अडुल्टेरी भाभी माँ (कम्प्लेटेड) - Page 62 - SexBaba
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अडुल्टेरी भाभी माँ (कम्प्लेटेड)

अपडेट 61
“क्या कोमल के साथ भी कुछ ऐसा होता था ??”

डॉ. ने ये प्रश्न भुवन से किया था , मैंने भाभी के बिहेवियर को देखकर परेशां हो गया था और ये बात डॉ. को बताई उन्होंने तुरंत hi भुवन और मुझे अकेले में बुलाया , हम अभी नदी के किनारे रेट पर बैठे हुए थे ..

भुवन ने भाभी के साथ हुई घटना को सुना तो उसका चेहरा भी गंभीर हो गया ..

“है लेकिन कोमल को पहले इस ताकत पर घमंड था बाद में धीरे धीरे उसने जीवा के कहने पर कुछ मासूमो को भी मार दिया और वंहा से उसे इस ताकत को लेकर ग्लानि के भाव आने शुरू हो गए ..

वो अपनी hi ताकत से डरने लगी थी क्योकि ताकत का होना और उसके कण्ट्रोल का होना दोनों hi अलग अलग बात होती है और कोमल की ताकत उसके कण्ट्रोल से बहार जाने लगी , तभी हम लोगो ने फैसला कर लिया था की हम ये सब छोड़कर दूर चले जायेंगे , केवल मेरे प्रेम के जरिये hi उसे शांत किया जा सकता था, लेकिन आरती के होने के बाद से वो जयदा शांत हो गयी और आरती के आने से हमारा जीवन hi बदल गया हम वो नहीं रह गए जो हम हुआ करते थे …”

“हुम्म्म “

डॉ. गहरे विचारो में गम हो गया था ..

“क्या बात है डॉ. क्या कोई परेशानी वाली बात है , देखिये हमें किसी से कोई बदला नहीं लेना मैं भाभी को लेकर कही दूर चला जाऊंगा , लेकिन मैं भाभी को इस तकलीफ में नहीं देख सकता “

डॉ. के चेहरे पर आ रहे भाव मुझे डरने लगे थे

“मैंने ये पहले क्यों नहीं सोचा .. ये कोई श्राप या कोई जादुई ताकत न होकर कोई मानसिक बीमारी भी तो हो सकती है जो की जेनेटिकली एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में फैलती हो .. मेडिकल साइंस में ऐसे कई रोग है जो की माँ बाप से बच्चो को हो जाते है , ये कोई मानसिक बीमारी हो सकती है “

डॉ. की बात से न सिर्फ मैं बल्कि भुवन भी बुरी तरह से चौक गया था

“ऐसे कैसे हो सकता है डॉ. , मैंने खुद उस पुस्तक में पढ़ा था की ये ताकत एक श्राप है “

भुवन बेचैन होते हुए बोलै

“है जो चीजे समझ नहीं आती हम उसे जादू कहना शुरू कर देते है , ये तो हमेशा से होता आ रहा है, हो सकता है की जब किसी को ये विकृति जगी होगी तो उसे समझ न आया हो और उन्होंने इसे श्राप का नाम दे दिया हो .. सोचने वाली बात है की ऐसे कंडीशन के मरीज तो आज भी मौजूद है , वो अपना आप खो देते है और अद्भुत ताकत उनके अंदर आ जाती है , कई स्किज़ोफ्रेनिअ के मरीजों में ऐसी कंडीशन पायी जाती है , उनकी ताकत इतनी हो जाती है की कई लोग एक साथ भी उसे सम्हाल नहीं सकते .. “

“लेकिन ये भी तो कॉन्फिडेंस के साथ नहीं कहा जा सकता की ये कोई बीमारी hi होगी , और प्यार का मिलना और प्यार के द्वारा सम्हालना ये भी तो कोई इत्तेफाक नहीं है , और ये चीजे भी तो उस पुस्तक में थी “

मैंने अपनी दुविधा सामने राखी , डॉ. ने मुस्कुराते हुए बोलना शुरू किया

“है सही बोले तुम , लेकिन अगर इसका पैटर्न देखो तो चीजे जयदा क्लियर हो जाती है …. कोमल और आरती दोनों के साथ एक चीज हुई और पुस्तक के हिसाब से और भी कई लोगो के साथ , और वो था की उनका पहला प्यार सक्सेसफुल नहीं हुआ था , इसलिए वो ताकत नहीं जाएगी ..

अब मजेदार चीज तो ये है की भुवन कोमल के साथ बचपन से था और तिवारी से जयदा प्यार उससे करता था, भले hi कोमल तिवारी के साथ थी लेकिन उसके दिल में ये बात जरूर थी की भुवन उससे प्यार करता है और वो भी भुवन को एक दोस्त की तरह hi सही लेकिन बहुत प्यार करती थी , जस्ट वैसे hi अंकित भी आरती के साथ तब से था जब से उसने राजू से शादी की राजू ने बेवफाई की लेकिन अंकित उसके साथ हमेशा रहा और इसीलिए आरती के दिल में भी अंकित के लिए एक भरोषा और अनकंडीशनल प्रेम ने जन्म लिया ..

मतलब दोनों hi कंडीशन में सिचुएशन लगभग एक सी थी , पहले प्यार से धोखा और फिर दूसरा प्रेम जो की छिपा हुआ था उसका बहार आना ..

अब एक और मजेदार बात ये है की अगर हम मानसिक बीमारियों का पैटर्न देखे तो वो ऐसे hi नहीं हो जाते , वो तब hi बहार आते है जब किसी प्रकार का मानसिक दबाव हो , एक uddipan(stimulation) की जरुरत होती है , सभी इंसानो की ताकत अलग अलग होती है इसलिए स्टिमुलेशन भी अलग अलग होता है, अधिकतर किसी बहुत hi बुरी चीज या घटना के सामने आने से hi मानसिक विकार जाग जाते है …

तो क्या ये नहीं हो सकता की इस केस में पहले प्रेम का धोखा स्टिमुलेशन का काम करता हो और फिर दूसरा सच्चा प्रेम जो की उन्हें भी हमेशा से लगता है की यही सच्चा प्रेम है लेकिन वो इसे उजागर नहीं कर प् रहे होते .. तो इस सच्चे प्रेम के मिल जाने से वो ताकत अचानक से फुट जाती हो ..

और फिर जैसा उनका बिहेवियर हो जाता है अपने प्रेमी के प्रति वो किसी मानसिक रोगी के hi लक्षण है , जैसे बहुत hi जयदा प्रेम करना और साथ hi एक आसक्ति का भाव आना ..

क्योकि कोमल ने पुस्तक पढ़ी थी इसलिए उसने इसे जादू की तरह hi लिया और अपने ताकत को एन्जॉय करने लगी , ऐसे भी वो हमेशा से जीवा और सम्पत के साथ रही थी तो उसे मारपीट वाला माहौल hi मिला था , लेकिन आरती के केस में ऐसा नहीं था, उसे बचपन से बहुत hi प्रेम से पला गया, राजू को छोड़ दो तो सभी ने उसे सम्मान और प्रेम दिया है , वो मारपीट जैसी चीजों से भी बहुत दूर थी .. तो उसके मन में इस ताकत से उठाने वाले विचारो को लेकर ग्लानि के भाव जल्दी hi आने शुरू हो गए .. “

डॉ. की बात सुनकर भुवन और मैं दोनों hi सोच में पढ़ गए थे ..

अगर ये बीमारी थी तो इसका लीलाज क्या था , एक इलाज तो हमें पता था वो था प्रेम ..

डॉ. ने बोलना जारी रखा

“और जैसा की अधिकतर मानसिक रोगियों के साथ होता है प्रेम से hi ये रोग भी काबू में आ जाता है ….

इसका कारण भी सामान्य सा है की अगर कोई आपसे प्रेम दिखाए तो उस प्रेम के अहसास से अपने पर काबू करना आसान हो जाता है ..”

हम सभी चुप थे की मेरे दिमाग में एक प्रश्न आया

“तो क्या हमें भाभी को बता देना चाहिए की वो बीमार है ..”

“नहीं अंकित अभी नहीं .. इससे वो और भी परेशां हो जायेगी और उससे उसका खुद पर से कण्ट्रोल खोने लगेगा .. उसे तुम्हारे प्रेम की जरुरत है उसे बस इन सबसे दूर रखो तो hi ठीक होगा, अभी तो मैं भी अपनी इस थ्योरी पर कन्फर्म नहीं हु, मुझे भी थोड़ा रिसर्च का मौका दो .. अगर ऐसा है तो ऐसे केस या इससे मिलते जुलते केस और भी होंगे , और प्रेम से बड़ी कोई थेरेपी दुनिया में नहीं है .. हम भारतीयों में परिवार का बहुत मुलाय होता है ये भी एक तरह से थेरेपी का काम करती है , पहले जब संयुक्त परिवार होते थे लोग अपनी समस्या एक दूसरे से खुलकर बोल लेते थे और हलके हो जाते थे इसलिए मानसिक रोगी बहुत hi काम थे, जिन समाजो में अकेलेपन की समस्या है वंहा मानसिक रोग भी बहुत जयदा है क्योकि उनके पास प्रेम hi तो नहीं है .. न माँ बाप का प्यार मिल पता है न hi दोस्तों का न hi रिश्तेदारों का , मिलता है तो बस टेंशन … तो अभी तो बस प्यार से रखो बाकि की बाटे बाद में देखते है .. अगर आरती को जयदा मानसिक टेंशन नहीं दिया जाए तो हो सकता है की वो खुद से hi ठीक होने लगे , जैसे की कोमल हो गयी … अब कोमल का खुद पर बहुत hi कण्ट्रोल है और यद् रखना हर मानसिक बीमारी अपने आप में एक मानसिक ताकत भी होती है , बीमारी और ताकत में बस एक hi चीज का फर्क होता है वो है कण्ट्रोल का .. कण्ट्रोल कर लिया तो ताकत और अगर न कर पाए तो बीमारी … ( ये मैं ऐसे hi नहीं बोल रहा हु , असल में साइकोलॉजी में हर बीमारी के साथ एक चीज मैंने देखि है और वो है उनकंट्रोलबले, और साथ hi साथ कई मानसिक बीमारिया ऐसी भी है जिसे हम योग और ध्यान की सिद्धिया मानते है , ताकत और जादू मानते है लेकिन वही बात है कण्ट्रोल का फर्क होता है ) “

डॉ. की बात से मुझे बहुत hi शांति मिली , तभी थोड़ी hi दूर हमें किसी के होने का अहसास हुआ ..

हम सभी की नजर उस और गयी ..

वो नेहा थी , आँखों में आंसू लिए वो हमारी बातो को सुन रही थी ..

“तुम ..”

मैं कुछ और बोल पता उससे पहले hi डॉ. वंहा से उठ गए

“तुम दोनों बात करो हम चलते है “

डॉ. ने ये कहते हुए मुझे आँख मार दी थी …..

डॉ. और भुवन के जाने के बाद नेहा मुझसे आकर लिपट गयी ,मैं आश्चर्य में था की ये क्या हो रहा है ..

“मुझ माफ़ कर दो अंकित , मेरी माँ सच में तिवारी के साथ मिली हुई है , मुझे माफ़ कर दो की मैंने भाभी के बारे में बुरा सोचा .. भाभी बीमार है और मैं.. “

मैं नेहा के इस हृदयपरिवर्तन से चौक गया था

“तुम.. तुमने मुझे माफ़ कर दिया “

उसने सर उठाया उसके होठो में एक मुस्कान थी लेकिन गहरी नहीं बस हलकी सी

“है भी और नहीं भी “

“मतलब ??”

“मतलब की तुमने भाभी के साथ जो किया उसके लिए मैंने तुम्हे माफ़ किया लेकिन मैं तुमसे प्यार करती हु और तुम्हे किसी और के साथ नहीं देख सकती .. तुम भाभी से hi प्यार करते हो मुझसे नहीं , मुझसे प्यार करना शायद तुम्हारा भरम था “

“नहीं नेहा ऐसा नहीं है , मैं तुम दोनों से प्यार करता हु .. और रही साररिक सम्बन्धो की तो मेरे सम्बन्ध सस और एक रानी नाम की ायरत से भी रहे है “

मेरी बात सुनकर नेहा ने मुझे छोड़ दिया और बड़े hi गौर से मेरे चेहरे को देखने लगी

“तुमने समझाना मेरे बस का नहीं है अंकित , तुमने जो किया वो शायद तुम्हारे लिए ठीक हो लेकिन मेरे लिए नहीं .. मैं आज hi यंहा से जा रही हु अपने पुराने जीवन में लौट रही हु , तिवारी से हमें कोई दर नहीं है उसका संरक्षण माँ के साथ है , मैं एक सिंपल सी लड़की हु अंकित और तुम बहुत hi कॉम्प्लिकेटेड हो… हमारा अलग हो जाना hi सही रहेगा “

इससे पहले की मैं उससे कुछ कह पता वो वंहा से निकल गयी , मैं उसे रोकना चाहता था लेकिन मुझे भाभी का ख्याल आया, नेहा के रहते मैं भाभी पर ध्यान नहीं दे पता शायद वक़्त की भी यही नजाकत थी की मैं नेहा को जाने दू …

वो आँखों में आंसू भरे जाने लगी मैं बस नदी की रेट में खड़ा हुआ उसे जाते देखता रहा ……..



मैं उसे रोकना तो चाहता था लेकिन मेरे आँखों के सामने बस भाभी की तस्वीर आ रही थी ………..
 
व्हेन समथिंग इस नॉट अंडरस्टुड, डॉ. साहब उसेस हिज ब्रिलियंट मंद.? ी फेल्ट राइट अबाउट डॉ. साहब. ी साइड तहत ओनली सोनू कैन दो थिस वर्क, ओनली तो लव एंड एवरीथिंग विल बे ऑलराइट विथ लव. नेहा लेफ्ट. ?

अस ऑलवेज थे अपडेट वास् ग्रेट, यू अरे राइटिंग वैरी वेल, नाउ let's सी व्हाट हप्पेंस नेक्स्ट, टिल थें वेटिंग फॉर थे नेक्स्ट part ऑफ़ थे स्टोरी.

थैंक यू...

???
 




:अप्प्रोवे: यह हुयी ना बात..... अक्लमंदी इसीमे है की सही टाइम पर सही डिसिशन लेनी चाहिए.. ख़ुशी की बात यह हैं की काम से काम अब नेहा अब चैन से जी सकेगी इन सभी झमेलों से दूर.. :अप्प्रोवे:

वर्ण इनसभी लोगो के साथ स्पेशलय सोनू के संग रहती तोह आरती क पता नहीं पर नेहा मेंटली सिक जरूर हो जाती.... :अप्प्रोवे:

खैर

ब्रिलियंट अपडेट डॉ साहब :अप्प्लायसे:
 
बात आपकी बिलकुल ठीक है डॉक्टर साहब की बीमार आदमी असल में दवा से कम पर du'a यानि अपनों के सही साथ से ज़्यादा ठीक होता है और यह बात यहाँ भी लागू होती है की आरती और कोमल दोनों hi परिवार प्यार दोस्ती और अपनेपन से ठीक हुई हैं या हो सकती हैं.... पर नेहा की माँ तिवारी के साथ क्यों और कबसे हैं? अब देखना यह है की क्या सोनू आरती को अपने प्रेम से ठीक कर पायेगा? क्या नेहा और सोनू कभी एक होंगे? असली शिवा का रहस्य भी अभी तक एक रहस्य hi बना हुआ है...
 
:सुपर्ब: :गुड: अमेजिंग अपडेट है डॉ साहब,

ये कहानी कहाँ से कहाँ मोड़ दिया है डॉ साहब,

अगर डॉ की थ्योरी सही निकली तो शायद अगली पीढ़ी के लिए इलाज भी ढूंढना संभव हो सके,

वहीँ इधर नेहा ने अब अंकित को छोड़ कर जाने का फैसला कर लिया है,

अब देखते हैं की आगे क्या होता है,

वेटिंग फॉर नेक्स्ट अपडेट
 
बहुत खूब डॉ साहब, डॉ ने अपनी थ्योरी दाल कर कहानी को नया मोड़ दे दिया,,,, :क्लाप्स:

आज कल थोड़ा काम में बिजी रहता हु डॉ साहब इस लिए अपडेट नहीं पढ़ pata...ummid है इसका आप बुरा नहीं मानेंगे. खैर स्टोरी को बहुत बढ़िया तरीके से खींच रहे हैं आप,,,, :हहै:

आगे का इंतज़ार रहेगा,,,, :वेटिंग:
 
अपडेट 62
सिगरेट के गहरे कास के साथ साथ hi मैं अपने दिमाग में भरे हुए विचारो को काम करने की कोशिस कर रहा था , साथी hi खड़ा हुआ था अज्जू ,

जब उसने मुझे फ़ोन किया तो मैं खुद को रोक hi नहीं पाया और उससे मिलने चल पड़ा था, हम कॉलेज के पास hi अपने एक अड्डे में बैठे थे जंहा बैठकर अधिकतर हम सिगरेट के कास लगाया करते थे ,

अज्जू को भी मेरे और भाभी के बारे में पता चल गया था साथ hi नेहा से ब्रेकउप के बारे में भी , लेकिन उसने मुझे कुछ भी नहीं कहा था , वो समझता था की कुछ चीजे समझ से बहार hi होती है उस समय में दिल की सुननी चाहिए ,लेकिन जब आप अपने दिल की सुनो तो दुनिया को समझाना बहुत मुश्किल हो जाता है की आखिर आपने ये डिसिशन कैसे ले लिया …

वो न तो मुझे समझा रहा था न hi मुझे जज कर रहा था बस मेरे साथ खड़ा हुआ सत्ता मार रहा था , अभी मुझे ऐसे hi दोस्त की जरुरत थी जो की मेरे जीवन में उंगली न करे बल्कि बस मेरे साथ खड़ा रहे ..

अभी थोड़ी hi देर हुए थे की हमें अक्की भी आता हुआ दिखा , जब मैंने आँखों hi आँखों में अज्जू को पूछा की ये यंहा कैसे वो उसने आँखों से hi जवाब दे दिया की उसे उसने hi बुलाया है..

लेकिन अक्की के तेवर कुछ सही नहीं लग रहे थे

और

चटकककक

एक जोरदार थप्पड़ मेरे गलो में पड़ा , ऐसा लगा जैसे चारो और hi सितारे घूम गए हो ,,,

“अक्की ..??”

अज्जू चिल्लाया लेकिन अक्की शायद किसी और hi दुनिया में था एक और छठा मेरे तरफ घुमा और मेरे गलो पर पद गया

“सेल तू इतना नीच निकल जायेगा मैंने सोचा hi नहीं था , मैं तेरे और नेहा को लेकर कितना खुस था लेकिन तूने … तूने नेहा को धोखा दिया है , वो भी … वो भी अपनी भाभी के लिए , तू तो उसे अपनी माँ के सामान मंटा था न .. छियई तुझे तो अपना दोस्त बोलते हुए भी शर्म आती है “

मैं समझ सकता था की अक्की और नेहा बचपन से साथ रहे है , उन दोनों के बिच की बॉन्डिंग थोड़ी अलग hi थी , नेहा को जो दुःख पंहुचा उससे अक्की को बी बहुत hi तकलीफ हुई थी ..

मैं समझ तो सकता था लेकिन मैं समझा नहीं सकता था ..

“यार अक्की हो जाता है “ अज्जू ने उसे समझने की कोशिस की

“नहीं अज्जू ऐसा नहीं होता भाई , इसने जो किया वो किया लेकिन नेहा को कैसा लग रहा होगा ये हम सोच भी नहीं सकते, उसने तो अपने दिल से इससे प्यार किया था भाई , लेकिन बेचारी का अब रो रो कर बुरा हल हो गया है “

“मैं समझ सकता हु भाई “ मैं कुछ बोलने hi वाला था

“मत बोल मुझे भाई, जो तूने नेहा के साथ किया है वो मैं कभी माफ़ नहीं करूँगा “

ये बोलकर अक्की पलटा hi था की , मैं चिल्ला पड़ा

“अक्की “ मैं अक्की के ऊपर खुद गया था , एक लोहे की रोड अक्की के ऊपर घुमाई गयी थी मैंने सही समय में अक्की को जमीं गिरा दिया था , मैंने देखा की कोई 10 -15 लोग थे और सभी के हाथो में हथियार थे .. मैं इन सभी के चेहरे पहचानता था

“अबे जीवा भाई ने बुलाया है चुप चाप चल सेल तुझे कहा कहा नहीं धुन्धड़ा और तू यही बैठा सिगरेट पि रहा है “

एक आदमी जोरो से हंसा वो मेरे पास hi था उसके हाथो में तलवार थी ..

“ोकक ोकक इन दोनों को पहले जाने दो फिर… “

मैं कुछ बोलता उससे पहले hi अज्जू बोल पड़ा

“सेल इसे हाथ तो लगा के दिखा “ अज्जू गरजा , मैंने देखा की उसके हाथो में एक पिस्तौल थी , उसने पिस्तौल को लोडे कर लिया , अज्जू ने एक गलती कर दी थी क्योकि ये लोग कोई सामान्य गुंडे नहीं थे बल्कि जीवा और सम्पत गैंग के खास लोग थे ऐसे पिस्तौल से खेलना उनका रोज का काम था

“सालो तुम लोग ऐसे नहीं मानोगे “ वो मुस्कुराया और मैंने देखा की उसके साथ साथ कई लोग अपने पीछे से पिस्तौल निकाल रहे है मैं तुरंत hi एक्शन में आया और अपने पेअर से उस आदमी कोई गिरा दिया लेकिन बाकियो की पिस्तौल अज्जू की और घूम गयी थी मैंने अज्जू की तरफ खुदा , अज्जू ने भी दो गोलिया चला दी लेकिन बदले में अज्जू की और एक साथ कई गोलिया चल पड़ी थी , मैंने अज्जू को गिरा कर बचा लिया था लेकिन ये बड़ी मुसीबत आ गयी थी , तब तक एक आदमी दौड़ कर आ गया था ,

“भाई ये ऐसे नहीं मानेगा इसे तोड़ कर ले जाते है “

और तभी उसने अपना तलवार मेरे पीठ पर गदा दिया ..

“aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh”

मैं जब तक पीछ मुद कर देखता तलवार मेरे पसलियों में गड चूका था ..

“मादरचोद मेरे दोस्त को मारा “

अज्जू गरजा था , उसने पास hi गैस में बन बन रहे गर्म गर्म चाय को उस आदमी के मुँह में फेक दिया , फिर से गोलिया चली लेकिन तब तक अज्जू भी खुद को सम्हाल चूका था मुझे बाजु में लिटा दिया गया था और जंहा अज्जू ने अपनी गन पर हाथ जमा लिए थे वही अक्की अपने एक हाथ में चाय बनाने का बर्तन और दूसरे में सामने पड़े हुए आदमी की तलवार पकडे हुए उस लोगो की तरफ दौड़ पड़ा था , मैं भी मुकिल से hi सही लेकिन खड़े होने की कोशिस कर रहा था , गोलिया चलने लगे थी अक्की के तलवार के और अज्जू की गोली के निशाने में जो भी आ रहा था वो घायल हो जाता था दोनों के अंदर न जाने कहा से ऐसा योद्धा जाग गया था , तलवार मेरे पसली के आर पर थी लेकिन फिर भी मैं जैसे तैसे खड़ा हुआ , तभी

धाययययय

एक गोली सीधे अक्की के कंडे पर लगी और उसका तलवार निचे गिर पड़ा और तभी उसके सामने खड़े आदमी ने अपने हाथो में रखे लोहे की रोड से उसका मुँह तोड़ दिया

“अक्की …” मैं उसकी तरफ भगा न जाने कहा से मेरे अंदर एक ताकत का जन्म हो गया था लेकिन तभी

धाय

एक गोली आकर मेरे कंधे पर लगी लेकिन मैं रुका नहीं और अपने हाथो से hi अपने पसलियों में गाड़ी हुई तलवार खींच कर निकाल ली ..

“आह्ह्ह्हह्ह “

दर्द तो था बहुत दर्द था लेकिन दोस्तों को लड़ते हुए देख कर अंदर ऐसा जोश आ गया था की दर्द का अहसास hi नहीं हो रहा था ..

मेरी आंखे बंद हुई और मेरे सामने भाभी के चेहरा आ गया जब वो रेल की पटरी पर मौत का तांडव कर रही थी , मैं भी चिल्लाया और दुःसाहमणो के ऊपर खुद पड़ा , हम 3 दोस्तों मेरे शिव बाकि दोनों लड़ाई झगड़ो से कोशो दूर थे , मैंने टैनिंग ली थी वही आज काम आ रही थी लेकिन मैं बुरी तरह से जख्मी था और सामने वालो के हाथो में पिस्तौल थी , हमने पहले पिस्तौल वालो को hi मारा , हम 3no भी बुरी तरह से जख्मी हो चुके थे लेकिन हम तब तक डेट रहे हम न सिर्फ अपनी अपनी जान बचा रहे थे बल्कि एक दूसरे का साथ भी दे रहे थे, लेकिन मेरा बहुत खून बाह चूका था , मैं खड़े होने की हालत में नहीं था , आँखों के सामने अँधेरा छाने लगा था , सब कुछ धुंधला धुंधला सा दिख रहा था , मुझे किसी ने बैठा दिया ..

“तू फ़िक्र मर कर जब तक हम जिन्दा है तुझे कुछ नहीं होगा “

ये अक्की की आवाज थी , मैं मुश्किल से आंखे खोलकर कुछ देखने की कोशिस कर रहा था की मेरे कानो में पुलिस की गाड़ी की आवाज आयी , और तभी एक और आवाज

“मादरचोद साला “

और ऐसा लगा की मेरे सर में आकर कुछ लगा ………………..

अभी ऐसा लग रहा था जैसे शरीर में जान है भी की नहीं , या सब कुछ जैसे सपना सा हो और मैं एक गहरी नींद से उठा हु , शरीर को हिलने की कोशिस कर रहा था लेकिन हिला नहीं पा रहा था , बस आँखों को थोड़ा हिला प् रहा था, कानो में किसी की आवाज आ रही थी वो एक ायरत थी साथी hi 2-3 लोग और थे जो बहस कर रहे थे , आंखे थोड़ी और खुली तो सामने टीवी चल रहा था मैं अधखुली आँखों से बस यही देख प् रहा था की कोई न्यूज़ चैनल चल रहा है और शायद किसी चीज का कोई डिबेट चल रहा था

मैंने सुनने की कोशिस की ..

“ये क्या हो रहा है शहर में आये दिन बेरहमी से क़त्ल हो रहे और लॉ एंड आर्डर की धज्जिया उड़ाई जा रही है , आखिर कोण है ये शिवा जो ऐसे बेरहमी से लोगो को मार रहा है “एक आदमी जोरो से चिल्लाया तभी एक महिला की आवाज मेरे कानो में पड़ी

“जो भी है लेकिन काम से काम वो शहर का कचरा hi तो साफ़ कर रहा है अभी तक पुराने जीवा गैंग के मेंबर्स को hi मारा गया है यंहा तक की सालो से छिपे हुए सम्पत और जीवा को भी मार कर बिच चौराहे में लटका दिया है उसने भाई डैम तो है बन्दे में “ायरत की आवाज में एक अजीब सी ख़ुशी थी

“पुलिस इसे एक आदमी का काम मानकर ताल रही है जबकि खुद मिनिस्टर तिवारी भी अपने 2 वफादारों की मौत पर कुछ नहीं बोल रहे है , पहले मंत्री जी के 2 लोग मरते है फिर उनके दुश्मन का पूरा गैंग hi ख़त्म कर दिया जाता है , क्या ये किसी प्रकार की कोई साजिस नहीं है , सर्कार की ताकत का इस्माल करके कही मिनिस्टर साहब अपनी पुराणी दुश्मनी तो नहीं निकाल रहे है “

एक दूसरे आदमी ने वयंग मारा था , जिससे एक दूर भड़क गया शायद ये तिवारी की hi पार्टी का कोई था

“देखिये मंर्ती जी के ऊपर खुद भी हमले हो रहे है , और आप ऐसे बेबुनियाद इल्जाम मंत्री जी पर नहीं लगा सकते अगर आपके पास कोई सबूत है तो आप सीधे अदालत जाइये “

और फिर कई लोग एक साथ बोल उठे ऐसा लगा जैसे बहस बहुत बाद गयी हो और कोई किसी की बात नहीं सुन रहा हो ……

तभी अचानक से सभी की आवाज संत हो गयी

“देखा आप लोगो ने शिवा नाम का ये शख्स क़त्ल पर क़त्ल किये जा रहा था लेकिन कल सनसनीखेज रूप से प्रख्यात गैंगस्टर जीवा जो की सालो से छिपे हुए थे और उसके साथी सम्पत को मारकर बिच चौराहे पर टांगने के बाद राजनैतिक सरगर्मी बाद गयी है , कहा जाता है की जीवा का मंत्री दया संकर तिवारी से पुराण याराना था जो की बाद में दुश्मनी में बदल गयी , अब शक की सुई मंत्री जी पर hi अटक गयी है हलाकि उनके ऊपर भी कुछ दिनों से हमले बाद गए है ………”



मैं कहा था और कितने दिनों से था और ये शहर में क्या हो रहा था , मैं कुछ और सोच पता लेकिन मेरी आंखे बंद होने लगे थे , मानसिक टेंशन लेते hi मुझे नींद आने लगी और मैं फिर से बेहोश हो गया था …………..
 
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थैंक यू...

???
 
बोहत hi उम्दा अपडेट भाई.. और स्टोरी तो मतलब धसू hi जा रही है... पता नाहिनि ा शिवा का केस कब सुलझेगा... क्यों की लगभग सरे मैं खिलाडियों ख़तम हो गए अब सिर्फ तिवारी बचा है.... पर अभी तक खुलेशस नाहिनि हुआ.. चलो देखते है क्या होता है आखिर कारका
 
अपडेट 63
महिमा अभी एक टेबल में छाती के बल बंधी हुई थी, जिस्म पर कोई भी कपडा नहीं था और वो रोये जा रही थी लेकिन उसकी सुनने वाला कोई भी नहीं था ,

“उस दिन तो तू बच गयी थी लेकिन आज तुझे कौन बचाएगा “

एक कामिनी सी हंसी सुनकर महिमा की रूह तक काँप गयी थी ,

“प्लस करीम भाई मुझे छोड़ दो , मैंने आपका क्या बिगाड़ा है “

महिमा की बात सुनकर करीम जोरो से हंस पड़ा

“तूने नहीं मेरी जान तेरी इस भरी हुई जवानी ने बिगाड़ा है , तेरे पति को हमने ठिकाना लगा दिया लेकिन तुझे ना प् सकने की दर्द मैं नहीं भूल पाया , मेरा जानवर आज भी तुझे पाने के लिए मारा जा रहा है ये देख “

करीम ने अपने नंगे लटकते हुए लिंग को महिमा के पिछवाड़े पर गदया

“नहीं ………”

महिमा की कनपटी हुई आवाज निकली जिसे सुनकर करीम का लिंग और भी फुंकार मरने लगा , महिमा मजबूर थी करीम ने उसकी बेटी को किडनैप कर लिया था और उसे बदले में महिमा की जवानी चाहिए थी , करीम की सबसे बड़ी कमजोरी थी जवान लड़किया थी, जो उसे पसंद आ जाती उसे वो भोग कर hi रहता था , लेकिन महिमा को तिवारी के वचन ने उस दिन बचा लिया था , सत्य ने अपनी जान के बदले महिमा की इज्जत और अपनी बेटी के भविष्य का सौदा किया था , लेकिन करीम के मन में ये महिमा को भोगने की िक्खा रह गयी और वो सिर्फ भोगता hi नहीं था बल्कि नोच डालता था , वो जानवर था जो अपने शिकार को पूरी तरह से नोच नोच कर खता था ..

और ये बात साडी दुनिया को पता थी , महिमा को भी ये बात पता थी , डॉ. जैसे hi अपने कामो में वयस्त हुआ और तिवारी का थोड़ा ध्यान हटा वैसे hi करीम ने महिमा की दुखती हुई राग उसकी बेटी नेहा पर हाथ मारा और उसे किडनेप कर लिया था ,

अब वो तिवारी के बोलने पर भी महिमा को नहीं छोड़ने वाला था लेकिन तिवारी के मन में महिमा के लिए अब भी कोई सॉफ्ट कार्नर मौजूद था , उसने करीम को मन लिया था की वो करीम की भूख मिटने के लिए एक लड़की उसे लेकर देगा बदले में करीम महिमा को छोड़ देगा , महिमा को केवल तिवारी का hi भरोषा था , उसके पति के जाने के बाद भी तिवारी ने उसे सपोर्ट किया था लेकिन आज ..

आज तो महिमा को लग रहा था की तिवारी भी उसकी इज्जत नहीं बचा पायेगा ..

“मुझे छोड़ दो तिवारी जी आते hi होंगे “महिमा ने अपने बचाव में कहा

वही करीम जोरो से हंस पड़ा

“तुझे क्या लगता है अगर मैं तिवारी के आते तक रुकूंगा , मुझे पता है की उस सेल चूतिये तिवारी का दिल तुझपर आ गया है , उस दिन भी उसने तुझे बचा लिया और आज भी बचा hi लेगा , इसलिए उसके आने से पहले hi मैं तुझे नोच डालूंगा, “

करीम की बात सुनकर महिमा फिर से काँप गयी थी

“नहीं ….”

उसने अपने कांपते हुए स्वर में कहा था

“चुप कर वर्ण तेरी बेटी का गाला तेरे सामने hi काट दूंगा , लाओ रे इसकी बेटी को उसके सामने hi इसकी माँ का बलात्कार करेंगे “

करीम की बात सुनकर महिमा सकते में आ गयी

“नहीं नहीं मेरे साथ जो करना है वो करो लेकिन मेरी बेटी को कुछ मत करना ,मैं .. मैं अब कुछ नहीं कहूँगी जो करना है कर लो “

करीम के चेहरे में एक कामिनी सी मुस्कान आ गयी थी

“अरे मेरी जान मछली चटपटायेगी नहीं तब तक मजा कैसे आएगा “

करीम ने अपनी उंगली महिमा के योनि पर चला दी , महिमा बस दबे हुए स्वर में चुहक उठी थी ..

करीम ने बड़े hi इत्मीनान से महिमा की योनि की गहराइयों में अपनी उंगलिया चलनी शुरू की , महिमा बस रो रही थी वो कोई भी प्रतिक्रिया नहीं कर प् रही थी ..

“छी इस साली रंडी को तो कुछ करने में मजा hi नहीं आ रहा है , लाओ से इसकी बेटी को “

“नहीं नहीं तुम जो बोलोगे मैं वो करुँगी लेकिन बेटी को नहीं “

महिमा छटपटाई

वही करीम जोरो से हंस पड़ा

“साली कुटिया तू अगर ऐसे hi सुस्त पड़ी रहेगी तो मुझे कैसे मजा आएगा , तुझे दर्द दे कर छोडूंगा तभी तो मुझे सुकून आएगा “

करीम ने महिमा के योनि को जोरो से अपनी मुठ्ठी में दबा दिया था ,

“आआह्ह्ह नहीं “ महिमा चिल्ला उठी थी

“अब आया न मजा , अब देख कुटिया “

करीम ने पास hi रखा अपना बेल्ट उठा लिया और जोरो से महिमा के पीठ में दे मारा

“आह्हः “

महिमा चिल्ला उठी थी , करीम ने इशारा किया और उसके लोगो ने नेहा को भी उसके सामने लेकर उसके सामने एक कांच की दिवार के उस पर खड़ा कर दिया , महिमा को लगा जैसे उसकी दुनिया hi लूट गयी हो , नेहा बस अपनी माँ को नहीं देख प् रही थी लेकिन वो महिमा की आँखों के सामने थी , वही करीम जोरो से महिमा को बेल्ट से मारे जा रहा था और फिर जब उसका मन भर गया उसने अपना लिंग महिमा की योनि में घुसा दिया , महिमा दर्द से चिल्ला रही थी और जितना वो चिल्लाती करीम को उतना hi मजा आता था , करीम तब तक नहीं रुका जब तक की उसने अपना पूरा वीर्य महिमा की कोख में नहीं दाल दिया ……….

करीम के बाद उसके सभी खास लोग भी महिमा को लालची नजरो से देख रहे थे , वो सभी उसे नोच कर खाना चाहते थे लेकिन अभी करीम का दिल नहीं भरा था ……

तभी वंहा तिवारी आ गया, उसके साथ एक और लड़की थी ..

तिवारी भी करीम के आगे मजबूर था लेकिन तिवारी ने करीम को मन लिया की करीम को जब भी जरुरत होगी महिमा उसके पास आ जायेगी , और अभी के लिए करीम और उसके गैंग के बाकि लोगो की भूख ये लड़की मिटाएगी …

शर्त ये थी की महिमा को बाकि के लोगो के सामने न परोसा जाये और हैवानियत न दिखाई जाए .. करीम मन गया था क्योकि उसे अब नयी मछली मिल गयी थी जो की और भी जयदा छटपटा रही थी , मांग में सिंदूर भरे वो नयी लड़की ऐसी लग रही थी जैसे उसकी अभी अभी नयी नयी hi शादी हुई हो , जवान और बहुत hi खूबसूरत , करीम को अब महिमा hi फीकी लगने लगी थी …

अब महिमा की जगह पर उस लड़की को लिटा दिया गया था , आज करीम और उसके साथी मिलकर उस लड़की के चिथड़े नोच डालने वाले थे , लेकिन महिमा की जान बच गयी थी , महिमा ने कपडे पहने और नेहा के साथ बहार आ गयी , नेहा ने एक बार उस ायरत को देखा जो की टेबल में बंधी हुई थी और उसके मुँह पर कपडा ठूंसा गया था , वो लाल रंग की साड़ी में थी, हाथो में भरी हुई लाल चुडिया और गहरे लाल रंग का सिंदूर से भरी हुई मांग …

‘ये कितनी सूंदर है ‘ नेहा के दिमाग में आया था ..

“मैं इस जानवर को जिन्दा नहीं छोडूंगी , ये तो आपको भी कुछ नहीं समझता “

वंहा से निकट hi महिमा ने तिवारी को कहा था ..

“आज के बाद नहीं , बहुत हो गया तुमपर हाथ डालकर इसने मेरे साबरा की सिमा को भी तोड़ दिया है , अब इसे रिश्ते से हटाना hi पड़ेगा “

तिवारी जैसे खुद में hi भुनभुनाया और उसने फ़ोन घुमा दिया ……………….

*************

नेहा के पुरे चेहरे में पसीना था , वो अभी हॉस्पिटल में मेरे बाजु में बैठी थी , उसने अपने सपने में वो देखा था जिसे देखकर उसकी रूह कैंप गयी थी , कल hi तो महिमा ने उसे बताया था की वो तिवारी की इतनी तारीफ क्यों करती है , कल hi महिमा ने नेहा को मुझसे दूर रहने के लिए कहा था और अपनी कहानी बताई थी , लेकिन नेहा मुझे ऐसी अवश्था में नहीं छोड़ सकती थी , मैं अभी भी कोमा से बहार आया hi था लेकिन कोई मुझसे जयदा बात नहीं करता था , कभी भाभी तो कभी नेहा रत रत भर मेरे बाजु में बैठे रहते थे , मुझे बताया गया की अक्की और अज्जू ठीक है , हॉस्पिटल के बहार बहुत कुछ हो चूका था या हो रहा था लेकिन मुझे कुछ भी नहीं बताया जा रहा था ..

आज रत के 2 बजे थे लेकिन नेहा की आँखों में नींद hi नहीं था उसके मन में अपनी माँ की कही बात और उस ायरत का चेहरा बार बार घूम रहा था जिसे उसने सालो पहले देखा था …..

“आखिर वो ायरत कोण थी और करीम ने उसके साथ क्या किया , और उसके बाद उसका क्या हुआ होगा ….?????????”



नेहा के दिमाग में अचानक से ये सवाल उठा ………….
 
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