम दोनों ने hi एक दूसरे को खोज लिया हो, वो खोज जो सदियों की थी आज ख़त्म हो गयी हो ….
तभी ट्रैन की आवाज और भी करीब आती मालूम हुई और ऐसा लगा जैसे अब इसी जन्नत मैं हमेशा के लिए खो जाऊंगा ………..