अडुल्टेरी भाभी माँ (कम्प्लेटेड) - Page 60 - SexBaba
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अडुल्टेरी भाभी माँ (कम्प्लेटेड)





गलत... बिलकुल गलत.. काजल जोह भी करती पति के सामने करती है पहले से hi ऐसी hi है... कहानी बीवी के कारनामे से लेके काजल 2 तक..... :डी





यह भी कोई याद रखने की बात हैं.... सभी को पता है की तू क्या है :lol:

अब क्या करे पूर्वी जी.. उसकी एक से पेट नहीं भरता ... हज़ारो भी मिल जाये तोह काम hain:lol:

ओह रियली :डी

और जोह तेरी मैं की चुकी बदसूरती... उसका क्या :डी





यार इसको बिच में पड़ने का बड़ा शौक है .. :सिघ: ...

जब बिच में आना चाहिए था तब तोह बस देखता hi रहा काजल को उनलोगो के साथ है है करते हुए :लाफिंग:





खोदा पहाड़ निकला चूहा :lol:

यह आकाश बड़ा उछाल रहा हैं.. :डी

रस्ते का कांटा जोह हैट गया :डी

ओह अच्छा... तेरी तोह जैसे बहोत सही जगह पे है... कहीं निगाहे कहीं पे निशाना... हैं न :lol:

और इसे मासूम बोलते हैं :डी





गंगा बोलै साहेबा :lol:.

अब जैसी करनी वैसी bharni...pehle hi सोचना चाहिए था पर अब क्या करे चिड़िया चुग गयी दाना :डी

चलो कोई ना धीरे धीरे सब ठीक हो जायेगा :डी

खैर.... अब आगे क्या ी मैं तो से खुनी कौन हैं..

Let's सी व्हाट हप्पेंस नेक्स्ट

ब्रिलियंट अपडेट विथ अवेसमे राइटिंग स्किल डॉ साहब :अप्प्लायसे: :अप्प्लायसे:
 
काजल एंड पूर्वी दीद नॉट लिखे एच इतर आलरेडी एंड टुडे थे डिस्प्यूट बिटवीन थे तवो बेकमे मोरे फन एंड entertainment.:trant: एवरीवन है ा डिफरेंट पास्ट. यू दीद वेल बी बीटिंग माय enemy,:whipper: ी वास् relieved.:toohappy: नाउ मैडम इस माइन एंड ओनली माइन, नाउ नोबडी इस गोइंग तो बोथेर me.:inluv:



आफ्टर रीडिंग today's अपडेट ी ऍम गेटिंग बोथ हैप्पीनेस एंड सॉरो, हैप्पीनेस इस बिकॉज़ सर वास् पुनिशद एंड साद बिकॉज़ तेरे इस ा रिफ्ट बिटवीन सोनू एंड नेहा.

अस ऑलवेज थे अपडेट वास् ग्रेट, यू अरे राइटिंग वैरी वेल, नाउ let's सी व्हाट हप्पेंस नेक्स्ट, टिल थें वेटिंग फॉर थे नेक्स्ट part ऑफ़ थे स्टोरी.


थैंक यू...

???
 
वह क्या अपडेट दिया हे. कॉमेडी ऑफ़ िर्रोर्स इसी को कहते हे सायद. काजल ने बिलकुल सही कहा की जो सवाल पहले पयचना चाहिए था उसे उसने कोई एहमियत hi नहीं दी. और कुछ हो न हो लेकिन अपने अक्की के चेहरे पर मुस्कान जरूर आ गयी और इस बात पर भी विराम लग गया की नेहा और अक्की का कुछ होगा.

वेटिंग 4 नेक्स्ट अपडेट
 
अपडेट 58
“तो अब हमें क्या करना चाहिए “

ये प्रश्न मेरे दिमाग में बहुत देर से घूम रहा था , हम सभी डॉ. के साथ उनके घर में थे ..

सभी चीजे तो साफ़ थी लेकिन मेरे और भाभी के सामने अभी भी ये साफ नहीं था की हमें अब क्या करना चाइये , जो भी हुआ था उसमे हमारा कुछ भी नहीं गया था, अभी तक हमारे पास ऐसी कोई भी वजह नहीं थी जो हमें जीवा या तिवारी का दुशमन बना देती ……..

“मुझे जीवा और तिवारी से अपने पिता की मौत का बदला लेना है “

नेहा ने एक रूखे हुए स्वर में कहा

“नहीं बेटी , ये तुम्हारा काम नहीं है जो हुआ उसके लिए अब अपना भविष्य दाव पर मत लगाओ .. वो काम तो मैं कर hi लुंगी , और अगर ना भी कर पायी तो भी मुझे कोई दिक्कत नहीं है , सत्य के पराम् की निशानी मेरे पास है और मुझ कुछ नहीं चाहिए “ नेहा की माँ महिमा नेहा की बात से इमोशनल हो गयी थी

“है बेटी, महिमा सही कह रही है , तुम्हारे सामने पूरा जीवन पड़ा हुआ है , तुम्हे अपन करियर पर ध्यान देना चाहिए “

इस बार कोमल बोल उठी

(लोग इतने जयदा हो गए है की अब संवादों को नाटक के फरमाते में hi लिखता हु वरना फिर बोलोगे की समझ नहीं आया की कौन बोल रहा है )

नेहा : “लेकिन मेरे लिए ये जानकर भी की मेरे पिता को किसने और किस हालातो में मारा है , चुप चाप बैठे रहना नामुमकिन है , आप लोग मेरा साथ दो या न दो लेकिन मैं तो ये जंग लड़ूंगी “

नेहा की बात सुनकर सभी के मन में एक खटास सी पैदा हो गयी थी

डॉ. : “बीटा ये कोई जंग नहीं है , और तुम क्या करोगी तिवारी जीवा और सम्पत को मार डौगी ,… यही न .. लेकिन उसके बाद तुम्हारा क्या होगा तुम्हारी जिंदगी का क्या होगा , अब वो समय नहीं है जब कोमल तलवार लहराते हुए जाती थी और लोगो को काट डालती थी और कोई भी कुछ नहीं कर पता था , अब कानून और प्रशाशन बहुत hi स्ट्रिक्ट हो गया है, अब बाहुबलियों और ुंडेरवोर्ड के डांस का समय गया , अब या तो पैसा बोलता है या तो पावर , अब समय दिमाग वालो का है , बाहुबल से कुछ भी नहीं हो सकता , अगर तुम्हे जीवा और तिवारी को ख़त्म करना hi है तो सीधे लड़ने की बजाये कुछ ऐसा करो की वो लोग खुद hi बर्बाद हो जाये , ऐसे भी कोई तो है जो तिवारी के पास है और तिवारी को मरना चाहता है, जीवा तो ख़त्म हो hi चूका है , तिवारी के पास अभी पावर है उसे ख़त्म करने के लिए उस इंसान के बारे में जानना जरुरी हो जाता है जो तिवारी को उसके घर में रहकर hi उसे मरने का सडयंत्र बना रहा है , कोई उसके करीब का hi आदमी है …

और मेरे खेल से अंकित, आरती, कोमल , भुवन तुम दोनों को गांव चले जाना चाहिए , या फिर कही और इन सबसे दूर चले जाओ .. कोई मतलब नहीं है इन सब चोचलो में पड़ने से ..”

डॉ. की बात से वंहा एक सन्नाटा सा छ गया था

मैं : “ लेकिन ये कतल कोण कर रहा होगा “

डॉ. : “क्या फर्क पड़ता है की कौन कतल कर रहा होगा , तुम्हे इससे क्या मतलब हो सकता है … जो भी मार रहा हो जिसे भी मार रहा हो , तुम्हे इन सब में पड़ने की क्या जरुरत है “

आरती : “डॉ. हम तो ये सब छोड़कर यंहा से चले जायेंगे लेकिन क्या वो हमें छोड़ देंगे , जीवा और सम्पत ने हमें ढूंढने के लिए गांव में आदमी भेजे थे, तिवारी भी हमें ढूंढ hi रहा होगा , गांव जाना हमारे लिए सेफ नहीं है और हमारे पास जो कुछ भी अभी है वो गांव में hi तो है , चलो मान लिया की हम वो सब छोड़कर कही चले भी जाये तो क्या हम जीवन भर चैन से जी पाएंगे , क्या वो लोग हमें डूंडाहेंगे नहीं .. मेरे माता पिता को देखिये , जो लोग पढ़ लिख कर एक अच्छी जिंदगी जी सकते थे वो इन सबसे दूर जाने के चक्कर में hi किस तरह का जीवन जी रहे है , महलो का सुख भोगने की काबिलियत रखने के बावजूद एक छोटे से ठेले में काम काके अपनी पूरी जिंदगी निकाल दी इन्होने …”

भाभी का चेहरा उदास हो गया था

कोमल : “बीटा हमने ग़ुरबत में दिन जरूर गुजर लिए लेकिन हम दुखी नहीं है , हमारे पास वो सब है जो हमें चाहिए था , आपस में प्रेम है और तुम भी तो हो … और प्रेम और शांति से बढ़कर जीवन में क्या हो सकता है , बाहरी चीजे तो महज बाहरी सुख hi दे पति है , और बाहरी सुख छनभंगुर hi होता है , थोड़े देर के इन्द्रिय सुख के लिए लोग न जाने क्या क्या कर जाते है ..

लेकिन आंतरिक सुख तो स्थायी है ,और इसका महत्व भी इन्द्रिय सुख से कही ज्यादा है , प्रेम और शांति से बढ़कर कुछ भी नहीं है बेटी…”

कोमल ने बड़े hi प्यार से भाभी के चेहरे पर अपने हाथ फेरे, भाभी के चेहरे में एक मुस्कान आ गयी थी ..

मैं : “तो क्या डीडे किया की क्या करना चाहिए ??”

मेरी बात से भाभी हंस पड़ी

भाभी : “मेरे ख्याल से हमें यही रहना चाहिए और जीवन वैसे hi जीना चाहिए जैसे हम जी रहे थे … “

भाभी की बात सुनकर सभी चौक गए

डॉ. : “ वो लोग तुम्हारे पीछे आएंगे “

भाभी : “अब मैं वो पुराणी आरती नहीं रह गयी हु डॉ. मेरे पास अब ताकत है “

डॉ. : “उसी का तो दर है , अगर तुम अपने ताकत का इस्तमाल करोगी तो तुम कानून के नजरो में गुनहगार हो सकती हो “

भाभी : “किसने कहा की मैं उसका इस्तमाल करुँगी, लेकिन सकती तो कर सकती है न ..”

फिर से एक ख़ामोशी ने सब को जकड लिया था

कोमल : “ये सही नहीं रहेगा आरती फिर से वही सब नहीं , अब नहीं हम कल hi ये शहर छोड़कर दूर कही चले जायेंगे “

अपनी माँ की बात सुनकर भाभी ने भी एक गहरी साँस छोड़ी ..

भाभी : “हुम्म्म ठीक है , लेकिन बहुत देर हो चुकी है काम से काम अब तो सोने चलते ही “

वो बेफिक्री से उठाकर वंहा से चली गयी थी ………….

*************************************************************************

रत का समां झूमे चन्द्रमा मन मोरा ऐसे रे जैसे बिजुरिया रत का समां ……………

पास रखे रेडियो पर एक पुराण गण बज रहा था मैं लेता हुआ आपने भविष्य के बारे में सोच रहा था .. जो अंधकार में दिखाई देर रहा था , कुछ समझ नहीं आ रहा था की आगे क्या करना है..

तभी कमरे का दरवाजा खुला , सामने एक पारी कड़ी थी , काळा रंग की झीनी सी निघ्त्य में उसके गोर गदराये जिस्म का हर कटाव खिल कर सामने आ रहा है ..

मैं उस पारी को बस देखता hi रह गया

“रत का समां झूमे कहंदृमा , मन मोरा ऐसे रे जैसे बिजुरिया ..”

वो रेडियो की धून में hi गुनगुनाते हुए मेरे करीब आ रही थी, उनके जिस्म से आती हुई एक मनोहर खुसबू नेरे नथुनों को भरने लगी थी ..

वो आकर मेरे साथ hi सो गयी , मैं लालच में बस लार टपका रहा था , मेरे हाथ उनके जांघो पर चले गए और हलके से ऊपर सार्क कर सीधे उनकी योनि में ,मने योनि को हलके से सहलाया , उन्होंने कोई भी अन्तः वस्त्र नहीं पहने थे ..

“आह भाभी यू अरे सो हॉट , कितनी गीली हो गयी हो “

“पता नहीं रे कल से क्या हो गया है , हर समय बस वही करने का मन करता है , ी ऍम फीलिंग सो हॉर्नी बाबू” उन्होंने मुँह बनते हुए कहा की मैं हंस पड़ा

“सच में बहुत हॉर्नी हो रही हो..” मैंने अपनी एक उंगली को उनके योनि की गहराइयों में घुसाया , वो सच में बहुत hi गीली थी , उनकी गर्म गर्म योनि में हलके हलके से उंगली करना भी मेरे लिए सुखद था , वो मेरे गॉड में आकर बैठ गयी थी

“रत का समां झूमे चन्द्रमा “

उन्होंने हसंते हुए कहा

“है भाभी .. मन मोरा ऐसे रे जैसे बिजुरिया “

मैंने उनके होठो में अपने होठो को घुसा दिया था , हम दोनों hi जिस्म के मजे में खोने लगे थे , एक दूसरे को चूमे जा रहे थे ..

उन्होंने तत्परता दिखते हुए मेरे कपड़ो को भी मेरे जिस्म से लग कर दिया, वो मेरे निचे अपनी टंगे फैलाये मकहल रही थी ..

‘मेरे पिया गए रंगून वंहा से किया था टेलीफोन ,, तुम्हारी यद् सताती है , जिया में आग लगाती है ‘ रेडियो में गण बदल गया था

“मेरे पिया गए Rangoooon…(maine अपना लिंग सरकारया ) आह सोऊ न्यू मेरे बेटे “

भाभी ने मेरे बालो को कास कर पकड़ लिया था , मेरा लिंग भाभी की योनि की गहराइयों में समां चूका था , आज वो इतनी गीली थी की मुझे उनके अंदर जाने के लिए कोई भी महेनत नहीं करनी पड़ी थी , उनकी योनि जैसे आग की भठ्ठी हो गर्म गर्म ..

“तुम्हारी यद् सताती है ,, जिया में आग लगाती है .. मेरी भाभी जी “

मैंने उनके होठो में अपने होठो को घुसेड़ दिया था , मेरे कमर हलके हलके से चल रहे थे , वो हलके हलके से कसमसा रही थी ..

आग की उस भट्ठी में अपने लिंग को सरकने में जो मजा आ रहा था उस अदंड को मैं बयां भी नहीं कर सकता ..

“मेरे पिया गए .. आह आह आह बीटा .. ाः रंगून … आह बीटा “

उन्होंने मेरे बालो को जोरो से खींच रखा था , और मैं भी जोरो से धक्के मार रहा था

“तुम्हारी यद् .. आह भाभी जी जिया में आग लगती है भाभी आह .. ोूह माय गॉड मजा आ गया “

मैं कुत्तो की तरह करने लगा था .. हांफ रहा था लेकिन मजे में डूबा हुआ था …

“व्हाट था फ़क .. तुम लोग नहीं सुधर सकते “

दरवाजे के खुलने और ये आवाज दोनों hi एक साथ hi आयी थी

हम दोनों hi हड़बड़ा गए थे , सामने जो थी उसे देखकर मेरी फैट के चार हो गयी थी

“नेहा मैं तुम जो सोच रही हो वैसा नहीं है “

मैंने कहा , लेकिन हम दोनों जानते थे की क्या है और क्या नहीं , मेरी कमर एक बार फिर जोरो से चली

“आह बीटा “

भाभी ने आह ली फिर उन्हने और मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ

“डिसगस्टिंग यार , मेरे सामने भी रुक नहीं सकते और बोलते हो की मैं गलत समझ रही हु .. छी और ये तुम्हे अपना बीटा बोलती और और …. छी छी छी कोई सी मनहूस घडी थी जब मैंने तुम जैसे इंसान से प्यार किया था छी.. मैंने तो सोचा था की तुम शे कल चले जाओगे तुमसे मिल लू लेकिन यंहा तो .. छी “

नेहा रट हुए वंहा से जाने लगी , मेरा लिंग अभी भी भाही के योनि में फंसा हुआ था , निकलने का मन भी नहीं कर रहा था लेकिन नेहा को ऐसे जाने भी तो नहीं दे सकता था .. मैंने एक बार भाभी को देखा

“क्या देख रहा है जा उसे मन “



ोकक भाभी मैंने अंतिम बार एक जोर का धक्का मारा और जल्दी से उठाकर नेहा के पीछे भगा ………..
 
पहली बार फाटे के नौक पे सही बात बोलै चुन्नीलाल ने फाटे के नौक पे... :डी





अब क्या करे यह दोनों धीरे धीरे इन्सेस्ट लोबेर्स बन रहे हैं तोह... :lol:

वैसे इस जिंघुल के ाव भाव देखने के लिए उधर छम्मक चलो कोमल को आना चाहिए था.... तोह ज़्यादा अच्छा होता . :lol:

जा मुन्नी जा... यहाँ कोई नहीं है अपना... :डी

खैर

अब तोह डॉ साहब िश बात पे गौर करिये की आकाश hi नेहा के लिए परफेक्ट हैं...

Btw ब्रिलियंट अपडेट डॉ साहब.... ग्रेट गोइंग :अप्प्लायसे: :अप्प्लायसे:
 
भयंकर शायद यही से शक्ति गैंग की लीडर कोमल का जनम हो चूका था और मुझे लगता है की भाभी दया शंकर और कोमल. की बेटी है मगर किसी के हरामी पैन की वजह से वह दोनों एक दुसरे से दूर हो गए है. और उस टाइम भुवन ने उसका साथ दिया था मगर कुछ तो है जिसकी पर्दा दरी है.
 
वाह क्या बात है बहुत खूब,,,, :क्लाप्स:

तो शक्ति के नाम से कॉल करके धमकाने वाला ये पवन था. कमाल है मतलब मैडम और सस के लिए इसने अपने करियर और मान प्रतिष्ठा को भी टाक पर रख दिया. सेल को जेल hi जाना चाहिए tha..kam से काम आकाश भाई की ख़ुशी में इज़ाफ़ा तो होता. इसे छोड़ देने से क्या पता ये फिर से कोई ऐसी तुच्छ हरकत करे,,,, :डेड:

काजल तो masha-allah hi है मगर पूर्वी तो और भी ज़्यादा वाली निकली. खुद को क्राइम ब्रांच की अफसर कहने वाली को इतना भी ज्ञान नहीं की किसी मुजरिम से कैसे पूछताछ की जाती है. खैर कोई बात नहीं, तो ये मसला अभी भी बना हुआ है की शक्ति के नाम से खून करने वाला कौन है,,,, :हम्म2:
 
अपना दिमाग लगाया करो :स्लैप:

एक तो काम देव जी के दिमाग में काम hi काम भरा पड़ा है , 2 अपडेट में उन्हें बस चुदाई hi दिकहि दी जब की पुरे 57तह अपडेट में सेक्स का स भी नहीं है , उसमे ह्यूमर है ..

और 58 के सिर्फ 1/3 में hi सेक्स है वो भी कॉमिक सेक्स है , जब की बाकि में एक चिंतन है आगे की स्टोरी के लिए ..

लेकिन काम देव जी की लीला निराली है उन्हें बस चुदाई hi दिखाई दी बाकि सब कुछ भूल गए ... :डोह:

तो अपना दिमाग लगा लिया करो दुसरो की बातो में नहीं आये :नौपे:
 
अपडेट 59
मैं भागता हुआ नेहा के पास पहुंच गया था

“यंहा क्यों आये हो अंकित चले जाओ , मैं तुम्हारा चेहरा भी नहीं देखना चाहती “

नेहा ने जोरो से कहा

“नेहा ी लव यू “

“नहीं अंकित तुम नहीं करते और अगर करते हो तो तुम अपनी भाभी से करते हो , जाओ उनके पास जाओ उनके साथ hi अपनी जिंदगी बिताओ .. मेरी जिंदगी बर्बाद मत करो “

“नेहा मेरी बात को समझो हम दोनों के बिच कुछ ऐसा है जिसे हम छह कर भी नहीं रोक सकते “

मेरी बात सुकर नेहा जोरो से हंस पड़ी …

“सच में ………????????

तुम मुझे समझते क्या हो , मैं पागल हु , कामकल हु … बहुत हो गया अंकित जाओ यंहा से “

मैं बिलकुल hi थक चूका था मैं अब नेहा को नहीं समझा सकता था ,

“तुम hi बताओ की मैं तुम्हे विस्वास दिलाने के लिए आखिर क्या करू “

मैं बेबसी से चीखा

“अपनी भाभी और उकसी माँ को मार डालो …”

वो आवाज मेरे पीछे से आयी थी , मैं और नेहा दोनों hi आश्चर्य से उस और देखने लगे . वो नेहा की माँ थी …

“आप पागल हो गयी हो ???? ये आप क्या कह रही हो “

मेरी बात सुनकर वो मुस्कुराई

“मैंने जो भी कहा वो सही कहा है अंकित , अगर मेरी बेटी का प्यार चाहते हो तो अपनी भाभी और उसकी माँ को मर डालो , वो दोनों hi शैतान है .. अगर नेहा तुम्हारे साथ जीवन बिताने को मान भी जाये तो मैं उसे ऐसा करने नहीं दूंगी ,

तुम्हारे घर में दो शैतान खले खूम रहे है , जो किसी का भी क़त्ल कर सकते है “

“आप ये क्या बोल रही हो ??? “ मैं बुरी तरह से परेसाहन हो चूका था

“मैं सही बोल रही हु अंकित , उन दोनों के होते हुए ऐसे भी नेहा उस घर की बहु नहीं बन सकती , और अगर बनती भी है तो महज एक नौकरानी से जयदा उसकी कोई ावुकत नहीं रह जायेगी ..

ऐसे भी न hi आरती न hi उसकी माँ कोमल ये चाहती है की नेहा की शादी या प्यार तुमसे रहे , अगर वो ऐसा चाहती तो अभी तुम्हारी जगह पर तुम्हारी भाभी नेहा से माफ़ी मांग रही होती , चलो जो एक बार होता है उसे गलती माना जा सकता है लेकिन बार बार ……. ये तुम नहीं बल्कि तुम्हारी भाभी तुमसे करवा रही है , जैसे सालो पहले कोमल ने भुवन से करवाया था, कोमल तिवारी से भी शादी कर सकती थी लेकिन तिवारी दिमाग वाला था इसलिए उसने भोले भले भुवन को चुन लिया , वर्ण तिवारी भी तो कोमल से प्यार करता था ……..

वैसे hi तुम्हरी भाभी ने तुम्हे चुना है क्योकि तुम एक भोले भले से बेवकूफ हो, और वो किसी दूसरे लड़की को तुम्हारे जीवन में आने नहीं देगी , हो सकता है की वो नेहा को भी मार डेल और तुम महज देखते hi रह जाओगे , अरे इसकी लाश तक नहीं मिलेगी …. क्या बचा पाओगे तुम नेहा उन दोनों से … नहीं अंकित तुम्हारे पास वो ताकत hi नहीं है की तुम उन दोनों से किसी की भी रक्षा कर सको , खुद की भी नहीं …”

महिमा के बोलने के बाद कमरे में बस सन्नाटा hi सन्नाटा फ़ैल गया था ………..

मैं गुस्से से उन्हें घर रहा था लेकिन उनकी कई बाटे अब भी मुझे ये सोचने पर भी मजबूर कर रही थी की अगर ये सच हुई तो फिर क्या ?????

“माँ ये आप क्या बोल रही हो “

जो नेहा अभी तक मुझसे खफा थी वो hi अब अपनी माँ पर गुस्सा होने लगी थी

“सही बोल रही हु बीटा , कोमल ने अपने बारे जो बताया उससे तो ऐसा लगा की वो कोई बहुत hi दूध की धूलि हुई ायरत है , और पूरा दोष केवल तिवारी और जीवा का है लेकिन ऐसा नहीं था, कोमल एक शैतान थी .. मेरे पति उस समय पुलिस में थे , जब कोमल का आतंक था, मैं तो रोज hi सोचती थी की कही मेरे पति कोमल की हैवानियत का शिकार न हो जाये .. जब जब वो घर से निकलते थे दिल में दर बना रहता था … वो आकर कोमल के कई किस्से मुझे सुनाया करते थे .. फिर तिवारी जी मुझे कोमल के बारे में कई ऐसी बाटे बताई जो की कोमल ने हमें नहीं बताई है , तिवारी तो कोमल से सच्चा प्यार करता था लेकिन वो कोमल hi थी जिसने उसे धोखा दिया , तिवारी तो कभी कोमल ी शक्ति को जगाना भी नहीं चाहता था लेकिन वो कोमल hi थी जिसे शक्ति चाहिए था उसे सकती का चसका जो लग गया था …”

महिमा की बात सुनकर मैं और नेहा दोनों hi बिलकुल hi आवक रह गए थे

“आप तिवारी के संपर्क में है “

नेहा ने कांपते हुए आवाज में कहा

“है जब तुम्हरे पिता उन गुंडों के बिच फंस गए थे तो उन्होंने hi हम दोनों को वंहा से बहार निकलवाया था, उन्हें तुम्हरे पिता का हमेशा से दुःख रहा ,और उनके जाने के बाद जबकि मैं पूरी तरह से टूट गयी थी उन्होंने hi मुझे सहारा दिया , डॉ. ने मुझे एक छोड़ी सी जॉब दिलवा दी थी बस , तुमने कभी सोचा है की तुम इतने महँगी स्कूल में कैसे पढ़ती हो उसके पैसे कहा से आते है .. वो तिवारी जी की दया रही है … देखो बेटी मैं ये नहीं कह रही हु की वो गलत इंसान नहीं है है वो है लेकिन …… उतना भी गलत नहीं है जितना hi कोमल ने बताया है और न hi कोमल उतनी सरीफ है जीतनी की वो हमें दिखा रही है .. अंकित अब तुम्हारे पास दो hi ऑप्शन है या तो नेहा को भूल जाओ .. या फिर अपनी भाभी और उसकी माँ से दूर चले जाओ , जो तुम नहीं कर सकते क्योकि अगर तुम ऐसा करोगी भी तो वो तुम दोनों को धुंध कर मार डालेंगे “

“नहीं वो ऐसा नहीं कर सकते , भाभी मुझसे प्यार करती है “

मैं गुस्से से चीखा लेकिन महिमा केवल मुस्कुराई

“वो तुमसे प्यार नहीं करती बल्कि वो अपनी हवस तुमसे शांत करवा रही है .. अगर प्यार करती तो नेहा के लिए तुम्हरी क़ुरबानी दे देती , कोण सी भाभी अपने देवर से ऐसा रिश्ता रखती है , खासकर उससे जिसे वो अपने बेटे की तरह मानती है ,

ये प्रेम नहीं है अंकित ये हवस है , चाहे तुम मनो या न मनो और साथ hi साथ ये भी सुन लो की तो तुम्हे अपने से अलग होने नहीं देगी , जबकि होना ये चाहिए थे की वो खुद hi तुमसे अलग हो जाये , गलती एक बार हो गयी तो हो गयी अब उसे तुमसे अलग हो जाना चाहिए था, या फिर तुम्हे मन करना चाहिए था कहना था की तुम नेहा के साथ जाओ .. उसके साथ रहो लेकिन उसने ऐसा नहीं किया बल्कि मैं तो बार बार ये कहती हु की अगर तुम उससे अलग होने की कोशिस करोगी तो वो नेहा को hi मार डालेंगे , शैतान जो ठहरे ..

तो या तो नेहा को भूल जाओ या फिर उन दोनों को मार डालो …….

तुम्हरे पास ये दो hi ऑप्शन है ………”

मैंने एक बार नेहा को देखा वो अपनी माँ के बातो से अवाक् थी, वही हाल मेरा भी था , मैं महिमा को यही मार डालना चाहता था लेकिन अगर वो सही हुई तो ..??

क्या वो सही हो सकती थी ??

नहीं ऐसा नहीं हो सकता था , लेकिन इस बात को तो मैं भी झुठला नहीं सकता था की भाभी के अंदर की ताकत ऐसी थी जिसे काबू में नहीं किया जा सकता , कहा गया था की मैं उसे काबू में कर सकता हु .. मैंने अभी तक कोशिस भी तो नहीं की थी ..

क्या भाभी सच में नहीं चाहती की मैं नेहा के साथ राहु ??????????

नहीं वो hi तो थी जिन्होंने मुझे नेहा से प्यार का अहसास डीएलए था , या फिर ऐसा तो नहीं की महिमा नहीं महिमा की जगह तिवारी बोल रहा हो ..



महिमा तिवारी के ाहसानो में दबी हुई है , शायद इसलिए वो तिवारी के बोल बोल रही है ..
 
वंडरफुल अपडेट है भाई मजा आ गवा लेकिन जो भी हो मई यही कहूंगा की सोनू को अपनी भाभी के साथ रहना चाहिए और सकती को पैसे और ताकत की भूख होती तो वो शहर छोड़ कर ठेला न लगाती सब अपना फालतू दिमाग दौड़ा रहे चार दिन का प्यार भाभी के आगे बेकार है वैसे भी दूसरी तरफ केवल मौत है
 
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